
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर इकोनॉमिक डी-डे (Economic D-Day) की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अगर किसी देश की वित्तीय संस्थाएं, कंपनियां, एयरपोर्ट या सरकारी एजेंसियां ईरान के लिए किसी तरह की मदद का रास्ता खोलती हैं, तो उन्हें भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना होगा। ALSO READ: सर्जियो गोर के J&K दौरे से भड़का Pakistan, 'जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा' वाले बयान पर अमेरिकी राजदूत तलब
सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया साइट ट्रूथ सोशल पर अपनी पोस्ट में कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को डील करने का जितना बड़ा मौका मैंने दिया, उतना किसी और ने नहीं दिया। दुख की बात है कि वे इसका फायदा उठाने में नाकाम रहे। उन्होंने कहा कि आज मैं किसी भी देश के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई का एलान कर रहा हूं। यह बड़े स्तर पर आर्थिक युद्ध और ईरान को अलग-थलग करने की मुहिम होगी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य और आर्थिक ताकत को कमजोर किया जाएगा। जो भी देश अपने वित्तीय संस्थानों, कारोबार, एयरपोर्ट या सरकारी एजेंसियों के जरिए ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक मदद देगा, उसे भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। ट्रंप ने खास तौर पर तेल की तस्करी, तेल टैंकरों की अदला-बदली, नकदी के जरिए पैसे भेजने, मनी एक्सचेंज कंपनियों के इस्तेमाल और जहाजों को फर्जी कंपनियों के नाम पर रजिस्टर करने जैसी गतिविधियों का जिक्र किया। ALSO READ: भारत से सीख ले अमेरिका! ट्रंप ने की वोटर ID अनिवार्य करने की मांग, CEC ज्ञानेश कुमार का लिया नाम
सहयोगियों से की अपील
उन्होंने इस अभियान की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नॉर्मंडी में अमेरिकी सैनिकों की लैंडिंग से की। उन्होंने अमेरिका के सहयोगी देशों से अपील की कि वे ईरान से पैदा होने वाले खतरे को खत्म करने के लिए अमेरिका का साथ दें।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर बहुत ज्यादा दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता बुरी तरह कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा कि ईरान की नेवी नष्ट हो गई है। वायु सेना बेकार हो गई है और सैन्य कारखाने में तब्दील हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था पर बहुत ज्यादा दबाव है औऱ नए कदमों से तेहरान की क्षमता और सीमित हो जाएगी। ALSO READ: बड़बोले ट्रंप की घटिया बेशर्मी, अंकारा में नहीं था Trump को कोई खतरा


