भारत के विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल

भारत के विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल

air india plane

विवेक कुमार

एक साल पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विमानन क्षेत्र को उभरते भारत की पहचान बताते हुए कहा था कि यह उद्योग नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है। लेकिन अब भारत के विमानन क्षेत्र को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी देश की दो सबसे बड़ी एयरलाइनों से जुड़ी घटनाओं ने सुरक्षा, नियामक व्यवस्था और वित्तीय स्थिरता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ALSO READ: नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

 

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े घरेलू विमानन बाजार के रूप में भारत ने पिछले दशक में तेज वृद्धि दर्ज की है, लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने इस विकास मॉडल की कमजोरियों को भी उजागर किया है। भू-राजनीतिक घटनाओं ने हालात को और जटिल बना दिया है, जिनसे एयरलाइनों की लागत बढ़ी है और विस्तार योजनाओं पर असर पड़ा है।

 

देश के घरेलू विमानन बाजार में एयर इंडिया और इंडिगो का दबदबा है। दोनों एयरलाइनों के पास मिलाकर घरेलू उड़ानों की लगभग 90 प्रतिशत सीट क्षमता है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिस्पर्धा की कमी भी उद्योग की चुनौतियों में एक महत्वपूर्ण कारक है।

 

मार्टिन कंसल्टिंग  के प्रमुख और एविएशन क्षेत्र के विशेषज्ञ मार्क मार्टिन कहते हैं कि वैश्विक प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता के लिहाज से 2025 और 2026 भारत के लिए विमानन क्षेत्र में सबसे कठिन वर्षों में रहे हैं। ALSO READ: टैक्सियों को लेकर क्यों लड़ते रहते हैं भारत के दो राज्य

 

सुरक्षा के सवाल

इस महीने एयर इंडिया की एक उड़ान से जुड़ी घटना ने नई चिंताएं पैदा कर दीं। थाईलैंड के फुकेट से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान अचानक लगभग 300 फुट नीचे आ गई, जिससे 24 यात्री घायल हो गए। घटना के बाद तब और विवाद बढ़ गया जब रिपोर्टों में दावा किया गया कि विमान के कप्तान की लैंडिंग के बाद की गई जांच में मारिजुआना सेवन के संकेत मिले।

 

इसके बाद एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों की एक बार विशेष मादक पदार्थ जांच कराने का फैसला किया। मामले की जांच जारी है और शुरुआती निष्कर्ष आने वाले हफ्तों में सामने आने की संभावना है।

 

यह घटना ऐसे समय हुई है जब एयर इंडिया पहले से ही सुरक्षा संबंधी सवालों के केंद्र में है। पिछले साल अहमदाबाद से लंदन जा रहे एक बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान हादसे में 241 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद एयरलाइन की सुरक्षा प्रक्रियाओं पर व्यापक ध्यान गया।

 

एक अलग ऑडिट में एयर इंडिया के भीतर सुरक्षा संबंधी लगभग 100 कमियां सामने आईं। संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार इनमें सात ऐसे उल्लंघन शामिल थे जिन पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई। रिपोर्ट में बोइंग 787 और बोइंग 777 विमानों के पायलटों के प्रशिक्षण में बार-बार सामने आने वाली कमियों का भी उल्लेख किया गया।

 

पूर्व एयरलाइन परिचालन प्रमुख शक्ति लुंबा का दावा है कि एयर इंडिया की सुरक्षा संस्कृति कमजोर है। उनके अनुसार केवल सुरक्षा की बात करने से सुरक्षा संस्कृति विकसित नहीं होती, बल्कि उसके लिए लगातार और ठोस कार्रवाई जरूरी होती है। डीजीसीए पर भी कई तरह के आरोप लगे हैं।

 

एयर इंडिया के पूर्व कार्यकारी निदेशक जितेंद्र भार्गव ने पायलट से जुड़े कथित मादक पदार्थ मामले को प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यदि कोई पायलट लंबे समय से ऐसे व्यवहार में शामिल हो तो उसके सहयोगियों को इसकी जानकारी होने की संभावना रहती है। ALSO READ: शहरों को ठंडा रखने वाले पेड़ों को भी अब चाहिए सहारा

 

वित्तीय दबाव के खतरे

सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के साथ-साथ भारतीय एयरलाइनों पर वित्तीय दबाव भी बढ़ रहा है। पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के बाद पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने से भारतीय विमानन कंपनियों को लंबे और अधिक महंगे मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

 

इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने एयरलाइनों की लागत और बढ़ा दी है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय एयरलाइनों को लगभग चार अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।

 

एयर इंडिया का घाटा पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर 2.3 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया, जबकि इंडिगो को लगातार दो तिमाहियों में नुकसान दर्ज करना पड़ा है।

 

वित्तीय दबाव का असर विस्तार योजनाओं पर भी दिखाई दे रहा है। इंडिगो ने पिछले महीने अपनी वाइड-बॉडी विमान सेवा बंद कर दी, जबकि रिपोर्टों के अनुसार एयर इंडिया सैकड़ों नए विमानों की खरीद को टालने पर विचार कर रही है।

 

कैसे होगा विस्तार?

पिछले दशक में भारतीय विमानन क्षेत्र ने तेजी से विस्तार किया है। पिछले साल भारतीय एयरलाइनों ने लगभग 16.7 करोड़ यात्रियों को सेवा दी, जो दस वर्ष पहले के मुकाबले दोगुने से अधिक है। इसी अवधि में देश में 70 से अधिक नए हवाई अड्डे जुड़े और एयरलाइनों ने लगभग 1,500 विमानों के ऑर्डर दिए।

 

स्टारएयर कंसल्टिंग के अध्यक्ष हर्ष वर्धन का कहना है कि समस्या विकास की कमी नहीं, बल्कि यह है कि विमानन पारिस्थितिकी तंत्र के अन्य हिस्से इस तेज वृद्धि के साथ तालमेल नहीं बिठा पाए। नियामकीय ढांचे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पिछले साल इंडिगो को पायलटों की थकान से जुड़े नए नियमों की पर्याप्त तैयारी ना होने के कारण बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि नए विश्राम नियमों के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से स्थगित किया जाना नियमगत कमजोरी का संकेत है। लुंबा का आरोप है कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) कई बार नियामक की बजाय सुविधाकर्ता की भूमिका निभाता दिखाई देता है।

 

पिछले दो दशकों में सात प्रमुख भारतीय एयरलाइनों का बंद होना या बिक जाना भी बाजार में प्रतिस्पर्धा कम होने का कारण बना है। इससे नियामकों के लिए प्रमुख कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना और मुश्किल हो गया है।

 

बड़ी तैयारी की जरूरत

सरकार ने पिछले साल कहा था कि देश को पांच बड़ी एयरलाइनों की जरूरत है। इसके बाद दो नई विमानन कंपनियों की योजनाओं को मंजूरी दी गई है। साथ ही हवाई अड्डा संचालकों को एयरलाइन स्वामित्व की अनुमति देने वाले नियमों में ढील देने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।

 

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नए निवेशकों को आकर्षित करना पर्याप्त नहीं होगा। उनके अनुसार लागत संरचना लंबे समय से इतनी कठिन रही है कि नई कंपनियों के लिए बाजार में जगह बनाना मुश्किल साबित हुआ है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की विमानन महत्वाकांक्षाओं के सामने सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि एक ओर इस क्षेत्र को देश के सबसे संभावनाशील उद्योगों में गिना जाता है, जबकि दूसरी ओर इस व्यापार से मुनाफे पर लगातार दबाव बना हुआ है।

नेपाल में बाढ़ से बहा पुल, राहुल गांधी के खिलाफ FIR; दिल्ली में 3565 H1N1 केस

नेपाल में बाढ़ से बहा पुल, राहुल गांधी के खिलाफ FIR; दिल्ली में 3565 H1N1 केस

top news 31 august

Top News 31 August : उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी। नेपाल में बाढ़ से एक झूला पुल बहा। नेपाल की विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद 900 से ज्यादा हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता। उत्तराखंड में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। दिल्ली में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले। 31 अगस्त की बड़ी खबरें :

 

उत्तर भारत में बारिश का कहर

उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश का दौर जारी। जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन से सांबा-मानसर मार्ग और बनी-बसोहली सड़क पर यातायात ठप हो गया। मौसम विभाग ने उत्तर भारत के 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5 सितंबर तक बारिश और बज्रपात का अनुमान जताया है।  

 

नेपाल में फिर बाढ़, झूला पुल बहा

नेपाल के मध्य हिस्से में रविवार सुबह त्रिशूली नदी में फिर बाढ़ आ गई। इस बाढ़ में एक झूला पुल बह गया। यह पुल गंडकी प्रांत के गोरखा जिले की गंडकी ग्रामीण नगरपालिका-8 के घ्यालचोक को पृथ्वी राजमार्ग के पास स्थित चरौंदी से जोड़ता था।

 

सुरंगों में फंसे 900 से ज्यादा हाइड्रोपावर कर्मचारी

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद 900 से ज्यादा हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं। इन मजूदूरों के जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। कर्मचारियों और इंजीनियरों को निकालने के लिए नेपाली सेना के नेतृत्व में करीब 90 सदस्यीय संयुक्त टीम अभियान चला रही है। बचाव दल सुरंग तक पहुंचने के लिए ड्रिलिंग, खुदाई और नियंत्रित विस्फोट कर रहे हैं। ALSO READ: नेपाल में बाढ़ से सुरंगों में फंसे 900 से ज्‍यादा मजदूर, रेस्क्यू टीम चला रही अभियान, इस तरह पहुंचाई ऑक्सीजन

 

दिल्ली में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले

दिल्ली में स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामलों में बढ़ोतरी जारी है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 29 अगस्त तक एच1एन1 के कुल 3565 मामले सामने आए हैं। इनमें दिल्ली के 3006 और दिल्ली से बाहर के 559 मामले शामिल हैं।

 

राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में FIR

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। राहुल गांधी के खिलाफ यह एफआईआर अनुसूचित जाति के युवक अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई है। अमित कुमार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है। ALSO READ: राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

सपा के भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक है जेपीएनआईसी : योगी आदित्यनाथ

सपा के भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक है जेपीएनआईसी : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi Adityanath targeted Samajwadi Party over JPNIC

– सीएम योगी ने कहा, जयप्रकाश नारायण के नाम का इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता, जनता के पैसे पर डकैती की छूट नहीं

– रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ सीएम योगी ने किया वीरांगना अवंतीबाई लोधी की भव्य प्रतिमा का लोकार्पण, पुष्पांजलि भी अर्पित की

– सीएम योगी  ने कहा- दंगों की बादशाह है सपा, कर्फ्यू उसकी पहचान और सरकारी खजाने में लूट-खसोट उसकी आदत

– लखनऊ, गोरखपुर व बदायूं में वीरांगनाओं के नाम पर गठित की गईं तीन महिला पीएसी बटालियन

– सीएम ने कहा- जाति के नाम पर समाज को बांट रही सपा, हम बटेंगे नहीं, तो कटेंगे भी नहीं

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लखनऊ में बना जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) समाजवादी पार्टी के भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक है। सपा ने इसे अपनी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का अड्डा जैसा बना दिया था। एक महापुरुष के नाम का इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता। प्रदेश सरकार अपराध व अपराधियों के साथ-साथ बेईमानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ भी जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। 

 

मुख्यमंत्री रविवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ वीरांगना अवंतीबाई लोधी की भव्य प्रतिमा का लोकार्पण करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए पूरा जीवन समर्पित करने वाले जयप्रकाश नारायण के नाम पर सपा शासनकाल में शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट की लागत 200 करोड़ रुपये थी, लेकिन 864 करोड़ खर्च करने के बावजूद यह अधूरा रहा।

जिस काम को 18 महीने में पूरा होना था, वह दो साल बाद भी अधूरा था। सेंटर पर सपा का कब्जा रखने के लिए एक कमेटी गठित की गई, जिसमें अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, अखिलेश के निजी सचिव और सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी शामिल थे।

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जनता के पैसे पर डकैती की छूट नहीं

सीएम योगी ने कहा कि जेपीएनआईसी पर खर्च हुए 864 करोड़ रुपये सैफई सिंडिकेट के नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की जनता के हैं। जनता के पैसे पर किसी राजनीतिक दल को डकैती डालने की छूट नहीं दी जा सकती। सरकार ने कमेटी भंग कर इस सेंटर को वापस लिया है।

अब लखनऊ विकास प्राधिकरण के मार्गदर्शन में इसे संचालित कर जयप्रकाश नारायण की स्मृति को जीवंत किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के खजाने से खर्च धनराशि की वसूली का प्रयास किया जाएगा। सरकार ने जिन लोगों के हाथ से खजाना छीन लिया, वे अब अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।

 

दंगा-कर्फ्यू, जातीय राजनीति सपा की पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीडीए के नाम पर समाज को बांटने वाली सपा के लोगों ने कभी महापुरुषों का सम्मान तक नहीं किया। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर सपा नेताओं के मुंह से श्रद्धांजलि का एक शब्द नहीं निकला, एक ट्वीट तक नहीं किया। सपा दंगों की बादशाह है। कर्फ्यू उसकी पहचान और सरकारी खजाने में लूट-खसोट उसकी आदत रही है। खाली जमीनों पर सपाई गुंडों का कब्जा और महिलाओं- बेटियों में भय का माहौल पिछली सरकार की सबसे बड़ी पहचान रहा है।

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मिशन शक्ति से महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज डबल इंजन की भाजपा सरकार मातृशक्ति को सशक्त बनाने के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में शुरू हुआ मिशन शक्ति महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वाभिमान और स्वावलंबन से जुड़ा अभियान है। जब बेटी को सुरक्षा मिलती है तो उसमें संरक्षण का भाव पैदा होता है।

सम्मान मिलने पर वह अपने जीवन की दिशा स्वयं तय करती है और जब उसे स्वावलंबन के अवसर मिलते हैं तो वह अपनी गति को प्रगति में बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ती। आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दिखाई दे रहा बदलाव इसी सशक्तीकरण का परिणाम है। हम बीमारू छवि से निकल कर देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बने हैं।

 

प्रेरित करेगी वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा

सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति को समर्पित है, जिसका लोकार्पण मोदी जी ने किया। यहां डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाएं देश की अखंडता, अंत्योदय और सुशासन की प्रेरणा देती हैं। इसी तरह वीरांगना अवंतीबाई लोधी की भव्य अश्वारोही प्रतिमा भारतीय नारी की गरिमा, शौर्य और तेजस्विता का प्रतीक बनकर देशवासियों को प्रेरित करेगी। 

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पीएसी में तीन महिला बटालियन गठित

सीएम ने कहा कि अच्छी सरकार ही अच्छा कार्य करती है। सपा सरकार के समय दंगाइयों की काल बनी पीएसी को समाप्त करने की चेष्टा की गई। भाजपा सरकार ने पीएसी की सभी 54 कंपनियों को पुनर्गठित किया। साथ ही तय किया कि पीएसी में बेटियां भी नेतृत्व की भूमिका निभाएंगी। इसी क्रम में प्रदेश में वीरांगनाओं ऊदा देवी, झलकारी बाई व अवंतीबाई लोधी के नाम पर तीन महिला बटालियन गठित की गई हैं। इनमें एक लखनऊ, दूसरी गोरखपुर और तीसरी बदायूं में निर्माण के अंतिम चरण में है।

 

50 हजार बेटियों को मिलेगी स्कूटी

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्नातक अंतिम वर्ष की 50 हजार बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर स्कूटी प्रदान की जाएंगी। 27, 28 और 29 अगस्त को हर बेटी, बहन व माता को परिवहन निगम व सिटी बस सेवा में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई। अब 60 वर्ष से अधिक उम्र की प्रत्येक महिला को निगम की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा शुरू कर दी गई है।

 

वीरांगना ने हिला दी थी ब्रिटिश हुकूमत की चूलें

मुख्यमंत्री ने कहा कि वीरांगना अवंतीबाई लोधी का जीवन देश की स्वतंत्रता और नारी शक्ति के अदम्य साहस का प्रतीक है। मात्र 26 वर्ष की उम्र में अवंतीबाई लोधी ने प्रथम स्वातंत्र्य समर में नेतृत्व करते हुए अंग्रेजों की चूलें हिला दी थीं।

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बैरकपुर में मंगल पांडे ने जो चिंगारी प्रज्वलित की, उसे झांसी में रानी लक्ष्मीबाई ने आगे बढ़ाया। मेरठ में धनसिंह गुर्जर कोतवाल के नेतृत्व में यह संघर्ष और विस्तृत हुआ। झांसी व ग्वालियर के बीच वीरांगना अवंतीबाई लोधी ने इसी संघर्ष का नेतृत्व किया। उनका जीवन हमें एकजुट रहने की प्रेरणा देता है। अगर हम बटेंगे नहीं, तो कटेंगे भी नहीं।

