इंदौर के बांबे अस्पताल के पास धंसी सड़क, नगर निगम का फायर टैंकर ही फंस गया

इंदौर के बांबे अस्पताल के पास धंसी सड़क, नगर निगम का फायर टैंकर ही फंस गया

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इंदौर में विकास कार्यों किस कदर बदहाल है इसका एक और ताजा मामला सामने आया है। बता दें कि इंदौर में सड़कों के धंसने और गहरे गड्ढे होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कहीं सीवरेज चैंबरों में लीकेज तो कहीं पाइपलाइन में खराबी के कारण सड़कें धंसने की आशंका जताई जा रही है। इंदौर में लगातार सड़कों पर गहरे गड्ढे होने और सड़क धंसने के मामले सामने आ रहे हैं। कुछ दिनों पहले पढ़रीनाथ क्षेत्र में सड़क धंस गई थी।

सोमवार को बांबे अस्पताल क्षेत्र की एक गली में उस वक्त सड़क धंस गई, जब वहां से पानी का टैंकर गुजर रहा था। टैंकर का पहिया गड्ढे में फंस गया। इसके बाद क्रेन की मदद से टैंकर को बाहर निकाला गया। सड़क के जिस हिस्से में गड्ढा हुआ, उसके पास ही एक चैंबर था। अब अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि गड्ढा किन कारणों से हुआ।

इंदौर में सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत कई जगहों पर लाइनें डाली गईं और चैंबर बनाए गए, लेकिन इनके निर्माण के दौरान अधिकारियों ने गुणवत्ता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। चैंबरों में लीकेज के कारण आसपास की मिट्टी धंसने लगी और इसके बाद सड़कें भी धंसने लगीं। शहर की कई सड़कों पर इस तरह की समस्या सामने आई है। बांबे अस्पताल क्षेत्र में जिस जगह गड्ढा हुआ, वहां भी पास में चैंबर था।

अब तक शहर में कई स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। राजवाड़ा क्षेत्र में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनी सड़क के नीचे करीब तीन महीने पहले नर्मदा लाइन को भरकर चार्ज किया गया था। इस दौरान लाइन फूट गई और सड़क धंस गई। इसके अलावा रावजी बाजार, मेघदूत गार्डन रोड और पढ़रीनाथ क्षेत्र में भी सड़क पर गड्ढे होने के मामले सामने आ चुके हैं। रावजी बाजार क्षेत्र में गड्ढे की गहराई 15 फीट से अधिक थी।

ग्वालियर में शीतला मंदिर हादसे में सवालों में पुलिसिया सिस्टम, नो-एंट्री में कैसे मौत बनकर दौड़ा ट्रक, कार्रवाई पर भी सवाल

ग्वालियर में शीतला मंदिर हादसे में सवालों में पुलिसिया सिस्टम, नो-एंट्री में कैसे मौत बनकर दौड़ा ट्रक, कार्रवाई पर भी सवाल

ग्वालियर पुलिस जिस तरह दिन भर शहर के हर चौक-चौराहे पर चेकिंग प्वाइंट लगाकर लोगों के चालान काटती है,काश वह ऐसी ही चौकसी शीतला माता मंदिर जाने वाली रोड पर दिखाती है तो आज 15 घरों के चिराग नहीं बुझते और न ही अस्पाल में 40 से अधिक लोग तड़प रहे होते। शीतला मंदिर हादसे के लिए भले ही पुलिस के अफसर ट्रक के ब्रेक फेल होने का वजह बताते हुए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे है लेकिन सवाल यह है कि जहां पर हादसा हुआ वह नो एंट्री जोन था, फिर धान से भरा ट्रक कैसे वहां पहुंचा और 50 से अधिक लोगों को रौंदा डालाा। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पैसे लेकर ट्रक को प्रतिबंधित रास्ते पर जाने  दिया। 

 

शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने जिले के पुलिसिया सिस्टम को लेकर एक नहीं कई सवाल खड़े कर दिए है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबंधित मार्ग पर आखिर लोडेड ट्रक पहुंचा कैसे? क्या पुलिस की बैरिकेडिंग सिर्फ खानापू्र्ति थी? क्या चेकपोस्ट पर तैनात पुलिसकर्मियों ने पैसे लेकर ट्रक को नो एंट्री वाले इलाके में जाना दिया? क्या मंदिर जाने वाले रास्ते पर ट्रैफिक व्यवस्था की निगरानी में बड़ी चूक की गई?

