सीएम युवा योजना से मिली नई उड़ान, अमेठी की रूपाली देवी बनीं आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की मिसाल

सीएम युवा योजना से मिली नई उड़ान, अमेठी की रूपाली देवी बनीं आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की मिसाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम-युवा) इसी संकल्प को साकार करने वाली एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। अमेठी जिले के जगापुर क्षेत्र की रहने वाली रूपाली देवी की सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर मिला आर्थिक सहयोग छोटे व्यवसायों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

ग्राम पंचायत से मिली जानकारी, खुला कारोबार विस्तार का रास्ता

रूपाली देवी बताती हैं कि उनके परिवार में कुल छह सदस्य हैं। परिवार लंबे समय से ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़ा था और इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा रखता था लेकिन सीमित संसाधनों और पूंजी की कमी के कारण कारोबार का विस्तार संभव नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान उन्हें ग्राम पंचायत के माध्यम से मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम-युवा) की जानकारी मिली। योजना के बारे में विस्तार से जानने के बाद उन्होंने आवेदन किया। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक औपचारिकताओं में लगभग दो से तीन महीने का समय लगा। इसके बाद जनवरी 2026 में बैंक के माध्यम से उन्हें 5 लाख रुपए का ऋण प्राप्त हुआ, जिसने उनके पारिवारिक व्यवसाय को नई दिशा देने का काम किया।

5 लाख रुपए के ऋण से मिला कारोबार को नया विस्तार

ऋण प्राप्त होने के बाद परिवार ने अपने ऑटोमोबाइल व्यवसाय को नए स्तर पर विकसित करने की योजना बनाई। प्राप्त धनराशि से आवश्यक उपकरण, मशीनें और ऑटो पार्ट्स की उपलब्धता सुनिश्चित की गई तथा उनके पारिवारिक व्यवसाय ‘परमजीत ऑटो पार्ट्स एवं ऑटो गैरेज’ को व्यवस्थित रूप से विकसित किया गया। वर्तमान में गैरेज का संचालन रूपाली देवी और उनके पति परमजीत द्वारा किया जा रहा है। यहां दोपहिया वाहनों की सर्विसिंग, मरम्मत और ऑटो पार्ट्स की बिक्री की जाती है। बेहतर सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के कारण क्षेत्र में उनकी पहचान लगातार मजबूत हुई है।

कुछ ही महीनों में कारोबार ने पकड़ी रफ्तार

रूपाली देवी बताती हैं कि ऋण मिलने के बाद कारोबार में तेजी से वृद्धि हुई। पहले जहां सीमित संसाधनों के कारण व्यवसाय का दायरा छोटा था, वहीं अब ग्राहकों की संख्या और काम दोनों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अब ‘परमजीत ऑटो पार्ट्स एवं ऑटो गैरेज’ का मासिक टर्नओवर लगभग 2 लाख रुपए तक पहुंच चुका है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और कारोबार को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी मिला है।

स्वरोजगार ने बढ़ाया आत्मविश्वास, परिवार को मिली नई पहचान

रूपाली देवी का कहना है कि सीएम-युवा योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता उनके परिवार के लिए किसी बड़े अवसर से कम नहीं थी। इस सहयोग ने न केवल कारोबार को विस्तार दिया, बल्कि परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर भी प्रदान किया। उनका मानना है कि यदि युवाओं और छोटे उद्यमियों को सही समय पर वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन मिले, तो वे अपने सपनों को आसानी से साकार कर सकते हैं। आज उनका परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन को मिल रही मजबूती

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार और अवसर सृजित करने वाला बनाना है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान इसी सोच को धरातल पर उतार रहा है। रूपाली देवी और उनका परिवार इस बात का उदाहरण हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे तो वे केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम भी बनती हैं।

सीएम-युवा योजना से खुल रहे स्वरोजगार के नए द्वार

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत युवाओं को बिना गारंटी ऋण, प्रशिक्षण और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना का उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। रूपाली देवी और उनके परिवार की यह सफलता कहानी बताती है कि मेहनत, संकल्प और सरकारी सहयोग मिल जाए तो आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है।

नेपाल-तिब्बत सीमा पर मंडराया बड़ा खतरा, 72 घंटे में टूट सकती है बैरियर लेक, फिर आ सकती है प्रलयंकारी बाढ़

नेपाल-तिब्बत सीमा पर मंडराया बड़ा खतरा, 72 घंटे में टूट सकती है बैरियर लेक, फिर आ सकती है प्रलयंकारी बाढ़

