चीन की स्मार्ट सिटी से नेपाल में तबाही? रसुवा फ्लैश फ्लड पर पत्रकार समूह का सनसनीखेज दावा

चीन की स्मार्ट सिटी से नेपाल में तबाही? रसुवा फ्लैश फ्लड पर पत्रकार समूह का सनसनीखेज दावा

नेपाल के रसुवा जिले में 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड को लेकर चीन की सीमा के पास चल रहे निर्माण कार्य सवालों के घेरे में आ गए हैं। नेपाल के एक पत्रकार समूह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दावा किया है कि तिब्बत सीमा क्षेत्र में चीनी निर्माण गतिविधियों और पर्यावरणीय बदलावों ने इस तबाही को जन्म दिया हो सकता है। समूह ने इसे कथित तौर पर ‘जानबूझकर पैदा किया गया पारिस्थितिक संकट’ तक बताया है। हालांकि, इन सनसनीखेज आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अभी यह कहना संभव नहीं है कि रसुवा में आई बाढ़ सीधे तौर पर चीन की निर्माण गतिविधियों के कारण आई।

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चीन की ‘स्मार्ट सिटी’ पर गंभीर आरोप

 

‘नेपाल कॉरेस्पॉन्डेंस’ नाम के एक्स हैंडल ने दावा किया कि चीन की ओर विकसित की गई Xiaokang बस्तियों और गिरोंग शहर के निर्माण में बड़े पैमाने पर पहाड़ियों को काटा गया और प्राकृतिक जलधाराओं के स्वरूप में बदलाव किया गया। पत्रकार समूह का आरोप है कि ग्लेशियर वाले ऊंचाई वाले इलाकों में इस तरह के निर्माण से हिमालय के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ रहा है। उसके मुताबिक, इससे हिमस्खलन की घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है और उनका मलबा नेपाल की ओर आने वाली नदियों में अचानक बाढ़ का कारण बन सकता है।

 

क्या गिरोंग से आया तबाही का सैलाब?

 

एक्स पर किए गए दावे में कहा गया कि 26 अगस्त की फ्लैश फ्लड का संभावित स्रोत गिरोंग शहर के आसपास का इलाका हो सकता है। समूह ने आरोप लगाया कि गिरोंग का निर्माण पहाड़ियों को काटकर और त्रिशूली नदी के प्राकृतिक मार्ग के आसपास किया गया है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि ग्लेशियर क्षेत्रों में पर्यावरणीय क्षति के कारण हर साल हिमस्खलन का खतरा बढ़ रहा है, जिसका असर नेपाल में अचानक आने वाली बाढ़ के रूप में पड़ सकता है।

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गिरोंग पोर्ट को लेकर भी उठे सवाल

 

पत्रकार समूह ने रसुवा सीमा के पास बने गिरोंग पोर्ट को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। पोस्ट में दावा किया गया कि बंदरगाह को नदी के संगम क्षेत्र के पास विकसित किया गया, जिससे नेपाल की दिशा में नदी के बहाव की गति बढ़ सकती है। समूह ने नेपाल सरकार से इस मुद्दे को चीन के सामने उठाने की मांग की है और आरोप लगाया है कि सीमा क्षेत्र में पारिस्थितिकी तंत्र के साथ हो रहे कथित बदलाव हिमालय को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।

 

रसुवा में सुबह 9 बजे तेजी से बढ़ा पानी

 

26 अगस्त की सुबह रसुवा में अचानक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा, तलछट और बड़े पत्थर भोटे कोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में आगे बढ़े। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, सुबह करीब 9 बजे भोटे कोशी बेसिन में जलस्तर तेजी से बढ़ना शुरू हुआ। तेज बहाव ने नदी के किनारों को नुकसान पहुंचाया और पानी भोटे कोशी से होते हुए त्रिशूली नदी की ओर बढ़ा। इसके चलते नुवाकोट और धादिंग जैसे निचले जिलों में भी संभावित बाढ़ को लेकर चिंता बढ़ गई।

 

दावा बड़ा, लेकिन सबूत का इंतजार

 

रसुवा की बाढ़ ने चीन-नेपाल सीमा क्षेत्र में निर्माण और हिमालयी पर्यावरण को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पत्रकार समूह द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन फिलहाल इनके समर्थन में स्वतंत्र वैज्ञानिक या आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

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इसलिए बाढ़ के पीछे चीन की निर्माण गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराने वाले दावों को अभी आरोप और सोशल मीडिया दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। बाढ़ के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक जांच, सैटेलाइट विश्लेषण और आधिकारिक रिपोर्ट महत्वपूर्ण होंगी। नेपाल में इस सप्ताह की शुरुआत में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। भोतेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदा में कम से कम 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1,400 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं। इस बीच नेपाल और चीन ने हिमालयी सीमा से लगे क्षेत्रों में नए सिरे से बाढ़ के खतरे की चेतावनी दी है।

 

युवा विद्यार्थी मंथन में CM धामी का संवाद, बोले- युवा पीढ़ी के सपनों से बनेगा विकसित उत्तराखंड

युवा विद्यार्थी मंथन में CM धामी का संवाद, बोले- युवा पीढ़ी के सपनों से बनेगा विकसित उत्तराखंड

