उज्‍जैन वाली नरभक्षी अघोरी पर FIR, शमशान से शव का मांस निकालकर खाया था, अब वीडियो बनाकर दी ये धमकी

उज्‍जैन वाली नरभक्षी अघोरी पर FIR, शमशान से शव का मांस निकालकर खाया था, अब वीडियो बनाकर दी ये धमकी

Aghori ujjain

उज्‍जैन के चक्रतीर्थ स्‍थित एक शमशान घाट से जलती चिता में से शव का मांस खाने वाली अघोरी तांत्रिक काली उर्फ नंद गिरी पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। बता दें कि किन्नर अखाड़े से जुड़ी अघोरी तांत्रिक काली उर्फ नंद गिरी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें वह जलती चिता से तलवार के जरिए इंसानी मांस निकालकर खाते हुए नजर आ रही है।

वीडियो में तांत्रिक को “यह बहुत टेस्टी है” और “मैं तुम्हारे जीवन से खेलूंगी” जैसी अमानवीय बातें कहते हुए सुना जा सकता है। इस वीभत्स वीडियो के वायरल होने के बाद आम जनता के साथ-साथ संत समाज में भी भारी आक्रोश था। महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए इसे वैदिक परंपरा और अघोर मर्यादा के खिलाफ बताया था और अघोरी तांत्रिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।

वीडियो वायरल होने और संत समाज (विशेषकर अघोर व जूना अखाड़े) के भारी आक्रोश के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। शव के साथ छेड़छाड़ और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 301 व अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है

एफआईआर के बाद बनाया एक और वीडियो : पुलिस ने आरोपी अघोरी को हिरासत में ले लिया है। हालांकि, FIR दर्ज होने के बाद उसका एक और वीडियो सामने आया, जिसमें वह पुलिस और विरोध करने वालों को चुनौती देती व धमकी देती नजर आ रही है। संतों और स्थानीय नागरिकों ने इस कृत्य को सनातन धर्म और अघोर परंपरा की आड़ में किया गया एक घिनौना, अमानवीय व पब्लिसिटी बटोरने वाला स्टंट बताया है। पुलिस फिलहाल मामले की विस्तृत जांच और वीडियो की फोरेंसिक पुष्टि कर रही है।

क्‍या है पूरा मामला : वायरल वीडियो में तांत्रिक काली उर्फ नंद गिरी यह कहते हुए नजर आती है कि वह चिता से मांस खाएगी। इसके बाद वह हाथ में तलवार लेकर जलती चिता के पास जाती और उसमें से मांस निकालकर खाने का दावा करती है। वीडियो सामने आने के बाद उज्जैन के साधु-संतों और अघोर परंपरा से जुड़े लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। वीडियो में वह यह कहती हुई सुनाई देती है कि ‘हम आज इंसान का मांस खाएंगे। इसके बाद वह तलवार की मदद से चिता में से कुछ निकालती है और उसे खाने का दावा करती है।

बिहार की गंडक नदी में नेपाल से बहकर आईं अजीब विशालकाय मछलियां, जानिए क्यों प्रशासन ने जारी किया ‘नो-ईटिंग’ अलर्ट!

बिहार की गंडक नदी में नेपाल से बहकर आईं अजीब विशालकाय मछलियां, जानिए क्यों प्रशासन ने जारी किया 'नो-ईटिंग' अलर्ट!

Bihar no eating fish alert

Bihar no eating fish alert: नेपाल में हाल ही में आई प्रलयंकारी बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद इसका सीधा असर भारत के सीमावर्ती राज्य बिहार पर दिखाई दे रहा है। नेपाल की नदियों से बहकर विशालकाय और असामान्य वजन वाली मछलियां उत्तर बिहार की गंडक (Gandak River) और कोसी नदियों में पहुंच गई हैं।

 

स्थानीय लोग और मछुआरे इन विशाल मछलियों को पकड़ने के लिए नदियों के किनारे जुट रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इन मछलियों को पकड़ने और खाने पर सख्त रोक लगा दी है। ALSO READ: Priya Adhikari कौन हैं , नेपाल बाढ़ के बीच 6 दिन में किए 100 रेस्क्यू मिशन, सैकड़ों जिंदगियां बचाईं

गंडक नदी में अचानक कैसे आईं ये विशाल मछलियां?

नेपाल में मूसलाधार बारिश और ग्लेशियर टूटने के कारण भोटे कोशी, त्रिशूली और गंडकी नदी प्रणालियों में भीषण फ्लैश फ्लड आया।

  • नेपाल के हैचरी और प्राकृतिक जलाशयों से बहाव : नेपाल के ऊपरी इलाकों में स्थित बड़े मत्स्य पालन केंद्रों (Fish Farms/Hatcheries) और प्राकृतिक झीलों के तटबंध बाढ़ में बह गए।
  • तेज बहाव के साथ भारत में प्रवेश : भारी पानी के बहाव और गाद (Sedimentation) के साथ 10 किलो से लेकर 40-50 किलो तक की विशालकाय मछलियां बहकर बिहार के वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण), गोपालगंज और सारण जिलों में गंडक नदी के मैदानी इलाकों में आ गईं।

प्रशासन क्यों कर रहा है इन मछलियों को खाने से मना?

