योगी सरकार ने तेज किया बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत-बचाव कार्य, एनडीआरएफ की टीमों को किया पूर्ण सक्रिय

योगी सरकार ने तेज किया बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत-बचाव कार्य, एनडीआरएफ की टीमों को किया पूर्ण सक्रिय

 

 

 

 

उत्तर प्रदेश में बाढ़ और जलभराव की स्थिति के बीच योगी सरकार ने प्रभावित जिलों में राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता पर जारी रखा है। लखीमपुर खीरी और अयोध्या में बाढ़ से जुड़े राहत-बचाव कार्यों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वहीं प्रयागराज में एनडीआरएफ की टीम डूबने की घटनाओं में सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। सरकार और बचाव दलों की सक्रियता से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।

 

प्रदेश के विभिन्न जिलों में एनडीआरएफ की टीमें जरूरत के अनुसार घटनास्थलों पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान चला रही हैं। साथ ही लोगों को नदियों और जलाशयों के आसपास सावधानी बरतने तथा प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।

 

प्रयागराज के नैनी क्षेत्र में 11वीं वाहिनी एनडीआरएफ की टीम ने डूबे व्यक्ति की तलाश के लिए व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया। डीप डाइवर की मदद से टीम ने 18 अगस्त को दोपहर 2:10 बजे उसे बरामद किया गया। एनडीआरएफ ने लोगों से नदी, तालाब और अन्य जलाशयों में स्नान या किसी अन्य गतिविधि के दौरान विशेष सावधानी बरतने को कहा है। तेज बहाव और गहरे पानी वाले स्थानों पर जाने से बचने व किसी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन या बचाव एजेंसियों को सूचना देने की अपील की।

 

वाराणसी में चलाया जागरूकता अभियान

11वीं वाहिनी एनडीआरएफ ने वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर सिविल डिफेंस के सहयोग से सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें श्रद्धालुओं और आम लोगों को डूबने, बाढ़, भूकंप और आग जैसी आपदाओं से बचाव के उपाय बताए। लोगों को प्राथमिक उपचार, सीपीआर और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की जानकारी भी दी गई।

 

दामिनी और सचेत ऐप की दी जानकारी

जागरूकता कार्यक्रम में लोगों को दामिनी ऐप के बारे में बताया गया, जो बिजली गिरने की संभावित गतिविधि की चेतावनी देता है। इसके अलावा सचेत ऐप के माध्यम से मौसम और आपदा संबंधी चेतावनियां प्राप्त करने की जानकारी दी गई। लोगों से इन सेवाओं का इस्तेमाल कर सतर्क रहने की अपील की गई।

 

आपदा में सतर्कता और समन्वय पर जोर

एनडीआरएफ और सिविल डिफेंस ने लोगों से आपदा के समय घबराने के बजाय सूझ-बूझ और सतर्कता से काम लेने की अपील की है। साथ ही अफवाहों से बचने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। सरकार के स्तर पर भी राहत और बचाव व्यवस्था को सक्रिय रखने तथा प्रभावित लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

योगी सरकार की उत्कृष्ट कार्यशैली का असर, संस्थागत प्रसव बढ़ने से मातृ मृत्युदर में आई बड़ी गिरावट

योगी सरकार की उत्कृष्ट कार्यशैली का असर, संस्थागत प्रसव बढ़ने से मातृ मृत्युदर में आई बड़ी गिरावट

योगी सरकार की ओर से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और प्रसव के दौरान मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) उत्तर प्रदेश में लगातार असरदार साबित हो रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से 9 अगस्त तक सात लाख से अधिक संस्थागत प्रसव इसका उदाहरण हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक कई जिलों में योजना के बेहतर क्रियान्वयन का असर दिखाई दे रहा है। योगी सरकार के इन प्रयासों से मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को कम करने में सफलता मिल रही है।

 

जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को दी जाती है आर्थिक सहायता

 

सचिव स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि योगी सरकार की ओर से सुरक्षित प्रसव पर जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव पर आर्थिक सहायता (ग्रामीण क्षेत्र में 1,400 रुपए और शहरी क्षेत्र में 1,000 रुपए) दी जाती है। इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को घर पर प्रसव के बजाय अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव कराने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना से मिलने वाली धनराशि प्रसव से जुड़े खर्चों में मदद करती है और महिलाओं को सुरक्षित प्रसव सेवाओं तक पहुंचने के लिए प्रेरित करती है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में योजना के बेहतर प्रदर्शन से स्पष्ट है कि संस्थागत प्रसव को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। पश्चिम के हाथरस, मैनपुरी, फिरोजाबाद, हरदोई, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर, बागपत तो पूरब से जौनपुर, अम्बेडकरनगर और सोनभद्र ने योजना के क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक भुगतान पहुंचाने में अच्छा प्रदर्शन किया है। सोनभद्र से मुजफ्फरनगर तक का बेहतर प्रदर्शन यह दर्शाता है कि जननी सुरक्षा योजना प्रदेश में सुरक्षित मातृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