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में आयोजित ‘युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में युवा विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के विचार और सुझाव सुने तथा उनके भविष्य के सपनों और विकसित उत्तराखंड को लेकर उनकी सोच को जाना।

 

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह देखकर खुशी होती है कि उत्तराखंड की भावी पीढ़ी सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित उत्तराखंड के निर्माण को लेकर जागरूक है। उन्होंने कहा कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने विचारों को दिशा और आकार देने का काम किया है।

 

सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार ‘विकसित भारत–विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प के साथ प्रदेश के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का फोकस शिक्षा, रोजगार, नवाचार और कौशल विकास के साथ-साथ पर्यटन, कृषि, खेल और तकनीक जैसे क्षेत्रों को मजबूत बनाने पर है।

 

उन्होंने कहा कि युवाओं की प्रतिभा और उनके सुझाव उत्तराखंड के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सरकार का प्रयास है कि युवाओं को बेहतर अवसर, आधुनिक शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया जाए।

 

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने सपनों को लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ें और राज्य के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति के सहयोग से उत्तराखंड को विकास के नए आयामों तक पहुंचाया जा सकता है।

CM मोहन यादव ने सरकारी स्कूलों को लेकर दिए बड़े निर्देश, सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा फोकस

CM मोहन यादव ने सरकारी स्कूलों को लेकर दिए बड़े निर्देश, सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा फोकस

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर चल रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार सराहनीय हैं, इन्हें जारी रखा जाए। इसके साथ ही छात्रों के हित में विद्यालयों में अधोसंरचनात्मक विकास के लिए विभिन्न पक्षों का सहयोग प्राप्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्यालयों में सभी व्यवस्थाएं बेहतर बनाने का कार्य निरंतर किया जाए।

इसके लिए अभियान संचालित कर कार्यों को पूरा किया जाए। शालाओं में नवीन निर्माण कार्यों की पूर्णता को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में शासकीय शालाओं में अधोसंरचना, संधारण और संचालन व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण से संबंधित स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तकनीक का अधिकतम उपयोग विभिन्न तरह के प्रबंधन को आसान बना देता है। सभी जिले इस दिशा में सक्रियतापूर्वक कार्य किया जाना सुनिश्चित करें। आवश्यकता के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी जैसे सिपरी सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर क्षेत्र के पेयजल स्रोतों और जल स्तर की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है। ऐसी जानकारियां विभिन्न कार्यों को जल्दी पूरा करने में उपयोगी सिद्ध होती हैं।

 

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू करने के अच्छे परिणाम मिले हैं। “हमारे शिक्षक” ऐप के माध्यम से शिक्षकों की ऑनलाइन एआई संचालित व्यवस्था का अन्य राज्यों द्वारा भी अध्ययन किया जा रहा है। कर्मचारियों के लिये ई-अटेंडेंस अनिवार्य करने के बाद ई-अटेंडेंस 95 प्रतिशत तक हो गई है। न्यूनतम शिक्षण अवधि के अनुसार पठन-पाठन सुनिश्चित करने के कार्य में सफलता मिली है। मध्यप्रदेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम का बेहतर क्रियान्वयन कर रहा है। स्वच्छ और हरित विद्यालय कार्यक्रम में प्रदेश के 2 विद्यालय रतलाम जिले के जावरा के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और भोपाल के शासकीय कमला नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत किया गया है।

 

गत 2 वर्ष में समेकित छात्रवृत्ति योजना का क्रियान्वयन कर लगभग सवा करोड़ छात्र हितग्राही लाभान्वित किए गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने नोडल विभाग के रूप में कार्य करते हुए योजना अंतर्गत राशि का भुगतान शिक्षा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा विद्यार्थियों के खातों में किया गया है। गत 2 वर्ष में विद्यार्थियों को 696 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला स्तर पर विद्यालयवार अधोसंरचनात्मक विकास की विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाए। विभिन्न विभागों के अंतर्गत उपलब्ध बजट से शाला भवनों में आवश्यक अधोसंरचना, अनुरक्षण एवं संधारण के कार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्यालयों में नियमित साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था तथा क्रियाशील शौचालयों की उपलब्धता स्थानीय निकायों के माध्यम से सुनिश्चित की जाए। इसी तरह उद्योग जगत और निवेशकों का सहयोग भी विद्यालयों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के लिए जिला कलेक्टर समन्वय एवं पर्यवेक्षण करेंगे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में अभिनव पहल करते हुए पूर्व छात्रों के सम्मेलन भी होना चाहिए। अनेक पूर्व छात्र अपनी पुरानी शिक्षण संस्था के विकास में सहयोगी होते हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि अधोसंरचनात्मक विकास के लिए सीएसआर, डीएमएफ, सांसद, विधायक निधि, स्थानीय संस्थाओं, जनभागीदारी तथा अन्य वैकल्पिक स्रोतों से सहयोग लिया जा रहा है। बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह वर्चुअल जुड़े।मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

GSRTC का नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड : 26 अगस्त को एक ही दिन में 88,626 टिकटों की स्मार्टफोन बुकिंग

GSRTC का नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड : 26 अगस्त को एक ही दिन में 88,626 टिकटों की स्मार्टफोन बुकिंग

