UP चुनाव 2027 : सर्वे में BJP को बढ़त का दावा, योगी सरकार से 77% संतुष्ट, CM पद के लिए योगी आदित्यनाथ पहली पसंद

UP चुनाव 2027 : सर्वे में BJP को बढ़त का दावा, योगी सरकार से 77% संतुष्ट, CM पद के लिए योगी आदित्यनाथ पहली पसंद

Yogi adityanath

उत्तरप्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले न्यूज 18 नेटवर्क के एक सर्वेक्षण में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को बढ़त मिलने का दावा किया गया है। सर्वे के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को लेकर लोगों की राय काफी हद तक सकारात्मक है। हालांकि, रोजगार और बेरोजगारी का मुद्दा सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।

 

सर्वेक्षण में राज्य के सभी 75 जिलों के 30,925 लोगों को शामिल किया गया। सर्वे 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के बीच किया गया था। इसके नतीजों में भाजपा-राजग को बढ़त दिखाई गई है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा)-कांग्रेस गठबंधन और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के समर्थन का भी आकलन किया गया है।

 

सर्वे में भाजपा-राजग को 66.6 प्रतिशत समर्थन

 

सर्वेक्षण के अनुसार, यदि अभी विधानसभा चुनाव कराए जाएं तो 66.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को वोट देने की बात कही। वहीं, 26.4 प्रतिशत लोगों ने सपा-कांग्रेस गठबंधन और 5.4 प्रतिशत ने बसपा के पक्ष में राय दी। अगली सरकार किस गठबंधन की बनेगी, इस सवाल पर भी 66.6 प्रतिशत लोगों ने भाजपा-राजग के पक्ष में राय जताई। वहीं, 26.5 प्रतिशत लोगों ने सपा-कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनने की संभावना जताई। इसके अलावा, 65.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना था कि भाजपा को राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए।

 

ये आंकड़े सर्वेक्षण में शामिल लोगों की राय को दर्शाते हैं। इन्हें 2027 के चुनाव के वास्तविक नतीजे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

 

मुख्यमंत्री पद के लिए योगी आदित्यनाथ पहली पसंद

 

मुख्यमंत्री पद के लिए पसंद पूछे जाने पर योगी आदित्यनाथ को 66.2 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला। वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव 24.4 प्रतिशत लोगों की पसंद रहे। सर्वेक्षण में 77.1 प्रतिशत लोगों ने योगी सरकार के कामकाज पर संतुष्टि जताई, जबकि 13.5 प्रतिशत लोगों ने असंतोष व्यक्त किया। सरकार के प्रदर्शन का आकलन सात प्रमुख मानकों पर किया गया था।

 

कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को लेकर संतुष्टि

 

सर्वेक्षण में कानून-व्यवस्था सरकार का सबसे बेहतर आंका गया पक्ष रहा। इस मुद्दे पर 74 प्रतिशत लोगों ने संतुष्टि जताई। इसके बाद बुनियादी ढांचे को लेकर 68.6 प्रतिशत और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर 66.3 प्रतिशत लोगों ने संतोष व्यक्त किया।

 

मतदान के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा पूछे जाने पर 33.4 प्रतिशत लोगों ने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी। भाजपा-राजग के मौजूदा समर्थकों में 89.6 प्रतिशत लोग कानून-व्यवस्था से संतुष्ट थे। वहीं, सपा-कांग्रेस और बसपा समर्थकों के बीच यह आंकड़ा लगभग 43 प्रतिशत रहा।

 

सर्वे के मुताबिक, भाजपा-राजग के मौजूदा समर्थकों में 94.7 प्रतिशत लोग राज्य सरकार के कामकाज से संतुष्ट थे। इनमें 93.3 प्रतिशत ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पहली पसंद बताया, जबकि 93.2 प्रतिशत का मानना था कि भाजपा को तीसरा कार्यकाल मिलना चाहिए।

 

भाजपा ने पुराने समर्थकों को बनाए रखा, विपक्ष के समर्थन में भी सुधार

 

सर्वेक्षण में दावा किया गया कि 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट देने वाले लगभग 91 प्रतिशत लोग अब भी भाजपा या उसके गठबंधन का समर्थन कर रहे हैं।

 

दूसरी ओर, सपा-कांग्रेस गठबंधन के पुराने समर्थकों को बनाए रखने की दर लगभग 83 से 85 प्रतिशत बताई गई। सर्वे के मुताबिक, गठबंधन का मौजूदा समर्थन 2022 के विधानसभा चुनाव की तुलना में 3.7 प्रतिशत अंक और 2024 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2.4 प्रतिशत अंक अधिक था।

 

इन आंकड़ों से सर्वे में दोनों राजनीतिक खेमों के समर्थकों के रुझान का आकलन किया गया है। वास्तविक मतदान में मतदाताओं का व्यवहार अलग हो सकता है।

 

रोजगार बना सरकार के लिए बड़ी चुनौती

 

सरकार के कामकाज के सात मानकों में रोजगार ऐसा क्षेत्र रहा, जहां संतुष्टि का स्तर सबसे कम दर्ज किया गया। सर्वेक्षण के अनुसार, 58.3 प्रतिशत लोगों ने रोजगार के मामले में सरकार के प्रदर्शन पर संतुष्टि जताई।

 

बेरोजगार उत्तरदाताओं में यह आंकड़ा घटकर 50.7 प्रतिशत रह गया। भूमिहीन और अकुशल श्रमिकों के बीच रोजगार को लेकर संतुष्टि लगभग 52 से 53 प्रतिशत रही।

 

यहां तक कि भाजपा-राजग के मौजूदा समर्थकों में भी रोजगार के मुद्दे पर संतुष्टि 74.5 प्रतिशत थी, जो कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं के आंकड़ों से कम है।

 

सर्वेक्षण में रोजगार के अलावा महंगाई और परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने जैसे मुद्दों पर भी लोगों की राय ली गई। ऐसे मुद्दे आगामी विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकते हैं।

 

राम मंदिर चंदे के विवाद पर क्या बोले लोग?

 

सर्वेक्षण में अयोध्या स्थित राम मंदिर के लिए दिए गए चंदे में कथित हेराफेरी के मुद्दे पर भी लोगों से सवाल पूछे गए। इस मामले में 31.2 प्रतिशत लोगों ने मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, 20.6 प्रतिशत ने कर्मचारियों और ठेकेदारों तथा 13.7 प्रतिशत ने राज्य सरकार को जिम्मेदार माना।

 

यह आंकड़े उत्तरदाताओं की राय पर आधारित हैं। इन्हें कथित हेराफेरी के मामले में किसी पक्ष की कानूनी जिम्मेदारी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। सर्वेक्षण में जेन जी के विरोध प्रदर्शनों और अन्य सार्वजनिक मुद्दों को लेकर भी लोगों की राय जानने की कोशिश की गई।

कैसे किया गया सर्वेक्षण?

 

न्यूज18 नेटवर्क के इस सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों से जनसंख्या के अनुपात में उत्तरदाताओं का चयन किया गया। इसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोगों को शामिल किया गया। लोगों से घर-घर जाकर आमने-सामने बातचीत की गई। इसके लिए कंप्यूटर आधारित व्यक्तिगत साक्षात्कार (CAPI) और एक संरचित प्रश्नावली का इस्तेमाल किया गया।

 

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में प्रस्तावित हैं। ऐसे में सर्वेक्षण के निष्कर्ष राजनीतिक दलों के लिए जनमत को समझने का एक संकेत हो सकते हैं, लेकिन चुनाव का अंतिम परिणाम मतदाताओं के वास्तविक मतदान पर निर्भर करेगा।