NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द; CJP नहीं करेगी प्रोटेस्ट

NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द; CJP नहीं करेगी प्रोटेस्ट

Supreme Court

नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज एफआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने आर्टिकल 142 के तहत मिले अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली और चार राज्यों में दर्ज एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया। फैसले के तुरंत बाद सीजेपी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस ले लिया। ALSO READ: ट्रंप की टैरिफ नीति से बिगड़े समीकरण, भारत, चीन और रूस के गठबंधन से बढ़ेगी अमेरिका की टेंशन

 

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली, असम, महाराष्ट्र, बंगाल और बिहार में नीट प्रदर्शन से जुड़ी एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया। ये मामले 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन से जुड़े थे। दिल्ली पुलिस और 4 राज्य सरकारों ने कोर्ट से आर्टिकल 142 के तहत इन मामलों को खत्म करने की मांग की थी।

 

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत में दिए गए भरोसे पर कायम है। उन्होंने बताया कि नीट प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। केंद्र ने इसके लिए तीन महीने का समय मांगा है। मुआवजे का तरीका तय करने के लिए अलग-अलग राज्य सरकारों और संबंधित पक्षों से बातचीत की जाएगी। ALSO READ: पीएम मोदी का नया मंत्र- Wed in India, आखिर क्या है इसके मायने?

 

2873 लोगों पर फिर कार्रवाई क्यों होगी?

कोर्ट ने केंद्र को 2873 ऐसे लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी है। इनके बारे में आपराधिक इतिहास होने की बात कही गई है। सुनवाई के दौरान वकील हरिहरन ने इन 2873 लोगों की सूची मांगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन लोगों के खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। ALSO READ: ‘GDP ग्रोथ का जश्न आम आदमी कैसे मनाए?’ खरगे ने PM मोदी पर साधा निशाना, बेरोजगारी-महंगाई से लेकर असमानता तक गिनाईं चुनौतियां

 

सीजेपी ने वापस लिया प्रोटेस्ट

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJP के सौरव दास ने कहा कि मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत सरकार के सकारात्मक आश्वासनों, आज उन्हें मिली न्यायिक मान्यता को देखते हुए और  कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए कॉकरोच जनता पार्टी 5 सितंबर को होने वाले मार्च के आह्वान को वापस लेना उचित समझता है। उम्मीद है कि सरकार अपने वचन का पालन करेगी।

Redmi Note 17 Pro Max 5G India Launch: भारत में जल्द दस्तक देगा Xiaomi का नया स्मार्टफोन, 10,000mAh बैटरी समेत मिलेंगे ये दमदार फीचर्स

Redmi Note 17 Pro Max 5G India Launch: भारत में जल्द दस्तक देगा Xiaomi का नया स्मार्टफोन, 10,000mAh बैटरी समेत मिलेंगे ये दमदार फीचर्स

Redmi Note 17 Pro Max 5G

Xiaomi ने भारत में अपने नए स्मार्टफोन Redmi Note 17 Pro Max 5G के लॉन्च को टीज कर दिया है। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फोन के भारत आने का संकेत दिया है। हालांकि, अभी तक Xiaomi ने इसकी सटीक लॉन्च डेट का खुलासा नहीं किया है। कंपनी की भारतीय वेबसाइट पर इस स्मार्टफोन के लिए लैंडिंग पेज भी लाइव हो चुका है।

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Redmi Note 17 Pro Max 5G को Xiaomi ने अगस्त में चुनिंदा ग्लोबल मार्केट्स में लॉन्च किया था। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि भारत में आने वाला मॉडल ग्लोबल वेरिएंट के कई प्रमुख स्पेसिफिकेशन्स के साथ पेश किया जा सकता है।

 

6.83 इंच AMOLED डिस्प्ले और 120Hz रिफ्रेश रेट

 

ग्लोबल मॉडल में 6.83 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। इसका रिफ्रेश रेट 120Hz तक है, जबकि पीक ब्राइटनेस 3,500 निट्स तक बताई गई है। फोन में Snapdragon 6 Gen 5 चिपसेट दिया गया है। यह स्मार्टफोन 8GB RAM और अधिकतम 512GB स्टोरेज के साथ आता है। सॉफ्टवेयर की बात करें तो इसमें Android 16 पर आधारित HyperOS 3 दिया गया है।

 

