कानपुर के नत्थूपुरवा गांव में गिरा ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट, दो पायलटों की मौत

कानपुर के नत्थूपुरवा गांव में गिरा ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट, दो पायलटों की मौत

Kanpur plane crash

Kanpur plane crash: उत्तर प्रदेश के कानपुर में गुरुवार दोपहर एक बड़ा दर्दनाक हादसा हो गया। कानपुर कैंट क्षेत्र से उड़ान भरने वाला एक 'ट्विन इंजन' ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट गंगा बैराज के पास कटरी क्षेत्र स्थित नत्थूपुरवा गांव में दुर्घटनाग्रस्त होकर खेत में गिर गया। इस भयानक हादसे में विमान उड़ा रहे दोनों पायलटों की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि एयरक्राफ्ट में सवार दोनों पायलटों की जान चली गई।

धमाके के साथ खेत में गिरा विमान

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विमान ने सुबह करीब 11:20 बजे कानपुर कैंट क्षेत्र से अपनी रूटीन ट्रेनिंग उड़ान भरी थी। दोपहर के समय नत्थूपुरवा गांव के पास अचानक विमान अनियंत्रित होकर आसमान से नीचे की ओर आया और तेज धमाके के साथ खेत में क्रैश हो गया। जोरदार आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण सन्न रह गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

मृतक पायलटों की हुई पहचान

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल और स्थानीय पुलिस-प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। विमान से दोनों पायलटों को बाहर निकाला गया। पुलिस कमिश्नर लाल ने दो मौतों की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले पायलटों की पहचान अभिषेक पुजारी (कर्नाटक) और सुमित भाटिया (गुजरात) के रूप में हुई है। दुर्घटना के बाद घायल अवस्था में पायलटों को इलाज के लिए हैलट अस्पताल भी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

2023 में गर्ग एविएशन में शामिल हुआ था एयरक्राफ्ट

पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह 4-सीटर एयरक्राफ्ट 'टेक्नम' कंपनी का था, जिसे वर्ष 2023 में गर्ग एविएशन द्वारा पायलटों की ट्रेनिंग के लिए शामिल किया गया था। हालांकि हादसे के शुरुआती कारणों का अभी पता नहीं चल सका है कि विमान किसी तकनीकी खराबी की वजह से क्रैश हुआ या मौसम संबंधी समस्या के कारण। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को दे दी गई है। डीजीसीए की विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंचकर हादसे के कारणों की गहनता से जांच करेगी।

सिंहस्थ से पहले देश में निकलेगी एकात्म यात्रा, बोले सीएम डॉ. मोहन यादव, सनातन संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प

सिंहस्थ से पहले देश में निकलेगी एकात्म यात्रा, बोले सीएम डॉ. मोहन यादव, सनातन संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को ओंकारेश्वर स्थित 'एकात्म धाम' में भव्य 'पञ्चायतन मंदिर' के निर्माण का पूजा-अर्चन कर शिलान्यास किया। इस दौरान संन्यास परंपरा के प्रतिनिधि,षड्दर्शन संत मंडल के संत और विशिष्ट अतिथि मौजूद थे। इन सभी की उपस्थिति में 45 पवित्र शिलाओं का पूजन कर मंदिर निर्माण का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ओंकारेश्वर धाम में आज पञ्चायतन मंदिर के शिला पूजन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। यह वही पावन भूमि है, जहां भगवान शंकराचार्य जी महाराज ने शिष्यत्व ग्रहण कर सनातन चेतना और संस्कृति के प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया था।
 
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एकात्म धाम में भव्य पञ्चायतन मंदिर का शिलान्यास हमारे लिए सौभाग्य और गौरव का विषय है। सिंहस्थ से पहले ओंकारेश्वर में अनेक विकास कार्य पूर्ण किए जाएंगे, जिनमें पञ्चायतन मंदिर के साथ ही घाटों का निर्माण कार्य भी शामिल है। मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों के विकास और उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत न सिर्फ विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है, बल्कि विश्व भी भारत के गौरव और वैभव का साक्षी बन रहा है।
 
चेतना और सांस्कृतिक वैभव का पुनर्जागरण-सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य धाम जिस तरह सनातन संस्कृति के गौरव को साकार कर रहा है, उसी प्रकार ओंकारेश्वर के एकात्म धाम में आदि गुरु शंकराचार्य जी महाराज की पञ्चायतन पूजन परंपरा 'अनेकता में एकता' का दिव्य संदेश देती है। इसी भाव और परंपरा को साकार रूप प्रदान करते हुए आज हमने भव्य पञ्चायतन मंदिर का शिलान्यास किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि भारत की सनातन एकात्म चेतना और सांस्कृतिक वैभव का पुनर्जागरण है।
 
विश्व की आध्यात्मिक धरोहर-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ से पहले हम एकात्म यात्रा का आयोजन करने जा रहे हैं। यह यात्रा पूरे देश से होकर उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में आकर पूर्ण होगी। मध्यप्रदेश की धरती पर स्थित बाबा श्री महाकालेश्वर और भगवान ओंकारेश्वर, दोनों ज्योतिर्लिंग हमारी आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने वाले दिव्य केंद्र हैं। ये दोनों देवस्थान केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत और विश्व की आध्यात्मिक धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि एकात्म यात्रा के माध्यम से हम इसी सनातन चेतना, आध्यात्मिक एकता और सांस्कृतिक विरासत के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प ले रहे हैं।
 

इंदौर में कांग्रेस ने लोन पर शक्कर और पनीर बांटा, सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन- यज्ञ, महंगाई पर कई जगह प्रदर्शन

इंदौर में कांग्रेस ने लोन पर शक्कर और पनीर बांटा, सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन- यज्ञ, महंगाई पर कई जगह प्रदर्शन

Indore Congress

देशभर में बढ़ती महंगाई, शक्‍कर, पेट्रोल और गैस के दाम के विरोध में गुरुवार को इंदौर कांग्रेस सरकार के खिलाफ सक्रिय हो गई। बता दें कि महंगाई को लेकर आम लोगों में काफी नाराजगी है, हर चीज कई गुना महंगी हो गई है। ऐसे में कांग्रेस ने पेट्रोल, एथेनॉल और बिजली के दामों को भी मुद्दा बनाया और कई जगह विरोध प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही पनीर और शक्‍कर लोन पर बांटकर प्रतीकात्‍मक तौर पर सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।

शहर के 24 ब्लॉक में प्रदर्शन : इंदौर में कांग्रेस कार्यकर्ता राजवाड़ा और मंगल नगर पेट्रोल पंप समेत शहर के 24 ब्लॉक में प्रदर्शन कर रहे हैं। कार्यकर्ता शक्कर की बढ़ती कीमत, पेट्रोल-गैस के दाम और बिजली की दरों को लेकर विरोध जता रहे हैं। आंदोलन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर किया जा रहा है। राजवाड़ा पर कार्यकर्ताओं ने आम जनता को शकर बांटकर विरोध जताया। नेताओं का कहना था कि शकर की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आने वाले त्योहारों पर पड़ेगा।

शक्कर और पनीर बांटकर विरोध : राजवाड़ा पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शक्कर और पनीर बांटकर विरोध जताया। कार्यकर्ताओं ने इसे आम लोगों की बढ़ती महंगाई का प्रतीक बताया। कांग्रेस का कहना है कि शक्कर के बढ़ते दाम का असर त्योहारों के दौरान परिवारों के बजट पर पड़ेगा।

त्‍योहारों पर घरों में सीधा असर : शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने दावा किया कि शक्कर के दाम में 30 से 35 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के बाद गणेश चतुर्थी, श्राद्ध पक्ष, नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहार आने हैं। ऐसे में महंगी शक्कर का सीधा असर आम परिवारों की रसोई पर पड़ेगा।

पेट्रोल, एथेनॉल और बिजली भी बनाया मुद्दा : कांग्रेस ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण और बिजली की बढ़ी दरों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। पार्टी का आरोप है कि एथेनॉल मिश्रण से वाहनों का माइलेज प्रभावित होता है और वाहन चालकों का खर्च बढ़ता है। वहीं बिजली की बढ़ी दरों और घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों को लेकर कांग्रेस का कहना है कि इससे आम परिवारों पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण को नई उड़ान, 3.09 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी

उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण को नई उड़ान, 3.09 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी

Uttarakhand Women Empowerment: उत्तराखंड में मातृशक्ति को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ राज्य की महिलाओं को मिल रहा है। सरकार का मुख्य ध्यान महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण और रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराने पर है।

सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण से सशक्त होती महिलाएं

राज्य सरकार ने महिलाओं को प्रशासनिक और सरकारी सेवाओं में उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण का प्रावधान किया है। इस ऐतिहासिक फैसले से उत्तराखंड की बेटियों और महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों के नए द्वार खुले हैं, जिससे वे राज्य के विकास में बराबरी की भागीदार बन रही हैं।
 

3 लाख 9 हजार से अधिक महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी'

धरातल पर योजनाओं के सफल क्रियान्वयन का सबसे बड़ा उदाहरण 'लखपति दीदी' योजना है। उत्तराखंड में इस अभियान को अत्यधिक सफलता मिली है। अब तक 3,09,000 से अधिक महिलाएं अपनी वार्षिक आय को एक लाख रुपये से अधिक बढ़ाकर 'लखपति दीदी' के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय स्वरोजगार के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होकर अपने परिवारों की रीढ़ बन रही हैं।

विशेष योजनाओं से मिल रहा संबल

मातृशक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य में कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री सक्षम बहना उत्सव योजना के जरिए स्थानीय महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को बाजार और बिक्री के बेहतरीन अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नवजात बालिकाओं और माताओं के स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह योजना प्रभावी रूप से कार्य कर रही है।

नेपाल त्रासदी में मध्यप्रदेश के कई लोगों के फंसे होने की आंशका, दिल्ली में बनाया गया कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन नंबर जारी

नेपाल त्रासदी में मध्यप्रदेश के कई लोगों के फंसे होने की आंशका, दिल्ली में बनाया गया कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन नंबर जारी

nepal flood

भोपाल। नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित उत्तरी रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आए भयंकर सैलाब और लैंडस्लाइड में 1500 से अधिक लोग लापता है। वहीं इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय भी लापता है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर कई तीर्थ यात्रियों के लापता होने की जानकारी भी सामने आ रही है। इस बीच मध्यप्रदेश के कई लोगों के भी फंसे होने की जानकारी सामने आ ऱही है।
 
मध्यप्रदेश सरकार ने नेपाल में आई आपदा के बीच मध्यप्रदेश वासियों की मदद के लिए नई दिल्ली में कंट्रोल रूम स्थापित किया है। इस कंट्रोल रूम के माध्यम से प्रभावितों को हर संभव सहायता मुहैया कराई जाएगी।
 
सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर, व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी जारी किए गए हैं। हेल्पलाइन नंबर: 011-26772005,व्हाट्सएप नंबर: 9818963273 और recp1mpbhawan@mp.gov.in ये हैं। नेपाल में फंसे नागरिक या उनके परिजन सहायता और जानकारी के लिए इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।
 
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नेपाल त्रासदी पर दुख व्यक्त किया है। इस त्रासदी के बीच मध्यप्रदेश के कई निवासी भी वहां फंसे हुए हैं। सीएम डॉ. यादव का कहना है कि राज्य सरकार संकट के समय अपने नागरिकों के साथ खड़ी है। सरकार जनता के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए सरकार ने जनता की सुविधा के लिए हर संभव व्यवस्था की है।
 
 

रक्षाबंधन पर महिलाओं को योगी सरकार का बड़ा तोहफा, बहनों के साथ सहयोगी की फ्री यात्रा

रक्षाबंधन पर महिलाओं को योगी सरकार का बड़ा तोहफा, बहनों के साथ सहयोगी की फ्री यात्रा

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर योगी सरकार ने प्रदेश की माताओं, बहनों और बेटियों को फ्री बस यात्रा का बड़ा उपहार दिया है। इसके तहत महिलाएं आज 27 अगस्त की सुबह से 29 अगस्त तक अपने एक सहयोगी के साथ फ्री बस यात्रा कर सकेंगी। सुविधा का शुभारंभ बृहस्पतिवार सुबह से हो गया है। यात्रा के लिए उन्हें कोई भी किराया नहीं देना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने परिवहन, पुलिस और प्रशासन को महिलाओं की सुरक्षित व सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के कड़े आदेश दिए हैं। इस दौरान महिला सुरक्षा के लिए 'एंटी रोमियो स्क्वाड' प्रमुख मार्गों पर सक्रिय रहेगा और बस चालकों की निगरानी की जाएगी ताकि नशे की हालत में कोई वाहन न चला सके।