Nepal flood

Nepal Tibet border floods: नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब एक और प्रलयंकारी प्राकृतिक आपदा का खतरा मंडरा रहा है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने चेतावनी जारी की है कि सीमा के ऊपरी हिस्से में चोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम पर बनी एक 'बैरियर लेक' (प्राकृतिक बांध से बनी झील) अगले 72 घंटों में टूट सकती है। इस झील में 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी पहले से ही ओवरफ्लो हो रहा है और आने वाले दिनों में 30 लाख क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी आने की आशंका है, जिससे निचले इलाकों और राहत कार्यों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

 

हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ में 350 से ज्यादा लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने के बाद अब एक नई और बड़ी आपदा ने दस्तक दे दी है। चीनी अधिकारियों ने अलर्ट जारी करते हुए बताया कि हिमालयी सीमा के ऊपरी इलाके में स्थित एक अस्थिर 'बैरियर लेक' भारी दबाव के कारण अगले तीन दिनों में कभी भी फट सकती है। ALSO READ: Nepal Flash Flood : नेपाल बाढ़ में मची तबाही की पूरी कहानी, तस्वीरों में देखें सैलाब का खौफनाक मंजर

30 लाख क्यूबिक मीटर पानी का खतरा

चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के अनुसार, यह झील चोचेन खोला (Chhochen Khola) और पुरेपु सांगपो (Purepu Tsangpo) नदियों के संगम पर स्थित है। वर्तमान में झील में 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी मौजूद है और यह ओवरफ्लो हो रही है। मौसम की प्रतिकूल स्थिति के कारण अगले 72 घंटों में इसमें 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी समाने का अनुमान है। यदि झील का प्राकृतिक बांध टूटता है, तो नेपाल के निचले इलाकों में एक बार फिर 2025 जैसी भीषण तबाही मच सकती है। ALSO READ: Nepal flash flood : नेपाल में तबाही, अपनों की तलाश के बीच सद्गुरु जग्गी वासुदेव की आंखों से छलके आंसू

कहां है बैरियर लेक?

यह प्राकृतिक झील तिब्बत-नेपाल सीमा के ऊपरी हिस्से में चोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम पर स्थित है। यह स्थान चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में जिइरोंग (Gyirong) काउंटी के उत्तर-पूर्व में पड़ता है, जो नीचे की ओर नेपाल की सीमाओं और नदियों से जुड़ता है। हाल ही में हुए भारी भूस्खलन के कारण पहाड़ों से गिरी मिट्टी, चट्टानों और मलबे ने नदियों के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया, जिससे यह अस्थायी 'बैरियर लेक' बन गई। इस झील में पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है और यह ओवरफ्लो हो रही है।  ALSO READ: तिब्बत में टूटा ग्लेशियर का 'थूथन', नेपाल में हाहाकार, 30 फीट ऊंची प्रलयंकारी बाढ़ का खौफनाक सच

अब तक 350 से ज्यादा मौतें

सीमावर्ती इलाकों में हाल ही में हुए भूस्खलन और फ्लैश फ्लड ने पहले ही भीषण तबाही मचाई है। मरने वालों का आंकड़ा 350 से ज्यादा हो गया है, जबकि 1500 से ज्यादा अब भी लापता बताए जा  रहे हैं। तिब्बत की ओर से कम से कम 558 लोग लापता हैं, जबकि नेपाल सीमा की तरफ 100 चीनी नागरिकों समेत सैकड़ों लोग लापता हैं। इस आपदा में 30 से ज्यादा देशों के लोग लापता हैं। भारत के ही 300 लोग लापता हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार 21 लोगों को बचा लिया गया है। नेपाल में राहत-बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। भारत से भी नेपाल को राहत सामग्री पहुंचाई गई है। 

नेपाल में क्यों आई आपदा?

नेपाल और तिब्बत के इस सीमावर्ती क्षेत्र में आई प्रलयकारी आपदा कोई अचानक घटी अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह हिमालयी क्षेत्र के तेजी से बदलते और अस्थिर होते पर्यावरण का परिणाम है। ग्लोबल वॉर्मिंग और बढ़ते तापमान के कारण हिमालयी ग्लेशियरों का निकला हिस्सा (Glacier Snout) तेजी से कमजोर हो रहा है। ग्लेशियर के एक बड़े हिस्से के टूटने और अचानक गिरने से 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा कंपन पैदा हुआ, जिसने आसपास की पहाड़ियों को अस्थिर कर दिया और भारी भूस्खलन को जन्म दिया। अगस्त 2025 में भी अत्यधिक तापमान के कारण तिब्बत में एक ग्लेशियल झील फटने (GLOF) से भारी तबाही हुई थी, जिसमें 9 लोगों की जान गई थी और मुख्य पुल बह गए थे। यह मौजूदा आपदा भी उसी सिलसिले की एक कड़ी है।

Rahul Gandhi : राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना, सुभाष चंद्रा के NCLT मामले पर उठाए सवाल, बोले- देश में 2 सिस्टम

Rahul Gandhi : राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना, सुभाष चंद्रा के NCLT मामले पर उठाए सवाल, बोले- देश में 2 सिस्टम

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि देश में आम लोगों और चुनिंदा अरबपतियों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। राहुल गांधी ने किसानों, नौकरीपेशा लोगों और गरीब छात्रों की आर्थिक परेशानियों का जिक्र करते हुए सरकार पर चुनिंदा उद्योगपतियों के प्रति अलग रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

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राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि कोई किसान 50 हजार रुपये नहीं चुका पाता है तो उसकी जमीन नीलाम कर दी जाती है। वहीं, कोई वेतनभोगी व्यक्ति एक भी ईएमआई चूक जाए तो बैंक उसके घर पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि गरीब छात्रों के लिए शिक्षा ऋण हासिल करना भी मुश्किल है।

 

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इसके विपरीत चुनिंदा ‘दोस्तों’ के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति की तरह है और वे जितना चाहें पैसा निकाल सकते हैं तथा अपनी सुविधा के अनुसार उसे वापस कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना दी हैं—एक मुट्ठीभर अरबपतियों के लिए और दूसरी बाकी सभी लोगों के लिए।

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सुभाष चंद्रा के मामले में NCLT का बड़ा फैसला

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राहुल गांधी के बयान के बीच मीडिया कारोबारी और जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़ा व्यक्तिगत दिवाला मामला भी चर्चा में है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में करीब ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत कर्ज दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ के भुगतान वाली पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि स्वीकृत दावों की तुलना में कर्जदाताओं को करीब 0.03 प्रतिशत की वसूली होगी।

 

हालांकि, इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये दावे सुभाष चंद्रा द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज नहीं थे। चंद्रा के अनुसार, उन्होंने विभिन्न कंपनियों के कर्ज के लिए पर्सनल गारंटर के तौर पर गारंटी दी थी। उनके मुताबिक, जिन संस्थाओं के कर्ज की उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी, वे करीब ₹45,000 करोड़ की बकाया राशि में से लगभग ₹43,000 करोड़ का भुगतान कर चुकी हैं।

 

80.81 प्रतिशत वोट से पास हुआ था प्लान

NCLT के सामने पेश की गई पुनर्भुगतान योजना को नवंबर 2024 में हुई लेनदारों की बैठक में 80.814 प्रतिशत वोटिंग शेयर का समर्थन मिला था। यह IBC के तहत जरूरी तीन-चौथाई सीमा से अधिक था। कुछ प्रमुख कर्जदाताओं ने योजना का विरोध किया था, जिनमें LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और Union Bank शामिल थे।

 

मामले में मूल दो सदस्यीय NCLT पीठ के बीच मतभेद के बाद तीसरे सदस्य के रूप में Nilesh Sharma को शामिल किया गया। उन्होंने योजना को मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया। NCLT ने कहा कि विरोध करने वाले कर्जदाताओं के पास 20 प्रतिशत से कम वोटिंग शेयर था और व्यक्तिगत संपत्ति के मूल्यांकन को देखते हुए योजना को खारिज करने पर बेहतर वसूली की संभावना नहीं दिखती थी।

22 हजार करोड़ के दावे पर सिर्फ 6.5 करोड़ का भुगतान

NCLT के फैसले के अनुसार, स्वीकृत योजना में ₹22,006.57 करोड़ के दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ का भुगतान होगा। इस आधार पर कर्जदाताओं को करीब 99.97 प्रतिशत का ‘हेयरकट’ स्वीकार करना पड़ेगा। आसान भाषा में कहें तो प्रत्येक ₹100 के दावे पर करीब तीन पैसे की वसूली होगी।

 

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि योजना मंजूर होने के बाद वह IBC की धारा 115 के तहत सभी संबंधित कर्जदाताओं पर बाध्यकारी होगी, चाहे उन्होंने योजना के पक्ष में मतदान किया हो या विरोध में।

 

राहुल गांधी के बयान से फिर गरम हुई बहस

सुभाष चंद्रा मामले में NCLT के फैसले और राहुल गांधी के बयान के बाद बैंक कर्ज, कॉरपोरेट देनदारी, व्यक्तिगत गारंटी और दिवाला समाधान प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। हालांकि, सुभाष चंद्रा का मामला एक व्यक्तिगत गारंटर की दिवाला समाधान प्रक्रिया से जुड़ा है और इसे सीधे तौर पर उनके द्वारा स्वयं लिए गए ₹22,006 करोड़ के कर्ज के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

Nepal Flash Flood : नेपाल बाढ़ में मची तबाही की पूरी कहानी, तस्वीरों में देखें सैलाब का खौफनाक मंजर

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और मलबे के सैलाब ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर/बर्फ-चट्टान के खिसकने से आई फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। सड़कों, घरों और बुनियादी ढांचे पर बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है।

 

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सैलाब ने मचाई भारी तबाही

प्रारंभिक सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक लेंडे नदी में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से मलबे वाली बाढ़ आई, जिसने नदी के आसपास बड़े क्षेत्र को प्रभावित किया। बाढ़ और मलबे के तेज बहाव से नेपाल की करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

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चीन के तिब्बत में भी तबाही

तिब्बत के गिरोंग काउंटी में बाढ़ ने गिरोंग बंदरगाह को प्रभावित किया। ड्रोन तस्वीरों में कई इमारतें मलबे में दबी दिखाई दीं। शिगात्से क्षेत्र में बाढ़ के कारण सड़कें, संचार व्यवस्था और बिजली की लाइनें प्रभावित हुईं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में मुश्किलें बढ़ीं। इतनी बड़ी तबाही की आशंका की जानकारी ना नेपाल और ना ही चीन की तरफ से दी जा सकी थी। नेपाल और चीन के बीच मौसम संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था होने के बावजूद, इस हालिया घटना के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं मिली थी। नेपाल के जल और मौसम विज्ञान विभाग ने यह जानकारी दी। हालांकि नेपाल में मौजूद चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया पर फैल रही उन वायरल ख़बरों का खंडन किया जिनमें दावा किया जा रहा है कि चीन ने नेपाल को हादसे के पारे में पूर्व चेतावनी नहीं दी जिसकी वजह से नेपाल में इतनी तबाही मची।  

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1500 से ज्यादा लोग लापता

तबाही के बाद 1500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें करीब 288 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। लापता भारतीयों में बड़ी संख्या कैलास-मानसरोवर तीर्थयात्रियों की बताई जा रही है। परिजनों में अपनों की सुरक्षित वापसी को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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भारत में भी बढ़ा बाढ़ का खतरा

नेपाल में आई बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में भी बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। दोनों राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है।  संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए भारत में एनडीआरएफ की 20 टीमों को तैनात किया गया है। प्रभावित क्षेत्रों पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

 

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नेपाल में आई इस भयावह आपदा ने 2013 में उत्तराखंड की केदारनाथ घाटी में आई विनाशकारी बाढ़ की यादें ताजा कर दी हैं।

Nepal flash flood : नेपाल में तबाही, अपनों की तलाश के बीच सद्गुरु जग्गी वासुदेव की आंखों से छलके आंसू

Nepal flash flood : नेपाल में तबाही, अपनों की तलाश के बीच सद्गुरु जग्गी वासुदेव की आंखों से छलके आंसू

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नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आए भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़ी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए ईशा फाउंडेशन के 77 यात्री और स्वयंसेवक लापता बताए जा रहे हैं। अपनों की तलाश और उनकी सुरक्षा को लेकर ईशा फाउंडेशन से जुड़े लोगों में चिंता का माहौल है।

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इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद सद्गुरु जग्गी वासुदेव भी बेहद भावुक नजर आए। यात्रा दल के सदस्यों के लापता होने की खबर ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया है। अपनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद के बीच उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

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भीषण जलप्रलय से मची तबाही

 

नेपाल और तिब्बत की सीमा से लगे इलाके में अचानक आई बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में भारी नुकसान की खबर है। तेज पानी के बहाव ने रास्तों और संपर्क व्यवस्था को प्रभावित किया है, जिससे राहत और बचाव कार्य में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए यात्रियों और स्वयंसेवकों का पता लगाने के लिए बचाव एवं राहत प्रयास जारी हैं। लापता लोगों के परिवार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं।

 

सद्गुरु ने जताई गहरी चिंता

यात्रा दल के सदस्यों के लापता होने की खबर के बाद सद्गुरु जग्गी वासुदेव भावुक हो गए। उन्होंने इस मुश्किल घड़ी में लापता यात्रियों और स्वयंसेवकों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। फिलहाल सभी की निगाहें राहत और बचाव अभियान पर टिकी हैं। उम्मीद है कि अभियान के जरिए लापता यात्रियों और स्वयंसेवकों का जल्द पता लगाया जा सकेगा।

नेपाल में बाढ़ से तबाही तो दिल्ली में H1N1 का कहर, मामलों की संख्या 2,600 के पार

नेपाल में बाढ़ से तबाही तो दिल्ली में H1N1 का कहर, मामलों की संख्या 2,600 के पार

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भारत के पड़ोसी देश नेपाल में जहां बाढ़ से तबाही मची है, वहीं देश की राजधानी में H1N1 के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। दिल्ली में H1N1 मामलों की संख्या 2,600 के पार पहुंच गई है। पिछले 24 घंटे में ही 166 नए मामले सामने आए हैं। राजधानी में बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली सरकार ने अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। साथ ही इन्फ्लुएंजा और सांस से जुड़ी बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं में किए गए इंतजामों का जायजा लिया जा रहा है।

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राजधानी में H1N1 मामलों में बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब सांस संबंधी बीमारियों के मामले भी बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अस्पतालों की तैयारियों का आकलन किया जा रहा है, ताकि मामलों में और वृद्धि होने की स्थिति में मरीजों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

 

स्वास्थ्य मंत्री ने इंदिरा गांधी अस्पताल का किया दौरा

 

बढ़ते H1N1 मामलों के बीच दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने इंदिरा गांधी अस्पताल का दौरा कर वहां की तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में इन्फ्लुएंजा और सांस संबंधी बीमारी के मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की तैयारियों, मरीजों के प्रबंधन और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता का जायजा लिया गया।

यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब दिल्ली में लगातार H1N1 के नए मामले सामने आ रहे हैं। सरकार राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में स्थिति की निगरानी कर रही है और बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य केंद्रों की तैयारियों की भी समीक्षा की जा रही है।

 

क्या है H1N1?

H1N1 एक प्रकार का इन्फ्लुएंजा वायरस है, जो फ्लू और सांस संबंधी बीमारी का कारण बन सकता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के जरिए यह संक्रमण दूसरे व्यक्ति तक फैल सकता है।

 इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, थकान और कमजोरी शामिल हैं। कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी या अन्य जटिलताएं भी हो सकती हैं। बीमारी की गंभीरता हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है। अधिकांश लोग इन्फ्लुएंजा से ठीक हो जाते हैं, लेकिन गंभीर लक्षण होने पर कुछ मरीजों को चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता पड़ सकती है।

 

संक्रमण से बचाव के लिए बरतें सावधानी

 

H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए कुछ सामान्य सावधानियां मददगार हो सकती हैं। नियमित रूप से हाथ साफ रखना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढंकना और बीमार लोगों के संपर्क से बचना जरूरी है। जिन लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें, उन्हें संक्रमण दूसरों तक फैलने से रोकने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। लक्षण बिगड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

 

दिल्ली में लगातार निगरानी

24 घंटे में सामने आए 166 नए मामलों के साथ दिल्ली में H1N1 के कुल मामले 2,600 से अधिक हो गए हैं। सरकार स्थिति पर नजर रखते हुए अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा कर रही है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह का इंदिरा गांधी अस्पताल का दौरा भी इसी तैयारियों का हिस्सा था। हालांकि मामलों में बढ़ोतरी हुई है, स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने और जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है।

कांवड़ यात्रा पर दिग्विजय सिंह के बयान से गरमाई सियासत, भाजपा ने बताया सनातन का अपमान, माफी की मांग

कांवड़ यात्रा पर दिग्विजय सिंह के बयान से गरमाई सियासत, भाजपा ने बताया सनातन का अपमान, माफी की मांग