50MP कैमरा और 4K वीडियो रिकॉर्डिंग

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कैमरा सेटअप की बात करें तो Redmi Note 17 Pro Max 5G में 50MP का प्राइमरी कैमरा दिया गया है, जो OIS सपोर्ट करता है। इसके साथ 8MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा मिलता है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 32MP फ्रंट कैमरा दिया गया है। फोन के फ्रंट और रियर दोनों कैमरों से 4K वीडियो 30fps पर रिकॉर्ड किया जा सकता है।

10,000mAh की बड़ी बैटरी

 

Redmi Note 17 Pro Max 5G की सबसे बड़ी खासियत इसकी 10,000mAh सिलिकॉन-कार्बन बैटरी है। इसे 100W वायर्ड फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। फोन को IP66 और IP68 रेटिंग भी दी गई है।

 

कनेक्टिविटी के लिए इसमें 5G, Wi-Fi 6, Bluetooth 6.0 और NFC जैसे फीचर्स मिलते हैं।

 

भारत में कितनी हो सकती है कीमत?

 

जापान में Redmi Note 17 Pro Max 5G के 8GB + 256GB वेरिएंट की शुरुआती कीमत JPY 79,980 (लगभग 47,900 रुपए) है। वहीं 8GB + 512GB मॉडल की कीमत JPY 99,980 (लगभग 59,900 रुपए) है। ग्लोबल मॉडल Black, Cloudbrush और Purple कलर ऑप्शन में उपलब्ध है। हालांकि, भारत में इसकी कीमत, वेरिएंट और कलर ऑप्शन की आधिकारिक जानकारी लॉन्च के समय ही सामने आएगी।

 

नोट: भारत में कीमत और स्पेसिफिकेशन्स को लेकर Xiaomi की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

नेपाल बाढ़ की तबाही का खौफनाक मंजर: एक घर के मलबे से मिले 23 शव, 4000 से ज्यादा लोग अब भी लापता

नेपाल बाढ़ की तबाही का खौफनाक मंजर: एक घर के मलबे से मिले 23 शव, 4000 से ज्यादा लोग अब भी लापता

nepal flood

नेपाल में आई भीषण बाढ़ को कई दिन गुजर चुके हैं, लेकिन तबाही का खौफनाक मंजर अब भी कायम है। अब तक करीब 962 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं जबकि 4000 से ज्यादा लोग लापता है। नुवाकोट जिले में रेस्क्यू के दौरान एक दिल दहला देने वाले घटनाक्रम में एक ही परिवार के 23 शव बरामद किए गए। ALSO READ: नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

 

मीडिया खबरों के अनुसार, नुवाकोट जिले के भोटे कोशी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिदुर नगर पालिका-10 में एक ही घर के मलबे से 23 शव निकाले गए हैं। बरामद किए गए शवों में से 21 शव तो एक ही कमरे से मिले।

 

नुवाकोट के विदुर नगरपालिका स्थित बेत्रावती गांव में भोटेकोशी नदी की बाढ़ के मलबे में यह घर दब गया था। सभी शव तीर्थयात्रियों के होने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल शवों की पहचान नहीं हो सकी है और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए काठमांडू के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग अस्पताल भेज दिया गया है। ALSO READ: Nepal Flood : बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो, अनजान शख्स बना फरिश्ता, बची 370 से ज्यादा जानें, स्कूल में ऐसे हुआ जिंदगी का सबसे बड़ा Rescue

 

एसपी रेग्मी के अनुसार, शव छत के ठीक नीचे स्थित कमरे में मिले हैं। एक महिला का शव एक छोटी बच्ची को गोद में कसकर पकड़े हुए अवस्था में मिला है। आशंका है कि दोनों मां-बेटी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि लोग बाढ़ से बचने के लिए भागकर एक जगह इकट्ठा हुए थे, लेकिन उसी दौरान पूरा ग्रुप सैलाब की चपेट में आकर दब गया।

ट्रंप की टैरिफ नीति से बिगड़े समीकरण, भारत, चीन और रूस के गठबंधन से बढ़ेगी अमेरिका की टेंशन

ट्रंप की टैरिफ नीति से बिगड़े समीकरण, भारत, चीन और रूस के गठबंधन से बढ़ेगी अमेरिका की टेंशन

India-China-Russia relations: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक 'टैरिफ नीति' ने दुनिया भर में आर्थिक खलबली मची हुई है। मित्र देशों पर लगाए गए भारी-भरकम टैक्स के कारण अब भारत, चीन और रूस एकजुट होकर अमेरिका के प्रभाव से अलग एक नया आर्थिक फ्रंट तैयार करने में जुट गए हैं। इस नई भू-राजनीतिक धुरी से वाशिंगटन में बेचैनी बढ़ गई है।

 