विशालकाय मछलियों को देखकर स्थानीय लोगों में इन्हें खाने की होड़ मच गई है, लेकिन प्रशासन और जिला मत्स्य अधिकारियों ने इसे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है। इसके पीछे मुख्य वैज्ञानिक और चिकित्सीय कारण निम्नलिखित हैं:

 

(A) पानी में जहरीले रसायनों और भारी धातुओं का मिश्रण (Heavy Metal Contamination)

नेपाल में आई बाढ़ सिर्फ पानी नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर चट्टानों, खदानों के मलबे और औद्योगिक कचरे को बहाकर लाई है। गंडक नदी में बहकर आ रही मछलियों में आर्सेनिक, सीसा (Lead) और मरकरी (Mercury) जैसे जहरीले तत्वों की मात्रा अत्यधिक होने की आशंका है, जो मानव शरीर के लिए विषैले साबित हो सकते हैं।

 

(B) दूषित और सड़ी हुई मछलियों का खतरा (Bacterial Contamination)

बाढ़ के तीव्र बहाव में दम घुटने (Oxygen Depletion) और पत्थरों से टकराने के कारण कई मछलियां रास्ते में ही मर चुकी थीं या घायल हो गई थीं। पानी में पड़े रहने से इनमें ई-कोलाई (E-coli) और साल्मोनेला (Salmonella) जैसे खतरनाक जीवाणु पनप चुके हैं। ऐसी मछलियों का सेवन करने से:

  • फूड पॉइज़निंग (Food Poisoning)
  • पेट में गंभीर संक्रमण और उल्टी-दस्त
  • लिवर और किडनी को नुकसान पहुँच सकता है।

(C) एलियन/इन्वेंसिव स्पीशीज (Invasive Species) का खतरा

प्रशासन को यह भी अंदेशा है कि नेपाल के हैचरी से बहकर आई कुछ मछलियां 'सकर-माउथ कैटफिश' (Sucker-mouth Catfish) या 'थाई मांगुर' जैसी विदेशी नस्ल की हो सकती हैं, जिनमें प्राकृतिक रूप से विषाक्तता होती है और ये स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई और एडवाइजरी

  • नदी घाटों पर धारा 144 व पुलिस बल : वाल्मीकिनगर बैराज और गंडक नदी के तटीय इलाकों में लोगों को पानी के पास जाने और जाल बिछाने से रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
  • बाजारों में बिक्री पर रोक : स्थानीय बाजारों में नेपाल से बहकर आई संदिग्ध मछलियों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officers) की टीमें छापेमारी कर रही हैं।
  • सैंपलिंग और लैब जांच: मत्स्य विभाग ने इन मछलियों के सैंपल इकट्ठा करके जांच के लिए लैबोरेटरी भेजे हैं, ताकि पानी और मछली में किसी भी प्रकार के टॉक्सिन (विष) की पुष्टि की जा सके।

नेपाल की बाढ़ से आई ये विशाल मछलियां पहली नजर में भले ही एक अवसर लग रही हों, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि लैब रिपोर्ट आने तक इन मछलियों का सेवन जानलेवा साबित हो सकता है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और नदी से पकड़ी गई संदिग्ध मछलियों को खाने से पूरी तरह परहेज करें।

जीतू पटवारी ने सीएम से मांगा नेहरू स्टेडियम, BJP ने बताया लोगों का मनोरंजन, राहुल गांधी के इंदौर दौरे में फंसा पेच

जीतू पटवारी ने सीएम से मांगा नेहरू स्टेडियम, BJP ने बताया लोगों का मनोरंजन, राहुल गांधी के इंदौर दौरे में फंसा पेच

Rahul Gandhi

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इंदौर में होने वाले आयोजन को लेकर राजनीतिक पेच फंस गया है। कांग्रेस लगातार नेहरू स्‍टेडियम में आयोजन की अनुमति मांग रही है, लेकिन अब तक उन्‍हें कोई जगह कार्यक्रम के लिए नहीं मिल सकी है।

अब प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखकर मांग की है। बता दें कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पत्र लिखकर राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के लिए नेहरू स्टेडियम उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि कांग्रेस के प्रस्ताव को संज्ञान में लेते हुए नेहरू स्टेडियम कार्यक्रम के लिए तत्काल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और शिक्षा की सुरक्षा तथा युवाओं के भविष्य को लेकर पूरे देश में जनजागृति अभियान चला रहे हैं। जीतू पटवारी ने कहा कि यह कार्यक्रम किसी राजनीतिक दल के प्रचार के लिए नहीं है। यह देश के भविष्य, युवाओं के सपनों और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा संवाद है।

उन्होंने कहा कि युवाओं के सपने तभी सुरक्षित रहेंगे, जब शिक्षा सुरक्षित रहेगी। शिक्षा बचेगी तो देश का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। पटवारी ने सरकार से अपील की कि वह कार्यक्रम के महत्व को समझते हुए नेहरू स्टेडियम उपलब्ध करवाए।

Rahul Gandhi

भाजपा ने कांग्रेस को फिर घेरा : दूसरी तरफ राहुल गांधी के प्रस्तावित इंदौर दौरे को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच पत्रों की राजनीति भी तेज हो गई है। भाजयुमो इंदौर महानगर अध्यक्ष सौगात मिश्रा ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष विपिन वानखेड़े को पत्र लिखकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। मिश्रा ने कहा कि भाजपा को राहुल गांधी की किसी यात्रा या सभा की चिंता नहीं होती। बल्कि कांग्रेस ही उनकी सभाओं को लेकर ज्यादा चिंतित रहती है।

