यूपी व देश को अपमानित करने का काम करते हैं राहुल गांधी : CM योगी

यूपी व देश को अपमानित करने का काम करते हैं राहुल गांधी : CM योगी

1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर नायक अवध केसरी राना बेनी माधव बख्श सिंह की 222वीं जयंती पर आयोजित भाव समर्पण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी के मनुस्मृति को लेकर दिए गए बयान पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनसे लोकतंत्र व संविधान के प्रति जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है। यदि मनु को जानना है तो अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण पढ़ना चाहिए। ऐसा कौन व्यक्ति है, जिसे जीवन में मां, बहन, पत्नी या बेटी के रूप में किसी महिला का संरक्षण न मिला हो। महिलाओं व पुरुषों के पारस्परिक संबंधों को लेकर भारत की परंपरा को एकतरफा तरीके से देखने के बजाय उसके व्यापक संदर्भ को समझने की जरूरत है।

भारत की परंपरा-विरासत को कोसना ही राहुल गांधी का काम

सीएम योगी ने कहा कि राहुल गांधी ने संविधान की शपथ ली है, लेकिन इसके बावजूद वह भारत की परंपरा व विरासत को कोसना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। राहुल यूपी से बाहर जाकर उत्तर प्रदेश को लांछित और अपमानित करते हैं और भारत से बाहर जाकर देश का अपमान करते हैं। सेना सीमाओं पर दुश्मनों से लड़ती है, लेकिन राहुल जवानों से प्रमाण मांगते हैं। कांग्रेस तो अयोध्या में प्रभु श्रीराम के अस्तित्व पर भी सवाल खड़ा करती रही है। बच्चों व नौजवानों को ऐसी दिशा में नहीं ले जाना चाहिए, जहां बाद में माता-पिता या परिवार को शर्मिंदा होकर माफी मांगनी पड़े।

 

मुख्यमंत्री ने जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री के प्रति कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल का उदाहरण देते हुए कहा कि बाद में उस बेटी और उसकी मां ने अपने शब्द वापस लेते हुए माफी मांगी। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि भारत की एक संवैधानिक संस्था हैं। जब प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है तो यह केवल व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि उस संस्था और देश का अपमान है।

भारत की वर्तमान पीढ़ी के भविष्य से खिलवाड़ न करें

मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी पर अर्बन नक्सलियों के हाथों वर्तमान पीढ़ी का भविष्य खराब करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि वह भारत की विरासत को क्यों बर्बाद करना चाहते हैं? क्यों देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं? देश ने राहुल गांधी से नेता प्रतिपक्ष के रूप में सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका की अपेक्षा की थी, लेकिन उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से स्वयं को पूरी तरह अलग कर लिया है। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र के प्रति कांग्रेस की निष्ठा पर भी सवाल उठाते हुए 1975 के आपातकाल का उल्लेख किया।

अमेठी-रायबरेली के सामने बनाया पहचान का संकट

मुख्यमंत्री ने गांधी परिवार के राजनीतिक प्रभाव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अमेठी व रायबरेली ने लंबे समय तक इस परिवार को ढोया, लेकिन इस क्षेत्र के सामने पहचान का संकट भी इसी परिवार ने खड़ा किया। अब जनता को तय करना है कि विकास के लिए किस प्रकार की राजनीति और नेतृत्व की आवश्यकता है।

एक ही परिवार का नाम बढ़ाती रही कांग्रेस

सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस को देश के स्मारकों और संस्थानों का नामकरण एक ही परिवार के नाम पर करने में रुचि रही है। उसने राना बेनी माधव बख्श सिंह, लालचंद स्वर्णकार और महापराक्रमी वीर पासी जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर संस्थानों व स्मारकों के नाम रखने के बारे में कभी नहीं सोचा। देश के वास्तविक नायकों को उचित सम्मान देना कांग्रेस की प्राथमिकता नहीं रही। काकोरी ट्रेन एक्शन को लूट कहकर कांग्रेस सालों तक हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान करती रही। हमारी सरकार ने स्वंतत्रा सेनानियों के साथ ही सभी महापुरुषों का सम्मान स्थापित किया। प्रभु राम के भव्य मंदिर के निर्माण के साथ महर्षि वाल्मीकि, गोस्वामी तुलसीदास, निषादराज और माता शबरी को भी सम्मान दिया है।

कांग्रेस के परिवार ने भारत नहीं बनाया, विभाजन जरूर कराया

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के शीर्ष परिवार पर देश के विभाजन और उस दौरान हुए बड़े पैमाने पर जनसंहार की जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने हमेशा लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का काम किया, जिसके लिए उसे देशवासियों से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस को वीर सावरकर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे राष्ट्रनायकों को स्वीकार करने में भी परेशानी रही। वाजपेयी सरकार में पोर्ट ब्लेयर एयरपोर्ट का नाम वीर सावरकर के नाम पर किया गया था, लेकिन बाद में कांग्रेस सरकार ने उसे बदल दिया। कांग्रेस ने ऐसे लोगों को महिमामंडित किया, जिन्होंने अंग्रेजों की मुखबिरी कर क्रांतिकारियों के खिलाफ साजिश रची। वर्तमान पीढ़ी को देश के वास्तविक नायकों का इतिहास बताने की जरूरत है।

सचिंद्र नाथ बख्शी को जेल भिजवाने वाला कांग्रेस नेता

मुख्यमंत्री ने काकोरी ट्रेन एक्शन के क्रांतिकारी सचिंद्र नाथ बख्शी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। आजादी के बाद उन्हें मुक्त किया गया। बाद में वह भारतीय जनसंघ से जुड़े और वाराणसी दक्षिण से विधायक बने। सचिंद्र नाथ बख्शी ने विधानसभा में बताया था कि उनके खिलाफ पैरवी करने वाला एक कांग्रेस नेता था, जिसने अंग्रेजों की मुखबिरी कर उन्हें जेल भिजवाने में भूमिका निभाई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने ऐसे व्यक्ति के नाम पर लखनऊ में सड़क का नामकरण किया, जबकि सचिंद्र नाथ बख्शी जैसे क्रांतिकारी को भुला दिया।

हनुमानगढ़ी में दर्शन के बाद मछली की दावत!

