4.9 तीव्रता से आए भूकंप के कारण टूटा ग्लेशियर, क्या आइस-रॉक एवलॉन्च है तबाही की वजह?

4.9 तीव्रता से आए भूकंप के कारण टूटा ग्लेशियर, क्या आइस-रॉक एवलॉन्च है तबाही की वजह?

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नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की प्रमुख इकाई राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने शुरुआती सैटेलाइट आधारित रिसर्च किया है। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने तबाही के पैमाने का आकलन किया और उन घटनाओं को समझने की कोशिश की, जिनके कारण हाल के सालों में हिमालयी क्षेत्र की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक सामने आई।

वर्तमान में भारत के 56 उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में सक्रिय हैं। NRSC के शुरुआती विश्लेषण के अनुसार, इस आपदा की शुरुआत तिब्बत के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में हुई। वैज्ञानिकों का मानना है कि 4.9 तीव्रता के भूकंप ने संभवतः एक सर्क ग्लेशियर (Cirque Glacier) को प्रभावित किया, जिसके बाद उसका एक बड़ा हिस्सा ढह गया। इस घटना से बर्फ और चट्टानों का विशाल हिमस्खलन हुआ, जो तेजी से नीचे घाटी की ओर बढ़ा। जो भारी मात्रा में पानी, मिट्टी, चट्टानें और मलबा लेकर अचानक नीचे की ओर बहा. इससे त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आई, जिसने व्यापक तबाही मचाई। सैटेलाइट इमेज की स्टडी कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि सर्क ग्लेशियर का ढहना और उसके बाद हुआ आइस-रॉक एवलॉन्च इस आपदा की सबसे संभावित वजह है।

पहाड़ी इलाकों को ज्यादा खतरा : इन झीलों से पैदा होने वाला खतरा मुख्य रूप से उन पर्वतीय और पहाड़ी जिलों में केंद्रित हैं, जो नीचे की ओर बहने वाली नदी घाटियों के रास्ते में स्थित हैं। यदि कोई बड़ा 'ग्लोफ' होता है, तो इन क्षेत्रों के लोगों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। पूर्वी और मध्य नेपाल, जिनमें कोशी और बागमती नदी बेसिन शामिल हैं, वहां कुल क्षेत्रीय जोखिम का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रित है। सबसे अधिक जोखिम वाले जिलों में सोलुखुम्बु शामिल है, जहां दूध कोसी और इमजा बेसिन आते हैं। संखुवासभा जिला बरुण और अरुण नदी घाटियों के किनारे स्थित है। दोलखा जिला तामा कोशी नदी कॉरिडोर में है और त्सो रोल्पा झील से खतरे का सामना कर सकता है।

LIVE: नेपाल बाढ़ तबाही में कितने देशों के लोग शामिल, कहां गए 750 लोग, क्या फिर आएगा तांडव?

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नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद 130 से ज्यादा भारतीय लापता हैं और कई दूसरे लोग फंस गए हैं। इनमें मानसरोवर यात्रा पर गए कई तीर्थयात्री भी शामिल हैं। काठमांडू में भारतीय दूतावास और तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने प्रभावित भारतीयों और उनके रिश्तेदारों के लिए हेल्पलाइन शुरू की हैं। सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल एजेंसी ने कहा कि कम से कम 59 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा के तीर्थयात्री थे। 

  

4.9 तीव्रता से आई भूकंप के कारण टूटा ग्लेशियर : नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की प्रमुख इकाई राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने शुरुआती सैटेलाइट आधारित रिसर्च किया है। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने तबाही के पैमाने का आकलन किया और उन घटनाओं को समझने की कोशिश की, जिनके कारण हाल के सालों में हिमालयी क्षेत्र की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक सामने आई। वर्तमान में भारत के 56 उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में सक्रिय हैं। NRSC के शुरुआती विश्लेषण के अनुसार, इस आपदा की शुरुआत तिब्बत के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में हुई। वैज्ञानिकों का मानना है कि 4.9 तीव्रता के भूकंप ने संभवतः एक सर्क ग्लेशियर (Cirque Glacier) को प्रभावित किया, जिसके बाद उसका एक बड़ा हिस्सा ढह गया। इस घटना से बर्फ और चट्टानों का विशाल हिमस्खलन हुआ, जो तेजी से नीचे घाटी की ओर बढ़ा। जो भारी मात्रा में पानी, मिट्टी, चट्टानें और मलबा लेकर अचानक नीचे की ओर बहा. इससे त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आई, जिसने व्यापक तबाही मचाई। सैटेलाइट इमेज की स्टडी कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि सर्क ग्लेशियर का ढहना और उसके बाद हुआ आइस-रॉक एवलॉन्च इस आपदा की सबसे संभावित वजह है।

