जियो IPO पर एनालिस्ट्स बुलिश, लिस्टिंग पर 15-20% तक बढ़त की उम्मीद

जियो IPO पर एनालिस्ट्स बुलिश, लिस्टिंग पर 15-20% तक बढ़त की उम्मीद

jio ipo

  • एमके रिसर्च ने दी ‘सब्सक्राइब’ रेटिंग, ग्रोथ के मुकाबले वैल्यूएशन को माना वाजिब
  • 5G पर भारी निवेश का दौर खत्म होने से कैश फ्लो मजबूत होने की उम्मीद
  • जियो की अलग लिस्टिंग से RIL शेयरहोल्डर्स के लिए वैल्यू अनलॉकिंग की उम्मीद

जियो प्लेटफॉर्म्स का प्राइस बैंड सामने आने के बाद आई कई एनालिस्ट रिपोर्ट्स ने कंपनी के IPO को हरी झंडी दी है। मार्केट एक्सपर्ट्स को लिस्टिंग पर करीब 15 से 20% तक शुरुआती बढ़त की संभावना नजर आ रही है। हालांकि यह अनुमान है और वास्तविक लिस्टिंग बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगी। ALSO READ: जियो IPO से पहले ईशा अंबानी ने बताया- कैसे आया JIo का आइडिया, कैसे खड़ा हुआ विशाल साम्राज्य?

 

16 अक्टूबर को जारी अपनी IPO नोट में एमके रिसर्च ने जियो IPO को ‘सब्सक्राइब’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि कंपनी की मार्केट लीडरशिप, प्राइसिंग पावर, मजबूत एक्जीक्यूशन और आगे के ग्रोथ अवसरों को देखते हुए मौजूदा प्राइस बैंड वाजिब है।

 

इसी बीच, स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट ने भी जियो IPO को ‘सब्सक्राइब’ रेटिंग दी है। उसकी रिपोर्ट के मुताबिक FY26 की कमाई के आधार पर ऊपरी प्राइस बैंड पर जियो का P/E करीब 33.3 गुना है, जबकि भारती एयरटेल का 40.7 गुना। यानी इस पैमाने पर स्वास्तिका जियो को एयरटेल के मुकाबले करीब 18% कम वैल्यूएशन पर देखता है। ALSO READ: JIO IPO : जानिए क्या है प्राइस बेंड, लॉट साइज और GMP, कब होगी शेयर बाजार में लिस्टिंग?

 

वहीं, एक अलग वैल्यूएशन आधार पर कुछ मार्केट एक्सपर्ट्स ने जियो की कीमत उसकी कमाई के करीब 33.5 गुना और भारती एयरटेल की करीब 38.9 गुना आंकी है। इस हिसाब से जियो करीब 14% सस्ती दिखती है। हालांकि एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनी की आगे की कुछ ग्रोथ का असर मौजूदा कीमत में पहले से शामिल है।

 

एनालिस्ट्स के मुताबिक जियो के लिए एक बड़ी राहत यह है कि 5G नेटवर्क पर भारी निवेश का दौर अब काफी हद तक पूरा हो चुका है। एमके रिसर्च का कहना है कि FY24 से FY26 के बीच कंपनी का पूंजीगत खर्च, रेवेन्यू के 48.8% से घटकर 23.3% रह गया। FY26 में कंपनी का फ्री कैश फ्लो करीब ₹32,500 करोड़ रहा। रिपोर्ट का मानना है कि आगे बड़े निवेश की जरूरत घटने से जियो के पास ज्यादा नकदी बच सकती है।

 

लंबी अवधि में मार्केट एक्सपर्ट्स की नजर सिर्फ मोबाइल कारोबार पर नहीं है। होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज, क्लाउड, AI और अपनी टेक्नोलॉजी को विदेशी बाजारों में ले जाना अगले ग्रोथ ड्राइवर माने जा रहे हैं। एमके ने भी होम ब्रॉडबैंड को अगला बड़ा ग्रोथ ड्राइवर और कंपनी की इन-हाउस टेक्नोलॉजी स्टैक को इंटरनेशनल अवसर बताया है।

 

जियो की अलग लिस्टिंग का असर रिलायंस इंडस्ट्रीज पर भी दिखा है। 15 अक्टूबर को जियो का प्राइस बैंड सामने आने के बाद RIL का शेयर करीब 3.4% चढ़ा। बाजार की नजर इस बात पर भी है कि जियो की स्वतंत्र लिस्टिंग से RIL शेयरहोल्डर्स के लिए वैल्यू अनलॉकिंग की संभावना और मजबूत हो सकती है।

78 वर्ष की हुईं हेमा मालिनी

बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री हेमा मालिनी आज 78 वर्ष की हो गईं।16 अक्टूबर 1948 को तमिलनाडु के आमानकुंडी में जन्मीं हेमा मालिनी की मां जया चक्रवर्ती फिल्म निर्माता थीं। हेमा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चेन्नई से पूरी की। वर्ष 1961 में हेमा मालिनी को एक लघु नाटक पांडव वनवासम में बतौर नर्तकी काम करने का अवसर मिला।वर्ष 1968 में हेमा मालिनी को सर्वप्रथम राजकपूर के साथ सपनों का सौदागर में काम करने का मौका मिला। फिल्म के प्रचार के दौरान हेमा मालिनी को ड्रीम गर्ल के रूप में प्रचारित किया गया। बदकिस्मती से फिल्म टिकट खिडकी पर असफल साबित हुई लेकिन अभिनेत्री के रूप में हेमा मालिनी को दर्शकों ने पसंद किया गया।

हेमा मालिनी को पहली सफलता वर्ष 1970 में प्रदर्शित फिल्म जॉनी मेरा नाम से हासिल हुयी। इसमें उनके साथ अभिनेता देवानंद मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में हेमा और देवानंद की जोड़ी को दर्शकों ने सिर आंखों पर लिया और फिल्म सुपरहिट रही।इसके बाद रमेश सिप्पी की वर्ष 1971 में प्रदर्शित फिल्म अंदाज में भी हेमा मालिनी ने अपने अभिनय से दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया।वर्ष 1972 में हेमा मालिनी को रमेश सिप्पी की ही फिल्म सीता और गीता में काम करने का अवसर मिला जो उनके सिने कैरियर के लिये मील का पत्थर साबित हुयी। इस फिल्म की सफलता के बाद वह शोहरत की बुंलदियों पर जा पहुंचीं। उन्हें इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिये सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

Also Read : ‘रामायणम्’ का इंटरनेशनल ट्रेलर रिलीज

हेमा मालिनी ने जब फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा ही था तब एक तमिल निर्देशक श्रीधर ने उन्हें अपनी फिल्म में काम देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि उनमें स्टार अपील नहीं है। बाद में सत्तर के दशक में इसी निर्माता.निर्देशक ने उनकी लोकप्रियता को भुनाने के लिए उन्हें लेकर 1973 में ..गहरी चाल.. फिल्म का निर्माण किया।सिल्वर स्क्रीन पर हेमा मालिनी की जोडी धर्मेन्द्र के साथ खूब जमी। यह फिल्मी जोंडी सबसे पहले फिल्म शराफत से चर्चा में आई। वर्ष 1975 में प्रदर्शित फिल्म शोले में धर्मेन्द्र ने वीरू और हेमामालिनी ने बसंती की भूमिका में दर्शकों का भरपूर मनोंरजन किया।हेमा और धमेन्द्र की यह जोड़ी इतनी अधिक पसंद की गई कि धर्मेन्द्र की रील लाइफ की ड्रीम गर्ल, हेमामालिनी उनके रीयल लाइफ की ड्रीम गर्ल बन गईं। बाद में इस जोड़ी ने ड्रीम गर्ल,चरस, आसपास, प्रतिज्ञा,राजा जानी,रजिया सुल्तान,अली बाबा चालीस चोर,बगावत ,आतंक,द बर्निंग ट्रेन ,दोस्त आदि फिल्मों में एक साथ काम किया।

सत्तर के दशक में हेमा मालिनी पर आरोप लगने लगे कि वह केवल ग्लैमर वाले किरदार ही निभा सकती हैं लेकिन उन्होंने खुशबू,किनारा, और मीरा जैसी फिल्मों में संजीदा किरदार निभाकर अपने आलोचकों का मुंह हमेशा के लिये बंद कर दिया ।इस दौरान हेमा मालिनी के सौंदर्य और अभिनयका जलवा छाया हुआ था।इसी को देखते हुये निर्माता प्रमोद चक्रवर्ती ने उन्हें लेकर फिल्म ड्रीम गर्ल का निर्माण तक कर दिया ।

वर्ष 1990 में हेमा मालिनी ने छोटे पर्दे की ओर भी रूख किया और धारावाहिक नुपूर का निर्देशन भी किया ।इसके बाद वर्ष 1992 में फिल्म अभिनेता शाहरूख खान को लेकर उन्होंने फिल्म दिल आशना है का निर्माण और निर्देशन किया ।वर्ष 1995 में उन्होंने छोटे पर्दे के लिये मोहिनी का निर्माण और निर्देशन किया। फिल्मों में कई भूमिकाएं निभाने के बाद हेमा मालिनी ने समाज सेवा के लिए राजनीति में प्रवेश किया। वर्ष 2000 में हेमा मालिनी पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित की गयीं।हेमा मालिनी ने अपने पांच दशक के सिने करयिर में लगभग 150 फिल्मों में काम किया। हेमा मालिनी मथुरा संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंची है।

Pic Credit : UNI

भारत के सबसे बड़े IPO पर बोले उदय कोटक, कहा- जियो ने बदल दी देश की डिजिटल तस्वीर

भारत के सबसे बड़े IPO पर बोले उदय कोटक, कहा- जियो ने बदल दी देश की डिजिटल तस्वीर

Uday Kotak in JIO IPO launch

JIO IPO : कोटक इनवेस्टमेंट बैंकिंग के चेयरमैन उदय कोटक ने रिलायंस जियो (Jio) के ऐतिहासिक आईपीओ लॉन्च के अवसर पर धीरूभाई अंबानी के दिनों से लेकर आज तक के सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि लगभग दो दशकों के बाद आरआईएल समूह की ओर से आया 30,188 करोड़ रुपये का यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है। उदय कोटक ने जियो की सफलता, 53 करोड़ ग्राहकों के विशाल आधार और भारत में डिजिटल क्रांति लाने में इसकी ऐतिहासिक भूमिका की खुलकर सराहना की। ALSO READ: जियो IPO से पहले ईशा अंबानी ने बताया- कैसे आया JIo का आइडिया, कैसे खड़ा हुआ विशाल साम्राज्य?

 

 

धीरूभाई अंबानी को इस तरह किया याद

उन्होंने कहा कि 1977 में एक शाम, मैंने देखा कि पूरी चौपाटी और मरीन ड्राइव रोशन हो रहे थे। मुझे बताया गया कि यह धीरूभाई अंबानी द्वारा शुरू की गई ‘रिलायंस टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज’ नाम की कंपनी का आईपीओ, मार्केटिंग और पोजीशनिंग है। वह मेरे लिए एक जादुई पल था। इसने वित्तीय सेवाओं में भविष्य के बारे में मेरी सोच को बहुत प्रभावित किया। इसलिए, जनता के पास जाने, निवेशकों के पास जाने और सभी निवेशकों के लिए वैल्यू पैदा करने के महत्व को सिखाने के लिए मैं धीरूभाई का आभारी हूँ।

 

लिस्टेड मार्केट कैप के आधार पर भारत का सबसे बड़ा समूह 

उदय कोटक ने कहा, जियो की लिस्टिंग के बाद, RIL समूह पिछले कुछ दशकों में चेयरमैन मुकेश अंबानी के परिवर्तनकारी नेतृत्व में, लिस्टेड मार्केट कैप के आधार पर भारत का सबसे बड़ा समूह (कोंग्लोमरेट) बन जाएगा। लगभग दो दशकों के बाद आरआईएल समूह की ओर से यह ऐतिहासिक आईपीओ आया है। प्राइस बैंड के ऊपरी छोर पर 30,188 करोड़ रुपये का यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। यह अगली पीढ़ी के नेतृत्व (आकाश अंबानी और ईशा अंबानी) के विकास का भी प्रमाण है, जो डिजिटल सर्विसेज और रिटेल में नए जमाने के बिजनेस बना रहे हैं… और यह सब निश्चित रूप से एक नेता और पिता की पैनी निगरानी में हो रहा है। ALSO READ: जियो IPO से पहले आकाश अंबानी ने खोला ग्रोथ प्लान, मोबिलिटी और होम ब्रॉडबैंड पर बड़ा दांव

 

53 करोड़ ग्राहक और असाधारण एक्जीक्यूशन

उन्होंने कहा कि जियो प्लेटफॉर्म को उसके 53 करोड़ ग्राहक और असाधारण एक्जीक्यूशन अलग बनाती है। 2016 के आसपास कई अन्य खिलाड़ी कह रहे थे, ‘रिलायंस ग्रुप क्या करने जा रहा है?’ लेकिन जब वे आए, तो वे धमाकेदार अंदाज में आए, और उन्होंने इस बात की अवधारणा को बदल दिया कि आने वाले वर्षों में भारत में मोबाइल कनेक्टिविटी और डिजिटल तकनीक कैसी होगी। इसने उस आम व्यक्ति के जीवन को बदल दिया जिसे इस सेवा के लिए बहुत कम कीमत चुकानी पड़ी और हमारे देश में कनेक्टिविटी का लोकतंत्रीकरण हुआ।

 

कोटक के अनुसार, जियो वैश्विक स्तर पर एकमात्र ऐसा खिलाड़ी है जिसके पास अपना खुद का मालिकाना हक वाला एंड-टू-एंड डिजिटल कनेक्टिविटी स्टैक है। डेटा को सुलभ बनाने में ‘डिजिटल इंडिया’ का प्रभाव अद्भुत है। 1 करोड़ से भी कम 4G ग्राहकों वाले डेटा की कमी वाले देश से लेकर, 100 करोड़ 4G और 5G ग्राहकों वाले डेटा से परिपूर्ण राष्ट्र बनने तक… यह सब पिछले 10 वर्षों में हुआ है। इन सभी बातों ने मोबिलिटी और होम ब्रॉडबैंड दोनों ही क्षेत्रों में भारत के बाजार में निर्विवाद नेतृत्व को स्थापित किया है।

 

उन्होंने कहा कि 1,46,885 करोड़ रुपये का रेवेन्यू, 76,000 करोड़ रुपये से अधिक का एबिटा, और पैमाने पर लगभग 18% की वृद्धि अपने आप में काफी प्रभावशाली है। जियो का आईपीओ लॉन्च ऐसा ही एक पल है जो निवेशकों को डिजिटल विकास के अगले चरण में भाग लेने और उससे लाभ उठाने का एक अवसर प्रदान करता है।

… तो हम पाकिस्तान का साथ देंगे, राजस्थान भाजपा अध्यक्ष राठौड़ के बयान से बवाल

... तो हम पाकिस्तान का साथ देंगे, राजस्थान भाजपा अध्यक्ष राठौड़ के बयान से बवाल

Rajasthan BJP Madan Rathore: राजस्थान भाजपा (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के एक विवादास्पद बयान को लेकर सियासत गरमा गई है। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान का समर्थन करने से जुड़े कथित बयान पर कांग्रेस ने भाजपा को घेरते हुए ‘देशद्रोह’ का आरोप लगाया है। वहीं, विवाद बढ़ने के बाद मदन राठौड़ ने सफाई जारी करते हुए कहा है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर और गलत संदर्भ में पेश किया गया है।

कांग्रेस का भाजपा पर बड़ा हमला

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो क्लिप के आधार पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने मदन राठौड़ के कथित बयान को मुद्दा बनाते हुए भाजपा के राष्ट्रवाद पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की ओर से निशाना साधते हुए कहा गया कि भाजपा का ‘पाकिस्तान प्रेम’ एक बार फिर सबके सामने आ गया है।

कांग्रेस ने कहा कि राजस्थान BJP के अध्यक्ष मदन राठौड़ का कहना है कि अगर अमेरिका और पाकिस्तान में युद्ध होता है, तो हम पाकिस्तान के साथ हैं। भाजपा उसी पाकिस्तान का साथ देने की बात कर रही है, जिसने भारत के निर्दोष नागरिकों और सैनिकों की हत्या करवाई है। भाजपा वालों की रग-रग में देशद्रोह भरा है।

मदन राठौड़ की सफाई

विवाद बढ़ने और विपक्षी दलों के हमलावर होने के बाद राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उनके भाषण के एक छोटे से अंश को संदर्भ से काटकर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि मैंने जो भी बात कही थी, वह क्रिकेट मैच के संदर्भ में कही थी। मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है, जो बिल्कुल भी उचित नहीं है। यह मुझे बदनाम करने की राजनीतिक साजिश है।

उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते कभी सामान्य नहीं हो सकते क्योंकि वह आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश है। उन्होंने अपील की कि उनके पूरे भाषण को देखा जाए, जिसे गलत तरीके से काटकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की गई है।

क्या कहते हैं एक्स यूजर्स?

राठौड़ के इस बयान पर एक्स यूजर्स ने भी ‍तीखी टिप्पणियां की हैं। कड़वा सच नामक हैंडल से लिखा- क्रिकेट मैच के बाद हाथ नहीं मिलाएंगे पर पाकिस्तान के साथ हैं। संदीप नामक एक यूजर ने लिखा- तभी तो जब चाहें पुलवामा और पहलगाम करवा देते हैं। एक अन्य यूजर हिरोशिमा ने लिखा- दूसरों को देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटने वाली मशीन आज खुद शॉर्ट-सर्किट हो गई है। कल तक जो देश का सबसे बड़ा दुश्मन था, आज वो ‘प्यारा पड़ोसी’ बन गया। मदन जी का यह ‘पड़ोसी धर्म’ देखकर तो सीमा पार बैठे लोग भी सोच रहे होंगे कि हमारा सबसे बड़ा शुभचिंतक तो राजस्थान में बैठा है!

‘रामायणम्’ का इंटरनेशनल ट्रेलर रिलीज

फिल्म ‘रामायणम्’ के इंटरनेशनल ट्रेलर के रिलीज के साथ फिल्म का वैश्विक प्रचार अभियान शुरू हो गया है। निर्माताओं ने रणबीर कपूर के भगवान राम और रॉकिंग स्टार यश के रावण के किरदार वाले सोलो पोस्टर भी जारी किये हैं।

नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म का इंटरनेशनल ट्रेलर हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में जारी किया गया है। ट्रेलर में महाकाव्य के प्रमुख किरदारों और एक्शन से भरपूर दृश्यों की झलक दिखाई गई है।

जारी पोस्टर में यश रावण के रूप में हाथ में भाला लिये युद्ध के बाद के दृश्य में नजर आ रहे हैं। वहीं, रणबीर कपूर भगवान राम के रूप में धनुष-बाण लिये दिखाई दे रहे हैं। उनके पीछे जंगल के बीच से आती सूर्य की रोशनी पोस्टर को विशेष रूप देती है।

Also Read : ट्रंप ने ईरान पर परमाणु हमला करने से किया इनकार

फिल्म के इंटरनेशनल ट्रेलर को बेंगलुरु में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में लॉन्च किया गया। इस मौके पर रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश, रवि दुबे, संगीतकार ए. आर. रहमान और निर्देशक नितेश तिवारी समेत फिल्म की टीम के कई सदस्य मौजूद थे।

फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे।

नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज ने डीएनईजी और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स के साथ मिलकर फिल्म का निर्माण किया है। फिल्म दो भागों में रिलीज होगी। इसका पहला भाग पांच नवंबर 2026 और दूसरा भाग दिवाली 2027 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगा।

Pic Credit : UNI

ट्रंप ने ईरान पर परमाणु हमला करने से किया इनकार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। जब उनसे उन खबरों के बारे में पूछा गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वाशिंगटन मध्यावधि चुनावों के बाद भारी पारंपरिक बम ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ का इस्तेमाल कर सकता है।

श्री ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या इस विकल्प में कोई टैक्टिकल परमाणु हथियार शामिल है, तो उन्होंने जोर देकर कहा मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स परमाणु बम नहीं है।

Also Read : ‘पदक लाओ, पद पाओ’ के तहत खिलाड़ियों की सीधी भर्ती: योगी

उन्होंने कहा कि “यह बिल्कुल भी परमाणु बम नहीं है। यह बस एक बहुत ही बड़ा बम है। यह एक छोटे परमाणु बम की तरह है।

इसके बाद राष्ट्रपति ट्रप ने किसी वास्तविक परमाणु हमले की ज़रूरत को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा ‘मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स’ एक बहुत बड़ा बम है लेकिन यह परमाणु बम नहीं है। मैं परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करूंगा। हमें ऐसा करने की ज़रूरत भी नहीं है।

Pic Credit : UNI

भारत स्वस्तिक यात्रा की ओंकारेश्वर में रामकथा ने आदि शंकराचार्य की आध्यात्मिक विरासत को किया रेखांकित

भारत स्वस्तिक यात्रा की ओंकारेश्वर में रामकथा ने आदि शंकराचार्य की आध्यात्मिक विरासत को किया रेखांकित

ओंकारेश्वर। भारत स्वस्तिक यात्रा के अंतर्गत मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में पूज्य मोरारी बापू की रामकथा का आयोजन किया गया। ओंकारेश्वर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। पवित्र नर्मदा नदी में स्थित मांधाता द्वीप पर बसा ओंकारेश्वर, शिव उपासना की प्राचीन परंपराओं और आदि शंकराचार्य से जुड़े अपने आध्यात्मिक संबंध के कारण भारत की आध्यात्मिक विरासत में विशिष्ट स्थान रखता है।

 

परंपरागत मान्यता के अनुसार, बाल्यावस्था में आदि शंकराचार्य की भेंट नर्मदा तट पर स्थित एक गुफा में उनके गुरु गोविंद भगवत्पाद से हुई थी, जहां उन्होंने उनसे आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त की। इस कारण ओंकारेश्वर केवल एक ज्योतिर्लिंग क्षेत्र ही नहीं, बल्कि अद्वैत वेदांत की गुरु-शिष्य परंपरा का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां ओंकारेश्वर और ममलेश्वर मंदिर, नर्मदा के घाट तथा पारंपरिक मांधाता परिक्रमा इस पवित्र क्षेत्र की आध्यात्मिक महत्ता को दर्शाते हैं।

 

पूज्य मोरारी बापू ने कहा, “साधु की पहचान उसके स्वभाव से होती है। ये नवरात्रि के दिन हैं, जो शक्ति उपासना अर्थात् जगदंबा की आराधना के लिए समर्पित हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी हमारे देश के अनेक हिस्सों और कई मंदिरों में बलि प्रथा अर्थात् पशु बलि की परंपरा जारी है। मैंने इस प्रथा को बंद करने की अपील की। शक्ति की उपासना में समस्त जीवों के प्रति करुणा और श्रद्धा का भाव होना चाहिए।

 

कथा में मैंने अभिमान के विभिन्न रूपों पर भी चर्चा की। इन सभी में सबसे श्रेष्ठ अवस्था निरभिमान है, अर्थात् अहंकार से मुक्त होना। किसी व्यक्ति के पास कोई योग्यता, ज्ञान या संपत्ति हो और उसके कारण उसमें अभिमान आ जाए, तो यह भी उचित नहीं है, हालांकि यह समझा जा सकता है कि ऐसा अभिमान कहां से उत्पन्न हुआ। लेकिन किसी व्यक्ति के पास कुछ भी न हो और फिर भी वह अभिमान करे, तो यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। सच्ची महानता विनम्रता में निहित है।

 

ओंकार का स्वस्तिक से गहरा संबंध है और यह आदि नाद का प्रतीक है। सनातन धर्म में ओंकारेश्वर की भूमि का अत्यंत विशिष्ट महत्व है, क्योंकि इसका संबंध आदि शंकराचार्य और उनके गुरु गोविंद भगवत्पाद की भेंट से है। शंकराचार्य की आध्यात्मिक यात्रा को दिशा देने वाली गुरु-शिष्य परंपरा की एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति इसी पवित्र भूमि में दिखाई देती है। इस पावन भूमि पर आकर हमें अपनी आध्यात्मिक विरासत की गहराई और उसके शाश्वत मूल्यों को संरक्षित रखने के महत्व का स्मरण होता है।”

 

आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली से जुड़े कालड़ी और उनके द्वारा स्थापित चार पीठों में से एक शृंगेरी की यात्रा के बाद, ओंकारेश्वर में भारत स्वस्तिक यात्रा का पड़ाव उनकी आध्यात्मिक विरासत से जुड़ाव का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है।

 

भारत स्वस्तिक यात्रा का आयोजन पूज्य मोरारी बापू के मार्गदर्शन में संतकृपा सनातन संस्थान द्वारा किया जा रहा है। मिराज समूह के चेयरमैन एवं संतकृपा सनातन संस्थान के प्रबंध न्यासी मदन पालीवाल ने कहा, “ओंकारेश्वर भारत की आध्यात्मिक विरासत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यहां भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक के साथ-साथ आदि शंकराचार्य की पवित्र विरासत भी जुड़ी हुई है। भारत स्वस्तिक यात्रा के माध्यम से हमारा प्रयास है कि इन परस्पर जुड़ी आध्यात्मिक परंपराओं को सामने लाया जाए और उनकी शाश्वत प्रासंगिकता को पुनः स्थापित किया जाए।”

 

मंगल और कल्याण का चिरस्थायी प्रतीक स्वस्तिक परस्पर जुड़ाव और सामूहिक कल्याण का प्रतिनिधित्व करता है। इस यात्रा के माध्यम से पूज्य मोरारी बापू सनातन धर्म के शाश्वत मूल्यों—सत्य, प्रेम और करुणा—का संदेश जन-जन तक पहुंचाना चाहते हैं। साथ ही, इस यात्रा का उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय एकता, अखंडता और देशवासियों के बीच अपनत्व की साझा भावना को सुदृढ़ करना है।

 

9,000 किलोमीटर लंबी भारत स्वस्तिक यात्रा में लगभग 900 श्रद्धालु पूज्य मोरारी बापू के साथ दो विशेष ट्रेनों—22 कोच वाली कैलाश भारत गौरव और 16 कोच वाली चित्रकूट भारत गौरव—में यात्रा कर रहे हैं। यात्रा के प्रथम चरण का शुभारंभ 10 अक्टूबर को कन्याकुमारी से हुआ था, जिसका समापन 23 अक्टूबर को केदारनाथ में होगा। इस दौरान देश के विभिन्न महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों से होकर यात्रा आगे बढ़ रही है।

 

यात्रा के अंतर्गत आयोजित रामकथा और अन्य कार्यक्रम सभी के लिए खुले हैं। समावेशिता और सेवा की अपनी परंपरा के अनुरूप, पूज्य बापू की प्रेरणा से प्रत्येक पड़ाव पर भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जहां प्रतिदिन निःशुल्क शाकाहारी भोजन प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।

जियो IPO से पहले ईशा अंबानी ने बताया- कैसे आया JIo का आइडिया, कैसे खड़ा हुआ विशाल साम्राज्य?

जियो IPO से पहले ईशा अंबानी ने बताया- कैसे आया JIo का आइडिया, कैसे खड़ा हुआ विशाल साम्राज्य?

isha ambani

JIO IPO : जियो प्लेटफॉर्म्स ने भारत के अब तक के सबसे बड़े IPO से पहले अपने अगले दौर की ग्रोथ का रोडमैप सामने रखा है। इस अवसर पर जियो प्लेटफॉम्स की डायरेक्टर ईशा अंबानी ने जियो (Jio) के जन्म की दिलचस्प और प्रेरणादायक कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि Growth is Life हमारा आदर्श वाक्य है। ALSO READ: जियो IPO से पहले आकाश अंबानी ने खोला ग्रोथ प्लान, मोबिलिटी और होम ब्रॉडबैंड पर बड़ा दांव

 

ईशा अंबानी ने जियो के जन्म की कहानी सुनाते हुए कहा कि यह लगभग 2009-2010 की बात है। आकाश और मैं अमेरिका में कॉलेज में थे, और छुट्टियों में बॉम्बे अपने घर आए हुए थे। मुझे ऑनलाइन एक असाइनमेंट सबमिट करना था। मैंने उसे सबमिट करने की कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्य से इंटरनेट ने काम नहीं किया और मैं उसे सबमिट नहीं कर पाई।

 

इसके बाद इस बात पर चर्चा शुरू हुई कि भारत पीछे क्यों छूटे? ऐसा क्यों था कि हमारे पास उस तरह की कनेक्टिविटी नहीं थी जैसी हम पश्चिम (विदेशी देशों) में अनुभव करते थे? उन्होंने कहा कि आकाश का दृढ़ विश्वास था कि इसका उत्तर और समाधान एक डिजिटल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म कंपनी का निर्माण करना है। 

 

साल 2016 में जियो लॉन्च हुआ और आज हम 2026 में यहां हैं। उन्होंने रिलायंस की व्यवसाय खड़ा करने की फिलॉसफी और जियो के निर्माण के बारे में बताते हुए कहा कि विचारों को लॉन्ग-टर्म दृष्टिकोण के साथ समर्थन दिया जाता है। इसलिए, रिलायंस में हम सिर्फ आज या कल के लिए निर्माण नहीं करते, बल्कि हम वास्तव में यह सोचते हैं कि आज से दशकों बाद क्या आने वाला है।

 

ईशा ने कहा कि मुझे लगता है कि जब पैमाने की बात आती है, तो हमारे लिए यह सवाल महत्वपूर्ण होता है कि हम जिस उद्योग में काम करते हैं, उसकी अर्थव्यस्था को मौलिक रूप से बदलने के लिए किस तरह के पैमाने की आवश्यकता है। और तीसरा है एक्जिक्यूशन। एक्जिक्यूशन हमारे पूरे संगठन में एक बहुत पक्की आदत है। यह हमें अपने लक्ष्यों को पूरा करने और अपने मिशन के प्रति वफादार रहने की अनुमति देती है। ALSO READ: Jio IPO से पहले आकाश अंबानी का बड़ा बयान, बोले- 2030-31 तक 1.4 लाख करोड़ डॉलर की होगी भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था

 

कैसे डेब्ट फ्री हुआ रिलायंस इंडस्ट्रीज?

उन्होंने बताया कि वित्तीय विवेक हमारे डीएनए में रचा-बसा है। साल 2019 में मेरे पिता ने रिलायंस के सभी शेयरधारकों से एक वादा किया था। उन्होंने कहा था कि साल 2021 तक रिलायंस इंडस्ट्रीज शुद्ध ऋण-मुक्त हो जाएगी।

 

 साल 2020 में कोरोना के साथ ही वैश्विक मंदी भी आई। फिर भी, तय समय से नौ महीने पहले ही वह वादा पूरा कर दिया गया। रिलायंस में हमारे लिए शेयरधारक की प्रतिबद्धता का यही मतलब है।

 

ग्रोथ इज लाइफ हमारा आदर्श वाक्य है

ईशा ने कहा कि वित्तीय प्रदर्शन के मामले में, हम अपने व्यवसायों को दो मुख्य लक्ष्यों की ओर ले जाते हैं। पहला यह कि हम मजबूत बैलेंस शीट बनाना और उनकी रक्षा करना पसंद करते हैं। और दूसरा यह कि हम अपने व्यवसायों को लगातार कंपाउंडिंग फ्री कैश फ्लो पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।

 

 इन वर्षों में, इसने हमें निर्माण करने, निवेश करने, विस्तार करने, नकदी पैदा करने और फिर विकास में पुनः निवेश करने के एक चक्र को चलाने की अनुमति दी है। Growth is Life हमारा आदर्श वाक्य है। ALSO READ: JIO IPO : जानिए क्या है प्राइस बेंड, लॉट साइज और GMP, कब होगी शेयर बाजार में लिस्टिंग?

 

धीरू भाई अंबानी को इस तरह किया याद

उन्होंने कहा कि साल 1977 में, रिलायंस इंडस्ट्रीज के पब्लिक होने के बाद से अब तक, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 29% वार्षिक रिटर्न दिया है। मेरे दादा जी धीरू भाई अंबानी के लिए, रिलायंस कभी सिर्फ एक कंपनी नहीं थी। रिलायंस एक ऐसा वादा है कि हर भारतीय को भारत के विकास में भाग लेने, भारत की समृद्धि में साझादार बनने और एक बेहतर भविष्य में विश्वास करने का अवसर मिलना चाहिए। 

 

मेरे दादाजी फुटबॉल स्टेडियमों को भर देते थे और एक मजबूत, अधिक आत्मविश्वासी और समृद्ध भारत के विजन से हजारों लोगों को प्रेरित करते थे। उनका संदेश सरल लेकिन शक्तिशाली था: सपने देखने की हिम्मत रखो, निडर बनो, बड़ा सोचो, और निरंतर इनोवेशन के माध्यम से उत्कृष्टता की तलाश करो।

 

 हम न केवल उनके विजन को आगे बढ़ा रहे हैं, बल्कि उन लाखों शेयरधारकों के भरोसे को भी आगे बढ़ा रहे हैं जिन्होंने उनके विजन पर विश्वास किया और उसे अपना बनाया। 

मोहन-शिवराज की एक घंटे बंद कमरे में बैठक के बाद आखिर कैसे खत्म हुआ कोसमी का आदिवासी जमीन विवाद?

मोहन-शिवराज की एक घंटे बंद कमरे में बैठक के बाद आखिर कैसे खत्म हुआ कोसमी का आदिवासी जमीन विवाद?

भोपाल। सीहोर के कोसमी में आदिवासियों के घरों के बुलडोजर चलाने से खड़ा हुआ विवाद अब थमता नजर आ रहा है। गुरुवार रात केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मुख्यमंत्री निवास पर बंद कमरे में हुई बैठक के बाद कोसमी से भोपाल की ओऱ से आ रहे हजारों की संख्या में आदिवासियों का आंदोलन खत्म हो गया है।

इससे पहले गुरुवार रात केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। इस दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे।

शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी ग्राम में बीते दिनों हुए घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी देने के साथ आदिवासियों के घरों पर कार्रवाई को लेकर जानकारी। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अपनी मांगों का एक ज्ञापन भी दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कराई जा रही है। सबके साथ न्याय होगा। उन्होंने कहा कि हम आपसी संवाद से मामले का व्यावहारिक समाधान निकालेंगे।

भोपाल में आ रहे आदिवासी रास्ते से लौटे-वहीं सीएम हाउस में बैठक के बाद सीहोर के 35 गांवों से हजारों की संख्या में भोपाल आ रहे आदिवासियों को रास्ते से वापस लौट दिया। बुधनी से विधायक रामाकांत भार्गव और भाजपा जिला अध्यक्ष रवि मालवीय भोपाल आ रहे आदिवासियों से मिलने दे रात पहुंचे और उनकी मांगों पर आश्वासन देकर उन्हें वापस दिया।

एक घंटे बंद कमरे की बैठक में निकला सुलह का रास्ता-सीहोर के कोसमी गांव में आदिवासियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई के विरोध रविवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के धरने से शुरु हुए पूरे विवाद का 4 दिन में कैसे पटाक्षेप हो गया, अब यह बड़ा सवाल है। गुरुवार रात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ बंद कमरे में शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की एक घंटे चली बैठक में क्या बात हुई इसकी आधिकारिक जानकारी तो सामने नहीं आ पाई है और न ही बैठक के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया से कोई बात की, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बैठक में कलेक्टर की जांच रिपोर्ट को सामने रखा गया जिसमें वन भूमि पर अतिक्रमण की बात कहीं गई। वहीं बैठक में वन विकास निगम के अधिकारियों की भूमिका का भी मुद्दा उठा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने वन विकास निगम के अधिकारियों के व्यवहार की उच्चस्तरीय जांच कराने का आश्वासन दिया।  

कलेक्टर की रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि-सीहोर के कोसमी में आदिवासियों की जमीन पर कब्जे को लेकर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सीहोर जिले की भैरूंदा तहसील के लाड़कुई वन परिक्षेत्र की कोसमी बीट स्थित आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 426 में वन विकास निगम की 31.48 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण किया गया था। रिपोर्ट में उल्लेख है कि वर्ष 2021 में क्षेत्र में 3.37 लाख से अधिक सागौन के पौधे लगाए गए थे, जिनमें से लगभग 78,700 पौधों को नष्ट कर वन भूमि पर कब्जा किए जाने का दावा किया गया है।

रिपोर्ट में सैटेलाइट चित्रों के आधार पर वर्ष 2022 से अतिक्रमण शुरू होने की बात कही गई है। प्रशासन ने 11 अक्टूबर 2026 को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की और कलेक्टर ने अपनी जांच रिपोर्ट राज्य शासन को सौंप दी है।

कैसे शुरु हुआ था विवाद?-केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र अंतर्गत  बुधनी विधानसभा के कोसमी गांव में 11 अक्टूबर को वन विभाग और प्रशासन द्वारा वन भूमि पर घर बनाने वाले 12 आदिवासियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई हुई थी। आदिवासी परिवारों के आशियाने उजड़ने, उनकी फसलें नष्ट होने और पानी के लिए इस्तेमाल होने वाले कुएं को मिट्टी से भर दिए जाने को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे और धरने पर बैठ गए थे।

इस दौरान उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को फोन कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि गरीब परिवारों को बेघर करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए नए घर बनवाए जाएंगे। साथ ही, जब तक उनके रहने की स्थायी व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनके रहने और खाने-पीने की अस्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। वहीं शिवराज सिंह चौहान के बाद उनके बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने भी वन विकास निगम के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे।  

‘पदक लाओ, पद पाओ’ के तहत खिलाड़ियों की सीधी भर्ती: योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि प्रदेश में अब ‘पदक लाओ, पद पाओ’ के तहत खिलाड़ियों की सीधी भर्ती हो रही है।

मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर पिछली सरकार के कार्यकाल पर निशाना साधते हुये कहा वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में भय और अराजकता का ऐसा माहौल था, जहां बेटियों के सपनों पर पहरे थे, हौसलों पर बंदिशें थीं और प्रतिभा अवसर के अभाव में दम तोड़ने को मजबूर थी। खेल के मैदान माफिया के कब्जे में थे, संसाधन नदारद थे और बेटियों की उड़ान को पंख देने के बजाय, उनके सपनों को चारदीवारी में कैद कर दिया गया था।

उन्होने कहा कि विगत साढ़े 9 वर्षों में प्रदेश में बदलाव की नई गाथा लिखी गई है। भय का स्थान सुरक्षा ने लिया है, उपेक्षा का स्थान प्रोत्साहन ने लिया है और संसाधनों के अभाव का स्थान खेल सुविधाओं के विस्तार ने लिया है।

Also Read : पेट्रोल निर्यात पर टैक्स बढ़ा, डीजल पर भारी कटौती!

गांव के खेल मैदानों और ब्लॉक स्तरीय मिनी स्टेडियम से लेकर जिला स्तरीय स्टेडियम, मंडल स्तरीय स्पोर्ट्स कॉलेज तथा मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय तक, बेटियों को अपनी प्रतिभा निखारने का सशक्त आधार मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ओलंपिक, कॉमनवेल्थ एवं एशियन गेम्स के पदक विजेताओं को लाखों-करोड़ों के पुरस्कार और ‘पदक लाओ, पद पाओ’ के तहत सीधी भर्ती जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। सरकार खिलाड़ियों की प्रतिभा को प्रोत्साहन, उपलब्धियों को सम्मान और भविष्य को सुरक्षा प्रदान कर रही है। इस परिवर्तन की गूंज अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर भी सुनाई दे रही है।

एथलेटिक्स में पारुल चौधरी, प्रियंका गोस्वामी, प्राची चौधरी और अन्नू रानी, जूडो में अस्मिता डे, क्रिकेट में दीप्ति शर्मा और मेघना सिंह, हॉकी में वंदना कटारिया, कुश्ती में दिव्या काकरान ने कॉमनवेल्थ एवं एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

Pic Credit : UNI