इस दिन पूरी रात खुला रहेगा खजराना मंदिर, सवा लाख मोदक का भोग, 6 करोड़ के सोने के आभूषण से सजेंगे गजानन

इस दिन पूरी रात खुला रहेगा खजराना मंदिर, सवा लाख मोदक का भोग, 6 करोड़ के सोने के आभूषण से सजेंगे गजानन

Khajrana Temple

इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में हजारों लाखों श्रद्धालुओं की आस्‍था है। यहां रोजाना हजारों लोग दर्शन के लिए आते हैं। इंदौर का तो कोई भी नागरिक बगैर खजराना गणेश के दर्शन के अपना कोई नया काम शुरू नहीं करता। अब गणेश चतुर्थी पर यहां विशेष तौर पर तैयारी की जा रही है।

मंदिर में होने वाले आयोजनों, भगवान के श्रृंगार, सजावट, प्रसाद और भोग, लाइटिंग, भक्तों की दर्शन व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था सहित अन्य तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर परिसर में 80 से ज्यादा CCTV कैमरों से नजर रखी जाएगी। व्यवस्था के लिए चार थानों का पुलिस बल भी तैनात रहेगा। मंदिर प्रबंधन समिति के 30 सुरक्षा गार्ड यहां नियमित रूप से तैनात रहते हैं। गणेशोत्सव के दौरान इनकी संख्या बढ़ाकर 100 की जाएगी।

सवा लाख मोदकों का भोग : इस बार भी गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को सवा लाख मोदकों का भोग लगाया जाएगा। गणेशोत्सव का शुभारंभ 14 सितंबर को सुबह 10 बजे ध्वजा पूजन के साथ होगा। कलेक्टर एवं मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष शिवम वर्मा और निगम कमिश्नर एवं मंदिर के प्रशासक क्षितिज सिंघल ध्वजा पूजन करेंगे। सवा लाख मोदक बनाने का काम भी जल्द मंदिर परिसर में शुरू होगा।

रातभर होंगे गजानन के दर्शन : गणेशोत्सव से एक दिन पहले हरतालिका तीज को लेकर भी मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट ने बताया कि 13 सितंबर को हरतालिका तीज पर मंदिर रातभर भक्तों के दर्शन के लिए खुला रहेगा। यानी मंदिर 24 घंटे खुला रहेगा। पंडित अशोक भट्ट ने बताया कि गणेशोत्सव पर हर साल मंदिर में भगवान गणेश को सवा लाख मोदकों का भोग लगाया जाता है। इस साल भी सवा लाख मोदक भगवान को अर्पित किए जाएंगे। इसके अलावा 10 दिनों तक शाम की आरती के समय अलग-अलग प्रकार के 11 हजार लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। इसमें सोंठ, ड्रायफ्रूट, उड़द आदि के लड्डू शामिल होंगे।

6 करोड़ के स्वर्ण आभूषणों से श्रृंगार: गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश का रोजाना भव्य श्रृंगार किया जाएगा। भगवान को स्वर्ण आभूषण पहनाए जाएंगे। इन स्वर्ण आभूषणों की कीमत 6 करोड़ रुपए से ज्यादा है। आभूषणों को पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ मंदिर में लाया जाता है। इसके बाद भगवान गणेश को ये स्वर्ण आभूषण धारण कराए जाते हैं। यह श्रृंगार विशेष होता है। पूरे 10 दिनों तक भगवान के अलग-अलग स्वरूपों में श्रृंगार देखने को मिलेगा।

इंदौर में बारिश में भी पानी का संकट, अब भी चल रहे 350 टैंकर, बोरवेल भी सूख रहे, गर्मियों में क्या होगा हाल?

इंदौर में बारिश में भी पानी का संकट, अब भी चल रहे 350 टैंकर, बोरवेल भी सूख रहे, गर्मियों में क्या होगा हाल?

indore water crisis

  • 18 इंच बारिश के बाद भी सूखे हैं इंदौर के बोरवेल
  • हर साल जुलाई में बंद हो जाता है टैंकर से पानी सप्‍लाय
  • इस बार अगस्‍त में भी चल रहे पानी सप्‍लाय के लिए टैंकर
  • अगले साल गर्मी में क्‍या होगा इंदौर का हाल

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में इस बार मानसून सीजन के दौरान चिंताजनक स्थिति देखने को मिल रही है। शहर में करीब 18 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, इसके बावजूद भू-जल स्तर (Groundwater Level) में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। आलम यह है कि जो निजी टैंकर अमूल्य रूप से सिर्फ गर्मियों में संकट से निपटने के लिए चलाए जाते थे, वे इस बार अगस्त का महीना बीतने को होने के बावजूद शहर में पानी की सप्लाई में जुटे हुए हैं।

सामान्य तौर पर जुलाई की बारिश के बाद टैंकरों की जरूरत खत्म हो जाती है, लेकिन मौजूदा हालात ने नगर निगम और आम नागरिकों दोनों की नींद उड़ा दी है। बता दें कि कई इलाकों के बोरिंगों में भी भरपूर पानी नहीं आ रहा है और कई मल्टियों में अभी भी पानी की पूर्ति के लिए टैंकर मंगाने पड़ रहे हैं।

संकट के लिए तैयार रहे इंदौर: यदि सितंबर माह में भरपूर बारिश नहीं होती है तो फिर अगले साल शहरवासियों को जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है। शहर के बड़े हिस्से की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर तालाब में 13 फीट पानी है, जबकि तालाब की क्षमता 19 फीट है। अभी भी तालाब में छह फीट पानी की आवश्यकता है। शहर के बिलावली, पिपलियापाला और पिपलियाहाना तालाब भी आधे खाली हैं। पिपलियाहाना तालाब को भरने के लिए नगर निगम सड़कों पर बहने वाले पानी को पाइपों के जरिए चैनल से तालाब तक लाया, लेकिन कम वर्षा होने के कारण तालाब खाली है।पिछले साल अगस्त माह तक कई तालाब भर चुक थे और अतिरिक्त पानी तालाबों से चैनलों के जरिए बाहर निकाला गया था।

जुलाई तक हो जाता है वाटर रिचार्ज: बता दें कि सामान्य मानसून में जुलाई तक भू-जल स्तर रिचार्ज हो जाता है और बोरवेल अपनी क्षमता के अनुसार पानी देने लगते हैं। इस साल 18 इंच बारिश होने के बाद भी कई इलाकों में बोरवेल सूखने लगे हैं। कई निजी बोरिंग में भी पानी कम आने लगा है।

अब भी चल रहे निजी टैंकर: नगर निगम सीमा के अंतर्गत अभी भी लगभग 350 निजी टैंकर पानी सप्लाई के लिए संचालित हो रहे हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जल वितरण नेटवर्क और प्राकृतिक स्रोत दोनों दबाव में हैं। बारिश के दिनों में लगातार अच्छी मानसूनी गतिविधियों की कमी और भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन के कारण यह संकट और गहराया है।

गर्मियों में संकट लेगा विकराल रूप: अगर अगस्त में भी टैंकरों की आवश्यकता पड़ रही है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगामी गर्मी के मौसम में जल संकट कितना भीषण हो सकता है, इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। बता दें कि पिछले साल भी इंदौर में पानी का संकट गहराया था और निगम को कई टैंकर चलाने पडे थे।

भू-जल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) की विफलता: यह इस बात का भी प्रमाण है कि शहर में कंक्रीट का दायरा बढ़ने और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के सही ढंग से काम न करने के कारण बारिश का पानी जमीन के अंदर जाने के बजाय बहकर निकल जाता है।

वाटर हार्वेस्टिंग ऑडिट में बरतना होगी सख्ती : शहर की बड़ी कॉलोनियों, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और सरकारी इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अनिवार्यता की सख्त जांच हो। नर्मदा जल पाइपलाइन नेटवर्क में होने वाले लीकेज को तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि पानी की एक-एक बूंद बचाई जा सके। इसके साथ ही शहर के पारंपरिक तालाबों और बावड़ियों का गहरीकरण और सौंदर्यीकरण समय रहते पूरा किया जाए तो पानी के संकट से कुछ हद तक बचा जा सकता है।

हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

himalaya

संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन की एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि हिमालय क्षेत्र में भविष्य में ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा है। इसके चलते ना सिर्फ जलविद्युत ऊर्जा पर संकट छा जाएगा बल्कि नदियों के तटों के पास रहने वाले लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ सकते हैं। ALSO READ: क्या तिब्बत में आपदा के नुकसान को छिपा रहा है चीन?

