
सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग’ 'Belonging: A Journey of Love' को लेकर ठीक वही हुआ, जैसा पहले से अनुमान था। सोनिया गांधी की इस किताब पर भारत में बखेड़ा शुरू हो गया है। इस किताब पर आग में घी का डालने का काम तब हुआ, जब इसके प्रकाशन समूह पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इसे भारत में प्रकाशित करने से इनकार कर दिया। इस घोषणा के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर प्रकाशक पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। विपक्ष भी कांग्रेस के साथ है। वहीं, प्रकाशन हाउस के अपने तर्क हैं। इस पूरे विवाद पर हालांकि बीजेपी ने भी अपनी सफाई दी है।
बता दें कि सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग’ नवंबर में रिलीज होगी। कहा जा रहा है कि इसमें सोनिया गांधी के अपने निजी और राजनीतिक अनुभव दर्ज हैं। लेकिन कुछ हिस्से ऐसे हैं, जिनके बारे में पता चलते ही इसे लेकर जमकर विवाद शुरू हो गया है। बता दें कि किताब 10 नवंबर को दुनियाभर में रिलीज होगी, जबकि प्रकाशन ने इसे भारत में प्रकाशित करने से इनकार कर दिया है। जानते हैं किताब के किन हिस्सों पर क्या विवाद है। क्या कहना है प्रकाशक का और कैसे यह एक राजनीतिक विवाद बन गया है।

भारत में छापने से प्रकाशक का इनकार क्यों : सोनिया गांधी की बिलॉन्गिंग पर पूरा विवाद तब सामने आया जब पेंगुइन की अमेरिकी शाखा अल्फ्रेड ए नॉफ ने घोषणा की कि सोनिया गांधी ने यह किताब 10 नवंबर को दुनियाभर में रिलीज होगी। हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि वह भारत में इसे छापने के लिए उत्सुक था, लेकिन किताबों में दिए गए तथ्यों की जांच करना प्रकाशक का अधिकार और जिम्मेदारी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि पब्लिशर किताब के कुछ हिस्सों में बदलाव या संपादन करना चाहता था, इस बदलाव या संपादन से सोनिया गांधी ने साफ मना कर दिया। इसके बाद पेंगुइन इंडिया ने इसे भारत में छापने से मना कर दिया। जबकि भारत के अलावा यह किताब दूसरे देशों में 10 नवंबर को रिलीज होगी।
किताब के किन हिस्सों पर कंट्रोवर्सी : एनडीटीवी की एक रिपोर्ट बताती है कि पब्लिशर और सोनिया गांधी के बीच मुख्य रूप से तीन विषयों को लेकर सहमित नहीं बन पाई। सोनिया गांधी की किताब में भारतीय क्षेत्र में चीन की कथित घुसपैठ और सीमा के मौजूदा हालात का प्रमुखता से जिक्र किया गया है। किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली, नेतृत्व और केंद्र सरकार की कई अहम नीतियों पर सोनिया गांधी के सवाल शामिल हैं। वहीं किताब में राष्ट्रीय मामलों और भारत के सामाजिक ताने-बाने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के असर को लेकर सोनिया गांधी के निजी विचार लिखे गए हैं। जब पब्लिशर ने इन हिस्सों में बदलाव का सुझाव दिया, तो सोनिया गांधी ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह उनके अपने अनुभव और नजरिए हैं, जिनमें कोई समझौता नहीं हो सकता।
तथ्यों की जांच करना चाहता है प्रकाशन : बता दें कि अल्फ्रेड ए. नॉफ पेंगुइन रैंडम हाउस की एक प्रकाशन इकाई है। उसने कहा था कि संबंधित चर्चाओं के दौरान वह इस संस्मरण को प्रकाशित करने की इच्छुक थी। हालांकि, प्रकाशक ने कहा कि लेखकों की सामग्री की तथ्य-जांच करना उसका अधिकार और जिम्मेदारी है। यह बयान उन खबरों के बीच आया, जिनमें कहा गया था कि सोनिया गांधी द्वारा संपादकीय बदलावों को स्वीकार नहीं किए जाने के बाद प्रमुख प्रकाशक ने किताब प्रकाशित करने का फैसला वापस ले लिया।
कांग्रेस का भाजपा-RSS पर आरोप : कांग्रेस के लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई ने पेंगुइन इंडिया के बयान की आलोचना की और इसे कमजोर बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ''यह कितना कमजोर बयान है। पेंगुइन इंडिया 'एग्जाम वॉरियर्स' और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर कई किताबें प्रकाशित करने में पूरी तरह खुश है। इसमें कोई संदेह नहीं कि भाजपा सरकार में ऐसे लोग हैं, जो अब इस बात से डर गए हैं कि भारत के लोग इस किताब को पढ़ेंगे।''
गहलोत ने कहा, क्या मजबूरी है : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया से पूछा कि जब उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन इकाई इस संस्मरण को दुनिया भर में प्रकाशित कर रही है तो भारत में इसे प्रकाशित करने से उसे क्या रोक रहा है। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'पेंगुइन की अंतरराष्ट्रीय इकाई सोनिया गांधी की आगामी किताब को उसके मूल रूप में पूरी दुनिया में प्रकाशित करने के लिए तैयार है, लेकिन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इसे भारत में प्रकाशित करने से पहले बदलाव चाहता है। आखिर ऐसी क्या वजह है या ऐसा कौन सा दबाव है कि जो किताब पूरी दुनिया में प्रकाशित हो रही है, उसे भारत में प्रकाशित नहीं किया जा सकता?''
