शहबाज शरीफ के सामने गरजे पीएम मोदी, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे, जड़ से खत्म करना होगा इकोसिस्टम

शहबाज शरीफ के सामने गरजे पीएम मोदी, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे, जड़ से खत्म करना होगा इकोसिस्टम

narendra modi at SCO summit

PM Modi at SCO Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO समिट में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सामने आतंकवाद पर सख्‍त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके विरुद्ध लड़ाई में हम क्रिया-प्रतिक्रिया की सोच तक सीमित नहीं रह सकते। हमें आतंकवाद के फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करना होगा। ALSO READ: 7.8% की शानदार विकास दर के बीच पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

 

पीएम मोदी ने कहा कि हमें एक आवाज में कहना चाहिए कि इस गंभीर मुद्दे पर दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं हो सकती। जो देश आतंकवाद को अपनी नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं और आतंकवादियों को पनाह और समर्थन देते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंकवाद किसी के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता।

 

उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। हमें आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करना होगा- जिसमें उसकी फंडिंग, लोगों की भर्ती और सुरक्षित ठिकाने शामिल हैं। हमें एक सुर में यह कहना होगा कि आतंकवाद के मामले में दोहरे मापदंडों की कोई जगह नहीं हो सकती।

पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध के मैदान में कोई समाधान नहीं निकलता, सभी युद्धों और विवादों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शांत और सुरक्षित यूरेशिया की हमारी साझा आकांक्षा, अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जुड़ी है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में योगदान देता रहा है, और आगे भी देता रहेगा। भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं, व्यापार को आसान बनाते हैं और विकास के नए रास्ते खोलते हैं।

अखिलेश यादव पर भड़के संगीत सोम: PDA की नई परिभाषा गढ़कर बोले- वे तो अपराधियों के ‘अब्बा’ हैं

अखिलेश यादव पर भड़के संगीत सोम: PDA की नई परिभाषा गढ़कर बोले- वे तो अपराधियों के 'अब्बा' हैं

sangeet som

भाजपा के फायर ब्रांड नेता संगीत सोम ने मीडिया से रूबरू होते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव  पर तीखे हमले बोले। शामली के अंकित चौहान हत्याकांड में आरोपियों के एनकाउंटर को लेकर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए सोम ने कहा कि प्रदेश सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का काम किया जा रहा है।

 

पूर्व विधायक संगीत सोम ने अखिलेश यादव को आड़े हाथ लेते हुए PDA की नई परिभाषा गढ़ दी। उन्होंने PDA को यानी P से पापी,D से डकैत,A से अपराधी व्याख्या की है। संगीत का हमला यही नही रूका उन्होंने अखिलेश को अपराधियों का ‘अब्बा’ तक कह दिया। सोम ने आरोप लगाया कि सपा नेतृत्व की राजनीति अपराधियों के समर्थन और जातीय ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द घूमती है।

 

अंकित चौहान के परिवार से मुलाकात का किया जिक्र

संगीत सोम ने बताया कि वह बीते कल यानी रविवार को शामली पहुंचे थे और अंकित चौहान के परिजनों से मुलाकात की थी। उन्होंने दावा किया कि परिवार को सरकार की ओर से न्याय का भरोसा दिलाया गया था। सोम के मुताबिक, इसके अगले दिन पुलिस मुठभेड़ में हत्याकांड के आरोपी मारे गए, जबकि बदमाशों की गोली से दो पुलिसकर्मी घायल भी हुए।

 

उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के बाद अखिलेश यादव ने एनकाउंटर पर सवाल उठाए, जिस पर उन्होंने सपा प्रमुख को घेरा। सोम ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय पीड़ित परिवार और पुलिसकर्मियों के पक्ष को भी देखा जाना चाहिए।

 

‘पुलिस को जाति के चश्मे से देखना गलत’

पूर्व विधायक ने अखिलेश यादव के एसटीएफ को लेकर दिए गए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और समाज को जातीय आधार पर बांटने की कोशिश की जा रही है। सोम ने कहा कि पुलिस बल को किसी जाति विशेष के चश्मे से देखना उचित नहीं है और अपराध के खिलाफ कार्रवाई को जातीय राजनीति से जोड़ना गलत है।

 

सोम ने अखिलेश यादव को उनके कार्यकाल की घटनाओं की याद दिलाते हुए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की हत्या के मामलों का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय मारे गए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को कितना न्याय मिला।

 

‘अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी’

