Tiger Shroff Firing Case में मुंबई पुलिस का बड़ा खुलासा, प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा

Tiger Shroff Firing Case में मुंबई पुलिस का बड़ा खुलासा, प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा

Tiger Shroff Firing Case

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई के जुहू इलाके में हुई फायरिंग के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले की जांच कर रही है।

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पुलिस के मुताबिक वारदात के बाद आरोपी नेपाल भागने की फिराक में थे। हालांकि, आरोपियों की उम्र को लेकर सामने आई जानकारी में बाद में बदलाव हुआ है। मुंबई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी नाबालिग नहीं हैं।

 

यह घटना 18 अक्टूबर 2026 की शाम को हुई थी। टाइगर श्रॉफ एक फुटबॉल ग्राउंड से निकल रहे थे, तभी बाइक सवार तीन लोग वहां पहुंचे। इनमें से दो लोगों ने अभिनेता की कार पर कथित तौर पर गोलीबारी की और इसके बाद मौके से फरार हो गए। घटना में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित बच गए। शुरुआती रिपोर्टों में उनके ड्राइवर और एक ऑटो रिक्शा चालक के घायल होने की जानकारी भी सामने आई थी।

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कोटा रेलवे स्टेशन से पकड़े गए तीन आरोपी

 

मुंबई पुलिस और राजस्थान पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कोटा रेलवे स्टेशन से तीन संदिग्धों को पकड़ा। इस ऑपरेशन में राजस्थान पुलिस के साथ एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने भी सहयोग किया।

 

पुलिस के अनुसार, आरोपियों को पकड़ने के लिए कई विशेष टीमें गठित की गई थीं। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, तकनीकी विश्लेषण और जमीनी स्तर पर की गई पड़ताल की मदद ली। जांच में आरोपियों की गतिविधियों का पता अंधेरी वेस्ट रेलवे स्टेशन से लेकर मुंबई के उत्तरी हिस्से और फिर सूरत तक लगाया गया। इसके बाद उनके पुणे-जयपुर एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होने की जानकारी मिली। आगे की कार्रवाई में कोटा पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।

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कौन हैं पकड़े गए आरोपी?

 

शुरुआती जानकारी में तीन संदिग्धों में से एक की उम्र 17 साल बताई गई थी। वहीं, अन्य दो की पहचान बिहार के बेगूसराय निवासी 22 वर्षीय ऋतिक कुमार उर्फ रोशन और हरियाणा के सोनीपत निवासी 18 वर्षीय रेहान के रूप में बताई गई। हालांकि, मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बाद में स्पष्ट किया कि इस मामले में पकड़े गए तीनों आरोपी नाबालिग नहीं हैं। पुलिस के मुताबिक, एक आरोपी की उम्र 18 साल और बाकी दो की उम्र 22 साल है। इस तरह आरोपियों की उम्र को लेकर शुरुआती रिपोर्टों और पुलिस के बाद के बयान में अंतर सामने आया है।

 

नेपाल भागने की फिराक में थे आरोपी

 

मुंबई पुलिस ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि फायरिंग के बाद आरोपी नेपाल भागने की योजना बना रहे थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात के पीछे किसका हाथ था और आरोपियों को किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह से निर्देश मिले थे या नहीं। मुंबई पुलिस ने कहा कि आरोपियों को मुंबई लाने की प्रक्रिया जारी है। इस कार्रवाई में दिल्ली, गुजरात और राजस्थान पुलिस भी सहयोग कर रही हैं।

 

जांच के लिए बनाई गईं करीब 20 विशेष टीमें

 

मुंबई पुलिस के डीसीपी राज तिलक रौशन के मुताबिक, रविवार शाम करीब सात बजे बाइक पर तीन लोग आए थे। इनमें से दो ने टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी की और इसके बाद फरार हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आरोपियों का पता लगाने के लिए करीब 20 विशेष टीमें बनाई थीं।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जानकारी और स्थानीय स्तर पर जुटाए गए सुरागों की मदद से उनकी आवाजाही का पता लगाया। पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट से संबंधित धाराएं लगाई हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।

 

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिया कार्रवाई का भरोसा

 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने टाइगर श्रॉफ से बात कर मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को ढूंढ निकाला जाएगा और इस तरह की वारदातों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फडणवीस के मुताबिक, आरोपियों के महाराष्ट्र के बाहर से, संभवतः विदेश से, काम करने की आशंका की भी जांच की जा रही है। इसके लिए अन्य राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय किया जाएगा।

 

अब आगे क्या करेगी पुलिस?