यूएन की सहायक महासचिव कन्नी विग्नराजा ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि लाखों की संख्या में लोग इस खतरे से प्रभावित हो सकते हैं।  शोधकर्ताओं ने साल 2020 में नेपाल, चीन और भारत में 47 संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियर झीलों की पहचान की थी। बाद में अनुमान लगाया गया कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

 

कन्नी विग्नराजा ने कहा कि हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर फ्लड के साथ-साथ ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा भी बढ़ रहा है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के चलते ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार तेज हो गई है। ALSO READ: नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

 

नेपाल में पिछले हफ्ते विनाशकारी बाढ़ भी एक ग्लेशियर के कुछ हिस्सों के टूटकर गिरने की वजह से आई थी। इस बाढ़ में अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत होने की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल के 10 से अधिक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी इसकी चपेट में आए। इन परियोजनाओं की सुरंगों में भी बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें बचाए जाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन अभी तक कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली है। 

तमिलनाडु की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी TET पर शिक्षकों को राहत देने की उठी मांग

तमिलनाडु की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी TET पर शिक्षकों को राहत देने की उठी मांग

umang singhar

भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे समय से चल रहा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता का विवाद एक बार फिर सियासी मुद्दा बन गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर TET के मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। सिंघार ने तमिलनाडु की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी पुराने शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की मांग की है। 

 

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पूरे मुद्दें को उठाते हुए  कहा कि  TET की अनिवार्यता से प्रदेश में लंबे समय से सेवाएं दे रहे करीब 1.50 लाख शिक्षक और उनके परिवार प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा की अनिवार्यता का सीधा असर शिक्षकों की सेवा-निरंतरता, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों पर पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को शिक्षकों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस मामले में गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। 

 

नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में तमिलनाडु विधानसभा के 25 अगस्त 2026 के प्रस्ताव का हवाला दिया है। तमिलनाडु विधानसभा ने 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से स्थायी छूट देने तथा उनकी सेवा और पदोन्नति संबंधी हितों के संरक्षण की मांग की है। प्रस्ताव में केंद्र से शिक्षा का अधिकार अधिनियम में आवश्यक संशोधन करने और संबंधित दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह भी किया गया है।  इसी आधार पर सिंघार का तर्क है कि मध्यप्रदेश में भी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर शिक्षकों की स्थिति पर चर्चा की जाए और तमिलनाडु की तर्ज पर राहत का रास्ता निकाला जाए।

 

राहुल गांधी तक पहुंचा शिक्षकों का मुद्दा- वहीं TET को लेकर शिक्षकों के एक संगठन के  प्रतिनिधियों ने दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर उनसे दखल देने की मांग की है।संगठन ने राहुल गांधी से शिक्षकों के पक्ष में हस्तक्षेप करने और इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की मांग की। संगठन के अनुसार, राहुल गांधी ने शिक्षकों की बात सुनी और इस मुद्दे को उठाने का भरोसा दिया।  शिक्षक संगठनों का दावा है कि यह केवल मध्यप्रदेश का मामला नहीं है, बल्कि देशभर में करीब 25 लाख शिक्षक इससे प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में वे चाहते हैं कि TET को लेकर केंद्र स्तर पर भी स्पष्ट निर्णय लिया जाए।

 

TET पर शिक्षकों की क्या हैं मांगें?-TET की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांग है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से पूर्ण और स्थायी छूट दी जाए। संगठनों का तर्क है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय लागू नियमों और निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के आधार पर हुई थी। वर्षों तक सेवा देने के बाद अब उन पर नई पात्रता शर्त लागू करना उनके लिए नौकरी की सुरक्षा और भविष्य को लेकर गंभीर संकट पैदा कर रहा है।

 

शिक्षक संगठन केवल TET से छूट ही नहीं, बल्कि वरिष्ठता, पदोन्नति, सेवा-निरंतरता और अन्य सेवा लाभों का संरक्षण भी चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार परीक्षा आयोजित करती है तो लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग और व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए। मध्यप्रदेश में 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को लेकर यह मांग विशेष रूप से जोर पकड़ रही है। 

 

 

चांद या मंगल पर कैसा होगा इंसानों का आशियाना? भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने शेयर किया खास ‘BHEEM’ प्रोजेक्ट का वीडियो

चांद या मंगल पर कैसा होगा इंसानों का आशियाना? भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने शेयर किया खास 'BHEEM' प्रोजेक्ट का वीडियो

