indus waters treaty : सिंधु जल संधि पर फिर बढ़ा विवाद, भारत के सामने फिर गिड़गिड़ाया Pakistan

indus waters treaty : सिंधु जल संधि पर फिर बढ़ा विवाद, भारत के सामने फिर गिड़गिड़ाया Pakistan

सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। बातचीत को लेकर भारत के सामने पाकिस्तान फिर गिड़गिड़ाया है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता निकाय के फैसले को भारत द्वारा खारिज किए जाने के कुछ दिनों बाद पाकिस्तान ने बुधवार को नई दिल्ली से 1960 की जल बंटवारा संधि के तहत 'रचनात्मक तरीके से' बातचीत करने का आग्रह किया।

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क्या कहा प्रवक्ता ने

मीडिया खबरों के मुताबिक पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंदाराबी ने कहा कि हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration) ने इस बात की पुष्टि की है कि सिंधु जल संधि पूरी तरह लागू और बाध्यकारी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान फैसले को लागू कराने के लिए 'हरसंभव कदम' उठाएगा। अंदाराबी ने कहा कि पाकिस्तान संधि को उसकी भाषा और प्रावधानों के अनुसार पूरी तरह लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत से भी इसी भावना के साथ संधि का पालन करने की अपील की।

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पाकिस्तान ने मार्च 2026 में खटखटाया था मध्यस्थता न्यायालय का दरवाजा

 

भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के फैसले के बाद पाकिस्तान ने मार्च 2026 में हेग स्थित Permanent Court of Arbitration का रुख किया था। पाकिस्तान ने न्यायालय से संधि की स्थिति को लेकर निर्णय देने की मांग की थी। 

 

फैसले को सिरे से किया खारिज

हालांकि भारत ने सोमवार को मध्यस्थता न्यायालय के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि भारत इस तथाकथित फैसले को स्वीकार नहीं करता और पहले भी इस संस्था के सभी पूर्व निर्णयों को खारिज कर चुका है।  विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला अभी भी प्रभावी है।

 

 

भारत के मुताबिक मध्यस्थता न्यायालय का गठन ही सिंधु जल संधि की शर्तों का उल्लंघन करते हुए किया गया था। नई दिल्ली का कहना है कि इस निकाय को भारत के संप्रभु फैसले पर अधिकार क्षेत्र हासिल नहीं है।

 

अधिकतम जल भंडारण क्षमता पर भी आया फैसला

 

विदेश मंत्रालय के अनुसार, Court of Arbitration ने 15 मई 2026 को अधिकतम जल भंडारण क्षमता (Maximum Pondage) से जुड़ा एक फैसला जारी किया था। यह फैसला सिंधु जल संधि की सामान्य व्याख्या से जुड़े पहले के निर्णय के अतिरिक्त था। भारत ने कहा है कि वह इस मध्यस्थता निकाय को ही अवैध मानता है और इसलिए उसके फैसलों को स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता।

SCO सम्मेलन में भी उठा पानी और आतंकवाद का मुद्दा

सिंधु जल विवाद का मुद्दा अप्रत्यक्ष रूप से शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में भी सामने आया। बिश्केक में आयोजित सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन देशों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत बताई जो आतंकवाद को राज्य की नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया केवल कार्रवाई और प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रह सकती। उन्होंने आतंकवादी नेटवर्क, उनकी फंडिंग, भर्ती व्यवस्था और सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

 
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पानी को क्षेत्र की 'जीवनरेखा' बताते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। शरीफ ने कहा कि साझा जल संसाधनों से संबंधित संधियां गंभीर और बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं हैं और इन्हें राजनीतिक सुविधा के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि की थी स्थगित

भारत ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने 23 अप्रैल 2025 को यह निर्णय लिया था। भारत का कहना है कि संधि के आधारभूत हालात में मौलिक बदलाव हो चुका है। नई दिल्ली ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय तरीके से त्याग नहीं देता, तब तक सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी।