कृति सेनन के राखी विज्ञापन पर क्यों मचा विवाद? राहुल गांधी के समर्थन से फिर गरमाई बहस, कंगना ने दिया था बयान

कृति सेनन के राखी विज्ञापन पर क्यों मचा विवाद? राहुल गांधी के समर्थन से फिर गरमाई बहस, कंगना ने दिया था बयान

rahul gandhi _ kirti senon

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को अभिनेत्री कृति सेनन का समर्थन किया। रक्षाबंधन के एक ज्वेलरी ब्रांड के विज्ञापन में कृति सेनन के पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर हुई आलोचना और ट्रोलिंग के बाद राहुल गांधी ने कहा कि किसी महिला के कपड़े और उसकी जीवनशैली को ऑनलाइन नियंत्रित नहीं किया जाना चाहिए।

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राहुल गांधी ने कृति सेनन के बयान को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर करते हुए लिखा कि एक महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां जाती है, यह उसकी अपनी पसंद है। महिलाओं को अपनी स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने के लिए ट्रोल करना बंद किया जाना चाहिए।

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रक्षाबंधन विज्ञापन से शुरू हुआ विवाद

विवाद उस समय शुरू हुआ जब ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन विज्ञापन में कृति सेनन को आइवरी रंग के ब्रालेट और स्कर्ट के साथ केप पहने हुए दिखाया गया। विज्ञापन में वह राखी बांधती नजर आईं। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके पहनावे को लेकर बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने इसे पारंपरिक त्योहार के अनुरूप नहीं बताया, जबकि कुछ लोगों ने विज्ञापन में कृति द्वारा कुत्ते को राखी बांधने पर भी आपत्ति जताई।

 

धीरे-धीरे विवाद केवल विज्ञापन तक सीमित नहीं रहा और महिलाओं के पहनावे, सांस्कृतिक परंपराओं तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई।

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कृति सेनन ने ट्रोलिंग पर दिया जवाब

 

मंगलवार को कृति सेनन ने सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना का जवाब देते हुए सवाल उठाया कि किसी महिला के अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान को उसके कपड़ों से ही क्यों आंका जाता है। उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा कि संस्कृति और परंपराएं महिला के दिल में होती हैं, उसकी नेकलाइन में नहीं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि महिलाओं को यह बताना आखिर कब बंद किया जाएगा कि उन्हें क्या पहनना चाहिए। कृति ने कहा कि समय के साथ एथनिक फैशन में काफी बदलाव आया है, लेकिन सांस्कृतिक परंपराओं की बात आते ही महिलाओं को आज भी उनके पहनावे के आधार पर परखा जाता है।

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कंगना रनौत ने भी कृति के लुक पर साधा निशाना

इस विवाद में अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत की भी प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए विज्ञापन में कृति सेनन के लुक की आलोचना की और इसे “जानबूझकर अजीब” बताया। वहीं कृति सेनन ने विज्ञापन का बचाव करते हुए कहा कि त्योहारों को उनके कपड़ों के बजाय उनसे जुड़े भावनात्मक मूल्यों और परंपराओं के आधार पर समझा जाना चाहिए।

‘रक्षाबंधन सुरक्षा का बंधन है’

 

कृति ने रक्षाबंधन के अपने पारिवारिक मायने भी बताए। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में यह भाई-बहन के बीच सुरक्षा और आपसी प्रेम का बंधन है। उन्होंने बताया कि वह और उनकी बहन एक-दूसरे को राखी बांधती हैं और दोनों मानती हैं कि वे एक-दूसरे की उसी तरह रक्षा कर सकती हैं, जैसे कोई भाई करता है। कृति के मुताबिक, दोनों बहनें एक-दूसरे के अच्छे स्वास्थ्य, खुशहाली और लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं। उन्होंने अपने पालतू जानवरों को भी परिवार का हिस्सा बताते हुए कहा कि उनके लिए वही भावना उनके पालतू जानवरों के प्रति भी है।

 

विज्ञापन में कुत्ते को राखी बांधने पर भी आपत्ति

विज्ञापन में कृति सेनन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती दिखाई देती हैं। इसके बाद वह अपने पालतू कुत्ते के पैर पर भी राखी बांधती नजर आती हैं। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने जहां कृति के पहनावे को लेकर सवाल उठाए, वहीं कुछ लोगों ने कुत्ते को राखी बांधने के दृश्य पर भी आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के साथ ही चर्चा महिलाओं के कपड़ों से लेकर संस्कृति, परंपरा और व्यक्तिगत पसंद की स्वतंत्रता तक पहुंच गई। राहुल गांधी के समर्थन में उतरने के बाद इस पूरे विवाद को राजनीतिक रंग भी मिल गया है।

बाबा महाकाल की कृपा से सिंहस्थ-2028 का आयोजन भव्य और दिव्य होगा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

बाबा महाकाल की कृपा से सिंहस्थ-2028 का आयोजन भव्य और दिव्य होगा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को उज्जैन में आयोजित सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल के दायित्व ग्रहण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से सिंहस्थ-2028 महापर्व का आयोजन भव्य, दिव्य, अद्भुत और अलौकिक होगा। सिंहस्थ के दृष्टिगत उज्जैन में किए जा रहे विकास कार्यों से महापर्व के पूर्व उज्जैन का सुंदर और सुव्यवस्थित होगा। सिंहस्थ के लिए संत, प्रशासन, संगठन सभी अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपनी भूमिका का निर्वहन करें।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि संत-महात्माओं के मार्गदर्शन में शासन-प्रशासन द्वारा सिंहस्थ महापर्व के लिए श्रद्धालुओं एवं साधु-संतों की सुविधा और सेवा के लिए चाक-चौबंद व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सिंहस्थ का आयोजन सभी की सहभागिता से होगा। जिन किसानों के पास भूमि उपलब्ध है, वे अपनी भूमि पर स्कूल, अस्पताल और हॉस्टल जैसी सुविधाएं विकसित करें, इसमें सरकार सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि उज्जैन के साथ गौरव जुड़ा हुआ है और सनातन धर्म की पहचान संत-महात्माओं के कारण बनी है। उन्होंने सिंहस्थ की तैयारियों के लिए किए जा रहे विकास कार्यों में सभी वर्गों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न धर्मों के लोगों ने धर्मस्थलों के लिए अपनी जगह उपलब्ध कराकर सहयोग किया है। अनेक नागरिकों ने अपने मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जगह भी स्वेच्छा से उपलब्ध कराई है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उज्जैन के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों का भी विकास किया जाएगा, जिससे ये धार्मिक स्थल और अधिक भव्य स्वरूप में नजर आएंगे।

 

करोड़ों की आस्था का केंद्र है सिंहस्थ-कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद संत बालयोगी उमेश नाथ महाराज ने कहा कि सिंहस्थ महापर्व करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का ध्यान सिंहस्थ को भव्य स्वरूप देने पर केंद्रित है। स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रामेश्वरदास महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ-2028 के लिए ऐतिहासिक कार्य किए हैं। वर्ष 2028 का कुंभ भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आगामी सिंहस्थ महापर्व का आयोजन अद्भुत होगा। 

 

विश्व का सबसे बड़ा मेला-सांसद अनिल फिरोजिया ने कहा कि सिंहस्थ महापर्व सनातन धर्म का विश्व का सबसे बड़ा मेला है। आयोजन की तैयारियों भी उसी के अनुरूप की जा रही है। फिरोजिया ने कहा कि महाकाल लोक बनने के बाद बाबा महाकाल का आभा मंडल विश्व में प्रचारित हुआ है। सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ पर्व की ऐतिहासिक आयोजन की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के विकास के लिए कृत संकल्पित हैं। सिंहस्थ के आयोजन में हम सभी मेजबान की भूमिका में हैं। सिंहस्थ मेला कार्यालय परिसर में आयोजित दायित्व ग्रहण समारोह में जगदीश अग्रवाल ने संत-महंतों की उपस्थिति में अध्यक्ष कक्ष में भगवान महाकाल की तस्वीर का पूजन-अर्चन किया।

योगी सरकार की ‘यात्री राहत योजना’ बनी पीड़ितों का आर्थिक सहारा, बस हादसे में मौत पर ₹7.50 लाख तक की मदद

योगी सरकार की 'यात्री राहत योजना' बनी पीड़ितों का आर्थिक सहारा, बस हादसे में मौत पर ₹7.50 लाख तक की मदद

उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों से होने वाली दुर्घटनाओं में यात्रियों और अन्य प्रभावित लोगों को आर्थिक सहारा देने के लिए संचालित यात्री राहत एवं सुरक्षा योजना पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी मदद का माध्यम बनी है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 के बीच मृत्यु और घायल होने के कुल 342 प्रकरणों में 17.33 करोड़ रुपए से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई है। योगी सरकार ने यह मदद पीड़ितों और परिवारों को उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के हक की दिशा में गंभीरता से काम किया है।

 

योजना के तहत 2017 से पहले उपलब्ध दो वर्षों यानी 2015-16 और 2016-17 में मृत्यु के 8 मामलों में 40 लाख रुपए की सहायता दी गई थी। इसके बाद 2017-18 से 2025-26 तक 9 वर्षों में मृत्यु के 322 मामलों में लगभग 17.08 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। वहीं घायल यात्रियों के 20 प्रकरणों में 24.37 लाख रुपए की सहायता दी गई।

 

2017 के बाद बढ़ा सहायता का दायरा और भुगतान

2017-18 से 2025-26 के बीच मृतकों के परिजनों को दी गई सहायता में लगातार बड़े स्तर पर भुगतान दर्ज है। इस अवधि में सबसे अधिक 2019-20 में 78 मृत्यु प्रकरणों में लगभग 3.68 करोड़ रुपए, 2021-22 में 48 प्रकरणों में लगभग 2.37 करोड़ रुपए की सहायता दी गई। वहीं 2017-18 में 42 प्रकरणों में करीब 2.10 करोड़ रुपए, 2023-24 में 32 प्रकरणों में 1.85 करोड़ रुपए और 2025-26 में 27 प्रकरणों में 1.97 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ।

 

परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि सड़क दुर्घटना में जान गंवाने या घायल होने वाले लोगों के परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत उपलब्ध कराने के लिए सरकार व परिवहन निगम की योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हमारा प्रयास शुरू से यह भी रहा है कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जाए। इसके लिए ड्राइवरों, कर्मचारियों से लेकर बसों के बेड़ों तक सभी की नियमित निगरानी की जा रही है।

 

वयस्क यात्री की मृत्यु पर अब 7.50 लाख रुपए

योजना के नए प्रावधानों में मृत्यु की स्थिति में राहत राशि बढ़ाई गई है। वयस्क यात्री की मृत्यु पर 7.50 लाख रुपए, आधा टिकट लेने वाले बच्चे की मृत्यु पर 3.75 लाख रुपए और परिवहन निगम के नियमों के तहत निःशुल्क यात्रा करने वाले छोटे बच्चे की मृत्यु पर लगभग 1.87 लाख रुपए की राहत राशि निर्धारित है। इससे दुर्घटना में परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने पर आश्रित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

