योगी सरकार की ओडीओपी योजना से बदली राजन की तकदीर, टेराकोटा ने दिलाई नई पहचान

योगी सरकार की ओडीओपी योजना से बदली राजन की तकदीर, टेराकोटा ने दिलाई नई पहचान

 

Yogi Government ODOP Scheme

Yogi Government ODOP Scheme: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के संकल्प के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार की ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना इसी विजन का प्रमुख आधार बनकर उभरी है। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित गोरखपुर के रहने वाले टेराकोटा शिल्पकार राजन प्रजापति की सफलता की कहानी एक सशक्त उदाहरण है कि सरकार की योजनाएं और युवाओं का कौशल मिलकर किस प्रकार आर्थिक उन्नति का माध्यम बन सकते हैं। 

लगभग डेढ़ करोड़ का वार्षिक कारोबार करने वाले सफल उद्यमी बने राजन

गोरखपुर के औरंगाबाद, लंगड़ी गुलरिहा गांव के निवासी राजन प्रजापति बताते हैं कि उन्होंने अपने पुश्तैनी टेराकोटा शिल्प को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढालकर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। कभी सीमित आय और संसाधनों के बीच संघर्ष करने वाले राजन आज लगभग डेढ़ करोड़ रुपए का वार्षिक कारोबार करने वाले सफल उद्यमी बन चुके हैं। उनकी इकाई में 25 से अधिक कारीगरों को नियमित रोजगार भी मिला है, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं।

योगी सरकार की ओडीओपी योजना बनी परिवर्तन का माध्यम

राजन प्रजापति बताते हैं कि योगी सरकार की महत्वाकांक्षी ओडीओपी योजना उनके लिए परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बनी। योजना के तहत आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार तक पहुंच मिलने से उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। इलेक्ट्रिक चाक और आधुनिक मशीनों के उपयोग से उनका कारोबार तेजी से बढ़ा और आज उनके उत्पाद देश के अनेक बड़े शहरों में भेजे जा रहे हैं।

टेराकोटा उत्पादों को जीआई टैग मिलने से मिली राष्ट्रीय पहचान

गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों को जीआई टैग मिलने से उनकी पहचान राष्ट्रीय सीमाओं से निकलकर वैश्विक बाजार तक पहुंची है। सरकार द्वारा स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने की नीति ने कारीगरों और उद्यमियों को नया आत्मविश्वास दिया है। यही कारण है कि त्योहारों के मौसम में उनकी इकाई से 18 से 24 ट्रक तक उत्पाद विभिन्न राज्यों में भेजे जाते हैं। राजन प्रजापति की सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए भी प्रेरणा है। उनकी कार्यशाला प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित हो चुकी है, जहां युवाओं को टेराकोटा शिल्प की बारीकियां सिखाई जाती हैं। यह पहल न केवल पारंपरिक कला को संरक्षित कर रही है, बल्कि युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर भी प्रेरित कर रही है।

‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ युवाओं को दिला रहा नई पहचान 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ स्थानीय प्रतिभाओं, पारंपरिक उत्पादों और युवा उद्यमियों को नई पहचान देने पर आधारित है। राजन प्रजापति जैसे सफल उद्यमी इस बात के प्रमाण हैं कि सही नीति, तकनीक और बाजार का सहयोग मिलने पर उत्तर प्रदेश का युवा न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा कर सकता है।

ओडीओपी योजना से स्थानीय उत्पादों को मिल रहा वैश्विक मंच  

उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना का उद्देश्य प्रत्येक जिले के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों को प्रोत्साहित करना, कारीगरों और उद्यमियों की आय बढ़ाना तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है। योजना के तहत प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, वित्तीय सहयोग, आधुनिक उपकरण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ओडीओपी योजना के माध्यम से प्रदेश के अनेक पारंपरिक उत्पाद नई पहचान हासिल कर रहे हैं। गोरखपुर का टेराकोटा शिल्प भी इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने स्थानीय कला को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ रोजगार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना: अफवाहों का गुबार बनाम जमीनी हकीकत, जानिए दावों के पीछे का सच

केन-बेतवा लिंक परियोजना: अफवाहों का गुबार बनाम जमीनी हकीकत, जानिए दावों के पीछे का सच

छतरपुर। बुंदेलखंड की जीवन रेखा कही जाने वाली महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना हाल के दिनों में एक बार फिर राजनीतिक चर्चा और विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में आ गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और स्थानीय नेताओं के बयानों के बाद इस परियोजना से जुड़े पुनर्वास, मुआवजे और विस्थापन को लेकर कई तरह के गंभीर दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, मध्य प्रदेश शासन और स्थानीय प्रशासन के आधिकारिक आंकड़े इन राजनीतिक दावों से बिल्कुल अलग एक बेहद संवेदनशील और पारदर्शी सच्चाई बयां करते हैं।

इस विशेष रिपोर्ट में हम परियोजना को लेकर फैलाए जा रहे प्रमुख दावों और उनके पीछे की वास्तविक सच्चाई का विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं: 

 

आबादी और विस्थापन के आंकड़ों का सच-

आरोप: विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक वीडियो में यह दावा किया जा रहा है कि इस परियोजना के कारण चारों बांधों (मझगवां, रूंझ, केन-बेतवा और नेगुवा) से लगभग 50,000 की आबादी प्रभावित हो रही है।


वास्तविक तथ्य: प्रशासन के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार यह दावा पूरी तरह भ्रामक है। वास्तव में, चारों परियोजनाओं से प्रभावित होने वाली कुल आबादी लगभग 23,000 ही है। इसका वास्तविक ग्रामवार विवरण इस प्रकार है:


मझगवां परियोजना: इसके डूब क्षेत्र से केवल 1 पूर्ण और 7 आंशिक गांव प्रभावित हैं, जिससे 1,450 परिवारों की कुल 5,640 आबादी प्रभावित हो रही है।


रूंझ परियोजना: डूब क्षेत्र से केवल 1 पूर्ण और 1 आंशिक गांव के 730 परिवारों की 1,906 आबादी प्रभावित है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना (पन्ना व छतरपुर): डूब क्षेत्र से 7 पूर्ण और 2 आंशिक गांव प्रभावित हैं, जबकि क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए 14 गांवों की भूमि अर्जित की गई है, जिससे कुल 5,039 परिवारों की 15,661 आबादी प्रभावित हो रही है।


नेगुवा लघु परियोजना: इस परियोजना से विस्थापन पूरी तरह शून्य है और प्रभावितों की संख्या पूरी तरह निरंक (Zero) है। 

 

रिकॉर्ड-तोड़ विशेष पुनर्वास पैकेज और 96% भुगतान-केन-बेतवा परियोजना के तहत प्रभावित 22 गांवों के कुल 5,039 विस्थापित परिवारों के पात्र हितग्राहियों के लिए ₹12.50 लाख प्रति परिवार की दर से कुल ₹604.745 करोड़ का विशेष पुनर्वास पैकेज स्वीकृत किया गया है। संवेदनशीलता की बड़ी मिसाल यह है कि इस स्वीकृत राशि का 96 प्रतिशत भुगतान पहले ही हितग्राहियों को किया जा चुका है। यह मुआवजा वितरण करीब डेढ़ वर्ष पूर्व ही पूरा कर लिया गया था।
 

इसके साथ ही, छतरपुर जिले के ग्राम करीदिया में 179 प्लॉट, ग्राम राईपुरा में 154 प्लॉट और ग्राम सलैया में 70 प्लॉटों का आवंटन करके कॉलोनी के रूप में पुनर्वास की भव्य व्यवस्था की जा रही है, जहां विद्युत और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं दी जा रही हैं। 

 

वर्षाकाल में विस्थापन के आरोपों का खंडन-आरोप है कि मानसून और वर्षा ऋतु के दौरान प्रभावित परिवारों को उचित वैकल्पिक व्यवस्था के बिना जबरन उनके घरों से बेघर किया गया। जबकि वास्तविक तथ्य यह है कि, वर्षाकाल में लोगों को बेघर करने का आरोप पूरी तरह निराधार है, क्योंकि पन्ना जिले के 08 प्रभावित गांवों का पुनर्व्यवस्थापन वर्षाकाल शुरू होने से बहुत पहले ही सुरक्षित तरीके से संपन्न कर लिया गया था। वर्तमान में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए ऐसी कोई भी दमनकारी कार्रवाई नहीं की जा रही है। विस्थापित परिवारों ने स्वेच्छा से इस विशेष एकमुश्त पुनर्वास पैकेज का विकल्प चुना है। 

 

पर्यावरण, बाघ और वन संरक्षण के कड़े इंतजाम


आरोप: परियोजना के कारण 21 आदिवासी बहुल गांवों के साथ लगभग 40 लाख वृक्षों और पन्ना टाइगर रिजर्व के 100 से अधिक बाघों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
 

वास्तविक तथ्य: परियोजना का क्रियान्वयन शुरू करने से पहले कड़े नियमों के तहत 'इनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट' (EIA) के अंतर्गत पर्यावरण मंजूरी प्राप्त की गई है। पन्ना टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए एक 'इंटीग्रेटेड लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान' तैयार किया गया है। भारत सरकार की शर्तों के अनुसार वन विभाग द्वारा 'कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट प्लान' और 'वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट प्लान' पर कड़ाई से काम किया जा रहा है। साथ ही, स्टेज-2 वन स्वीकृति के कड़े नियमों के तहत एफ.आर.एल (FRL) से 10 मीटर नीचे तक वृक्षों की कटाई नहीं की गई है। इसके अलावा, प्रभावित वन क्षेत्र में वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत पात्र परिवारों की संख्या शून्य (निरंक) पाई गई है। 

 

सुप्रीम कोर्ट और NGT में कोई रोक नहीं

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि परियोजना से जुड़े कानूनी विषयों पर सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में प्रकरण लंबित हैं, जिससे काम पर रोक लग सकती है।


वास्तविक तथ्य: परियोजना क्षेत्र के लिए 6017 हेक्टेयर वन भूमि की स्टेज-1, स्टेज-2 और वाइल्ड लाइफ स्वीकृतियों की सभी शर्तों का पूर्ण पालन किया जा रहा है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट या एनजीटी में परियोजना से संबंधित कोई भी अदालती मामला प्रचलन में या लंबित नहीं है।

 

पुलिस कार्रवाई और महिलाओं के उत्पीड़न के दावों की सच्चाई

वीडियो में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन स्थल पर 2000 से 5000 पुलिस बल तैनात किया गया, तथा रात्रि 2:00 बजे पुलिस ने 50 महिलाओं को लगभग 10 किलोमीटर तक दौड़ाकर खदेड़ा।
 

वास्तविक तथ्य: प्रशासन ने महिलाओं को रात में प्रताड़ित करने या दौड़ाने के आरोपों को पूरी तरह असत्य और भ्रामक करार दिया है। हकीकत यह है कि दौधन बांध निर्माण स्थल पर असामाजिक तत्वों द्वारा पथराव करने और सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ कर शासकीय कार्य को जबरन रोकने की कोशिश की गई थी। इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा केवल न्यूनतम आवश्यक पुलिस बल की मदद ली गई थी और उपद्रवियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं।

 

संवेदनशीलता: मुख्यमंत्री का अतिरिक्त बजट और प्रशासन का ऐतिहासिक फैसला

इस विवाद के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पन्ना जिले के लिए ₹202.50 करोड़ का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया है। इसी प्रकार, छतरपुर के नवागत कलेक्टर मृणाल मीणा ने 11 अगस्त 2026 को ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्रभावित 14 गांवों में दोबारा सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं ताकि कोई भी वास्तविक पात्र व्यक्ति मुआवजे से वंचित न रहे। इसके साथ ही, 5 गांवों के 59 लोगों के लिए ₹7.37 करोड़ की अतिरिक्त राशि भी स्वीकृत कर दी गई है। 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके बालिगों (कट-ऑफ तिथि मार्च 2024) को भी लाभ देने के लिए 313 हितग्राहियों के विशेष पैकेज के भुगतान की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। 

 

दावों के पीछे का असली खेल: राजनीतिक महत्वाकांक्षा 

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे आंदोलन के पीछे कुछ लोगों की व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छिपी हुई हैं। आंदोलन का मुख्य चेहरा बने अमित भटनागर (एनजीओ जय किसान संगठन के संचालक) आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर बिजावर विधानसभा सीट से 2018 (1.34% वोट) और 2023 (2.49% वोट) का चुनाव बुरी तरह हार चुके हैं। उनकी सहयोगी दिव्या अहिरवार (25 वर्षीय) भी 'आप' की ही पार्षद हैं।

 

विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस में अपना वजूद तैयार करने और राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए अमित भटनागर द्वारा आदिवासियों को ढाल बनाया जा रहा है। वास्तव में आंदोलन स्थल पर स्थानीय आदिवासियों की संख्या काफी कम है। इसमें वे लोग अधिक शामिल हैं जो पूर्व में अन्य परियोजनाओं (मझगवां और रूंझ बांध) में ₹5 लाख तक का मुआवजा उठा चुके हैं। इन्हें संवेदनशीलता दिखाते हुए राज्य सरकार ने 10.07.2026 को केन-बेतवा की तर्ज पर ही ₹12.50 लाख प्रति परिवार का विशेष पैकेज स्वीकृत कर दिया है, जिसका भुगतान वर्तमान में प्रक्रियाधीन है। इसके बावजूद, उनके परिवारों की बढ़ी हुई बालिग सदस्य संख्या के आधार पर और अधिक मुआवजा दिलाने का झूठा आश्वासन देकर उन्हें भड़काया जा रहा है।

 

केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के विकास की नई इबारत लिखने को तैयार है। पारदर्शी कानूनी प्रक्रियाओं, बाजार मूल्य से अधिक मुआवजे और संवेदनशील पुनर्वास नीतियों के बावजूद, राजनीतिक रोटियां सेंकने और आगामी चुनावों में खुद को स्थापित करने के लिए कुछ राजनीतिक चेहरों द्वारा इसे विवाद का मुद्दा बनाया जा रहा है।

Gen Z के प्यार और रिश्तों पर गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर की दो टूक बातें, ‘Situationship’ से ‘Soulmate’ तक हर सवाल का जवाब

Gen Z के प्यार और रिश्तों पर गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर की दो टूक बातें, 'Situationship' से 'Soulmate' तक हर सवाल का जवाब

shri shri ravishankar

आज एक आत्मीय और जीवंत संवाद में भारत के 1,300 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों- जिनमें IIT, IIM, NIT और AIIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं—के हजारों प्रथम-वर्षीय विद्यार्थियों ने वैश्विक मानवतावादी एवं आध्यात्मिक गुरु गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के साथ संवाद किया।
 

विद्यार्थियों ने अपने मन के अनेक प्रश्न खुले तौर पर उनके सामने रखे—लोकप्रिय कोरियाई हार्ट इमोजी के अर्थ से लेकर उस अंतहीन विचार-श्रृंखला तक, जो आज के अनेक युवा मनों को रात के दो बजे तक जगाए रखती है। जब एक विद्यार्थी ने पूछा कि जीवन में ‘सिचुएशनशिप’ चुननी चाहिए या ‘सोलमेट’ की तलाश करनी चाहिए, तो गुरुदेव ने प्रश्न को एक नई दृष्टि दे दी। उन्होंने पूछा—“अपने आपको उस दूसरे व्यक्ति के स्थान पर रखकर देखिए।

यदि आप किसी को अपना जीवनसाथी चुनें और वह आपको केवल एक ‘सिचुएशनशिप’ के रूप में देखना चाहे, तो आपको कैसा लगेगा? तब आप क्या चुनेंगे?” कश्मीर की एक छात्रा ने अपने जीवन की एक और गहरी उलझन साझा की। उसने कहा कि जीवन में सब कुछ ठीक होते हुए भी भीतर एक प्रकार की निरर्थकता का अनुभव होता है। गुरुदेव ने अत्यंत आत्मीयता से कहा कि उसका प्रश्न आज पूरी दुनिया के युवाओं के भीतर चल रहे एक व्यापक संघर्ष को अभिव्यक्त करता है। उन्होंने अकेलेपन से बाहर निकलने और जीवन में पुनः अर्थ एवं उद्देश्य खोजने के लिए एक अत्यंत सरल और अंतरंग माध्यम—श्वास—की ओर संकेत किया।

 

यह संवाद आर्ट ऑफ लिविंग के यूथ डेस्क द्वारा आयोजित सातवें नेशनल इंडक्शन प्रोग्राम National Induction Programme के दौरान हुआ। यह कार्यक्रम उस पीढ़ी को एक साथ लेकर आया, जो तकनीक के कारण पहले से कहीं अधिक जुड़ी हुई है, फिर भी भीतर से अपनत्व, जीवन के अर्थ और मानसिक स्थिरता की तलाश में है।

 

लेकिन इस पूरे संवाद में जो बात विद्यार्थियों के मन में सबसे अधिक अंकित हुई, वह थी गुरुदेव की सहज जिज्ञासा, उनका विनोदपूर्ण अंदाज़ और उस पीढ़ी को समझने तथा उससे सीखने की उनकी तत्परता, जो कठिन से कठिन प्रश्न पूछने से नहीं हिचकती। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे उन गुणों को कभी न खोएँ, जो युवावस्था को जीवंत बनाते हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा—“शरारती बने रहिए। यही युवावस्था की पहचान है।” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा—“आप गतिशील और शरारती अवश्य रहें, लेकिन आपकी शरारत किसी दूसरे के लिए पीड़ा का कारण नहीं बननी चाहिए।”

 

विद्यार्थियों को “इस दुनिया की वास्तविक संपदा” बताते हुए गुरुदेव ने उन्हें उनकी असाधारण संभावनाओं का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि दुनिया में जहाँ भी उत्कृष्ट प्रतिभाएँ दिखाई देती हैं, वहाँ कम-से-कम एक भारतीय अवश्य मिलता है। इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कंप्यूटर विज्ञान, फैशन और हॉस्पिटैलिटी जैसे विविध क्षेत्रों में विश्वभर में अपनी पहचान बना रहे भारतीय युवाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उपलब्धियों से भी अधिक आवश्यक एक गुण है—“बाहर से दृढ़ और भीतर से लचीला व्यक्तित्व।”

 

उनके अनुसार, दृढ़ता का अर्थ यह नहीं कि जीवन में असफलता या संदेह कभी आए ही नहीं; बल्कि इसका अर्थ है—असफलताओं और अनिश्चितताओं के बावजूद निरंतर आगे बढ़ते रहना।

उन्होंने कहा—“जो लोग आरंभ में असफल होते हैं, उनमें से भी अनेक आगे चलकर महान उद्यमी बनते हैं। इसलिए स्वयं पर विश्वास रखिए।” और जब बात अपने निर्णयों को लेकर उठने वाले संदेह की आई, तो उन्होंने एक अत्यंत महत्वपूर्ण दृष्टिकोण रखा—“संदेह होना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन उसे अपने भीतर इतना गहरा मत उतरने दीजिए कि वही आपकी पहचान बन जाए।”

 

आज के युवाओं के जीवन में ध्यान और एकाग्रता का प्रश्न भी उतना ही महत्वपूर्ण है। छोटे-छोटे वीडियो और निरंतर डिजिटल उत्तेजना की आदी होती जा रही पीढ़ी के संदर्भ में गुरुदेव ने कहा—“आज ध्यान की कमी बहुत सामान्य हो गई है। पहले ध्यान की अवधि 40-50 मिनट हुआ करती थी, आज यह केवल 30 सेकंड रह गई है।” इसका समाधान उन्होंने भीतर के तनाव को दूर करने में देखा। उनके अनुसार, “जब व्यक्ति भीतर से तनावमुक्त होता है, तो उसके भीतर ऊर्जा का संचार होता है और उसकी एकाग्रता भी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।”

 

युवाओं की भावनात्मक उलझनों पर बात करते हुए गुरुदेव ने अपने विशिष्ट हास्यबोध का भी सहारा लिया। उन्होंने कहा—“जीवन में थोड़ा हास्य रखिए।” उन्होंने स्मरण कराया कि क्रोध वह दंड है जो स्वयं को दिया जाता है। जब क्रोध उठे, तो कुछ गहरी साँसें लें, परिस्थिति से थोड़ा पीछे हटें, स्वयं को देखें—और संभव हो तो उसी परिस्थिति को हास्य में बदल दें।

सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस युग में उन्होंने युवाओं को विवेकपूर्ण दृष्टि अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा—“सोशल मीडिया पर जो कुछ भी आता है, उसे सच मत मान लीजिए। बहुत-सी चीज़ें झूठी होती हैं और आज उनमें से बहुत कुछ AI द्वारा निर्मित भी है।”

 

FOMO, फ़ोमो—अर्थात दूसरों से पीछे छूट जाने का भय—रिश्तों और निरंतर आगे बढ़ते रहने के सामाजिक दबाव के बीच गुरुदेव ने मित्रता की एक अत्यंत सुंदर और सरल परिभाषा दी।

उन्होंने कहा—“अच्छा मित्र वह है, जिसके साथ बात करके आप फ़ोमो  से बाहर आ जाएँ। आप ज़ोमो में जिएँ और दूसरों को फ़ोमो दें।” उनके इस सहज और चुटीले कथन पर पूरा सभागार तालियों और हँसी से गूँज उठा।

 

शायद इस पूरे संवाद का सबसे गहरा संदेश यही था कि युवाओं को अपनी महत्वाकांक्षाएँ कम करने, प्रश्न पूछना छोड़ने या अपने साहस और जिज्ञासा को दबाने की आवश्यकता नहीं है।

युवा होना जीवन से प्रश्न पूछना है। युवा होना नई राहों पर चलने का साहस है। युवा होना गिरकर फिर उठ खड़े होने की क्षमता है और सबसे बढ़कर—युवा होना अपने भीतर की जीवंतता को बनाए रखना है।

 

गुरुदेव का संदेश स्पष्ट था—सफलता की दौड़ में स्वयं को मत खोइए। प्रश्न पूछिए, सपने देखिए, प्रयोग कीजिए, हँसिए, असफलताओं से सीखिए और सबसे महत्वपूर्ण—अपने भीतर की शांति, ऊर्जा और करुणा को जीवित रखिए।

जापान के साथ यूपी की दोस्ती को मिलेगी नई उड़ान, लखनऊ में उद्योग से कृषि तक बनेगी बड़ी साझेदारी की रणनीति

जापान के साथ यूपी की दोस्ती को मिलेगी नई उड़ान, लखनऊ में उद्योग से कृषि तक बनेगी बड़ी साझेदारी की रणनीति

उत्तरप्रदेश और जापान के बीच रिश्तों को नई ऊंचाई देने की दिशा में शुक्रवार का दिन बेहद अहम होने जा रहा है। जापानी प्रतिनिधिमंडल की यूपी विजिट के तीसरे दिन लखनऊ में निवेश, उद्योग, शिक्षा, पर्यटन, स्वास्थ्य, एमएसएमई और महिला सशक्तीकरण जैसे क्षेत्रों में व्यापक संवाद होगा। दिन की शुरुआत जापानी प्रतिनिधिमंडल की राज्यपाल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट के साथ होगी, जबकि इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होने वाले चार सेक्टोरल सेशन इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहेंगे। समापन सत्र को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संबोधित करेंगे।

 

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जापानी प्रतिनिधिमंडल को प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, निवेश की संभावनाओं और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों से रूबरू कराने के लिए पूरे दिन कार्यक्रमों की श्रृंखला तैयार की गई है। खास बात यह है कि दिनभर होने वाले संवाद केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जापान-उत्तर प्रदेश के बीच दीर्घकालिक आर्थिक और संस्थागत साझेदारी की जमीन तैयार करने पर केंद्रित होंगे।

 

राज्यपाल व मुख्यमंत्री से मुलाकात से होगी शुरुआत

शुक्रवार सुबह जापानी प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचकर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से शिष्टाचार मुलाकात करेगा। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर प्रतिनिधिमंडल की भेंट वार्ता प्रस्तावित है। इन मुलाकातों के जरिए दोनों पक्षों के बीच आपसी संबंधों, निवेश और सहयोग की संभावनाओं को लेकर उच्चस्तरीय संवाद होगा। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल दिनभर विभिन्न सेक्टोरल कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा।

 

जापानी विद्यार्थी देखेंगे यूपी की नई शिक्षा व्यवस्था

जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ आए 15 विद्यार्थियों का मोहनलालगंज स्थित अटल विद्यालय का दौरा भी दिन के प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल है। इन विद्यार्थियों के साथ इन्वेस्ट यूपी के अधिकारी रहेंगे। इससे जापान के युवाओं को उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और राज्य में विकसित हो रहे आधुनिक शैक्षणिक मॉडल को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

 

1090 की कार्यप्रणाली समझेंगी जापानी महिला प्रतिनिधि

जापान से आईं 15 महिला प्रतिनिधियों के लिए भी विशेष कार्यक्रम रखा गया है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग के मंत्री के साथ बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल लखनऊ स्थित 1090 वीमेन हेल्पलाइन का दौरा करेगा। यहां एडीजी की ओर से महिला सुरक्षा और हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली पर प्रस्तुतीकरण एवं ब्रीफिंग दी जाएगी। यह कार्यक्रम महिला सुरक्षा और तकनीक आधारित महिला सहायता प्रणाली के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।

 