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भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने सोशल मीडिया पर 'BHEEM' (भारतीय रहने योग्य विस्तार योग्य अलौकिक आवास) प्रोजेक्ट का वीडियो साझा किया है। आईआईएससी बेंगलुरु की आलोक लैब में तैयार इस तकनीक से इंसानों के चंद्रमा या मंगल ग्रह पर रहने का रास्ता साफ हो सकता है। ALSO READ: Priya Adhikari कौन हैं , नेपाल बाढ़ के बीच 6 दिन में किए 100 रेस्क्यू मिशन, सैकड़ों जिंदगियां बचाईं

 

शुक्ला ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, बी.एच.ई.ई.एम. (B.H.E.E.M.) — भारतीय रहने योग्य, विस्तार योग्य, अलौकिक आवास (Bharatiya Habitable Expandable Extraterrestrial Habitat)।  जब हम रूस में अपनी ट्रेनिंग पूरी करके लौटे, तो हमने अपने अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण के भारतीय चरण की शुरुआत की। इसमें लॉन्च व्हीकल और ऑर्बिटल मॉड्यूल के सिस्टम को सीखना, साथ ही व्यापक शारीरिक और अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण शामिल था। लेकिन हमारे प्रशिक्षण का एक और, काफी अलग पहलू भी था—एकेडमिक रिसर्च।

 

उन्होंने कहा कि हमें भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण से संबंधित किसी विषय को चुनने, उसकी अपनी समझ को गहरा करने और, उम्मीद है कि, भारत के भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए उपयोगी हो सकने वाला कुछ योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। मैंने उस अंतरिक्ष यान से आगे की सोचना तय किया जिसमें हम उड़ान भरने की ट्रेनिंग ले रहे थे और इस बारे में सोचना शुरू किया कि उतरने के बाद मनुष्य कहाँ रह सकते हैं।

 

शुक्ला ने कहा कि मेरा शोध का क्षेत्र बाह्य अंतरिक्ष आवास (एक्सट्राटेरेस्ट्रियल हैबिटेट्स) था—ऐसी तकनीकें और अवधारणाएं जो अंततः इंसानों को पृथ्वी से परे रहने और काम करने की अनुमति दे सकती हैं। उस काम का परिणाम अंततः iisc bangalore की आलोक लैब में B.H.E.E.M. के रूप में सामने आया।

 

अनगिनत विशाल चुनौतियों को हल करना बाकी

भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि चंद्रमा, मंगल या अन्य बाह्य अंतरिक्ष गंतव्यों पर इंसानों की स्थायी उपस्थिति स्थापित होने से पहले अनगिनत विशाल चुनौतियों को हल करना बाकी है।

 

उन्होंने कहा कि विकिरण और अत्यधिक तापमान से लेकर जीवन रक्षक प्रणालियों, ऊर्जा, निर्माण और इस सीधे से सवाल तक कि—हम कहां रहेंगे? ठीक यही कारण है कि हमें आज से ही इस बारे में सोचना शुरू करने की आवश्यकता है। 

 

क्या होगा दूसरी दुनिया में आवास बनाने की दिशा में पहला कदम?

शुक्ला ने अनुसार, यदि हम चाहते हैं कि आज से 20 साल बाद इंसान पृथ्वी से परे रहें, तो इस पर काम आज से 20 साल बाद शुरू नहीं हो सकता। इसकी शुरुआत आज ही करनी होगी। किसी दूसरी दुनिया में आवास बनाने की दिशा में पहला कदम शायद उसकी पहली ईंट रखना न हो। यह केवल यह कल्पना करने की हिम्मत जुटाना हो सकता है कि वह आवास कैसा दिख सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी के जन सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर सेवा संकल्प अभियान चलाया जाएगा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी के जन सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर सेवा संकल्प अभियान चलाया जाएगा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल। अगामी 7 अक्टूबर को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जनसेवा के 25 साल पूरे हो रहे हैं। इन 25 सालों में विकास और जनकल्याण के जो अविस्मरणीय कार्य हुए हैं, उनकी जानकारी जन-जन तक पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से प्रारंभ होकर 1 माह यानी 17 अक्तूबर तक चलेगा। सेवा संकल्प अभियान विकसित भारत के संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इस अभियान के अंतर्गत अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अप्रैल से जून की तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.8% होने पर प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी तथा मंत्रि-परिषद की ओर से उनका अभिनंदन किया। पिछले साल इसी अवधि में यह दर 6.9% थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के परिणामस्वरूप देश सभी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सांस्कृतिक उत्थान और धार्मिक पर्यटन की जो दृष्टि प्रदान की, उसी के परिणामस्वरूप प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर हमारी गौरवशाली परम्परा और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने का कार्य आरंभ किया गया है। इस दिशा में प्रदेश में 243 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न संरक्षण और विकास कार्य जारी हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में विगत 7 अगस्त से आरंभ जन-विश्वास अभियान के अंतर्गत न देरी, न दूरी के सिद्धांत पर काम करते हुए राज्य सरकार अभियान को सुशासन के क्षेत्र में एक मील का पत्थर बनाने का प्रयास कर रही है। अभी तक उन्होंने स्वयं चार जिलों, छिंदवाड़ा, बड़वानी, टीकमगढ़ और बालाघाट का भ्रमण किया है। उन्होंने मंत्रियों से अभियान में निरंतर दौरा कर, विभिन्न योजनाओं तथा विकास गतिविधियों की मॉनीटरिंग करने और विभिन्न समुदायों से संवाद में बने रहने की बात कही।

