टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामला: अभिनेता के घर पहुंचे एकनाथ शिंदे, बोले- ’90 के दशक जैसा गैंगवार बर्दाश्त नहीं’

टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामला: अभिनेता के घर पहुंचे एकनाथ शिंदे, बोले- '90 के दशक जैसा गैंगवार बर्दाश्त नहीं'

tiger shroff and eknath shinde

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ रविवार को मुंबई में एक भीषण गोलीबारी की घटना में बाल-बाल बच गए। कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जिसके बाद से महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है। विपक्ष ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस बीच उपमुख्‍यमंत्री एकनाथ शिंदे ने टाइगर श्राफ से मुलाकात की और उनका हाल जाना। ALSO READ: अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग, घटना का वाडियो आया सामने, मामले की जांच में जुटी पुलिस

 

टाइगर और उनकी मां सदमें में

घटना की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे देर रात टाइगर श्रॉफ के आवास पहुंचे और उनका हालचाल जाना। मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए शिंदे ने कहा कि यह एक बेहद गंभीर और निंदनीय घटना है। हमलावरों ने पांच राउंड गोलियां चलाईं, गनीमत रही कि टाइगर सुरक्षित हैं, हालांकि उनके ड्राइवर और एक ऑटो रिक्शा चालक को चोटें आई हैं। उन्होंने आगे बताया कि अभिनेता के बाएं हाथ में बारूद और कांच के टुकड़े लगने से मामूली चोट आई है और इस घटना से टाइगर श्रॉफ व उनकी मां दोनों गहरे सदमे में हैं।

 

’90 के दशक का गैंगवार नहीं लौटने देंगे’

कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सार्वजनिक हस्तियों को मिलने वाली धमकियों से सख्ती से निपटेगी। उन्होंने कहा, “90 के दशक में इस तरह की गैंगवार आम बात थी, जिसे मुंबई पुलिस ने 1995 में खत्म कर दिया था। लोगों को डराने-धमकाने के ऐसे नापाक प्रयासों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हम इस गुंडागर्दी का पूरी तरह अंत करेंगे।”

 

विपक्ष के निशाने पर सरकार

रविवार को हुई इस सनसनीखेज घटना के बाद से महाराष्ट्र सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कई टीमों का गठन कर दिया है और हमलावरों की तलाश तेज कर दी है।

 

सलमान के घर की सुरक्षा सख्‍त

पुलिस ने टाइगर श्राफ के साथ ही सलमान खान के घर की सुरक्षा भी सख्‍त कर दी है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग सलमान को भी कई बार जान से मारने की धमकी दे चुकी है।

राहुल ने दी केस करने की चुनौती

पणजी। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के जरिए वोट चोरी के आरोपों को दोहराते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को चुनौती दी है कि वह उनके ऊपर मुकदमा करे। राहुल ने कहा है कि वे लगातार वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे डंके की चोट पर कहते हैं कि और राज्य में कहते हैं कि प्रधानमंत्री वोट चोरी करते हैं। फिर भी उनके ऊपर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता है।

गौरतलब है कि गोवा में चार महीने के बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं उससे पहले राज्य के दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी ने कहा, ‘मैं हर राज्य से कहता हूं पीएम वोट चोरी करते हैं। लेकिन मुझ पर कोई केस दर्ज नहीं होता। क्योंकि, ये जानते हैं कि अगर केस हुआ तो मामला लीगल हो जाएगा और ये फंस जाएंगे’। उन्होंने दावा करते हुए कहा, ‘दिल्ली में हम कुछ ही समय में पीएम, गृहमंत्री से निपट लेंगे। काम जारी है। सरकार की एक्सपायरी डेट आने वाली है’। राहुल ने आगे कहा, ‘आपने देखा है कि आजकल पीएम सामने खड़े नहीं हो सकते हैं। क्योंकि ये जानते हैं कि देश का युवा इनके खिलाफ खड़ा हो गया है’।

राहुल गांधी गोवा विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के जनसंपर्क अभियान ‘गोय राखोन यात्रा’ में शामिल होने पहुंचे थे। यहा यात्रा 28 दिन चली थी और इसमें राज्य की सभी 40 विधानसभा सीटों को कवर किया गया। राहुल का पिछले चार सालों में यह पहला गोवा दौरा है।

