‘जानते नहीं मेरा बाप कौन है’ का नया वर्जन बना ‘हम Gen Z हैं’? उमर अब्दुल्ला ने द्रास चेकपोस्ट Viral Video पर कसा तंज [VIDEO]

‘जानते नहीं मेरा बाप कौन है’ का नया वर्जन बना ‘हम Gen Z हैं’? उमर अब्दुल्ला ने द्रास चेकपोस्ट Viral Video पर कसा तंज [VIDEO]

कारगिल के द्रास इलाके में एक चेकपोस्ट पर टूरिस्ट और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में एक महिला टूरिस्ट कई घंटे तक रोके जाने से नाराज नजर आती है और इसी दौरान वह बार-बार कहती सुनाई देती है—“We are Gen Z, we will not tolerate this.” वीडियो सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस अंदाज पर तंज कसते हुए कहा कि आजकल “हम Gen Z हैं” कहना कहीं-कहीं उसी पुराने रसूख वाले अंदाज जैसा लगता है, जब लोग अपनी पहुंच दिखाने के लिए कहते थे—“जानते नहीं हो मेरा बाप कौन है।” इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है कि क्या Gen Z होना अपनी बात रखने की ताकत है या फिर इसे हर छोटी-बड़ी नाराजगी में ‘थ्रेट कार्ड’ की तरह इस्तेमाल करना ठीक है। 

कारगिल चेकपोस्ट पर आखिर हुआ क्या?

 

वायरल वीडियो द्रास के मिनिमार्ग चेक पोस्ट के पास का बताया जा रहा है, जहां एक टूरिस्ट ग्रुप को कुछ समय के लिए रोका गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मिनिमार्ग-ज़ोजिला-सोनमर्ग रोड पर आवाजाही पर सुरक्षा कारणों से रोक लगाई गई थी। लद्दाख पुलिस के अनुसार वीडियो जुलाई में कारगिल विजय दिवस के आसपास, 26 जुलाई के आस पास का है। इंतजार लंबा होने के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और महिला टूरिस्ट सुरक्षाकर्मियों से बहस करती नजर आई। महिला ने सवाल उठाया कि जब आम यात्रियों को आगे जाने से रोका जा रहा है तो फिर किसी मंत्री को वहां से जाने की अनुमति कैसे मिली। इसके बाद उसने वहां मौजूद दूसरे टूरिस्टों से भी विरोध में साथ आने की अपील की। 

 

वीडियो में महिला यह भी कहती सुनाई देती है कि उन्हें करीब पांच घंटे से रोका गया है और वह लोग घूमने के लिए पैसे देकर आए हैं, ऐसी स्थिति को सहने के लिए नहीं। उसने यह आरोप भी लगाया कि जिस तरह का व्यवहार कश्मीरियों के साथ किया जाता है, अब बाहर से आए पर्यटकों के साथ भी वैसा ही किया जा रहा है। वीडियो में मौजूद कुछ दूसरे टूरिस्ट महिला का समर्थन करते हुए नजर आते हैं और वह उन्हें अपनी गाड़ियों में बैठकर आगे बढ़ने के लिए कहती है। हालांकि, इस दौरान सुरक्षा प्रक्रिया को लेकर बहस और तनाव बढ़ता दिखाई देता है। 

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‘हम Gen Z हैं’… महिला ने क्या कहा?

 

वीडियो में महिला का सबसे ज्यादा चर्चा में आया बयान है—“We are Gen Z. We won’t tolerate this nonsense.” इसके बाद वह दूसरे टूरिस्टों से पूछती है कि क्या वे भी उसके साथ खड़े होंगे और फिर सभी को गाड़ियों में बैठकर आगे बढ़ने के लिए कहती है। महिला ने लंबे इंतजार और रास्ता बंद होने को लेकर नाराजगी जाहिर की और सवाल किया कि अगर पर्यटक पैसे खर्च करके घूमने आते हैं, तो क्या उन्हें इस तरह घंटों इंतजार करना चाहिए। 

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को केवल महिला की नाराजगी के नजरिए से देखना भी अधूरा होगा। कारगिल जैसे संवेदनशील इलाके में सड़क और आवाजाही से जुड़े फैसले सुरक्षा कारणों से भी लिए जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस समय सड़क पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था। यानी टूरिस्टों की परेशानी अपनी जगह थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन की परिस्थितियां भी इस पूरे मामले का हिस्सा थीं। 

 

 उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?

 

वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर Gen Z वाली लाइन को लेकर तीखा लेकिन व्यंग्यात्मक कमेंट किया। उन्होंने कहा कि “हम Gen Z हैं” अब “जानते नहीं हो मेरा बाप कौन है” का नया वर्जन बनता जा रहा है। उनका कहना था कि Gen Z को लेकर बनी सकारात्मक छवि को नुकसान पहुंचाने का सबसे आसान तरीका यही है कि अपनी पहचान को हर छोटी-सी बात पर धमकी या दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाए। 

 

उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी का फोकस केवल इस महिला पर नहीं, बल्कि उस रवैये पर था जिसमें कोई व्यक्ति अपनी पहचान, पीढ़ी या किसी विशेष वर्ग से जुड़े होने को अपनी बात मनवाने के हथियार की तरह इस्तेमाल करने लगे। उनके मुताबिक Gen Z को लेकर लोगों के बीच बनी goodwill तब कमजोर हो सकती है, जब “हम Gen Z हैं” जैसी लाइन को हर perceived insult या disagreement पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाए। 

 ऐसी Travel Restrictions कारगिल में नई बात नहीं

 

कारगिल और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सड़क बंद होना या कुछ समय के लिए आवाजाही सीमित किया जाना असामान्य नहीं है। यहां **मौसम, सुरक्षा जरूरतों और सड़क की स्थिति* के कारण कई बार यात्रियों को अचानक रोकना पड़ सकता है और कभी-कभी यह इंतजार लंबा भी हो जाता है। इसलिए किसी route पर restriction लगना अपने आप में कोई नई बात नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वायरल वीडियो वाले मामले में भी सड़क को सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से बंद किया गया था। 

 

इसी वजह से यह पूरा मामला अब सिर्फ एक वायरल वीडियो या “हम Gen Z हैं” वाली लाइन तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ लंबे समय तक रोके जाने से परेशान यात्रियों का गुस्सा है, तो दूसरी तरफ संवेदनशील border region में security protocols और restrictions की जरूरत भी है। इस बीच भारतीय सेना ने भी स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा चेकपोस्ट Army का नहीं, बल्कि पुलिस का चेकपोस्ट था। सेना की ओर से कहा गया कि घटना का उसके personnel से संबंध नहीं था। 

 

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद बहस का सबसे बड़ा मुद्दा यही बन गया है कि अपनी बात रखने और किसी व्यवस्था पर सवाल उठाने का अधिकार हर किसी के पास है, लेकिन पहचान को अपनी बात मनवाने के दबाव के तौर पर इस्तेमाल करना अलग बात है। Gen Z को लेकर उमर अब्दुल्ला का तंज इसी फर्क की ओर इशारा करता है। वहीं, यात्रियों की परेशानी और लंबे इंतजार को भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आखिरकार, इस पूरे विवाद की तस्वीर तब ही पूरी बनती है जब टूरिस्ट की परेशानी, सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार तरीके से विरोध—तीनों पहलुओं को साथ देखा जाए।