मनोरंजन है राहुल की सभाएं: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी की सभाओं में लोग मनोरंजन के लिए जाते हैं और वह मनोरंजन कराने में कोई कसर नहीं छोड़ते। सौगात मिश्रा ने अपने पत्र में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की भाषा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की मातृशक्ति पर शराबी होने का झूठा आरोप लगाकर माताओं और बहनों का अपमान किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को सौजन्यपूर्ण भाव से पत्र लिखा था, लेकिन कांग्रेस ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। भाजयुमो नेता ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने चंडीगढ़ छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई की हार का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की छात्र राजनीति पर सवाल उठाए। पत्र के अंत में सौगात मिश्रा ने राहुल गांधी को सलाह दी कि इंदौर दौरे के दौरान वे देवी अहिल्या माता के दर्शन और नमन जरूर करें।

‘मक्का गठबंधन’ की इस्तांबुल में हुई पहली बैठक, पाकिस्तान को बड़ी जिम्मेदारी

'मक्का गठबंधन' की इस्तांबुल में हुई पहली बैठक, पाकिस्तान को बड़ी जिम्मेदारी

Mecca Defense Alliance

Mecca Defense Alliance: दुनिया भर में अपनी चौधराहट दिखाने का आदी रहा अमेरिका, मध्य-पूर्व में अपनी अब तक की भूमिका से पीछे हट रहा है। इस कारण, वहाँ पैदा होने वाले खालीपन को भरने के लिए तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने 7 अगस्त, 2026 को मक्का में अपना जो नया गठबंधन बनाया था, उसकी पहली बैठक सोमवार, 31 अगस्त को तुर्की के सबसे बड़े शहर इस्तांबुल में हुई।

 

तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फि़दान ने इस बैठक में घोषणा की कि तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के “मक्का डिफेंस अलायंस” (MDA) का सचिवालय सऊदी अरब की राजधानी रियाद में बनाया जाएगा और पाकिस्तान का एक प्रतिनिधि उसका पहला महासचिव होगा। हालांकि, 7 अगस्त को मक्का में हुए इन तीनों देशों के शिखर नेताओं के बीच जो समझौता हुआ था, उसकी कोई सटीक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। ALSO READ: तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

एक पर हमला, सब पर हमले के समान

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की का कहना है कि उनके गठबंधन में शामिल किसी भी देश पर हमले को वे तीनों देशों पर हमला मानेंगे। यह बात अमेरिका और यूरोप वाले “उत्तर अटलांटिक संधि संगठन” नाटो (NATO) जैसी ही एक शर्त है—हालांकि दोनों ही मामलों में, यानी न तो नाटो संधि में और न ही MDA संधि में, यह अनिवार्य नहीं है कि किसी एक देश पर हमला होते ही, बाक़ी देशों को उस देश के पास तुरंत अपनी सेना भेजना या अपनी सेना को वहाँ तैनात करना होगा।

 

“इस्तांबुल पॉलिटिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट” (IstanPol) में तुर्की की विदेश नीति के विशेषज्ञ रिकार्डो गैस्को का कहना है कि शायद यही एक बात है जो दोनों गठबंधनों में एक समान है। उनकी नज़र में, “मक्का डिफेंस अलायंस” असल में कोई गठबंधन नहीं है, बल्कि “हितों का तालमेल” है। उनका तर्क है कि यह ऐसी कोई चीज़ नहीं है “जो नाटो जैसी हो।” ALSO READ: ट्रंप समेत 13 टॉप लीडर ईरान की HIT लिस्ट में, जानिए कौन-कौन हैं वे नेता

एक नई क्षेत्रीय शक्ति का उदय

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने मिलकर अपना एक त्रिगुट बना तो लिया है, पर तीनों देशों की अपनी सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं अलग-अलग हैं, भले ही तुर्की और सऊदी अरब की एक प्रमुख सोच मिलती-जुलती है: यह कि अमेरिका अब मध्य-पूर्व में स्थिरता लाने वाली शक्ति नहीं रहा।

 

अत: इन तीनों मुस्लिम देशों का उद्देश्य मध्य-पूर्व में एक ऐसा “पावर वैक्यूम” (सत्ता का खालीपन) बनने से रोकना लगता है, जिसमें इसराइल या ईरान जैसी कोई दूसरी शक्ति अपनी जगह बना सके। ईरान के साथ चल रहे टकराव के बीच सऊदी अरब को भी बार-बार ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों का निशाना बनाया गया है। सऊदी में मौजूद अमेरिकी सेना के अड्डे अब सुरक्षा-कवच के बजाय सुरक्षा-संकट अधिक बन गए लगते हैं।

 

तुर्की इस इलाके में —विशेषकर सीरिया में— इसराइल की गतिविधियों को अपने लिए बढ़ते ख़तरे के तौर पर देखता है। वैसे, तुर्की ही नहीं, सारा इस्लामी जगत धार्मिक कट्टरता के चलते इसराइल से इतना जलता-भुनता है, कि उसका अस्तित्व ही मिटा देना चाहता है।

 

यही धार्मिक विद्वेष भारत के प्रति पाकिस्तान की अंधी सोच-समझ पर भी हावी है। कर्ज़ में डूबे और भीतर से खंडित होते पाकिस्तान को लगता है कि सऊदी अरब का साथ मिल जाने पर भारत के मामले में उसे इस अरबी धन्नासेठ का राजनीतिक समर्थन ही नहीं, भरपूर धन-धान्य भी मिल सकता है। ALSO READ: बड़बोले ट्रंप की घटिया बेशर्मी, अंकारा में नहीं था Trump को कोई खतरा

नाटो बनाम मक्का?

तुर्की के विदेश मंत्री फिदान के अनुसार, तुर्की का बहुत पहले से ही नाटो जैसे रक्षा गठबंधन का हिस्सा होना कोई विरोधाभास नहीं है; मक्का समझौते का उद्देश्य “मौजूदा ज़िम्मेदारियों और ढांचों के पूरक” के तौर पर काम करना है।

 

“इस्तांबुल पॉलिटिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट” के रिकार्डो गैस्को ने मीडिया से कहा, “तुर्की के लिए नाटो और मक्का समझौते के अलग-अलग लाभ हैं।” तुर्की की सरकार के लिए—जिसने हाल ही में अपने यहाँ नाटो के शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की थी—नाटो ही यूरो-अटलांटिक क्षेत्र में उसकी अपनी सुरक्षा का आधार है।

 

रिकार्डो गैस्को का यह भी कहना है कि मक्का गठबंधन “फ़ारस की खाड़ी, लाल सागर, हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका या दक्षिण एशिया में हर संकट से निपटने के लिए नहीं बनाया गया है।” “इसलिए, मक्का समझौता तुर्की को क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ सीधे सहयोग के लिए एक लचीला ज़रिया देता है।”

 

ट्रंप मक्का समझौते से खुश हैं यूरोपीय संघ के मुख्यालय ब्रसेल्स में, संघ के एक अधिकारी ने बताया कि तुर्की ने अपने NATO सहयोगियों को मक्का समझौते के बारे में पहले ही जानकारी दे दी थी। सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ यह समझौता दो साल से ज़्यादा समय से तैयार किया जा रहा था। तुर्की के सबसे प्रमुख NATO सहयोगी अमेरिका ने इस सारी प्रक्रिया का सकारात्मक रूप से समर्थन किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मक्का समझौते को “एक बड़ा, साहसी और महत्वपूर्ण पहला क़दम” बताया है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई है कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने “आख़िरकार” इस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

तुर्की के रक्षा उद्योग के लिए निर्यात बाज़ार

इस नई साझेदारी से तुर्की को एक और लाभ है: उसे एक आकर्षक निर्यात बाज़ार मिल रहा है। तुर्की का रक्षा उद्योग दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले उद्योगों में से एक माना जाता है। सरकारी रक्षा उद्योग एजेंसी (SSB) के अनुसार, तु्र्की के रक्षा उद्योग ने पिछले साल 10.05 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर मूल्य का सामान निर्यात किया—जो 2024 की तुलना में 48 प्रतिशत ज़्यादा है। तुर्की की “बायकर” (Baykar) कंपनी द्वारा बनाए गए ड्रोन सबसे ज़्यादा बिकने वाले निर्यात उत्पाद हैं।

 

“बायकर” कंपनी के मुख्य तकनीक अधिकारी सेल्चुक बायराक्तार ने, मक्का समझौते के बारे में मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि “खासकर रक्षा उद्योग में हमारे देश की जो वैश्विक महत्वाकांक्षाएँ विकसित हुई हैं, वे नई कूटनीतिक पहलों के लिए रास्ता बना रही हैं।” बायकर कंपनी पहले से ही सऊदी अरब को ड्रोन बेच रही है और वहाँ उनका निर्माण भी कर रही है।

 

बायराक्तार ने बताया, “हमारी कुल कमाई का 90 प्रतिशत हिस्सा निर्यत से आता है। यदि हमने यह टेक्नोलॉजी अपने मित्र और सहयोगी देशों को नहीं दी होती, तो शायद हम इसका दसवां हिस्सा ही कमा पाते।” पाकिस्तान भी पहले से ही बायकर ड्रोन इस्तेमाल कर रहा है और तुर्की की डिज़ाइन के आधार पर युद्धपोत भी बना रहा है।

लक्ष्य : मक्का अलायंस का विस्तार है

मक्का गठबंधन की “रणनीतिक-राजनीतिक और रक्षा समिति” (स्ट्रैटेजिक-पॉलिटिकल एंड डिफेंस कमिटी) की पहली बैठक में, तुर्की के विदेश मंत्री फिदान ने ज़ोर दिया कि यह गठबंधन समय के साथ उसके विस्तार के उद्देश्य से बना है। वह किसी देश के विरुद्ध नहीं है, बल्कि उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमारा क्षेत्र अपनी समस्याओं की ज़िम्मेदारी खुद संभाले।

 

फिलहाल इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले तीनों देश मिलकर उसके प्रथम “स्थापना चरण” को पूरा करना चाहते हैं। जानकारों का मानना है कि इस नए गठजोड़ के पास मध्यपूर्व की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को बदलने की क्षमता है—हालांकि ऐसा तुरंत नहीं होगा, क्योंकि नए साझे ढांचे को बनाने में अभी कई साल लग सकते हैं।

‘कॉकरोच’ कहने पर हिला दी सरकार! पढ़िए CJP आंदोलन से अभिजीत दीपके को मिले 3 सबसे बड़े सबक

‘कॉकरोच’ कहने पर हिला दी सरकार! पढ़िए CJP आंदोलन से अभिजीत दीपके को मिले 3 सबसे बड़े सबक

Gen Z Protests India: बॉस्टन के एक कमरे में बैठा 30 साल का अंतर्मुखी नौजवान—दिमाग में सिर्फ दो बातें: नौकरी और एजुकेशन लोन की अदायगी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अभिजीत दीपके ने कभी नहीं सोचा था कि वे भारत के इतिहास के सबसे बड़े और मुखर छात्र आंदोलनों में से एक की अगुवाई करेंगे।

 

हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स (New York Times) के ओपिनियन वीडियो में अभिजीत दीपके ने उस पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया है कि कैसे एक तंज से भरे ट्वीट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janta Party) का रूप लिया और सत्ता के गलियारों को हिलाकर रख दिया। ALSO READ: NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द; CJP नहीं करेगी प्रोटेस्ट

एक ट्वीट और 5 दिन में 1 करोड़ लोग : आंदोलन की शुरुआत

इस ऐतिहासिक मोड़ की शुरुआत तब हुई जब देश के मुख्य न्यायाधीश ने बेरोजगार युवाओं के एक हिस्से को कथित तौर पर 'कॉकरोच' (ऐसे नौजवान जिन्हें रोजगार नहीं मिलता और समाज में जगह नहीं मिलती) कहकर संबोधित किया।

 

बॉस्टन में बैठे अभिजीत दीपके ने X पर लिखा: “क्या हो अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?”

