विवाद के बाद मतदाता सूची की समीक्षा की घोषणा

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में गड़बड़ियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब 17 राज्यों में मतदाता सूची की स्पेशल समरी रिवीजन यानी एसएसआर का ऐलान किया है। गौरतलब है कि मतदाता सूची का समरी रिवीजन यानी संक्षिप्त समीक्षा हमेशा चलती रहती है। इस बार स्पेशल समरी रिवीजन की घोषणा हुई है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान सहित 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह काम होगा।

संक्षिप्त समीक्षा के दौरान मतदाता सूची को और अद्यतन बनाया जाएगा। इसमें नए नाम जोड़े जाएंगे और पहले से दर्ज जानकारी में गलतियां सुधारी जाएंगी। आयोग ने कहा है कि 2027 में 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवा भी मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे। गौरतलब है कि एसआईआर के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 13 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।

बहरहाल, चुनाव आयोग ने कहा है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है, वहां एसएसआर का शेड्यूल बाद में घोषित किया जाएगा। चुनाव आयोग ने कहा है कि एसएएआर का मकसद वोटर लिस्ट को सही और अपडेट रखना है। इसके तहत पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, दर्ज जानकारी में गलतियां सुधारने और जरूरी बदलाव करने का काम होगा। इसमें युवाओं और पहली बार वोट देने वाले लोगों को शामिल करने पर खास ध्यान दिया जाएगा।

आयोग ने बताया है कि एक जनवरी 2027 के अलावा एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्टूबर 2027 को 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवा भी पहले से आवेदन कर सकेंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक दो नवंबर 2026 तक मतदान केंद्रों की व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। इसके बाद 12 नवंबर को मतदाता सूची की मसौदा कॉपी जारी होगी। मसौदा सूची में नाम या जानकारी को लेकर 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इनका निपटारा 28 दिसंबर तक किया जाएगा। इसके बाद चार जनवरी 2027 को वोटर लिस्ट की अंतिम सूची जारी होगी।

धर्म बदलने वालों को नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने धर्म परिवर्तन के बाद भी आरक्षण लेने के मामले में निर्णायक फैसला सुना दिया है। सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को अपने फैसले में कहा कि धर्म बदल कर मुस्लिम या ईसाई बनने वालों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू धर्म से गैर हिंदू धर्म अपनाने वाला व्यक्ति पुराने सामाजिक दर्जे के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मांग सकता। अदालत ने इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रखा है।

गौरतलब है कि तमिलनाडु सरकार ने नौ मार्च 2024 को पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति आदि के लोगों को इस्लाम अपनाने के बाद मुस्लिम पिछड़ा वर्ग में शामिल करने की अनुमति दी थी। हालांकि मद्रास हाई कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस चंद्रशेखर की बेंच ने कहा कि हिंदू व्यवस्था से गैर हिंदू व्यवस्था में जाने वाला व्यक्ति संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत सिर्फ पुराने सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर एफर्मेटिवएक्शन का लाभ लेने का दावा नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के 1950 के अनुसूचित जाति आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति का दर्जा हिंदू, बौद्ध या सिख धर्म के अलावा दूसरे धर्मों के लोगों को नहीं दिया जा सकता।

अदालत ने कहा कि धर्म बदलते ही व्यक्ति का अपनी मूल जाति से जुड़ा अनुसूचित जाति दर्जा खत्म हो जाता है। असल में समीर अहमद नाम के व्यक्ति ने 2015 में इस्लाम अपनाया। उसने धर्म परिवर्तन के बाद भी पिछड़ा वर्ग आरक्षण का लाभ लेने का प्रयास किया। सरकार उसको लाभ देने को तैयार थी। लेकिन हाई कोर्ट ने 25 जून 2026 को सरकार के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने साफ किया कि सिर्फ इस्लाम धर्म अपनाने भर से कोई व्यक्ति राज्य के तयशुदा मुस्लिम पिछड़े वर्गों का हिस्सा नहीं बन जाता। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस फैसले को बरकरार रखा है।

दिल्ली में CJP के तिरंगा मार्च से पहले बड़ा फैसला, 16-17 अक्टूबर को बंद रहेगा कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क

दिल्ली में CJP के तिरंगा मार्च से पहले बड़ा फैसला, 16-17 अक्टूबर को बंद रहेगा कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क

delhi police

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए आम लोगों के लिए बंद करने का फैसला किया है। NDMC की ओर से 15 अक्टूबर को जारी सार्वजनिक नोटिस के अनुसार, पार्क 16 और 17 अक्टूबर को प्रशासनिक कारणों से बंद रहेगा। हालांकि, अधिकारियों ने पार्क बंद करने के पीछे के विशिष्ट कारणों पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज के साथ जुटने की अपील की है। ऐसे में पार्क बंद करने के फैसले को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले की तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है, हालांकि NDMC ने आधिकारिक तौर पर इसकी वजह स्पष्ट नहीं की है।

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सेंट्रल पार्क के पांचों गेट रहेंगे बंद

कनॉट प्लेस के बीचोंबीच स्थित सेंट्रल पार्क राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के ऊपर बना है। करीब 41,500 वर्ग मीटर में फैले इस पार्क में चार जलाशय, 350 लोगों की क्षमता वाला एम्फीथिएटर और 207 फुट ऊंचे स्तंभ पर लगा विशाल राष्ट्रीय ध्वज है। NDMC के एक अधिकारी के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों से पार्क बंद रखने के निर्देश मिले हैं। इसके तहत पार्क के सभी पांच प्रवेश द्वार बंद किए जाएंगे। NDMC का उद्यान विभाग इस पार्क की देखरेख करता है। अधिकारी ने बताया कि पार्क का एम्फीथिएटर सरकारी कार्यक्रमों के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। सप्ताहांत में यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