*ओडीओपी से स्टार्टअप तक दिखेगी यूपी की ताकत-

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित एक्जीबिशन एंड ओडीओपी एक्सपीरियंस सेंटर में जापानी मेहमानों को उत्तर प्रदेश की वास्तविक औद्योगिक और सांस्कृतिक ताकत से परिचित कराया जाएगा। यहां यूपीनेडा, पर्यटन, शिक्षा, इन्वेस्ट यूपी, श्रम, आईटी एवं स्टार्टअप, ओडीओपी और कौशल विकास से जुड़े स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके साथ जापानी कंपनियां तथा एकेटीयू, आईआईटी बीएचयू और आईआईटी कानपुर जैसे प्रमुख संस्थान भी अपनी क्षमताओं और संभावनाओं को प्रदर्शित करेंगे। यानी एक ही छत के नीचे यूपी के उत्पाद, तकनीक, शिक्षा, स्टार्टअप और निवेश के अवसर जापानी प्रतिनिधियों के सामने होंगे।

 

कृषि से वैश्विक बाजार तक, चार सेक्टोरल सत्रों में बनेगी रणनीति

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चार समानांतर सेक्टोरल सत्र होंगे, जिनमें उत्तर प्रदेश-जापान साझेदारी के अलग-अलग आयामों पर गहन चर्चा होगी। ‘फ्रॉम गेट टू ग्लोबल प्लेट’ सत्र में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को वैश्विक बाजार से जोड़ने और जापानी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होगी। जापानीज टूरिज्म सत्र में पर्यटन क्षेत्र में सहयोग और पर्यटकों के आदान-प्रदान की संभावनाओं पर मंथन होगा। यूपी जापान हेल्थकेयर एंड केयर इकॉनमी पार्टनरशिप सत्र स्वास्थ्य और केयर इकोनॉमी में साझेदारी के नए अवसर तलाशेगा। वहीं जापान-यूपी एमएसएमई पार्टनरशिप फोरम में उत्तर प्रदेश के विशाल एमएसएमई नेटवर्क और जापानी तकनीक, निवेश व विशेषज्ञता के बीच तालमेल पर चर्चा होगी। इन सत्रों को खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इनमें संभावित निवेश और कारोबारी साझेदारी को क्षेत्रवार आगे बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया जाएगा।

 

एमओयू से साझेदारी को मिलेगा संस्थागत आधार

दिन में विधानसभा में एमओयू एक्सचेंज के लिए बैठक भी प्रस्तावित है। ऐसे में जापानी प्रतिनिधिमंडल का लखनऊ दौरा केवल संवाद और निवेश चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संभावित समझौतों के जरिए साझेदारी को संस्थागत रूप देने की दिशा में भी आगे बढ़ेगा। दोपहर में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर के बीच भी बैठक प्रस्तावित है। यह मुलाकात ऊर्जा क्षेत्र में संभावित सहयोग के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

 

संस्कृति से मजबूत होंगे रिश्ते, शाम को होगा समापन सत्र

दोपहर बाद रंग भारती की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद शाम को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर हॉल में वेलेडिक्टरी सेशन होगा, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संबोधित करेंगे। इस दौरान प्रदेश सरकार के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद होंगे। यह सत्र पूरे आयोजन के निष्कर्षों को सामने रखने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और जापान की भविष्य की साझेदारी की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच बनेगा। इसके बाद नेटवर्किंग हाई-टी के जरिए जापानी प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को अनौपचारिक संवाद का अवसर मिलेगा। रात्रि में मुख्यमंत्री आवास पर डिनर के साथ ही दिनभर चले कार्यक्रमों का समापन होगा।

OBC बेटियों की शादी में योगी सरकार का बड़ा सहारा, 30 हजार से ज्यादा परिवारों को मिला ₹60.93 करोड़ का अनुदान

OBC बेटियों की शादी में योगी सरकार का बड़ा सहारा, 30 हजार से ज्यादा परिवारों को मिला ₹60.93 करोड़ का अनुदान

CM Yogi Adityanath

मंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों के लिए सहारा बन रही हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक मदद देने के लिए संचालित शादी अनुदान योजना के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 30 हजार से अधिक लाभार्थियों को लाभ दिया जा चुका है। सरकार की इस पहल से बेटियों के विवाह से जुड़ी आर्थिक जिम्मेदारियों को कम करने में मदद मिल रही है।

 

वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के तहत 1 लाख 5 हजार पात्र लाभार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 210 करोड़ रुपये का वार्षिक लक्ष्य रखा गया है, जिसके सापेक्ष अब तक 106.65 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की जा चुकी है। योजना के अंतर्गत अब तक 96,956 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 12,855 आवेदन निरस्त किये गए हैं। 

 

आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 30,466 लाभार्थियों को 60.93 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। यह आवंटित धनराशि का करीब 57.13 प्रतिशत है। सरकार का लक्ष्य है कि पात्र परिवारों को समयबद्ध तरीके से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें बेटी के विवाह के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

 

पात्र परिवार को 20 हजार रुपये की सहायता

 

शादी अनुदान योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी के विवाह के लिए 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह धनराशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। योजना का लाभ ऐसे परिवारों को मिलता है, जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये तक है। विवाह के समय लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है।

 

आवेदन प्रक्रिया में दिव्यांग, विधवा, दैवीय आपदा से प्रभावित और भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बेटी का विवाह बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी माना जाता है। ऐसे में योगी सरकार की शादी अनुदान योजना जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संबल देने के साथ ही बेटियों के सम्मानजनक विवाह में सहयोगी बन रही है।

 

पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार पिछड़े वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कल्याण और बेटियों के सम्मानजनक विवाह के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। शादी अनुदान योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को समयबद्ध आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि आर्थिक स्थिति बेटियों के विवाह में बाधा न बने। योजना में पात्र लाभार्थियों को पारदर्शी तरीके से सीधे उनके बैंक खातों में धनराशि भेजी जा रही है।

Jantar Mantar Protest : जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, 5 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच, जानें कौन-कौन शामिल

Jantar Mantar Protest : जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, 5 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच,  जानें कौन-कौन शामिल

20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने घटना की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी (HPEC) का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे।

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प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई की होगी जांच

 

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई के विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। खास तौर पर यह पता लगाया जाएगा कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पेलेट गन का इस्तेमाल नियमों के तहत किया गया था या इसका अनावश्यक इस्तेमाल हुआ। समिति प्रदर्शन स्थल पर मौजूद महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिंसा के आरोपों की भी जांच करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए। समिति को तय समय सीमा के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत को सौंपनी होगी।

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कमेटी में कौन-कौन शामिल?