भोपाल। अपने बयानों के जरिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाले मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर कांवड़ यात्रा को लेकर ऐसा बयान दिया है जिस पर प्रदेश की सियासत गर्मा गई है। भोपाल में शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों के आंदोलन में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सरकार पर युवाओं को रोजगार देने के बजाय कांवड़ यात्रा में भेजने का आरोप लगाया था। वहीं दिग्विजय सिंह के बयान को भाजपा ने सनातन आस्था से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है।


दिग्विजय सिंह ने क्या कहा?- भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग को लेकर चल रहे अभ्यर्थियों के धरने में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सरकार पर युवाओं के रोजगार के मुद्दे को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को नौकरी देना नहीं चाहती, बल्कि उन्हें कांवड़ यात्रा में ले जाना चाहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर युवाओं को रोजगार मिल जाएगा तो कांवड़ यात्रा में कौन जाएगा। इसके साथ दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांवड़ यात्रा में क्या-क्या होता है, उनको सब पता है। 

 

दरअसल भोपाल के नीलम पार्क में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन चल रहा है। अभ्यर्थी रिक्त पदों को भर्ती में शामिल करने, पदों की संख्या बढ़ाने और दूसरी काउंसलिंग कराने की मांग कर रहे हैं। इसी आंदोलन के दौरान दिग्विजय सिंह ने रोजगार के मुद्दे को कांवड़ यात्रा से जोड़ते हुए सरकार पर हमला बोला ।

 

भाजपा का दिग्विजय पर पलटवार-दिग्विजय सिंह कांवड़ यात्रा को लेकर दिए बयान पर भाजपा ने सनातन का अपमान बताया  है। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांवड़ यात्रा किसी राजनीतिक दल की यात्रा नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म और भगवान शिव के प्रति करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का पर्व है। उन्होंने दिग्विजय पर सनातन धर्म को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि पढ़े लिखे युवा गंगा, सरयू, नर्मदा मैय्या से कांवड़ लेकर भगवान शिव को जल चढ़ाने जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे युवाओं को लेकर इस तरह की टिप्पणी क्यों की जा रही है। भाजपा विधायक ने यह भी कहा कि हर-हर महादेव का जयघोष भारतीय सेना की विभिन्न रेजिमेंटों में भी किया जाता है।

 

रामेश्वर शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह को राजनीतिक विरोध करना है तो भाजपा से करे, लेकिन सनातन धर्म और श्रद्धालुओं की आस्था को निशाना नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार हिंदू धर्म को टारगेट कर रही है।

 

 

चीनी कैमरे ने रिकॉर्ड की Nepal की तबाही का भयावह दृश्‍य, जिस जगह टूटा था ग्लेशियर, वहां पहुंचा चीनी हेलीकॉप्टर

चीनी कैमरे ने रिकॉर्ड की Nepal की तबाही का भयावह दृश्‍य, जिस जगह टूटा था ग्लेशियर, वहां पहुंचा चीनी हेलीकॉप्टर

Chinese helicopter

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के डरावने दृश्‍य पूरी दुनिया देख रही है, सोशल मीडिया में यह दृश्‍य चल रहे हैं। दृश्‍य देखकर हर किसी की रूह कांप रही है। ऐसे में एक चीनी हेलीकॉप्‍टर का रिकॉर्ड किया गया दृश्‍य भी सामने आया है।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने पूरे दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। इस बाढ़ की वजह से लाखों घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं और अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर करीब 162 हो चुकी है। इसके अलावा सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें कई विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। बुधवार सुबह अचानक आई इस बाढ़ ने भोटेकोशी नदी के आसपास बसे रसुवा और नुवाकोट जिलों में भारी तबाही मचाई। सड़कें, पुल, घर और बिजली परियोजनाएं सब कुछ पानी की तेज धार में बह गए।
 
इतनी बड़ी तबाही देखकर हर किसी के मन में एक ही सवाल उठ रहा था कि आखिर नेपाल में इतना खौफनाक हादसा किस वजह से हुआ? इसी सवाल का जवाब ढूंढते हुए चीन का एक हेलीकॉप्टर उस जगह पहुंचा, जहां से इस बाढ़ की शुरुआत हुई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, तिब्बत क्षेत्र में ऊंचाई पर बर्फ खिसकने और एक ग्लेशियर के अचानक टूटने से यह पानी नीचे की ओर बहा, जिसने भोटेकोशी नदी में इतनी बड़ी बाढ़ ला दी। चीनी हेलीकॉप्टर द्वारा लिए गए एरियल व्यू का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
 

