पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

Raghav Chadha name removed from voter list in SIR

पंजाब में SIR में भाजपा के राज्यसभा सांसद राघव चढ्‍डा का नाम कटने से हड़कंप मच गया। उन्होंने राज्य की भगवंत मान सरकार पर बदले की राजनीति के ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स तक लाने का आरोप लगाया। ALSO READ: क्या राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी का बदलेगा विभाग? मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच उठे बड़े सवाल

 

राघव चढ्‍डा ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि आप सरकार अब बदले की राजनीति को प्रारूप मतदाता सूची (ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स) तक ले आई है।

 

उन्होंने कहा कि मैं पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हूँ और मेरा वोटर आईडी पंजाब के मोहाली में पंजीकृत है। इसके बावजूद, प्रारूप मतदाता सूची में मेरे नाम को स्थानांतरित के रूप में वर्गीकृत किया गया है। गनीमत है कि यह केवल प्रारूप मतदाता सूची है, अंतिम मतदाता सूची नहीं। 'दावे और आपत्ति' (क्लेम्स एंड ऑब्जेक्शन) प्रक्रिया के दौरान नामों को सुधारा जाता है, जो फिलहाल जारी है। अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित की जाएगी। मैं एसआईआर (SIR) दिशानिर्देशों के तहत उपलब्ध उपायों का लाभ उठाने की प्रक्रिया में हूं।

 

भाजपा सांसद के अनुसार, यह केवल एक लिपिकीय गलती नहीं लगती। यह राजनीतिक प्रतिशोध का एक स्पष्ट मामला है। मुझे ‘स्थानांतरित’ के रूप में किसने चिह्नित किया? आप की पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने। उस वर्गीकरण का सत्यापन किसने किया? फिर से, आप की पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने। उच्च स्तर पर इसे किसने आगे बढ़ाया? एक बार फिर, वही आप की पंजाब सरकार के अधिकारी ने।

 

उन्होंने कहा कि जमीन पर तैनात बीएलओ (BLO) से लेकर पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक, इस पूरी प्रक्रिया का हर प्रशासनिक स्तर पंजाब सरकार के अधिकारियों से भरा पड़ा है। बीएलओ आमतौर पर पंजाब सरकार का एक जूनियर कर्मचारी होता है। बीच के एईआरओ, ईआरओ और डीईओ पंजाब सरकार के अधिकारी हैं। सबसे शीर्ष पर पंजाब कैडर के एक आईएएस अधिकारी हैं जो पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ये अधिकारी जानते हैं कि चुनावी ड्यूटी समाप्त होते ही आप सरकार उनके तबादले, तैनाती और करियर को नियंत्रित करती है। वे जानते हैं कि कौन उनका तबादला कर सकता है और कौन उनका जीवन कठिन बना सकता है। इस तरह आप सरकार राजनीतिक बदले को अंजाम देने के लिए राज्य के अधिकारियों के माध्यम से राजनीतिक दबाव बनाती है।

 

राघव चढ्‍डा ने कहा कि जब से मैंने भ्रष्ट आम आदमी पार्टी छोड़ी है, इसका नेतृत्व गुस्से में जल रहा है। इसने हममें से उन लोगों के खिलाफ पंजाब पुलिस और पंजाब सरकार की प्रशासनिक मशीनरी को तैनात कर दिया है जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया था। आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अन्य सांसदों को भी पंजाब सरकार द्वारा निशाना बनाया गया है। यह गलत वर्गीकरण उस राजनीतिक प्रतिशोध का एक नया अध्याय है।

 

उन्होंने कहा कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव आयोग के एसआईआर (SIR) के विस्तृत दिशानिर्देशों का पैराग्राफ 4(d) उन जनप्रतिनिधियों के लिए एक 'सुरक्षित सूची' (प्रोटेक्टेड लिस्ट) बनाता है जिनके नाम चिह्नित किए गए हैं। इसमें न्यायाधीश, सांसद और विधायक शामिल हैं। यह कहता है: न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों के धारकों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल व लोक सेवा आदि क्षेत्रों की हस्तियों के वे सभी नाम जो पहले चुनावी डेटाबेस में चिह्नित किए गए हैं, उन्हें प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किया जाना है, ताकि दावों और आत्तियों की अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेज भी एकत्र किए जा सकें।

 

राघव चढ्‍डा ने कहा कि मैं पंजाब से मौजूदा संसद सदस्य हूं। यदि मेरे नाम को चिह्नित भी किया गया था, तो पैराग्राफ 4(d) के अनुसार प्रारूप मतदाता सूची में मेरा नाम शामिल करना अनिवार्य था। इस निर्देश की केवल अनदेखी नहीं की गई, बल्कि मेरे मामले में जानबूझकर इसका उल्लंघन किया गया। आप भले ही पंजाब सरकार चला सकती है, लेकिन पंजाब की प्रारूप मतदाता सूची उसकी निजी संपत्ति नहीं है।

क्या राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी का बदलेगा विभाग? मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच उठे बड़े सवाल

क्या राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी का बदलेगा विभाग? मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच उठे बड़े सवाल

rajnath singh and nitin gadkari

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के SCO समिट से भारत लौटते ही मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई। ऐसा माना जा रहा है कि नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह समेत 70 पार के मंत्रियों की जिम्मेदारी कम की जा सकती है। कहा जा रहा है कि कैबिनेट में बदलाव के दौरान महिला मंत्रियों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। ALSO READ: indus waters treaty : सिंधु जल संधि पर फिर बढ़ा विवाद, भारत के सामने फिर गिड़गिड़ाया Pakistan

 

मोदी कैबिनेट में 70 वर्ष से अधिक के 14 मंत्री हैं। इनकी संख्या कम कर नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। 70 प्लस के कुछ मंत्रियों को संगठन में एडजस्ट किया जा सकता है जबकि कुछ को राज्यों में भूमिका दी जा सकती है। अश्विनी वैष्णव के प्रमोशन और नितिन गडकरी के विभाग में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं।

 

राजनाथ सिंह के विभाग को लेकर क्यों चर्चा?

राजनाथ सिंह मोदी सरकार के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और वर्तमान में रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। हाल के दिनों में उन्होंने रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता से जुड़े मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा है। 1 सितंबर को उन्होंने रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों से उत्पादन क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर जोर दिया था।

 

ऐसे में एक सवाल यह भी है कि क्या संभावित फेरबदल में राजनाथ सिंह की जिम्मेदारी को बदला जाएगा या उन्हें मौजूदा मंत्रालय में ही बनाए रखा जाएगा? राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक नीति से सीधे जुड़ा हुआ है।

 

गडकरी को लेकर भी क्यों बढ़ी अटकलें?

नितिन गडकरी लंबे समय से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय संभाल रहे हैं और मोदी सरकार के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर चेहरों में गिने जाते हैं। 2024 में गठित कैबिनेट में भी उन्हें यही मंत्रालय मिला था। कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स और कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

 

संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच गडकरी के नाम को लेकर भी अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, उनके विभाग में बदलाव या उन्हें किसी दूसरे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी दिए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

 

क्या दोनों नेताओं को मिल सकती है नई जिम्मेदारी?

यही वह सवाल है जिसने मौजूदा चर्चाओं को सबसे ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। यदि मोदी सरकार व्यापक फेरबदल करती है तो वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और राजनीतिक वजन को देखते हुए उनकी जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

एक संभावना यह भी हो सकती है कि सरकार मौजूदा चेहरों को उन्हीं मंत्रालयों में बनाए रखकर नए नेताओं को दूसरे महत्वपूर्ण विभागों में जगह दे। दूसरी तरफ, अगर फेरबदल को व्यापक बनाया जाता है तो वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव संभव है।

 

फेरबदल के पीछे क्या हो सकती है रणनीति?

कैबिनेट में संभावित बदलाव को केवल मंत्रालयों के फेरबदल के रूप में नहीं देखा जा रहा। बीजेपी के संगठन में हुए बदलाव के बाद सरकार में क्षेत्रीय, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की जरूरत भी एक बड़ा फैक्टर हो सकती है। हालिया रिपोर्टों में कैबिनेट फेरबदल को संगठनात्मक बदलाव के बाद की संभावित अगली कड़ी के तौर पर देखा गया है।

 

ऐसे में अगर फेरबदल होता है तो नए चेहरों को जगह देने के साथ-साथ कुछ वरिष्ठ नेताओं को अतिरिक्त या नई जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा है।

 

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी अपने मौजूदा मंत्रालयों में बने रहेंगे या मोदी सरकार उनके अनुभव का इस्तेमाल किसी दूसरी बड़ी जिम्मेदारी में करेगी? जवाब कैबिनेट फेरबदल की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगा। तब तक दोनों नेताओं के विभाग बदलने की खबरों को संभावना और राजनीतिक अटकल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

दिल्ली-बिहार समेत 15 राज्यों में भारी बारिश, 4 दिन का अलर्ट

दिल्ली-बिहार समेत 15 राज्यों में भारी बारिश, 4 दिन का अलर्ट

IMD rain alert in 15 states

Weathet Update : मध्य भारत के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र और उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहाड़ से लेकर मैदान तक मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है। नदियां उफान पर है। मौसम विभाग ने दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड समेत 12 से ज्यादा राज्यों में अगले 4 दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।  

 

इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट 

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज भारत के 15 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, असम और केरल शामिल हैं। 

 

कहां कैसा है मौसम?

उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन के चलते 150 से ज्यादा सड़कों पर यातायात बाधित रहा। इस वजह से चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। 

 

मध्य प्रदेश के सतना में भारी बारिश के बीच मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। भारी बारिश के बाद झारखंड के रांची में नदियां, डैम और झरने ओवरफ्लो हो गए। 

 

हरियाणा के अंबाला, रोहतक, फरीदाबाद, पलवल, कुरुक्षेत्र, कैथल व जींद के कई इलाकों में बुधवार को तेज बारिश हुई। यमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज के पास लापता हुए 2 कमांडो में से एक कमांडों का शव देर शाम बरामद कर लिया है। दूसरे की तलाश जारी है। 

 

बिहार और नेपाल में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण राज्य की प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन ने पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया।

बाढ़ प्रभावितों के साथ खड़ी योगी सरकार, राहत अभियानों के तहत 3.36 लाख लंच पैकेट वितरित

बाढ़ प्रभावितों के साथ खड़ी योगी सरकार, राहत अभियानों के तहत 3.36 लाख लंच पैकेट वितरित

उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने राहत और बचाव अभियान को पूरी ताकत के साथ जारी रखा है। प्रभावित परिवारों तक भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने के साथ बड़े पैमाने पर रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 68,953 खाद्यान्न पैकेट और 3.36 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। 1,499 नाव एवं मोटरबोट राहत-बचाव में लगाई गई हैं और अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 5.02 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 1.77 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट भी वितरित किए जा चुके हैं।

 

23 जिलों में प्रशासन पूरी तरह सक्रिय

उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त के मुताबिक 35 जिले अब तक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि 23 जिलों में अब भी इसका असर है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बदायूं, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, सीतापुर, सोनभद्र, उन्नाव और वाराणसी में युद्धस्तर पर राहत-बचाव कार्य चल रहा है। प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी और तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

 

हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

बचाव अभियान के तहत अब तक बाढ़ग्रस्त इलाकों में फंसे 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। बुधवार को ही 3,042 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। जलमग्न क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए नावों और मोटरबोट्स का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन बाधित होने के बावजूद राहत टीमों की पहुंच सुनिश्चित की गई है। अब तक 1,499 नावों एवं मोटरबोट्स का प्रयोग किया जा चुका है। इससे बचाव दलों को प्रभावित गांवों और जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने तथा जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में मदद मिल रही है।

 