कांग्रेस की यात्रा के समापन कार्यक्रम में राहुल ने कहा, ‘पूरी दुनिया मानती थी कि इंडिया का एजुकेशन सिस्टम नंबर वन मॉडल का था। लेकिन, आज दिल्ली में स्टूडेंट्स को ही मारा जा रहा है। हर एजुकेशनल सिस्टम में इन्होंने बीजेपी और आरएसएस के लोग बैठे हुए हैं’। उन्होंने दावा किया कि राज्य में बहुत भ्रष्टाचार है और कांग्रेस जीतेगी तो इसे समाप्त करेगी। उन्होंने कहा, ‘हाईटेक करप्शन, जमीन का करप्शन ये यहां करते हैं। जैसे पहले गुजरात में नरेंद्र मोदी का मॉडल था। वैसे ही गोवा में करप्शन का मॉडल है। इसे सिर्फ कांग्रेस ही खत्म कर सकती है’।

राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी गोवा में है। उन्होंने कहा, ‘पहले मास्टर प्लान था, मास्टर प्लान को रद्द कर दिया। इनका यही काम है कि पैसा कैसे बनाए। इनका यही काम है। गोवा की जनता को लूटने का, आपकी जमीन छीनकर अरबपतियों को देने का’। उन्होंने कहा कि गोवा देश में सबसे सुंदर जगह है, सबसे अच्छा कल्चर है। लेकिन यहां भी सरकार लोगों की जमीन छीनकर गोवा के जो बाहर के लोगों को करोड़ों में बेचती है।

प्रवासियों के कारण जल रहा है फ्रांस

नई दिल्ली। फ्रांस में पिछले कई दिन से हो रहे दंगे और भड़क गए हैं। राजधानी पेरिस से लेकर दूर दराज के शहरों में भी हिंसा फैल गई है। फ्रांस की पुलिस के मुताबिक रविवार तक करीब दो हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने फ्रांस के हालात पर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप और वेंस दोनों ने कहा है कि प्रवासियों के कारण फ्रांस के ऐसे हालात हैं। दोनों ने फ्रांस को सीमा बंद करने को कहा है।

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने फ्रांस से अपनी सीमाएं बंद करने की अपील की है और कहा है कि यह सब कुछ प्रवासियों के कारण हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरी दुनिया से आए लोगों के मन सिर्फ नफरत भरी है। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा, ‘फ्रांस जल रहा है। एक बिल्कुल अलग दुनिया से आए लोगों के आप्रवासन ने, जिसके दिलों में नफरत भरी है, इस कभी महान रहे देश को तबाह कर दिया है। बहुत देर होने से पहले अपनी सीमाएं बंद करें और नियंत्रण अपने हाथ में लें’।

गौरतलब है कि फ्रांस में बड़े पैमाने पर विरोध, प्रदर्शन चल रहे हैं। कहा जा रहा है कि बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। लेकिन ज्यादातर जगहों पर प्रवासी इस हिंसा में शामिल हैं। इस प्रदर्शन में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, बड़े पैमाने पर लूटपाट हुई और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, इन प्रदर्शनों में साढ़े पांच लाख के करीब लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारी दुकानें लूट रहे हैं और उसमें आग लगा रहे हैं।

अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इसके लिए आव्रजन को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि फ्रांस और अन्य पश्चिमी देश, लोगों को समाज में शामिल करने और उनके बीच तालमेल बिठाने के मुद्दे को सुलझाने में विफल रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में वेंस ने कहा, ‘पश्चिमी उदारवादियों ने विविधता और करुणा के नाम पर ‘तीसरी दुनिया’ के लोगों को फ्रांस और अन्य देशों में लाकर बसा दिया। उन्होंने समाज में घुलने मिलने और तालमेल बिठाने जैसे बुनियादी सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया’।

एक्टर टाइगर श्रॉप पर फायरिंग

मुंबई। फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ के ऊपर रविवार की शाम को फायरिंग हुई। हमलावरों ने पांच राउंड गोलियां चलाईं। हालांकि टाइगर श्रॉप को गोली नहीं लगी, लेकिन अंधाधुंध फायरिंग में उनका ड्राइवर और एक ऑटो रिक्शा चालक घायल हो गया। लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। लॉरेंस गैंग के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पोस्ट लिख कर हमले की जिम्मेदारी ली है और कहा है कि जो भी सलमान खान के साथ काम करेगा उसके साथ ऐसा ही होगा। टाइगर श्रॉफ मशहूर फिल्म स्टार जैकी श्रॉफ के बेटे हैं।