 

यह सवाल इंटरनेट पर आग की तरह फैला। महज 5 दिनों के भीतर 1 करोड़ लोग इस डिजिटल मुहिम से जुड़ गए—जो भारत की सत्ताधारी पार्टी के कुल सक्रिय सदस्यों से भी ज्यादा थे। दो महीनों के भीतर यह आंकड़ा 2.6 करोड़ के पार पहुंच गया। ALSO READ: CJP ने संगठन में किए बड़े बदलाव, नए पदाधिकारियों का ऐलान, पार्टी ने बताया अब आगे का क्या है प्लान

आंदोलन का तात्कालिक कारण:

  • पेपर लीक और रद्द परीक्षा : लाखों छात्रों द्वारा दी गई राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) में धांधली और पेपर लीक के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी।
  • 20 से ज्यादा छात्रों की खुदकुशी : रिपोर्टों के मुताबिक, इस विवाद के कारण 20 से अधिक अभ्यर्थियों ने हताशा में अपनी जान दे दी।
  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग : युवाओं का गुस्सा उस शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ चरम पर पहुंच गया जहां सालों की मेहनत का सिला सिर्फ बेरोजगारी और पेपर लीक के रूप में मिल रहा था।

अभिजीत दीपके के 3 सबसे बड़े सबक

अभिजीत दीपके ने अपने अनुभव साझा करते हुए जेन-जी और देश के नागरिकों के लिए तीन मुख्य सबक बताए हैं:

 

पहला सबक : किस्मत और सही वक्त (Timing & Opportunity)

अमेरिका में बैठे होने के बावजूद दीपके ने तुरंत भांपा कि भारत का युवा खारिज किए जाने से गुस्से में है। वे कहते हैं कि सरकारें और मीडिया हर रात टीवी डिबेट्स के जरिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और हिंदू-मुसलमान की बहस में असली मुद्दों (जैसे नौकरी और शिक्षा) को दबा देती हैं। लेकिन Gen-Z अलग है—वह मुखर है और कम पर राजी नहीं होती। ALSO READ: CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

 

दूसरा सबक : हिम्मत (Courage in Face of Threat)

जब आंदोलन बढ़ा, तो तंत्र ने उन्हें “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा” बताना शुरू किया।

 

  • भारत लौटने का फैसला : वकीलों ने कहा कि यह पागलपन है, पत्रकारों ने चेतावनी दी कि एयरपोर्ट पर उतरते ही जेल होगी और मां टूट गई थीं।
  • एयरपोर्ट का हाई-ड्रामा : भारत उतरते ही प्लेन में खास अनाउंसमेंट हुई। 15-20 पुलिस अधिकारियों ने उन्हें घेर लिया और एक तैयार लेटर पर साइन करने को कहा। दीपके ने मना कर दिया और पुलिस के सामने बैठकर हाथ से लिखा: “मैं भारत का नागरिक हूं, विरोध प्रदर्शन मेरा लोकतांत्रिक अधिकार है। अगर आपको यह मंजूर नहीं, तो आप मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं।” प्रशासन को झुकना पड़ा और उन्हें जाने दिया गया।

तीसरा सबक : जिद और निरंतरता (Persistence)

दिल्ली के धरनास्थल पर 36 दिनों से ज्यादा प्रदर्शन चला। 200 लोगों से शुरू हुआ आंदोलन हजारों की भीड़ में बदल गया।

 

सबसे बड़ी जीत : डर का टूटना

अभिजीत दीपके का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी जीत शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं है। असली जीत यह है कि पिछले एक दशक से भारत के लोगों के दिलों में सरकार से सवाल पूछने का जो डर बैठा था, वह डर अब टूट चुका है।

 

वे मुख्यधारा के मीडिया पर भी कड़ा हमला बोलते हुए कहते हैं कि गोदी मीडिया को देश के युवाओं की बात सुननी ही पड़ेगी, क्योंकि युवा ही इस देश की बहुसंख्यक आवाज हैं।

 

“शिक्षा कोई व्यापार नहीं, भारत में पैदा हुए हर बच्चे का मौलिक अधिकार है।” — अभिजीत दीपके

 

'कॉकरोच जनता पार्टी' का देशव्यापी अभियान

अब यह आंदोलन केवल एक परीक्षा या मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी अब हर राज्य में जाकर जमीनी समस्याओं, युवाओं के दर्द और उनकी उम्मीदों को समझने के लिए एक देशव्यापी अभियान शुरू कर रही है।

 

Gen-Z अपनी स्क्रीन के जरिए दुनिया भर के लोकतंत्र और अवसरों को देख रही है। वह जानती है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर शिक्षा उनका हक है। जब न रोजी-रोटी संभल रही हो, न बच्चों की पढ़ाई, तो चुपचाप बैठना और शिकायत न करना अब किसी विकल्प में शामिल नहीं है।

इस दिन पूरी रात खुला रहेगा खजराना मंदिर, सवा लाख मोदक का भोग, 6 करोड़ के सोने के आभूषण से सजेंगे गजानन

इस दिन पूरी रात खुला रहेगा खजराना मंदिर, सवा लाख मोदक का भोग, 6 करोड़ के सोने के आभूषण से सजेंगे गजानन

Khajrana Temple

इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में हजारों लाखों श्रद्धालुओं की आस्‍था है। यहां रोजाना हजारों लोग दर्शन के लिए आते हैं। इंदौर का तो कोई भी नागरिक बगैर खजराना गणेश के दर्शन के अपना कोई नया काम शुरू नहीं करता। अब गणेश चतुर्थी पर यहां विशेष तौर पर तैयारी की जा रही है।

मंदिर में होने वाले आयोजनों, भगवान के श्रृंगार, सजावट, प्रसाद और भोग, लाइटिंग, भक्तों की दर्शन व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था सहित अन्य तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर परिसर में 80 से ज्यादा CCTV कैमरों से नजर रखी जाएगी। व्यवस्था के लिए चार थानों का पुलिस बल भी तैनात रहेगा। मंदिर प्रबंधन समिति के 30 सुरक्षा गार्ड यहां नियमित रूप से तैनात रहते हैं। गणेशोत्सव के दौरान इनकी संख्या बढ़ाकर 100 की जाएगी।

सवा लाख मोदकों का भोग : इस बार भी गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को सवा लाख मोदकों का भोग लगाया जाएगा। गणेशोत्सव का शुभारंभ 14 सितंबर को सुबह 10 बजे ध्वजा पूजन के साथ होगा। कलेक्टर एवं मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष शिवम वर्मा और निगम कमिश्नर एवं मंदिर के प्रशासक क्षितिज सिंघल ध्वजा पूजन करेंगे। सवा लाख मोदक बनाने का काम भी जल्द मंदिर परिसर में शुरू होगा।

रातभर होंगे गजानन के दर्शन : गणेशोत्सव से एक दिन पहले हरतालिका तीज को लेकर भी मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट ने बताया कि 13 सितंबर को हरतालिका तीज पर मंदिर रातभर भक्तों के दर्शन के लिए खुला रहेगा। यानी मंदिर 24 घंटे खुला रहेगा। पंडित अशोक भट्ट ने बताया कि गणेशोत्सव पर हर साल मंदिर में भगवान गणेश को सवा लाख मोदकों का भोग लगाया जाता है। इस साल भी सवा लाख मोदक भगवान को अर्पित किए जाएंगे। इसके अलावा 10 दिनों तक शाम की आरती के समय अलग-अलग प्रकार के 11 हजार लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। इसमें सोंठ, ड्रायफ्रूट, उड़द आदि के लड्डू शामिल होंगे।

6 करोड़ के स्वर्ण आभूषणों से श्रृंगार: गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश का रोजाना भव्य श्रृंगार किया जाएगा। भगवान को स्वर्ण आभूषण पहनाए जाएंगे। इन स्वर्ण आभूषणों की कीमत 6 करोड़ रुपए से ज्यादा है। आभूषणों को पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ मंदिर में लाया जाता है। इसके बाद भगवान गणेश को ये स्वर्ण आभूषण धारण कराए जाते हैं। यह श्रृंगार विशेष होता है। पूरे 10 दिनों तक भगवान के अलग-अलग स्वरूपों में श्रृंगार देखने को मिलेगा।

इंदौर में बारिश में भी पानी का संकट, अब भी चल रहे 350 टैंकर, बोरवेल भी सूख रहे, गर्मियों में क्या होगा हाल?

इंदौर में बारिश में भी पानी का संकट, अब भी चल रहे 350 टैंकर, बोरवेल भी सूख रहे, गर्मियों में क्या होगा हाल?

indore water crisis

  • 18 इंच बारिश के बाद भी सूखे हैं इंदौर के बोरवेल
  • हर साल जुलाई में बंद हो जाता है टैंकर से पानी सप्‍लाय
  • इस बार अगस्‍त में भी चल रहे पानी सप्‍लाय के लिए टैंकर
  • अगले साल गर्मी में क्‍या होगा इंदौर का हाल

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में इस बार मानसून सीजन के दौरान चिंताजनक स्थिति देखने को मिल रही है। शहर में करीब 18 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, इसके बावजूद भू-जल स्तर (Groundwater Level) में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। आलम यह है कि जो निजी टैंकर अमूल्य रूप से सिर्फ गर्मियों में संकट से निपटने के लिए चलाए जाते थे, वे इस बार अगस्त का महीना बीतने को होने के बावजूद शहर में पानी की सप्लाई में जुटे हुए हैं।

सामान्य तौर पर जुलाई की बारिश के बाद टैंकरों की जरूरत खत्म हो जाती है, लेकिन मौजूदा हालात ने नगर निगम और आम नागरिकों दोनों की नींद उड़ा दी है। बता दें कि कई इलाकों के बोरिंगों में भी भरपूर पानी नहीं आ रहा है और कई मल्टियों में अभी भी पानी की पूर्ति के लिए टैंकर मंगाने पड़ रहे हैं।

संकट के लिए तैयार रहे इंदौर: यदि सितंबर माह में भरपूर बारिश नहीं होती है तो फिर अगले साल शहरवासियों को जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है। शहर के बड़े हिस्से की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर तालाब में 13 फीट पानी है, जबकि तालाब की क्षमता 19 फीट है। अभी भी तालाब में छह फीट पानी की आवश्यकता है। शहर के बिलावली, पिपलियापाला और पिपलियाहाना तालाब भी आधे खाली हैं। पिपलियाहाना तालाब को भरने के लिए नगर निगम सड़कों पर बहने वाले पानी को पाइपों के जरिए चैनल से तालाब तक लाया, लेकिन कम वर्षा होने के कारण तालाब खाली है।पिछले साल अगस्त माह तक कई तालाब भर चुक थे और अतिरिक्त पानी तालाबों से चैनलों के जरिए बाहर निकाला गया था।

जुलाई तक हो जाता है वाटर रिचार्ज: बता दें कि सामान्य मानसून में जुलाई तक भू-जल स्तर रिचार्ज हो जाता है और बोरवेल अपनी क्षमता के अनुसार पानी देने लगते हैं। इस साल 18 इंच बारिश होने के बाद भी कई इलाकों में बोरवेल सूखने लगे हैं। कई निजी बोरिंग में भी पानी कम आने लगा है।

अब भी चल रहे निजी टैंकर: नगर निगम सीमा के अंतर्गत अभी भी लगभग 350 निजी टैंकर पानी सप्लाई के लिए संचालित हो रहे हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जल वितरण नेटवर्क और प्राकृतिक स्रोत दोनों दबाव में हैं। बारिश के दिनों में लगातार अच्छी मानसूनी गतिविधियों की कमी और भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन के कारण यह संकट और गहराया है।

गर्मियों में संकट लेगा विकराल रूप: अगर अगस्त में भी टैंकरों की आवश्यकता पड़ रही है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगामी गर्मी के मौसम में जल संकट कितना भीषण हो सकता है, इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। बता दें कि पिछले साल भी इंदौर में पानी का संकट गहराया था और निगम को कई टैंकर चलाने पडे थे।

भू-जल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) की विफलता: यह इस बात का भी प्रमाण है कि शहर में कंक्रीट का दायरा बढ़ने और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के सही ढंग से काम न करने के कारण बारिश का पानी जमीन के अंदर जाने के बजाय बहकर निकल जाता है।

वाटर हार्वेस्टिंग ऑडिट में बरतना होगी सख्ती : शहर की बड़ी कॉलोनियों, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और सरकारी इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अनिवार्यता की सख्त जांच हो। नर्मदा जल पाइपलाइन नेटवर्क में होने वाले लीकेज को तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि पानी की एक-एक बूंद बचाई जा सके। इसके साथ ही शहर के पारंपरिक तालाबों और बावड़ियों का गहरीकरण और सौंदर्यीकरण समय रहते पूरा किया जाए तो पानी के संकट से कुछ हद तक बचा जा सकता है।

हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

himalaya

संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन की एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि हिमालय क्षेत्र में भविष्य में ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा है। इसके चलते ना सिर्फ जलविद्युत ऊर्जा पर संकट छा जाएगा बल्कि नदियों के तटों के पास रहने वाले लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ सकते हैं। ALSO READ: क्या तिब्बत में आपदा के नुकसान को छिपा रहा है चीन?

यूएन की सहायक महासचिव कन्नी विग्नराजा ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि लाखों की संख्या में लोग इस खतरे से प्रभावित हो सकते हैं।  शोधकर्ताओं ने साल 2020 में नेपाल, चीन और भारत में 47 संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियर झीलों की पहचान की थी। बाद में अनुमान लगाया गया कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

 

कन्नी विग्नराजा ने कहा कि हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर फ्लड के साथ-साथ ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा भी बढ़ रहा है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के चलते ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार तेज हो गई है। ALSO READ: नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

 

नेपाल में पिछले हफ्ते विनाशकारी बाढ़ भी एक ग्लेशियर के कुछ हिस्सों के टूटकर गिरने की वजह से आई थी। इस बाढ़ में अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत होने की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल के 10 से अधिक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी इसकी चपेट में आए। इन परियोजनाओं की सुरंगों में भी बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें बचाए जाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन अभी तक कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली है। 

तमिलनाडु की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी TET पर शिक्षकों को राहत देने की उठी मांग

तमिलनाडु की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी TET पर शिक्षकों को राहत देने की उठी मांग

umang singhar

भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे समय से चल रहा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता का विवाद एक बार फिर सियासी मुद्दा बन गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर TET के मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। सिंघार ने तमिलनाडु की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी पुराने शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की मांग की है। 

 

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पूरे मुद्दें को उठाते हुए  कहा कि  TET की अनिवार्यता से प्रदेश में लंबे समय से सेवाएं दे रहे करीब 1.50 लाख शिक्षक और उनके परिवार प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा की अनिवार्यता का सीधा असर शिक्षकों की सेवा-निरंतरता, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों पर पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को शिक्षकों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस मामले में गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। 

 

नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में तमिलनाडु विधानसभा के 25 अगस्त 2026 के प्रस्ताव का हवाला दिया है। तमिलनाडु विधानसभा ने 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से स्थायी छूट देने तथा उनकी सेवा और पदोन्नति संबंधी हितों के संरक्षण की मांग की है। प्रस्ताव में केंद्र से शिक्षा का अधिकार अधिनियम में आवश्यक संशोधन करने और संबंधित दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह भी किया गया है।  इसी आधार पर सिंघार का तर्क है कि मध्यप्रदेश में भी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर शिक्षकों की स्थिति पर चर्चा की जाए और तमिलनाडु की तर्ज पर राहत का रास्ता निकाला जाए।

 

