बागेश्वर का बागनाथ मंदिर: उत्तर भारत का अनोखा दक्षिणमुखी शिव धाम, सावन में दर्शन का विशेष महत्व

बागेश्वर का बागनाथ मंदिर: उत्तर भारत का अनोखा दक्षिणमुखी शिव धाम, सावन में दर्शन का विशेष महत्व

bagnath mandir bageshwar

उत्तराखंड के बागेश्वर में सरयू और गोमती नदियों के संगम के निकट बागनाथ मंदिर उत्तर भारत का एकमात्र ऐसा प्राचीन शिव मंदिर है जिसका मुख दक्षिण दिशा की ओर है। बागेश्वर जिले का नाम भी इसी मंदिर के नाम पर रखा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने सावन मास में बागेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं से इस दिव्य और प्राचीन धाम के दर्शन करने की अपील की। ALSO READ: उत्तराखंड का कमलेश्वर महादेव मंदिर, जानें इतिहास, मान्यता और पहुंचने का रास्ता

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, बागेश्वर में सरयू और गोमती नदियों के पावन संगम के निकट स्थित श्री बागनाथ मंदिर भगवान शिव की आराधना को समर्पित एक प्राचीन एवं दिव्य धाम है। पवित्र सावन मास में यहां दर्शन एवं पूजन का विशेष महत्व है। बागेश्वर जनपद आगमन पर इस पवित्र मंदिर के दर्शन अवश्य करें।

 

बागनाथ में मंदिरों का एक समूह है प्रमुख मंदिरों में भैरव मंदिर, दत्तात्रेय महाराज, गंगा माई मंदिर, हनुमान मंदिर, दुर्गा मंदिर, कालिका मंदिर, थिंगल भिरव मंदिर, पंचनाम जुनाखरा और वनेश्वर मंदिर हैं। ALSO READ: दक्षेश्वर महादेव मंदिर: सावन में क्यों खास है कनखल का यह शिव धाम?

 

बाघ के रूप में आए थे शिव जी!

हिन्दु पौराणिक कथा के अनुसार, ऋषि मार्कडेय यहां शिव जी पूजा किया करते थे। इससे प्रसन्न होकर शिव जी एक बाघ के रूप में उन्हें आशीर्वाद देने आये थे। इसलिए इस स्थान को व्याघ्रेश्वर नाम से जाना गया। कालातंर में यही नाम बागेश्वर हो गया। भगवान शिव के व्याघ्रेश्वर रूप का प्रतीक देवालय यहां स्थापित है। कहा जाता है कि यह मंदिर 7वीं शताब्दी और कत्यूरी शासनकाल से जुड़ा है। हालांकि नागर शैली में इस मंदिर का निर्माण चंद शासक लक्ष्मी चंद ने 1602 ईस्वी में कराया था। ALSO READ: रुद्रनाथ मंदिर क्यों है खास? भगवान शिव की मुखाकृति के दर्शन और मंदिर से जुड़ी अद्भुत मान्यताएं

 

कैसे पहुंचे बागनाथ मंदिर

देहरादून से बागेश्वर की दूरी लगभग 470 किमी है। देश की राजधानी दिल्ली से यह 502 किमी दूर है। नजदीकी रेलवे स्टेशन हल्द्वानी, काठगोदाम, रामनगर और टनकपुर हैं। इन जगहों से बस, टैक्सी से यात्रा कर बागेश्वर पहुंचा जा सकता है।

वंदे मातरम पर शर्मिला टैगोर की टिप्पणी से भड़कीं कंगना रनौत, बोलीं- ‘कला और कविता को लेकर सोच इतनी छोटी कैसे?

वंदे मातरम पर शर्मिला टैगोर की टिप्पणी से भड़कीं कंगना रनौत, बोलीं- ‘कला और कविता को लेकर सोच इतनी छोटी कैसे?

kangana ranaut attacks sharmila tagore on vande matram

एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर की वंदे मातरम पर टिप्पणी पर भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने कड़ी नाराजगी जताई है। शर्मिला टैगोर ने कहा था कि वंदे मातरम के कुछ हिस्से एक ईश्वर को मानने वाले लोगों की आस्था से मेल नहीं खा सकते। उन्होंने कहा कि गीत में कई देवताओं का जिक्र है। उन्होंने कहा कि हैरान हूं कि आपकी सोच इतनी छोटी है। ALSO READ: वंदे मातरम् पर कांग्रेस का बड़ा फैसला, 1937 के प्रस्ताव पर कायम, पार्टी कार्यक्रमों में गाए जाएंगे सिर्फ पहले दो अंतरे

 

कंगना ने शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए लिखा, 'मैं खुश हूं कि शर्मिला जी ने वंदे मातरम को लेकर अपनी आपत्ति के बारे में बात की। लेकिन एक कलाकार के तौर पर मैं हैरान हूं कि कला और कविता को लेकर उनकी सोच इतनी छोटी और बनावटी कैसे हो सकती है।'

 

भाजपा सांसद ने आगे लिखा कि किसी भी कविता या गीत में शब्द रूपक होते हैं। कवि या कलाकार मनचाहा असर पैदा करने के लिए हर तरह की कल्पना करता है और असंभव लगने वाली समानताएं खींचता है। विवेकानंद ने तौर पर कहा था कि मुझे ऐसे युवा चाहिए, जो लोहे जैसे बने हों, जिनकी हड्डियां फौलाद की हों और जिनकी नसों में बिजली दौड़ती हो। विवेकानंद मौसम का अनुमान नहीं बता रहे थे। वह केवल शक्ति को जगाने की मांग कर रहे थे। कृपया हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए।

 

आखिर में कंगना ने लिखा कि भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ताकत को शक्ति कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपनों की तरह अपनाएं। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और उस जोरदार गले मिलने से भी मुझे परेशानी नहीं है, जैसा आप हमेशा देती हैं। ALSO READ: मुकेश खन्ना ने 'जन गण मन' को हटाने की उठाई मांग, 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान बनाने की कही बात

 

क्या था शर्मिला का बयान?