बहरहाल, पुलिस के मुताबिक बाइक सवारों ने जुहू में टाइगर श्रॉफ के ऊपर पांच राउंड फायरिंग की। बताया जा रहा है कि, टाइगर फुटबॉल खेलकर कार से लौट रहे थे। जब वह जुहू के पुष्पा पार्क के पास पहुंचे तो उन्हें देखने के लिए भीड़ जमा हो गई। तभी एक बाइक पर सवार तीन लोग वहां पहुंचे। हमलावरों ने बिना किसी कहासुनी के अचानक टाइगर की गाड़ी पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। टाइगर के ड्राइवर और पास में मौजूद एक ऑटो रिक्शा चालक को गोली लगी है।

हमले के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है, जिसमें लॉरेंस गैंग के अनिल पंडित ने फायरिंग की जिम्मेदारी ली। इसमें लिखा कि सलमान खान के साथ काम करने वाले का यही अंजाम होगा। अनिल पंडित के साथ हरमन संधू ने फायरिंग की जिम्मेदारी ली है। अनिल पंडित ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है, ‘हमने इसे समझाया था, इसको समझ नहीं आया। आज हमने इसको सही से समझा दिया है। मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में जो हमारी बात नहीं सुनेगा, या सलमान के साथ काम करेगा, अगला नंबर उसी का होगा’।

गौरतलब है कि लॉरेंस गैंग ने काला हिरन मामले की वजह से सलमान खान को भी धमकी दे रखी है। दो साल पहले अक्टूबर 2024 में बाबा सिद्दीकी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। वे भी सलमान के करीबी थे। लॉरेंस गैंग ने ही उस कांड की भी जिम्मेदारी ली थी। बहरहाल, रविवार को टाइगर श्रॉप पर हमले के बाद पुलिस ने इलाके को सील कर दिया है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि हमलावरों की बाइक का नंबर और उनकी पहचान की जा सके। पुलिस चश्मदीदों के बयान दर्ज कर रही है।

पंडाल हादसे में सात गिरफ्तार

कोलकाता। दुर्गापूजा पंडाल में हुए हादसे के बाद पंडालों की कई व्यवस्था में बदलाव किया गया है। वीआईपी पास की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। इसकी घोषणा खुद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने की है। गौरतलब है कि शनिवार की रात को हुए हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 19 हो गई है। इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनके ऊपर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।

हादसे के एक दिन बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा कि सरकार दुर्गा पूजा पंडालों में वीआईपी गेट की व्यवस्था अनिवार्य रूप से खत्म कर सकती है। गौरतलब है कि लोकप्रिय और बड़े बजट वाले पूजा आयोजक आमतौर पर वीआईपी पंडाल विजिटर्स के लिए अलग प्रवेश की व्यवस्था करते हैं। इन रास्तों पर कम भीड़ रहती है। श्रद्धालुओं को प्रीमियम कीमत पर विशेष पास दिए जाते हैं, जिनके जरिए वे वीआईपी गेट से पंडाल में प्रवेश करते हैं।

बहरहाल, कोलकाता के दुर्गापूजा पंडाल में हुई भगदड़ के मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनको पुलिस ने रविवार को स्थानीय अदालत में पेश किया। अदालत ने सभी को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। इस बीच कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार रात भगदड़ के दो वीडियो रविवार को सामने आए। 27 सेकेंड के एक वीडियो में बारिश के बीच सैकड़ों लोग दौड़ते हुए पंडाल में घुसते दिख रहे हैं। पंडाल के अंदर के एक अन्य वीडियो में संकरे रास्ते में लोगों की भारी भीड़ फंसी दिख रही है।

वहां इतनी भीड़ है कि लोग एक दूसरे से सटकर खड़े थे और दबाव के कारण हिलने डुलने तक की जगह नहीं थी। महिलाएं और बच्चे मदद के लिए चीख रहे थे। हादसे में 19 लोगों की मौत हुई, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। इनमें से पांच लोग आईसीयू में भर्ती हैं। पुलिस ने पूजा कमेटी के सचिव और उपाध्यक्ष सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया है। उन पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है।

