टीचर की हरकत से दहशत में 3 साल की बच्‍ची, अपशब्‍द कहे, धमकी दी, बेटी के बैग में वॉइस रिकॉर्डर रखकर पिता ने जुटाए सबूत, FIR दर्ज

टीचर की हरकत से दहशत में 3 साल की बच्‍ची, अपशब्‍द कहे, धमकी दी, बेटी के बैग में वॉइस रिकॉर्डर रखकर पिता ने जुटाए सबूत, FIR दर्ज

indore teacher

इंदौर में एक 3 साल की बच्‍ची को टीचर ने अपशब्‍द कहे और धमकी दी। टीचर की हरकत से मायूस दिखी बेटी से पिता ने पूछा तो उसने बताया कि टीचर मैम उसे गंदा गंदा बोलती है। इसके बाद पिता ने टीचर के खिलाफ सबूत जुटाने के लिए बेटी के बैग में वॉयस रिकॉर्डर रख दिया, जिसमें बच्‍ची से बात करने के दौरान टीचर की भाषा और अपशब्‍द रिकॉर्ड हो गए।

सबूत मिलने के बाद पिता ने टीचर के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई है। शिक्षिका की शिकायत लेकर पहले पिता स्कूल प्रबंधन के पास पहुंचे थे, लेकिन उनकी शिकायत को स्कूल प्रबंधन ने गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद पिता के दोस्तों ने सुझाव दिया कि वे पुलिस में इसकी शिकायत करें।

मैम गंदा गंदा बोलती है : मामला विजय नगर स्थित फर्स्टक्राई इंटेलिटाट्स प्री-स्कूल का है। बच्ची यहां नर्सरी में पढ़ती है। बच्ची के पिता रत्नेश की शिकायत पर पुलिस ने शिक्षिका के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रत्नेश ने शिकायत में बताया कि वे 8 अगस्त को बेटी को लेने स्कूल गए थे। वह उदास दिख रही थी। बातचीत में उसने बताया कि मैम उसे गंदा कहती हैं। बच्ची ने रोते हुए बताया कि उसे स्कूल में बहुत बुरा लगता है। मैडम ने उसे चिमटी काटी। इसके अगले दिन रत्नेश ने बेटी के लिए वॉइस रिकॉर्डर खरीदा और उसे बच्ची के बैग में रखकर स्कूल भेज दिया।

डर के मारे गिड़गिड़ा रही थी बच्ची : रात में रत्नेश ने रिकॉर्डिंग सुनी। इसमें उनकी बेटी को टीचर प्रांजली अपशब्द कहते हुए और मारने-पीटने की बात कह रही थी। बच्ची पिटाई से बचने के लिए गिड़गिड़ा भी रही थी। टीचर ने उसके माता-पिता को भी अपशब्द कहे। पूरे घटनाक्रम की वॉइस रिकॉर्डिंग हो गई।

रिकॉर्डिंग सुनने के बाद रत्नेश अपनी बेटी को लेकर स्कूल पहुंचे। उस समय बच्ची ने स्कूल के अंदर जाने से इनकार कर दिया और काफी रोने लगी। इसके बाद रत्नेश ने स्कूल की प्रिंसिपल से बात की और सीसीटीवी फुटेज की मांग की।

स्कूल प्रबंधन ने उन्हें फुटेज उपलब्ध नहीं कराए। मामले में पीड़ित परिवार ने अन्य रिश्तेदारों और वकील से बात की। इसके बाद विजयनगर पुलिस को रिकॉर्डिंग सौंपते हुए पूरा घटनाक्रम बताया। जांच के बाद मंगलवार को विजयनगर पुलिस ने टीचर के खिलाफ गंभीर धाराओं में कार्रवाई की है।

शिलांग में KSU की बाइक रैली के दौरान भारी हिंसा : वाहनों में आगजनी, स्वामी विवेकानंद और नेताजी की प्रतिमाएं खंडित

शिलांग में KSU की बाइक रैली के दौरान भारी हिंसा : वाहनों में आगजनी, स्वामी विवेकानंद और नेताजी की प्रतिमाएं खंडित

Shillong KSU Bike Rally Violence

Shillong KSU Bike Rally Violence: मेघालय की राजधानी शिलांग में खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) द्वारा आयोजित एक 'काले झंडे वाली बाइक रैली' के दौरान अचानक हिंसा भड़क गई। प्रदर्शनकारियों और उपद्रवियों ने शहर के कई इलाकों में जमकर उत्पात मचाया, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया है। हिंसा की घटनाओं के बाद पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है।  

वाहनों को किया आग के हवाले, प्रतिमाओं में तोड़फोड़

रैली के दौरान उपद्रवियों ने कानून-व्यवस्था को ताक पर रखते हुए कम से कम दो सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया और दर्जनों अन्य वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। हिंसा की सबसे दुखद घटना 1960 के दशक में पूर्वी पाकिस्तान से आए विस्थापितों के लिए बसाई गई 'राहत और पुनर्वास कॉलोनी' (RR Colony) में सामने आई। यहां स्थापित राष्ट्रनायक स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमाओं को उपद्रवियों द्वारा खंडित कर दिया गया।  

 

इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने मेघालय सचिवालय के मुख्य द्वार पर पहुंचकर विरोध स्वरूप अपने झंडे और बैनर लगा दिए थे। हालांकि, वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन झंडों को तुरंत हटा दिया।

15 दिनों का अल्टीमेटम खत्म होने पर शुरू हुआ आंदोलन

समाचार एजेंसी 'पीटीआई' के अनुसार, छात्र संगठन KSU ने राज्य सरकार को अपनी मांगों को लेकर 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया था। इस समय सीमा के दौरान सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम न उठाए जाने के विरोध में छात्र संगठन ने इस बाइक रैली का आह्वान किया था।  

क्या हैं छात्र संगठन (KSU) की मुख्य मांगे?

KSU का यह विरोध प्रदर्शन निम्नलिखित प्रमुख मांगों को लेकर चल रहा है:

  • सुरक्षा अधिनियम लागू करना : राज्य में 'मेघालय निवासी सुरक्षा और संरक्षा अधिनियम' (MRSSA) को पूरी तरह से लागू किया जाए।
  • प्रवासी श्रमिकों पर नियंत्रण व भर्ती सुधार : राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार किया जाए और बाहर से आने वाले प्रवासी श्रमिकों पर कड़े नियम और नियंत्रण लागू किए जाएं।
  • नर्सों की भर्ती में बदलाव : NEIGRIHMS में नर्सों की भर्ती प्रक्रिया में संशोधन कर स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए।  
  • खनन जनसुनवाई रद्द करना : ईस्ट जयंतिया हिल्स के लम सिरमन में 'श्री सीमेंट लिमिटेड' की चूना पत्थर खनन परियोजना के लिए आयोजित की गई जन सुनवाई को अमान्य और रद्द घोषित किया जाए।

स्थिति तनावपूर्ण, पुलिस बल तैनात

हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद शिलांग शहर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस उपद्रवियों की पहचान करने और स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लाने के लिए मामले की जांच कर रही है। प्रशासन ने नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

NRC नहीं तो जनगणना नहीं! मणिपुर में भारी बवाल, प्रदर्शनकारियों ने फूंके सीएम और गृह मंत्री के पुतले

NRC नहीं तो जनगणना नहीं! मणिपुर में भारी बवाल, प्रदर्शनकारियों ने फूंके सीएम और गृह मंत्री के पुतले

Manipur NRC Demand Protest

Manipur NRC Demand Protest: मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट करने की मांग को लेकर बुलाया गया 48 घंटे का राज्यव्यापी बंद बुधवार को समाप्त हो गया। हालांकि, बंद खत्म होते ही घाटी वाले जिलों के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और तीव्र हो गए। बंद समर्थकों ने राजनेताओं के पुतले फूंके, विशाल रैलियां निकालीं और सड़कों पर जाम लगा दिया।  

'नो एनआरसी, नो सेंसस' के लगे नारे  

इम्फाल ईस्ट जिले के खुरई लामलोंग में बंद समर्थकों ने मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह और गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम के पुतले जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। पीटीआई के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने 'नो एनआरसी, नो सेंसस' (एनआरसी नहीं, तो जनगणना नहीं) के जोरदार नारे लगाए। उनकी मुख्य मांग है कि जब तक हिंसा के कारण आंतरिक रूप से विस्थापित हुए लोग अपने मूल स्थानों पर वापस नहीं लौट जाते और अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए एनआरसी लागू नहीं होती, तब तक राज्य में जनगणना की प्रक्रिया शुरू न की जाए।  ALSO READ: दिल्ली के नरेला में रॉकेट लॉन्चरों को नष्ट करने की कार्रवाई, मणिपुर में 2 संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी से जुड़ा मामला

सड़कों पर चक्काजाम, प्रशिक्षण कार्यक्रम रद्द

इम्फाल वेस्ट जिले के सिंगजामेई में दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने लगभग 2 किलोमीटर लंबी विरोध रैली निकाली। इसके अलावा इम्फाल वेस्ट, इम्फाल ईस्ट, बिष्णुपुर और थोउबल जिलों में कई स्थानों पर पत्थरों और बांस के खंभों से सड़कें अवरुद्ध कर दी गईं। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों की गाड़ियों समेत निजी वाहनों को रोक दिया और उन्हें वापस लौटने पर मजबूर कर दिया।  

 

बढ़ते विरोध के चलते थोउबल जिले में जनगणना के सुपरवाइजरों, प्रगणकों और फील्ड ट्रेनरों के लिए आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा। इस स्थिति पर 'कौंसिल ऑफ टीचर्स एसोसिएशंस' (COTA), मणिपुर ने भी अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।  

सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार का ऐलान

'कैंपेन फॉर Just and Fair Delimitation' (JFD) के संयोजक जीतेंद्र निंगोंबा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की। उन्होंने बताया कि गुरुवार से संगठन राज्य और केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों का पूर्ण बहिष्कार करेगा। हालांकि, जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पानी, बिजली और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाओं को इस बहिष्कार से मुक्त रखा गया है।  

 

घाटी के पांचों जिलों— इम्फाल ईस्ट, इम्फाल वेस्ट, थोउबल, काकचिंग और बिष्णुपुर— में व्यापारिक प्रतिष्ठान, बाजार, शिक्षण संस्थान और सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह ठप रहे।  

आगे और बढ़ सकती है हलचल

एक तरफ तेंगनौपाल जिले में नागरिक समाज संगठनों ने डॉक्टरों के तबादले और पदस्थापना के आदेश को लागू न करने पर 24 अगस्त से राष्ट्रीय राजमार्ग पर 48 घंटे के पूर्ण बंद की चेतावनी दी है। वहीं दूसरी ओर, एनआरसी की मांग पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से महत्वपूर्ण चर्चा करने के लिए मणिपुर के राज्यपाल अजय के. भल्ला नई दिल्ली रवाना हो गए हैं।

स्वाइन फ्लू की महिला मरीज की मौत, उज्जैन से इलाज के लिए आई थी इंदौर, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग हुआ अलर्ट

स्वाइन फ्लू की महिला मरीज की मौत, उज्जैन से इलाज के लिए आई थी इंदौर, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग हुआ अलर्ट

इंदौर के निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती एक महिला की स्वाइन फ्लू से मौत की खबर सामने आई है। महिला उज्जैन के ऋषि नगर में रहती थी और इलाज के लिए उसे उज्जैन से इंदौर लाया गया था। अस्पताल से लामा करवाकर परिजन उसे उज्जैन ले गए थे, जहां बुधवार को घर पर उसकी मौत हो गई।

महिला की मेडिकल जांच में एच1एन1 संक्रमण पाया गया था। उसे सांस लेने में तकलीफ के साथ सर्दी-खांसी की शिकायत थी। पहले उसे उज्जैन के अवंती सुपर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह छह दिन तक अस्पताल में भर्ती रही, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर परिजन उसे इंदौर के कोकिलाबेन अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने करीब दो सप्ताह तक उसका इलाज किया। इसके बावजूद तबीयत में सुधार नहीं होने पर परिजनों ने लामा करवाकर उसे उज्जैन ले जाने का फैसला किया। घर पहुंचने के बाद उसकी मौत हो गई।

एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि : डॉक्टरों को स्वाइन फ्लू के संक्रमण की आशंका थी। इसके चलते नाक और गले से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। जांच में एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हुई। हालांकि, महिला की मौत स्वाइन फ्लू के कारण ही हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने अभी नहीं की है।

इलाज के दौरान डॉक्टरों ने महिला की ट्रेवल हिस्ट्री भी पता की थी। परिजनों के अनुसार, महिला बाहर ज्यादा नहीं जाती थी और अधिकांश समय घर पर ही रहती थी। कभी-कभार वह पार्क जाती थी। 25 जुलाई के बाद उसे सर्दी-खांसी और जुकाम की शिकायत हुई थी, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ।

‘जानते नहीं मेरा बाप कौन है’ का नया वर्जन बना ‘हम Gen Z हैं’? उमर अब्दुल्ला ने द्रास चेकपोस्ट Viral Video पर कसा तंज [VIDEO]

‘जानते नहीं मेरा बाप कौन है’ का नया वर्जन बना ‘हम Gen Z हैं’? उमर अब्दुल्ला ने द्रास चेकपोस्ट Viral Video पर कसा तंज [VIDEO]

कारगिल के द्रास इलाके में एक चेकपोस्ट पर टूरिस्ट और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में एक महिला टूरिस्ट कई घंटे तक रोके जाने से नाराज नजर आती है और इसी दौरान वह बार-बार कहती सुनाई देती है—“We are Gen Z, we will not tolerate this.” वीडियो सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस अंदाज पर तंज कसते हुए कहा कि आजकल “हम Gen Z हैं” कहना कहीं-कहीं उसी पुराने रसूख वाले अंदाज जैसा लगता है, जब लोग अपनी पहुंच दिखाने के लिए कहते थे—“जानते नहीं हो मेरा बाप कौन है।” इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है कि क्या Gen Z होना अपनी बात रखने की ताकत है या फिर इसे हर छोटी-बड़ी नाराजगी में ‘थ्रेट कार्ड’ की तरह इस्तेमाल करना ठीक है। 

कारगिल चेकपोस्ट पर आखिर हुआ क्या?