शर्मिला टैगोर ने कहा कि मेरी राय यह है कि बहुत से धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं, कई ईश्वरों में नहीं। वंदे मातरम में एक अंतरा है, जिसमें कई देवताओं का जिक्र है।
 

उन्होंने आगे कहा कि जो लोग एक धर्म में विश्वास करते हैं, उनके लिए ‘वंदे काली, वंदे दुर्गा’ कहना मुश्किल है। इसलिए, अगर हम भारत के सभी धार्मिक लोगों को साथ लेकर चलें, तो इसके पहले दो अंतरे बहुत अच्छे हैं।

‘बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर’, नए संसद भवन पर शशि थरूर का बड़ा बयान; सेंट्रल हॉल पर भी जताई चिंता

‘बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर’, नए संसद भवन पर शशि थरूर का बड़ा बयान; सेंट्रल हॉल पर भी जताई चिंता

shashi tharoor

Shashi Tharoor New Parliament Building: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने नए संसद भवन की डिजाइन और वहां के माहौल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नए संसद भवन को 'बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर' बताते हुए कहा कि इसमें पुराने संसद भवन जैसा अपनापन और सहज बातचीत का माहौल नहीं है। ALSO READ: Sugar Price : चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? 15 दिन में 20 रुपए महंगी हुई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जानें आपके लिए क्या बदलेगा

 

थरूर ने पत्रकार और लेखिका शोभना के. नायर की नई किताब 'हाउसिंग द रिपब्लिक: ए बायोग्राफी ऑफ द इंडियन पार्लियामेंट' के विमोचन के दौरान कहा कि ये दूरियां हमारी राजनीति के ध्रुवीकरण को दर्शाती हैं।

 

दूर-दूर बैठने की व्यवस्था पर सवाल

थरूर ने कहा कि नए संसद भवन की छत काफी ऊंची है। इससे सदस्यों के बीच सहज बातचीत और एक-दूसरे से जुड़ने की संभावना कम होती है। पुराने संसद भवन के कक्षों में एक तरह का अपनापन था, जो सांसदों के बीच बातचीत और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता था। उन्होंने नए भवन में सांसदों के बैठने की पंखे जैसी व्यवस्था का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, यहां सदस्यों के बीच एक तरह की दूरी दिखाई देती है। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

 

सेंट्रल हॉल पर क्या बोले थरूर?

चार बार के तिरुवनंतपुरम सांसद थरूर ने नए संसद भवन में सेंट्रल हॉल नहीं होने को भी महत्वपूर्ण कमी बताया। उन्होंने कहा कि पुराने संसद भवन का सेंट्रल हॉल सांसदों के बीच अनौपचारिक बातचीत का अहम स्थान था। उनके मुताबिक, वहां मौजूदा और पूर्व सांसदों के साथ-साथ पर्यवेक्षकों और मीडिया के लोगों के बीच भी अनौपचारिक बातचीत होती थी। इससे अलग-अलग दलों के नेताओं के बीच संबंध और आपसी संवाद मजबूत होता था। थरूर ने कहा कि नए भवन में ऐसे अनौपचारिक संवाद की जगह कम हो गई है।

 

सांसदों की संख्या बढ़ाने पर क्या कहा?

थरूर ने प्रस्तावित लोकसभा विस्तार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ाकर 850 की जाती है तो भले ही नए भवन में इसके लिए जगह हो, लेकिन इससे सार्थक संसदीय बहस और चर्चा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में सांसद होने पर सदस्य एक-दूसरे के लिए अजनबी जैसे हो सकते हैं। उन्होंने चीन की संसद जैसी स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर सांसद केवल नेता की घोषणाओं पर एक साथ मेज थपथपाने तक सीमित रह जाएं, तो यह संसद के वास्तविक उद्देश्य के अनुरूप नहीं होगा।

 

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में नए संसद भवन का उद्घाटन किया था। यह भवन सरकार के महत्वाकांक्षी ‘सेंट्रल विस्टा कॉम्प्लेक्स’ का हिस्सा है। इसकी परिकल्पना औपनिवेशिक दौर की सरकारी इमारतों की जगह लेने के लिए की गई।

इसराइली मंत्री के “टारगेट किलिंग” वाले बयान पर उबाल

इसराइली मंत्री के "टारगेट किलिंग" वाले बयान पर उबाल

itamar ben gvir

ओंकार सिंह जनौटी

गाजा पट्टी में फलीस्तीनियों की “लक्षित हत्याएं करने” की बात कहने वाले इसराइली मंत्री बेन ग्विर की जर्मनी और फ्रांस ने कड़ी निंदा की है। गाजा पर इसराइली सरकार का रुख, अब सहयोगियों के धीरज की परीक्षा ले रहा है। ALSO READ: कीव पर रूस के मिसाइल हमले में 12 लोगों की मौत

 

इसराइल के धुर दक्षिणपंथी नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्विर ने कहा कि इसराइल को हर रात गाजा में “30 या 40” लोगों को मारना चाहिए। हमास की कैद से छूटे एक पूर्व इसराइली बंधक रोम ब्रास्लाव्स्की के साथ पॉडकास्ट के दौरान ग्विर ने कहा, “मुझे लगता है कि गाजा में हर रात निशाना बनाकर सफाई की जानी चाहिए। 30 या 40 को खत्म कीजिए।”

