देवदार के घने जंगलों में विराजते हैं ताड़केश्वर महादेव, सावन में जरूर करें दर्शन

देवदार के घने जंगलों में विराजते हैं ताड़केश्वर महादेव, सावन में जरूर करें दर्शन

tarkeshwar mahadev

उत्तराखंड की पहाड़ियों में कई ऐसे शिव धाम हैं, जहां आस्था के साथ प्रकृति की खूबसूरती भी मन मोह लेती है। पौड़ी गढ़वाल के लैंसडाउन क्षेत्र में देवदार और बलूत के घने जंगलों के बीच स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर भी ऐसा ही एक पवित्र स्थल है। समुद्र तल से करीब 2092 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर शांत वातावरण, प्राकृतिक झरनों और भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के बीच भी खास आकर्षण रखता है। खासकर सावन के महीने में यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। ALSO READ: उत्तराखंड में 50 रोपवे परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, सीएम धामी ने दिए प्राथमिकता के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, जनपद पौड़ी गढ़वाल में देवदार के घने जंगल के बीच स्थित श्री ताड़केश्वर महादेव मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और आध्यात्मिक आभा के लिए प्रसिद्ध है। भगवान शिव को समर्पित यह पावन धाम श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति और दिव्य अनुभूति प्रदान करता है। श्रावण मास में यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पौड़ी गढ़वाल की यात्रा के दौरान श्री ताड़केश्वर महादेव के दर्शन अवश्य करें।

 

टिहरी गढ़वाल जिले के लैंसडाउन क्षेत्र में स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर भगवान् शिवजी को समर्पित है। यह मंदिर समुद्री तल से 2092 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। 5 किमी की चौड़ाई में फैला हुआ यह मंदिर बलूत और देवदार के पेड से घिरा हुआ है। यहां कई पानी के छोटे छोटे झरने बहते हैं। मान्यता है कि ताड़कासुर का अंत करने के बाद शिवजी यहां ठहरे थे। ALSO READ: बागेश्वर का बागनाथ मंदिर: उत्तर भारत का अनोखा दक्षिणमुखी शिव धाम, सावन में दर्शन का विशेष महत्व

 

वर्षभर यहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, जबकि सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ALSO READ: उत्तराखंड का छोटा अमरनाथ! प्राकृतिक बर्फ से बनता है यहां शिवलिंग, दर्शन के लिए उमड़ती है भारी भीड़

 

कैसे पहुंचें ताड़केश्वर मंदिर?

हवाई मार्ग- लैंसडाउन पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। यहां से लैंसडाउन की दूरी करीब 177 किलोमीटर है। यहां से आपको टैक्सी या बसें मिल जाएंगी।

ट्रेन से- सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कोटद्वार है। यहां से लैंसडाउन की दूरी करीब 70 किलोमीटर है। यहां से भी आपको बस और टैक्सी आराम से मिल जाएंगी।

सड़क मार्ग से- अगर आप कार से आ रहे हैं तो दिल्ली, देहरादून या हरिद्वार से सड़कें लैंसडाउन के लिए कनेक्टेड हैं।

कूड़े में फेंकी गई थीं एक्सपायरी चॉकलेट-टॉफियां, उठाने के लिए टूट पड़े लोग; वीडियो वायरल

कूड़े में फेंकी गई थीं एक्सपायरी चॉकलेट-टॉफियां, उठाने के लिए टूट पड़े लोग; वीडियो वायरल

expired chocolate

कानपुर में एक्सपायरी हो चुकी चॉकलेट, टॉफी और बिस्किट को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक दुकानदार ने बड़ी मात्रा में एक्सपायरी खाद्य सामग्री को कूड़े के ढेर में फेंकवा दिया। लेकिन इसके बाद वहां ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने लोगों को चौंका दिया। ALSO READ: मौत के बाद खुला भिखारी महिला का राज! 30 से ज्यादा बोरियों में मिले नोट-सिक्के, निकले 8.40 लाख रुपये

 

कूड़े में पड़े चॉकलेट और टॉफियों के पैकेट देखकर कई लोग उन्हें उठाने के लिए पहुंच गए। देखते ही देखते लोगों में इन्हें अपने घर ले जाने की होड़ मच गई। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

कचरे के ढेर पर पड़े थे चॉकलेट और बिस्किट

बताया जा रहा है कि कानपुर के एक इलाके में बड़ी मात्रा में एक्सपायरी डेट पार कर चुके चॉकलेट, टॉफी और बिस्किट के डिब्बे कूड़े के ढेर पर फेंके गए थे। कुछ लोगों की नजर जब इन खाद्य उत्पादों पर पड़ी तो उन्होंने उन्हें उठाना शुरू कर दिया।

 

इसके बाद कई अन्य लोग भी वहां पहुंच गए और कचरे के बीच से चॉकलेट-टॉफियां निकालकर अपने साथ ले जाने लगे। वायरल वीडियो में लोगों को कूड़े के ढेर से खाद्य सामग्री इकट्ठा करते हुए देखा जा सकता है। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़, ड्यूटी आदेश मिलते ही कर्मचारी ने दिया इस्तीफा, कर्मचारियों में क्यों फैला खौफ?
 

एक्सपायरी खाद्य पदार्थ उठाना कितना खतरनाक?

एक्सपायरी डेट पार कर चुके खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खासतौर पर गर्मी और नमी में लंबे समय तक पड़े रहने से ऐसे उत्पादों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

 

ऐसे में कूड़े के ढेर से एक्सपायरी चॉकलेट, टॉफी या बिस्किट उठाकर घर ले जाना स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। इन उत्पादों की पैकेजिंग खराब या दूषित होने की स्थिति में जोखिम और बढ़ सकता है।

 

घटना ने उठाए जागरूकता पर सवाल

इस पूरे मामले ने खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ लोगों की स्वास्थ्य जागरूकता और सार्वजनिक व्यवहार पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। दुकानदारों और खाद्य कारोबारियों की जिम्मेदारी है कि एक्सपायरी उत्पादों को खुले कचरे में फेंकने के बजाय उन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाए, ताकि कोई व्यक्ति उन्हें दोबारा इस्तेमाल न कर सके।

 

वहीं, लोगों को भी कूड़े में पड़े किसी खाद्य पदार्थ को केवल इसलिए घर नहीं ले जाना चाहिए क्योंकि वह पैकेट में बंद दिखाई दे रहा है। वायरल वीडियो के बाद यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

मौत के बाद खुला भिखारी महिला का राज! 30 से ज्यादा बोरियों में मिले नोट-सिक्के, निकले 8.40 लाख रुपये

मौत के बाद खुला भिखारी महिला का राज! 30 से ज्यादा बोरियों में मिले नोट-सिक्के, निकले 8.40 लाख रुपये

Mandya Beggar Woman

कर्नाटक के मांड्या से सामने आई एक घटना ने हर किसी को हैरान कर दिया। यहां 68 साल की एक महिला लंबे समय से भीख मांगकर अपना जीवन गुजार रही थी। अचानक उसकी मौत के बाद उसके घर से लाखों रुपये नकद बरामद हुए। महिला की पहचान नूर के रूप में हुई है।

 

घर की तलाशी में मिले पैसों से भरे बोरे

नूर मांड्या में अपनी बहन के साथ किराए के मकान में रहती थीं। दोनों बहनों ने शादी नहीं की थी। करीब दो साल पहले उसकी बहन की भी मौत हो गई थी। इसके बाद वह अकेले ही रह रही थीं।

नूर की मौत के बाद जब स्थानीय लोगों ने उनके घर की तलाशी ली तो वहां का नजारा देखकर हर कोई हैरान रह गया। घर में 30 से ज्यादा प्लास्टिक की बोरियां मिली। इन बोरियों में बड़ी संख्या में सिक्के और 10, 20 और 50 रुपये के नोट भरे हुए थे। स्थानीय लोगों ने इन पैसों को बाहर निकालकर गिनना शुरू किया। इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो भी सामने आया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में लोग बोरियों से नोट और सिक्के निकालते तथा रकम की गिनती करते दिखाई दे रहे हैं।

कुल 8.40 लाख रुपये निकले

काफी मशक्कत के बाद जब पूरी रकम की गिनती की गई तो कुल 8 लाख 40 हजार रुपये निकले। बताया गया कि नूर के पास यह रकम लंबे समय से जमा थी। इतनी बड़ी राशि सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के साथ-साथ उनके रिश्तेदार भी हैरान रह गए।

पैसों के बंटवारे को लेकर हुआ विवाद

महिला की मौत के बाद उसके घर से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की खबर फैलते ही रिश्तेदारों के बीच रकम के बंटवारे को लेकर तनातनी भी हुई। हालांकि बाद में रकम को परिवार के सदस्यों के बीच बांट दिया गया। एक भाई को 6 लाख रुपये मिले, जबकि दूसरे भाई के हिस्से में 2 लाख 40 हजार रुपये आए। बताया गया कि दूसरे भाई ने मिली रकम मस्जिद में दान कर दी।

दिल्ली में आफत की बारिश! जलभराव से बढ़ी परेशानी, पूरी राजधानी में रेड अलर्ट

दिल्ली में आफत की बारिश! जलभराव से बढ़ी परेशानी, पूरी राजधानी में रेड अलर्ट

delhi rain

Delhi Rain : दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार सुबह से भारी बारिश जारी है। कई इलाकों में जलभराव के बीच IMD ने पूरी दिल्ली के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। तेज हवाओं, बिजली और तूफान की चेतावनी के साथ लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। ALSO READ: Weather Forecast: 25 अगस्त को कौनसे राज्यों में होगी बारिश, IMD ने किन राज्यों के लिए जारी की चेतावनी

 

मौसम विभाग के मुताबिक, अगले कुछ घंटों के दौरान दिल्ली के सभी जिलों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तूफानी हवाएं चलने की आशंका है। हवाओं की रफ्तार करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और जरूरी न होने पर घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।

 

कनॉट प्लेस से दक्षिणी दिल्ली तक जलभराव

सुबह से जारी मूसलाधार बारिश का असर दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में देखने को मिला। कनॉट प्लेस, एम्स और दक्षिणी दिल्ली के कई हिस्सों में सड़कें पानी से लबालब है। जलभराव के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों और दफ्तर जाने वाले लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। मौसम विभाग ने पहले दिल्ली के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था, लेकिन बारिश की तीव्रता बढ़ने के बाद इसे रेड अलर्ट में बदल दिया गया।

इन इलाकों के लिए रेड अलर्ट

IMD के अनुसार, सेंट्रल दिल्ली, ईस्ट दिल्ली, नई दिल्ली, नॉर्थ दिल्ली, नॉर्थ ईस्ट दिल्ली, नॉर्थ वेस्ट दिल्ली, शाहदरा, साउथ दिल्ली, साउथ ईस्ट दिल्ली, साउथ वेस्ट दिल्ली और वेस्ट दिल्ली समेत सभी जिलों में रेड अलर्ट लागू किया गया है। ALSO READ: Delhi-NCR Rain: भारी बारिश से हाहाकार, 14 उड़ानें डायवर्ट; दिल्ली-गुरुग्राम में लंबा जाम

लोगों को क्या सावधानी बरतने की सलाह?

मौसम विभाग ने लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है। बारिश के दौरान वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने और कम दृश्यता वाले रास्तों पर गति नियंत्रित रखने की सलाह दी गई है। लोगों को पेड़ों के नीचे खड़े होने, जलाशयों के आसपास जाने और कमजोर इमारतों या ढांचों के पास रुकने से बचने को कहा गया है। प्रशासन ने जल निकासी व्यवस्था पर भी ध्यान देने की सलाह दी है।

 

किसानों के लिए भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खेतों में जमा अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करने और कटी हुई फसल को खुले में न रखने को कहा गया है। खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।

बलात्कारी बाबा, बार-बार पैरोल, क्या भारत में कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है?

बलात्कारी बाबा, बार-बार पैरोल, क्या भारत में कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है?

ram rahim parole

“तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख…” फिल्म दामिनी में Sunny Deol का यह संवाद केवल अदालत की सुस्ती पर व्यंग्य नहीं था, बल्कि उस भारतीय व्यवस्था का आईना था जहां कानून की किताब सबके लिए एक जैसी दिखती है, लेकिन उसका इस्तेमाल सबके लिए बराबर नहीं होता।

 

आज यह संवाद फिर प्रासंगिक लगता है— क्योंकि एक तरफ देश की जेलों में हजारों विचाराधीन कैदी सालों तक सुनवाई का इंतजार करते रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर मामलों में दोषी करार दिया गया Gurmeet Ram Rahim Singh बार-बार पैरोल और फरलो पाकर जेल से बाहर आता है, सत्संग करता है, गाने लॉन्च करता है, वीडियो संदेश देता है और राजनीतिक मौसम के साथ उसकी “आध्यात्मिक सक्रियता” भी अचानक बढ़ जाती है।

 

सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है जहां “सजा” और “सुविधा” के बीच की रेखा रसूख देखकर तय होती है।

 

जेल या वीआईपी वेटिंग लाउंज?

भारतीय जेल व्यवस्था का सिद्धांत कहता है कि पैरोल एक मानवीय राहत है — परिवार में मृत्यु, बीमारी, सामाजिक संकट या मानसिक पुनर्वास जैसे कारणों के लिए। लेकिन जब पैरोल बार-बार मिलने लगे, उसकी टाइमिंग राजनीतिक रूप से सुविधाजनक दिखने लगे, और जेल से बाहर आकर दोषी व्यक्ति सार्वजनिक शक्ति प्रदर्शन करने लगे, तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि:

 

क्या पैरोल सुधार का माध्यम है या प्रभावशाली लोगों के लिए “कानूनी छुट्टी पैकेज”?

भारत की जेलों में ऐसे लाखों कैदी हैं जिन्हें मामूली जमानत तक नहीं मिलती। कई लोग उस अपराध की अधिकतम संभावित सजा से भी ज्यादा समय विचाराधीन कैदी के रूप में काट देते हैं। उनके लिए कानून धीमा है, कठोर है, और लगभग बहरा है। लेकिन कुछ लोगों के लिए वही कानून आश्चर्यजनक रूप से लचीला हो जाता है।

 

कानून की आंखों पर पट्टी है… या चयनात्मक दृष्टि?

भारतीय न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत यह मानी जाती है कि कानून “अंधा” होता है — यानी सबको बराबर देखता है। लेकिन वास्तविकता में भारतीय जनता का अनुभव कुछ और कहता है।

 

आम नागरिक के लिए:

  • अदालत = इंतजार
  • पुलिस = दबाव
  • जेल = दंड

 

लेकिन रसूखदार के लिए:

  • अदालत = प्रक्रिया
  • कानून = व्याख्या
  • जेल = अस्थायी व्यवधान

 

यही वह बिंदु है जहां लोकतंत्र धीरे-धीरे “कानूनी समानता” से “कानूनी विशेषाधिकार” की ओर खिसकने लगता है।

फ्रांसीसी दार्शनिक Michel Foucault ने लिखा था: “कानून केवल न्याय का उपकरण नहीं होता, वह सत्ता का प्रदर्शन भी होता है।” भारत में यह प्रदर्शन अब बेहद आम दृश्य हो चुका है।

 

जब अपराधी ‘इन्फ्लुएंसर’ बन जाए

सबसे विचित्र बात यह नहीं कि पैरोल मिली। सबसे विचित्र बात यह है कि जेल से बाहर आने के बाद एक दोषी व्यक्ति सार्वजनिक मंचों पर लगभग सेलिब्रिटी की तरह सक्रिय रहता है।

  • वीडियो संदेश।
  • भक्तों की भीड़।
  • राजनीतिक संकेत।
  • यूट्यूब संस्कृति।
  • डिजिटल ब्रांडिंग।

यह सब उस देश में हो रहा है जहां पीड़ितों को अक्सर अपनी पहचान छिपानी पड़ती है। भारत का सामाजिक मनोविज्ञान भी यहां कटघरे में खड़ा है। हम अपराध और प्रसिद्धि के बीच की रेखा खो चुके हैं। टीआरपी, सोशल मीडिया और राजनीतिक लाभ ने “दोषी” को भी “प्रभावशाली” बना दिया है।

 

क्या न्याय अब सिर्फ प्रक्रिया बनकर रह गया है?

भारतीय न्याय व्यवस्था का सबसे बड़ा संकट देरी नहीं है। सबसे बड़ा संकट है — जनता का घटता भरोसा।

जब लोग देखते हैं कि:

 

  • गरीब जमानत के लिए वर्षों भटकता है।
  • किसान कर्ज के लिए जेल जाता है।
  • छात्र सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तार हो जाता है।
  • लेकिन प्रभावशाली दोषी बार-बार राहत पा लेते हैं।

 

तब संविधान की किताब से ज्यादा असर जनता की निराशा करती है।

लोकतंत्र केवल चुनाव से नहीं चलता। लोकतंत्र इस विश्वास पर चलता है कि कानून सबके लिए समान है। और जब यह विश्वास टूटने लगता है, तब नागरिक कानून का सम्मान नहीं, बल्कि उससे दूरी बनाना शुरू कर देते हैं।

 

भारत को किस तरह की न्याय व्यवस्था चाहिए?

यह बहस किसी एक बाबा, एक पार्टी या एक केस की नहीं है। यह उस बड़े प्रश्न की बहस है: क्या भारत में न्याय व्यवस्था व्यक्ति की सामाजिक-राजनीतिक ताकत से प्रभावित हो रही है? अगर जवाब “नहीं” है, तो फिर हर बार वही चेहरे विशेष राहत क्यों पाते हैं? और अगर जवाब “हां” है, तो फिर लोकतंत्र की नैतिक नींव कितनी सुरक्षित बची है? लेखक George Orwell ने Animal Farm में लिखा था: “All animals are equal, but some animals are more equal than others.

