Yogi Adityanath की Zero Tolerance Policy : अंकित बालियान हत्याकांड, गाने के विवाद से गैंगवार तक कैसे पहुंची कहानी? DGP ने खोला दोनों शूटर्स का पूरा राज

Yogi Adityanath की Zero Tolerance Policy : अंकित बालियान हत्याकांड, गाने के विवाद से गैंगवार तक कैसे पहुंची कहानी? DGP ने खोला दोनों शूटर्स का पूरा राज

Yogi adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत यूपी पुलिस ने हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान हत्याकांड के दो आरोपी शूटरों को शामली कोतवाली क्षेत्र में मुठभेड़ में ढेर कर दिया। दोनों आरोपियों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। इस संबंध में यूपी पुलिस मुख्यालय में डीजीपी राजीव कृष्ण ने सोमवार को प्रेसवार्ता में कहा कि प्रदेश की धरती को किसी भी गैंग की शरणस्थली नहीं बनने दिया जाएगा। प्रदेश की सीमा से बाहर व विदेशों से साजिश रचने वाले अपराधी भी किसी गलतफहमी में न रहें।   

 

थाना कोतवाली शामली क्षेत्रान्तर्गत पुलिस टीम द्वारा चेकिंग के दौरान 02 संदिग्ध व्यक्तियों को रोकने का प्रयास किया गया, जिस पर दोनों संदिग्धों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस टीम द्वारा आत्मरक्षार्थ की गई जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपी गोली लगने से घायल हो गए। उन्हें तत्काल उपचार हेतु अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकों की टीम द्वारा परीक्षण के उपरान्त दोनों को मृत घोषित कर दिया गया।

 

डीजीपी के मुताबिक मुठभेड़ में मारे गए आरोपियों की पहचान मोहित निवासी सोनीपत और सुमित निवासी कुंडली, सोनीपत के रूप में हुई है। कार्रवाई के दौरान आरोपियों की फायरिंग में शामली स्वाट टीम के हेड कांस्टेबल हरविंदर और हेड कांस्टेबल प्रदीप भी गोली लगने से घायल हुए हैं, जिनका शामली के जिला संयुक्त चिकित्सालय में उपचार चल रहा है। मृत आरोपी मोहित के खिलाफ हरियाणा में करीब 14 मुकदमे और सुमित के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज होने की जानकारी पुलिस को मिली है। दोनों के अन्य आपराधिक इतिहास की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

 

डीजीपी ने पुलिस टीम को 2 लाख का पुरस्कार देने की घोषणा की

यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण ने इस कार्रवाई के लिए पुलिस टीम को 2 लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि आपराधिक घटनाओं और साजिशों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस की कठोर वैधानिक कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की जवाबदेही तय की जाएगी।

 

प्रदेश के बाहर और विदेशों से साजिश रचने वालों को चेतावनी

डीजीपी ने प्रदेश की सीमा से बाहर बैठकर, जेलों व विदेशों से साजिश रचने, शूटर भेजने वाले अपराधियों को भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधी किसी गलतफहमी में न रहें और प्रदेश की जमीन को किसी भी गैंग की रंजिश या शरणस्थली नहीं बनने दी जाएगी। उन्होंने बेहतर अंतरराज्यीय समन्वय और सहयोग को इस घटना के कम समय में सफल अनावरण का महत्वपूर्ण कारण बताया। उन्होंने कहा कि कानून के लंबे हाथ उन सभी अपराधियों तक जरूर पहुंचेंगे, जो कहीं भी छिपने की कोशिश कर रहे हैं।

 

26 अगस्त को हुई थी सिंगर अंकित बालियान की हत्या 

हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान निवासी बनतीखेड़ा थाना बाबरी, जिला शामली की 26 अगस्त को शाम करीब 6:45 बजे हत्या की गई थी। अंकित शामली कोतवाली क्षेत्र के नालापिरी स्थित फिटनेस जिम से बाहर निकलकर अपनी गाड़ी में बैग रख रहे थे। इसी दौरान चार अज्ञात हथियारबंद बदमाशों ने उन पर गोलीबारी कर दी। वारदात के बाद अंकित के पिता की तहरीर पर शामली कोतवाली में चार अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। 

 

हत्या के खुलासे के लिए 11 अधिकारियों की विशेष टीम बनी

घटना की गंभीरता को देखते हुए इसके अनावरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। एडीजी कानून-व्यवस्था और एडीजी मेरठ जोन के स्तर से शामली पुलिस के सहयोग के लिए एसटीएफ मेरठ, गौतमबुद्धनगर और मेरठ जोन के विभिन्न जिलों के 11 पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम गठित की गई। इसमें चार अपर पुलिस अधीक्षक और सात पुलिस उपाधीक्षक शामिल थे। इस टीम में चार आईपीएस अधिकारी भी शामिल थे। जांच के दौरान पुलिस टीमों ने ह्यूमन इंटेलिजेंस और टेक्निकल इंटेलिजेंस के आधार पर साक्ष्य जुटाए। सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल गतिविधियों, आरोपियों की आवाजाही, ठहरने के स्थान, भुगतान और आपसी संपर्क से जुड़े तथ्यों को जोड़ते हुए पुलिस ने हत्याकांड में शामिल शूटरों की पहचान की। इसी जांच के आधार पर मोहित और सुमित की पहचान वारदात में शामिल शूटरों के रूप में हुई। 

 

गोगी गैंग से जुड़ी साजिश के संकेत

पुलिस टीम को गोगी गैंग के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र के साक्ष्य मिले है। जांच में यह भी सामने आया कि 26-27 अगस्त को सोशल मीडिया पर राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया से जुड़े इंस्टाग्राम अकाउंट से अंकित बालियान की हत्या की जिम्मेदारी गोगी गैंग द्वारा लिए जाने से जुड़ा पोस्ट सामना आया था। पुलिस ने इस सोशल मीडिया पोस्ट को भी विवेचना का हिस्सा बनाया। 

 

एक गाने को लेकर शुरू हुआ था विवाद

अंकित बालियान ने ‘भरी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान’ नाम के एक गाने में अभिनय किया था, जिसे यूट्यूब पर 5.4 करोड़ व्यूज मिले थे। अंकित ने यह गाना राहुल पुट्ठी से 55 हजार रुपये में खरीदा था और इसे वत्स कंपनी को 1.50 लाख रुपये में बेच दिया था। पुलिस के अनुसार गोगी गैंग ने इस गाने को जितेंद्र मान उर्फ गोगी की हत्या के घटनाक्रम से जोड़कर अपने अपमान के रूप में लिया। 