 

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा कर्मियों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों की व्यापक जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई है।

 

इस समिति में शामिल सदस्य हैं:

 

  • जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी – सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और समिति के अध्यक्ष
  • जस्टिस रवि शंकर झा – पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश
  • जस्टिस शालिंदर कौर – दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश
  • ऋषि कुमार शुक्ला – सीबीआई के पूर्व निदेशक
  • डॉ. एल.आर. बिश्नोई – मेघालय के सेवानिवृत्त डीजीपी
  • पुलिस पर बल प्रयोग के आरोपों की भी पड़ताल

 

समिति प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की ओर से कथित बल प्रयोग से जुड़े आरोपों की जांच करेगी। इसके साथ ही पुलिस की ओर से लगाए गए उन आरोपों पर भी गौर किया जाएगा, जिनमें पुलिसकर्मियों के साथ हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई है। इस जांच का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी प्रमुख आरोपों और परिस्थितियों की निष्पक्ष पड़ताल करना है।

सर्वोदय विद्यालयों के संचालन में व्यापक बदलाव की जरूरत : CM योगी

सर्वोदय विद्यालयों के संचालन में व्यापक बदलाव की जरूरत : CM योगी

CM Yogi Sarvodaya Vidyalaya: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में सुव्यवस्थित संचालन के लिए व्यापक बदलाव की जरूरत बताई है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि विद्यालयों से जुड़ी सुस्पष्ट नियमावली तैयार करने, शिक्षकों के रिक्त पदों पर चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने तथा एक सोसाइटी के गठन की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि इन आवासीय विद्यालयों का प्रबंधन और संचालन अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सके। 

 

गुरुवार को समाज कल्याण विभाग के माननीय मंत्री असीम अरुण की उपस्थिति में विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने विद्यालयों में शिक्षकों और अन्य आवश्यक स्टाफ की उपलब्धता, विद्यार्थियों को मिल रही सुविधाओं तथा प्रबंधन व्यवस्था की जानकारी ली। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में 93 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित थे, जबकि वर्ष 2025-26 तक इनकी संख्या बढ़कर 103 हो गई है। इनमें 59 विद्यालय सीबीएसई तथा 44 विद्यालय यूपी बोर्ड से संबद्ध हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। साथ ही विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। 

वृद्धावस्था पेंशन को लेकर सीएम के निर्देश

बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वृद्धावस्था पेंशन के लिए पात्र किंतु अब तक वंचित वृद्धजनों के आवेदनों का सत्यापन कराते हुए यथाशीघ्र उन्हें पेंशन से लाभान्वित कराया जाए। उन्होंने कहा कि पात्र वृद्धजनों को अनावश्यक रूप से प्रतीक्षा न करनी पड़े और आवेदन के सत्यापन से लेकर पेंशन स्वीकृति तक की प्रक्रिया समयबद्ध हो। बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत वर्ष 2017-18 में 37.47 लाख लाभार्थियों की संख्या बढ़कर वर्ष 2025-26 में 67.50 लाख हो गई है। वर्तमान में लगभग 11.50 लाख नए आवेदन लंबित हैं।

 

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराने और योजना की पहुंच तथा प्रभावशीलता को और बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने तथा श्रेष्ठ शिक्षकों और विशेषज्ञों के अनुभव का अधिक से अधिक विद्यार्थियों को लाभ दिलाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि योजना प्रदेश के सभी 75 जनपदों में 163 केंद्रों के माध्यम से संचालित है। इन केंद्रों पर 1,783 इम्पैनल्ड शिक्षक हैं तथा यूपीएससी, पीसीएस, नीट, जेईई, एनडीए/सीडीएस सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 23,801 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। योजना के अंतर्गत चार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी संचालित हैं।

छात्रवृत्ति का लाभ प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को मिले

छात्रवृत्ति वितरण की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रवृत्ति का लाभ प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को समय से मिलना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति से वंचित विद्यार्थियों के लिए आवेदन पोर्टल तत्काल खोला जाए और हर हाल में 02 अक्टूबर तक छात्रवृत्ति की धनराशि अंतरित कर दी जाए। उन्होंने छात्रवृत्ति वितरण में आने वाली तकनीकी और प्रक्रियागत कठिनाइयों का त्वरित समाधान करते हुए पात्र विद्यार्थियों को अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि विभिन्न कारणों से छात्रवृत्ति से वंचित रह गए लगभग 3.16 लाख विद्यार्थियों को पुनः अवसर देने की व्यवस्था की जा रही है। इनमें 31,836 शासकीय, 69,631 अनुदानित तथा 2,46,426 निजी संस्थानों के विद्यार्थी शामिल हैं।

युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाएं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग की कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए कहा कि आईटीआई को अधिक से अधिक उद्योगों से जोड़ा जाए। उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण विकसित करने के साथ ही अप्रेंटिसशिप तथा ऑन-जॉब प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाए, ताकि प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि कौशल विकास को रोजगार के साथ वैश्विक अवसरों से भी जोड़ा जाए। आईटीआई और उद्योगों के बीच निरंतर संवाद की व्यवस्था होनी चाहिए और प्रत्येक मंडल मुख्यालय पर नियमित रोजगार मेलों का आयोजन किया जाए।

 

मुख्यमंत्री ने सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्वेंशन, इन्क्यूबेशन एंड ट्रेनिंग (सीआईआईआईटी) केंद्रों की प्रगति की समीक्षा करते हुए गोरखपुर, मुजफ्फरनगर और बरेली केंद्रों का संचालन शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों को आधुनिक तकनीक और उद्योग आधारित प्रशिक्षण के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से 150 राजकीय आईटीआई के उन्नयन का कार्य किया जा रहा है, जबकि 62 अन्य आईटीआई के उन्नयन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। उद्योगों के सहयोग से 37 राजकीय आईटीआई में एडवांस स्किल लैब स्थापित की गई हैं।

Simple Wave Electric Scooter की लॉन्च डेट, डिजाइन, रेंज और कीमत का खुलासा, Bajaj Chetak C25 और TVS Orbiter से मुकाबला