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राष्ट्रीय ध्वज के पास लोगों को रोकना हो सकता है चुनौतीपूर्ण

अधिकारी के अनुसार, पार्क की चारदीवारी की रेलिंग लगभग तीन से चार फुट ऊंची है। ऐसे में लोगों को पार्क में प्रवेश करने से रोकना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। पार्क के एक कोने में लगा विशाल राष्ट्रीय ध्वज भी अंदरूनी सड़क से कुछ ही दूरी पर स्थित है। अधिकारी ने कहा कि ध्वज के पास लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है और ऐसी स्थिति में कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी पुलिस की होगी।

 

दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च पर रोक लगाने से किया इनकार

 

सेंट्रल पार्क बंद करने का फैसला ऐसे समय आया है, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने CJP और अभिजीत दिपके के प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने दिल्ली पुलिस के इस आश्वासन को दर्ज किया कि वह कानून के अनुसार भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। अदालत में याचिका पालिका बाजार के एक रेहड़ी-पटरी विक्रेता ने दायर की थी। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई थी कि प्रदर्शन से कनॉट प्लेस में कारोबार प्रभावित हो सकता है और त्योहारों के मौसम में व्यापारियों तथा छोटे विक्रेताओं की आजीविका पर असर पड़ सकता है। इस मामले में अगली सुनवाई 3 नवंबर को निर्धारित की गई है।

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क्यों निकाला जा रहा है ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च?

 

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पार्टी के कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की गिरफ्तारी के विरोध में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च का आह्वान किया है। दोनों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किए जाने के बाद पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया और तिहाड़ जेल में रखा गया। पुलिस के आरोपों के अनुसार, दोनों कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश किया और तिरंगा लहराया। CJP के कुछ सदस्यों पर बैरिकेड पार करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाने का भी आरोप है। पुलिस ने गिरफ्तारियों के संबंध में निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन का हवाला दिया है। दिपके का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज लहराना अपराध नहीं है। उन्होंने समर्थकों से दूसरे शहरों में भी इसी तरह के मार्च आयोजित करने की अपील की है।

 

यह घटनाक्रम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य सत्तारूढ़ भाजपा को फायदा पहुंचाना है।

cjp press confrance

जंतर-मंतर के बाद प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थल

 

दिल्ली पुलिस ने हाल ही में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के बाद तीन वैकल्पिक स्थानों की पहचान की है। इनमें मध्य दिल्ली का रामलीला मैदान, उत्तरी दिल्ली का बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का CBD मैदान शामिल हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के उस आदेश के बाद उठाया गया, जिसमें सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लोगों के विरोध प्रदर्शन के अधिकार के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को हाईकोर्ट को जंतर-मंतर से संबंधित फैसले की जानकारी दी थी।

 

कनॉट प्लेस में ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर

 

प्रस्तावित मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस के अधिकारी सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर रहे हैं। इसमें कनॉट प्लेस और मध्य दिल्ली के अन्य हिस्सों में संभावित ट्रैफिक प्रतिबंधों और रूट डायवर्जन पर भी विचार किया जा रहा है। प्रशासन के सामने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आम यात्रियों, दुकानदारों और बाजार आने वाले लोगों की आवाजाही सामान्य रखने की चुनौती होगी। ऐसे में कनॉट प्लेस जाने वाले लोगों को निकलने से पहले यातायात और सुरक्षा संबंधी आधिकारिक अपडेट देख लेने चाहिए।

दिल्ली की रामलीला में 30 फुट के ‘कॉकरोच’ का होगा दहन, रावण-कुंभकर्ण और मेघनाद के साथ जलेगा पुतला

दिल्ली की रामलीला में 30 फुट के 'कॉकरोच' का होगा दहन, रावण-कुंभकर्ण और मेघनाद के साथ जलेगा पुतला

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल रामलीला के दौरान रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ 30 फुट ऊंचे ‘कॉकरोच’ यानी तिलचट्टे के पुतले का भी दहन किया जाएगा। आयोजकों के मुताबिक इस पहल का उद्देश्य गंदगी के खिलाफ संदेश देना और स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करना है।

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पीतमपुरा में रामलीला का आयोजन करने कमेटी के मुताबिक, तिलचट्टे का पुतला गंदगी और कूड़े-कचरे का प्रतीक है। इसके दहन की पहल को केंद्र सरकार के ‘स्वच्छ भारत’ अभियान और दिल्ली में स्वच्छता से जुड़े प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है।

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कमेटी के मुताबिक इसका मकसद बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश के साथ स्वच्छता का महत्व भी लोगों तक पहुंचाना है। कमेटी का कहना है कि तिलचट्टे को रावण की सेना में शामिल असुरों में से एक के रूप में भी दिखाया जाएगा। इस तरह रामलीला में पारंपरिक रूप से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के दहन के साथ एक नया प्रतीक भी जोड़ा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मीडिया रिपोर्ट के आधार पर नहीं ले रहे संज्ञान, CJP प्रदर्शन मामले में केंद्र ने दी माफी पर सफाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मीडिया रिपोर्ट के आधार पर नहीं ले रहे संज्ञान, CJP प्रदर्शन मामले में केंद्र ने दी माफी पर सफाई