योजना का लाभ अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका 

 

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल के अनुसार संस्थागत प्रसव केवल प्रसव की जगह बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मां और नवजात दोनों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। अस्पताल में प्रसव होने पर प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं की समय रहते पहचान और उपचार संभव होता है। जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित चिकित्सक, स्टाफ नर्स, दवाएं, रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाएं भी दी जाती हैं। इससे मातृ एवं नवजात मृत्यु के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। योजना का लाभ अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के फील्ड कर्मचारियों की भूमिका भी अहम है। गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव और उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ उन्हें समय पर स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने का काम किया जाता है।

 

9 अगस्त तक कुल संस्थागत प्रसव 7,17,736 के सापेक्ष 5,43,661 लाभार्थियों का भुगतान हो चुका 

 

स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना के तहत एक अप्रैल से 9 अगस्त तक कुल संस्थागत प्रसव 7,17,736 के सापेक्ष 5,43,661 लाभार्थियों का भुगतान हो चुका है। इनमें हाथरस, मैनपुरी, फिरोजाबाद, हरदोई, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर, जौनपुर, बागपत, अम्बेडकरनगर व सोनभद्र ने उत्कृष्ट कार्य किया है। इन सभी जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों का भुगतान हो चुका है। सिर्फ सिद्धार्थनगर, बहराइच व अलीगढ़ में 50 प्रतिशत या उससे कम भुगतान हुआ है जिसके लिए स्थानीय अधिकारियों को सभी अवरोध दूर कर शत प्रतिशत लाभार्थियों का भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ईरान पर सबसे बड़ा आर्थिक हमला, इकोनॉमिक डी-डे घोषित

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ईरान पर सबसे बड़ा आर्थिक हमला, इकोनॉमिक डी-डे घोषित

trump imposes Economic D-Day on Iran

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर इकोनॉमिक डी-डे (Economic D-Day) की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अगर किसी देश की वित्तीय संस्थाएं, कंपनियां, एयरपोर्ट या सरकारी एजेंसियां ईरान के लिए किसी तरह की मदद का रास्ता खोलती हैं, तो उन्हें भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना होगा। ALSO READ: सर्जियो गोर के J&K दौरे से भड़का Pakistan, 'जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा' वाले बयान पर अमेरिकी राजदूत तलब

 

सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई 

अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने सोशल मीडिया साइट ट्रूथ सोशल पर अपनी पोस्ट में कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को डील करने का जितना बड़ा मौका मैंने दिया, उतना किसी और ने नहीं दिया। दुख की बात है कि वे इसका फायदा उठाने में नाकाम रहे। उन्होंने कहा कि आज मैं किसी भी देश के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई का एलान कर रहा हूं। यह बड़े स्तर पर आर्थिक युद्ध और ईरान को अलग-थलग करने की मुहिम होगी।

 

राष्‍ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य और आर्थिक ताकत को कमजोर किया जाएगा। जो भी देश अपने वित्तीय संस्थानों, कारोबार, एयरपोर्ट या सरकारी एजेंसियों के जरिए ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक मदद देगा, उसे भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। ट्रंप ने खास तौर पर तेल की तस्करी, तेल टैंकरों की अदला-बदली, नकदी के जरिए पैसे भेजने, मनी एक्सचेंज कंपनियों के इस्तेमाल और जहाजों को फर्जी कंपनियों के नाम पर रजिस्टर करने जैसी गतिविधियों का जिक्र किया। ALSO READ: भारत से सीख ले अमेरिका! ट्रंप ने की वोटर ID अनिवार्य करने की मांग, CEC ज्ञानेश कुमार का लिया नाम

 

सहयोगियों से की अपील

उन्होंने इस अभियान की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नॉर्मंडी में अमेरिकी सैनिकों की लैंडिंग से की। उन्होंने अमेरिका के सहयोगी देशों से अपील की कि वे ईरान से पैदा होने वाले खतरे को खत्म करने के लिए अमेरिका का साथ दें।

 

ईरान की अर्थव्यवस्था पर बहुत ज्यादा दबाव

अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता बुरी तरह कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा कि ईरान की नेवी नष्ट हो गई है। वायु सेना बेकार हो गई है और सैन्य कारखाने में तब्दील हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था पर बहुत ज्यादा दबाव है औऱ नए कदमों से तेहरान की क्षमता और सीमित हो जाएगी। ALSO READ: बड़बोले ट्रंप की घटिया बेशर्मी, अंकारा में नहीं था Trump को कोई खतरा

Top News 20 August: पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश से हाहाकार, वंदे मातरम् पर कांग्रेस का बड़ा ऐलान, ईरान पर ट्रंप सख्त

Top News 20 August: पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश से हाहाकार, वंदे मातरम् पर कांग्रेस का बड़ा ऐलान, ईरान पर ट्रंप सख्त

top news 20 august

Top News 20 August : भारी बारिश से पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन से तबाही। कांग्रेस कार्यकर्ता अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पहले 2 अंतरे ही गाएंगे। केंद्र सरकार ने जिलाधिकारियों को दिया नागरिकता देने का अधिकारी। चीनी कारोबारियों के स्टॉक की सीमा तय हुई। ईरान से व्यापार करने वालों पर ट्रंप ने कसा शिकंजा। 20 अगस्त की बड़ी खबरें :

 

पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ का कहर

दक्षिण-पश्चिम मानसून पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में कहर बनकर टूट रहा है। बुधवार को जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल और उत्तराखंड में ज्यादातर जगहों पर गरज और चमक के साथ मूसलाधार बारिश हुई। भारी बारिश से पहाड़ी राज्यों में जगह-जगह भूस्खलन होने से कई मार्गों पर यातायात बाधित हो गया। जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में बादल फटने से भारी तबाही। मौसम विभाग ने 20 से 25 अगस्त के बीच उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी भारत के कई क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है।

 

वंदे मातरम् पर कांग्रेस का बड़ा फैसला

वंदे मातरम् को लेकर जारी सियासी विवाद के बीच कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने स्पष्ट किया कि वह 1937 में पारित अपने प्रस्ताव पर कायम रहेगी। इसके तहत अब पार्टी के सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। ALSO READ: वंदे मातरम् पर कांग्रेस का बड़ा फैसला, 1937 के प्रस्ताव पर कायम, पार्टी कार्यक्रमों में गाए जाएंगे सिर्फ पहले दो अंतरे

 

जिलाधिकारी को नागरिकता देने का अधिकार

केंद्र सरकार ने नागरिकता से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए कुछ सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जिलाधिकारियों को नागरिकता देने का अधिकार दिया है। नए नियमों के तहत गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में रहने वाले पात्र आवेदकों की नागरिकता संबंधी अर्जियों पर जिलाधिकारी फैसला कर सकेंगे। असम और त्रिपुरा में यह व्यवस्था जनजातीय क्षेत्रों को छोड़कर लागू होगी।

 

 

चीनी कारोबारियों के स्टॉक पर सीमा

भारत सरकार ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा।

 

ईरान से व्यापार करने वालों पर कार्रवाई होगी :ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान का साथ देने वाले देशों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा- अगर किसी देश की वित्तीय संस्थाएं, कंपनियां, एयरपोर्ट या सरकारी एजेंसियां ईरान के लिए किसी तरह की मदद का रास्ता खोलती हैं, तो उन्हें भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना होगा।

‘नसबंदी में 40 लाख खर्च, फिर मेरे 6 बच्चे कैसे हो गए?’ जनसुनवाई में ‘डॉगी भाई’ की अनोखी शिकायत, खंडवा नगर निगम पर सवाल

'नसबंदी में 40 लाख खर्च, फिर मेरे 6 बच्चे कैसे हो गए?' जनसुनवाई में 'डॉगी भाई'  की अनोखी शिकायत, खंडवा नगर निगम पर सवाल

dog nagar nigam khandwa

मध्यप्रदेश के खंडवा नगर निगम के विपक्षी पार्षदों/नेताओं ने कुत्तों की नसबंदी योजना में कथित भ्रष्टाचार की शिकायत को लेकर जनसुनवाई में पहुंचकर अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराया था। इस दौरान एक व्यक्ति को कुत्ते का मुखौटा पहनाकर लाया गया। 

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मीडिया को भी दिया बयान 

इसके जरिए कुत्तों की नसबंदी योजना में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई।  विरोध के इस अनोखे तरीके की तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। इस प्रदर्शन के दौरान ‘डॉगी भाई’ के तौर पर पेश किए गए व्यक्ति का बयान भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। उसने मीडिया के माइक पर भी बयान दिया। 

अधिकारियों में मचा हड़कंप

खंडवा नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष दीपक 'मुल्लू' राठौर ने युवक को डॉगी का मुखौटा पहनाकर जनसुनवाई में पेश किया। ये देखकर जनसुनवाई में अफसरों के बीच हड़कंप मच गया। डॉगी का मुखौटा पहने युवक ने सवाल उठाया। शहर में कुत्तों के बधियाकरण का दावा किया जा रहा है तो मुझे 6 बच्चे कैसे पैदा हो गए।

सर्जियो गोर के J&K दौरे से भड़का Pakistan, ‘जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा’ वाले बयान पर अमेरिकी राजदूत तलब

सर्जियो गोर के J&K दौरे से भड़का Pakistan, 'जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा' वाले बयान पर अमेरिकी राजदूत तलब

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अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान दिए गए बयान को लेकर पाकिस्तान ने बुधवार को कड़ा विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस मामले में इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी प्रभारी राजदूत (Charge d’Affaires) को तलब किया और सर्जियो गोर की टिप्पणी के खिलाफ कड़ा राजनयिक विरोध (Strong Demarche) दर्ज कराया।

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सर्जियो गोर ने बुधवार को श्रीनगर दौरे के दौरान कहा था कि “जम्मू-कश्मीर भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।” जम्मू-कश्मीर की अपनी पहली यात्रा पर पहुंचे अमेरिकी राजदूत ने यह भी कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र को लेकर जारी अपनी ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा कर सकता है।

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गोर के बयान पर पाकिस्तान ने जताई नाराजगी

 

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी की कड़ी निंदा की और इसे “गैर-जिम्मेदाराना” बताया। पाकिस्तान ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर का अंतिम समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के संबंधित प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि सर्जियो गोर की टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की सर्वोच्चता के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता के विपरीत है।

सर्जियो गोर ने की CM उमर अब्दुल्ला से मुलाकात

जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी मुलाकात की। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में गोर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसी वजह से वह पहली बार यहां आए हैं। उन्होंने क्षेत्र की खूबसूरती की भी तारीफ की। गोर ने मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक को 'बहुत अच्छी' बताते हुए कहा कि बातचीत के दौरान कुछ मुद्दों पर आगे काम करने की जरूरत पर चर्चा हुई, जिन्हें वह वॉशिंगटन वापस ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संबंधों को आगे और मजबूत करने की उम्मीद है।

 

J&K की ट्रैवल एडवाइजरी में बदलाव के संकेत

अमेरिकी राजदूत ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में हुए 'महत्वपूर्ण सुधार' का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका समय-समय पर अपनी ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा करता है। हालांकि उन्होंने तत्काल किसी बड़े फैसले की घोषणा से इनकार किया, लेकिन संकेत दिया कि इस क्षेत्र के लिए जारी यात्रा चेतावनी की समीक्षा की जा सकती है। फिलहाल अमेरिका की ओर से जम्मू-कश्मीर के लिए Level 4 ‘Do Not Travel’ एडवाइजरी जारी है।

 

गोर ने कहा कि अमेरिका इस बात पर विचार करेगा कि मौजूदा ट्रैवल वार्निंग को कम किया जा सकता है या नहीं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को खूबसूरत क्षेत्र बताते हुए कहा कि कई अमेरिकी यहां की प्राकृतिक सुंदरता और उपलब्ध अवसरों का अनुभव करना पसंद करेंगे।

उमर अब्दुल्ला ने बताई बैठक की प्राथमिकताएं

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी सर्जियो गोर के साथ मुलाकात को “बहुत अच्छी बैठक” बताया। उन्होंने कहा कि बातचीत में जम्मू-कश्मीर और अमेरिका के बीच संपर्क और सहयोग को व्यापक और गहरा करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इनमें खास तौर पर पर्यटन, बागवानी और न्यू इकोनॉमी जैसे क्षेत्र शामिल रहे। इस दौरे और गोर की टिप्पणी के बाद जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक बयानबाजी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

वंदे मातरम् पर कांग्रेस का बड़ा फैसला, 1937 के प्रस्ताव पर कायम, पार्टी कार्यक्रमों में गाए जाएंगे सिर्फ पहले दो अंतरे

वंदे मातरम् पर कांग्रेस का बड़ा फैसला, 1937 के प्रस्ताव पर कायम, पार्टी कार्यक्रमों में गाए जाएंगे सिर्फ पहले दो अंतरे

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वंदे मातरम् को लेकर जारी सियासी विवाद के बीच कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने बुधवार को बड़ा फैसला लिया है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह 1937 में पारित अपने प्रस्ताव पर कायम रहेगी। इसके तहत अब पार्टी के सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। कांग्रेस का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस नेताओं पर पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण नहीं गाने और राष्ट्रगीत का अपमान करने का आरोप लगाया था।

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CWC बैठक के बाद कांग्रेस ने साफ किया रुख

 

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चार घंटे से अधिक चली CWC की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी का रुख पूरी तरह स्पष्ट है और वह 1937 में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिए गए फैसले के साथ खड़ी है।

 

उन्होंने कहा कि उस समय महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल समेत कांग्रेस के शीर्ष नेता मौजूद थे। पार्टी ने उस समय जो निर्णय लिया था, कांग्रेस कार्यकर्ता उसी का पालन करेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सिर्फ दो अंतरे गाए जाएंगे, वेणुगोपाल ने जवाब दिया—“हां, पहले दो अंतरे।”

 

कांग्रेस बोली- हमारे लिए भावनात्मक मुद्दा, BJP के लिए राजनीतिक

 

वेणुगोपाल ने कहा कि वंदे मातरम् और राष्ट्रगान का गायन कांग्रेस के लिए भावनात्मक मुद्दा है, जबकि BJP इसे राजनीतिक मुद्दे के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।

 

उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी द्वारा वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के गायन पर आपत्ति को लेकर BJP की आलोचना को भी खारिज किया। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि BJP राष्ट्रीय मुद्दों, पेपर लीक और ‘चंदा चोरी’ से ध्यान भटकाने के लिए इस मुद्दे को उठा रही है।

 

जयराम रमेश ने 1937 के प्रस्ताव का किया जिक्र

 

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 28 अक्टूबर 1937 को CWC की बैठक में वंदे मातरम् को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया था। उनके मुताबिक, उस बैठक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और मौलाना आजाद मौजूद थे और रवींद्रनाथ टैगोर के सुझाव पर इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। रमेश ने कहा कि बुधवार की CWC बैठक में भी 1937 के प्रस्ताव पर चर्चा हुई और कांग्रेस अध्यक्ष ने पुराने प्रस्ताव के एक हिस्से को पढ़कर सुनाया।

 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रुख पहले दिन से स्पष्ट रहा है कि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रगीत है।

 

खड़गे ने BJP पर किया था पलटवार

 

इससे एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वंदे मातरम् के कथित “अधूरे” संस्करण को गाने के BJP के आरोप पर पलटवार किया था। दक्षिण गोवा में पत्रकारों से बातचीत में खड़गे ने कहा था कि उन्होंने वही संस्करण गाया है, जिसे महात्मा गांधी, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं ने भी गाया था। BJP ने सोमवार को दक्षिण गोवा में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान खड़गे पर वंदे मातरम् का “अधूरा” संस्करण गाने का आरोप लगाया था। पार्टी ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत का अनादर करने का आरोप भी लगाया।

 

प्रमुख सीईओज के साथ राउंड टेबल मीटिंग में बोले सीएम योगी- यूपी में निवेश करें, हर स्तर पर मिलेगा पूरा सहयोग

प्रमुख सीईओज के साथ राउंड टेबल मीटिंग में बोले सीएम योगी- यूपी में निवेश करें, हर स्तर पर मिलेगा पूरा सहयोग

UP Japan Investment Meet

UP Japan Investment Meet: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट के दौरान प्रमुख कंपनियों के सीईओज व बिजनेस लीडर्स के साथ आयोजित राउंड टेबल मीटिंग में निवेशकों का प्रदेश में निवेश के प्रति उत्साह दिखाने के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में 360 डिग्री का व्यापक परिवर्तन हुआ है। इसी बदलाव के कारण आज उत्तर प्रदेश भारत के प्रमुख और ड्रीम इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में उभरकर सामने आया है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश करने वाले उद्यमियों और कंपनियों को सरकार की ओर से हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने निवेशकों का आह्वान करते हुए कहा कि वे उत्तर प्रदेश आएं और यहां अपनी औद्योगिक एवं कारोबारी गतिविधियों का विस्तार करें। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि निवेशकों को किसी भी स्तर पर अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

निवेशकों के सुझावों पर गंभीरता से होगा विचार

सीएम योगी ने कहा कि इन्वेस्टमेंट मीट को लेकर जिस तरह की उत्सुकता प्रमुख उद्योगपतियों और सीईओज ने दिखाई है, उसके लिए वह सभी का हृदय से धन्यवाद करते हैं। निवेशकों की ओर से दिए गए सुझावों को प्रदेश सरकार की टीम ने गंभीरता से संज्ञान में लिया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि निवेशकों के सुझावों और अपेक्षाओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जो भी व्यावहारिक समस्याएं सामने आएंगी, उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। सरकार और उसकी पूरी टीम निवेश अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

युवा मैनपावर और स्किलिंग बनेगी ताकत

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास बड़ी संख्या में युवा मैनपावर है। सरकार युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप स्किलिंग और अपस्किलिंग के अवसर उपलब्ध करा रही है। इससे निवेशकों को प्रशिक्षित और सक्षम मानव संसाधन उपलब्ध होगा। प्रदेश में बदलते औद्योगिक परिदृश्य के अनुरूप इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, स्किल्ड मैनपावर और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इसका सीधा लाभ प्रदेश में निवेश करने वाली कंपनियों को मिलेगा।

