PM मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर ओवैसी का तंज, बोले- ‘बाबर के नाम पर गालियां देते थे, उसी देश ने दिया अवार्ड’

PM मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर ओवैसी का तंज, बोले- ‘बाबर के नाम पर गालियां देते थे, उसी देश ने दिया अवार्ड’

owaisi attacks PM Modi on dostlik award

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान में मिले सर्वोच्च नागरिक सम्मान को लेकर भाजपा और आरएसएस पर जोरदार तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी को मुबारकबाद कि जिस बाबर के नाम पर हमें गालियां देते थे, उसी बाबर के देश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अवार्ड दिया है। ALSO READ: PM मोदी को मिला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान, द्विपक्षीय बैठक में हुए कई अहम समझौते

 

ताशकंद में रविवार को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च मित्रता सम्मान 'ओली दाराजाली दोस्तलिक' से सम्मानित किया। इस पर हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस को सोचने को कहा है कि जो भाजपा बाबर के नाम पर हमें गाली देती थी, उम्मीद करते हैं कि अब ऐसा नहीं करेगी।

 

पीएम मोदी को विदेश में मिलने वाले सम्मान पर कटाक्ष करते हुए ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री जहां भी जाते हैं अवार्ड लेकर आते हैं। मुबारकबाद आपको..बाबर के नाम पे इतनी गाली जो देते थे…उसी देश वाले अवार्ड दे रहे हैं आपको। संघ वालों को इस बारे में सोचना पड़ेगा। ALSO READ: अमेरिका से तनाव, चीन-रूस से नजदीकियां, SCO समिट में पीएम मोदी पर क्यों टिकी हैं दुनिया की निगाहें?

 

दिन में 100 बार 'दोस्तलिक' बोलता है हर भारतीय परिवार

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लटेफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि ओली दराजाली दोस्तलिक' सम्मान प्राप्त कर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा, मैं यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच स्थाई संबंधों को समर्पित करता हूं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित होना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है।

उन्होंने कहा कि भारत के लोग इस सम्मान के नाम में प्रयुक्त शब्द 'दोस्तलिक' से भलीभांति परिचित हैं। भारत में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा, जहां 'दोस्तलिक' शब्द दिन में 100 बार न बोला जाता हो। आज आपने वास्तव में इस शब्द के सार को सामने ला दिया है। 'दोस्तलिक' का अर्थ मित्रता है। यह शब्द अपने आप में भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों के केंद्र में मौजूद भावना को खूबसूरती से व्यक्त करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सम्मान प्राप्त करना उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि 1.4 अरब भारतीयों का सम्मान है।

अमेरिका से तनाव, चीन-रूस से नजदीकियां, SCO समिट में पीएम मोदी पर क्यों टिकी हैं दुनिया की निगाहें?

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PM Modi SCO Summit 2026

PM Modi SCO Summit 2026: साल 2026 के उत्तरार्ध में वैश्विक राजनीति एक बेहद संवेदनशील और बहु-आयामी संकटों के दौर से गुजर रही है। एक ओर जहाँ यूक्रेन-रूस संघर्ष, मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव और इज़राइल-ईरान टकराव जैसी वैश्विक महा-आपदाएँ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chains) को पंगु बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर अमरीका द्वारा चीन-रूस पर सख्त प्रतिबंध और भारत जैसे देशों पर आव्रजन/वीज़ा कड़ाई (H-1B Fee Increase Proposals) जैसे नीतिगत दबाव बढ़ाए जा रहे हैं।

ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताशकंद (उज्बेकिस्तान) और बिश्केक (किर्गिस्तान) की चार दिवसीय मध्य एशिया यात्रा तथा 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी ने भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।

अमेरिका-पश्चिम से बढ़ता टकराव और वैश्विक संकट (US Conflicts & Global Crises)

वर्तमान वैश्विक संकटों ने दुनिया को दो स्पष्ट धड़ों में बाँट दिया है, जिससे भारत के लिए रणनीतिक संतुलन साधना पहले से कहीं अधिक जटिल हो गया है:

  • अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियां और H-1B वीज़ा कड़ाई: अमेरिका में H-1B वीज़ा पर भारी-भरकम फीस वृद्धि के प्रस्ताव और सख्त आव्रजन नीतियों ने भारतीय आईटी पेशेवरों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ अमरीका इंडो-पैसिफिक (QUAD) में भारत को मुख्य साझेदार मानता है, तो दूसरी तरफ आर्थिक व आव्रजन मोर्चे पर संरक्षणवादी (Protectionist) रुख अपनाता है।
  • रूस-यूक्रेन व मध्य-पूर्व संकट का आर्थिक असर: पश्चिमी देशों द्वारा रूस और ईरान पर लगाए गए द्वितीयक प्रतिबंधों (Secondary Sanctions) के कारण भारत के ऊर्जा हितों (ऑइल इम्पोर्ट) और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

 

PM Modi SCO Summit 2026

  1.  

मध्य एशिया: भारत का 'Extended Neighborhood' और SECURE विज़न

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्ज़ियोयेव और किर्गिज़ राष्ट्रपति सादिर जापारोव के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भारत ने अपने SECURE विज़न (Security, Economic Cooperation, Connectivity, Unity, Respect for Sovereignty, Environment Protection) को दोहराया है:

  • RATS (Regional Anti-Terrorist Structure): सीमा पार आतंकवाद, कट्टरपंथ और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सुरक्षा ढाँचा मजबूत करना।
  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) व खनिज : मध्य एशियाई देशों को भारतीय UPI मॉडल, एआई (AI) और यूरेनियम व दुर्लभ खनिजों (Critical Minerals) के क्षेत्र में भागीदार बनाना।

बहुध्रुवीय दुनिया में भारत का 'विश्वबंधु' रूप

पश्चिम में अमरीका के कड़े वीज़ा नियम व आर्थिक संरक्षणवाद और पूर्व में चीन-रूस का मजबूत होता गठजोड़—इन दोनों के बीच भारत एक स्वतंत्र और संतुलित ध्रुव के रूप में उभरा है।

ताशकंद और बिश्केक से भारत का वैश्विक संदेश स्पष्ट है: विश्व संकटों के इस दौर में भारत किसी के पाले में खड़ा होने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों, वैश्विक शांति और समावेशी विकास का मार्ग चुनेगा।

47 किमी और 16 साल की बच्‍ची, बस में 2 दरिंदों ने दिल्‍ली के कश्‍मीरी गेट तक मचाई हैवानियत, जानिए गैंगरेप की पूरी कहानी