सीएम पर भतीजे को बचाने का आरोप

कोलकाता। चोरबागान दुर्गापूजा पंडाल में शनिवार रात को हुए हादसे के बाद इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस मामले के दोषियों को बचाया जा रहा है। टीएमसी ने यह भी आरोप लगाया है कि हादसे के दोषियों में एक मुख्यमंत्री का भतीजा भी है, जिसे बचाया जा रहा है।

तृणमूल कांग्रेस ने कोलकाता पुलिस को टैग करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में तीन लोगों के नाम गिनाएं और पूछा इन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी या सीएम उन्हें बचा रहे हैं? ममता की पार्टी ने एक्स पोस्ट में देबदीप अधिकारी को मुख्य संरक्षक बताया है, जो सीएम शुभेंदु अधिकारी के भतीजे हैं।  विजय ओझा को अध्यक्ष बताया है, जो भाजपा के विधायक हैं। इसके अलावा तीसरा नाम तमोघना घोष का है, इन्हें मुख्य सलाहकार बताया गया है। तमोघना उत्तरी कोलकाता के भाजपा जिला अध्यक्ष हैं।

तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है, ‘मुख्यमंत्री ने खुद चोरबागान पूजा पंडाल का उद्घाटन किया था। क्या पंडाल में जाते समय उन्होंने सुरक्षा इंतजामों पर ध्यान नहीं दिया? क्या जान गंवाने वाले हर एक व्यक्ति के लिए उन्हें जवाबदेह नहीं ठहराया जाएगा’? तृणमूल के आरोपों पर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता और विधायक रितेश तिवारी ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि मुख्यमंत्री का कोई रिश्तेदार पूजा समिति से जुड़ा है या नहीं। हालांकि, उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई रिश्तेदार समिति से जुड़ा भी हो तो क्या वह अपने रहते ऐसी त्रासदी होने देना चाहेगा?

ग्वालियर में ट्रक ने श्रद्धालुओं को कुचला, 15 की मौत

भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शनिवार की देर रात को एक बड़ा हादसा हो गया। एक तेज रफ्तार ट्रक ने 41 श्रद्धालुओं को कुचल दिया। इसस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई और दो पुलिसकर्मी सहित 26 लोग घायल हैं। हादसा देर रात करीब डेढ़ बजे चीनौर रोड पर ढलान के पास हुआ, जहां श्रद्धालु शीतला माता मंदिर में दर्शन के लिए सड़क किनारे लाइन में लगे थे।

बताया गया है कि चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर बेकाबू हो गया। यह भी बताया गया है कि ड्राइवर गूगल मैप की मदद से ट्रक चला रहा था। ढलान पर ट्रक पुलिस चेकपोस्ट तोड़ते हुए लोगों को कुचलकर मंदिर की बाहरी दीवार और गेट से जा टकराया। इससे मंदिर की दीवार ढह गई। कई लोग मलबे में दब गए।

हादसे में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। हालांकि पुलिस ने ट्रक ड्राइवर और ट्रक मालिक दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि ट्रक का ब्रेक फेल हो गया था। इस बीच हादसे के बाद सरकार ने सिटी एसपी को हटा दिया है। साथ ही आठ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को भी निलंबित स्पेंड किया गया है। इनमें चार टीआई हैं।

क्या है सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और इसके लिए कोर्ट क्या सजा देती है?

क्या है सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और इसके लिए कोर्ट क्या सजा देती है?

supreme court

-समीरात्मज मिश्र

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पाबंदियां लगाने से जुड़े एक मामले में केंद्रीय गृह सचिव समेत तीन वरिष्ठ अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया। अधिकारियों ने अदालत में माफी मांगी, हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनके स्पष्टीकरण और माफी के स्वरूप पर सवाल उठाए। ALSO READ: कमजोर मानसून के बाद भारत में पानी और बिजली की किल्लत

 

दो दिन पहले ही एसआईआर से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ उनकी टिप्पणियों पर अवमानना नोटिस जारी किया। इन मामलों ने एक बार फिर अदालत की अवमानना को लेकर बहस शुरू कर दी है। आखिर अवमानना क्या होती है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट क्या सजा दे सकता है।

 

अदालत की अवमानना क्या होती है?

भारत में अदालत की अवमानना मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है— दीवानी अवमानना और आपराधिक अवमानना। इनके प्रावधान अदालत की अवमानना एक्ट 1971 में दिए गए हैं।

 

दीवानी अवमानना तब हो सकती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर अदालत के फैसले, आदेश या निर्देश का पालन नहीं करता। अदालत के सामने किए गए किसी वादे का जानबूझकर उल्लंघन भी इसके दायरे में आ सकता है।

 

विरोध-प्रदर्शनों पर पाबंदियों से जुड़ा हालिया मामला इसी सवाल के इर्द-गिर्द है। अदालत के सामने आरोप लगाया गया कि सीजेपी के प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से उठाए गए कुछ कदम मसलन, इंटरनेट बंद करना, मेट्रो और ट्रेनों के संचालन को रोकना उसके पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से जवाब मांगा और यह स्पष्ट करने को कहा कि संबंधित कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई।

 

सुप्रीम कोर्ट में अवमानना नोटिस के जवाब में अधिकारियों का कहना था कि उन्होंने जानबूझकर अवमानना नहीं की बल्कि ये कदम सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाए गए थे।

 

दूसरी तरफ आपराधिक अवमानना का संबंध ऐसे कामों से है जो अदालत की प्रतिष्ठा को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हों, न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालते या न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करते हों। इसमें लिखित और मौखिक बयान दोनों शामिल हो सकते हैं।

 

हालांकि इसका यह मतलब भी नहीं है कि अदालत के हर फैसले की आलोचना अवमानना है। सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील रवींद्र गड़िया कहते हैं, “न्यायिक फैसलों के तर्कों पर सवाल उठाना और उनकी आलोचना करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है लेकिन सवाल यह है कि आलोचना कहां तक वैध है और किस बिंदु पर वह न्याय प्रशासन में बाधा डालने वाली कार्रवाई बन जाती है।” ALSO READ: प्रदर्शन का हक बनाम पुलिस की पाबंदी, क्या कहता है संविधान

 

अवमानना के लिए सुप्रीम कोर्ट कितनी सजा दे सकता है?

अदालत की अवमानना के लिए सजा का प्रावधान कानून में स्पष्ट है। अदालत की अवमानना एक्ट 1971 की धारा 12 के मुताबिक, दोषी पाए जाने पर अधिकतम छह महीने की साधारण कैद, दो हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।

 

हालांकि कानून में माफी का भी प्रावधान है। यानी अगर अदालत को लगता है कि संबंधित व्यक्ति की माफी पर्याप्त और स्वीकार करने योग्य है, तो वह आरोप से मुक्त कर सकती है या सजा माफ कर सकती है। दीवानी अवमानना के कुछ मामलों में अदालत दोषी व्यक्ति को सिविल जेल भेजने का आदेश भी दे सकती है।

 

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अवमानना का नोटिस मिलते ही जेल जाना तय हो जाता है। रवींद्र गड़िया के मुताबिक, “पहले अदालत को आरोपों, उपलब्ध सामग्री और संबंधित व्यक्ति के जवाब पर विचार करना होता है। उसके बाद ही दोष और सजा पर फैसला लिया जा सकता है। अदालत यह भी देखती है कि उल्लंघन जानबूझकर किया गया था या नहीं, संबंधित व्यक्ति ने बाद में क्या कदम उठाए और क्या न्यायिक आदेश का पालन सुनिश्चित हो गया है। इन सबकी पड़ताल करने के बाद ही सजा पर फैसला होता है।”

 

दिलचस्प तथ्य यह है कि अदालतों में अवमानना के मामले तो बड़ी संख्या में दायर होते हैं लेकिन उनमें सजा बहुत कम मामलों में हो पाती है। लीगल-टेक कंपनी द प्रोफेसर वकीलों और मुकदमा लड़ने वाले लोगों को अदालतों से जुड़े डेटा का विश्लेषण उपलब्ध कराने पर काम करती है। कंपनी के विश्लेषण के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में सिविल अवमानना के कुल 5,566 मामले लंबित हैं या उन पर कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें विभिन्न पक्षों की तरफ से दायर 5,533 याचिकाएं और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से खुद शुरू किए गए 33 मामले शामिल हैं।

 

अवमानना मामलों में सजा की दर इतनी कम क्यों है?

विश्लेषण से पता चलता है कि अवमानना के सिर्फ बीस मामलों में यानी करीब आधे फीसदी मामलों में अवमानना के दोषी व्यक्ति को वास्तव में जेल या जुर्माने की सजा दी गई। कुछ मामलों में व्यक्ति को दोषी तो ठहराया गया, लेकिन जेल की सजा नहीं दी गई जबकि करीब 1।5 फीसदी मामलों को अदालत की तरफ से माफी स्वीकार किए जाने के बाद बंद कर दिया गया। वहीं, 98 प्रतिशत यानी 3,600 मामले ऐसे थे, जिनमें संबंधित व्यक्ति ने अदालत के आदेश का पालन कर लिया या मामले को खारिज कर दिया गया अथवा याचिका वापस ले ली गई।

 

सुप्रीम कोर्ट के वकील दुष्यंत पराशर कहते हैं कि सजा की कम दर की एक वजह यह है कि अवमानना की हर याचिका का मकसद संबंधित व्यक्ति को दंडित करवाना नहीं होता। डीडब्ल्यू से बातचीत में वो कहते हैं, “कई बार याचिका इसलिए दायर की जाती है ताकि अदालत के पहले के आदेश का पालन सुनिश्चित हो सके। अगर संबंधित पक्ष आदेश का पालन कर देता है, तो अदालत को अलग से सजा देना जरूरी नहीं लगता। इसलिए अवमानना कानून का मकसद केवल दंड देना नहीं, बल्कि न्यायिक आदेशों का सम्मान सुनिश्चित करना और न्याय प्रशासन को बाधित होने से बचाना भी है।”

 

अदालत की अवमानना से संबंधित कुछ चर्चित मामले

अदालत की आलोचना और अवमानना के बीच की सीमा पर बहस करने वाले मामलों में सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण का मामला काफी चर्चित है। साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके दो ट्वीट्स को आपराधिक अवमानना माना। इन टिप्पणियों में न्यायपालिका और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए एक रुपये का सांकेतिक जुर्माना लगाया जिसे उन्हें भरना पड़ा था। ऐसा नहीं करने पर उन्हें तीन महीने की कैद और वकालत पर पाबंदी लग सकती थी।

 

इसी तरह लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय को भी साल 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक अवमानना के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें एक दिन की साधारण कैद और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

 

हालांकि कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश सीएस कर्णन का मामला काफी चर्चित रहा। साल 2017 में जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई जजों पर खुले तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने उन्हें अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई। उस समय कर्णन हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश थे।

 

निशिकांत दुबे के मामले में खुद संज्ञान लेने की मांग

अप्रैल 2025 में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की सुप्रीम कोर्ट और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ टिप्पणियों को लेकर अवमानना की कार्रवाई की मांग उठी थी। निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को ‘देश में गृहयुद्ध भड़काने के लिए जिम्मेदार’ बताया था।

 

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर अनुरोध किया गया कि अदालत इन टिप्पणियों पर खुद संज्ञान लेकर उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करे। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उनकी टिप्पणियों को गैर-जिम्मेदाराना बताया।

 

लेकिन इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल उठाया कि किसी बयान को अनुचित या गैर-जिम्मेदाराना मानना और उसे कानूनी रूप से अवमानना मानना क्या अलग-अलग चीजें हैं।

 

सरकारी विभागों के अफसर कई बार ऐसा करते हैं कि अवमानना मामलों में अदालत से माफी मांग लेते हैं लेकिन उनकी कार्यशैली में कोई फर्क नहीं पड़ता। हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शनों से निपटने के मामले हों या फिर बुलडोजर कार्रवाइयों को लेकर अफसरों को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, अदालती आदेशों की अवहेलना कई बार दिखी है।

 

दुष्यंत पराशर इसे खतरनाक स्थिति बताते हैं, “जब सरकारें यह समझ लेती हैं कि अदालत आदेश देती रहे, हमें तो वही करना है जो हमारे फायदे में है, तब आम जनता का न्याय प्रणाली से भरोसा उठने लगता है। अगर अवमानना की कार्रवाई केवल कागजी नोटिस तक सीमित रह जाएगी और दोषी अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तो अवमानना का खौफ पूरी तरह खत्म हो जाएगा।”

 

दरअसल, अवमानना का नोटिस अपने आप में सजा नहीं है लेकिन यह बताता है कि अदालत अपने आदेशों के पालन को गंभीरता से ले रही है। अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि जानबूझकर अवहेलना साबित होती है या नहीं और संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण अदालत को संतुष्ट करता है या नहीं।

Top News 19 October: फायरिंग में बाल-बाल बचे टाइगर श्रॉफ, पेट्रोल में गन्ने वाला इथेनॉल मिलाने पर रोक

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Top News 19 October: फायरिंग में बाल बाल बचे टाइगर श्राफ, पेट्रोल में गन्ने वाला इथेनॉल मिलाने पर रोक, CEC के खिलाफ 23 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन, अमित शाह 20 अक्टूबर को पंजाब जाएंगे, भारत ने जिम्बाब्वे को 9 विकेट से हराया। पल पल की जानकारी…

 

टाइगर श्राफ पर फायरिंग

मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ गोलीबारी में बाल-बाल बच गए। लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली हमले की जिम्मेदारी। ताबड़तोड़ फायरिंग की इस घटना से महाराष्ट्र में सियासी पारा चढ़ा। विपक्षी दलों ने कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री फडणवीस को कटघरे में खड़ा किया है। शिवसेना नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने देर रात अभिनेता से उनके आवास पर मुलाकात की। ALSO READ: अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग, घटना का वाडियो आया सामने, मामले की जांच में जुटी पुलिस

 

पेट्रोल में गन्ने वाला इथेनॉल मिलाने पर रोक

केंद्र सरकार ने चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए गन्ने से बने इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने पर रोक लगा दी है। अब मक्का, टूटे चावल व अन्य पदार्थों से बने इथेनॉल का मिश्रण किया जाएगा। पेट्रोलियम कंपनियों से जारी निविदा में मक्के से बने इथेनॉल पर प्रोत्साहन राशि भी घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई।

 

CEC के खिलाफ 23 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन

‘पीपल अगेंस्ट एसआईआर’ नाम के नए बने मंच ने 23 अक्तूबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का बड़ा एलान किया है। संगठन ने संसद से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाकर उन्हें पद से हटाने और उन पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। इस संगठन का आरोप है कि एसआईआर की आड़ में देश के करोड़ों नागरिकों के मताधिकार छीन लिए गए हैं। 

 

अमित शाह का पंजाब दौरा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 20 अक्टूबर को पंजाब के दौरे पर आएंगे। इस दौरान वह मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मुलाकात कर सकते हैं। झोटा की 13 अक्टूबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

 

भारत ने जिम्बाब्वे को 9 विकेट से हराया

भारतीय महिला टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में एकतरफा अंदाज में जीत दर्ज की। रविवार को खेले गए मैच में भारत ने जिम्बाब्वे को 9 विकेट से हराया। जिम्बाब्वे ने मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए 102 रन बनाए। भारतीय बल्लेबाजों ने महज 8.5 ओवर में 103 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया।

यूपी की शक्ति स्वरूपा सोनू मलान ने परंपरा तोड़कर संभाला बस का स्टीयरिंग

यूपी की शक्ति स्वरूपा सोनू मलान ने परंपरा तोड़कर संभाला बस का स्टीयरिंग

Story of Sonu Malan female bus driver from Aligarh

– अलीगढ़ मंडल की इकलौती महिला बस चालक रोज लगाती हैं अलीगढ़ से नोएडा के बीच चार चक्कर।

– सोशल मीडिया पर 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स, योगी सरकार की पहल से साकार हुआ सपना।

– सोनू मलान महिलाओं को आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही हैं।

Female bus driver Sonu Malan : नवरात्रि के पावन पर्व पर जहां घर-घर मां भगवती की आराधना हो रही है, अलीगढ़-नोएडा हाइवे प्रतिदिन नारीशक्ति का खामोश गवाह बनता है। अलीगढ़ की सोनू मलान जब इस मार्ग पर रोडवेज बस चलाते हुए गुजरती हैं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘सशक्त नारी-समृद्ध उत्तर प्रदेश’ नारा चरित्रार्थ होता दिखाई देता है। पुरुष प्रधान माने जाने वाले परिवहन क्षेत्र में सोनू ने मेहनत और हौसले से अलग पहचान बनाई है।