डोनाल्ड ट्रंप ने 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' के वादे के साथ दोबारा सत्ता संभालते ही वैश्विक स्तर पर आक्रामक टैरिफ वॉर की शुरुआत कर दी। लेकिन अपने मित्र राष्ट्रों पर भी अतिरिक्त टैक्स थपने का यह फैसला अब अमेरिका पर ही भारी पड़ता दिख रहा है। ट्रंप की इस आर्थिक नीति ने भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे उभरते देशों के हितों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। परिणाम स्वरूप, वाशिंगटन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत, चीन और रूस की अगुआई में एक नया इकोनॉमिक फ्रंट आकार लेने लगा है। ALSO READ: शहबाज शरीफ के सामने गरजे पीएम मोदी, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे, जड़ से खत्म करना होगा इकोसिस्टम

क्या अमेरिका के खिलाफ खड़ा हो रहा है नया मोर्चा

दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले दो देश— भारत और चीन जब एक साथ व्यापारिक और आर्थिक तालमेल बढ़ाते हैं, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था का रुख बदलने की क्षमता रखता है। दोनों देशों के विशाल उपभोक्ता बाजार पर दुनिया भर की नजरें हैं। ट्रंप के मनमाने टैक्स रवैये ने भारत जैसे विश्वसनीय मित्र को भी अपनी व्यापारिक प्राथमिकताओं पर फिर से सोचने को मजबूर कर दिया है। भारत अब द्विपक्षीय संबंधों को नए आयाम देकर अपनी अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने में जुटा है।

अमेरिका ने पाकिस्तान को साधा, पर हाथ से फिसला भारत

व्हाइट हाउस में दोबारा प्रवेश के बाद ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मेहमाननवाजी की थी। हालांकि, अमेरिकी राजनीति के इन पैंतरों के जवाब में एशिया के शक्ति समीकरण तेजी से बदल गए। ट्रंप के टैरिफ वॉर के दबाव के चलते भारत और इस्लामाबाद का सदाबहार दोस्त माने जाने वाला चीन अब करीब आ रहे हैं। ALSO READ: पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत की बड़ी आर्थिक छलांग: जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही, RBI का अनुमान पीछे छूटा

 

वहीं दूसरी ओर, भारत और रूस की दशकों पुरानी ऐतिहासिक और सैन्य रणनीतिक साझेदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत है। भारतीय वायुसेना के सुखोई-30MKI (Su-30MKI) फाइटर जेट—जिन्होंने पाकिस्तान पर ब्रह्मोस मिसाइल दागकर अपनी ताकत दिखाई थी—उसी रूसी रक्षा प्रौद्योगिकी की पहचान हैं।

ब्रिक्स समिट में भारत की धमक

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव और वैश्विक कद ने पाकिस्तान को पहले ही असहज कर रखा है। अब भारत की मेजबानी में होने जा रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक ही मंच पर साथ नजर आएंगे। अमेरिका की नीतियों को दरकिनार कर इन तीन बड़ी ताकतों का एक साथ आना ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका साबित हो सकता है।

क्या अमेरिका से दूर हो रहा है भारत?

हालांकि ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि भारत अमेरिका से दूर हो रहा है, लेकिन वह अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत कर रहा है। दरअसल, भारत किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय अपनी जरूरतों के हिसाब से संबंधों को संतुलित करता है। यदि अमेरिका व्यापारिक प्रतिबंध या कठोर टैरिफ लगाता है, तो भारत अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए रूस और चीन के साथ व्यापारिक सहयोग बढ़ाने से पीछे नहीं हटता।

 

भारत और अमेरिका के संबंध रक्षा, तकनीक और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र की सुरक्षा में आज भी महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, वाशिंगटन की नीतियां जब भारत के व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं, तो नई दिल्ली अपने विकल्पों का विस्तार करती है। भारत यह स्पष्ट संदेश दे रहा है कि अमेरिका के साथ रिश्ते पारस्परिक सम्मान और लाभ पर आधारित होने चाहिए, न कि एकतरफा दबाव या व्यापारिक पाबंदियों पर।

 

‘GDP ग्रोथ का जश्न आम आदमी कैसे मनाए?’ खरगे ने PM मोदी पर साधा निशाना, बेरोजगारी-महंगाई से लेकर असमानता तक गिनाईं चुनौतियां

‘GDP ग्रोथ का जश्न आम आदमी कैसे मनाए?’ खरगे ने PM मोदी पर साधा निशाना, बेरोजगारी-महंगाई से लेकर असमानता तक गिनाईं चुनौतियां

mallikarjun kharge attacks narendra modi on GDP statement

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। खरगे ने GDP ग्रोथ के आंकड़ों को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश का आम नागरिक बेरोजगारी, महंगाई और बढ़ती आर्थिक असमानता के ‘3 अ’ के बोझ तले दबा हुआ है। ALSO READ: पीएम मोदी का नया मंत्र- Wed in India, आखिर क्या है इसके मायने?