 

फिलहाल पुलिस आरोपियों को मुंबई लाने, फायरिंग के पीछे की वजह का पता लगाने और संभावित साजिश की जांच में जुटी है। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक और हथियार कहां से आए तथा आरोपियों को किसने मदद पहुंचाई। पुलिस की जांच पूरी होने और आधिकारिक तौर पर अधिक जानकारी सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

यूपी में बनेंगे प्राकृतिक खेती के जिले, योगी सरकार का बड़ा प्लान; गोशालाओं से किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

यूपी में बनेंगे प्राकृतिक खेती के जिले, योगी सरकार का बड़ा प्लान; गोशालाओं से किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

उत्तर प्रदेश में अब गोशालाएं केवल गोवंश संरक्षण का ठिकाना नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई धुरी बनने जा रही हैं। योगी सरकार गोशालाओं से निकलने वाले गोबर और अन्य जैविक संसाधनों को प्राकृतिक खेती से जोड़कर आत्मनिर्भरता का नया मॉडल विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

 

इसके लिए ललितपुर को प्रदेश के पहले पायलट नेचुरल फार्मिंग डिस्ट्रिक्ट के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य गोशालाओं की आय बढ़ाने के साथ किसानों को प्राकृतिक खेती के संसाधन उपलब्ध कराना और उनके उत्पादों के लिए बाजार तैयार करना है।

एसआईआर के बाद भी मतदाता सूची में गड़बड़ी, फर्जी मतदाताओं के नाम शामिल : अखिलेश

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठाते हुए सोमवार को कहा कि इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद भी मतदाता सूची में गड़बड़ी है और उसमें फर्जी मतदाताओं के नाम शामिल हैं।

सपा मुख्‍यालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, अखिलेश ने कहा एसआईआर के बाद भी मतदाता सूची में गड़बड़ी है और उसमें फर्जी मतदाताओं के नाम शामिल हैं। कई जगहों पर एक ही व्यक्ति एक से ज्यादा मतदान केंद्रों पर मतदाता के रूप में पंजीकृत है।

बयान में अखिलाश ने दावा किया कि “निर्वाचन आयोग ने भी इन गड़बिड़यों को स्वीकार किया है, हालांकि वह इन्हें छोटी-मोटी गलती बता रहा है। उन्होंने कहा यह छोटी-मोटी नहीं, बल्कि बहुत मोटी गड़बड़ी है।

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अखिलेश ने सोमवार को लखनऊ के गोमती नगर में पूर्व मंत्री विद्या चौधरी के आवास पर पहुंचकर उनका हालचाल जाना। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा पूरा देश जानता है कि जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) हारने लगती है, तो वह बेईमानी और चोरी पर उतर आती है।

अखिलेश ने आरोप लगाया भाजपा निर्वाचन आयोग की मिलीभगत से बेईमानी करती है। निर्वाचन आयोग भाजपा के इशारे पर काम करता है।

उन्होंने कहा अगर विपक्षी दल और आम जनता निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं, तो भाजपा को क्यों दर्द होता है? भाजपा बचाव के लिए क्यों सामने आती है?”

अखिलेश ने “मतदाता सूची में गड़बड़ी और चुनावों में वोटों की लूट” को लेकर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने दावा किया कि सपा ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और उपचुनाव में “वोटों की चोरी” को लेकर निर्वाचन आयोग से सबूतों के साथ शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

अखिलेश ने कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे भाजपा के इशारे पर काम नहीं करना चाहिए।

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ग्वालियर शीतला मंदिर हादसे के घायलों से सीएम डॉ. मोहन यादव ने मुलाकात, बोले घटना के दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

ग्वालियर शीतला मंदिर हादसे के घायलों से सीएम डॉ. मोहन यादव ने मुलाकात, बोले घटना के दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को ग्वालियर के शीतला माता मंदिर हादसे के पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने ट्रक हादसे में गंभीर रूप से घायल श्रद्धालुओं से ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में मुलाकात की। सीएम डॉ. मोहन यादव ने उनके स्वास्थ्य और उन्हें  मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। साथ ही, उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की। 

 

इसके बाद मुख्यमंत्री ने संबंधित डॉक्टरों और अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी घायलों को गुणवत्तापूर्ण और फ्री इलाज उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने, मरीजों के समुचित उपचार और देखभाल के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी दिए।

 

घायलों से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से कहा कि बीती रात एक घटना घटी थी। हम उस घटना में घायल हुए लोगों से मिलने यहां आए हैं । हम घायलों को बेहतर चिकित्सा दिलाने के लिए तत्पर हैं। और घटना की जांच के हमने निर्देश दे दिए हैं। हर व्यक्ति की चिंता करने का काम सरकार का है। सरकार सभी लोगों के साथ खड़ी है। इस घटना के दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।


सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। आवश्यकता पड़ने पर एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था भी की जाएगी, लेकिन घायलों को हर संभव बेहतर उपचार मिले, यह सुनिश्चित किया जा रहा है। चिकित्सकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अधिकांश घायलों की स्थिति में पहले की तुलना में सुधार है। हालांकि, एक-दो गंभीर मरीजों की स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

UP चुनाव 2027 : सर्वे में BJP को बढ़त का दावा, योगी सरकार से 77% संतुष्ट, CM पद के लिए योगी आदित्यनाथ पहली पसंद

UP चुनाव 2027 : सर्वे में BJP को बढ़त का दावा, योगी सरकार से 77% संतुष्ट, CM पद के लिए योगी आदित्यनाथ पहली पसंद

Yogi adityanath

उत्तरप्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले न्यूज 18 नेटवर्क के एक सर्वेक्षण में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को बढ़त मिलने का दावा किया गया है। सर्वे के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को लेकर लोगों की राय काफी हद तक सकारात्मक है। हालांकि, रोजगार और बेरोजगारी का मुद्दा सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।

 

सर्वेक्षण में राज्य के सभी 75 जिलों के 30,925 लोगों को शामिल किया गया। सर्वे 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के बीच किया गया था। इसके नतीजों में भाजपा-राजग को बढ़त दिखाई गई है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा)-कांग्रेस गठबंधन और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के समर्थन का भी आकलन किया गया है।

 

सर्वे में भाजपा-राजग को 66.6 प्रतिशत समर्थन

 

सर्वेक्षण के अनुसार, यदि अभी विधानसभा चुनाव कराए जाएं तो 66.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को वोट देने की बात कही। वहीं, 26.4 प्रतिशत लोगों ने सपा-कांग्रेस गठबंधन और 5.4 प्रतिशत ने बसपा के पक्ष में राय दी। अगली सरकार किस गठबंधन की बनेगी, इस सवाल पर भी 66.6 प्रतिशत लोगों ने भाजपा-राजग के पक्ष में राय जताई। वहीं, 26.5 प्रतिशत लोगों ने सपा-कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनने की संभावना जताई। इसके अलावा, 65.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना था कि भाजपा को राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए।

 

ये आंकड़े सर्वेक्षण में शामिल लोगों की राय को दर्शाते हैं। इन्हें 2027 के चुनाव के वास्तविक नतीजे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

 

मुख्यमंत्री पद के लिए योगी आदित्यनाथ पहली पसंद

 

मुख्यमंत्री पद के लिए पसंद पूछे जाने पर योगी आदित्यनाथ को 66.2 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला। वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव 24.4 प्रतिशत लोगों की पसंद रहे। सर्वेक्षण में 77.1 प्रतिशत लोगों ने योगी सरकार के कामकाज पर संतुष्टि जताई, जबकि 13.5 प्रतिशत लोगों ने असंतोष व्यक्त किया। सरकार के प्रदर्शन का आकलन सात प्रमुख मानकों पर किया गया था।

 

कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को लेकर संतुष्टि

 

सर्वेक्षण में कानून-व्यवस्था सरकार का सबसे बेहतर आंका गया पक्ष रहा। इस मुद्दे पर 74 प्रतिशत लोगों ने संतुष्टि जताई। इसके बाद बुनियादी ढांचे को लेकर 68.6 प्रतिशत और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर 66.3 प्रतिशत लोगों ने संतोष व्यक्त किया।

 

मतदान के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा पूछे जाने पर 33.4 प्रतिशत लोगों ने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी। भाजपा-राजग के मौजूदा समर्थकों में 89.6 प्रतिशत लोग कानून-व्यवस्था से संतुष्ट थे। वहीं, सपा-कांग्रेस और बसपा समर्थकों के बीच यह आंकड़ा लगभग 43 प्रतिशत रहा।

 

सर्वे के मुताबिक, भाजपा-राजग के मौजूदा समर्थकों में 94.7 प्रतिशत लोग राज्य सरकार के कामकाज से संतुष्ट थे। इनमें 93.3 प्रतिशत ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पहली पसंद बताया, जबकि 93.2 प्रतिशत का मानना था कि भाजपा को तीसरा कार्यकाल मिलना चाहिए।

 

भाजपा ने पुराने समर्थकों को बनाए रखा, विपक्ष के समर्थन में भी सुधार

 

सर्वेक्षण में दावा किया गया कि 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट देने वाले लगभग 91 प्रतिशत लोग अब भी भाजपा या उसके गठबंधन का समर्थन कर रहे हैं।

 

दूसरी ओर, सपा-कांग्रेस गठबंधन के पुराने समर्थकों को बनाए रखने की दर लगभग 83 से 85 प्रतिशत बताई गई। सर्वे के मुताबिक, गठबंधन का मौजूदा समर्थन 2022 के विधानसभा चुनाव की तुलना में 3.7 प्रतिशत अंक और 2024 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2.4 प्रतिशत अंक अधिक था।

 

इन आंकड़ों से सर्वे में दोनों राजनीतिक खेमों के समर्थकों के रुझान का आकलन किया गया है। वास्तविक मतदान में मतदाताओं का व्यवहार अलग हो सकता है।

 

रोजगार बना सरकार के लिए बड़ी चुनौती

 

सरकार के कामकाज के सात मानकों में रोजगार ऐसा क्षेत्र रहा, जहां संतुष्टि का स्तर सबसे कम दर्ज किया गया। सर्वेक्षण के अनुसार, 58.3 प्रतिशत लोगों ने रोजगार के मामले में सरकार के प्रदर्शन पर संतुष्टि जताई।

 

बेरोजगार उत्तरदाताओं में यह आंकड़ा घटकर 50.7 प्रतिशत रह गया। भूमिहीन और अकुशल श्रमिकों के बीच रोजगार को लेकर संतुष्टि लगभग 52 से 53 प्रतिशत रही।

 

यहां तक कि भाजपा-राजग के मौजूदा समर्थकों में भी रोजगार के मुद्दे पर संतुष्टि 74.5 प्रतिशत थी, जो कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं के आंकड़ों से कम है।

 

सर्वेक्षण में रोजगार के अलावा महंगाई और परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने जैसे मुद्दों पर भी लोगों की राय ली गई। ऐसे मुद्दे आगामी विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकते हैं।

 

राम मंदिर चंदे के विवाद पर क्या बोले लोग?

 

सर्वेक्षण में अयोध्या स्थित राम मंदिर के लिए दिए गए चंदे में कथित हेराफेरी के मुद्दे पर भी लोगों से सवाल पूछे गए। इस मामले में 31.2 प्रतिशत लोगों ने मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, 20.6 प्रतिशत ने कर्मचारियों और ठेकेदारों तथा 13.7 प्रतिशत ने राज्य सरकार को जिम्मेदार माना।

 

यह आंकड़े उत्तरदाताओं की राय पर आधारित हैं। इन्हें कथित हेराफेरी के मामले में किसी पक्ष की कानूनी जिम्मेदारी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। सर्वेक्षण में जेन जी के विरोध प्रदर्शनों और अन्य सार्वजनिक मुद्दों को लेकर भी लोगों की राय जानने की कोशिश की गई।

कैसे किया गया सर्वेक्षण?

 

न्यूज18 नेटवर्क के इस सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों से जनसंख्या के अनुपात में उत्तरदाताओं का चयन किया गया। इसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोगों को शामिल किया गया। लोगों से घर-घर जाकर आमने-सामने बातचीत की गई। इसके लिए कंप्यूटर आधारित व्यक्तिगत साक्षात्कार (CAPI) और एक संरचित प्रश्नावली का इस्तेमाल किया गया।

 

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में प्रस्तावित हैं। ऐसे में सर्वेक्षण के निष्कर्ष राजनीतिक दलों के लिए जनमत को समझने का एक संकेत हो सकते हैं, लेकिन चुनाव का अंतिम परिणाम मतदाताओं के वास्तविक मतदान पर निर्भर करेगा।

कॉजपा नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिनों के लिए बढ़ायी गयी

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को सोमवार को मंदिर मार्ग पुलिस थाने में नवनियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया और दोनों को और दो दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

यह घटनाक्रम कॉजपा के उन आरोपों के बीच हुआ, जिनमें कहा गया है कि इस मामले में जमानत की कार्यवाही जानबूझकर विलंबित की जा रही है, ताकि इसके दो सह-संयोजकों की रिहायी रोकी जा सके। इससे पहले दोनों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए लगाई गई पाबंदियों का उल्लंघन करने के बाद 13 अक्टूबर को शुरुआती तौर पर पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

दोनों को कथित तौर पर ताला लगे गेट को फांदकर जंतर-मंतर में प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। जंतर-मंतर को इससे पहले निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया था।

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अन्य कॉजपा कार्यकर्ताओं के साथ दास और राकां ने उस दिन घटनास्थल पर राष्ट्र ध्वज प्रदर्शित किया था और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए थे। इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया था।

दोनों को बाद में एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था और मजिस्ट्रेट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

सूत्रों के अनुसार, सोमवार को पुलिस ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया, जिसके बाद अदालत ने उन्हें दो और दिनों के लिए जेल भेज दिया। उन्होंने बताया कि दास और रांका को अब बुधवार को पेश किया जाएगा।

रविवार को, दोनों की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने अज्ञात लोगों द्वारा धमकी दिए जाने का दावा किया, जिसके बाद पुलिस ने एक गैर-संज्ञेय मामला दर्ज किया।

कॉजपा संस्थापक अभिजीत दीपके ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया, था सरकार जानबूझकर आशु (आशुतोष) और सौरव की अवैध गिरफ्तारी को लंबा खींच रही है। वह अदालती कार्यवाही विलंबित करने और उनकी रिहाई को रोकने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रही है।

कॉजपा ने यह भी आरोप लगाया कि उनके नेताओं की रिहाई के लिए दी गई जमानतदारों की गारंटी को ‘अस्पष्ट’ आधारों पर खारिज कर दिया गया।

Pic Credit : UNI

अयोध्या का वैभव सात समंदर पार, रूसी बोले- दोनों देशों को जोड़ रही श्रीराम की लीला

अयोध्या का वैभव सात समंदर पार, रूसी बोले- दोनों देशों को जोड़ रही श्रीराम की लीला

Moscow Ramlila event

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में हुए विकास कार्यों की चर्चा अब रूस की राजधानी मॉस्को में भी हो रही है। मॉस्को में ‘रूसी राम’ के नाम से प्रसिद्ध सोवियत रंगमंच के अभिनेता गेनादी मिखाइलोविच पेचनिकोव की 100वीं जयंती पर आयोजित समारोह में रूसी कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने अयोध्या के विकास और रामलीला के आयोजन की सराहना की।

 

कलाकारों ने कहा कि जिस तरह दिवाली पर अयोध्या जगमगाती है, उसी तरह वे मॉस्को में भी भगवान राम की लीला के माध्यम से भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करना चाहते हैं। समारोह में भारतीय और रूसी कलाकारों की रामलीला को लेकर भी चर्चा हुई। इस दौरान वक्ताओं ने भगवान राम के आदर्शों, रामराज्य की अवधारणा और भारत-रूस के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने में पेचनिकोव के योगदान को याद किया।

अयोध्या के विकास से प्रभावित रूसी कलाकार

मॉस्को में आयोजित समारोह में बाल रंगमंच की निदेशक अल्ला लियोनिदोव्ना ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में हुए विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामलीला और अन्य विकास कार्यों के माध्यम से अयोध्या को बेहतर बनाया है। अब रूस में भी भगवान राम की लीला के जरिए राम राज्य की अवधारणा को समझने का मौका मिल रहा है। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भगवान राम के जीवन और उनके आदर्शों को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम भी है।

पिता के अभिनय ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत किया : तात्याना

‘रूसी राम’ गेनादी मिखाइलोविच पेचनिकोव की पुत्री तात्याना पेचनिकोव ने अपने पिता के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अभिनय के माध्यम से भारत और रूस की मित्रता को नया रूप दिया। भगवान राम की भूमिका निभाकर उन्होंने रूसी समाज को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराया। तात्याना ने उत्तर प्रदेश में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद अयोध्या का वैभव और बढ़ा है। उन्होंने कहा कि उनके पिता के अभिनय ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पेचनिकोव ने रूस को रामराज्य की अवधारणा से कराया परिचित

मॉस्को के एर्शोव थिएटर संस्थान के वीसी बिताली एवगेनिविच दाशिंस्की ने कहा कि गेनादी मिखाइलोविच पेचनिकोव ने रूस के लोगों को भगवान राम और रामराज्य की अवधारणा से परिचित कराया। उन्होंने अपने अभिनय के माध्यम से भगवान राम के आदर्शों को रूसी समाज तक पहुंचाया। उनका योगदान केवल रंगमंच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूत किया। आज उनकी 100वीं जयंती पर दोनों देशों के कलाकार और भारतीय समुदाय के लोग उन्हें याद कर रहे हैं।

भगवान राम का जीवन सिखाता है जीने का तरीका : अलेक्जेंड्रा

एर्शोव थिएटर संस्थान, मॉस्को की रेक्टर अलेक्जेंड्रा कोनेवा ने कहा कि भगवान राम के जीवन से हमें जीवन जीने का सलीका मिलता है। उनके आदर्श आज भी समाज को सही दिशा दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम के जीवन और चरित्र को रंगमंच के माध्यम से प्रस्तुत करना नई पीढ़ी को उनके विचारों से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

रूसी रंगमंच पर राम बनकर बनाई अलग पहचान

मास्को में आयोजित होने वाली रामलीला के निर्माता एवं निर्देशक डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि गेनादी मिखाइलोविच पेचनिकोव सोवियत रंगमंच के प्रतिष्ठित अभिनेता थे। उन्होंने भगवान राम की भूमिका निभाकर रूस में भारतीय संस्कृति और रामायण की परंपरा को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया। इसी कारण उन्हें ‘रूसी राम’ के नाम से जाना जाता है। उनकी जन्मशताब्दी पर मॉस्को में आयोजित समारोह में उनके अभिनय और भारत-रूस के सांस्कृतिक संबंधों में योगदान को याद किया गया। समारोह में रूसी कलाकारों और प्रवासी भारतीयों की भागीदारी ने दोनों देशों के सांस्कृतिक जुड़ाव को सामने रखा।

चंद्रबाबू नायडू-रेवंत-शिवकुमार की मुलाकातों से NDA टेंशन में, जगन ने भाजपा का साथ देने के लिए मांगी माफी

चंद्रबाबू नायडू-रेवंत-शिवकुमार की मुलाकातों से NDA टेंशन में, जगन ने भाजपा का साथ देने के लिए मांगी माफी

South India politics

South India politics: राजनीति में कोई भी रिश्ता स्थायी नहीं होता। आज जो साथ हैं, कल वे एक-दूसरे के खिलाफ हो सकते हैं। और दक्षिण भारत में यह खेल अब खुलकर खेला जा रहा है।

 

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी केन्द्र की एनडीए सरकार की बैसाखी है। 16 सांसद। सरकार इनके बिना डगमगा सकती है। और कांग्रेस ने इन जड़ों को हिलाना शुरू कर दिया है। रेवंत रेड्डी और डीके शिवकुमार  दोनों कांग्रेस के महत्वपूर्ण चेहरे नायडू से मिल रहे हैं। रेवंत तो लगातार। शिवकुमार दो बार। यह संयोग नहीं लग रहा। ALSO READ: CM Vijay : CM विजय का इशारा, तमिलनाडु विधानसभा में मचा हंगामा, थलापति को क्यों देनी पड़ी सफाई, पढ़िए क्या है मामला

कोई बड़ा खेल तैयार हो रहा है

नायडू पुराने खिलाड़ी हैं। वे जानते हैं कि सत्ता की बैसाखी कभी भी छूट सकती है। टीडीपी अपने सांसदों को एकजुट रहने का संदेश दे रही है। मतलब अंदरखाने कुछ हलचल है। कोई बड़ा खेल तैयार हो रहा है। जनता का विद्रोह बढ़ रहा है, और नेता भी हवा का रुख समझने लगे हैं। और जगन मोहन रेड्डी वाईएसआरसीपी के मुखिया ने अब जनता से माफी मांग ली है, सीईसी एक्ट का समर्थन करने के लिए, भाजपा का साथ देने के लिए। कहा– गलती हो गई। पछतावा हो रहा है। परीक्षक को छात्र नहीं नियुक्त कर सकता। निष्पक्ष निकाय चाहिए। अभी दो वोट सत्ता के, एक विपक्ष का – सिस्टम में खामी है।

क्या टीडीपी एनडीए से दूरी बनाएगी?

यह माफी महज शब्दों की नहीं लग रही। यह राजनीतिक पुनर्रचना का संकेत है। जगन कांग्रेस की तरफ लौट सकते हैं। दक्षिण में कांग्रेस फिर से समीकरण बनाने की कोशिश में है। तेलंगाना, आंध्र, कर्नाटक तीनों जगह दबाव बनाया जा रहा है। प्रश्न यह है कि नायडू कितनी दूर तक जाएंगे? क्या टीडीपी एनडीए से दूरी बनाएगी? या सिर्फ दबाव बनाने का खेल है? और जगन की माफी,  क्या यह सिर्फ जनभावना शांत करने की चाल है या वाकई दिशा बदलने का संकेत? 

 

राजनीति में माफी मांगना आसान है, लेकिन सत्ता का समीकरण बदलना मुश्किल। फिर भी हवा बदल रही है। जनता का विद्रोह नेताओं को मजबूर कर रहा है। अब देखना यह है कि यह संपर्क, ये मुलाकातें और ये माफी कहां जाकर थमती हैं। दक्षिण भारत का राजनीतिक भूगोल फिर से आकार ले रहा है। और केंद्र की सरकार बैसाखी पर खड़ी है – कोई भी झटका महंगा पड़ सकता है।

जादवपुर बुकस्टॉल विवाद को लेकर माकपा कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंची

पश्चिम बंगाल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कोलकाता के जादवपुर में दुर्गा पूजा के दौरान लगाए गए अपने अस्थायी बुकस्टॉल को हटाने की कोशिश के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है।

इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है। आरोप है कि जब पुलिस ने इस अस्थायी बुकस्टॉल को हटाने की कोशिश की, तो मौके पर एक बुलडोजर भी लाया गया था। इस घटना के बाद विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए, जिसमें वामपंथी समर्थक बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए और नारेबाजी की। माकपा के श्री सुजन चक्रवर्ती समेत अन्य नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस के पास बुकस्टॉल हटाने के लिए कोई कानूनी आदेश या लिखित नोटिस था। अब पार्टी ने जादवपुर की इस घटना को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

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यह घटना ऐसे समय में हुई है जब आरोप लग रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान वामपंथी दलों को अलग-अलग जगहों पर बुकस्टॉल लगाने से रोकने की कोशिश की जा रही है। जादवपुर, बारासात और नागरबाजार से भी इसी तरह के विवाद सामने आए हैं, जिसके बाद वामपंथी दलों ने सत्ताधारी भाजपा की आलोचना और तेज कर दी है। जादवपुर का यह विवाद बोंगांव में माकपा के एक बुकस्टॉल को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के बाद सामने आया है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ (सिंगल बेंच) ने गुरुवार को पार्टी को बुकस्टॉल लगाने की अनुमति दे दी थी।

इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी। मुख्य न्यायाधीश रवींद्रनाथ वी. घुगे और न्यायमूर्ति शब्बर रशीदी की एक विशेष खंडपीठ ने शुक्रवार को एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी।

Pic Credit : UNI

इंदौर में दशहरे पर रावण नहीं, शूर्पणखा का होगा दहन, कौन हैं देशभर की ये शूर्पणखाएं और क्‍या है वजह?

इंदौर में दशहरे पर रावण नहीं, शूर्पणखा का होगा दहन, कौन हैं देशभर की ये शूर्पणखाएं और क्‍या है वजह?

Dussehra.

आमतौर पर किसी भी शहर में दशहरे पर रावण दहन होता है, लेकिन इस बार इंदौर में दशहरे पर रावण दहन नहीं, बल्‍कि शूर्पणखा का दहन भी होगा। बता दें कि इस बार 20 अक्टूबर को पहली बार शूर्पणखा दहन किया जाएगा। संस्था “पौरुष” की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में देश के पांच चर्चित महिला अपराधियों के नामों को शूर्पणखा के प्रतीक से जोड़कर दहन किया जाएगा।

इनमें मेरठ की मुस्कान भी शामिल है, जिसका नाम नीले ड्रम में शव छिपाने के मामले से जुड़ा रहा है। एक अन्य महिला का उल्लेख सांप से कटवाकर हत्या कराने के मामले के संदर्भ में किया गया है। आयोजन महालक्ष्मी नगर के मैदान में शाम 7 बजे होगा।

यह आयोजन संस्था ‘पौरुष’ आयोग की ओर से किया जा रहा है। संस्था अध्यक्ष अशोक दशोरा ने बताया कि इसके जरिए महिलाओं से जुड़े गंभीर अपराधों और दोषियों को सजा दिए जाने की व्यवस्था पर सवाल उठाए जाएंगे। उनका कहना है कि देश की आजादी के करीब 80 साल बाद भी किसी महिला अपराधी को फांसी दिए जाने का मामला सामने नहीं आया है।

दशोरा ने बताया कि देश में करीब 45 महिलाओं को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन इन सजाओं पर अमल नहीं हुआ। पुरुष आयोग इस मुद्दे को समाज के सामने लाना चाहता है। संस्था का कहना है कि गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा मिलने और उसके क्रियान्वयन को लेकर समानता के सवाल पर चर्चा होनी चाहिए।
दशहरे पर रावण दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इसी परंपरा के बीच शूर्पणखा दहन की पहल अपने अलग स्वरूप के कारण चर्चा में है। पुरुष आयोग का कहना है कि इस आयोजन के जरिए गंभीर अपराधों के मामलों को सामने लाने और सजा के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए जाएंगे।

आयोजन में पांच महिला अपराधियों के चेहरे लगाए गए हैं। संस्था के अनुसार, इनमें पति की हत्या सहित अन्य जघन्य अपराधों से जुड़ी महिलाएं शामिल हैं। आयोजन के प्रचार में मेरठ के चर्चित नीले ड्रम मामले की आरोपी मुस्कान और सांप से कटवाकर हत्या कराने के मामले से जुड़ी महिला का उल्लेख किया गया है। इन मामलों ने देशभर में ध्यान खींचा था। ‘पौरुष’ आयोग का कहना है कि शूर्पणखा दहन के जरिए अपराध, दंड और न्याय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक चर्चा में लाना उसका उद्देश्य है।