 

इसी गाने को लेकर वर्ष 2022-23 में अंकित को धमकी भी दी गई थी। धमकी मिलने के बाद अंकित ने गोगी गैंग को सफाई दी थी कि गाने में उन्होंने केवल अभिनय किया है और गाना व उसकी धुन उनकी नहीं है। इसके बावजूद गैंग की ओर से अंकित पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने विरोधी टिल्लू ताजपुरिया के साथ मिलकर गाना रिलीज किया था। पुलिस के मुताबिक धमकी के संबंध में अंकित ने अपने परिजनों या शामली पुलिस को कोई सूचना नहीं दी थी।

 

गोगी-टिल्लू गैंगवार की पुरानी कहानी भी सामने आई

पुलिस के अनुसार 24 सितंबर 2021 को रोहिणी कोर्ट में पेशी के दौरान टिल्लू गैंग के शूटरों ने जितेंद्र मान उर्फ गोगी की हत्या कर दी थी। इसके बाद गोगी गैंग ने बदले की तैयारी शुरू की। करीब डेढ़ वर्ष बाद 2 मई 2023 को तिहाड़ जेल में गोगी गैंग के सदस्य योगेश उर्फ टुंडा और उसके साथियों ने टिल्लू ताजपुरिया की हत्या कर दी थी। पुलिस ने अंकित हत्याकांड की पृष्ठभूमि में इस गैंगवार और गीत से जुड़े विवाद को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।

 

फरार अन्य आरोपियों की तलाश तेज

हत्याकांड में शामिल अन्य शूटरों, शरणदाताओं और साजिश में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार सक्रिय हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना से जुड़े अन्य आरोपियों को भी जल्द पकड़ा जाएगा।

‘विजिट माय स्टेट’ के तहत यूपी में ‘जेन-जी’ बनेंगे कल्चरल एम्बेसडर

'विजिट माय स्टेट’ के तहत यूपी में 'जेन-जी' बनेंगे कल्चरल एम्बेसडर

Visit My State UP: डिजिटल दुनिया में 'जेन-जी' की पसंद और उनकी आवाज संस्कृति व यात्रा के नए रुझान तय कर रही है। इसी बदलते दौर को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के युवाओं को अपने-अपने शहरों की संस्कृति, विरासत और खासियतों का प्रतिनिधि बनाने की पहल की है। 'विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश' अभियान के तहत उत्तर प्रदेश पर्यटन ने युवाओं से आह्वान किया है कि वे अपने शहर की अनकही कहानियों, स्थानीय संस्कृति और खास पहचान को अपनी आवाज में महज 60 सेकंड की रील के जरिए दुनिया के सामने लाएं।

 

शहर के विरासत से जुड़ी अनकही कहानियां हों या स्थानीय व्यंजन का स्वाद, सदियों पुरानी परंपराएं हों या फिर पर्यटकों की नजरों से अब तक दूर रहे अल्पज्ञात स्थल, 'विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश' अभियान के जरिए प्रदेश को उन लोगों की नजर से दिखाने की तैयारी है, जो अपने शहर और उसकी पहचान को सबसे करीब से जानते हैं। स्थानीय निवासी खुद कैमरे के सामने आकर अपने शहर के विशेष अनुभव और विशेषताओं की कहानी के रूप में साझा कर सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य किसी स्थान की पहचान को केवल तस्वीरों और सूचनाओं तक सीमित न रखकर वहां के लोगों की आवाज और अनुभवों के जरिए उसकी असली कहानी व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाना है।

डिजिटल माध्यम से पर्यटन को लगेंगे पंख  

युवाओं के बीच पर्यटन स्थलों को खोजने और जानने के बदलते तरीकों को देखते हुए यूपी पर्यटन ने इस अभियान को रील्स के माध्यम से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। वर्तमान समय में यात्रा की योजना बनाने से पहले युवा छोटे वीडियो, लोगों के अनुभवों और कंटेंट क्रिएटर्स की राय को तेजी से महत्व दे रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा होने वाले ऐसे अनुभव न सिर्फ लोकप्रिय पर्यटन स्थलों को विशिष्ट पहचान दे रहे हैं, बल्कि अल्पज्ञात स्थलों को भी व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचा रहे हैं। 'विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश' अभियान का उद्देश्य इसी डिजिटल रुचि को प्रदेश के पर्यटन से जोड़ते हुए नया आयाम देना है। 

युवा बनेंगे अपने शहरों के सांस्कृतिक दूत- मंत्री 

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान केवल उसके प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। प्रदेश के हर जिले, शहर और गांव की अपनी अलग कहानी और पहचान है। यहां की स्थानीय खान-पान की परंपराएं, हस्तशिल्प, त्योहार, रीति-रिवाज, लोग और उनसे जुड़ी कहानियां उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि 'विजिट माय स्टेट' अभियान के जरिए प्रदेश की जेन-जी सहित अन्य युवाओं को अपने-अपने शहरों का सांस्कृतिक दूत बनाने की पहल की जा रही है। युवा अपनी आवाज और शब्दों में अपने शहर की खासियतों को दुनिया के सामने प्रस्तुत करेंगे, जिससे आगंतुकों को उत्तर प्रदेश को अधिक रोचक और नए नजरिए से जानने का अवसर मिलेगा।'

60 सेकंड में सुनाएं अपने शहर की कहानी

अभियान में भाग लेने की प्रक्रिया को भी युवाओं के लिए बेहद सरल रखा गया है। प्रतिभागियों को अपने शहर की खास पहचान और उसकी कहानी अपनी आवाज में अधिकतम 60 सेकंड की रील के माध्यम से प्रस्तुत करनी होगी। वीडियो में प्रतिभागी का स्वयं कैमरे के सामने आना जरूरी होगा, जिसमें उनका चेहरा स्पष्ट दिखाई दे और आवाज साफ सुनाई दे। खास बात यह है कि शहर की कहानी किसी तय स्क्रिप्ट के बजाय युवा अपने शब्दों और अपने अंदाज में सुनाएंगे। रील की शूटिंग खुले स्थान पर की जाएगी, जहां पृष्ठभूमि में शहर का कोई प्रमुख पर्यटन स्थल अथवा उसकी पहचान से जुड़ा खास स्थान नजर आए। प्रतिभागी हिंदी या अंग्रेजी, किसी भी भाषा में अपनी रील तैयार कर सकते हैं। प्रत्येक वीडियो के अंत में ‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ कहना अनिवार्य होगा।

 

प्रतिभागी अपनी प्रविष्टियां ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से भेज सकते हैं:

(https://docs.google.com/forms/d/1EyOqivGfwOjQTw0Yd7DzT-4-utbs6WF7UKhgloJeFRQ/viewform?edit_requested=true&utm_source=chatgpt.com)

 

विशेष जानकारी के लिए प्रतिभागी उत्तर प्रदेश पर्यटन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध 'विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश' से संबंधित वीडियो भी देख सकते हैं।

 

अपर मुख्य सचिव, पर्यटन अमृत अभिजात ने बताया कि 'विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश' अभियान स्थानीय निवासियों को अपने शहर और आसपास के पर्यटन स्थलों की कहानी कहने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि महज 60 सेकंड की एक रील के जरिए किसी स्थान की विशेषता, व्यक्ति की अपनी आवाज और स्थानीय अनुभव को प्रभावी ढंग से एक साथ प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे एक ओर प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को नए नजरिए से देखने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय और कम चर्चित जगहों को भी व्यापक पहचान मिल सकेगी। अमृत अभिजात ने कहा कि युवाओं की ओर से सामने आने वाली ऐसी छोटी-छोटी कहानियां मिलकर उत्तर प्रदेश की आस्था, समृद्ध विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य, व्यंजन और हस्तशिल्प की विविधता को एक समग्र यात्रा अनुभव के रूप में देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करेंगी।'

 

उदाहरण के तौर पर लखनऊ का कोई निवासी अपने शहर के खान-पान, चिकनकारी, पुराने मोहल्लों अथवा सांस्कृतिक स्थलों के बारे में बता सकता है। इसी तरह ब्रज, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और तराई क्षेत्र के युवा अपने-अपने शहरों की परंपराओं, स्थानीय विशेषताओं और पर्यटन अनुभवों को दुनिया के सामने ला सकते हैं। यह पहल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों को दुनिया के सामने लाने का प्रयास है।

मेरठ में Electric Chak ने बदली कुम्हारों की जिंदगी! 210 से ज्यादा परिवारों को फायदा, 5 गुना तक बढ़ी आमदनी

मेरठ में Electric Chak ने बदली कुम्हारों की जिंदगी! 210 से ज्यादा परिवारों को फायदा, 5 गुना तक बढ़ी आमदनी

khumar

कभी हाथों की मेहनत और धीमे घूमते पारंपरिक चाक तक सीमित कुम्हारों का कारोबार अब बिजली की रफ्तार पकड़ रहा है। योगी सरकार की ग्रामोद्योग विकास योजना ने मिट्टी को आकार देने वाले कारीगरों के हुनर को आधुनिक तकनीक का साथ दिया है। मुफ्त इलेक्ट्रिक चाक मिलने के बाद मेरठ के कुम्हारों की उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ गई है और इसका सीधा असर उनकी कमाई पर दिखाई दे रहा है।

कुम्हारों के मुताबिक, जहां पहले दिनभर की मशक्कत के बाद सीमित संख्या में दीये तैयार होते थे, वहीं अब कम समय में सैकड़ों डिजाइनर दीये बनाए जा रहे हैं। बढ़ती मांग के चलते कई कुम्हारों की आमदनी करीब पांच गुना तक बढ़ी है।

 

210 से ज्यादा कुम्हारों को मिला इलेक्ट्रिक चाक

 

माटीकला बोर्ड की ओर से वित्तीय वर्ष 2020-21 में शुरू की गई योजना के तहत अब तक मेरठ जिले में 210 से अधिक कुम्हारों को इलेक्ट्रिक चाक दिये जा चुके हैं। करीब 13 से 15 हजार रुपये कीमत का यह चाक बीपीएल परिवारों के कुम्हारों को निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी 40 और लोगों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है।

 

जहां 50-60 दीये बनते थे, अब 300-400 की रफ्तार

 

गढ़ रोड निवासी कुम्हार सुरेश बताते हैं कि पारंपरिक चाक पर एक निश्चित समय में करीब 50-60 दीये ही तैयार हो पाते थे। हाथ से चाक चलाने में मेहनत भी अधिक लगती थी और उत्पादन भी सीमित रहता था। इलेक्ट्रिक चाक ने पूरा काम बदल दिया। अब उतने ही समय में 300 से 400 तक डिजाइनर दीये तैयार हो जाते हैं। यानी उत्पादन क्षमता करीब छह से सात गुना तक बढ़ गई है। दीपावली के मौसम में जब मिट्टी के दीयों की मांग अचानक बढ़ जाती है, तब यह अतिरिक्त उत्पादन कुम्हार परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है।

 

ढाई लाख दीयों का ऑर्डर, एक घंटे में 700 दीये

 

कुम्हार मनोज कुमार के लिए इस बार दीपावली खास है। उन्हें अभी से करीब ढाई लाख दीयों का ऑर्डर मिल चुका है। उनका कहना है कि इलेक्ट्रिक चाक की मदद से अब वह एक घंटे में करीब 700 दीये तैयार कर रहे हैं।

 

मनोज के मुताबिक, मिट्टी के पारंपरिक दीयों और दूसरे मिट्टी उत्पादों के प्रति लोगों का रुझान फिर बढ़ रहा है। बाजार में डिजाइनर दीयों की मांग ने कुम्हारों के लिए कमाई के नए रास्ते खोले हैं। पहले जहां बड़े ऑर्डर पूरे करना मुश्किल होता था, वहीं अब इलेक्ट्रिक चाक के कारण समय पर बड़ी मात्रा में उत्पादन संभव हो गया है।

 

चाक की रफ्तार बढ़ी तो दर्द भी हुआ कम

 

इलेक्ट्रिक चाक ने सिर्फ उत्पादन ही नहीं बढ़ाया, बल्कि कुम्हारों की शारीरिक मेहनत भी कम की है। दीपक प्रजापति बताते हैं कि हाथ से चलने वाले पारंपरिक चाक पर लंबे समय तक काम करना बेहद थकाऊ होता था। लगातार मेहनत के कारण हाथ, कंधे और सीने में दर्द की समस्या रहती थी। परिवार के सदस्य भी ज्यादा देर तक काम नहीं कर पाते थे।