 

वायरल वीडियो द्रास के मिनिमार्ग चेक पोस्ट के पास का बताया जा रहा है, जहां एक टूरिस्ट ग्रुप को कुछ समय के लिए रोका गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मिनिमार्ग-ज़ोजिला-सोनमर्ग रोड पर आवाजाही पर सुरक्षा कारणों से रोक लगाई गई थी। लद्दाख पुलिस के अनुसार वीडियो जुलाई में कारगिल विजय दिवस के आसपास, 26 जुलाई के आस पास का है। इंतजार लंबा होने के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और महिला टूरिस्ट सुरक्षाकर्मियों से बहस करती नजर आई। महिला ने सवाल उठाया कि जब आम यात्रियों को आगे जाने से रोका जा रहा है तो फिर किसी मंत्री को वहां से जाने की अनुमति कैसे मिली। इसके बाद उसने वहां मौजूद दूसरे टूरिस्टों से भी विरोध में साथ आने की अपील की। 

 

वीडियो में महिला यह भी कहती सुनाई देती है कि उन्हें करीब पांच घंटे से रोका गया है और वह लोग घूमने के लिए पैसे देकर आए हैं, ऐसी स्थिति को सहने के लिए नहीं। उसने यह आरोप भी लगाया कि जिस तरह का व्यवहार कश्मीरियों के साथ किया जाता है, अब बाहर से आए पर्यटकों के साथ भी वैसा ही किया जा रहा है। वीडियो में मौजूद कुछ दूसरे टूरिस्ट महिला का समर्थन करते हुए नजर आते हैं और वह उन्हें अपनी गाड़ियों में बैठकर आगे बढ़ने के लिए कहती है। हालांकि, इस दौरान सुरक्षा प्रक्रिया को लेकर बहस और तनाव बढ़ता दिखाई देता है। 

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‘हम Gen Z हैं’… महिला ने क्या कहा?

 

वीडियो में महिला का सबसे ज्यादा चर्चा में आया बयान है—“We are Gen Z. We won’t tolerate this nonsense.” इसके बाद वह दूसरे टूरिस्टों से पूछती है कि क्या वे भी उसके साथ खड़े होंगे और फिर सभी को गाड़ियों में बैठकर आगे बढ़ने के लिए कहती है। महिला ने लंबे इंतजार और रास्ता बंद होने को लेकर नाराजगी जाहिर की और सवाल किया कि अगर पर्यटक पैसे खर्च करके घूमने आते हैं, तो क्या उन्हें इस तरह घंटों इंतजार करना चाहिए। 

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को केवल महिला की नाराजगी के नजरिए से देखना भी अधूरा होगा। कारगिल जैसे संवेदनशील इलाके में सड़क और आवाजाही से जुड़े फैसले सुरक्षा कारणों से भी लिए जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस समय सड़क पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था। यानी टूरिस्टों की परेशानी अपनी जगह थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन की परिस्थितियां भी इस पूरे मामले का हिस्सा थीं। 

 

 उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?

 

वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर Gen Z वाली लाइन को लेकर तीखा लेकिन व्यंग्यात्मक कमेंट किया। उन्होंने कहा कि “हम Gen Z हैं” अब “जानते नहीं हो मेरा बाप कौन है” का नया वर्जन बनता जा रहा है। उनका कहना था कि Gen Z को लेकर बनी सकारात्मक छवि को नुकसान पहुंचाने का सबसे आसान तरीका यही है कि अपनी पहचान को हर छोटी-सी बात पर धमकी या दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाए। 

 

उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी का फोकस केवल इस महिला पर नहीं, बल्कि उस रवैये पर था जिसमें कोई व्यक्ति अपनी पहचान, पीढ़ी या किसी विशेष वर्ग से जुड़े होने को अपनी बात मनवाने के हथियार की तरह इस्तेमाल करने लगे। उनके मुताबिक Gen Z को लेकर लोगों के बीच बनी goodwill तब कमजोर हो सकती है, जब “हम Gen Z हैं” जैसी लाइन को हर perceived insult या disagreement पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाए। 

 ऐसी Travel Restrictions कारगिल में नई बात नहीं

 

कारगिल और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सड़क बंद होना या कुछ समय के लिए आवाजाही सीमित किया जाना असामान्य नहीं है। यहां **मौसम, सुरक्षा जरूरतों और सड़क की स्थिति* के कारण कई बार यात्रियों को अचानक रोकना पड़ सकता है और कभी-कभी यह इंतजार लंबा भी हो जाता है। इसलिए किसी route पर restriction लगना अपने आप में कोई नई बात नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वायरल वीडियो वाले मामले में भी सड़क को सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से बंद किया गया था। 

 

इसी वजह से यह पूरा मामला अब सिर्फ एक वायरल वीडियो या “हम Gen Z हैं” वाली लाइन तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ लंबे समय तक रोके जाने से परेशान यात्रियों का गुस्सा है, तो दूसरी तरफ संवेदनशील border region में security protocols और restrictions की जरूरत भी है। इस बीच भारतीय सेना ने भी स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा चेकपोस्ट Army का नहीं, बल्कि पुलिस का चेकपोस्ट था। सेना की ओर से कहा गया कि घटना का उसके personnel से संबंध नहीं था। 

 

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद बहस का सबसे बड़ा मुद्दा यही बन गया है कि अपनी बात रखने और किसी व्यवस्था पर सवाल उठाने का अधिकार हर किसी के पास है, लेकिन पहचान को अपनी बात मनवाने के दबाव के तौर पर इस्तेमाल करना अलग बात है। Gen Z को लेकर उमर अब्दुल्ला का तंज इसी फर्क की ओर इशारा करता है। वहीं, यात्रियों की परेशानी और लंबे इंतजार को भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आखिरकार, इस पूरे विवाद की तस्वीर तब ही पूरी बनती है जब टूरिस्ट की परेशानी, सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार तरीके से विरोध—तीनों पहलुओं को साथ देखा जाए। 

एक बार मंगेतर से मिला दो, सगाई से इनकार पर दुखी युवती ने की आत्‍महत्‍या, मंगेतर ने लगाए थे चैटिंग के आरोप

एक बार मंगेतर से मिला दो, सगाई से इनकार पर दुखी युवती ने की आत्‍महत्‍या, मंगेतर ने लगाए थे चैटिंग के आरोप

इंदौर में मंगेतर द्वारा शादी से इनकार करने के बाद एक 19 साल की युवती मारिया ने जहर खाकर आत्‍महत्‍या कर ली। वो लगातार अपने मंगेतर सोहेल से मिलने की गुहार लगा रही थी। लेकिन मंगेतर और घरवालों ने उसे मिलने से साफ मना कर दिया। बताया जा रहा है कि मारिया सगाई टूट जाने की वजह से दुखी और परेशान थी।

घटना विजय नगर की है। स्वर्ण बाग कॉलोनी निवासी 19 साल की मारिया ने गुरुवार देर रात संदिग्ध परिस्थिति में जहर खा लिया। तबीयत बिगड़ने पर जब छोटी बहन ने उससे कारण पूछा, तो उसने जहर खाने की बात स्वीकार की। इसके पश्चात परिजन तुरंत उसे इलाज के लिए एमवाय अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया है और पुलिस ने मामले की जांच प्रारंभ कर दी है।

जून 2025 में हुई थी सगाई : मारिया के पिता उमर शेख के अनुसार उनकी बेटी मारिया की सगाई 15 जून 2025 को आजाद नगर निवासी सोहेल उर्फ साहिल के साथ हुई थी। दोनों की सगाई को लगभग 1.5 साल बीत चुका था और इसी साल दोनों की शादी होना थी। किंतु करीब एक हफ्ते पहले सोहेल ने फोन पर मारिया को बताया कि वह अब उससे शादी नहीं करना चाहता और सगाई तोड़ रहा है। सोहेल ने अपने परिवार को भी इस निर्णय के लिए सहमत कर लिया था। जब मारिया के परिजनों ने सोहेल के परिवार से संपर्क किया, तो उन्होंने यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि लड़का जब शादी नहीं करना चाहता तो वे इसमें कुछ नहीं कर सकते।

एक बार मंगेतर से बात करा दो प्‍लीज : बताया जा रहा है कि सगाई टूटने की खबर के बाद से मारिया अत्यधिक मानसिक तनाव में रहने लगी थी। वह पिछले 8 दिनों से सोहेल से केवल 1 बार आमने सामने मिलकर बात करना चाहती थी। परिजनों का कहना है कि सोहेल ने उससे मिलने या बातचीत करने से साफ मना कर दिया था। सोहेल द्वारा आजाद नगर इलाके में जूस की दुकान का संचालन किया जाता है। इसके बाद वो गहरे तनाव में चली गई। मारिया ने गुरुवार देर रात यह आत्मघाती कदम उठा लिया।