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गुजरात में एसटी बस से यात्रा करने वाले नागरिक अब तेजी से डिजिटल सेवाओं की ओर बढ़ रहे हैं। इसका सीधा और सकारात्मक असर GSRTC (गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम) की आधिकारिक मोबाइल ऐप पर दिखाई दे रहा है। 26 अगस्त का दिन एसटी निगम के लिए बेहद खास साबित हुआ, क्योंकि इस एक ही दिन में यात्रियों ने मोबाइल ऐप के जरिए रिकॉर्डतोड़ 88,626 टिकटों की बुकिंग की, जो अब तक का सबसे बड़ा दैनिक आंकड़ा है।

 

पुराना 85,247 टिकटों का रिकॉर्ड टूटा

 

GSRTC के इतिहास में मोबाइल ऐप बुकिंग का पिछला सर्वोच्च रिकॉर्ड 85,247 टिकटों का था। 26 अगस्त को दर्ज की गई 88,626 टिकट बुकिंग के साथ यह पुराना रिकॉर्ड टूट गया है और एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि एसटी निगम की डिजिटल सेवाओं का दायरा पूरे राज्य में कितनी तेजी से फैल रहा है।

 

डिजिटल सेवाओं पर बढ़ा यात्रियों का भरोसा

 

पहले बस की टिकट लेने के लिए यात्रियों को बस स्टैंड की लंबी लाइनों में खड़ा रहना पड़ता था या बुकिंग काउंटर तक चक्कर लगाने पड़ते थे। अब मोबाइल ऐप के आसान इंटरफेस की वजह से लोग घर बैठे ही अपनी यात्रा का एडवांस प्लान बना रहे हैं। कौन सी बस, कौन सा समय और कौन सी सीट चुननी है, यह तमाम सुविधाएं उंगलियों के इशारे पर उपलब्ध होने से लोगों का भरोसा टेक्नोलॉजी पर बढ़ा है।

 

समय की बचत और सफर हुआ बेहद आसान

 

डिजिटल बुकिंग के इस ट्रेंड से यात्रियों का कीमती समय बच रहा है और यात्रा शुरू करने से पहले ही कंफर्म टिकट मिल जाने से मानसिक शांति भी रहती है। इसके साथ ही एसटी निगम के लिए भी काउंटरों पर होने वाली भीड़ को नियंत्रित करना आसान हो गया है। समय पर बुकिंग और तकनीक के इस बेहतर मेल से गुजरात की सार्वजनिक परिवहन सेवा और अधिक आधुनिक बन रही है।

 

आने वाले समय में नए शिखर छूने की संभावना

 

26 अगस्त को हासिल हुई यह उपलब्धि सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि गुजरात के नागरिकों की बदलती डिजिटल जीवन शैली का प्रमाण है। यात्री जिस तरह से मोबाइल ऐप को प्राथमिकता दे रहे हैं, उसे देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी त्योहारों और छुट्टियों के दिनों में दैनिक टिकट बुकिंग के आंकड़े नए रिकॉर्ड बना सकते हैं।

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के 5 साल पूरे, 12 से 53 पाठ्यक्रमों तक पहुंची शैक्षिक यात्रा

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के 5 साल पूरे, 12 से 53 पाठ्यक्रमों तक पहुंची शैक्षिक यात्रा

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स्थापना के मात्र पांच वर्ष में ही महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) रोजगारपरक शिक्षा और चिकित्सा सेवा के प्रतिमान गढ़ रहा है। इस विश्वविद्यालय ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में उच्च, विशिष्ट, रोजगारपरक और चिकित्सा शिक्षा को नई राह दिखाई है।

पांच साल के भीतर एमबीबीएस, बीएएमएस समेत चार दर्जन से अधिक रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की शुरुआत, शोध-अनुसंधान के लिए कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ एमओयू कर इस विश्वविद्यालय ने शैक्षिक प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया है तथा गोरखपुर को ज्ञान की नगरी बनाने की दिशा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2021 में 12 पाठ्यक्रम से शुरू हुई इस विश्वविद्यालय की शैक्षिक यात्रा में अब 53 विशिष्ट और रोजगारपरक पाठ्यक्रम जुड़ चुके हैं।

 

28 अगस्त, 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों लोकार्पित महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय पांच वर्ष में ही शिक्षा के विशिष्ट व प्रमुख केंद्र के रूप में विख्यात हो चुका है। यहां भारतीय ज्ञान मूल्यों का संरक्षण व संवर्धन, वर्तमान और भावी समय को ध्यान में रखकर अनुसंधानिक तरीके से किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में यहां संचालित पाठ्यक्रम ऐसे है, जो समाज के लिए लाभकारी, विद्यार्थी के लिए सहज व रोजगारदायी हैं। इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति (गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री) योगी आदित्यनाथ की मंशा वर्ष 2032 तक गोरखपुर को 'नॉलेज सिटी' के रूप में ख्यातिलब्ध कराने की है।

 उल्लेखनीय है कि 10 दिसम्बर, 2018 को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह में आए तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 तक गोरखपुर को नॉलेज सिटी बनाने का आह्वान किया था।

 