LIVE: CBI करेगी दिशा सालियान मामले की जांच

LIVE: CBI करेगी दिशा सालियान मामले की जांच

disha salian

Latest News Today Live Updates in Hindi : बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिशा सालियान मामले में सीबीआई को FIR दर्ज करने का आदेश दिया। पल पल की जानकारी…

-बॉम्बे हाई कोर्ट ने CBI को दिशा सालियन की मौत के मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट का कहना है कि इस मामले की CBI जांच होनी चाहिए।

-दिशा के पिता सतीश सालियान की ओर से दायर उस याचिका पर यह फैसला आया है, जिसमें उन्होंने साल 2020 में हुई अपनी बेटी की मौत के कारणों और परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए थे। 

पति ने छोड़ा साथ, तीन बेटों की जिम्मेदारी… फिर भी नहीं टूटी बबीता, ठेले से दुकान तक पहुंची ‘आत्मनिर्भरता’ की कहानी

पति ने छोड़ा साथ, तीन बेटों की जिम्मेदारी… फिर भी नहीं टूटी बबीता, ठेले से दुकान तक पहुंची ‘आत्मनिर्भरता’ की कहानी

babita sharma

जिंदगी जब मुश्किलों से घिर जाती है तो अक्सर इंसान रास्ते तलाशना छोड़ देता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की बबीता शर्मा आज महिलाओं के लिए मिसाल बन गई है। नंदग्राम की रहने वाली बबीता ने मुश्किलों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया। पति ने जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ा तो उनके ऊपर तीन बेटों की जिम्मेदारी आ गई। आर्थिक हालात ने हर कदम पर परीक्षा ली, लेकिन बबीता ने हार नहीं मानी। सड़क किनारे पूजा सामग्री बेचने से शुरू हुआ सफर आज एक दुकान तक पहुंच चुका है। ALSO READ: गन्ने के खेत से विदेशी बाजार तक पहुंची यूपी की एक्सपोर्ट चेन, निर्यात नीति ने बदली तस्वीर

 

बबीता की यह कहानी अब सिर्फ गाजियाबाद की गलियों तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 137वें एपिसोड में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के लाभार्थियों का जिक्र करते हुए बबीता शर्मा का नाम लिया। पीएम मोदी ने बताया कि योजना के लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं हैं और लगभग 35 लाख महिलाएं इस योजना का लाभ लेकर अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं।
 

जब जिंदगी ने ली सबसे कठिन परीक्षा

कोविड काल वर्ष 2022 बबीता की जिंदगी में ऐसा मोड़ लेकर आया, जिसने उनके सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दीं। पति वेल्डिंग का काम करते है, लेकिन उन्होंने और बच्चों और बबीता की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया। ऐसे में तीन बेटों की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई। हालात बिगड़ने पर बबीता बच्चों को लेकर अपने मायके नंदग्राम आ गईं।

 

मायके में आकर तीन बच्चों को पढ़ाना और उनका भविष्य बनाना आसान नही था, जेब में पूंजी नहीं थी, लेकिन कुछ कर दिखाने का जज्बा जरूर था बबीता के पास। शुरूआती दौर में बबीता से बहुत कम पूंजी से सड़क किनारे ठेला लगाकर छोटा-मोटा सामान बेचना शुरू कर दिया, इसी ठेले पर पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री रखकर बच्चों का खर्च उठाया। ग्राहक बबीता के पास पूजा सामग्री के लिए आते, लेकिन पूरा सामान न मिलने पर वापस लौट जाते थे। बबीता व्यवसाय बढ़ाना चाहती थी, लेकिन आर्थिक तंगी सामने खड़ी हो जाती। यहीं से बबीता के संघर्ष का अगला अध्याय शुरू हुआ। ALSO READ: GPS से होगी गन्ना ढुलाई की लाइव ट्रैकिंग, 24 घंटे में चीनी मिल पहुंचेगा गन्ना, योगी सरकार का बड़ा डिजिटल बदलाव