निवेशकों के लिए हर स्तर पर सपोर्ट

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में होने वाला निवेश निवेशकों के लिए काफी लाभदायक साबित होगा। प्रदेश सरकार अपनी नीतियों के दायरे में निवेशकों को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। सरकार का प्रयास है कि निवेश की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो तथा उद्यमियों को अपने कारोबार के विस्तार पर ध्यान देने के लिए बेहतर वातावरण मिले। सरकार की पूरी टीम निवेशकों के साथ खड़ी है और किसी भी प्रकार की समस्या आने पर उसके समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

जो कहते हैं, उसे जमीन पर उतारते हैं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार केवल घोषणाएं करने में विश्वास नहीं करती, बल्कि जो कहती है, उसे धरातल पर उतारती है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में आए बदलाव को निवेशक स्वयं देख सकते हैं। कानून-व्यवस्था, कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक वातावरण और निवेश के लिए तैयार नीतियों से आए बदलाव ने उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर पेश की है। सरकार की कार्यप्रणाली में आया यह बदलाव निवेशकों को भी दिखाई देगा।

इन्वेस्टमेंट मीट को बताया महत्वपूर्ण अवसर

मुख्यमंत्री ने इस इन्वेस्टमेंट मीट को उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास और निवेश के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे संवाद के माध्यम से सरकार को उद्योग जगत की अपेक्षाओं और जरूरतों को समझने का अवसर मिलता है, वहीं निवेशकों को प्रदेश में उपलब्ध संभावनाओं और सुविधाओं की जानकारी मिलती है।

 

सीएम योगी ने विश्वास जताया कि प्रमुख उद्योग समूहों की उत्तर प्रदेश में बढ़ती रुचि से प्रदेश में नए निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलेगी। उन्होंने निवेशकों से उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने और प्रदेश में निवेश के अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान भी किया।

भारत-जापान के रिश्तों में नई मजबूती : खन्ना 

उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मजबूत कानून-व्यवस्था, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश अनुकूल नीतियों ने उत्तर प्रदेश को सबसे संभावनाशील निवेश स्थलों में शामिल कर दिया है। जापान अब प्रदेश की विकास यात्रा में केवल निवेशक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और रणनीतिक साझेदार के रूप में आगे बढ़ रहा है।

 

नई दिल्ली के ताज पैलेस में आयोजित उत्तर प्रदेश-जापान निवेश सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए सुरेश खन्ना ने कहा कि भारत और जापान के संबंध साझा मूल्यों, समान दृष्टिकोण और परस्पर प्राथमिकताओं के आधार पर लगातार मजबूत हो रहे हैं। जापान से आए बड़े प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश के प्रति जापानी उद्योग जगत का भरोसा बढ़ा है। उन्होंने यामानाशी प्रांत के गवर्नर कोटारो नागासाकी सहित जापानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।

 

सुरेश खन्ना ने कहा कि सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, बेहतर कनेक्टिविटी, विशाल उपभोक्ता बाजार, कुशल मानव संसाधन, नीति आधारित सुशासन और तेजी से विकसित हो रहा आधारभूत ढांचा यूपी की बड़ी ताकत हैं। ‘निवेश मित्र’ जैसी व्यवस्थाओं ने कारोबार की राह आसान की है और निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया को गति दी है।

 

उन्होंने कहा कि गत दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जापान यात्रा से दोनों पक्षों के बीच औद्योगिक और संस्थागत संवाद को नई गति मिली है। अब ग्रीन हाइड्रोजन, ऑटोमोबाइल, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं बन रही हैं। उत्तर प्रदेश जापान को सिर्फ निवेशक के रूप में नहीं देखता, बल्कि सतत और दीर्घकालिक विकास के विश्वसनीय साझेदार के रूप में उसका स्वागत करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 दोनों पक्षों के आर्थिक, औद्योगिक और संस्थागत संबंधों को नई ऊंचाई देगा।

 

140 साल पुराना पारीछा बांध बना विश्व धरोहर, फ्रांस में आयोजित समारोह में मिलेगा सम्मान

140 साल पुराना पारीछा बांध बना विश्व धरोहर, फ्रांस में आयोजित समारोह में मिलेगा सम्मान

Jhansi Paricha Dam

योगी सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत को विश्व पटल पर पहचान दिलाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इस दिशा में योगी सरकार ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। झांसी के 140 साल पुराना पारीछा बांध अब वैश्विक विरासत का हिस्सा बन गया है। इसे इंटरनेशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज (आईसीआईडी) ने वर्ल्ड हेरिटेज इरिगेशन स्ट्रक्चर्स (डब्ल्यूएचआईएस) के रूप में मान्यता दे दी है। वहीं पारीक्षा बांध को फ्रांस में अक्टूबर में होने वाली 26वीं आईसीआईडी इंटरनेशनल कांग्रेस और 77वीं इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव काउसिंल मीटिंग के दौरान डब्ल्यूएचआईएस अवार्ड-26 दिया जाएगा। 

14 अक्टूबर को फ्रांस के मार्सेई में आयोजित कार्यक्रम में दिया जाएगा अवार्ड

प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने बताया कि 13 अगस्त को विभाग को आईसीआईडी की ओर से एक पत्र भेजा गया था, जिसमें झांसी के 140 साल पुराने पारीछा बांध को फ्रांस के मार्सेई में 14 अक्टूबर में होने वाली 26वीं आईसीआईडी इंटरनेशनल कांग्रेस और 77वीं इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव काउसिंल मीटिंग के दौरान डब्ल्यूएचआईएस अवार्ड-26 दिया जाएगा। इसके लिए विभाग के अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। 

पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी है पारीछा बांध 

झांसी का पारीछा बांध बेतवा नदी पर बना है। यह करीब 140 साल से बुंदेलखंड की सिंचाई व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह बेतवा नहर प्रणाली का मुख्य हिस्सा है। इस नहर व्यवस्था से बुंदेलखंड के सूखे क्षेत्रों में खेती के लिए पानी पहुंचाया जाता है। पारीछा बांध करीब 1,174 मीटर लंबा है और इसकी ऊंचाई नदी तल से करीब 16.8 मीटर है। इसमें 318 स्टील के गेट लगाए गए हैं। इन गेटों की मदद से पानी को रोकने और जरूरत के हिसाब से छोड़ने का काम किया जाता है।

 

वहीं पिछले कुछ वर्षों में इसकी पानी जमा करने की क्षमता बढ़ाई गई है। पहले इसकी क्षमता करीब 1,700 मिलियन क्यूबिक फीट थी, जिसे बढ़ाकर करीब 2,400 मिलियन क्यूबिक फीट किया गया। यह बांध 140 साल पुराना होने के बाद भी काम कर रहा है। इस बांध से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में सिंचाई का फायदा मिलता है। बारिश के मौसम में जब बांध के गेट खोले जाते हैं तो यहां पानी का सुंदर दृश्य भी दिखाई देता है। यही वजह है कि यह जगह पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनती है। पारीछा बांध से थर्मल पावर प्रोजेक्ट को भी पानी मिलता है। इस परियोजना की बिजली उत्पादन क्षमता 920 मेगावाट है। 

 

योगी सरकार पुरानी जल सरंचनाओं को सम्मान देने के साथ आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को कर रही मजबूत

पारीछा बांध को विकसित करने की योजना 19वीं सदी में बनाई गई थी। वर्ष 1855 में कैप्टन स्ट्रेची ने बुंदेलखंड के लिए नहर प्रणाली विकसित करने का विचार रखा था। इसके बाद सर्वे किया गया। वर्ष 1881 में इसका निर्माण शुरू हुआ और वर्ष 1886 में बांध चालू हो गया। पारीछा बांध को डब्ल्यूएचआईएस अवार्ड-26 अवॉर्ड के लिए चुना जाना सिर्फ एक पुराने बांध को सम्मान मिलना नहीं है।

यह बुंदेलखंड की उस सिंचाई व्यवस्था की पहचान है, जो लंबे समय से किसानों और खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने में काम कर रही है। योगी सरकार प्रदेश में पुरानी जल संरचनाओं को सम्मान देने के साथ-साथ आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने पर भी कार्य कर रही है। यह उसी का नतीजा है कि पारीक्षा बांध को वैश्विक विरासत में मान्यता दी गयी है।

Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके ‘सिंघम’

Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके 'सिंघम'

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी मुंढे को नियमों का कड़ाई से पालन कराने और भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है। उनके करियर में 21 साल में 25 तबादले भी चर्चा का विषय रहे हैं।

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मई 2026 में महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) Commissioner की जिम्मेदारी संभालने के बाद मुंढे ने मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा के खिलाफ कार्रवाई तेज की। दूध-पनीर में मिलावट से लेकर खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन, प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों और क्विक-कॉमर्स स्टोर्स तक के खिलाफ जांच और कार्रवाई की गई। कई प्रतिष्ठानों पर छापेमारी हुई, कुछ को बंद किया गया और कई को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

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सवाल यह है कि हर राज्य को मुंढे जैसे अधिकारी की जरूरत क्यों है?

