सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली हाईकोर्ट में बड़ा झटका, फटकार के बाद वापस ली याचिका

सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली हाईकोर्ट में बड़ा झटका, फटकार के बाद वापस ली याचिका

ashutoh ranka and saurabh das

दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई। सुनवाई के दौरान अदालत ने बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और शांति व्यवस्था से जुड़े कई सवाल उठाए। फटकार के बाद याचिकाकर्ताओं के वकील ने अपनी याचिका वापस लेने की गुजारिश की, जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया। ALSO READ: कौन हैं साड़ी पहनकर AK-47 चलाने वाली IPS अंकिता शर्मा, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल ने उठाए गंभीर सवाल

 

अदालत ने साफ किया कि याचिका वापस लिए जाने के दौरान मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी गई है। इसके साथ ही, वकीलों को सलाह दी गई कि वे याचिका वापस लेकर आज होने वाली अन्य कार्यवाहियों का इंतजार कर सकते हैं।

 

‘वे Gen Z नहीं हैं…’

सुनवाई के दौरान जज ने सौरव दास और आशुतोष रांका की उम्र के बारे में पूछा। वकील ने बताया कि सौरव दास 27 साल के और आशुतोष रांका 31 साल के हैं। इस पर जज ने कहा कि “वे Gen Z नहीं हैं।” इसके बाद जज ने मिलेनियल्स और Gen Z की उम्र के अंतर को लेकर भी चर्चा की। ALSO READ: अभिजीत दीपके का बड़ा बयान, CJP के प्रोटेस्‍ट पर लगेगा ब्रेक, जानिए क्‍यों लिया यह फैसला?

 

प्रदर्शन और लोकतंत्र पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

अदालत ने शांति भंग की आशंका और विरोध प्रदर्शन के अधिकारों पर बात करते हुए कहा कि प्रदर्शन करने का अधिकार सभी को है, इसमें कोई संदेह नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी जोड़ा: जब मजिस्ट्रेट के सामने शांति भंग होने की आशंका का सवाल आता है, तो प्रदर्शनकारियों की पहचान, उनकी मंशा और वे जीवन में क्या करते हैं, यह देखना जरूरी हो जाता है।

अदालत ने कहा कि अगर प्रदर्शन का मकसद सत्ता में बदलाव लाना है, तो लोकतंत्र में ऐसा बदलाव केवल चुनाव के जरिए होता है। ऐसे मामलों में प्रदर्शनकारियों की मंशा और उनके काम के सवाल अहम हो जाते हैं। कोर्ट ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आप अदालत को ऐसी बहस में उलझा रहे हैं, जिसका नतीजा अंत में आपके पक्ष में न भी जाए।

 

बॉन्ड उल्लंघन और पुलिस की हिरासत पर सवाल

मामले में 11 अक्टूबर को भरे गए बॉन्ड और उसकी शर्तों के उल्लंघन को लेकर भी चर्चा हुई। हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति दोबारा बॉन्ड तोड़ता है, तो क्या अधिकारियों को उससे अधिक सख्त शर्तें तय करने का अधिकार नहीं है? वहीं, याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि पुलिस ने दोनों की हिरासत बढ़ाने के लिए फिर से अर्जी दी है। इस पर ASG ने स्पष्ट किया कि दोनों को न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद आज SEM कोर्ट (मंदिर मार्ग) में पेश किया जाएगा। हाईकोर्ट ने अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दाखिल करने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्या आप दो जमानती पेश नहीं कर सकते?

 

अदालत ने यह भी कहा कि डीनोटिफिकेशन के बाद दोनों जंतर-मंतर गए थे। कोर्ट ने कहा कि डीनोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और उस पर कोई रोक नहीं लगी है।

 

क्या है पूरा मामला?

CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। आज दोपहर दो बजे दोनों को मंदिर मार्ग स्थित SEM कोर्ट में पेश किया जाना है। 

कॉजपा नेताओं की रिहाई की मांग पर ओडिशा भाजपा ने नवीन पटनायक को घेरा

Giriraj Singh

ओडिशा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के दो नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग करने को लेकर बीजू जनता दल (बीजद) प्रमुख नवीन पटनायक पर राजनीतिक लाभ के लिए देश में ‘‘बांग्लादेश जैसी स्थिति’’ पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

भाजपा ने मंगलवार को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि पटनायक ‘‘सत्ता परिवर्तन’’ की कोशिशों का समर्थन कर रहे हैं।

पटनायक ने कॉजपा नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई की मांग की थी। दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर की ओर मार्च निकालने के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद से न्यायिक हिरासत में रखा गया है।

नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद कॉजपा के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने वाले पटनायक ने कहा था कि प्रतिबंधित क्षेत्र में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए इतनी लंबी अवधि तक हिरासत में रखना उचित नहीं है।