एमजीयूजी के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव बताते हैं कि इस विश्वविद्यालय की नींव में युग पुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के विचार हैं, जिनका मानना था कि दासता से मुक्ति, स्वावलंबन व सामाजिक विकास के लिए शिक्षा ही सबसे सशक्त माध्यम है। वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर एवं कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ इसी वैचारिक परंपरा के संवाहक हैं। उनके मार्गदर्शन में इस विश्वविद्यालय का लक्ष्य भारतीय ज्ञान मनीषा के आलोक में मूल्य संवर्धित, रोजगारपरक उस शिक्षा को बढ़ावा देना है, जो समग्र रूप में सामाजिक व राष्ट्रीय हितों का पोषण कर सके। इसी लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाते हुए यहां श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में एमबीबीएस और गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में बीएएमएस की पढ़ाई सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इसके अलावा विश्वविद्यालय की नर्सिंग फैकल्टी में दर्जनभर रोजगारदायी पाठ्यक्रम पूर्ण क्षमता से संचालित हैं।

विश्वविद्यालय में मेडिकल साइंस, नर्सिंग, पैरामेडिकल, एग्रीकल्चर, एलॉयड हेल्थ साइंसेज और फार्मेसी, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन से संबंधित डिप्लोमा से लेकर मास्टर और पीएचडी तक के चार दर्जन से अधिक पाठ्यक्रम हैं। मसलन दो वर्षीय एएनएम, तीन वर्षीय जीएनएम, चार वर्षीय बीएससी नर्सिंग, दो वर्षीय पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग, दो वर्षीय एमएससी नर्सिंग, डिप्लोमा इन डायलिसिस, डिप्लोमा इन आप्टिमेट्री, डिप्लोमा इन इमरजेंसी एंड ट्रामा केयर, डिप्लोमा इन एनेस्थिसिया एंड क्रिटिकल केयर, डिप्लोमा इन आर्थोपेडिक एंड प्लास्टर टेक्निशियन, डिप्लोमा इन लैब टेक्निशियन (सभी दो वर्षीय), चार वर्षीय बीएससी एग्रीकल्चर, बीएससी ऑनर्स बॉयोटेक्नालोजी, बीएससी आनर्स बॉयोकेमिस्ट्री, बीएससी आनर्स माइक्रोबॉयोलोजी, बीएससी फोरेंसिक साइंस, दो वर्षीय एमएससी बॉयोटेक्नालोजी, तीन वर्षीय एमएससी मेडिकल बॉयोकेमिस्ट्री, तीन वर्षीय एमएससी मेडिकल माइक्रोबॉयोलोजी, एमएससी फोरेंसिक साइंस, दो वर्षीय एमएससी एनवायरमेंटल साइंस, एमएससी एग्रोनोमी, एमएससी हॉर्टिकल्चर, एमएससी प्लांट पैथालॉजी, एमएससी जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग, चार वर्षीय बी फार्मा, दो वर्षीय डी फार्मा, बीबीए लॉजिस्टिक, बीबीए ई कॉमर्स, एमबीए फार्मा मैनेजमेंट, एमबीए एग्री बिजनेस मैनेजमेंट, एमबीए फाइनेंस एंड मार्केटिंग,एमबीए इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, और पीएचडी (बायो टेक्नोलॉजी, आयुर्वेद, मेडिकल बायोकेमिस्ट्री, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी,  एग्रीकल्चर, फोरेंसिक साइंस, फार्मेसी, कॉमर्स एंड मैनेजमेंट), बीसीए और एमसीए आदि। वर्तमान दौर में ये सभी पाठ्यक्रम रोजगारपरक हैं और उनकी बहुत मांग है। आने वाले समय में नवाचार आधारित पाठ्यक्रमों की लंबी श्रृंखला दिखेगी। एमजीयूजी देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है, जहां छात्र संसद का चुनाव स्वनिर्मित सॉफ्टवेयर से ऑनलाइन कराया जा रहा है।

 

बीएएमएस और एमबीबीएस के विद्यार्थियों को मिली विशेष उपलब्धि

एमजीयूजी के बीएएमएस और एमबीबीएस के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर विशेष उपलब्धि हासिल कर पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। बीएएमएस के विद्यार्थियों को प्रति वर्ष औसतन पांच विशिष्ट अनुसंधान के लिए चयनित किया जा रहा है, तो एमबीबीएस के दो विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के शोध अनुसंधान के लिए चयनित किया गया है। निजी विश्वविद्यालय के रूप में ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाला एमजीयूजी राज्य का पहला विश्वविद्यालय है। 

 

शोध, नवाचार व स्टार्टअप को बढ़ावा देने वाले एमओयू

शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में शोध-अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए एमजीयूजी ने अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (ईरी), लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय नेपाल, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय, एम्स गोरखपुर, केजीएमयू लखनऊ, आरएमआरसी गोरखपुर, महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद, वैद्यनाथ आयुर्वेद, इंडो-यूरोपियन चैंबर ऑफ स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ, राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो, भारतीय बीज विज्ञान संस्थान, जुबिलेंट एग्रीकल्चर रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी, लॉजिस्टिक सेक्टर स्किल काउंसिल आदि के साथ एमओयू किया है।

 