 

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में बस चालक के पद पर तैनात सोनू रोज करीब 540 किलोमीटर बस चलाकर यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती हैं। उनका सफर उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो परंपरागत सोच से आगे बढ़कर अपनी अलग राह बनाना चाहती हैं।

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योगी सरकार की पहल से परिवहन जैसे क्षेत्र में महिलाओं को अवसर मिलना महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मिशन शक्ति का समग्र उद्देश्य भी नारी सुरक्षा, शिक्षा, सम्मान व स्वावलंबन से जुड़ा है। सोनू मलान की कहानी बताती है कि सही अवसर, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति से महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी जगह बना सकती हैं।

 

मंडल की इकलौती महिला बस चालक

अलीगढ़ के जट्टारी क्षेत्र स्थित हजियापुर गांव की रहने वाली 28 वर्षीय सोनू मलान ने वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में बस चालक के पद पर कार्यभार संभाला था। वह अलीगढ़ मंडल की इकलौती महिला बस चालक हैं। सोनू अलीगढ़ से नोएडा के बीच रोडवेज बस चलाती हैं और दिन में चार चक्कर लगाकर करीब 540 किलोमीटर की दूरी तय करती हैं।

जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ वह रोज यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। स्टीयरिंग व्हील पर एक लड़की को देखकर कई बस यात्रियों के चेहरे पर आश्चर्य के भाव आते हैं, लेकिन सोनू की कुशल ड्राइविंग देखकर वे उनकी तारीफ करना और धन्यवाद करना भी नहीं भूलते। 

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12 साल की उम्र से ही ट्रैक्टर चलाने की शौकीन थीं सोनू

सोनू को बचपन से ही गाड़ियां चलाने का शौक था। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने गांव में खेती-किसानी के काम के लिए ट्रैक्टर चलाना शुरू कर दिया था। गाड़ियां चलाने के प्रति उनका यही शौक आगे चलकर जुनून बन गया। वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में महिला बस चालकों की नियुक्ति का अवसर आया, तो सोनू ने भी इसमें रुचि दिखाते हुए आवेदन किया।

चयनित महिलाओं में अलीगढ़ की सोनू मलान और गाजियाबाद के सिकंदराबाद क्षेत्र की वेद कुमारी शामिल थीं। इस अवसर ने सोनू को अपने ड्राइविंग शौक को पेशे में बदलने का मौका दिया और वह बस चालक के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल रहीं।

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सोशल मीडिया पर भी लोकप्रिय हैं सोनू

सोनू मलान की पहचान सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी-खासी लोकप्रियता है। उनके यूट्यूब पर करीब दो लाख, इंस्टाग्राम पर डेढ़ लाख और फेसबुक पर साढ़े छह लाख फॉलोअर्स हैं। वह अक्सर बस चलाने से जुड़े वीडियो साझा करती हैं, जिन्हें लोग पसंद करते हैं। इस तरह सोनू अपने काम के जरिए न सिर्फ यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचा रही हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी महिलाओं को आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही हैं।

 

परिवार का साथ मिला, तो हौसले ने भरी उड़ान

सोनू मलान बताती हैं कि शुरुआत में कई लोगों ने कहा कि बस चलाना पुरुषों का काम है। लेकिन उनकी रुचि इसी क्षेत्र में बढ़ती गई और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके मुताबिक, योगी सरकार में उन्हें अवसर मिला और उन्होंने अपने हौसले से इस परंपरागत सोच को चुनौती दी। इस सफर में परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया। उनका भाई भी परिवहन निगम में बस चालक है, जबकि उनके पिता शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हैं।

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सोनू के अनुसार, बस में सफर करने वाली लड़कियां और महिलाएं उन्हें देखकर सुरक्षित महसूस करती हैं और उनके काम की सराहना भी करती हैं। कई महिलाएं उनसे प्रेरित होकर यह भरोसा जताती हैं कि वे भी अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं। सोनू की कहानी इसी विश्वास को मजबूत करती है कि अवसर और संकल्प साथ हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।