Gen Alpha मैदान में, पटना BPSC प्रदर्शन में 6 साल के आदित्य आया सुर्खियों में, CM सम्राट चौधरी के इस्तीफे की कर दी मांग

Gen Alpha मैदान में, पटना BPSC प्रदर्शन में 6 साल के आदित्य आया सुर्खियों में, CM सम्राट चौधरी के इस्तीफे की कर दी मांग

aditya

बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को बीपीएससी परीक्षा से जुड़ी मांगों को लेकर छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के बीच एक झुग्गी बस्ती में रहने वाला 6 साल का बच्चा आदित्य अचानक चर्चा का केंद्र बन गया। टी-शर्ट, डेनिम की पैंट और माथे पर तिलक लगाए आदित्य ने प्रदर्शन में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में राजनीतिक टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस्तीफे की मांग कर दी। आदित्य ने पत्रकारों से कहा, “मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को इस्तीफा देना चाहिए और लाठीचार्ज का आदेश देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”

 

पुलिस ने हिरासत में लेने की बात से किया इनकार

प्रदर्शन के बाद पुलिस आदित्य को थाने ले गई और उसकी मां को सौंप दिया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि बच्चे को गिरफ्तार नहीं किया गया था, बल्कि उसकी सुरक्षा को देखते हुए कुछ समय के लिए थाने में रखा गया था। इससे पहले सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि पुनाईचक इलाके के रहने वाले आदित्य को प्रदर्शन में शामिल होने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, पुलिस ने इन दावों को खारिज कर दिया। PTI के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि बच्चे को केवल सुरक्षा के लिहाज से अस्थायी तौर पर थाने लाया गया था।

 

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि बच्चे की मां और दिहाड़ी मजदूर पिता को भी बच्चे को लेकर अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई। अधिकारी के मुताबिक, जिस इलाके में तनाव की स्थिति थी, वहां बच्चे को अकेले घूमने नहीं देना चाहिए था।

प्रदर्शनकारियों ने लगाए ‘Gen Alpha’ के नारे

 

जब आदित्य को थाने से छोड़ा गया तो प्रदर्शनकारियों ने “Gen Alpha” के नारे लगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते बच्चा प्रदर्शनकारियों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया।

 

आदित्य के माता-पिता और उसे जानने वाले लोगों के मुताबिक, प्रदर्शन स्थल पर उसकी मौजूदगी के पीछे मुख्य वजह आसपास हो रही घटनाओं को लेकर उसकी जिज्ञासा थी। हालांकि, पत्रकारों से बातचीत में आदित्य ने कहा कि वह “भविष्य को लेकर चिंतित एक नागरिक के तौर पर अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है।”

 

CM आवास की ओर बढ़ रहे छात्रों की पुलिस से झड़प

 

मंगलवार को बीपीएससी परीक्षा से जुड़ी मांगों को लेकर छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों का प्रदर्शन उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे। इस दौरान उनकी पुलिस से झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड तोड़ने और पुलिस पर पत्थरबाजी किए जाने के बाद पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और कथित तौर पर लाठीचार्ज भी किया। झड़प में कई लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबर है।

जनक दीदी पौधे लगाकर मनाएंगी अपना 41वाँ रक्षा-बंधन

जनक दीदी पौधे लगाकर मनाएंगी अपना 41वाँ रक्षा-बंधन

janak didi

'जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' की निदेशक और प्रसिद्ध पर्यावरणविद डॉ. जनक पलटा मगिलिगन (जिन्हें सभी प्यार से 'जनक दीदी' कहते हैं) इस वर्ष अपना 41वाँ “रक्षा-बंधन” का पावन पर्व एक अनूठे और प्रेरणादायक अंदाज़ में मनाने जा रही हैं। पिछले 40 वर्षों की अपनी अनवरत परंपरा को जारी रखते हुए, वे इस बार भी अपने पर्यावरण-प्रेमी भाई-बहनों के साथ मिलकर सनावदिया स्थित अपने निवास 'गिरिदर्शन' के पीछे स्थित 'दुतनी टेकरी' पर सामूहिक रूप से पौधारोपण कर इस त्योहार को मनाएंगी।

 

भारतीय संस्कृति में “रक्षा-बंधन” का त्योहार भाई-बहन के पवित्र और अटूट रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र (राखी) बाँधती हैं और भाई जीवन भर अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है।

 

लेकिन जनक दीदी ने रक्षा-बंधन के इस पारंपरिक विचार को एक व्यापक और व्यावहारिक स्वरूप दिया है। उनका मानना है कि जब तक हमारी प्रकृति और पर्यावरण सुरक्षित नहीं रहेगा, तब तक मानव जीवन की सुरक्षा भी अधूरी है। इसी विचार के तहत वे इस दिन केवल इंसानों की ही नहीं, बल्कि पूरी सृष्टि और प्रकृति की रक्षा के लिए पौधे लगाती हैं।

 

प्रकृति संरक्षण के इस पावन अभियान में हर साल जनक दीदी के 'वृक्षमित्रों' (पर्यावरणप्रेमी साथियों) की संख्या लगातार बढ़ रही है। केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनके बड़े होने तक उनकी उचित देखभाल और सुरक्षा की ज़िम्मेदारी भी तय की गई है। इस अभियान में वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक (CCF) श्री पी. एन. मिश्रा और 'जैविक सेतु' संस्था का विशेष सहयोग व भागीदारी सुनिश्चित की गई है, ताकि लगाए गए सभी पौधे सुरक्षित रहकर एक समृद्ध जंगल का रूप ले सकें।

नेपाल में बाढ़ के कहर से बिहार में दहशत, कई जिलों में अलर्ट, कई इलाकों में NDRF और SDRF तैनात

नेपाल में बाढ़ के कहर से बिहार में दहशत, कई जिलों में अलर्ट, कई इलाकों में NDRF और SDRF तैनात

Nepal floods

नेपाल में गंडक नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में आए सैलाब के बाद अब बिहार में भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। गंडक नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ने की संभावना को देखते हुए बिहार में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। गंडक नदी में लगभग 3 मीटर तक ऊंची लहरें उठने की संभावना जताई गई है। इससे गंडक नदी से जुड़े जिलों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक भी हुई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित जिलों के जिलाधिकारी एवं वरीय पुलिस पदाधिकारी/पुलिस अधीक्षक बैठक में शामिल हुए। बैठक में हालात की समीक्षा करते हुए सभी संबंधित जिलों को अलर्ट रहने तथा आवश्यक बचाव एवं राहत तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए गए।

गंडक नदी से जुड़े जिलों में अलर्ट : गंडक नदी के संभावित बढ़े हुए जलप्रवाह को देखते हुए पश्चिमी चंपारण (बेतिया), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर एवं वैशाली में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा सीतामढ़ी, शिवहर एवं अन्य संवेदनशील जिलों में भी हालात पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। सभी जिलाधिकारियों को नदी के जलस्तर, तटबंधों, निचले इलाकों, पुल-पुलियों एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने तथा लोगों को समय पर अलर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

जल संसाधन विभाग द्वारा गंडक बैराज के सभी गेटों तथा उससे जुड़े नहरों में पानी प्रवाहित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उपलब्ध जलप्रवाह का सुरक्षित एवं प्रभावी प्रबंधन किया जा सके। संबंधित जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को अपने-अपने इलाकों में सतत निगरानी रखने तथा तटबंधों की निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

NDRF एवं SDRF की तैनाती: किसी भी हालात से निपटने के लिए NDRF एवं SDRF की भी तैनाती की जा रही है। गोपालगंज के लिए एक NDRF टीम भेजने का निर्देश दिया गया है तथा एक NDRF टीम को मुजफ्फरपुर में स्टैंडबाय पर रखा जाएगा। इसके अतिरिक्त बेतिया में भी NDRF की टीम को तैनाय करने के निर्देश दिए गए हैं। SSB DIG द्वारा भी जरूरत के मुताबिक QRT एवं अन्य संभावित सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है, जो बेतिया में उपलब्ध रहेगा।