 

इस बयान के सार्वजनिक होते ही यूरोपीय राजनीति में तूफान सा आ गया। जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने बुधवार को ग्विर के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया। जर्मन सरकार के प्रवक्ता सेबास्टियान हिले के जरिए दिए गए बयान के मुताबिक, जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स “बहुत ही कड़े शब्दों में मंत्री बेन ग्विर की इस अमानवीय अपील की निंदा करते हैं, ये अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती है।”

 

फ्रांस के विदेश मंत्री जॅां-नोएल बारो ने भी ग्विर के बयान को “असहनीय और अमानवीय” करार दिया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेष ने भी इसे “भयानक। घृणित। अमानवीय और खतरनाक” बताया। जर्मनी की केंद्रीय यहूदी काउंसिल के प्रेसिडेंट योसेफ शुस्टर ने बेन ग्विर के बयान को “बेहद शर्मनाक और गैरजिम्मेदाराना” बताया। मंगलवार को शुस्टर ने कहा कि बेन ग्विर का व्यवहार, दिखाता है कि धुर दक्षिणपंथी ताकतें किस तरह का खतरा पेश करती हैं।

 

मजबूत होती बैन ग्विर पर यूरोपीय प्रतिबंधों की मांग

कई यूरोपीय देशों में अब फिर बेन ग्विर पर ईयूव्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग जोर पकड़ रही है। इससे पहले मई 2026 में भी ग्विर ने अपना एक वीडियो पब्लिश किया था। उस वीडियो में वह, गाजा के लिए राहत सामग्री ले जा रहे एक्टिविस्टों की हिरासत का मजाक उड़ा रहे थे। इन एक्टिविस्टों को इसराइली सेना ने हिरासत में रखा था। इस वाकये के बाद पेरिस ने बेन ग्विर के फ्रांस आने पर प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही फ्रांस ने यूरोपीय संघ के स्तर पर बैन लगाने की मांग भी की।

 

यूरोपीय संसद में ऐसे प्रतिबंध संबंधी प्रस्ताव को पास करने के लिए एकमत या निर्विरोध की जरूरत पड़ती है। लेकिन तब जर्मनी ने इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया। प्रस्तावों में बेन ग्विर की संपत्ति फ्रीज करना या उन पर ट्रेवल बैन लगाना शामिल था। जून में जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि इसराइल या उसकी सरकार के किसी मंत्री पर, अगले दंडात्मक प्रतिबंध लगाने का कोई आधार नहीं है। उसी दौरान वाडेफुल ने यह भी कहा कि जर्मन सरकार मानती है कि उसका संदेश इसराइल समझ चुका है।

 

लेकिन ताजा पॉडकास्ट के बाद अब खुद जर्मन सरकार दबाव में है। मंगलवार को जर्मनी के उप चांसलर लार्स क्लिंगबाइल ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा कि बेन ग्विर की टिप्पणियों के बाद “नतीजे जरूर निकलने चाहिए।” क्लिंगबाइल ने बताया कि इस मुद्दे पर यूरोपीय स्तर पर बातचीत जारी है। क्लिंगबाइल जर्मनी की गठबंधन सरकार में शामिल पार्टी एसपीडी के नेता हैं। इसराइल के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने में अक्सर, चांसलर मैर्त्स की पार्टी सीडीयू और उसकी सिस्टर पार्टी सीएसयू हिचकते हैं। ALSO READ: नॉर्ड स्ट्रीम धमाकों का एक और संदिग्ध गिरफ्तार

 

पश्चिमी तट पर इसराइली कब्जा

ग्विर के ताजा बयान के बाद जर्मनी ने पश्चिमी तट पर इसराइली बस्ती के विस्तार की भी आलोचना की। जर्मन सरकार के प्रवक्ता हिले ने कहा, “हमारा संदेश साफ है: पश्चिमी तट को अलग करने की दिशा में कोई और कदम नहीं उठना चाहिए।” इसराइल 1967 से पश्चिमी तट पर जमा है। एक के बाद एक आई इसराइली सरकारों ने पश्चिमी तट पर अपनी बस्तियों का विस्तार किया है।

 

प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू की गठबंधन सरकार के दौरान, हाल में इसराइली बस्तियों का विस्तार बहुत तेज हुआ है। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, पूर्वी येरूशलम को छोड़ भी दें तो पांच लाख से ज्यादा इसराइली अब पश्चिमी तट पर बस चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह गैरकानूनी है। पश्चिमी तट पर फलीस्तीनियों की आबादी करीब 30 लाख है।

 

इसराइल की ये बस्तियां, हाल के महीनों में फलीस्तीनी बाशिंदों को कई तरीकों से परेशान व डरा रही हैं। कई बार तो ऐसे हथकंडों का उद्देश्य फलीस्तीनियों की संपत्ति पर कब्जा करना होता है। फ्रांसीसी विदेश मंत्री बारो ने पश्चिमी तट पर बसाई गई इसराइली बस्तियों पर प्रतिबंध लगाने से इनकार नहीं किया है। बारो ने कहा, “हमने ऐसे बसने वालों पर 28 मई को तीसरी बार यूरोपीय प्रतिबंध लगाए हैं।”

 