 

अगर मंदिर जाने वाले रास्ते पर रोक थी, बैरिकेडिंग थी और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस की थी, फिर भी धान से भरा ट्रक श्रद्धालुओं को कुचलता हुआ मंदिर के नजदीक पहुंच गया, यह सबसे बड़ा सवाल है।  दरअसल नवरात्रि के दौरान शीतला माता मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। ऐसे समय में भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध होने के बावजूद ट्रक का प्रतिबंधित क्षेत्र तक पहुंच जाना कई सवाल खड़े करता है। सवाल यह भी है कि अगर मंदिर जाने वाली रास्ते पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था, तो उस नियम का पालन कराने की जिम्मेदारी किसकी थी? ट्रक चालक की लापरवाही की जांच जरूरी है, लेकिन इसके साथ यह पता लगाना भी उतना ही जरूरी है कि प्रतिबंधित रास्ते पर वाहन को रोकने में व्यवस्था नाकाम क्यों रही। 

 

कार्रवाई पर भी उठे सवाल?-हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर झांसी रोड के सीएसपी को पद से हटाया गया और आठ अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। इस पूरे मामले में झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को हटाने के साथ झांसी रोड थाना प्रभारी शक्ति सिंह यादव, आंतरी थाना प्रभारी गीतेश शर्मा, झांसी रोड के ट्रैफिक थाना प्रभारी अभिषेक रघुवंशी, निरीक्षक यातायात राघवेंद्र जादौन, प्रधान आरक्षक सुशील द्विवेदी, आरक्षक किशन खन्ना, आरक्षक अनिल जैतपुरिया और आरक्षक पवन सेंगर को निलंबित किया गया है।

सरकार ने भले ही हादसे के बाद फौर तौर पर कार्रवाई कर दी हो लेकिन लेकिन सवाल यह है कि क्या निलंबन और गिरफ्तारी से उन खामियों का पता चल जाएगा, जिनकी वजह से प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहन पहुंचा? हादसे के बाद जिला कलेक्टर ने पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए है लेकिन उन परिवारों का क्या जिनके सहारे को इस हादसे ने छीन लिया। 

 

यमन के सैन्य शिविर पर मिसाइल हमले में 25 सैनिकों की मौत, 30 घायल

यमन के दक्षिण-पूर्वी प्रांत शबवा में सोमवार को एक सरकारी सैन्य प्रशिक्षण ठिकाने पर मिसाइलें हमलों में कम से कम 25 सैनिकों की जान चली गई और 30 से अधिक घायल हो गए।

प्रांतीय राजधानी अताक के पास जरदान जिले में स्थित अल-आलम सैन्य अड्डे पर गिरी तीनों मिसाइलों ने परिसर के भीतर बने एक प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया। एक सैन्य अधिकारी ने इस हमले के पीछे हुती विद्रोहियों का हाथ बताया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फुटेज में घटनास्थल पर भारी तबाही और हताहत लोग दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय चिकित्सा सूत्र ने बताया कि हताहतों का यह आंकड़ा शुरुआती है और इसमें बढ़ोतरी हो सकती है।

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चिकित्सा सूत्र के अनुसार, आपातकालीन और मेडिकल टीमें घायलों को शबवा के अस्पतालों में पहुंचाने में जुटी हैं। शिविर से बरामद कुछ शव बुरी तरह झुलस चुके हैं, जिससे मृतकों की अंतिम संख्या तय करने में मुश्किलें आ रही हैं। जरदान जिले में स्थित अल-आलम एक बड़ा सैन्य ठिकाना है। इसका इस्तेमाल यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन करने वाले बल करते हैं।

हुती विद्रोहियों ने फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। यह वारदात ऐसे समय में हुई है, जब यमन के कई मोर्चों पर हुती विद्रोहियों और सऊदी गठबंधन समर्थित सरकारी बलों के बीच लड़ाई और हमले तेज हो गए हैं।