अत्याधुनिक और आयुर्वेद, दोनों पद्धतियों से उत्कृष्ट चिकित्सा का केंद्र

एमजीयूजी शिक्षा के साथ ही परिसर में संचालित अस्पतालों के जरिये काफी किफायती दर पर मॉडर्न मेडिसिन और आयुर्वेद, दोनों की उत्कृष्ट चिकित्सा का केंद्र भी बन गया है। इसके मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में जटिल कैंसर तक की सर्जरी का सफलतापूर्वक इलाज हो रहा है। यहां पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों से भी मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। इसी तरह आयुर्वेद अस्पताल में भी उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा है। आयुर्वेद अस्पताल के विश्व स्तरीय 11 कॉटेज वाले पंचकर्म केंद्र ने कम समय में ही विश्वसनीय उपचार की ख्याति अर्जित की है। यहां कई दुर्लभ बीमारियों का सफल इलाज हो चुका है।

 

पांच साल में हुआ दो राष्ट्रपति का आगमन

एमजीयूजी निजी क्षेत्र का संभवतः प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है, जहां पांच साल के दौरान दो बार राष्ट्रपति का आगमन हुआ। 28 अगस्त, 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसका लोकार्पण करने आए थे। जबकि एक जुलाई 2025 को वर्तमान राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु यहां अकादमिक भवन, ऑडिटोरियम और पंचकर्म चिकित्सा केंद्र का लोकार्पण करने आईं थीं।

 

पांचवां स्थापना दिवस समारोह 

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर में आगामी 28 अगस्त (शुक्रवार) को पांचवां स्थापना समारोह मनाया जाएगा। दोपहर बाद 3 बजे से होने वाले समारोह में मुख्यमंत्री एवं इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ अपने आशीर्वचन से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे।

यूपी में ‘आधी आबादी’ पर दांव, क्या डिंपल यादव बन सकती हैं सपा का CM चेहरा?

यूपी में 'आधी आबादी' पर दांव, क्या डिंपल यादव बन सकती हैं सपा का CM चेहरा?

Dimple Yadav: उत्तर प्रदेश में आगामी ‍विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक बिसात पर समाजवादी पार्टी (सपा) 'आधी आबादी' यानी महिलाओं को साधने में पूरी ताकत से जुट गई है। रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं के लिए 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' जैसी बड़ी घोषणाओं के केंद्र में मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव नजर आईं।

 

इस बीच, जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव से डिंपल यादव को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने को लेकर सवाल किया गया, तो उनके गोल-मोल जवाब और रहस्यमयी मुस्कान ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। इस समय यूपी में योगी आदित्य के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार है। योगी भी राज्य में तीसरी बार सरकार बनाने की जी-तोड़ प्रयास कर रहे हैं। 

 

दरअसल, हाल के दिनों में डिंपल यादव के राजनीतिक कद और शैली में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। संसद के मानसून सत्र से लेकर दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन तक, डिंपल बेहद मुखर होकर पार्टी की बात रख रही हैं। 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' के तहत महिलाओं को सालाना 40,000 रुपए देने के बड़े चुनावी वादे का ऐलान भी अखिलेश ने डिंपल यादव के हाथों ही कराया। इससे यह साफ संदेश जाता है कि सपा अब महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर डिंपल को 'फ्रंटफुट' पर रखकर आगे बढ़ाना चाहती है।

अखिलेश की रहस्यमयी मुस्कान!

पत्रकारों द्वारा जब डिंपल यादव को राज्य में पार्टी का सीएम चेहरा बनाए जाने पर सीधा सवाल पूछा गया, तो अखिलेश यादव ने सीधे न तो इसका समर्थन किया और न ही सवाल का खंडन किया। वे केवल मुस्करा कर रह गए। इससे इन अटकलों को बल मिला है। दरअसल, भाजपा की की महिला केंद्रित कल्याणकारी योजनाओं की काट के लिए सपा एक मजबूत और सर्वमान्य महिला चेहरे की तलाश में है, जिसमें डिंपल यादव पूरी तरह फिट बैठती हैं। इसके साथ ही डिंपल की सौम्य और सादगी से भरी छवि महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। अखिलेश ने डिंपल को आगे करके यह संकेत दिया है कि पार्टी का नेतृत्व एक नया और व्यापक सामाजिक आधार तैयार करने के लिए तैयार है।

कौन हैं डिंपल यादव?

डिंपल यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख महिला चेहरा और समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेता हैं। वह वर्तमान में मैनपुरी लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद हैं। डिंपल यादव, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की बहू तथा सपा मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी हैं। उनका जन्म 15 जनवरी 1978 को पुणे (महाराष्ट्र) में एक सैन्य परिवार में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी थे, जिसके कारण उनकी शुरुआती पढ़ाई अलग-अलग स्थानों पर हुई। उन्होंने अपनी इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा आर्मी पब्लिक स्कूल, लखनऊ से पास की। वे लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं। 

 

डिंपल यादव पहली बार 2012 में कन्नौज लोकसभा सीट से निर्विरोध सांसद चुनी गई थीं। इसके बाद 2014 में भी वह कन्नौज से सांसद रहीं। 2022 में मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उन्होंने मैनपुरी से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। डिंपल यादव अपनी सादगी, सौम्यता और महिलाओं व युवाओं के मुद्दों को मुखरता से उठाने के लिए जानी जाती हैं। हाल के समय में वे पार्टी के भीतर नीतिगत फैसलों और अभियानों में बेहद सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