 

अवंतीबाई से कल्याण सिंह तक महापुरुषों का सम्मान

सीएम योगी ने कहा कि वीरांगना अवंतीबाई लोधी के सम्मान में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ ने विधान भवन के सामने उनकी अश्वारोही प्रतिमा स्थापित कराई थी। अलीगढ़ में उनके नाम पर स्टेडियम का निर्माण भी कराया जा रहा है।

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान लखनऊ में तिरंगा फहराने वाले अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी के सम्मान में उन्नाव के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किया गया है। बुलंदशहर में कल्याण सिंह की स्मृति में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कराया गया है। लखनऊ के कैंसर संस्थान का नाम भी बाबूजी के नाम पर रखा गया और वहां उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित कराई गई है।

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महापुरुषों के प्रति श्रद्धा-सम्मान की भावना जीवंत रहे

मुख्यमंत्री ने क्षत्रिय लोधी महासभा के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के आयोजकों का आभार जताते हुए समाज की एकता और महापुरुषों के आदर्शों को आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि वीरांगना अवंतीबाई लोधी, अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी और श्रद्धेय बाबूजी कल्याण सिंह ने समाज की एकता को मजबूती देने के साथ राष्ट्र को भी सशक्त बनाने का कार्य किया।

इन महापुरुषों के प्रति श्रद्धा व सम्मान की भावना आने वाली पीढ़ियों में भी जीवंत रहे, इसके लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

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कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित भाजपा पदाधिकारी, लोधी महासभा के प्रतिनिधि, विधायक और बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।

राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

Complaint filed against Rahul Gandhi in Haldwani Uttarakhand

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। राहुल गांधी के खिलाफ यह एफआईआर अनुसूचित जाति के युवक अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई है। यह मामला हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद किए गए 'शुद्धिकरण यज्ञ' और उसे लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है। अमित कुमार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है।

खबरों के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। राहुल गांधी के खिलाफ यह एफआईआर अनुसूचित जाति के युवक अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई है। यह मामला हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद किए गए 'शुद्धिकरण यज्ञ' और उसे लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है।

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अमित कुमार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है। अमित कुमार ने कहा कि वह स्वयं अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। बयान से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, सम्मान और सुरक्षा प्रभावित हुई है। अमित कुमार ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस बयान से उनके और शुद्धिकरण में शामिल दूसरे लोगों के सम्मान और सामाजिक छवि पर असर पड़ा है।

अमित कुमार के अनुसार, 8 अगस्त को रामलीला मैदान में कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली हुई थी। रैली के बाद मैदान में कूड़ा-कचरा और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिलने का आरोप लगाते हुए 11 अगस्त को उन्होंने अनुसूचित जाति के अन्य सदस्यों के साथ मैदान की सफाई और हवन-शुद्धिकरण किया था।

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दरअसल, राहुल गांधी ने कहा कि शुद्धिकरण एससी/एसटी एक्ट के तहत एक आपराधिक कृत्य है, जिन भी लोगों ने ऐसा किया है उन पर जल्द से जल्द एफआईआर होनी चाहिए। हालांकि इस मामले को लेकर हल्द्वानी पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद श्री राम सेना के सदस्यों ने वहां शुद्धिकरण हवन किया था।

देश की सबसे बड़ी रामलीला में पहली बार 3 वर्ष के बच्चे करेंगे अभिनय

देश की सबसे बड़ी रामलीला में पहली बार 3 वर्ष के बच्चे करेंगे अभिनय

For first time 3 year old children will perform in country's largest Ramlila

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से कोरोना काल में शुरू हुई रामलीला, 15 से 25 जनवरी तक अयोध्या में होगा आयोजन

– दिल्ली में 10 से 20 अक्टूबर तक सजेगा राममंच, देश-विदेश के दर्शकों को दिखेगी भव्य प्रस्तुति

– 62 करोड़ दर्शकों का आंकड़ा पार कर चुकी प्रस्तुति, 60 देशों तक पहुंचेगा रामभक्ति का संदेश

– अयोध्या से चर्चित फिल्मी कलाकारों की रामलीला का आठवां संस्करण दिल्ली में

– 2 माह बाद जनवरी में नौवां संस्करण अयोध्या में किया जाएगा आयोजित

Ramlila Ayodhya Uttar Pradesh news : अयोध्या से चर्चित फिल्मी कलाकारों की रामलीला को देश की सबसे बड़ी रामलीला माना जाता है। इस वर्ष पहली बार दिल्ली में अपना आठवां संस्करण प्रस्तुत करेगी। इस भव्य आयोजन में तीन वर्ष के छोटे बच्चों से लेकर सोलह वर्ष तक के बाल कलाकार सुबह के सत्र में अभिनय करेंगे, जबकि शाम को साठ से अधिक फिल्मी सितारे मंच पर नजर आएंगे। नवां संस्करण दो माह बाद जनवरी में अयोध्या में आयोजित होगा। यह रामलीला कोरोना काल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से शुरू हुई थी और अब यह विश्व स्तर पर रामभक्ति का संदेश पहुंचा रही है।

दिल्ली में आयोजन 10 से 20 अक्टूबर तक नई दिल्ली स्थित रफी मार्ग पर कांस्टीट्यूशन क्लब के मावलंकर हॉल में होगा। यहां सुबह 10 बजे से 12 बजे तक तीन से सोलह वर्ष के बच्चे अयोध्या की रामलीला में भाग लेंगे। शाम 7 बजे से 10 बजे तक फिल्मी कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। आयोजन स्थल पर शाम 4 बजे से रात 11 बजे तक मेले का भी आयोजन होगा।

