पत्‍नी की हत्‍या कर सेप्टिक टैंक में छिपाई लाश, सुभद्रा योजना के पैसे न देने पर पति ने कर डाला ये कांड

पत्‍नी की हत्‍या कर सेप्टिक टैंक में छिपाई लाश, सुभद्रा योजना के पैसे न देने पर पति ने कर डाला ये कांड

murder

ओडिशा के ढेंकानाल जिले में पत्‍नी को पीट-पीटकर हत्‍या और उसके शव को सेप्‍टिक टैंक में छिपाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक पति ने अपनी पत्‍नी की हत्‍या सुभद्रा योजना से मिलने वाली राशि नहीं देने पर की।

घटना ढेंकानाल सदर थाना क्षेत्र के ऐंदिपुर जुआंग साही की है। यहां पति पति गिरीश प्रधान ने अपनी पत्नी कौशल्‍या प्रधान की पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है कि कैसे एक झगड़ा इस कदर बढ़ गया कि पति ने पत्नी की जान ले ली।

क्या है पूरा मामला : मृतका की पहचान कौशल्या प्रधान के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, उसके पति गिरीश प्रधान ने शुक्रवार रात शराब के नशे में उससे सुभद्रा योजना के तहत मिले पैसे मांगे थे। पत्नी ने पैसे देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर गिरीश ने गुस्से में पत्नी के साथ मारपीट की। उसने डंडे और फावड़े से हमला किया, जिससे कौशल्या की मौत हो गई।

सेप्‍टिक टैंक में छिपाया शव : हत्या के बाद आरोपी ने शव को घर के पास के सेप्टिक टैंक छिपाने की कोशिश की, ताकि घटना का पता न चल सके। बाद में ग्रामीणों से मिली सूचना के आधार पर शनिवार को ढेंकानाल सदर पुलिस मौके पर पहुंची और शव बरामद किया।

पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। घटनास्थल पर वैज्ञानिक टीम को भी बुलाया गया, जिसने सबूत जुटाए। पुलिस ने घटनाक्रम को समझने के लिए क्राइम सीन रीक्रिएशन भी कराया। घटना के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों ने शराब की लत और घरेलू विवादों को लेकर चिंता जताई है।

ढेंकानाल की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक इंदुरेखा ने बताया कि स्थानीय पुलिस को घटना की जानकारी सुबह करीब 9 बजे मिली, जिसके बाद पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। एएसपी ने कहा, “पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। पति ने पत्नी की हत्या कर उसके शव को घर के पीछे सेप्टिक टैंक को खोदकर दफना दिया। सूचना मिलने के बाद हम मौके पर पहुंचे और शव को बरामद किया। इसके बाद मामले को एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाया गया और शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया गया। एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव को बरामद किया गया।”

JPNIC विवाद पर CM योगी का बड़ा हमला, ‘प्राइवेट कंपनी बनाकर डकैती डाल रहे थे अखिलेश-डिंपल

JPNIC विवाद पर CM योगी का बड़ा हमला, 'प्राइवेट कंपनी बनाकर डकैती डाल रहे थे अखिलेश-डिंपल

Akhilesh Yadav JPNIC Controversy: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए कहा कि लखनऊ में बने जेपीएनआईसी (जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर) की प्रारंभिक लागत मात्र 200 करोड़ थी। सपा ने इस पर 864 करोड़ खर्च कर दिए, तब भी यह अधूरा रहा। यह पैसा ‘सैफई सिंडिकेट’ का नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता का पैसा था। ये लोग जनता का पैसा पानी की तरफ बहाते थे। यदि अब सरकार उस पर पैसा लगाती तो कम से कम 150-200 करोड़ रुपये और खर्च होते। ये लोग सरकार के खजाने से 900-1000 करोड़ खर्च करके इस सेंटर को एक प्राइवेट कंपनी को देना चाहते थे, जिसमें अखिलेश, डिंपल व धर्मेंद्र यादव शामिल थे।

 

मुख्यमंत्री शनिवार को सलेमपुर व भाटपाररानी विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए 305 करोड़ की 80 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बाबा दुग्धेश्वर नाथ की धरा पर उमड़े जनसमुद्र का अभिनंदन किया और 2017 के पहले की दुर्दशा और इसके बाद आए सकारात्मक बदलावों को भी बताया।

पाप करने वाले सपा मुखिया जनता से मांगें माफी 

सीएम ने कहा कि सपा की मंशा थी कि सरकार के पैसे से बने जेपीएनआईसी को प्राइवेट कंपनी चलाएगी। इसमें होटल, क्लब, जिम आदि रहेगा और कमाई भी घर में ही जाएगी। अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव व इनके शागिर्द प्राइवेट कंपनी बनाकर प्रदेश के खजाने पर डकैती डाल रहे थे। 2017 में हमारी सरकार आई तो हमने इसे लखनऊ विकास प्राधिकरण को दे दिया, उसने जांच कराई। रिपोर्ट आने के बाद विज्ञापन निकाला। हम इस प्रोजेक्ट पर और पैसा खर्च करने को तैयार नहीं थे, बल्कि जो पैसा खर्च हुआ है वह भी सरकारी खजाने में आए, इसके लिए सरकार ने व्यवस्था प्रारंभ की है। जिस पैसे से युवाओं को रोजगार मिलता, फ्लाईओवर, इनोवेशन सेंटर, विश्वविद्यालय आदि बनते, अपनी अय्याशी के लिए प्रदेश के खजाने में डकैती डालने का पाप करने वाले सपा मुखिया को जनता से माफी मांगनी चाहिए।

लूटखसोट का पर्याय और डकैतों का गिरोह है सपा

सीएम ने सपा को लूटखसोट का पर्याय और डकैतों का गिरोह बताया, कहा कि 2017 के पहले ‘देख सपाई-बिटिया घबराई’ का नारा चलता था। बेटी की सुरक्षा को लेकर माता-पिता और भाइयों को चिंता रहती थी। जब हम 26 अगस्त को निशुल्क बस सेवा का शुभारंभ करने जा रहे थे, तब सपा के बबुआ की नींद टूटी और उन्होंने जल्दी-जल्दी ने प्रेसवार्ता बुलाई। उनको पता ही नहीं था कि क्या बोलना है, उन्होंने कहा कि लोगों से 40 हजार रुपए लेंगे। उन्हें पता ही नहीं था कि यह लेने के लिए नहीं, बल्कि देने के लिए कार्यक्रम है।

पत्रकारों से गाली-गलौच व हाथापाई पर उतर आते हैं अखिलेश

समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि सपा के ‘बबुआ’ 12 बजे सोकर उठते हैं। इससे उनका दिमाग भारी रहता है और वह झुंझलाते हैं। पत्रकारों के सवाल पर वह गाली-गलौच व हाथापाई करने पर उतारू हो जाते हैं। मैंने सुना कि अखिलेश यादव ने एक बार पत्रकार के गले पर तलवार रख दी थी। मीडिया लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में काम करता है। यदि कोई सरकार-प्रशासन गलत करता है तो मीडिया उस ओर ध्यानाकर्षण कराती है, लेकिन जब मीडिया ने बबुआ की सच्चाई उजागर की तो उन्होंने पत्रकार के गले पर तलवार रख दी!