दिल्ली में 10 अक्टूबर को SIR के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान मेट्रो और ट्रेन सेवाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के कथित उल्लंघन के मामले में केंद्र सरकार ने अदालत में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांगने से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के आधार पर संज्ञान नहीं ले रहा है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि अधिकारियों ने अपने हलफनामों में कार्रवाई का बचाव भी किया है और उसके कारण स्पष्ट किए हैं।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। तुषार मेहता ने कहा कि मीडिया और सोशल मीडिया में हलफनामों के शुरुआती पैराग्राफ के आधार पर यह संदेश दिया जा रहा है कि सरकार ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है, जबकि अधिकारियों ने अपने कदमों के समर्थन में विस्तृत स्पष्टीकरण भी दिया है।

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केंद्र ने कहा- हलफनामे में माफी का उल्लेख कानूनी प्रक्रिया के तहत

 

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अवमानना नोटिस के जवाब में हलफनामा दाखिल करते समय पहले बिना शर्त माफी मांगने का उल्लेख किया जाता है। इसके बाद संबंधित पक्ष यह बताता है कि उसके अनुसार अदालत की अवमानना क्यों नहीं हुई।

 

उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की ओर से दाखिल हलफनामों में भी इसी प्रक्रिया का पालन किया गया है। मेहता के मुताबिक, सरकार ने अपनी कार्रवाई का बचाव किया है और मीडिया में दिखाई जा रही तस्वीर पूरी स्थिति को नहीं दर्शाती। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मीडिया क्या प्रकाशित करता है, यह अदालत की कार्यवाही के लिए प्रासंगिक नहीं है। अदालत मीडिया के लिए कार्यवाही नहीं कर रही है।

 

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने भी कहा कि अदालत सॉलिसिटर जनरल द्वारा संदर्भित माफी को अलग से आधार बनाकर संज्ञान नहीं ले रही है। मेहता ने स्पष्ट किया कि माफी बिना शर्त है और उसके बाद हलफनामों में कार्रवाई से जुड़े तथ्य और कारण दिए गए हैं।

 

9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से जुड़ा है मामला

 

यह अवमानना मामला 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से बुलाए गए प्रदर्शन से संबंधित है। आरोप था कि प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर ऐसी पाबंदियां लगाई गईं, जो सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के निर्देशों का उल्लंघन कर सकती थीं।

 

अदालत ने अपने निर्देशों में कहा था कि प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए। इसके बाद केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC की ओर से संबंधित कार्रवाई के बारे में हलफनामे दाखिल किए गए।

 

गृह सचिव ने इंटरनेट बंद करने के फैसले का किया बचाव

 

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने अपने हलफनामे में कहा कि दिल्ली पुलिस की ओर से 10 अक्टूबर को रात 10 बजे तक एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने का अनुरोध मिला था। उनके अनुसार, इस अनुरोध पर कानून के तहत विचार किया गया और तत्कालीन परिस्थितियों तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत को देखते हुए इसे उचित माना गया।

 

हलफनामे के मुताबिक, रायसीना हिल के चार किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित की गई थीं।

 

गृह सचिव ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध केवल मोबाइल नेटवर्क के जरिए मिलने वाली इंटरनेट सेवाओं पर था। वाई-फाई, ब्रॉडबैंड और अन्य गैर-मोबाइल इंटरनेट सेवाएं इसके दायरे में नहीं थीं।

 

दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और खुफिया इनपुट का दिया हवाला

 

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने अपने हलफनामे में कहा कि 10 अक्टूबर को उठाए गए एहतियाती कदम खुफिया सूचनाओं और मौके पर बदलती परिस्थितियों के आकलन पर आधारित थे। उनके अनुसार, मेट्रो सेवाओं को नियंत्रित करने सहित अन्य कदमों का उद्देश्य शांति बनाए रखना और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने से रोकना था।

 

पुलिस आयुक्त ने राष्ट्रीय राजधानी की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए भीड़ की हिंसा, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचने तथा 6, 7 और 8 अक्टूबर की घटनाओं से जुड़े कथित नुकसान और चोटों का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की कार्रवाई को लेकर गलत नैरेटिव फैलाया जा रहा है।

 

DMRC का दावा- 303 में से 258 मेट्रो स्टेशन सामान्य रूप से चलते रहे

 

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने अपने हलफनामे में कहा कि प्रदर्शन के कारण मेट्रो सेवाएं न तो बंद की गई थीं और न ही रद्द की गई थीं। हालांकि, कुछ चुनिंदा स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को सीमित किया गया था।

 

DMRC के मुताबिक, 303 में से 45 स्टेशनों पर 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से 10 अक्टूबर तक पाबंदियां लागू थीं। यह मेट्रो नेटवर्क के करीब 15 प्रतिशत स्टेशनों के बराबर है। शेष 258 स्टेशनों पर यात्रियों के लिए सामान्य पहुंच जारी रही। DMRC ने बताया कि 10 अक्टूबर को करीब 32 लाख यात्रियों ने मेट्रो से सफर किया, जबकि सामान्य दूसरे शनिवार को यह संख्या लगभग 58 लाख रहती है। निगम ने कम यात्रियों की संख्या को प्रदर्शन के कारण आम यात्रियों को हुई परेशानी के प्रभाव के रूप में पेश किया।

 

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट में अवमानना कार्यवाही के दौरान केंद्र और संबंधित एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई के पक्ष में दलीलें दी हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वह मीडिया रिपोर्टों के आधार पर नहीं, बल्कि मामले में दाखिल जवाब और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी।

Voter List Update: 17 राज्यों में वोटर लिस्ट का रिवीजन करेगा चुनाव आयोग, 2027 में 18 साल के होने वाले युवा भी कर सकेंगे आवेदन

Voter List Update: 17 राज्यों में वोटर लिस्ट का रिवीजन करेगा चुनाव आयोग, 2027 में 18 साल के होने वाले युवा भी कर सकेंगे आवेदन

वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) का आदेश दिया है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, छूटे हुए नाम शामिल करने और सूची को अपडेट करने का काम किया जाएगा।

 

चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक, इस पुनरीक्षण के लिए 1 जनवरी 2027 को क्वालिफाइंग डेट निर्धारित किया गया है। इसका मतलब है कि इस तारीख तक 18 साल की उम्र पूरी करने वाले पात्र युवा मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।

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किन 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा SSR?

 

चुनाव आयोग ने जिन 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का आदेश दिया है, उनमें ये शामिल हैं:

 

  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
  • असम
  • बिहार
  • छत्तीसगढ़
  • गोवा
  • गुजरात
  • केरल
  • लक्षद्वीप
  • मध्य प्रदेश
  • मणिपुर
  • पुडुचेरी
  • पंजाब
  • राजस्थान
  • तमिलनाडु
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • पश्चिम बंगाल

 

इनमें से उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और गुजरात में 2027 में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

2027 में 18 साल के होने वाले युवाओं को भी मिलेगा मौका

 

चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के नामांकन के लिए चार क्वालिफाइंग डेट का प्रावधान बताया है। इसके तहत 1 जनवरी 2027 के अलावा 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को 18 साल की उम्र पूरी करने वाले पात्र युवा भी अग्रिम आवेदन कर सकेंगे।

 

इस व्यवस्था का उद्देश्य पहली बार मतदान के पात्र बनने वाले युवाओं को मतदाता सूची में शामिल होने का अवसर देना है। आयोग ने इससे पहले 29 सितंबर को भी छूटे हुए और पहली बार मतदाता बनने के पात्र युवाओं के नामांकन के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। ध्यान रहे कि आवेदन करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों का पालन करना होगा। आवेदन करने के बाद नाम मतदाता सूची में शामिल हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि करना भी जरूरी है।

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जिन राज्यों में SIR चल रहा है, वहां बाद में आएगा कार्यक्रम

 

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चल रही है या हाल ही में पूरी हुई है, वहां SSR का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।

 

इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना शामिल हैं।

 

हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए क्या है व्यवस्था?

 

आयोग के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अभी SIR शुरू नहीं हुआ है। इन क्षेत्रों में मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्यक्रम तय किया जाएगा।

 

मतदाता अपना नाम कैसे जुड़वाएं?

 

जो युवा निर्धारित तारीखों पर 18 साल के हो रहे हैं और अन्य पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाना चाहते हैं, वे चुनाव आयोग के आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल Voters’ Services Portal के माध्यम से आवेदन और संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और अपने क्षेत्र में लागू कार्यक्रम की जानकारी आधिकारिक चुनाव आयोग की वेबसाइट से जांच लें।

‘नारीशक्ति समर्थ तो राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल’, मां स्कंदमाता के पूजन पर CM योगी का बड़ा संदेश

'नारीशक्ति समर्थ तो राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल', मां स्कंदमाता के पूजन पर CM योगी का बड़ा संदेश

Yogi adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जगतजननी मां भगवती के स्कंदमाता स्वरूप को वात्सल्य, ममता और पोषण की अधिष्ठात्री देवी बताया। उन्होंने कहा कि मां स्कंदमाता की आराधना हमें यह पावन संदेश देती है कि जब नारीशक्ति स्वस्थ, शिक्षित और समर्थ होती है, तभी राष्ट्र का वर्तमान सुरक्षित और भविष्य उज्ज्वल होता है।

 

2017 से पहले सिर्फ उपेक्षा एवं भ्रष्टाचार

सीएम ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि वर्ष 2017 से पहले बेटियों को संबल देने के बजाय पूर्ववर्ती सरकारें केवल अपने राजनीतिक कुनबे को पोषित करने में व्यस्त थीं। प्रदेश में माताओं का स्वास्थ्य और बेटियों की शिक्षा घोर उपेक्षा एवं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई थी। अस्पतालों की बदहाली, दवाओं का अभाव और संस्थागत प्रसव की लचर व्यवस्था के कारण मातृ-शिशु मृत्यु दर चिंताजनक स्थिति में थी। 

 

डबल इंजन सरकार ने बनाया समग्र सुरक्षा एवं कल्याण चक्र

मुख्यमंत्री ने लिखा कि विगत साढ़े 9 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने इस स्थिति को बदला है। पहले सुविधाओं के अभाव में प्रदेश की लाखों बेटियां पढ़ाई छोड़ने को मजबूर थीं, लेकिन विगत 9.5 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा और सुरक्षित मातृत्व तक समग्र सुरक्षा एवं कल्याण चक्र तैयार किया है।

 

बदले परिदृश्य पर कराया ध्यानाकर्षण

मुख्यमंत्री ने 2017 के बाद बदले परिदृश्य पर भी ध्यानाकर्षण कराया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प से प्राथमिक विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का सैचुरेशन 36 से बढ़कर 96 फीसदी से अधिक हो गया है। स्कूल ड्रॉपआउट रेट 20 से घटकर 3 प्रतिशत से भी कम रह गया है। अटल आवासीय विद्यालयों के माध्यम से श्रमिक व वंचित वर्ग की बेटियों को आधुनिक, विश्वस्तरीय आवासीय शिक्षा मिल रही है।

 

सीएम ने कहा कि कस्तूरबा बालिका विद्यालयों में कक्षा 12 तक पढ़ाई की सुविधा के विस्तार से बेटियों को अपनी शिक्षा पूरी करने के अवसर मिल रहे हैं। बेटियों की शिक्षा में निवेश, उनके आत्मविश्वास और प्रदेश के भविष्य को सशक्त बनाने का निवेश है।