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं के कथित दोहरे आचरण पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग विरासत का अपमान करने के साथ धार्मिक आस्था को लेकर भी दिखावा करते हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अयोध्या में हनुमानगढ़ी में दर्शन के बाद मछली की दावत उड़ाई। यही कांग्रेस का दोहरा चरित्र है। मंदिर में राम-राम चिल्लाने और बजरंग बली के सामने दंडवत होने का ढोंग करने के बाद ऐसा आचरण शर्मनाक है। इन लोगों से गिरगिट भी शर्मा जाए। इन प्रदेश अध्यक्ष के भाई की हत्या एक माफिया ने की थी। प्रदेश अध्यक्ष ने उस माफिया के खिलाफ आवाज उठाने के बजाय उसके सामने घुटने टेककर नतमस्तक होने का काम किया।

अवध केसरी राना बेनी माधव बख्श सिंह को किया नमन

मुख्यमंत्री ने कहा कि राना बेनी माधव बख्श सिंह भारत माता के महान सपूत और स्वाधीनता संग्राम के प्रखर हस्ताक्षर थे। उनके अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान को देश सदैव स्मरण करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से उनकी स्मृतियों को नमन किया। सीएम योगी ने कहा कि 1857 का प्रथम स्वातंत्र्य समर उत्तर प्रदेश के बगैर अधूरा है। अवध क्षेत्र में इस पूरे आंदोलन को राना बेनी माधव बख्श सिंह ने नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने हजारों स्थानीय नागरिकों को अपनी सेना का हिस्सा बनाकर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। उनके नेतृत्व में अवध की धरती पर स्वतंत्रता की लड़ाई ने व्यापक रूप लिया। सीएम ने मंगल पांडे, धन सिंह गुर्जर, नाना साहेब, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, वीरा पासी, राजा माधव सिंह, राजा चंद्रिका बख्श सिंह, लालचंद स्वर्णकार, फतेह बहादुर और बसंत सिंह समेत भारत माता के महान सपूतों को नमन कर श्रद्धांजलि दी।

वीरा पासी की प्रतिमा लगाने का सुझाव

सीएम योगी ने कहा कि राना बेनी माधव बख्श सिंह स्मारक के पहले चरण का काम पूरा हो चुका है। कुल बजट 21 करोड़ रुपये था और करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने दूसरे चरण के कार्य में वीरा पासी और उनके सहयोगियों की प्रतिमाएं लगाने का सुझाव दिया। सीएम ने कहा कि पूरे वर्ष कार्यक्रम आयोजित कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों के परिवारों को आमंत्रित कर उनका सम्मान किया जाना चाहिए।

युवाओं को खेती से जोड़ने के लिए सीएम मोहन यादव का बड़ा कदम, संभाग और जिलास्तर पर होंगे कृषि नवाचार संवाद कार्यक्रम

युवाओं को खेती से जोड़ने के लिए सीएम मोहन यादव का बड़ा कदम, संभाग और जिलास्तर पर होंगे कृषि नवाचार संवाद कार्यक्रम

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने और युवाओं को खेती से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में कृषि नवाचार, आधुनिक तकनीक और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने एवं किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से अब संभाग एवं जिलास्तर पर कृषि नवाचार संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह बात मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने  भोपाल के रविंद्र भवन में आयोजित युवा संवाद के दौरान कहीं। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान कृषि प्रधान राज्य के रूप में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में सिंचाई सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में हर गांव तक स्वच्छ पेयजल और हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचे।  उन्होंने कहा कि आज खेती के स्वरूप में तेजी से बदलाव हो रहा है। नई तकनीक, नई फसलों, आधुनिक कृषि यंत्रों, उद्यानिकी, जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा कृषि आधारित उद्यमिता को अपनाकर युवा कृषि को लाभ का व्यवसाय बना सकते हैं।

 

युवाओं को कृषि नवाचार से जोड़ने पर जोर-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के कई विश्वविद्यालयों में कृषि संकाय की पढ़ाई प्रारंभ की गई है। युवा कृषि शिक्षा प्राप्त कर नई संभावनाओं के द्वार खोलें और कृषि की जड़ों से जुड़े रहते हुए नवाचार करें। किसान पॉलीहाउस, वेयरहाउस, फूड प्रोसेसिंग और अन्य कृषि आधारित उद्यम स्थापित कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कम भूमि में अधिक लाभ के लिए उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पॉलीहाउस में गुलाब सहित विभिन्न फूलों की खेती, मशरूम फार्मिंग, पर्ल फार्मिंग और मधुमक्खी पालन जैसे कार्य युवा कम लागत में शुरू कर सकते हैं। मशरूम एवं पर्ल फार्मिंग तो घर के एक कमरे से भी प्रारंभ की जा सकती है।

 

कृषि के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन से बढ़ेगी आय-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान बहुफसलीय खेती के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन और मुर्गी पालन को भी अपनाएं। मध्यप्रदेश वर्तमान में देश में दूध उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। इसे अग्रणी राज्य बनाने के लिए एनडीडीबी के साथ एमओयू किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रतिवर्ष एक लाख गिर नस्ल की बछिया तैयार करने का लक्ष्य है। उन्नत नस्ल के पशुधन से दूध उत्पादन बढ़ेगा और किसानों-पशुपालकों को प्रतिदिन आय का साधन मिलेगा। राज्य सरकार के प्रयासों से किसानों को दूध के प्रति लीटर मूल्य में भी 8 से 10 रुपये तक की वृद्धि का लाभ मिला है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत लगभग 43 लाख रुपये की लागत से 25 गायों की डेयरी स्थापित करने पर राज्य सरकार द्वारा 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। ग्राम स्तर पर सहकारी समितियों के माध्यम से दूध संग्रहण की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। मत्स्य पालन के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्याप्त संख्या में तालाब और जलाशय उपलब्ध हैं। पहले मछली का बीज अन्य राज्यों से लाना पड़ता था, लेकिन अब मध्यप्रदेश में ही मछली बीज उत्पादन के लिए तीन हैचरियां प्रारंभ की गई हैं। इससे स्थानीय स्तर पर मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर सृजित होंगे।

 

किसानों के हित में निरंतर निर्णय-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिले, इसके लिए राज्य सरकार लगातार किसान हितैषी निर्णय ले रही है। किसानों को एमएसपी पर गेहूं खरीदी के साथ बोनस का लाभ दिया गया है और मध्यप्रदेश देश में सर्वाधिक गेहूं खरीदी करने वाले राज्यों में अग्रणी बना है। सोयाबीन उत्पादक किसानों को भावांतर योजना का लाभ भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसान आधुनिक कृषि यंत्रों और नई तकनीक को अपनाएं तथा एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय बहुफसलीय और वैकल्पिक खेती की ओर बढ़ें। इससे खेती से होने वाली आय में वृद्धि होगी। राज्य सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए कृषक कल्याण वर्ष प्रारंभ किया है। इस वर्ष कृषि के साथ फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्यमिता के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

 

सिंचाई विस्तार को मिली गति-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई क्षमता का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़े और प्रदेश का कोई भी खेत पानी की कमी के कारण पिछड़े नहीं। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ आधुनिक सिंचाई तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

 

इस दौरान खेल, युवा कल्याण एवं सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस वर्ष को कृषक कल्याण को समर्पित करते हुए युवाओं को कृषि और कृषि आधारित उद्यमिता से जोड़ने की पहल की है। कृषि क्षेत्र में युवाओं के साथ संवाद मध्यप्रदेश में नई कृषि क्रांति का आधार बनेगा।

 

CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

Deepak letter to Education Ministers

Deepak letter to the Education Ministers: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने देश और राज्यों में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित शिक्षा मंत्री को एक पत्र लिखा है। पत्र में आजादी के 80 साल बाद भी स्कूलों में पीने के पानी, शौचालय और डेस्क जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर सवाल उठाए गए हैं।

सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक

CJP ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को लिखे पत्र में कहा कि स्वतंत्रता के आठ दशकों बाद भी बच्चे मूलभूत सुविधाओं के बिना पढ़ाई करने को मजबूर हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। बच्चों को सुरक्षित पेयजल, चालू शौचालय, उचित कक्षाएं और बैठने के लिए बेंच तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।

दीपके के 6 प्रमुख सवाल

  • पिछले पांच वर्षों में राज्य के कितने सरकारी स्कूलों का जीर्णोद्धार (Renovation) किया गया है और कितनों में मरम्मत या पूर्ण सुधार की आवश्यकता है?
  • वर्तमान में शिक्षकों के कितने पद स्वीकृत हैं, कितने भरे गए हैं और कितने पद खाली पड़े हैं?
  • बीते पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों के लिए कितना बजट आवंटित किया गया और उसमें से वास्तव में कितना पैसा खर्च हुआ?
  • हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कितने अतिरिक्त सरकारी स्कूलों की आवश्यकता है?
  • सरकारी स्कूल के शिक्षकों को शिक्षण कार्य के अलावा कौन-कौन से गैर-शैक्षणिक (Non-teaching) काम सौंपे गए हैं?
  • कितने सरकारी स्कूलों में वर्तमान में कंप्यूटर, डिजिटल लर्निंग, साफ शौचालय और खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं?

पत्र के अंत में CJP ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी राजनीति या किसी एक सरकार का नहीं है, बल्कि देश के बच्चों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने मांग की कि सरकार इन जानकारियों को सार्वजनिक करे और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाए ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

सीजेपी टीम पर राजस्थान में हुआ था हमला

उल्लेखनीय है कि हाल ही में राजस्थान के जयपुर जिले के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में 21 अगस्त 2026 को CJP के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर कथित रूप से हमला और पथराव हुआ था। CJP की टीम अपने 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत इस सरकारी स्कूल की स्थिति का निरीक्षण करने पहुंची थी। पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि यह सरकारी स्कूल सालों से एक मवेशी शेड में चलाया जा रहा था। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि स्कूल पहुंचने से पहले ही स्थानीय उपद्रवियों और विरोधियों ने उनकी गाड़ियों पर पथराव किया, गाड़ियों के शीशे तोड़े और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की।

इंदौर में बारिश के लिए जिंदा शख्‍स को मार डाला, निकाल डाली शव यात्रा, अब कर रहे बारिश का इंतजार

