
नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद हालात अभी सामान्य भी नहीं हुए थे कि शुक्रवार को एक बार फिर बड़े खतरे की आशंका पैदा हो गई। नेपाल-चीन सीमा पर ग्लेशियर के मलबे से बनी एक झील का पानी ओवरफ्लो होने लगा। इसके बाद नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन करीब 90 मिनट के लिए रोक दिया गया।
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ताजा संकट के बीच चीन के सिचुआन प्रांत में 5.1 तीव्रता का भूकंप भी आया। हालांकि भूकंप से तत्काल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली है। एक के बाद एक सामने आ रही इन घटनाओं ने पहले से ही आपदा से जूझ रहे हिमालयी क्षेत्र की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
झील ओवरफ्लो होने से फिर जारी हुआ बाढ़ का अलर्ट
ग्लेशियर के बड़े हिस्से के टूटने के बाद निकले मलबे ने नदी का रास्ता रोक दिया था। इससे पानी जमा होकर एक प्राकृतिक झील बन गई। शुक्रवार को इस झील का पानी अपनी सीमा से बाहर निकलने लगा, जिससे निचले इलाकों में फिर से बाढ़ आने का खतरा पैदा हो गया। अधिकारियों ने नेपाल की रेस्क्यू टीमों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी। खतरे का आकलन करने के लिए नेपाल सेना ने करीब एक घंटे 30 मिनट तक राहत और बचाव अभियान रोक दिया। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, चीन के तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा जिले में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद स्थानीय लोग ऊंचे स्थानों की ओर जाते दिखाई दिए। रसुवा जिले के वरिष्ठ अधिकारी नरेंद्र परियार ने कहा कि नदी का जलस्तर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है और अधिकारी स्थिति का आकलन कर रहे हैं।
25 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा पानी जमा
ग्लेशियर से टूटकर आए मलबे के कारण नदी अवरुद्ध होने से बनी इस झील में पानी लगातार जमा हो रहा है। चीन ने गुरुवार को स्थिति का जायजा लेने के लिए आठ सदस्यीय इंजीनियरिंग टीम भेजी थी। टीम ने हवाई सर्वे और थ्री-डायमेंशनल मॉडलिंग के जरिए झील की स्थिति का अध्ययन किया। शुक्रवार तक इस झील में 25 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा पानी जमा हो चुका था। एक दिन पहले यह मात्रा करीब 15 से 20 लाख क्यूबिक मीटर आंकी गई थी। अगर प्राकृतिक बांध टूटता है तो लाखों क्यूबिक मीटर पानी बेहद तेज रफ्तार से नीचे की ओर बह सकता है। इससे पहले ही तबाही झेल चुके इलाकों में एक और विनाशकारी बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है।
नेपाल में मौत का आंकड़ा 469 पहुंचा
बुधवार की विनाशकारी बाढ़ और ग्लेशियर से आई तबाही में नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है। नेपाल और तिब्बत में करीब 1,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें कम से कम 540 विदेशी नागरिक शामिल हैं। बाढ़ के पानी और मलबे ने गांवों और घाटियों को तबाह कर दिया। कई पावर स्टेशन, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। काठमांडू को तिब्बत के ल्हासा से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यह रास्ता कैलाश पर्वत की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों और ट्रेकर्स के बीच भी लोकप्रिय है।
हेलीकॉप्टर से जारी था रेस्क्यू ऑपरेशन
रेस्क्यू ऑपरेशन रोके जाने से पहले नेपाली सुरक्षा बल हेलीकॉप्टरों की मदद से लापता लोगों की तलाश कर रहे थे और बाढ़ से कटे इलाकों में जरूरी सामान पहुंचा रहे थे। खोजी कुत्तों की मदद से काम कर रही टीमों ने भी नदी के बहाव में बहकर मैदानी इलाकों तक पहुंचे कई शव बरामद किए हैं। रसुवा से गुरुवार को बचाए गए लोगों में डिब्गा तमांग भी शामिल थे। उन्हें तीन अन्य लोगों के साथ हेलीकॉप्टर से नुवाकोट स्थित सेना के कैंप पहुंचाया गया।
नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद लेने से किया इनकार
कई देशों की ओर से मदद की पेशकश के बावजूद नेपाल ने फिलहाल विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों की जरूरत से इनकार किया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर क्षेत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा एजेंसियां ही फिलहाल खोज और बचाव अभियान चला रही हैं।
दक्षिण कोरिया की एक रैपिड रिस्पॉन्स टीम काठमांडू पहुंच चुकी है, लेकिन नेपाल की ओर से विदेशी टीमों को तैनात करने की योजना तय नहीं होने के कारण उसे अभी अभियान में शामिल नहीं किया गया है।
चीन के ग्यिरोंग बॉर्डर पर भी भारी तबाही
आपदा ने चीन की ओर स्थित ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। वहां सड़क पर जमा मलबे को हटाने का काम जारी है, जिसके कारण चीनी रेस्क्यू टीमों को सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है। बुधवार को सामने आए वीडियो में तेज रफ्तार से बहता कीचड़, पानी और मलबा कुछ ही सेकंड में बॉर्डर क्रॉसिंग की संरचनाओं को तबाह करता दिखाई दिया।
चीनी सरकारी प्रसारक के अनुसार, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 558 लोग लापता हैं, जिनमें 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं। चीन की ओर अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
चीन में 5.1 तीव्रता का भूकंप
इसी बीच शुक्रवार को चीन के सिचुआन प्रांत के नेइजियांग के लोंगचांग शहर में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। चीन के अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर के मुताबिक भूकंप का केंद्र इसी क्षेत्र में था। फिलहाल भूकंप से किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं है। हालांकि, बाढ़, अस्थिर पहाड़ी इलाकों और भूस्खलन के खतरे के बीच आए इस भूकंप ने हिमालयी क्षेत्र में चिंता और बढ़ा दी है।
परिजन कर रहे अपनों का इंतजार
इस भीषण आपदा के बाद कई देशों में परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। लापता लोगों में ऐसे अमेरिकी नागरिक भी शामिल हैं, जो नेपाल से तिब्बत स्थित माउंट कैलाश की यात्रा पर गए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी नेपाल को मदद की पेशकश की है। उन्होंने इस आपदा को बेहद भयावह बताते हुए कहा कि अमेरिका ने नेपाल के नेतृत्व से बात की है और जरूरत पड़ने पर हर संभव सहायता देने की पेशकश की है।