 

अब इलेक्ट्रिक चाक ने काम को आसान कर दिया है। परिवार के सदस्य मिलकर 10 से 12 घंटे तक आसानी से काम कर लेते हैं। इससे ज्यादा उत्पादन हो रहा है और बड़े ऑर्डर भी समय पर पूरे किए जा रहे हैं।

 

बिहारी प्रजापति भी मानते हैं कि आधुनिक तकनीक ने माटीकला को नई गति दी है। उनके लिए इलेक्ट्रिक चाक महज एक मशीन नहीं, बल्कि पारंपरिक हुनर को बाजार की नई जरूरतों से जोड़ने वाला साधन बन गया है।

 

माटीकला में लौट रही रौनक

 

पिछले कुछ वर्षों में मिट्टी के दीयों, बर्तनों और सजावटी उत्पादों की मांग में बढ़ोतरी ने कुम्हारों के चेहरे पर फिर से उम्मीद जगाई है। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी के मुताबिक, सरकार पात्र लोगों को विभिन्न योजनाओं का लाभ देकर माटीकला से जुड़े परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का प्रयास कर रही है। अब सामान्य उपभोक्ता भी मिट्टी के बर्तनों और दीयों को प्राथमिकता देने लगे हैं।

 

सिर्फ प्रजापति समाज नहीं, हर वर्ग के लोग कर सकते हैं आवेदन

 

माटीकला टूल-किट योजना का लाभ केवल प्रजापति समाज तक सीमित नहीं है। किसी भी समाज का इच्छुक व्यक्ति आवेदन कर सकता है। इसके लिए आवेदक का संबंधित जिले का मूल निवासी होना और उसकी उम्र 18 से 55 वर्ष के बीच होना जरूरी है।

 

टूल-किट मिलने से पहले मंडलीय प्रशिक्षण केंद्र पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण अनिवार्य है। इसके अलावा परिवार में पहले किसी विभाग या संस्था से माटीकला टूल-किट नहीं मिली होनी चाहिए। आवेदक का माटीकला कारीगर के रूप में पंजीकरण और तहसील स्तर से सत्यापन भी जरूरी है।

 

देश की मिट्टी वही है, हुनर वही है, लेकिन अब चाक की रफ्तार बदल गई है। इलेक्ट्रिक चाक ने मेरठ के कुम्हारों के हाथों को तकनीक की ताकत दी है। यही वजह है कि इस बार दीपावली से पहले उनके आंगन में सिर्फ दीये नहीं, बल्कि बढ़ी हुई आमदनी और बेहतर भविष्य की उम्मीद भी आकार ले रही है।

Swachh Bharat Mission : CM योगी के मार्गदर्शन में बदली यूपी के शहरों की तस्वीर, 10 हजार से ज्यादा सार्वजनिक शौचालय-यूरिनल ब्लॉक्स बने

Swachh Bharat Mission : CM योगी के मार्गदर्शन में बदली यूपी के शहरों की तस्वीर, 10 हजार से ज्यादा सार्वजनिक शौचालय-यूरिनल ब्लॉक्स बने

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद से शहरी स्वच्छता अभियान को नई गति मिली है। स्वच्छ भारत मिशन-नगरीय के तहत सरकार ने स्वच्छता अवसंरचना के विस्तार को प्राथमिकता देते हुए व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों के निर्माण को तेज किया है। इसका असर आंकड़ों में भी साफ दिखाई देता है। जहां 2017-18 तक प्रदेश में योजना के तहत नगरों में सिर्फ 3.10 लाख के करीब व्यक्तिगत घरेलू शौचालय ही निर्मित थे, वहीं योगी सरकार में अभियान को मिली रफ्तार से यह संख्या 9 लाख के पार पहुंच गई है।  

 

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017-18 तक प्रदेश में 3,09,924 व्यक्तिगत घरेलू शौचालय (आईएचएचएल) बने थे। इसके बाद शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। वर्ष 2018-19 तक शौचालयों की संख्या बढ़कर 7,58,949 हो गई थी। प्रदेश में अब तक 9,00,113 व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बन चुके हैं। इस तरह वर्ष 2017-18 के बाद करीब 5.90 लाख अतिरिक्त शौचालयों का निर्माण किया गया है। इससे बड़ी संख्या में शहरी परिवारों को घर में ही सुरक्षित और सम्मानजनक स्वच्छता सुविधा उपलब्ध हुई है।

 

सार्वजनिक स्वच्छता सुविधाओं का भी विस्तार

 

सरकार ने घरेलू शौचालयों के साथ सार्वजनिक स्वच्छता सुविधाओं को भी मजबूत किया है। स्वच्छ भारत मिशन-नगरीय 1.0 के तहत प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में 10 हजार से अधिक सामुदायिक एवं सार्वजनिक शौचालय तथा यूरिनल ब्लॉक्स का भी निर्माण कराया गया है। इनके जरिए 70 हजार से अधिक शौचालय सीटें तैयार की गई हैं। इस तरह बाजारों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, व्यावसायिक क्षेत्रों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर इन सुविधाओं के विस्तार से नागरिकों को आसानी से स्वच्छता सुविधाएं मिल रही हैं।

 

स्वच्छ भारत मिशन-नगरीय के अगले चरण में भी सार्वजनिक स्वच्छता अवसंरचना के विस्तार पर जोर जारी है। वर्ष 2024-25 से अबतक 2623 सार्वजनिक शौचालय सीटों तथा 1104 यूरिनल सीटों का निर्माण किया गया है। इस प्रकार इस अवधि में कुल 3727 अतिरिक्त सार्वजनिक स्वच्छता जोड़ी गई है। 

 

घरेलू शौचालयों से मजबूत हुआ शहरी स्वच्छता ढांचा

 

घरेलू शौचालयों से लेकर सार्वजनिक स्वच्छता ढांचे तक हुए इस विस्तार को प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नगर विकास विभाग के सचिव अनुज कुमार झा ने बताया कि प्रदेश सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन-नगरीय के माध्यम से व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों के निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शौचालयों का निर्माण करना नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र परिवार को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक स्वच्छता सुविधा उपलब्ध कराना है।

CM Yogi in Bahraich : नेपाल सीमा से बदलेगी बहराइच की तस्वीर! सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर साधा निशाना, रेल सेवा की शुरुआत

CM Yogi in Bahraich : नेपाल सीमा से बदलेगी बहराइच की तस्वीर! सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर साधा निशाना, रेल सेवा की शुरुआत

CM Yogi Adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सीएम ने कहा कि बहराइच कभी भारत की सत्ता का संचालन भी करता था, लेकिन आजादी के बाद भी यह क्षेत्र विकास से वंचित रहा। एक हजार वर्ष पहले महाराजा सुहेलदेव ने बहराइच में ही सालार मसूद को मिट्टी में मिलाया था और भारत को विदेशी आक्रांताओं से मुक्त किया था, लेकिन आजादी के बाद भी दशकों तक महाराजा सुहेलदेव को विस्मृत किया गया। सालार मसूद के नाम पर उर्स व मेले लगवाकर देश को अपमानित किया जाता रहा। किंतु आज यहां विदेशी आक्रांता के नाम पर कोई आयोजन नहीं होता, बल्कि महाराजा सुहेलदेव का भव्य स्मारक बनकर तैयार हो गया है।

 

मुख्यमंत्री ने सोमवार को बहराइच में आयोजित कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़े रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ नेपालगंज रोड (रुपईडीहा)-नानपारा-बहराइच रेल खंड और इस पर ट्रेन सेवा की शुरुआत की। दोनों ने हरी झंडी दिखाकर स्पेशल ट्रेन को वाराणसी के लिए रवाना किया। रेलमंत्री ने बहराइच नानपारा-नेपालगंज रोड के रेलखंड को ब्रॉडगेज नेटवर्क से जोड़ने की घोषणा की। सीएम ने चार अन्य ट्रेनों की घोषणा के लिए प्रधानमंत्री व रेलमंत्री के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि रेलमंत्री ने बहराइच से नानपारा और नेपालगंज रोड के रेलवे ब्रॉडगेज कार्य (56 किमी का रेलखंड) को 730 करोड़ से समय-सीमा के अंदर पूरा कराया। पहली ट्रेन रूपईडीहा से बाबा विश्वनाथ के धाम वाराणसी सिटी तक जाएगी। 

 

आजादी के बाद भी विकास से वंचित था बहराइच 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस बहराइच ने भारत की गौरव-गाथा को बढ़ाया था, वह विकास से वंचित हो गया। रेल कनेक्टिविटी न के बराबर थी, जो थी वह मीटरगेज (छोटी लाइन) के रूप में थी। मित्र राष्ट्र नेपाल से भी कनेक्टिविटी नहीं हो पाई। आजादी के बाद कई स्थानों पर रेल लाइन को मीटरगेज से ब्रॉडगेज किया गया। शताब्दी समेत अनेक नई ट्रेनें चलीं, फिर भी यह खंड मीटरगेज के रूप में उन सरकारों की संकीर्ण सोच का प्रतीक बनी रही, जिन्होंने इसे बॉर्डर का क्षेत्र मानकर पिछड़ेपन का पर्याय बना दिया था। उनके लिए भले ही यह अंतिम क्षेत्र रहा हो, लेकिन हमारे लिए रूपईडीहा बहराइच-नानपारा का यह क्षेत्र भारत के प्रवेश द्वार के रूप में रहा। इस क्षेत्र के लोग दशकों से यह दिन देखने को लालायित थे। पीढ़ियां चली गईं, लेकिन यह सपना और संकल्प आज साकार हो रहा है।

 

रेल सेवाओं से बढ़ेगी क्षेत्र की कनेक्टिविटी

सीएम ने कहा कि रेल सेवाओं से यहां की कनेक्टिविटी मजबूत होने जा रही हैं। कनेक्टिविटी गति देती है। जब गति सकारात्मक दिशा में गंतव्य की ओर बढ़ती है तो वह प्रगति का आधार बनती है। यह भारत-नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ करेगी। यह कनेक्टिविटी बॉर्डर क्षेत्र की सुरक्षा व सुविधा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की प्रॉस्पैरिटी के लिए भी महत्वपूर्ण है। इससे व्यापार बढ़ेगा, उद्योग लगेंगे, पर्यटन व कृषि को नया आयाम मिलेगा। ईको टूरिज्म के बेहतरीन केंद्र कतर्निया तक पहुंच होगी। अयोध्या, वाराणसी व गोरखपुर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों को जोड़ने में भी मदद मिलेगी। नेपालगंज रोड, नानपारा, बाबागंज, मटेरा, रिसिया, बहराइच समेत पूरे क्षेत्र के सामाजिक व आर्थिक प्रगति में इसकी बड़ी भूमिका होगी। बहराइच से खलीलाबाद के लिए नई रेललाइन बिछाई जा रही है। नई रेल सेवा के तहत गोरखपुर से सिद्धार्थनगर, शोहरतगढ़, बलरामपुर होते हुए बहराइच तक की कनेक्टिविटी के जरिए नेपालगंज रोड को जोड़ने की गतिविधि भी प्रारंभ हो रही है। इससे क्षेत्र की नई संभावनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा। 

 

हमने न आंखें फेरीं और न ही धूल झोंकी

सीएम ने कहा कि पिछली सरकार हर जनपद में माफिया पालती थी। अब बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, अंबेडकरनगर, बस्ती, अयोध्या, सुल्तानपुर, सिद्धार्थनगर समेत हर जनपद में मेडिकल कॉलेज हैं। बालार्क ऋषि के नाम पर हॉस्पिटल है। श्रावस्ती में एयरपोर्ट का निर्माण किया गया है। कभी यह सीजन इस क्षेत्र में इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी की कहर लेकर आता था, जिसमें मासूम दम तोड़ते थे। पिछली सरकार उसे अज्ञात बीमारी बताते हुए मासूमों की मौत पर पर्दा डालकर आंखों में धूल झोंकती थी। लेकिन, सरकार बनने के बाद हमने न आंखें फेरीं और न ही धूल झोंकी। हमने बीमारी का उन्मूलन किया। यूपी से माफिया व इंसेफेलाइटिस, दोनों समाप्त हो गए। अब यह सीजन किसी माता-पिता के लिए चिंता लेकर नहीं आता।

 

जमीन पर दिखते हैं डबल इंजन सरकार के कार्य

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कार्य जमीन पर दिखाई देते हैं। अब यूपी में किसी बेटी-व्यापारी को माफिया से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं। पीएम मोदी जी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने लखनऊ से बहराइच की रोड कनेक्टिविटी को फोरलेन से जोड़ने की स्वीकृति दी है। नए भारत में चारों ओर रोड व रेल कनेक्टिविटी हो रही है। रैपिड रेल, नमो भारत, अमृत भारत, वंदे भारत के रूप में नई रेल सेवाएं विकसित व आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को पूरा करती दिखाई दे रही हैं। 

 

लगभग सभी रेल लाइनों का इलेक्ट्रिफिकेशन

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी हम तरसते थे कि हमारे क्षेत्र में रेलवे लाइन का इलेक्ट्रिफिकेशन हो जाता, लेकिन आज भारत में रेलवे की जितनी भी लाइनें हैं, लगभग सभी का इलेक्ट्रिफिकेशन हो चुका है। सभी ब्रॉडगेज की हो गई हैं। जब पटरी बड़ी होती है तो रास्ते भी बड़े होते हैं, बाजार भी बड़े होते हैं, अवसर भी बड़े होते हैं और तब संकल्पों की पूर्ति होने में देर नहीं लगती है। आज से शुरू होने वाली कनेक्टिविटी यह डबल इंजन सरकार की विकास-गाथा के रूप में जानी जाएगी। सीएम ने देश व उत्तर प्रदेश में रेलवे में कायाकल्प के लिए प्रधानमंत्री व रेलमंत्री का आभार जताया।

 

दुख की घड़ी में हम सभी नेपाल के साथ

कार्यक्रम से पहले सभी ने नेपाल की भीषण आपदा में जान गंवाने वालों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। सीएम ने कहा कि हाल में नेपाल, भारत समेत दुनिया के कई देशों के सैकड़ों लोगों को प्राकृतिक आपदा का शिकार होना पड़ा। सीएम ने परिजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए नेपालवासियों को आश्वस्त किया कि सुख-दुख में हम सभी एकसाथ मिलकर चलेंगे। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने त्वरित निर्णय लेते हुए मित्र राष्ट्र नेपाल के सहयोग के लिए कदम उठाया है। हमारा सिर्फ राजनीतिक रिश्ता नहीं है, बल्कि साझी सांस्कृतिक विरासत भी है। भगवान पशुपतिनाथ से लेकर काशी विश्वनाथ, गोरखा से गोरखपुर, जनकपुर से अयोध्या को श्रद्धा के साथ स्मरण किया जाता है। हम एक-दूसरे के धाम में जाकर साझी विरासत का आदर भी करते हैं।

 

इस अवसर पर बहराइच के सांसद डॉ. आनंद गोंड, डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल, विधायक रामनिवास वर्मा, सुभाष त्रिपाठी, अनुपमा जायसवाल, सुरेश्वर सिंह, सरोज सोनकर, विधान परिषद सदस्य प्रज्ञा त्रिपाठी,  पूर्व सांसद अक्षयवर लाल गोंड आदि मौजूद रहे।

बस्ती में वाल्टरगंज थानाध्यक्ष सूर्यप्रकाश सिंह ने की खुदकुशी, पुलिस महकमे में हड़कंप

बस्ती में वाल्टरगंज थानाध्यक्ष सूर्यप्रकाश सिंह ने की खुदकुशी, पुलिस महकमे में हड़कंप

Walterganj SO suicide: ​उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद से एक बेहद दुखद और हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। वाल्टरगंज थाने के थानाध्यक्ष (SO) 57 वर्षीय सूर्यप्रकाश सिंह ने शनिवार को अपने सरकारी आवास में पंखे से गमछे के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हमेशा जिंदादिल और खुशमिजाज रहने वाले एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के इस अप्रत्याशित कदम से पुलिस महकमे से लेकर उनके परिवार तक में कोहराम मच गया है।

​थाने से लेकर घर तक घटनाक्रम

शनिवार सुबह 10 बजे सूर्यप्रकाश सिंह ने थाने में स्टाफ मीटिंग ली और कर्मियों को रोज की तरह दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने अपने जरूरी काम निपटाए और सरकारी वाहन से शहर चले आए। सिविल लाइन पुलिस चौकी के पास उन्होंने अपने सहयोगियों को रुकने के लिए कहा और खुद डीएम कार्यालय के पास स्थित अपने आवास में चले गए। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर उन्होंने आत्महत्या कर ली।

नहीं मिला ​सुसाइड नोट 

​देर शाम करीब 7 बजे जब आवास का दरवाजा खोला गया, तो अंदर पंखे से गमछे के सहारे उनका शव लटकता मिला। कमरे में प्रवेश का वही एकमात्र रास्ता था। मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए। डीआईजी संजीव त्यागी के अनुसार, मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।

 

​घटना के बाद लखनऊ में रह रहे परिजनों को जब बस्ती आने को कहा गया, तब उनकी बेटी बार-बार फोन करके पिता की सलामती पूछती रही, लेकिन पुलिसकर्मी सच बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। दरअसल, रक्षाबंधन से पहले उनका परिवार लखनऊ स्थित घर चला गया था। देर रात बस्ती पहुंचे परिजन भी आत्महत्या की वजह को लेकर पूरी तरह अनभिज्ञ हैं।

​कौन थे सूर्यप्रकाश सिंह?

आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थानाक्षेत्र के ग्राम भीलमपुर छपरा निवासी सूर्यप्रकाश सिंह के परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है। वे ​15 फरवरी 1988 में पुलिस विभाग में आरक्षी (कांस्टेबल) पद पर भर्ती हुए थे। 7 सितंबर 2008 में हेड कांस्टेबल पद पर उन्हें पदोन्नति मिली। ​11 नवंबर 2016 में उपनिरीक्षक बने। सिद्धार्थनगर से स्थानांतरित होकर बस्ती आने पर पहले पासपोर्ट कार्यालय, फिर एसपी के पीआरओ और कार्यशैली से प्रभावित होकर उन्हें वाल्टरगंज थाने का प्रभार (SO) दिया गया था। जिम्मेदारी और सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले एक अधिकारी का यूं अचानक चले जाना पीछे कई अनसुलझे सवाल छोड़ गया है, जिसकी पड़ताल में पुलिस जुटी हुई है।

Kaushambi Blast : कौशांबी में अवैध पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट, 10 से ज्यादा की मौत

Kaushambi Blast : कौशांबी में अवैध पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट, 10 से ज्यादा की मौत

उत्तरप्रदेश के कौशांबी जिले में सोमवार को कथित अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट से इलाके में हड़कंप मच गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्टरी की पूरी इमारत जमींदोज हो गई और आसपास के कई मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा। हादसे में करीब 11 लोगों की मौत बताई जा रहे हैं। इसमें बच्चे भी शामिल हैं जबकि कुछ लोग घायल बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसे अंदर करीब 25 मजदूर मौजूद थे। 

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धमाके के बाद फैक्टरी पूरी तरह तबाह हो गई और आसपास मलबा फैल गया। बताया जा रहा है कि विस्फोट की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। धमाके के बाद इलाके में धुएं का बड़ा गुबार छा गया।  मलबे में फंसे लोगों की तलाश के साथ राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। कौशांबी के जिलाधिकारी अमित पाल शर्मा और पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण प्रजापत समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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मुख्यमंत्री ने जताया दु:ख

बताया जा रहा है कि विस्फोट के बाद भी काफी देर तक धमाके होते रहे।  इससे आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आसपास के कई मकानों को भारी नुकसान पहुंचा। बताया जा रहा है कि कुछ मकानों में रखे LPG सिलेंडरों में भी विस्फोट हुआ और आग लग गई।

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इससे स्थिति और भयानक हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने अधिकारियों को घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को मृतकों के परिवारों के संपर्क में रहने और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।

अयोध्या से साधु-संतों ने भरी हुंकार, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए मथुरा रवाना हुई ‘रजत शिला’

अयोध्या से साधु-संतों ने भरी हुंकार, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए मथुरा रवाना हुई 'रजत शिला'

​Sri Krishna Janmabhoomi Movement

​Sri Krishna Janmabhoomi Movement: अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति और मंदिर निर्माण के आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। साधु-संतों और श्रद्धालुओं की मंडली ने अयोध्या से मथुरा तक धार्मिक चेतना जगाने का संकल्प लिया है।

 

​रजत शिला का पवित्र पूजन : हिंदू पक्षकार दिनेश फलाहारी की अगुवाई में पहुंचे श्रद्धालुओं ने सबसे पहले पूर्णिमा पर मां सरयू में डुबकी लगाई और तट पर शिला का पूजन किया।

 

रामलला और हनुमान जी की आज्ञा : सरयू महाआरती के बाद शिला को हनुमानगढ़ी में बजरंगबली के समक्ष अर्पित कर आशीर्वाद लिया गया और फिर श्रीराम जन्मभूमि की चौखट तक ले जाकर दर्शन कराए गए।

 

​महंत नृत्यगोपाल दास का आशीर्वाद : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट व श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने मणिरामदास छावनी में रजत शिला का स्पर्श और पूजन कर सफलता का आशीर्वाद दिया। इस दौरान उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास और जानकी दास समेत संतों ने पुष्प वर्षा की।

 

एक लाख गांवों में जाएगा अभियान : ब्रज धर्माचार्य परिषद के महामंत्री पं. राजेश पाठक के नेतृत्व में यह रजत शिला देश के प्रमुख मंदिरों और 1 लाख से अधिक गांवों में पूजन हेतु ले जाई जाएगी।

 

​1 सितंबर को वृंदावन में अनुष्ठान : अयोध्या से रवाना हुई यह शिला 1 सितंबर को ब्रजभूमि पहुंचेगी, जहां वृंदावन में विशेष वैदिक पूजन के साथ आगे के अभियान की शुरुआत होगी।

Ather Konarc vs Bajaj Chetak: किस Electric Scooter में है ज्यादा दम? कीमत, रेंज, स्पीड और फीचर्स की पूरी तुलना

Ather Konarc vs Bajaj Chetak: किस Electric Scooter में है ज्यादा दम? कीमत, रेंज, स्पीड और फीचर्स की पूरी तुलना

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इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में Ather Energy ने Ather Konarc के जरिए फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में अपनी दावेदारी मजबूत की है। इसका मुकाबला बाजार में पहले से मौजूद Bajaj Chetak जैसे लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटर से है। बड़ी बात यह है कि दोनों स्कूटर में 3.5 kWh बैटरी पैक दिया गया है, लेकिन रेंज, टॉप स्पीड, फीचर्स, स्टोरेज और चार्जिंग के मामले में दोनों का फोकस अलग-अलग है। अगर आप फैमिली के लिए नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो दोनों के बीच यह तुलना आपके लिए काफी काम की हो सकती है।

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 Ather Konarc vs Bajaj Chetak: कीमत

 

Ather Konarc S 161 की एक्स-शोरूम कीमत ₹1.45 लाख है। वहीं Bajaj Chetak C3501 की एक्स-शोरूम कीमत बेंगलुरु में करीब ₹1.52 लाख है। इस हिसाब से Ather Konarc करीब ₹7,000 सस्ता है।

Battery और Range में कौन आगे?

दोनों इलेक्ट्रिक स्कूटर में 3.5 kWh बैटरी मिलती है, लेकिन दावा की गई रेंज में Ather Konarc आगे है।

  • Ather Konarc S 161: 161 km IDC रेंज
  • Bajaj Chetak C3501: 153 km रेंज
  • Ather ने SmartEco मोड में 130 km TrueRange का भी दावा किया है।

यानी कागज पर देखें तो Ather Konarc करीब 8 km ज्यादा IDC रेंज देता है।

  •  Top Speed में Bajaj Chetak आगे
  • स्पीड के मामले में Bajaj Chetak बाजी मारता है।
  • Chetak C3501 की टॉप स्पीड 80 km/h है, जबकि Ather Konarc S 161 की टॉप स्पीड 70 km/h है।
  • यानी Chetak की टॉप स्पीड Konarc से 10 km/h ज्यादा है।

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Boot Space में भी Chetak आगे

अगर आपके लिए स्कूटर में ज्यादा सामान रखने की जगह महत्वपूर्ण है, तो Bajaj Chetak बेहतर विकल्प नजर आता है।  Chetak का एक बड़ा फायदा इसका 35 लीटर का बूट स्पेस है। Chetak में 4 लीटर ज्यादा बूट स्पेस मिलता है, जो रोजाना के फैमिली इस्तेमाल में उपयोगी हो सकता है।

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 Features में Ather Konarc का पलड़ा भारी

 

Ather Konarc को टेक्नोलॉजी के लिहाज से ज्यादा एडवांस पैकेज के साथ पेश किया गया है। इसमें AtherStack Pro, OTA Updates, Bluetooth और SIM Connectivity जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इसके अलावा Ather App Integration, रिमोट चार्जिंग स्टेटस और Theft/Tow Alerts भी दिए गए हैं। इसके टॉप-स्पेक वर्जन में 7-inch DeepView Display मिलता है।

Bajaj Chetak में क्या मिलता है?

