लखनऊ की सई नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने की कवायद तेज

लखनऊ की सई नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने की कवायद तेज

Sai River Lucknow

Sai River Lucknow: योगी सरकार में प्रदेश के अंदर से गुजरने वाली सभी नदियों में गिरने वालों नालों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में लखनऊ में सई नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। सई नदी लखनऊ के सरोजनीनगर और मोहनलालगंज जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के पास से होकर प्रवाहित होती है। इसके प्रदूषण को रोकने के लिए नदी में जाने वाले नालों की पहचान कर उन्हें टैप करने, सीवेज को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाने और शोधित पानी के दोबारा इस्तेमाल की योजना पर काम चल रहा है। 

 

मौजूदा योजना के तहत सई नदी में जाने वाले एक अनटैप्ड नाले को टैप किया जा रहा है। इस नाले से करीब 59.88 एमएलडी सीवेज नदी में पहुंचता है। इसे रोकने के लिए 100 एमएलडी क्षमता वाले बिजनौर एसटीपी की परियोजना पर काम शुरू हो चुका है।

सई नदी में जाता है एक अनटैप्ड नाला

लखनऊ नगर क्षेत्र में सई नदी में जाने वाले एक अनटैप्ड नाले की पहचान हो चुकी है। इस नाले से करीब 59.88 एमएलडी सीवेज का डिस्चार्ज होता है। फिलहाल यह सीवेज नदी के प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत इस नाले को टैप कर सीवेज को सीधे नदी में जाने से रोकने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए जरूरी सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता विकसित की जा रही है, ताकि नाले से निकलने वाले पानी को शोधित करने के बाद ही उसका निस्तारण या दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।

100 एमएलडी बिजनौर एसटीपी का निर्माण जारी

सई नदी में जाने वाले अनटैप्ड नाले को टैप करने के लिए 100 एमएलडी क्षमता वाले बिजनौर एसटीपी की परियोजना महत्वपूर्ण है। इस परियोजना का कार्यादेश 2 जून 2025 को जारी किया गया था। इसके बाद अनुबंध गठित किया जा चुका है और 23 जून 2026 से निर्माण कार्य शुरू किया गया। वर्तमान में परियोजना का निर्माण कार्य प्रगति पर है। एसटीपी के तैयार होने के बाद नाले से आने वाले सीवेज को उपचारित किया जा सकेगा और बड़ी मात्रा में बिना शोधित सीवेज के सई नदी में पहुंचने की समस्या पर रोक लगेगी।

2044 तक सीवेज शोधन की पर्याप्त क्षमता

शहर में निर्माणाधीन, स्वीकृत और प्रस्तावित एसटीपी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लखनऊ में कुल 1263 एमएलडी सीवेज शोधन क्षमता उपलब्ध हो जाएगी। इस क्षमता से वर्ष 2044 तक शहर में पैदा होने वाले सीवेज के शोधन के लिए पर्याप्त व्यवस्था तैयार होने की उम्मीद है। योजना का उद्देश्य केवल वर्तमान जरूरत को पूरा करना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में बढ़ने वाली आबादी और सीवेज की मात्रा को ध्यान में रखते हुए स्थायी व्यवस्था तैयार करना है। परियोजनाएं पूरी होने के बाद किसी भी तरह का अशोधित सीवेज सई नदी में नहीं जाने देने की दिशा में बड़ा कदम होगा। इससे लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने में भी बड़े स्तर पर मदद मिलेगी।

शोधित पानी का भी होगा दोबारा इस्तेमाल

सीवेज शोधन के साथ-साथ शोधित पानी के दोबारा इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत 39 एमएलडी क्षमता वाले दौलतगंज एसटीपी से शोधित पानी को दोबारा उपयोग में लाने के लिए 16 एमएलडी क्षमता के टीटीपी के निर्माण का काम चल रहा है। इस पानी का इस्तेमाल पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क में औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जाना है। इससे एक ओर नदियों और जल स्रोतों पर दबाव कम होगा, वहीं दूसरी ओर उद्योगों की पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए शोधित पानी का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पार्क में भी इस्तेमाल होगा शोधित पानी

एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी को केवल औद्योगिक जरूरतों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। 3.5 एमएलडी एसटीपी के शोधित पानी को राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पार्क में इस्तेमाल करने की योजना है। यहां इस पानी का उपयोग बागवानी और सफाई के काम में किया जाएगा। इससे पेयजल या दूसरे स्वच्छ जल स्रोतों पर ऐसे कामों के लिए निर्भरता कम की जा सकेगी। शोधित पानी के इस तरह दोबारा इस्तेमाल से जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