अन्य लड़के से चैटिंग का आरोप : परिजनों के मुताबिक सोहेल ने मारिया पर किसी अन्य युवक से मोबाइल पर बातचीत और चैटिंग करने का आरोप लगाया था। उसका यह भी कहना था कि मारिया उसे टाइम नहीं देती है। हालांकि मारिया के पिता उसे लगातार समझा रहे थे और दोनों पक्षों के बीच चल रहे इस विवाद को सुलझाने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन वो एक बार मंगेतर सोहेल से मिलना चाहती थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है और परिवार द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की गहराई से जांच की जा रही है।

गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, विदेश में पढ़ाई के लिए अब 10 लाख रुपये तक आय वालों को मिलेगा लोन

गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, विदेश में पढ़ाई के लिए अब 10 लाख रुपये तक आय वालों को मिलेगा लोन

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गुजरात सरकार ने अनारक्षित वर्ग के छात्रों को एक बड़ी राहत दी है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए विदेश अध्ययन ऋण योजना के तहत पारिवारिक वार्षिक आय सीमा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी है।

 

19 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक संकल्प के अनुसार, अब 10 लाख रुपये तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले छात्र इस योजना के तहत विदेश में पढ़ाई के लिए ऋण पाने के पात्र होंगे। पहले इस योजना का लाभ उठाने के लिए अधिकतम आय सीमा 6 लाख रुपये थी, जिसमें अब 4 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

 

पिछले संकल्प के अन्य सभी प्रावधान यथावत रहेंगे

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 'विदेश अध्ययन ऋण योजना' के तहत पहले जारी किए गए वर्तमान संकल्पों के अन्य सभी प्रावधान यथावत (जैसे थे वैसे ही) रहेंगे। यह फैसला वित्त विभाग और सरकार की 3 अगस्त 2026 की टिप्पणी से मिली मंजूरी के तहत जारी किया गया है।

उत्तराखंड का कमलेश्वर महादेव मंदिर, जानें इतिहास, मान्यता और पहुंचने का रास्ता

उत्तराखंड का कमलेश्वर महादेव मंदिर, जानें इतिहास, मान्यता और पहुंचने का रास्ता

kamleshwar mahadev mandir

पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर स्थित कमलेश्वर महादेव मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है। मान्यता है कि यहां भगवान राम ने 108 कमलों से शिव की पूजा की थी। उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री पुष्कर धामी ने भी श्रावण मास में पौड़ी गढ़वाल आने वाले श्रद्धालुओं से कमलेश्वर महादेव के दर्शन करने की अपील की है। जानें मंदिर का इतिहास, धार्मिक महत्व और पहुंचने का रास्ता। ALSO READ: दक्षेश्वर महादेव मंदिर: सावन में क्यों खास है कनखल का यह शिव धाम?

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि श्रीनगर, पौड़ी गढ़वाल में स्थित श्री कमलेश्वर महादेव मंदिर देवभूमि के प्राचीन एवं पौराणिक शिवालयों में से एक है। स्कंद पुराण में वर्णित यह पावन धाम भगवान शिव की आराधना और आस्था का प्रमुख केंद्र है। पवित्र श्रावण मास में यदि आप पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र के भ्रमण पर हैं, तो देवाधिदेव महादेव के इस दिव्य धाम के दर्शन अवश्य करें।

मंदिर का पुरातात्विक महत्व

यह एक पौराणिक मंदिर है, जिसका उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। यहां भू लिंग स्थापित है और गणेश-पार्वती की नवनिर्मित मूर्तियां हैं। नवंबर माह में बैकुंड चतुर्दशी के अवसर पर यहां मेला लगता है। इस दिन प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में निसंतान दंपति संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर यहां पहुंचते हैं। ये लोग जलते दीए को अपने हाथ में रखकर रात भर जाप और जागरण करते हैं। सुबह दीपक को अलकनंदा में प्रवाहित कर मंदिर में पूजा करते हैं। कहा जाता है कि उनकी मनोकामना पूरी भी होती है। ALSO READ: रुद्रनाथ मंदिर क्यों है खास? भगवान शिव की मुखाकृति के दर्शन और मंदिर से जुड़ी अद्भुत मान्यताएं

 

कैसे पड़ा कमलेश्वर महादेव नाम

मंदिर के बारे में मान्यता है कि रावण वध करने के बाद श्रीराम गुरु वशिष्ठ की आज्ञा अनुसार, भगवान शिव की उपासना करने के लिए कमलेश्वर मंदिर आए थे। इस स्थान पर आकर उन्होंने 108 कमलों से भगवान शिव की उपासना की थी। इसके बाद से यहां का नाम कमलेश्वर पड़ा।