 

भारतीय लोकतंत्र का सबसे खतरनाक क्षण वह होगा जब जनता यह मान ले कि यह पंक्ति अब केवल व्यंग्य नहीं, बल्कि वास्तविकता है।

 

अंतिम सवाल

जब जेल से बाहर आने वाला दोषी व्यक्ति खुद कानून से ज्यादा शक्तिशाली दिखने लगे, तो फिर असली कैद में कौन है? वह व्यक्ति… या भारत का न्यायबोध?

 

LIVE: दिल्ली में झमाझम, भारी बारिश का रेड अलर्ट

LIVE: दिल्ली में झमाझम, भारी बारिश का रेड अलर्ट

delhi rain

Latest News Today Live Updates in Hindi : दिल्ली में भारी बारिश से राजधानी के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। मौसम विभाग ने आज यहां भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया। पल पल की जानकारी। 

-भारी बारिश से राजधानी दिल्ली के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। मौसम विभाग ने भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया।
-मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से गैंगटिक वेस्ट बंगाल से मॉनसून का एक सिस्टम बना है। वहीं, उत्तर भारत में कम दबाव का क्षेत्र बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य स्थानें में आंधी के साथ तेज बारिश हुई।

राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की पैरोल, 7 साल में 17वीं बार आया जेल से बाहर

राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की पैरोल, 7 साल में 17वीं बार आया जेल से बाहर

parole to gurmit ram rahim

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 21 दिन की पैरोल मिल गई है। यौन शोषण के मामले में रोहतक की सुनारिया जेल में 20 साल की सजा काट रहे राम रहीम को 17वीं बार पैरोल पर रिहा किया गया है। वह जेल से बाहर निकलकर सीधे सिरसा जाएगा। ALSO READ: बलात्कारी बाबा, बार-बार पैरोल, क्या भारत में कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है?

 

2 साध्वियों से दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा

गुरमीत राम रहीम को 25 अगस्त 2017 को पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 2 साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया था। इसके तीन दिन बाद 28 अगस्त 2017 को अदालत ने दोनों मामलों में 10-10 साल की सजा सुनाई थी। इस तरह उसे कुल 20 साल की कारावास की सजा मिली। राम रहीम इसके अलावा एक पूर्व डेरा प्रबंधक और एक पत्रकार की हत्या के मामलों में भी दोषी ठहराया गया था। हालांकि बाद में उच्च न्यायालय ने इन दोनों मामलों में उसे बरी कर दिया।
 

पैरोल मिलने की अनिवार्य शर्तें

पैरोल मिलने की सबसे बड़ी शर्त जेल के अंदर कैदी का आचरण है। यह भी देखा जाता है कि क्या उसने जेल के नियमों का पालन किया? राम रहीम को अक्सर उसके अच्छे व्यवहार के आधार पर ही पैरोल की रिपोर्ट मिलती है। आमतौर पर पैरोल तभी मिलती है जब कैदी अपनी सजा का एक निश्चित हिस्सा (जैसे 1 या 3 साल) काट चुका हो। स्थानीय पुलिस और प्रशासन से रिपोर्ट ली जाती है कि क्या उस कैदी के बाहर आने से इलाके में 'लॉ एंड ऑर्डर' (कानून-व्यवस्था) बिगड़ने का खतरा तो नहीं है। कैदी को भारी सुरक्षा राशि (Bail Bond) जमा करनी पड़ती है और दो 'जमानतदारों' की गारंटी देनी होती है कि वह समय पर वापस आएगा। 

 

गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल मिलने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने पहले भी इस पर आपत्ति जताई है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि पैरोल नियमों के तहत दी जाती है। 

 

कब कब जेल से बाहर आया राम रहीम?