केरल में ओणम पर शराब बिक्री ने बनाया रिकॉर्ड, 8 दिनों में 771 करोड़ रुपए की बिक्री

केरल में ओणम पर शराब बिक्री ने बनाया रिकॉर्ड, 8 दिनों में 771 करोड़ रुपए की बिक्री

केरल में ओणम के त्योहार के दौरान शराब की बिक्री ने नया रिकॉर्ड बनाया है। राज्य में 10 दिवसीय ओणम सीजन के पहले आठ दिनों में सरकारी शराब बिक्री कंपनी केरल स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन (Bevco) के आउटलेट्स से करीब 771.29 करोड़ रुपए की शराब बिकी।

 

आबकारी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, 25 अगस्त तक ओणम सीजन के शुरुआती आठ दिनों में राज्यभर के Bevco आउटलेट्स पर 771.29 करोड़ रुपए की शराब की बिक्री हुई। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 694.96 करोड़ रुपए था। यानी इस साल शुरुआती आठ दिनों में शराब बिक्री में करीब 76.33 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है।

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उथ्राडम पर 126 करोड़ रुपए की शराब बिकी

 

ओणम के मुख्य त्योहार थिरुवोनम से एक दिन पहले 25 अगस्त को उथ्राडम दिवस के मौके पर Bevco आउटलेट्स से 126.31 करोड़ रुपए की शराब बेची गई। हालांकि, यह आंकड़ा पिछले साल के उथ्राडम दिवस की तुलना में कम रहा। 2025 में इसी दिन 137.64 करोड़ रुपए की शराब बिक्री हुई थी।

 

इस साल 826 करोड़ का आंकड़ा पार होने की उम्मीद

 

अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2025 में ओणम सीजन के दौरान Bevco ने कुल 826.38 करोड़ रुपए की शराब बिक्री दर्ज की थी। इस साल शुरुआती आठ दिनों की बिक्री को देखते हुए अधिकारियों को उम्मीद है कि ओणम सीजन में पिछले साल का आंकड़ा पार हो सकता है।

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केरल सरकार की कंपनी है Bevco

 

Kerala State Beverages Corporation (Bevco) पूरी तरह केरल सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी है। राज्य सरकार ने इसे इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL), बीयर, वाइन, फॉरेन मेड फॉरेन लिकर (FMFL) और फॉरेन मेड वाइन (FMW) की खरीद, बिक्री और वितरण की जिम्मेदारी दी है। ओणम के दौरान राज्य में बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और उत्सव के लिए बाहर निकलते हैं। इसी वजह से त्योहार के सीजन में शराब की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलती है।

Raksha Bandhan 2026 : बहनों के लिए फ्री बस सेवा, 1,200 रुपए तक प्रोत्साहन पाएंगे चालक-परिचालक

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रक्षाबंधन पर महिलाओं और बहनों को योगी सरकार की ओर से दी गई निशुल्क बस यात्रा का लाभ मिलना शुरू हो गया है। यात्रियों की बढ़ी भीड़ को देखते हुए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने भी कमर कस ली है। निगम ने 26 से 31 अगस्त तक छह दिनों के लिए अधिक से अधिक बसों का संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रमुख बस स्टेशनों पर अतिरिक्त कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों की तैनाती कर यात्रियों को सुगम और सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

 

परिवहन निगम ने यात्रियों की उपलब्धता के आधार पर लखनऊ, कानपुर समेत विभिन्न प्रमुख गंतव्यों के लिए अतिरिक्त सेवाएं चलाने और जरूरत के मुताबिक बसों की उपलब्धता बढ़ा दी है। सभी बसों को निर्धारित स्टॉपेज से यात्रियों को लेने और मार्गों की सघन चेकिंग कराने को कहा गया है। बस स्टेशनों पर लगातार पर्यवेक्षकों की मौजूदगी के साथ यात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखा जा रहा है।

 

बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर

रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं के अलावा अन्य यात्रियों को भी बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर है। बढ़ी मांग वाले मार्गों पर अतिरिक्त बसें संचालित की जा रही हैं। इस अवधि में निगम की सभी अनुबंधित बसों का भी संचालन महिलाओं व अन्य यात्रियों की सुविधा के लिए किया जा रहा है। बस संचालन से जुड़े कर्मचारियों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना भी लागू की गई है, ताकि अधिक से अधिक बसें सड़क पर रहें।

 

चालक-परिचालकों को प्रोत्साहन राशि, बस संचालन पर विशेष जोर

26 से 31 अगस्त तक छह दिनों की अवधि में 1,800 किलोमीटर बस संचालन पूरा करने वाले चालक-परिचालकों को 1,200 रुपये प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, 1,800 किलोमीटर से अधिक संचालन पर संविदा चालक-परिचालकों को अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 55 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। इससे त्योहार के दौरान बसों के अधिकतम संचालन को प्रोत्साहन मिलेगा।

 

प्रमुख बस स्टेशनों पर अतिरिक्त व्यवस्था

यात्रियों की अधिक भीड़ वाले आनंद विहार, कौशांबी, कश्मीरी गेट, मुरादाबाद, मेरठ, बरेली, कैसरबाग, आलमबाग, चारबाग, अवध डिपो, सहारनपुर, आईएसबीटी आगरा, मसूदाबाद अलीगढ़, झकरकटी कानपुर और इटावा समेत चिन्हित बस स्टेशनों पर अतिरिक्त कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों की ड्यूटी सुचारु रूप से चल रही है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य रक्षाबंधन के दौरान बसों के संचालन को सुचारु बनाए रखना और यात्रियों को समय पर बस उपलब्ध कराना है।

 

यात्रियों की मांग के अनुसार बढ़ेंगी बसें

निगम ने क्षेत्रीय प्रबंधकों को बस स्टेशनों पर बसों की उपलब्धता की लगातार निगरानी करने और मांग के अनुसार तत्काल बसें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बसों में भीड़ को देखते हुए यात्रियों को बीच के स्टॉपेज से भी बस में बैठाकर उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए बड़ा बदलाव! योगी सरकार का APAAR ID पर फोकस, डिजिटल रिकॉर्ड से छात्रवृत्ति तक होंगे आसान

कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए बड़ा बदलाव! योगी सरकार का APAAR ID पर फोकस, डिजिटल रिकॉर्ड से छात्रवृत्ति तक होंगे आसान

योगी सरकार की डिजिटल और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था में अब विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित डिजिटल पहचान से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों से अपार आईडी (APAAR ID) बनवाकर अपने अग्रिम पंजीकरण एवं परीक्षा आवेदन पत्र में दर्ज करने का अनुरोध किया है।

‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ की अवधारणा पर आधारित 12 अंकों की यह स्थायी डिजिटल पहचान विद्यार्थियों की स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक की शैक्षणिक यात्रा के रिकॉर्ड को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

अपार आईडी के माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहचान को डिजिटल सुरक्षा देने की यह पहल योगी सरकार के पारदर्शी, तकनीक आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा तंत्र को और मजबूत करेगी। इससे आज के विद्यार्थी का शैक्षणिक रिकॉर्ड भविष्य की शिक्षा तक सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से साथ ले जाने का आधार तैयार होगा।

 

अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि परिषद द्वारा कक्षा 9 एवं 11 के विद्यार्थियों के अग्रिम पंजीकरण तथा कक्षा 10 एवं 12 के विद्यार्थियों के परीक्षा आवेदन पत्र भरने की प्रक्रिया चल रही है। इसी क्रम में विद्यार्थियों के शैक्षणिक विवरण को पारदर्शी, त्रुटिरहित और सुरक्षित रखने के उद्देश्य से अपार आईडी की व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।

 

स्थायी डिजिटल पहचान है अपार आईडी

अपार आईडी 12 अंकों की स्थायी डिजिटल पहचान है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी की पूरी शैक्षणिक यात्रा के क्रेडिट और रिपोर्ट कार्ड को एक स्थान पर सुरक्षित रखा जा सकेगा। इसके माध्यम से मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट समेत विभिन्न प्रमाणपत्र डिजीलॉकर पर डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेंगे। इससे भविष्य में महत्वपूर्ण दस्तावेज खोने या खराब होने की चिंता कम होगी।

 

छात्रवृत्ति और योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मिलेगी सुविधा

सही विवरण और आंकड़ों के आधार पर विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, कल्याणकारी योजनाओं और शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ सीधे और बिना बाधा उपलब्ध कराने में अपार आईडी उपयोगी होगी। इससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहचान और उनके अभिलेखों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी।

 

 

अभिभावकों की सहमति से बनेगी अपार आईडी: भगवती सिंह

माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि पंजीकरण एवं आवेदन पत्र भरते समय अपार आईडी का विवरण देना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, विद्यार्थियों के व्यापक हित और उनके डिजिटल शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए परिषद ने सभी विद्यालय प्रधानाचार्यों, शिक्षकों एवं अभिभावकों से विशेष अनुरोध किया है कि वे अपने बच्चों की अपार आईडी बनवाकर इसे अग्रिम पंजीकरण एवं परीक्षा फॉर्म में दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि अपार आईडी का निर्माण सरल और सुरक्षित प्रक्रिया है, जो अभिभावकों की सहमति से पूरी की जाती है। प्रधानाचार्यों से प्रयास करने को कहा गया है कि अग्रिम पंजीकरण की अंतिम तिथि से पूर्व शत-प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी प्रविष्ट हो जाए।

यूपी के स्टार्टअप्स को योगी सरकार का भरोसा, फाउंडर्स बोले- बढ़ेगा इनोवेशन का दायरा

यूपी के स्टार्टअप्स को योगी सरकार का भरोसा, फाउंडर्स बोले- बढ़ेगा इनोवेशन का दायरा

उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार के प्रयासों को उस समय और मजबूती मिली, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टार्टअप फाउंडर्स और उनकी टीमों से सीधे संवाद कर उन्हें सरकार के हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपए से अधिक और 9 इनक्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि के चेक सौंपे। कार्यक्रम में मौजूद कई स्टार्टअप प्रमुखों ने भी सरकार की नीतियों, सहयोग और प्रोत्साहन व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे यूपी के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए अहम कदम बताया।

 

एडूबुक के सह-संस्थापक एवं सीईओ अपूर्व बजाज और सीओओ शिवानी मल्होत्रा ने आयोजन के दौरान योगी सरकार की स्टार्टअप नीति की सराहना की। उन्होंने बताया कि उनका स्टार्टअप साइबर सिक्योरिटी, ब्लॉकचेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स की शिक्षा देता है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में बच्चों की बायोडाटा तैयार कराकर देश-विदेश में जॉब मेलों के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। उनके पोर्टल के जरिए छात्रों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन भी तुरंत हो जाता है, जिसमें पहले आमतौर पर 20 दिन से अधिक समय लगता था।

 

उन्होंने बताया कि स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए योगी सरकार की ओर से 4.50 लाख रुपए का अनुदान मिला है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स की सुविधा के लिए सरकार की ओर से शुरू किया गया ‘वन पोर्टल, वन विंडो’ अच्छा कदम है। इससे उत्तर प्रदेश में उनके जैसे स्टार्टअप्स के लिए काम करना और फंडिंग प्राप्त करना आसान होगा। उन्होंने बताया कि कंपनी में अब तक 80 लाख रुपए तक का निवेश किया जा चुका है।

कंपनी में महिलाओं को 50 प्रतिशत रोजगार

शिवानी मल्होत्रा ने कहा कि योगी सरकार ने महिला स्टार्टअप फाउंडर्स को भी प्रोत्साहित किया है। इसका सीधा असर प्रदेश में महिलाओं के रोजगार पर पड़ेगा। उनके लखनऊ स्थित कार्यालय में भी 50 प्रतिशत स्टाफ में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

पाइप लाइन से घर-घर तक पानी पहुंचाने का विजन

वीडीटी पाइपलाइन के प्रबंध निदेशक भुवनेश शर्मा ने कहा कि उनकी कंपनी उत्तर प्रदेश में तेल, पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने का काम कर रही है। इसके लिए पाइपलाइन व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यूपी स्टार्टअप समिट में आकर वह काफी खुश हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनसे बातचीत की और प्रदेश के घर-घर तक पानी पहुंचाने को लेकर चर्चा की।

 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उनकी टीम पाइपलाइन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर काम करेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री ने जमीन और फंड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। टीम के अब तक के कार्य के लिए उन्हें प्रशस्ति पत्र भी मिला। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश को बीमारू प्रदेश के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब प्रदेश तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम का हो रहा विस्तार

सीएम योगी ने सिंह डायनेमिक्स प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक डॉ. अनुशी वर्मा और डॉ. हिमांशु सिंह को स्टार्टअप प्रोत्साहन के तौर पर 4.50 लाख रुपए का चेक सौंपा। डॉ. हिमांशु सिंह ने कहा कि उनकी कंपनी सुरक्षा बलों के लिए छोटे हथियार बनाने का काम कर रही है। इस राशि से कारोबार को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार विकसित होगा और उनकी कंपनी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास में योगदान दे सकेगी।

यूपी में मिलेगा भरपूर सहयोग

एंड्योरएयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ रामा कृष्णा ने बताया कि उनकी कंपनी सुरक्षा बलों के लिए ड्रोन बनाने का काम करती है। इनमें लॉजिस्टिक्स, सर्विलांस और अटैक ड्रोन शामिल हैं। उनकी कंपनी में करीब 150 लोग काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप्स को पहले से भी ज्यादा सहयोग मिलने वाला है। योगी सरकार की नई स्टार्टअप नीति काफी अच्छी है। इसमें जमीन, सुविधाएं, फंडिंग और पूंजी की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा गया है।

योगी सरकार का विजन सराहनीय

त्रिशूल पल्सेशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक दियांम को स्टार्टअप में प्रोटोटाइप विकास के लिए पांच लाख रुपए का प्रोत्साहन चेक मिला। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन पर काम कर रही है। साथ ही, उनके उत्पाद एक विदेशी कंपनी को भी सप्लाई किए जा रहे हैं। प्रोटोटाइप तैयार करने में योगी सरकार से मिली ग्रांट काफी उपयोगी साबित हुई है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार का विजन और उसके लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।

योगी सरकार में पूरा हो रहा सपना

जेनोमिक्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड की सह-संस्थापक डॉ. दीक्षा भारतीया को मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप प्रोत्साहन के रूप में 4.50 लाख रुपए का चेक सौंपा। उन्होंने बताया कि वह नवजात शिशुओं में होने वाली दुर्लभ बीमारियों पर काम कर रही हैं। भारत में करोड़ों बच्चे ऐसी बीमारियों से प्रभावित हैं। उनका स्टार्टअप नए इनोवेशन के जरिए जन्म के समय बच्चों की हेल्थ स्क्रीनिंग कर रहा है, जिससे बीमारियों की समय रहते पहचान की जा सके।

 

उन्होंने बताया कि प्रदेश की कई लैब और अस्पतालों को अपने साथ जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अपने उत्पाद के लिए पेटेंट भी फाइल किया गया है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने इस सपने को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता के साथ अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई हैं। इसका परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में नवाचार और स्टार्टअप्स की संख्या लगातार बढ़ रही है।