इसराइली मंत्री के “टारगेट किलिंग” वाले बयान पर उबाल

इसराइली मंत्री के "टारगेट किलिंग" वाले बयान पर उबाल

itamar ben gvir

ओंकार सिंह जनौटी

गाजा पट्टी में फलीस्तीनियों की “लक्षित हत्याएं करने” की बात कहने वाले इसराइली मंत्री बेन ग्विर की जर्मनी और फ्रांस ने कड़ी निंदा की है। गाजा पर इसराइली सरकार का रुख, अब सहयोगियों के धीरज की परीक्षा ले रहा है। ALSO READ: कीव पर रूस के मिसाइल हमले में 12 लोगों की मौत

 

इसराइल के धुर दक्षिणपंथी नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्विर ने कहा कि इसराइल को हर रात गाजा में “30 या 40” लोगों को मारना चाहिए। हमास की कैद से छूटे एक पूर्व इसराइली बंधक रोम ब्रास्लाव्स्की के साथ पॉडकास्ट के दौरान ग्विर ने कहा, “मुझे लगता है कि गाजा में हर रात निशाना बनाकर सफाई की जानी चाहिए। 30 या 40 को खत्म कीजिए।”

 

इस बयान के सार्वजनिक होते ही यूरोपीय राजनीति में तूफान सा आ गया। जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने बुधवार को ग्विर के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया। जर्मन सरकार के प्रवक्ता सेबास्टियान हिले के जरिए दिए गए बयान के मुताबिक, जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स “बहुत ही कड़े शब्दों में मंत्री बेन ग्विर की इस अमानवीय अपील की निंदा करते हैं, ये अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती है।”

 

फ्रांस के विदेश मंत्री जॅां-नोएल बारो ने भी ग्विर के बयान को “असहनीय और अमानवीय” करार दिया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेष ने भी इसे “भयानक। घृणित। अमानवीय और खतरनाक” बताया। जर्मनी की केंद्रीय यहूदी काउंसिल के प्रेसिडेंट योसेफ शुस्टर ने बेन ग्विर के बयान को “बेहद शर्मनाक और गैरजिम्मेदाराना” बताया। मंगलवार को शुस्टर ने कहा कि बेन ग्विर का व्यवहार, दिखाता है कि धुर दक्षिणपंथी ताकतें किस तरह का खतरा पेश करती हैं।

 

मजबूत होती बैन ग्विर पर यूरोपीय प्रतिबंधों की मांग

कई यूरोपीय देशों में अब फिर बेन ग्विर पर ईयूव्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग जोर पकड़ रही है। इससे पहले मई 2026 में भी ग्विर ने अपना एक वीडियो पब्लिश किया था। उस वीडियो में वह, गाजा के लिए राहत सामग्री ले जा रहे एक्टिविस्टों की हिरासत का मजाक उड़ा रहे थे। इन एक्टिविस्टों को इसराइली सेना ने हिरासत में रखा था। इस वाकये के बाद पेरिस ने बेन ग्विर के फ्रांस आने पर प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही फ्रांस ने यूरोपीय संघ के स्तर पर बैन लगाने की मांग भी की।

 

यूरोपीय संसद में ऐसे प्रतिबंध संबंधी प्रस्ताव को पास करने के लिए एकमत या निर्विरोध की जरूरत पड़ती है। लेकिन तब जर्मनी ने इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया। प्रस्तावों में बेन ग्विर की संपत्ति फ्रीज करना या उन पर ट्रेवल बैन लगाना शामिल था। जून में जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि इसराइल या उसकी सरकार के किसी मंत्री पर, अगले दंडात्मक प्रतिबंध लगाने का कोई आधार नहीं है। उसी दौरान वाडेफुल ने यह भी कहा कि जर्मन सरकार मानती है कि उसका संदेश इसराइल समझ चुका है।

 

लेकिन ताजा पॉडकास्ट के बाद अब खुद जर्मन सरकार दबाव में है। मंगलवार को जर्मनी के उप चांसलर लार्स क्लिंगबाइल ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा कि बेन ग्विर की टिप्पणियों के बाद “नतीजे जरूर निकलने चाहिए।” क्लिंगबाइल ने बताया कि इस मुद्दे पर यूरोपीय स्तर पर बातचीत जारी है। क्लिंगबाइल जर्मनी की गठबंधन सरकार में शामिल पार्टी एसपीडी के नेता हैं। इसराइल के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने में अक्सर, चांसलर मैर्त्स की पार्टी सीडीयू और उसकी सिस्टर पार्टी सीएसयू हिचकते हैं। ALSO READ: नॉर्ड स्ट्रीम धमाकों का एक और संदिग्ध गिरफ्तार

 

पश्चिमी तट पर इसराइली कब्जा

ग्विर के ताजा बयान के बाद जर्मनी ने पश्चिमी तट पर इसराइली बस्ती के विस्तार की भी आलोचना की। जर्मन सरकार के प्रवक्ता हिले ने कहा, “हमारा संदेश साफ है: पश्चिमी तट को अलग करने की दिशा में कोई और कदम नहीं उठना चाहिए।” इसराइल 1967 से पश्चिमी तट पर जमा है। एक के बाद एक आई इसराइली सरकारों ने पश्चिमी तट पर अपनी बस्तियों का विस्तार किया है।

 

प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू की गठबंधन सरकार के दौरान, हाल में इसराइली बस्तियों का विस्तार बहुत तेज हुआ है। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, पूर्वी येरूशलम को छोड़ भी दें तो पांच लाख से ज्यादा इसराइली अब पश्चिमी तट पर बस चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह गैरकानूनी है। पश्चिमी तट पर फलीस्तीनियों की आबादी करीब 30 लाख है।

 

इसराइल की ये बस्तियां, हाल के महीनों में फलीस्तीनी बाशिंदों को कई तरीकों से परेशान व डरा रही हैं। कई बार तो ऐसे हथकंडों का उद्देश्य फलीस्तीनियों की संपत्ति पर कब्जा करना होता है। फ्रांसीसी विदेश मंत्री बारो ने पश्चिमी तट पर बसाई गई इसराइली बस्तियों पर प्रतिबंध लगाने से इनकार नहीं किया है। बारो ने कहा, “हमने ऐसे बसने वालों पर 28 मई को तीसरी बार यूरोपीय प्रतिबंध लगाए हैं।”

 

7 अक्टूबर 2023 को हमास के आतंकवादियों ने इसराइल में घुसकर बड़े हमले किए। इन हमलों के दौरान हमास ने 1,200 से ज्यादा इसराइलियों की हत्या की और 200 से ज्यादा को बंधक बनाया। इन हमलों के बाद इसराइल ने आठ अक्टूबर को गाजा में घुसकर सैन्य अभियान शुरू कर दिया। ब्राउन यूनिवर्सिटी के डाटा के मुताबिक तब से तीन अक्टूबर 2025 तक गाजा में 67,075 लोग मारे जा चुके हैं। करीब 1।70 लाख लोग घायल हुए हैं। ये वह मामले में हैं जिनकी पुष्टि हुई है।