लखनऊ से चलाई जाएंगी 979 बसें : रक्षाबंधन पर रोडवेज लखनऊ परिक्षेत्र 979 एसी व साधारण बसें चलाएगा। चारबाग से 111, अवध से 117, कैसरबाग से 142, रायबरेली से 170, हैदरगढ़ से 113, उपनगरीय से 88, बाराबंकी से पांच, आलमबाग से 90 बसें चलाई जाएंगी। गोरखपुर रूट पर 46, बहराइच रूट पर 16, दिल्ली के लिए 53, कानपुर के लिए 13, आजमगढ़ के लिए 36, देहरादून के लिए 17, हरिद्वार के लिए 12, वाराणसी के लिए 15, प्रयागराज के लिए 35, आगरा के लिए 20, रायबरेली के लिए 20 बसें चलेंगी। 50 बसें रिजर्व में रहेंगी।

रक्षाबंधन पर बस अड्डों पर भीड़ को देखते हुए तीन शिफ्टों में कर्मचारियों व अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन ने बताया कि चारबाग, आलमबाग और अवध बस अड्डे पर सुबह छह से दोपहर दो बजे, दोपहर दो से रात 10 बजे व फिर सुबह छह बजे तक के लिए तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगेगी।

चार स्पेशल ट्रेनें आज से : रक्षाबंधन पर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए उत्तर रेलवे प्रशासन बृहस्पतिवार से चार स्पेशल ट्रेनें चलाएगा। सीनियर डीसीएम समर्थ गुप्ता ने बताया कि चंडीगढ़-लखनऊ और दिल्ली-वाराणसी वाया लखनऊ स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। 04546 चंडीगढ़-लखनऊ स्पेशल चंडीगढ़ से 27 की शाम 7:40 बजे रवाना होकर अगली सुबह 9:30 बजे लखनऊ पहुंचेगी। वापसी में 04545 लखनऊ-चंडीगढ़ स्पेशल 28 को दोपहर एक बजे लखनऊ से चलकर रात 2:10 बजे चंडीगढ़ पहुंचेगी। 17 कोच वाली यह ट्रेन अंबाला कैंट, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर और हरदोई स्टेशन पर रुकेगी।

ट्रेन 04012 दिल्ली-वाराणसी स्पेशल 27 की रात 9:10 बजे दिल्ली से चलकर चारबाग सुबह 6:30 बजे और वाराणसी सुबह 11:45 बजे पहुंचेगी। वापसी में 04011 वाराणसी-दिल्ली स्पेशल वाराणसी से 28 की शाम 5:50 बजे चलकर चारबाग रात 12:01 बजे और दिल्ली अगली सुबह 10:20 बजे पहुंचेगी। 21 कोच वाली स्पेशल ट्रेन नई दिल्ली, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, सुल्तानपुर और जौनपुर सिटी होते हुए चलेगी। दोनों ट्रेनों में एसी, सामान्य श्रेणी के कोच रहेंगे।

वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 31 अगस्त से होगा शुरू: अब सिर्फ 4 घंटे में पूरा होगा मुंबई का सफर

वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 31 अगस्त से होगा शुरू: अब सिर्फ 4 घंटे में पूरा होगा मुंबई का सफर

Vadodara-Mumbai

अहमदाबाद-मुंबई के बीच शुरू होने वाली बुलेट ट्रेन के पहले चरण से पहले ही वाहन चालकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। देश के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 31 अगस्त, 2026 तक यातायात के लिए खोले जाने की पूरी संभावना है। यह नया रूट शुरू होने से गुजरात और महाराष्ट्र के बीच सड़क मार्ग ज्यादा तेज़ और सुविधाजनक बन जाएगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि राज्य के हिस्से में आने वाला 157 किलोमीटर का पूरा सेक्शन 31 अगस्त तक ट्रैफिक के लिए खोलने की योजना है। लगभग ₹24,000 करोड़ की लागत से बन रहे इस सेक्शन के 7 में से 5 निर्माण पैकेज का काम पूरा हो चुका है और बाकी के दो पैकेज का काम अंतिम चरण में है।