7 अक्टूबर 2023 को हमास के आतंकवादियों ने इसराइल में घुसकर बड़े हमले किए। इन हमलों के दौरान हमास ने 1,200 से ज्यादा इसराइलियों की हत्या की और 200 से ज्यादा को बंधक बनाया। इन हमलों के बाद इसराइल ने आठ अक्टूबर को गाजा में घुसकर सैन्य अभियान शुरू कर दिया। ब्राउन यूनिवर्सिटी के डाटा के मुताबिक तब से तीन अक्टूबर 2025 तक गाजा में 67,075 लोग मारे जा चुके हैं। करीब 1।70 लाख लोग घायल हुए हैं। ये वह मामले में हैं जिनकी पुष्टि हुई है।

इसराइली मंत्री के “टारगेट किलिंग” वाले बयान पर उबाल

इसराइली मंत्री के "टारगेट किलिंग" वाले बयान पर उबाल

itamar ben gvir

ओंकार सिंह जनौटी

गाजा पट्टी में फलीस्तीनियों की “लक्षित हत्याएं करने” की बात कहने वाले इसराइली मंत्री बेन ग्विर की जर्मनी और फ्रांस ने कड़ी निंदा की है। गाजा पर इसराइली सरकार का रुख, अब सहयोगियों के धीरज की परीक्षा ले रहा है। ALSO READ: कीव पर रूस के मिसाइल हमले में 12 लोगों की मौत

 

इसराइल के धुर दक्षिणपंथी नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्विर ने कहा कि इसराइल को हर रात गाजा में “30 या 40” लोगों को मारना चाहिए। हमास की कैद से छूटे एक पूर्व इसराइली बंधक रोम ब्रास्लाव्स्की के साथ पॉडकास्ट के दौरान ग्विर ने कहा, “मुझे लगता है कि गाजा में हर रात निशाना बनाकर सफाई की जानी चाहिए। 30 या 40 को खत्म कीजिए।”

 

इस बयान के सार्वजनिक होते ही यूरोपीय राजनीति में तूफान सा आ गया। जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने बुधवार को ग्विर के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया। जर्मन सरकार के प्रवक्ता सेबास्टियान हिले के जरिए दिए गए बयान के मुताबिक, जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स “बहुत ही कड़े शब्दों में मंत्री बेन ग्विर की इस अमानवीय अपील की निंदा करते हैं, ये अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती है।”

 

फ्रांस के विदेश मंत्री जॅां-नोएल बारो ने भी ग्विर के बयान को “असहनीय और अमानवीय” करार दिया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेष ने भी इसे “भयानक। घृणित। अमानवीय और खतरनाक” बताया। जर्मनी की केंद्रीय यहूदी काउंसिल के प्रेसिडेंट योसेफ शुस्टर ने बेन ग्विर के बयान को “बेहद शर्मनाक और गैरजिम्मेदाराना” बताया। मंगलवार को शुस्टर ने कहा कि बेन ग्विर का व्यवहार, दिखाता है कि धुर दक्षिणपंथी ताकतें किस तरह का खतरा पेश करती हैं।

 

मजबूत होती बैन ग्विर पर यूरोपीय प्रतिबंधों की मांग

कई यूरोपीय देशों में अब फिर बेन ग्विर पर ईयूव्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग जोर पकड़ रही है। इससे पहले मई 2026 में भी ग्विर ने अपना एक वीडियो पब्लिश किया था। उस वीडियो में वह, गाजा के लिए राहत सामग्री ले जा रहे एक्टिविस्टों की हिरासत का मजाक उड़ा रहे थे। इन एक्टिविस्टों को इसराइली सेना ने हिरासत में रखा था। इस वाकये के बाद पेरिस ने बेन ग्विर के फ्रांस आने पर प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही फ्रांस ने यूरोपीय संघ के स्तर पर बैन लगाने की मांग भी की।

 

यूरोपीय संसद में ऐसे प्रतिबंध संबंधी प्रस्ताव को पास करने के लिए एकमत या निर्विरोध की जरूरत पड़ती है। लेकिन तब जर्मनी ने इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया। प्रस्तावों में बेन ग्विर की संपत्ति फ्रीज करना या उन पर ट्रेवल बैन लगाना शामिल था। जून में जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि इसराइल या उसकी सरकार के किसी मंत्री पर, अगले दंडात्मक प्रतिबंध लगाने का कोई आधार नहीं है। उसी दौरान वाडेफुल ने यह भी कहा कि जर्मन सरकार मानती है कि उसका संदेश इसराइल समझ चुका है।

 

लेकिन ताजा पॉडकास्ट के बाद अब खुद जर्मन सरकार दबाव में है। मंगलवार को जर्मनी के उप चांसलर लार्स क्लिंगबाइल ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा कि बेन ग्विर की टिप्पणियों के बाद “नतीजे जरूर निकलने चाहिए।” क्लिंगबाइल ने बताया कि इस मुद्दे पर यूरोपीय स्तर पर बातचीत जारी है। क्लिंगबाइल जर्मनी की गठबंधन सरकार में शामिल पार्टी एसपीडी के नेता हैं। इसराइल के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने में अक्सर, चांसलर मैर्त्स की पार्टी सीडीयू और उसकी सिस्टर पार्टी सीएसयू हिचकते हैं। ALSO READ: नॉर्ड स्ट्रीम धमाकों का एक और संदिग्ध गिरफ्तार

 

पश्चिमी तट पर इसराइली कब्जा

ग्विर के ताजा बयान के बाद जर्मनी ने पश्चिमी तट पर इसराइली बस्ती के विस्तार की भी आलोचना की। जर्मन सरकार के प्रवक्ता हिले ने कहा, “हमारा संदेश साफ है: पश्चिमी तट को अलग करने की दिशा में कोई और कदम नहीं उठना चाहिए।” इसराइल 1967 से पश्चिमी तट पर जमा है। एक के बाद एक आई इसराइली सरकारों ने पश्चिमी तट पर अपनी बस्तियों का विस्तार किया है।