2020 (अक्टूबर) : 1 दिन

2021 (मई) : 1 दिन

2022 (फरवरी) : 21 दिन

2022 (जून) : 30 दिन

2022 (अक्टूबर) : 40 दिन

2023 (जनवरी) : 40 दिन

2023 (जुलाई) : 30 दिन

2023 (नवंबर) : 21 दिन

2024 (जनवरी) : 50 दिन

2024 (अगस्त) : 21 दिन

2024 (अक्टूबर) : 20 दिन

2025 (जनवरी) : 21 दिन

2025 (मई) : 20 दिन

2025 (सितंबर) : 21 दिन

2026 (फरवरी) : 20 दिन

2026 (मई) : 30 दिन

2026 (अगस्त) : 21 दिन

जर्मनी: बुजुर्गों और बीमारियों पर बढ़ते खर्च का बोझ कौन उठाए

जर्मनी: बुजुर्गों और बीमारियों पर बढ़ते खर्च का बोझ कौन उठाए

Germany healthcare spending

निखिल रंजन

जर्मनी में बुजुर्गों और बीमारियों पर होने वाला खर्च बीते साल सामाजिक खर्च के कुल खर्च का करीब 70 फीसदी तक पहुंच गया। इसकी वजह से देश का सोशल बजट रिकॉर्ड ऊंचाई पर चला गया है। ALSO READ: क्या सूखे की मार से जर्मनी में महंगा होगा भोजन?

 

आईएफओ इंस्टीट्यूट के एक नए विश्लेषण से यह बात पता चली है। इस विश्लेषण की रिपोर्ट सोमवार, 24 अगस्त को प्रकाशित हुई। इस रिपोर्ट के मुताबिक 1992 के बाद से अब तक हुइ खर्चों में बढ़ोतरी का करीब 80 फीसदी हिस्सा बुजुर्गों और बीमारियों पर होने वाला खर्च है।

 

रिपोर्ट के मुताबिक इस जनसंख्या की संरचना में हो रहे बदलाव प्रवृत्ति के पीछे प्रमुख कारण है। इनकी वजह से कल्याणकारी राज्य में एक पीढ़ी का खर्च दूसरी पीढ़ी तक बहुत ज्यादा पहुंच रहा है।

 

जीडीपी से ज्यादा तेज गति से बढ़ रहा है सोशल बजट

आईएफओ की रिसर्चर एमिली होएसलिंगर का कहना है, “देश का सोशल बजट जीडीपी की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। इस वजह से कमजोर अर्थव्यवस्था भी सोशल बजट की हिस्सेदारी बढ़ाने में योगदान दे रही है।”

 

विश्लेषण के बाद जारी रिपोर्ट के मुताबिक 2019 और 2025 के बीच सामाजिक खर्च में 11.5 फीसदी या 104 अरब की बढ़ोत्तरी हुई। यह आंकड़ा कीमतों के असर को शामिल करने के बाद हासिल हुआ है। इसी अवधि में सोशल बजट की हिस्सेदारी 29.6 फीसदी से बढ़ कर 32 हो गई, जो रिकॉर्ड है।

 

खर्च में बढ़ोतरी की मुख्य वजह उन बुजुर्गों की बीमारी और देखभाल पर बढ़ता खर्च है, जिनके पास स्वास्थ्य बीमा है। इसके अलावा, संघीय पेंशन व्यवस्था के लिए किए जा रहे भुगतान भी इस वृद्धि का एक प्रमुख कारण हैं। ALSO READ: शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है जंगल की आग का धुआं

 

जर्मनी में क्या है सोशल बजट

जर्मनी में सोशल बजट का मतलब वह धनराशि जो समाज के अलग अलग वर्गों को सहायता के रूप में दी जाती है। इसमें बुजुर्गों को पेंशन से लेकर, स्वास्थ्य बीमा, दीर्घकालिक देखभाल, बेरोजगारी भत्ता, परिवार सहायता, आवास सहायता जैसे खर्चे शामिल हैं। इनके अलावा भी कुछ और खर्चे हैं जो इस धन से किए जाते हैं, मसलन सामाजिक सुरक्षा योजनाएं।

 

जर्मनी के श्रम और सामाजिक मंत्रालय के मुताबिक 2024 में इस सामाजिक बजट पर कुल 1.345 खरब यूरो खर्च किए गए। यह रकम देश की कुल जीडीपी की करीब 31.2 फीसदी है। हर गुजरते साल के साथ यह रकम बढ़ती जा रही है जबकि उस गति से जीडीपी नहीं बढ़ रही। हालत यह है कि कई सालों से इस बजट के लिए अतिरिक्त धन की व्यवस्था दूसरे स्रोतों से करनी पड़ रही है। ALSO READ: जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए जर्मन शहर ने उठाए कदम

 

किन लोगों तक पहुंचता है सोशल बजट का फायदा

सोशल बजट से बुजुर्गों को पेंशन और सहायता मिलती है। बीमारी, शारीरिक अक्षमता या किसी और वजह से अपना काम कर पाने में असमर्थ लोग भी लंबी समय की देखभाल या फिर दूसरी जरूरतों के लिए इसी बजट से सहायता पाते हैं।