चीन में भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन शुरू की : चीन में भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी कर तिब्बत-नेपाल बॉर्डर के इलाकों में अचानक आई बाढ़ में फंसे भारतीय नागरिकों के लिए मदद पाने के लिए संपर्क करने की जानकारी दी। तिब्बत से शुरू हुई जबरदस्त बाढ़ ने मध्य नेपाल में कई कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया, जरूरी पुल बहा दिए और एक दर्जन हाइड्रोपावर प्रोजेक्टों को ठप कर दिया। दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के सीमावर्ती इलाकों में हाल ही में आई बाढ़ को देखते हुए, आस-पास फंसे भारतीय नागरिक इन संपर्क बिंदुओं से मदद ले सकते हैं।” इसमें कहा गया है कि भारतीय नागरिक मौके पर मौजूद चीनी अधिकारियों से 0086 139 8999 0012 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। मिशन ने बताया कि वे बीजिंग में भारतीय दूतावास से 0086 185 1428 4905 नंबर पर और वाट्सऐप के जरिए और काठमांडू में भारतीय दूतावास से +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 नंबरों पर (इन दोनों पर WhatsApp के जरिए भी) संपर्क कर सकते हैं।

ब्रांडेड डिब्बा, नकली दवा! हर 3 में से 1 भारतीय को मिल रहा है नकली मेडिकल सामान! जानिए किस शहर में है सबसे ज्यादा खतरा

ब्रांडेड डिब्बा, नकली दवा! हर 3 में से 1 भारतीय को मिल रहा है नकली मेडिकल सामान! जानिए किस शहर में है सबसे ज्यादा खतरा

Fake Medicine

Fake Medicines India: जनस्वास्थ्य (Public Health) के मोर्चे पर एक बेहद डरावनी और चिंताजनक सच्चाई सामने आई है। बाजार में मिलने वाली नकली दवाएं और हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स पहली नजर में बिल्कुल असली जैसे दिखते हैं। इनकी पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजाइन की नकल इतनी सफाई से की जाती है कि आम मरीज या ग्राहक के लिए असली और नकली का फर्क पहचानना लगभग असंभव हो जाता है। खास बात यह है कि दिल्ली क्राइम ब्रांच ने हाल ही में कैंसर की नकली दवाओं के कारोबार का भंडाफोड़ किया है। देश के 17 राज्यों में फैले इस कारोबार के सिलसिले में 17 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है।

एएसपीए-क्रिसिल (ASPA-CRISIL) की हालिया जारी स्टेट ऑफ काउंटरफिटिंग इन इंडिया 2025” रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सर्वे किए गए हर तीन में से लगभग एक उपभोक्ता (33%) ने पिछले 12 महीनों के दौरान किसी न किसी नकली हेल्थकेयर प्रोडक्ट का सामना किया है। यह समस्या कपड़े या इलेक्ट्रॉनिक्स के नकली होने से कहीं ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि यहाँ सीधे मरीज की जान दांव पर लगी होती है।

 

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स्थानीय मेडिकल स्टोर से लेकर ऑनलाइन ऐप्स तक जाल

अक्सर यह माना जाता है कि नकली सामान केवल अनधिकृत या ऑनलाइन बाजारों में मिलता है, लेकिन यह सर्वे इस भ्रम को तोड़ता है। जिन लोगों का सामना नकली हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स से हुआ:

  • 63% लोगों ने स्थानीय रिटेल मेडिकल स्टोर्स को इसका स्रोत बताया।
  • 60% लोगों को ऑनलाइन एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स (दवा डिलीवरी ऐप्स) के जरिए नकली उत्पाद मिले।
  • लगभग एक-तिहाई लोगों को मल्टी-ब्रांड स्टोर्स और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए यह सामान बेचा गया।

कीमत का अंतर : नकली हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स असली की तुलना में औसतन 18% सस्ते होते हैं। हालांकि, रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि 96% लोग अंजाने में नकली दवाएं खरीदते हैं, असली समस्या यह है कि मरीज के पास दुकान पर खड़े होकर असलियत जांचने का कोई आसान जरिया नहीं है।

पैकेजिंग पर भरोसा ही सबसे कमजोर कड़ी

सर्वे के अनुसार, केवल 52% उपभोक्ता ही दवा या हेल्थकेयर प्रोडक्ट खरीदने से पहले उसकी असलियत जांचते हैं। हालांकि, 60% लोगों को यह मुगालता रहता है कि वे खुद नकली सामान पहचान सकते हैं।
लोग आमतौर पर इन चीजों को देखकर फैसला लेते हैं:

  1. पैकेजिंग की क्वालिटी (66%)
  2. होलोग्राम (48%)
  3. क्यूआर कोड (40%)

लेकिन आज के आधुनिक जालसाज पैकेजिंग डिजाइन और ब्रांडिंग की हुबहू नकल कर लेते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ डिब्बा देखकर दवा के असली होने का अंदाजा लगाना जानलेवा साबित हो सकता है।

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2018 से 2025 के बीच दर्ज हुए 521 मामले

एएसपीए (ASPA) के काउंटरफिट न्यूज़ रिपॉजिटरी के अनुसार, वर्ष 2018 से 2025 के बीच हेल्थकेयर क्षेत्र में जालसाजी के 521 आधिकारिक मामले दर्ज किए गए।

  • महामारी में सबसे बड़ा संकट: कोविड-19 (2020-2021) के दौरान नकली पीपीई किट, मास्क, कफ सिरप, जीवनरक्षक दवाओं और यहाँ तक कि नकली वैक्सीन के मामलों में भारी उछाल देखा गया था।

 

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नकली दवा का मुद्दा सिर्फ आर्थिक नुकसान का नहीं, बल्कि सीधे जीवन और मृत्यु का है। भले ही उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ रही हो, लेकिन जब तक हर दवा की रीयल-टाइम प्रामाणिकता (Authenticity) जांचने की मजबूत और आसान डिजिटल व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक जनस्वास्थ्य पर यह बड़ा खतरा मंडराता रहेगा।

मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर बवाल, US संसदीय आयोग ने उठाए सवाल, RSS को बैन करने की मांग

मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर बवाल, US संसदीय आयोग ने उठाए सवाल, RSS को बैन करने की मांग

Mohan Bhagwat US Visit

RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर जमकर बवाल मचा हुआ है। न्यूयॉर्क के मशहूर मैडिसन स्क्वायर गार्डन (MSG) में शनिवार, 29 अगस्त को उनका कार्यक्रम है, जिसको लेकर सरगर्मी बढ़ी हुई है। इस कार्यक्रम से पहले अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सलाहकार आयोग- यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने एक बार फिर बयान जारी किया है। संस्था ने आरोप लगाया कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार खराब हो रही है। उसने अमेरिकी सरकार से RSS के खिलाफ प्रतिबंध लगाने पर विचार करने की भी अपील की है।

पाकिस्तानी-अमेरिकी आसिफ महमूद की अध्यक्षता वाली इस संस्था ने बुधवार को स्थानीय समय के अनुसार कहा- भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार खराब हो रही है। धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाने के लिए अक्सर हिंसा और भड़काऊ बयानबाजी का इस्तेमाल किया जाता है।

USCIRF ने अमेरिकी सरकार से RSS के सदस्यों और धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन में शामिल भारतीय अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करने की अपील की। उसने मोहन भागवत का वीजा रद्द करने और भविष्य में उनके अमेरिका आने पर रोक लगाने की भी मांग की। संस्था की उपाध्यक्ष सीसी हेल ने कहा कि अमेरिकी सरकार के पास भारत को जवाबदेह ठहराने का मौका है और वह यह संदेश दे सकती है कि अमेरिका भारत के लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता के साथ खड़ा है।

बता दें कि इससे पहले 21 अगस्त को भारत के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका में RSS प्रमुख की बैठकों पर रोक लगाने की USCIRF की मांग की आलोचना की थी। विदेश मंत्रालय ने इस संस्था को “पक्षपाती” बताया था और कहा था कि इसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा था कि यह आयोग भारत को लेकर बार-बार गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है। उन्होंने कहा, “हम सभी जानते हैं कि यह एक पक्षपाती संस्था है। कई वर्षों से यह भारत के बारे में गलत और भड़काऊ बयान देती रही है। हमें ऐसी संस्थाओं को नजरअंदाज करना चाहिए, क्योंकि उनका अपना एजेंडा है और उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।

इस बीच, RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बुधवार को कहा कि न्यूयॉर्क में होने वाला ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन' एक ऐसा कार्यक्रम होगा, जिसमें अलग-अलग धर्मों के लोग शामिल होंगे। इसमें RSS प्रमुख मोहन भागवत अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों से जुड़े लोगों से बातचीत करेंगे। आंबेकर ने कहा कि यह कार्यक्रम खुली बातचीत और एक-दूसरे के सम्मान की भावना से आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय संस्कृति की उस सोच को दिखाता है, जो सभी को साथ लेकर चलने और सभी का स्वागत करने वाली है।

उन्होंने बताया कि यह पहल अलग-अलग समुदायों के साथ भारत और दुनिया के दूसरे हिस्सों में RSS के लंबे समय से चले आ रहे संपर्क का हिस्सा है। इसका मकसद लोगों के बीच समझ बढ़ाना और साझा उद्देश्यों पर साथ काम करना है। आंबेकर ने ‘एक्स' पर लिखा कि न्यूयॉर्क में होने वाला ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन' अलग-अलग धर्मों के लोगों का एक कार्यक्रम है, जिसमें RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों से आने वाले लोगों से बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम खुली बातचीत और आपसी सम्मान की भावना से आयोजित किया गया है और यह ऐसी भारतीय सोच को दिखाता है जो मूल रूप से सभी को साथ लेकर चलने वाली और सभी का स्वागत करने वाली है।

Nepal Flash Flood : बाढ़ ने नेपाल में मचाई तबाही, खौफनाक Photos देख खड़े हो जाएंगे रोंगटे

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तिब्बत की सीमा से लगे मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक 100 लोगों के मौत हो चुकी है। बाढ़ ने खासतौर पर भोटे कोशी नदी के आसपास के इलाकों को प्रभावित किया है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 1000 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं। फोटो में देखें बाढ़ के बाद की तबाही के फोटोज- 

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तिब्बत की तरफ से आया पानी बना आफत

बताया गया है कि तिब्बत की ओर से बड़ी मात्रा में पानी आने के बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव ने घरों, सड़कों और बिजली से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचों को नुकसान पहुंचाया है।

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384 लोग लापता, 133 भारतीय नागरिक शामिल

नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक बाढ़ प्रभावित इलाकों से 384 लोग लापता हैं। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशी नागरिकों में 133 भारतीय बताए गए हैं।

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परिजनों की बढ़ी चिंता

133 भारतीयों के लापता होने की खबर से उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। परिजन अपने रिश्तेदारों की सुरक्षित होने की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

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नेपाल सुरक्षा बलों के जवान भी लापता

बाढ़ का असर नेपाल के सुरक्षा बलों पर भी पड़ा है। रसुवा जिले में नेपाल पुलिस के 26 जवान लापता बताए गए हैं। वहीं सशस्त्र पुलिस बल के 7 जवान भी लापता हैं। नुवाकोट और धादिंग जिलों से पुलिस ने 8 शव बरामद किए हैं।

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सड़क और हाईवे बुरी तरह क्षतिग्रस्त

बाढ़ ने उत्तरी नेपाल की कई सड़कों और राजमार्गों को नुकसान पहुंचाया है। कुछ प्रमुख मार्ग बंद होने से प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालना और राहत-बचाव टीमों का पहुंचना मुश्किल हो गया है।

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हाइड्रोपावर और बिजली व्यवस्था को नुकसान

नेपाल विद्युत प्राधिकरण के मुताबिक बाढ़ से 6 प्रमुख जलविद्युत और ट्रांसमिशन सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें रसुवागढ़ी, चिलिमे, त्रिशूली-3ए, त्रिशूली-3बी हब 220 केवी सबस्टेशन, त्रिशूली हाइड्रोपावर स्टेशन और देवीघाट हाइड्रोपावर स्टेशन शामिल हैं।

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बाढ़ का खौफनाक मंजर कैमरे में कैद

नेपाल पुलिस और अन्य लोगों द्वारा साझा किए गए वीडियो में पहाड़ी इलाकों से तेज रफ्तार में मटमैला पानी बहता हुआ दिखाई दे रहा है। पानी ने घरों, सड़कों और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया है। पुलिस ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

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सेना के हेलीकॉप्टर राहत-बचाव में जुटे

नेपाल सेना ने प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर और आपदा प्रतिक्रिया दल भेजे हैं। अधिकारी नुकसान का आकलन कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि किन इलाकों में तत्काल मदद की जरूरत है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की आपात बैठक भी बुलाई है।

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मानसून के बीच जारी है राहत-बचाव अभियान

यह आपदा नेपाल के मानसून सीजन के दौरान हुई है, जब भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है।

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फिलहाल राहतकर्मी दुर्गम और कटे हुए इलाकों तक पहुंचने, लापता लोगों की तलाश करने और प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने में जुटे हैं। परिवार अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी की खबर का इंतजार कर रहे हैं।

पूर्वी यूपी के 21 व बुंदेलखंड के 7 जनपदों में कृषि उत्पादकता व अन्नदाताओं की आय में होगी वृद्धि : योगी

पूर्वी यूपी के 21 व बुंदेलखंड के 7 जनपदों में कृषि उत्पादकता व अन्नदाताओं की आय में होगी वृद्धि : योगी

Yogi Adityanath Agriculture MoU: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गूगल एवं ग्लोबल एंड नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी, आईटीसी, एक्वाब्रिज के साथ हुए एमओयू एग्रीकल्चर प्रोडक्टिविटी, किसान की आय और यूपी में कृषि के भविष्य को नई दिशा देने का संकल्प हैं। यूपीएग्रीज प्रदेश के एग्रीकल्चर को प्रोडक्टिविटी से प्रॉस्पैरिटी व फ्यूचर इकॉनमी की ओर ले जाने की महत्वपूर्ण पहल है। इसका लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसान की आय, फॉर्मिंग की क्लाईमेट रेजिलिएंट कैपिसिटी (जलवायु अनुकूलन क्षमता) को वैल्यू एडिशन व रूरल एंटरप्रेन्योरशिप को एक साथ मजबूत करना भी है। ये एमओयू पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 तथा बुंदेलखंड के 7 जनपदों में कृषि उत्पादकता व अन्नदाताओं की आय में वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

 

मुख्यमंत्री की उपस्थिति में बुधवार को विश्व बैंक वित्तपोषित उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग (यूपी-एग्रीज) परियोजना के अंतर्गत यूपीडीएएसपी (उत्तर प्रदेश विविधीकृत कृषि सहायता परियोजना) के साथ ये एमओयू हस्ताक्षरित किए गए।

 

इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि गत वर्ष विश्व बैंक के अध्यक्ष का आगमन हुआ था। उप्र के वे क्षेत्र, जो उस समय कृषि प्रोडक्टिविटी में अत्यंत पिछड़े थे। वहां क्या होना चाहिए, इस पर उनसे चर्चा हुई, फिर यूपीएग्रीज की इस योजना को हमने आगे बढ़ाया। यूपीएग्रीज पीएम मोदी जी और विश्व बैंक के अध्यक्ष के विजन के अनुरूप यूपी में धरातल पर कार्य करते दिख रहा है। यह एमओयू उसी कड़ी को मजबूत तरीके से बढ़ाने के लिए किया गया है। हम दशकों तक यही सुनते रहे कि अन्नदाता किसानों की जय-जयकार होती थी। देश में अन्न उत्पादन बढ़ाने के दावे किए जाते थे। पैदावार बढ़ती भी थी, लेकिन किसान वहीं का वहीं खड़ा था। किसान को कभी नहीं बताया गया कि लागत कैसे घटेगी, उसकी फसल को कौन खरीदेगा और उसका माल मंडी तक कैसे जाएगा।

विश्व बैंक समर्थित इस परियोजना का फोकस पूर्वी उत्तर प्रदेश व बुंदेलखंड 

मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 4000 करोड़ की विश्व बैंक समर्थित इस परियोजना का फोकस पूर्वी उत्तर प्रदेश व बुंदेलखंड है। जहां पोटेंशियल भी है और परिवर्तन की आवश्यकता भी। इन क्षेत्रों को पिछड़ेपन का पर्याय मानकर दशकों तक उपेक्षित छोड़ दिया गया था। जो क्षेत्र कभी सरकार के लिए चिंता व तनाव का कारण होता था, आज वही क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता व प्रदेश के प्रोडक्टिविटी का कारण भी बन रहा है। हम पूर्वी उप्र व बुंदेलखंड के 28 जनपदों के 123 विकास खंडों में इस परियोजना को लागू कर रहे हैं।

इसका लक्ष्य लगभग 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते 10 लाख किसानों, 35 हजार मत्स्य उत्पादक किसानों व 3 लाख महिलाओं को लाभ पहुंचाना है। परियोजना के अंतर्गत खरीफ 2026 में 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को आच्छादित किया गया है। रबी फसल (2026-27) में भी 1.75 लाख हेक्टेयर में गेहूं, मटर, चना, मसूर व सरसों आदि की उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य है। हमें किसान को केवल प्रोड्यूसर नहीं, बल्कि आधुनिक कृषि व अर्थव्यवस्था का प्रॉस्पैरिटी पार्टनर भी बनाना है। 

साइंटिफिक व क्लाईमेटिक विजिलेंट

सीएम ने कहा कि ईरी के साथ पार्टनरशिप के माध्यम से साइंटिफिक व क्लाईमेटिक विजिलेंट जैसी पद्धतियों को खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। खरीफ सत्र 2026 में 3000 हेक्टेयर क्षेत्र में डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) का प्रयोग किया जा रहा है। धान के साथ मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, तिल, उरद व मूंगफली जैसी फसलों को भी कार्ययोजना में सम्मिलित किया है। उप्र की कृषि परंपरा की शक्ति व आधुनिक विज्ञान के संगम से इसे बढ़ाने में मदद मिलेगी। ग्लोबल साइंस अब लोकल फॉर्म तक पहुंच रहा है। 

सीएम ने कहा कि गूगल एवं नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी के साथ साझेदारी में ओपन नेटवर्क फॉर एग्रीकल्चर विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यह कृषि के लिए ऐसा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा, जिसका कॉन्सेप्ट यूपीआई और ओएनडीसी जैसे ओपन डिजिटल नेटवर्क मॉडल से भी प्रेरित है। इससे किसानों को अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग ऐप व प्लेटफॉर्म की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि हमारा लक्ष्य एक ही इंटरफेस से मौसम, बाजार-मूल्य, मृदा, कृषि सलाह तथा विभिन्न एग्रीटेक सेवाओं तक उनकी पहुंच बनाना है। 

एग्रीटेक स्टार्टअप व कंपनियां किसानों तक सेवाएं पहुंचा सकेंगी

सीएम ने कहा कि एग्रीटेक स्टार्टअप व कंपनियां भी खुले नेटवर्क के माध्यम से बड़ी संख्या में किसानों तक सेवाएं पहुंचा सकेंगी। हमारा लक्ष्य लागत को कम करना, कम संसाधन व अधिक आय के साथ ही वैश्विक बाजार के अनुरूप गुणवत्ता उपलब्ध कराना भी है। यूपीएग्रीज के अंतर्गत धान और गेहूं के क्लाईमेट रेजिलिएंट कमोडिटी कलस्टर विकसित करने के लिए आईटीसी के साथ भी साझेदारी की जा रही है। दो लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में क्लाईमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर का विस्तार प्रस्तावित है। इसमें आधुनिक पद्धति यानी शून्य जुताई, डायरेक्ट सीडेड राइस, क्लाईमेट रेजिलिएंट उन्नत बीज, डिसिजन न्यूट्रेंट मैनेजमेंट सम्मिलित होगा। 

 

सीएम ने कहा कि बहराइच में 1500 एकड़ का डीयू कंप्लाइन एंड एमआरएल मानकों के अनुरूप धान कलस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है। किसान की प्रति एकड़ आय में 20-30 प्रतिशत वृद्धि, यूरिया के उपयोग को 25 फीसदी कम करने तथा श्रम व सिंचाई में 25-30 प्रतिशत की बचत का भी लक्ष्य रखा गया है। अब यूपी का किसान केवल अनाज उत्पादक नहीं रहेगा, बल्कि क्वालिटी, कैपेबिलिटी व एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड से जुड़ी नई एग्री इकॉनमी का भी भागीदार बनेगा। 

 

सीएम ने कहा कि यूपीएग्रीज के अंतर्गत धान, गेहूं, मिर्च, मक्का, हरी मटर व टमाटर जैसी फसलों के लिए भी प्रमुख निजी कंपनियों के साथ साझेदारी की जा रही है, जिससे किसानों को बाजार व बेहतर खरीद की व्यवस्था उपलब्ध हो पाएगी। इसके अंतर्गत वैल्यू चेन के प्रत्येक चरण में उत्पादन, संग्रहण, भंडारण, प्रसंस्करण व बाजार को और मजबूत किया जाएगा। हम उत्तर प्रदेश में एक्वा कल्चर को साइंस, टेक्नोलॉजी, प्रोसेसिंग व एंटरप्रेन्योरशिप से जोड़कर पूर्ण ब्लू इकॉनमी इकोसिस्टम विकसित करना चाहते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए एक्वाब्रिज के साथ मत्स्य पालन को ट्रेडिशनल एक्टिविटी से टेक्नोलॉजी ड्रिवेन एंटरप्राइज की ओर बढ़ाने जा रहे हैं। एक्वाब्रिज के साथ साझेदारी के माध्यम से मत्स्य किसानों, सहकारिता समितियों व उद्यमियों को आधुनिक तकनीक व प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। इसमें एआई आधारित एक्वाकल्चर मैनेजमेंट, ऑटोमैटिक फीडिंग टेक्नोलॉजी, आधुनिक प्रशिक्षण व कैपिसिटी बिल्डिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

60 एकड़ क्षेत्र में इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर परियोजना

सीएम ने कहा कि यूपीएग्रीज के अंतर्गत उन्नाव में आईएमसी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत 60 एकड़ क्षेत्र में इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर परियोजना विकसित की जा रही है। इसमें हेचरी, फीड मैन्यूफेक्चरिंग, प्रोसेसिंग फैसिलिटी, डेडिकेटेड ट्रेनिंग सेंटर भी प्रस्तावित है। कृषि को खेत से फूड प्रोसेसिंग, एक्सपोर्ट एवं ग्लोबल वैल्यू चेन तक ले जाने की तैयारी है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट मेगा फूड पार्क एवं एग्री एक्सपोर्ट सेंटर विकसित करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य यूपी की कृषि उपज को मंडी से आगे प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, लॉजिस्टिक व एक्सपोर्ट से जोड़ना है। यूपीएग्रीज का नया सूत्र व मूलदर्शन प्रोडक्टिविटी, टेक्नोलॉजी, क्लाईमेट रेजिलिएंट, मार्केट, एंटरप्राइज, फॉर्मर प्रॉस्पैरिटी है। हमारा लक्ष्य किसानों को बेहतर बीज और तकनीक से प्रोडक्टिविटी, क्लाईमेट स्मार्ट फॉर्मिंग से सस्टेनबिलिटी, डिजिटल नेटवर्क से इन्फॉर्मेशन एंड सर्विस तक पहुंच, कमोडिटी कलस्टर से बाजार, प्रोसेसिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर से वैल्यू एडिशन, एफपीओ व निजी निवेशक के माध्यम से रूलर एंटरप्रेन्योरशिप और ग्रामीण विकास तक ले जाना है।

 

सीएम ने कहा कि 21वीं सदी मिट्टी व मौसम के साथ डेटा साइंस, साइंस टेक्नोलॉजी और मार्केट इंटेलिजेंस से भी संचालित होगी। यूपीएग्रीज के साथ प्रदेश सरकार कृषि को इस भविष्य के लिए तैयार कर रही है। हमारा लक्ष्य किसान को एग्री इनोवेशन की नई इकॉनमी का सक्रिय भागीदार बनाना है। यूपी कृषि का अगला चरण प्रोडक्टिविटी, सस्टेनबिलिटी व प्रॉस्पेरिटी को साथ लेकर चलने वाली स्मार्ट एग्री रेगुलेशन का केंद्र बनना है। जब खेत डिजिटल होंगे, खेती क्लाईमेट स्मार्ट होगी, उत्पादन क्वालिटी ड्रिवेन व बाजार ग्लोबल होगा तो किसान की आय में वृद्धि होगी। इससे कृषि मॉडल का स्वाभाविक परिणाम भी आएगा।

 

सीएम ने अतिथियों को ओडीओपी का स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर श्रम व सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, उप्र ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव (कृषि) रविंद्र, प्रमुख सचिव पंधारी यादव, विश्व बैंक के अनूप जगवानी, गूगल के सिद्धार्थ प्रकाश, एक्वाब्रिज से मो. ताबिश, नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी से राधा किझनट्टम, आईटीसी के सचिन शर्मा, सीआईपी के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह, सिद्धि नायक एग्रो. लि. के हेमंत गौर आदि मौजूद रहे।

 

Nepal Flood Live Updates : नेपाल बाढ़ से तबाही, 92 की मौत, भारत ने भेजी मानवीय सहायता, 108 भारतीय लापता

Nepal Flood Live Updates : नेपाल बाढ़ से तबाही, 92 की मौत, भारत ने भेजी मानवीय सहायता, 108 भारतीय लापता

nepal floods

तिब्बत की सीमा से लगे मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई और कम से कम 95 लोगों की मौत हो गई वहीं 133 भारतीय नागरिक समेत करीब 500 लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई, पुल बह गए और कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। स्थानीय समयानुसार, सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई, जिससे तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए। रसुवा, काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर उत्तरपूर्व में स्थित है। नेपाल बाढ़ से जुड़ा पल-पल का अपडेट-

अयोध्या में रामलला को 10000, कर्मचारियों के लिए 4 करोड़ का दान

अयोध्या में रामलला को 10000, कर्मचारियों के लिए 4 करोड़ का दान

Ayodhya Ram Mandir

Nagalakshmi Donation Ayodhya: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था रत्ती भर नहीं डिगी है। तमिलनाडु के कोयंबटूर से अयोध्या आईं महिला श्रद्धालु एस. नागलक्ष्मी ने अटूट श्रद्धा की मिसाल पेश करते हुए रामलला के दर्शन किए और 10 हजार रुपए का चढ़ावा दिया। इसके साथ ही, मंदिर में दिन-रात सेवा देने वाले कर्मचारियों के लिए उन्होंने 4 करोड़ रुपए का चेक सौंपकर सभी को चकित कर दिया।

 

​बिड़ला धर्मशाला पर कटवाई रसीद, रखी विशेष शर्त

​महिला श्रद्धालु ने बिड़ला धर्मशाला के सामने स्थित यात्री सेवा केंद्र पर दान की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद वे रामघाट स्थित ट्रस्ट के अकाउंट कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने लिखित अनुरोध करते हुए अपनी मंशा स्पष्ट की कि 4 करोड़ रुपए के इस विशाल दान का उपयोग राम मंदिर के कर्मचारियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने और उनके वेतन में वृद्धि करने के लिए किया जाए।

 

​मंदिर व्यवस्था सुधारने के लिए दिए महत्वपूर्ण सुझाव

​दानवीर एस. नागलक्ष्मी ने मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों से भेंट कर व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि रामलला की सेवा और परिसर की व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों की सुविधाओं और उनके वेतन का ध्यान रखना भी भगवान की प्रत्यक्ष सेवा का ही एक हिस्सा है। ​दिन भर पूरे राम जन्मभूमि परिसर और तीर्थक्षेत्र में इस दानवीर महिला श्रद्धालु की उदारता की चर्चा होती रही।

Nepal Flood: यूपी के कुशीनगर, महराजगंज, सरयू और घाघरा के तटीय इलाकों पर मंडराया बाढ़ का खतरा

Nepal Flood: यूपी के कुशीनगर, महराजगंज, सरयू और घाघरा के तटीय इलाकों पर मंडराया बाढ़ का खतरा

Saryu River Ayodhya

Nepal Flash Flood: ​नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत की ओर से आए अचानक सैलाब (फ्लैश फ्लड) और भोटेकोशी नदी के उफान ने नेपाल से लेकर भारत के सीमावर्ती राज्यों तक हड़कंप मचा दिया है। इस प्राकृतिक आपदा का सीधा असर उत्तर प्रदेश और बिहार के मैदानी इलाकों पर पड़ने की आशंका है, जिसके चलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जनपदों को हाई अलर्ट पर रहने के कड़े निर्देश दिए हैं।

​तबाही का प्रमुख केंद्र और नेपाल में स्थिति

  • भीषण जन-धन की हानि : रसुवा और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ व भूस्खलन के कारण 384 से अधिक लोग लापता हैं, जिनमें 105 भारतीय नागरिकों सहित कई विदेशी पर्यटक शामिल हैं।
  • ​अवसंरचना को भारी नुकसान : टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाकों में कई घर, बाजार और नदियां पार करने वाले पुल बह गए हैं। रसुवा का एक प्रमुख हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पूरी तरह तबाह हो गया है, जबकि कई अन्य जलविद्युत परियोजनाओं को भारी क्षति पहुंची है।

​​उत्तर प्रदेश पर असर व प्रभावित नदियां

  • ​गंडक एवं नारायणी नदी : महराजगंज और कुशीनगर जिले मुख्य रूप से प्रभावित हैं। नेपाल से लगभग 3 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की आशंका है, जिससे सोहगीबरवा, भोतियाही और शिकारपुर गांवों पर बाढ़ का सीधा खतरा बना हुआ है।
  • ​सरयू और घाघरा नदी : अयोध्या (सदर, सुहावल और रुदौली तहसील), बाराबंकी तथा बस्ती जिले जोखिम में हैं। नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब और ऊपर पहुंच रहा है, जिसके कारण निचले और माझा क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया गया है।
  • गंगा नदी : पश्चिमी उत्तर प्रदेश, प्रयागराज और वाराणसी के तटीय इलाके प्रभावित हैं। पहाड़ों पर और स्थानीय स्तर पर लगातार हो रही बारिश के कारण तटीय बस्तियों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है।

प्रशासनिक सतर्कता और मुख्यमंत्री के निर्देश

​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में हुए हादसे पर चिंता व्यक्त करते हुए स्थानीय प्रशासन को 24 घंटे पूरी मुस्तैदी और सतर्कता बरतने के आदेश दिए हैं। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों व बस्तियों का दौरा शुरू कर दिया है। नागरिकों को नदियों के करीब न जाने की सख्त सलाह दी गई है।

 

मुख्यमंत्री ने महाराजगंज और कुशीनगर में स्थानीय प्रशासन को सभी जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। महाराजगंज और कुशीनगर में गंडक एवं नारायणी नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। इसे लेकर मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन को नदियों के जलस्तर पर नजर रखते हुए पूरी सतर्कता बरतने को कहा है। न्होंने भगवान पशुपतिनाथ से सभी के सकुशल रहने की प्रार्थना की है।

जालसाजी कर 944 हेक्टेयर जमीन बैंकों में गिरवी रख ऋण लेने वाली दो कंपनियों पर योगी सरकार का शिकंजा, वापस ली सारी भूमि

जालसाजी कर 944 हेक्टेयर जमीन बैंकों में गिरवी रख ऋण लेने वाली दो कंपनियों पर योगी सरकार का शिकंजा, वापस ली सारी भूमि

योगी सरकार ने जालसाजी-अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कानपुर देहात में दो कंपनियों को आवंटित 944 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद्द कर उसे सरकार के पक्ष में दर्ज करने का अंतिम निर्देश जारी कर दिया है। वर्ष 2011 में थर्मल पावर प्लांट लगाने के नाम पर मैसर्स लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड और मैसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को भोगनीपुर तहसील में जमीनें आवंटित की गई थीं। कंपनियों ने 15 साल बाद भी मौके पर कोई काम शुरू नहीं किया और बिना इजाजत जमीनों को बैंकों में गिरवी रख दिया। राज्यपाल की अनुमति मिलते ही ऊर्जा विभाग ने कानपुर देहात के जिलाधिकारी को निर्देश जारी किए हैं कि खतौनी से दोनों कंपनियों का नाम खारिज कर यह जमीन उत्तर प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज की जाए।  

यह है पूरा मामला

इस पूरे मामले की शुरुआत 28 जून 2011 को हुई थी, जब ऊर्जा विभाग और दोनों कंपनियों के बीच एग्रीमेंट हुआ था। मैसर्स लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड को भोगनीपुर तहसील के ग्राम कृपालपुर, चपरघटा, रसूलपुर भुरण्डा और भरतौली में 90.3260 हेक्टेयर पट्टा भूमि तथा 285.0524 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि मिलाकर कुल 375.378 हेक्टेयर जमीन दी गई थी। वहीं, मैसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को ग्राम अमिलिया, सिहारी, कछगाँव और चपरघटा में 217.813 हेक्टेयर पट्टा भूमि तथा 350.838 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि मिलाकर कुल 568.651 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई गई थी।  

कंपनियों ने तोड़ी अनुबंध की शर्त, की धोखाधड़ी

अनुबंध की शर्त के अनुसार, कंपनियों को जमीन का कब्जा मिलने के 3 साल के भीतर पावर प्रोजेक्ट का निर्माण पूरा करना था। हालांकि तीन साल से अधिक का लंबा समय बीत जाने के बाद भी कंपनियों ने पावर प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य आज तक शुरू ही नहीं किया। इस तरह दोनों ही कंपनियों ने एग्रीमेंट की पहली सबसे बड़ी शर्त का सीधा उल्लंघन किया। 

 

इसके बाद जांच में धोखाधड़ी की दूसरी बड़ी बात सामने आई। एग्रीमेंट की शर्त में साफ लिखा था कि कंपनियां राज्य सरकार की अनुमति के बिना जमीन को किसी को बेच नहीं सकतीं, न ही लीज पर दे सकती हैं और न ही गिरवी रख सकती हैं। इसके बावजूद मैसर्स हिमावत पावर ने बिना किसी अनुमति के जमीन को आईडीबीआई बैंक में बंधक रख दिया। वहीं मैसर्स लैन्को अनपरा पावर ने भी सरकार को बिना बताए जमीन को केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में गिरवी रख दिया। कंपनियों ने इस संबंध में ऊर्जा विभाग को कोई पत्र नहीं भेजा और न ही शासन से कोई इजाजत ली, जिससे राज्य सरकार को बड़ी आर्थिक क्षति पहुंची। 

 

शर्तों का उल्लंघन होने पर शासन ने सख्त रुख अपनाया और अनुबंध की शर्त 4(6) के तहत 25 मई 2026 को दोनों कंपनियों को 15 दिन के भीतर जवाब देने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया। यह नोटिस कंपनियों के रजिस्टर्ड पते और ईमेल पर भेजा गया, जो कंपनियों को प्राप्त भी हो गया। इसके बावजूद निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी कंपनियों की तरफ से कोई स्पष्टीकरण या उत्तर उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे स्पष्ट हो गया कि कंपनियों के पास शर्तों के उल्लंघन का कोई जवाब नहीं था। 

 

कंपनियों द्वारा जान-बूझकर काम न करने, सरकार को आर्थिक क्षति पहुंचाने और नोटिस का जवाब न देने के कारण 25 अगस्त 2026 को अपर मुख्य सचिव डॉ आशीष कुमार गोयल ने अंतिम आदेश निर्गत कर दिया। आदेश में राज्यपाल की अनुमति से पूरी 944.029 हेक्टेयर जमीन को ऊर्जा विभाग में वापस निहित करने के लिए कहा गया। साथ ही, आदेश की प्रति कानपुर देहात जिलाधिकारी को भेजकर यह निर्देश दिया गया है कि वे तत्काल राजस्व अभिलेखों (खतौनी) में इस पूरी जमीन को ऊर्जा विभाग व राज्य सरकार के नाम अंकित कराने की नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।