LIVE: CBI करेगी दिशा सालियान मामले की जांच

LIVE: CBI करेगी दिशा सालियान मामले की जांच

disha salian

Latest News Today Live Updates in Hindi : बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिशा सालियान मामले में सीबीआई को FIR दर्ज करने का आदेश दिया। पल पल की जानकारी…

-बॉम्बे हाई कोर्ट ने CBI को दिशा सालियन की मौत के मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट का कहना है कि इस मामले की CBI जांच होनी चाहिए।

-दिशा के पिता सतीश सालियान की ओर से दायर उस याचिका पर यह फैसला आया है, जिसमें उन्होंने साल 2020 में हुई अपनी बेटी की मौत के कारणों और परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए थे। 

पति ने छोड़ा साथ, तीन बेटों की जिम्मेदारी… फिर भी नहीं टूटी बबीता, ठेले से दुकान तक पहुंची ‘आत्मनिर्भरता’ की कहानी

पति ने छोड़ा साथ, तीन बेटों की जिम्मेदारी… फिर भी नहीं टूटी बबीता, ठेले से दुकान तक पहुंची ‘आत्मनिर्भरता’ की कहानी

babita sharma

जिंदगी जब मुश्किलों से घिर जाती है तो अक्सर इंसान रास्ते तलाशना छोड़ देता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की बबीता शर्मा आज महिलाओं के लिए मिसाल बन गई है। नंदग्राम की रहने वाली बबीता ने मुश्किलों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया। पति ने जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ा तो उनके ऊपर तीन बेटों की जिम्मेदारी आ गई। आर्थिक हालात ने हर कदम पर परीक्षा ली, लेकिन बबीता ने हार नहीं मानी। सड़क किनारे पूजा सामग्री बेचने से शुरू हुआ सफर आज एक दुकान तक पहुंच चुका है। ALSO READ: गन्ने के खेत से विदेशी बाजार तक पहुंची यूपी की एक्सपोर्ट चेन, निर्यात नीति ने बदली तस्वीर

 

बबीता की यह कहानी अब सिर्फ गाजियाबाद की गलियों तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 137वें एपिसोड में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के लाभार्थियों का जिक्र करते हुए बबीता शर्मा का नाम लिया। पीएम मोदी ने बताया कि योजना के लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं हैं और लगभग 35 लाख महिलाएं इस योजना का लाभ लेकर अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं।
 

जब जिंदगी ने ली सबसे कठिन परीक्षा

कोविड काल वर्ष 2022 बबीता की जिंदगी में ऐसा मोड़ लेकर आया, जिसने उनके सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दीं। पति वेल्डिंग का काम करते है, लेकिन उन्होंने और बच्चों और बबीता की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया। ऐसे में तीन बेटों की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई। हालात बिगड़ने पर बबीता बच्चों को लेकर अपने मायके नंदग्राम आ गईं।

 

मायके में आकर तीन बच्चों को पढ़ाना और उनका भविष्य बनाना आसान नही था, जेब में पूंजी नहीं थी, लेकिन कुछ कर दिखाने का जज्बा जरूर था बबीता के पास। शुरूआती दौर में बबीता से बहुत कम पूंजी से सड़क किनारे ठेला लगाकर छोटा-मोटा सामान बेचना शुरू कर दिया, इसी ठेले पर पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री रखकर बच्चों का खर्च उठाया। ग्राहक बबीता के पास पूजा सामग्री के लिए आते, लेकिन पूरा सामान न मिलने पर वापस लौट जाते थे। बबीता व्यवसाय बढ़ाना चाहती थी, लेकिन आर्थिक तंगी सामने खड़ी हो जाती। यहीं से बबीता के संघर्ष का अगला अध्याय शुरू हुआ। ALSO READ: GPS से होगी गन्ना ढुलाई की लाइव ट्रैकिंग, 24 घंटे में चीनी मिल पहुंचेगा गन्ना, योगी सरकार का बड़ा डिजिटल बदलाव

 

10 हजार रुपये ने जगाई उम्मीद

वर्ष 2022 में किसी के माध्यम से बबीता को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया और उन्हें पहली बार 10 हजार रुपये का ऋण मिला।

 

यह पूंजी भले ही बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन बबीता के लिए यह उनके सपनों की पहली सीढ़ी थी। उन्होंने इस पैसे से अपने कारोबार को बढ़ाया। सड़क किनारे ठेले से शुरू हुआ काम धीरे-धीरे एक खोखे तक पहुंच गया।

 

बबीता ने समय से पहली ऋण राशि समय से चुकाई। इसके बाद उन्होंने दोबारा योजना के तहत आवेदन किया और उन्हें 20 हजार रुपये का ऋण मिला। बढ़ती पूंजी के साथ उनके कारोबार का विस्तार भी बढ़ता गया। उन्होंने तीसरी बार में 50 हजार का ऋण लिया, जिससे उसकी किस्मत के दरवाजे भी खुल गए।

 

ठेले से बाजार की दुकान तक

अब मेहनत रंग लाई। बबीता ने बाजार में किराये पर दुकान ली और पूजा सामग्री का कारोबार शुरू किया। जो काम कभी सड़क किनारे कुछ सामान के साथ शुरू हुआ था, वह अब एक पहचान बन चुका है।

 

यह बदलाव सिर्फ दुकान की चारदीवारी का नहीं था। बबीता के लिए यह आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत थी।

 

उनकी कहानी बताती है कि किसी महिला को अवसर और थोड़ी आर्थिक मदद मिल जाए तो वह न सिर्फ अपने परिवार को संभाल सकती है, बल्कि खुद रोजगार खड़ा कर दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।

 

‘मोदी जी मेरे लिए पिता और भाई जैसे हैं’

‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री द्वारा अपना नाम लिए जाने पर बबीता भावुक हैं। उनका कहना है कि जिस समय उनके सामने कोई रास्ता नहीं था, उस समय प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने उन्हें आगे बढ़ने का सहारा दिया।

 

बबीता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने लिए माता-पिता जैसा मानती हैं। उनका कहना है कि पीएम मोदी द्वारा ऐसी कल्याणकारी योजना ने आगे बढ़ने का अवसर दिया, उसी के कारण आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं। प्रधानमंत्री के मुंह से अपना नाम सुनना उनके लिए जिंदगी के सबसे खास पलों में से एक है। ALSO READ: स्वयं सहायता समूहों से जुड़े सवा करोड़ ग्रामीण परिवारों की बदली तकदीर

 

बबीता की सफलता पर गाजियाबाद को गर्व

बबीता शर्मा का नाम प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में आने के बाद गाजियाबाद प्रशासन में भी खुशी का माहौल है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने इसे पूरे जिले के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि बबीता की कहानी जिले की हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेगी।

 

मुख्यमंत्री की ओर से भी बबीता की सफलता की सराहना किए जाने की बात सामने आई है। प्रशासन का मानना है कि बबीता जैसी कहानियां सरकारी योजनाओं के उद्देश्य को जमीन पर साकार होते हुए दिखाती हैं।

 

‘एक छोटी शुरुआत भी बदल सकती है पूरी जिंदगी’

 

बबीता की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि संसाधन कम हो सकते हैं, लेकिन हौसला कम नहीं होना चाहिए।

 

एक महिला, जिसने कभी सड़क किनारे सामान बेचकर अपने बच्चों का भविष्य संभालने की कोशिश शुरू की थी, आज अपनी दुकान के जरिए आत्मनिर्भर जीवन जी रही है। उनका सफर उन लाखों महिलाओं के लिए उम्मीद है, जो आर्थिक परेशानियों के कारण अपने सपनों को रोक देती हैं।

 

बबीता ने साबित कर दिया है कि सरकारी योजना का लाभ जब मेहनत और हौसले से जुड़ता है, तो 10 हजार रुपये की मदद भी किसी की जिंदगी बदलने की शुरुआत बन सकती है।

 

जिला प्रशासन ने सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील की है, उन्होंने कहाकि की नागरिक जिलाधिकारी कार्यालय, डूडा, नगर निगम और विकास भवन से संपर्क करके योजना के लाभार्थी बन सकते है। वहीं महिलाओं की कल्याणकारी योजनाओं के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

राम मंदिर को आज मिल सकता है पहला CEO, 3 नामों का पैनल तैयार

राम मंदिर को आज मिल सकता है पहला CEO, 3 नामों का पैनल तैयार

ayodhya ram mandir ceo

अयोध्या राम मंदिर के CEO के लिए 3 नाम हुए शॉर्टलिस्ट कर लिए गए हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आज मंदिर के पहले CEO के नाम का एलान कर सकता है। सचिव पद पर भी आधिकारिक घोषणा हो सकती है। ट्रस्ट में 2 सदस्यों पद पर भी बुधवार को नियुक्ति की जा सकती है।

 

करीब दो माह चली चयन प्रक्रिया के बाद चयन समिति ने तीन अभ्यर्थियों का पैनल तैयार किया है। समिति ने मंगलवार को इन नामों को ट्रस्ट को सौंप दिया। अब समिति की सिफारिश के आधार पर ट्रस्ट नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा। कहा जा रहा है कि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजेश पांडेय का नाम सीईओ पद की दौड़ में सबसे आगे है। अब सभी की नजरें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर है। 

 

बैठक में शामिल होने के लिए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि, सदस्य शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद, सदस्य युगपुरुष स्वामी परमानंद अयोध्या पहुंच गए हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास, अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन, सदस्य महांत दिनेंद्रदास, पदेन सदस्य जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी भी अयोध्या में हैं।

 

राम मंदिर का CEO एक तरह से मंदिर के प्रशासनिक और मैनेजमेंट प्रमुख की भूमिका निभाएगा। ट्रस्ट नीति तय करेगा और CEO उस नीति को प्रभावी तरीके से लागू कराने की जिम्मेदारी संभालेगा।

होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का लगभग पूरा कंट्रोल? ट्रंप के दावे से मचा हड़कंप ; तेल के दाम चढ़े

होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का लगभग पूरा कंट्रोल? ट्रंप के दावे से मचा हड़कंप ; तेल के दाम चढ़े

strait of hormuz

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर अब अमेरिका का लगभग पूरा कंट्रोल है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी अर्थव्यवस्था क्रैश की ओर बढ़ रही है। हालांकि ईरान ने इसका खंडन किया है। ALSO READ: India-Russia Defence Deal : भारत को S-500 और Su-57 की पेशकश, रूस ने बढ़ाया रक्षा सहयोग का हाथ

 

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर अपनी पोस्ट में कहा,  'मैं ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश नहीं कर रहा हूं, जैसा कि ABC फेक न्यूज ने रिपोर्ट किया है. मुझे जरा भी परवाह नहीं है 

 

कि वे एक बेकार समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं या नहीं। मुझे हमारी वर्तमान स्थिति कहीं बेहतर लगती है, जिसमें होर्मुज पर लगभग पूर्ण नियंत्रण है और उनकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद हो रही है।

 

गौरतलब है कि ट्रंप इससे पहले भी कई बार दावा कर चुके हैं कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को खारिज किया है और कहा है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नियंत्रण अभी भी उसके पास है। ALSO READ: Trump का खर्ग द्वीप पर बड़ा दावा, कहा- 'पूरी तरह तबाह'; होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फिर आमने-सामने अमेरिका-ईरान

 

अमेरिका का चाबहार और केशम द्वीप पर हमला

अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान में चाबहार और केशम द्वीप समेत कई अहम ठिकानों पर मिसाइलों से हमला किया। IRGC के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई होर्मुज में कमर्शियल शिप और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर ईरान की ओर से किए गए हालिया हमलों के जवाब में किया गया। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ईरान ने इस हमले का जवाब दिया, तो उसे और भी सख्त परिणाम भुगतने होंगे।

 

कच्चा तेल 96 डॉलर पार

दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से कच्चे तेल के दाम फिर आसमान पर पहुंच गए। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया तो WTI क्रूड भी 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है। इंडियन बास्केट में कच्चे तेल की कीमत 90.53 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

योगी सरकार 15 सितंबर से 14 अक्टूबर तक चलाएगी अनुरक्षण माह

योगी सरकार 15 सितंबर से 14 अक्टूबर तक चलाएगी अनुरक्षण माह

 

 

 

 

 

 

उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को और मजबूत, भरोसेमंद एवं चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए योगी सरकार ने आगामी नवरात्र, दशहरा और दीपावली को देखते हुए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन की ओर से 15 सितंबर से 14 अक्टूबर 2026 तक अनुरक्षण माह मनाया जाएगा। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं उप्र. पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने सभी वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों को विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए हैं।

 

डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु के दौरान अधिक तापमान, बढ़े हुऐ विद्युत भार, वर्षा, आंधी- तूफान तथा अन्य कारणों से वितरण तंत्र के विभिन्न उपकरणों पर अधिक दबाव पड़ा है। इसके कारण कई क्षेत्रों में वितरण परिवर्तकों, फीडरों, 33 केवी एवं 11 केवी लाइनों, एलटी लाइनों तथा अन्य उपकरणों में खराबियां हुई हैं और विद्युत आपूर्ति में बार-बार व्यवधान की स्थिति उत्पन्न हुई है। 

 

15 सितंबर से 14 अक्टूबर तक अनुरक्षण माह

 

आगामी नवरात्र, दशहरा, दीपावली एवं अन्य पर्वों के दौरान उपभोक्ताओं को निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। इस उद्देश्य से ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु के दौरान वितरण तंत्र में उत्पन्न कमियों को दूर करने, बार-बार होने वाली खराबियों एवं फीडर ट्रिपिंग को खत्म करने तथा वितरण तंत्र को आगामी पर्वों के लिए तैयार करने के लिए 15 सितम्बर से 14 अक्टूबर तक की अवधि को अनुरक्षण माह के रूप में मनाये जाने का निर्णय लिया गया है।

 

खराबियों का होगा स्थायी समाधान, ट्रिपिंग पर लगेगी रोक

 

अनुरक्षण माह का उद्देश्य वितरण तंत्र में मौजूद वास्तवित कमियों को दूर करना है तथा विद्युत व्यवधान, फीडर ट्रिपिंग एवं परिवर्तक क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं में वास्तविक कमी लायी जा सके। अनुरक्षण माह के दौरान सभी 33/11 केवी उपकेंद्रों, शक्ति परिवर्तकों और वितरण परिवर्तकों की गहन जांच, साफ सफाई और मरम्मत का कार्य किया जाएगा। साथ ही जहां-जहां बार-बार खराबी आ रही है, वहां उसके मूल कारण को खोजकर उसका स्थायी समाधान किया जाएगा। जर्जर तारों, ढीले संयोजनों और क्षतिग्रस्त उपकरणों को बदला जाएगा। प्रत्येक परिवर्तक पर उसकी क्षमता के अनुसार उचित मानक के सुरक्षा तार लगाए जाएंगे और जुगाड़ से लगाए गए तारों को हटाया जाएगा।

 

पेड़ों की डालियों की सघन छंटाई युद्ध स्तर पर

 

बिजली लाइनों के आस-पास उगी पेड़ों की डालियों की सघन छंटाई युद्ध स्तर पर कराई जाएगी, क्योंकि अक्सर यही डालियां आंधी में लाइनों से टकराकर आपूर्ति बाधित करती हैं। इसके साथ ही पोषकों के मापक यंत्रों की जांच भी की जाएगी। ताकि आपूर्ति की विश्वसनीयता को सही ढंग से परखा जा सके। इसको लेकर यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने निर्देश दिया है कि सभी खंड दस सितंबर तक अपने-अपने क्षेत्र की कार्य योजना तैयार कर लें और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था पहले से कर ली जाए ताकि कार्य में कोई रुकावट न आए। त्योहारों के दिनों में बिजली बंद करने से बचा जाएगा और बंदी इस प्रकार नियोजित की जाएगी कि उपभोक्ताओं को कम से कम परेशानी हो।

     

वरिष्ठ अधिकारी फील्ड में जाकर उपकेंद्रों का अचानक करेंगे निरीक्षण 

 

अभियान की गंभीरता को देखते हुए निगरानी के कड़े निर्देश दिए गए हैं। प्रबंध निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी फील्ड में जाकर उपकेंद्रों का अचानक निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण वाले उपकेंद्रों की सूची पहले से जारी नहीं की जाएगी ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। कार्यों का सत्यापन 21 से 27 अक्टूबर के बीच निगम और मुख्यालय स्तर से कराया जाएगा। अध्यक्ष ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से इस अभियान को पूरी निष्ठा एवं परीश्रम के साथ सफल बनाने का आह्वान किया है।

क्या तिब्बत में आपदा के नुकसान को छिपा रहा है चीन?

क्या तिब्बत में आपदा के नुकसान को छिपा रहा है चीन?

Tibet Flood

निखिल रंजन

नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाके में जिस विनाशकारी बाढ़ से नेपाल में हजारों लोगों के मरने और लापता होने की खबर दे रहा वहीं तिब्बत में हुए इस आपदा से हुए नुकसान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं आ रही है। भारत के धर्मशाला में रह रहे निर्वासित तिब्बती लोगों ने चीनपर आरोप लगाया है कि वह इस बारे में जानकारी छिपा रहा है। चीन ने इन आरोपों को, “दुर्भावना से छवि खराब करना और सनसनीखेज” बनाने की कोशिश कह कर खारिज किया है। ALSO READ: नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

 

चीन इस ऊंचे पठारी इलाके को अपना अटूट हिस्सा मानता है और यहां अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों का लंबे समय से विरोध करता आया है और इसे अपनी संप्रभुता को चुनौती के रूप में देखता है।

 

ऐसी खबरें आ रही हैं कि विदेशी पत्रकारों को तिब्बत से रिपोर्टिंग करने से रोका जा रहा है। चीनी अधिकारियों ने इलाके की खबरों की स्रोतों पर कड़ा पहरा बिठा रखा है।

 

चीन की सरकारी मीडिया ने खबर दी है कि तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया है कि सूचना का प्रवाह, “खुला, पारदर्शी और समय से” है।

 

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने मंगलवार, 1 सितंबर को कहा कि आपात सेवा के कर्मचारी जिंदा बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं और एक प्रमुख हाइवे को दोबारा खोलने की कोशिश कर रहे हैं। सरकारी प्रसारक सीसीटीवी ने कीचड़ भरी उफनती नदी से मलबा हटाते मशीनों की तस्वीरें दिखाई हैं।

 

चीन के अधिकारियों ने 10 लोगों को ऑनलाइन गलत जानकारी देने के आरोप में सजा भी दी है। इन लोगों का कहना था कि लापता और मृत लोगों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों की तुलना में बहुत ज्यादा है। ALSO READ: नेपाल आपदा के बाद भारत ने हिमालय पर निगरानी बढ़ाई

 

तिब्बत में टूटे घर     

निर्वासित तिब्बती लोग सरकार के दावों को गलत बता रहे हैं। भारत से चलने वाले निर्वासित लोगों के तिब्बत रेडियो का कहना है कि उसने 25 लोगों के मरने की जानकारी जुटाई है। इनमें 15 लोग सीमावर्ती क्षेत्र के हैं और 10 लोग वहां कारोबार और काम के लिए आए थे।

 

भारत में रह रहे निर्वासित तिब्बतियों ने आपदा की मार सबसे ज्यादा झेलने वाले ग्यिरोंग इलाके में परिवारों से भी संपर्क किया था। इन लोगों के मुताबिक पांच गांव प्रभावित हुए हैं।

 

परिवारों की सुरक्षा को लेकर डर की वजह से इन लोगों ने नाम जाहिर नहीं करने को कहा है। इनका कहना है कि तिब्बत में लोगों के अंतिम संस्कार हो रहे हैं और कम से कम 24 लोगों की मौत हुई है।

 

निर्वासित तिब्बतियों के मुताबिक रिश्तेदारों ने उन्हें बताया कि वहां बड़ी संख्या में ल्हासा और शिगात्से के मजदूर प्रभावित इलाके में पुल बनाने की परियोजनाओं में काम कर रहे हैं। आपदा के बाद ये लोग कहां हैं इसकी जानकारी नहीं है।

 

कुछ अधिकार समूह भी चीन की बताई संख्या पर सवाल उठा रहे हैं। इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत के अध्यक्ष तेनचो ग्यात्सो ने चीन से, “नुकसान और मरने वालों की पूरी और पुष्ट जानकारी देने को कहा है।”

 

इस समूह का कहना है कि तिब्बत के अंदर उसके सूत्रों ने कम से कम चार गांवों पर आपदा की गंभीर मार पड़ने की जानकारी दी है, जिसमें “300 से ज्यादा घर तबाह हुए हैं और बड़ी संख्या निवासी अब तक लापता है।” समूह का कहना है कि सूत्रों ने उन्हें जानकारी दी है कि मरने वालों की तादाद “काफी ज्यादा है।”

 

ग्लेशियर के ढहने से नेपाल में बेहद ठंडे पानी और मलबे की जो बाढ़ आई उसकी चपेट में आकर अब कम से कम 939 लोगों की मौत हुई है। 4,500 से ज्यादा लोग लापता भी हैं। ALSO READ: नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

 

तिब्बत में रहने वाले रिश्तेदारों पर खतरा

तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा ने भारत में कहा है कि वह पीड़ितों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, सात ही उन्होंने दूसरे मुद्दों के लिए चेतावनी भी दी है। दलाई लामा का कहना है, “इस इलाके में पहले भी कई आपदाएं आई हैं, निश्चित रूप से यह गहराई में छिपे कारणों का संकेत भर है, यह जलवायु परिवर्तन भी हो सकता है और दूसरे कारण भी।”

 

दलाई लामा महज 23 साल के थे जब वह तिब्बत की राजधानी ल्हासा से भाग कर भारत आ गए। 1959 में चीनी सैनिकों ने बलपूर्वक तिब्बत का विद्रोह कुचल दिया था। डर था कि वह दलाई लामा को भी मार देंगे इसलिए वह चुपके से वहां से निकल आए। वह कभी वापस नहीं गए। चीन दलाई लामा को विद्रोही और अलगाववादी मानता है।

 

न्यूयॉर्क में तिब्बत हाउस के बियेटा टिकोस ने कहा है कि चीन के संदेशों को लेकर “उलझन हो सकती है” और यह कोई हैरानी की बात नहीं है। टिकोस का आरोप है कि चीन तिब्बत में बांध बना रहा है और नदियों की दिशा बदल रहा है जो आपदा का मुख्य कारण भी हो सकता है। टिकोस ने यह भी कहा, “बहुत सारे दस्तावेज मौजूद हैं जो यह संकेत देते हैं कि बांध बनाने से ग्लेशियरों और पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना बढ़ जाता है, जो पहले से ही गर्म हो रहे हैं।”

 

ऑस्ट्रेलिया में 3,000 से ज्यादा तिब्बती लोग निर्वासन में रहते हैं। उन्हें तिब्बत में अपने परिजनों को लेकर चिंता हो रही है। ऑस्ट्रेलिया तिब्बत काउंसिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जो बेडफोर्ड का कहना है, “हमारा मानना है कि वे नुकसान के पैमाने को घटा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले तिब्बती जानते हैं कि वे अपने रिश्तेदारों को फोन कर यह नहीं पूछ सकतेः 'वहां क्या हो रहा है?' इससे उनके परिजनों का जीवन संकट में पड़ जाएगा।”

Heavy Rain Alert: देश के 19 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, उत्तराखंड-यूपी में बिगड़े हालात

Heavy Rain Alert: देश के 19 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, उत्तराखंड-यूपी में बिगड़े हालात

IMD rain alert in 14 states

Weather Update 2 September : बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम की वजह से दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिय हुआ है। इसके प्रभाव से जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश हुई है। मौसम विभाग ने यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल समेत 19 राज्यों में भारी बारिश के अलर्ट जारी किया है। ALSO READ: Top News 2 September: 19 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, राम मंदिर को मिलेगा पहला CEO; ईरान पर अमेरिकी हमले से बढ़ा तनाव

 

मौसम विभाग ने 2 सितंबर को कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई स्थानों पर हवा की रफ्तार 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ लैंडस्लाइड जैसी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भी आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है।

 

मौसम विभाग ने उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर मध्य भारत और पूर्वी हिस्सों तक बारिश का व्यापक असर बताया है। यूपी और बिहार के कई जिलों में तेज बारिश के साथ आंधी चल सकती है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी गरज-चमक के साथ बारिश के आसार है। दिल्ली-NCR में भी भारी बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवा का अनुमान है। झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी बारिश की संभावना है। ALSO READ: Priya Adhikari कौन हैं , नेपाल बाढ़ के बीच 6 दिन में किए 100 रेस्क्यू मिशन, सैकड़ों जिंदगियां बचाईं

