क्या भारत में और महंगी होने वाली है चीनी और क्यों करना पड़ रहा है आयात?

क्या भारत में और महंगी होने वाली है चीनी और क्यों करना पड़ रहा है आयात?

tax free Sugar Import in India

आगामी त्यौहारी सीजन (गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली) से ठीक पहले देश में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। Mint की रिपोर्ट के अनुसार, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 10 लाख मीट्रिक टन (1 Million Tonnes) कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात (Duty-Free Import) की अनुमति दे दी है। ALSO READ: Sugar Price : चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं? 15 दिन में 20 रुपए महंगी हुई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जानें आपके लिए क्या बदलेगा

 

1. आयात करने की नौबत क्यों आई?

गन्ने के उत्पादन और स्टॉक में कमी: मानसून की अनिश्चितता और चीनी सत्र (2025-26) में गन्ने की पैदावार पर असर पड़ने से चीनी मिलों के पास शुरुआती स्टॉक (Opening Stock) कम रहने का अनुमान है।
एथेनॉल निर्माण में इस्तेमाल: गन्ने के रस और सीरे का एक बड़ा हिस्सा पेट्रो-ईंधन में मिलाने वाले एथेनॉल (Ethanol) बनाने में डायवर्ट किया गया, जिससे शुद्ध चीनी उत्पादन में थोड़ी गिरावट आई।
त्यौहारी मांग: अगस्त से नवंबर के बीच मिठाइयों और प्रोसेस्ड फूड की मांग सबसे ज्यादा होती है। बाजार में चीनी की कमी की आशंका से थोक कीमतें बढ़ने लगी थीं।

  

2. निर्यात से आयात का सफर: जिम्मेदार कौन?

भारत यूएई, बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान जैसे देशों को चीनी निर्यात कर विदेशी मुद्रा कमाता रहा है। हालांकि, स्थिति अचानक नहीं बदली:

अनुमान में चूक और निर्यात अनुमति: सरकार ने सत्र की शुरुआत में करीब 8 लाख टन से अधिक चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। जब domestic स्टॉक कम होने लगा, तब मई में निर्यात पर पूरी तरह से रोक लगाई गई।

जमाखोरी पर कसता शिकंजा: सरकार ने बड़े खरीदारों (जैसे कोल्ड ड्रिंक्स और कंफेक्शनरी कंपनियों) के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी है ताकि बाजार में कृत्रिम किल्लत न पैदा हो।  

 

3. क्या होगा आम जनता पर असर?

100% कस्टम ड्यूटी हटाने का उद्देश्य यही है कि विदेशों से आने वाली कच्ची चीनी भारत में रिफाइन होकर घरेलू बाजार में सही दामों पर उपलब्ध हो सके। सरकार का लक्ष्य खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखना है, जिससे आम उपभोक्ता को त्यौहारी सीजन में अचानक आई महंगाई का सामना न करना पड़े।