प्राथमिकता पर भोजन व्यवस्था कर रही सरकार

बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए भोजन की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। अब तक 68,953 खाद्यान्न पैकेट और 3.36 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। इससे प्रभावित परिवारों को आपदा के बीच तत्काल खाद्य सहायता मिल रही है। सभी क्षेत्रों में राहत सामग्री का वितरण जरूरत के मुताबिक लगातार जारी है।

 

स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी विशेष जोर

बाढ़ के बाद दूषित पानी से संक्रमण और जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए योगी सरकार ने स्वास्थ्य और स्वच्छता को भी राहत अभियान का अहम हिस्सा बनाया है। अब तक 5.02 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 1.77 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। इसके अलावा 1,067 मेडिकल टीमें गठित की जा चुकी हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए अब तक 1,311 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 201 वर्तमान में संचालित हैं।

 

पशुधन और मकानों की क्षति पर सहायता

योगी सरकार का राहत अभियान केवल लोगों तक सीमित नहीं है। बाढ़ से अब तक 36,287 पशु प्रभावित हुए हैं और उनके लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। बाढ़ से मकान क्षतिग्रस्त होने के 442 मामलों में प्रभावित परिवारों को सहायता वितरित की जा चुकी है। राहत-बचाव के साथ क्षति का आकलन और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने का काम लगातार जारी है।

इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) की जांच सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क कराएं, निजी संस्थान निर्धारित शुल्क से अधिक न लें: मुख्यमंत्री योगी

इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) की जांच सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क कराएं, निजी संस्थान निर्धारित शुल्क से अधिक न लें: मुख्यमंत्री योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) की जांच सभी जिला अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी, मेडिकल कॉलेजों सहित सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क कराए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अधिक मामलों वाले जिलों में निगरानी और उपचार व्यवस्था को और मजबूत किया जाए तथा अस्पतालों में दवा, जांच और आइसोलेशन की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित रहे। गंभीर मरीजों के लिए अलग आईसीयू वार्ड तैयार किए जाएं। मुख्यमंत्री ने एच1एन1 की रोकथाम और उपचार के संबंध में विस्तृत गाइडलाइन जारी करने तथा टेलिकन्सल्टेशन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिए।

 

बुधवार को उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एवं राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह की उपस्थिति में प्रदेश में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) एवं सीजनल इन्फ्लुएंजा की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों की समय से पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जाए। जहां भी मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, वहां निगरानी बढ़ाने के साथ तत्काल आवश्यक चिकित्सा व्यवस्थाएं की जाएं। निजी चिकित्सा संस्थानों द्वारा जांच के लिए पूर्व में निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क न लिया जाए, यह भी सुनिश्चित किया जाए।

 

बैठक में विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1), इन्फ्लुएंजा-ए वायरस की एक प्रजाति है और यह सीजनल इन्फ्लुएंजा की श्रेणी में आता है। इसका संक्रमण मुख्य रूप से खांसी और छींक से निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के माध्यम से फैलता है। बुखार, नाक बहना, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द, ठंड लगना और आंखों में लालिमा इसके प्रमुख लक्षण हैं। बताया गया कि 2 सितंबर तक प्रदेश में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) के 685 प्रयोगशाला-पुष्ट मामले सामने आए हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामान्य लक्षण वाले मरीजों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार घर पर आराम और सेल्फ आइसोलेशन की सलाह दी जाए, जबकि गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बच्चों, गर्भवती महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। एएनएम, आशा एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के सहयोग से सघन जांच अभियान चलाकर संभावित मरीजों की पहचान करने तथा जरूरत के अनुसार होम क्वारंटीन, मास्क और संक्रमण से बचाव के अन्य उपायों की जानकारी एवं सहायता उपलब्ध कराने को कहा। अस्पतालों में इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण वाले मरीजों के लिए अलग काउंटर बनाने के भी निर्देश दिए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव न बढ़े और गंभीर मरीजों को समय से उपचार मिल सके, इसके लिए मरीजों की स्थिति के अनुसार रेफरल की व्यवस्था की जाए। गंभीर लक्षण वाले मरीजों को ही अस्पताल भेजने के साथ ऐसे मरीजों के लिए समुचित उपचार और आईसीयू की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विशेषज्ञों ने बताया कि सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, अत्यधिक सुस्ती, रक्तचाप कम होना, खून मिला बलगम अथवा नाखूनों का नीला पड़ना गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं। बच्चों में लगातार तेज बुखार, भोजन लेने में असमर्थता, झटके आना, तेज सांस चलना या सांस लेने में कठिनाई तथा पहले से मौजूद बीमारी की स्थिति बिगड़ना भी गंभीर संकेत हैं। 