 

उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर

उत्तराखंड के कई शहरों में भारी बारिश कर कहर दिखाई दे रहा है। गौला, कोसी और शिप्रा समेत कई नदियां उफान पर हैं। शासन लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को नदी से दूर रहने की सलाह दे रहा है। बारिश के कारण हुए भूस्खलन की वजह से 150 से ज्यादा सड़कें बंद है। सोनप्रयाग में केदारनाथ यात्रा रोक दी गई है। मसूरी-देहरादून मार्ग भी बंद है। प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है।

 

यूपी में बाढ़ जैसे हालात

उत्तर प्रदेश में गंगा और मंदाकिनी के बढ़ते जलस्तर से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। बलिया में गंगा का पानी कई रिहायशी इलाकों में पहुंचने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। वाराणसी में भी गंगा चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से करीब 4 मीटर ऊपर बह रही है। सीतापुर में मकान की मिट्टी की दीवार गिरने से 2 लोगों की मौत हो गई तो गाजीपुर में गंगा में नहाते समय 2 नाबालिग लड़कियां बह गईं। ALSO READ: मानसूनी बारिश के अनियमित होने से पेट्रोल-डीजल की बिक्री में उछाल, अगस्त में 9.1% बढ़ी मांग

 

झारखंड में फ्लैश फ्लड का अलर्ट

झारखंड में भारी बारिश के बाद मौसम विभाग ने 10 जिलों में फ्लैश फ्लड का अलर्ट जारी किया है। गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सिमडेगा में बुधवार सुबह तक विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।

Top News 2 September: 19 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, राम मंदिर को मिलेगा पहला CEO; ईरान पर अमेरिकी हमले से बढ़ा तनाव

Top News 2 September: 19 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, राम मंदिर को मिलेगा पहला CEO; ईरान पर अमेरिकी हमले से बढ़ा तनाव

top news 2 september : IMD rain alert, ram mandir, us iran war

Top News 2 September: मौसम विभाग ने 19 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया। अयोध्या राम मंदिर को आज मिलेगा पहले CEO। अमेरिकी हमलों से दहला ईरान। ट्रंप ने फिर दी सख्त परिणाम भुगतने की चेतावनी। पेट्रोल डीजल की बिक्री में उछाल। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 से पहले मोटरकेड रिहर्सल को लेकर ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की। 2 सितंबर की बड़ी खबरें : 

 

19 राज्यों में भारी बारिश के अलर्ट

दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिया हुआ है। इसके प्रभाव से जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश हुई है। मौसम विभाग ने 7 सितंबर तक 19 राज्यों में भारी बारिश के अलर्ट जारी किया है।

 

राम मंदिर को मिलेगा नया CEO

अयोध्या राम मंदिर के CEO के लिए 3 नाम हुए शॉर्टलिस्ट कर लिए गए हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आज मंदिर के पहले CEO के नाम का एलान कर सकता है। सचिव पद पर भी आधिकारिक घोषणा हो सकती है। ट्रस्ट में अनिल मिश्रा के इस्तीफे से रिक्त हुए सदस्य पद पर भी बुधवार को नियुक्ति की जा सकती है।

 

यूएस-ईरान टकराव बढ़ा

अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान में चाबहार और केशम द्वीप समेत कई अहम ठिकानों पर मिसाइलों से हमला किया। IRGC के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ईरान ने इस हमले का जवाब दिया, तो उसे और भी सख्त परिणाम भुगतने होंगे। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब।

 

पेट्रोल-डीजल की बिक्री में उछाल

देश में मानसूनी बारिश के अनियमित रहने का असर ईंधन की मांग पर भी देखने को मिला है। अगस्त में सार्वजनिक क्षेत्र की तीन प्रमुख पेट्रोलियम कंपनियों की पेट्रोल और डीजल बिक्री में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। ALSO READ: मानसूनी बारिश के अनियमित होने से पेट्रोल-डीजल की बिक्री में उछाल, अगस्त में 9.1% बढ़ी मांग
 

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 से पहले मोटरकेड रिहर्सल को लेकर ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। 2 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी की 35 से ज्यादा सड़कों पर यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन लागू रहेगा।

मथुरा में जन्माष्टमी पर्व को भव्य और दिव्य बनाने की तैयारियां अंतिम चरण में, भक्ति के साथ तकनीक का होगा संगम

मथुरा में जन्माष्टमी पर्व को भव्य और दिव्य बनाने की तैयारियां अंतिम चरण में, भक्ति के साथ तकनीक का होगा संगम

mathura janamashtami

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी पर्व को भव्य और दिव्य स्वरूप देने के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मथुरा इस बार जन्माष्टमी पर श्रद्धा, भक्ति के साथ आधुनिक तकनीक के अनूठे संगम की साक्षी बनेगी। इस अवसर पर जहां देश-प्रदेश से आने वाले श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में शामिल होंगे, वहीं अनेक प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से भक्तिमय माहौल को और भव्य बनाएंगे। इसके साथ ही पहली बार 500 ड्रोन के जरिए आसमान में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनकी विभिन्न लीलाओं को जीवंत किया जाएगा। 

तीन से चार किमी. तक दिखाई देगी कृष्णलीला

ब्रज तीर्थ विकास परिषद की सीईओ लक्ष्मी नागप्पन ने बताया कि इस बार ड्रोन शो मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा, जो चार सितंबर को रात करीब नौ बजे से शुरू होगा। यह शो लगभग एक घंटे तक चलेगा। इस दौरान 500 ड्रोन एक साथ आसमान में उड़ान भरेंगे और अलग-अलग आकृतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म तथा उनकी लीलाओं से जुड़े दृश्य प्रदर्शित करेंगे। ड्रोन शो की खास बात यह होगी कि आसमान में बनने वाली कृष्णलीला की आकृतियां जन्मभूमि के आसपास करीब तीन से चार किलोमीटर की दूरी तक दिखाई दे सकेंगी। इससे श्रीकृष्ण जन्मभूमि और उसके आसपास मौजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को एक साथ इस अनूठे आयोजन का साक्षी बनने का अवसर मिलेगा। इससे पहले 2 सितंबर से विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे, जो 4 सितंबर तक चलेंगे। यह सभी कार्यक्रम डैम्पियर नगर स्थित पांचजन्य प्रेक्षागृह में होंगे। 