 

नौकरी छूट जाने या फिर दोबारा रोजगार नहीं मिलने की स्थिति में भी सरकार लोगों की इस बजट से सहायता करती है। जर्मनी में परिवार और बच्चे पालने वाले लोगों को भी कुछ सहायता दी जाती है, इसके लिए भी धन इसी बजट से आता है।

 

जिन लोगों की आमदनी कम होती है और वो अपना खर्च उठा पाने में सक्षम नहीं होते उनके लिए आवास या फिर इसी तरह की सामाजिक सहायता या फिर सब्सिडी इस बजट के जरिए दी जाती है। ALSO READ: इसराइली मंत्री के “टारगेट किलिंग” वाले बयान पर उबाल

 

आबादी में बदलाव का असर

जर्मनी दुनिया के उन देशों में है जहां आबादी में वृद्धि बहुत धीमी है या फिर नहीं हो रही है। इसकी वजह से जनसंख्या में बुजुर्गों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है और युवा कम हो रहे हैं। बुजुर्ग होने के साथ लोगों की काम करने की क्षमता घटती जाती है। काम कम करने या फिर बंद कर देने के बाद उनके लिए पेंशन और दूसरे खर्चों का इंतजाम सामाजिक बजट के जिम्मे आ जाता है।

 

बच्चे कम पैदा होने की वजह से युवाओं की संख्या कम है ऐसे में इन सब बढ़े खर्चों का बोझ उठाना पड़ता है। यह स्थिति हर गुजरते साल के साथ बिगड़ती जा रही है।

 

जर्मनी में बीते कई वर्षों से आबादी लगभग स्थिर है। आप्रवासन के जरिए आबादी को घटने से रोकने में कुछ मदद मिली है लेकिन अगर यही हाल रहा तो यह उपाय भी कारगर नहीं रहेगा।

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Top News 25 August : देशभर में प्याज के बढ़ते दामों पर सख्त हुई सरकार। कांदा एक्सप्रेस से बढ़ाई सप्लाई। दिल्ली एनसीआर में लगातार दूसरे दिन भी झमाझम बारिश हो रही है। डाक मतपत्र पर ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से राहत। गालिबाफ ने अमेरिका पर MOU की शर्तों को बार बार तोड़ने का आरोप लगाया। गृहमंत्री अमित शाह का घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस का आरोप। पल पल की जानकारी…
 

5 शहरों में 35 रुपए किलो 'प्याज' 

देश में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच सरकार ने महाराष्ट्र के नासिक से प्रमुख खपत वाले शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए समर्पित रेलवे रेक यानी ‘कांदा एक्सप्रेस’ की सप्लाई बढ़ा दी है। NCCF और NAFED के माध्यम से चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी के खुदरा बाजारों में प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जाएगा। ALSO READ: Onion Price Hike : प्याज महंगा होते ही सरकार का बड़ा एक्शन, इन 5 शहरों में 35 रुपए किलो मिलेगा

 

दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश

दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में मंगलवार को भी झमाझम बारिश हो रही है। बारिश की वजह से लोगों को गर्मी से राहत मिली। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में जलभराव और यातायात जाम की स्थिति भी देखने को मिली। मौसम विभाग के अनुसार, आज राष्‍ट्रीय राजधानी में मानसून ट्रफ का असर बना रहेगा। यहां भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। ALSO READ: Weather Forecast: 25 अगस्त को कौनसे राज्यों में होगी बारिश, IMD ने किन राज्यों के लिए जारी की चेतावनी

 

डाक मतपत्र पर ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से राहत

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के डाक मतपत्र से मतदान को प्रतिबंधित करने वाले कार्यकारी आदेश को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया। । ट्रंप लंबे समय से डाक मतपत्र मतदान को धोखाधड़ी का जरिया बताते रहे हैं। ट्रंप के कार्यकारी आदेश पर मार्च में हस्ताक्षर किए गए थे। यह उनके प्रशासन से योग्य मतदाताओं की सूची बनाने और अमेरिकी डाक विभाग को केवल उन सूचियों में शामिल लोगों को डाक मतपत्र वितरित करने का आदेश देता है।

 

ईरान का अमेरिका पर बड़ा आरोप

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सोमवार को पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की। इस दौरान गालिबाफ ने अमेरिका की आलोचना करते हु्ए कहा कि अमेरिका ने जून में हुए 14 बिंदुओं वाले एमओयू की शर्तों को बार-बार तोड़ा है। यह समझौता पश्चिम एशिया में जंग खत्म करने और तकनीकी बातचीत के लिए रास्ता बनाने के लिए हुआ था।

