Ather Konarc vs Bajaj Chetak: किस Electric Scooter में है ज्यादा दम? कीमत, रेंज, स्पीड और फीचर्स की पूरी तुलना

Ather Konarc vs Bajaj Chetak: किस Electric Scooter में है ज्यादा दम? कीमत, रेंज, स्पीड और फीचर्स की पूरी तुलना

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इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में Ather Energy ने Ather Konarc के जरिए फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में अपनी दावेदारी मजबूत की है। इसका मुकाबला बाजार में पहले से मौजूद Bajaj Chetak जैसे लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटर से है। बड़ी बात यह है कि दोनों स्कूटर में 3.5 kWh बैटरी पैक दिया गया है, लेकिन रेंज, टॉप स्पीड, फीचर्स, स्टोरेज और चार्जिंग के मामले में दोनों का फोकस अलग-अलग है। अगर आप फैमिली के लिए नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो दोनों के बीच यह तुलना आपके लिए काफी काम की हो सकती है।

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 Ather Konarc vs Bajaj Chetak: कीमत

 

Ather Konarc S 161 की एक्स-शोरूम कीमत ₹1.45 लाख है। वहीं Bajaj Chetak C3501 की एक्स-शोरूम कीमत बेंगलुरु में करीब ₹1.52 लाख है। इस हिसाब से Ather Konarc करीब ₹7,000 सस्ता है।

Battery और Range में कौन आगे?

दोनों इलेक्ट्रिक स्कूटर में 3.5 kWh बैटरी मिलती है, लेकिन दावा की गई रेंज में Ather Konarc आगे है।

  • Ather Konarc S 161: 161 km IDC रेंज
  • Bajaj Chetak C3501: 153 km रेंज
  • Ather ने SmartEco मोड में 130 km TrueRange का भी दावा किया है।

यानी कागज पर देखें तो Ather Konarc करीब 8 km ज्यादा IDC रेंज देता है।

  •  Top Speed में Bajaj Chetak आगे
  • स्पीड के मामले में Bajaj Chetak बाजी मारता है।
  • Chetak C3501 की टॉप स्पीड 80 km/h है, जबकि Ather Konarc S 161 की टॉप स्पीड 70 km/h है।
  • यानी Chetak की टॉप स्पीड Konarc से 10 km/h ज्यादा है।

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Boot Space में भी Chetak आगे

अगर आपके लिए स्कूटर में ज्यादा सामान रखने की जगह महत्वपूर्ण है, तो Bajaj Chetak बेहतर विकल्प नजर आता है।  Chetak का एक बड़ा फायदा इसका 35 लीटर का बूट स्पेस है। Chetak में 4 लीटर ज्यादा बूट स्पेस मिलता है, जो रोजाना के फैमिली इस्तेमाल में उपयोगी हो सकता है।

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 Features में Ather Konarc का पलड़ा भारी

 

Ather Konarc को टेक्नोलॉजी के लिहाज से ज्यादा एडवांस पैकेज के साथ पेश किया गया है। इसमें AtherStack Pro, OTA Updates, Bluetooth और SIM Connectivity जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इसके अलावा Ather App Integration, रिमोट चार्जिंग स्टेटस और Theft/Tow Alerts भी दिए गए हैं। इसके टॉप-स्पेक वर्जन में 7-inch DeepView Display मिलता है।

Bajaj Chetak में क्या मिलता है?

Bajaj Chetak C3501 में 5-inch TFT Touchscreen दिया गया है। इसमें Integrated Google Maps, OTA Updates, Hill-Hold और अलग-अलग Ride Modes मिलते हैं।

 

 Charging में Chetak की बड़ी बढ़त

 

चार्जिंग के मामले में Bajaj Chetak C3501 को बड़ा फायदा मिलता है। इसके टॉप वेरिएंट में 950W On-board Charger दिया गया है। इससे इसकी सामान्य चार्जिंग स्पीड Ather Konarc की तुलना में बेहतर हो जाती है और 0-80% चार्जिंग में Chetak को बढ़त मिलती है।

  Ather Konarc या Bajaj Chetak, कौनसा आपके लिए बेहतर

 

अगर आपकी प्राथमिकता ज्यादा रेंज और आधुनिक टेक्नोलॉजी है तो कागज पर Ather Konarc S 161 ज्यादा आकर्षक नजर आता है। इसमें ज्यादा IDC रेंज, बड़ा 7-inch डिस्प्ले और कई कनेक्टेड फीचर्स मिलते हैं। वहीं, अगर आपको ज्यादा टॉप स्पीड, बड़ा बूट स्पेस और तेज स्टैंडर्ड चार्जिंग चाहिए तो Bajaj Chetak C3501 बेहतर विकल्प हो सकता है।

 

Ather Konarc चुनें अगर:

  • ज्यादा रेंज चाहिए
  •  ज्यादा टेक्नोलॉजी और कनेक्टेड फीचर्स चाहिए
  • बड़ा TFT डिस्प्ले पसंद है
  •  कम कीमत में स्कूटर चाहिए

 

Bajaj Chetak चुनें अगर

  • ज्यादा टॉप स्पीड चाहिए
  •  ज्यादा बूट स्पेस चाहिए
  • तेज चार्जिंग प्राथमिकता है
  •  ज्यादा किलोमीटर की वाहन वारंटी चाहते हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्‍स 