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simple electric scooter

Simple Energy ने अपनी आगामी इलेक्ट्रिक स्कूटर Wave से जुड़ी नई जानकारी साझा की है। कंपनी ने पहले इस मॉडल को ‘Arrive’ नाम से पेश करने की बात कही थी, लेकिन अब इसका प्रोडक्शन वर्जन Simple Wave नाम से बाजार में आएगा। कंपनी इसे 2 सितंबर 2026 को लॉन्च करेगी। नई Wave को खास तौर पर ऐसे परिवारों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जो रोजाना शहर में आने-जाने के लिए किफायती और आरामदायक इलेक्ट्रिक स्कूटर चाहते हैं। यह कंपनी के मौजूदा Simple One से नीचे पोजिशन की जाएगी।

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छोटे शहरों पर Simple Energy का फोकस

 

Simple Energy का लक्ष्य Wave के जरिए Tier-2 और Tier-3 शहरों में अपनी पकड़ मजबूत करना है। इसके लिए कंपनी अपने डीलरशिप नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार कर रही है। फिलहाल कंपनी के पास करीब 75 डीलरशिप हैं। Simple Energy की योजना इस वित्त वर्ष के अंत तक इनकी संख्या बढ़ाकर 150 से 200 आउटलेट करने की है। इससे कंपनी को देश के छोटे शहरों और कस्बों में ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

 

परिवारों के लिए बनाया गया डिजाइन

 

Simple Wave में बॉक्सी और प्रैक्टिकल डिजाइन देखने को मिलेगा। इसमें बड़ा सीट सेटअप दिया जाएगा, जिससे राइडर और पीछे बैठने वाले व्यक्ति को बेहतर आराम मिलने की उम्मीद है। स्कूटर में चौड़ा फ्लोरबोर्ड भी मिलेगा। इससे रोजमर्रा का सामान रखने और पैरों के लिए ज्यादा जगह मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर इसका डिजाइन उन परिवारों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिन्हें शहर में रोजाना इस्तेमाल के लिए आरामदायक और आसान स्कूटर चाहिए।

 

180 किमी तक की रेंज मिलने की उम्मीद

 

Simple Energy ने अभी Wave के सभी स्पेसिफिकेशन का खुलासा नहीं किया है। हालांकि, रिपोर्ट्स और संभावित जानकारी के मुताबिक, इसमें करीब 180 किमी प्रति चार्ज की राइडिंग रेंज मिल सकती है।

 

इसकी अनुमानित कीमत करीब 1.30 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) हो सकती है। हालांकि, बैटरी, रेंज और कीमत की आधिकारिक जानकारी लॉन्च के करीब सामने आने की उम्मीद है।

 

सस्पेंशन और ब्रेकिंग में होंगे बदलाव

 

Simple Wave में कंपनी Simple One वाले प्लेटफॉर्म के बेस का इस्तेमाल कर सकती है, लेकिन इसके हार्डवेयर में बदलाव किए जाएंगे। स्कूटर में टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क और ट्विन रियर शॉक एब्जॉर्बर दिए जाने की संभावना है। वहीं Simple One में मोनोशॉक सेटअप मिलता है। ब्रेकिंग के लिए Wave में फ्रंट डिस्क ब्रेक और रियर ड्रम ब्रेक दिया जाएगा। यह सेटअप रोजाना शहर में इस्तेमाल के लिए पर्याप्त ब्रेकिंग क्षमता देने के उद्देश्य से रखा गया है।

 

Bajaj Chetak C25 और TVS Orbiter से मुकाबला

 

लॉन्च के बाद Simple Wave का मुकाबला किफायती फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में Bajaj Chetak C25 और TVS Orbiter जैसे मॉडल से हो सकता है। कंपनी Wave को ज्यादा किफायती, आरामदायक और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए उपयोगी इलेक्ट्रिक स्कूटर के तौर पर पेश करेगी। अब सभी की नजरें 2 सितंबर 2026 को होने वाले लॉन्च पर हैं, जहां इसकी कीमत, बैटरी और रेंज की पूरी जानकारी सामने आ सकती है।

मैडम और सर बाथरूम में प्यार करते हैं, पढ़ाते नहीं, स्‍कूल की जल्‍दी छुट्टी कर देते हैं, बच्‍चों की शिकायत पर जांच शुरू

मैडम और सर बाथरूम में प्यार करते हैं, पढ़ाते नहीं, स्‍कूल की जल्‍दी छुट्टी कर देते हैं, बच्‍चों की शिकायत पर जांच शुरू

sexual intimacy

सर और मैडम बाथरूम में बंद होकर प्‍यार करते हैं। पढ़ाते नहीं और स्‍कूल की जल्‍दी छुट्टी कर देते हैं, अंदर बंद होकर प्‍यार करते हैं और किसी को अंदर आने भी नहीं देते। यह आरोप है स्‍कूल की छात्राओं का। दरअसल, छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव इलाके के बिचबेहरी गांव के सरकारी स्कूल की छात्राओं का एक वीडियो वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में वे कह रही हैं कि सर और मैडम स्कूल आते तो हैं लेकिन हमें पढ़ाते नहीं है। वे हमारी जल्दी छुट्टी कर बाथरूम में बंद होकर प्यार करते हैं। हमारे स्कूल का टाइम 4 बजे तक है। लेकिन हमारी 3 बजे ही छुट्‌टी कर दी जाती है।

छात्राओं ने ये बात स्कूल के टीचर इंचार्ज और गेस्ट फीमेल टीचर के बारे में की। 15 अगस्त 2026 को स्टूडेंट्स ने दोनों के आपत्तिजनक व्यवहार से संबंधित वीडियो बनाकर उसे वायरल कर दिया।

बता दें कि पहले यह मामला ग्राम सभा में पहुंचा और उसके बाद कलेक्टर की जनसुनवाई में। स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं के पेरेंट्स का कहना है। बच्चे अभी छोटे हैं। अगर स्कूल में टीचर ऐसे गलत काम करेंगे तो बच्चों पर इसका क्या असर होगा। इसलिए दोनों टीचर को स्कूल से हटाकर किसी दूसरे टीचर की नियुक्ति की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई ठीक से हो सके।

छात्राओं ने टीचर की शिकायत करते हुए कहा- हमारे स्कूल में पढ़ाई पूरी तरह बंद हैं। दोनों टीचर पढ़ाने के बजाय दिनभर मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। स्कूल की छुट्‌टी का समय शाम 4:30 बजे तक है, लेकिन बच्चों की 3 बजे ही छुट्‌टी कर दी जाती है। बच्चों ने खुलकर आरोप लगाया कि छात्रों को घर भेजने के बाद दोनो बाथरूम में बंद होकर प्यार करते हैं। इस दौरान किसी भी छात्र को अंदर जाने की अनुमति नहीं होती है। बता दें कि अधिकारियों के रवैये से तंग आकर ग्रामीणों ने 16 अगस्त को आयोजित ग्रामसभा की बैठक में दोनों टीचर्स को तत्काल पद से हटाने की मांग की थी।