 

शाह का घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस का आदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 9वें राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन 2026 का उद्घाटन किया। इस दौरान अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को घुसपैठ और अवैध आव्रजन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का निर्देश दिया। उन्होंने आतंकवाद से निपटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के अधिक इस्तेमाल पर भी जोर दिया। सम्मेलन में देशभर से करीब 850 अधिकारी शामिल हुए। 

Onion Price Hike : प्याज महंगा होते ही सरकार का बड़ा एक्शन, इन 5 शहरों में 35 रुपए किलो मिलेगा

Onion Price Hike : प्याज महंगा होते ही सरकार का बड़ा एक्शन, इन 5 शहरों में 35 रुपए किलो मिलेगा

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देश में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। एक साल में खुदरा प्याज की कीमतों में 59 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। कीमतों पर लगाम लगाने और बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने अब महाराष्ट्र के नासिक से प्रमुख खपत वाले शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए समर्पित रेलवे रेक यानी ‘कांदा एक्सप्रेस’ (Kanda Express) की सप्लाई बढ़ा दी है। उपभोक्ता मामलों की सचिव के मुताबिक इस कदम का उद्देश्य बाजार में प्याज की आपूर्ति बढ़ाना और मौसमी तेजी के कारण बढ़ रही कीमतों को नियंत्रित करना है।

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एक साल में 59% महंगा हुआ प्याज

 

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 24 अगस्त 2026 को 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। एक साल पहले इसी दिन यह कीमत 27.37 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यानी खुदरा कीमत में करीब 59 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, प्याज का औसत थोक भाव भी करीब 68 फीसदी बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलो हो गया है, जो एक साल पहले 21.23 रुपये प्रति किलो था।

 

दिल्ली समेत बड़े शहरों में क्या है प्याज का भाव?

 

सोमवार को प्रमुख शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें इस प्रकार रहीं:

 

  • चेन्नई : 60 रुपये प्रति किलो, पिछले साल 33 रुपये
  • दिल्ली : 55 रुपये प्रति किलो, पिछले साल 35 रुपये
  • कोलकाता : 53 रुपये प्रति किलो

 

सरकार का कहना है कि कीमतों में तेजी को देखते हुए बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ाई जा रही है।

 

इन 5 शहरों में पहुंचेगा ‘कांदा एक्सप्रेस’ का प्याज

 

निधि खरे ने बताया कि शुरुआत में प्याज की सप्लाई पांच प्रमुख खपत केंद्रों—चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी में की जाएगी। बाजार की जरूरत के अनुसार बाद में अन्य शहरों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। नासिक में रखे गए प्याज के बफर स्टॉक को विशेष रेलवे रेक के जरिए बड़ी मात्रा में इन शहरों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके बाद इसे चुनिंदा शहरों के थोक और खुदरा बाजारों में वितरित किया जाएगा।

 

35 रुपये किलो में मिलेगा प्याज

 

सरकार के मुताबिक, NCCF और NAFED के माध्यम से खुदरा बाजारों में प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जाएगा। इससे बाजार में बढ़ी हुई कीमतों को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की जाएगी। सरकार प्याज की कीमतों पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नासिक की मंडियों में प्याज के भाव दिल्ली से ज्यादा चल रहे हैं, जबकि सामान्य स्थिति में ऐसा नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, इससे बाजार में कार्टेलाइजेशन और सट्टेबाजी की आशंका दिखाई देती है।

 

क्या है प्याज का बफर स्टॉक?

 

प्याज का बफर स्टॉक केंद्र सरकार का रणनीतिक भंडार है। इसका उद्देश्य आपूर्ति कम होने या कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के समय बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित करना है। सरकार मुख्य रूप से NAFED और NCCF जैसी एजेंसियों के माध्यम से प्याज की खरीद करती है। इसे Price Stabilisation Fund के तहत जमा किया जाता है और जरूरत के अनुसार चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारा जाता है। चालू वर्ष के लिए सरकार के पास 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक है, जो मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

 

अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ते हैं प्याज के दाम?

आमतौर पर अगस्त और सितंबर में प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। इसके पीछे त्योहारी मांग में बढ़ोतरी, मौसम से जुड़ी समस्याएं, सप्लाई चेन में बदलाव और खपत के पैटर्न में परिवर्तन जैसे कई कारण होते हैं। सरकार की ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश से आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।