इंदौर में बारिश के लिए जिंदा शख्‍स को मार डाला, निकाल डाली शव यात्रा, अब कर रहे बारिश का इंतजार

dead man

इंदौर में मानसून तकरीबन आधे से ज्‍यादा गुजर गया है, लेकिन बारिश आने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में हर किसी को इस सूखे के खत्‍म होने का इंतजार है। लोग कई तरह के टोटके कर रहे हैं। हाल ही में एक अनोखा टोटका सामने आया है।

दरअसल, इंदौर जिले की महू तहसील के ग्राम गवली पलासिया में अच्छी बारिश की कामना को लेकर ‘जिंदा व्यक्ति की शव यात्रा’ निकाली गई। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनूठे टोटके से रूठे हुए मेघराज प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है।

इस दौरान एक जिंदा शख्‍स अर्थी पर लेटा और ढोल-धमाकों के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई। गांव में फसलों को पानी न मिलने से परेशान किसानों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस प्रतीकात्मक यात्रा का आयोजन किया। यात्रा के दौरान एक जीवित व्यक्ति को बांस की अर्थी पर लिटाया गया और उसे कफन की तरह कपड़े से ढंका गया। इसके बाद ढोल-धमाकों और धार्मिक भजनों के साथ गांव की मुख्य गलियों और चौराहों से यह ‘जिंदा शव यात्रा’ निकाली गई। गांव के लोग पीछे-पीछे चलते हुए भगवान से जल्द से जल्द मूसलाधार बारिश कराने की प्रार्थना कर रहे थे।
 
गवली पलासिया के ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा नई नहीं है, बल्कि जब भी खेतों में पानी की सख्त जरूरत होती है और बारिश रुक जाती है, तो पूर्वजों के जमाने से चला आ रहा यह टोटका अपनाया जाता है। मान्यता है कि इस तरह की सांकेतिक शव यात्रा निकालने से प्राकृतिक बाधाएं दूर होती हैं और इंद्रदेव की कृपा बरसती है। बारिश की आस में निकली यह अनोखी और आस्था से भरी यात्रा अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों को पूरा भरोसा है कि उनकी यह प्रार्थना जरूर रंग लाएगी और जल्द ही गांव में झमाझम बारिश का दौर शुरू होगा।

बड़वानी में Gen अल्फा छात्रों का प्रोटेस्‍ट, 50 KM पैदल चलकर NH-3 किया जाम, ये थी आंदोलन की वजह

बड़वानी में Gen अल्फा छात्रों का प्रोटेस्‍ट, 50 KM पैदल चलकर NH-3 किया जाम, ये थी आंदोलन की वजह

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मध्‍यप्रदेश के बड़वानी जिले में जामली एकलव्य स्कूल के 200 छात्र-छात्राएं सुबह 7 बजे 70 KM दूर कलेक्टर से मिलने पैदल निकल पड़े। उन्‍होंने आगरा-मुंबई नेशनल हाई-वे-3 (NH-3) जाम कर दिया। वे रोड पर ही जमकर बैठ गए। प्रशासन ने उन्‍हें काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जिद थी कि कलेक्टर को ही मौके पर बुलाओ, वे अपनी समस्‍याएं कलेक्‍टर को ही बताएंगे।

उन्होंने बड़वानी जिले में आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे जाम कर दिया और रोड पर प्रदर्शन करने बैठ गए। वह बड़वानी के कलेक्टर को मौके पर बुलाने की जिद पर अड़ गए। उनका कहना था कि वह कलेक्टर को ही अपनी मांगों के बारे में बताएंगे। इस दौरान हाईवे पर जाम से यातायात प्रभावित हो गया। मौके पर पुलिस और प्रशासन भी पहुंच गया, जिन्होंने बच्चों को समझाकर जाम खुलवाया।

क्‍या मांग थी बच्‍चों की : दरअसल, जामली स्थित एकलव्य स्कूल के छात्र-छात्राएं 70 किमी दूर बड़वानी कलेक्टर से मिलने निकल पड़े और मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे 3 से होते हुए पैदल चलने लगे। आरोप है कि छात्रावास में अपशब्द और अभद्र व्यवहार किया जाता है। साथ ही कहना है कि उन्हें परिजनों से भी नहीं मिलने दिया जाता है।

अधिकारी मनाते रहे लेकिन नहीं माने : सूचना मिलते ही एसडीएम, एसडीओपी, तहसीलदार, एकलव्य स्कूल के प्राचार्य और पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन वह काफी देर तक नहीं माने। फिर मजबूरन प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस को उनके साथ-साथ पैदल चलना पड़ा और वह उन्हें मनाते रहे। उनकी मांग थी कि वह कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्याओं का हल निकलवाएंगे। छात्र-छात्राएं लगभग जामली स्थित एकलव्य स्कूल से लगभग दूर तक कई किमी तक पैदल चले। करीब 200 की संख्या में विद्यार्थी सुबह 7 बजे ही निकल गए थे. उन्होंने 50 किमी से ज्यादा पैदल सफर तय किया। इस बीच एसडीएम ने उन्हें काफी समझाया, लेकिन वह अड़े रहे कि कलेक्टर से ही बात करेंगे।

चक्कर खाकर गिरे तो एंबुलेंस आई : इस दौरान कई छात्राओं को चक्कर भी आए गए तो मौके पर एंबुलेंस बुलाई गई और उन्हें अस्पताल भेजा। जब सूचना मिली तो जिला मुख्यालय से अपर कलेक्टर रवाना हो गए. उन्होंने छात्रों को समझाया और उनकी समस्याएं सुनीं। स्टूडेंट्स का कहना है कि हॉस्टल में जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। परिजन आते हैं तो उनसे मिलने नहीं दिया जाता है। अगर भाई आता है तो उसे भी अलग नजरिए से देखा जाता है। छात्राओं के चरित्र पर भी उंगली उठाई जाती है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि छात्रावास में मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं भी नहीं दी जाती है। साथ ही परिजनों से मिलने और छात्रावास की शिकायत न करने का भी दबाव बनाया जाता है।