CM योगी ने वाराणसी में किया स्वच्छता मित्रों का सम्मान, प्रदान किए अंगवस्त्र व उपहार

CM योगी ने वाराणसी में किया स्वच्छता मित्रों का सम्मान, प्रदान किए अंगवस्त्र व उपहार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार निर्माण समेत बड़े कार्य कर सकती है, लेकिन उसके संरक्षण व सुरक्षा की जिम्मेदारी जागरूक समाज व जनता की होती है। यदि जनता जागरूक नहीं है तो बड़े से बड़े निर्माण को भी धराशायी होने में देर नहीं लगती। प्रयागराज में माफिया ने जमीन पर कब्जा कर लिया था, उसे खाली कराकर सरकार गरीबों, दलितों, वंचितों के लिए हाईराइज बिल्डिंग बनाने जा रही है। यूपी में माफिया की जगह सिर्फ मिट्टी में है और कब्जाई गई जमीनों पर गरीबों के लिए हवेलियां बनेंगी।

 

मुख्यमंत्री ने गुरुवार को स्वच्छता मित्र सम्मान समारोह में नगर निगम व जल निगम के स्वच्छता मित्रों को सम्मानित किया। उन्होंने स्वच्छता मित्रों पर पुष्पवर्षा की और उन्हें भोजन भी परोसा। कबीरचौरा स्थित सरोजा पैलेस में आयोजित इस समारोह में जन-कल्याणकारी कार्यों के संदर्भ में लघु फिल्म भी दिखाई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता मित्र स्थानीय सांसद एवं विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता पीएम नरेन्द्र मोदी जी के ‘स्वच्छ काशी’ मिशन को धरातल पर उतार रहे हैं।

 

सीएम योगी ने कहा कि स्वच्छता कर्मी नींव के पत्थर हैं, जो दिखते नहीं है, लेकिन इमारत इसी पर खड़ी होती है। सर्दी, गर्मी, बरसात, आंधी-तूफान, त्योहार में भी स्वच्छता मित्र सड़कों पर उतरकर समाज को स्वच्छ वातावरण देते हैं। पहले आपका माहौल उत्सवमय करते हैं और अंत में अपने बच्चों का त्योहार मनवाते हैं। कुछ लोग अपने कृत्यों व कारनामों से गंदगी फैलाते हैं, लेकिन बड़ा तबका अपने पुरुषार्थ व परिश्रम से आमजन को स्वच्छ वातावरण देता है। स्वच्छता कर्मियों के कारण ही प्रयागराज महाकुंभ स्वच्छ, दिव्य-भव्य हो पाया था। वहां 66 करोड़ श्रद्धालु आए और सभी ने स्वच्छता की प्रशंसा की।

अविनाशी काशी का कायाकल्प 

मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी बदल चुकी है। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में अविनाशी काशी का कायाकल्प हुआ है। जिस काशी की संकरी गलियों में 2014 से पहले गंदगी का अंबार था। सड़कों पर गोवंश व सांड़ घूमते थे। बिजली के लिए तरसना पड़ता था। बदहाल घाट, जाम और गंदगी काशी की पहचान और नियति बन चुकी थी। 2017 से पहले माफिया काशी में गरीब, व्यापारी की जमीन पर कब्जा कर भय फैलाते थे, परंतु लेकिन अब काशी नई आभा, नए कलेवर के साथ आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए बढ़ रही है। 

देश को परिवार मानने वाले ही ला सकते परिवर्तन 

सीएम ने विपक्ष पर तंज कसा कि मंथरा बुद्धि वालों की दुर्गति किसी से छिपी नहीं है। हर जागरूक नागरिक का दायित्व है कि सच के साथ खड़े हों, सत्य को धरातल पर उतारें और सुरक्षा-संरक्षण की जिम्मेदारी लें। उन्होंने सपा पर तंज कसते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि को भी जागरूक होना चाहिए। जब जनप्रतिनिधि ही 12 बजे सोकर उठेगा और परिवार को ही समाज व प्रदेश मानने की भूल करेगा तो दुर्गति तय है। जिन लोगों ने समाज, प्रदेश व देश को परिवार माना, वही परिवर्तन ला सकते हैं। 

सरकारी निर्माण कार्यों की सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी 

सीएम ने काशी में विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी द्वारा 19 जुलाई से 2 अक्टूबर (76 दिवसीय) तक चलाए गए वार्ड प्रवास एवं स्वच्छता अभियान को नवनिर्माण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह अवधि बरसात की थी, लेकिन थोड़ी सतर्कता व सफाई रखी जाए तो डेंगू, कालाजार, मलेरिया, इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियां नजदीक नहीं आ सकतीं। सीएम ने जागरूकता पर बल देते हुए कहा कि सरकार ने जो निर्माण कराया है, सभी नागरिक उसकी सुरक्षा व संरक्षण करें, किसी को क्षति न पहुंचाने दें। 

लोकप्रिय जनप्रतिनिधि वही, जिसकी हर घर में पहुंच 

सीएम ने कहा कि लोकप्रिय जनप्रतिनिधि वही है, जिसकी हर घर में पहुंच हो। जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र में अधिक से अधिक समय देना चाहिए। इस 76 दिवसीय वार्ड प्रवास के दौरान जरूरतमंदों को शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं, स्वास्थ्य शिविर, आयुष्मान कार्ड, आवास सुविधा, पीएम विश्वकर्मा समेत अन्य सुविधाओं का लाभ मिला। सभी जनप्रतिनिधि सरकार की योजनाओं की जानकारी पात्रों तक अवश्य पहुंचाएं। बिना भेदभाव हर जरूरतमंद को शासन की योजनाओं का लाभ मिलना ही ‘सबका साथ-सबका विकास’ है। 

सीएम ने कराया जिम्मेदारी का अहसास

सीएम ने आमजन को जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए कहा कि हम प्रकृति से ले रहे हैं, लेकिन दे क्या रहे हैं। ऐसे में शुद्ध पर्यावरण के लिए पीएम मोदी का मिशन ‘एक पेड़ मां के नाम’ सबसे उपयुक्त है। इस अभियान में चार अलग-अलग कार्यक्रम (स्वच्छता मित्रों का सम्मान, पर्यावरण शुद्धता, सरकार के निर्माण कार्यों का संरक्षण व जागरूकता) सभी के लिए प्रेरक हैं। 

संवाद से ही निकलता है समस्या का समाधान

सीएम ने कहा कि समस्या का समाधान सिर्फ संवाद है। नगर निगम, विकास प्राधिकरण, स्थानीय प्रशासन व शासन के विभिन्न विभाग इस अभियान का हिस्सा बनते हैं। कार्य करने के लिए हर कोई तैयार है, कार्य लेने वाला चाहिए। हर चीज में शिकायती लहजा नहीं होना चाहिए। कार्य कराने की प्रवृत्ति भी होनी चाहिए। ऐसे कार्यक्रम अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी प्रेरणा हैं।  

स्वच्छ भारत अभियान ने देश को दिलाई नई पहचान

सीएम ने कहा कि मोदी जी ने स्वच्छ भारत अभियान को सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचा कर देश को नई पहचान दिलाई है। पीएम की प्रेरणा दुनिया के लिए उदाहरण बनी है। स्वच्छ भारत अभियान के पहले गांवों, गलियों की स्थिति अत्यंत खराब थी। झाड़ू उठाकर सफाई करने वालों को सम्मान भी नहीं मिलता था। काम करने के बावजूद उनका पैसा काट दिया जाता था। 

स्वच्छता कर्मियों का पैसा काटने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई 

सीएम ने कहा कि हमने यूपी में तय किया है कि स्वच्छता कर्मियों का पैसा काटने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। हम मानदेय की गारंटी दे रहे हैं। अब यूपी आउटसोर्स निगम काम कर रहा है। 16 हजार रुपये न्यूनतम मानदेय मिलना चाहिए। ईएसआई के तहत उपचार के लिए हॉस्पिटल की सुविधा मिलनी चाहिए। कार्मिकों को सुरक्षा बीमा मिलेगा, ताकि हादसे पर परिवार के लोग लाचार न हों। पीएफ भी कटेगा। सेवानिवृत्त होने पर उसके पास खुद की पूंजी होगी और बैंक से इस पर ब्याज भी मिलेगा, जिससे वह बच्चों पर आश्रित नहीं होगा। 

 

अतिथियों का स्वागत वाराणसी दक्षिण के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने किया। इस दौरान प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, हंसराज विश्वकर्मा, महापौर अशोक तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. अवधेश सिंह, त्रिभुवन राम, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह, भाजपा के महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि आदि मौजूद रहे। 

 

इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री ने स्वच्छता मित्र वसीम, रोहित रावत, राजकुमार, पूर्णमासी, आशुतोष, दिनेश, सुनील, रेखा, अल्पना, चिंता देवी को माला पहनाकर, अंगवस्त्र व उपहार देकर मंच पर सम्मानित किया।

प्रयागराज में माफिया की जमीन पर गरीबों के घर, कसारी-मसारी अब ‘श्रीकृष्णपुरी’, CM योगी ने किया पद्मलोक योजना का भूमिपूजन

प्रयागराज में माफिया की जमीन पर गरीबों के घर, कसारी-मसारी अब 'श्रीकृष्णपुरी', CM योगी ने किया पद्मलोक योजना का भूमिपूजन

yogi adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रयागराज के कसारी मसारी में माफिया से मुक्त कराई 9,811 वर्ग मीटर भूमि पर पद्म लोक आवास योजना के अंतर्गत 191 करोड़ से अधिक की लागत से 602 आवासों के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत पीपलगांव में निर्मित 556 आवासों के लाभार्थियों को चाबी भी वितरित की।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी आती है, तो माफिया और गुंडे-बदमाश लेकर आती है और भाजपा आती है तो विकास और बदलाव आता है। उन्होंने घोषणा की कि कसारी-मसारी अब नहीं होगा, इस पूरे क्षेत्र को ‘श्रीकृष्णपुरी’ के रूप में विकसित किया जाएगा। माफिया से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों के लिए आवास बनाए जाएंगे और यहां एक व्यवस्थित टाउनशिप विकसित होगी।

 

अवैध कब्जा कर अय्याशी का अड्डा बनाया था माफिया अतीक ने

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रयागराज में अब कोई माफियागिरी करने का दुस्साहस नहीं करेगा और अगर कोई ऐसा करेगा या करवाएगा, तो उसे मिट्टी में मिलने की तैयारी भी कर लेनी चाहिए। कोई गुंडा या माफिया किसी की संपत्ति पर कब्जा नहीं कर सकता। अगर कोई ऐसा करेगा तो उसके बाप-दादा की कमाई को भी जब्त कर लिया जाएगा। लूकरगंज के बाद अब कसारी-मसारी में भी माफिया से मुक्त कराई गई सरकारी जमीन पर गरीबों के आशियाने बनेंगे। जिस भूमि पर कभी माफिया अतीक अहमद और उसके गुर्गों का कब्जा था, वहां अब गरीब परिवारों के लिए पक्के मकान बनाए जाएंगे। ढाई हेक्टेयर यानी लगभग 15 बीघा जमीन पर अतीक अहमद और उसके गुंडों ने कब्जा कर अस्तबल बनाया हुआ था, उसे अय्याशी का अड्डा बना रखा था। सरकार ने उस अवैध साम्राज्य को ध्वस्त कर जमीन को मुक्त कराया। अब इसी जमीन पर गरीबों के आवास बनेंगे। यह केवल जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई नहीं है, बल्कि उसका उपयोग समाज के गरीब और जरूरतमंद परिवारों के हित में करने का संकल्प भी है।

 

माफिया अतीक-अशरफ के सामने घुटने टेकती थी पिछली सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज तीर्थराज है। यह सामाजिक समता की भूमि, भगवान अक्षयवट की पावन धरा और महर्षि भारद्वाज की साधना से पवित्र हुई धरती है। इस भूमि ने युगों-युगों से तीर्थ के महात्म्य को संजोकर पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया है। लेकिन इसी प्रयागराज में एक समय ऐसा था, जब माफिया अतीक और माफिया अशरफ जिस जमीन पर पैर रखते थे, वह उनकी हो जाती थी और प्रदेश सरकार उनके सामने घुटने टेककर मौन बनी रहती थी। यहां बेटियों की सुरक्षा पर खतरा होता था। माफिया असलहा लहराते हुए प्रयागराज की सड़कों और गलियों में भय तथा दहशत के पर्याय बने हुए थे। माफिया के आतंक के कारण आम आदमी अपने आपको असुरक्षित महसूस करता था। ऐसे वातावरण में न विकास हो सकता था, न निवेश आ सकता था, न युवाओं को रोजगार मिल सकता था और न ही उनके उज्ज्वल भविष्य की कोई कार्ययोजना आगे बढ़ सकती थी।

 

अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने पहले दिन ही स्पष्ट कर दिया था कि अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। किसी अपराधी को रियायत नहीं मिलेगी और उत्तर प्रदेश को माफिया मुक्त बनाया जाएगा। आज इसी संकल्प के परिणाम सामने दिखाई दे रहे हैं। कभी भय और दहशत के प्रतीक रहे माफिया को उसके किए की सजा दिलाने के लिए सरकार आगे बढ़ी। प्रयागराज में विधायक राजू पाल की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और तत्कालीन सरकार इन माफियाओं के सामने गिड़गिड़ाती हुई दिखाई देती थी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने माफिया के अवैध साम्राज्य को ध्वस्त करने और उनसे मुक्त कराई गई जमीन का उपयोग गरीबों के हित में करने का संकल्प लिया। लूकरगंज में माफिया से मुक्त कराई गई जमीन पर 86 गरीब परिवारों के लिए हाईराइज बिल्डिंग बनाकर उन्हें आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। अब कसारी-मसारी में भी आवासीय योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। यहां पहले चरण में 602 परिवारों और दूसरे चरण में 598 परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की योजना है। इस प्रकार लगभग 1,200 परिवारों को पक्के घर मिलेंगे।

 

बाजार-पार्क-जिम और खेल सुविधाएं भी मिलेंगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब लगभग 1,200 परिवार इस आवासीय परिसर में रहेंगे, तो यहां छह से साढ़े छह हजार से अधिक लोगों की आबादी होगी। उनके लिए केवल मकान ही नहीं, बल्कि अलग से व्यवस्थित टाउनशिप विकसित की जाएगी। यहां बाजार बनेगा, पार्क की सुविधा होगी, खेलकूद के लिए स्थान होगा, जिम बनेगा और लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रयागराज विकास प्राधिकरण इन सुविधाओं को विकसित करने का काम करेगा।

 

उन्होंने कहा कि गरीबों को आवास देने का अर्थ केवल उन्हें छत उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उनके परिवारों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और परिवार सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें। सरकार बिना भेदभाव हर गरीब और हर जाति के व्यक्ति को आवास की सुविधा उपलब्ध करा रही है। आजादी के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने 65 लाख गरीबों को पक्का आवास उपलब्ध कराया है। अब प्रयागराज में भी गरीबों को पक्के आवास की सुविधा दी जा रही है। 

 

प्रयागराज में पुल, लॉ यूनिवर्सिटी का निर्माण भी अंतिम चरण में

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में बड़े पैमाने पर सड़कें चौड़ी की गईं। अब यहां सात मीटर से लेकर 14 मीटर तक चौड़ी सड़कें हैं और आवागमन सुगम हुआ है। सरकार सुरक्षा का माहौल इसलिए उपलब्ध करा रही है, जिससे युवाओं को रोजगार मिल सके, उनकी नौकरी का उचित प्रबंध हो, गरीबों को सिर ढकने के लिए आवास मिले और हर नागरिक सुशासन का लाभ लेकर विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर सके। इसी उद्देश्य से प्रयागराज में विकास की अनेक योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। सहसों क्षेत्र में गंगा नदी पर बड़े पुल पर 950 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसी विधानसभा क्षेत्र में डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी का निर्माण भी लगभग पूरा होने की स्थिति में है।

 

महाराजा बिजली पासी के नाम पर बनेगा आईटीआई

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में आईटीआई के निर्माण की योजना भी आगे बढ़ाई जा रही है। इस आईटीआई का नाम महाराजा बिजली पासी के नाम पर रखा जाएगा। महाराजा बिजली पासी ने लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में 12 किले बनवाए थे। वह विदेशी आक्रांताओं के काल में सनातन धर्म के प्रबल रक्षक थे। उनके नाम पर आईटीआई का निर्माण कर उनके योगदान को सम्मान दिया जाएगा।

 

प्रयागराज के लिए अब बेहतर कनेक्टिविटी

सीएम ने कहा कि प्रयागराज अब बेहतर कनेक्टिविटी से जुड़ चुका है। यहां एयरपोर्ट बन चुका है और गंगा एक्सप्रेसवे प्रयागराज से सीधे मेरठ तथा दिल्ली की दूरी कम कर रहा है। पहले प्रयागराज से कार से दिल्ली जाने में 10 से 12 घंटे लगते थे, लेकिन अब गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से यह दूरी लगभग सात घंटे में पूरी की जा सकती है। यही डबल इंजन की भाजपा सरकार का बदलाव है। 

 

इस अवसर पर प्रयागराज के प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, प्रयागराज पश्चिमी के विधायक और पूर्व मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, सांसद प्रवीण पटेल, महापौर गणेश केसरवानी, विधायक हर्षवर्धन वाजपेई, पीयूष रंजन निषाद, दीपक पटेल, गुरु प्रसाद मौर्य, विधान परिषद सदस्य सुरेंद्र चौधरी, भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश की उपाध्यक्ष और विधायक पूजा पाल और पूर्व सांसद विनोद सोनकर उपस्थित रहे।

 

इन लाभार्थियों को मंच पर मिली आवास की चाबी

  • ममता
  • सिंधु श्रीवास्तव
  • कंचन सोनी
  • बसंती देवी
  • निरुपम चक्रवर्ती
  • शंकरलाल कुशवाहा
  • प्रियंका सोनकर
  • ललिता पांडे
  • रंजीता सोनकर
  • हरिशंकर मिश्रा

मुस्कान कैदी नंबर 396, साहिल 395… जेल में बदली पहचान, जानिए जेल में दोनों को क्या काम मिलेगा?

मुस्कान कैदी नंबर 396, साहिल 395… जेल में बदली पहचान, जानिए जेल में दोनों को क्या काम मिलेगा?

meerut neela durm hatayakand

कभी नाम से पहचाने जाने वाले मुस्कान और साहिल की अब मेरठ जिला जेल में नई पहचान बन गई है। साहिल को कैदी नंबर 395 और मुस्कान को कैदी नंबर 396 आवंटित किया गया है। चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोनों की जेल में दिनचर्या बदलने लगी है। अब उनकी पहचान, कामकाज और निगरानी की व्यवस्था सजायाफ्ता कैदियों के लिए निर्धारित नियमों के मुताबिक की जा रही है। जेल की चारदीवारी के भीतर दोनों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल अपने भविष्य और आगे की कानूनी लड़ाई को लेकर है।

बैरक भी अलग, जिम्मेदारियां भी होंगी अलग-अलग

मेरठ जेल में मुस्कान को महिला बंदियों की बैरक संख्या 12बी में रखा गया है, जबकि साहिल बैरक नंबर 15 में रहेगा। दोनों की गिनती और रिकॉर्ड कैदी नंबर के आधार पर दर्ज किए जा रहे हैं। जेल में दोनों अलग-अलग रहेंगे और उनकी दिनचर्या भी अलग होगी।

 

जेल प्रशासन के मुताबिक, सजायाफ्ता कैदियों के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार उनके कामकाज की व्यवस्था की जाती है। इसी क्रम में मुस्कान ने सिलाई और कढ़ाई सीखने की इच्छा जताई थी। अब वह जेल में कपड़ों की सिलाई का काम करेगी। दूसरी ओर, साहिल को खेतीबाड़ी और बागवानी से जुड़े काम में लगाया जाएगा। इस तरह जेल के भीतर दोनों की दिनचर्या अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ेगी।

लखनऊ और आगरा जेल भेजे जाने की संभावना

मेरठ जेल में दोनों की आगे की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा है। जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, जेल के नियमों के तहत दोनों को दूसरी जेल में स्थानांतरित किया जा सकता है। मुस्कान को लखनऊ स्थित नारी निकेतन और साहिल को आगरा जेल भेजे जाने की संभावना है। हालांकि, यह फैसला संबंधित स्थानों पर उपलब्धता और नियमानुसार प्रक्रिया के आधार पर आगामी दिनों में लिया जा सकता है।

 

फिलहाल दोनों मेरठ जिला जेल में ही हैं। दूसरी जेल में स्थानांतरण को लेकर अंतिम निर्णय होने तक उनकी व्यवस्था जेल प्रशासन के निर्देशों के अनुसार संचालित होगी।

भविष्य की चिंता…. 

अदालत के फैसले के बाद मुस्कान और साहिल के सामने अब कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण है। दोनों अपने भविष्य को लेकर चिंतित बताए जा रहे हैं और जेल प्रशासन से यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे क्या होगा और अपील की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी। फांसी की सजा के बाद दोनों की कानूनी लड़ाई का अगला पड़ाव अब महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, सजा के खिलाफ अपील और आगे की न्यायिक प्रक्रिया का निर्णय संबंधित कानूनी कार्यवाही के तहत होगा।

दोनों बच्चियों की चिंता में भावुक हो रही मुस्कान

अब दोनों के सामने जेल द्वारा निर्धारित दिनचर्या के साथ-साथ आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी।वहीं मुस्कान के लिए अपनी बच्चियों की चिंता सर्वोपरि है। उसके आंखें बार-बार नम हो रही है कि यदि उसे जल्दी ही फांसी हो गई तो उसकी छोटी बेटी की देखभाल कौन करेगा।