
जिंदगी जब मुश्किलों से घिर जाती है तो अक्सर इंसान रास्ते तलाशना छोड़ देता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की बबीता शर्मा आज महिलाओं के लिए मिसाल बन गई है। नंदग्राम की रहने वाली बबीता ने मुश्किलों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया। पति ने जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ा तो उनके ऊपर तीन बेटों की जिम्मेदारी आ गई। आर्थिक हालात ने हर कदम पर परीक्षा ली, लेकिन बबीता ने हार नहीं मानी। सड़क किनारे पूजा सामग्री बेचने से शुरू हुआ सफर आज एक दुकान तक पहुंच चुका है। ALSO READ: गन्ने के खेत से विदेशी बाजार तक पहुंची यूपी की एक्सपोर्ट चेन, निर्यात नीति ने बदली तस्वीर
बबीता की यह कहानी अब सिर्फ गाजियाबाद की गलियों तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 137वें एपिसोड में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के लाभार्थियों का जिक्र करते हुए बबीता शर्मा का नाम लिया। पीएम मोदी ने बताया कि योजना के लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं हैं और लगभग 35 लाख महिलाएं इस योजना का लाभ लेकर अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं।
जब जिंदगी ने ली सबसे कठिन परीक्षा
कोविड काल वर्ष 2022 बबीता की जिंदगी में ऐसा मोड़ लेकर आया, जिसने उनके सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दीं। पति वेल्डिंग का काम करते है, लेकिन उन्होंने और बच्चों और बबीता की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया। ऐसे में तीन बेटों की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई। हालात बिगड़ने पर बबीता बच्चों को लेकर अपने मायके नंदग्राम आ गईं।
मायके में आकर तीन बच्चों को पढ़ाना और उनका भविष्य बनाना आसान नही था, जेब में पूंजी नहीं थी, लेकिन कुछ कर दिखाने का जज्बा जरूर था बबीता के पास। शुरूआती दौर में बबीता से बहुत कम पूंजी से सड़क किनारे ठेला लगाकर छोटा-मोटा सामान बेचना शुरू कर दिया, इसी ठेले पर पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री रखकर बच्चों का खर्च उठाया। ग्राहक बबीता के पास पूजा सामग्री के लिए आते, लेकिन पूरा सामान न मिलने पर वापस लौट जाते थे। बबीता व्यवसाय बढ़ाना चाहती थी, लेकिन आर्थिक तंगी सामने खड़ी हो जाती। यहीं से बबीता के संघर्ष का अगला अध्याय शुरू हुआ। ALSO READ: GPS से होगी गन्ना ढुलाई की लाइव ट्रैकिंग, 24 घंटे में चीनी मिल पहुंचेगा गन्ना, योगी सरकार का बड़ा डिजिटल बदलाव
10 हजार रुपये ने जगाई उम्मीद
वर्ष 2022 में किसी के माध्यम से बबीता को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया और उन्हें पहली बार 10 हजार रुपये का ऋण मिला।
यह पूंजी भले ही बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन बबीता के लिए यह उनके सपनों की पहली सीढ़ी थी। उन्होंने इस पैसे से अपने कारोबार को बढ़ाया। सड़क किनारे ठेले से शुरू हुआ काम धीरे-धीरे एक खोखे तक पहुंच गया।
बबीता ने समय से पहली ऋण राशि समय से चुकाई। इसके बाद उन्होंने दोबारा योजना के तहत आवेदन किया और उन्हें 20 हजार रुपये का ऋण मिला। बढ़ती पूंजी के साथ उनके कारोबार का विस्तार भी बढ़ता गया। उन्होंने तीसरी बार में 50 हजार का ऋण लिया, जिससे उसकी किस्मत के दरवाजे भी खुल गए।
ठेले से बाजार की दुकान तक
अब मेहनत रंग लाई। बबीता ने बाजार में किराये पर दुकान ली और पूजा सामग्री का कारोबार शुरू किया। जो काम कभी सड़क किनारे कुछ सामान के साथ शुरू हुआ था, वह अब एक पहचान बन चुका है।
यह बदलाव सिर्फ दुकान की चारदीवारी का नहीं था। बबीता के लिए यह आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत थी।
उनकी कहानी बताती है कि किसी महिला को अवसर और थोड़ी आर्थिक मदद मिल जाए तो वह न सिर्फ अपने परिवार को संभाल सकती है, बल्कि खुद रोजगार खड़ा कर दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।
‘मोदी जी मेरे लिए पिता और भाई जैसे हैं’
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री द्वारा अपना नाम लिए जाने पर बबीता भावुक हैं। उनका कहना है कि जिस समय उनके सामने कोई रास्ता नहीं था, उस समय प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने उन्हें आगे बढ़ने का सहारा दिया।
बबीता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने लिए माता-पिता जैसा मानती हैं। उनका कहना है कि पीएम मोदी द्वारा ऐसी कल्याणकारी योजना ने आगे बढ़ने का अवसर दिया, उसी के कारण आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं। प्रधानमंत्री के मुंह से अपना नाम सुनना उनके लिए जिंदगी के सबसे खास पलों में से एक है। ALSO READ: स्वयं सहायता समूहों से जुड़े सवा करोड़ ग्रामीण परिवारों की बदली तकदीर
बबीता की सफलता पर गाजियाबाद को गर्व
बबीता शर्मा का नाम प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में आने के बाद गाजियाबाद प्रशासन में भी खुशी का माहौल है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने इसे पूरे जिले के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि बबीता की कहानी जिले की हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेगी।
मुख्यमंत्री की ओर से भी बबीता की सफलता की सराहना किए जाने की बात सामने आई है। प्रशासन का मानना है कि बबीता जैसी कहानियां सरकारी योजनाओं के उद्देश्य को जमीन पर साकार होते हुए दिखाती हैं।
‘एक छोटी शुरुआत भी बदल सकती है पूरी जिंदगी’
बबीता की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि संसाधन कम हो सकते हैं, लेकिन हौसला कम नहीं होना चाहिए।
एक महिला, जिसने कभी सड़क किनारे सामान बेचकर अपने बच्चों का भविष्य संभालने की कोशिश शुरू की थी, आज अपनी दुकान के जरिए आत्मनिर्भर जीवन जी रही है। उनका सफर उन लाखों महिलाओं के लिए उम्मीद है, जो आर्थिक परेशानियों के कारण अपने सपनों को रोक देती हैं।
बबीता ने साबित कर दिया है कि सरकारी योजना का लाभ जब मेहनत और हौसले से जुड़ता है, तो 10 हजार रुपये की मदद भी किसी की जिंदगी बदलने की शुरुआत बन सकती है।
जिला प्रशासन ने सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील की है, उन्होंने कहाकि की नागरिक जिलाधिकारी कार्यालय, डूडा, नगर निगम और विकास भवन से संपर्क करके योजना के लाभार्थी बन सकते है। वहीं महिलाओं की कल्याणकारी योजनाओं के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है।