योगी सरकार आयुष्मान योजना में दिशानिर्देशों को लेकर सख्त, उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई

योगी सरकार आयुष्मान योजना में दिशानिर्देशों को लेकर सख्त, उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई

Ayushman Bharat Yojana UP: योगी सरकार ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जुड़े सभी अस्पतालों को योजना के नियमों और आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य रूप से करने के सख्त निर्देश दिये हैं ताकि लाभार्थियों को बेहतर और पारदर्शी इलाज मिले। ऐसे में सीएम योगी के निर्देश पर स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) अस्पतालों को लगातार इन नियमों की जानकारी दे रही है। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने बताया कि इसके बाद भी नियमों का उल्लंघ करने, लाभार्थी से अवैध वसूली, बिना इलाज के बिल लगाना, गलत लाभार्थी के नाम पर इलाज दर्ज करना, अनावश्यक इलाज या तय मानकों का पालन नहीं करने पर अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

साचीज की वेबसाइट पर देखें दिशानिर्देश 

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों को आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिर्देशों की जानकारी दी जा रही है। योगी सरकार का प्रयास है कि अस्पताल पहले से ही नियमों को समझें और अपने स्तर पर कमियों को दूर करें, ताकि मरीजों को परेशानी न हो और योजना में किसी तरह की गड़बड़ी न हो। उन्होंने बताया कि सभी सूचीबद्ध अस्पताल आपत्तिजनक कार्यप्रणाली संबंधी दिशानिर्देश साचीज की आधिकारिक वेबसाइट https://sachis.in/ पर देख और डाउनलोड कर सकते हैं। विभाग की ओर से अस्पतालों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, बिलिंग कर्मचारियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को भी इन नियमों की जानकारी दें।

नियम तोड़ने पर पहली, दूसरी और तीसरी बार अलग कार्रवाई

लाभार्थी से अवैध नकद भुगतान : पहली बार नियम तोड़ने पर राशि का पूर्ण रिफंड तथा अवैध भुगतान की राशि का पांच गुना दंड, दोबारा उल्लंघन पर क्लेम निरस्तीकरण एवं चिकित्सालय का निलंबन तथा तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जा सकती है।

 

बिना सेवा दिए बिलिंग : पहली बार उल्लंघन पर क्लेम निरस्त करने के साथ क्लेम राशि के पांच गुना तक दंड, दूसरी बार उल्लंघन पर दस गुना तक दंड एवं निलंबन तथा तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान है।

 

अपकोडिंग, अनबंडलिंग एवं अनावश्यक प्रक्रियाएं : पहली बार उल्लंघन पर अतिरिक्त क्लेम राशि के दस गुना तक तथा दूसरी बार उल्लंघन पर बीस गुना तक दंड एवं निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान है।

 

गलत लाभार्थी पहचान : पहली बार उल्लंघन पर पांच गुना तक तथा दूसरी बार उल्लंघन पर दस गुना तक दंड एवं निलंबन की कार्रवाई हो सकती है। तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जा सकती है।

 

गुणवत्ता एवं सेवा मानकों में कमी : न्यूनतम एम्पैनलमेंट, गुणवत्ता एवं निर्धारित सेवा मानकों में कमी पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्धारित अवधि में सुधार एवं अनुपालन का अवसर दिया जाएगा। निर्धारित अवधि में सुधार न होने पर क्लेम निरस्तीकरण, तीन गुना तक दंड एवं निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी बार उल्लंघन पर संबंधित स्वीकृत क्लेम्स पर पांच गुना तक दंड एवं सत्यापन तक निलंबन तथा तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट एवं संबंधित स्वीकृत क्लेम्स पर पांच गुना तक दंड का प्रावधान है।

चिकित्सालयों के लिए महत्वपूर्ण संदेश 

साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने सभी सूचीबद्ध चिकित्सालयों से आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिर्देशों को केवल औपचारिक निर्देश के रूप में न लेते हुए, इसे अपने दैनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक चिकित्सालय अपने स्तर पर यह सुनिश्चित करें कि चिकित्सकीय, नर्सिंग, बिलिंग एवं प्रशासनिक स्टाफ को योजना के सभी नियमों और दंडात्मक प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी हो।

 

चिकित्सालयों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से अपने क्लेम, उपचार प्रक्रिया, दस्तावेजीकरण एवं लाभार्थी सेवाओं की आंतरिक समीक्षा करें और किसी भी संभावित अनियमितता को समय रहते ठीक करें। लाभार्थी से अवैध राशि लेना, बिना उपचार के क्लेम करना, अनावश्यक उपचार या प्रक्रियाएं करना, गलत लाभार्थी के नाम पर उपचार दर्ज करना अथवा योजना के मानकों का उल्लंघन न केवल योजना के नियमों के विरुद्ध है, बल्कि इसके लिए निर्धारित दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