लाखों महिलाओं ने की निःशुल्क बस यात्रा

सीएम ने कहा कि परिवहन निगम की बसों में तीन दिन (27 से 29 अगस्त) तक सहयात्री के साथ निशुल्क बस यात्रा की सुविधा दी गई। पिछले दो दिनों में लाखों महिलाओं ने निशुल्क यात्रा का लाभ उठाया। आज भी निशुल्क बस सेवा जारी है। कल से 60 वर्ष से ऊपर की माताओं को निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। सरकार जनता के टैक्स का पैसा रिटर्न कर रही है। 16 करोड़ गरीबों को निशुल्क राशन मिल रहा है। अब कोई इनके राशन पर डाका नहीं डाल सकता।

जो हाल जनता दल का हुआ था, वही सपा का होगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी दरअसल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है, जिसमें एक ही परिवार के सब लोग मिलेंगे। सपा मुखिया कहते हैं कि एक ही परिवार के पांच सांसद हैं, इसीलिए पार्टी बची है। उन्हें खैर मनानी चाहिए कि सपा बची है,  वर्ना वही हाल होगा जो जनता दल का हुआ था। 

एक लाख युवाओं को जल्द सरकारी नौकरी

मुख्यमंत्री ने युवाओं को आश्वस्त किया कि नौकरियों की कमी नहीं है। जल्द ही एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी मिलेगी। इसमें 45 हजार होमगार्ड, 36 हजार पुलिस कार्मिकों (4 हजार सब इंस्पेक्टर भी) की भर्ती होगी। उप्र पब्लिक सर्विस कमीशन के तहत अलग-अलग विभागों में 30 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र देने जा रहे हैं। जल्द ही शिक्षकों की भर्ती भी करेंगे। यूपीटीईटी की परीक्षा में 13 लाख नौजवान उत्तीर्ण हुए हैं। इस भर्ती का अधियाचन जा चुका है, विज्ञापन जारी होने वाला है।

 

सीएम योगी ने कहा कि इन नौजवानों के लिए भी जल्द ही नौकरी का खजाना निकलने वाला है। सरकार दो करोड़ नौजवानों को टैबलेट देगी। 50 लाख से अधिक नौजवान यह पा चुके हैं, 25 लाख का फिर से ऑर्डर दिया गया है। स्नातक अंतिम वर्ष के बच्चों को टैबलेट देंगे। अब कोई नौकरी में सेंध नहीं लगा पाता, सपा मुखिया को इसी बात की चिढ़ है। अब हर जनपद के नौजवानों को नौकरी मिलती है। नौजवान के लिए हर जगह नौकरी, रोजगार व स्वरोजगार है। हर न्याय पंचायत स्तर पर डिजिटल एंटरप्रेन्योर के रूप में नौजवान को कार्य दिया जाएगा। 

40 वर्ष में 50 हजार मासूमों की जान गई

सीएम ने कहा कि 15 जुलाई से 15 नवंबर गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर, संतकबीरनगर, बस्ती व सिद्धार्थनगर के लिए भय व दहशत का माहौल लेकर आता था कि इंसेफेलाइटिस न जाने किस बच्चे को निगल ले। माता-पिता भय के साये में जीने को मजबूर थे। यह सपा व कांग्रेस सरकारों की बीमार मानसिकता थी, जो मासूमों को निगलती थी, लेकिन इनकी संवेदना मर चुकी थी। 40 वर्ष में 50 हजार मासूमों की जान गई, लेकिन सपा का मुख्यमंत्री या कांग्रेस का मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री एक बार भी देखने या गरीब का हालचाल लेने नहीं आया। 2017 से पहले बच्चा नंगे पैर स्कूल जाता था, भवन जर्जर थे, बेटी स्कूल छोड़ देती थी, शिक्षक नहीं थे, गरीबों का राशन हड़प लिया जाता था। मुसहर, गरीब, वंचित, दलित भूख से दम तोड़ता था, लेकिन तत्कालीन सरकारें उसका हाल नहीं लेती थीं, बल्कि गरीबों का राशन बेचकर अपनी पार्टी को माफिया के हवाले कर चुकी थीं। माफिया समानांतर सत्ता चलाते थे।

अब किसी माता-पिता को मासूम की चिंता नहीं करनी

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार हर बच्चे की फिक्र करती है। जुलाई हो या नवंबर, अब किसी माता-पिता को मासूम की चिंता नहीं करनी है। हमने इंसेफेलाइटिस (नवकी बीमारी) को सदैव के लिए समाप्त कर दिया है। सुशासन का परिणाम है कि गरीब को बिना मांगे राशन, बिजली, आवास, शौचालय और नौजवान को रोजगार व सरकारी नौकरी मिल रही है। हमने साढ़े 9 साल में साढ़े 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं। लगभग तीन करोड़ युवा रोजगार प्राप्त कर रहा है। अब यहां उत्सव से पहले उपद्रव, दंगा-फसाद भी नहीं हो सकता।

तुष्टिकरण नीति का विरोध करते थे कांग्रेस विधायक राघव बाबा

सीएम ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार आने के बाद देवरिया में विकास कार्य नए प्रतिमान स्थापित कर रहे हैं। महर्षि देवरहा बाबा के नाम पर अब देवरिया में मेडिकल कॉलेज है। स्वाधीनता संग्राम सेनानी राघव बाबा कांग्रेस के विधायक थे, लेकिन कांग्रेस सरकार के विरोध के बावजूद उन्होंने दो-टूक कहा था कि राम आन-बान-शान के प्रतीक हैं। यदि कांग्रेस सरकार राम मंदिर के मार्ग में बाधा बनेगी तो वह स्वीकार नहीं करेंगे। वह रामजन्मभूमि आंदोलन में कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति का खुलकर विरोध करते थे। 

देश-दुनिया वाले कहते हैं- काश, मेरा भी जन्म यूपी में हुआ होता

सीएम ने कहा कि अब यूपी को कोई बीमारू नहीं कहता। अब देश-दुनिया वालों के चेहरे की चमक बताती है कि वे यूपी के नाम पर खुश हैं। वे कहते हैं कि काश, मेरा भी जन्म यूपी में हुआ होता, हम भी रामराज्य का अनुभव करते। माफिया मिट्टी में मिल गए। व्यापारी व बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों की एकमात्र जगह जेल है या जहन्नुम।