 

गंभीर रूप से घायल यात्रियों को भी राहत

दुर्घटना में घायल होने वाले यात्रियों के लिए भी योजना में राहत का प्रावधान है। सामान्य रूप से घायल होने पर उपचार के लिए 10 हजार रुपए तक और गंभीर रूप से घायल होने पर 25 हजार रुपए तक की अग्रिम राहत संबंधित अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई जा सकती है। वहीं प्रारंभिक राहत के बाद भी घायल यात्री के उपचार पर इससे अधिक खर्च आता है, तो चिकित्सकीय उपचार के प्रमाणित बिलों और संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से जारी स्वास्थ्य लाभ प्रमाणपत्र के आधार पर आगे की प्रक्रिया की जाती है।

 

योजना के मूल प्रावधानों में गंभीरता के आधार पर घायल यात्री के लिए अधिकतम राहत की सीमा भी निर्धारित की गई है। सामान्य चोट के लिए अधिकतम 25 हजार रुपए।

 

250 नई इलेक्ट्रिक बसों से मजबूत होगा रोडवेज का बेड़ा

योगी कैबिनेट ने सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी अहम फैसला लिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बस बेड़े के सुदृढ़ीकरण के लिए 250 नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों की खरीद प्रस्तावित है। इसके लिए सरकार ने 400 करोड़ रुपए की प्रावधानित धनराशि को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया है।

 

प्रस्ताव के तहत 50 सीटर 100 बसें और 41 सीटर 150 बसें खरीदी जाएंगी। इन 250 बसों की कुल खरीद पर करीब 425.50 करोड़ रुपए का वित्तीय व्यय संभावित है। सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली 400 करोड़ रुपए की धनराशि के अतिरिक्त करीब 25.50 करोड़ रुपए का खर्च उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम अपने संसाधनों से वहन करेगा।

प्रदूषण पर भी लगेगी लगाम

इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना भी है। सीपीक्यूएम के निर्देशों के अनुसार 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक और बीएस-6 वाहनों को प्रवेश की अनुमति होगी। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े का विस्तार उत्तर प्रदेश से दिल्ली आने-जाने वाले सार्वजनिक परिवहन को इन पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप बनाने में मदद करेगा।

 

नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए परिवहन सेवाओं को भी बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इलेक्ट्रिक बसें पर्यावरण के अनुकूल यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ आम यात्रियों को आधुनिक और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प देंगी।

 

लोगों को कई स्तर पर मिलेगा रोजगार

इसके साथ ही बस बेड़े के विस्तार से चालकों, परिचालकों और तकनीकी रख-रखाव से जुड़े कुशल-अकुशल कर्मियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। बसों की संख्या में वृद्धि से ढाबा, रेस्टोरेंट और अन्य यात्री सुविधाओं से जुड़े रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

गंगा एक्सप्रेसवे अब पहुंचेगा हरिद्वार तक! ₹10,761 करोड़ से होगा विस्तार, प्रयागराज से हरिद्वार की कनेक्टिविटी होगी आसान

गंगा एक्सप्रेसवे अब पहुंचेगा हरिद्वार तक! ₹10,761 करोड़ से होगा विस्तार, प्रयागराज से हरिद्वार की कनेक्टिविटी होगी आसान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तारित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण 6 लेन में किया जाएगा, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा।

 

10,761 करोड़ रुपए आएगी अनुमानित लागत

हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार के लिए राज्य सरकार पर संभावित 10,761 करोड़ रुपए का व्यय-भार आएगा। परियोजना में केंद्र सरकार की किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित अथवा प्रस्तावित नहीं है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद परियोजना की डीपीआर तैयार करने सहित आगे की आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

 

बिजनौर से हरिद्वार की कनेक्टिविटी होगी आसान

उत्तराखंड सीमा से लगे बिजनौर जिले से हरिद्वार जाने के लिए वर्तमान में प्रमुख रूप से एनएच-34 (मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार राष्ट्रीय मार्ग) की सुविधा उपलब्ध है। गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से बिजनौर को हरिद्वार से बेहतर और तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी।इसके साथ ही बिजनौर की कनेक्टिविटी गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रदेश की राजधानी लखनऊ से भी बेहतर होगी। इससे क्षेत्र में व्यापार, निवेश, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

 

प्रयागराज-हरिद्वार के बीच बनेगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर

गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से गंगा के तट पर स्थित दो प्रमुख कुम्भ नगरियों, प्रयागराज और हरिद्वार के बीच प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेसवे नेटवर्क के माध्यम से तेज और सुगम यातायात सुविधा विकसित होगी। इससे धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए दोनों धार्मिक नगरियों के बीच आवागमन अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

 

धार्मिक पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

एक्सप्रेसवे के विस्तार से धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। बेहतर कनेक्टिविटी से हरिद्वार, बिजनौर और गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े अन्य क्षेत्रों में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। परियोजना के निर्माण और इससे उत्पन्न होने वाली आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

 

60 साल से अधिक उम्र की महिलाएं यूपी रोडवेज की बसों में करेंगी निशुल्क यात्रा, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में महिला सशक्तीकरण और उन्हें बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। प्रदेश सरकार ने लोक कल्याण संकल्प-2022 के तहत ‘सशक्त नारी’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की सामान्य बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने की घोषणा की है। यह फैसला वरिष्ठ महिलाओं को आर्थिक राहत देने के साथ ही उन्हें आवागमन में अधिक स्वतंत्रता और सुविधा देने वाला कदम साबित होगा।

 

योगी सरकार के इस फैसले का लाभ बड़ी संख्या में महिला यात्रियों को मिलेगा। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन करीब 88,438 महिला यात्रियों द्वारा इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है। इससे महिलाओं को प्रतिदिन आने-जाने के खर्च में राहत मिलेगी। विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक उम्र की उन महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन अधिक सुलभ होगा, जिन्हें नियमित रूप से विभिन्न कार्यों के लिए यात्रा करनी पड़ती है।

 

निगम की ओर से जारी होंगे विशेष स्मार्ट कार्ड

इस योजना के तहत निशुल्क यात्रा सुविधा को व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को परिवहन निगम की ओर से विशेष स्मार्ट कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। स्मार्ट कार्ड के माध्यम से पात्र महिला यात्रियों की पहचान और निशुल्क यात्रा की व्यवस्था को सुगम बनाया जा सकेगा।

 

22 करोड़ से ज्यादा हर महीने होंगे खर्च

इस सुविधा के तहत सरकार पर हर महीने 22.55 करोड़ रुपए का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। योगी सरकार ने इस फैसले के जरिए महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता के रूप में दर्शाया है। ‘सशक्त नारी’ के संकल्प को अब परिवहन सेवाओं से भी जोड़ दिया गया है।

छह महीने के अंदर एक लाख युवाओं को देंगे सरकारी नौकरी : CM योगी

छह महीने के अंदर एक लाख युवाओं को देंगे सरकारी नौकरी : CM योगी

CM Yogi government jobs announcement

CM Yogi government jobs announcement: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने 9 साल में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को पारदर्शी ढंग से बिना भेदभाव सरकारी नौकरियां दी हैं। यूपी में कभी एक लाख नौकरियां कल्पना होती थी, लेकिन हम छह महीने के भीतर एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र देने जा रहे हैं। रिजल्ट की प्रक्रिया चल रही है।

मुख्यमंत्री मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मिशन रोजगार के तहत उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा कृषि विभाग में नवचयनित 3446 प्राविधिक सहायकों (ग्रुप-सी) व 126 मंडी सचिवों को नियुक्ति पत्र सौंपने के उपरांत युवाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नवचयनितों से कहा कि सरकार ने पारदर्शी नियुक्ति दी है तो आप भी इसका लाभ प्रदेश, भावी पीढ़ी और देश को दें। कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन ही ‘नेशन फर्स्ट’ की थ्योरी है।

सीएम ने थपथपाई आयोग की पीठ

सीएम ने कहा कि हमारे आयोग व बोर्ड पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया से बिना भेदभाव, आरक्षण नियमों का पालन करते हुए योग्य अभ्यर्थियों को मेरिट के अनुसार सफलतापूर्वक नियुक्ति पत्र दिला रहे हैं। यह प्रशंसनीय है। योग्यतम अभ्यर्थियों के चयन से उनकी ऊर्जा का लाभ पूरे प्रदेश को मिलता है। 

अधियाचन के छह महीने में परिणाम दें

सीएम ने आयोग व बोर्डों के अधिकारियों से कहा कि आपके कार्यों में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। यदि हमने स्वतंत्रता दी है तो समय से परिणाम लाइए। अधियाचन जाने के बाद परिणाम आने में छह महीने से अधिक नहीं लगना चाहिए। एक महीने के अंदर विज्ञापन और अगले दो महीने के अंदर परीक्षा कराएं। प्रक्रिया को सहज-सरल बनाएं, जिससे युवा अपनी ऊर्जा का लाभ दे सके। जब हम युवा ऊर्जा को साथ लेकर चलते हैं तो परिणाम आते हैं। 

9 साल में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी

सीएम ने 9 साल में पारदर्शी नियुक्तियों को डबल इंजन सरकार की उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस दौरान सरकार ने 9.30 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई है। किसी भी नियुक्ति पर कोई प्रश्न नहीं खड़ा कर सकता। 2017 से पहले तो विज्ञापन निकलते ही चाचा-भतीजे की जोड़ी और महाभारत का खानदान वसूली करने निकल पड़ता था। युवा भटकता था, लेकिन परिणाम नहीं आता था। अंततः माननीय न्यायालय को स्टे करना पड़ता था। युवाओं का समय और उम्र खराब होती थी। नौकरी न पाने वाले युवाओं को लोग किसी काम का नहीं मानते थे, लेकिन गलती युवा की नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में बैठे राजनेताओं, आयोगों व बोर्डों में बैठे बेईमान लोगों की होती थी। हमारी सरकार ने कहा था कि नकल माफिया की कमर तोड़ेंगे और उनके आकाओं को भी जमीन दिखाएंगे। हम लोगों ने माफिया की संपत्ति जब्त कराकर उनसे वसूली कराई। 

नौजवानों की दुश्मन थी पिछली सरकार

सीएम ने 2017 से पहले यूपी बोर्ड की परीक्षा की दुर्दशा भी बताई और कहा कि तीन महीने परीक्षा और तीन महीने परिणाम आने में लगते थे। फिर अगले तीन महीने त्योहारों के बीच प्रवेश प्रक्रिया चलती थी। बच्चों को पढ़ाई के लिए तीन महीने भी नहीं मिल पाते थे। नौजवानों की दुश्मन सपा सरकार नकल करवाती थी और नौजवानों को किसी लायक नहीं छोड़ती थी। 

एक महीने में परीक्षा व परिणाम नहीं देने वाले कुर्सी छोड़ें 

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 में सीएम बनने के बाद मैंने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों से कहा कि परीक्षा व परिणाम एक महीने में दो। जवाब नकारात्मक मिला तो मैंने कहा कि तुम कुर्सी छोड़ो, मैं एक महीने के अंदर यह कराऊंगा। आज यूपी बोर्ड के 56 लाख अभ्यर्थियों की परीक्षा 14 दिन में होती है और अगले 14 दिन में परिणाम आता है। पहले फरवरी से शुरू हुई परीक्षा जून में लू-तपती गर्मी तक चलती थी। अब नकलविहीन परीक्षा और समय से परिणाम आ रहे हैं। विश्वविद्यालयों को भी सुधार लाने का निर्देश दिया गया है। शिक्षण संस्थान बच्चों की स्किलिंग, करियर, रोजगार के लिए भी खुद को तैयार करें।

युवाओं की उपेक्षा कर विकास नहीं कर सकती सरकार

सीएम ने कहा कि इन 9.30 लाख युवाओं ने डेमोग्राफिक डिविडेंड के रूप में यूपी को लाभान्वित किया है। यूपी की अर्थव्यवस्था व प्रतिव्यक्ति आय को तीन गुना करने में योगदान दिया है। पिछली सरकारें युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करती थीं। बंदरबांट कर पैसे के बल पर नौकरी देती थीं, लेकिन आज युवाओं के चेहरे की खुशी बता रही है कि बिना किसी लेनदेन, सिफारिश के उनके सपनों को उड़ान मिल रही है। युवा यूपी को बीमारू राज्य से उबारकर टॉप-3 राज्य बनाने में सफल हुए हैं। कोई सरकार युवाओं की उपेक्षा करके न विकास कर सकती और न ही परिणाम ला सकती है। 

यूपी के युवाओं को दुनिया दे रही नौकरी

सीएम ने कहा कि 2017 के पहले यहां कोई नहीं आता था, लेकिन दुनिया आज यूपी के नौजवानों को मांग रही है। उन्होंने विगत दिनों यूपी में आए जापान के प्रतिनिधिमंडल का भी जिक्र किया। कहा कि 240 सदस्यों का इतना बड़ा दल पहली बार भारत आया। इसमें बड़े नेता, अधिकारी, इडस्ट्री-बिजनेस लीडर्स शामिल थे। वे यूपी के युवाओं को जापान में नौकरी देना चाहते हैं। जर्मनी, इजराइल भी यूपी के नौजवानों को नौकरी देते हैं। इजराइल में यूपी के 5000 नौजवान गए, वहां डेढ़ लाख रुपये प्राप्त करते हैं। घर पर भी पैसा भेज रहे हैं। उनके रहने-खाने की भी व्यवस्था है। इजराइल जब युद्ध लड़ रहा था, तब भी यूपी के युवा वहां काम कर रहे थे। 

2017 के पहले खेतों से मोटर चोरी कराते थे सरकार के लोग

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले किसान खेत में जाने से डरता था। उसकी मोटर चोरी हो जाती थी, लेकिन अब कोई मोटर चोरी नहीं करता, क्योंकि पता है कि ऐसा करने पर अंजाम भुगतना पड़ेगा। 2017 के पहले सरकार के लोग ही मोटर चोरी कराते थे। सीएम ने 2017 के पहले बिजली क्षेत्र की दुर्दशा का भी जिक्र करते हुए बताया कि यूपी के किसानों को सर्वाधिक (10 घंटे) बिजली मिलती है। 16 लाख से अधिक निजी ट्यूबवेल का 3000 करोड़ रुपये का बिजली बिल भी सरकार ने माफ किया। अब इसका भुगतान प्रदेश सरकार करती है। पहली बार यूपी में किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ मिला है।

जिस चीनी मिल का स्क्रैप 10 करोड़ में बिकता था, उसे 3 करोड़ में बेच दिया 

सीएम ने 2017 से पहले गन्ना किसानों की तबाही बयान की और बताया कि 2009 से चीनी मिलों पर बकाया था। 2007 से 2017 के बीच सपा-बसपा सरकारों ने 29 चीनी मिलों को बंद किया था और 21 को औने-पौने दाम पर बेच दिया था। गोरखपुर मंडल की एक चीनी मिल मात्र तीन करोड़ रुपये में बेची गई थी, जबकि उसका स्क्रैप ही 10 करोड़ में बिकता। उस जमीन की कीमत आज 1000 करोड़ रुपये है। बतौर सांसद मैंने आंदोलन किया और माफिया की चलने न दी। तत्कालीन सरकारें चीनी मिलों को बंद करती थीं। आज 122 मिलें चल रही हैं।

30 फीसदी तक पहुंचा सकते हैं कृषि विकास दर

सीएम ने कहा कि यूपी जितना सामर्थ्य किसी के पास नहीं है। यूपी ने कृषि विकास दर 8 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी किया। अब इसे और आगे बढ़ाते हुए 30 फीसदी तक पहुंचा सकते हैं। इसके लिए अच्छी क्वालिटी के बीज उपलब्ध कराने होंगे। चौधरी चरण सिंह सीड पार्क काम काम लखनऊ में प्रारंभ हो रहा है। अब 3.25 लाख करोड़ रुपये किसानों के खाते में भेजे जा चुके हैं। सीएम ने किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का भी जिक्र किया। 

किसानों के लिए 2014-15 में आया पैसा हमने 2017 में बांटा 

सीएम ने कहा कि 2014-15 में हुदहुद साइक्लोन आया था, जिससे असमय अतिवृष्टि, अनावृष्टि, अत्यधिक बारिश से वर्ष भर का फसल चक्र बिगड़ा था। उस समय केंद्र सरकार ने आपदा राहत से पैसा उपलब्ध कराया था। यह पैसा 2017 तक नहीं बंट पाया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद हमने किसानों को वह पैसा बांटा। अब मानव-वन्यजीव संघर्ष, सर्पदंश, आकाशीय बिजली की चपेट में आने पर किसान, बटाईदार व परिवार वालों को 24 घंटे के भीतर 5 लाख की सहायता देते हैं। अतिवृष्टि-अनावृष्टि खेत का नुकसान हुआ है तो फसल बीमा का पैसा बाद में मिलेगा, लेकिन आपदा राहत का पैसा किसान को तत्काल दिलाते हैं।

हमारी सरकार ने सिंचाई के दायरे को भी बढ़ाया

सीएम ने कहा कि 2017 के पहले किसान सरकार के एजेंडे में ही नहीं था, लेकिन हमारी सरकार ने सिंचाई के दायरे को भी बढ़ाया। 2018 में बाणसागर परियोजना पूरी की। इससे ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिल रही है। अर्जुन सहायक परियोजना के जरिए महोबा से बांदा तक सिंचाई सुविधा को बढ़ाया। 1972 में बनी सरयू राष्ट्रीय नहर परियोजना 2021 में पूरी हुई। इससे बहराइच से गोरखपुर तक 9-10 जनपदों को 14 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा मिल रही है। 

अच्छे कार्यों से किसानों के मन में जगह बनाइए

सीएम ने नवनियुक्त मंडी सचिवों से कहा कि मंडियों को चमकाइए। वह साफ-सुथरी हों, कचरे का निस्तारण व रंगरोगन हो। किसानों को बुनियादी सुविधाएं, सम्मान मिले, मंडी समिति की सड़कों का समय से निर्माण हो। शेड अच्छे व प्रभावी हों। किसान की उपज की खरीद व एमएसपी देने की उचित व्यवस्था हो। मंडी को ई-नाम से जोड़ने की कार्रवाई को बढ़ाइए। किसानों को वैल्यू एडिशन, ड्रिप एरिगेशन, स्प्रिंकलर प्रणाली, आधुनिक तकनीकों से जोड़ें ताकि उनकी आमदनी बढ़े। आपके अच्छे कार्यों से किसानों के मन में श्रद्धाभाव पैदा होगा। 

यूपी में चीनी की कोई कमी नहीं

सीएम ने कहा कि यूपी 140 करोड़ देशवासियों का भी पेट भरने की क्षमता रखता है। यूपी में चीनी की कोई कमी नहीं है। यूपी में एक महीने की कुल खपत 4 लाख टन चीनी है और हमारे पास 28 लाख टन चीनी (7 महीने की चीनी) मौजूद है। 15 अक्टूबर से चीनी मिलें प्रारंभ होगी तो 90 लाख टन चीनी का और उत्पादन हो जाएगा। इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव (कृषि) रविंद्र, कृषि निदेशक त्र्यंबक मणि त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

यूपी में 8 मेगा औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत, ₹2,901 करोड़ से ज्यादा के निवेश को मिलेगा बढ़ावा, रोजगार के खुलेंगे नए अवसर

यूपी में 8 मेगा औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत, ₹2,901 करोड़ से ज्यादा के निवेश को मिलेगा बढ़ावा, रोजगार के खुलेंगे नए अवसर

योगी कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत आठ मेगा श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए जाने की संस्तुति को मंजूरी प्रदान कर दी है। इन आठ औद्योगिक इकाइयों द्वारा प्रदेश में कुल 2,901.97 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इन इकाइयों को नीति के तहत नेट एसजीएसटी और पूंजीगत सब्सिडी जैसे प्रोत्साहनों का लाभ मिलेगा।

 

मेगा निवेश परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी

उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) की 4 मई 2026 को हुई बैठक में इन औद्योगिक इकाइयों के प्रस्तावों पर विचार कर कैबिनेट से अनुमोदन की संस्तुति की गई थी। अब कैबिनेट ने इन इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए जाने की मंजूरी दे दी है। मंजूरी पाने वाली औद्योगिक इकाइयों में सूर्या ग्लोबल सुपर फ्लैक्सीफिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा गौतमबुद्ध नगर में 605.37 करोड़ रुपए, शाल्विस स्पेशियलिटीज लिमिटेड द्वारा हमीरपुर में 297.30 करोड़ रुपए और साउंड कास्टिंग्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा हाथरस में 225 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इसी तरह वृन्दावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बाराबंकी में 436.12 करोड़ रुपए, जुआरी (Zuari) एनविएन बायोएनर्जी प्राइवेट बायोएनर्जी लिमिटेड द्वारा लखीमपुर खीरी में 294.72 करोड़ रुपए, पसवारा पेपर्स लिमिटेड द्वारा हाथरस में 315 करोड़ रुपए, सीआरडी फूड्स एंड बेवरेजेज लिमिटेड द्वारा मथुरा में 363.94 करोड़ रुपए और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज लिमिटेड द्वारा उन्नाव में 363.52 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव है।

 

निवेशकों को मिलेगा नीति आधारित प्रोत्साहन

इन परियोजनाओं को उनकी पात्रता के अनुसार नेट एसजीएसटी और पूंजीगत सब्सिडी जैसे प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने और औद्योगिक इकाइयों को प्रतिस्पर्धी कारोबारी वातावरण उपलब्ध कराना है। इन आठ मेगा परियोजनाओं से प्रदेश में विनिर्माण एवं अन्य औद्योगिक गतिविधियों को विस्तार मिलने की उम्मीद है। निवेश के साथ नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

 

सरकार के इस निर्णय से गौतमबुद्ध नगर, हमीरपुर, हाथरस, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, मथुरा और उन्नाव जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

झांसी को मिलेगा बड़ा एक्सप्रेसवे का तोहफा, 7,968 करोड़ से बनेगा लिंक एक्सप्रेसवे, बीडा और डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगा सीधा फायदा

झांसी को मिलेगा बड़ा एक्सप्रेसवे का तोहफा, 7,968 करोड़ से बनेगा लिंक एक्सप्रेसवे, बीडा और डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगा सीधा फायदा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बुंदेलखंड के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने 7,968.30 करोड़ रुपए की लागत से झांसी लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना के विकास को मंजूरी प्रदान कर दी है।

 

बीडा और डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगा सीधा लाभ

झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र, डिफेंस कॉरिडोर और जनपद झांसी के आसपास के महत्वपूर्ण स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रदेश एवं देश के अन्य क्षेत्रों से इन स्थानों तक सुरक्षित और द्रुतगति यातायात आवागमन की सुविधा मिलेगी। परियोजना के निर्माण की अनुमानित लागत 7,968.30 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है। निर्माण कार्य के लिए होने वाला संभावित पूरा व्यय भार राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से इस परियोजना में किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित अथवा प्रस्तावित नहीं है।

 

जल्द शुरू होगा निर्माण

परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद यथाशीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ किए जाने की कार्यवाही की जाएगी। सरकार का लक्ष्य परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करना है, जिससे क्षेत्र को जल्द बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिल सके। झांसी लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण बीडा और डिफेंस कॉरिडोर के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से औद्योगिक गतिविधियों, निवेश और कारोबार को बढ़ावा मिलने की संभावना है। परियोजना के निर्माण और इसके बाद बढ़ने वाली आर्थिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।

सुल्तानपुर में 272 करोड़ से बनेगा बड़ा औद्योगिक क्लस्टर, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पास IMLC को कैबिनेट की मंजूरी

सुल्तानपुर में 272 करोड़ से बनेगा बड़ा औद्योगिक क्लस्टर, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पास IMLC को कैबिनेट की मंजूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने औद्योगिक कॉरिडोर योजना के अंतर्गत जनपद सुल्तानपुर में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आईएमएलसी) की स्थापना के लिए अवस्थापना विकास के निर्माण कार्यों से संबंधित परियोजना प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी।

 

272.25 करोड़ रुपए की परियोजना को मिली मंजूरी

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के सन्निकट विकसित किए जाने वाले इस औद्योगिक क्लस्टर के लिए 27225.33 लाख रुपए यानी लगभग 272.25 करोड़ रुपए की लागत अनुमोदित की गई है। निर्माण कार्य में होने वाला संभावित व्यय-भार राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। परियोजना में केंद्र सरकार की किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित अथवा प्रस्तावित नहीं है।

 

ग्लोबल बिड से होगा निर्माण एजेंसी का चयन

कैबिनेट की मंजूरी के बाद परियोजना के निर्माण एजेंसी के चयन के लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा और परियोजना को समयबद्ध रूप से पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

 

पूर्वांचल में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगी रफ्तार

आईएमएलसी के विकास से सुल्तानपुर में उद्योगों की स्थापना, निवेश और विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप होने के कारण क्लस्टर को बेहतर कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

 

स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

परियोजना के क्रियान्वयन और इसके अंतर्गत उद्योगों की स्थापना से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे सुल्तानपुर के लोगों को अपने ही जनपद में रोजगार के अवसर मिलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर के विकास से सुल्तानपुर में औद्योगिक आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी।

CJP ने संगठन में किए बड़े बदलाव, नए पदाधिकारियों का ऐलान, पार्टी ने बताया अब आगे का क्या है प्लान

CJP ने संगठन में किए बड़े बदलाव, नए पदाधिकारियों का ऐलान, पार्टी ने बताया अब आगे का क्या है प्लान

Abhijeet Dipke Cockroach Janta Party

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मंगलवार को अपने संगठन में नए पदाधिकारियों और जोनल कोऑर्डिनेशन कमेटियों के सदस्यों की घोषणा की। यह फैसला संगठन की 14 सदस्यीय नेशनल वर्किंग कमेटी के गठन के कुछ सप्ताह बाद लिया गया है। पार्टी ने अपने संस्थापक अभिजीत दिपके को राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया है। वहीं मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका को सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।

 

CJP ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर नए संगठनात्मक पदाधिकारियों की घोषणा करते हुए कहा कि वह देशभर में संगठन को और मजबूत तथा सक्रिय बनाने की दिशा में काम करना चाहती है। संगठन ने इसके साथ ही पांच संगठन संयुक्त सचिवों और दो राष्ट्रीय प्रवक्ताओं के नामों का भी ऐलान किया है।

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व्यंग्यात्मक संगठन से युवा आंदोलन तक पहुंचा CJP

 

कॉकroach जनता पार्टी की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक संगठन के तौर पर हुई थी, लेकिन पिछले महीने हुए सफल प्रदर्शन के बाद यह धीरे-धीरे युवा आंदोलन और दबाव समूह के रूप में उभरा। संगठन का दावा है कि उसके आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

 

नए पदाधिकारियों की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब CJP ने केंद्र सरकार पर 25 जुलाई को किए गए कथित वादों और प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया है।

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5 सितंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च का ऐलान

 

CJP ने सोमवार को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने और 5 सितंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की घोषणा की थी। संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को किए गए आश्वासनों को पूरा नहीं किया है। CJP के मुताबिक, 25 जुलाई को सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद संगठन ने अच्छे विश्वास में अपना राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन वापस लिया था। हालांकि, अब संगठन का आरोप है कि सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं पर खरी नहीं उतरी।

 

संगठन ने बताया कि 5 सितंबर को होने वाला मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। मार्च का नेतृत्व कथित तौर पर मृत NEET अभ्यर्थियों के परिवार और पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों के परिवार करेंगे। CJP ने दावा किया कि देशभर से छात्र, युवा संगठन और युवा नागरिक इस शांतिपूर्ण मार्च में शामिल हो सकते हैं।

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FIR वापस लेने के वादे को लेकर सरकार पर आरोप

 

CJP लंबे समय से केंद्र सरकार पर अपने वादों से पीछे हटने का आरोप लगाती रही है। संगठन का मुख्य आरोप प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और प्रदर्शनकारियों को दंडात्मक कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा देने के कथित आश्वासन से जुड़ा है। इस महीने की शुरुआत में CJP ने सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया था। संगठन ने केंद्र की मोदी सरकार पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म करने की प्रक्रिया में कथित तौर पर अड़चन डालने का आरोप लगाया था।

 

संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि 25 जुलाई को किए गए कथित वादों पर ठोस प्रगति नहीं हुई तो देशभर में आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है। CJP ने सोमवार को अपने बयान में कहा कि सरकार किसी पूरी पीढ़ी का भरोसा लेकर युवाओं को घर भेजने के बाद अपने ही वादे से पीछे नहीं हट सकती। संगठन ने इसे “विश्वासघात” करार देते हुए कहा कि वह इसे स्वीकार नहीं करेगा।

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आगे क्या?

नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च के ऐलान से CJP ने अपने संगठनात्मक विस्तार के साथ-साथ सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति भी स्पष्ट कर दी है। अब नजर इस बात पर होगी कि केंद्र सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च में कितनी भागीदारी होती है।

उषा देवी ने किराने की दुकान से बदली अपनी जिंदगी, 130 महिलाओं को भी दिखाई राह

उषा देवी ने किराने की दुकान से बदली अपनी जिंदगी, 130 महिलाओं को भी दिखाई राह

Usha Devi success story: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हजारों महिलाएं आज स्वरोजगार से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। गोरखपुर के चरगांवा ब्लॉक के नाहरपुर गांव की रहने वाली उषा देवी की कहानी भी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है, जिन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि गांव की सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गईं।

पड़ोसी गांव की महिलाओं से मिली प्रेरणा

उषा देवी बताती हैं कि करीब चार वर्ष पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। घर के खर्चों को पूरा करने में कठिनाई होती थी और आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। इसी दौरान उन्हें पड़ोसी गांव की महिलाओं से स्वयं सहायता समूह के बारे में जानकारी मिली। उन महिलाओं ने उषा देवी को समूह से जुड़ने और अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ने के लिए प्रेरित किया। उषा देवी ने इस अवसर को अपने जीवन में बदलाव लाने का माध्यम बनाया और स्वयं सहायता समूह से जुड़ गईं। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, बैंकिंग और स्वरोजगार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जिसने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम किया।

1.50 लाख रुपए के ऋण से मजबूत हुआ कारोबार

उषा देवी बताती हैं कि जुलाई 2022 में उन्हें स्वयं सहायता समूह के माध्यम से लगभग 1.50 लाख रुपए का ऋण प्राप्त हुआ। यह आर्थिक सहायता उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस राशि की मदद से उन्होंने अपनी किराने की दुकान को और मजबूत किया तथा व्यवसाय को विस्तार दिया। आज उनकी दुकान गांव के लोगों की जरूरतों को पूरा कर रही है और परिवार के लिए नियमित आय का स्रोत बन चुकी है। उषा देवी पिछले चार वर्षों से अपनी दुकान का सफल संचालन कर रही हैं। उनकी मेहनत और लगन ने परिवार की आर्थिक स्थिति को पहले की तुलना में काफी बेहतर बना दिया है।

130 महिलाओं को मिला मंच, गांव में बढ़ रही आत्मनिर्भरता की ताकत

उषा देवी वर्तमान में समूह सखी के रूप में भी कार्य कर रही हैं। उनके नेतृत्व में कुल 9 स्वयं सहायता समूह संचालित हो रहे हैं. इनसे लगभग 130 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न प्रकार के स्वरोजगार कार्य कर रही हैं। कोई बकरी पालन कर रही है, कोई गाय पालन, कोई मुर्गी पालन, तो कोई सिलाई, कढ़ाई और छोटे व्यापार के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही है। स्वयं सहायता समूहों ने गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें समाज में नई पहचान भी दिलाई है।

योगी सरकार की योजनाओं ने बढ़ाया महिलाओं का आत्मविश्वास

उषा देवी का कहना है कि स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाओं ने महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी दिया है। पहले जो महिलाएं घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, वे आज अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका मानना है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं। स्वयं सहायता समूहों ने गांव की महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया है।

ग्रामीण महिलाओं को नई दिशा दे रहा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। मिशन के तहत महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर बचत, ऋण, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। गोरखपुर की उषा देवी की सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सरकार की योजनाएं जब सही लाभार्थियों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल आर्थिक सहायता नहीं देतीं बल्कि जीवन बदलने का माध्यम बनती हैं। आज उषा देवी न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने साथ सैकड़ों महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ा रही हैं।