 

प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू की गठबंधन सरकार के दौरान, हाल में इसराइली बस्तियों का विस्तार बहुत तेज हुआ है। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, पूर्वी येरूशलम को छोड़ भी दें तो पांच लाख से ज्यादा इसराइली अब पश्चिमी तट पर बस चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह गैरकानूनी है। पश्चिमी तट पर फलीस्तीनियों की आबादी करीब 30 लाख है।

 

इसराइल की ये बस्तियां, हाल के महीनों में फलीस्तीनी बाशिंदों को कई तरीकों से परेशान व डरा रही हैं। कई बार तो ऐसे हथकंडों का उद्देश्य फलीस्तीनियों की संपत्ति पर कब्जा करना होता है। फ्रांसीसी विदेश मंत्री बारो ने पश्चिमी तट पर बसाई गई इसराइली बस्तियों पर प्रतिबंध लगाने से इनकार नहीं किया है। बारो ने कहा, “हमने ऐसे बसने वालों पर 28 मई को तीसरी बार यूरोपीय प्रतिबंध लगाए हैं।”

 

7 अक्टूबर 2023 को हमास के आतंकवादियों ने इसराइल में घुसकर बड़े हमले किए। इन हमलों के दौरान हमास ने 1,200 से ज्यादा इसराइलियों की हत्या की और 200 से ज्यादा को बंधक बनाया। इन हमलों के बाद इसराइल ने आठ अक्टूबर को गाजा में घुसकर सैन्य अभियान शुरू कर दिया। ब्राउन यूनिवर्सिटी के डाटा के मुताबिक तब से तीन अक्टूबर 2025 तक गाजा में 67,075 लोग मारे जा चुके हैं। करीब 1।70 लाख लोग घायल हुए हैं। ये वह मामले में हैं जिनकी पुष्टि हुई है।

राज्यपालों के कार्यकाल पर क्या कहता है भारत का संविधान

राज्यपालों के कार्यकाल पर क्या कहता है भारत का संविधान

UP Raj Bhavan

समीरात्मज मिश्र

7 साल से भी ज्यादा समय से आनंदीबेन पटेल उत्तर प्रदेश की राज्यपाल हैं। राज्य के लिए यह एक रिकॉर्ड है। लेकिन अब उनकी लंबी छुट्टी ने कई अटकलों को जन्म दे दिया है। राज्यपालों की नियुक्ति और पदत्याग पर क्या कहता है संविधान? ALSO READ: भारत में नए नए हाईवे और एक्सप्रेसवे आखिर टूट क्यों रहे हैं?

 

बीजेपी की पूर्व नेता और गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल, बीते साल बरसों से उत्तर प्रदेश की राज्यपाल हैं। लेकिन सात साल पूरे करने के कुछ ही हफ्तों बाद उनका 17 से 26 अगस्त तक गुजरात जाना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। क्या यह महज नियमित अवकाश है या राजभवन में किसी बदलाव की तैयारी चल रही है?

 

हालांकि राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव सुधीर बोबड़े का कहना है कि राज्यपाल अपने गृहराज्य गुजरात गई हैं और अवकाश के लिए उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अनुमति ली है।

 

उत्तर प्रदेश में आनंदीबेन पटेल का कार्यकाल राज्य के इतिहास में किसी राज्यपाल का सबसे लंबा कार्यकाल है। हालांकि मोदी सरकार के मौजूदा दौर में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का कार्यकाल आनंदीबेन पटेल से कुछ दिन ज्यादा लंबा है। देवव्रत ने 22 जुलाई 2019 को गुजरात के राज्यपाल का पद संभाला था, जबकिआनंदीबेन पटेल ने 29 जुलाई 2019 को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का पद संभाला था।

 

वैसे देश में किसी राज्यपाल का लगातार सबसे लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड इससे भी बड़ा है। मेघालय के पूर्व राज्यपाल एमएम जैकब करीब 12 साल तक इस पद पर रहे थे। ALSO READ: मानसून का बदलता पैटर्न बढ़ा रहा भारत का जलवायु संकट

 

क्या कहता है संविधान?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 156 में राज्यपाल के कार्यकाल का प्रावधान है। इसके मुताबिक राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत पद पर रहते हैं और उनका सामान्य कार्यकाल पांच साल का होता है। लेकिन इसी अनुच्छेद में कहा गया है कि पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद भी राज्यपाल तब तक पद पर बने रहेंगे, जब तक उनका उत्तराधिकारी पदभार नहीं संभाल लेता। यानी संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि पांच साल पूरे होने के बाद राज्यपाल को अलग से कार्यकाल विस्तार का आदेश देना जरूरी हो।

 

संवैधानिक मामलों के जानकार वीके त्रिपाठी कहते हैं, “इसका मतलब यह हुआ कि पांच साल का कार्यकाल एक संवैधानिक अवधि है, लेकिन पद पर बने रहने की अधिकतम सीमा पांच साल तय नहीं की गई है। यही वजह है कि भारत में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जहां राज्यपाल अपने निर्धारित पांच साल से अधिक समय तक पद पर रहे हैं। और इसे कहीं से भी असंवैधानिक या नियमों के प्रतिकूल नहीं कहा जा सकता।”

 

लेकिन सवाल यह है कि क्या संवैधानिक रूप से संभव होना राजनीतिक और संस्थागत रूप से भी उचित होने के सवाल का जवाब देता है। ALSO READ: क्या स्वस्थ रहने के लिए 8 घंटे सोना सच में जरूरी है?

 

पहले भी राज्यपालों का लंबा कार्यकाल रहा है

भारत में इससे पहले भी राज्यपाल पांच साल से अधिक समय तक पद पर रहे हैं। मेघालय के एमएम जैकब करीब 12 साल, पश्चिम बंगाल की पद्मजा नायडू करीब 11 साल और जम्मू-कश्मीर में एनएन वोहरा दस साल से ज्यादा समय तक राज्यपाल रहे।

 

संविधान के मुताबिक राज्यपाल, केंद्र और राज्यों के बीच एक संवेदनशील संवैधानिक कड़ी हैं। विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों में विधानसभा, विधेयकों और विश्वविद्यालयों से जुड़े मामलों को लेकर राज्यपाल और सरकार के बीच विवाद सामने आते रहे हैं। ALSO READ: क्या भारत-बांग्लादेश संबंधों में रोड़ा बन रही हैं शेख हसीना?

 

राजभवन और सरकार के बीच मतभेद

उत्तर प्रदेश में राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों एक ही राजनीतिक दल से संबंधित रहे हैं। इसके बावजूद राजभवन और राज्य सरकार के बीच मतभेद के मौके सामने आते रहे हैं। सबसे हालिया मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहक्षेत्र गोरखपुर का है। पिछले दिनों राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहनगर गोरखपुर में थीं और वहां दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की व्यवस्थाओं पर तीखी नाराजगी जताई और हॉस्टल, भोजन, मेस और कैंटीन की व्यवस्था में कमियों को लेकर अधिकारियों को सुधार के निर्देश दिए।

 

गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, इसलिए राज्यपाल की यह सार्वजनिक नाराजगी राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बनी। यही नहीं, पिछले साल योगी सरकार के कई मंत्रियों से राज्यपाल की अलग अलग बैठकें भी चर्चा में थीं, वो भी उस वक्त जब कई मंत्रियों की नाराजगी सामने आई थी।

 

यूपी के राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा रहती है कि चूंकि आनंदीबेन पटेल न सिर्फ गुजरात से आती हैं बल्कि वे केंद्रीय नेतृत्व की बहुत करीबी भी हैं, इसलिए उन्हें राज्य सरकार की निगरानी के लिए यहां भेजा गया है और कार्यकाल पूरा होने के बावजूद हटाया नहीं जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार अमिता वर्मा कहती हैं कि अभी भी उन्हें हटाए जाने की संभावना बहुत कम ही है।

 

डीडब्ल्यू से बातचीत में अमिता वर्मा कहती हैं, “देखिए, मुख्यमंत्री के साथ उनका टकराव तो है ही। कई बार ऐसे मौके आ चुके हैं। अब मुख्यमंत्री के क्षेत्र में जाकर जिस तरह से उन्होंने सरकार की आलोचना की तो इसे क्या कहा जा सकता है। यह बात तो वो योगी को बुलाकर भी कह सकती थीं। अनौपचारिक रूप से कह सकती थीं लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐसा कहा। विश्वविद्यालयों में कुलपतियों और अन्य पदों पर नियुक्तियों को लेकर भी टकराव सामने आए हैं।”

 

हालांकि कई मौकों पर आनंदीबेन पटेल ने योगी सरकार के कामकाज और नीतियों की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा भी की है।

 

आनंदीबेन पटेल का सात साल से ज्यादा समय तक उत्तर प्रदेश की राज्यपाल बने रहना संविधान के खिलाफ नहीं है। संविधान खुद यह रास्ता देता है कि पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद भी राज्यपाल अपने उत्तराधिकारी के पद संभालने तक पद पर बना रह सकता है। लेकिन नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं होने से यह सवाल जरूर उठता है कि इस संवैधानिक व्यवस्था के तहत किसी राज्यपाल का इतने लंबे समय तक पद पर बने रहना राजनीतिक शुचिता के लिहाज से किस सीमा तक उचित माना जाना चाहिए।

Top News 21 August: चीनी के दाम से अमेरिका के कर्ज तक, इमरान खान और शशि थरूर समेत पढ़ें दिन की 5 बड़ी खबरें

Top News 21 August: चीनी के दाम से अमेरिका के कर्ज तक, इमरान खान और शशि थरूर समेत पढ़ें दिन की 5 बड़ी खबरें

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Top News 21 August: चीनी के बढ़ते दामों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने रॉ शुगर का आयात ड्यूटी फ्री किया। अमेरिका का कर्ज 40 अरब डॉलर पार। इमरान खान को जांच के बाद फिर पटियाला जेल लाया गया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नए संसद भवन को बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर बताया। हरियाणा की खाप लिन इन के खिलाफ लेकिन लव मैरिज मंजूर। 21 अगस्त की बड़ी खबरें :

 

ड्यूटी-फ्री होगा रॉ-शुगर का आयात

त्योहारी सीजन में चीनी पर महंगाई की मार। अगस्त में चीनी के दाम करीब 20 रुपए तक बढ़ गए हैं। देश में कई स्थानों पर 70 रुपए किलो तक बिकी। ऐसे में मिठाई, चाय और घर की रोजमर्रा की जरूरतों पर इसका असर पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी। ALSO READ: Sugar Price : चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? 15 दिन में 20 रुपए महंगी हुई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जानें आपके लिए क्या बदलेगा

 