सभी संबंधित जिलाधिकारियों को संभावित प्रभावित आबादी के लिए Evacuation Plan, पर्याप्त नावों की व्यवस्था, Community Kitchen एवं Shelter की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर समय रहते पहुंचाने की पूरी तैयारी रखने को कहा गया है।

सभी विभाग अलर्ट मोड में : जिला प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारियों को अपने-अपने इलाकों की निगरानी करते हुए आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। तटबंधों एवं जल संसाधन से संबंधित सभी महत्वपूर्ण संरचनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। बता दें कि तिब्बत की ओर से अचानक आई भीषण बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले के टिमुरे बाजार क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। लेन्दे खोला (भोटेकोशी) में आई बाढ़ से रसुवा सीमा नाके पर बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।

नेपाल में बाढ़ का सैलाब, 5 जिलों में हाई अलर्ट, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और कई परियोजनाएं ध्वस्‍त, हाई-रिस्क एडवाइजरी जारी

नेपाल में बाढ़ का सैलाब, 5 जिलों में हाई अलर्ट, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और कई परियोजनाएं ध्वस्‍त, हाई-रिस्क एडवाइजरी जारी

nepal flood

तिब्बत की ओर से अचानक आई भीषण बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचाई है। लेन्दे खोला (भोटेकोशी नदी) में अचानक आई बाढ़ से टिमुरे बाजार और रसुवा सीमा नाके के कस्टम क्षेत्र को व्यापक नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में वाहन और अन्य सामान बाढ़ के तेज बहाव में बह गए हैं। कई जलविद्युत परियोजनाओं और बस्तियों को भी नुकसान पहुंचने की भी खबर है।

5 जिलों में हाई अलर्ट : हालात की गंभीरता को देखते हुए 5 जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पीएम बालेन शाह के निर्देश पर सेना ने मोर्चा संभाल लिया है और हेलीकॉप्टर्स के जरिए उफनते पानी के बीच फंसी जिंदगियों को बचाने के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार सुबह तिब्बत से अचानक आई ज़बरदस्त बाढ़ ने उत्तरी नेपाल में भारी तबाही मचाई है और नदी के बहाव की दिशा में पड़ने वाले कई जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पानी का यह अचानक बहाव सुबह करीब 9:00 बजे भोटे कोशी नदी में आया और फिर आगे बढ़कर त्रिशूली नदी में नुवाकोट की ओर बढ़ा।

9 पुलिसकर्मी लापता : तेज बहाव में वाहन और सामान बह गए, जबकि एक पुल भी टूट गया। बाढ़ के बाद टिमुरे बॉर्डर पोस्ट पर तैनात 9 पुलिसकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ के बाद से इनसे संपर्क नहीं हो पाया है। हालांकि, बॉर्डर पोस्ट पर मौजूद 25 से 30 दूसरे लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

बाढ़ के असर को देखते हुए बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिला हाई अलर्ट पर हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने गंडक नदी में करीब 3 मीटर ऊंची फ्लैश फ्लड वेव आने की आशंका जताई है।

तिब्बत से आई बाढ़ से तबाही : शुरुआती जानकारी के मुताबिक उत्तरी रसुवा में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है खासकर तिमुरे बाजार इलाके, तिमुरे कस्टम ऑफिस और स्याब्रुबेसी में नुकसान हुआ है। वहीं जिला अधिकारी जान-माल और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी जुटा रहे हैं। हाइड्रोलॉजी के विशेषज्ञों का मानना ​​है कि पानी का यह अचानक बहाव स्थानीय बारिश के कारण नहीं बल्कि तिब्बत में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी ग्लेशियर झील के फटने से आया है।

हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग, स्थानीय प्रशासनिक कार्यालयों के साथ मिलकर चीनी अधिकारियों से संपर्क कर रहा है और घटना के स्रोत का पता लगाने के लिए सैटेलाइट डेटा की जांच कर रहा है। इस बीच रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन में नदी के किनारे वाले इलाकों के लिए हाई-रिस्क एडवाइजरी जारी की गई है। अनुमान है कि बुधवार शाम तक पानी का स्तर मुग्लिंग में मार्श्यांगडी नदी के संगम तक पहुंच जाएगा। नेपाल आपदा प्रबंधन अधिकारी प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षा उपाय करने की सलाह दे रहे हैं।

रेस्क्यू हेलिकॉप्टर को लौटना पड़ा : रसुवा के टिमुरे में फंसे लोगों को निकालने के लिए भेजा गया हेलिकॉप्टर बिना उतरे काठमांडू लौट आया। बाढ़ के पानी में स्थानीय हेलिपैड बह गया था, इसलिए पायलट को उतरने के लिए सुरक्षित जगह नहीं मिली। पायलट ने काठमांडू पोस्ट को बताया कि ऊपर से देखने पर टिमुरे गांव का बड़ा हिस्सा नजर ही नहीं आ रहा था। उन्होंने कहा कि त्रिशूली नदी का पानी अचानक बहुत तेजी से बढ़ा, जैसे अचानक किसी बंद नदी का पानी बाहर निकल आया हो।

ग्लेशियल झील फटने की आशंका : रसुवा में पिछले 24 घंटे में 7 मिमी से ज्यादा बारिश नहीं हुई, इसलिए बाढ़ की वजह स्थानीय बारिश नहीं मानी जा रही। अधिकारियों को शक है कि तिब्बत में ग्लेशियल झील फटने (GLOF) से अचानक पानी भोटे कोशी में आया। ICIMOD-UNDP की 2020 की स्टडी के मुताबिक, भोटे कोशी बेसिन में 122 ग्लेशियल झीलें हैं। कौन-सी झील फटी, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है; सैटेलाइट इमेज और तकनीकी जांच से स्रोत का पता लगाया जा रहा है।

न्यूयॉर्क से दिल्ली तक बवाल, RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर गर्माई सियासत, ‘इंडिया’ गठबंधन में उभरे मतभेद

न्यूयॉर्क से दिल्ली तक बवाल, RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर गर्माई सियासत, 'इंडिया' गठबंधन में उभरे मतभेद

Mohan Bhagwat US Visit

Mohan Bhagwat US Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे और मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले उनके कार्यक्रम को लेकर समंदर पार शुरू हुआ विवाद अब भारत के राजनीतिक गलियारों में पूरी तरह गरमा चुका है। न्यूयॉर्क के भारतीय मूल के मेयर जोहरान ममदानी द्वारा इस कार्यक्रम का विरोध किए जाने के बाद भारत में विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के घटक दलों के बीच ही दरार और विरोधाभासी सुर देखने को मिल रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सिंगर मैरी बिलमेन ने ममदानी पर निशाना साधते हुए कहा है कि वे भाजपा और मोदी विरोध के चलते ऐसा कर रहे हैं।

मेयर ममदानी का कड़ा रुख

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत संगठन के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तहत 'यूनिवर्सल वननेस' इवेंट में हिस्सा लेने अमेरिका पहुंचे हैं, जहां वे मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 5 हजार से अधिक भारतीय प्रवासियों को संबोधित करने वाले हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने साफ कहा कि वे इस रैली या कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक निजी कार्यक्रम है, इसलिए नगर प्रशासन के पास इसे रद्द करने का अधिकार शायद नहीं है। ALSO READ: USCIRF ने RSS पर प्रतिबंध की मांग की, मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे से पहले बढ़ा विवाद

शिवसेना-UBT ने किया भागवत का समर्थन

ममदानी के बयान पर शिवसेना (यूबीटी) ने सख्त आपत्ति जताई है। पार्टी नेता आनंद दुबे ने कहा कि आरएसएस से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है और उनकी पार्टी के भी संघ से हमेशा अच्छे रिश्ते रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि घरेलू राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन विदेश में भारतीय नेता या नागरिक का विरोध पूरे देश का अपमान है। ममदानी को मेहमानों का सम्मान करना सीखना चाहिए।

कांग्रेस ने संघ के रजिस्ट्रेशन और फंड पर दागे सवाल

वहीं, दूसरी ओर महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने इस मामले पर सीधे संघ को ही आड़े हाथों लिया है। पटोले ने आरोप लगाया कि आरएसएस भारत में कहीं भी पंजीकृत संगठन नहीं है और एनजीओ के मुखौटे में काम कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि दुनिया के 36 देशों में इनके बिना किसी ऑडिट के बैंक खाते चल रहे हैं। पटोले ने सवाल उठाया कि भारी विरोध के बीच भागवत अमेरिका क्यों गए और इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। ALSO READ: 20 जुलाई को कहां थे भागवत? RSS के Gen-Z संवाद पर CJP प्रमुख दीपके का हमला, बोले- अब बहुत देर हो गई!

कौन हैं जोहरान ममदानी?

भागवत के कार्यक्रम का विरोध करने वाले जोहरान ममदानी भारतीय मूल के अमरीकी नेता हैं और वर्तमान में न्यूयॉर्क शहर के मेयर हैं। जोहरान ममदानी मशहूर भारतीय मूल की फिल्म निर्देशक मीरा नायर (फिल्म 'सलाम बॉम्बे' और 'मानसून वेडिंग' की डायरेक्टर) और प्रसिद्ध युगांडा-भारतीय शिक्षाविद महमूल ममदानी के बेटे हैं। वे न्यूयॉर्क शहर के इतिहास में पहले भारतीय-अमेरिकी मेयर हैं। ममदानी की मां मीरा का पूरा परिवार आज भी भारत में ही निवास करता है।

कर्नल सोफिया मामले में मंत्री विजय शाह के बचाव में क्यों सरकार?, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

कर्नल सोफिया मामले में मंत्री विजय शाह के बचाव में क्यों सरकार?, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले कैबिनेट मंत्री विजय शाह के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी नहीं जाने के सरकार के फैसले को लेकर प्रदेश में सियासी पारा गर्मा गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इससे सेना का अपमान बताकर प्रदेश सरकार को बर्खास्त करने की मांग की है। 

 

जीतू पटवारी ने की सरकार को बर्खास्त करने की मांग- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में संवैधानिक एवं न्यायिक व्यवस्था की गरिमा की रक्षा और प्रदेश सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। जीतू पटवारी ने अपने पत्र में लिखा कि “आज मैं यह पत्र राजनीतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नहीं, भारतीय सेना, संविधान और न्याय की गरिमा में विश्वास रखने वाले एक नागरिक के रूप में लिख रहा हूँ! मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने देश की जांबाज बेटी और भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी कर जिस मर्यादा को तार-तार किया, वह एक व्यक्ति ही नहीं, देश की सेना का भी अपमान था”। 

 

उन्होंने आगे लिखा कि “लेकिन, आज प्रश्न उससे भी गंभीर हो गया है! मध्य प्रदेश सरकार द्वारा विजय शाह के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने का निर्णय एक बड़ेबोल मंत्री को राजनीतिक संरक्षण देने के साथ, उस व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है, जिसमें सत्ता अपने राजनीतिक व्यक्ति को जवाबदेही से बचाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया के सामने दीवार बनकर खड़ी हो रही है! सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित SIT ने अभियोजन की स्वीकृति की मांग की है। ऐसे में सरकार का रुख देश के सामने एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा करता है, क्या सत्ता में बैठे व्यक्ति कानून से ऊपर हैं।“

 

उन्होंने आगे लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनेक अवसरों पर भारतीय सेना, सैनिकों और उनकी शहादत के सम्मान को राष्ट्र के सर्वोच्च गौरव से जोड़ा है! यदि वे अपने ही शब्दों की गरिमा बनाए रखना चाहते हैं, तो उन्हें इस मामले में तत्काल और स्पष्ट हस्तक्षेप करना चाहिए! मेरा यह भी मानना है कि मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल का असंवैधानिक निर्णय प्रधानमंत्री की राजनीतिक सहमति के बिना संभव नहीं था। यदि ऐसा नहीं है, तो प्रधानमंत्री को स्वयं आगे आकर देश के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि वे विजय शाह को संरक्षण देने वाले इस निर्णय से “असहमत हैं।” इसलिए, आज देश प्रधानमंत्री से भी जवाब चाहता है! यह आपराधिक घटनाक्रम उस कथित 'डबल इंजन सरकार' के अहंकार को उजागर करता है, जिसमें एक मंत्री के राजनीतिक संरक्षण के लिए लोकतांत्रिक, संवैधानिक और न्यायिक मर्यादाओं को चुनौती देने तक की स्थिति पैदा हो रही है! विजय शाह ने पहले सेना का अपमान किया! अब उन्हें बचाने की कोशिश उस अपमान और अपराध को संस्थागत संरक्षण देने जैसी है! मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास का यह एक अत्यंत शर्मनाक अध्याय है, जहां सवाल अब केवल विजय शाह के आचरण का नहीं, मुख्यमंत्री और पूरे मंत्रिमंडल की संवैधानिक एवं नैतिक जवाबदेही का है! इसलिए, मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सहित अब पूरे मंत्रिमंडल को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए!

 

विजय शाह का बचाव क्यों कर रही सरकार?- मोहन सरकार में सीनियर मंत्री विजय शाह आदिवासी वर्ग से आते है और उनकी आदिवासी वोट बैंक पर मजबूत पकड़ है। बालाघाट में 25 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत के बाद सरकार पूरी तरह बैकफुट पर है। हरसूद से भाजपा विधायक विजय शाह आदिवासी वर्ग में गोंड जाति से आते है। प्रदेश में 21.5 फीसदी वोट बैंक रखने वाले आदिवासी वर्ग के लिए 47 विधानसभा सीट आरक्षित भी है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के परिणाम बताते है कि आदिवासी वोटर पूरी तरह भाजपा के साथ है। दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो तो प्रदेश में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 47 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने 24 सीटों पर जीत हासिल की है वहीं कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत हासिल की है।

 

खंडवा की हरसूद विधानसभा सीट से ढाई दशक से विधायक चुने जा रहे विजय शाह के मालवा-निमाड़ के आदिवाली बाहुल्य इलाके में गहरी पैठ है। खासकर निमाड़ के आदिवासियों के बीच उन्हें आज भी राजा के तौर पर माना जाता है। ऐसे में भाजपा के इस बात का डर है कि अगर विजय शाह पर केस चलाने की अनुमति दी जाती है उनको मंत्रिमंडल से भी बाहर करना होगा। इससे आदिवासी वर्ग में गलत मैसेज जाएगा और इसका नुकसान उसको चुनाव में उठाने पड़ेगा। भाजपा को शंका है कि विजय शाह के इस्तीफा का सीधा असर निमाड़ की 10 विधानसभा सीटों पर पड़ेगा, और भाजपा को आने वाले वक्त पर इन सीटों पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा सकता है। 

क्या है पूरा मामला?-मध्यप्रदेश के आदिवासी नेता और मोहन सरकार कैबिनेट मंत्री विजय शाह से जुडा यह पूरा मामला मई 2025 का है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इस ऑपरेशन की जानकारी मीडिया को देने वाली सैन्य अधिकारियों की टीम में कर्नल सोफिया कुरैशी भी शामिल थीं। 11 मई 2025 को महू के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसे उनके धर्म और पहलगाम हमले के आतंकियों के समुदाय से जोड़कर देखा गया। इस पूरे मामले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया और शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी को बेहद आपत्तिजनक माना था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

 

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT गठित की। SIT ने जांच पूरी करने के बाद विजय शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(a) के तहत अभियोजन की अनुमति मांगी। यही अनुमति लंबे समय से राज्य सरकार के पास लंबित है। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को अभियोजन स्वीकृति पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद भी फैसला नहीं हुआ। मई में सुप्रीम कोर्ट ने फिर सरकार के रुख पर नाराजगी जताई और आदेश के पालन के लिए समय दिया। जुलाई की स्थिति रिपोर्ट में भी सरकार की ओर से जरूरी दस्तावेज दाखिल नहीं किए जाने की बात सामने आई थी।

 

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 31 अगस्त को होनी है। वहीं इससे पहले गत मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में मंत्री विजय शाह पर केस चलाने के लिए सरकार के स्तर पर अभियोजन स्वीकृति देने के प्रस्ताव  की चर्चा थी लेकिन कैबिनेट बैठक मे यह प्रस्ताव नहीं आया है। 

 

उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में 17 अहम प्रस्तावों को मंजूरी, अग्निवीरों के लिए बनेगा रोजगार सेल

उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में 17 अहम प्रस्तावों को मंजूरी, अग्निवीरों के लिए बनेगा रोजगार सेल

Uttarakhand Cabinet Decision: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में 17 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने 'उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति-2026' और सेवानिवृत्त अग्निवीरों के लिए 'अग्निवीर रोजगार सेल' के गठन समेत उपनल कर्मचारियों के समान कार्य समान वेतन और बिजली खरीद से जुड़े बड़े फैसले लिए गए। 

 

सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में सहकारिता, परिवहन, स्वास्थ्य, ऊर्जा और कार्मिक विभाग से जुड़े 17 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अलग-अलग राज्यों की इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों का अध्ययन कर उत्तराखंड के लिए नई ईवी नीति बनाने के भी निर्देश दिए।

राज्य सहकारिता नीति-2026 को मंजूरी

कैबिनेट ने राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के अनुरूप 'उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति-2026' को स्वीकृति दी है। इस नीति में सात रणनीतिक मिशन तय किए गए हैं, जिनका उद्देश्य ग्रामीण नींव का सशक्तिकरण, सहकारिता का विस्तार, सहकारी संस्थाओं को भविष्य के लिए तैयार करना और युवा पीढ़ी को सहकारी विकास से जोड़ना है।

अग्निवीरों के लिए 'रोजगार सेल' का गठन

कैबिनेट ने सेवानिवृत्त अग्निवीरों के लिए समर्पित 'अग्निवीर रोजगार सेल' के गठन को मंजूरी प्रदान की है। इस सेल के जरिए सेवानिवृत्त अग्निवीरों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ और उनकी योग्यता व कौशल के अनुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। सेल के संचालन के लिए संविदा के आधार पर छह पदों (उपनिदेशक, सहायक निदेशक, कनिष्ठ सहायक आदि) के सृजन को स्वीकृति दी गई है। उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां अग्निवीरों के लिए ऐसा सेल बनाया गया है।

1320 मेगावाट बिजली खरीदेगा राज्य

ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कैबिनेट ने अडानी पावर लिमिटेड से 5.746 रुपए प्रति यूनिट की दर से 25 साल के लिए 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली की खरीद को मंजूरी दी है। छत्तीसगढ़ स्थित अडानी पॉवर के इस बिजलीघर से उत्तराखंड को वर्ष 2029-30 से 1320 मेगावाट बिजली मिलने लगेगी।

विद्वत् शिखर सम्मान @Astrologer Swati Saxena

विद्वत् शिखर सम्मान

हरिबोल

विद्वत् शिखर सम्मानबिहारीजी की कृपा और पापा के आशीर्वाद से ” ” प्राप्त हुआ, उत्तरप्रदेश पूर्व उप-मुख्य मंत्री डॉ दिनेश शर्मा व
देश के श्रेष्ट ज्योतिष विद्वानों के बीच आइकॉनिक ज्योतिषीय इंदु प्रकाश जी, पवन सिन्हा जी, शैलेंद्र पांडे जी की उपस्थिति रही

इंदौर में कीचड़भरी सड़क पर बैठे शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू, दो साल से अधूरी सड़क से लोग परेशान

इंदौर में कीचड़भरी सड़क पर बैठे शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू, दो साल से अधूरी सड़क से लोग परेशान

congress

इंदौर की खराब सड़कों के लिए अब लोगों को तरह तरह के विरोध करना पड़ रहा है। हाल ही में इंदौर में एक सड़क की बदहाल हालत को सुधारने की मांग के साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे लोगों के साथ कीचड़भरी सड़क पर बैठ गए। यह सड़क बॉम्बे हॉस्पिटल की सर्विस रोड है।

शहर की बदहाल सड़कों और गड्ढों के कारण हो रही जन परेशानी की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए कांग्रेस नगर अध्यक्ष चिंटू चौकसे बुधवार सुबह 10 बजे कीचड़ से भरी सड़क पर धरने पर बैठ गए। रहवासियों का आरोप है कि पिछले 2 वर्षों से वे इस दयनीय स्थिति का सामना कर रहे हैं, क्योंकि ड्रेनेज लाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़क की मरम्मत अब तक नहीं कराई गई है।

कांग्रेस नगर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने बताया कि नगर निगम प्रशासन और महापौर को नींद से जगाने के लिए अनूठा प्रदर्शन किया। चिंटू चौकसे ने कहा कि बॉम्बे हॉस्पिटल के पास स्थित यह सर्विस रोड बीते कई समय से बेहद खराब स्थिति में है। यहां से गुजरने वाले आम नागरिकों और वाहन चालकों को हर दिन दुर्घटनाओं और भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने बताया कि 2 वर्ष पूर्व ड्रेनेज लाइन डालने के लिए इस सड़क की खुदाई की गई थी, जिसके बाद से इसे अपने हाल पर छोड़ दिया गया। बारिश के मौसम में यह सड़क कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जिससे आए दिन लोग गाड़ियों समेत गिरकर चुटिल हो रहे हैं। चौकसे ने कहा कि यह केवल एक क्षेत्र की बात नहीं है, बल्कि इंदौर शहर के कई इलाकों में सड़कों का यही हाल है।

कांग्रेस नेताओं ने नगर निगम प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अगले 5 दिनों के भीतर इस सड़क की स्थिति को सुधार कर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी उग्र आंदोलन करेगी और शहर में चक्का जाम करने के लिए बाध्य होगी। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि शहर भर की सभी खस्ताहाल सड़कों की अविलंब मरम्मत की जाए।

रक्षाबंधन 2026: 27 या 28 अगस्त? जानिए राखी बांधने का सबसे सही दिन और शुभ मुहूर्त!

Rakshabandhan 2026
इस साल रक्षाबंधन (Shravan Purnima) की तारीख और भद्रा काल को लेकर कई लोगों के मन में उलझन है। अगर आप भी सोच रहे हैं कि राखी 27 अगस्त को बांधनी है या 28 अगस्त को, तो आपकी उलझन को दूर करने के लिए शास्त्रों और पंचांग के अनुसार सटीक जानकारी यहाँ दी गई है।
27 अगस्त को क्यों न बांधें राखी? (भद्रा का साया)
पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 (गुरुवार) को सुबह 09:08 बजे से शुरू हो जाएगी। लेकिन, तिथि के साथ ही भद्रा काल भी शुरू हो जाएगा जो रात तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा में राखी बांधना वर्जित और अशुभ माना जाता है। इसलिए 27 अगस्त को रक्षाबंधन मनाना श्रेष्ठ नहीं है।
28 अगस्त को ही क्यों मनाएं रक्षाबंधन? (उदया तिथि का महत्व)
पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को सुबह 09:48 बजे तक रहेगी। सनातन धर्म में उदया तिथि (सूर्योदय के समय जो तिथि हो) को ही पूरे दिन के लिए मान्य माना जाता है।
    • इस दिन भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा।
    • आप 28 अगस्त को पूरे दिन हर्षोल्लास के साथ रक्षाबंधन का पर्व मना सकते हैं।

 क्या 28 अगस्त के चंद्रग्रहण का असर पड़ेगा?
28 अगस्त को चंद्रग्रहण भी लग रहा है, लेकिन घबराने की कोई बात नहीं है! यह ग्रहण भारत में दिखाई (दृश्य) नहीं देगा। इस कारण से भारत में इसका कोई सूतक काल मान्य नहीं होगा और आपके रक्षाबंधन के पर्व पर इसका कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
राखी बांधने का सबसे श्रेष्ठ और शुभ मुहूर्त (Best Muhurat)
चूंकि पूर्णिमा तिथि सुबह 09:48 बजे समाप्त हो रही है, इसलिए शास्त्रों के अनुसार सुबह का समय सबसे उत्तम है:
    1. सर्वोत्तम मुहूर्त (सुबह): सुबह 05:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक 
    2. दोपहर का शुभ समय (अभिजीत मुहूर्त): दोपहर 12:24 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक।

सावधानी (राहुकाल): सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस समय के दौरान राखी बांधने से बचें।