वीडियो में क्या नजर आया?
सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा वीडियो शेयर किया है, जिसमें साफ लिखा है कि चीन का हेलीकॉप्टर उसी जगह पहुंचा जहां ग्लेशियर टूटा था और जहां से निकले पानी ने नेपाल में भारी तबाही मचाई। वीडियो में ऊंचे पहाड़ों के बीच बर्फ से ढकी चट्टानें और उनके बीच से तेजी से बहता हुआ पानी साफ नजर आ रहा है। कुछ हिस्सों में बर्फ की एक बड़ी सुरंग भी दिखाई देती है, जिसके बारे में वीडियो में बताया गया है कि यह पानी बर्फ के नीचे से होते हुए करीब तीन मील दूर तक बनी एक झील तक जाता है। वीडियो में यह भी समझाया गया है कि पानी का दबाव बढ़ने पर बर्फ ऊपर उठ जाती है और वह पानी पहाड़ के नीचे की तरफ बहने लगता है। बताया गया है कि यह झील करीब 36 घंटों में पूरी तरह खाली हो जाती है और इतनी तेज रफ्तार से पानी निकलता है कि वह अपने साथ ग्लेशियर के अंदर से बर्फ के बड़े-बड़े टुकड़े भी बहा ले जाता है। यही पानी आगे चलकर भोटेकोशी नदी में मिला और नेपाल के कई इलाकों में तबाही की वजह बना।

तिब्बत में टूटा ग्लेशियर का ‘थूथन’, नेपाल में हाहाकार, 30 फीट ऊंची प्रलयंकारी बाढ़ का खौफनाक सच

तिब्बत में टूटा ग्लेशियर का 'थूथन', नेपाल में हाहाकार, 30 फीट ऊंची  प्रलयंकारी बाढ़ का खौफनाक सच

Tibet Glacier Collapse

Tibet Glacier Collapse: हाल ही में नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई प्रलयंकारी बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में मंडराते गंभीर पर्यावरणीय और भू-वैज्ञानिक खतरों को उजागर किया है। प्लैनेट लैब्स (Planet Labs) की उपग्रह छवियों और वैश्विक भू-विज्ञानियों (Geologists) के विश्लेषण के अनुसार, इस तबाही का मुख्य कारण ग्लेशियर के निचले हिस्से (Glacier Snout) का ढहना, तीव्र बर्फ का पिघलना और संभावित भूकंपीय हलचल का एक खतरनाक परिणाम है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि यह भूकंप नहीं बल्कि ग्लेशियर के ढहने से पैदा हुआ कंपन था, जिसकी तीव्रता 5.2 थी। हिमस्खलन ने ही भूकंप जैसा कंपन पैदा किया था।

नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई हालिया तबाही ने पूरे दक्षिण एशिया में पर्यावरण और भू-वैज्ञानिक सुरक्षा पर गहरा संकट पैदा कर दिया है। वैज्ञानिक रिपोर्ट बताती है कि कैसे 5,200 मीटर की ऊंचाई पर घटी एक घटना ने महज 30 मिनट के भीतर नदियों का जलस्तर 30 फीट (9 मीटर) तक बढ़ा दिया। ALSO READ: नेपाल त्रासदी में मानवता का 'घिनौना चेहरा', मदद की बजाए मची लूटपाट, सिलेंडर लेकर भागे लोग

घटना का मुख्य वैज्ञानिक कारण : 'बर्फ-चट्टान हिमस्खलन' (Ice-Rock Avalanche)

सिक्किम यूनिवर्सिटी के भू-विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. विक्रम गुप्ता और कैलगरी विश्वविद्यालय के पृथ्वी विज्ञानी डैन शूगर के उपग्रह इमेजरी विश्लेषण के अनुसार:

  • ग्लेशियर स्नाउट का ढहना: लगभग 5,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियर का अग्रभाग (Snout) टूटकर लगभग 1,200 मीटर नीचे घाटी के फर्श (Valley Floor) पर गिर गया।
  • विशाल मलबे का वेग: इस हिमस्खलन में केवल बर्फ ही नहीं, बल्कि सैकड़ों टन भारी चट्टानें, गाद और तलछट (Sediment) शामिल थे। इतने विशाल द्रव्यमान के 1.2 किलोमीटर की ऊंचाई से गिरने से उत्पन्न गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) ने घाटी के जल स्रोतों में एक अप्रत्याशित शॉकवेव पैदा की।

24 घंटे में तापमान वृद्धि और त्वरित पिघलाव (Thermal Forcing)