दोनों स्कूटर में बैटरी क्षमता समान है, लेकिन उनका फोकस अलग है। Ather Konarc रेंज और टेक्नोलॉजी पर जोर देता है, जबकि Bajaj Chetak स्पीड, प्रैक्टिकलिटी और चार्जिंग सुविधा को प्राथमिकता देता है।

Nepal Flood : बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो, अनजान शख्स बना फरिश्ता, बची 370 से ज्यादा जानें, स्कूल में ऐसे हुआ जिंदगी का सबसे बड़ा Rescue

Nepal Flood : बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो, अनजान शख्स बना फरिश्ता, बची 370 से ज्यादा जानें, स्कूल में ऐसे हुआ जिंदगी का सबसे बड़ा Rescue

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'बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो…' चिल्लाते हुए स्कूल के पास से गुजर रहे इस अज्ञात व्यक्ति ने जो आवाज लगाई, वह किसी आधिकारिक अलर्ट से पहले उत्तर्गया पब्लिक स्कूल, बेत्रावती तक पहुंच गई। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच एक अनजान शख्स की कुछ शब्दों की चेतावनी ने सैकड़ों जिंदगियां बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक बुधवार की सुबह त्रिशूली बाजार से कुछ किलोमीटर दूर, नदी के उस पार बेत्रावती में उत्तरगया पब्लिक स्कूल के पास से भागते हुए एक अनजान आदमी ने कहा था कि बाढ़ आ रही है भागो। उस वक्त स्कूल में पढ़ाई का दिन शुरू ही हुआ था। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में बाढ़ का पानी रास्तों और आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में लेने वाला है। स्कूल में न तो सायरन बजा था, न कोई ऑटोमेटेड मैसेज आया था और न ही कोई आधिकारिक चेतावनी पहुंची थी,  लेकिन उस अनजान शख्स की आवाज ने सबको खतरे का एहसास करा दिया। 

 

नाश्ता कर रहे थे हॉस्टल के छात्र, तभी सुनाई दी आवाज

बाढ़ की चेतावनी जब स्कूल परिसर में पहुंची, तब हॉस्टल में रहने वाले छात्र नाश्ता कर रहे थे। जैसे ही उन्हें पता चला कि बड़ी बाढ़ आने वाली है, स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। कक्षा 7 से 10 तक के बड़े छात्र खुद ऊंचाई की तरफ भागने लगे, जबकि शिक्षकों ने छोटे बच्चों को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी संभाली। कुछ बच्चे कीचड़ में तेजी से नहीं चल पा रहे थे तो स्कूल स्टाफ ने उन्हें उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

 

कुछ ही मिनटों में छात्र स्कूल के पीछे मौजूद जंगल और ऊंची पहाड़ी की ओर पहुंचने लगे। बाढ़ के पानी ने सड़क और सामान्य रास्तों को काट दिया था।  नेपाल की यह घटना सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा की कहानी नहीं है। यह हमें बताती है कि कभी-कभी एक छोटी सी चेतावनी भी सैकड़ों जिंदगियों के बीच और मौत के बीच दीवार बन सकती है।

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न कोई सरकारी सिस्टम, न सायरन और न कोई आधिकारिक संदेश—लेकिन एक अनजान व्यक्ति ने खतरा देखा और बिना यह सोचे कि उसे इसका क्या मिलेगा, लोगों को चेतावनी देने लगा।

 

उसकी एक आवाज- 'बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो…' 

 

शायद सैकड़ों लोगों के लिए जिंदगी की पुकार बन गई। और जब खतरा सामने आया तो शिक्षकों ने भी अपने छात्रों को अकेला नहीं छोड़ा। बड़े बच्चों ने छोटे बच्चों का साथ दिया और स्टाफ ने उन बच्चों को भी उठाकर सुरक्षित पहुंचाया जो खुद भाग नहीं पा रहे थे।

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सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर विज्ञापन या लिंक पर क्लिक करना भारी पड़ सकता है। राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई (NCTAU) ने सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए फैलाए जा रहे संदिग्ध पॉर्नोग्राफी ऐप्स को लेकर चेतावनी जारी की है। इन ऐप्स के जरिए साइबर अपराधी मोबाइल फोन का नियंत्रण हासिल कर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे सकते हैं।

 

केंद्रीय गृह मंत्रालय के साइबर अपराध रोधी तंत्र I4C के तहत काम करने वाली NCTAU के मुताबिक, Facebook और Instagram पर कुछ संदिग्ध ऐप्स के विज्ञापन या लिंक दिखाए जा रहे हैं। इनमें ‘नाइट प्ले’, ‘रीलूप’, ‘किस’, ‘वीमो’, ‘रिवो’, ‘नेक्सो’ और ‘विक्सा’ जैसे नामों से प्रचारित किए जा रहे ऐप शामिल हैं।

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कैसे फंसाते हैं साइबर अपराधी?

 

ऐसे विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर को ऐसी वेबसाइट पर भेजा जाता है, जहां अश्लील सामग्री दिखाने का दावा किया जाता है। इसके बाद यूजर को Google Play Store के बाहर से APK फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित किया जाता है। यही गलती आपके मोबाइल और बैंकिंग सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

 

ऐप इंस्टॉल करते ही मांगते हैं खतरनाक Permission

NCTAU के अनुसार, ऐप इंस्टॉल होने के बाद ऐसी अनुमतियां मांगी जा सकती हैं, जिनके जरिए ऐप को डिवाइस पर अतिरिक्त एप्लिकेशन इंस्टॉल करने और फोन की पहुंच का गलत इस्तेमाल करने की क्षमता मिल जाती है। इसके बाद साइबर अपराधी फोन का नियंत्रण हासिल कर सकते हैं और इसका इस्तेमाल अनधिकृत वित्तीय लेनदेन के लिए किया जा सकता है।

 

कुछ मामलों में ये ऐप VPN भी इंस्टॉल कर सकते हैं, जिसका इस्तेमाल इंटरनेट गतिविधि की लोकेशन बदलने या संदिग्ध गतिविधियों को छिपाने के लिए किया जा सकता है।

 

फोन से ऐप हटाना भी हो सकता है मुश्किल

सबसे गंभीर खतरा यह है कि कुछ दुर्भावनापूर्ण ऐप यूजर को सामान्य Device Settings के जरिए उन्हें हटाने से रोक सकते हैं। इससे पीड़ित के लिए फोन पर दोबारा नियंत्रण हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

 

अगर गलती से APK डाउनलोड कर लिया तो क्या करें?

 

1. इंटरनेट कनेक्शन तुरंत बंद करें

Wi-Fi और Mobile Data को अस्थायी रूप से बंद कर दें।

 

2. संदिग्ध ऐप की Permissions चेक करें

खासकर Accessibility, Device Admin, VPN और अन्य संवेदनशील permissions को देखें।

 

3. अनजान ऐप को हटाने की कोशिश करें

जिस ऐप को आपने खुद इंस्टॉल नहीं किया या पहचानते नहीं हैं, उसे डिवाइस से हटाएं।

 

4. बैंक और UPI तुरंत चेक करें

अपने बैंक अकाउंट, UPI और कार्ड से जुड़े लेनदेन की जांच करें।

 

5. संदिग्ध लेनदेन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें

देरी होने पर वित्तीय नुकसान बढ़ सकता है।

 

6. Google Play Protect चालू रखें

Android फोन में Play Protect को बंद न करें।

 

7. फोन का Software Update करें

Android और सुरक्षा अपडेट हमेशा नवीनतम रखें।

भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा, एंटी नेशनल सवाल पूछने पर झड़प, युवाओं ने लगाए कॉकरोच मुर्दाबाद के नारे

भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा, एंटी नेशनल सवाल पूछने पर झड़प, युवाओं ने लगाए कॉकरोच मुर्दाबाद के नारे

भोपाल। कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों के ऑ़डिट को लेकर राजधानी के गांधी भवन में आयोजित बैठक में जमकर हंगामा हो गया। सवाल जवाब से शुरु हुआ विवाद देखते ही देखते तीखी नोंक-झोंक और झड़प में बदल गगा। CJP की बैठक में विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब एक युवक ने दिल्ली में हुए प्रोटेस्ट के एंटी नेशनल होने पर सवाल पूछ दिया। इसके बाद जमकर हंगामा हो गया।
 

भोपाल के गांधी भवन में CJP की ओर से स्कूल ऑडिट और संगठन की आगामी गतिविधियों को लेकर बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में पहुंचे कुछ और युवा वहां पहुंचे और उन्हें सवाल जवाब किए। इस दौर एक छात्र ने जब दिल्ली में हुए प्रदर्शन को एंटी नेशनल तत्वों के द्वारा हाईजैक करने को लेकर सवाल किया। युवक ने सवाल करते हुए पूछा कि दिल्ली में हुए प्रोटेस्ट के दौरान क्या कोई एंटी नेशनल गतिविधि हुई थी, साथ ही उसने सवाल किया कि भोपाल में होने वाली गतिविधियों में भी क्या इस तरह की चीजें देखने को मिलेंगी।

 

युवक के इस तरह के सवाल पूछने के दौरान ही विवाद की स्थिति बन गई और बैठक में मौजूद लोगों ने माइक छीनने की कोशिश की। इस पर छात्रों एक गुट ने नारेबाजी शुरु कर दी। प्रदर्शन मेंं शामिल छात्रा गौतम जायसवाल ने कहा कि सरकारी स्कूलों के सर्वे को लेकर ऱखी गई बैठक में जब उन्होंने सवाल किया तो वहां पर उपस्थित लोग भड़क गए और उनके साथ झूमाझटकी की गई। 

 

दरअसल सीजेपी की बैठक का आयोजन मुख्य रूप से स्कूल ऑडिट और CJP की आगे की गतिविधियों को लेकर चर्चा करने के लिए किया गया था। हालांकि, बैठक के दौरान सवाल-जवाब को लेकर हुए विवाद ने कार्यक्रम का रुख बदल दिया और मामला हंगामे तक पहुंच गया और कॉकरोच जनता पार्टी के मुर्दाबाद के नारे लगाए  गए। 

 

वहीं हंगामे के बाद CJP की अभियान कोऑर्डिनेटर माया विश्वकर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों  का नागरिक स्तर पर ऑडिट किया जाएघा। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप के गृह जिले नरसिहपुर से साईखेंड ब्लॉक से 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तह स्कूलों के ऑडिट की शुरुआत की जाएगी और इसके  बाद भोपाल समेत प्रदेश के अन्य जिलों मे इसको किया जाएगा।

CJP Protest Marc h: 5 सितंबर के दिल्ली मार्च पर SC ने क्यों नहीं लगाई रोक? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

CJP Protest Marc h: 5 सितंबर के दिल्ली मार्च पर SC ने क्यों नहीं लगाई रोक? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

Supreme Court Jantar Mantar Protest

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को Cockroach Janata Party (CJP) की ओर से 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर तत्काल प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उसे उम्मीद है कि सभी पक्ष शांतिपूर्ण और कानून के मुताबिक व्यवहार करेंगे तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की होगी।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि पुलिस द्वारा NEET प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित High Powered Enquiry Committee के समक्ष भी अपनी याचिका प्रस्तुत करें। पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए कहा कि इसे लंबित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया जाए और 10 सितंबर को सुनवाई की जाए।

 

कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी एजेंसियों की

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करने की उम्मीद है। वहीं, कानून लागू कराने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे तय करें कि क्या कानूनी है और क्या प्रतिबंधित है। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों से अपेक्षा है कि वे कानून का सम्मान करें, अपने आचरण में संयम रखें और देश के कानून का पालन करें।

 

5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की तैयारी

CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च का आह्वान किया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चलाए गए 36 दिन के आंदोलन को समाप्त कराने के लिए 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा नहीं किया। CJP के मुताबिक प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाना है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि उसे इस तरह के किसी जुलूस के आयोजन के लिए अभी तक कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।

 

याचिका में सुरक्षा-संवेदनशील इलाकों में मार्च पर रोक की मांग

सेवानिवृत्त दिल्ली पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा और आसपास के इलाकों जैसे सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील संवैधानिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जुटान, मार्च या संगठित प्रदर्शन की अनुमति तभी दी जाए, जब आयोजकों ने आवश्यक अनुमति हासिल कर ली हो। याचिका में लुटियंस दिल्ली में प्रस्तावित किसी भी बड़े प्रदर्शन को नियंत्रित करने, टालने या उसके स्वरूप में बदलाव करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने यह व्यवस्था 12-13 सितंबर को प्रस्तावित BRICS Summit के समाप्त होने तक लागू रखने की मांग की है।

 

इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि कोई भी मार्च या जुलूस निर्धारित और अधिकृत सीमा से आगे न बढ़े तथा संबंधित क्षेत्र में लागू कानूनी अनुमति और नियामक व्यवस्था का पालन किया जाए।

 

Teachers' Day पर होगा प्रस्तावित मार्च

CJP का प्रस्तावित मार्च Teachers' Day यानी 5 सितंबर को आयोजित किया जाना है। खबर के मुताबिक इसमें उन छात्रों के परिवारों के शामिल होने की बात कही गई है, जिन्होंने इस साल NEET परीक्षा रद्द होने और उसके बाद दोबारा परीक्षा कराए जाने के घटनाक्रम के बाद कथित तौर पर आत्महत्या की थी। इसके अलावा जुलाई के आंदोलन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती का सामना करने वाले छात्रों के परिवारों के भी मार्च में शामिल होने की बात कही गई है।

YouTube Creators की बल्ले-बल्ले, Amazon के साथ शुरू हुआ नया Affiliate फीचर, वीडियो से होगी अतिरिक्त कमाई

YouTube Creators की बल्ले-बल्ले, Amazon के साथ शुरू हुआ नया Affiliate फीचर, वीडियो से होगी अतिरिक्त कमाई

YouTube ने कंटेंट क्रिएटर्स के लिए कमाई का एक और रास्ता आसान कर दिया है। कंपनी ने Amazon के साथ साझेदारी करते हुए अपने Shopping Affiliate Program में बड़ा अपडेट किया है। फिलहाल यह सुविधा अमेरिका में रहने वाले क्रिएटर्स के लिए उपलब्ध है। इसके तहत क्रिएटर्स अब अपने YouTube Shorts, लंबे वीडियो और Livestreams में Amazon के प्रोडक्ट्स को टैग कर सकेंगे।

 

इस फीचर की मदद से वीडियो देखने वाले यूजर्स को वीडियो में दिखाए या सुझाए गए प्रोडक्ट को खोजने के लिए अलग से Amazon पर जाने की जरूरत नहीं होगी। वे YouTube पर ही प्रोडक्ट को देख सकेंगे और उस पर क्लिक करके सीधे खरीदारी कर सकेंगे। वहीं, क्रिएटर को इस खरीदारी से Affiliate Commission मिल सकेगा। गैजेट और फैशन क्रिएटर्स को होगा खास फायदा

 

YouTube का यह नया फीचर खास तौर पर Gadget Reviewers, Fashion Creators, Beauty Experts और Product Recommendation Creators के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। अब क्रिएटर जिस प्रोडक्ट की अपने वीडियो में सिफारिश करेंगे, उसे सीधे वीडियो के साथ टैग कर सकेंगे। इससे दर्शकों को प्रोडक्ट ढूंढने में आसानी होगी और क्रिएटर्स को अपने कंटेंट से अतिरिक्त कमाई का मौका मिलेगा।

 

कौन कर सकेगा Amazon Product Tagging?

YouTube के मुताबिक, Amazon के प्रोडक्ट टैग करने के लिए क्रिएटर का YouTube Partner Program (YPP) और YouTube Shopping Affiliate Program दोनों में शामिल होना जरूरी है। इसके अलावा क्रिएटर के Amazon Influencer या Amazon Associates अकाउंट को उसके YouTube चैनल से लिंक होना चाहिए। पात्र क्रिएटर्स YouTube Studio में मौजूद Product Picker के जरिए अपने वीडियो में Amazon के प्रोडक्ट टैग कर सकेंगे।

 

यह सुविधा Shorts, सामान्य वीडियो और Livestreams तीनों तरह के कंटेंट में इस्तेमाल की जा सकती है।

 

  YouTube का Auto-Tagging फीचर भी मिलेगा

 

क्रिएटर्स का काम आसान करने के लिए YouTube ने Auto-Tagging का विकल्प भी दिया है। यह फीचर हाल ही में अपलोड किए गए वीडियो को स्कैन करके ऐसे प्रोडक्ट्स की पहचान कर सकता है जिन्हें टैग किया जा सकता है। अगर किसी क्रिएटर को जरूरी प्रोडक्ट लिस्ट में नहीं मिलता है, तो वह Creator Support से मदद ले सकता है।

 

  विदेशों से होने वाली खरीदारी पर भी कमाई

YouTube के इस अपडेट की खास बात यह है कि क्रिएटर की कमाई सिर्फ अमेरिकी दर्शकों तक सीमित नहीं रहेगी। यदि कोई दर्शक अमेरिका के बाहर से वीडियो देख रहा है, तो YouTube उसे स्थानीय और भरोसेमंद मर्चेंट से जोड़ने की कोशिश करेगा। अगर स्थानीय विकल्प उपलब्ध नहीं होता है, तो दर्शक को Amazon का अमेरिकी पेज या संबंधित क्षेत्र का विकल्प दिखाया जा सकता है।

 

 YouTube Studio में दिखेगी कमाई

 

क्रिएटर्स YouTube Studio Analytics के जरिए Product Clicks और Estimated Revenue को ट्रैक कर सकेंगे। Amazon द्वारा कमाई को अंतिम रूप देने के बाद भुगतान सामान्य AdSense अकाउंट के जरिए किया जाएगा। भुगतान मासिक आधार पर होगा। उदाहरण के तौर पर जनवरी में हुई कमाई का भुगतान मार्च के पेआउट में दिखाई दे सकता है।

 

 प्रोडक्ट वापस करने पर कम हो सकती है कमाई

 

Affiliate Commission से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नियम भी है। यदि कोई दर्शक क्रिएटर के लिंक के जरिए खरीदा गया प्रोडक्ट बाद में वापस कर देता है, तो उस खरीदारी से मिली कमीशन राशि क्रिएटर के बैलेंस से काटी जा सकती है। यदि इससे बैलेंस निगेटिव हो जाता है, तो भविष्य में होने वाली कमाई से उस राशि की भरपाई की जाएगी।

 

 YouTube के नियमों का पालन जरूरी

YouTube ने स्पष्ट किया है कि प्रोडक्ट टैगिंग करने वाले क्रिएटर्स को उसके Product Tagging Rules, Community Guidelines और Paid Promotion Disclosure से जुड़े नियमों का पालन करना होगा कुल मिलाकर, Amazon के साथ यह इंटीग्रेशन उन YouTubers के लिए महत्वपूर्ण अपडेट है जो अपने वीडियो में नियमित रूप से प्रोडक्ट्स की सिफारिश करते हैं। अब दर्शक वीडियो से सीधे प्रोडक्ट तक पहुंच सकेंगे और क्रिएटर्स को अपने कंटेंट से Affiliate Income का एक अतिरिक्त जरिया मिलेगा।

H-1B वीज़ा का झटका बनेगा नया मौका, भारत में मिल सकती है ग्लोबल पैकेज वाली जॉब्स, जानिए कैसे बदल रहा है IT सेक्टर का गणित?

H-1B वीज़ा का झटका बनेगा नया मौका, भारत में मिल सकती है ग्लोबल पैकेज वाली जॉब्स, जानिए कैसे बदल रहा है IT सेक्टर का गणित?

Indian IT Sector Jobs

Indian IT Sector Jobs: वैश्विक अर्थव्यवस्था और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के परिदृश्य में एक बड़ा ढांचागत बदलाव देखने को मिल रहा है। दशकों से भारतीय आईटी पेशेवरों और बहुराष्ट्रीय टेक कंपनियों के लिए अमरीका का 'H-1B वीज़ा' पासपोर्ट से कहीं अधिक—वैश्विक अवसरों का सबसे बड़ा द्वार माना जाता रहा है। हालाँकि, अमेरिकी आव्रजन नीतियों में हालिया कड़े बदलावों, नए वीज़ा नियमों पर प्रस्तावित रिकॉर्ड शुल्क (जो लाख डॉलर तक की सीमा छू रहे हैं) और कड़े आव्रजन मानदंडों ने इस स्थापित समीकरण को गहरा झटका दिया है।

इस नए घटनाक्रम ने भारतीय आईटी दिग्गजों, नीति निर्माताओं और युवा टेक पेशेवरों के सामने एक यक्ष प्रश्न खड़ा कर दिया है: क्या अब अमरीका केंद्रित मॉडल से बाहर निकलकर खुद भारत के भीतर मजबूत और टिकाऊ विकल्प तलाशने का समय आ गया है?

आव्रजन नीतियों में बदलाव का नया दौर और पृष्ठभूमि

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) और आव्रजन एजेंसियों द्वारा H-1B वीज़ा व्यवस्था को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाया जा रहा है:

  • लागत में बेतहाशा वृद्धि : नए नियमों के तहत नए H-1B आवेदनों के लिए भारी-भरकम शुल्क के प्रस्ताव ने भारतीय आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए ऑन-साइट स्पॉन्सरशिप को आर्थिक रूप से बेहद महंगा बना दिया है।
  • वेतन मानदंड और लॉटरी प्रणाली : वीज़ा लॉटरी प्रक्रिया में न्यूनतम वेतन सीमाओं और उच्च दक्षता वाले आवेदकों को प्राथमिकता देने से शुरुआती करियर वाले टेक इंजीनियरों के लिए अमेरिकी वीज़ा हासिल करना पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर प्रभाव : अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने वाले भारतीय STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) छात्रों के लिए 'OPT से H-1B' श्रेणी में नौकरी में ट्रांसफर होना मुश्किल हुआ है, जिससे 'अमेरिकन ड्रीम' की अनिश्चितता और बढ़ गई है।

 

Indian IT Sector Jobs

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Indian IT Sector Jobs

डीप-टेक और स्वदेशी AI/डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर : भारत का UPI, ONDC और 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) विश्व स्तर पर मिसाल बन चुका है। देश में जेनेरेटिव एआई (GenAI), सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और क्लाउड आर्किटेक्चर जैसे डीप-टेक क्षेत्रों में भारी निवेश आ रहा है।

'रिवर्स ब्रेन ड्रेन' (Reverse Brain Drain) : आव्रजन की जटिलताओं और भारत में बेहतर जीवनशैली, आकर्षक पैकेज व जीवंत स्टार्टअप कल्चर के चलते पिछले दो-तीन वर्षों में हजारों अनुभवी भारतीय आईटी विशेषज्ञ अमेरिका व यूरोप छोड़कर स्वदेश लौट चुके हैं। यह प्रतिभा पूल भारत के स्थानीय इनोवेशन इकोसिस्टम को अत्यधिक मजबूती दे रहा है।

क्या भारत के अलावा अन्य वैश्विक विकल्प भी हैं?

अमेरिकी बाज़ार पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए भारतीय आईटी उद्योग अब वैश्विक स्तर पर अपनी रणनीतियों का विविधीकरण (Diversification) कर रहा है:

  • यूरोप व ब्रिटेन : जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश अपनी घटती कार्यबल आबादी के कारण भारतीय टेक पेशेवरों के लिए अधिक अनुकूल वीज़ा और वर्क-परमिट नीतियां पेश कर रहे हैं।
  • मध्य पूर्व (GCC Region) : दुबई, रियाद और अबू धाबी जैसे केंद्र भारी डिजिटल रूपांतरण (Digital Transformation) से गुजर रहे हैं, जहाँ भारतीय डेवलपर्स के लिए बड़े पैमाने पर अवसर उभर रहे हैं।
  • दक्षिण-पूर्व एशिया व जापान : जापान में वृद्ध होती आबादी के चलते सॉफ्टवेयर और रोबोटिक्स इंजीनियर्स की भारी मांग है।

चुनौतियाँ : स्वदेशी इकोसिस्टम बनाने में क्या रुकावटें हैं?

यद्यपि भारत में विकल्प मौजूद हैं, फिर भी कुछ बड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं:

  1. वेतन और क्रय शक्ति विषमता: भारत में शीर्ष-स्तरीय पैकेज बढ़े हैं, लेकिन शुरुआती और मध्य-स्तरीय टेक पेशेवरों का औसत वेतन अमेरिकी मानकों की तुलना में अभी भी कम है।
  2. रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में निवेश की कमी: भारतीय आईटी क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा अभी भी सेवाओं (Services) पर आधारित है, उत्पाद विकास (Product-based R&D) पर नहीं।
  3. बुनियादी ढाँचा और जीवन की गुणवत्ता: मेट्रो शहरों में बुनियादी ढाँचे का दबाव (ट्रैफिक, प्रदूषण) भी कई पेशेवरों को विदेश जाने का विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करता है।

संकट नहीं, बल्कि स्वावलंबन का अवसर

अमेरिकी वीज़ा और आव्रजन नीतियों में बढ़ती सख्ती भारतीय टेक इंडस्ट्री के लिए कोई विनाशकारी संकट नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक अवसर (Blessing in Disguise) है।

दशकों से 'ब्रेन ड्रेन' की समस्या से जूझ रहे भारत के लिए यह समय अपने टेक-इकोसिस्टम को सिर्फ सर्विस-प्रोवाइडर बनाने के बजाय वैश्विक इनोवेशन हब बनाने का है। GCCs का बढ़ता दायरा, स्वदेशी AI स्टार्टअप्स और घरेलू डिजिटल बाज़ार यह साबित करते हैं कि भारतीय आईटी सेक्टर को अब अमेरिका के 'H-1B वीज़ा' पर पूरी तरह निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। भारत में ही वैश्विक स्तर के विकल्प मौजूद हैं और यह समय देश को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में 'विश्व गुरु' बनाने की दिशा में अपने संसाधन लगाने का है।

अघोरी ने शमशान से जलते शव का मांस निकालकर खाया, कहा- ‘यह बहुत टेस्टी है’, वीडियो शेयर किया, उज्‍जैन का संत समाज भड़का

अघोरी ने शमशान से जलते शव का मांस निकालकर खाया, कहा- ‘यह बहुत टेस्टी है’, वीडियो शेयर किया, उज्‍जैन का संत समाज भड़का