2 सितंबर से शुरू होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम

नागप्पन ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत 2 सितंबर को दोपहर तीन बजे उद्घाटन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ होगी। इसके बाद दोपहर 3:10 से 3:15 बजे तक श्याम जी शंख वादन करेंगे। शाम 4:15 बजे से भारत भूषण भजन, कीर्तन और लोकगायन की प्रस्तुति होगी। शाम 6:15 से 7:40 बजे तक गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, वृंदावन की ओर से ‘मुदरिया प्रेम एवं नंदोत्सव’ की झांकी गीत और नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद शाम 7 से 9 बजे तक श्रुति अनंदिता वर्मा के निर्देशन में आरुष वर्मा, कमला बैरवा, निष्ठा शर्मा, रालीग खान और सम्राट कुमार कृष्णा कॉन्सर्ट-डिवोशनल म्यूजिकल प्रस्तुति देंगे।

 

इस प्रस्तुति में भक्ति संगीत के साथ आधुनिक संगीत का भी समावेश होगा। तीन सितंबर को शाम 4 से 5 बजे तक देवेश शर्मा भजन गायन करेंगे। इसके बाद शाम 5 से 7 बजे तक कृष्णा सागर कलेक्टिव की भजन जेमिंग होगी। शाम 6:15 से 7:40 बजे तक गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी की ओर से ‘मुदरिया प्रेम एवं नंदोत्सव’ की झांकी गायन और नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत की जाएगी। शाम 7 से 9 बजे तक भी कई प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इनमें श्रुति अनंदिता वर्मा के निर्देशन में आरुष वर्मा, कमला बैरवा, निष्ठा शर्मा, रालीग खान और सम्राट कुमार कृष्णा की संगीत प्रस्तुति शामिल होगी। इसके साथ ही चार सितंबर को दोपहर तीन से पांच बजे तक मोहित शैवानी ‘कृष्णानयन-कृष्णप्रिय वो जो कभी कहा नहीं गया’ की प्रस्तुति देंगे।

4 सितंबर को कन्हैया मित्तल के भजनों से गूंजेगी कान्हा नगरी 

चार सितंबर को शाम 5 से 7 बजे तक हार्टफुलनेस फाउंडेशन की प्रस्तुति होगी। इसमें सुनीति मिश्रा ‘कृष्ण : अनंत रंग, अनंत भाव’ प्रस्तुत करेंगी। इसके बाद अनिरबान भजन एवं बांसुरी वादन और मैत्रेयी राय भजन गायन करेंगी। शाम 7 से 9 बजे तक प्रसिद्ध भजन गायक कन्हैया मित्तल की भजन संध्या आयोजित होगी। तीन दिवसीय आयोजन के दौरान शहर में पांच बड़े और 21 छोटे मंच भी बनाए जाएंगे। इन मंचों पर ब्रज के कलाकार अपनी लोककला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इससे स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को ब्रज की पारंपरिक संस्कृति से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसके अलावा पहली बार पांचजन्य प्रेक्षागृह परिसर में फूड स्टॉल भी लगाए जाएंगे। इससे श्रद्धालु सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने के साथ विभिन्न खान-पान का भी लुत्फ उठा सकेंगे।

सुरक्षा के किए गए पुख्ता इंतजाम, 16 वॉच टावर बनाए गए

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए हैं। शहर में 129 स्थानों पर बैरियर लगाए जाएंगे और 24 पार्किंग स्थल बनाए जाएंगे, ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 16 वॉच टावर बनाए जाएंगे। पुलिसकर्मी इन टावरों से भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। इसके साथ ही ड्रोन कैमरों के जरिए भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और प्रमुख मार्गों की निगरानी की जाएगी। किसी स्थान पर भीड़ बढ़ने या संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर पुलिस अधिकारियों को तत्काल सूचना देने की व्यवस्था रहेगी। जन्माष्टमी के दौरान करीब 350 मुख्य आरक्षी और आरक्षी तथा 50 महिला आरक्षियों की तैनाती की जाएगी। रूट डायवर्जन और ट्रैफिक प्लान लागू कर शहर में यातायात व्यवस्था को नियंत्रित किया जाएगा।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने 41 हजार करोड़ रुपये के कार्यों को दी स्वीकृति, जानें कैबिनेट ने और क्या-क्या लिए निर्णय?

सीएम डॉ. मोहन यादव ने 41 हजार करोड़ रुपये के कार्यों को दी स्वीकृति, जानें कैबिनेट ने और क्या-क्या लिए निर्णय?

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई। उनकी अध्यक्षता में कैबिनेट ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लगभग 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्तावों और जन-कल्याणकारी निर्णयों को स्वीकृति दी। कैबिनेट ने “विकसित भारत (ग्रामीण): वीबी जी राम जी विकसित भारत जी राम जी योजना मध्यप्रदेश” और इसके 1 जुलाई 2026 से प्रभावशील किए जाने का अनुसमर्थन किया। योजना के कार्यान्वयन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-2027 में अनुमानित लागत रुपये 3,183 करोड़ रुपये और वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक योजना की निरंतरता के लिए कुल अनुमानित लागत 26,436 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया। 

 

केंद्र और राज्य का अंश 60:40 के अनुपात में होगा, जिसमें राज्यांश 10 हजार 574 करोड़ रुपये होगा। इन पांच वर्षों में प्रशासनिक व्यय के लिए 946 करोड़ रुपये का व्यय होगा, जो राज्य शासन वहन करेगा। निर्णय अनुसार नई योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अब 100 दिन के स्थान पर 125 दिनों के श्रमजन्य रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी। रोजगार के दिनों में की गई यह वृद्धि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। नई योजना का मुख्य आधार 'विकसित भारत @2047' के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ग्रामीण बुनियादी ढांचे को तैयार करना है। अब प्रत्येक ग्राम पंचायत जी आई एस आधारित तकनीक, 'पीएम गति शक्ति' लेयर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' तैयार करेगी। 

 