Delhi-NCR Rain: भारी बारिश से हाहाकार, 14 उड़ानें डायवर्ट; दिल्ली-गुरुग्राम में लंबा जाम

Delhi-NCR Rain: भारी बारिश से हाहाकार, 14 उड़ानें डायवर्ट; दिल्ली-गुरुग्राम में लंबा जाम

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दिल्ली-NCR में सोमवार सुबह हुई तेज बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। कई इलाकों में जलभराव के कारण सड़कों पर यातायात की रफ्तार थम गई और लोगों को लंबे जाम का सामना करना पड़ा। खराब मौसम का असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा है। दिल्ली एयरपोर्ट से अब तक 14 उड़ानों को डायवर्ट किया गया है, जिनमें 2 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शामिल हैं। इनमें से 12 उड़ानों को जयपुर एयरपोर्ट भेजा गया है। ALSO READ: Weather Update : 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, पहाड़ों में लैंडस्लाइड का खतरा; मछुआरों को समुद्र से दूर रहने की सलाह

 

मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR के कई हिस्सों में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट, जबकि कुछ इलाकों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग ने आंधी-तूफान, बिजली चमकने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई है। मौसम खराब होने के कारण उड़ानों के संचालन पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

 

एयरलाइंस की यात्रियों को सलाह

खराब मौसम को देखते हुए स्पाइसजेट, एयर इंडिया, इंडिगो समेत कई एयरलाइंस ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है। यात्रियों से घर से निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेट्स जांचने की अपील की गई है। एयरलाइंस ने यह भी कहा है कि मौसम की स्थिति के कारण आगे की उड़ानों के समय में बदलाव या देरी हो सकती है।

दिल्ली-NCR में कई जगह भारी ट्रैफिक

भारी बारिश की वजह जलभराव के चलते दिल्ली के कई हिस्सों में जलभराव के चलते यातायात प्रभावित हुआ। संगम विहार के पास एमबी रोड पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। वायुसेनाबाद और संगम विहार के बीच भी ट्रैफिक काफी धीमा रहा और लोग करीब एक घंटे तक जाम में फंसे रहे। इसका असर एयरपोर्ट, ऑफिस और साकेत कोर्ट की ओर जाने वाले यात्रियों पर भी पड़ा। नोएडा में भी बारिश के दौरान नेशनल हाईवे-9 पर हिंडन नदी के पास छिजारसी कट के आसपास वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम की स्थिति बन गई। ALSO READ: मोदी-ट्रंप की G7 मुलाकात में क्या हुआ था? अमेरिकी राजदूत का बड़ा दावा- भारत ने कहा था ‘सवाल मत पूछिए’, फिर ट्रंप ने बदल दिया प्लान

गुरुग्राम में 2 से 3 फीट तक पानी

गुरुग्राम में भी कुछ ही देर की बारिश के बाद कई सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी भर गया। इसके चलते दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे, सोहना रोड, ओल्ड दिल्ली रोड और रेलवे रोड पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। राजीव चौक अंडरपास और फ्लाईओवर के आसपास वाहन चालक करीब एक घंटे तक फंसे रहे।

 

अगले दो घंटे कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो घंटों के दौरान दिल्ली-NCR में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। दिल्ली के अलावा झज्जर, फरुखनगर, सोहना, रेवाड़ी, पलवल, बावल, नूंह और हरियाणा के औरंगाबाद में भी बारिश के साथ हल्की आंधी और बिजली चमकने की संभावना है। राजस्थान के भिवाड़ी, तिजारा, खैरथल, कोटपूतली और अलवर में भी मौसम खराब रहने का अनुमान है।

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मोदी-ट्रंप की G7 मुलाकात में क्या हुआ था? अमेरिकी राजदूत का बड़ा दावा- भारत ने कहा था ‘सवाल मत पूछिए’, फिर ट्रंप ने बदल दिया प्लान

modi and trump

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया कि फ्रांस में G-7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के प्रेस मीट को लेकर भारत ने कोई सवाल नहीं पूछने के लिए कहा था। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत सरकार के सूत्रों का कहना है कि किसी भी VVIP के दौरे से पहले नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यवस्था को लेकर दोनों देशों के बीच बात की जाती है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। ALSO READ: भारत का बांग्लादेश को बड़ा झटका! बिजली हस्तांतरण पर लगेगा नया SNA शुल्क

 

सर्जियो गोर ने ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ में इस पूरे घटनाक्रम का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 17 जून को फ्रांस में G7 समिट के दौरान मोदी और ट्रंप की मुलाकात से पहले वह अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मौजूद थे। इस दौरान ट्रंप ने उनसे पूछा कि भारतीय पक्ष किन मुद्दों को उठाना चाहता है और दिल्ली की ओर से क्या कोई खास मांग है?