यमन 2014 के उत्तरार्ध से ही भयानक संघर्ष में फंसा हुआ है, जब हूतियों ने राजधानी सना और देश के अधिकतर उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 2015 में सैन्य हस्तक्षेप किया था।

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इंदौर कांग्रेस ने महापौर को बताया ‘मित्रासुर’, रीगल चौराहे पर फूंका पुतला, कहा, बताएं 6 महीने में क्‍या काम किया

इंदौर कांग्रेस ने महापौर को बताया 'मित्रासुर', रीगल चौराहे पर फूंका पुतला, कहा, बताएं 6 महीने में क्‍या काम किया

pushymitra bhargav

इंदौर कांग्रेस ने महापौर को मित्रासुर बताया और शहर की समस्याओं को लेकर सोमवार को रीगल चौराहे पर उनका पुतला फूंका। यहां नगर निगम नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। इस दौरान महापौर पुष्यमित्र भार्गव व नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने गड्ढे, जलसंकट, ट्रैफिक, ड्रेनेज और कथित घोटालों जैसे मुद्दों को उठाया। मिमरोट ने महापौर को छह महीने में काम साबित करने या इस्तीफा देने की चुनौती दी।

सोनिला मिमरोट महिलाओं के साथ रीगल चौराहे पर पहुंचीं। प्रदर्शन के दौरान महापौर मुर्दाबाद, धोखेबाज और भाजपा मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम के खिलाफ भी नारेबाजी की। इस दौरान राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे भी सुनाई दिए।

प्रदर्शन के दौरान मित्रासुर का पुतला लाया गया। उसके अलग-अलग चेहरों पर शहर की समस्याओं और कथित अनियमितताओं से जुड़े नाम लिखे गए थे। इनमें गड्ढा मित्र, फर्जी नामांतरण घोटाला मित्र, भागीरथपुरा कांड मित्र, सफाईकर्मियों का झूठा मित्र, जलसंकट मित्र, अवैध होर्डिंग मित्र, घटिया ट्रैफिक नवाचार मित्र, भेदभाव मित्र और फर्जी बिल घोटाला मित्र शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने मित्रासुर मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए पुतला दहन किया।

नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने कहा कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव खुद को इंदौर का मित्र बताते हैं, लेकिन उनके अनुसार वे जनता के मित्र नहीं, बल्कि शत्रु हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महापौर ने अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाईं और शहर के गड्ढों, पानी, ट्रैफिक व ड्रेनेज की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने महापौर पर घोटालों में शामिल लोगों का साथ देने का आरोप भी लगाया।

यूपी में एक मार्कशीट पर 10 नियुक्तियां, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, एसटीएफ का शिकंजा

यूपी में एक मार्कशीट पर 10 नियुक्तियां, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, एसटीएफ का शिकंजा

UP fake teacher scam

UP fake teacher scam: बेसिक शिक्षा विभाग में एक ही शैक्षिक प्रमाणपत्र (मार्कशीट) का इस्तेमाल कर 10-10 शिक्षकों की फर्जी नियुक्तियों के खुलासे ने पूरी प्रणाली को हिलाकर रख दिया है। इस बड़े फर्जीवाड़े और कूटरचित दस्तावेजों के खेल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

 

​न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों में तैनात सभी परिषदीय शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की गहन जांच कराने का सख्त आदेश दिया है। इस जांच की निगरानी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ एसटीएफ (STF) करेगी।

​क्या हैं हाईकोर्ट के निर्देश?

  • ​एक सप्ताह का अल्टीमेटम : सभी शिक्षकों को एक सप्ताह के भीतर अपने नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक दस्तावेज संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के समक्ष जमा करने होंगे।
  • ​रिश्तेदारों का ब्योरा देना अनिवार्य : शिक्षकों को एक नोटरी शपथ पत्र भी प्रस्तुत करना होगा, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि उनके कौन-कौन से रिश्तेदार शिक्षा विभाग में BSA या उससे उच्च पदों पर कार्यरत हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
  • ​4 नवंबर को अगली सुनवाई : कोर्ट ने अधिकारियों को 4 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। फर्जी नियुक्तियों को रद्द करने, अवैध रूप से उठाए गए वेतन की वसूली और इसमें संलिप्त अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई पर कोर्ट अगली सुनवाई पर विचार करेगा।

​ऐसे खुला फर्जीवाड़े का खेल

​संतकबीरनगर निवासी कुसुमलता ने अपनी नियुक्ति की मंजूरी और बकाया वेतन जारी कराने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन जांच के दौरान एसटीएफ लखनऊ ने बड़ा खुलासा किया। याची ने गोरखपुर के बरईपार कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय में तैनात वास्तविक शिक्षिका ‘कुसुमलता श्रीवास्तव’ के असली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी से नौकरी हासिल की थी।

 

​एसटीएफ द्वारा 12 और 13 अक्तूबर को सत्यापन के लिए बुलाए जाने पर भी याची उपस्थित नहीं हुई। सुनवाई के दौरान सामने आया कि यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि पिछले दो दशकों से एक ही डिग्री पर 10 या उससे अधिक लोगों को नौकरी दिलाने का संगठित नेटवर्क चल रहा है।

​हाईकोर्ट की तल्क टिप्पणी

​सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार भले ही मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और मिड-डे मील पर करोड़ों खर्च कर दे, लेकिन फर्जी डिग्री से शिक्षक बने लोग बच्चों का भविष्य कभी नहीं संवार सकते। सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या और शिक्षा के गिरते स्तर का मुख्य कारण शिक्षकों की अयोग्यता और फर्जीवाड़ा है।

​गोपनीय पत्र लीक होने से बढ़ा संकट

​एसटीएफ के इनपुट के अनुसार राज्य में 10,000 से अधिक शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध हैं। वर्ष 2020 में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अनामिका शुक्ला के नाम पर एक साथ कई जिलों में नौकरियां हथियाने का मामला सामने आया था। जून 2022 में एसटीएफ ने 35 से अधिक जिलों के 228 संदिग्ध शिक्षकों की सूची सौंपी थी, लेकिन गोपनीय पत्र लीक होने, एफआईआर में देरी और बिहार, मध्य प्रदेश तथा आगरा विश्वविद्यालयों से सत्यापन में लगने वाले वर्षों के समय के कारण कार्रवाई प्रभावित हुई।

 

इस बीच, इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है और पिछले दो दशकों से चल रहे फर्जीवाड़ा रैकेट का पर्दाफाश होना तय माना जा रहा है।

यूपी में एक मार्कशीट पर 10 नियुक्तियां, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, एसटीएफ का शिकंजा

यूपी में एक मार्कशीट पर 10 नियुक्तियां, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, एसटीएफ का शिकंजा

UP fake teacher scam

UP fake teacher scam: बेसिक शिक्षा विभाग में एक ही शैक्षिक प्रमाणपत्र (मार्कशीट) का इस्तेमाल कर 10-10 शिक्षकों की फर्जी नियुक्तियों के खुलासे ने पूरी प्रणाली को हिलाकर रख दिया है। इस बड़े फर्जीवाड़े और कूटरचित दस्तावेजों के खेल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

 

​न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों में तैनात सभी परिषदीय शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की गहन जांच कराने का सख्त आदेश दिया है। इस जांच की निगरानी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ एसटीएफ (STF) करेगी।

​क्या हैं हाईकोर्ट के निर्देश?

  • ​एक सप्ताह का अल्टीमेटम : सभी शिक्षकों को एक सप्ताह के भीतर अपने नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक दस्तावेज संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के समक्ष जमा करने होंगे।
  • ​रिश्तेदारों का ब्योरा देना अनिवार्य : शिक्षकों को एक नोटरी शपथ पत्र भी प्रस्तुत करना होगा, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि उनके कौन-कौन से रिश्तेदार शिक्षा विभाग में BSA या उससे उच्च पदों पर कार्यरत हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
  • ​4 नवंबर को अगली सुनवाई : कोर्ट ने अधिकारियों को 4 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। फर्जी नियुक्तियों को रद्द करने, अवैध रूप से उठाए गए वेतन की वसूली और इसमें संलिप्त अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई पर कोर्ट अगली सुनवाई पर विचार करेगा।

​ऐसे खुला फर्जीवाड़े का खेल

​संतकबीरनगर निवासी कुसुमलता ने अपनी नियुक्ति की मंजूरी और बकाया वेतन जारी कराने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन जांच के दौरान एसटीएफ लखनऊ ने बड़ा खुलासा किया। याची ने गोरखपुर के बरईपार कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय में तैनात वास्तविक शिक्षिका ‘कुसुमलता श्रीवास्तव’ के असली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी से नौकरी हासिल की थी।

 

​एसटीएफ द्वारा 12 और 13 अक्तूबर को सत्यापन के लिए बुलाए जाने पर भी याची उपस्थित नहीं हुई। सुनवाई के दौरान सामने आया कि यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि पिछले दो दशकों से एक ही डिग्री पर 10 या उससे अधिक लोगों को नौकरी दिलाने का संगठित नेटवर्क चल रहा है।

​हाईकोर्ट की तल्क टिप्पणी

​सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार भले ही मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और मिड-डे मील पर करोड़ों खर्च कर दे, लेकिन फर्जी डिग्री से शिक्षक बने लोग बच्चों का भविष्य कभी नहीं संवार सकते। सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या और शिक्षा के गिरते स्तर का मुख्य कारण शिक्षकों की अयोग्यता और फर्जीवाड़ा है।

​गोपनीय पत्र लीक होने से बढ़ा संकट

​एसटीएफ के इनपुट के अनुसार राज्य में 10,000 से अधिक शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध हैं। वर्ष 2020 में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अनामिका शुक्ला के नाम पर एक साथ कई जिलों में नौकरियां हथियाने का मामला सामने आया था। जून 2022 में एसटीएफ ने 35 से अधिक जिलों के 228 संदिग्ध शिक्षकों की सूची सौंपी थी, लेकिन गोपनीय पत्र लीक होने, एफआईआर में देरी और बिहार, मध्य प्रदेश तथा आगरा विश्वविद्यालयों से सत्यापन में लगने वाले वर्षों के समय के कारण कार्रवाई प्रभावित हुई।

 

इस बीच, इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है और पिछले दो दशकों से चल रहे फर्जीवाड़ा रैकेट का पर्दाफाश होना तय माना जा रहा है।

इजरायल चुनाव : ट्रंप ने किया नेतान्याहू का समर्थन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 27 अक्टूबर को होने वाले संसदीय चुनावों में कड़े मुकाबले का सामना कर रहे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू का औपचारिक रूप से समर्थन किया है।

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी पोस्ट में श्री ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमरीका का साथ देने के लिए इजरायली नेता की सराहना की। उन्होंने कहा कि वे श्री नेतान्याहू को अपना ‘पूर्ण और समग्र समर्थन’ दे रहे हैं। श्री ट्रंप ने लिखा बीबी नेतान्याहू आपको कभी निराश नहीं करेंगे!

अमरीकी राष्ट्रपति का यह समर्थन इजरायली चुनाव से ठीक नौ दिन पहले सामने आया है, जबकि इससे पहले अटकलें लगाई जा रही थीं कि शायद वे किसी का समर्थन नहीं करेंगे।इससे पहले इस महीने की शुरुआत में ‘टाइम’ पत्रिका को दिए साक्षात्कार में जब श्री ट्रंप से इजरायली प्रधानमंत्री के कामकाज को लेकर बार-बार सवाल पूछे गए थे, तो उन्होंने नेतान्याहू का समर्थन करने से इनकार कर दिया था।

साक्षात्कारकर्ता के जोर देने पर भी श्री ट्रंप इस मुद्दे से बचते रहे और बातचीत को अपनी लोकप्रियता तथा पश्चिम एशिया की सुरक्षा की ओर मोड़ दिया। श्री ट्रंप ने रविवार को समाचार वेबसाइट ‘एक्सियोस’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि नेतन्याहू का समर्थन करने को लेकर उनके मन में कभी कोई संदेह नहीं था।

श्री ट्रंप ने संक्षिप्त टेलीफोन वार्ता में कहा मैं हमेशा से उनका समर्थन करने वाला था, बस बहुत जल्दी ऐसा नहीं करना चाहता था। यह जरूरी है कि इजरायल के पास एक ऐसा नेता हो जिस पर भरोसा किया जा सके। एक्सियोस के अनुसार, जब श्री ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे नेतन्याहू के अलावा किसी अन्य इजरायली नेता के साथ काम कर सकते हैं, तो उन्होंने गोलमोल जवाब दिया।

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श्री ट्रंप ने कहा शायद करूं, शायद न भी करूं, लेकिन यह जोखिम कौन लेना चाहता है?” समर्थन का ऐलान करते हुए श्री ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने तर्क दिया कि अगर वे पहल न करते तो ईरान जल्द ही अमरीका और इजरायल दोनों पर हमला कर देता।

श्री ट्रंप ने कहा कि इस युद्ध ने सैन्य और वित्तीय रूप से ईरान को पूरी तरह तबाह कर दिया है, और अगर उसने जल्द ही अपना रवैया नहीं बदला तो काम पूरा कर दिया जाएगा। श्री ट्रंप ने लिखा यदि इजरायल में गलत नेता चुना गया, जो श्री बीबी (नेतन्याहू) के अलावा कोई भी हो सकता है, तो अमरीका को यह काम अकेले करना पड़ेगा, और मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं है।

उन्होंने लिखा इजरायल के भीतर से भी हो रहे भारी विरोध के बावजूद श्री बीबी नेतन्याहू पूरी मजबूती, साहस और बुद्धिमत्ता से टिके रहे हैं। श्री ट्रंप के इस बयान के जवाब में श्री नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अमरीकी राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया।श्री नेतन्याहू ने कहा आपके इस अभूतपूर्व समर्थन से मैं बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं। ह्वाइट हाउस में इजरायल का इससे बड़ा दोस्त कभी नहीं रहा।

ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर हो रही घरेलू आलोचनाओं के आगे न झुकने के लिए श्री नेतन्याहू ने श्री ट्रंप की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने महंगाई से जूझ रहे अमरीकी मतदाताओं से सीधे अपील करते हुए श्री ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन किया।

श्री नेतन्याहू ने कहा मैं अमरीकी जनता से कहना चाहता हूं कि अगर आप आज ईंधन की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, तो सोचिए कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार हासिल कर लिए तो क्या होगा। ऐसा हम और श्री डोनाल्ड ट्रंप कभी नहीं होने देंगे।

उन्होंने कहा जब उस शासन का खतरा खत्म हो जाएगा, तो ईंधन के दाम तेजी से नीचे आ जाएंगे। लेकिन ऐसा केवल श्री ट्रंप के नेतृत्व में ही संभव है, उन लोगों के हाथ में नहीं जो तानाशाहों के आगे झुकना चाहते हैं।

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Weather Update : उत्तर भारत में हल्की ठंडक, दक्षिण में भारी बारिश का अलर्ट, कैसा है मुंबई का मौसम?

Weather Update : उत्तर भारत में हल्की ठंडक, दक्षिण में भारी बारिश का अलर्ट, कैसा है मुंबई का मौसम?

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Weather Update 19 October: देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। उत्तर भारत में जहां सुबह-शाम गुलाबी ठंडक ने दस्तक दे दी है, वहीं पश्चिमी भारत (विशेषकर मुंबई) में गर्मी और उमस परेशान कर रही है। इसके साथ ही, दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। आइए जानते हैं देश भर के प्रमुख शहरों और क्षेत्रों के मौसम का ताजा हाल:

 

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु के तटों पर चक्रवाती परिसंचरण का क्षेत्र बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, 19 से 25 अक्तूबर तक हिमाचल प्रदेश में बारिश या बर्फबारी का पूर्वानुमान नहीं है। अगले 4-5 दिनों में कई क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।

 

दिल्ली-NCR और उत्तर भारत में हल्की ठंडक

राजधानी दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में मौसम सुहाना बना हुआ है। राजधानी में आज आसमान साफ है। अधिकतम तापमान 31°C से 33°C और न्यूनतम तापमान 18°C से 20°C के बीच रहने का अनुमान है। सुबह और रात के समय हल्की ठंडक महसूस हो सकती है, जबकि दिन में खिली हुई धूप निकलेगी। बारिश की संभावना फिलहाल बहुत कम है।

 

मुंबई और पश्चिमी भारत में गर्मी के तेवर तीखे

गर्मी और उमस से लोग परेशान पश्चिमी भारत और खासकर मुंबई में गर्मी के तेवर अभी भी तीखे बने हुए हैं। अधिकतम तापमान 35°C से 36°C के आसपास दर्ज किया जा सकता है, जिससे गर्मी और उमस अधिक रहेगी। न्यूनतम तापमान लगभग 27°C के आसपास रह सकता है।

 

दक्षिण भारत: भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी

दक्षिण भारत के राज्यों में मानसूनी गतिविधियां या मौसमी सिस्टम सक्रिय हैं, जिसके चलते मौसम विभाग ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश होने की संभावना है। इन इलाकों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। लोगों को सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों से बचने की सलाह दी गई है।

 

मध्य प्रदेश में कैसा है मौसम?

मौसम विभाग (IMD) द्वारा मध्य प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई थी। इसके चलते इंदौर समेत कुछ जगहों पर छिटपुट गतिविधियां देखने को मिलीं।

फ्रांस में महंगाई पर भड़की हिंसा : राष्ट्रपति मैक्रों ने शांति की अपील की

फ्रांस में बढ़ती महंगाई, शिक्षा बजट में कटौती और चरमराती सार्वजनिक सेवाओं के खिलाफ जारी देशव्यापी प्रदर्शनों के दाैरान हिंसक दंगों, लूटपाट की घटनाओं को रोकने के लिए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ‘शांति और व्यवस्था’ बनाए रखने की अपील की है।

राष्ट्रपति कार्यालय (एलिसी पैलेस) से राष्ट्र के नाम दिए टीवी संबोधन में श्री मैक्रों ने प्रदर्शनकारियों से स्थिति को और न बिगड़ने देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “हम सभी गुस्सा और शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदर्शनकारियों की ‘जायज मांगों’ और तोड़फोड़ व लूटपाट के जिम्मेदार उपद्रवियों के बीच स्पष्ट फर्क किया जाना चाहिए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को पूरे फ्रांस में 5,50,000 से अधिक लोग सड़कों पर उतरे। अधिकतर प्रदर्शन हालांकि शांतिपूर्ण रहे, लेकिन रात ढलते ही कई शहरों में हिंसा भड़क उठी। सप्ताहांत के दौरान पुलिस ने 2,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं गृह मंत्रालय ने यह संख्या लगभग 2,400 बताई है।

पेरिस, मार्सिले, ल्योन और लिमोगेस में नकाबपोश समूहों ने दुकानों में तोड़फोड़ की, गाड़ियों में आग लगा दी और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाया। लिमोगेस में आग लगने के कारण 143 वर्ष पुराने टाउन हॉल का गुंबद ढह गया। रविवार को भी पेरिस के कुछ हिस्सों में झड़पें जारी रहने पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े।

श्री मैक्रों ने इस हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ऐसी तबाही को ‘किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता’। उन्होंने वादा किया कि उपद्रवियों को सख्त सजा दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने जनता की शिकायतों के समाधान के लिए इस सप्ताह ठोस उपायों पर बैठकों की प्रतिबद्धता जताई।

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यह विरोध प्रदर्शन सितंबर में पेरिस के उपनगरीय इलाकों के विद्यालयों में शिक्षकों और छात्रों की हड़ताल से शुरू हुआ था, जो कर्मी बढ़ाने और बेहतर संसाधनों की मांग कर रहे थे। बाद में कक्षाओं में भीड़, कर्मचारियों की कमी, महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता को लेकर यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया।

वायरल वीडियो में एक पुलिसकर्मी द्वारा छात्रा को प्रतिबंधित तरीके से गर्दन से दबोचने की घटना सामने आते ही जन आक्रोश और भड़क गया। पुलिस पर बेतहाशा बल प्रयोग का आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में कूद पड़े। इस अशांति ने मैक्रों सरकार को भारी राजनीतिक दबाव में ला खड़ा किया है। विरोधी सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासन प्रदर्शन के इतने बड़े पैमाने का अंदाजा लगाने में पूरी तरह नाकाम रहा। स्थिति पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू सोमवार को कैबिनेट की आपात बैठक करने वाले थे।

घटनाक्रम पर राजनीतिक नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने वामपंथियों पर जन आक्रोश का फायदा उठाने का आरोप लगाया, वहीं वामपंथी नेता ज्यां-ल्यूक मेलेनचोन ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के अधिकार का बचाव किया। आगे उपद्रव की आशंका के मद्देनजर मार्सिले प्रशासन ने सभाओं पर पाबंदी लगा दी है।

फ्रांस का यह आंदोलन बढ़ती महंगाई, मकानों की किल्लत और बदहाल सार्वजनिक सेवाओं को लेकर पूरे यूरोप में पनप रहे असंतोष का हिस्सा है। बेल्जियम, पुर्तगाल, इटली और अल्बानिया में भी ऐसे ही आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं।

इस स्थिति ने फ्रांस सरकार के लिए कानून-व्यवस्था बहाल करने के साथ-साथ प्रदर्शनों के पीछे की बुनियादी आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को सुलझाने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

Pic Credit : UNI

ग्वालियर में मंदिर हादसे के घायलों के इलाज की जगह अस्पताल में केंद्रीय मंत्री सिंधिया के स्वागत के लिए बिछा ग्रीन कार्पेट

ग्वालियर में मंदिर हादसे के घायलों के इलाज की जगह अस्पताल में केंद्रीय मंत्री सिंधिया के स्वागत के लिए बिछा ग्रीन कार्पेट

ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत और 40 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद जहां हर कोई शोक में डूबा हुआ था। वहीं जिन पर घायलों के इलाज का जिम्मा था वह वीआईपी नेताओं की आवभगत में जुटे हुए थे। पूरा मामला ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल से जुडा है। मंदिर हादसे में गंभीर रुप से घायल लोगों को इलाजा के लिए जयारोग्य अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। घटना के बाद सुबह मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंत्री एदल सिंह कंसान और राकेश शुक्ला के साथ स्थानीय सांसद भारत सिंह कुशवाह अस्पाताल पहुंचे औऱ घायलों का हालचाल जाना और परिजनों से बात की। 

 

वहीं जब दोपहर बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अस्पताल पहुंचने की जानकारी अस्पताल प्रबंधन  को लगी तो सिंधिया के आगमन की तैयारी में अस्पताल परिसर की साफ-सफाई और ग्रीन कार्पेट बिछाई जाने लगी। हादसे के बाद अस्पताल में घायलों और उनके परिजनों के बीच बेचैनी का माहौल था। कोई अपनों की सलामती की दुआ कर रहा था, तो कोई इलाज की जानकारी के लिए इधर-उधर भटक रहा था। ऐसे समय में वीआईपी दौरे की तैयारियों का यह नजारा देख हर कोई हैरान रह गया। मौके पर मौजूद लगों ने  जब एक कर्मचारी से इसकी वजह पूछी गई, तो उसने कहा कि आप सब जानते तो हैं सिंधिया जी आने वाले हैं। हम तो कर्मचारी हैं, ऊपर वालों का आदेश मानना पड़ेगा।।

 

केंद्रीय मंत्री सिंधिया के अस्पताल पहुंचने से पहले परिसर में साफ-सफाई के साथ व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम भी होता दिखाई दिया। अस्पताल परिसर में मौजूद टूटी टाइल्स और गड्ढों को सीमेंट-रेत के मसाले से ठीक करने की कवायद की गई। ट्रॉमा सेंटर के बाहर ग्रीन मैट बिछाने की तैयारी और परिसर की मरम्मत की तस्वीरों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
 

हादसे के बाद अस्पताल में घायलों का इलाज और उनके परिजनों को राहत देना सबसे बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में वीआईपी दौरे से पहले साफ-सफाई,मरम्मत और ग्रीन मैट बिछाने की तैयारी ने यह सवाल खड़ा किया कि आपात स्थिति में अस्पताल की प्राथमिकताएं क्या होनी चाहिए।

 

वहीं अस्पताल पहुंचे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से जब इसको लेकर मीडिया ने सवाल पूछा तो उन्होंने  इसे गलत बताते हुए कहा कि मैं ग्वालियर का हूं, ग्वालियर मेरा है। मेरे लिए कहां से ग्रीन कारपेट क्या तमाशा है।