47 किमी और 16 साल की बच्‍ची, बस में 2 दरिंदों ने दिल्‍ली के कश्‍मीरी गेट तक मचाई हैवानियत, जानिए गैंगरेप की पूरी कहानी

delhi bus gang rape

  • मैनपुरी की रहने वाली 16 साल की 11वीं की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म
  • घटना के बाद पीड़िता ने कश्मीरी गेट थाना पुलिस को दी थी सूचना
  • कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर कार्रवाई शुरू की

दिल्‍ली एक बार फिर शर्मसार हुई है, वहां निर्भया गैंगरेप कांड की तरह एक और हैवानियत सामने आई है। चलती बस में 47 किमी तक के सफर के दौरान एक 16 साल की बच्‍ची के साथ रात में 2 दरिंदों ने गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। बच्‍ची बस रुकवाकर नोएडा में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास जा रही थी। जैसे ही बच्‍ची बस में सवार हुई उसे पता चला कि बस में कोई सवारी नहीं है। खाली बस का फायदा उठाकर बस के ड्राइवर और कंडक्‍टर ने बच्‍ची के साथ बारी-बारी से दुष्‍कर्म किया। बच्‍ची चीखती-चिल्‍लाती रही, लेकिन दरिंदों ने एक न सुनी। दुष्‍कर्म के बाद उसे रात में ही कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर उतार दिया। घायल अवस्‍था में ही बच्‍ची ने पुलिस को सूचना दी।

हैरान करने वाली बात है कि करीब 47 किमी के सफर के बीच कहीं भी पुलिस चेकिंग नहीं मिली। न कोई चेकपोस्‍ट। बस ड्राइवर और कंडक्‍टर ने बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दिया और बच्‍ची को अंधेरे में उतार दिया। इस कांड ने दिल्‍ली के ही निर्भया कांड की याद दिला दी। लोग सोशल मीडिया में चर्चा कर रहे हैं कि राजधानी भी बच्‍च्‍ियों के लिए सुरक्षित नहीं है। इस कांड के बाद देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से सवाल खडा हो गया है।

सवारी न होने का उठाया फायदा : बस में चढ़ने के बाद पीड़िता को अहसास हुआ कि उसमें कोई अन्य यात्री नहीं था। बस के चलते ही कंडक्टर ने छात्रा के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। पूरी बस में सिर्फ ड्राइवर और कंडक्‍टर ही थे। चालक और कंडक्टर दोनों ने मिलकर चलती बस में छात्रा के साथ बारी बारी से दुष्कर्म किया। उन्‍होंने उसे धमकाया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। वारदात के बाद आरोपियों ने देर रात उसे कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर उतार दिया और बस लेकर मौके से फरार हो गए।

क्या है पूरा मामला : जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की रहने वाली यह छात्रा 4 अगस्त को घर में किसी बात से नाराज होकर बिना बताए निकल गई थी। वह नोएडा में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास जा रही थी। भारी बारिश और रात के अंधेरे के कारण वह अपनी सही जगह पर उतरने के बजाय परी चौक पर उतर गई। वहां से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस को देखकर उसने रुकने का इशारा किया। बस के कंडक्टर ने उसे आश्वस्त किया कि वह उसे नोएडा सेक्टर-63 उतार देगा। लेकिन बस में चढ़ने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर और ड्राइवर ने अपनी घिनौनी करतूत शुरू कर दी। विरोध करने पर आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी और चलती बस में उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी देर रात उसे कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर छोड़कर फरार हो गए।

लॉ एंड ऑर्डर और पुलिस चेकिंग पर उठे गंभीर सवाल
47 किलोमीटर का लंबा रास्ता: परी चौक से कश्मीरी गेट तक के इस सफर में बस ने लगभग 47 किलोमीटर की दूरी तय की, लेकिन इस बीच उन्हें कहीं भी पुलिस बैरिकेडिंग या चेकिंग का सामना नहीं करना पड़ा।

काले पर्दे और सुनियोजित साजिश: बस में गहरे रंग के पर्दे लगे हुए थे, जिसके कारण बाहर से गुजर रहे किसी भी राहगीर को अंदर चल रही इस दरिंदगी का अहसास नहीं हो सका।

वर्कशॉप जा रही थी बस: पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी बस खराब होने के बाद उसे सूरजपुर की वर्कशॉप में रिपेयरिंग के लिए ले गए थे और फिर खाली बस को तिमारपुर ला रहे थे, तभी रास्ते में छात्रा उन्हें मिल गई और उन्‍होंने उसे अपना शिकार बना डाला।

सीसीटीवी फुटेज की मदद से हुई गिरफ्तारी : घायल अवस्था में पीड़िता ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और आपबीती बताई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाल बिछाया और दोनों आरोपियों को तिमारपुर से दबोच लिया। बस की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। साथ ही, परिजनों को तुरंत दिल्ली बुलाकर काउंसलिंग के बाद पीड़िता को सुरक्षित उनके हवाले कर दिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर बसों के नियमों और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

मैडिसन स्क्वायर पर मोहन भागवत के हिंदु-मुस्लिम वाले बयान और ज़ोहरान ममदानी के विरोध के असली मायने

मैडिसन स्क्वायर पर मोहन भागवत के हिंदु-मुस्लिम वाले बयान और ज़ोहरान ममदानी के विरोध के असली मायने

Mohan Bhagwat

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष के मुहाने पर खड़ा है। इस अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत का अमरीका दौरा सिर्फ प्रवासी भारतीयों से संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघ के वैश्विक अक्स को नए सिरे से परिभाषित करने का एक कूटनीतिक और सामाजिक प्रयास है।

न्यू यॉर्क में 'एएचईएडी' (AHEAD) फोरम द्वारा आयोजित 'फेथ लीडर्स कॉन्फ्रेंस' और मैडिसन स्क्वायर गार्डन के मंच से मोहन भागवत ने जो कहा—यदि कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता”—यह महज एक बयान नहीं है। यह घरेलू राजनीति, वैश्विक आख्यान (global narrative) और अमरीका में उभरती दक्षिण एशियाई राजनीति के त्रिकोण पर टकराता हुआ एक बड़ा वैचारिक मोड़ है।