पाकिस्तान को चीन और तुर्की के हथियारों की सप्लाई? 60 घंटे की रहस्यमयी ‘सैन्य एयरलिफ्ट’ से मची हलचल

पाकिस्तान को चीन और तुर्की के हथियारों की सप्लाई? 60 घंटे की रहस्यमयी 'सैन्य एयरलिफ्ट' से मची हलचल

South Asia strategic defense

South Asia strategic defense: 18 से 20 अगस्त के बीच पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में देखी गई अभूतपूर्व सैन्य गतिविधियों ने दक्षिण एशियाई सामरिक संतुलन पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। खुले स्रोतों (OSINT) और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के अनुसार, चीन (Xi'an Y-20) और तुर्की (Airbus A400M) के भारी सैन्य परिवहन विमानों ने करीब 60 घंटे तक पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेसों पर दर्जनों उड़ानें भरीं और उतरते देखे गए।

 

यह कोई साधारण उड़ानों का अभ्यास नहीं था। रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस (GHQ के पास) और कराची के मस्रूर एयरबेस पर इन विमानों की आपात लैंडिंग ने पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियों का ध्यान खींचा है। ALSO READ: क्या भारत को घेरने की तैयारी है? पाकिस्तान-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ से बांग्लादेश का जुड़ना भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

पाकिस्तान की ज़मीन पर क्या उतार रहे हैं चीन और तुर्की?

सैन्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह भारी एयरलिफ्ट सिर्फ नियमित लॉजिस्टिक्स (Routine Logistics) का हिस्सा नहीं हो सकती। इस असामान्य हलचल के पीछे निम्नलिखित सैन्य आपूर्ति की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस उच्च-स्तरीय लॉजिस्टिक ऑपरेशन में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सैन्य सामग्रियों की डिलीवरी शामिल हो सकती है: 

  • सटीक मारक हथियार और उन्नत ड्रोन (UCAVs) : तुर्की के Bayraktar Akinci/TB2 और चीन के Wing Loong III ड्रोनों की नई खेप या उनके महत्वपूर्ण स्पेयर पार्ट्स। 
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) व राडार सिस्टम : पाकिस्तान वायु सेना (PAF) के लड़ाकू विमानों और ग्राउंड-बेस्ड राडार के लिए एडवांस्ड स्टैंड-ऑफ जैमर्स (SOJ) व सिग्नल्स इंटेलिजेंस उपकरण।
  • एयर-डिफेंस और मिसाइल स्पेयर-पार्ट्स : चीन से प्राप्त HQ-16 और HQ-9P मिसाइल रक्षा प्रणालियों के कलपुर्जे या त्वरित रिप्लेसमेंट हार्डवेयर। 
  • 'KAAN' 5th Gen फाइटर जेट कंपोनेंट्स : तुर्की के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट 'KAAN' में पाकिस्तान की साझेदारी के तहत तकनीकी हस्तांतरण।
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) और राडार उपकरण : पाकिस्तान वायु सेना (PAF) के स्टैंड-ऑफ जैमर्स (SOJ) और अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट (AEW&C) के लिए आधुनिक जैमिंग उपकरण। 
  • सटीक मारक हथियार और स्पेयर पार्ट्स : जेएफ-17 ब्लॉक 3 (JF-17 Block 3) और जे-10सीई (J-10CE) फाइटर जेट्स के स्पेयर पार्ट्स व गाइडेड म्यूनिशन्स। ALSO READ: पाकिस्तान ने धोखे से हड़पा था बलूचिस्तान, क्यों कभी पाक सेना के आगे नहीं झुके धुरंधर बलोच? जानिए बलोच संघर्ष की पूरी कहानी

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

भारतीय रक्षा एजेंसियों के लिए यह त्रिगुट (China-Pakistan-Türkiye Axis) कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसका समय और तीव्रता चिंता का विषय है:

  • त्वरित क्षमता निर्माण (Rapid Capability Replenishment) : किसी संभावित आपात स्थिति के लिए पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों को तेजी से मजबूत करना।
  • त्रिपक्षीय रक्षा गठबंधन : हाल ही में सामने आए तुर्की, पाकिस्तान और रणनीतिक सहयोगियों के बीच बढ़ते सैन्य समन्वय का यह एक व्यावहारिक प्रदर्शन हो सकता है। 
  • 'KAAN' फाइटर जेट प्रोजेक्ट : तुर्की के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट में पाकिस्तान की भागीदारी के बाद तकनीकी ट्रांसफर और उपकरणों की आवाजाही। 

South Asia strategic defense

हाल ही में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब द्वारा हस्ताक्षरित 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के तुरंत बाद इस तरह की भारी सैन्य एयरलिफ्ट का होना संकेत देता है कि क्षेत्र में एक नया सैन्य ब्लॉक आकार ले रहा है। 

 

चीन की तकनीकी व वित्तीय ताकत, तुर्की की आधुनिक ड्रोन टेक्नोलॉजी और पाकिस्तान का भारत विरोधी एजेंडा—यह त्रिकोण दक्षिण एशिया के सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। भारत की खुफिया एजेंसियां इस 60 घंटे के रहस्यमयी एयरलिफ्ट ऑपरेशन्स के हर विवरण पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

ईरान के निशाने पर अब ट्रंप का सबसे छोटा बेटा बैरन? हत्या का खौफनाक प्लान बेनकाब

ईरान के निशाने पर अब ट्रंप का सबसे छोटा बेटा बैरन? हत्या का खौफनाक प्लान बेनकाब

Donald Trump son Barron Iran target

Donald Trump son Barron Iran target: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव के बीच तेहरान से बेहद खौफनाक खबर सामने आई है। ईरानी सरकारी टीवी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े मीडिया चैनलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 20 वर्षीय छोटे बेटे बैरन ट्रंप को सीधा निशाना बनाने वाला एक नया प्रोपेगैंडा वीडियो प्रसारित किया गया है।

 

वीडियो का शीर्षक ही बेहद भड़काऊ—'बैरन ट्रंप को कहां और कैसे मारा जाए?'— रखा गया है, जिसमें बैरन की लोकेशन, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी कैंपस, पर्सनल सिक्योरिटी और उनके ऑनलाइन गेमिंग अकाउंट्स तक को ट्रैक करने का दावा किया गया है। इतना ही नहीं, वीडियो में बैरन ट्रंप की हत्या के लिए 10 मिलियन डॉलर (लगभग 83 करोड़ रुपए) का इनाम देने की बात भी कही गई है। ALSO READ: NEW US Territory, होर्मुज पर ट्रंप का दावा, अमेरिका-ईरान टकराव ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

ईरान के प्रोपेगैंडा वीडियो में क्या-क्या दावे किए गए हैं?

ईरानी राज्य संचालित मीडिया 'चैनल 3' और IRGC से जुड़े टेलीग्राम चैनलों पर प्रसारित लगभग 3 मिनट के इस वीडियो में कंप्यूटर ग्राफिक्स और एनिमेशन के ज़रिए बैरन ट्रंप के आसपास के सुरक्षा घेरे को दिखाया गया है। वीडियो में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (NYU) स्थित 'कॉन्स्टेंस मिल्स्टीन एंड फैमिली ग्लोबल एकेडमिक सेंटर' और बैरन के हॉस्टल (Dormitories) को दिखाया गया है।

 

ईरानी टीवी का दावा है कि उन्होंने बैरन की सुरक्षा में तैनात अमेरिका की 'सीक्रेट सर्विस' (Secret Service) के अधिकारियों की लोकेशन और उनकी गाड़ियों (Escort Vehicles) का नक्शा तैयार कर लिया है। वीडियो में यह भी दावा किया गया कि बैरन ट्रंप अपनी सुरक्षा व्यवस्था से दूर रहकर 'Xbox', 'FIFA' और 'Discord' जैसे ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर दोस्तों से निजी बातचीत करते हैं। ALSO READ: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ईरान पर सबसे बड़ा आर्थिक हमला, इकोनॉमिक डी-डे घोषित

 

ईरानी मीडिया ने यह सनसनीखेज दावा भी किया कि उनकी पहुंच में मौजूद एक लड़की सीक्रेट सर्विस के घेरे को चकमा देकर बैरन ट्रंप से निजी तौर पर मिली और उनसे जुड़ी जानकारी आगे भेजी। वीडियो के अंत में चेतावनी देते हुए कहा गया है कि 'यह तो बस शुरुआत है! बैरन ट्रंप, हमारा इंतजार करो!'

मेलानिया ट्रंप को भी मिल चुकी है धमकी

हालांकि इस वीडियो को ईरान का प्रोपेगैंडा बताया जा रहा है, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और 'सीक्रेट सर्विस' ने वीडियो का संज्ञान लिया है। विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि इस वीडियो में अधिकांश तथ्य थ्रेट एनिमेशन और ड्रमैटाइज्ड ग्राफिक्स पर आधारित हैं और इसमें इस बात का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं दिया गया है कि ईरानी एजेंट बैरन तक पहुंचने में सफल रहे हैं। माना जा रहा है कि यह वीडियो मुख्य रूप से मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के उद्देश्य से प्रसारित किया गया लगता है। यह पहली बार नहीं है जब तेहरान ने ट्रंप या उनके परिवार को निशाना बनाकर ऐसी सामग्री जारी की हो।

 

इससे पहले जुलाई में IRGC से जुड़ी 'तस्नीम न्यूज एजेंसी' ने एक वीडियो जारी किया था, जिसका शीर्षक था—'मेलेनिया ट्रंप तक कहां और कैसे पहुंचा जा सकता है?' तेहरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशन स्क्वायर' में एक बड़ा होर्डिंग/बिलबोर्ड लगाया गया था, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप को ताबूत में मृत दिखाया गया था और लिखा था 'वी विल किल ट्रंप'।

सुलेमानी की हत्या के बाद बिगड़े रिश्ते

उल्लेखनीय है कि ईरान और डोनाल्ड ट्रंप के बीच की यह दुश्मनी साल 2020 से बेहद गंभीर मोड़ ले चुकी है, जब ट्रंप के पहले कार्यकाल में बगदाद में एक अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी। इसके बाद से ही ईरानी शासन लगातार सुलेमानी की मौत का बदला लेने ('क़िसास' या बदला लेने का सिद्धांत) की धमकियां देता आ रहा है। हाल के महीनों में अमेरिकी-इजराइली हमलों के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक युद्ध और ज्यादा गहरा गया है।

कुबेरेश्वर धाम के आयोजन की वजह से AB रोड हुआ बदहाल, रेलवे स्‍टेशन पर भोपाल-इंदौर के हजारों यात्री हो रहे परेशान

कुबेरेश्वर धाम के आयोजन की वजह से AB रोड हुआ बदहाल, रेलवे स्‍टेशन पर भोपाल-इंदौर के हजारों यात्री हो रहे परेशान

Pradeep Mishra

कुबेरेश्‍वर धाम में प्रदीप मिश्रा के होने वाले आयोजन में वैसे तो हर साल ही इंदौर –भोपाल रोड पर जाम लगता है, लेकिन अब तो इनके आयोजन की वजह से रेलवे स्‍टेशन पर भी असर हो रहा है।

सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में आयोजित धार्मिक आयोजन की वजह से अब इंदौर-भोपाल के बीच यातायात और रेल सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। प्रशासन ने इंदौर से भोपाल जाने वाले वाहनों का रूट डायवर्ट कर दिया, जिससे यात्रियों को करीब 80 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है।

प्रशासन ने ट्रैफिक डायवर्ट किया : सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में हुए धार्मिक आयोजन के कारण प्रशासन ने इंदौर से भोपाल जाने वाले ट्रैफिक को दूसरे रास्तों पर डायवर्ट कर दिया। इस कारण भोपाल और इंदौर जाने वाले यात्री मंगलवार को परेशान होते रहे। इंदौर से आने वाले ट्रैफिक को देवास, राजगढ़ और मक्सी होते हुए भोपाल की तरफ जाना पड़ा। इससे वाहन चालकों को करीब 80 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ा। उधर, एबी रोड से सीहोर के आयोजन में शामिल होने जा रहे लोगों को भी रास्ते में ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।

कुबेरेश्वर धाम में आयोजित यात्रा में मंगलवार को लाखों लोगों की भीड़ उमड़ी। सीहोर जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने भी मंगलवार और बुधवार को विशेष व्यवस्था की। सीहोर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए स्टेशन से गुजरने वाली पांच ट्रेनों को अस्थायी ठहराव दिया गया।

ये ट्रेनें हुईं प्रभावित : मंगलवार और बुधवार को गाड़ी संख्या 20413 वाराणसी–इंदौर सुपरफास्ट एक्सप्रेस, गाड़ी संख्या 20414 इंदौर–वाराणसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस, गाड़ी संख्या 19313 इंदौर–पटना एक्सप्रेस, गाड़ी संख्या 19322 पटना–इंदौर एक्सप्रेस और गाड़ी संख्या 22674 मन्नारगुडी–जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस सीहोर रेलवे स्टेशन पर दो मिनट के लिए रुकेंगी।

इंदौर रेलवे स्‍टेशन पर भीड़ : सीहोर में हुए आयोजन के कारण लगने वाले जाम से बचने के लिए यात्रियों ने बसों और अन्य वाहनों के बजाय ट्रेनों का विकल्प अपनाया। इस कारण सुबह इंदौर से भोपाल जाने वाली ट्रेनों में भी आम दिनों की तुलना में ज्यादा भीड़ रही। सुबह इंदौर से भोपाल जाने वाली वंदे भारत ट्रेन में जगह नहीं थी। इसके अलावा, सीहोर जाने वाले यात्रियों की भीड़ भी रेलवे स्टेशन पर रही।

बांके बिहारी मंदिर के चढ़ावे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- दान का हर पैसा दान पेटी या ऑनलाइन खाते में ही जमा हो

बांके बिहारी मंदिर के चढ़ावे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- दान का हर पैसा दान पेटी या ऑनलाइन खाते में ही जमा हो

shri banke bihari temple

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दान की रकम की कथित हेराफेरी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि दान का हर पैसा दान पेटी या ऑनलाइन खाते में ही जमा हो और मंदिर की आय-व्यय व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता रखी जाए। ALSO READ: तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, उत्पीड़न मामले में आत्मसमर्पण से छूट की याचिका खारिज

 

क्या है पूरा मामला? 

