मोदी, भागवत पर राहुल का हमला

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ अपनी बातचीत का एक वीडियो शनिवार को जारी किया। इसमें छात्रों से बात करते हुए राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस के ऊपर तीखा हमला किया। राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, इनका लोकतंत्र मे विश्वास नहीं है।

इस वीडियो में राहुल छात्रों से कह रहे हैं, ‘ऊपर बैठे लोगों में से अधिकांश डेमोक्रेसी में विश्वास नहीं करते। प्रधानमंत्री, मोहन भागवत, आरएसएस के लोग डेमोक्रेसी में विश्वास नहीं करते’। उन्होंने देश के संभ्रांत वर्ग पर भी निशाना साथा और कहा, ‘एलीट वर्ग के लोग डेमोक्रेसी में विश्वास नहीं करते। शिक्षा का अनप्राइवेटाइज सिस्टम डेमोक्रेसी का सॉलिड प्रोटेक्टर है’।

इस वीडियो में राहुल ने उन प्रदर्शनकारी छात्रों से बात की, जो पुलिस की कार्रवाई का शिकार हुए थे। राहुल ने वीडियो के साथ एक पोस्ट भी लिखी है, जिसमें उन्होंने कहा है, ‘यौन उत्पीड़न, कपड़े खींचना और प्राइवेट पार्ट्स पर हमला, लोकतंत्र के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों और महिलाओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस की बर्बरता ने शर्मनाक हदें पार कर दी हैं’। इस वीडियो में प्रदर्शनकारी छात्र और छात्राओं ने अपना अनुभव सुनाया है। उन्होंने बताया है कि पुलिस ने उनके ऊपर किस तरह से हमला किया। एक छात्रा ने पुलिसकर्मियों द्वारा पिन चुभोने के आरोप भी लगाए।

सर्दियों से पहले सीमा पर घुसपैठ की चुनौती, सुरक्षा ग्रिड अलर्ट, 2 घुसपैठिए ढेर

सर्दियों से पहले सीमा पर घुसपैठ की चुनौती, सुरक्षा ग्रिड अलर्ट, 2 घुसपैठिए ढेर

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सर्दियों की आहट के साथ जम्मू कश्मीर में सीमा पार से घुसपैठ की आशंकाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती बढ़ा दी है। हाल में पुंछ के कृष्णा घाटी सेक्टर में बारूदी सुरंग विस्फोट में चार संदिग्ध घुसपैठियों के मारे जाने और सुरनकोट में आतंकी ठिकाने से एके-47 राइफल, छह हथगोले व 30 कारतूस बरामद होने के बाद सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और तलाशी अभियान अहम हो गए हैं।

 

सेना, बीएसएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ सीमा पर घुसपैठ रोकने की नहीं, बल्कि घुसपैठ के बाद जंगलों में छिपने वाले आतंकियों और उनके संभावित मददगारों के नेटवर्क को भी निष्क्रिय करने की है। शनिवार 17 अक्टूबर को भी सुरक्षाबलों ने 2 घुसपैठियों को ढेर कर दिया। 

इस साल घुसपैठ की 8 कोशिशें नाकाम

जानकारी के लिए इस साल अभी तक एलओसी पर घुसपैठ के आठ प्रयास नाकाम किए जा चुके हैं। जबकि रिपोर्टों के अनुसार, इस साल इस समय तक जम्मू कश्मीर में एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ की 8 कोशिशों को नाकाम किया जा चुका था। ये घटनाएं सांबा, सुंदरबनी, भींबर गली, नौशहरा, उड़ी, पुंछ और राजौरी सहित विभिन्न क्षेत्रों में सामने आई थीं।

 

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ के छह प्रयास 2025 में दर्ज किए गए थे। इससे पहले 2021 में आठ, 2022 में 12, 2023 में 18 और 2024 में 10 प्रयास दर्ज हुए थे। आंकड़े बताते हैं कि कोशिशों की संख्या घटने-बढ़ने के बावजूद खतरे को खारिज नहीं किया जा सकता।

 

सीमा बाड़, निगरानी उपकरणों, गश्त और खुफिया सूचनाओं पर आधारित अभियानों के साथ सुरक्षा एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन से हथियार और नशीले पदार्थ पहुंचाने की आशंकाओं से भी निपटना पड़ रहा है। पहाड़ी इलाकों में कोहरा और बर्फबारी निगरानी तथा आवाजाही को कठिन बना सकते हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के लिए सर्दियों के दौरान चौकसी बनाए रखना और संभावित घुसपैठ के बाद त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना निर्णायक होगा।

ऑपरेशन में दो घुसपैठिए आतंकी मारे गए

उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एलओसी के पास जारी आपरेशन में दो घुसपैठिए आतंकी मारे गए। सर्दियां शुरू होने और बर्फबारी के बाद उस पार से यह घुसपैठ का पहला प्रयास बताया जा रहा है। रक्षा सूत्रों ने बताया कि शनिवार को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास चल रहे एक ऑपरेशन के दौरान दो आतंकवादी मारे गए। उन्होंने बताया कि केरन सेक्टर के जुमागुंड इलाके में सैनिकों ने कुछ संदिग्ध गतिविधि देखी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। सैनिकों ने उन्हें चुनौती दी, जिसके जवाब में गोलीबारी हुई।

 

रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तड़के करीब 3:30 बजे केरन सेक्टर के जुमागुंड इलाके में एलओसी के पास मुठभेड़ शुरू हो गई। दो आतंकवादी मारे गए हैं। तलाशी अभियान जारी है।

गरबा पांडाल में 15 वर्षीय किशोरी से दुर्व्यवहार, BJP मंडल अध्यक्ष कमल चौहान को कारण बताओ नोटिस

गरबा पांडाल में 15 वर्षीय किशोरी से दुर्व्यवहार, BJP मंडल अध्यक्ष कमल चौहान को कारण बताओ नोटिस

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के प्रसिद्ध कनकेश्वरी गरबा पंडाल में 15 वर्षीय किशोरी के साथ कथित दुर्व्यवहार, धक्का-मुक्की और मारपीट के मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष कमल सिंह चौहान पर संगठन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कार्यालय तलब किया और कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। 

 

पंडाल में दुर्व्यवहार का आरोप

मिली जानकारी के अनुसार, कनकेश्वरी परिसर में आयोजित गरबा कार्यक्रम के दौरान 15 वर्षीय बालिका के साथ कथित रूप से अभद्रता और धक्का-मुक्की की गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर मंडल अध्यक्ष कमल चौहान द्वारा मारपीट भी की गई। यह भी खबर है कि पीड़िता की शिकायत और परिजनों के विरोध के बाद हीरानगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया है। 

प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर भाजपा कार्यालय तलब

मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पूरे घटनाक्रम पर सख्त निर्देश दिए। प्रदेश नेतृत्व के निर्देश के बाद मंडल अध्यक्ष कमल सिंह चौहान को तत्काल भाजपा नगर कार्यालय तलब किया गया। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने इस पूरे घटनाक्रम पर संगठन की ओर से अत्यधिक नाराजगी व्यक्त की।

कारण बताओ नोटिस जारी

भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने स्पष्ट किया कि अनुशासनहीनता और इस तरह के आचरण को पार्टी कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। संगठन की ओर से कमल सिंह चौहान को औपचारिक ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया है। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि नोटिस के जवाब और पुलिस जांच के आधार पर आरोपी के खिलाफ आगे की दंडात्मक संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कोलकाता में बड़ा हादसा, दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ में 17 लोगों की मौत, कई घायल

कोलकाता में बड़ा हादसा, दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ में 17 लोगों की मौत, कई घायल

Kolkata Durga Pandal Stampede

Kolkata Durga Puja Pandal Accident: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान भगदड़ मचने से दर्दनाक हादसा सामने आया है। शहर के शारदा पार्क दुर्गा पूजा पंडाल में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ एकत्र होने और अचानक मची भगदड़ के कारण 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए। गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्‍यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी से बात कर घटना के बारे में जानकारी ली और घटना पर दुख जताया। सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 18003455678 जारी किया है। 

कैसे हुआ हादसा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूजा पंडाल में भव्य सजावट और आकर्षक थीम को देखने के लिए देर शाम बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। पंडाल के प्रवेश और निकास द्वार पर भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया, जिससे सुरक्षा घेरा टूट गया और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे। पूजा उत्सव के मुख्य दिनों में शहर के प्रमुख पंडालों में लाखों की संख्या में दर्शनार्थी पहुंचते हैं। अचानक धक्का-मुक्की बढ़ने से पंडाल परिसर के भीतर अफ़रा-तफ़री मच गई, जिसमें मुख्य रूप से महिलाएं और बच्चे प्रभावित हुए। घटना की सूचना मिलते ही कोलकाता पुलिस और आपातकालीन राहत बल मौके पर पहुंचे और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया।

राहत और बचाव कार्य

हादसे के तुरंत बाद कोलकाता पुलिस के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए राहत कार्य शुरू किया। एम्बुलेंस और पुलिस वाहनों के जरिए घायलों को तुरंत पास के मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने संबंधित पंडाल के आसपास बैरिकेडिंग कर दी और दर्शकों के प्रवेश पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शहर के अन्य सभी बड़े पंडालों पर सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है तथा अतिरिक्त पुलिस बल और आरएएफ (RAF) की तैनाती की गई है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

मुख्‍यमंत्री अधिकारी अस्पताल पहुंचे

घटना सूचना मिलते ही मुख्‍यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी अस्पताल पहुंचे एवं घायलों का हालचाल लिया। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ की घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में, मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। पूर्व मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना पर दुख व्यक्त किया है। 

ग्रेटर नोएडा में दो सीक्रेट ड्रग लैब्स का भंडाफोड़, बड़ी मात्रा में सिंथेटिक ड्रग्स और केमिकल जब्त

ग्रेटर नोएडा में दो सीक्रेट ड्रग लैब्स का भंडाफोड़, बड़ी मात्रा में सिंथेटिक ड्रग्स और केमिकल जब्त

NCB Greater Noida Raids

NCB Greater Noida Raids: देश में नशे के अवैध कारोबार और अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट के खिलाफ जारी अभियान में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को बड़ी सफलता मिली है। एनसीबी ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में चल रही मादक पदार्थ बनाने वाली दो गुप्त प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ किया है। इस बड़ी उपलब्धि पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को एनसीबी की टीम को बधाई दी।

क्या है पूरा मामला?

NCB ने उत्तर प्रदेश पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के साथ एक खुफिया इनपुट के आधार पर संयुक्त अभियान चलाते हुए ग्रेटर नोएडा में अवैध रूप से चलाई जा रही मादक पदार्थ (सिंथेटिक ड्रग्स) बनाने वाली दो गुप्त प्रयोगशालाओं का पर्दाफाश किया। इन प्रयोगशालाओं में अवैध रूप से मेफेड्रोन (Mephedrone/MD) और मेथमफेटामाइन (Methamphetamine) जैसी उच्च गुणवत्ता वाली सिंथेटिक ड्रग्स का निर्माण किया जा रहा था।

 

विदेशी नागरिक समेत दो आरोपी गिरफ्तार

एनसीबी की इस बड़ी कार्रवाई के दौरान मौके से एक विदेशी नागरिक समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये गुप्त प्रयोगशालाएं काफी समय से अलग-थलग इलाकों में छिपाकर चलाई जा रही थीं, ताकि स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक न लग सके। गिरफ्तार विदेशी नागरिक की भूमिका मुख्य रूप से ड्रग्स के सही केमिकल फार्मूले और निर्माण प्रक्रिया को अंजाम देने में थी। ये आरोपी तैयार सिंथेटिक ड्रग्स को दिल्ली-एनसीआर के अलावा देश के अन्य महानगरों और नाइटक्लब्स में सप्लाई करने की योजना बना रहे थे।

 

एनसीबी की सख्त कार्रवाई जारी

एनसीबी अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस सिंडिकेट के वित्तीय संपर्कों, मुख्य सरगना और स्थानीय मददगारों का पता लगाया जा सके। पुलिस और एनसीबी यह भी जांच कर रही है कि इन प्रयोगशालाओं के लिए कच्चा माल और रसायन कहां से लाया जा रहा था।

 

गृह मंत्री अमित शाह ने दी बधाई

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एनसीबी को इस सफल ऑपरेशन के लिए बधाई देते हुए कहा कि ग्रेटर नोएडा में दो गुप्त प्रयोगशालाओं का पर्दाफाश होना भारत को ‘नशा मुक्त’ बनाने की दिशा में एक बहुत महत्वपूर्ण कदम और बड़ी सफलता है। गृहमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार देश में नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।

 

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, इंटरनेट बच्चों का मौलिक अधिकार, पूर्ण रोक गलत

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, इंटरनेट बच्चों का मौलिक अधिकार, पूर्ण रोक गलत

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Children Internet Access: सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल युग में बच्चों के अधिकारों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इंटरनेट तक पहुंच और इसका विवेकपूर्ण इस्तेमाल बच्चों का मौलिक अधिकार है, इसलिए इस पर पूर्ण प्रतिबंध या रोक नहीं लगाई जा सकती। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों से जुड़ी अश्लील और शोषणकारी सामग्री का पता लगाने और उसे तुरंत हटाने के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय डेटाबेस (National Database) तैयार करे।

एनजीओ की याचिका पर आया फैसला

सुप्रीम कोर्ट का यह दूरगामी आदेश गैर-सरकारी संगठन (NGO) ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस’ की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, मैसेजिंग ऐप्स और ऑनलाइन स्पेस में बच्चों के यौन शोषण, दुर्व्यवहार और उनसे जुड़ी अश्लील सामग्री के खतरनाक स्तर तक बढ़ने पर गंभीर चिंता जताई गई थी। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि बच्चों के सुरक्षित ऑनलाइन माहौल के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।

स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन

मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि आज के आधुनिक समय में शिक्षा, जानकारी और कौशल विकास के लिए इंटरनेट एक अनिवार्य जरिया बन चुका है। ऐसे में बच्चों को इससे पूरी तरह से वंचित करना या उनके इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना तर्कसंगत नहीं है। अदालत ने रेखांकित किया कि चुनौती इंटरनेट को बंद करने की नहीं, बल्कि इसे बच्चों के लिए सुरक्षित और सुलभ बनाने की है।

केंद्र सरकार को सख्त निर्देश

ऑनलाइन स्पेस को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार एक ऐसा सेंट्रलाइज्ड ‘नेशनल डेटाबेस’ तैयार करे, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड या शेयर की जाने वाली बाल शोषण और अश्लील सामग्री को ऑटोमैटिकली ट्रेस और फ्लैग कर सके। इस डेटाबेस की मदद से चिह्नित की गई आपत्तिजनक सामग्री को इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से तुरंत हटाया जाएगा, ताकि इसे आगे फैलने से रोका जा सके।

रोमानिया के पास ड्रोन हमले का शिकार हुआ केमिकल टैंकर पहुंचा पोर्ट, सभी 9 भारतीय नाविक सुरक्षित

रोमानिया के पास ड्रोन हमले का शिकार हुआ केमिकल टैंकर पहुंचा पोर्ट, सभी 9 भारतीय नाविक सुरक्षित

रोमानियाई तट के करीब एक रासायनिक टैंकर (Chemical Tanker) पर हुए ड्रोन हमले के बाद राहत भरी खबर सामने आई है। पोत पर सवार सभी नौ भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और प्रभावित जहाज रोमानिया के प्रमुख बंदरगाह कॉन्स्टांटा पहुंच गया है। बुखारेस्ट स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की।

दूतावास और राजदूत ने लिया सुरक्षा स्थिति का जायजा

रोमानिया में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी देते हुए बताया कि रोमानिया में भारत के राजदूत मनोज कुमार मोहापात्रा ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय अधिकारियों और राहत एजेंसियों से तुरंत संपर्क साधा।

 

राजदूत मोहापात्रा ने रोमानिया की खोज एवं बचाव एजेंसियों, जिनमें SAR रोमानिया और MRCC कॉन्स्टांटा शामिल हैं, के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। इसके अलावा, उन्होंने पोत ‘यारा जे’ (Yara J) के मुख्य सुरक्षा अधिकारी (Chief Security Officer) से भी स्थिति की विस्तृत जानकारी ली और भारतीय क्रू मेंबर्स की कुशलक्षेम जानी।

सुरक्षित पोर्ट पर पहुंचा पोत

हमले के तुरंत बाद रोमानियाई समुद्री बचाव सेवाओं की त्वरित सहायता से टैंकर ‘यारा जे’ को सुरक्षित रूप से कॉन्स्टांटा बंदरगाह तक पहुंचाया गया। भारतीय दूतावास के अनुसार, सभी नौ भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर ली गई है और दूतावास लगातार पोत के क्रू और स्थानीय प्राधिकारियों के संपर्क में बना हुआ है ताकि आवश्यकता पड़ने पर हर संभव मदद मुहैया कराई जा सके।

 

राहुल गांधी के खिलाफ महिला पत्रकार ने दर्ज कराई शिकायत, जानें सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे इस पूरे मामले की असल वजह

राहुल गांधी के खिलाफ महिला पत्रकार ने दर्ज कराई शिकायत, जानें सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे इस पूरे मामले की असल वजह

Rahul Gandhi Female Journalist Complaint

Rahul Gandhi Female Journalist Complaint: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के विरोध मार्च की कवरेज कर रही एक महिला पत्रकार के साथ अभद्रता और धक्का-मुक्की का मामला अब कानूनी रूप से तूल पकड़ता जा रहा है। पत्रकार ऋचा पाराशर ने नई दिल्ली के डीसीपी कार्यालय पहुंचकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, दूसरी ओर यह मामला कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गया है।

क्या हैं महिला पत्रकार के आरोप?

पत्रकार ऋचा पाराशर ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि 12 अक्तूबर 2026 को जब वह इंडिया ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट मार्च को कवर कर रही थीं, तब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उनका हाथ या कंधा पकड़कर पीछे की तरफ खींचा। इसके तुरंत बाद उनके सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धक्का दे दिया, जिससे वह सड़क पर गिर गईं और उनका मोबाइल फोन भी क्षतिग्रस्त हो गया। पत्रकार ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि वह तीन महीने की गर्भवती हैं। अचानक गिर जाने के कारण उन्हें पेट में गंभीर दर्द उठा और शरीर पर अन्य चोटें आईं, जिसके चलते उन्हें इलाज के लिए तत्काल अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। ALSO READ: गर्भवती पत्रकार ने राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप, मेरा हाथ पकड़ा, मुझे धक्का दिया

क्या कहना है कांग्रेस का?

दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के समर्थकों ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया है। कांग्रेस का कहना है कि विरोध मार्च के दौरान किसी भी वीडियो फुटेज में यह साबित नहीं होता कि पत्रकार को राहुल गांधी या उनके सुरक्षाकर्मियों द्वारा जानबूझकर निशाना बनाया गया या धक्का दिया गया। पार्टी के अनुसार, शिकायतकर्ता द्वारा किए जा रहे दावों और उपलब्ध तथ्यों में कई तकनीकी विसंगतियां साफ नजर आती हैं। ALSO READ: राहुल गांधी के घर चाय पर चर्चा की इनसाइड स्टोरी? CJP से नेहा बोरा तक कौन किसके साथ, कौन किसके खिलाफ?

अब हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने पीड़ित महिला पत्रकार की ओर से इस मुद्दे को देश की शीर्ष अदालत के समक्ष उठाया। गौरव भाटिया ने CJI जस्टिस सूर्यकांत के सामने मामले की त्वरित सुनवाई की मांग रखी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इस याचिका पर 26 अक्टूबर को हाईकोर्ट में सुनवाई तय की गई है।

पूरा मामला क्या है?