1. समावेशी हिंदुत्व या वैचारिक निरंतरता?
भागवत का यह बयान कि “विविधता हमारी सहज एकता का आभूषण है” और “सभी मार्ग एक ही ईश्वर की ओर ले जाते हैं”—संघ की पारंपरिक छवि से भिन्न एक अत्यंत उदारवादी और दार्शनिक आख्यान गढ़ता है।

  • 2018 के दिल्ली भाषण की निरंतरता: 2018 में दिल्ली के विज्ञान भवन में दिए गए भाषण में भी भागवत ने स्पष्ट कहा था कि “मुसलमानों के बिना हिंदुत्व अधूरा है।” न्यू यॉर्क में 2018 का ही संदर्भ देकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देने की कोशिश की है कि संघ की विचारधारा बहिष्कारवादी (exclusionary) नहीं, बल्कि समावेशी (inclusive) है।
  • 'सेवा और संवाद' बनाम राजनीति: भागवत ने राजनीति को “स्वार्थ का खेल” बताते हुए सामाजिक शक्ति निर्माण पर बल दिया। 1996 के चरखी दादरी विमान हादसे का उदाहरण देकर, जहाँ संघ स्वयंसेवकों ने पीड़ितों का धर्म देखे बिना मदद की थी, उन्होंने यह स्थापित करने का प्रयास किया कि संघ का मूल चरित्र बहुसंख्यकवादी राजनीति से परे केवल सामाजिक सेवा (Seva) है।

2. ज़ोहरान ममदानी का विरोध: अमरीका की आंतरिक राजनीति और भारतीय डायस्पोरा का विभाजन
संघ प्रमुख के अमरीका पहुँचते ही न्यू यॉर्क शहर के पहले भारतीय-अमरीकी मेयर ज़ोहरान ममदानी का कड़ा रुख सामने आया। ममदानी ने संघ की विचारधारा को “बहिष्कारवादी” बताते हुए कहा कि यह उस बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष भारत के विचारों के विपरीत है, जिसमें वे पले-बढ़े हैं।
इस विरोध के तीन प्रमुख राजनीतिक पहलू हैं:

  1. अमरीकी प्रथम संशोधन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: ममदानी ने वैचारिक विरोध के बावजूद यह स्वीकार किया कि न्यू यॉर्क शहर के पास किसी निजी स्थल (मैडिसन स्क्वायर गार्डन) पर आयोजित कानून-सम्मत कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) नहीं है। अमरीकी संविधान का प्रथम संशोधन (First Amendment) विचार के आधार पर किसी भी शांतिपूर्ण आयोजन पर रोक लगाने से राज्य को रोकता है।
  2. डायस्पोरा का बदलता स्वरूप: भारतीय-अमरीकी समुदाय अब केवल आर्थिक रूप से समृद्ध वर्ग नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रूप से दो ध्रुवों में बँट चुका है। एक तरफ पारंपरिक संघ-समर्थक संस्थाएं हैं जो भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान को अमरीका में स्थापित करना चाहती हैं; दूसरी तरफ ममदानी जैसे प्रगतिशील नेता और नागरिक अधिकार समूह (जैसे 'हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स') हैं जो भारत में बहुसंख्यकवाद की राजनीति के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज़ उठाते हैं।
  3. 'हिंदूफोबिया' बनाम 'सिविल राइट्स' की जंग: अमरीकी विश्लेषकों का मानना है कि संघ प्रमुख का दौरा अमरीकी संस्थानों में 'हिंदूफोबिया' के खिलाफ माहौल बनाने और भारत विरोधी आख्यान को कुंद करने की रणनीति का हिस्सा है, जबकि विपक्षी समूह इसे भारत की संस्कृति-युद्ध (culture wars) को अमरीका में एक्सपोर्ट करने का प्रयास मानते हैं।

3. 'वसुधैव कुटुंबकम' बनाम धरातल का यथार्थ
मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क में पश्चिमी अवधारणा “जियो और जीने दो” (Live and let live) के मुकाबले भारतीय अवधारणा “दूसरों को जीने में मदद करो” (Help others live) को ऊपर रखा। लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय दार्शनिक वक्तव्य के साथ कुछ जमीनी विरोधाभास भी सामने आते हैं:

  • आंतरिक और बाह्य आख्यान का अंतर: असदुद्दीन ओवैसी जैसे घरेलू राजनीतिक विरोधियों ने भागवत के बयान को “संघ की पुरानी रणनीति” करार दिया है। उनका तर्क है कि विदेश में वैश्विक जनमत के सामने 'उदारवादी हिंदुत्व' की बात की जाती है, जबकि भारत के भीतर धार्मिक अल्पसंख्यकों को संदिग्ध दृष्टिकोण से देखने वाले विमर्श को बढ़ावा मिलता है।
  • संवाद की निरंतरता: भागवत ने स्वयं स्वीकार किया कि मुस्लिम और ईसाई प्रतिनिधि अक्सर उनसे कहते हैं कि “कई बैठकों के बाद भी कुछ नहीं बदला”। इस पर भागवत का उत्तर—”बैठते रहिए, नियत सच्ची है तो बदलाव होगा”—यह दर्शाता है कि संघ स्वीकार करता है कि अविश्वास की खाई गहरी है और इसे भरने में लंबा समय लगेगा।

वैश्विक मंच पर संघ की नई पहचान की परीक्षा
मोहन भागवत का न्यू यॉर्क भाषण और ज़ोहरान ममदानी की तीखी प्रतिक्रिया यह साबित करती है कि भारतीय राजनीति का दायरा अब भौगोलिक सीमाओं को पार कर चुका है।

आरएसएस प्रमुख का यह कहना कि जो हिंदू मुसलमानों को भारत से बाहर निकालना चाहता है, वह हिंदू नहीं है”, निश्चित रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघ की छवि को एक समावेशी संगठन के रूप में पेश करने का एक रणनीतिक और दार्शनिक प्रयास है। हालाँकि, इस 'वैश्विक दर्शन' की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संघ भारत के भीतर अपने जमीनी तंत्र और अनुषांगिक संगठनों में इस समावेशी सोच को किस हद तक लागू कर पाता है।

अमरीका की धरती से 'सत्य, विविधता और एकता' का जो संदेश भागवत ने दिया है, वह केवल एक भाषण बनकर रहेगा या भारत के सामाजिक-राजनीतिक ताने-बाने में कोई ठोस बदलाव लाएगा—दुनिया भर की निगाहें अब इसी पर टिकी हैं।

क्या ‘जीवन का अधिकार’ सिर्फ कागजी वादा है? इंदौर के MY अस्‍पताल पर बढ़ता रेफरल सिस्‍टम का बोझ और स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत

क्या 'जीवन का अधिकार' सिर्फ कागजी वादा है? इंदौर के MY अस्‍पताल पर बढ़ता रेफरल सिस्‍टम का बोझ और स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत

Indore MY Hospital

दोपहर 12 बजे इंदौर के महाराजा यशवंतराव (MYH) अस्पताल की कैजुअल्टी के बाहर एम्बुलेंस के सायरन की आवाज थमने का नाम नहीं लेती। धार के ग्रामीण इलाके से आई 28 वर्षीय सीता बाई गंभीर प्रसव पीड़ा में हैं। परिजन पिछले तीन घंटे से 150 किलोमीटर दूर से एम्बुलेंस में भटकते हुए पहुंचे हैं, क्योंकि जिला अस्पताल में ऑक्सीजन और विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं थे।

MYH पहुंचने पर उन्हें जो मिला, वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार और गरिमा) का सीधा उल्लंघन है—एक ही बेड पर दो महिलाएं दर्द से कराह रही थीं, और कुछ मरीज कॉरिडोर की ठंडी टाइलों पर अपनी गंदी चादर बिछाकर बोतल चढ़वाने को मजबूर थे।

दरअसल, इंदौर का एमवाय अस्‍तपाल इस सूबे का इकलौता बड़ा अस्‍पताल है, मालवा से लेकर निमाड़ तक के मरीज इस अस्‍पताल पर निर्भर हैं। आलम यह है कि मालवा-निमाड़ के अस्‍पतालों से रोजाना सैंकड़ों मरीजों को रेफर किया जाता है। ऐसे में एमवाय पर लगातार दबाव बढता है, जिसका नतीजा यह होता है कि मरीज को बेहतर इलाज नहीं मिल पाता है, इसके उलट मरीज और डॉक्‍टरों के बीच लगातार विवाद और टकराव की घटनाएं सामने आती हैं।

महात्‍मा गांधी मेडिकल कॉलेज (एमजीएम) इंदौर के पूर्व डीन डॉ संजय दीक्षित बताते हैं कि हां, यह सही है। जिला अस्‍पतालों से अक्‍सर मरीजों को एमवाय रेफर किया जाता है, क्‍योंकि उनके पास भी संसाधन नहीं है या विशेषज्ञ डॉक्‍टर उनके पास नहीं होते हैं। ऐसे में एमवाय पर मरीजों का बोझ ज्‍याद हो जाता है। ऐसे में यहां मरीज के स्‍वास्‍थ्‍य के साथ समझौता करना मजबूरी हो जाता है। जब यह दबाव बढ़ता है तो मरीज की हेल्‍थ प्रभावित होने से लेकर मरीज की मौत तक का ग्राफ बढ़ता है और फिर मरीज और डॉक्‍टर के बीच टकराव बढ़ते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि मरीज को स्‍वास्‍थ्‍य का अधिकार नहीं मिल पाता है। ऐसे मामलों में ज्‍यादातर वही लोग प्रभावित होते हैं जो वंचित वर्ग के होते हैं और ग्रामीण इलाकों से रेफर कि जाते हैं। डॉ संजय दीक्षित बताते हैं कि सरकार को जिला अस्‍पतालों को ज्‍यादा रिस्‍पॉन्सिबल बनाना चाहिए, क्‍योंकि ज्‍यादातर नेशनल हेल्‍थ मिशन से मिला फंड इन्‍हीं जिला अस्‍पतालों, प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों और हेल्‍थ सेंटर्स को जाता है। मेडिकल कॉलेजों को सरकार से किसी तरह का सीधा फंड नहीं मिलता है।

'रेफरल सिस्टम' की विफलता और MYH पर बेकाबू बोझ
मध्य भारत के सबसे बड़े इस 1400 से अधिक बेड वाले सरकारी अस्पताल की क्षमता अब दम तोड़ रही है। झाबुआ, खरगोन, खंडवा, देवास और बड़वानी जैसे जिलों से प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC/CHC) द्वारा प्राथमिक इलाज दिए बिना ही मरीजों को सीधे 'रेफर' कर दिया जाता है।

  • एक बेड पर दो-दो मरीज: बर्न यूनिट, पीडियाट्रिक और मेडिसिन वार्डों में स्थिति सबसे गंभीर है। 100% से अधिक ऑक्यूपेंसी के कारण एक बेड पर दो मरीजों को सुलाया जाता है।
  • वेंटीलेटर और स्ट्रेचर की मारामारी: गंभीर रूप से बीमार मरीजों के परिजनों को खुद स्ट्रेचर खींचते या आईसीयू में खाली वेंटीलेटर के लिए घंटों मिन्नतें करते देखा जा सकता है।


डॉक्टरों और मरीजों के बीच तनाव और हिंसक टकराव

अत्यधिक दबाव और संसाधनों की कमी का सीधा असर डॉक्टर-मरीज के रिश्तों पर पड़ रहा है। MYH में रेजिडेंट डॉक्टर प्रतिदिन 16-18 घंटे की ड्यूटी करते हैं।

  • केस 1 (कैजुअल्टी में झड़प): धार से आए एक गंभीर मरीज की समय पर वेंटिलेटर न मिलने से मौत के बाद परिजनों ने जूनियर डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाकर तोड़फोड़ की। सुरक्षा में तैनात गार्ड स्थिति को नियंत्रित नहीं कर पाए और डॉक्टरों ने हड़ताल की चेतावनी दे दी।
     
  • केस 2 (ओपीडी में डॉक्टरों से अभद्रता): मेडिसिन ओपीडी में एक डॉक्टर प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज देखने को मजबूर हैं। परामर्श में महज 30 सेकंड का समय मिलने से नाराज मरीजों के परिजनों और जूनियर डॉक्टरों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की आम बात बन चुकी है।

स्वास्थ्य व्यवस्था के आंकड़ों की हकीकत

जिला अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं, वेंटिलेटर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी के कारण 'रेफरल बोझ' अकेले MYH पर आ गिरता है।

क्षेत्र MYH (इंदौर) की स्थिति मालवा-निमाड़ के जिला अस्पताल
रोजाना ओपीडी भार 3,000 से 4,500 मरीज 300 से 600 मरीज (अधिकांश रेफर)
डॉक्टर-मरीज अनुपात 1 डॉक्टर पर ~150-200 मरीज/दिन विशेषज्ञों (M.D./M.S.) के 50%-60% पद खाली
वेंटिलेटर उपलब्धता मांग की तुलना में 30%-40% कम अधिकांश जिलों में शो-पीस बने या ऑपरेटर नहीं
नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ स्वीकृत पदों की तुलना में 35% कमी 45% से 50% तक पद रिक्त

 
एमवाय अस्‍पताल में समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत का आरोप : एमवायएच (MYH) कैंपस स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हाल ही में घटी घटना ढहते रेफरल सिस्टम और भारी दबाव का प्रत्यक्ष प्रमाण है। झाबुआ जिले से गंभीर स्थिति में लाई गई 42 वर्षीय महिला मरीज को प्राथमिक उपचार में हुई देरी और वेंटिलेटर बेड न मिलने के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी।

महिला की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के आईसीयू और कॉरिडोर में जमकर हंगामा किया। परिजनों का सीधा आरोप था कि मरीज को घंटों स्ट्रेचर पर रखा गया और डॉक्टरों ने ‘बेड खाली नहीं हैं’ का हवाला देकर समय पर वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं दिया। दूसरी ओर, ऑन-ड्यूटी जूनियर डॉक्टरों का कहना था कि अस्पताल के सभी वेंटिलेटर और आईसीयू बेड पहले से ही अन्य गंभीर मरीजों से फुल थे।

महिला की मौत के बाद इंदौर के सुपरस्‍पेशलिटी के आईसीयू में घुसे परिजन : सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद परिजन और मेडिकल स्टाफ के बीच विवाद हो गया। करीब 30 से 35 लोग ICU में घुस आए। ICU में हंगामे के साथ तोड़फोड़ की गई। घटना अस्पताल की छठी मंजिल पर स्थित ICU में शाम करीब 7 बजे हुई। हंगामे के दौरान डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को अपनी सुरक्षा के लिए वहां से बाहर निकलना पड़ा। मृतक की पहचान 60 वर्षीय ताहिरा कपाड़िया के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार ताहिरा को पिछले रविवार को तबीयत खराब होने के बाद एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार का कहना है कि डॉक्टरों ने उनके दिल में ब्लॉकेज की जानकारी दी थी। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल लाया गया था। मोईज के मुताबिक मंगलवार को ताहिरा कपाड़िया को ऑपरेशन के लिए ले जाया गया था। परिवार का कहना है कि ऑपरेशन से पहले ताहिरा कपाड़िया सामान्य स्थिति में थीं और परिवार के लोगों से बातचीत भी कर रही थीं। ऑपरेशन थिएटर ले जाने के करीब 20 मिनट बाद एक डॉक्टर बाहर आए और इमरजेंसी की बात कही।

एमवाय अस्पताल (MYH) के अधीक्षक प्रो. (डॉ.) अशोक यादव, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. डी.के. शर्मा और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रियाएं।

मालवा-निमाड़ के 8 से अधिक जिलों (धार, झाबुआ, खरगोन, खंडवा, बड़वानी आदि) से मरीजों का सीधे इंदौर रेफर होना, MYH और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पर बेकाबू बोझ, डॉक्टरों पर अत्यधिक मानसिक तनाव, संसाधनों का अभाव और आए दिन होने वाले डॉक्टर-मरीज विवादों पर MYH अधीक्षक, सुपर स्पेशलिटी अधीक्षक और इंदौर CMHO का दृष्टिकोण व बयान:

क्षेत्रीय दबाव और संसाधनों की कमी से डॉक्टरों पर मानसिक और भावनात्मक दबाव बढ़ता।
एमवाय अस्पताल पूरे मालवा-निमाड़ का एकमात्र प्रमुख टर्शरी केयर सेंटर है। हमारे पास स्वीकृत क्षमता 1,400पलंग की है, लेकिन कई बार ओपीडी और कैजुअल्टी को मिलाकर रोजाना 3,000 से 4,000 मरीजों की देखरेख करनी पड़ती है। आसपास के जिला अस्पतालों से ऐसे मरीजों को भी अंतिम समय में रेफर कर दिया जाता है, जिन्हें बुनियादी स्तर पर रोका जा सकता था। हमारे जूनियर और रेजिडेंट डॉक्टर 18-18 घंटे लगातार काम कर रहे हैं। जब एक ही बेड पर दो मरीजों का इलाज करना पड़ता है या वेंटिलेटर वेटिंग में होते हैं, तो डॉक्टरों पर भारी मानसिक और भावनात्मक दबाव बनता है। इस बीच यदि किसी मरीज की मौत हो जाती है तो परिजन सारा गुस्सा डॉक्टरों पर निकालते हैं। हिंसा और अभद्रता से डॉक्टरों का मनोबल टूटता है, जबकि कमी संसाधनों की है, डॉक्टरों की मंशा की नहीं।”
प्रो. (डॉ.) अशोक यादव — अधीक्षक, एमवाय अस्पताल (MYH), इंदौर
 
रेफरल सिस्टम की नाकामी, अनियंत्रित केस लोड और डॉक्टर-मरीज के बीच बढ़ता टकराव।
पेरिफेरल और जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों (Cardiologists, Neurologists) और टेक्नीशियनों की कमी के कारण मरीज सीधे हमारे सुपर स्पेशलिटी सेंटर में भेजे जा रहे हैं। जब मरीज यहां पहुंचता है, तो उसकी स्थिति बेहद क्रिटिकल हो चुकी होती है। हमारे आईसीयू (ICU) हमेशा 100% से अधिक क्षमता पर चल रहे होते हैं। जब किसी गंभीर मरीज को बेड या वेंटिलेटर के लिए इंतजार करना पड़ता है, तो परिजनों का आक्रोश स्वाभाविक होता है, लेकिन डॉक्टरों के साथ मारपीट और आईसीयू में घुसकर तोड़फोड़ करना किसी समस्या का समाधान नहीं है। डॉक्टरों और मरीजों के बीच संवाद की कमी की मुख्य वजह समय और स्टाफ का अभाव है। जब तक निचले स्तर पर हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं होगा, तब तक टर्शरी अस्पतालों पर यह दबाव और तनाव खत्म नहीं हो सकता।”
डॉ. डी.के. शर्मा — अधीक्षक, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, इंदौर
 
जिला व ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली की स्थिति
यह सच है कि इंदौर के सरकारी अस्पतालों पर संभाग भर का भारी रीजनल बोझ है। ग्रामीण और जिला स्तर के प्राथमिक (PHC) व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में बुनियादी सुविधाओं, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते रेफरल की संख्या बढ़ी है। हमारा प्रयास है कि जिलों से बिना वजह होने वाले 'अनावश्यक रेफरल' को रोका जाए और एक 'स्टेबलाइजेशन प्रोटोकॉल' लागू किया जाए ताकि मरीज को इंदौर भेजने से पहले प्राथमिक उपचार वहीं मिले। साथ ही, जिला स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पदों को भरने और वेंटिलेटर/ऑक्सीजन सुविधाओं को चालू रखने के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। इंदौर के अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा और मरीजों को समय पर इलाज मिलना—दोनों हमारी प्राथमिकता हैं।”
डॉ. माधव प्रसाद हसानी — मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), इंदौर

तीनों प्रशासनिक अधिकारियों की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि समस्या की जड़ इंदौर का MYH या सुपर स्पेशलिटी अस्पताल नहीं, बल्कि पूरे मालवा-निमाड़ का ढह चुका रेफरल सिस्टम और प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे में संसाधनों की भारी कमी है। जब तक जिला अस्पतालों में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक इंदौर के अस्पतालों में डॉक्टरों पर मानसिक दबाव और मरीजों के परिजनों के साथ हिंसक झड़पों का सिलसिला थमता नजर नहीं आता है।

इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल (MYH) और एमजीएम (MGM) मेडिकल कॉलेज से जुड़े पूरे परिसर की आधिकारिक और वर्तमान संसाधन क्षमता:
1. बेड और क्लिनिकल क्षमता

  • मूल एमवाय अस्पताल (मुख्य 7 मंजिला भवन): 1,300 बेड स्वीकृत (जो अत्यधिक दबाव के समय 1,500+ तक खींच दिए जाते हैं)।
  • संपूर्ण एमवाय समूह (MGM कैंपस के सभी अस्पताल मिलाकर): 3,000 बेड।

    • सुपर स्पेशलिटी अस्पताल: 600 बेड
    • एमटीएच महिला एवं प्रसूति अस्पताल: 500 बेड
    • चाचा नेहरू बाल अस्पताल: 200 बेड
    • कैंसर अस्पताल: 100 बेड
    • एम.आर. टीबी अस्पताल: 100 बेड
    • मानसिक अस्पताल (बाणगंगा): 100 बेड

2. क्रिटिकल केयर (ICU व वेंटिलेटर)

  • आईसीयू बेड (मुख्य MYH): 25-30 बेड की मेडिकल आईसीयू (MICU) (इसके अलावा SICU, NICU, PICU और बर्न यूनिट्स में पृथक बेड)।
  • वेंटीलेटर: पूरे कैंपस को मिलाकर लगभग 150-180 क्रियाशील वेंटिलेटर (सुपर स्पेशलिटी और एमवाय मिलाकर)।
  • डायलिसिस: 15 हीमोडायलिसिस मशीनें।

3. ओपीडी और दैनिक मरीज भार

  • दैनिक फुटफॉल (MYH मुख्य भवन): 3,000 से 4,500 मरीज प्रतिदिन।
  • कैजुअल्टी/इमरजेंसी: 300 से 500 इमरजेंसी केस रोजाना (जिसमें 40-50% केस मालवा-निमाड़ के अन्य जिलों से रेफर होकर आते हैं)।

4. डॉक्टर और मानव संसाधन (MGM मेडिकल कॉलेज संकाय)

  • डॉक्टर व फैकल्टी: 350-400 (प्रोफेसर, एसोसिएट/असिस्टेंट प्रोफेसर व कंसलटेंट)।
  • रेजिडेंट व जूनियर डॉक्टर (PGs/Interns): ~600-700 (इन्हीं पर 24 घंटे नाइट ड्यूटी और इमरजेंसी सेवाओं का मुख्य भार रहता है)।
  • नर्सिंग स्टाफ: स्वीकृत पदों (1,200) के मुकाबले 30% से 35% पद रिक्त हैं।
  • पैरामेडिकल व क्लास-4 कर्मचारी: लगभग 40% कमी, जिसे आउटसोर्स कर्मचारियों से पूरा किया जाता है।

गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार कहां?

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल खेत मजदूर समिति (1996) मामले में स्पष्ट किया था कि समय पर समयबद्ध चिकित्सीय उपचार न मिलना जीवन के मौलिक अधिकार का हनन है। जब एक नागरिक को इलाज के लिए फर्श पर सोने को मजबूर होना पड़े, तो यह केवल स्वास्थ्य सेवाओं की नाकामी नहीं, बल्कि एक संवैधानिक विफलता है। जब तक जिला और तहसील स्तर के अस्पतालों में डॉक्टरों की भर्ती और जरूरी उपकरण सुनिश्चित नहीं किए जाएंगे, तब तक एमवायएच की व्यवस्थाएं ऐसे ही चरमराती रहेंगी और आम नागरिक अपनी गरिमा गंवाता रहेगा।

नेपाल में कैसे आई इतनी भयानक बाढ़? वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

नेपाल में कैसे आई इतनी भयानक बाढ़? वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

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नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ में 903 लोगों की मौत हो गई जबकि करीब 4200 लोग लापता है। इस मामले में वैज्ञानिकों ने प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह आपदा सामान्य से बेहद ज्यादा बारिश या बादल फटने के कारण नहीं आई थी। इसके पीछे ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बर्फ, चट्टानों और मलबे के अचानक खिसकने की घटना को जिम्मेदार माना गया है। ALSO READ: नेपाल आपदा के बाद भारत ने हिमालय पर निगरानी बढ़ाई

 

नेपाल पर्यावरण सोसायटी के अनुरोध पर तैयार की गई रिपोर्ट रविवार को सार्वजनिक की गई। वैज्ञानिकों के प्रारंभिक अध्ययन के अनुसार, रसुवा जिले के लांगटांग-लिरुंग क्षेत्र में करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई से बर्फ और चट्टानों का एक विशाल हिस्सा टूटकर नीचे गिरा। यह मलबा ल्हेंदे नदी में पहुंचा और वहां से तेज बहाव भोटेकोशी होते हुए त्रिशूली नदी तक पहुंच गया। रास्ते में पानी अपने साथ भारी मात्रा में चट्टान, मिट्टी और तलछट लेकर आगे बढ़ा।

 

इस अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के उत्तरी और मध्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। कई कस्बे और गांव प्रभावित हुए। अधिकारियों के अनुसार, आपदा में मरने वालों की संख्या सोमवार तक बढ़कर 903 हो गई है। राहत और बचाव अभियान के दौरान शवों की बरामदगी अब भी जारी है। ALSO READ: नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद भावुक हुईं मनीषा कोइराला, अंतरराष्ट्रीय समुदया से की बड़ी अपील

 

ग्लेशियल झील फटने का नहीं मिला सबूत

 

रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि यह आपदा ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी हिमनदीय झील के अचानक फटने से नहीं हुई। वैज्ञानिकों ने उपग्रह तस्वीरों, मौसम और जल विज्ञान से जुड़े आंकड़ों, भू-भाग की संरचना तथा नदी तंत्र में ऊंचाई और ढलान के बदलावों का अध्ययन किया। इस विश्लेषण में किसी ग्लेशियल झील के फटने के प्रमाण नहीं मिले।

 

शोधकर्ताओं के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह करीब 8:37 बजे लांगटांग-लिरुंग के उत्तरी हिस्से में बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आया। करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई से शुरू हुआ यह मलबा तेज ढलान से गुजरते हुए लगभग 2,930 मीटर की ऊंचाई पर ल्हेंदे नदी में जा पहुंचा।

 

उपग्रह तस्वीरों में करीब 10 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में बड़े भू-आकृतिक बदलाव दिखाई दिए हैं। इसके अलावा करीब 0.56 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर अलग होने के संकेत भी मिले हैं। ALSO READ: नेपाल में बाढ़ से सुरंगों में फंसे 900 से ज्‍यादा मजदूर, रेस्क्यू टीम चला रही अभियान, इस तरह पहुंचाई ऑक्सीजन
 

महज 7 मिनट में 22 किलोमीटर का सफर

रिपोर्ट में इस बाढ़ की रफ्तार को भी असाधारण बताया गया है। वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक बर्फ, चट्टानों और मलबे का यह विशाल प्रवाह सात मिनट से कुछ अधिक समय में करीब 22 किलोमीटर की दूरी तय करके रसुवागढ़ी पहुंच गया।

 

इस दौरान इसकी औसत गति करीब 46.3 मीटर प्रति सेकंड यानी लगभग 167 किलोमीटर प्रति घंटा आंकी गई। रसुवागढ़ी से बेत्रावती के बीच इसकी गति घटकर करीब 73 किलोमीटर प्रति घंटा रह गई। आगे बढ़ते हुए बहाव की गति करीब 22 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई।

 

हालांकि रफ्तार कम होने के बाद भी बाढ़ का बहाव अपने साथ बड़ी मात्रा में चट्टान, मिट्टी और तलछट लेकर आगे बढ़ता रहा। वैज्ञानिकों ने पाया कि बाढ़ आने से कई घंटे पहले रसुवागढ़ी और स्याफ्रुबेसी में नदी का जलस्तर और बहाव घट गया था।

 

भारी बारिश को लेकर भी सवाल

अध्ययन के मुताबिक, रसुवागढ़ी में सुबह 5 बजे से 8 बजे के बीच पानी का औसत स्तर कम हुआ, जबकि स्याफ्रुबेसी में नदी का बहाव करीब सात बजे से घटने लगा था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घटना वाले दिन ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में असाधारण रूप से भारी बारिश होने के प्रमाण नहीं मिले। इससे यह संभावना कमजोर होती है कि पूरी आपदा केवल अत्यधिक बारिश या बादल फटने की वजह से हुई थी।

 

हालांकि वैज्ञानिकों ने अंतिम निष्कर्ष से पहले और जांच की जरूरत बताई है। विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस घटना के पीछे सटीक भूगर्भीय प्रक्रिया क्या थी, पिघलती बर्फ की कितनी भूमिका रही और क्या ऊपरी क्षेत्र में नदी का पानी कुछ समय के लिए कहीं रुका था।

 

जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान

विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया। अध्ययन में नेपाल विद्युत प्राधिकरण के शुरुआती आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि 13 जलविद्युत परियोजनाएं और एक सौर परियोजना प्रभावित हुईं। इन परियोजनाओं के प्रभावित होने से करीब 431 मेगावाट की बिजली उत्पादन क्षमता फिलहाल व्यवस्था से बाहर हो गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस आपदा से हुए पर्यावरणीय, आर्थिक और बुनियादी ढांचे के नुकसान का पूरा आकलन आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम: महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा 5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण

उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम: महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा 5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण

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उत्तराखंड की पुष्कर धामी सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपए तक का ब्याज मुक्त ऋण प्रदान कर रही है।

 

सीएम धामी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके सपनों को नई उड़ान देने के लिए हमारी सरकार निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपए तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। जिससे महिलाएं स्वरोजगार, लघु उद्योग एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाकर आत्मनिर्भर बन सकें। सशक्त और आत्मनिर्भर मातृशक्ति ही विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव है।

इस योजना की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

 

आर्थिक मजबूती: इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार, लघु उद्योग, और छोटे व्यवसायों को शुरू करने या बढ़ाने के लिए बिना किसी ब्याज के पूंजी उपलब्ध कराना है।

 

ब्याज का बोझ नहीं: ऋण राशि पर लगने वाला पूरा ब्याज राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जिससे महिलाओं को बैंक ऋण चुकाने में आसानी होगी।

 

स्वरोजगार को बढ़ावा: इसके जरिए महिलाएं पापड़, आचार, हस्तशिल्प, सिलाई-कढ़ाई, कृषि आधारित उद्योग और अन्य घरेलू उत्पाद से जुड़े व्यवसाय शुरू कर सकती हैं।

 

आवेदन प्रक्रिया: महिला स्वयं सहायता समूह अपने नजदीकी बैंक शाखा, ब्लॉक विकास कार्यालय (BDO), या ग्रामीण आजीविका मिशन (UKRLM) के माध्यम से इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।

LIVE: नेपाल हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 903, 4000 से ज्यादा लापता

LIVE: नेपाल हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 903, 4000 से ज्यादा लापता

Nepal flood and landslide

Latest News Today Live Updates in Hindi : नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन में मृतकों की संख्या बढ़कर 903 हुई। 4 हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता। पल पल की जानकारी…

उत्तर प्रदेश के शामली में सोमवार तड़के पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में दो बदमाश मारे गए। पुलिस के मुताबिक, दोनों बदमाश अंकित बालियान हत्याकांड में शामिल शूटर थे और उनकी गिरफ्तारी पर 50-50 हजार रुपए का इनाम घोषित था। ALSO READ: शामली में पुलिस मुठभेड़, अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर ढेरअमेरिका और ईरान में फिर तेज हुई जंग। अमेरिका ने खर्ग द्वीप और लरक द्वीप पर किया हमला। ईरान ने भी जॉर्डन में अमेरिकी बेस को निशाना बनाया। ALSO READ: Trump का खर्ग द्वीप पर बड़ा दावा, कहा- 'पूरी तरह तबाह'; होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फिर आमने-सामने अमेरिका-ईराननेपाल की बाढ़ में अब तक 903 मौतें हुईं, 4000 से ज्यादा लोग लापता हैं। इसमें सबसे ज्यादा पॉवर प्रोजेक्ट के कार्यों में लगे 933 लोग लापता हैं।

दिल्ली में फिर निर्भया जैसा कांड: 47KM तक बस में नाबालिग के साथ होती रही दरिंदगी

दिल्ली में फिर निर्भया जैसा कांड: 47KM तक बस में नाबालिग के साथ होती रही दरिंदगी

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राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जिसने छह साल पुरानी ‘निर्भया’ कांड की खौफनाक यादें ताजा कर दी हैं। 47 किलोमीटर लंबे सफर के दौरान एक चलती हुई बस में ग्यारहवीं कक्षा की नाबालिग छात्रा के साथ हैवानियत की गई। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों (ड्राइवर और कंडक्टर) को तिमारपुर बस पार्किंग से गिरफ्तार कर लिया है। ALSO READ: शामली में पुलिस मुठभेड़, अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर ढेर

 

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की रहने वाली यह छात्रा 4 अगस्त को घर में किसी बात से नाराज होकर बिना बताए निकल गई थी। वह नोएडा में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास जा रही थी। भारी बारिश और रात के अंधेरे के कारण वह अपनी सही जगह पर उतरने के बजाय परी चौक पर उतर गई।

 

 वहां से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस को देखकर उसने रुकने का इशारा किया। बस के कंडक्टर ने उसे आश्वस्त किया कि वह उसे नोएडा सेक्टर-63 उतार देगा। लेकिन बस में चढ़ने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर और ड्राइवर ने अपनी घिनौनी करतूत शुरू कर दी। विरोध करने पर आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी और चलती बस में उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी देर रात उसे कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर छोड़कर फरार हो गए।

 

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस चेकिंग पर उठे गंभीर सवाल

 

47 किलोमीटर का लंबा रास्ता: परी चौक से कश्मीरी गेट तक के इस सफर में बस ने लगभग 47 किलोमीटर की दूरी तय की, लेकिन इस बीच उन्हें कहीं भी पुलिस बैरिकेडिंग या चेकिंग का सामना नहीं करना पड़ा।

 

काले पर्दे और सुनियोजित साजिश: बस में गहरे रंग के पर्दे लगे हुए थे, जिसके कारण बाहर से गुजर रहे किसी भी राहगीर को अंदर चल रही इस दरिंदगी का अहसास नहीं हो सका।

 

वर्कशॉप जा रही थी बस: पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी बस खराब होने के बाद उसे सूरजपुर की वर्कशॉप में रिपेयरिंग के लिए ले गए थे और फिर खाली बस को तिमारपुर ला रहे थे, तभी रास्ते में छात्रा उन्हें मिल गई। ALSO READ: राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

 

सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी गिरफ्तार

घायल अवस्था में पीड़िता ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और आपबीती बताई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाल बिछाया और दोनों आरोपियों को तिमारपुर से दबोच लिया। बस की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। साथ ही, परिजनों को तुरंत दिल्ली बुलाकर काउंसलिंग के बाद पीड़िता को सुरक्षित उनके हवाले कर दिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर बसों के नियमों और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

Trump का खर्ग द्वीप पर बड़ा दावा, कहा- ‘पूरी तरह तबाह’; होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फिर आमने-सामने अमेरिका-ईरान

Trump का खर्ग द्वीप पर बड़ा दावा, कहा- 'पूरी तरह तबाह'; होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फिर आमने-सामने अमेरिका-ईरान

US attacks Khage island

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खर्ग द्वीप को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। लारक हमले के बाद ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं।

 

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि खर्ग द्वीप धुएं में उड़ाया जा रहा है। खर्ग फारस की खाड़ी में ईरान का मुख्य तेल-निर्यात केंद्र है।  यह पोस्ट तब आई जब होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिका और ईरान की लड़ाई फिर से भड़क उठी।

 

खबरों के अनुसार, ट्रंप द्वारा शेयर किया गया क्लिप एआई-जनरेटेड फुटेज प्रतीत होता है, न कि पुष्ट लाइव स्ट्राइक वीडियो। ट्रंप महीनों से खर्ग को धमकी दे रहे हैं और पहले कह चुके हैं कि अमेरिकी बलों ने तेल सुविधाओं को बख्शते हुए वहां के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था।

 

अमेरिका ने लारक आईलैंड पर हमला किया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के मुताबिक, कार्रवाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के जवान इन रॉकेट लॉन्चरों से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइंस डालने की तैयारी कर रहे थे। हमले में कई ईरानी सैनिकों और नागरिकों के मारे जाने या घायल होने की खबर सामने आई।

खर्ग द्वीप ईरान का काला खजाना 

खर्ग द्वीप को ईरान का काला खजाना कहा जाता है। यह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के लिए भी राजस्व का प्रमुख स्रोत है।

 

कहां है खर्ग द्वीप

खर्ग द्वीप एक छोटा प्रवाल द्वीप है, जो ईरान के कच्चे तेल उद्योग का सबसे बड़ा टर्मिनल है। देश के करीब 90% कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है। इसे ईरान की तेल की जीवनरेखा भी कहा जाता है। उत्तरी फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप ईरान से करीब 25 किलोमीटर दूर और और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के 483 किमी (300 मील) उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इसकी लंबाई 6 किलोमीटर है।

 

क्या है द्वीप का चीन से कनेक्शन

खर्ग द्वीप से निर्यात होने वाले तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। इस तेल निर्यात से ईरान को न केवल भारी राजस्व मिलता है, बल्कि एक महाशक्ति के रूप में चीन का रणनीतिक साथ भी मिलता है। द्वीप पर अमेरिक हमले से चीन भी नाराज हो सकता है।