Bajaj Chetak C3501 में 5-inch TFT Touchscreen दिया गया है। इसमें Integrated Google Maps, OTA Updates, Hill-Hold और अलग-अलग Ride Modes मिलते हैं।

 

 Charging में Chetak की बड़ी बढ़त

 

चार्जिंग के मामले में Bajaj Chetak C3501 को बड़ा फायदा मिलता है। इसके टॉप वेरिएंट में 950W On-board Charger दिया गया है। इससे इसकी सामान्य चार्जिंग स्पीड Ather Konarc की तुलना में बेहतर हो जाती है और 0-80% चार्जिंग में Chetak को बढ़त मिलती है।

  Ather Konarc या Bajaj Chetak, कौनसा आपके लिए बेहतर

 

अगर आपकी प्राथमिकता ज्यादा रेंज और आधुनिक टेक्नोलॉजी है तो कागज पर Ather Konarc S 161 ज्यादा आकर्षक नजर आता है। इसमें ज्यादा IDC रेंज, बड़ा 7-inch डिस्प्ले और कई कनेक्टेड फीचर्स मिलते हैं। वहीं, अगर आपको ज्यादा टॉप स्पीड, बड़ा बूट स्पेस और तेज स्टैंडर्ड चार्जिंग चाहिए तो Bajaj Chetak C3501 बेहतर विकल्प हो सकता है।

 

Ather Konarc चुनें अगर:

  • ज्यादा रेंज चाहिए
  •  ज्यादा टेक्नोलॉजी और कनेक्टेड फीचर्स चाहिए
  • बड़ा TFT डिस्प्ले पसंद है
  •  कम कीमत में स्कूटर चाहिए

 

Bajaj Chetak चुनें अगर

  • ज्यादा टॉप स्पीड चाहिए
  •  ज्यादा बूट स्पेस चाहिए
  • तेज चार्जिंग प्राथमिकता है
  •  ज्यादा किलोमीटर की वाहन वारंटी चाहते हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्‍स 

दोनों स्कूटर में बैटरी क्षमता समान है, लेकिन उनका फोकस अलग है। Ather Konarc रेंज और टेक्नोलॉजी पर जोर देता है, जबकि Bajaj Chetak स्पीड, प्रैक्टिकलिटी और चार्जिंग सुविधा को प्राथमिकता देता है।

Nepal Flood : बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो, अनजान शख्स बना फरिश्ता, बची 370 से ज्यादा जानें, स्कूल में ऐसे हुआ जिंदगी का सबसे बड़ा Rescue

Nepal Flood : बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो, अनजान शख्स बना फरिश्ता, बची 370 से ज्यादा जानें, स्कूल में ऐसे हुआ जिंदगी का सबसे बड़ा Rescue

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'बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो…' चिल्लाते हुए स्कूल के पास से गुजर रहे इस अज्ञात व्यक्ति ने जो आवाज लगाई, वह किसी आधिकारिक अलर्ट से पहले उत्तर्गया पब्लिक स्कूल, बेत्रावती तक पहुंच गई। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच एक अनजान शख्स की कुछ शब्दों की चेतावनी ने सैकड़ों जिंदगियां बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक बुधवार की सुबह त्रिशूली बाजार से कुछ किलोमीटर दूर, नदी के उस पार बेत्रावती में उत्तरगया पब्लिक स्कूल के पास से भागते हुए एक अनजान आदमी ने कहा था कि बाढ़ आ रही है भागो। उस वक्त स्कूल में पढ़ाई का दिन शुरू ही हुआ था। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में बाढ़ का पानी रास्तों और आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में लेने वाला है। स्कूल में न तो सायरन बजा था, न कोई ऑटोमेटेड मैसेज आया था और न ही कोई आधिकारिक चेतावनी पहुंची थी,  लेकिन उस अनजान शख्स की आवाज ने सबको खतरे का एहसास करा दिया। 

 

नाश्ता कर रहे थे हॉस्टल के छात्र, तभी सुनाई दी आवाज

बाढ़ की चेतावनी जब स्कूल परिसर में पहुंची, तब हॉस्टल में रहने वाले छात्र नाश्ता कर रहे थे। जैसे ही उन्हें पता चला कि बड़ी बाढ़ आने वाली है, स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। कक्षा 7 से 10 तक के बड़े छात्र खुद ऊंचाई की तरफ भागने लगे, जबकि शिक्षकों ने छोटे बच्चों को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी संभाली। कुछ बच्चे कीचड़ में तेजी से नहीं चल पा रहे थे तो स्कूल स्टाफ ने उन्हें उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

 

कुछ ही मिनटों में छात्र स्कूल के पीछे मौजूद जंगल और ऊंची पहाड़ी की ओर पहुंचने लगे। बाढ़ के पानी ने सड़क और सामान्य रास्तों को काट दिया था।  नेपाल की यह घटना सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा की कहानी नहीं है। यह हमें बताती है कि कभी-कभी एक छोटी सी चेतावनी भी सैकड़ों जिंदगियों के बीच और मौत के बीच दीवार बन सकती है।

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न कोई सरकारी सिस्टम, न सायरन और न कोई आधिकारिक संदेश—लेकिन एक अनजान व्यक्ति ने खतरा देखा और बिना यह सोचे कि उसे इसका क्या मिलेगा, लोगों को चेतावनी देने लगा।

 

उसकी एक आवाज- 'बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो…' 

 

शायद सैकड़ों लोगों के लिए जिंदगी की पुकार बन गई। और जब खतरा सामने आया तो शिक्षकों ने भी अपने छात्रों को अकेला नहीं छोड़ा। बड़े बच्चों ने छोटे बच्चों का साथ दिया और स्टाफ ने उन बच्चों को भी उठाकर सुरक्षित पहुंचाया जो खुद भाग नहीं पा रहे थे।