संगीत सोम ने साफ कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि अपराधियों को बचाने के लिए कोई कितनी भी कोशिश कर ले, सरकार अपराध के खिलाफ पीछे नहीं हटेगी।

 

उन्होंने अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी का नाम लेते हुए भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। सोम ने आरोप लगाया कि सपा नेतृत्व ने ऐसे लोगों के प्रति नरम रुख अपनाया, जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंकित चौहान मामले में पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई पर सवाल उठाना भी उसी राजनीतिक सोच का हिस्सा है।

 

यादव परिवार को लेकर भी अखिलेश पर हमला

जातिवाद के मुद्दे पर संगीत सोम ने अखिलेश यादव और यादव परिवार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को जातिवाद की बात करने से पहले अपने परिवार की राजनीतिक स्थिति पर नजर डालनी चाहिए।

 

सोम ने दावा किया कि यादव परिवार के कई सदस्य सांसद हैं और आरोप लगाया कि परिवार के लोगों को राजनीतिक पद मिलने के बावजूद PDA के नाम पर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने अखिलेश यादव, डिंपल यादव, आदित्य यादव, रामगोपाल यादव, धर्मेंद्र यादव और अक्षय यादव का नाम लेते हुए परिवारवाद और जातीय राजनीति के आरोप लगाए।

 

पुराने मामलों पर भी मांगा जवाब

सोम ने अखिलेश यादव के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें सत्ता में आने पर पुराने मामलों की जांच कराने की बात कही जाती है। उन्होंने मुजफ्फरनगर के गौरव-सचिन हत्याकांड और मथुरा में पुलिस अधिकारियों की हत्या का जिक्र करते हुए पिछली सरकार के दौरान हुई कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मिले न्याय पर सवाल खड़े किए।

 

उन्होंने कहा कि अखिलेश दावा कर रहें है कि उनकी सरकार आयेंगी तो वह न्याय दिलाने का काम करेंगे, जो सरकार को बदलने की मंशा रखते है उन्हें पहले यह भी बताना चाहिए कि उनके शासनकाल में गंभीर अपराधों के पीड़ित परिवारों को कितना न्याय मिला?

 

‘अपराधी अखिलेश से बचाने की गुहार लगा रहे’

संगीत सोम ने तंज कसते हुए कहा कि अपराधी अब अखिलेश यादव से बचाने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सरकार अपराधियों पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने दोहराया कि भाजपा सरकार में अपराधियों के खिलाफ जीरो टालरेंस नीति है, जिसके चलते अपराधियों के सफायें का अभियान आगे भी चलता रहेगा। 

 

सनातन पर टिप्पणी को लेकर भी साधा निशाना

सोम ने सनातन धर्म को लेकर भी अखिलेश यादव पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अध्यक्ष लगातार सनातन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाना बनाते हैं। कभी पोस्टर में चिलम के साथ मुख्यमंत्री को दिखाया जाता है, ये संत का अपमान है। संत का अपमान सीधेतौर पर सनातन समाज का अपमान है। इसी ऐसी छोटी सोच और टिप्पणियां कर वालों को समाज कभी भी स्वीकार नहीं करेगा।

 

‘चवन्नी’ वाले बयान का भी किया जिक्र

प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिर में संगीत सोम ने अखिलेश यादव के पुराने ‘चवन्नी’ वाले बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जिन्हें आज चवन्नी बताया जा रहा है, वही लोग आने वाले समय में अखिलेश यादव को ‘इकन्नी’ बनाने का काम करेंगे।

 

पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संगीत सोम ने अपराध, एनकाउंटर, जातीय राजनीति, परिवारवाद और सनातन के मुद्दे पर अखिलेश यादव को घेरा और कहा कि प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

LIVE: एससीओ समिट 2026 में शामिल हुए पीएम मोदी, जिनपिंग से मिलाया हाथ

LIVE: एससीओ समिट 2026 में शामिल हुए पीएम मोदी, जिनपिंग से मिलाया हाथ

sco summit 2026

Latest News Today Live Updates in Hindi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को एससीओ समिट 2026 में शामिल हुए। समिट के दौरान चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग से उन्होंने हाथ मिलाया। पल पल की जानकारी… 

 

हरियाणा के पलवल जिले में कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हुआ। इस दुर्घटना में छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 14 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

सितंबर महीने की शुरुआत के साथ ही कमर्शियल LPG सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों को महंगाई का झटका लगा है। तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में 9.50 रुपए की बढ़ोतरी की है। दिल्ली में 19 किलो का सिलेंडर अब 9.50 रुपये महंगा होकर 2,747.50 रुपये का हो गया है। मुंबई में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,701 रुपये हो गई।

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिश्केक में 26वें शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइज़ेशन (SCO) समिट में शामिल हुए। 

– पीएम मोदी ने SCO समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की।

पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत की बड़ी आर्थिक छलांग: जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही, RBI का अनुमान पीछे छूटा

पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत की बड़ी आर्थिक छलांग: जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही, RBI का अनुमान पीछे छूटा

GDP of India

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई के तमाम दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से कहीं अधिक मजबूत प्रदर्शन किया है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून (Q1) तिमाही में देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 7.8% दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस तिमाही के लिए 7% ग्रोथ का अनुमान जताया था, जिसे अर्थव्यवस्था ने पीछे छोड़ दिया है। एक साल पहले की इसी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.9% रही थी। ALSO READ: 7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

 

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद देश के आर्थिक पहिए की रफ्तार नहीं थमी। इससे संकेत मिलता है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान सब्सिडी का प्रभाव अप्रत्यक्ष करों की तुलना में अधिक सकारात्मक रहा।

 

विभिन्न सेक्टरों का प्रदर्शन

आंकड़ों के मुताबिक, अर्थव्यवस्था के ज्यादातर प्रमुख क्षेत्रों में शानदार तेजी देखने को मिली है:

 

फाइनेंस, रियल एस्टेट, आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज: इस सेक्टर में सबसे शानदार 11.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिसने महंगाई के दबाव के बीच जीडीपी की रफ्तार को थामे रखा।

मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र: विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर मजबूत होकर 9.2 प्रतिशत पर रही।

बिजली, गैस, पानी और अन्य सेवाएं: इस यूटिलिटी और सेवा क्षेत्र ने 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।

व्यापार, होटल, ट्रांसपोर्ट और संचार सेवाएं: इस सेक्टर में 8.5 प्रतिशत की दमदार तेजी देखने को मिली।

कृषि एवं संबंधित क्षेत्र: कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.6 प्रतिशत दर्ज की गई।

खनन क्षेत्र : समीक्षाधीन तिमाही के दौरान केवल खनन (Mining) क्षेत्र का प्रदर्शन कमजोर रहा, जिसकी वृद्धि दर नकारात्मक 2.4 प्रतिशत दर्ज की गई। ALSO READ: 100% स्वदेशी AK-203 'शेर': अमेठी में तैयार हुई देश की पहली पूरी तरह देसी गन, जानिए INSAS के मुकाबले कितनी घातक है भारतीय सेना की नई राइफल!

 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान

देश के इस मजबूत आर्थिक प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसका पूरा श्रेय भारत के मेहनती नागरिकों को दिया। उन्होंने कहा कि इस मजबूत प्रदर्शन का श्रेय देश के लोगों और उनकी कड़ी मेहनत को जाता है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार द्वारा किए गए दूरदर्शी सुधारों और अर्थव्यवस्था के कुशल प्रबंधन के बेहतरीन परिणाम अब सामने आ रहे हैं। ALSO READ: LPG Price 1 September: सितंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल सिलेंडर, जानें दिल्ली-मुंबई समेत 4 महानगरों में नए दाम

 

जीडीपी के विभिन्न घटकों के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि जून तिमाही के दौरान निवेश मांग में तेज उछाल आया और यह 11.9 फीसदी रही। हालांकि, इस दौरान निजी उपभोग 7.1 फीसदी और सरकारी खर्च 4.3 फीसदी की दर से बढ़ा, जो पिछली मार्च तिमाही की तुलना में थोड़ा धीमा है। इसके बावजूद वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की यह रफ्तार देश की मजबूत आंतरिक क्षमता को दर्शाती है।

7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

pm modi on india GDP growth

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की मजबूत आर्थिक विकास दर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए देशवासियों को बधाई दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 7.8% की शानदार विकास दर हासिल की है, जिससे पूरा देश खुशी से भरा हुआ है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय देश के नागरिकों के संकल्प और उनके मेहनती स्वभाव को दिया है। ALSO READ: LPG Price 1 September: सितंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल सिलेंडर, जानें दिल्ली-मुंबई समेत 4 महानगरों में नए दाम

 

वैश्विक संकटों के बीच भारत की रफ्तार

प्रधानमंत्री मोदी ने मौजूदा वैश्विक हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया संघर्षों और संकटों से घिरी हुई है। हर तरफ युद्ध की खबरें आ रही हैं और वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह बाधित हुई है। साल 2020 के कोविड महामारी के दौर के बाद से ही दुनिया भर में आर्थिक स्थिरता की कमी बनी हुई है। इन तमाम वैश्विक बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद भारत तेजी से प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

निराशा फैलाने वालों पर साधा निशाना

देश के भीतर का माहौल पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस दौरान कुछ लोग निराशा के अंधेरे में डूबे हुए हैं जो लगातार झूठ फैला रहे हैं और देश में निराशा का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, देश इन तमाम नकारात्मकताओं से ऊपर उठकर और हर बाधा को पार करते हुए 7.8% की विकास दर हासिल करने में सफल रहा है। ALSO READ: Top News 1 September: अगस्त में 125 साल की गर्मी का रिकॉर्ड टूटा, अन्ना हजारे अस्पताल में भर्ती, मेसी का संन्यास

 

'आत्मनिर्भर भारत' पर जोर

प्रधानमंत्री ने इस गति को भविष्य में भी लगातार बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश को लगातार आगे बढ़ाते रहने के लिए 'आत्मनिर्भर भारत' का बनना बेहद जरूरी है। देश की यह सामूहिक ताकत भविष्य में आने वाली हर चुनौती का सामना करने के लिए मजबूत आधार तैयार करती है।

100% स्वदेशी AK-203 ‘शेर’: अमेठी में तैयार हुई देश की पहली पूरी तरह देसी गन, जानिए INSAS के मुकाबले कितनी घातक है भारतीय सेना की नई राइफल!

100% स्वदेशी AK-203 'शेर': अमेठी में तैयार हुई देश की पहली पूरी तरह देसी गन, जानिए INSAS  के मुकाबले कितनी घातक है भारतीय सेना की नई राइफल!

AK 203 Sher assault rifle: भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया गया है। उत्तर प्रदेश के अमेठी में कोरबा स्थित 'इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड' (IRRPL) की फैक्ट्री में 100% भारतीय पुर्जों और कच्चे माल से निर्मित पहली AK-203 'शेर' (Sher) असाल्ट राइफल का निर्माण कर इसका सफल परीक्षण (Test-fire) कर लिया गया है।

यह महज कलपुर्जों का असेंबलिंग नहीं, बल्कि 100% एंड-टू-एंड स्वदेशीकरण (End-to-End Indigenisation) का परिणाम है। इसके साथ ही भारतीय सेना के दशकों पुराने INSAS (इंसास) राइफलों को रिटायर करने और जवानों को दुनिया की सबसे घातक असाल्ट राइफलों में से एक से लैस करने की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।

'मेक इन इंडिया' की बड़ी छलांग : अमेठी की कोरबा फैक्ट्री का कारनामा

AK-203 मूल रूप से रूस की प्रसिद्ध कलाश्निकोव (Kalashnikov) 200 सीरीज पर आधारित है, जिसे भारत-रूस के संयुक्त उद्यम (JV) के तहत अमेठी में बनाया जा रहा है।                     

  • प्रोजेक्ट की कुल लागत: भारत सरकार ने सेना के लिए लगभग 6,01,427 AK-203 राइफलों की आपूर्ति के लिए ₹5,124 करोड़ के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
  • हर 100 सेकंड में एक राइफल: प्लांट में पूर्ण क्षमता से उत्पादन शुरू होने के बाद हर 100 सेकंड में एक स्वदेशी AK-203 राइफल बनकर तैयार होगी।
  • आर्मी ट्रायल्स की तैयारी: IRRPL अब 100% स्वदेशी प्रोटोटाइप्स तैयार कर रहा है, जिन्हें सितंबर 2026 में भारतीय सेना के व्यापक परीक्षणों (Army Trials) के लिए सौंपा जाएगा।

कितनी घातक है AK-203 'शेर'? जानिए इसकी प्रमुख ताकतें

भारतीय सेना के अग्रिम पंक्ति के सैनिकों के लिए यह राइफल बेहद मारक, सटीक और हर मौसम में काम करने वाली साबित होगी:

  1. भारी कारतूस, ज्यादा मारक क्षमता: इसमें $7.62 times 39text{mm}$ कैलीबर की गोलियों का उपयोग होता है, जो दुश्मन को एक ही वार में न्यूट्रलाइज़ (One-shot Stop) करने की ताकत रखती हैं।
  2. लंबी रेंज और हाई-फायरिंग स्पीड: AK-203 'शेर' की प्रभावी मारक क्षमता (Effective Range) 800 मीटर तक है और यह 700 राउंड प्रति मिनट की रफ्तार से फायर कर सकती है।
  3. हल्का वजन और छोटा साइज: 30-राउंड मैगजीन के साथ इसका कुल वजन मात्र 3.8 किलोग्राम है, जिससे सियाचिन के ग्लेशियरों से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान तक इसे ले जाना और इस्तेमाल करना बेहद आसान है।
  4. कभी न जाम होने वाली विश्वसनीयता: यह गैस-ऑपरेटेड रोटेटिंग बोल्ट सिस्टम पर काम करती है। अत्यधिक बर्फ, रेत या कीचड़ में भी इसके जाम होने की संभावना न के बराबर है।
  5. मॉड्यूलर डिजाइन (Picatinny Rail): इसमें आधुनिक टेलिस्कोपिक साइट, नाइट-विज़न स्कोप, लेजर डिज़ाइनर और ग्रिप लगाने के लिए पिकाटिनी रेल दी गई है, जो इसे रात के ऑपरेशन्स के लिए आदर्श बनाती है।

3

AK 203 Sher assault rifle

 

अमेठी में 100% भारतीय घटकों से बनी AK-203 'शेर' का सफल परीक्षण न केवल भारतीय सेना की पैदल सेना (Infantry) की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा, बल्कि विदेशी हथियारों के आयात पर भारत की निर्भरता को समाप्त कर देश को रक्षा निर्यात के एक नए युग में ले जाएगा।

गुजरात विधानसभा का 3 दिवसीय मानसून सत्र 9 सितंबर से: पहले दिन दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि के बाद शुरू होगी कार्यवाही

गुजरात विधानसभा का 3 दिवसीय मानसून सत्र 9 सितंबर से: पहले दिन दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि के बाद शुरू होगी कार्यवाही

Gujarat Monsoon Session 2026

गुजरात विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के शेड्यूल में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। राज्यपाल द्वारा जारी की गई नई अधिसूचना के अनुसार, यह 9वां सत्र अब 8 सितंबर के बजाय 9, 10 और 11 सितंबर यानी तीन दिनों तक चलेगा। गांधीनगर में आयोजित होने वाले इस छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सत्र के दौरान राज्य सरकार के नीतिगत और प्रशासनिक कार्यों को निपटाया जाएगा। तीनों दिनों के दौरान राज्य सरकार द्वारा विभिन्न सरकारी विधेयक पेश किए जाएंगे और उन पर विस्तृत चर्चा के बाद उन्हें पारित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ALSO READ: Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

 

प्रधानमंत्री के दौरे के कारण सत्र की तारीखों में बदलाव

मिल रही जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 8 सितंबर को तय हुए गुजरात दौरे को ध्यान में रखते हुए विधानसभा सत्र के समय-पत्रक में संशोधन करने का निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान विभिन्न राजनीतिक और सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन होना है, जिसमें राज्य के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी व्यवस्थाओं में व्यस्त रहेंगे। इसी वजह से सत्र की शुरुआत 8 सितंबर के बजाय 9 सितंबर से रखी गई है। नई तारीखों की घोषणा के साथ ही विधानसभा सचिवालय द्वारा सभी विधायकों और संबंधित विभागों को नया शेड्यूल भेज दिया गया है।

 

पहले दिन दिवंगत नेताओं को शोक उल्लेख और श्रद्धांजलि

सत्र के शुरुआती दिन विधायी कार्य और अन्य संसदीय कार्यवाही शुरू होने से पहले सदन में नियमानुसार शोक उल्लेख पेश किया जाएगा। इस अवसर पर हाल के समय में दिवंगत हुए राज्य के पूर्व विधायकों, वर्तमान सदस्यों और महानुभावों को पूरे सदन द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं द्वारा दिवंगत नेताओं के राज्य के विकास और जनकल्याण में दिए गए अतुलनीय योगदान को याद किया जाएगा। इसके बाद सभी सदस्य दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करेंगे, जिसके बाद ही सदन की दैनिक कार्यवाही आगे बढ़ेगी।

 

जमीन टुकड़ा कानून संशोधन सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश होने की संभावना

तीन दिवसीय इस सत्र के दौरान राज्य सरकार द्वारा जनहित और भू-राजस्व (लैंड रेवेन्यू) सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन के पटल पर रखे जाने की प्रबल संभावना है। विशेष रूप से, राज्य के किसानों और भूमि स्वामियों से संबंधित 'जमीन टुकड़ा कानून संशोधन विधेयक' (Land Fragmentation Act Amendment Bill) सहित कुछ अन्य सुधार बिल पेश किए जाने की चर्चा है। इसके अलावा, सत्र के दौरान विधायकों के लिए तारांकित प्रश्नकाल का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के मुद्दों, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा देखने को मिलेगी।