मंदिरों का पैसा कब्रिस्तान पर बहाती थी सपा

सीएम ने जिनकी इच्छाशक्ति मर चुकी है, उनसे क्या ही उम्मीद रखना। जब कोई मुख्यमंत्री 16-18 घंटे मेहनत करेगा, तब सुरक्षा और परिवर्तन ला पाएगा। विधायकों से मांगे गए प्रस्तावों को हम तत्काल स्वीकृति देते हैं। सभाकुंवर जी के प्रस्ताव पर फ्लाईओवर को स्वीकृति दी। दुग्धेश्वर नाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई है। सपा मंदिरों के सौंदर्यीकरण का पैसा कब्रिस्तानों पर बहाती थी। 

 

इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही, ग्राम्य विकास राज्यमंत्री विजयलक्ष्मी गौतम, विधायक सभाकुंवर कुशवाहा, डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी, सुरेंद्र चौरसिया, दीपक कुमार मिश्र ‘शाका’, जिला पंचायत प्रशासक गिरीश चंद्र तिवारी, भाजपा जिलाध्यक्ष काली प्रसाद, पूर्व सांसद रविंद्र कुशवाहा आदि मौजूद रहे।

इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में आएंगे राहुल गांधी, 12 सितंबर को नेहरू स्टेडियम में कार्यक्रम

इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में आएंगे राहुल गांधी, 12 सितंबर को नेहरू स्टेडियम में कार्यक्रम

rahul gandhi

भोपाल। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 12 सितंबर को इंदौर आ सकते है। छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी के शामिल होने को लेकर  कांग्रेस ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। राहुल गांधी के दौरे के दौरान प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए इंदौर शहर कांग्रेस कमेटी ने प्रशासन से नेहरू स्टेडियम आरक्षित करने की मांग की है।

इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर 8 सितंबर से 12 सितंबर तक संपूर्ण नेहरू स्टेडियम आरक्षित करने की अनुमति मांगी है। पत्र में कहा गया है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में राहुल गांधी छात्रों को संबोधित करेंगे।

 

कांग्रेस के मुताबिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों के शामिल होने की संभावना है। इसी को देखते हुए कार्यक्रम की तैयारियों और आयोजन के लिए पांच दिनों तक नेहरू स्टेडियम आरक्षित करने का अनुरोध किया गया है। 12 सितंबर को राहुल गांधी के इंदौर पहुंचने की तैयारियों के बीच कांग्रेस का यह पत्र दौरे को लेकर तैयारियों के तेज होने का संकेत माना जा रहा है। प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।

 

राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर शनिवार को प्रदेश कांग्रेस जीतू पटवारी ने पार्टी नेताओं के साथ मंथन किया। इसके साथ ही राहुल के कार्यक्रम को शामिल बनाने के लिए युवा  कांग्रेस और NSUI को अलग से जिम्मेदारी  सौंपी जा रही है।  छात्रों के गूंज कार्यक्रम में इंदौर के साथ आसपास जिलों से बड़ी संख्या में युवाओं को शामिल करने की योजना पर पार्टी काम कर रही है।

 

नेपाल त्रासदी की एक तस्‍वीर यह भी, पहले शवों की ज्‍वेलरी नोची, अब 92 लाख का लॉकर लूटा, लालचियों से निपट रही पुलिस

नेपाल त्रासदी की एक तस्‍वीर यह भी, पहले शवों की ज्‍वेलरी नोची, अब 92 लाख का लॉकर लूटा, लालचियों से निपट रही पुलिस

Nepal tragedy

जब कोई प्राकृतिक आपदा आती है तो इसकी भयावहता की कई तस्‍वीरें सामने आती है। एक तरफ मृत लोगों के घरों में मौतों का मातम होता है तो दूसरी तरफ जो जिंदा है वो अपनी मानवता तक खो देते हैं। नेपाल में आई भीषण बाढ़ की तबाही में कुछ तस्‍वीरें ऐसी भी सामने आई हैं, जिसमें मानवता पर सवाल खडा कर दिया है।

इस दौरान एक खबर ये भी आई है कि बाढ़ के सैलाब में नेपाल से एक बैंक का लॉकर भी बहकर आ गया, जिसे देखकर लोगों में लूट मच गई। कल एक वीडियो सामने आया था, जिसमें कुछ लोग एक मृत महिला के शव के कान और गले से ज्‍वेलरी नौच रहे थे। बता दें कि नेपाल में आई बाढ़ की वजह से अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और ढाई हजार लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 320 भारतीयों समेत 537 विदेशी भी शामिल हैं।

बैंक लॉकर के लिए मची लूट : रसुवा में बाढ़ के सैलाब में एक बैंक का लॉकर भी बह गया। ये बैंक लॉकर धादिंग जिले के गल्छी गांवपालिका-4 स्थित बेलखूखोला के पास त्रिशूली नदी के किनारे पहुंचा तो इसमें से नकदी की लूट मच गई। हालांकि पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया और 29 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार लोगों से 92 लाख से ज्यादा की नकदी बरामद हुई है। आरोपियों के पास से 92 लाख 68 हजार 505 नेपाली रुपए बरामद किए गए हैं।

गिरफ्तार लोगों में पवन पौडे, वीरबहादुर राना मगर, विनोद गिरी, नवराज भेटुवाल, पूर्णलाल श्रेष्ठ, विष्णुमणि अधिकारी, कृष्ण मगर, शिवबहादुर राना मगर, युवराज अधिकारी,सुशान्त श्रेष्ठ, सुचिमबहादुर राना मगर, सविन श्रेष्ठ, प्रेमबहादुर राना मगर, अनिल भेटुवाल, बाकी 15 आरोपियों समेत कुल 29 लोगों को पुलिस ने नियंत्रण में लिया है।

त्रासदी की एक तस्‍वीर यह भी : बता दें कि नेपाल से बहकर कई शव भी भारत के बिहार तक आ रहे हैं, कितना ही सामान और तरह तरह की चीजें बहकर यहां तक आ गई है। जिनमें गैस सिलेंडर जैसी चीजें भी शामिल हैं। कई शव बहकर गंडक नदी में आ रहे हैं, सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में सामने आया कि लोग शवों से उनकी ज्‍वेलरी निकाल रहे हैं, खासतौर से महिलाओं के गले से सोने की चेन, कान के झुमके और अन्‍य कीमती सामान निकाल रहे हैं। एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ लोग बहकर आए गैस के सिलेंडर उठाकर ले जा रहे थे। कुछ बहकर आईं मछलियां ले जा रहे थे। हैरान करने वाली बात है कि एक तरफ नेपाल में लोग जिदंगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं, वहीं यहां लोग लालच में यह सब कर रहे हैं।