इस पर भाजपा ने कहा पटनायक अपनी राजनीति चमकाने के लिए देश में बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं। पार्टी ने पटनायक पर उन गतिविधियों का समर्थन करने का भी आरोप लगाया, जिन्हें उसने ‘‘सत्ता परिवर्तन’’ की कोशिश बताया।

भाजपा ने कहा आप (पटनायक) 24 साल तक ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे और सत्ता से बाहर हुए अभी बमुश्किल 24 महीने हुए हैं, लेकिन आपने सत्ता परिवर्तन जैसी गतिविधियां शुरू कर दी हैं? अराजक तत्वों और भारत-विरोधी गतिविधियों में शामिल विदेशी धन से पोषित ताकतों का समर्थन करना, जो बांग्लादेश जैसी हिंसक सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रही हैं, आपके इतिहास को देखते हुए हैरान करने वाला नहीं है। आपने राज्य में हजारों अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को बसने दिया। आपने न केवल उन्हें मतदाता बनने दिया, बल्कि अब आप एसआईआर प्रक्रिया का भी विरोध कर रहे हैं।

भाजपा ने कहा कि ओडिशा के लोग हमेशा से शांतिप्रिय रहे हैं और भारत की संप्रभुता का सम्मान करते आए हैं। पार्टी ने कहा हमारे देश की संप्रभुता अस्थायी राजनीतिक प्रचार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। दूसरों के इशारे पर चलना बंद करें।

भाजपा प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने पटनायक की आलोचना करते हुए कहा कि बीजद प्रमुख को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तरह प्रचार पाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

बिस्वाल ने कहा भारत एक लोकतंत्र है, भीड़तंत्र नहीं! कॉजपा नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को शांति भंग होने और सार्वजनिक शांति व्यवस्था बाधित होने की आशंका के आधार पर एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा था।

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उन्होंने कहा नवीन बाबू उच्चतम न्यायालय की ओर राहुल गांधी के मार्च के तरीके को अपनाते हुए न्यायिक व्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। किसी पूर्व मुख्यमंत्री से इस तरह के आचरण की उम्मीद नहीं की जाती। हम भारत में फ्रांस, स्पेन, बेल्जियम और इटली जैसी भीड़तंत्र की स्थिति और सड़कों पर अशांति फैलने का इंतजार नहीं कर सकते।

भाजपा की ये टिप्पणियां पटनायक की उस पोस्ट के बाद आईं, जिसमें उन्होंने दास और रांका की तत्काल रिहाई की मांग की थी।

पटनायक ने ‘एक्स’ पर लिखा था जय हिंद। #आशुतोष रांका और #सौरव दास की न्यायिक हिरासत की तत्काल समीक्षा की जानी चाहिए और उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। प्रतिबंधित क्षेत्र में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए, इतनी लंबी अवधि तक हिरासत में रखना उचित नहीं है। न्यायपालिका और कार्यपालिका को यह सुनिश्चित करने के लिए आगे आना चाहिए कि देश के युवाओं का कानून के शासन और संवैधानिक अधिकारों से विश्वास न उठे।

कॉजपा प्रमुख अभिजीत दीपके ने दास और रांका को समर्थन देने के लिए बीजद प्रमुख का आभार जताया।

इस बीच, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा कॉजपा नेताओं के खिलाफ दर्ज दो मामलों की जांच करेगी। दूसरा मामला, जो कथित तौर पर दास और रांका के जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश करने से जुड़ा है, सोमवार को अपराध शाखा को सौंप दिया गया था।

पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर को दास, रांका, अजिंक्य शिंदे और कॉजपा के 11 अन्य सदस्य कथित तौर पर निजी परिसर से होकर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के बाद जंतर-मंतर पहुंचे थे। इससे पहले जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की अधिसूचित सूची से हटाया जा चुका है।

वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और उन्हें रोकने की कोशिश की। सभी 14 लोगों को हिरासत में लिया गया और दो प्राथमिकी दर्ज की गईं।

शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बंधपत्रों का कथित तौर पर उल्लंघन करने के मामले में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 14 अक्टूबर को दास और रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। सोमवार को उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई।

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बंगाल की खाड़ी में बन रहा लो प्रेशर, दक्षिण में भारी बारिश तो उत्तर भारत में महसूस होने लगी ठंड

बंगाल की खाड़ी में बन रहा लो प्रेशर, दक्षिण में भारी बारिश तो उत्तर भारत में महसूस होने लगी ठंड

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Weather Update 21 October : उत्तर पूर्वी मानसून की वजह से दक्षिण भारत में भारी बारिश का दौर जारी है। दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे तमिलनाडु तट के ऊपर अगले 24 घंटों के दौरान निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। उत्तर भारत में हल्की ठंड बढ़ रही है और पहाड़ी इलाकों में ठंड बढ़ने के संकेत हैं। 

 

पिछले 24 घंटों में तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश तथा लक्षद्वीप में तेज बारिश हुई। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में भी गिरा पानी। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी कई इलाकों में बारिश दर्ज की गई। 

 

इन राज्यों में बारिश का अलर्ट?

तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भारी से बहुत भारी बारिश (21-22 अक्टूबर तक व्यापक, उसके बाद भी जारी)। गरज-चमक और तेज हवाएं (40-60 किमी/घंटा तक)। चेन्नई और आसपास स्कूल छुट्टी भी घोषित हुई।
 

केरल और माहे में 26 अक्टूबर तक भारी बारिश की संभावना है। कर्नाटक में 21-24 अक्टूबर तक भारी बारिश का अलर्ट है। तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा और तेलंगाना: 21 अक्टूबर को भारी बारिश की संभावना। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में भारी बारिश का अलर्ट है।

 

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश नागालैंड और मणिपुर में मध्यम से छिटपुट बारिश हो सकती है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के मैदानी इलाकों में ज्यादातर साफ या छिटपुट बादल/हल्की बारिश की संभावना है।

 

उत्तर भारत में बढ़ी ठंड

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों जैसे दिल्ली, यूपी, बिहार, राजस्थान आदि स्थानों पर सुबह-शाम हल्की ठंड महसूस हो रही है। तापमान गिर रहा है। पहाड़ी राज्यों (हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाके) में ठंड ज्यादा है। उत्तराखंड और हिमाचल के ऊंचे इलाकों में कहीं-कहीं हल्की बारिश/बर्फबारी हो सकती है। जम्मू-कश्मीर/लद्दाख में 23-25 अक्टूबर के आसपास छिटपुट गतिविधि का जिक्र है।

कॉजपा के नेताओं ने न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका वापस ली

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) द्वारा उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने को चुनौती के लिए उच्च न्यायालय में दायर याचिका बुधवार को वापस ले ली।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कॉजपा के सह-संयोजकों की ओर से पेश वकील से कहा कि वे विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष बुधवार को होने वाली सुनवाई का नतीजा देखें और यदि उनकी शिकायत बरकरार रहती है तो अपीलीय अदालत का रुख करें।

न्यायाधीश ने दास और रांका को याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

अदालत ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी की कि इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर करना उचित कानूनी उपाय नहीं है।

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कॉजपा के नेताओं ने दशहरा की छुट्टियों के कारण बंद उच्च न्यायालय में तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था, जिसके बाद अदालत ने मामले पर सुनवाई की।

दास और रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसके तहत उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई थी।

दास और रांका को 13 अक्टूबर को उस समय हिरासत में लिया गया था, जब उन्होंने जंतर मंतर में घुसने के लिए कथित तौर पर बंद फाटक को फांदा था। दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

मंदिर मार्ग थाने में नवनियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने सोमवार को दोनों को अपने समक्ष पेश किए जाने के बाद उनकी न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ाने का आदेश दिया था।

दास और रांका ने कॉजपा के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज लहराया था और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए थे। इसके बाद उन्हें 13 अक्टूबर को हिरासत में लेकर एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया था।

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मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग में 20 हजार पदों पर होगी भर्ती, बोले सीएम डॉ मोहन यादव, 950 से अधिक लोगों को दिए अनुकंपा नियुक्ति पत्र

मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग में 20 हजार पदों पर होगी भर्ती, बोले सीएम डॉ मोहन यादव, 950 से अधिक लोगों को दिए अनुकंपा नियुक्ति पत्र

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित अनुकंपा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में सहभागिता की। भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित इस कार्यक्रम का सीएम डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग में 20 हजार नए पदों पर भर्ती होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों के लिए 200 नए सांदीपनि विद्यालय भवन मंजूर किए जाते हैं। जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत 200 सांदीपनि विद्यालय भवनों का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत भी 200 नए विद्यालय भवनों का निर्माण होगा। उन्होंने उन्होंने कार्यक्रम में  950 से अधिक पात्र लोगों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए। 

 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शासकीय नौकरी करते हुए किसी के असमय दुनिया से चले जाना बड़ा कष्टकारी समय होता है। परिवार सदस्य की कमी और उसके माध्यम से आय में रुकावट भी आती है। यह एक प्रकार से परिवार के ऊपर दु:खों के पहाड़ टूटने जैसा है। मुश्किल हालात में यह परिवार राज्य सरकार के लिए एक परिवार की तरह है। उन्होंने कहा कि जीवन में जन्म और मृत्यु नियति है, जिसे कोई नहीं रोक सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से आज 954 अधिकारी-कर्मचारियों को अनुकम्पा नियुक्ति देने के साथ उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत भी किया गया है। यह सभी के लिए प्रेरणा पुंज की तरह काम करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यही समय है, सही समय है। जब हम व्यवस्थाओं और भावनाओं का तालमेल करते हुए अपने कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन करें।

 

परिवारों का ध्यान रखना हमारी प्राथमिकता-सीएम डॉ. यादव ने कहा कि जो आज दुनिया से चले गए, उसका हमें दु:ख है, लेकिन सरकार ने त्यौहारों के मौसम में अनुकम्पा नियुक्ति के कार्य को प्राथमिकता से लिया है। परिवार में आर्थिक रूप से सुख संपन्नता हो, तभी आनंद से त्यौहार मनता है। हम अपनी जिम्मेदारियों को शब्दों की वेदी पर नहीं चढ़ा सकते हैं, इसमें निर्णयों की प्रतिबद्धता होनी चाहिए। आज जिन्हें नियुक्ति दी गई है, उनमें 661 सहायक ग्रेड-3, 31 प्राथमिक शिक्षक और 262 चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक तक बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए कार्य कर रहा है। अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त करने वाले सभी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी को अच्छे से निभाएंगे।

 

स्कूलों की बदल गई तस्वीर-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्कूल शिक्षा व्यवस्था में शासकीय सांदीपनि विद्यालय एक क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आए हैं। प्रदेश में वर्ष 2002-03 तक स्कूल शिक्षा का बजट 400 करोड़ के अंदर रहता था, लेकिन हमारी सरकार की प्रतिबद्धता के बलबूते यह बजट 38 हजार करोड़ तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में अधोसंरचना, आधुनिक लैब, खेल गतिविधियां सहित उच्च गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्कूल शिक्षा विभाग हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में 369 विद्यालय भवनों का निर्माण एवं लोकार्पण किया गया है। इसके साथ ही आज 200 नए विद्यालय भवनों को भी मंजूरी दी गई है। वहीं, जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत भी 200 सांदीपनि विद्यालय भवनों का निर्माण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी भी भविष्य में निकलने वाली शासकीय भर्तियों में शामिल हो सकते हैं। राज्य सरकार ने अब तक 85 हजार से अधिक शासकीय पदों पर युवाओं को नौकरी प्रदान की है। इनमें 15 हजार पद स्कूल शिक्षा के थे, अब 20 हजार पदों पर नए सिरे से भर्ती शुरू होने वाली है। प्रदेशभर में 1 लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया, इससे विभागों में पद रिक्त हुए, जिन्हें भरने की प्रक्रिया जारी है। अभी अनुकम्पा नियुक्ति के 350 पद शेष है, साल के अंत तक इन पर नियुक्ति दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए हर वर्ष डीपीसी की प्रक्रिया चलती रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल से पढ़ाई कर निकलने वाले बच्चों को नीट की तैयारी के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। प्रदेश सरकार ने मेधावी विद्यार्थियों को 1 लाख 35 हजार से अधिक लैपटॉप वितरित किए हैं। बोर्ड परीक्षाओं में स्कूल टॉपर बच्चों को स्कूटी की सौगात भी मिली है। कई बच्चों ने लैपटॉप और स्कूटी दोनों के पुरस्कार प्राप्त किए हैं। 

 

हर समय श्रेष्ठ कार्य करने का प्रयास कर रही राज्य सरकार-स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हमारी सरकार प्रतिदिन श्रेष्ठ कार्य करने का प्रयास करती है। आज स्कूल शिक्षा विभाग में के कार्यरत 950 से अधिक कर्मचारियों के असमय निधन के बाद उनके योग्य परिवारजन को अनुकम्पा नियुक्ति दी गई है। इनमें 655 सहायक ग्रेड-3, 26 प्राथमिक शिक्षक और 262 चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरगामी सोच के बिना यह कार्य संभव नहीं था। लेकिन, जब पदोन्नति का रास्ता खुला तो विभागों में पद रिक्त हुए। यह अनुकम्पा नियुक्ति एक प्रकार से आपके परिजन के आशीर्वाद की तरह है, जो अब इस दुनिया में नहीं है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सामान्य भर्ती, पदोन्नति और अनुकम्पा नियुक्ति को प्राथमिकता प्रदान करते हैं। प्रदेश में शिक्षकों को क्रमोन्नति का लाभ भी मिला है। नई भर्तियों के साथ ही सालों से लंबित शिक्षकों की समस्याओं को दूर करने का कार्य किया है। राज्य सरकार प्रत्येक शिक्षक के सम्मान और बच्चों को अवसर उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ काम कर रही है। पिछले तीन माह में 1500 से अधिक पेंशन प्रकरणों का निराकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी संवेदनशील सरकार लगातार प्रदेशवासियों के हितों की रक्षा करती है।

दिल्ली से लेकर पेरिस तक क्यों सड़कों पर उतर रही है Gen-Z पीढ़ी? क्या कोई पैटर्न है या वैश्विक साजिश?