 

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में ओसेल्टामिविर कैप्सूल और सिरप तथा एच1एन1 वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता है। जनपदीय चिकित्सालयों में हेल्प डेस्क, जांच के लिए नमूना संग्रह और पृथक फ्लू ओपीडी की व्यवस्था है। सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में भी फ्लू हेल्प डेस्क, आवश्यक जांच, दवाओं और आइसोलेशन बेड की व्यवस्था उपलब्ध है।  

 

निदेशक एसजीपीजीआई डॉ. आरके धीमान, कुलपति केजीएमयू डॉ. सोनिया नित्यानंद और राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने मुख्यमंत्री को अपने-अपने संस्थानों में उपलब्ध उपचार, टेस्टिंग और दवाओं की उपलब्धता के संबंध में अवगत कराया। बैठक में बताया गया कि चिकित्सा महाविद्यालयों में फ्लू ओपीडी और आइसोलेशन बेड की व्यवस्था है तथा जांच के लिए पर्याप्त आरटीपीसीआर किट उपलब्ध हैं।  

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि संक्रमण की रोकथाम के लिए जनजागरूकता अभियान को प्रभावी बनाया जाए। क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसकी सरल, सही और तथ्यपरक जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाए, ताकि अनावश्यक पैनिक की स्थिति न बने। अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर हाथों की स्वच्छता, खांसी और छींक के दौरान सावधानी तथा संक्रमण से बचाव के उपायों के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि एच1एन1 की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी जिले में मामलों में बढ़ोतरी दिखाई देने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि बीमारी की समय पर पहचान, जरूरतमंद मरीज को त्वरित उपचार, पर्याप्त चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना संक्रमण से निपटने की प्रभावी रणनीति है।

LIVE: नेपाल में बाढ़ से 1200 से ज्यादा की मौत, सतना में मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर

LIVE: नेपाल में बाढ़ से 1200 से ज्यादा की मौत, सतना में मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर

nepal flood

Latest News Today Live Updates in Hindi : नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1200 के पार पहुंच गई। पल पल की जानकारी… 

-मध्य प्रदेश के सतना में भारी बारिश के बीच मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

-भारी बारिश के बाद झारखंड के रांची में नदियां, डैम और झरने ओवरफ्लो हो गए। नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1204 हुई।

Top News 3 September: 12 राज्यों में बारिश का अलर्ट, ईरान युद्ध पर ट्रंप का बड़ा बयान

Top News 3 September: 12 राज्यों में बारिश का अलर्ट, ईरान युद्ध पर ट्रंप का बड़ा बयान

Heavy rain in India

Top News 3 September : देश के 12 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, ट्रंप का दावा- ज्यादा लंबी नहीं चलेगी जंग। पाकिस्तान में 100 साल पुराना हिंदू मंदिर ढहाए जाने पर भारत ने जताई आपत्ति। राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ ने नई जिम्मेदारी मिलने पर चयन समिति, श्री राम मंदिर ट्रस्ट और भगवान राम के प्रति आभार जताया। 3 सितंबर की बड़ी खबरें : 

 

12 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

मध्य भारत के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र और उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहाड़ से लेकर मैदान तक मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है। नदियां उफान पर है। मौसम विभाग 12 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।  

 

ट्रंप का बड़ा दावा- लंबी नहीं चलेगी जंग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान के साथ जारी युद्ध अब 'बहुत ज्यादा लंबा' चलेगा। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था।

 

पाकिस्तान में 100 साल पुराने हिन्दू मंदिर पर बवाल

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में करीब 100 से 125 साल पुराने हिन्दू मंदिर को कथित तौर पर गिराए जाने के मामले में भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के पूजा स्थल के खिलाफ “निंदनीय तोड़फोड़ की कार्रवाई” करार दिया है। ALSO READ: पाकिस्तान में 100 साल पुराने हिन्दू मंदिर पर बवाल, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति, जानें मंदिर गिराने पर क्या बोली सरकार

 

सिंधु जल संधि पर फिर बढ़ा विवाद

सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता निकाय के फैसले को भारत द्वारा खारिज किए जाने के कुछ दिनों बाद पाकिस्तान ने बुधवार को नई दिल्ली से 1960 की जल बंटवारा संधि के तहत 'रचनात्मक तरीके से' बातचीत करने का आग्रह किया। ALSO READ: indus waters treaty : सिंधु जल संधि पर फिर बढ़ा विवाद, भारत के सामने फिर गिड़गिड़ाया Pakistan

 

राम मंदिर के CEO जितेंद्र मिश्रा का पहला बयान 

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या के पहले CEO नियुक्त किए गए एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने नई जिम्मेदारी मिलने पर चयन समिति, श्री राम मंदिर ट्रस्ट और भगवान राम के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा- मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि मुझे इतनी क्षमता प्रदान करें कि मैं इस जिम्मेदारी को अच्छी तरह निभा सकूं। ALSO READ: Ram Mandir : 'प्रभु राम मुझे यह जिम्मेदारी निभाने का सामर्थ्य दें', अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO जितेंद्र मिश्रा ने कहा

पाकिस्तान में 100 साल पुराने हिन्दू मंदिर पर बवाल, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति, जानें मंदिर गिराने पर क्या बोली सरकार

पाकिस्तान में 100 साल पुराने हिन्दू मंदिर पर बवाल, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति, जानें मंदिर गिराने पर क्या बोली सरकार

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में करीब 100 से 125 साल पुराने हिन्दू मंदिर को कथित तौर पर गिराए जाने के मामले में भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के पूजा स्थल के खिलाफ “निंदनीय तोड़फोड़ की कार्रवाई” करार दिया है।

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विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि नारोवाल स्थित मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पाकिस्तानी अधिकारियों की कथित उदासीनता और विफलता बेहद चिंताजनक है। भारत ने मामले की तत्काल और पारदर्शी जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

 

भारत ने पाकिस्तान से मंदिर की स्थिति बहाल करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की अपील भी की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह अपने देश में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करे।

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क्यों चर्चा में आया 100 साल पुराना हिंदू मंदिर?

यह मंदिर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल  जिले के सिराज गांव में स्थित था। लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर का निर्माण लगभग 100 से 125 साल पहले हुआ था और यह करीब 1,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ था।

स्थानीय निवासियों, अल्पसंख्यक संगठनों और एक राजनीतिक दल ने आरोप लगाया कि 21 अगस्त को धार्मिक कट्टरपंथियों के एक समूह ने मंदिर को गिरा दिया, ताकि मंदिर की जमीन को पास स्थित एक मदरसे में शामिल किया जा सके।

 

पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी (PMMP) ने इस कथित घटना के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पार्टी ने मंदिर को दोबारा बनाए जाने की भी मांग की है। PMMP के परवेज सहोत्रा ने आरोप लगाया कि मंदिर गिराने वाले लोग तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) से जुड़े थे। TLP पाकिस्तान की एक प्रतिबंधित दक्षिणपंथी इस्लामिक राजनीतिक पार्टी है।

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पाकिस्तान सरकार ने क्या कहा?