हर जिले में एक 'लोकपाल' की नियुक्ति-इन योजनाओं को डिजिटल पोर्टल के माध्यम से 'विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक' में समेकित किया जाएगा। योजना के तहत जल सुरक्षा, जलवायु-अनुकूल इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और अत्याधुनिक आजीविका मॉडल जैसे तकनीकी कार्यों के प्रभावी संपादन के लिए मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद में एक समर्पित राज्य-स्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की जाएगी। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में प्राप्त होने वाले वित्तीय आवंटन को पारदर्शी और आवश्यकता-आधारित बनाने के लिए ग्राम पंचायतों को विकास मानदंडों के आधार पर क, ख, ग (A, B, C) श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। योजना में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और प्रत्येक छह माह में सामाजिक अंकेक्षण को अनिवार्य किया गया है। साथ ही त्वरित शिकायत निवारण के लिए प्रत्येक जिले में एक 'लोकपाल' की नियुक्ति की जाएगी, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायतों का निराकरण करेंगे। मंत्रि-परिषद ने अंतरिम व्यवस्था के तहत नई परिषद के पूर्ण गठन/पंजीकरण तक वर्तमान 'मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद' को ही इस नई योजना के समस्त दायित्वों के निर्वहन के लिए अधिकृत किया है।

 

दुग्ध उत्पादकों के हित में फैसला-कैबिनेट ने प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी प्रणाली और सांची ब्राण्ड को उन्नयन करने के उद्देश्य से 2 हजार 973 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। डेयरी विकास योजना के माध्यम सेआगामी 5 वर्ष में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7331 ग्रामों से बढ़ाकर 26,000 ग्रामों तक किया जाएगा।दुग्ध संकलन को 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन किया जाएगा।दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन किया जाएगा। दुग्ध पैकेट विक्रय 7 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन लीटर किया जाएगा। कृत्रिम गर्भाधान कवरेज 15% से बढाकर 50% किया जाएगा।

एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड एवं संबद्ध दुग्ध संघों के संचालन और प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश शासन, एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन एवं संबद्ध दुग्ध संघों तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के मध्य सहकार्यता अनुबंध (कोलेबोरेशन एग्रीमेंट) 13 अप्रैल 2025 को निष्पादित किया गया है। निष्पादित सहकार्यता अनुबंध के तहत राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा 2 हजार 973 करोड़ की प्रस्तुत डेयरी विकास योजना पर सैद्धांतिक सहमति दी गई है। राज्य शासन द्वारा 500 करोड़ रुपये अधोसंरचना के लिए अनुदान एवं इसके अतिरिक्त भारत सरकार की योजनाओं पर स्वीकृति के अनुरूप अनुमानित 241 करोड़ रूपये का राज्यांश तथा योजना विभिन्न घटकों के क्रियान्वयन की स्वीकृति दी गई है।

 

पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन का मय पेव्ड शोल्डर के होगा निर्माण-कैबिनेट ने पश्चिम भोपाल बायपास 4 लेन मय पेव्ड शोल्डर के लम्बाई 35.61 कि.मी., निर्माण कार्य के लिए हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) अंतर्गत कुल परियोजना वित्तीय लागत 3,225 करोड़ 51 लाख रुपये की पुनरीक्षित स्वीकृति दी। इसके अतिरिक्त निर्माण पूर्व कार्यकलाप की राशि 548 करोड़ 29 लाख रुपये का भुगतान भी राज्य बजट के माध्यम से किये जाने का अनुमोदन किया गया। इस बायपास के निर्माण से जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इन्दौर आने-जाने वाले वाहनों को भोपाल से नहीं गुजरना पड़ेगा और 21 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी।

उल्लेखनीय है कि पूर्व में पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर सहित हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (40:60) अंतर्गत लम्बाई-40.90 कि.मी. के लिए 2,981 करोड़ 65 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति 4 सितंबर 2023 को प्रदान की गई थी। पश्चिम भोपाल बायपास का एक रेखण भोपाल-जबलपुर मार्ग पर मण्डीदीप के समीप इटायाकलां से प्रारंभ होकर भोपाल-देवास मार्ग के ग्राम फंदा के समीप तक निर्मित किया जाना था, जिसकी लंबाई-40.90 कि.मी. थी। पश्चिम भोपाल बॉयपास क्षेत्र में रातापानी टाईगर रिजर्व घोषित हो जाने, बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में पर्यावरण विभाग के नोटिफिकेशन के प्रभाव का समावेश करने, राज्य पुरातत्व विभाग की प्राचीन धरोहर शिवमंदिर (समसगढ़) एक रेखण पर आने तथा बॉयपास को पूर्वी बायपास से जोड़कर संपूर्ण रिंग रोड बनाने के कारण एक रेखण में परिवर्तन किया गया। एक रेखण में परिवर्तन से परियोजना की लागत में पूर्व स्वीकृति से 8.18 प्रतिशत वृद्धि होने से पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति मंत्रि-परिषद से प्राप्त की गई है। निर्णय अनुसार परियोजना निर्माण लागत का 40 प्रतिशत 599 करोड़ 44 लाख रुपये का भुगतान कंसेशन अनुबंध में निर्धारित माइलस्टोन प्राप्त करने पर 10 किश्तों में एवं नेट पॉजिटिव कॉज की राशि का भुगतान निर्माण अवधि में अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार, राज्य राजमार्ग निधि के माध्यम से किया जाएगा। परियोजना निर्माण लागत की शेष 60% राशि रुपये 1,910 करोड़ 42 लाख रुपये का भुगतान एन्यूटी, ओएण्डएम एवं ब्याज सहित संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छः माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से किया जाएगा।

 

3 नए प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की स्वीकृति-कैबिनेट ने प्रदेश में तकनीकी शिक्षा के संवर्धन, क्षेत्रीय संतुलन और अधोसंरचना की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए वर्तमान राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) भोपाल के स्थान पर अब राज्य में 3 पृथक प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की स्वीकृति दी है। ये विश्वविद्यालय भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में स्थापित होंगे। इस व्यवस्था के तहत भोपाल स्थित वर्तमान विश्वविद्यालय को 'मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय', उज्जैन के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को 'मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' तथा जबलपुर के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को 'महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के रूप में स्थापित किया जाएगा।