 

ऐसे पहुंचें कमलेश्वर मंदिर

हवाई मार्ग: जौलीग्रांट हवाई अड्डा से कमलेश्वर मंदिर से 151 किमी दूर है। वहां से आप मंदिर के लिए टैक्सी या बस ले सकते हैं।

ट्रेन से: निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है, जो कमलेश्वर मंदिर से 140 किमी दूर है।

सड़क मार्ग से: श्रीनगर गढ़वाल उत्तराखंड के अन्य जिलों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश से आसानी से कमलेश्वर मंदिर के लिए टैक्सी बुक कर सकते हैं।

नॉर्ड स्ट्रीम धमाकों का एक और संदिग्ध गिरफ्तार

नॉर्ड स्ट्रीम धमाकों का एक और संदिग्ध गिरफ्तार

nord stream

ओंकार सिंह जनौटी

क्रोएशिया की पुलिस ने एक यूक्रेनी गोताखोर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी यूरोपीय अरेस्ट वॉरंट के आधार पर की गई है। शक है कि इस गोताखोर ने अरबों यूरो की नॉर्ड स्ट्रीम, पाइपलाइनों को उड़ाने में हिस्सा लिया। ALSO READ: रूस के लिए जासूसी के मामले में यूक्रेनी नागरिक को जर्मनी में 15 महीने की सजा

 

क्रोएशिया के पुला शहर के पास जमीन, समंदर को तीन तरफ से घेरकर, एक झील जैसा लुक देती है। झील के तट पर सुंदर बीच है और पानी में कुछ जगहों पर कम गहराई में डूबी चट्टानें। झील वहां एकदम से गहरी नहीं होती, बल्कि गहराव एक हल्की ढाल के साथ बढ़ता है। और यही खासियत, पुला को स्कूबा डाइविंग के लिए विख्यात बनाती है।

 

शहर में स्कूबा डाइविंग, यानी ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ गोताखोरी सिखाने वाले कई स्कूल हैं। गोताखोरी सीखने वाले शुरुआती चरणों से 3 से 3 मीटर की गहराई तक जाते हैं। अनुभव, साहस और कौशल बढ़ने पर ये गहराई बढ़ती चली जाती है। गर्मियों में दुनिया भर के कई पेशेवर गोताखोर, नए लोगों को गोताखोरी सिखाने पुला आते हैं। क्रोएशिया की पुलिस ने यूक्रेन के एक निपुण तैराक को इसी शहर में गिरफ्तार किया है।

 

धमाके में यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारियां

ये जानकारी जर्मनी के संघीय अभियोजन विभाग ने दी है। निजता के अधिकार के कारण, संदिग्ध की पहचान छुपाते हुए जर्मन अधिकारियों ने उसका नाम व्लादिमीर जेड बताया है। जर्मन अभियोजन विभाग के मुताबिक, “व्लादिमीर जेड एक प्रशिक्षित स्कूबा गोताखोर है, जो बोर्नहोम द्वीप (डेनमार्क) के पास नॉर्ड स्ट्रीम 1 और नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइनों में विस्फोटक लगाने वाले ग्रुप का एक हिस्सा था।”

 

26 सितंबर 2022 को बाल्टिक सागर की गहराई से गुजरने वाली इन पाइपलाइनों में कई धमाके हुए। इन पाइपलाइनों के जरिए रूसी गैस, जर्मनी तक आती थी। असल में फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमला करने के बाद, यूरोपीय देशों ने रूसी तेल और गैस पर अपनी निर्भरता घटाते हुए उसे खत्म करने की पहल शुरू कर दी। उसी दौरान नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइनों का बार बार जिक्र हो रहा था।

 

जर्मन अभियोजन अधिकारियों का कहना है कि, पाइपलाइनों को ध्वस्त करने की योजना, गैस पाइपलाइन को हमेशा के लिए बर्बाद करने के इरादे से बनाई गई। इसका मकसद था कि रूस किसी भी तरह से यूरोप तक गैस ना पहुंचा सके। लक्ष्य था कि, ऐसा होने पर मॉस्को को गैस के बदले मिलने वाली रकम में गिरावट आएगी और वह अपनी सैन्य गतिविधियों पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं कर सकेगा। ALSO READ: तारिक रहमान के गले की फांस बनता शेख हसीना का मुद्दा

 

संदिग्धों पर कैसे आरोप लगा रहा है जर्मनी

जर्मन अधिकारी कहते हैं कि व्लादिमीर जेड “बहुत ही पुख्ता तौर पर धमाके करने, संविधान विरोधी बाधा डालने और इमारतों व ढांचों को नुकसान पहुंचाने का संदिग्ध है।” जर्मन अभियोजन विभाग के बयान में कहा गया है कि अब व्लादिमीर जेड को क्रोएशिया से जर्मनी लाने की तैयारी की जानी चाहिए।

 

जुलाई 2026 में भी जर्मन के संघीय अभियोजन विभाग ने नॉर्ड स्ट्रीम पाइप लाइनों से जुड़े धमाकों के मामले में एक पूर्व यूक्रेनी सैन्य अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दायर किया। सेरही के। के खिलाफ विस्फोट करने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सार्वजनिक सेवाओं में बाधा डालने और नागरिक ढांचे पर हमला करने जैसे युद्ध अपराध के आरोप लगाए गए हैं।

 

दरसल, जर्मन अधिकारियों को धमाकों के कुछ समय बाद ही शक हो गया कि विस्फोट, पेशेवर गोताखोरों और सैन्य कौशल रखने वाले लोगों ने किए गए हैं। पाइपलाइनों में धमाके 70 से 80 मीटर की गहराई में किए गए। इतनी गहराई पर पानी का दबाव काफी ज्यादा होता है। इतनी ज्यादा दबाव में वहां जाकर संवेदनशील जगहों पर विस्फोटक लगाने के लिए खास उपकरणों और गैस मिश्रणों की जरूरत पड़ती है। फॉरेंसिक जांच में यह भी पता चला कि धमाके के लिए बेहद ताकतवर व सैन्य ग्रेड विस्फोटक इस्तेमाल किए गए।

 

यूक्रेन की सरकार अब तक इन धमाकों में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इंकार करती आई है। ALSO READ: स्पेन के सेउता पहुंचना चाहते थे प्रवासी, मोरक्को ने रोका

 

क्या थीं नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइनें

रूस से जर्मनी तक सीधे गैस पहुंचाने वाले नॉर्ड स्ट्रीम सिस्टम में दो पाइपलाइन थीं। 1220 से 1230 किलोमीटर लंबी इन पाइपलाइनों का निर्माण रूस की सरकारी ऊर्जा कंपनी गाजप्रोम ने किया था। नॉर्ड स्ट्रीम 1 का निर्माण अप्रैल 2010 में शुरू हुआ और नवंबर 2011 में पाइपलाइन से गैस का फ्लो शुरू कर दिया गया।

 

नॉर्ड स्ट्रीम 2 भी सितंबर 2021 में बनकर तैयार हो गई, लेकिन इससे गैस सप्लाई कभी नहीं हुई। असल में अमेरिका और बाल्टिक देशों समेत जर्मनी के कई सहयोगी इस पाइपलाइन से खुश नहीं थे। भारी तनाव के बीच जर्मनी ने आपूर्ति प्रक्रिया को दी गई अनुमति रद्द कर दी। कुछ ही दिनों बाद फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया। यूक्रेन युद्ध के कारण रूसी गैस पर यूरोप की अति निर्भरता, एक बड़ा राजनीतिक, रणनैतिक और कूटनीतिक मुद्दा बन गई।

 

सितंबर 2022 में हुए धमाकों से पहले नॉर्ड स्ट्रीम 1 से यूरोप को 450 अरब घन मीटर रूसी गैस मिली थी। इस गैस का सबसे बड़ा उपभोक्ता जर्मनी था। जर्मनी पहुंचने के बाद यह गैस नीदरलैंड्स, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, चेक गणराज्य, ऑस्ट्रिया और स्लोवाकिया को भी सप्लाई की जाती थी।

 

USCIRF ने RSS पर प्रतिबंध की मांग की, मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे से पहले बढ़ा विवाद

USCIRF ने RSS पर प्रतिबंध की मांग की, मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे से पहले बढ़ा विवाद

Mohan Bhagwat

अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने राष्‍ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने की अपील की है। महमूद का यह बयान RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से कुछ दिन पहले आया है।

 

आयोग के चेयरमैन आसिफ महमूद ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं और इसके सहयोगी संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब RSS नेता मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा की योजना है।

USCIRF कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए।

 

क्या है मोहन भागवत का कार्यक्रम?

भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे। वे 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) के ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम में शामिल होंगे।

 

100 से ज्यादा संगठनों ने किया भागवत के कनाडा दौरे का समर्थन

कनाडा के 100 से ज्यादा संगठनों ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे का समर्थन किया है। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और मंत्रियों को पत्र लिखकर भागवत को रोकने की मांगों को खारिज करने की अपील की। इन संगठनों ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पुख्ता और स्वतंत्र सबूत होने चाहिए और कानून के मुताबिक पूरी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।