 

सर्जियो गोर ने ट्रंप को दी थी जानकारी

गोर के अनुसार, इसी बातचीत में भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से एक अनुरोध का जिक्र हुआ। इसमें कहा गया था कि बैठक में मीडिया को मौजूद रहने दिया जाए, लेकिन इसे पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में तब्दील न किया जाए और पत्रकारों के सवाल न लिए जाएं। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने इस पर सहमति जताते हुए कहा था कि इसमें कोई समस्या नहीं है।

 

ट्रंप भूल गए गोर की बात

इसके बाद मोदी और ट्रंप की बैठक कैमरों और पत्रकारों की मौजूदगी में शुरू हुई। गोर ने बताया कि कमरे में करीब 50 कैमरे मौजूद थे। दोनों नेताओं ने शुरुआत में अपनी-अपनी बात रखी। लेकिन इसके तुरंत बाद ट्रंप गोर की बात भूल गए। वे कैमरों की तरफ मुड़े और पत्रकारों से पूछा कि क्या किसी के पास सवाल है। यहीं से बैठक का स्वरूप बदल गया। पत्रकारों के सवाल शुरू होने के बाद मोदी और ट्रंप के बीच बातचीत का दायरा बढ़ता गया और यह मुलाकात करीब 45 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बदल गई। गोर ने कहा कि ट्रंप के इस कदम के बाद कई अहम मुद्दों पर खुलकर सवाल-जवाब हुए। ALSO READ: नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

 

अमेरिकी राजदूत के इस दावे के बाद मोदी-ट्रंप मुलाकात को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से गोर के उस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है कि भारतीय पक्ष ने प्रेस मीट में सवाल नहीं लेने का अनुरोध किया था।

 

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज पर अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई और तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद दोनों देशों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी नजर बनी हुई है।

इंदौर में ‘गोरिल्ला’ बना ट्रैफिक हवलदार, नियम तोड़ने वालों को पढ़ाया सड़क पर चलने का पाठ

इंदौर में 'गोरिल्ला' बना ट्रैफिक हवलदार, नियम तोड़ने वालों को पढ़ाया सड़क पर चलने का पाठ

Gorilla

इंदौर के बदहाल होते ट्रैफिक को सुधारने के लिए पुलिस तरह तरह के तरीके अपना रही है। हाल ही में शहर के चौराहों पर एक गोरिल्‍ला ट्रैफिक कंट्रोल करता नजर आया। दरअसल, इंदौर पुलिस ने एक अनोखा प्रयोग किया है। यहां गोरिल्ला की पोशाक पहने व्यक्ति ने सड़क पर उतरकर यातायात संभाला और वाहन चालकों को नियमों का पालन करने का संदेश दिया। अचानक गोरिल्ला को ट्रैफिक संभालते देख राहगीरों और वाहन चालकों का ध्यान उसकी ओर आकर्षित हुआ।

रॉन्ग साइड वाहन रोके: गोरिल्ला ने रॉन्ग साइड से आने वाले वाहन चालकों को रोककर उन्हें सही दिशा में चलने का इशारा किया। जेब्रा क्रॉसिंग पर वाहन खड़े करने वालों को भी पीछे कराया गया। लोगों को समझाया गया कि जेब्रा क्रॉसिंग पैदल यात्रियों के सुरक्षित सड़क पार करने के लिए है, वाहनों को रोकने या पार्क करने के लिए नहीं।
अभियान के दौरान कई वाहन चालक अपने वाहन स्टॉप लाइन के पीछे करते नजर आए। दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट और कार चालकों को सीट बेल्ट लगाने के लिए भी जागरूक किया गया।
 
पैदल यात्रियों की भी मदद : गोरिल्ला ने केवल वाहन चालकों को नियमों का संदेश नहीं दिया, बल्कि बुजुर्गों और पैदल यात्रियों को सड़क पार कराने में भी मदद की। इस दौरान उसने यातायात संचालन में पुलिस का सहयोग किया। अभियान में यातायात पुलिस के अधिकारी और एनसीसी कैडेट्स भी मौजूद रहे। पुलिस ने इस गतिविधि के माध्यम से लोगों तक सुरक्षा का संदेश मनोरंजक और प्रभावी तरीके से पहुंचाने का प्रयास किया।
 
मुझ में ट्रैफिक सेंस तो आपमें क्‍यों नहीं : इस अनोखे अभियान का संदेश था- ‘मैं तो जानवर हूं, फिर भी मुझे ट्रैफिक सेंस है। तुम तो इंसान हो। ट्रैफिक नियम तोड़ोगे तो चोट लग सकती है, जान जा सकती है। जब मैं नियम समझ सकता हूं, तो तुम क्यों नहीं समझते?’ पलासिया चौराहे का यह अनोखा अभियान और गोरिल्ला का वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है।

भारत का बांग्लादेश को बड़ा झटका! बिजली हस्तांतरण पर लगेगा नया SNA शुल्क

भारत का बांग्लादेश को बड़ा झटका! बिजली हस्तांतरण पर लगेगा नया SNA शुल्क

India Bangladesh electricity trade

India Bangladesh electricity trade: बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्ता पलट अंतरिम सरकार के गठन के बाद से भारत के साथ उसके रिश्ते सामान्य नहीं है। तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बावजूद रिश्तों में अपेक्षित सुधार नहीं आया है। इस बीच, खबर है कि भारत सरकार ने बांग्लादेश को दी जाने वाली बिजली आपूर्ति पर नया 'सेटलमेंट नोडल एजेंसी' (SNA) शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है। इस नए फैसले के तहत बांग्लादेश को दी जाने वाली प्रति यूनिट बिजली पर 0.005 रुपए का नया शुल्क जोड़ा जाएगा।

यह शुल्क मूल बिजली शुल्क (Tariff) से अलग होगा। इसका प्राथमिक उद्देश्य दोनों देशों के बीच बिजली के निर्बाध लेन-देन और ग्रिड से जुड़ी तकनीकी सेवाओं के खर्च को पूरा करना है। इसमें बिजली की शेड्यूलिंग, मीटरिंग, ऊर्जा का हिसाब-किताब (Energy Accounting) और ग्रिड संचालन जैसी बुनियादी सेवाएं शामिल हैं। ALSO READ: हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है, बांग्लादेश में हारुन इजहार की खुलेआम धमकी

SNA (सेटलमेंट नोडल एजेंसी) क्या है?