एयरपोर्ट पर भी शोधित पानी के इस्तेमाल का प्रस्ताव

बिजनौर में निर्माणाधीन 100 एमएलडी एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी के पुन: उपयोग का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत शोधित पानी को राजधानी लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में इस्तेमाल करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो एयरपोर्ट की विभिन्न जरूरतों में शोधित पानी का उपयोग किया जा सकेगा। इससे साफ पानी की खपत कम करने और सीवेज ट्रीटमेंट के बाद मिलने वाले पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

सीवेज को नदी तक पहुंचने से रोकना मुख्य लक्ष्य

राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह के मुताबिक लखनऊ में सीवेज प्रबंधन की पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य अशोधित सीवेज को सई नदी में पहुंचने से रोकना है। इसके लिए नालों की टैपिंग के साथ-साथ पर्याप्त एसटीपी क्षमता विकसित की जा रही है। सीवेज को उपचारित करने के बाद उसके उपयोग की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं। इससे नदी में प्रदूषण का दबाव कम करने के साथ-साथ शोधित पानी को दोबारा उपयोग में लाकर जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सकेगा।

1263 एमएलडी क्षमता से मजबूत होगा सीवेज प्रबंधन

लखनऊ में निर्माणाधीन, स्वीकृत और प्रस्तावित परियोजनाओं के पूरा होने के बाद 1263 एमएलडी की कुल सीवेज शोधन क्षमता उपलब्ध होगी। इससे वर्ष 2044 तक सीवेज शोधन की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त आधार तैयार होगा। सई नदी में जाने वाले नाले को टैप करने, नए एसटीपी बनाने और शोधित पानी के पुन: उपयोग की योजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे आने वाले समय में सई नदी में अशोधित सीवेज की रोकथाम के साथ शहर में सीवेज प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

यूपी में विधवा पेंशन के लिए 380 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय व्यवस्था

यूपी में विधवा पेंशन के लिए 380 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय व्यवस्था

CM Yogi Adityanath

Widow Pension Scheme UP: प्रदेश की निराश्रित एवं विधवा महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा देने वाली इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना को लेकर योगी सरकार ने वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के तहत 380 करोड़ 15 लाख 74 हजार रुपए की धनराशि की व्यवस्था की गई है। यह राशि भारत सरकार से प्राप्त केंद्रांश (मदर सैंक्शन) के उपयोग के लिए नवीन लेखाशीर्षक यानी नए बजट हेड में उपलब्ध कराई गई है। इस संबंध में महिला कल्याण विभाग द्वारा शासनादेश जारी किया गया है।

 

इसमें स्पष्ट किया गया है कि केंद्र सरकार से प्राप्त मदर सैंक्शन की धनराशि का उपयोग चालू वित्तीय वर्ष में योजना के अंतर्गत किया जाएगा। इस वित्तीय व्यवस्था का उद्देश्य योजना के अंतर्गत पात्र निराश्रित और विधवा महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए पेंशन संबंधी खर्च को सुचारु बनाए रखना है।

वित्तीय नियमों के अनुसार इस्तेमाल होगी धनराशि

महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तीकरण के साथ उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना योगी सरकार की प्राथमिकता है। मिशन शक्ति सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। स्वीकृत धनराशि का इस्तेमाल निर्धारित मद में ही किया जाएगा। धनराशि का आहरण एवं व्यय आवश्यकता और वित्तीय नियमों के अनुसार होगा।

जरूरतमंद महिलाओं तक समयबद्ध पहुंचेगी सहायता

अपर मुख्य सचिव (महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग) लीना जौहरी ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रदेश में निराश्रित और विधवा महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। विधवा पेंशन योजना के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक सहारा देने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत 380 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि से योजना के संचालन और पात्र लाभार्थियों तक पेंशन का लाभ पहुंचाने में और मजबूती आएगी। हमारा प्रयास है कि कोई भी पात्र महिला सामाजिक सुरक्षा के इस लाभ से वंचित न रहे और उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत समयबद्ध सहायता मिल सके।

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, JPSC-JSSC उम्मीदवारों को बड़ी राहत

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, JPSC-JSSC उम्मीदवारों को बड़ी राहत