अमेरिका का कर्ज 40 खरब डॉलर के पार

अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज बुधवार को 40 खरब डॉलर के पार पहुंच गया। बढ़ते कर्ज ने अमेरिकी सरकार के सामने खर्च और आय के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बढ़ा दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय कर्ज खत्म करने का वादा किया था, लेकिन कर्ज लगातार बढ़ता गया। अब उनके दूसरे कार्यकाल में यह उस समय के मुकाबले करीब दोगुना हो चुका है।

 

इमरान को फिर अडियाला जेल लाया गया

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को कड़ी सुरक्षा के बीच शिफा अस्पताल में जांच के बाद वापस फिर अडियाला जेल लाया गया। अस्पताल में 6 डॉक्टरों की टीम ने उनकी जांच की। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इलाज के लिए शिफा अस्पताल में भर्ती कराने का आदेश दिया था। 

 

नया संसद भवन 'बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर' : थरूर

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने नए संसद भवन की डिजाइन और वहां के माहौल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नए संसद भवन को 'बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर' बताते हुए कहा कि इसमें पुराने संसद भवन जैसा अपनापन और सहज बातचीत का माहौल नहीं है।  

 

हरियाणा की खाप को लव मैरिज मंजूर

हरियाणा की माजरा खाप लिव-इन संबंधों के खिलाफ है, पर लव मैरिज के नहीं। वह चाहती है कि लव मैरिज के साथ-साथ समलैंगिक विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों में बदलाव हो। वह लव 

 

मैरिज के खिलाफ नहीं है, पर माता-पिता की सहमति जरूर होनी चाहिए।

 

सोमालिया के पास समुद्री डाकुओं ने कार्गो शिप किया हाईजैक, जहाज में 6 भारतीय भी सवार, हथियारों की थी खेप

सोमालिया के पास समुद्री डाकुओं ने कार्गो शिप किया हाईजैक, जहाज में 6 भारतीय भी सवार, हथियारों की थी खेप

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सोमालिया के पुंटलैंड तट के पास समुद्री डाकुओं ने एक कार्गो जहाज को हाईजैक कर लिया। इस जहाज पर 10 लोगों का क्रू सवार था, जिसमें 6 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। सोमालिया के एक अधिकारी ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। कैमरून के झंडे वाले इस कार्गो जहाज का नाम M/V LUTUF बताया गया है। जहाज को सोमवार को हाईजैक किया गया और समुद्री डाकू इसे पुंटलैंड के नुगाल तट की ओर ले गए।

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तुर्की के लिए हथियार लेकर जा रहा था जहाज

 

सोमाली अधिकारी के मुताबिक, जहाज में तुर्की के हथियार, कम्युनिकेशन उपकरण और सैटेलाइट इक्विपमेंट मौजूद था। यह सामान मोगादिशु स्थित एक तुर्की सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए भेजा जा रहा था। जहाज का मालिकाना हक Polar Movement Shipping के पास बताया गया है।

 

क्रू में 6 भारतीय समेत 10 लोग

 

अधिकारी के अनुसार, जहाज पर कुल 10 लोग सवार थे। इनमें:

 

6 भारतीय नागरिक

1 तुर्की नागरिक

1 जॉर्जियाई नागरिक

2 सर्बियाई सुरक्षा गार्ड

 

शामिल हैं।

 

घटना को लेकर तुर्की के अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

 

8 समुद्री डाकुओं ने किया जहाज पर कब्जा

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अधिकारी ने बताया कि करीब 8 समुद्री डाकुओं ने जहाज को अपने कब्जे में लिया। माना जा रहा है कि ये वही समूह है, जो इससे पहले 26 अप्रैल को M/V Sward नाम के जहाज के अपहरण में शामिल था।

 

समुद्री डाकू जहाज को पुंटलैंड के डांगोरोयो जिले में गरमाल के पास तट की ओर ले गए।

 

तुर्की के हेलीकॉप्टर और ड्रोन ने रखी नजर

 

हाईजैक किए गए जहाज के पास बाद में तुर्की के स्वामित्व वाले दो जहाज पहुंचे। इसके अलावा तुर्की के हेलीकॉप्टर और ड्रोन इलाके की निगरानी कर रहे थे। मंगलवार को दो लोगों को लेकर एक छोटी नाव जहाज के पास पहुंची। इस नाव से जहाज पर खात (Khat) पहुंचाया गया। खात सोमालिया में आम तौर पर चबाया जाने वाला एक उत्तेजक पदार्थ है। अधिकारी के अनुसार, छोटी नाव के वापस तट पर लौटने के बाद एक हवाई हमला हुआ, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए।

हमले को लेकर स्थिति साफ नहीं

 

हालांकि, इस हवाई हमले को लेकर कई सवाल अभी अनसुलझे हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि हमला किसने किया था और मारे गए लोग हाईजैकिंग में शामिल थे या नहीं। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। फिलहाल M/V LUTUF, उसके क्रू और जहाज पर मौजूद सामान की स्थिति भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। उपलब्ध जानकारी के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

Sugar Price : चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? 15 दिन में ₹20 महंगी हुई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जानें आपके लिए क्या बदलेगा

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अगर आपको पिछले कुछ दिनों में चीनी पहले से महंगी लग रही है, तो इसकी वजह समझना आपके घरेलू बजट के लिए जरूरी है। त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, महज 15 दिनों में चीनी के दाम करीब 20 रुपये तक बढ़ गए हैं। ऐसे में मिठाई, चाय और घर की रोजमर्रा की जरूरतों पर इसका असर पड़ सकता है।

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बढ़ती कीमतों और घरेलू बाजार में चीनी के स्टॉक को लेकर सरकार ने अब बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है। यानी तय सीमा के भीतर विदेश से आने वाली कच्ची चीनी पर आयात शुल्क नहीं लगेगा।