दिल्ली से लेकर पेरिस तक  क्यों सड़कों पर उतर रही है Gen-Z पीढ़ी? क्या कोई पैटर्न है या वैश्विक साजिश?

Gen-Z Protests Youth Unrest 2026

Gen-Z Protests Youth Unrest 2026: अक्टूबर 2026 में यूरोप के कई बड़े देश एक बार फिर युवा आक्रोश की चपेट में हैं। फ्रांस, इटली, अल्बानिया, स्पेन, पुर्तगाल और बेल्जियम जैसे विकसित और विकासशील देशों में Gen-Z (लगभग 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी) के छात्र और युवा बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतर आए हैं।

फ्रांस में सितंबर 2026 से शुरू हुए छात्र प्रदर्शन अब केवल शिक्षा या फीस तक सीमित नहीं रहे, बल्कि महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं की खस्ताहाली और बढ़ती सामाजिक असमानता के खिलाफ एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स (BBC और CNN) के अनुसार, हाल ही में फ्रांस के विभिन्न शहरों में एक ही दिन में 5.5 लाख से ज्यादा युवा सड़कों पर उतरे।

उधर इटली में “Italia in Piazza” आंदोलन के तहत युवा महंगाई और रहने के लिए घर न मिलने (Housing Crisis) के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, तो अल्बानिया में छात्र “Flamingo” आंदोलन के बैनर तले सीधे प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

सवाल उठता है कि आखिर अचानक पूरी दुनिया में डिजिटल स्क्रीन पर व्यस्त रहने वाली ‘जेन-जी’ पीढ़ी सड़कों पर क्यों आ गई है? क्या यह केवल उनका आर्थिक असंतोष है, या इसके पीछे कोई गहरा वैश्विक पैटर्न (Global Pattern) या साजिश काम कर रही है?

आर्थिक तंगी, महंगाई और ‘हाउसिंग क्राइसिस‘ (The Economic Squeeze)

2020 के बाद के भू-राजनीतिक तनावों, ईंधन संकट और लगातार बढ़ती महंगाई ने युवाओं के भविष्य पर सबसे गहरा आघात किया है।

  • किराए और घर की पहुंच से दूरी : पेरिस, रोम, मैड्रिड और ब्रुसेल्स जैसे यूरोपीय शहरों में मकानों का किराया और कीमतें इतनी बढ़ चुकी हैं कि एक औसत युवा अपनी पहली नौकरी के वेतन से खुद का घर या कमरा भी नहीं ले सकता।
  • बेरोजगारी और घटते अवसर : पारंपरिक डिग्रियों की घटती उपयोगिता और ऑटोमेशन/एआई (AI) के बढ़ते असर के कारण अच्छी नौकरियों के अवसर सीमित हो गए हैं, जिससे युवाओं में भारी निराशा है।

‘लीडरलेस प्रोटेस्ट‘ (Leaderless Movement) का नया पैटर्न

अगर 1968 के छात्र आंदोलनों या 1970 के दशक के जेपी आंदोलन से आज की तुलना करें, तो 2026 के Gen-Z प्रदर्शनों में एक अनोखा पैटर्न देखने को मिल रहा है:

  • डिजिटल एकजुटता : ये आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल या पारंपरिक ट्रेड यूनियन द्वारा प्रायोजित नहीं हैं। इन्हें टेलीग्राम, सिग्नल और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर गुमनाम हैंडल और हैशटैग द्वारा मिनटों में असेंबल किया जाता है।
  • त्वरित लामबंदी : किसी एक मुद्दे (जैसे फीस वृद्धि या प्रशासनिक बयान) के सामने आते ही हजारों युवा बिना किसी बड़े नेता के आदेश के अचानक किसी भी चौराहे पर एकत्रित हो जाते हैं।

क्या कोई ‘वैश्विक साजिश‘ (Conspiracy) है या केवल एक जैसा गुस्सा?

जब एक ही समय में महाद्वीपों के पार (यूरोप के कई देशों से लेकर दक्षिण एशिया के देशों तक) युवा सड़कों पर उतरते हैं, तो ‘वैश्विक साजिश’ (Foreign Hand/Conspiracy Theories) के दावे सामने आने लगते हैं।