अगस्त में बारिश ने किया निराश, गर्मी ने तोड़ा 125 साल का रिकॉर्ड; सितंबर में भी कम बारिश का अनुमान

अगस्त में बारिश ने किया निराश, गर्मी ने तोड़ा 125 साल का रिकॉर्ड; सितंबर में भी कम बारिश का अनुमान

hottest august in 125 years

अगस्त में देशभर में बारिश सामान्य से करीब 16 फीसदी कम दर्ज की गई। इसके चलते 1 जून से 31 अगस्त तक पूरे मानसून सीजन में बारिश की कमी बढ़कर लगभग 14 फीसदी हो गई है। अब भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सितंबर को लेकर भी राहत की उम्मीद कम कर दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस महीने देश में कुल बारिश सामान्य से कम रह सकती है। ALSO READ: Top News 1 September: अगस्त में 125 साल की गर्मी का रिकॉर्ड टूटा, अन्ना हजारे अस्पताल में भर्ती, मेसी का संन्यास

 

बारिश की कमी के साथ अगस्त में तापमान ने भी नया रिकॉर्ड बनाया। आईएमडी के मुताबिक, 1901 के बाद अगस्त 2026 भारत का सबसे गर्म अगस्त रहा। महीने के दौरान देश का औसत तापमान 28.01 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सामान्य औसत तापमान 27.34 डिग्री सेल्सियस है।

 

125 साल में सबसे गर्म रहा अगस्त

आईएमडी के महानिदेशक मौसम विज्ञान मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि अगस्त 2026 में देश का औसत तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान औसत न्यूनतम तापमान भी 1901 के बाद अगस्त महीने के लिए सबसे अधिक रहा।

 

अगस्त में औसत न्यूनतम तापमान 24.36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि इसका सामान्य स्तर 23.68 डिग्री सेल्सियस है। यानी रात के तापमान में भी सामान्य के मुकाबले बढ़ोतरी देखने को मिली।

 

मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त में देशभर में कुल 213.3 मिलीमीटर बारिश हुई। यह सामान्य से कम है और 2001 के बाद अगस्त महीने में दर्ज सातवीं सबसे कम बारिश है।

 

अल नीनो से सितंबर में भी बारिश पर असर

आईएमडी ने सितंबर में कम बारिश की एक प्रमुख वजह प्रशांत महासागर में बनी मजबूत अल नीनो स्थिति को बताया है। मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले महीनों में अल नीनो की स्थिति और मजबूत हो सकती है।

 

अगस्त में देश में चार कम दबाव वाले क्षेत्र बने थे और ये कुल 26 दिनों तक सक्रिय रहे। हालांकि, इनसे होने वाली बारिश का असर मुख्य रूप से गंगा के मैदानी इलाकों तक सीमित रहा। देश के दूसरे हिस्सों में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण कुल मानसूनी बारिश में कमी बनी रही। ALSO READ: LPG Price 1 September: सितंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल सिलेंडर, जानें दिल्ली-मुंबई समेत 4 महानगरों में नए दाम

 

सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

आईएमडी के 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर सितंबर में सामान्य बारिश का दीर्घकालिक औसत (LPA) 167.9 मिलीमीटर है। मौसम विभाग का अनुमान है कि सितंबर में देश के बड़े हिस्से में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।

 

हालांकि, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व, पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ इलाकों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। इसके बावजूद पूरे देश के स्तर पर बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान लगाया गया है।

 

सितंबर में गर्मी से भी राहत की उम्मीद कम

बारिश के साथ तापमान को लेकर भी मौसम विभाग का पूर्वानुमान लोगों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। देश के अधिकांश हिस्सों में सितंबर का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। इसी तरह ज्यादातर क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रह सकता है।

 

हालांकि, उत्तर-पश्चिम, पश्चिम-मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य या सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। ALSO READ: नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

 

हिंद महासागर में फिलहाल न्यूट्रल स्थिति

आईएमडी के मुताबिक, अभी हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति न्यूट्रल है। मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMcFS) के अनुमान के अनुसार सितंबर तक भी न्यूट्रल IOD की स्थिति बने रहने की संभावना है।

 

इस तरह सितंबर में देश को एक तरफ कम बारिश का सामना करना पड़ सकता है, वहीं अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है। अगस्त में बारिश की कमी और रिकॉर्ड गर्मी के बाद अब सितंबर का मौसम भी चुनौतीपूर्ण रहने के संकेत दे रहा है।

नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

nepal flood

रीतिका 

26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने नेपाल की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका दिया है। आर्थिक तौर पर नेपाल के सामने कमोबेश वैसी ही चुनौतियां फिर से खड़ी हो गई हैं जिनका सामना उसने 2015 में आए विनाशकारी भूकंपों के दौरान किया था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक इस हफ्ते आई प्रलयकारी बाढ़ से उबरने के लिए नेपाल को 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत पड़ सकती है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने रॉयटर्स को यह जानकारी दी है और कहा है कि यह रकम देश की अर्थव्यवस्था के लगभग दसवें हिस्से के बराबर है। ALSO READ: नेपाल आपदा के बाद भारत ने हिमालय पर निगरानी बढ़ाई

 

वागले ने कहा कि बाढ़ से हुए विनाश के बाद के पुनर्निमार्ण के लिए शुरुआती अनुमान 4-5 अरब डॉलर के बीच है। हालांकि, यह सिर्फ एक अनुमान है क्योंकि कुल नुकसान कितना हुआ है इस पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। साथ ही उन्होंने कहा कि नेपाल को 2015 के भूकंप के लिए जितनी जरूरत थी, उससे काफी कम की आवश्यकता होगी और फिलहाल कुल नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

 

वित्त मंत्री वागले ने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया कि पुनर्निर्माण का खर्च 2015 में आए भूकंप के बाद खर्च किए गए 9 अरब डॉलर से कम रहने की उम्मीद क्यों है। उस भूकंप में लगभग 9,000 लोग मारे गए थे, 5 लाख से अधिक घर नष्ट हो गए थे और नेपाल की अर्थव्यवस्था के लगभग एक तिहाई हिस्से के बराबर नुकसान हुआ था। बीते 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के कारण पत्थर, बर्फ, कीचड़ और मलबे का एक विशाल सैलाब हिमालय की पहाड़ी नदी त्रिशुली से होकर गुजरा। इस विनाशकारी सैलाब में नेपाल और चीन के तिब्बत में 600 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 2000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।

 

नेपाल को तकनीकी मदद की दरकार

लापता लोगों की तलाश में प्रभावित इलाके का खराब मौसम भी चुनौती बनकर उभरा है। नेपाल के शीर्ष अधिकारी नरेंद्र परियार ने रॉयटर्स को बताया कि खोज और बचाव कार्य अस्थायी रूप से रोक दिए गए हैं क्योंकि बारिश हो रही है और मौसम धुंधला है। वहीं, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि देश को खोज और बचाव अभियानों में मदद की जरूरत नहीं है, बल्कि सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने, उन स्थानों पर परिवहन और संचार लाइनों को शुरू करने जहां पुल नष्ट हो गए थे, शवों की पहचान, डीएनए परीक्षण और शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में सहायता की जरूरत है। उन्होंने रॉयटर्स को बताया, “हमने ऐसे क्षेत्रों में विशेष सेवाओं और तकनीकी सहायता के लिए अनुरोध किया है जहां हमारे पास पर्याप्त विशेषज्ञता और तकनीकी जानकारी नहीं है।”

 

भारत ने नेपाल के लिए लगभग 60 टन राहत सामग्री ले जाने वाली तीन उड़ानें भेजी हैं, जिनमें कंबल, दवाएं, भोजन और पानी साफ करने वाली गोलियां शामिल हैं। इसके साथ ही भारत की योजना एक सुरंग बचाव दल और एक चिकित्सा दल भेजने की भी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने अपनी आपदा प्रतिक्रिया बल और पूर्वनिर्मित पुलों के साथ संपर्क बहाल करने में मदद के लिए तकनीकी टीमों की भी पेशकश की है। वहीं, चीन ने नेपाल के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए आपातकालीन सहायता और अंतरराष्ट्रीय बचाव सहयोग का आह्वान किया है। हालांकि उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि चीन नेपाल को मदद के तौर पर क्या भेज रहा है। ALSO READ: नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

 

अर्थव्यवस्था को फिर पीछे धकेला

बाढ़ ने सीमावर्ती इलाके के शहरों को तबाह कर दिया, पुलों और सड़कों को अपने साथ बहा ले गई और प्रमुख जलविद्युत स्टेशनों को नुकसान पहुंचाया है। पर्यटन और जलविद्युत पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए ये आपदा कई स्तरों पर विनाशकारी साबित हुई है। अब तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक इसने राष्ट्रीय बिजली उत्पादन क्षमता के 12 प्रतिशत से अधिक हिस्से वाले बिजली प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचाया है। इन योजनाओं में काम करने वाले 900 से ज्यादा कर्मचारी लापता बताए जा रहे हैं।

 

इस आपदा के आने से पहले से ही नेपाल की अर्थव्यवस्था दबाव में थी। जेन जी प्रदर्शनों के बाद सत्ता में आई प्रधानमंत्री बालेन शाहकी सरकार सीमित संसाधनों के साथ काम कर रही है। ऐसे में इस आपदा ने अर्थव्यवस्था पर कई गुना बोझ बढ़ा दिया है। इसके साथ ही पर्यटन पर निर्भर इस देश के लिए यह बाढ़ नुकसानदायक साबित हुई है क्योंकि इससे तीर्थ, ट्रेकिंग और पर्वतारोहण जैसी गतिविधियां ठप पड़ गई हैं। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक पर्यटन नेपाल की जीडीपी का 6.4 फीसदी हिस्सा है और देश की करीब 15 फीसदी नौकरियां यहीं से आती हैं।

 

अंतरराष्ट्रीय संस्था रेड क्रॉस ने कहा है कि इस बाढ़ से 93,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने बताया है कि इस आपदा ने 10,000 स्कूली बच्चों का भी नुकसान किया है क्योंकि प्रभावित इलाकों में कम से कम 18 स्कूल बह गए हैं और 20 स्कूलों की इमारतों को नुकसान पहुंचा है।

LPG Price 1 September: सितंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल सिलेंडर, जानें दिल्ली-मुंबई समेत 4 महानगरों में नए दाम

LPG Price 1 September: सितंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल सिलेंडर, जानें दिल्ली-मुंबई समेत 4 महानगरों में नए दाम

commercial gas cylinder price hike

सितंबर महीने की शुरुआत के साथ ही कमर्शियल LPG सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों को महंगाई का झटका लगा है। तेल मार्केटिंग कंपनियों ने 19 किलो वाले व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) के मुताबिक, अलग-अलग शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में करीब 9.50 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।

हालांकि, तेल कंपनियों ने 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। यानी घरों में इस्तेमाल होने वाला गैस सिलेंडर सितंबर में भी पुरानी कीमत पर ही मिलेगा। ALSO READ: Top News 1 September: अगस्त में 125 साल की गर्मी का रिकॉर्ड टूटा, अन्ना हजारे अस्पताल में भर्ती, मेसी का संन्यास

 

चारों महानगरों में 19 किलो LPG सिलेंडर के नए दाम

कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में शहर के हिसाब से बदलाव हुआ है। दिल्ली में 19 किलो का सिलेंडर अब 9.50 रुपये महंगा होकर 2,747.50 रुपये का हो गया है। 31 अगस्त तक इसकी कीमत 2,738 रुपये थी। मुंबई में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,691.50 रुपये से बढ़कर 2,701 रुपये हो गई है। कोलकाता में इसकी कीमत 2,872.50 रुपये से बढ़कर 2,982 रुपये पहुंच गई है। वहीं, चेन्नई में 19 किलो वाला व्यावसायिक LPG सिलेंडर अब 2,916.50 रुपये में मिलेगा।

5 और 10 किलो वाले सिलेंडर के दाम भी स्थिर

तेल कंपनियों ने 5 किलो और 10 किलो वाले LPG सिलेंडर की कीमतों में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। 5 किलो वाला सामान्य ‘छोटू’ LPG सिलेंडर अभी भी 349.50 रुपये में उपलब्ध है। वहीं, XTRALITE 5 किलो सिलेंडर की कीमत 339 रुपये पर बनी हुई है। हालांकि, 5 किलो के नॉन-डोमेस्टिक LPG सिलेंडर की कीमत में मामूली बढ़ोतरी हुई है। इसकी कीमत 762 रुपये से बढ़कर अब 764 रुपये हो गई है। ALSO READ: 1 सितंबर से बदल जाएंगे आपकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ये नियम, LPG से लेकर विदेश यात्रा तक जानें क्या बदलेगा

 

घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें स्थिर

घरेलू उपभोक्ताओं को इस महीने कीमतों में बढ़ोतरी से राहत मिली है। 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें चारों महानगरों में स्थिर रखी गई हैं। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 942 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये, कोलकाता में 968 रुपये और चेन्नई में 957.50 रुपये में मिल रहा है।