 

10 हजार रुपये ने जगाई उम्मीद

वर्ष 2022 में किसी के माध्यम से बबीता को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया और उन्हें पहली बार 10 हजार रुपये का ऋण मिला।

 

यह पूंजी भले ही बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन बबीता के लिए यह उनके सपनों की पहली सीढ़ी थी। उन्होंने इस पैसे से अपने कारोबार को बढ़ाया। सड़क किनारे ठेले से शुरू हुआ काम धीरे-धीरे एक खोखे तक पहुंच गया।

 

बबीता ने समय से पहली ऋण राशि समय से चुकाई। इसके बाद उन्होंने दोबारा योजना के तहत आवेदन किया और उन्हें 20 हजार रुपये का ऋण मिला। बढ़ती पूंजी के साथ उनके कारोबार का विस्तार भी बढ़ता गया। उन्होंने तीसरी बार में 50 हजार का ऋण लिया, जिससे उसकी किस्मत के दरवाजे भी खुल गए।

 

ठेले से बाजार की दुकान तक

अब मेहनत रंग लाई। बबीता ने बाजार में किराये पर दुकान ली और पूजा सामग्री का कारोबार शुरू किया। जो काम कभी सड़क किनारे कुछ सामान के साथ शुरू हुआ था, वह अब एक पहचान बन चुका है।

 

यह बदलाव सिर्फ दुकान की चारदीवारी का नहीं था। बबीता के लिए यह आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत थी।

 

उनकी कहानी बताती है कि किसी महिला को अवसर और थोड़ी आर्थिक मदद मिल जाए तो वह न सिर्फ अपने परिवार को संभाल सकती है, बल्कि खुद रोजगार खड़ा कर दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।

 

‘मोदी जी मेरे लिए पिता और भाई जैसे हैं’

‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री द्वारा अपना नाम लिए जाने पर बबीता भावुक हैं। उनका कहना है कि जिस समय उनके सामने कोई रास्ता नहीं था, उस समय प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने उन्हें आगे बढ़ने का सहारा दिया।

 

बबीता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने लिए माता-पिता जैसा मानती हैं। उनका कहना है कि पीएम मोदी द्वारा ऐसी कल्याणकारी योजना ने आगे बढ़ने का अवसर दिया, उसी के कारण आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं। प्रधानमंत्री के मुंह से अपना नाम सुनना उनके लिए जिंदगी के सबसे खास पलों में से एक है। ALSO READ: स्वयं सहायता समूहों से जुड़े सवा करोड़ ग्रामीण परिवारों की बदली तकदीर

 

बबीता की सफलता पर गाजियाबाद को गर्व

बबीता शर्मा का नाम प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में आने के बाद गाजियाबाद प्रशासन में भी खुशी का माहौल है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने इसे पूरे जिले के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि बबीता की कहानी जिले की हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेगी।

 

मुख्यमंत्री की ओर से भी बबीता की सफलता की सराहना किए जाने की बात सामने आई है। प्रशासन का मानना है कि बबीता जैसी कहानियां सरकारी योजनाओं के उद्देश्य को जमीन पर साकार होते हुए दिखाती हैं।

 

‘एक छोटी शुरुआत भी बदल सकती है पूरी जिंदगी’

 

बबीता की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि संसाधन कम हो सकते हैं, लेकिन हौसला कम नहीं होना चाहिए।

 

एक महिला, जिसने कभी सड़क किनारे सामान बेचकर अपने बच्चों का भविष्य संभालने की कोशिश शुरू की थी, आज अपनी दुकान के जरिए आत्मनिर्भर जीवन जी रही है। उनका सफर उन लाखों महिलाओं के लिए उम्मीद है, जो आर्थिक परेशानियों के कारण अपने सपनों को रोक देती हैं।

 

बबीता ने साबित कर दिया है कि सरकारी योजना का लाभ जब मेहनत और हौसले से जुड़ता है, तो 10 हजार रुपये की मदद भी किसी की जिंदगी बदलने की शुरुआत बन सकती है।