जब बिजली एक जगह से दूसरी जगह (जैसे भारत से बांग्लादेश) भेजी जाती है, तो ग्रिड के जरिए होने वाले इस व्यापार को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार एक एजेंसी नियुक्त करती है। भारत में NVVN (NTPC Vidyut Vyapar Nigam Limited) जैसी संस्थाएं इस तरह की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करती हैं। बिजली के बड़े पैमाने पर लेन-देन में केवल बिजली का उत्पादन ही शामिल नहीं होता, बल्कि कई तकनीकी और प्रशासनिक कार्य भी होते हैं। SNA शुल्क का इस्तेमाल इन सेवाओं के खर्च को पूरा करने के लिए किया जाता है। यह वह वास्तविक कीमत है जो प्रति यूनिट बिजली (Electricity Units) के उत्पादन और आपूर्ति के लिए दी जाती है। ALSO READ: बांग्लादेश में हिंदू परिवार की निर्मम हत्या, बंद घर में मिले 4 शव, इस बात से नाराज थे आरोपी

भारत बांग्लादेश को बिजली बेचकर कितना कमाता है?

भारत-बांग्लादेश के बीच बिजली व्यापार दोनों देशों के लिए बेहद अहम रहा हैस भारत की विभिन्न सरकारी और निजी कंपनियां (जैसे NTPC, Adani Power, NVVN) बांग्लादेश को प्रतिवर्ष अरबों रुपए की बिजली निर्यात करती हैं। एक अनुमान के अनुसार, बिजली निर्यात से भारत को सालाना लगभग 8000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपए तक की कमाई होती है। हालांकि हाल के महीनों में बांग्लादेश पर भारतीय ऊर्जा कंपनियों का करोड़ों डॉलर का बकाया जमा हो गया है, जिसकी वसूली के लिए वार्ताएं जारी हैं।

 

नया SNA शुल्क लागू होने से दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार अधिक सुव्यवस्थित होगा, हालांकि यह बांग्लादेश के लिए आयात लागत में मामूली वृद्धि लाएगा।

 

उल्लेखनीय है कि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुई तख्तापलट और शेख हसीना के पद छोड़ने के बाद से दोनों देशों के कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों में तनाव देखा गया है। बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर असमंजस बना हुआ है। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साझा किया समृद्ध मध्यप्रदेश 2047 का विजन, MP को नंबर-1 बनाने पर हुआ मंथन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साझा किया समृद्ध मध्यप्रदेश 2047 का विजन, MP को नंबर-1 बनाने पर हुआ मंथन

भोपाल। मध्यप्रदेश के लिए 24 अगस्त का दिन बेहद खास रहा। देशभर के संस्थानों के विद्वानों ने प्रदेश के विकास पर अपने-अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि वे राज्य के विकास के लिए क्या कर रहे हैं और क्या कर सकते हैं। मौका था भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीटयूशनस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश @2047” राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव का। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने “समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” स्मारिका का विमोचन भी। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (AIGGPA) द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय कॉन्क्लेव की थीम “वन इंस्टीट्यूट–वन प्रॉमिस” है। 

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्तमान का अद्भुत समय चल रहा है। रामायण काल में जब भगवान श्री राम की सेना युद्ध के लिए तैयार थी, उस वक्त सबसे महत्वपूर्ण भूमिका जामवंत ने निभाई थी। उस वक्त चुनौती भी थी, अवसर भी था, लेकिन जामवंत को भगवान हनुमान को उनका सामर्थ्य याद दिलाना पड़ा। प्रधानमंत्री मोदी ने भी आज वही भूमिका निभाई है, जो जामवंत ने निभाई थी।

उन्होंने भारत को भारत की ताकत का अहसास कराया है। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि भारत हर चुनौती का सामना करने का माद्दा रखता है। उनके 12 वर्ष के कार्यकाल में चमत्कार हुए हैं। जबकि, 12 वर्ष का कार्यकाल बहुत कम होता है। आज सेमीकंडक्टर की यूनिट मध्यप्रदेश में लग रही है। दो-तीन पहले तक हम जो सोच नहीं सकते थे, वह हो रहा है। समय कहां से कहां चला गया। आज सारे राज्यों के पास आगे बढ़ने के समान अवसर हैं। उन्होंने कहा कि आज सारे संस्थानों के विद्वान यहां इकट्ठा हुए हैं। निश्चित रूप से हम विकास की ओर और तेजी से अग्रसर होंगे।

हमारे सामने ये है बड़ी चुनौती-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इजराइल हमारी आजादी के एक साल बाद आजाद हुआ, जापान द्वितीय विश्व युद्ध में करीब-करीब तबाह हो गया। लेकिन, आज ये देश कहां से कहां पहुंच गए। कुछ समय पहले तक पाकिस्तान की इकोनॉमी भारत से बेहतर मानी जाती थी, लेकिन अब चिंतनीय स्थिति में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वो समय गया जब दुश्मन हमारे सैनिकों के सिर काटकर ले जाते थे, वो दौर बड़ी चुनौती का दौर था। लेकिन, आज समय बदला है। हमने थल-जल-नभ में अपनी ताकत बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि ड्रोन की वजह से युद्ध का स्वरूप बदल गया है। ऑपरेशन सिंदूर में हम इसकी झलक देख चुके हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस बदलते दौर में भी हमारे सामने कई चुनौतियां हैं। आज कोई छात्र ये नहीं कहता कि वह खेती करना चाहता है। हमारा देश और प्रदेश कृषि आधारित हैं, ऐसे में किसी का खेती में रुचि न लेना बड़ी चुनौती है। 1956 में मध्यप्रदेश बना, लेकिन 2002-03 तक सिंचाई क्षेत्र केवल साढ़े सात लाख हेक्टेयर ही था। साढ़े सात लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र बनाने में 55 साल लग गए। 

 

राज्य आगे बढ़ेंगे तो देश आगे बढ़ेगा-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं नदी जोड़ो अभियान के लिए प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद देता हूं। इसके जरिये सिंचाई का क्षेत्र और विस्तृत होगा। हमने दक्षिण भारतीय राज्यों में बाढ़ की स्थिति में लोगों को मरते देखा है। नदियां जुड़ जाएंगी तो बाढ़ा का पानी व्यवस्थित होगा। आज मिल-जुलकर काम करने का समय है। राज्य आगे बढ़ेगा तो देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान के साथ हमारा दो दशकों से पानी के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था, अब पीकेसी योजना के जरिये 15 जिले राजस्थान के और 15 जिले हमारे हरे-भरे होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैन्यूफैक्चरिंग में मध्यप्रदेश ग्लोबल हब, रिसर्च, एआई और पब्लिकेशन से पेटेंट तक का रोडमैप, इंफ्रास्ट्रक्चर, नवाजार और अधोसंरचना, डिजिटल पेमेंट और एआई तकनीक से सुशासन की ओर बढ़ने का मार्ग मिलता है। मानव पूंजी, आत्मनिर्भरता, रोजगार, निवेश, नवाचार, उद्यमशीलता, क्षेत्रीय संतुलन के साथ समावेशी विकास करते हुए मध्यप्रदेश निरंतर आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में स्किल हमारे लिए नई करेंसी और इनोवेशन नई इकोनॉमी है। ऐसे समय में प्रदेश को शोध, नवाचार, उद्यमिता का केंद्र बनाने की आवश्यकता है। अटल बिहारी वाजपेयी जी के मन में राष्ट्रवाद की अटूट भावना थी।

 

सभी की भागीदारी जरूरी- कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव अशोक वर्णबाल ने कहा कि समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 विजन डॉक्यूमेंट विकसित भारत का एक लक्ष्य है। इसे हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सप्त संकल्प बताए हैं। मध्यप्रदेश तकनीक और नवाचारों में अग्रणी राज्य है। हमारा प्रयास वर्ष 2047 तक की सभी जनरेशन को एक सूत्र में बांधना है। इसमें सिविल सोसाइटी, उद्यमी, संस्थानों और हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। हमें केवल इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट नहीं चाहिए, बल्कि प्रोडक्टिव इन्वेस्टमेंट चाहिए, जो वैल्यू जनरेट कर मध्यप्रदेश को नेशनल वैल्यू चेन में शामिल करे। विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प में 2029 हमारा चेक प्वाइंट है।विकसित मध्यप्रदेश की जिम्मेदारी सिर्फ शासन की नहीं, बल्कि हम सभी की है, क्योंकि हमारी आने वाली पीढ़ी यह देखेगी कि उन्हें क्या मिला?

 

केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों से हुई अहम बात-गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। इस सत्र को एआईजीजीपीए के चीफ साइंटिफिक एडवाइजर संतोष कुमार विश्वकर्मा ने मॉडरेट किया। एनआई ट्रिपल टीआर के प्रतिधिनि ने मध्यप्रदेश को सेमीकंडक्टर तकनीक के विकास के लिए सबसे अनुकूल स्थान बताया। संस्थान इस दिशा में कार्य करेगा। ट्रिपल आईटी भोपाल के प्रतिनिधि ने साइबर सिक्योरिटी और डेटा को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारतीय सेना की ओर से मेजर जनरल विकास ने डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने के लिए ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम करने की आवश्यकता बताई।

मैनिट के निदेशक ने बताया कि मध्यप्रदेश में होम स्टे का प्रशिक्षण देने के लिए कार्य़ कर रहा है। होम स्टे को विषय के रूप में जोड़ा गया है। एलएनआईपी की प्रतिनिधि ने शारीरिक शिक्षण और खेलों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण देने की बात कही। एम्प्री के प्रतिनिधि ने बताया कि राज्य के युवाओं को वैज्ञानिक प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने का काम जारी है। क्रिटिकल एलिमेंट्स के लिए रिसर्च में हमारा अहम योगदान होगा। रायसेन के जनकपुर गांव को एम्प्री ने सीएसआर के अंतर्गत गोद लिया है। इस गांव को स्मार्ट विलेज बनाने के प्रयास जारी हैं, अगले दो साल में 4 से 5 करोड़ रुपए का निवेश और सीएसआर के जरिए तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी। मध्यप्रदेश का यह गांव देश के 5 चयनित गांवों में शामिल है, जिन्हें स्मार्ट विलेज बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सिंहस्थ 2028 के लिए भी सीएसआर के जरिए प्रयास जारी रखेंगे। इस दौरान आईआईटी इंदौर, आयशर भोपाल, आईआईएम इंदौर, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के निदेशक ने भी विकसित मध्यप्रदेश के लिए अपनी योजनाएं सामने रखीं।