
South India politics: राजनीति में कोई भी रिश्ता स्थायी नहीं होता। आज जो साथ हैं, कल वे एक-दूसरे के खिलाफ हो सकते हैं। और दक्षिण भारत में यह खेल अब खुलकर खेला जा रहा है।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी केन्द्र की एनडीए सरकार की बैसाखी है। 16 सांसद। सरकार इनके बिना डगमगा सकती है। और कांग्रेस ने इन जड़ों को हिलाना शुरू कर दिया है। रेवंत रेड्डी और डीके शिवकुमार दोनों कांग्रेस के महत्वपूर्ण चेहरे नायडू से मिल रहे हैं। रेवंत तो लगातार। शिवकुमार दो बार। यह संयोग नहीं लग रहा। ALSO READ: CM Vijay : CM विजय का इशारा, तमिलनाडु विधानसभा में मचा हंगामा, थलापति को क्यों देनी पड़ी सफाई, पढ़िए क्या है मामला
कोई बड़ा खेल तैयार हो रहा है
नायडू पुराने खिलाड़ी हैं। वे जानते हैं कि सत्ता की बैसाखी कभी भी छूट सकती है। टीडीपी अपने सांसदों को एकजुट रहने का संदेश दे रही है। मतलब अंदरखाने कुछ हलचल है। कोई बड़ा खेल तैयार हो रहा है। जनता का विद्रोह बढ़ रहा है, और नेता भी हवा का रुख समझने लगे हैं। और जगन मोहन रेड्डी वाईएसआरसीपी के मुखिया ने अब जनता से माफी मांग ली है, सीईसी एक्ट का समर्थन करने के लिए, भाजपा का साथ देने के लिए। कहा– गलती हो गई। पछतावा हो रहा है। परीक्षक को छात्र नहीं नियुक्त कर सकता। निष्पक्ष निकाय चाहिए। अभी दो वोट सत्ता के, एक विपक्ष का – सिस्टम में खामी है।
क्या टीडीपी एनडीए से दूरी बनाएगी?
यह माफी महज शब्दों की नहीं लग रही। यह राजनीतिक पुनर्रचना का संकेत है। जगन कांग्रेस की तरफ लौट सकते हैं। दक्षिण में कांग्रेस फिर से समीकरण बनाने की कोशिश में है। तेलंगाना, आंध्र, कर्नाटक तीनों जगह दबाव बनाया जा रहा है। प्रश्न यह है कि नायडू कितनी दूर तक जाएंगे? क्या टीडीपी एनडीए से दूरी बनाएगी? या सिर्फ दबाव बनाने का खेल है? और जगन की माफी, क्या यह सिर्फ जनभावना शांत करने की चाल है या वाकई दिशा बदलने का संकेत?
राजनीति में माफी मांगना आसान है, लेकिन सत्ता का समीकरण बदलना मुश्किल। फिर भी हवा बदल रही है। जनता का विद्रोह नेताओं को मजबूर कर रहा है। अब देखना यह है कि यह संपर्क, ये मुलाकातें और ये माफी कहां जाकर थमती हैं। दक्षिण भारत का राजनीतिक भूगोल फिर से आकार ले रहा है। और केंद्र की सरकार बैसाखी पर खड़ी है – कोई भी झटका महंगा पड़ सकता है।