  • साजिश का तर्क : कई राजनीतिक विश्लेषकों और सत्तारूढ़ सरकारों का आरोप रहता है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय दबाव समूह, गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और बाहरी ताकतें सोशल मीडिया एल्गोरिदम का इस्तेमाल करके अलग-अलग देशों में सरकारों को अस्थिर करने के लिए युवाओं का इस्तेमाल कर रही हैं।
  • वास्तविक पैटर्न (The Structural Pattern): हालांकि, बहुसंख्यक समाजशास्त्रियों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह कोई साजिश नहीं, बल्कि एक जैसी वैश्विक परिस्थितियां हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने पूरी दुनिया के Gen-Z युवाओं को एक जैसा ‘ग्लोबल कल्चर’ दिया है। जब फ्रांस का युवा अपने देश में आवास संकट से जूझता है, तो स्पेन या अल्बानिया का युवा सोशल मीडिया पर उसे देखकर खुद को उससे जोड़ लेता है और प्रेरित होकर सड़कों पर उतर जाता है।

प्रशासनिक रवैये के खिलाफ ‘आत्मसम्मान‘ की लड़ाई

Gen-Z केवल आर्थिक मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे अधिकारियों और नेताओं के नकारात्मक या उपेक्षापूर्ण रवैये पर भी बहुत तेजी से प्रतिक्रिया दे रही है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर उठते सवाल और युवाओं को ‘गैर-जिम्मेदार’ या ‘परजीवी’ ठहराने वाले बयानों ने इस आग में घी का काम किया है।

2026 का यह दौर यह साबित कर रहा है कि Gen-Z को केवल ऑनलाइन अभियानों और मीम्स (Memes) तक सीमित मान लेना सत्ताधीशों की सबसे बड़ी भूल थी। जब जीवन यापन की लागत असहनीय हो जाती है और भविष्य धुंधला दिखने लगता है, तो डिजिटल पीढ़ी का यह गुस्सा सड़कों पर उतरकर व्यवस्था को हिलाने की क्षमता रखता है। यह किसी एक देश की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था के सामने खड़ा एक बड़ा यथार्थ है।

चोरबागान भगदड़ की घटना पर राजनीति कर रहा है विपक्ष: शुभेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विपक्षी दलों पर बुधवार को आरोप लगाया कि वे चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना के पीड़ितों और घायलों के साथ खड़े होने के बजाय इस मामले पर राजनीति कर रहे हैं।

शुभेंदु अधिकारी ने यह टिप्पणी उस समय की, जब वह भगदड़ में मारी गई प्रिया समद्दार के उत्तर 24 परगना जिले के न्यू बैरकपुर इलाके स्थित घर गए थे। उन्होंने प्रिया के शोक संतप्त परिवार को राज्य सरकार की ओर से 25 लाख रुपये की मुआवजा राशि भी सौंपी।

उत्तरी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार शाम भगदड़ मचने से 19 लोगों की मौत हो गई थी और 25 अन्य घायल हो गए थे।

चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना से निपटने के सरकार के तरीके और वहां पुलिस की व्यवस्था को लेकर तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी दलों की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर शुभेंदु अधिकारी ने उनके रवैये पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कौन सा विपक्ष है? केवल विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट ही बचा है।

शुभेंदु अधिकारी ने ‘‘तृणमूल कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सहित अन्य विपक्षी दलों की प्रासंगिकता खत्म होने’’ का संकेत देते हुए पूछा क्या ऐसा कोई विपक्षी दल भगदड़ के बाद कोलकाता मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर या मेडिकल कॉलेज अस्पताल गया था? शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वह 24 अक्टूबर तक सभी मृतकों के घर जाएंगे।

मुख्यमंत्री भगदड़ में मारे गए दिलीप घोष और दीपाली घोष के बारानगर स्थित घर गए। इस दौरान उन्होंने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर पहले हुई दुर्घटनाओं के पीड़ितों के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

उन्होंने पत्रकारों से कहा पिछली सरकार पहले हुई दुर्घटनाओं के पीड़ितों की मदद के लिए आगे नहीं आई और उनके प्रति उदासीन रही लेकिन हम भी इंसान हैं और मुख्यमंत्री होने के नाते मेरा कर्तव्य है कि मैं पीड़ितों के साथ खड़ा रहूं।

भगदड़ की घटना से मिले सबक के बारे में पूछे जाने पर शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है।

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उन्होंने कहा 10 करोड़ लोग इस त्योहार में शामिल होते हैं। हमें लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में प्रति एक लाख आबादी पर 106 पुलिसकर्मी हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भगदड़ की घटना के संबंध में पुलिस की ओर से लापरवाही बरते जाने के आरोपों की जांच की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस घटना के पीछे किसी साजिश की आशंका की भी जांच की जाएगी और यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या किसी घोषणा के कारण अचानक भीड़ बढ़ी थी।

सरकारी अस्पतालों की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार से पांच महीने के भीतर स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह बदल देने की उम्मीद नहीं की जा सकती, लेकिन वह इसमें सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा पांच महीने में सरकारी अस्पतालों की स्थिति बदलना संभव नहीं है। हमें मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजना पड़ा, लेकिन हम स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा हमें 49 वर्ष की गंदगी साफ करनी होगी। इनमें 34 साल वामपंथियों के शासन के और 15 साल तृणमूल कांग्रेस के शासन के हैं।