आरोपों पर बोलें टीचर्स : बच्‍चों के आरोपों पर टीचर का कहना है कि हमें बेवजह बदनाम किया जा रहा है। बच्चे किसी बहकावे में आकर ऐसा कर रहे हैं, क्योंकि यहां पर किसी और ने भी गेस्ट टीचर बनने के लिए आवेदन दिया है, उनका नाम वेटिंग लिस्ट में है। मुझे हटाकर दूसरे का नाम आ जाए, इसलिए ऐसा किया जा रहा है।

तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

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CJP Abhijeet Dipke TN CM Vijay

CJP Abhijeet Dipke Tamil Nadu CM Vijay: देश में सरकारी स्कूलों की बदहाली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का 'स्कूल ठीक करो' आंदोलन अब एक देशव्यापी जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। इसी बीच, तमिलनाडु सरकार द्वारा छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर लगाए गए प्रतिबंध के आदेश को वापस लेने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने तीखा हमला बोला है। एक इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने तमिलनाडु सरकार, पश्चिम बंगाल में एक छात्र के पिता की हत्या, सुप्रीम कोर्ट के एफआईआर वापसी के निर्देश और 'पीएम केयर्स फंड' जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी बात बेबाकी से रखी।   

अगर डर लग रहा है तो स्कूल ठीक करो

हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की सरकार ने शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन को एक विवादास्पद आदेश जारी किया था, जिसके तहत छात्रों को CJP और वामपंथी दलों द्वारा आयोजित 'स्कूल ठीक करो' जैसे आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, भारी जन-विरोध के बाद सरकार ने यह आदेश वापस ले लिया है। ALSO READ: तमिलनाडु की विजय सरकार का यू-टर्न, CJP और लेफ्ट के प्रदर्शन में जाने से छात्रों को रोकने वाला आदेश वापस

 

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि ऐसा आदेश आना ही गलत था। आंदोलन करना और अपनी बात रखना नागरिकों का मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकार (Fundamental Right) है। ऐसे आदेश दिखाते हैं कि सरकारें जनता और छात्रों से डर रही हैं। अगर आपको डर है कि लोग वीडियो बना लेंगे या बदनामी होगी, तो स्कूलों की हालत सुधार दीजिए! लोग रोकने के बजाय आपकी तारीफ में वीडियो बनाएंगे। ALSO READ: आखिर क्‍यों CM विजय थलापति ने वापस लिया स्‍टूडेंट को कॉकरोचों से दूर रखने वाला आदेश, क्‍या है वजह?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी धोखा दे रही सरकार?

दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन और जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुई एफआईआर (FIR) के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सभी मुकदमों का ब्योरा मांगा था ताकि उन्हें निरस्त (Quash) किया जा सके। इस पर दीपके ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले सरकारें सुप्रीम कोर्ट के कंधों पर बंदूक रखकर यह बहाना बनाती थीं कि अदालत की वजह से केस वापस नहीं लिए जा सकते। लेकिन अब जब सुप्रीम कोर्ट खुद केस खत्म करने को तैयार है, तब भी सरकारें डेटा जमा नहीं कर रही हैं। यह देश के युवाओं के साथ सीधी धोखाधड़ी है।  

PM CARES में 8000 करोड़ की FD क्यों? शिक्षा नीति पर उठाया सवाल

CJP नेता अभिजीत दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर 'PM CARES Fund' में जमा पड़ी विशाल धनराशि पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने बताया कि एक तरफ देश के गरीब बच्चे बिना पीने के पानी, टूटी बेंचेस और जर्जर क्लासरूम में पढ़ने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ PM CARES Fund में लगभग 8,000 करोड़ रुपए बिना किसी इस्तेमाल के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में पड़े हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह पैसा किसी नेता के रिटायरमेंट के लिए बचाकर रखा गया है? जब देश के बच्चे एक अच्छे स्कूल और सड़कों के लिए रो रहे हैं, तो इस पैसे का इस्तेमाल देश में हाई-टेक मॉडल स्कूल बनाने के लिए क्यों नहीं किया जा रहा?

पश्चिम बंगाल में स्कूल की बदहाली का वीडियो बनाया तो हेट क्राइम का शिकार हुए अब्दुल के पिता

पश्चिम बंगाल के बांकुरा में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना पर दीपके बेहद भावुक और आक्रोशित नजर आए। 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत अपने पुराने सरकारी स्कूल का वीडियो बनाने और बदहाली उजागर करने के कारण अब्दुल हफीज के परिवार पर प्राणघातक हमला हुआ, जिसमें उनके पिता की जान चली गई।  

  • हेट क्राइम का आरोप : पुलिस रिपोर्ट्स में पकड़े गए आरोपियों का संबंध राजनीतिक पृष्ठभूमि से बताया गया है। दीपके ने इसे साफ तौर पर 'हेट क्राइम' करार दिया।
  • मुआवजा नहीं, स्कूल चाहिए : अब्दुल के जज्बे को सलाम करते हुए दीपके ने कहा कि पिता को खोने के बाद भी उस लड़के ने कोई आर्थिक मुआवजा (Compensation) नहीं मांगा। उसकी एक ही मांग है कि उसके गांव में एक वर्ल्ड क्लास स्कूल बने और उसका नाम उसके दिवंगत पिता के नाम पर रखा जाए। इससे बड़ा देशभक्त कोई नहीं हो सकता।  

गांधी के विचारों को कोई नहीं मार सकता

आंदोलन पर उठे हिंसा और अराजकता के सवालों पर जवाब देते हुए दीपके ने कहा कि आज जब महात्मा गांधी का परिवार खुद इस मुहिम के साथ खड़ा है, तो इससे बड़ा देशभक्ति का कोई प्रमाण पत्र नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन नेपाल या बांग्लादेश जैसी हिंसक घटनाओं पर आधारित नहीं, बल्कि महात्मा गांधी, मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला के अहिंसक और शांतिपूर्ण रास्तों पर चलता है। जिस विचारधारा ने गांधी की हत्या की थी, वे आज भी उनके विचारों को खत्म करना चाहते हैं, लेकिन भारत की आत्मा गांधी के सिद्धांतों में ही बसती है।