वर्तमान में आरजीपीवीअंतर्गत 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थाए और 3 लाख 83 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। स्वीकृत व्यवस्था के अंतर्गत प्रदेश के सभी तकनीकी महाविद्यालयों को संभागवार विभाजित कर नवीन गठित तीन विश्वविद्यालयों के क्षेत्राधिकार में सौंपा गया है। भोपाल स्थित 'मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के अधीन भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग आएंगे। उज्जैन स्थित 'मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के अंतर्गत उज्जैन और इंदौर संभाग रहेंगे। इसी प्रकार जबलपुर स्थित 'महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के क्षेत्राधिकार में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों के तकनीकी संस्थान शामिल किए जाएंगे। तीनों विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए पृथक अधिनियम लागू किए जाएंगे।

उज्जैन एवं जबलपुर में नवीन स्थापित होने वाले दोनों विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक संचालन के लिए प्रारंभिक स्तर पर कुलगुरु, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, उप कुलसचिव तथा वित्त अधिकारी के पदों को मंजूरी दी गई है। साथ ही अन्य सहायक व तकनीकी पदों को नियमानुसार आउटसोर्स के माध्यम से भरा जाएगा। इन पदों का वेतन आहरण प्रारंभिक रूप से विश्वविद्यालय की उपलब्ध राशि से किया जाएगा और ये संस्थान स्व-वित्तीय आधार पर संचालित होंगे। मंत्रि-परिषद ने तीनों विश्वविद्यालयों की स्थापना एवं अनुवर्ती कार्यवाही को गति देने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय 'मध्यप्रदेश प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय साधिकार समिति' के गठन को भी स्वीकृति प्रदान की है। इस समिति में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार, वित्त, उच्च शिक्षा और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिवों एवं मध्यभारत प्रौद्योगिकी विश्वद्यालय के कुलगुरु सहित आयुक्त तकनीकी शिक्षा को सदस्य सचिव के रूप में शामिल किया गया है।

 

मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग का होगा निर्माण-कैबिनेट ने मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग लंबाई 67.116 कि.मी., 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर के साथ हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) पर निर्माण के लिए कुल परियोजना वित्तीय लागत 2,776 करोड़ 83 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। अतिरिक्त निर्माण पूर्व कार्यकलाप (भू-अर्जन एवं अन्य कार्य) की राशि 428 करोड़ 94 लाख रुपये तथा सुपरविजन चार्जेस की राशि 65 करोड़ 77 लाख रुपये का भुगतान भी राज्य बजट के माध्यम से किये जाने का अनुमोदन किया गया। मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन परियोजना निर्माण लागत रुपये 1,151 करोड़ है। कुल परियोजना निर्माण लागत की 40 प्रतिशत राशि रुपये 543 करोड़ 27 लाख (जीएसटी सहित) निर्माण अवधि के दौरान भुगतान म.प्र. सड़क विकास निगम द्वारा लिए जा रहे ऋण के माध्यम से तथा कुल परियोजना निर्माण लागत की शेष 60 प्रतिशत राशि 1,738 करोड़ 85 लाख रुपये (जीएसटी सहित) का भुगतान संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छः माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से किया जाएगा। प्रस्तावित मार्ग एन.एच.-346 विदिशा-चंदेरी पर मेहलुआ चौराहा से प्रारंभ होता है एवं बीना में एन.एच-934 हीरापुर-बीना को क्रॉस करते हुये मालथोन में एन.एच-44 नार्थ साउथ कॉरीडोर को जोड़ता है। यह मार्ग क्षेत्रीय, अंतर-राज्यीय एवं औद्योगिक यातायात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बीना शहरी क्षेत्र में बीपीसीएल रिफाइनरी, थर्मल पावर प्लांट, रेलवे यार्ड एवं प्रमुख उद्योग स्थित होने के कारण भारी वाहनों की संख्या अधिक है। यह मार्ग भविष्य में एक सशक्त आर्थिक व लॉजिस्टिक कॉरिडोर के रूप में विकसित होने की उच्च क्षमता रखता है।

 

स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीन एवं उपकरण का अनुरक्षण-मंत्रि-परिषद ने स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीन एवं उपकरण का अनुरक्षण से संबंधित योजना को एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 488 करोड़ 41 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश की चिकित्सा संस्थाओं में प्रदाय किये गये मशीन एवं उपकरणों के रख-रखाव, मरम्मत इत्यादि के कार्य किए जाएंगे। मंत्रि-परिषद ने विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण से संबंधित योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 915 करोड़ 77 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। योजना के अंतर्गत प्रदेश की चिकित्सा संस्थाओं में मॉड्यूलर किचन, मॉड्यूलर ओ.टी. इत्यादि के मरम्मत कार्य किए जाते हैं। मंत्रि-परिषद ने नवगठित जिलों यथा मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालय संचालित करने के लिए प्रत्येक जिले में उप संचालक का एक पद, सहायक वर्ग-2 का एक पद एवं सहायक वर्ग-3 के तीन पद सहित कुल 15 नवीन नियमित पद सृजित किए जाने तथा प्रत्येक जिले के लिए चतुर्थ श्रेणी के दो-दो मानव संसाधन कुल 6 आउटसोर्सिंग से रखे जाने की स्वीकृति प्रदान की है।

 

मंत्रि-परिषद ने नवगठित जिला निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार चार जिला कार्यालयों में जिला आयुष अधिकारी के चार पद वेतन मान 15 हजार 600-39,100-6600 ग्रेड पे, सहायक ग्रेड-1 मुख्य लिपिक के चार पद वेतन मान 5,200-20हजार 200-2800 ग्रेड पे, लेखापाल के चार पद वेतन मान 5,200-20 हजार 200-2,800 ग्रेड पे एवं सहायक ग्रेड-2 के चार पद वेतन मान 5,200-20हजार 200-2400 ग्रेड पे की स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने रबी विपणन वर्ष 2026 में मूंग एवं उडद का 1 जुलाई 2026 से उपार्जन के लिए मुख्यमंत्री के निर्णय का अनुसमर्थन किया है। उल्लेखनीय है कि रबी वर्ष 2025-26 (विपणन वर्ष 2026-27) में प्राइस सपोर्ट स्कीम अंतर्गत ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन के लिए मंत्रि-परिषद के 24 फरवरी 2026 के आदेश में पंजीकृत कृषकों से उनकी उपज का 25 प्रतिशत उत्पादन ही उर्पाजित करने के निर्णय को आंशिक रूप से संशोधन करते हुए मूंग का पंजीकृत कृषकों से उनकी उपज का 60 प्रतिशत तक का उपार्जन किया जाने का निर्णय लिया गया था।