12 अक्तूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ विपक्षी गठबंधन (इंडिया ब्लॉक) ने दिल्ली में संसद से सुप्रीम कोर्ट की ओर विरोध मार्च निकाला था। इस मार्च की कवरेज के दौरान एक निजी चैनल की महिला पत्रकार ऋचा पाराशर के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और अभद्रता हुई। पत्रकार का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनका हाथ या कंधा पकड़कर खींचा और उनके सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें जोर से धक्का दिया, जिससे वह जमीन पर गिर गईं और उनका फोन टूट गया। यह मामला अब कोर्ट तक पहुंच गया है।

यूपी में रूल ऑफ माफिया मिटाकर स्थापित किया रूल ऑफ लॉ : CM योगी

यूपी में रूल ऑफ माफिया मिटाकर स्थापित किया रूल ऑफ लॉ : CM योगी

CM Yogi Adityanath

CM Yogi Rule of Law UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले माफियाराज का प्रभाव था, लेकिन अब प्रदेश में रूल ऑफ लॉ यानी कानून का राज स्थापित किया गया है। यही विकास, निवेश और आमजन के विश्वास की सबसे मजबूत नींव है। एक समय यूपी को बीमारू राज्यों की श्रेणी में रखा जाता था, निवेश तथा कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जाते थे, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रभावी कार्ययोजना से प्रदेश ने अपनी स्थिति बदली है। आज उत्तर प्रदेश देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में आगे बढ़ रहा है।

 

मुख्यमंत्री शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने युवा विधि स्नातकों से कहा कि वे कानून को केवल धाराओं और मुकदमों तक सीमित न रखें, बल्कि आम नागरिक के विश्वास, अधिकारों की रक्षा और न्याय की सुलभता को अपने कार्य का आधार बनाएं। विकसित भारत की कल्पना केवल सड़कों, कारखानों और एक्सप्रेसवे के निर्माण से साकार नहीं होगी। इसके लिए न्याय, अधिकारों और कर्तव्यों पर आधारित व्यवस्था को मजबूत करना होगा। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को बिना भेदभाव सहज और सुलभ न्याय मिलना चाहिए। कानून की सबसे बड़ी पूंजी उसकी धाराएं नहीं, बल्कि आमजन का विश्वास है। यह विश्वास निष्पक्षता, पीड़ित के सम्मान और विधिवेत्ताओं के आचरण से मजबूत होता है। विधिवेत्ताओं को सत्य, धर्म, निष्पक्षता और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखनी होगी।

पहले यूपी को लेकर थी नकारात्मक धारणा

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश को लेकर यह धारणा थी कि यहां निवेश सुरक्षित नहीं है, कनेक्टिविटी कमजोर है और विकास की संभावनाएं सीमित हैं। सबको यही लगता था कि उत्तर प्रदेश नहीं सुधर सकता। इस सोच को बदलने के लिए इच्छाशक्ति और परिणाम देने वाली कार्ययोजना जरूरी थी। प्रदेश में कानून का राज स्थापित करना इसी परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमने प्रदेश को माफियाराज से मुक्त कर कानून का शासन स्थापित किया। पहले हाल यह था कि प्रयागराज के एक माफिया के सामने प्रशासनिक और संवैधानिक पदों से जुड़े लोगों के काफिले तक रुक जाते थे। लेकिन, अब कानून के राज में प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

‘विकसित भारत’ 2047 की पैरवी करेंगे विधि विद्यार्थी

मुख्यमंत्री ने इस दीक्षांत समारोह को एक काल्पनिक मुकदमे के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि ‘विकसित भारत 2047’ एक केस है, तो 140 करोड़ भारतीय उसके याची हैं और युवा विधिवेत्ता उनके अधिवक्ता हैं। इस मुकदमे में तथ्य, साक्ष्य, तर्क और ईमानदार पैरवी की आवश्यकता होगी। इसका प्रतिवादी कोई व्यक्ति या राजनीतिक दल नहीं, बल्कि वह यथास्थितिवादी सोच है, जो यह मानने को तैयार नहीं होती कि परिवर्तन संभव है।

मई 2014 के बाद देश में सुधारों को गति

सीएम योगी ने कहा कि देश की स्वतंत्रता, संविधान का लागू होना, आपातकाल, न्यायपालिका के ऐतिहासिक निर्णयों और देश में हुए सुधारों को हमारी यात्रा की महत्वपूर्ण तिथियों के रूप में देखा जा सकता है। 15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ। 25 जून 1975 को आपातकाल लागू होने की घटना ने ‘रूल ऑफ लॉ’ और ‘रूलर के लॉ’ के बीच का अंतर स्पष्ट किया। मई 2014 के बाद देश में सुधारों की प्रक्रिया को गति मिली। अप्रासंगिक हो चुके 1,500 से अधिक कानून समाप्त किए गए। जन विश्वास अधिनियम के माध्यम से 42 कानूनों के 183 प्रावधानों में छोटी-छोटी चूकों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, जीएसटी, अनुच्छेद 370 से संबंधित बदलाव और नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सुधार का अर्थ केवल नए कानून बनाना नहीं, बल्कि उन पुराने कानूनों को हटाना भी है जिनकी प्रासंगिकता समाप्त हो चुकी है।

2029-30 तक वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2013 में भारत को दुनिया की पांच नाजुक अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, जबकि आज वह दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। इस बदलाव ने भारत के प्रति वैश्विक विश्वास को मजबूत किया है। इसी तरह यूपी को अब वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विजन डॉक्यूमेंट जारी किया गया है और कार्ययोजना लागू की गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2029-30 तक यह लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा। कहा कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति और विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कानून के शासन, निष्पक्षता और आमजन के विश्वास को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। पीड़ित को सम्मान देना और न्याय को सुलभ बनाना इस विश्वास के प्रमुख आधार हैं।

एआई सहायक बने, अंतिम निर्णय मनुष्य के विवेक से हो

तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक ने अपराध और साक्ष्य, दोनों का स्वरूप बदल दिया है। एआई ने शोध, आंकड़ों के विश्लेषण और संभावित परिणामों के आकलन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। डीपफेक के माध्यम से किसी व्यक्ति का चेहरा और आवाज इस तरह प्रस्तुत की जा सकती है कि देखने-सुनने वाला उसे वास्तविक मान ले। ऐसे में डिजिटल साक्ष्य की प्रामाणिकता की वैज्ञानिक जांच करना आवश्यक होगा। जब किसी दूसरे देश में बैठा अपराधी किसी व्यक्ति की जीवनभर की कमाई एक झटके में उड़ा लेता है, तो उसकी पहचान और उस तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इन परिस्थितियों में युवा विधिवेत्ताओं को तकनीक और कानून, दोनों की समझ विकसित करनी होगी।

सभी 75 जनपदों में साइबर थाने स्थापित

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में साइबर थाने स्थापित किए गए हैं। प्रदेश के 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है। राज्य में फॉरेंसिक संस्थान भी स्थापित किया गया है। एआई प्रज्ञा कार्यक्रम के माध्यम से 10 लाख युवाओं को एआई, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सिक्योरिटी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नए आपराधिक कानूनों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को मान्यता दी गई है। सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले मामलों में फॉरेंसिक जांच अनिवार्य है।

 

सीएम ने कहा कि एआई न्यायाधीश या विधिवेत्ता के विवेक का विकल्प नहीं हो सकता। श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन को ज्ञान देने के बाद निर्णय लेने का अधिकार उनके विवेक पर छोड़ते हैं। इसी भाव को आज की तकनीकी भाषा में ‘ह्यूमन इन द लूप’ कहा जा सकता है। मशीन सुझाव दे सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय मनुष्य को ही लेना होगा। एआई को सहायक बनाइए, सारथी नहीं। सारथी आपका विवेक और धर्म होना चाहिए। मशीन ड्राफ्ट तैयार कर सकती है, लेकिन उसमें लापरवाही की कीमत कोई निर्दोष व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता से चुका सकता है। इसलिए मशीन कोड लिख सकती है, लेकिन कोड ऑफ कंडक्ट का पालन विधिवेत्ता को ही करना होगा।

अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की खुशहाली ही विकास की कसौटी

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की वास्तविक कसौटी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में आने वाला बदलाव है। महात्मा गांधी ने ग्राम स्वराज और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अंत्योदय के माध्यम से इसी भावना को व्यक्त किया। विकास का आकलन सबसे ऊंचे पायदान पर बैठे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि सबसे नीचे खड़े व्यक्ति की स्थिति से किया जाना चाहिए। गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई “जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी, सो नृप अवसि नरक अधिकारी” स्पष्ट करती है कि शासन और व्यवस्था की सार्थकता जनकल्याण में निहित है।

युवा विधि स्नातकों से सीएम के चार आग्रह

मुख्यमंत्री ने युवा विधि स्नातकों के सामने चार प्रमुख आग्रह रखे। पहला, वे अन्याय के सामने मूक दर्शक न बनें, बल्कि न्याय की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाएं। दूसरा, अपनी जड़ों और गांवों से जुड़े रहें तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन और परिवार से संबंधित छोटे विवादों के समाधान में योगदान दें। तीसरा,  नैतिक चरित्र और पेशेवर साख को सुरक्षित रखें तथा किसी भी अनुचित समझौते या शॉर्टकट से बचें। चौथा, नए कानूनों, न्यायिक निर्णयों और संशोधनों के प्रति स्वयं को लगातार अपडेट रखें और स्वाध्याय की आदत विकसित करें। सत्य बोलना, धर्म का आचरण करना और स्वाध्याय में आलस्य न करना किसी भी अधिवक्ता के लिए सबसे महत्वपूर्ण जीवन-मूल्य हैं।

140 करोड़ भारतीयों के विश्वास की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह अभिभावकों के वर्षों के त्याग, प्रार्थनाओं और परिश्रम के साकार होने का अवसर है। विद्यार्थियों की डिग्री के पीछे उनके अभिभावकों की अनगिनत जागी हुई रातें और कठिन परिस्थितियों में किया गया संघर्ष है। युवा स्नातक अपनी डिग्री को केवल शैक्षणिक योग्यता का प्रमाणपत्र न मानें, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास के प्रतीक के रूप में देखें। जब भी कोई मुकदमा कठिन लगे या किसी निर्णय का दायित्व भारी महसूस हो, तब भारत के संविधान को अपना मार्गदर्शक बनाएं। फैसला इतिहास सुनाएगा, लेकिन बहस आपको करनी है।

 

इस अवसर पर उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अमर पाल सिंह, विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मनीष सिंह, विश्वविद्यालय के कुलसचिव केशव कुमार व अन्य गण्यमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

सपा पर जमकर बरसे सीएम योगी, कहा- उन्होंने दिए माफिया, हमने दिए मेडिकल कॉलेज

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CM Yogi Speech: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह शिक्षा की घोषित दुश्मन है। शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा और शिक्षकों का अपमान उसकी राजनीति का आधार रहा है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के समय शिक्षण संस्थानों पर पेशेवर गुंडों का दबदबा था और युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ। इसके विपरीत, भाजपा सरकार ने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए काम किया है। मुख्यमंत्री ने शिक्षक एवं स्नातक मतदाताओं से अपील की कि वे इस चुनाव में परिवारवाद और वंशवाद को नकारते हुए योग्य और सक्षम प्रतिनिधि चुनें।

‘शिक्षक-स्नातक सम्मेलन’ में जनता को किया संबोधित

उत्तर  प्रदेश विधान परिषद के आगामी लखनऊ खंड स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर लखनऊ में  ‘शिक्षक-स्नातक सम्मेलन’ का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए एवं कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। यह सम्मेलन लखनऊ स्नातक क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह और लखनऊ शिक्षक क्षेत्र से प्रत्याशी उमेश द्विवेदी के समर्थन में आयोजित किया गया था। 

 

कार्यक्रम में पहुंचने पर क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, भाजपा प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल और दोनों प्रत्याशियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का  बुके भेंट कर भव्य स्वागत व अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र ,पुष्पगुच्छ भेंट किया गया और स्मृति चिह्न के रूप में भगवान श्रीराम की प्रतिमा भेंट की गई। मुख्यमंत्री ने लखनऊ खंड के मतदाता महासम्मेलन को संबोधित करते हुए सपा की नीतियों पर सवाल उठाए और शिक्षकों, युवाओं तथा अधिवक्ताओं के हित में सरकार की ओर से किए गए कार्यों का उल्लेख किया।

समाजवादी पार्टी शिक्षा की घोषित दुश्मन

मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा की व्यवस्था की उपेक्षा, शिक्षकों का अपमान, यहीं से समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनीति की थी।” उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के समय शिक्षण संस्थानों में पेशेवर गुंडे हावी हो जाते थे और शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उनके अनुसार, शिक्षा और युवा पिछली सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं थे।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की व्यवस्था कमजोर होने का असर केवल शिक्षकों और विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे समाज, प्रदेश और देश का भविष्य भी प्रभावित होता है। उन्होंने शिक्षकों के सम्मान, विद्यालयों की सुविधाओं और युवाओं के अवसरों को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया के मुकाबले वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट

मुख्यमंत्री ने सपा सरकार पर माफिया के प्रभाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा gs, “समाजवादी पार्टी ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ दिया, हमने ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ दिया, ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ दिया।”

 

उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में माफिया जमीनों पर कब्जा कर लेते थे और आम लोगों, शिक्षकों तथा सरकारी संपत्तियों की जमीनों को भी निशाना बनाया जाता था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था में सुधार के साथ विकास को प्राथमिकता दी है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ने का भी उल्लेख किया।

परिवारवाद और वंशवाद की विषबेल हटाइए

मुख्यमंत्री ने शिक्षक एवं स्नातक विधान परिषद चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह और उमेश द्विवेदी के समर्थन में मतदान की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के मतदाताओं को ऐसा प्रतिनिधि चुनना चाहिए, जो उनकी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठा सके और जिम्मेदारी के साथ काम करे।

 

उन्होंने कहा कि आपका प्रतिनिधि वह बनेगा जिसमें जज्बा हो और जिसमें सामर्थ्य हो। परिवारवाद और वंशवाद पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से इसे बढ़ावा देने वाली राजनीति को नकारने का आह्वान किया। उन्होंने दोनों प्रत्याशियों को शिक्षकों और स्नातकों की आवाज उठाने में सक्षम बताया।

बैलेट पेपर से चुनाव, न्याय के पक्ष में परिणाम देने की अपील

मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएलसी चुनाव “ईवीएम से नहीं, बैलेट पेपर से हो रहा है और परिणाम न्याय के पक्ष में देने का काम आपको करना है।” उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की प्रवृत्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह चुनाव उसका भी जवाब होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से सतर्क रहकर मतदान करने और अति-आत्मविश्वास से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनाव में प्रत्येक मत महत्वपूर्ण है और कार्यकर्ताओं को मतदाताओं तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए।