 

खरगे ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि लाइट्स, कैमरा और इनैक्शन (निष्क्रियता)! यह अर्थव्यवस्था के मामले में मोदी जी के पीआर (प्रचार) की कहानी है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदीजी, आप कह रहे हैं कि देश जीडीपी ग्रोथ का जश्न मना रहा है। आपके पास यह विलासिता हो सकती है, लेकिन आम आदमी के पास नहीं!

 

3 'अ' के बोझ तले दबा आम नागरिक

उन्होंने कहा कि हमारा आम नागरिक 3 'अ' के बोझ तले दबा हुआ है और इसके लिए आप जिम्मेदार हैं! 3 'अ' अभूतपूर्व बेरोजगारी, असहनीय महंगाई और अनियंत्रित असमानता! बेरोजगारी 50 साल के उच्चतम स्तर पर है। युवा स्नातकों में से 40% बेरोजगार हैं। जुलाई 2026 में 15 से 29 वर्ष की आयु के हर 6 में से 1 युवा भारतीय बेरोजगार था। हर साल 2 करोड़ नौकरियों का वादा चूर-चूर हो चुका है।

 

खुदरा महंगाई 19 महीने के उच्चतम स्तर पर है। चीनी, प्याज, टमाटर, दाल, खाना पकाने का तेल, चावल, दूध—रसोई की हर जरूरत आग उगल रही है। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और सीएनजी की कीमतें आम पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। मध्यम वर्गीय परिवार किसी तरह जीने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और गरीबों ने तो उम्मीद ही छोड़ दी है।

 

असमानता ब्रिटिश राज से भी बदतर हो गई है। शीर्ष 1% के पास भारत की कुल संपत्ति का 40% हिस्सा है। सबसे निचले 50% लोग बमुश्किल 15% पर गुजर-बसर कर रहे हैं। आपकी सरकार ने स्वतंत्र भारत के इतिहास में गरीबों से अमीरों की तरफ संपत्ति का सबसे बड़ा ट्रांसफर किया है। ALSO READ: 7.8% की शानदार विकास दर के बीच पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

क्रोनी कैपिटलिज्म इकलौती आर्थिक नीति

खरगे ने कहा कि अंधाधुंध क्रोनी कैपिटलिज्म (पक्षपातपूर्ण पूंजीवाद) ही आपकी इकलौती आर्थिक नीति है। आपकी सरकार ने 2014 से लेकर अब तक 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कॉर्पोरेट कर्ज को बट्टे खाते (राइट ऑफ) में डाल दिया है। इसके सबसे ताजा और चौंकाने वाले उदाहरण में, लेनदारों ने 22,006 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले महज 6.5 करोड़ रुपये वसूले, यानी 99.97% की भारी-भरकम छूट (हेयरकट) दे दी गई। ALSO READ: 7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

 

खरगे ने बताया क्या बदला?

उन्होंने कहा कि देश ने देखा है कि भारत के प्रधानमंत्री एक चहेते मित्र के लिए पर्सनल ट्रैवल एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं! भारतीयों से सोना न खरीदने और विदेश यात्रा न करने के लिए आपके बार-बार दिए जाने वाले उपदेश जमीनी हकीकत को बयां करते हैं। सच्चाई यह है कि जनता से झूठ बोलने की आपकी क्षमता के अलावा कुछ भी नहीं बदला है!

पीएम मोदी का नया मंत्र- Wed in India, आखिर क्या है इसके मायने?

पीएम मोदी का नया मंत्र- Wed in India, आखिर क्या है इसके मायने?

मेक इन इंडिया के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को एक नया मंत्र दिया है 'Wed in India'। देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से 'स्वदेशी' और 'आत्मनिर्भरता' को अपनाने की भावुक अपील की है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत GDP विकास दर का हवाला देते हुए पीएम मोदी ने विशेष रूप से विदेशों में होने वाली खर्चीली शादियों पर चिंता जताई और 'Wed in India' (भारत में शादी) के मंत्र पर जोर दिया।

विदेशों में शादियों के चलन पर चिंता

पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि घूमने के अलावा अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचना चाहिए और विदेशों में शादियां रचाने के चलन पर विराम लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेश यात्राएं अगर घूमने के लिए जाते हैं, तो नहीं जाना चाहिए। अगर विदेश में शादियां करते हैं, तो नहीं करनी चाहिए। ‘वेड इन इंडिया’ के मंत्र को जीना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने घरेलू उत्पादों की खपत बढ़ाने और बिना जरूरत के सोना न खरीदने की भी सलाह दी। ALSO READ: शहबाज शरीफ के सामने गरजे पीएम मोदी, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे, जड़ से खत्म करना होगा इकोसिस्टम

विदेशी डेस्टिनेशन वेडिंग का सच

उद्योग अनुमानों और रिपोर्टों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 5000 अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन वेडिंग्स (विदेशों में) आयोजित की जाती हैं। हालांकि इसका कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन, कंज्यूमर और वेडिंग इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार हर साल इन 5000 शादियों के जरिए भारतीय परिवारों का लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का खर्च देश से बाहर विदेशी वेडिंग डेस्टिनेशन (जैसे थाईलैंड, यूएई, श्रीलंका, वियतनाम और यूरोप) में चला जाता है। ALSO READ: 7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

पीएम मोदी की अपील का उद्देश्य

पीएम मोदी की सीधी अपील का उद्देश्य इसी धन को देश के भीतर बनाए रखना है। भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग का औसतन खर्च करीब 58 लाख रुपए आता है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बजट बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ रुपए तक पहुंच जाता है। भारतीयों के लिए थाइलैंड सबसे लोकप्रिय विदेशी वेडिंग डेस्टिनेशन बना हुआ है। इसके अलावा UAE, वियतनाम और श्रीलंका (2025 में 25% की वृद्धि) भी प्रमुख विकल्प हैं, जबकि इटली, स्पेन और ग्रीस का चयन लक्जरी शादियों के लिए किया जाता है। Policybazaar के आंकड़े दर्शाते हैं कि अंतरराष्ट्रीय शादियों के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस की खरीद में लगातार दो वर्षों तक 27.4% की सालाना वृद्धि हुई है।

दवाओं पर अब तक लागू नहीं हुआ नया नियम, पूरी स्‍ट्रिप खरीदने को मजबूर मरीज, पैकेजिंग बदली तो बढ़ेगा जेब पर भार

दवाओं पर अब तक लागू नहीं हुआ नया नियम, पूरी स्‍ट्रिप खरीदने को मजबूर मरीज, पैकेजिंग बदली तो बढ़ेगा जेब पर भार

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जब आप किसी मेडिकल स्‍टोर पर कोई दवा खरीदने जाते हैं, आप दवाओं का सिर्फ एक डोज चाहते हैं, मसलन, आपको सिर्फ 3 टेबलेट चाहिए, लेकिन मेडिकल संचालक आपको टेबलेट का पूरा स्‍ट्रिप थमा देता है। यानी आपको चाहिए सिर्फ 3 टेबलेट, लेकिन खरीदना पड़ती है 10 गोलियां। यह भारत में ज्‍यादातर मरीजों के साथ होता है।

इसके लिए सरकार में दवाओं की पैकेजिंग और उन पर बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट की प्रिंटिंग को लेकर बदलाव की योजना बनाई थी, लेकिन वो अब तक लागू नहीं हो सकी है, नतीजा यह है कि आज भी मरीजों को दो गोली की जगह मेडिसिन का पूरा पत्‍ता यानी स्‍ट्रिप खरीदना पड़ रही है। अगर ऐसा होता है तो इसमें भी एक अलग समस्‍या पैदा हो सकती है। केमिस्‍टों का मानना है कि पैकेजिंग बदलेगी तो उसका बोझ भी मरीजों की जेब पर आएगा।

मरीज की मजबूरी : दरअसल, नियम यह है कि कानूनी रूप से आपको या किसी भी मरीज को मेडिकल संचालक पूरी स्ट्रिप लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता, लेकिन इसके पीछे कुछ तकनीकी खामियां हैं, जिसकी वजह से केमिस्ट वाले ऐसा करने के लिए मजबूर हैं। जानते हैं क्‍या हैं दवाओं को खरीदने के नियम और सरकार इस लूपहोल से निपटने के लिए क्‍या योजना बना रही है।