नेपाल में खतरा बरकरार : नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भी अभी खतरा पूरी तरह टला नहीं है। दरअसल चीन ने नेपाल को अलर्ट किया है कि ल्हेन्डे नदी सिस्टम के ऊपरी इलाकों में बनी झील कभी भी अपने किनारों को तोड़ सकती है और जो पानी का रंग बदल रहा है, वह खतरा हो सकता है। चीन का कहना है कि झील कभी भी फट सकती है। चीन ने नदी के बहाव की दिशा में जो लोग नीचे की तरफ रहते हैं, उन्हें अलर्ट रहने के लिए कहा है।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी : नेपाल में आई बाढ़ के बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। सेना ने रसुवा जिले में अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोप्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों का रेस्क्यू कर लिया है। अब तक 4500 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है जबकि 2500 की खोज खबर नहीं मिल पाई है।

नॉर्वे के राजा हाराल्ड पंचम का निधन, 1991 में बने थे राजा

नॉर्वे के राजा हाराल्ड पंचम का निधन, 1991 में बने थे राजा

Death of King Harald Norway

नॉर्वे के राजा हाराल्ड पंचम का— शुक्रवार 28 अगस्त को स्थानीय समय के अनुसार सुबह साढ़े छह बजे— राजधानी ओस्लो के सबसे प्रसिद्ध अस्पताल में निधन हो गया। 89 साल की अपनी आयु के साथ वे इस समय यूरोप के सबसे वयोवृद्ध और सबसे लोकप्रिय शासक थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष मई मे जब नॉर्वे भी गए थे, तब राजधानी ओस्लो में उनके राजमहल में उनसे मिले थे। उन्होंने नॉर्वे के राजपरिवार को तुरंत अपना शोक-संदेश भेजा।

 

राजा हाराल्ड अपनी सादगी, मिलनसार स्वभाव और सहनशीलता के लिए जाने जाते थे, हालांकि उनका बचपन कतई चिंता-मुक्त नहीं था। उनका जन्म 21 फरवरी, 1937 को हुआ था। वे 500 से ज़्यादा वर्षों में नॉर्वे में ही पैदा हुए पहले नॉर्वेजी राजा थे; हालाँकि जन्म के तुरंत बाद नॉर्वे अधिकतर समय तक उनका घर नहीं रहा, क्योंकि यूरोप में जल्द ही दूसरा विश्वयुद्ध छिड़ गया था।

जर्मन नाज़ियों का हमला

जर्मनी के तानाशाह हिटलर द्वारा 1 सितंबर, 1939 की सुबह पोलैंड पर अकस्मात आक्रमण के साथ शुरू हुआ यह भयंकर युद्ध 9 अप्रैल, 1940 को नॉर्वे की धरती पर भी पहुँच गया। जर्मन नाज़ियों ने नॉर्वे के शाही परिवार का अपहरण करने और उसे बंधक बनाने की भी कोशिश की। युवराज हाराल्ड तब केवल तीन साल के थे। उनके पिता और दादा ने उन दिनों लंदन में रह कर वहीं से हिटलर के ख़िलाफ़ प्रतिरोध का नेतृत्व किया।

 

नॉर्वे पर हमले के बाद हाराल्ड की माँ युवराज्ञी मैर्था, उनके और अपनी दोनों बेटियों के साथ पहले स्वीडन और बाद में अमेरिका चली गईं। हिटलर जब युद्ध हार गया और 30 मई, 1945 के दिन बर्लिन में उसने आत्महत्या कर ली, तब मैर्था भी जून 1945 में अपने बच्चों के साथ स्वदेश लौटीं। एक लंबी बीमारी के बाद, अप्रैल 1954 में उनकी मृत्यु हो गई—हाराल्ड तब मात्र 17 साल के थे।

भावी पत्नी से मुलाकात

नॉर्वे में अपनी स्कूली शिक्षा और मिलिट्री ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, हाराल्ड पहले ऑक्सफ़ोर्ड चले गए। वहां समाज शास्त्र, इतिहास और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। कुछ साल बाद, एक डिनर पार्टी में उनकी मुलाक़ात अपनी भावी पत्नी, सोन्या हाराल्डसेन से हुई। सोन्या एक साधारण परिवार की सीधी-सादी साधारण महिला थीं, इस कारण दोनों की शादी को लेकर राजमहल में काफ़ी बहस आदि हुई। अंततः कोई नौ साल बाद, हाराल्ड के पिता, राजा ओलाफ़ पंचम ने शादी की अनुमति दे दी। इन्हीं कटु अनुभवों ने हाराल्ड के शासनकाल के दौरान एक खुले समाज के प्रति उनकी जीवन भर की प्रतिबद्धता को आकार दिया।

 

17 जनवरी 1991 को अपने पिता, राजा ओलाफ़ पंचम का निधन होने के बाद हाराल्ड उनके उत्तराधिकारी बने। उन्होंने एक बार कहा था: “मेरे दादाजी का आदर्श वाक्य था “नॉर्वे के लिए सब कुछ।” हमारे सामने लगातार यही चुनौती होती है कि हम उस वाक्यांश के अर्थ, और वास्तविक जीवन में उसके तात्पर्य पर फिर से विचार करें। यह बात न केवल हम शाही परिवार के सदस्यों पर, बल्कि इस देश में रहने वाले हर व्यक्ति पर लागू होती है।”

टोक्यो ओलंपिक में झंडा लेकर चले

हाराल्ड को नौकायन (सेलिंग) का बहुत शौक था। 1964 के टोक्यो ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में उन्हें नॉर्वे का झंडा लेकर चलने का सम्मान मिला। 1987 में, उन्होंने अपनी यॉट नौका के कप्तान के तौर पर “वर्ल्ड सेलिंग चैंपियनशिप” जीती। अपने निजी जीवन में, उन्होंने अपने आप को ज़्यादा चमक-दमक से दूर रखना ही पसंद किया। राजा हाराल्ड के निधन के बाद, अब उनके पुत्र युवराज हाकोन नए राजा बनेंगे।

 

वे नॉर्वे के शाही परिवार के लिए एक कठिन समय में राजगद्दी संभाल रहे हैं। उनकी पत्नी मेत्ते-मारित, दान से मिले एक पराए फेफड़े के सहारे जी रही हैं। मेत्ते-मारित को अमेरिकी सेक्स कांड अपराधी, जेफ्री एपस्टीन के साथ अपनी दोस्ती को लेकर कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। उनके पिछले रिश्ते से हुए सबसे बड़े बेटे को, बलात्कार के आरोपों की पुष्टि के बाद जेल की सज़ा भी भुगतनी पड़ रही है।

