अमेरिका से तनाव, चीन-रूस से नजदीकियां, SCO समिट में पीएम मोदी पर क्यों टिकी हैं दुनिया की निगाहें?

अमेरिका से तनाव, चीन-रूस से नजदीकियां,  SCO समिट में पीएम मोदी पर क्यों टिकी हैं दुनिया की निगाहें?

PM Modi SCO Summit 2026

PM Modi SCO Summit 2026: साल 2026 के उत्तरार्ध में वैश्विक राजनीति एक बेहद संवेदनशील और बहु-आयामी संकटों के दौर से गुजर रही है। एक ओर जहाँ यूक्रेन-रूस संघर्ष, मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव और इज़राइल-ईरान टकराव जैसी वैश्विक महा-आपदाएँ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chains) को पंगु बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर अमरीका द्वारा चीन-रूस पर सख्त प्रतिबंध और भारत जैसे देशों पर आव्रजन/वीज़ा कड़ाई (H-1B Fee Increase Proposals) जैसे नीतिगत दबाव बढ़ाए जा रहे हैं।

ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताशकंद (उज्बेकिस्तान) और बिश्केक (किर्गिस्तान) की चार दिवसीय मध्य एशिया यात्रा तथा 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी ने भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।

अमेरिका-पश्चिम से बढ़ता टकराव और वैश्विक संकट (US Conflicts & Global Crises)

वर्तमान वैश्विक संकटों ने दुनिया को दो स्पष्ट धड़ों में बाँट दिया है, जिससे भारत के लिए रणनीतिक संतुलन साधना पहले से कहीं अधिक जटिल हो गया है:

  • अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियां और H-1B वीज़ा कड़ाई: अमेरिका में H-1B वीज़ा पर भारी-भरकम फीस वृद्धि के प्रस्ताव और सख्त आव्रजन नीतियों ने भारतीय आईटी पेशेवरों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ अमरीका इंडो-पैसिफिक (QUAD) में भारत को मुख्य साझेदार मानता है, तो दूसरी तरफ आर्थिक व आव्रजन मोर्चे पर संरक्षणवादी (Protectionist) रुख अपनाता है।
  • रूस-यूक्रेन व मध्य-पूर्व संकट का आर्थिक असर: पश्चिमी देशों द्वारा रूस और ईरान पर लगाए गए द्वितीयक प्रतिबंधों (Secondary Sanctions) के कारण भारत के ऊर्जा हितों (ऑइल इम्पोर्ट) और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

 

PM Modi SCO Summit 2026

  1.  

मध्य एशिया: भारत का 'Extended Neighborhood' और SECURE विज़न

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्ज़ियोयेव और किर्गिज़ राष्ट्रपति सादिर जापारोव के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भारत ने अपने SECURE विज़न (Security, Economic Cooperation, Connectivity, Unity, Respect for Sovereignty, Environment Protection) को दोहराया है:

  • RATS (Regional Anti-Terrorist Structure): सीमा पार आतंकवाद, कट्टरपंथ और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सुरक्षा ढाँचा मजबूत करना।
  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) व खनिज : मध्य एशियाई देशों को भारतीय UPI मॉडल, एआई (AI) और यूरेनियम व दुर्लभ खनिजों (Critical Minerals) के क्षेत्र में भागीदार बनाना।

बहुध्रुवीय दुनिया में भारत का 'विश्वबंधु' रूप

पश्चिम में अमरीका के कड़े वीज़ा नियम व आर्थिक संरक्षणवाद और पूर्व में चीन-रूस का मजबूत होता गठजोड़—इन दोनों के बीच भारत एक स्वतंत्र और संतुलित ध्रुव के रूप में उभरा है।

ताशकंद और बिश्केक से भारत का वैश्विक संदेश स्पष्ट है: विश्व संकटों के इस दौर में भारत किसी के पाले में खड़ा होने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों, वैश्विक शांति और समावेशी विकास का मार्ग चुनेगा।