मरीजों के साथ क्‍यों हो रहा ऐसा : दरअसल, दवाओं पर उनकी बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट छपी होती है। स्‍ट्रिप को काटकर उसमें से कुछ ही गोलियां निकालने पर स्‍ट्रिप के एक हिस्‍से में यह जानकारी नहीं मिल पाती है, क्‍योंकि यह जानकारी स्‍ट्रिप के एक ही हिस्‍से में लिखी होती है। जबकि ग्राहक के लिए यह जानना जरूरी है कि जो दवा वो खरीद रहा है, उनकी बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट क्‍या है। केमिस्‍ट स्‍ट्रिप पर लिखी जानकारी मिटने और नुकसान के डर से ऐसा करते हैं। हालांकि, नियमों में सख्ती और नई पैकेजिंग आने के बाद यह समस्या जल्द ही पूरी तरह खत्म होने का दावा किया जा रहा है।

किन वजहों से केमिस्‍ट ऐसा करते हैं?
जानकारी गायब होने का डर : दरअसल, दवा की स्ट्रिप के पीछे बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट छपी होती है। अगर केमिस्ट स्ट्रिप को बीच से काट कर दो गोलियां दे देता है, तो बाकी बची स्ट्रिप से यह जरूरी जानकारी गायब हो सकती है। बिना एक्सपायरी डेट या लेबल वाली दवाएं रखना या बेचना ड्रग नियमों के खिलाफ माना जाता है।

Medicine Time After Food

दवा कंपनियों का नियम: दवा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स का यह नियम होता है कि वे केवल पूरी और बिना कटी हुई स्ट्रिप ही वापस (Return) लेते हैं। अगर मेडिकल स्टोर वाला कोई धीमी बिकने वाली दवा (Slow-moving drug) काट कर दे देता है और बची हुई दवाएं एक्सपायर हो जाती हैं, तो कंपनी उसे वापस नहीं लेती। इसका पूरा आर्थिक नुकसान छोटे मेडिकल स्टोर संचालक को उठाना पड़ता है।

दवाइयों की बर्बादी: कुछ दवाइयां बहुत कम बिकती हैं (स्लो मूविंग ड्रग्स)। उनकी कटी हुई स्ट्रिप दुकान में महीनों पड़ी रह सकती है और अंत में केमिस्ट को उसे फेंकना पड़ता है।

पूर्व सिविल सर्जन डॉ प्रवीण जड़िया ने बताया कि तकनीकी खामियों और इन वजह से मरीज की जेब पर होने वाले भार और मेडिसिन की पूरी जानकारी भी बरकरार रखने के इरादे के साथ ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) और उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय इस समस्या को खत्म करने के लिए नए नियमों पर काम की योजना तो बनाई थी, हालांकि उस पर अब तक कुछ हो नहीं सका है।

क्‍या कहते हैं मेडिकल संचालक और केमिस्‍ट : दरअसल, इस पूरे मसले में तकनीकी खामी है। कुछ केमिस्‍ट संचालकों का कहना है कि स्‍ट्रिप की हर गोली पर क्‍यूआर कोड और बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट प्रिंट करना संभव नहीं है। अगर ऐसा होता है तो पैकेजिंग में कई तरह के बदलाव करना होगा। यह दवा कंपनियों के लिए एक महंगा सौदा साबित होगा। ऐसे में दवा कंपनियां मेडिसिन के दाम बढाएगी और उसका बोझ मरीज की ही जेब पर पड़ेगा।

लंबी बीमारी में तो ठीक, आम बीमारियों में बोझ : दरअसल, लाइफ लॉन्‍ग बीमारियां जैसे शूगर हार्ट, बीपी ओर कैंसर में तो मरीज दो महीने या तीन महीने के डोज खरीदता ही है, लेकिन आम बीमारियों के इलाज में लगने वाली दवाओं को खरीदने में मरीज पर बोझ बरकरार है, क्‍योंकि आम शिकायतों में मरीज को 2 या तीन डोज लेना होते हैं।

इस नई योजना पर चल रहा काम: सटीक मात्रा बेचने का प्रस्ताव (Exact Quantity Dispensing): DCGI ने एक नए नियम का प्रस्ताव रखा है जिसके तहत फार्मासिस्टों को उतनी ही दवाएं काट कर देनी होंगी, जितनी डॉक्टर के पर्चे पर लिखी हैं।

हर गोली पर QR कोड और जानकारी: पैकेजिंग टेक्नोलॉजी में बदलाव के सुझाव दिए गए हैं ताकि हर एक सिंगल टैबलेट या कैप्सूल के पीछे या उसकी पैकेजिंग पर एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और QR कोड अंकित हो। इससे पत्ता काटने पर भी जानकारी सुरक्षित रहेगी।

