
राजधानी दिल्ली में लगातार होने वाले राजनीतिक प्रदर्शनों, चक्का जाम और यातायात प्रतिबंधों से परेशान होकर व्यापारी संगठन भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। संगठन का कहना है कि आंदोलन से प्रतिदिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है। ALSO READ: रिहाई के बाद भड़कीं AISA प्रेसिडेंट नेहा बोरा, बोलीं- ‘आम नागरिकों के साथ अपराधियों जैसा बर्ताव’
संगठन ने पत्र भेजकर आगामी त्योहारी और विवाह सीजन के मद्देनजर दिल्ली में सभी राजनीतिक प्रदर्शनों को 31 जनवरी 2027 तक स्थगित करने की मांग की है। इन राजनीतिक प्रदर्शनों से व्यापारियों के नुकसान के साथ ही आम जनता का कीमती समय भी नष्ट होता है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बाजारों में बिक्री घटने का सीधा असर वहां काम करने वाले लाखों श्रमिकों, दिहाड़ी मजदूरों और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों पर भी पड़ रहा है।
व्यापारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी यह अपील किसी के लोकतांत्रिक अधिकारों के विरोध में नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य व्यापार, रोजगार, जनसुविधा और व्यापक जनहित की रक्षा करना है। ALSO READ: ट्रंप का बड़ा फैसला, रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर नहीं लगेगा 100% टैरिफ, भारत को क्या फायदा?
परेशान व्यापारियों को मिला भाजपा का साथ
भाजपा ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, दिल्ली में कांग्रेस, INDI गठबंधन, AAP और CJP के लगातार प्रदर्शनों और अराजकता से व्यापारी परेशान हो चुके हैं। वोटर सुधार और लोकतंत्र बचाने के नाम पर सड़कों पर उतरने वाले इन लोगों की राजनीति का खामियाजा छोटे दुकानदारों, फेरीवालों और मेहनतकश व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है।
विपक्ष की इस राजनीति से आजिज आकर व्यापारियों को अपने कारोबार और आजीविका की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। याचिका में जनवरी 2027 तक यातायात सुचारू रखने, बाजारों से दूर प्रदर्शन स्थल निर्धारित करने और विरोध-प्रदर्शनों के लिए स्पष्ट SOP बनाने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस सूर्यकांत ने भी प्रदर्शनों के कारण छोटे दुकानदारों और फेरीवालों की रोजी-रोटी प्रभावित होने पर चिंता जताई। व्यापारियों के मुताबिक, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के कारण अकेले कनॉट प्लेस में करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।
पार्टी ने कहा कि सवाल कांग्रेस, AAP और CJP की राजनीति से है कि क्या लोकतंत्र बचाने के नाम पर अराजकता फैलाना ही इनका एजेंडा है? क्या विरोध के अधिकार की आड़ में आम जनता की रोजी-रोटी और व्यापार को नुकसान पहुंचाना जायज है? विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन उसकी आड़ में अराजकता फैलाकर व्यापारियों की रोजी-रोटी छीनने का अधिकार किसी को नहीं!
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली के व्यापारियों की याचिका पर तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया। याचिका में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सेंट्रल पार्क में प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि सभी लोग बेहतर समझदारी दिखाएंगे। हम जानते हैं कि सभी छोटे दुकानदार इन दिनों अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। हम जानते हैं कि पूरे परिवारों को किन मुश्किलों और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।