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सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। DGFT (विदेश व्यापार महानिदेशालय) ने गुरुवार को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार का मानना है कि शुल्क-मुक्त आयात से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में राहत मिल सकती है।

 

31 अक्टूबर तक मिलेगी ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की सुविधा

DGFT के नोटिफिकेशन के अनुसार, टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर का आयात किया जा सकेगा। यह सुविधा 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, रॉ-शुगर का आयात सामान्य तौर पर 'फ्री' रहेगा, लेकिन 10 लाख मीट्रिक टन की शुल्क-मुक्त सीमा और निर्धारित शर्तें लागू होंगी।

सरकार ने तय की स्टॉक सीमा

भारत सरकार ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती है। इस दौरान बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियां पहले से स्टॉक बढ़ाती हैं। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार सीमित मात्रा में ड्यूटी-फ्री चीनी आयात की अनुमति देने पर विचार कर रही है। करीब एक दशक बाद भारत में चीनी आयात का रास्ता खुल सकता है।

आयातित चीनी को विदेश नहीं भेज सकेंगे

सरकार ने इस योजना के तहत एक अहम शर्त भी रखी है। आयात की गई रॉ-शुगर से तैयार की गई रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में ही बेचना होगा।  इसका मतलब है कि इस ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट के तहत लाई गई चीनी को दोबारा निर्यात नहीं किया जा सकेगा। इससे सरकार का फोकस घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने पर है।

 

चीनी महंगी होने की क्या वजह है?

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। इनमें घरेलू उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक और बाजार में मांग जैसे कारक महत्वपूर्ण हैं। त्योहारों से पहले मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से भी चीनी की खपत बढ़ सकती है। चीनी का स्टॉक घट रहा है। मौजूदा सीजन के अंत में घरेलू चीनी स्टॉक काफी कम रहने की आशंका है। कम उत्पादन और पिछले सीजन में हुए निर्यात ने उपलब्धता पर दबाव बढ़ाया है।  महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी और अनियमित मानसून से अगले सीजन के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।

 

इसके अलावा, गन्ने से एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस ने एथेनॉल नीति को चीनी की उपलब्धता और कीमतों से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, चीनी के दाम बढ़ने की पूरी तस्वीर समझने के लिए उत्पादन, स्टॉक, मांग और एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल—सभी पहलुओं को देखना जरूरी है।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

सरकार के इस फैसले का सीधा उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है। अगर आयातित रॉ-शुगर की सप्लाई समय पर बाजार में आती है, तो इससे चीनी की कीमतों में तेजी को रोकने में मदद मिल सकती है। आम उपभोक्ताओं के लिए इसका असर खास तौर पर त्योहारों के दौरान महत्वपूर्ण होगा, जब घरों में चीनी की खपत के साथ-साथ मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग भी बढ़ जाती है। 

क्या और बढ़ेंगे दाम ?

दावा किया जा रहा है कि बाजार में मांग की तुलना में करीब आधी ही चीनी की आपूर्ति हो पा रही है। आने वाले दिनों में रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और दिवाली जैसे त्योहारों से मांग और बढ़ेगी। इससे चीनी के दाम में और तेजी आने की आशंका है।

अयोध्या कचहरी लॉकअप से शातिर चोर फरार, गार्द को चकमा देकर भागा दीपक; दो पुराने फरार बंदियों का भी नहीं मिला सुराग

अयोध्या कचहरी लॉकअप से शातिर चोर फरार, गार्द को चकमा देकर भागा दीपक; दो पुराने फरार बंदियों का भी नहीं मिला सुराग

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धार्मिक नगरी अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए गुरुवार दोपहर कचहरी परिसर से एक बंदी पुलिस कस्टडी से फरार हो गया। चोरी के आरोप में जिला कारागार में बंद दीपक कुमार उर्फ दीपू को कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया था, जहाँ से वह पुलिसकर्मियों को चकमा देकर रफूचक्कर हो गया। घटना के बाद कचहरी परिसर में हड़कंप मच गया है।

​बाथरूम जाने के दौरान दिया झांसा

 

दर्शननगर (थाना कोतवाली अयोध्या) निवासी दीपक कुमार को गत 10 जून को कैंट पुलिस ने मोबाइल टावर का तार चोरी करने के आरोप में जेल भेजा था। गुरुवार को पेशी के बाद जब पुलिसकर्मी उसे न्यायालय कक्ष से वापस लाकअप ले जा रहे थे, तभी गार्द के कुछ पुलिसकर्मी बाथरूम चले गए। इसी ढिलाई का फायदा उठाकर दीपक शेष पुलिसकर्मियों को चकमा देकर गायब हो गया।

 

​सघन तलाशी अभियान, CCTV खंगाल रही पुलिस

बंदी के भागने की सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी नगर (CO City) श्रीयश त्रिपाठी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने कचहरी परिसर की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया:

 

​स्थानीय दबिश: आरोपी के गृहक्षेत्र दर्शननगर में पुलिस टीम भेजी गई है।

 

​नाकाबंदी: शहर के प्रमुख रास्तों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

 

​सीसीटीवी निगरानी: कचहरी परिसर व आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

 

​सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

अयोध्या कचहरी और जिला कारागार की सुरक्षा पर यह पहली बार सवाल नहीं उठा है। इससे पहले भी जेल व कस्टडी से दो बंदी फरार हो चुके हैं, जिनका पुलिस आज तक कोई सुराग नहीं लगा सकी है। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।