राहुल गांधी तक पहुंचा शिक्षकों का मुद्दा- वहीं TET को लेकर शिक्षकों के एक संगठन के  प्रतिनिधियों ने दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर उनसे दखल देने की मांग की है।संगठन ने राहुल गांधी से शिक्षकों के पक्ष में हस्तक्षेप करने और इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की मांग की। संगठन के अनुसार, राहुल गांधी ने शिक्षकों की बात सुनी और इस मुद्दे को उठाने का भरोसा दिया।  शिक्षक संगठनों का दावा है कि यह केवल मध्यप्रदेश का मामला नहीं है, बल्कि देशभर में करीब 25 लाख शिक्षक इससे प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में वे चाहते हैं कि TET को लेकर केंद्र स्तर पर भी स्पष्ट निर्णय लिया जाए।

 

TET पर शिक्षकों की क्या हैं मांगें?-TET की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांग है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से पूर्ण और स्थायी छूट दी जाए। संगठनों का तर्क है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय लागू नियमों और निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के आधार पर हुई थी। वर्षों तक सेवा देने के बाद अब उन पर नई पात्रता शर्त लागू करना उनके लिए नौकरी की सुरक्षा और भविष्य को लेकर गंभीर संकट पैदा कर रहा है।

 

शिक्षक संगठन केवल TET से छूट ही नहीं, बल्कि वरिष्ठता, पदोन्नति, सेवा-निरंतरता और अन्य सेवा लाभों का संरक्षण भी चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार परीक्षा आयोजित करती है तो लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग और व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए। मध्यप्रदेश में 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को लेकर यह मांग विशेष रूप से जोर पकड़ रही है। 

 

 

चांद या मंगल पर कैसा होगा इंसानों का आशियाना? भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने शेयर किया खास ‘BHEEM’ प्रोजेक्ट का वीडियो

चांद या मंगल पर कैसा होगा इंसानों का आशियाना? भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने शेयर किया खास 'BHEEM' प्रोजेक्ट का वीडियो

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भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने सोशल मीडिया पर 'BHEEM' (भारतीय रहने योग्य विस्तार योग्य अलौकिक आवास) प्रोजेक्ट का वीडियो साझा किया है। आईआईएससी बेंगलुरु की आलोक लैब में तैयार इस तकनीक से इंसानों के चंद्रमा या मंगल ग्रह पर रहने का रास्ता साफ हो सकता है। ALSO READ: Priya Adhikari कौन हैं , नेपाल बाढ़ के बीच 6 दिन में किए 100 रेस्क्यू मिशन, सैकड़ों जिंदगियां बचाईं

 

शुक्ला ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, बी.एच.ई.ई.एम. (B.H.E.E.M.) — भारतीय रहने योग्य, विस्तार योग्य, अलौकिक आवास (Bharatiya Habitable Expandable Extraterrestrial Habitat)।  जब हम रूस में अपनी ट्रेनिंग पूरी करके लौटे, तो हमने अपने अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण के भारतीय चरण की शुरुआत की। इसमें लॉन्च व्हीकल और ऑर्बिटल मॉड्यूल के सिस्टम को सीखना, साथ ही व्यापक शारीरिक और अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण शामिल था। लेकिन हमारे प्रशिक्षण का एक और, काफी अलग पहलू भी था—एकेडमिक रिसर्च।

 

उन्होंने कहा कि हमें भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण से संबंधित किसी विषय को चुनने, उसकी अपनी समझ को गहरा करने और, उम्मीद है कि, भारत के भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए उपयोगी हो सकने वाला कुछ योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। मैंने उस अंतरिक्ष यान से आगे की सोचना तय किया जिसमें हम उड़ान भरने की ट्रेनिंग ले रहे थे और इस बारे में सोचना शुरू किया कि उतरने के बाद मनुष्य कहाँ रह सकते हैं।

 

शुक्ला ने कहा कि मेरा शोध का क्षेत्र बाह्य अंतरिक्ष आवास (एक्सट्राटेरेस्ट्रियल हैबिटेट्स) था—ऐसी तकनीकें और अवधारणाएं जो अंततः इंसानों को पृथ्वी से परे रहने और काम करने की अनुमति दे सकती हैं। उस काम का परिणाम अंततः iisc bangalore की आलोक लैब में B.H.E.E.M. के रूप में सामने आया।

 

अनगिनत विशाल चुनौतियों को हल करना बाकी

भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि चंद्रमा, मंगल या अन्य बाह्य अंतरिक्ष गंतव्यों पर इंसानों की स्थायी उपस्थिति स्थापित होने से पहले अनगिनत विशाल चुनौतियों को हल करना बाकी है।

 

उन्होंने कहा कि विकिरण और अत्यधिक तापमान से लेकर जीवन रक्षक प्रणालियों, ऊर्जा, निर्माण और इस सीधे से सवाल तक कि—हम कहां रहेंगे? ठीक यही कारण है कि हमें आज से ही इस बारे में सोचना शुरू करने की आवश्यकता है। 

 

क्या होगा दूसरी दुनिया में आवास बनाने की दिशा में पहला कदम?

शुक्ला ने अनुसार, यदि हम चाहते हैं कि आज से 20 साल बाद इंसान पृथ्वी से परे रहें, तो इस पर काम आज से 20 साल बाद शुरू नहीं हो सकता। इसकी शुरुआत आज ही करनी होगी। किसी दूसरी दुनिया में आवास बनाने की दिशा में पहला कदम शायद उसकी पहली ईंट रखना न हो। यह केवल यह कल्पना करने की हिम्मत जुटाना हो सकता है कि वह आवास कैसा दिख सकता है।