“घर वहीं होता है जहाँ दिल बसता है”

लगभग 56 लाख की जनसंख्या वाले बहुत ही ठंडे, पर उतने ही धनी देश नॉर्वे के बहुत से लोग अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान, पोलैंड, स्वीडन, सोमालिया और सीरिया से आकर वहां बस गए हैं। राजा हाराल्ड का कहना था कि घर वहीं होता है जहाँ दिल बसता है; इसे हमेशा देश की सीमाओं से तय नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह बात अपने शासनकाल की रजत जयंती (सिल्वर जुबली) के अवसर पर कही थी।

 

हाराल्ड यूरोप में सबसे लंबे समय से राज करने वाले राजा थे। उन्हें मिलनसार, आसानी से बात-चीत करने लायक और सहनशील माना जाता था। उन्होंने यह भी कहा था: “नॉर्वे के लोगों में ऐसी लड़कियाँ हैं जो लड़कियों को पसंद करती हैं, ऐसे लड़के हैं जो लड़कों को पसंद करते हैं, और ऐसी लड़कियाँ और लड़के हैं जो एक-दूसरे को पसंद करते हैं। नॉर्वे के लोग भगवान में, अल्लाह में, हर चीज़ में और किसी भी चीज़ में विश्वास नहीं करते—यानी हर तरह के लोग हैं।” ऐसी ही बातों से राजा हाराल्ड युवा और प्रगतिशील नॉर्वे-वासियों के बीच बहुत लोकप्रिय भी हुए।

यूपी में रक्षाबंधन के पर्व पर भाई-बहनों ने लगाए एक लाख से अधिक पौधे

यूपी में रक्षाबंधन के पर्व पर भाई-बहनों ने लगाए एक लाख से अधिक पौधे

Ek Ped Maa Ke Naam: रक्षाबंधन पर भाई-बहनों ने प्रदेश में एक लाख से अधिक पौधे लगाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में इस विशिष्ट वन (रक्षाबंधन वाटिका) में पौधरोपण किया। विशिष्ट वनों के अंतर्गत सभी वन प्रभागों में 28 अगस्त (शुक्रवार) को रक्षाबंधन वाटिका में पौधे लगाए गए। 

59 स्थलों पर रोपे गए 1,09,171 पौधे 

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधरोपण महायज्ञ-2026 में विशिष्ट वन (महर्षि चरक औषधि वन, समरस वन, समृद्धि वन, कपि वन, ऊर्जा वन, एक्सप्रेस-वे-पौधरोपण, अविरल धारा पौधरोपण, वंदे मातरम वाटिका) आदि स्थापित किए गए। इसी श्रृंखला में 'भाई-बहन' के स्नेह के प्रतीक’ रक्षाबंधन पर 28 अगस्त (शुक्रवार) को प्रत्येक वन प्रभाग में 'भाई-बहन पौधरोपण के माध्यम से 59 स्थलों पर 109171 पौधे रोपित कर 59 नई रक्षाबंधन वाटिकाओं की स्थापना की गई।

पेड़-पौधों को बांधा रक्षासूत्र

रक्षाबंधन पर बहनों ने भाइयों को राखी बांधकर उनकी खुशहाली की कामना की तो भाई-बहनों ने रक्षासूत्र बांधकर पर्यावरण संरक्षण का भी संकल्प लिया। रक्षाबंधन पर पर्यावरण व प्रकृति के उपकारों के प्रति सम्मान व्यक्त करने तथा पर्यावरण प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रत्येक प्रभाग में पौध रोपित किए गए। भाई-बहनों ने पौधरोपण के साथ ही संयुक्त रूप से पेड़-पौधों को रक्षा सूत्र बांधकर सुरक्षा का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री ने लगाया बरगद का पौधा 

गोरखपुर वन प्रभाग में रक्षाबंधन पर भाई-बहन पौधरोपण के अंतर्गत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर में बरगद का पौधा रोपा। साथ ही मौलश्री समेत 101 अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रजातियों पर छात्र एवं छात्राओं ने रक्षासूत्र बांधकर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लिया गया।

लोगों को बोल्ड महिलाएं पसंद नहीं, हां, मैंने शराब पी थी, कोई रिग्रेट नहीं, नोएडा में गार्ड्स को गालियां देने वाली महिला का बयान

लोगों को बोल्ड महिलाएं पसंद नहीं, हां, मैंने शराब पी थी, कोई रिग्रेट नहीं, नोएडा में गार्ड्स को गालियां देने वाली महिला का बयान

Noida woman

नोएडा में गार्ड्स को गालियां देने वाली महिला सामने आई है। उसने स्‍वीकार किया है कि हां उसने शराब पर रखी थी, लेकिन इस बात का कोई पछतावा नहीं है। बता दें कि हाल ही में एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक महिला सोसायटी के सिक्योरिटी गार्ड्स को गालियां दे रही थी।

वीडियो ग्रेटर नोएडा वेस्ट की आम्रपाली सेंचुरियन पार्क टेरेस होम्स सोसाइटी का था, जिसमें महिला ना केवल गालियां दे रही थी, बल्कि जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए धमकी भी दे रही थी। यह वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है और लोगों में इसे लेकर बहस चल रही है।

कौन हैं महिला और उसने क्‍या कहा : बता दें कि महिला का नाम येशा कुमार है और वह आम्रपाली सेंचुरियन पार्क टेरेस होम्स सोसाइटी में ही रहती हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, 45 वर्षीय येशा ने कहा कि वो घटना उनके लिए एक बुरे सपने के जैसी है और वह उसे याद नहीं करना चाहती। शुक्रवार को सोसाइटी के सिक्योरिटी सुपरवाइजर ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई। येशा ने बताया, 'मैं सोसायटी में अकेली रहती हूं और यही वजह है कि कुछ लोग मुझे जानबूझकर निशाना बनाते हैं। वो घटना 25 अगस्त की है, जब रात में करीब 2:30 बजे उन्होंने कुछ सामान ऑनलाइन ऑर्डर किया। सिक्योरिटी गार्ड डिलीवरी बॉय को ऊपर नहीं आने दे रहे थे। मैंने उस समय शराब पी रखी थी और इसीलिए मैं नीचे नहीं जाना चाहती थी, लेकिन उन लोगों ने कहा कि मुझे ऑर्डर लेने के लिए नीचे ही आना होगा।'

लोग मुझे टारगेट करते हैं, क्‍योंकि मैं अकेली रहती हूं : सोसाइटी के लोगों पर आरोप लगाते हुए येशा ने कहा, 'मैं मानती हूं कि मैंने शराब पी रखी थी और बहुत ज्यादा गुस्से में थी, लेकिन मुझे किसी बात का अफसोस नहीं है। मैं माफी नहीं मांगूंगी, क्योंकि मैंने कुछ गलत नहीं किया। सोसाइटी के कुछ लोग और मैनेजमेट मुझे निशाना बनाते हैं, क्योंकि मैं अकेली रहती हूं। बिना नोटिस के मेरी बिजली काट दी गई। ये लोग नौकरानी को मेरे घर नहीं आने देते। मैं एक पढ़े-लिखे परिवार से आती हूं और आप किसी से भी मेरे बैकग्राउंड के बारे में पूछ सकते हैं।'

लोगों को बोल्ड महिलाएं पसंद नहीं : येशा का एक बयान वायरल हो रहा है, जिसमें वो उनका कहना है कि 'मैंने सोसाइटी में कभी किसी को परेशान नहीं किया। मैं जो करती हूं, अपने घर के अंदर करती हूं और किसी को उसमें दखल देने या रोक-टोक करने का हक नहीं है। वो मुझे पागल कहते हैं, लेकिन मैं पागल नहीं हूं। मैंने ये घर खरीदा है और इसी घर में रहूंगी। किसी भी महिला को अकेले रहने और मनमर्जी जिंदगी जीने का हक है, लेकिन लोग बोल्ड महिलाओं को पसंद नहीं करते। मैं लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ी हूं और एक मॉडल के तौर पर भी काम कर चुकी हूं। फिलहाल इवेंट्स के काम में जुड़ी हूं और मेरा अपना कपड़ों का ब्रांड भी है।'

क्‍या था पूरा मामला : पुलिस को दी गई शिकायत में सिक्योरिटी एजेंसी ने बताया कि गार्ड्स ने डिलीवरी बॉय को सोसाइटी के गेट नंबर 2 पर रोका था और उसे अंदर आने के लिए महिला से परमिशन मांगी थी। जब परमिशन नहीं मिली, तो डिलीवरी बॉय ने महिला को फोन किया और कहा कि वह गेट पर इंतजार कर रहा है। इसके बाद महिला नीचे आई और गार्ड्स को गालियां देना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने गार्ड्स के साथ हाथापाई भी की। सोसाइटी के सिक्योरिटी सुपरवाइजर अमित शर्मा ने बताया कि घटना के वक्त मैं मौके पर मौजूद था। महिला गालियां दिए जा रही थी और कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी। जब मैंने पुलिस को फोन करने की कोशिश की, तो उन्होंने मुझे थप्पड़ मारा, तब मैंने उन्हें पीछे हटाया और कहा कि हाथापाई ना करें। उस कोशिश में मेरा फोन भी नीचे गिर गया और उसकी स्क्रीन टूट गई। हम चाहते हैं कि पुलिस मामले में जांच करे और सख्त कार्रवाई करे। साथ ही मोबाइल को हुए नुकसान के लिए उनसे हर्जाना भी लिया जाए।' बता दें कि नोएडा का ये मामला पिछले कुछ घंटों से लगातार वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया में सिंगल रहने वाली महिलाओं को लेकर बहस भी चल रही है।

50-50 किलो राहत सामग्री दे रही यूपी सरकार, 1500 परिवारों को वितरित की राहत सामग्री

50-50 किलो राहत सामग्री दे रही यूपी सरकार, 1500 परिवारों को वितरित की राहत सामग्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार बाढ़ पीड़ितों को करीब 50-50 किलो राहत सामग्री के पैकेट उपलब्ध करा रही है, जबकि सपा सरकार में 500 ग्राम राहत सामग्री भी नहीं पहुंच पाती थी। गरीबों के हक की राहत सपा से जुड़े लोग हड़प लेते थे। आज हर आपदा में आवास समेत तत्काल राहत उपलब्ध कराई जाती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार गरीब, नौजवान, माता-बहनों और अन्नदाता किसानों के हक में संवेदनशीलता व ईमानदारी से काम कर रही है। अतिवृष्टि के कारण पिछले कुछ दिनों में करीब 26 जनपद बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सरकार लगातार व तेजी से राहत व बचाव कार्य में जुटी है। बाढ़ से 1.71 लाख से अधिक लोग और 251 गांव प्रभावित हुए हैं। एक हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित शरणालयों में पहुंचाया गया है।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को बलिया में तीन विधानसभा क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित गांवों का हवाई निरीक्षण करने के उपरांत 1500 बाढ़ पीड़ित परिवारो को राहत सामग्री और चिकित्सकीय किट वितरित कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने आयोजन स्थल पर मौजूद बाढ़ पीड़ितों से बातचीत की, उनका दुख साझा किया और सबको आश्वस्त किया कि किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं, सरकार हर पीड़ित व्यक्ति के साथ खड़ी है।

जेपीएनआईसी को लूट-खसोट का अड्डा बनाने की कोशिश

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोंटने का काम किया था, सपा उसी की पिछलग्गू बन गई। जिन लोगों ने जयप्रकाश नारायण के सपनों को तार-तार किया,  सपा उन्हीं के साथ खड़ी है। इन्होंने जयप्रकाश जी के नाम को किस तरह लूट-खसोट का माध्यम बनाया था, लखनऊ में बना जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएआईसी) उसका उदाहरण है। इस केंद्र की लागत मात्र 200 करोड़ थी। लेकिन, लुटेरी सपा सरकार ने उस पर 864 करोड़ रुपए खर्च किए, और तब भी यह अधूरा रहा। उनकी मंशा जनता-जनार्दन के पैसे से बने इस केंद्र को लूट-खसोट व अय्याशी का अड्डा बनाना थी। ऐसी कोशिश भी की गई।

जेपीएनआईसी सेंटर के लिए बनाई परिवार की कमेटी

सीएम ने कहा कि जेपीएआईसी के संचालन से जुड़ी कमेटी में अखिलेश यादव, धर्मेंद्र यादव, डिंपल यादव और राजेंद्र चौधरी समेत कई लोगों को शामिल किया गया था। इस तरह केंद्र को व्यक्तिगत संपत्ति के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश हुई। अखिलेश को इसके लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए। यूपी में संसाधनों व प्रतिभा की कमी कभी नहीं थी। प्रदेश का युवा प्रतिभाशाली और ऊर्जावान था, किसान मेहनती था तथा व्यापारी और उद्यमी बनने की क्षमता रखता था। इसके बावजूद पिछली सरकारों की नीतियों और भ्रष्टाचार के कारण प्रदेश पिछड़ गया।

सीएम ने किया बाढ़ग्रस्त गांवों का हवाई निरीक्षण

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण करते हुए आए हैं। बांसडीह, बलिया और बैरिया विधानसभा क्षेत्रों में कटान और जलप्लावन से प्रभावित गांवों का निरीक्षण करने के बाद वह लोगों के बीच पहुंचे हैं। राहत कार्यों को लेकर वह लगातार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के संपर्क में रहे तथा कई बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी स्थिति की समीक्षा की। उद्देश्य यही रहा कि बाढ़ से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को परेशानी न हो।

राहत किट में आटा-चावल से लेकर टॉर्च और छतरी तक

सीएम ने कहा कि बाढ़ पीड़ित परिवारों को राहत किट उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, दो किलो अरहर की दाल, दो किलो चना, दो किलो भुना चना, एक किलो चीनी, 10 पैकेट बिस्कुट, माचिस, मोमबत्ती, दो नहाने के साबुन और एक तिरपाल शामिल है। इसके अलावा हल्दी, मिर्च, सब्जी मसाला, एक किलो रिफाइंड तेल, एक किलो नमक, सैनिटरी पैड, कपड़े धोने के दो साबुन, तौलिया, सूती कपड़ा, डिस्पोजल बैग, डेटॉल और 10 किलो आलू भी दिया जा रहा है। राहत किट में ढाई किलो लाई, एक बाल्टी, एक मग, एक टॉर्च और एक छतरी भी उपलब्ध कराई जा रही है। बाढ़ प्रभावितों के लिए मेडिसिन किट में ओआरएस पाउडर और आवश्यक दवाएं दी जा रही हैं। साथ ही पर्याप्त मात्रा में क्लोरीन की गोलियां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि दूषित पानी से होने वाली समस्याओं से बचाव हो सके।

सांप-बिच्छू के काटने से लेकर रेबीज तक की दवाओं का इंतजाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ के दौरान सांप, बिच्छू और अन्य विषैले कीड़ों के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कुत्ते के काटने और जंगली जानवरों के हमले की शिकायतें भी सामने आती हैं। इसे देखते हुए सभी सीएचसी और जिला अस्पतालों में एंटी-स्नेक और एंटी-रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। सरकार का प्रयास केवल लोगों को सुरक्षित बचाना ही नहीं, बल्कि उनके पशुधन को भी नुकसान से बचाना है। पशुओं के टीकाकरण, दवाओं और उनके लिए जरूरी खाद्य सामग्री की व्यवस्था की जा रही है।

गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए अलग व्यवस्था

सीएम ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं का चिह्नीकरण किया जा रहा है। बच्चों व गर्भवती महिलाओं के लिए अलग से राहत सामग्री उपलब्ध कराने तथा उनकी विशेष देखभाल की व्यवस्था की जा रही है। यह कार्य इसलिए तेजी से हो पा रहा है, क्योंकि जनता ने अच्छे विधायक चुने हैं। राहत किट वितरण के दौरान हर व्यक्ति को करीब 50 किलो तक सामग्री दी गई है। यह सामग्री वाहनों के माध्यम से उनके घर तक पहुंचाई जाएगी।

दुर्घटनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए कई राहत व्यवस्थाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आपदा और दुर्घटनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए कई राहत व्यवस्थाएं लागू की हैं। सर्पदंश से मृत्यु पर तत्काल चार लाख रुपए की सहायता दी जाती है। 2017 से पहले यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। जंगली जानवरों के हमले में मृत्यु होने पर भी सरकार सहायता देती है। पागल कुत्ते के काटने से होने वाली दुर्भाग्यपूर्ण मौत पर भी राहत का प्रावधान है। ऐसे मामलों में परिवार को 24 घंटे के अंदर सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

बाढ़ या आकाशीय बिजली से किसान की मौत पर 5 लाख रुपए 

सीएम ने कहा कि किसान, बटाईदार किसान या उनके परिवार के किसी सदस्य की बाढ़ अथवा आकाशीय बिजली से मृत्यु होने पर मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपए की सहायता दी जाती है। बाढ़ के कारण मकान या झोपड़ी नष्ट होने पर सरकार तत्काल परिवार को नया मकान बनाने के लिए जमीन का पट्टा उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास भी स्वीकृत किया जाता है। 

घाघरा नदी की ड्रेजिंग पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने बलिया में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान का भरोसा दिलाते हुए कहा कि जल शक्ति मंत्री को इस संबंध में व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं। मैंने स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया है और कई स्थानों पर घाघरा नदी को ड्रेजिंग के माध्यम से चैनलाइज करने की आवश्यकता दिखाई देती है। ड्रेजिंग से निकलने वाली सिल्ट को तटबंध के सामने उपयोग किया जाए। जरूरत वाले स्थानों पर बोल्डर से ठोकर बनाए जाएं, जिससे नदी के कटान को रोका जा सके और बाढ़ का खतरा कम हो।

पहले 36-40 जिलों में आती थी बाढ़

सीएम ने कहा कि पहले बारिश के दौरान 36-40 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनती थी, जबकि इस बार 26 जनपद प्रभावित हुए हैं। इस बार भी जन-धन की क्षति न्यूनतम रही है और जनहानि लगभग न के बराबर हुई है। सरकार का प्रयास है कि राहत और बचाव के साथ-साथ बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। बलिया के लोगों की प्रतिभा और ऊर्जा को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान और विकास कार्यों को गति देना जरूरी है।

बलिया में बाबा भृगु के नाम पर मेडिकल कॉलेज

मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिया में बाबा भृगु के नाम पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने धनराशि स्वीकृत कर दी है। बलिया में बाबा भृगु धाम कॉरिडोर का निर्माण भी कराया जा रहा है। यह मंगल पांडे, चित्तू पांडे व जयप्रकाश नारायण की भूमि है। ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक विरासत को देखते हुए यहां विकास के साथ विरासत संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बलिया के सिताब दियारा को जेपी की पावन भूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि मुझे वहां जाने के कई अवसर मिले हैं और जल्द ही वहां फिर कार्यक्रम बनाने की तैयारी है।

बुजुर्ग महिलाओं को अब निशुल्क बस यात्रा सुविधा

मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर परिवहन निगम की बसों में माता-बहनों को तीन दिन तक निशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई। दो दिन में ही लाखों महिलाओं ने सहयात्रियों के साथ इस सेवा का लाभ उठाया। आज भी निशुल्क बस यात्रा की सुविधा जारी है। अगले दिन से 60 वर्ष से अधिक उम्र की हर महिला को निगम की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। वे प्रदेश में कहीं भी यात्रा कर सकेंगी। जब जनता अच्छी सरकार चुनती है तो उसका लाभ राहत, सुरक्षा, जनकल्याण और विकास के रूप में दिखाई देता है।

 