परफोरेशन्स (Perforation) तकनीक: दवा कंपनियों को ऐसी स्ट्रिप्स बनाने की सलाह दी जा रही है, जिन्हें बिना कैंची के आसानी से सिंगल यूनिट में अलग किया जा सके।

केमिस्‍ट और मरीज के बीच विवाद: नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) के मुताबिक इस तरह की शिकायतों की संख्या में तेजी आई है। NCH को कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री रन करती है। इससे मिले आंकड़ों के आधार पर ही मिनिस्ट्री विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। मंत्रालय ने हाल में फार्मा और मेडिकल डेवाइसेज इंडस्ट्री के नुमाइंदों के साथ सलाह-मशविरा किया था। इसमें ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के टॉप अधिकारी भी शामिल हुए। क्‍योंकि अक्‍सर केमिस्‍ट और मरीज के बीच इसे लेकर विवाद हो रहे हैं।

शहबाज शरीफ के सामने गरजे पीएम मोदी, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे, जड़ से खत्म करना होगा इकोसिस्टम

शहबाज शरीफ के सामने गरजे पीएम मोदी, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे, जड़ से खत्म करना होगा इकोसिस्टम

narendra modi at SCO summit

PM Modi at SCO Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO समिट में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सामने आतंकवाद पर सख्‍त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके विरुद्ध लड़ाई में हम क्रिया-प्रतिक्रिया की सोच तक सीमित नहीं रह सकते। हमें आतंकवाद के फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करना होगा। ALSO READ: 7.8% की शानदार विकास दर के बीच पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

 

पीएम मोदी ने कहा कि हमें एक आवाज में कहना चाहिए कि इस गंभीर मुद्दे पर दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं हो सकती। जो देश आतंकवाद को अपनी नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं और आतंकवादियों को पनाह और समर्थन देते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंकवाद किसी के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता।

 

उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। हमें आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करना होगा- जिसमें उसकी फंडिंग, लोगों की भर्ती और सुरक्षित ठिकाने शामिल हैं। हमें एक सुर में यह कहना होगा कि आतंकवाद के मामले में दोहरे मापदंडों की कोई जगह नहीं हो सकती।

पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध के मैदान में कोई समाधान नहीं निकलता, सभी युद्धों और विवादों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शांत और सुरक्षित यूरेशिया की हमारी साझा आकांक्षा, अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जुड़ी है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में योगदान देता रहा है, और आगे भी देता रहेगा। भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं, व्यापार को आसान बनाते हैं और विकास के नए रास्ते खोलते हैं।

अखिलेश यादव पर भड़के संगीत सोम: PDA की नई परिभाषा गढ़कर बोले- वे तो अपराधियों के ‘अब्बा’ हैं

अखिलेश यादव पर भड़के संगीत सोम: PDA की नई परिभाषा गढ़कर बोले- वे तो अपराधियों के 'अब्बा' हैं

sangeet som

भाजपा के फायर ब्रांड नेता संगीत सोम ने मीडिया से रूबरू होते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव  पर तीखे हमले बोले। शामली के अंकित चौहान हत्याकांड में आरोपियों के एनकाउंटर को लेकर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए सोम ने कहा कि प्रदेश सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का काम किया जा रहा है।

 

पूर्व विधायक संगीत सोम ने अखिलेश यादव को आड़े हाथ लेते हुए PDA की नई परिभाषा गढ़ दी। उन्होंने PDA को यानी P से पापी,D से डकैत,A से अपराधी व्याख्या की है। संगीत का हमला यही नही रूका उन्होंने अखिलेश को अपराधियों का ‘अब्बा’ तक कह दिया। सोम ने आरोप लगाया कि सपा नेतृत्व की राजनीति अपराधियों के समर्थन और जातीय ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द घूमती है।

 

अंकित चौहान के परिवार से मुलाकात का किया जिक्र

संगीत सोम ने बताया कि वह बीते कल यानी रविवार को शामली पहुंचे थे और अंकित चौहान के परिजनों से मुलाकात की थी। उन्होंने दावा किया कि परिवार को सरकार की ओर से न्याय का भरोसा दिलाया गया था। सोम के मुताबिक, इसके अगले दिन पुलिस मुठभेड़ में हत्याकांड के आरोपी मारे गए, जबकि बदमाशों की गोली से दो पुलिसकर्मी घायल भी हुए।

 

उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के बाद अखिलेश यादव ने एनकाउंटर पर सवाल उठाए, जिस पर उन्होंने सपा प्रमुख को घेरा। सोम ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय पीड़ित परिवार और पुलिसकर्मियों के पक्ष को भी देखा जाना चाहिए।