सफर का समय घटकर आधा रह जाएगा : इस एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही वडोदरा से मुंबई के बीच की 403 किलोमीटर की दूरी अब सिर्फ 4 घंटे में तय की जा सकेगी। अब तक इसी दूरी को तय करने में यात्रियों को लगभग 8 घंटे का समय लगता था। यात्रा का समय आधा हो जाने से यात्रियों को न केवल आसानी होगी, बल्कि पेट्रोल-डीजल की भी भारी बचत होगी।

प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट : 1,400 किलोमीटर लंबा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है, जो देश के 5 राज्यों को आपस में जोड़ता है। इस विशाल कॉरिडोर का अहम हिस्सा वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे चालू होने से उत्तर और पश्चिम भारत के बीच व्यापार, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स बिजनेस को नई रफ्तार मिलेगी।

रात 12 से सुबह 6 तक बंद होगा Insta- Facebook, फैसले का भारत के लिए क्या है मतलब?

रात 12 से सुबह 6 तक बंद होगा Insta- Facebook, फैसले का भारत के लिए क्या है मतलब?

Meta अब अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंट्रोल करने जा रहा है। दरअसल, अमेरिका में बच्चों के लिए इसे लत बताया था। अब अमेरिका में बच्चों और किशोरों की सुरक्षा से जुड़े एक बड़े मुकदमे को खत्म करने के लिए समझौता किया है। मेटा इस मामले में करीब 17 अरब डॉलर का भुगतान करेगी और बच्चों के लिए अपने ऐप्स में कई बड़े बदलाव करेगी। इनमें फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मिलाकर दिन में दो घंटे की डिफॉल्ट लिमिट और रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक इस्तेमाल पर रोक शामिल है। Meta ने समझौते में कोई गलती स्वीकार नहीं की है।

क्या था मामला : अमेरिका के कई राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने 2023 में Meta पर मुकदमा किया था। आरोप था कि कंपनी ने Facebook और Instagram में ऐसे फीचर बनाए जिनसे बच्चों और किशोरों का इन ऐप्स का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा बढ़ता है। स्टेट्स का कहना था कि इससे बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर नुकसान हो सकता है। कंपनी पर लोगों और माता-पिता को इन खतरों के बारे में गुमराह करने का भी आरोप लगा। मामले की सुनवाई अगस्त 2026 में कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में शुरू हुई थी। समझौता होने के बाद अब यह मुकदमा आगे ट्रायल के रूप में नहीं चलेगा हालांकि अंतिम मंजूरी अदालत को देनी है।

17 अरब डॉलर तक मिल सकते हैं : रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल के मुताबिक समझौते में राज्यों को 17 अरब डॉलर तक मिल सकते हैं। मेटा ने अपने बयान में कुल भुगतान करीब 18 अरब डॉलर बताया है। फॉरेन मीडिया ने समझौते की अधिकतम रकम करीब 16.68 अरब डॉलर बताई है। इस रकम का बड़ा हिस्सा तय है जबकि करीब 5 अरब डॉलर से ज्यादा हिस्सा कुछ शर्तों पर निर्भर है। यह अतिरिक्त रकम तभी जारी होगी जब YouTube और TikTok भी बच्चों के लिए इसी तरह के सुरक्षा कदम उठाएं और तय रकम का भुगतान करें। मेटा ने कहा है कि वह इस समझौते के लिए 2026 की तीसरी तिमाही में करीब 10 अरब डॉलर का कानूनी खर्च दर्ज करेगी।

क्या बदलेगा फेसबुक-इंस्टाग्राम में : बता दें कि सबसे बड़ा बदलाव 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए होगा। दिन में 2 घंटे की लिमिट – फेसबुक और इंस्टाग्राम को मिलाकर रोजाना दो घंटे की डिफॉल्ट लिमिट होगी। इसे हटाने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी। दोनों ऐप्स पर बिताया गया समय इसी कुल लिमिट में गिना जाएगा। रात में ऐप बंद – रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक किशोर फेसबुक और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

डिफॉल्ट रूप से नोटिफिकेशन म्यूट रहेंगे : सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक डिफॉल्ट रूप से नोटिफिकेशन म्यूट रहेंगे। हालांकि सीधे मैसेज और सुरक्षा से जुड़े जरूरी अलर्ट आते रहेंगे। हर कुछ देर में ब्रेक का रिमाइंड – लगातार इस्तेमाल के दौरान किशोरों को नियमित ब्रेक लेने के लिए रिमाइंडर भी दिखाए जाएंगे। इसके अलावा उम्र की जांच के लिए ज्यादा सख्त तकनीक, आसान पैरेंटल कंट्रोल और बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से बचाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। कुछ ऐसे फीचर भी सीमित किए जाएंगे जिन पर बच्चों की मानसिक सेहत को लेकर सवाल उठते रहे हैं जैसे सार्वजनिक लाइक काउंट और कुछ ब्यूटी फिल्टर।

मेटा ने लगातार इन आरोपों से इनकार किया है, कंपनी का कहना है कि किशोरों के लिए सुरक्षित ऑनलाइन अनुभव उसकी प्राथमिकता है। समझौते में मेटा ने किसी गलती या कानूनी जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया है। कंपनी ने यह भी कहा है कि इस समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दूसरे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी ऐसे ही कदम उठाएं।

इस अमेरिकी समझौते का भारत में सीधे तौर पर कानूनी असर नहीं होगा लेकिन बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर यह फैसला दुनियाभर की टेक कंपनियों पर दबाव बढ़ा सकता है। भारत में भी बच्चों के डेटा और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नियम बनाए गए हैं। इसलिए आगे यह देखना अहम होगा कि उम्र की जांच, पैरेंटल कंट्रोल और बच्चों के स्क्रीन टाइम जैसे उपाय भारतीय बाजार में किस तरह लागू किए जाते हैं।

नेपाल त्रासदी में मानवता का ‘घिनौना चेहरा’, मदद की बजाए मची लूटपाट, सिलेंडर लेकर भागे लोग

नेपाल त्रासदी में मानवता का 'घिनौना चेहरा', मदद की बजाए मची लूटपाट, सिलेंडर लेकर भागे लोग

Nepal flood

नेपाल में आई बाढ़ में भीषण तबाही देखने को मिल रही है। बाढ़ के कारण अब तक 157 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 700 से ज्यादा लोग लापता हैं। अचानक आई इस बाढ़ ने लोगों को संभलने का भी मौका नहीं दिया। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, 384 पर्यटक लापता हैं, जिनमें 105 भारतीय भी शामिल हैं।

लेकिन इस त्रासदी के बीच मानवता का एक घिनौना चेहरा भी देखने को मिल रहा है। बाढ़ की त्रासदी झेल रहे नेपाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें लोग बाढ़ में बहकर आ रहे मलबे से सिलिंडर निकालते नजर आ रहे हैं। आपदा के समय एक-दूसरे के साथ हाथ-हाथ मिलाकर आगे बढ़ने के बजाय कुछ लोग सामान लूटते नजर आ रहे हैं।

आपदा में अवसर खोज रहे लोग : सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रहा कि बाढ़ के पानी में घरेलू सिलिंडर, रेगूलेटर और पाइप बहकर जा रहे हैं। तभी वहां मौजूद कुछ लोगों ने इस आपदा में अवसर खोजते हुए पानी में छलांग लगाई और बहते सिलिंडरों को अपने साथ लेकर जाने लगे। सोशल मीडिया पर सामने आए इस वीडियो में बताया गया है कि रसुवा का बाढ़ का पानी अब चितवन के नारायणघाट तक पहुंच गया है। लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। एक अन्य वीडियो में बाढ़ का प्रकोप दिखाई दे रहा है। लोग नदी के पास से जान बचाने के लिए भागते नजर आ रहे हैं। वीडियो में स्कूली बच्चे पीठ पर स्कूल बैग लटकाए हुए जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं। सोशल मीडिया पर इन वीडियो को नेपाल का बताकर वायरल किया जा रहा है। हालांकि वेबदुनिया इन सोशल मीडिया के वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

मदद नहीं लूट का खेल : भयानक बाढ़ के बीच जहां लोग अपनी जान बचाने के लिए जूझ रहे हैं, वहीं इसी मुश्किल वक्त में कुछ लोगों की मदद की जाना चाहिए, लेकिन उसकी जगह बहकर आया सामान लूटने का वीडियो सामने आया है। वीडियो में कुछ लोग गैस सिलेंडर ले जाते हुए नजर आ रहे हैं। बाढ़ की तबाही के बीच सामने आए इस वीडियो ने लोगों को हैरान कर दिया है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसकी लोकेशन और घटना की पूरी परिस्थितियों की पुष्टि जरूरी है।

नेपाल-तिब्बत में फिर आएगी तबाही? 47 ग्लेशियर झीलों से खतरा, कौनसी झीलें हैं सबसे ज्यादा खतरनाक?