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से लेकर सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तक स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए काम कर रही है।

बारानगर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक सकल घोष भी इस दौरान मौजूद थे।

शुभेंदु अधिकारी भगदड़ में मारे गए दो अन्य लोगों बरनाली हलदर और तानिया विश्वास के न्यू टाउन के गौरांगनगर स्थित घर भी गए और उन्होंने उनके शोक संतप्त परिवारों को 25-25 लाख रुपये के चेक भी सौंपे।

मुख्यमंत्री ने भगदड़ में मारे गए तोगोर बेज (37) और उनके बेटे संदीप (14) के परिवार से मंगलवार को पूर्व बर्धमान जिले में मुलाकात की थी। इसके बाद वह हुगली जिले के आरामबाग में पियाली प्रामाणिक (25) के परिजन से मिले थे। प्रामाणिक, तोगोर बेज की रिश्तेदार थीं।

उन्होंने नादिया जिले के चकदह में आरती सरकार (45), हुगली के बैद्यबाटी में श्रीपर्णा पोद्दार (26) और हावड़ा के लिलुआ में आकृति राउत (17) के परिवारों से भी मुलाकात की।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को सवाल उठाया था कि चोरबागान दुर्गा पूजा समिति में प्रमुख पदों पर बैठे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं को भगदड़ के बाद गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भाजपा सरकार के कदमों पर सवाल उठाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।

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उत्तराखंड पुलिस बेड़े में जल्द होगी 1600 पदों पर भर्ती, पुलिस बल के आधुनिकीकरण पर सरकार का जोर

उत्तराखंड पुलिस बेड़े में जल्द होगी 1600 पदों पर भर्ती, पुलिस बल के आधुनिकीकरण पर सरकार का जोर

उत्तराखंड सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और पुलिस तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। पुलिस बल को आधुनिक, सक्षम और तकनीक-संपन्न बनाने की दिशा में सरकार निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में प्रदेश की वर्दीधारी इकाइयों में खाली पड़े 1600 पदों पर जल्द ही सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

 

देहरादून में आयोजित ‘पुलिस स्मृति दिवस’ कार्यक्रम के अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुलिस एवं अर्धसैन्य बलों के अमर शहीदों को नमन करते हुए यह घोषणा की।

शहीदों के परिजनों का सम्मान

देहरादून स्थित पुलिस लाइन में आयोजित भव्य कार्यक्रम में देश और प्रदेश की सुरक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले पुलिस व अर्धसैन्य बलों के वीर शहीदों को याद किया गया। मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर अमर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने शहीद जवानों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया और आश्वासन दिया कि राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा गया कि बदलते समय के साथ अपराध के तरीके भी बदले हैं, जिससे निपटने के लिए पुलिस व्यवस्था को और अधिक उन्नत बनाना बेहद जरूरी है। आधुनिक तकनीकों के समावेश से न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और तेजी आएगी, बल्कि प्रदेश की आम जनता की सुरक्षा भी अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जा सकेगी।

1600 पदों पर शीघ्र शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया

उत्तराखंड की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इनमें सबसे अहम घोषणा विभिन्न वर्दीधारी इकाइयों में रिक्त पड़े 1600 पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने को लेकर रही। धामी सरकार के इस फैसले से एक ओर जहां पुलिस बल में युवाओं को शामिल कर सुरक्षा तंत्र को नई ऊर्जा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। 

उज्‍जैन के 11 मंदिर शेयर बाजार की तरह करेंगे ट्रेडिंग, बनाए जाएंगे टेंपल बॉन्‍ड, देश में पहली बार ऐसा प्रयोग

उज्‍जैन के 11 मंदिर शेयर बाजार की तरह करेंगे ट्रेडिंग, बनाए जाएंगे टेंपल बॉन्‍ड, देश में पहली बार ऐसा प्रयोग

श्री महाकाल की नगरी उज्‍जैन के मंदिरों को लेकर प्रयोग होने जा रहा है। ऐसा प्रयोग देश में पहली बार हो रहा है। अब यहां के करीब 11 मंदिर शेयर बाजार की तरह ट्रेडिंग करेंगे। यह धार्मिक स्थलों के विकास या सौंदर्यीकरण के लिए जारी होंगे और इसमें आम व्यक्ति भी हर दिन बॉन्ड खरीदी-बिक्री करते हुए सीधे सहभागी बन सकेंगे।