शिक्षकों को पांच लाख रुपए तक कैशलेस इलाज

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और स्ववित्तपोषित संस्थानों सहित विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों तथा उनके परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपए तक कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

 

उन्होंने कहा कि सरकारी और सहायता प्राप्त संस्थानों से जुड़े शिक्षकों, शिक्षामित्रों तथा अनुदेशकों के साथ किसी अनहोनी या दुर्घटना की स्थिति में परिवार को बीमा कवर के माध्यम से 40 लाख रुपए से लेकर 1.5 करोड़ रुपए तक की आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है। रसोइयों के लिए भी दो लाख रुपए का सुरक्षा बीमा कवर उपलब्ध कराने का उल्लेख किया।

स्कूलों में ड्रॉपआउट दर 20 से घटकर तीन प्रतिशत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने के लिए काम किया है। बेसिक शिक्षा में ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत अभियान के तहत स्कूलों में बेहतर कक्षाएं, बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, पेयजल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और कंप्यूटर कक्ष जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। 

 

मुख्यमंत्री के अनुसार, बेसिक शिक्षा में ड्रॉपआउट दर 20 प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत रह गई है, जबकि सैचुरेशन का स्तर 36 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत हो गया है। माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत राजकीय इंटर कॉलेजों, राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों, सहायता प्राप्त कॉलेजों और संस्कृत महाविद्यालयों के भवनों का निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण किया गया है। इन संस्थानों में प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, स्मार्ट क्लास और अटल टिंकरिंग लैब जैसी सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है।

 

मुख्यमंत्री ने अटल आवासीय विद्यालयों, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों और आश्रम पद्धति के विद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।

अधिवक्ताओं को पांच लाख रुपए तक स्वास्थ्य सुरक्षा

मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं के लिए किए गए प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि अधिवक्ता की मृत्यु होने पर उनके परिवार को मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाकर पांच लाख रुपए की गई है। पहले यह सहायता डेढ़ लाख रुपए थी और इसका लाभ 60 वर्ष से कम आयु के अधिवक्ताओं के मामलों में मिलता था। सरकार ने आयु सीमा को बढ़ाकर 70 वर्ष तक किया है।

 

उन्होंने बताया कि अधिवक्ताओं को पांच लाख रुपए तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों और अधिवक्ताओं सहित विभिन्न वर्गों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है।

9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी, एक लाख और को नियुक्ति की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र दिए हैं। चुनाव से पहले एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने की तैयारी है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का दावा करते हुए कहा कि युवाओं को योग्यता के आधार पर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

 

उन्होंने निजी क्षेत्र में निवेश के माध्यम से 65 लाख युवाओं को रोजगार मिलने और प्रदेश में स्टार्टअप की संख्या बढ़कर 24 हजार से अधिक होने का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में सुरक्षा और निवेश के बेहतर माहौल से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी ने स्नातक प्रत्य़ाशी अवनीश सिंह और शिक्षक प्रत्याशी उमेश के पक्ष में वोट की अपील की. उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत अभिनंदन किया।

 

योगी ने दिया सभी शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ

स्नातक प्रत्याशी इंजीनियर अवनीश सिंह ने कहा मुख्यमंत्री योगी ने सभी शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ दिया. प्रोजेक्ट अंलकार के माध्यम से माध्यमिक स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था को और उनके शिक्षकों कार्यों को और उनके इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृणीकरण करके माध्यमिक विद्यालयों की व्यवस्था को सुधारा है. आउटसोर्सिंग आयोग बनाकर के युवाओं को एक सुरक्षा प्रदान की है।

 

शिक्षक प्रत्याशी उमेश द्विवेदी ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने 2000 पहले के जो तदर्थ शिक्षक थे उनके सारे शिक्षकों को विनियमित करते हुए उनको वेतन देने का काम किया है. 2000 के बाद के भी लगभग 60 प्रतिशत शिक्षक वेतन आहारित कर रहे हैं 40 पर्सेंट बचे हैं उनके लिए फाइलें चल रही है. इस सरकार के पहले शिक्षक सम्मान नहीं था. शिक्षक वो हो गया था जो नकल कराए, शिक्षक वो हो गया था जो बच्चों की कॉपी लिखे, उनका कोई सम्मान नहीं रह गया था. लेकिन भाजपा ने शिक्षकों का जो गिरा हुआ सम्मान था उसको वापस किया. हमारे खिलाफ जो लोग खड़े हैं वो शिक्षक नहीं है वो मुनीम हैं।

 

कार्यक्रम में रहे मौजूद : सम्मेलन में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, मंत्री मनोज पांडे, दिनेश प्रताप सिंह, नितिन अग्रवाल, रजनी तिवारी, राकेश राठौर ‘गुरु’, सुरेश राही और सतीश चंद्र शर्मा, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल और संजय राय, प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह, प्रदेश महामंत्री उपेंद्र रावत, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, स्नातक प्रत्याशी इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह, शिक्षक प्रत्याशी उमेश द्विवेदी सहित पार्टी पदाधिकारी, शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में शिक्षक एवं स्नातक मतदाता मौजूद रहे।