 

हालांकि, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने मंदिर को गिराए जाने के आरोप से इनकार किया है। सरकार के मुताबिक मंदिर को तोड़ा नहीं गया, बल्कि भारी बारिश के कारण उसका एक हिस्सा ढह गया।

 

पंजाब सरकार ने कहा कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने मंदिर स्थल का दौरा किया और पाया कि मूसलाधार बारिश के कारण मंदिर के साइन/संरचना का केवल एक हिस्सा गिरा था। सरकार ने यह भी कहा कि वह क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा बहाल करेगी। ऐसे में मंदिर के कथित विध्वंस को लेकर भारत की आपत्ति और पाकिस्तान सरकार के स्पष्टीकरण के बीच मामला अब जांच के केंद्र में है।

WhatsApp, ई-मेल और Teams पर अफसर बनकर ठगी, फर्जी प्रोफाइल से मांगे जा रहे पैसे, ऐसे बचें

WhatsApp, ई-मेल और Teams पर अफसर बनकर ठगी, फर्जी प्रोफाइल से मांगे जा रहे पैसे, ऐसे बचें

Cyber Fraud

साइबर ठग लोगों और कारोबारियों को निशाना बनाने के लिए ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अब ठग वरिष्ठ अधिकारियों, बिजनेस मालिकों, CEO या भरोसेमंद संपर्कों की पहचान की नकल कर WhatsApp, ई-मेल, Microsoft Teams और दूसरे कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से पैसे ट्रांसफर करने को कह रहे हैं।

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इस तरह की ठगी में जालसाज पीड़ित पर तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाते हैं। वे तत्काल फंड ट्रांसफर, इनवॉयस का भुगतान या बैंक खाते की जानकारी बदलने जैसे संदेश भेज सकते हैं। लोगों को भरोसा दिलाने के लिए फर्जी प्रोफाइल, नाम, लोगो और ई-मेल आईडी का इस्तेमाल किया जाता है।

 

कैसे होती है यह ठगी?

ठग किसी वरिष्ठ अधिकारी या परिचित व्यक्ति की पहचान बनाकर तुरंत भुगतान करने का अनुरोध भेजते हैं।

इसके बाद वे लाभार्थी (Beneficiary) के बैंक खाते की जानकारी देते हैं और तुरंत कार्रवाई करने का दबाव डालते हैं।

पीड़ित अनुरोध को वास्तविक समझकर बताए गए खाते में पैसे ट्रांसफर कर देता है।

रकम मिलने के बाद ठग उसे तेजी से कई अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे पैसे की रिकवरी मुश्किल हो जाती है।

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ठगी से बचने के लिए क्या करें?

 

1. जल्दबाजी में भुगतान न करें

WhatsApp, ई-मेल, SMS या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर आए तत्काल भुगतान के अनुरोध को पहले सत्यापित करें। संबंधित व्यक्ति से उसके पहले से मौजूद और भरोसेमंद फोन नंबर पर सीधे संपर्क करें।

 

2. सिर्फ नाम और फोटो देखकर भरोसा न करें

ठग नाम, प्रोफाइल फोटो, लोगो और ई-मेल आईडी में हेरफेर करके किसी अधिकारी या परिचित की पहचान की नकल कर सकते हैं।

 

3. OTP, PIN और पासवर्ड शेयर न करें

किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, पासवर्ड, PIN या गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा न करें।

 

4. दबाव बनाने वाले संदेशों से सावधान रहें

अगर कोई संदेश डर, घबराहट या जल्दबाजी पैदा करके तुरंत लेन-देन करने के लिए कह रहा है तो सावधान हो जाएं।

 

5. बैंक खाते की जानकारी बदलने से पहले करें पुष्टि

अगर किसी व्यक्ति या कंपनी की ओर से लाभार्थी के बैंक खाते की जानकारी बदलने का अनुरोध मिले तो भुगतान करने से पहले किसी स्वतंत्र और भरोसेमंद माध्यम से इसकी पुष्टि जरूर करें।

 

याद रखें- रुकें, सत्यापित करें और फिर भुगतान करें

 