सुप्रीम कोर्ट ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर की मैनेजमेंट कमेटी की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। मंदिर में कथित चंदा चोरी को लेकर सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने हाई पावर कमेटी की एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की। उन्होंने तस्वीरें पेश करते हुए कहा कि मामले बहुत गंभीर हैं और इसमें तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक वीडियो है। तीन लोग 'गोलक' (पारंपरिक दान पेटी) के सामने खड़े होकर भक्तों से पैसे इकट्ठा कर रहे हैं और उन्हें अपनी पॉलीथीन की थैलियों में डाल रहे हैं। ALSO READ: मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के भंवर में खाकी, कटनी के बाद इंदौर में पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज

 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम निर्देश देते हैं कि दान का हर पैसा दान पेटी या ऑनलाइन खाते में ही आना चाहिए। 'सेवायत' या किसी और की तरफ से इसमें कोई भी रुकावट डालने को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। मैनेजमेंट कमेटी को मंदिर के खजाने के लिए एक पारदर्शी सिस्टम लागू करना चाहिए।

 

शीर्ष अदालत ने कहा कि सेवायतों या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से दान की इस व्यवस्था में किसी भी तरह की बाधा को 'बहुत गंभीरता से' लिया जाएगा। अदालत ने मंदिर की प्रबंधन समिति को दान की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक ऐसी व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया, जिससे किसी भी तरह की अनियमितता या गड़बड़ी को रोका जा सके।

 

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मंदिर के पैसे से संपत्ति खरीदने के प्रस्तावों को लेन-देन पूरा होने से पहले अदालत के सामने रखा जाए।

8.7 करोड़ युवा ‘NEET’ श्रेणी में दर्ज! जानिए क्यों 15 से 29 साल के युवाओं पर नीति आयोग ने जारी किया रेड अलर्ट

8.7 करोड़ युवा 'NEET' श्रेणी में दर्ज! जानिए क्यों 15 से 29 साल के युवाओं पर नीति आयोग ने जारी किया रेड अलर्ट

Indian youth employment crisis

8.7 crore NEET youth India: भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' (जनसांख्यिकीय लाभांश) यानी युवा आबादी मानी जाती है। लेकिन नीति आयोग (NITI Aayog) की हालिया रिपोर्ट ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047’ ने देश के सामने एक कड़वी सच्चाई रखी है। रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 29 वर्ष की आयु के लगभग 8.7 करोड़ भारतीय युवा 'NEET' (Not in Education, Employment, or Training) श्रेणी में हैं—यानी वे न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न नौकरी में हैं और न ही किसी प्रकार का कौशल प्रशिक्षण ले रहे हैं।

यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि भारत के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने पर एक गंभीर सवालिया निशान भी खड़ा करता है। ALSO READ: शिक्षा को लेकर क्यों सड़क पर उतरने को मजबूर है Gen-Alfa 8 साल में 84 हजार स्कूल बंद!

नीति आयोग की रिपोर्ट : मुख्य बिंदु और आंकड़े

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के 78वें दौर के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट में देश के कार्यबल और शिक्षा परिदृश्य को 5 प्रमुख वर्गों में बांटकर विश्लेषित किया गया है:

  1. स्कूली शिक्षा (School Education)
  2. उच्च शिक्षा (Higher/Tertiary Education)
  3. औपचारिक और अनौपचारिक कार्यबल (Formal & Informal Workforce)
  4. NEET युवा (Youth Not in Education, Employment, or Training)
  5. महिलाएं (Women Workforce)

युवा 'NEET' वर्ग में क्यों जा रहे हैं? (प्रमुख कारण)

रिपोर्ट के मुताबिक, युवाओं के इस वर्ग में धकेले जाने के पीछे सबसे बड़ी वजह आर्थिक तंगी और रोजगार योग्य कौशल (Employability Skills) की कमी है:

  • वित्तीय तंगी और महंगाई : निम्न-आय वाले परिवारों के युवा पहले से ही कॉलेज फीस और पढ़ाई के खर्चों के बोझ तले दबे होते हैं। ऐसे में किसी अतिरिक्त सशुल्क (Paid) स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम का खर्च उठाना उनके लिए लगभग असंभव हो जाता है।
  • कम वेतन वाली नौकरियों की मजबूरी : वित्तीय प्रतिबद्धताओं के कारण स्नातक (Graduation) पूरा करते ही कई युवा परिवार की मदद के लिए किसी भी तरह की कम वेतन वाली असंगठित नौकरी करने को मजबूर हो जाते हैं, जबकि लाखों युवा कोई अवसर न मिलने के कारण सीधे 'NEET' वर्ग में चले जाते हैं।
  • स्नातकों में हुनर की कमी : रिपोर्ट में एक चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है कि केवल 8.25% स्नातकों को ही उनकी योग्यता और डिग्री के अनुसार रोजगार मिल पाता है। पारंपरिक शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद व्यावहारिक ज्ञान और उद्योग-आधारित (Industry-relevant) स्किल न होने से युवाओं की एम्प्लॉयबिलिटी बहुत कम रह जाती है।

 

Indian youth employment crisis

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अब तक के प्रयास और आगे की राह

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत प्रशिक्षित किया जा चुका है। हालांकि, 8.7 करोड़ युवाओं का NEET वर्ग में होना यह दर्शाता है कि कौशल विकास के प्रयासों की गति और गुणवत्ता दोनों को और बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।
जब तक देश की इस विशाल युवा शक्ति को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण हुनर और रोजगार के बेहतर अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' का पूरा फायदा उठा पाना एक कठिन चुनौती बना रहेगा।

तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, उत्पीड़न मामले में आत्मसमर्पण से छूट की याचिका खारिज

तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, उत्पीड़न मामले में आत्मसमर्पण से छूट की याचिका खारिज

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सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार तरुण तेजपाल की याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में उन्होंने 2013 के उत्पीड़न मामले में आत्मसमर्पण से छूट मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की है। ALSO READ: राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की पैरोल, 7 साल में 17वीं बार आया जेल से बाहर

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने तरुण तेजपाल को 2013 के उत्पीड़न मामले में मिली 10 साल की सजा के लिए 2 हफ्ते के अंदर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। तेजपाल ने इस आधार पर आत्मसमर्पण से छूट मांगी थी कि उनकी अपील पहले सर्वोच्च न्यायालय में सूचीबद्ध और सुनवाई के लिए पेश की जानी चाहिए।

 

तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने तर्क दिया कि न्यायालय के पास उचित मामले में आत्मसमर्पण की आवश्यकता को समाप्त करने और आरोपी के आत्मसमर्पण न करने की स्थिति में भी आपराधिक अपील को सूचीबद्ध करने का अधिकार है।
 

क्या है मामला? 

नवंबर 2013 में गोवा के एक होटल में एक कार्यक्रम के दौरान उनकी एक महिला सहकर्मी ने उन पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया था। इस मामले में तहलका के मामले में दोषी ठहराया था। उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। वर्ष 2021 में गोवा की एक सत्र अदालत ने उन्हें इस मामले से बरी कर दिया था। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने उस फैसले को पलट दिया और अगस्त 2026 में उन्हें इस मामले में बलात्कार (रेप) का दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। ALSO READ: मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के भंवर में खाकी, कटनी के बाद इंदौर में पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज

 

कौन हैं तेजपाल?

तेजपाल का जन्म 15 मार्च 1963 को पंजाब के जालंधर शहर में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में थे, जिसके चलते उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने का मौका मिला। तेजपाल ने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक (ग्रेजुएट) की पढ़ाई की है। तेजपाल की शादी साल 1985 में हुई थी और उनकी पत्नी का नाम गीता बत्रा है। दोनों कॉलेज में साथ थे। उनकी दो बेटियां हैं, एक का नाम टिया और दूसरी का कारा है।

 

56 साल के तरुण तेजपाल भारत के प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक और उपन्यासकार रहे हैं। उनके पास पत्रकारिता का 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। साल 1980 में 'द इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप में नौकरी करते हुए उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की थी। इसके बाद 'इंडिया-2000' नाम की एक मैगजीन में नौकरी करने के लिए वे नई दिल्ली आ गए। वे चर्चित खोजी समाचार पत्रिका 'तहलका' (Tehelka) के सह-संस्थापक और पूर्व प्रधान संपादक रह चुके हैं।

इंदौर पुलिस में क्‍यों अचानक हुआ बड़ा बदलाव, 3 थानों के टीआई बदले गए, कई अफसर अटैच, क्‍या है वजह?

इंदौर पुलिस में क्‍यों अचानक हुआ बड़ा बदलाव, 3 थानों के टीआई बदले गए, कई अफसर अटैच, क्‍या है वजह?

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इंदौर पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है।  पुलिस आयुक्त संतोष सिंह ने इस संबंध में आधिकारिक सूची जारी की है। हाल ही में टीआई से डीएसपी पद पर पदोन्नत हुए 3 अधिकारियों को पुलिस आयुक्त कार्यालय में अटैच किया गया है।

वहीं 3 प्रमुख थानों में नए प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। इसके अतिरिक्त डीआरपी लाइन में मौजूद 2 अधिकारियों को क्राइम ब्रांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

3 थानों में नए प्रभारियों की नियुक्ति : रावजी बाजार थाने से डीएसपी उमेश यादव, परदेशीपुरा थाने से आरडी कानवा और छोटी ग्वालटोली थाने से संजू कामले को पुलिस आयुक्त कार्यालय में अटैच किया गया है। पदोन्नति के बाद इन अधिकारियों के स्थान पर नए प्रभारियों की तैनाती की गई है। अब रावजी बाजार थाने की कमान दीप सिंह को, परदेशीपुरा की कमान पंकज द्विवेदी को और छोटी ग्वालटोली थाने की कमान जितेंद्र यादव को सौंपी गई है। प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डीआरपी लाइन से लोकेन्द्र सिंह खडैत और राजकुमार रघुवंशी को क्राइम ब्रांच में पदस्थ किया गया है।

बता दें कि पंकज द्विवेदी को दूसरी बार परदेशीपुरा थाने की जिम्मेदारी दी गई है। वह वरिष्ठ टीआई हैं, लेकिन विभागीय जांच की प्रक्रिया जारी होने के कारण हालिया सूची में उनका प्रमोशन नहीं हो सका। जितेंद्र यादव को पूर्व में हुए सोनाकांड प्रकरण के बाद तुकोगंज थाने से हटाकर क्राइम ब्रांच स्थानांतरित किया गया था। लगभग 5 माह के समयांतराल के बाद उन्हें पुनः थाना प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी मिली है। दीप सिंह की रावजी बाजार थाने में यह पहली पोस्टिंग है।

मध्यप्रदेश के स्कूलों में 3 दिन होंगे जन्माष्टमी के कार्यक्रम, स्कूल शिक्षा विभाग का फरमान, आयोजन के फोटो-वीडियो भेजने के निर्देश

मध्यप्रदेश के स्कूलों में 3 दिन होंगे जन्माष्टमी के कार्यक्रम, स्कूल शिक्षा विभाग का फरमान, आयोजन के फोटो-वीडियो भेजने के निर्देश

भोपाल। मध्यप्रदेश के स्कूलों में इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर सरकारी स्तर पर विशेष आयोजन की तैयारी ने सियासी बहस छेड़ दी है। स्कूल शिक्षा विभाग के जन्माष्टमी को लेकर जारी दिशा निर्देश के मुताबिक प्रदेश के स्कूलों में 1 से 3 सितंबर 2026 तक कृष्ण जन्माष्टमी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें कृष्ण लीला का मंचन, गीता के संदेश पर नाटक-नृत्य और श्रीकृष्ण से जुड़े मिथकों की व्याख्या जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। स्कूलों से आयोजन की फोटो और रिपोर्ट भी मांगी गई है। 

 

गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी प्रदेश के स्कूलों में जन्माष्टमी पर कार्यक्रम किए गए थे। इस वर्ष भी जन्माष्टमी से पहले लोक शिक्षण आयुक्त की ओर से जारी पत्र में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को एक से तीन सितम्बर तक जन्माष्टमी मनाने के निर्देश दिए गए है। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर 1 से 3 सितंबर तक स्कूलों में अलग-अलग कार्यक्रम कराने को कहा गया है। स्कूलों में जन्माष्टमी मानने का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपराओं, नैतिक मूल्यों और आपसी भाईचारे की समझ विकसित करना हैष स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी अधिकारियों से आयोजनों की जानकारी विभागीय ई-मेल पर भेजने के निर्देश भी दिए हैं।

 

सरकार के इस फैसले को भाजपा ने भारतीय संस्कृति और श्रीकृष्ण के जीवन मूल्यों से नई पीढ़ी को परिचित कराने की पहल बताया है। भाजपा का कहना है कि श्रीकृष्ण की जीवन गाथा केवल धार्मिक संदर्भ तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें कर्तव्य, नेतृत्व, मित्रता और प्रबंधन जैसे विषय भी शामिल हैं। पार्टी ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया है।

 