 

‘पुलिस को जाति के चश्मे से देखना गलत’

पूर्व विधायक ने अखिलेश यादव के एसटीएफ को लेकर दिए गए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और समाज को जातीय आधार पर बांटने की कोशिश की जा रही है। सोम ने कहा कि पुलिस बल को किसी जाति विशेष के चश्मे से देखना उचित नहीं है और अपराध के खिलाफ कार्रवाई को जातीय राजनीति से जोड़ना गलत है।

 

सोम ने अखिलेश यादव को उनके कार्यकाल की घटनाओं की याद दिलाते हुए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की हत्या के मामलों का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय मारे गए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को कितना न्याय मिला।

 

‘अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी’

संगीत सोम ने साफ कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि अपराधियों को बचाने के लिए कोई कितनी भी कोशिश कर ले, सरकार अपराध के खिलाफ पीछे नहीं हटेगी।

 

उन्होंने अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी का नाम लेते हुए भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। सोम ने आरोप लगाया कि सपा नेतृत्व ने ऐसे लोगों के प्रति नरम रुख अपनाया, जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंकित चौहान मामले में पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई पर सवाल उठाना भी उसी राजनीतिक सोच का हिस्सा है।

 

यादव परिवार को लेकर भी अखिलेश पर हमला

जातिवाद के मुद्दे पर संगीत सोम ने अखिलेश यादव और यादव परिवार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को जातिवाद की बात करने से पहले अपने परिवार की राजनीतिक स्थिति पर नजर डालनी चाहिए।

 

सोम ने दावा किया कि यादव परिवार के कई सदस्य सांसद हैं और आरोप लगाया कि परिवार के लोगों को राजनीतिक पद मिलने के बावजूद PDA के नाम पर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने अखिलेश यादव, डिंपल यादव, आदित्य यादव, रामगोपाल यादव, धर्मेंद्र यादव और अक्षय यादव का नाम लेते हुए परिवारवाद और जातीय राजनीति के आरोप लगाए।

 

पुराने मामलों पर भी मांगा जवाब

सोम ने अखिलेश यादव के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें सत्ता में आने पर पुराने मामलों की जांच कराने की बात कही जाती है। उन्होंने मुजफ्फरनगर के गौरव-सचिन हत्याकांड और मथुरा में पुलिस अधिकारियों की हत्या का जिक्र करते हुए पिछली सरकार के दौरान हुई कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मिले न्याय पर सवाल खड़े किए।

 

उन्होंने कहा कि अखिलेश दावा कर रहें है कि उनकी सरकार आयेंगी तो वह न्याय दिलाने का काम करेंगे, जो सरकार को बदलने की मंशा रखते है उन्हें पहले यह भी बताना चाहिए कि उनके शासनकाल में गंभीर अपराधों के पीड़ित परिवारों को कितना न्याय मिला?

 

‘अपराधी अखिलेश से बचाने की गुहार लगा रहे’

संगीत सोम ने तंज कसते हुए कहा कि अपराधी अब अखिलेश यादव से बचाने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सरकार अपराधियों पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने दोहराया कि भाजपा सरकार में अपराधियों के खिलाफ जीरो टालरेंस नीति है, जिसके चलते अपराधियों के सफायें का अभियान आगे भी चलता रहेगा। 

 

सनातन पर टिप्पणी को लेकर भी साधा निशाना

सोम ने सनातन धर्म को लेकर भी अखिलेश यादव पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अध्यक्ष लगातार सनातन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाना बनाते हैं। कभी पोस्टर में चिलम के साथ मुख्यमंत्री को दिखाया जाता है, ये संत का अपमान है। संत का अपमान सीधेतौर पर सनातन समाज का अपमान है। इसी ऐसी छोटी सोच और टिप्पणियां कर वालों को समाज कभी भी स्वीकार नहीं करेगा।

 

‘चवन्नी’ वाले बयान का भी किया जिक्र

प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिर में संगीत सोम ने अखिलेश यादव के पुराने ‘चवन्नी’ वाले बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जिन्हें आज चवन्नी बताया जा रहा है, वही लोग आने वाले समय में अखिलेश यादव को ‘इकन्नी’ बनाने का काम करेंगे।

 

पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संगीत सोम ने अपराध, एनकाउंटर, जातीय राजनीति, परिवारवाद और सनातन के मुद्दे पर अखिलेश यादव को घेरा और कहा कि प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिश्केक में 26वें शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइज़ेशन (SCO) समिट में शामिल हुए। 

– पीएम मोदी ने SCO समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की।