
नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। इसी बीच नेपाल-चीन सीमा के पास बनी एक बैरियर झील के टूटने से शुक्रवार को एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल में चल रहे राहत और बचाव अभियानों की समीक्षा की और कहा कि भारत इस पूरे मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
जयशंकर ने काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों के साथ बातचीत कर नेपाल में प्रभावित भारतीय नागरिकों की स्थिति और उनकी सुरक्षा की जानकारी ली। विदेश मंत्रालय के संबंधित विभागों ने भी उन्हें नेपाल के लिए तैयार की जा रही अतिरिक्त राहत सामग्री के बारे में जानकारी दी। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि नेपाल में जारी राहत और बचाव प्रयासों पर चर्चा की गई है। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावासों ने वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की स्थिति और कुशलक्षेम की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि भारत इस मुद्दे को सबसे अधिक प्राथमिकता दे रहा है।
रसुवा में फ्लैश फ्लड ने मचाई भारी तबाही
नेपाल में संकट की शुरुआत 26 अगस्त को हुई, जब तिब्बत-नेपाल सीमा क्षेत्र में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। पानी, मलबे और बड़े-बड़े बोल्डर का तेज बहाव भोटेकोशी नदी तंत्र से होते हुए नीचे के इलाकों तक पहुंचा।
इस आपदा में नेपाल के रसुवा जिले में सड़कें, पुल, इमारतें और अन्य बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। पहाड़ी इलाकों में मलबे और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राहत एवं बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में इस आपदा से मरने वालों की संख्या 530 के पार पहुंच गई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं।
बैरियर झील टूटने से फिर बढ़ा खतरा
रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच शुक्रवार को एक और खतरा सामने आया। चीन की ओर छोछेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी एक बड़ी बैरियर झील के टूटने की खबर सामने आई।
रसुवा के मुख्य जिला अधिकारी नरेंद्र परियार ने बताया कि नेपाली सेना ने उन्हें झील के टूटने की जानकारी दी। इसके बाद आशंका जताई गई कि अचानक पानी छोड़े जाने से भोटेकोशी नदी में फिर तेज बाढ़ आ सकती है और नदी के किनारे बसे इलाकों को प्रभावित कर सकती है। इसके बाद नेपाली अधिकारियों ने संवेदनशील नदी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी।
स्याफ्रुबेसी तक पहुंचा बाढ़ का पानी
झील टूटने के बाद बाढ़ का पानी स्याफ्रुबेसी तक पहुंच गया। बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के मुताबिक, भोटेकोशी नदी में बाढ़ का पानी करीब 12:31 बजे वहां पहुंचा। वहीं त्रिशूली नदी के किनारे मुगलिंग तक के इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है और ताजा स्थिति का आकलन करने के लिए हवाई सर्वे की तैयारी भी की जा रही है।
नेपाल के लिए भारत ने बढ़ाया राहत सहयोग
भारत भी नेपाल में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यक सामान उपलब्ध कराने में मदद कर रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कई भारतीय नागरिकों के फंसे होने या प्रभावित होने के कारण नई दिल्ली उनकी सुरक्षा और स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।
इसी बीच नेपाल सरकार ने भारत से 25,000 मीट्रिक टन DAP खाद खरीदने के लिए कृषि सामग्री कंपनी लिमिटेड को मंजूरी दी है। यह खरीद सरकार-से-सरकार व्यवस्था के तहत की जाएगी।
नेपाल स्थित भारतीय दूतावास प्रभावित भारतीय नागरिकों से जुड़ी जानकारी जुटाने और समन्वय करने में लगा है। विदेश मंत्रालय भी उनकी सुरक्षा और लोकेशन पर लगातार नजर रख रहा है।
पर्यटक और भारतीय तीर्थयात्री भी हुए प्रभावित
आपदा के कारण नेपाल के रास्ते यात्रा कर रहे पर्यटक और तीर्थयात्री भी प्रभावित हुए हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 117 पर्यटकों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 85 भारतीय शामिल हैं।
रेस्क्यू किए गए अन्य पर्यटकों में चीन के 16, दक्षिण कोरिया के 9, अमेरिका और इटली के 2-2 नागरिक शामिल हैं। तीन अन्य पर्यटकों की पहचान नहीं हो सकी है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया भारतीय दल बाल-बाल बचा
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया एक भारतीय दल भी इस आपदा की चपेट में आने से बाल-बाल बच गया। इस 28 सदस्यीय दल में विशाखापत्तनम DLDA के चेयरमैन गाडु वेंकटप्पा समेत उनके परिवार के आठ सदस्य शामिल थे।
जानकारी के मुताबिक, यह दल 24 अगस्त को एक निजी ट्रैवल ऑपरेटर के जरिए तीर्थयात्रा के लिए रवाना हुआ था। यात्रा में हुई देरी और समय रहते लिए गए कुछ फैसलों के कारण दल भीषण बाढ़ की सबसे खतरनाक स्थिति से बच गया।
नेपाल में अभी भी हाईअलर्ट
बैरियर झील टूटने की घटना ने नेपाल के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ पहले आई भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों की तलाश और राहत कार्य जारी हैं, तो दूसरी तरफ भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में फिर बाढ़ का खतरा बना हुआ है। नेपाल और चीन के अधिकारी अस्थायी रूप से बनी इस झील की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे थे। आशंका है कि झील में जमा पानी अचानक नीचे की ओर बहने पर पहले से तबाह इलाकों में एक और खतरनाक सैलाब आ सकता है।