Aghori

उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट से एक बेहद खौफनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। किन्नर अखाड़े से जुड़ी अघोरी तांत्रिक काली उर्फ नंद गिरी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वह जलती चिता से तलवार के जरिए इंसानी मांस निकालकर खाते हुए नजर आ रही है। वीडियो में तांत्रिक को “यह बहुत टेस्टी है” और “मैं तुम्हारे जीवन से खेलूंगी” जैसी अमानवीय बातें कहते हुए सुना जा सकता है।

इस वीभत्स वीडियो के वायरल होने के बाद आम जनता के साथ-साथ संत समाज में भी भारी आक्रोश है। महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए इसे वैदिक परंपरा और अघोर मर्यादा के खिलाफ बताया है। आक्रोशित लोग अब इस कृत्य को अमानवीय बताते हुए अघोरी तांत्रिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।

वीडियो में खुद को अघोरी और किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बताने वाली काली उर्फ नंद गिरी श्मशान घाट में जलती चिता से कुछ निकालकर खाती नजर आ रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद संत समाज और आम लोगों में नाराजगी जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि वीडियो महिला के इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा किया गया था।

इस वीडियो के बाद इस तरह की तांत्रिक प्रैक्‍टिस को लेकर बहस चल पडी है। इसके बाद उज्‍जैन के संत समाज ने इस अभ्‍यास को अघौर परंपरा में खिलाफ मानते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

क्‍या है वायरल वीडियो में : वायरल वीडियो में महिला यह कहते हुए नजर आती है कि वह चिता से मांस खाएगी। इसके बाद वह हाथ में तलवार लेकर जलती चिता के पास जाती और उसमें से कुछ निकालकर खाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। वीडियो सामने आने के बाद उज्जैन के साधु-संतों और अघोर परंपरा से जुड़े लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

इंस्‍टाग्राम पर शेयर किया श्मशान का वीडियो : वायरल हो रहे इस वीडियो में महिला हाथ में तलवार लिए जलती चिता के पास खड़ी दिखाई दे रही है। वीडियो में वह यह कहती हुई सुनाई देती है कि ‘हम आज इंसान का मांस खाएंगे। इसके बाद वह तलवार की मदद से चिता में से कुछ निकालती है और उसे खाने का दावा करती है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो महिला ने अपने ही इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया गया था, जिसके बाद यह तेजी से फैल गया। हालांकि, इस वीडियो की प्रामाणिकता की आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

संत समाज ने जताया कड़ा ऐतराज : वीडियो के सामने आते ही उज्जैन के साधु-संतों और अघोर परंपरा से जुड़े लोगों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी महाराज समेत कई प्रमुख संतों ने इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की है। संतों का स्पष्ट कहना है कि अंतिम संस्कार और शव से जुड़ी एक तय मर्यादा होती है। इस तरह का व्यवहार सनातन धर्म और अघोर परंपरा की मर्यादा के पूरी तरह खिलाफ है।

FIR दर्ज करने और कार्रवाई की मांग: संतों का कहना है कि जलते शव का इस तरह अपमान करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। संत समाज ने पुलिस प्रशासन से इस मामले पर तुरंत संज्ञान लेने, आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

तमिलनाडु में छिड़ी रार! TVK के दावों पर भड़की कांग्रेस, कहा- राहुल गांधी ही होंगे PM फेस

तमिलनाडु में छिड़ी रार! TVK के दावों पर भड़की कांग्रेस, कहा- राहुल गांधी ही होंगे PM फेस

Tamil Nadu Politics 2029 PM Candidate

2029 PM Candidate: साल 2029 के लोकसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन विपक्षी खेमे में प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर सियासत अभी से गरमाने लगी है। विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री का चेहरा कौन होगा? इसे लेकर तमिलनाडु में राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है। सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) और उसकी गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के बीच पीएम पद की उम्मीदवारी को लेकर सीधा टकराव दिखाई दे रहा है। स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि कांग्रेस के मंत्रियों ने राज्य सरकार से इस्तीफा देने तक का ऐलान कर दिया है।

राहुल गांधी के नाम पर समर्थन दें वरना देंगे इस्तीफा

तमिलनाडु के मंत्री एस. राजेश कुमार ने दो-टूक कहा है कि यदि गठबंधन सहयोगी TVK 2029 के चुनाव में राहुल गांधी को पीएम उम्मीदवार बनाने के फैसले का समर्थन नहीं करती है, तो वह और उनके साथी मंत्री पी. विश्वनाथन तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे देंगे। कन्याकुमारी में एक कार्यक्रम के दौरान राजेश कुमार ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा कि राहुल गांधी ही भारत के अगले प्रधानमंत्री होंगे। हम अपने रुख से कोई समझौता नहीं करने वाले। इससे पहले शुक्रवार को उच्च शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन ने भी स्पष्ट किया था कि INDIA गठबंधन की ओर से राहुल गांधी ही पीएम पद के निर्विवाद चेहरा हैं। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

TVK नेताओं की अलग ही मांग 

विवाद की शुरुआत TVK नेताओं के उस बयान से हुई जिसमें मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (अभिनेता थलपति विजय) को 2029 का प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाने की मांग की गई। राज्य के मंत्री एम. शरतकुमार ने हाल ही में विजय की तारीफ करते हुए कहा था, जो हमारे दिलों में, घरों में और सेंट जॉर्ज फोर्ट में सीएम हैं, वही देश के अगले प्रधानमंत्री हैं। TVK खेमे से लगातार उठ रही इस मांग ने कांग्रेस को असहज कर दिया है।

तमिलनाडु विधानसभा का सीटों का गणित

तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों में से TVK के पास 107 विधायक हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 118 है। सरकार बनाने के लिए TVK को 5 सीटों वाली कांग्रेस, MDMK और अन्य सहयोगियों के समर्थन की आवश्यकता पड़ी थी। मई में कांग्रेस के समर्थन के बाद ही राज्य में सरकार का गठन हो सका था। ALSO READ: तमिलनाडु की विजय सरकार का यू-टर्न, CJP और लेफ्ट के प्रदर्शन में जाने से छात्रों को रोकने वाला आदेश वापस

MDMK प्रमुख वाइकू का कांग्रेस को समर्थन

गठबंधन के अन्य सहयोगी MDMK के प्रमुख वाइकू ने भी राहुल गांधी की उम्मीदवारी का खुलकर समर्थन किया है। वाइकू ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस INDIA गठबंधन का नेतृत्व कर रही है, इसलिए राहुल गांधी के अलावा पीएम पद का कोई दूसरा विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय को सलाह दी कि वे इस तरह के बेतुके दावे करने वाले अपने मंत्रियों पर तुरंत लगाम लगाएं।

तमिलनाडु में कितनी हैं लोकसभा सीटें?

उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु में लोकसभा की 39 सीटें हैं। ऐसे में यदि आगामी लोकसभा चुनाव 2029 में उनकी पार्टी सभी 39 सीटें भी जीत लेती है, तो भी प्रधानमंत्री पद के लिए उनका दावा नहीं बनता। क्योंकि वर्तमान स्थिति में देखें तो विपक्ष में कांग्रेस ही सबसे बड़ी पार्टी है। ऐसे में टीवीके का दावा तो बनता ही नहीं है। 

इंदौर में फिर एक रेस्टोरेंट में मोमोज में रेंगती मिलीं इल्लियां, शिकायत के बाद फूड विभाग ने जारी किया नोटिस

इंदौर में फिर एक रेस्टोरेंट में मोमोज में रेंगती मिलीं इल्लियां, शिकायत के बाद फूड विभाग ने जारी किया नोटिस

Photo – Twitter

अपने खान-पान के लिए जाने जाने वाले इंदौर में खाद्य सामग्रियों में कभी इल्‍लियां तो कभी कॉकरोच मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब एक रेस्‍टोरेंट में मोमोज में इल्‍लियां मिलने का मामला सामने आया है।

सी-21 मॉल के पीछे डायमेंशन फर्निचर के सामने स्थित एक रेस्टोरेंट में ग्राहकों को परोसे गए मोमोज में इल्लियां मिलने का आरोप लगाया गया है। मामला सामने आने के बाद ग्राहक ने खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पर विभाग की टीम ने रेस्टोरेंट पहुंचकर जांच की और प्रबंधन को नोटिस जारी किया है।

क्‍या है पूरा मामला : शुक्रवार शाम दीपक मीणा अपने दोस्तों के साथ नाश्ता करने रेस्टोरेंट पहुंचे थे। उन्होंने वहां मोमोज का ऑर्डर दिया। प्लेट टेबल पर आने के बाद मोमोज में इल्लियां रेंगती दिखाई देने का दावा किया गया। यह देखकर ग्राहक हैरान रह गए और उन्होंने तत्काल रेस्टोरेंट प्रबंधन के सामने शिकायत दर्ज कराई। दीपक मीणा के मुताबिक, उन्होंने रेस्टोरेंट संचालक सिद्धार्थ मालवीय और कर्मचारी सोनू पाल से इस मामले को लेकर सवाल किया। आरोप है कि कर्मचारी ने यह कहते हुए जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया कि मोमोज रेस्टोरेंट में तैयार नहीं किए जाते हैं। इसको लेकर ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच बहस भी हुई।

फ्रोजन मोमोज की बास्केट में भी इल्लियां : मामला सामने आने के बाद ग्राहकों ने रेस्टोरेंट में रखी फ्रोजन मोमोज की बास्केट की भी जांच की। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसमें रखे अन्य मोमोज में भी इल्लियां दिखाई दीं। इसके बाद मौके पर फोटो और वीडियो बनाए गए और पूरे मामले की जानकारी खाद्य सुरक्षा विभाग को दी गई।

शिकायत में रेस्टोरेंट में खाद्य पदार्थों के रखरखाव, साफ-सफाई और गुणवत्ता की विस्तृत जांच कराने की मांग की गई। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन सामने आने पर रेस्टोरेंट को सील करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। शिकायत के साथ फोटो, वीडियो और रेस्टोरेंट की लोकेशन भी विभाग को उपलब्ध कराई गई। सीनियर फूड इंस्पेक्टर मनीष स्वामी के मुताबिक विभाग को रेस्टोरेंट के खिलाफ शिकायत मिली थी। शिकायत मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की विशेष टीम मौके पर पहुंची और रेस्टोरेंट की जांच की। जांच के बाद रेस्टोरेंट प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया है। अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल दुकानदार रेस्टोरेंट नहीं खोल रहा है और विभाग नोटिस के जवाब का इंतजार कर रहा है। संचालक की ओर से दिए जाने वाले जवाब और विभागीय जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इसी जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किस स्तर तक हुआ है।