वहीं कांग्रेस ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक एजेंडे से जोड़ दिया है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सरकार पर निशाना साधते हुए तीखी टिप्पणी की है। कांग्रेस का सवाल है कि सरकारी स्कूलों में किसी एक धार्मिक पर्व को लेकर इस तरह के निर्देश जारी करना क्या उचित है।

 

विवाद केवल भाजपा और कांग्रेस तक सीमित नहीं है। मुस्लिम समाज से जुड़े कुछ लोगों ने भी आपत्ति जताई है। मुस्लिम स्कॉलर तौकीर निजामी ने कहा कि स्कूलों को किसी धर्म विशेष का आयोजन करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए और यदि धार्मिक पर्वों के आयोजन की बात है तो सभी धर्मों के त्योहारों के प्रति समान दृष्टिकोण होना चाहिए।

 

दूसरी ओर हिंदू धर्मगुरुओं ने सरकार के फैसले का समर्थन किया है। उनका कहना है कि बच्चों को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की जानकारी देना गलत नहीं है। सरकार समर्थक पक्ष इसे धार्मिक आयोजन के बजाय सांस्कृतिक और नैतिक शिक्षा से जोड़कर देख रहा है।

 

जन्माष्टमी को लेकर शुरू हुई यह बहस दरअसल इस बड़े सवाल में बदल गई है कि सरकारी स्कूलों में धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों की सीमा क्या होनी चाहिए? सरकार इसे संस्कृति और मूल्य-शिक्षा का हिस्सा बता रही है, जबकि विरोध करने वाले इसे धर्मनिरपेक्ष शिक्षा व्यवस्था के संदर्भ में देख रहे हैं।

शिक्षा को लेकर क्यों सड़क पर उतरने को मजबूर है Gen-Alfa 8 साल में 84 हजार स्कूल बंद!

शिक्षा को लेकर क्यों सड़क पर उतरने को मजबूर है Gen-Alfa 8 साल में 84 हजार स्कूल बंद!

84 thousand government schools closed in India

UDISE education data: देश की सबसे युवा पीढ़ी—Gen-Alfa (जनरेशन अल्फा)—आज किताबों के साथ-साथ अपने अधिकारों और बेहतर शिक्षा की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर है। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) के हालिया आंकड़ों ने देश की स्कूली शिक्षा प्रणाली की एक ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसने नीति-निर्माताओं से लेकर आम जनता तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

एक तरफ कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के स्कूल ठीक करो अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की बदहाली, शिक्षकों की कमी और डिजिटल सुविधाओं के अभाव को राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है, तो दूसरी तरफ सरकारी आंकड़ों ने पुष्टि कर दी है कि पिछले आठ वर्षों में देश के शिक्षा ढांचे में बड़ा संकुचन (Contraction) आया है।

84 thousand government schools closed in India

बड़ी चिंता : वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, 3 से 17 वर्ष की आयु के लगभग 31 प्रतिशत पात्र बच्चे (करीब 11.1 करोड़) स्कूलों में नामांकित ही नहीं हैं। यह आंकड़ा 2018-19 से लगातार इसी स्तर पर बना हुआ है।

84 thousand government schools closed in India

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माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट और बजटीय आवंटन की चुनौती

छात्रों को उच्च स्तर तक स्कूल में बनाए रखना (Retention) एक बड़ी चुनौती बना हुआ है:

  • ड्रॉपआउट दर: माध्यमिक स्तर (Secondary level) पर ड्रॉपआउट दर 7% दर्ज की गई, जबकि प्राथमिक स्तर पर यह नगण्य है।
  • रिटेंशन रेट: माध्यमिक स्तर पर छात्रों को रोककर रखने की दर केवल 44% है—यानी आधे से ज्यादा छात्र माध्यमिक स्तर तक पहुंचते-पहुंचते शिक्षा छोड़ देते हैं।

शिक्षा बजट में बजटीय कटौती

सरकारी स्कूलों की संख्या और नामांकन में गिरावट का एक बड़ा कारण सार्वजनिक खर्च (Public Expenditure) में कमी भी है:

  • स्कूल शिक्षा व साक्षरता विभाग: केंद्रीय बजट में हिस्सेदारी FY2010 के 1.9% से घटकर FY2026 में 1.4% रह गई।
  • उच्च शिक्षा विभाग: बजटीय हिस्सेदारी 1.4% से घटकर 1.0% हो गई।

आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था एक गंभीर संकट और बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। सरकारी स्कूलों का बंद होना, घटता नामांकन, बजट में कमी और डिजिटल असमानता ऐसे मुद्दे हैं, जो Gen-Alfa के भविष्य पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। जब तक शिक्षा पर सार्वजनिक निवेश नहीं बढ़ेगा और बुनियादी ढांचे को आधुनिक तकनीकों से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक 'हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा' का सपना अधूरा ही रहेगा।