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हॉल की बैठने की क्षमता करीब 600 लोगों की है। 120 फीट लंबी एलईडी टीवी स्क्रीन लगाई जाएगी, ताकि दर्शकों को भव्य दृश्य स्पष्ट रूप से दिखाई दें। माना जा रहा है कि इतनी कम उम्र के बच्चों वाली रामलीला पहली बार हो रही है। इसमें भगवान श्रीराम के बचपन के स्वरूपों को भी विशेष रूप से दिखाया जाएगा। यह आयोजन न केवल कलाकारों के अभिनय से यादगार बनेगा, बल्कि तकनीकी व्यवस्थाओं जैसे विशाल एलईडी स्क्रीन और बहुभाषी प्रसारण से भी नए आयाम स्थापित करेगा।

संस्थापक सुभाष मलिक (बॉबी)और शुभम मलिक की अगुवाई में टीम लगातार तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सहयोग से शुरू हुई यह रामलीला अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है। दिल्लीवासियों और देश-विदेश के रामभक्तों के लिए यह सुनहरा अवसर है कि वे मावलंकर हॉल में पहुंचकर या टीवी पर बैठकर इस अद्वितीय रामलीला का आनंद लें। अक्टूबर में दिल्ली और जनवरी में अयोध्या दोनों स्थानों पर रामकथा का मंच सजेगा और करोड़ों दिलों में भक्ति का संचार होगा।

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राम के अभिनय में पहली बार सामने आयेंगे सांसद रवि किशन

प्रभु श्रीराम की भूमिका में गोरखपुर सांसद और भोजपुरी-बॉलीवुड स्टार रवि किशन नजर आएंगे। 19 अक्टूबर को वे पहली बार राम का किरदार निभाएंगे। इससे पहले वे केवट, भगवान परशुराम और भरत की भूमिकाएं अदा कर चुके हैं। लंकापति रावण की भूमिका में अरुण बख्शी होंगे। बिंदु दारा सिंह भगवान शिव के रूप में, पुनीत इस्सर भगवान परशुराम के रूप में, रजा मुराद अहिरावण के रूप में और अवतार गिल मेघनाद के रूप में मंच पर आएंगे। कुल मिलाकर साठ से अधिक फिल्मी सितारे इस रामलीला में अभिनय करेंगे। रिहर्सल दिल्ली और मुंबई के कलाकार कर रहे हैं।

 

अयोध्या में 10 दिन चलेगी रामलीला

अयोध्या में नवां संस्करण 15 जनवरी 2027 से 25 जनवरी 2027 तक होगा। अब तक अयोध्या में सात संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित हो चुके हैं। कोरोना काल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस रामलीला को अनुमति दी थी, जो आज संसार की सबसे बड़ी रामलीला बन चुकी है।

 

80 से अधिक सैटेलाइट चैनलों व 40 भाषाओं में होगा प्रसारण

सुभाष मलिक बताते हैं कि पिछले वर्ष इस प्रस्तुति को 62 करोड़ से अधिक रामभक्तों ने अपने घर बैठे देखा। इस वर्ष भी 80 से अधिक सैटेलाइट चैनलों पर 40 भाषाओं में इसका प्रसारण होगा। साठ से अधिक देशों तक रामभक्ति का संदेश पहुंचेगा। देश-विदेश के दर्शक इस भव्य प्रस्तुति का आनंद ले सकेंगे।

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राजधानी के लोगों को अयोध्या की भव्यता का होगा अनुभव

अयोध्या की रामलीला न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि यह बच्चों को रामकथा से जोड़ने का भी माध्यम बन रही है। तीन वर्ष के छोटे बच्चे मंच पर आकर भगवान के बाल स्वरूप को जीवंत करेंगे, जो इस आयोजन को और भी विशेष बनाता है। दिल्ली में पहली बार होने वाला यह संस्करण राजधानी के लोगों को अयोध्या की भव्यता का अनुभव कराएगा। मेले के साथ जुड़ी गतिविधियों से पूरा माहौल राममय हो जाएगा।

लखनऊ के विकास में मुख्यमंत्री योगी का सबसे बड़ा सहयोग : राजनाथ सिंह

लखनऊ के विकास में मुख्यमंत्री योगी का सबसे बड़ा सहयोग : राजनाथ सिंह

Defence Minister Rajnath Singh's statement regarding development work in Lucknow

– रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, केंद्र-राज्य की सोच एक दिशा में हो तो कई गुना बढ़ती है विकास की गति

– रक्षामंत्री सिंह ने कहा- विकास व सुशासन के नए मानदंड स्थापित करता रहेगा उत्तर प्रदेश

– प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित भारत के संकल्प के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा

Defence Minister Rajnath Singh : रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ में जो विकास कार्य हुए हैं, उसमें सबसे बड़ा सहयोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का है। उन्होंने वह सब किया, जो कहा था। लखनऊ के हर कार्य में उन्होंने दिल खोलकर सहयोग किया और समय-समय पर समीक्षा भी की। केंद्र व राज्य सरकार की सोच एक दिशा में होने पर विकास की गति स्वाभाविक रूप से कई गुना बढ़ जाती है। रक्षा मंत्री रविवार को मुख्यमंत्री के साथ लखनऊ छावनी के लिए करीब 101 करोड़ रुपये की 12 विकास परियोजनाओं के शिलान्यास एवं भूमि पूजन अवसर पर जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।

 

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार, रक्षा मंत्रालय और उद्योग जगत मिलकर विकास के कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। उत्तर प्रदेश विकास और सुशासन के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करता रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित भारत के संकल्प के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज से 10-12 वर्ष पहले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन आज भारत जब बोलता है तो पूरी दुनिया कान खोलकर सुनती है।

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विकसित भारत का अर्थ केवल बड़ी परियोजनाएं और आधुनिक इमारतें नहीं, बल्कि इसका मतलब है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, हर परिवार तक स्वच्छ पानी पहुंचे, युवाओं को खेलने और प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले और दिव्यांग बच्चों को यह महसूस न हो कि वे समाज से पीछे हैं। विकसित भारत की यात्रा बड़े शहरों से शुरू होकर हर मोहल्ले, बस्ती और परिवार तक पहुंचनी चाहिए।

 

तीन से पांच मंजिल तक निर्माण की राह खुली

राजनाथ सिंह ने कहा कि समय के साथ शहरों और लोगों की जरूरतें बदलती हैं, इसलिए नियमों में बदलाव भी जरूरी है। लखनऊ सहित छावनी क्षेत्रों में नई व्यवस्था लागू की गई है। पहले जहां तीन मंजिल तक निर्माण का प्रावधान था, अब पांच मंजिल तक निर्माण की अनुमति दी गई है। लखनऊ छावनी क्षेत्र अपनी विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं के साथ तेजी से आगे बढ़ेगा।

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ब्रिटिश काल के बाजारों को मिली नई पहचान

रक्षा मंत्री ने कहा कि बदलाव केवल इमारतों में नहीं, पहचान में भी होना चाहिए। लखनऊ छावनी में ब्रिटिश काल से चले आ रहे कुछ बाजारों के नाम बदलकर स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक चेतना और राष्ट्रसेवा से जुड़े व्यक्तित्वों के नाम पर किए गए हैं। 

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12 परियोजनाएं नहीं, 12 संकल्प

राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ छावनी के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। करीब 101 करोड़ रुपये की लागत वाली ये 12 परियोजनाएं लखनऊ कैंट के भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता हैं। इन परियोजनाओं के जरिए स्वच्छ छावनी, बेहतर जलापूर्ति, बच्चों के बेहतर भविष्य, युवाओं को खेल और प्रतिभा दिखाने के अवसर, सम्मानजनक नागरिक सुविधाएं तथा आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ती छावनी का संकल्प पूरा किया जाएगा।

नेपाल में बाढ़ से सुरंगों में फंसे 900 से ज्‍यादा मजदूर, रेस्क्यू टीम चला रही अभियान, इस तरह पहुंचाई ऑक्सीजन

नेपाल में बाढ़ से सुरंगों में फंसे 900 से ज्‍यादा मजदूर, रेस्क्यू टीम चला रही अभियान, इस तरह पहुंचाई ऑक्सीजन

Over 900 workers trapped in tunnels due to floods in Nepal

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद 900 से ज्यादा हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं। इन मजूदूरों के जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। बाढ़ और भूस्खलन के बाद कई इलाकों में सड़कें और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत अभियान प्रभावित हुआ है। सुरंग में फंसे कर्मचारियों और इंजीनियरों को निकालने के लिए नेपाली सेना के नेतृत्व में करीब 90 सदस्यीय संयुक्त टीम अभियान चला रही है। बचाव दल सुरंग तक पहुंचने के लिए ड्रिलिंग, खुदाई और नियंत्रित विस्फोट कर रहे हैं। बचाव दल सुरंग के मुख्य हिस्से तक पहुंचने में कामयाब रहा।

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद 900 से ज्यादा हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं। इन मजूदूरों के जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। बाढ़ और भूस्खलन के बाद कई इलाकों में सड़कें और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत अभियान प्रभावित हुआ है।

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सुरंग में फंसे कर्मचारियों और इंजीनियरों को निकालने के लिए नेपाली सेना के नेतृत्व में करीब 90 सदस्यीय संयुक्त टीम अभियान चला रही है। बचाव दल सुरंग तक पहुंचने के लिए ड्रिलिंग, खुदाई और नियंत्रित विस्फोट कर रहे हैं। सुरंग के अंदर फंसे लोगों के जिंदा होने की उम्मीद में बचाव दल ने ऊर्ध्वाधर रास्ते से ऑक्सीजन और हवा पहुंचानी शुरू कर दी है।

अंदर की स्थिति का पता लगाने के लिए कैमरा भी भेजा गया है। साथ ही खाने का सामान भी सुरंग के भीतर पहुंचाने का प्रयास किया गया है। मलबा बेहद ज्यादा होने के कारण बचाव दल रास्ते को चौड़ा करने में जुटा है। भारी मशीनों और नियंत्रित विस्फोटों की मदद से सुरंग के अंदर जाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है। बचाव दल अभी तक सुरंग के अंदर मौजूद किसी व्यक्ति से संपर्क स्थापित नहीं कर सका है।

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इसके बावजूद अभियान जारी है और सुरंग के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण अभियान में रुकावट आ रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि सुरंग में प्रवेश का रास्ता पूरी तरह खुलने के बाद अंदर फंसे लोगों की तलाश और उन्हें बाहर निकालने का अभियान तेजी से आगे बढ़ सकेगा।

सेना के अधिकारियों के मुताबिक, नदी के तेज बहाव और कठिन परिस्थितियों के बावजूद संयुक्त बचाव दल लगातार काम कर रहा है। त्रिशूली नदी का जलस्तर सिर्फ 30 मिनट में करीब 9 मीटर तक बढ़ गया। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार प्राकृतिक आपदा में अब तक 752 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,502 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

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राहत और बचाव कार्य में लगभग 20 हजार सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है और करीब 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। लापता लोगों में 933 हाइड्रोपावर कर्मचारी शामिल हैं। भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस समेत कई देशों और संगठनों ने नेपाल को राहत सहायता देने की पेशकश की है।

अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के 223 छात्रावासों का होगा कायाकल्प, योगी सरकार ने मंजूर किए 12.45 करोड़

अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के 223 छात्रावासों का होगा कायाकल्प, योगी सरकार ने मंजूर किए 12.45 करोड़

223 hostels for Scheduled Caste students to undergo makeover

– रखरखाव व मरम्मत के लिए स्वीकृत की धनराशि, विद्यार्थियों को मिलेगा सुरक्षित और बेहतर आवासीय वातावरण

– गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरे होंगे कार्य, पढ़ाई के अनुकूल बनेगा छात्रावासों का माहौल

– पेयजल, बिजली, शौचालय, रंग-रोगन, सुरक्षा व सफाई आदि सुविधाओं पर होगा फोकस

Chief Minister Yogi Adityanath : अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के सभी 223 राजकीय अनुसूचित जाति छात्रावासों के रखरखाव, मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 12.45 करोड़ रुपये की बजट स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार की इस पहल से छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को स्वच्छ, सुरक्षित और अध्ययन के अनुकूल वातावरण मिलने की उम्मीद है।

 

क्षमता के अनुसार होगा धनराशि का आवंटन

छात्रावासों में विद्यार्थियों की क्षमता के आधार पर रखरखाव और मरम्मत के लिए धनराशि जारी की जाएगी। इसके तहत 50 विद्यार्थियों की क्षमता वाले छात्रावासों को प्रति छात्रावास पांच लाख रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छात्रावासों की जरूरत के अनुसार आवश्यक सुधार कार्य कराए जा सकेंगे।

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बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान

स्वीकृत बजट से छात्रावासों में पेयजल व्यवस्था को बेहतर करने, विद्युत उपकरणों की मरम्मत एवं सुधार, शौचालयों की मरम्मत, रंग-रोगन तथा सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े जरूरी कार्य कराए जाएंगे। इन सुविधाओं के मजबूत होने से विद्यार्थियों को बेहतर दैनिक सुविधाएं मिलेंगी और पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा। योगी सरकार की प्राथमिकता अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सम्मानजनक आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। छात्रावासों में सुविधाओं का सुधार इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 

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रखरखाव और मरम्मत के कार्यों में गुणवत्ता व समयबद्धता पर जोर

समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि छात्रावासों में रखरखाव और मरम्मत के सभी कार्य गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय सीमा में पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि छात्रावास केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं। बजट स्वीकृति से सभी 223 छात्रावासों की व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार होगा।

राजस्‍थान के धौलपुर में दर्दनाक हादसा, भाई को बचाने कुंड में कूदीं 3 बहनें, डूबने से चारों की मौत

राजस्‍थान के धौलपुर में दर्दनाक हादसा, भाई को बचाने कुंड में कूदीं 3 बहनें, डूबने से चारों की मौत

राजस्‍थान के धौलपुर जिले से एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। यहां सरमथुरा में रक्षाबंधन की खुशियां मातम में बदल गईं। बिरजा गांव स्थित कुंड में नहाने के दौरान डूबे भाई को बचाने के लिए उसकी 3 बहनें भी पानी में कूद गईं। हादसे में चारों भाई-बहनों की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस ने एसडीआरएफ और गोताखोरों की मदद से चारों के शव बाहर निकाले।

राजस्‍थान के धौलपुर जिले से एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। यहां सरमथुरा में रक्षाबंधन की खुशियां मातम में बदल गईं। बिरजा गांव स्थित कुंड में नहाने के दौरान डूबे भाई को बचाने के लिए उसकी 3 बहनें भी पानी में कूद गईं। हादसे में चारों भाई-बहनों की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई।

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खबरों के अनुसार, धौलपुर शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र के नथुआपुरा मोरोली निवासी रवि उर्फ भोलू अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बिरजा गांव के पास स्थित हीरामन बाबा धाम पर आयोजित मेले में शामिल होने आया था। आज सुबह पास के कुंड में नहाने गया। इसी दौरान वह अचानक डूबने लगा।

भाई को डूबता देख उसकी चचेरी बहन समेत 3 बहनें उसको बचाने के प्रयास में गहरे पानी में चली गईं, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस ने एसडीआरएफ और गोताखोरों की मदद से चारों के शव बाहर निकाले। हादसे के बाद पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और रक्षाबंधन की खुशियां मातम में बदल गईं।

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चारों शवों को सरमथुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मोर्चरी में रखवाया गया, जहां पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। गांव में भी मातम छा गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

योगी सरकार करेगी पेयजल की गुणवत्ता का गहनता से परीक्षण, माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस की भी होगी जांच

योगी सरकार करेगी पेयजल की गुणवत्ता का गहनता से परीक्षण, माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस की भी होगी जांच

Yogi government will conduct rigorous testing of drinking water quality

– विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का कराया जा रहा तेजी से निर्माण 

– माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषक के परीक्षण के लिए आवश्यक उन्नत उपकरणों का प्रस्ताव वार्षिक कार्ययोजना में शामिल 

– पेयजल एवं स्वच्छता विभाग भारत सरकार के सचिव ने मौजूदा स्टेट लैब का किया था निरीक्षण

– प्रदेश में 1 स्टेट, 3 क्षेत्रीय, 72 जिला एवं 62 वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रयोगशालाओं का नेटवर्क 

– राज्यस्तरीय प्रयोगशालाओं में उन्नत स्तर की परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध

Chief Minister Yogi Adityanath : प्रदेश में ग्रामीण पेयजल की गुणवत्ता जांच व्यवस्था को और अधिक उन्नत एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। जल निगम (ग्रामीण) द्वारा विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का निर्माण कराया जा रहा है, जिसका कार्य तेजी से पूर्ण कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। नई स्टेट लैब में अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक सुविधाओं के साथ पेयजल में उभरते प्रदूषक (इमर्जिंग कंटेमिनेंट्स) जैसे माइक्रोप्लास्टिक या पीएफएएस की जांच क्षमता विकसित करने की योजना है।

 

केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने मौजूदा स्टेट लैब का किया था निरीक्षण

हाल ही में उत्तर प्रदेश के दौरे पर आए भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) की मौजूदा स्टेट लैबोरेटरी का निरीक्षण किया था। इस दौरान जल गुणवत्ता परीक्षण सुविधाओं, उन्नत उपकरणों तथा भविष्य में विकसित की जाने वाली परीक्षण क्षमताओं पर चर्चा हुई। इस दौरान उन्होंने माइक्रोप्लास्टिक तथा पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषकों की जांच की सुविधा भी स्टेट लैब स्तर पर विकसित किए जाने पर जोर दिया। 

 

प्रदेश में व्यापक जल गुणवत्ता प्रयोगशाला नेटवर्क

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पेयजल गुणवत्ता की निगरानी एवं परीक्षण के लिए बहुस्तरीय प्रयोगशाला नेटवर्क कार्यरत है। इसमें 1 राज्य स्तरीय,  3 क्षेत्रीय, 72 जिला स्तरीय तथा 62 जल शोधक संयंत्र प्रयोगशालाएं हैं। राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं में उन्नत स्तर की परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके 50 मानक एनएबीएल प्रमाणित हैं। इस नेटवर्क के माध्यम से जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल गुणवत्ता की नियमित निगरानी एवं आवश्यकतानुसार विस्तृत प्रयोगशाला परीक्षण किया जाता है।

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माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस दो अलग श्रेणियों के प्रदूषक

माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस को एक ही पदार्थ मानना तकनीकी रूप से सही नहीं है। माइक्रोप्लास्टिक सामान्यतः 5 मिमी से छोटे प्लास्टिक कणों को कहा जाता है, जबकि पीएफएएस फ्लोरीन युक्त कृत्रिम रसायनों का व्यापक समूह है, जिन्हें पर्यावरण में अत्यधिक स्थायित्व के कारण इसे फॉरएवर कैमिकल कहा जाता है। दोनों की नमूना परीक्षण तथा तकनीकी जांचें अलग-अलग होती हैं।

 

कैसे होगी माइक्रोप्लास्टिक की जांच

माइक्रोप्लास्टिक परीक्षण में प्रदूषक मुक्त सैंपलिंग अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नमूने को इस प्रकार एकत्र एवं संभाला जाता है कि इसे इकट्ठा करने का फ्लास्क या बर्तन, वातावरण, कपड़ों अथवा प्रयोगशाला सामग्री से बाहरी प्लास्टिक कण नमूने में न मिलें। इसके बाद जल शोधन एवं आवश्यक नूमने परीक्षण के माध्यम से कणों को अलग किया जाता है।

माइक्रोस्कोपित परीक्षण से सैंपल या नमूनों में संदिग्ध कणों की संख्या, आकार, आकृति और रंग जैसी विशेषताओं का आकलन किया जा सकता है, जबकि पॉलीमर की पुष्ट पहचान के लिए एफटीआरआर या रमन माइक्रोस्कोपी जैसी स्पेकट्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग किया जाता है।

 

बीआईएस मानकों एवं जल जीवन मिशन के प्रोटोकॉल के अनुरूप पेयजल गुणवत्ता निगरानी

जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी निर्धारित राष्ट्रीय प्रोटोकॉल तथा लागू भारतीय मानकों के अनुरूप की जाती है। प्रयोगशालाओं के साथ-साथ ग्राम स्तर पर प्रशिक्षित महिलाओं/जल गुणवत्ता निगरानी समूहों द्वारा फील्ड टेस्टिंग किट से प्रारंभिक निगरानी की व्यवस्था भी इस प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आवश्यकता एवं निर्धारित परीक्षण कार्यक्रम के अनुसार नमूनों को प्रयोगशालाओं में भेजकर विस्तृत जांच की जाती है।

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भविष्य की जल गुणवत्ता चुनौतियों के लिए तैयार होगी नई स्टेट लैब

नई स्टेट लैबोरेटरी को आधुनिक एवं विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस करने का उद्देश्य प्रदेश में मजबूत राज्य रेफरल, आधुनिक रेफरल प्रयोगशाला की क्षमता विकसित करना है। माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे प्रदूषक की परीक्षण सुविधा विकसित होने से भविष्य में बेसलाइन डाटा तैयार करने, संभावित प्रदूषण स्रोतों की पहचान, वैज्ञानिक निगरानी तथा राष्ट्रीय स्तर पर विकसित होने वाले मानकों एवं दिशानिर्देशों के अनुरूप परीक्षण व्यवस्था स्थापित करने में मदद मिलेगी।

 

तेज गति से पूरा कराया जाएगा कार्यः प्रबंध निदेशक

उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने बताया कि नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है और इसे विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से सुसज्जित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। स्टेट लैब की उन्नत परीक्षण क्षमता से जल निगम के साथ-साथ आवश्यकता के अनुसार अन्य सरकारी विभागों एवं संस्थाओं को भी उच्च स्तरीय जल परीक्षण में सहयोग मिल सकेगा। माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषकों की जांच को विकसित करना, भविष्य की जल गुणवत्ता चुनौतियों के दृष्टिगत महत्वपूर्ण पहल है।