Jharkhand CM announces rs 3 crore relief for flood victims

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के इस आदेश से उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जिन्होंने इन परीक्षाओं को पास कर नौकरी हासिल की थी और अब अपने भविष्य को लेकर असमंजस में थे।

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याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील है कि राज्य सरकार ने उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना ही भर्ती परीक्षाओं और उसके बाद हुई नियुक्तियों को एकतरफा तरीके से रद्द कर दिया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकारी सेवाओं में नियुक्त भी हो चुके थे। ऐसे में सरकार के फैसले से सीधे तौर पर उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया था।

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उम्मीदवारों ने प्राकृतिक न्याय का दिया हवाला

 

याचिकाकर्ताओं ने अपनी दलील में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Principles of Natural Justice) का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी उम्मीदवार की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन बिना व्यक्तिगत जांच या सुनवाई के सभी सफल अभ्यर्थियों को नौकरी से हटाना उचित नहीं है।

 

उम्मीदवारों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षाएं दी थीं, मेरिट लिस्ट में स्थान हासिल किया और इसके बाद उन्हें सरकारी पदों पर नियुक्त किया गया। इसलिए पूरी भर्ती प्रक्रिया को एक साथ रद्द करने के बजाय प्रत्येक अभ्यर्थी की भूमिका की अलग-अलग जांच की जानी चाहिए।

 

JSSC-CGL परीक्षा को लेकर भी उठे सवाल

 

JSSC-CGL मामले में कुछ याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी है कि परीक्षा के परिणाम पहले हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में घोषित किए गए थे। ऐसे में बाद में राज्य सरकार की ओर से पूरी परीक्षा रद्द करने के फैसले की कानूनी वैधता पर सवाल उठता है।

 

गौरतलब है कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर CID और SIT की जांच में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर झारखंड सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इन परीक्षाओं के अभ्यर्थियों और नियुक्त उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है।

इंदौर के 100 करोड़ के ड्रेनेज घोटाले में ED ने पेश किया 20 हजार पन्‍नों का चालान, 32 आरोपी बनाए गए

इंदौर के 100 करोड़ के ड्रेनेज घोटाले में ED ने पेश किया 20 हजार पन्‍नों का चालान, 32 आरोपी बनाए गए

इंदौर के 100 करोड़ रुपए के ड्रेनेज लाइन घोटाले में ED ने 20 हजार पन्‍नों से ज्यादा का चालान कोर्ट में पेश किया है। इस मामले में चीफ इंजीनियर अभय राठौर समेत 32 लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों में इंजीनियर, लेखा विभाग के कर्मचारी और ठेकेदार शामिल हैं।

बता दें कि यह इंदौर का बहुचर्चित घोटाला है। इस पर पूरे शहर की नजर है। इसके साथ ही इस मामले में जेल में बंद दो आरोपियों ने जमानत के लिए अर्जी लगाई थी, जिसे खारिज कर दिया गया है।

मामले में पेश किए गए चालान में चीफ इंजीनियर अभय राठौर को मुख्य आरोपी बनाया गया है। बगैर काम किए फाइल मंजूर करने और लेखा विभाग के कर्मचारियों की मदद से बिल मंजूर कराने के खेल में अभय माहिर था।

फर्जी फाइल से किया था खेल : चार साल में 100 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों की फर्जी फाइल तैयार कर लेखा विभाग में बिल भुगतान के लिए भेजे गए थे। जब इसकी शिकायत बड़े अफसरों के कानों तक पहुंची तो जांच शुरू हुई। इस बीच घोटाले की फाइलें नगर निगम के एक अधिकारी की कार से गायब हो गईं। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और फिर घोटाले की परतें खुलती चली गईं।

32 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय : बाद में इस केस में ईडी की एंट्री हुई और उसने आरोपियों की संपत्तियां अटैच करना शुरू कीं। ईडी ने जो चालान कोर्ट में पेश किया है, वह 20 हजार पेज से ज्यादा का है और 32 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं।