डैन शूगर के अनुसार, आपदा से 24 घंटे पहले की प्लैनेट लैब्स की तस्वीरों की तुलना करने पर यह स्पष्ट हुआ कि घाटी के जो ग्लेशियर कल तक बर्फ से ढके (Snow-covered) थे, वे अचानक 'बेयर आइस' (Bare Ice) यानी बिना बर्फ की नग्न परतों में बदल गए। ALSO READ: Nepal Flash Flood : बाढ़ ने नेपाल में मचाई तबाही, खौफनाक Photos देख खड़े हो जाएंगे रोंगटे

  • अत्यधिक थर्मल मेल्टिंग : यह दर्शाता है कि क्षेत्र में अचानक तापमान में असामान्य वृद्धि हुई, जिसने ग्लेशियर के ऊपरी हिस्से को तेजी से पिघलाया।
  • सब-ग्लेशियर वॉटर प्रेशर : पिघला हुआ पानी ग्लेशियर के निचले हिस्सों में रिसकर जमा हो गया, जिसने बर्फ और चट्टानों के बीच के घर्षण (Friction) को कम कर दिया और स्नाउट के अचानक टूटने का कारण बना।

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भूकंपीय कंपन ने पहले से ही असंतुलित और अत्यधिक पिघलाव का सामना कर रहे ग्लेशियर की संरचनात्मक स्थिरता (Structural Integrity) को तुरंत नष्ट कर दिया।

Tibet Glacier Collapse

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क्या 'हिंदू कुश हिमालय' में विनाश का अलार्म बज चुका है?

संयुक्त राष्ट्र (UN) और ICIMOD (इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट) की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने पिछले 30 वर्षों में अपनी एक-तिहाई बर्फ खो दी है। पिछले दशक में यहाँ ग्लेशियर 65% तेजी से पिघले हैं

यह घटना स्पष्ट संकेत देती है कि ग्लोबल वार्मिंग, अनियंत्रित निर्माण और जलवायु परिवर्तन के कारण अब हिमालयी क्षेत्रों में GLOF (Glacial Lake Outburst Flood), बर्फ-चट्टान हिमस्खलन और अचानक आने वाली प्रलयंकारी बाढ़ का खतरा खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है।

इंदौर में ABVP कार्यकर्ताओं का कलेक्टर कार्यालय में हंगामा, बैरिकेड तोड़ अंदर घुसे, पुलिस के साथ जमकर झूमा-झटकी

इंदौर में ABVP कार्यकर्ताओं का कलेक्टर कार्यालय में हंगामा, बैरिकेड तोड़ अंदर घुसे, पुलिस के साथ जमकर झूमा-झटकी

ABVP

इंदौर में गुरुवार को ABVP कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय में जमकर हंगामा किया। कई छात्र बैरिकेड तोडकर अंदर घुस गए और जब पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो उनके साथ भी हाथापाई और झूमा-झटकी हुई। छात्रों ने इंदौर कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। छात्रों ने यह विरोध कॉलेजों में पसरी अव्‍यवस्‍थाओं को दुरुस्‍त करने के लिए किया।

दरअसल, कार्यकर्ता अपनी मांगों का ज्ञापन कलेक्टर शिवम वर्मा को सौंपने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय के बाहर लगे बैरिकेड तोड़ दिए और परिसर में प्रवेश कर गए। इसके बाद कार्यालय के गेट को भी तोड़ने की कोशिश की गई। मौके पर तैनात सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। स्थिति को देखते हुए कलेक्टर कार्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।

कॉलेजों में स्‍थिति खराब : प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं ने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों और शासकीय महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को कई बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई करनी पड़ रही है। उन्होंने शासन से इन संस्थानों में स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधायुक्त शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।

स्‍टूडेंट को नहीं मिल रहीं बुनियादी सुविधाएं : ABVP का आरोप है कि कई शासकीय महाविद्यालयों में स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त और साफ शौचालय, व्यवस्थित कक्षाएं, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और खेल सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। बिजली और प्रकाश व्यवस्था के साथ छात्राओं के लिए जरूरी सुविधाओं, इंटरनेट, पार्किंग, सुरक्षा और प्राथमिक उपचार जैसी व्यवस्थाओं को लेकर भी संगठन ने सवाल उठाए।

कार्यकर्ताओं ने बताया कि शिक्षा केवल भवन और कक्षाओं तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध कराना शासन और महाविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए बार-बार परेशान होना पड़े, यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है।