भारत जैसे विशाल देश में प्रशासन केवल सरकारी आदेश जारी करने का नाम नहीं है। कानूनों को जमीन पर लागू कराने के लिए ऐसे अधिकारियों की जरूरत होती है जो कानून, जनहित और प्रशासनिक जवाबदेही को प्राथमिकता दें। तुकाराम मुंढे की कार्यशैली इसी सवाल को सामने लाती है। खाद्य और दवा जैसी सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्था में अगर मिलावट या नियमों का उल्लंघन होता है तो उसका असर आम आदमी पर पड़ता है। ऐसे में अधिकारी की जिम्मेदारी केवल फाइलों तक सीमित नहीं रह सकती।

 

मुंढे का कहना है कि जब तक राज्य में लोगों को सुरक्षित भोजन और दवाएं सुनिश्चित नहीं हो जातीं, तब तक वह कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, उनकी सख्त कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें ‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल’ करने जैसी अति से बचने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद उनकी कार्रवाई को कई लोगों ने सराहा है।

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गरीब किसान परिवार से निकले IAS अधिकारी

तुकाराम मुंढे का सफर भी उनकी प्रशासनिक सोच को समझने में महत्वपूर्ण है। उनका जन्म महाराष्ट्र के बीड जिले के एक गरीब कृषि परिवार में हुआ। मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित इलाके में उन्होंने बचपन से ही खेती की मुश्किलें, पानी की कमी और आर्थिक परेशानियां देखीं।

 

वह अपने परिवार के खेत में काम करते थे और माता-पिता के साथ साप्ताहिक बाजार में सब्जियां बेचते थे। फसलों में पानी देने के लिए उन्हें रात में करीब 2 बजे उठना पड़ता था। मिट्टी के घर में पले-बढ़े मुंढे ने बारिश पर निर्भर खेती और पानी की कमी का असर करीब से देखा। वह स्थानीय जिला परिषद स्कूल तक नंगे पैर जाते थे। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि वह व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था को बदलने के लिए उसमें शामिल हुए।

 

बिना कोचिंग के UPSC में हासिल की 20वीं रैंक

मुंढे ने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान या पारिवारिक प्रशासनिक पृष्ठभूमि के 2005 में UPSC परीक्षा पास की और देशभर में 20वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित हुआ। उन्होंने 1996 में औरंगाबाद के Government College of Arts and Science से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1998 में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। सिविल सेवा में आने के बाद भी उन्होंने वित्तीय नीति, राजस्व पूर्वानुमान, वित्तीय बाजार नियमन, मैक्रोइकोनॉमिक मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अध्ययन और प्रशिक्षण जारी रखा।

 

21 साल की नौकरी में 25 तबादले

 

तुकाराम मुंढे के करियर की सबसे चर्चित बातों में उनके तबादले शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 21 साल की सेवा में उनका 25 बार तबादला हो चुका है। कई पदों पर वह निर्धारित पूर्ण कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाए। एक IAS अधिकारी का सामान्य कार्यकाल किसी पद पर करीब तीन साल माना जाता है, जबकि मुंढे का करियर बार-बार होने वाले तबादलों के लिए चर्चा में रहा है। कुछ मौकों पर उन्हें बिना महत्वपूर्ण पोस्टिंग के भी रखा गया। फिर भी उनके प्रशासनिक काम को कई पुरस्कार और सम्मान मिले।

 

पानी से लेकर ट्रैफिक मैनेजमेंट तक काम

 

मुंढे को जल संरक्षण, शहरी प्रशासन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, परिवहन और सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में काम के लिए पहचान मिली है। उन्हें 2015-16 में महाराष्ट्र सरकार का Best Collector Award दिया गया। सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। जल संरक्षण के काम के कारण उन्हें ‘वॉटरमैन ऑफ महाराष्ट्र’ भी कहा गया। नवी मुंबई नगर निगम में उनके कार्यकाल के दौरान ई-टॉयलेट और भूकंपीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों को SKOCH Order of Merit मिला।

 

2017 में उन्हें Best Integrated Traffic Management System के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। आखिर क्यों जरूरी हैं ऐसे अधिकारी?

 

तुकाराम मुंढे की कहानी सिर्फ एक अधिकारी के तबादलों या सख्त कार्रवाई की कहानी नहीं है। यह उस सवाल से भी जुड़ी है कि क्या प्रशासन में ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो दबाव के बावजूद कानून और जनहित को प्राथमिकता दें?

 

लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारी की सख्ती के साथ संवेदनशीलता और कानून के दायरे में रहना भी जरूरी है। लेकिन दूसरी तरफ, खाद्य सुरक्षा, मिलावट, अवैध कारोबार और जनस्वास्थ्य जैसे मामलों में कार्रवाई न होने का खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है।

 

इसीलिए मुंढे की कार्यशैली देश के सामने एक बड़ा सवाल रखती है- क्या हर राज्य को ऐसे अधिकारियों की जरूरत है, जो व्यवस्था में रहकर व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश करें? शायद इसी वजह से, तबादलों और विवादों के बावजूद तुकाराम मुंढे का नाम आज भी सख्त और सक्रिय प्रशासन की बहस में बार-बार सामने आता है।