ईडी ने पिछले साल 200 करोड़ की संपत्‍ति की थी फ्रीज : बता दें कि ईडी ने पिछले साल 2025 में आरोपियों के ठिकानों पर छापे मारकर 200 करोड़ रुपए की संपत्ति, खाते और लॉकर फ्रीज किए थे और फिर संपत्तियां अटैच करना शुरू कीं। अब तक कुल 59 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं। घोटाले के मुख्य आरोपी अभय राठौर का कहना है कि उसका घोटाले से कोई लेना-देना नहीं है। वह तो लंबे समय तक निलंबित था, लेकिन जैसे ही बहाल हुआ, उसे इस घोटाले में फंसा दिया गया। जिन फाइलों पर भुगतान हुआ, उन पर वरिष्ठ अफसरों के हस्ताक्षर थे। ईडी अब कोर्ट में आरोपों को साबित करेगा। फिलहाल इस घोटाले के तीन आरोपी जेल में बंद हैं।

Sajjan Kumar Death: 1984 सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद काट रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का निधन, 80 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

Sajjan Kumar Death: 1984 सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद काट रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का निधन, 80 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

sajjan kumar

1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को निधन हो गया।  सफदरजंग अस्पताल के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। वह 80 वर्ष के थे।अस्पताल  की ओर से अभी तक सज्जन कुमार की मौत की वजह स्पष्ट नहीं की गई है। वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे।

 

दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को पांच सिखों की हत्या और दंगों के दौरान एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद वह तिहाड़ जेल में सजा काट रहे थे। वहीं, फरवरी 2025 में दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के दंगों के दौरान दो सिख पुरुषों की हत्या के एक अन्य मामले में भी उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

 

सज्जन कुमार तीन बार लोकसभा सांसद रहे थे। उन्होंने आउटर दिल्ली लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया था। वर्ष 2018 में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था।

 

1984 में कैसे भड़के थे सिख विरोधी दंगे?

 

सिख विरोधी दंगे 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे। इंदिरा गांधी की हत्या उनके दो सिख अंगरक्षकों ने की थी। ये अंगरक्षक जून 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेना चाहते थे। ऑपरेशन ब्लू स्टार भारतीय सेना की ओर से अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में चलाया गया सैन्य अभियान था।

SIT की क्लीन चिट के बाद चंपत राय का बड़ा धमाका, नृपेंद्र मिश्रा के खिलाफ खोला मोर्चा, जारी किया 9 पन्नों का सनसनीखेज बयान

SIT की क्लीन चिट के बाद चंपत राय का बड़ा धमाका, नृपेंद्र मिश्रा के खिलाफ खोला मोर्चा, जारी किया 9 पन्नों का सनसनीखेज बयान

Champat Rai Letter Nripendra Mishra: ​अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा व दान चोरी मामले में एसआईटी (SIT) से क्लीन चिट मिलते ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चम्पत राय ने एक बड़ा राजनीतिक व प्रशासनिक भूचाल ला दिया है। चम्पत राय ने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष/चेयरमैन और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा के खिलाफ 9 पन्नों का विस्तृत बयान जारी करते हुए 33 गंभीर बिंदुओं के तहत सीधे सवाल खड़े किए हैं।

​चम्पत राय के सनसनीखेज दावे

  • नृपेंद्र मिश्रा की ही चली मर्जी : चम्पत राय का दावा है कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से अब तक मंदिर निर्माण में केवल वही हुआ जो नृपेंद्र मिश्रा चाहते थे। किसी अन्य व्यक्ति के फैसले या सलाह को महत्व नहीं दिया गया।
  • ​कंपनियों और वास्तुकारों का चयन : एलएंडटी (L&T) को निर्माण के लिए चुनना, टाटा (TCE) को प्रोजेक्ट सलाहकार बनाना और अन्य भवनों के लिए नोएडा की फर्म 'डिजाइन एसोसिएट' (जय काकतीकर) को चुनना, ये सभी फैसले केवल नृपेंद्र मिश्रा द्वारा लिए गए।
  • ​निर्णयों में सर्वाधिकार : मंदिर वास्तुकार चंद्रकांत भाई सोमपुरा (जिन्हें 1986 में अशोक सिंहल ने चुना था) को छोड़कर, निर्माण समिति की हर मासिक बैठक में नृपेंद्र मिश्रा ही हर निर्णय के सर्वेसर्वा रहे। यदि किसी और ने कोई निर्णय लिया भी, तो उसे अमान्य कर हटा दिया गया।

​विवाद का मुख्य कारण

​यह पूरा विवाद तब और गहराया जब चढ़ावा चोरी मामले पर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा था कि मंदिर में व्यवस्था में भारी खामी के साथ-साथ यह एक तरह का 'डाका' है। मिश्रा ने बिना नाम लिए मन-मुताबिक नियुक्तियों का आरोप लगाया था और सुझाव दिया था कि राम मंदिर का संचालन एक CEO स्तर के पेशेवर सिस्टम के तहत होना चाहिए। ​एसआईटी जांच से पूरी तरह बरी होने के बाद चम्पत राय ने नृपेंद्र मिश्रा के इन्हीं बयानों और फैसलों का जवाब देने के लिए यह मोर्चा खोला है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर चोरी के 81 लाख कैसे बरामद हुए? चंपत राय की चिट्‍ठी से खुला बड़ा राज

​चिट्ठी पर नृपेंद्र मिश्रा का रुख

​विवाद के बीच नृपेंद्र मिश्रा ने अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर निर्माण की प्रगति की जानकारी दी और मुख्य बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि परिसर के अधिकांश निर्माण 30 सितंबर तक पूरे हो जाएंगे। इसके बाद 30 अक्टूबर तक L&T और Tata के कर्मचारी अपना काम समाप्त कर चले जाएंगे। मिश्रा ने कहा कि मंदिर की सुरक्षा दीवार और बाउंड्री वॉल का काम दिसंबर तक पूरा होगा। मंदिर निर्माण का अंतिम व पूर्ण समापन मार्च 2027 तक तय किया गया है। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला, SIT जांच रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट

 

सबसे बड़ी चुनौती : परिसर में 20 गैलरियों वाला एक हाई-टेक संग्रहालय बनाया जा रहा है, जिसमें आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों के साथ आधुनिक 'इमर्सिव टेक्नोलॉजी' का प्रयोग होगा।

World Photography Day: इंदौर प्रेस क्लब में दिखा तस्वीरों का अद्भुत संसार, 40+ फोटोग्राफर्स की 500 से ज्यादा तस्वीरें प्रदर्शित

World Photography Day: इंदौर प्रेस क्लब में दिखा तस्वीरों का अद्भुत संसार, 40+ फोटोग्राफर्स की 500 से ज्यादा तस्वीरें प्रदर्शित

world photography day

वर्ल्ड फोटोग्राफी डे पर इंदौर प्रेस क्लब में फोटोग्राफर्स ऑफ इंडिया इंदौर और प्रेस क्लब ने विशेष स्लाइड शो आयोजित किया। 40 से अधिक फोटोग्राफर्स की 500 से ज्यादा तस्वीरें प्रदर्शित की गईं। वरिष्ठ छायाकारों का सम्मान भी हुआ।

 

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। फोटोग्राफर्स साथियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी काम करने वाले हमारे साथी चंद सेकंड में जिस तस्वीर को क्लिक करते हैं वह तस्वीर अपने आप में मुकम्मल कहानी होती है, बल्कि कई बार इतिहास भी बन जाती है।

 

 

इंदौर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि एक जर्नलिस्ट होने के नाते मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि कोईर् भी खबर बिना तस्वीर के पूरी नहीं होती। इसके लिए हमारे फोटो जर्नलिस्ट बधाई के पात्र हैं जो हर परिस्थिति में अपने काम में जुटे रहते हैं।

 

कार्यक्रम में महापौर परिषद सदस्य राजेश उदावत, भाजपा नगर उपाध्यक्ष डॉ. दीप्ति हाड़ा एवं डॉ. शिखा घनघोरिया, वरिष्ठ छायाकार पद्मश्री भालू मोंढे विशेष अतिथि के रूप उपस्थित थी। इस दौरान इंदौर के वरिष्ठ छायाकार हेमशंकर पाठक, अखिल हार्डिया, महेंद्र राठौर, तनवीर फारुखी और प्रवीण रावत का अतिथियों द्वारा सम्मान किया गया।

 

 

अतिथियों का स्वागत महासचिव प्रदीप जोशी, सचिव अभिषेक चेंडके, कोषाध्यक्ष मुकेश तिवारी, कार्यक्रम संयोजक बलवंत सिंह चौहान, सह संयोजक राजू पंवार, कार्यकारिणी सदस्य अभय तिवारी, श्याम कामले, विजय भट्ट ने किया।

 

सामाजिक संस्था अभ्यास मंडल ने भी छायाकार बंधुओं का गुलाब के फूल देकर सम्मान किया। इस मौके पर अभ्यास मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता, शिवाजी मोहिते, डॉ. एसएल गर्ग, हरेराम वाजपेयी, मुरली खंडेलवाल उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप जोशी ने किया और आभार मुकेश तिवारी ने माना। कार्यक्रम के अंत में विश्व विख्यात फोटोग्राफर्स रघु राय को श्रद्धासुमन भी अर्पित करते हुए उनके प्रति आदरांजलि प्रेषित की गई।

इंसानी गलती से होते हैं 90% रोड एक्सीडेंट, जानिए क्या है ADAS टेक्नोलॉजी और यह कैसे बचाती है आपकी जान?

इंसानी गलती से होते हैं 90% रोड एक्सीडेंट, जानिए क्या है ADAS टेक्नोलॉजी और यह कैसे बचाती है आपकी जान?

what is ADAS Technology: सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण मानवीय भूल (Human Error) होता है—चाहे वह ध्यान भटकना हो, थकावट हो या अचानक सामने आई रुकावट पर सही समय पर फैसला न ले पाना। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में सुरक्षा का नया पर्याय बन चुकी ADAS (Advanced Driver Assistance System) तकनीक इन्हीं मानवीय गलतियों को सुधारने और हादसों को रोकने या उनके प्रभाव को बेहद कम करने का काम करती है।

क्या है ADAS और कैसे काम करता है यह सिस्टम?

ADAS कार में मौजूद स्मार्ट सेंसर्स, रडार (Radar), सोनार (Sonar), 360-डिग्री कैमरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चिप्स का एक एकीकृत नेटवर्क है।

  • आस-पास का वातावरण पढ़ना: यह नेटवर्क कार के चारों ओर 360-डिग्री विज़न रखता है। अंधेरे, धुंध या ब्लाइंड स्पॉट्स में भी, जहाँ इंसान की आँखें आसानी से नहीं देख पातीं, वहाँ इसके सेंसर्स गाड़ियों, इंसानों और रुकावटों को भांप लेते हैं।
  • रियल-टाइम डिसीजन: सेंसर्स से मिलने वाले डेटा को कार का ऑन-बोर्ड कंप्यूटर प्रोसेस करता है। खतरा भांपते ही यह सिस्टम ड्राइवर को अलर्ट (ऑडियो-विजुअल वार्निंग या सीट वाइब्रेशन) करता है, और ज़रूरत पड़ने पर इंसानी प्रतिक्रिया से भी तेज़ रफ़्तार में खुद ब्रेक या स्टीयरिंग एक्शन ले लेता है।

 what is ADAS Technology


ADAS के 6 लेवल्स (Society of Automotive Engineers के अनुसार)

ऑटोनॉमस (स्वचालित) ड्राइविंग की दिशा में ADAS को 0 से 5 तक कुल 6 स्तरों में विभाजित किया गया है:

  1. Level 0 (No Automation): पूरी जिम्मेदारी ड्राइवर की होती है। सिस्टम केवल बुनियादी चेतावनियाँ (जैसे रिवर्स पार्किंग सेंसर्स) देता है।
  2. Level 1 (Driver Assistance): इसमें कम से कम एक सपोर्ट फीचर होता है, जैसे क्रूज़ कंट्रोल या लेन डिपार्चर वार्निंग।
  3. Level 2 (Partial Automation): भारत में यही लेवल सबसे लोकप्रिय है। इसमें गाड़ी एक्सीलरेशन, ब्रेकिंग और स्टीयरिंग का कुछ कंट्रोल खुद संभाल सकती है (उदा. एडाप्टिव क्रूज़ कंट्रोल और लेन सेंटरिंग), लेकिन ड्राइवर को हर वक्त ध्यान देना अनिवार्य है।
  4. Level 3 (Conditional Automation): विशिष्ट परिस्थितियों (जैसे हाई-वे पर) में गाड़ी पूरी तरह ड्राइविंग संभालती है। ड्राइवर को अलर्ट मिलने पर तुरंत टेकओवर करने के लिए तैयार रहना होता है।
  5. Level 4 (High Automation): इसमें गाड़ी तय रास्तों (Geo-fenced areas) पर पूरी तरह बिना ड्राइवर सपोर्ट के (Driverless Taxi) चल सकती है।
  6. Level 5 (Full Automation): बिना किसी स्टीयरिंग या पेडल के, हर स्थिति में पूरी तरह से स्वचालित गाड़ी।