बेटियों और व्यापारियों की सुरक्षा से समझौता नहीं

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि जिन लोगों के शासन में अराजकता फैली, युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ और बेटियों तथा व्यापारियों की सुरक्षा प्रभावित हुई, वे किस मुंह से नौजवानों की बात करते हैं। डबल इंजन सरकार में कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। किसी ने बेटी या व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाने का प्रयास किया तो उसके लिए जेल या जहन्नुम ही जगह होगी। सपा शासन में हर जिले में माफिया समानांतर सत्ता चलाते थे। हमारी सरकार ने माफिया को मिट्टी में मिला दिया। अब प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया नहीं, बल्कि वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज का दौर है।

 

इस अवसर पर मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, दयाशंकर मिश्र दयालु, दयाशंकर सिंह, राज्य मंत्री दानिश आजाद, राज्यसभा सदस्य नीरज शेखर, विधायक केतकी सिंह, विधायक हंसुराम, विधान परिषद सदस्य रवि शंकर (पप्पू सिंह) भाजपा जिला अध्यक्ष संजय मिश्र, राज्य महिला आयोग की सदस्य सुनीता श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

जनता दर्शन में CM योगी ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं

जनता दर्शन में CM योगी ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं

CM Yogi Janta Darshan

CM Yogi Janta Darshan: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान शनिवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि बिना भेदभाव, हर व्यक्ति की समस्या का समाधान कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की शिकायतों का निस्तारण संवेदनशीलता और शीघ्रता से किया जाए। उन्होंने हर पात्र व्यक्ति को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था करने और जमीन कब्जाने वाले भू माफिया व दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

 

महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करीब 200 लोगों से मिले। कुर्सियों पर बैठे लोगों तक वह खुद गए। उनकी समस्याओं व शिकायतों को ध्यान से सुना। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि हर पीड़ित की समस्या का पारदर्शी समाधान सुनिश्चित कराया जाएगा। 

 

जनता दर्शन में हर बार की तरह कुछ लोग गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। इन लोगों से मुख्यमंत्री ने कहा कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का एस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए, सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी। सीएम ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में शीघ्रता से निस्तारण के निर्देश दिए। जनता दर्शन में कुछ लोग पारिवारिक विवादों के मामले भी लेकर आए थे। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पारिवारिक विवादों में सर्वप्रथम सबंधित पक्षों के बीच संवाद कराने की पहल की जाए। 

मुख्यमंत्री ने की गोसेवा, गोवंश को खिलाया गुड़

गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। मुख्यमंत्री ने गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से पूड़ी-गुड़ खिलाया।

 

नेपाल की ग्लेशियर बाढ़ ने बजाई कश्मीर के लिए खतरे की घंटी, बढ़ती ग्लेशियल झीलें बन सकती हैं तबाही की वजह

नेपाल की ग्लेशियर बाढ़ ने बजाई कश्मीर के लिए खतरे की घंटी, बढ़ती ग्लेशियल झीलें बन सकती हैं तबाही की वजह

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नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों और उनसे बनी झीलों के खतरे की घंटी फिर बजा दी है। 26 अगस्त की घटना में बर्फ, चट्टान और मलबे के साथ अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। इसका सीधा सबक कश्मीर हिमालय के लिए भी महत्वपूर्ण है, जहां बढ़ते तापमान और ग्लेशियरों के पीछे हटने से ग्लेशियल झीलों की संख्या और आकार दोनों बढ़ रहे हैं। ALSO READ: नेपाल की बाढ़ में फंसे 320 भारतीयों से संपर्क नहीं, खरगे ने PM मोदी और अमित शाह से की बड़ी मांग

 

कश्मीर पर जनवरी 2026 में प्रकाशित एक विस्तृत अध्ययन के अनुसार 1992 से 2024 के बीच क्षेत्र में 155 ग्लेशियल झीलों का वैज्ञानिक आकलन किया गया। खास चिंता की बात यह है कि बर्फ से सीधे जुड़ी प्रोग्लेशियल झीलों के क्षेत्रफल में 32 वर्षों में 26 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई है।

 

इससे पहले ऊपरी झेलम बेसिन के एक अध्ययन में 393 ग्लेशियल झीलें चिन्हित की गई थीं, जिनमें 102 प्रोग्लेशियल, 13 सुप्राग्लेशियल और 278 अन्य ग्लेशियल झीलें शामिल थीं। इनमें 21 झीलों को संभावित रूप से खतरनाक पाया गया—सात उच्च, नौ मध्यम और पांच निम्न खतरे की श्रेणी में। इन संभावित खतरनाक झीलों का क्षेत्रफल 1980 के 5.92 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2020 में 8.46 वर्ग किलोमीटर, यानी करीब 30 प्रतिशत बढ़ गया।

 

एक अन्य दीर्घकालिक अध्ययन में कश्मीर हिमालय की ग्लेशियल झीलों की संख्या 1990 के 253 से बढ़कर 2018 में 324 हो गई, जबकि उनका कुल क्षेत्रफल 18.84 से बढ़कर 22.13 वर्ग किलोमीटर हो गया। अध्ययन के अनुसार 0.1 वर्ग किलोमीटर से बड़ी झीलें अचानक फटने पर नीचे के इलाकों में विनाशकारी बाढ़ पैदा करने की क्षमता रखती हैं। खतरा केवल झील के फटने तक सीमित नहीं है। ग्लेशियर का टूटना, हिमस्खलन, चट्टानों का झील में गिरना अथवा भूकंपीय हलचल झील की प्राकृतिक बांध जैसी संरचना को तोड़ सकती है। इसके बाद पानी, बर्फ और मलबे की तेज धारा घाटियों में कई किलोमीटर तक तबाही मचा सकती है।

 

नेपाल की घटना ने इस जोखिम को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक गर्म होते हिमालय में ग्लेशियरों का पीछे हटना, पर्माफ्रॉस्ट का कमजोर होना और अस्थिर पर्वतीय ढलान आपस में मिलकर ऐसी घटनाओं की संभावना बढ़ा रहे हैं। ALSO READ: नेपाल-तिब्बत सीमा पर मंडराया बड़ा खतरा, 72 घंटे में टूट सकती है बैरियर लेक, फिर आ सकती है प्रलयंकारी बाढ़

 

कश्मीर के लिए चुनौती अब केवल ग्लेशियरों की निगरानी नहीं, बल्कि संभावित खतरनाक झीलों की 24 घंटे निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और निचली घाटियों में त्वरित निकासी योजना तैयार करना है। नेपाल की त्रासदी ने स्पष्ट कर दिया है कि हिमालय में छोटी-सी झील भी अचानक बड़े जलप्रलय में बदल सकती है।