बता दें कि अगले एक-दो महीने में टेंपल बॉन्ड की ऑनलाइन खरीदी बिक्री शुरू हो जाएगी। शहर के कुल 11 मंदिरों के विकास के लिए 1124 करोड़ रुपए का प्लान बना है। इसके लिए यूडीए की गारंटी पर 600 करोड़ रुपए लोन लेने की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी है। लोन देने वाली बैंक ने भी स्वीकृति दे दी। अब 200 रुपए टेंपल बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

इंदौर की तर्ज पर करेगा काम : इंदौर में जलूद सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए ग्रीन बॉन्ड जारी करते हुए निगम ने 244 करोड़ जुटाए। इससे नगर निगम ​का करोड़ों रुपए का बिजली बिल बचा। इंदौर के जिन लोगों ने ग्रीन बॉन्ड खरीदे, उन्हें करीब 8.25% प्रतिवर्ष का आकर्षक ब्याज मिला। जो बैंक ब्याज से ज्यादा है। ठीक इसी तर्ज पर उज्जैन का टेंपल बॉन्ड काम करेगा।

जारी होंगे टेंपल बॉन्ड : बता दें कि कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सिद्धवट और सांदीपनि आश्रम के लिए काम शुरू हो चुका है। नलखेड़ा स्थित मां बगुलामुखी मंदिर, अंगारेश्वर महादेव मंदिर व भूखी माता के लिए भी निर्माण एजेंसी को वर्क-ऑर्डर जारी हो चुके हैं। गढ़कालिका, शनि मंदिर के टेंडर एक सप्ताह में खुल जाएंगे।

कप्तानी छोड़ने के बाद खेल का आनंद लेना चाहती हूं: हरमनप्रीत

जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे टी-20 में 41 गेंदों पर नाबाद 91 रन की मैच जिताऊ पारी खेलने वाली हरमनप्रीत कौर ने कहा कि कप्तानी छोड़ने के बाद वह अपने करियर के इस नए दौर को कम दबाव के साथ खेल का अधिक आनंद लेना चाहती हैं।

मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में हरमनप्रीत ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि अब कोई दबाव रह गया है। अब तो मैदान पर अपने खेल का आनंद लेने की बात है और मैं यही करना चाहती हूं। मुझे क्रीज पर बल्लेबाजी करना पसंद है और मैं इसी के लिए यहां हूं। मैं बस अपनी बल्लेबाजी का आनंद लेना चाहती हूं। अच्छा लगा कि रन भी बने।

37 वर्षीय हरमनप्रीत ने इस महीने की शुरुआत में भारतीय टीम की कप्तानी छोड़ दी थी, जिसके बाद स्मृति मंधाना ने यह जिम्मेदारी संभाली। इस मैच से पहले हरमनप्रीत लगातार आठ पारियों से अर्धशतक नहीं लगा पाई थीं। रायपुर में वह आठवें ओवर में चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरीं। अपनी पहली 12 गेंदों पर उन्होंने केवल एक चौका लगाया, लेकिन इसके बाद गियर बदला और कुडज़ाई चिगोरा के ओवर में 20 रन बटोर लिए। इस ओवर में उन्होंने दो चौके और दो छक्के लगाए।

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हरमनप्रीत ने कहा कि उनकी पहली बाउंड्री ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। लॉरिन फिरी की गेंद पर एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से लगाए गए ड्राइव से उन्हें लगा कि पिच बल्लेबाजी के लिए अच्छी है।

उन्होंने कहा मुझे लगता है कि जब मैंने दूसरी गेंद पर चौका लगाया, तभी मुझे एहसास हुआ कि पिच अच्छी है और बल्ला गेंद पर अच्छी तरह आ रहा है। उस शॉट से मुझे काफी आत्मविश्वास मिला। इसके बाद मैंने सोचा कि बस खेलती रहूं और देखूं कि आगे क्या होता है।

हरमनप्रीत ने कहा कि नेट्स में की गई मेहनत से उन्हें क्रीज पर सहज महसूस करने में मदद मिली। अभ्यास के दौरान मैच जैसा दबाव महसूस करने से असली मुकाबले में अतिरिक्त दबाव से बचने में मदद मिलती है।

उन्होंने कहा मुझे लगता है कि बैट स्विंग मेरी बल्लेबाजी की सबसे अहम चीज है। मैं नेट्स में इसे बार-बार दोहराना चाहती हूं। मैं अपने बल्लेबाजी कोच हिमांशु भैया को भी इसका श्रेय देना चाहूंगी। वह काफ़ी मेहनत कर रहे हैं और उन्होंने समझा है कि मैं किस तरह की बल्लेबाजी कर सकती हूं। जब भी हम मिलते हैं और नेट्स में समय बिताते हैं, तो वह चाहते हैं कि मैं वहां भी उसी तरह का दबाव महसूस करूं, ताकि मैच खेलते समय मुझे किसी अतिरिक्त दबाव का सामना न करना पड़े। उनकी रणनीति और सोच काफी अच्छी तरह काम करती है।

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