नेपाल-तिब्बत में फिर आएगी तबाही? 47 ग्लेशियर झीलों से खतरा, कौनसी झीलें हैं सबसे ज्यादा खतरनाक?

नेपाल में आई बाढ़ ने हजारों लोगों को प्रभावित किया। अब तक इसकी वजह से 160 लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं। अहम बात यह है कि नेपाल फिर से इसी तरह की तबाही की चपेट में आ सकता है। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) और नेपाल सरकार के वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार, 47 ग्लेशियल झीलों को 'संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियल झीलें' (पीडीजीएलएस) के रूप में चिन्हित किया गया है।

चेतावनी दी गई है कि इन झीलों से कभी भी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लोफ) आ सकता है, जो नेपाल की नदी प्रणालियों में विनाशकारी बाढ़ का कारण बन सकता है। इन 47 झीलों में से 21 नेपाल में स्थित हैं, जबकि 25 झीलें तिब्बत में हैं और सीमा पार की श्रेणी में आती हैं। ये झीलें उन नदियों के ऊपरी हिस्से में स्थित हैं जो दक्षिण की ओर बहते हुए नेपाल में प्रवेश करती हैं, इसलिए ये नीचे बसे समुदायों और बुनियादी ढांचे के लिए संभावित खतरा पैदा करती हैं।

इस पूरी लिस्ट में से आपदा प्रबंधन अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने कुछ तेजी से फैल रही, पत्थर और मलबे से बनी बांधनुमा झीलों को विशेष रूप से चिन्हित किया है। इनके जोखिम को कम करने और जलस्तर घटाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई गई है। इनमें सबसे प्रमुख झीलें लोअर बरुण (टैलोपोखरी), थुलागी (डोना), लुमडिंग त्सो, होंगु-2/चामलांग साउथ, त्सो रोल्पा और इमजा त्सो हैं।

पहाड़ी इलाकों को ज्यादा खतरा : इन झीलों से पैदा होने वाला खतरा मुख्य रूप से उन पर्वतीय और पहाड़ी जिलों में केंद्रित हैं, जो नीचे की ओर बहने वाली नदी घाटियों के रास्ते में स्थित हैं। यदि कोई बड़ा 'ग्लोफ' होता है, तो इन क्षेत्रों के लोगों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। पूर्वी और मध्य नेपाल, जिनमें कोशी और बागमती नदी बेसिन शामिल हैं, वहां कुल क्षेत्रीय जोखिम का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रित है।

सबसे अधिक जोखिम वाले जिलों में सोलुखुम्बु शामिल है, जहां दूध कोसी और इमजा बेसिन आते हैं। संखुवासभा जिला बरुण और अरुण नदी घाटियों के किनारे स्थित है। दोलखा जिला तामा कोशी नदी कॉरिडोर में है और त्सो रोल्पा झील से खतरे का सामना कर सकता है।

इन झीलों से पैदा होने वाला खतरा मुख्य रूप से उन पर्वतीय और पहाड़ी जिलों में केंद्रित हैं, जो नीचे की ओर बहने वाली नदी घाटियों के रास्ते में स्थित हैं। यदि कोई बड़ा 'ग्लोफ' होता है, तो इन क्षेत्रों के लोगों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। पूर्वी और मध्य नेपाल, जिनमें कोशी और बागमती नदी बेसिन शामिल हैं, वहां कुल क्षेत्रीय जोखिम का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रित है। सबसे अधिक जोखिम वाले जिलों में सोलुखुम्बु शामिल है, जहां दूध कोसी और इमजा बेसिन आते हैं। संखुवासभा जिला बरुण और अरुण नदी घाटियों के किनारे स्थित है। दोलखा जिला तामा कोशी नदी कॉरिडोर में है और त्सो रोल्पा झील से खतरे का सामना कर सकता है।