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने आगे कहा, ''इतने कद की व्यक्ति, देश की वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सोनिया गांधी जी की किताब को दबाव में दबाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हत्या के समान है।'
विपक्ष आया कांग्रेस के सपोर्ट में : सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर हुए विवाद पर सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने कहा, 'लेखिका को अपने मन की बात लिखने का पूरा अधिकार है, और यह एक तरह की आत्मकथा ही है। इसमें से कुछ अंश हटाने का कोई मतलब नहीं है। इसके पीछे क्या तर्क है? इसलिए हम इसका विरोध करते हैं। कई प्रकाशक हैं, और मुझे उम्मीद है कि उनमें से कुछ इसे जल्द ही प्रकाशित करेंगे।'
नकवी बोले- यह संस्मरण है या उसका सियासीकरण : पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सोनिया गांधी की किताब पर जारी विवाद पर कहा कि यह लेखक और प्रकाशक के बीच का मामला है। वे तय करेंगे कि यह संस्मरण है या उसका सियासीकरण है। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए नकवी ने कहा, “यह सोनिया गांधी का संस्मरण है या कल्पना है, ये तो लेखक और प्रकाशक के बीच की बात है। प्रकाशक और लेखक ही तय करेंगे कि यह संस्मरण है या उसका सियासीकरण है। मुझे लगता कि इसमें किसी को राजनीति करने की जरूरत है। आप अगर संस्मरण के नाम पर कल्पनाएं लिख कर रहे हैं और उनमें भी कई तरह के फ्रिक्शन हों या फर्जी और मनगढ़ंत किस्से-कहानियां हों तो निश्चित रूप से उसमें प्रकाशक के साथ भी जिम्मेदारी होती है।”
आरोपों पर क्या बोली भाजपा : किताब के प्रकाशन पर दबाव को लेकर लग रहे आरोपों पर अब भाजपा ने जवाब दिया है। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस नेता संस्मरण को लेकर 'डर की झूठी कहानी गढ़ने और एक गलत धारणा बनाने' की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने कहा कि कांग्रेस के ये प्रयास सिर्फ विडंबना से ही नहीं, बल्कि स्पष्ट रूप से पाखंड से भी भरे हैं।

आखिर क्या है किताब में : ये किताब सोनिया गांधी की आत्मकथा है। इसमें सोनिया गांधी के इटली में बिताए बचपन से लेकर भारत में उनके जीवन तक को दर्ज किया गया है। राजीव गांधी से विवाह, देश की प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी की बहू बनना, इन सबका उल्लेख इस आत्मकथा में किया गया है। सोनिया ने कहा कि राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाने के बाद जब उन्होंने अपने जीवन को पीछे मुड़कर देखा, तो उन्हें एहसास हुआ कि ''उनके जीवन के हर पड़ाव को जोड़ने वाली कड़ी प्रेम और निष्ठा रही है।'' उन्होंने अपनी इस यात्रा को ''इटली के छोटे शहर में अपने बचपन की सरलता से लेकर भारत में बिताए वर्षों की जटिलता'' तक की यात्रा बताया।