 

जिला प्रशासन ने सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील की है, उन्होंने कहाकि की नागरिक जिलाधिकारी कार्यालय, डूडा, नगर निगम और विकास भवन से संपर्क करके योजना के लाभार्थी बन सकते है। वहीं महिलाओं की कल्याणकारी योजनाओं के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

राम मंदिर को आज मिल सकता है पहला CEO, 3 नामों का पैनल तैयार

राम मंदिर को आज मिल सकता है पहला CEO, 3 नामों का पैनल तैयार

ayodhya ram mandir ceo

अयोध्या राम मंदिर के CEO के लिए 3 नाम हुए शॉर्टलिस्ट कर लिए गए हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आज मंदिर के पहले CEO के नाम का एलान कर सकता है। सचिव पद पर भी आधिकारिक घोषणा हो सकती है। ट्रस्ट में 2 सदस्यों पद पर भी बुधवार को नियुक्ति की जा सकती है।

 

करीब दो माह चली चयन प्रक्रिया के बाद चयन समिति ने तीन अभ्यर्थियों का पैनल तैयार किया है। समिति ने मंगलवार को इन नामों को ट्रस्ट को सौंप दिया। अब समिति की सिफारिश के आधार पर ट्रस्ट नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा। कहा जा रहा है कि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजेश पांडेय का नाम सीईओ पद की दौड़ में सबसे आगे है। अब सभी की नजरें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर है। 

 

बैठक में शामिल होने के लिए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि, सदस्य शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद, सदस्य युगपुरुष स्वामी परमानंद अयोध्या पहुंच गए हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास, अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन, सदस्य महांत दिनेंद्रदास, पदेन सदस्य जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी भी अयोध्या में हैं।

 

राम मंदिर का CEO एक तरह से मंदिर के प्रशासनिक और मैनेजमेंट प्रमुख की भूमिका निभाएगा। ट्रस्ट नीति तय करेगा और CEO उस नीति को प्रभावी तरीके से लागू कराने की जिम्मेदारी संभालेगा।

होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का लगभग पूरा कंट्रोल? ट्रंप के दावे से मचा हड़कंप ; तेल के दाम चढ़े

होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का लगभग पूरा कंट्रोल? ट्रंप के दावे से मचा हड़कंप ; तेल के दाम चढ़े

strait of hormuz

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर अब अमेरिका का लगभग पूरा कंट्रोल है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी अर्थव्यवस्था क्रैश की ओर बढ़ रही है। हालांकि ईरान ने इसका खंडन किया है। ALSO READ: India-Russia Defence Deal : भारत को S-500 और Su-57 की पेशकश, रूस ने बढ़ाया रक्षा सहयोग का हाथ

 

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर अपनी पोस्ट में कहा,  'मैं ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश नहीं कर रहा हूं, जैसा कि ABC फेक न्यूज ने रिपोर्ट किया है. मुझे जरा भी परवाह नहीं है 

 

कि वे एक बेकार समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं या नहीं। मुझे हमारी वर्तमान स्थिति कहीं बेहतर लगती है, जिसमें होर्मुज पर लगभग पूर्ण नियंत्रण है और उनकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद हो रही है।

 

गौरतलब है कि ट्रंप इससे पहले भी कई बार दावा कर चुके हैं कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को खारिज किया है और कहा है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नियंत्रण अभी भी उसके पास है। ALSO READ: Trump का खर्ग द्वीप पर बड़ा दावा, कहा- 'पूरी तरह तबाह'; होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फिर आमने-सामने अमेरिका-ईरान

 

अमेरिका का चाबहार और केशम द्वीप पर हमला

अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान में चाबहार और केशम द्वीप समेत कई अहम ठिकानों पर मिसाइलों से हमला किया। IRGC के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई होर्मुज में कमर्शियल शिप और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर ईरान की ओर से किए गए हालिया हमलों के जवाब में किया गया। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ईरान ने इस हमले का जवाब दिया, तो उसे और भी सख्त परिणाम भुगतने होंगे।

 

कच्चा तेल 96 डॉलर पार

दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से कच्चे तेल के दाम फिर आसमान पर पहुंच गए। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया तो WTI क्रूड भी 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है। इंडियन बास्केट में कच्चे तेल की कीमत 90.53 डॉलर प्रति बैरल हो गई।