महत्वपूर्ण सूचना: Level 2 या Level 3 ADAS वाली गाड़ियों में कभी भी स्टीयरिंग छोड़कर सोना (Nap लेना) या पूरी तरह बेफिक्र होना जानलेवा हो सकता है। यह एक असिस्टेंस (सहायता) सिस्टम है, ड्राइवर का विकल्प नहीं।

what is ADAS Technology

 

ADAS तकनीक ऑटोमोबाइल सुरक्षा की दुनिया में एक क्रांतिकारी कदम है। जहाँ इंसानी आँखें और दिमाग प्रतिक्रिया देने में 1 से 2 सेकंड का समय लेते हैं, वहीं ADAS माइक्रोसेकंड में काम करके दुर्घटनाओं को टाल देता है। हालांकि, भारतीय सड़कों की परिस्थितियों (अव्यवस्थित ट्रैफिक और गायब लेन मार्किंग) को देखते हुए ड्राइवरों को हमेशा सतर्क रहकर ही ड्राइव करना चाहिए।

Belonging: राजनीति, प्‍यार और निजी जिंदगी तक, गांधी परिवार में हुईं हत्‍याओं के बाद कैसे बदल गई सोनिया गांधी की जिंदगी

Belonging: राजनीति, प्‍यार और निजी जिंदगी तक, गांधी परिवार में हुईं हत्‍याओं के बाद कैसे बदल गई सोनिया गांधी की जिंदगी

Sonia Gandhi

भारत में विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा सोनिया गांधी की जिंदगी पर आधारित उनकी किताब Belonging 10 नवंबर को प्रकाशित होगी, लेकिन इसके पहले ही इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में जमकर हलचल है। सोनिया की इस किताब में उनकी राजनीति से लेकर उनकी जिंदगी, उनका संघर्ष और और निजी जीवन का भी जिक्र है। इसमें इटली से भारत तक के उनके सफ़र का ज़िक्र किया गया है। यह किताब प्यार, नुकसान और उन राजनीतिक फैसलों की निजी कहानी बताती है।

इसके साथ ही किताब उनके जीवन के साथ-साथ भारत में करीब छह दशकों के दौरान हुए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को देखने का एक अलग नजरिया भी देती है। अल्फ्रेड ए. नॉफ़ द्वारा रिलीज़ की जाने वाली 544 पन्नों की इस किताब को एक “खुलासा करने वाली” यादों की किताब बताया जा रहा है, जो युद्ध के बाद के इटली से भारत तक के उनके जीवन का सफ़र बताती है और एक बेहद निजी और राजनीतिक कहानी सुनाती है।

पेंगुइन रैंडम हाउस की वेबसाइट पर इसके बारे में कहा गया है कि यह “एक हैरान करने वाली यादों की किताब है जो प्यार, परिवार का एक बेहद दिलचस्प तरीके से जिक्र करती है। इसमें कहा गया है कि किताब में इटली में गांधी के शुरुआती सालों और राजीव गांधी से उनकी शादी से लेकर उनके संघर्षों तक का ज़िक्र होगा।

हिंदी, साड़ी और गांधी परिवार : जानकारी अनुसार, यह किताब इंग्लैंड के कैम्ब्रिज से शुरू होती है, जहां “1965 में उन्नीस साल की छात्रा सोनिया माइनो को पहली नज़र में ही प्यार हो जाता है”- भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पोते राजीव गांधी से। इसमें बताया गया है कि किताब में उनकी प्रभावशाली सास, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से उनकी मुलाकात का ज़िक्र है और दिखाया गया है कि कैसे राजीव के साथ रहते हुए सोनिया का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह हिंदी बोलना, साड़ी पहनना और भारतीय खाने का मज़ा लेना सीखती हैं।

राजीव की हत्‍या और संजय की प्‍लैन क्रैश में मौत : बता दें कि इस किताब में उन दुखद घटनाओं का भी ज़िक्र है जो राजीव गांधी के भाई संजय की प्लेन क्रैश में मौत और 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद गांधी परिवार पर गुज़रीं। अपनी माँ की मौत के बाद और सोनिया के डर के बावजूद, राजीव प्रधानमंत्री बने, और सात साल बाद राजीव की भी चुनाव प्रचार के दौरान एक आत्मघाती हमलावर द्वारा हत्या कर दी गई। इसमें यह भी बताया गया है कि सोनिया ने कई सालों तक राजनीति में आने के दबाव का विरोध किया, लेकिन बाद में वह इंडियन नेशनल कांग्रेस की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहीं। एक अहम चुनाव के बाद जब पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री बनाने का फैसला किया, तो उन्होंने इस पद को ठुकराने का ‘हैरान करने वाला फैसला’ लिया और इसके बजाय उस गठबंधन में अपनी पार्टी का नेतृत्व किया जिसने एक दशक तक देश पर शासन किया।

2004 में PM की कुर्सी ठुकराई थी : बता दें कि 2004 में कांग्रेस ने 14 सहयोगी दलों के साथ UPA बनाया। चुनाव के बाद लेफ्ट समेत कई दलों के समर्थन से UPA को 335 सांसदों का समर्थन मिला। सहयोगियों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने 18 मई 2004 को पद ठुकरा दिया। इसके बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

परदे के पीछे बागडोर : NDA ने सोनिया के विदेशी नागरिक का मुद्दा उठाकर उनके पीएम बनने का विरोध किया। इसके कारण सोनिया ने पीएम पद ठुकरा दिया और मनमोहन सिंह को पीएम बनाने का प्रस्ताव रखा। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें। हालांकि, कहा जाता है कि पर्दे के पीछे रहकर सरकार की बागडोर सोनिया के हाथों में ही थी।

किताब के बारे में प्रकाशक का कहना है कि यह किताब आज़ादी के बाद के इतिहास, मौजूदा राजनीतिक संघर्षों और 60 सालों में हुए आर्थिक और सामाजिक बदलावों के ज़रिए “भारत को एक अनोखे नज़रिए से” दिखाती है, साथ ही सोनिया गांधी की निजी खुशियों और मुश्किलों की एक करीबी तस्वीर भी पेश करती है। अल्फ्रेड ए. नॉफ़, नॉफ़ डबलडे पब्लिशिंग ग्रुप का एक इम्प्रिंट है, जो पेंगुइन रैंडम हाउस का एक डिवीज़न है।

लखनऊ में खौफनाक वारदात, बैंक के बाहर पति ने पत्नी की हत्या की, फिर खुद को भी गोली मारी, घर में बहन का शव मिला

लखनऊ में खौफनाक वारदात, बैंक के बाहर पति ने पत्नी की हत्या की, फिर खुद को भी गोली मारी, घर में बहन का शव मिला

Lucknow Bank Employee Murder Case

Lucknow Bank Employee Murder Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गुरुवार को एक दिल दहला देने वाली वारदात से सनसनी फैल गई। यहां एक सिरफिरे पति ने अपनी बैंक कर्मचारी पत्नी की दिनदहाड़े बैंक के बाहर गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद आरोपी ने खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस के मुताबिक इससे पहले आरोपी मानस ने अपनी बहन की भी हत्या कर दी थी।

दिनदहाड़े बैंक के बाहर खूनी खेल

मानस भी बैंक में काम करता था, जबकि उसकी पत्नी दिव्या बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर थी। बताया जा रहा है कि दोनों के आपसी रिश्ते ठीक नहीं थे। दोनों के बीच तलाक का मामला चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मृतका बैंक में कार्यरत थी और रोजाना की तरह अपने दफ्तर पहुंची थी। इसी दौरान उसका पति मानस वहां पहुंचा और अपनी जेब से तमंचा निकाला और पत्नी पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।

 

गोली लगते ही महिला खून से लथपथ होकर सड़क पर गिर पड़ी। इससे पहले कि आसपास के लोग या बैंक सुरक्षाकर्मी कुछ समझ पाते या आरोपी को पकड़ते, मानस ने पिस्टल अपनी कनपटी पर रखी और खुद को भी गोली मार ली। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

घर पर बहन का भी मिला शव

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। जब पुलिस आरोपी मानस की पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच करने उसके आवास पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। घर के अंदर मानस की बहन का शव खून से लथपथ हालत में पड़ा मिला। आशंका जताई जा रही है कि मानस ने अपनी पत्नी की हत्या करने निकलने से पहले ही घर में अपनी बहन को मौत के घाट उतार दिया था।

क्या है घटना का कारण?

लखनऊ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल और आरोपी के घर का मुआयना कर साक्ष्य जुटाए हैं। शुरुआती जांच में घरेलू कलह और गंभीर मानसिक तनाव को इस खौफनाक वारदात की वजह माना जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी के पास अवैध हथियार कहां से आया और इस दोहरे हत्याकांड के पीछे की मुख्य वजह क्या थी। एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।