वित्तीय लेन-देन से जुड़े निर्देशों को सत्यापित करने में वरिष्ठ अधिकारी भी सहयोग करेंगे। कुछ मिनट की पुष्टि आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।

indus waters treaty : सिंधु जल संधि पर फिर बढ़ा विवाद, भारत के सामने फिर गिड़गिड़ाया Pakistan

indus waters treaty : सिंधु जल संधि पर फिर बढ़ा विवाद, भारत के सामने फिर गिड़गिड़ाया Pakistan

सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। बातचीत को लेकर भारत के सामने पाकिस्तान फिर गिड़गिड़ाया है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता निकाय के फैसले को भारत द्वारा खारिज किए जाने के कुछ दिनों बाद पाकिस्तान ने बुधवार को नई दिल्ली से 1960 की जल बंटवारा संधि के तहत 'रचनात्मक तरीके से' बातचीत करने का आग्रह किया।

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क्या कहा प्रवक्ता ने

मीडिया खबरों के मुताबिक पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंदाराबी ने कहा कि हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration) ने इस बात की पुष्टि की है कि सिंधु जल संधि पूरी तरह लागू और बाध्यकारी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान फैसले को लागू कराने के लिए 'हरसंभव कदम' उठाएगा। अंदाराबी ने कहा कि पाकिस्तान संधि को उसकी भाषा और प्रावधानों के अनुसार पूरी तरह लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत से भी इसी भावना के साथ संधि का पालन करने की अपील की।

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पाकिस्तान ने मार्च 2026 में खटखटाया था मध्यस्थता न्यायालय का दरवाजा

 

भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के फैसले के बाद पाकिस्तान ने मार्च 2026 में हेग स्थित Permanent Court of Arbitration का रुख किया था। पाकिस्तान ने न्यायालय से संधि की स्थिति को लेकर निर्णय देने की मांग की थी। 

 

फैसले को सिरे से किया खारिज

हालांकि भारत ने सोमवार को मध्यस्थता न्यायालय के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि भारत इस तथाकथित फैसले को स्वीकार नहीं करता और पहले भी इस संस्था के सभी पूर्व निर्णयों को खारिज कर चुका है।  विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला अभी भी प्रभावी है।

 

 

भारत के मुताबिक मध्यस्थता न्यायालय का गठन ही सिंधु जल संधि की शर्तों का उल्लंघन करते हुए किया गया था। नई दिल्ली का कहना है कि इस निकाय को भारत के संप्रभु फैसले पर अधिकार क्षेत्र हासिल नहीं है।

 

अधिकतम जल भंडारण क्षमता पर भी आया फैसला

 

विदेश मंत्रालय के अनुसार, Court of Arbitration ने 15 मई 2026 को अधिकतम जल भंडारण क्षमता (Maximum Pondage) से जुड़ा एक फैसला जारी किया था। यह फैसला सिंधु जल संधि की सामान्य व्याख्या से जुड़े पहले के निर्णय के अतिरिक्त था। भारत ने कहा है कि वह इस मध्यस्थता निकाय को ही अवैध मानता है और इसलिए उसके फैसलों को स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता।

SCO सम्मेलन में भी उठा पानी और आतंकवाद का मुद्दा

सिंधु जल विवाद का मुद्दा अप्रत्यक्ष रूप से शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में भी सामने आया। बिश्केक में आयोजित सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन देशों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत बताई जो आतंकवाद को राज्य की नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया केवल कार्रवाई और प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रह सकती। उन्होंने आतंकवादी नेटवर्क, उनकी फंडिंग, भर्ती व्यवस्था और सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

 
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पानी को क्षेत्र की 'जीवनरेखा' बताते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। शरीफ ने कहा कि साझा जल संसाधनों से संबंधित संधियां गंभीर और बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं हैं और इन्हें राजनीतिक सुविधा के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि की थी स्थगित

भारत ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने 23 अप्रैल 2025 को यह निर्णय लिया था। भारत का कहना है कि संधि के आधारभूत हालात में मौलिक बदलाव हो चुका है। नई दिल्ली ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय तरीके से त्याग नहीं देता, तब तक सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी।