
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खर्ग द्वीप को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। लारक हमले के बाद ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि खर्ग द्वीप धुएं में उड़ाया जा रहा है। खर्ग फारस की खाड़ी में ईरान का मुख्य तेल-निर्यात केंद्र है। यह पोस्ट तब आई जब होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिका और ईरान की लड़ाई फिर से भड़क उठी।
President Trump just posted that Kharg Island is “being blown to smithereens.”
Kharg is Iran’s main oil-export hub in the Persian Gulf.
The post came as U.S. Iran fighting flared again around the Strait of Hormuz.
Reports say the clip Trump shared appears to be AI-generated… pic.twitter.com/ZMcExlWeEl— Commentary Donald J. Trump Posts From Truth Social (@TrumpDailyPosts) August 31, 2026
खबरों के अनुसार, ट्रंप द्वारा शेयर किया गया क्लिप एआई-जनरेटेड फुटेज प्रतीत होता है, न कि पुष्ट लाइव स्ट्राइक वीडियो। ट्रंप महीनों से खर्ग को धमकी दे रहे हैं और पहले कह चुके हैं कि अमेरिकी बलों ने तेल सुविधाओं को बख्शते हुए वहां के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था।
अमेरिका ने लारक आईलैंड पर हमला किया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के मुताबिक, कार्रवाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के जवान इन रॉकेट लॉन्चरों से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइंस डालने की तैयारी कर रहे थे। हमले में कई ईरानी सैनिकों और नागरिकों के मारे जाने या घायल होने की खबर सामने आई।
खर्ग द्वीप ईरान का काला खजाना
खर्ग द्वीप को ईरान का काला खजाना कहा जाता है। यह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के लिए भी राजस्व का प्रमुख स्रोत है।
कहां है खर्ग द्वीप
खर्ग द्वीप एक छोटा प्रवाल द्वीप है, जो ईरान के कच्चे तेल उद्योग का सबसे बड़ा टर्मिनल है। देश के करीब 90% कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है। इसे ईरान की तेल की जीवनरेखा भी कहा जाता है। उत्तरी फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप ईरान से करीब 25 किलोमीटर दूर और और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के 483 किमी (300 मील) उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इसकी लंबाई 6 किलोमीटर है।
क्या है द्वीप का चीन से कनेक्शन
खर्ग द्वीप से निर्यात होने वाले तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। इस तेल निर्यात से ईरान को न केवल भारी राजस्व मिलता है, बल्कि एक महाशक्ति के रूप में चीन का रणनीतिक साथ भी मिलता है। द्वीप पर अमेरिक हमले से चीन भी नाराज हो सकता है।


