UP में पशुओं के लिए बनेगा हाईटेक अस्पताल, योगी सरकार खर्च करेगी 3 करोड़ रुपये, ऑपरेशन से लेकर इलाज तक की सुविधा

पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवाओं को आधुनिक और उन्नत सुविधाओं से युक्त बनाने की दिशा में योगी सरकार ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस आदर्श पशु चिकित्सालय स्थापित किए जाएंगे, जहां पशुओं को सामान्य उपचार से लेकर जटिल और गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं वाली चिकित्सा सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।

इन अस्पतालों में डायलिसिस, एक्स-रे, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आंखों की सर्जरी, हड्डी टूटने पर ऑर्थोपेडिक सर्जरी और गंभीर रूप से बीमार पशुओं को अस्पताल में भर्ती कर इलाज करने की व्यवस्था होगी। भर्ती पशुओं के भोजन, देखभाल और रिकवरी तक का पूरा प्रबंध भी अस्पताल परिसर में किया जाएगा। प्रत्येक आदर्श पशु चिकित्सालय पर तीन करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाएंगे।

 

आधुनिक उपचार की सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी : धर्मपाल सिंह

 

पशुधन और दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि प्रदेश में पहली बार इस स्तर की व्यापक योजना तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि यह पहल प्रदेश के लाखों पशुपालकों के लिए बड़ी सुविधा साबित होने वाली है।

अभी तक गंभीर बीमारियों या जटिल सर्जरी के लिए पशुपालकों को बड़े शहरों या चुनिंदा संस्थानों का रुख करना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद आधुनिक उपचार की सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी।

 

प्रदेश के सभी जिलों में मिलेगी यह सुविधा

 

योजना के तहत प्रत्येक आदर्श पशु चिकित्सालय को आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा। अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट, डिजिटल एक्स-रे, ऑपरेशन थिएटर, रिकवरी वार्ड और भर्ती वार्ड बनाए जाएंगे। आंखों की बीमारियों का इलाज और ऑपरेशन भी यहीं होगा, जबकि दुर्घटना या फ्रैक्चर की स्थिति में पशुओं का सफल उपचार किया जा सकेगा। प्रदेशभर के जिलों में यह सुविधा मिलने जा रही है।

 

उपचार की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी

 

योगी सरकार ने अस्पतालों में गंभीर पशुओं की भर्ती की भी विशेष व्यवस्था की है। इलाज के दौरान पशुओं के लिए संतुलित भोजन, साफ-सफाई और चौबीसों घंटे चिकित्सकीय निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। अस्पतालों में पूरे उपचार की प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और पशुपालकों का भरोसा भी मजबूत होगा। उपचार की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

 

ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को नहीं तय करनी पड़ेगी लंबी दूरी

 

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी योजना का विस्तार जिला स्तर से लेकर विधानसभा क्षेत्र के स्तर तक किया जाएगा। योगी सरकार पशु चिकित्सा सुविधाओं का मजबूत नेटवर्क विकसित करेगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े। प्रत्येक आदर्श पशु चिकित्सालय पर तीन करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाएंगे। इसमें 2.55 करोड़ रुपए से कंस्ट्रक्शन तथा 50 लाख रुपए उपकरण, फर्नीचर, सोलर सिस्टम और अन्य पर खर्च किया जाएगा। इससे प्रदेश में पशु स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और आधुनिक होगा।

 

पशुओं की देखभाल का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा

 

योजना का एक महत्वपूर्ण पक्ष मानव संसाधन का विकास भी है। सरकार केवल भवन और उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बड़ी संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सक और पैरा वेटरनरी स्टाफ यहां तैनात होंगे। इन प्रशिक्षित कर्मियों को आधुनिक उपकरणों के संचालन, आपातकालीन उपचार, ऑपरेशन में सहयोग और पशुओं की देखभाल का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे चिकित्सकों को बेहतर सहयोग मिलेगा और इलाज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

 

प्रदेश के डेयरी और पशुधन क्षेत्र को मिलेगी नई मजबूती

 

प्रदेश में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला है। लाखों परिवार दुग्ध उत्पादन, डेयरी, बकरी पालन और अन्य पशुधन गतिविधियों पर निर्भर हैं। समय पर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं मिलने से पशुओं की मृत्यु दर कम होगी, उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और पशुपालकों की आय में भी सकारात्मक वृद्धि होगी। साथ ही प्रदेश के डेयरी और पशुधन क्षेत्र को भी नई मजबूती मिलेगी। 

 

उत्तर प्रदेश बन रहा पशु चिकित्सा सेवाओं का नया मॉडल

 

योगी सरकार की यह पहल केवल चिकित्सा सेवाओं का विस्तार नहीं है, बल्कि पशुधन संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि की दिशा में एक दीर्घकालिक निवेश भी है। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश देश में पशु चिकित्सा सेवाओं का नया मॉडल प्रस्तुत करने की तैयारी में है। अब प्रदेश के पशुपालकों को अपने क्षेत्र में ही ऐसी सुविधाएं मिलेंगी, जिनके लिए अब तक उन्हें बड़े शहरों का सहारा लेना पड़ता था।

नर्मदा नदी की तेज धार में बहा इंदौर का युवक, 9 घंटे की मशक्कत के बाद मिला शव

Narmada river

मध्य प्रदेश के धार्मिक पर्यटन स्थल महेश्वर में नर्मदा नदी के सहस्त्रधारा घाट पर दर्दनाक हादसा हो गया। परिवार के साथ घूमने आए 30 वर्षीय अर्पित हाड़ा का पैर फिसलने से वह तेज बहाव में बह गया। परिजनों ने ग्रामीणों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन नदी की तेज धारा के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। सूचना मिलते ही पुलिस, होमगार्ड और गोताखोरों की टीम ने तलाशी अभियान शुरू किया। सोमवार को 9 घंटे की मशक्कत के बाद युवक का शव मिल सका है।

परिवार के साथ घूमने आया था : अर्पित हाड़ा रविवार सुबह अपने परिवार के साथ महेश्वर के प्रसिद्ध सहस्त्रधारा क्षेत्र घूमने आया था। परिवार के पांच सदस्य उसके साथ थे। दिनभर धार्मिक स्थल और आसपास के क्षेत्रों में घूमने के बाद शाम को पूरा परिवार नर्मदा स्नान के लिए सहस्त्रधारा घाट पहुंचा। यहां बड़ी संख्या में चट्टानें हैं और फिसलन भी रहती है।

तेज बहाव में बह गया युवक : नर्मदा में स्नान के दौरान अचानक अर्पित का पैर फिसल गया और वह नदी में जा गिरा। नदी का बहाव इतना तेज था कि वह खुद को संभाल नहीं सका। उसके भाई और पत्नी ने शोर मचाकर ग्रामीणों से मदद मांगी, लेकिन किसी को भी उसे बचाने का मौका नहीं मिला। देखते ही देखते अर्पित तेज धारा में बह गया और परिजनों की आंखों के सामने ओझल हो गया।

रातभर चला रेस्क्यू : घटना की सूचना मिलते ही महेश्वर पुलिस गोताखोरों के साथ मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया। रविवार देर रात तक लगातार खोजबीन की गई, लेकिन युवक का कोई पता नहीं चल सका। सोमवार सुबह होमगार्ड और गोताखोरों की टीम फिर मौके पर पहुंची और दोबारा सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सोमवार को करीब 9 घंटे की मशक्‍कत के बाद उसका शव बरामद किया गया है।

अयोध्या राम मंदिर में बड़ा बदलाव, ऑनलाइन दान करते ही तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद

ayodhya ram mandir trust meeting

Ram Mandir online donation: ​अयोध्या में श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के हालिया मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राम भक्तों के लिए ऑनलाइन दान करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और हाई-टेक बना दिया गया है।

 

​ऑनलाइन दान करने वाले श्रद्धालुओं को अब दान की पुष्टि के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ट्रस्ट ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट के 'डोनेशन सेक्शन' को अपडेट कर यह नई सुविधा शुरू की है। ​दान प्रक्रिया पूरी होते ही रसीद तुरंत स्क्रीन पर आ जाएगी, जिसे डाउनलोड करके सुरक्षित रखा जा सकता है। रसीद पाने के लिए श्रद्धालु को नाम, दान का उद्देश्य, पैन (PAN) नंबर, तिथि, दान राशि, पूरा पता, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। किसी भी सहायता या पूछताछ के लिए ट्रस्ट ने अपनी वेबसाइट पर हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी भी जारी कर दिए हैं। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में 5 बड़े फैसले, संतों को बड़ी जिम्मेदारी

ऑफलाइन दान के लिए भी सख्त नियम लागू

​चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद कई श्रद्धालुओं ने रसीद में देरी की शिकायत की थी। इसी को देखते हुए अब मंदिर परिसर में ऑफलाइन (नकद) दान करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को भी मौके पर ही अनिवार्य रूप से रसीद देने की व्यवस्था लागू कर दी गई है। नई डिजिटल व्यवस्था से श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा और भविष्य में दान के रिकॉर्ड का सत्यापन बेहद आसान रहेगा। ALSO READ: अयोध्या आहत है… रामलला के घर 'लूट' ने आस्था को घायल किया, सरयू किनारे गूंज रहा एक ही सवाल— 'अब न्याय कब?'

रोज आ रहा है 8 से 10 लाख रुपये का चढ़ावा

​चढ़ावा चोरी की घटना के बाद शुरुआत में दान की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर हुई थी, लेकिन राम भक्तों की अटूट आस्था को कोई रोक नहीं सका। श्रद्धालुओं का भरोसा एक बार फिर पूरी तरह लौट आया है। ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों को मिलाकर राम लला के चरणों में प्रतिदिन 8 से 10 लाख रुपए का चढ़ावा आ रहा है। मंदिर परिसर में रखे दान पात्रों में भक्त दिल खोलकर चढ़ावा अर्पित कर रहे हैं, वहीं ऑनलाइन दान में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, आरोपों से मुक्ति के लिए चंपत राय की कठोर साधना!

champat rai resigns from ram mandir trust

Champat Rai Chaturmas: ​राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े विवादों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने आध्यात्मिक साधना का मार्ग चुन लिया है। अपने ऊपर लगे आरोपों से मुक्ति और आत्मिक शांति के लिए 80 वर्षीय चंपत राय ने अयोध्या में 4 महीने का चातुर्मास अनुष्ठान शुरू कर दिया है।

​अनुष्ठान की मुख्य बातें

  • ​रोजाना 6 घंटे का मौन व्रत : प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक वे पूरी तरह मौन रहेंगे।
  • ​मंत्र जाप और मानस पाठ : मौन अवधि के दौरान निरंतर 'राम-मंत्र' का जाप और रामचरितमानस का पाठ करेंगे।
  • ​अयोध्या से बाहर नहीं जाएंगे : 21 नवंबर (देवोत्थान एकादशी) तक वे अयोध्या छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।
  • ​तीर्थ क्षेत्र भवन में साधना : पूरा अनुष्ठान परिसर से करीब 200 मीटर दूर स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र भवन में ही संपन्न होगा। ALSO READ: दान की गणना पर चंपत राय ने उठाए सवाल! आखिर किस पर साधा निशाना

​विवादों से दूरी और सीमित मुलाकातें

​चढ़ावा चोरी विवाद के बाद से ही चंपत राय सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर हैं। 23 जून के बाद से वे सार्वजनिक मंचों पर नजर नहीं आए हैं और 7 जून से ही तीर्थ क्षेत्र भवन में एकांतवास जैसा जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

​भगवान राम पर छोड़ा न्याय का फैसला

चंपत राय का अटूट विश्वास है कि केवल भगवान श्रीराम ही उन्हें इन आरोपों और कलंक से मुक्त करेंगे। हालांकि, ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि यह एक विशुद्ध धार्मिक प्रक्रिया है और इसका किसी विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। अयोध्या के कई संतों और स्थानीय व्यापारी समाज ने भी तीर्थ क्षेत्र भवन पहुंचकर चंपत राय के प्रति अपना समर्थन और विश्वास व्यक्त किया है। ALSO READ: राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर, कृष्ण मोहन को मिली नई जिम्मेदारी

​क्या होता है चातुर्मास अनुष्ठान?

​हिंदू पंचांग के अनुसार, चातुर्मास आषाढ़ शुक्ल एकादशी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक (सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक) चलता है। इस दौरान साधु-संत यात्राएं रोककर एक ही स्थान पर रहकर जप, तप और स्वाध्याय करते हैं। मान्यता है कि इन 4 महीनों में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, इसलिए विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। चातुर्मास में लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा और तामसिक भोजन का पूरी तरह त्याग कर सात्विक जीवन अपनाया जाता है।

जंतर-मंतर का नया व्याकरण, क्‍या ‘Gen-Z’ की गालियों से हो रहा संस्‍कारों का पतन, सोशल मीडिया में छिड़ी बहस

Gen-Z protest

दिल्‍ली का जंतर-मंतर हमेशा से देश की धड़कन रहा है—यहां कभी इंकलाब के नारे गूंजते हैं, तो कभी व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश का सैलाब उमड़ता है। लेकिन हाल ही में, नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक के विरोध में जुटे 'Gen-Z' (नई पीढ़ी) के प्रदर्शन ने विरोध प्रदर्शनों के इतिहास में एक नया और तीखा अध्याय जोड़ दिया है। इस आंदोलन की सबसे बड़ी चर्चा सिर्फ इसके मुद्दों को लेकर नहीं, बल्कि उस भाषा को लेकर है जो प्रदर्शनकारियों के मुंह से निकली। सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को संबोधित करते हुए जिस खुलेपन और बेबाकी से फूहड़ और भद्दी गालियों का इस्तेमाल किया गया, उसने सोशल मीडिया से लेकर ड्राइंग रूम तक भूचाल ला दिया है।

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यह सिर्फ एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap) पर छिड़ी एक अंतहीन बहस बन गया है। देश की साहित्यिक और लेखक बिरादरी इस मुद्दे पर दो स्पष्ट और विपरीत ध्रुवों पर बंट गई है।

साहित्यिक बिरादरी में छिड़ा घमासान: अभिव्यक्ति या पतन?
इस पूरी घटना के बाद वैचारिक गलियारों में एक तीखी खींचतान शुरू हो गई है। एक धड़ा ऐसा है जो इन गालियों को युवा पीढ़ी के घुटनभरे गुस्से और निराशा का स्वाभाविक विस्फोट मान रहा है। इनका तर्क है कि जब सिस्टम युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है, जब उनकी डिग्रियां और सपने पेपर लीक की भेंट चढ़ जाते हैं, तब शालीनता और व्याकरण के दायरे टूट जाते हैं। इस वर्ग का मानना है कि गालियां समाज का हिस्सा हैं और जब सत्ता बहरी हो जाती है, तो भाषा अपनी शालीनता छोड़कर आक्रामक हो जाती है। उनके अनुसार, यह Gen-Z का अपने गुस्से को बिना किसी फिल्टर के बयां करने का तरीका है।

दूसरी तरफ, पारंपरिक साहित्यकारों, विचारकों और वरिष्ठ नागरिकों का एक बड़ा वर्ग इसे संस्कारों का गंभीर हनन और सभ्यता के पतन की शुरुआत मान रहा है। उनका कहना है कि विरोध दर्ज कराने के लोकतांत्रिक और शालीन तरीके सदियों से मौजूद रहे हैं। सार्वजनिक मंचों पर इस स्तर की भद्दी भाषा का प्रयोग न केवल राजनीतिक बहस के स्तर को गिराता है, बल्कि यह दिखाता है कि नई पीढ़ी के भीतर संवाद की संस्कृति खत्म हो रही है।

ओटीटी, सोशल मीडिया और 'मूक स्क्रीन' की देन : इस वैचारिक मंथन में एक और दिलचस्प पहलू पर बात हो रही है—वह है Gen-Z की भाषा का ताना-बाना। आज की पीढ़ी किताबों की दुनिया से दूर, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की वेब सीरीज, सोशल मीडिया के मीम्स और रील्स की ऐसी दुनिया में जी रही है जहाँ गालियों को 'कूल' और 'रॉ' (Raw) मानकर सामान्यीकृत कर दिया गया है। फिल्मों और सीरीज में एंटी-हीरो के मुंह से निकलने वाली गालियां अब युवाओं के दैनिक बोलचाल का हिस्सा बन चुकी हैं।

जब यही पीढ़ी अपने वास्तविक जीवन में किसी बड़े संकट या अन्याय का सामना करती है, तो उनके पास विरोध की अपनी गढ़ी हुई कोई शास्त्रीय शब्दावली नहीं होती। वे अपनी उसी सिनेमैटिक और सोशल मीडिया वाली दुनिया की भाषा में प्रतिक्रिया देते हैं, जहां आक्रोश का मतलब ही तीखा और अमर्यादित होना है।

क्या यह लोकतंत्र की नई भाषा है?
सवाल यह है कि क्या जंतर-मंतर पर सुनाई दी यह भाषा लोकतंत्र के लिए खतरनाक है या यह एक चेतावनी है? एक तरफ, भाषा की पवित्रता और सार्वजनिक जीवन की गरिमा का सवाल अपनी जगह बिल्कुल सही है। लोकतंत्र में संवाद की एक मर्यादा होती है, और जब वह मर्यादा तार-तार होती है, तो समाज की मूल संरचना खतरे में पड़ जाती है। दूसरी तरफ, यह भी सच है कि यह गुस्सा रातों-रात पैदा नहीं हुआ। युवाओं के भीतर सिस्टम के प्रति जो अविश्वास और लाचारी का भाव है, उसने इस अमर्यादित भाषा को जन्म दिया है।

अंत में, जंतर-मंतर की यह घटना सिर्फ नीट पेपर लीक तक सीमित नहीं है। यह इस बात का आईना है कि हमारी आने वाली पीढ़ी व्यवस्था से कितनी त्रस्त है और उनके गुस्से को व्यक्त करने के साधन कितने बदल चुके हैं। अब यह बहस सिर्फ इस बात की नहीं है कि गालियां दी जानी चाहिए या नहीं, बल्कि इस बात की है कि क्या हम उस समाज का निर्माण कर रहे हैं जहाँ युवाओं का गुस्सा केवल गालियों के शोर में ही दबकर रह जाए?

CM पुष्कर सिंह धामी ने बच्ची से की बातचीत का वीडियो एक्स पर किया पोस्ट, बोले- बेटियों के लिए सुरक्षित और सशक्त उत्तराखंड बनाना हमारा संकल्प

puskar singh dhami

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने बच्चों और बेटियों के भविष्य को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए एक छोटी बच्ची से हुई मुलाकात का जिक्र किया।

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 उन्होंने यह वीडियो एक्स पर पोस्ट भी किया। सीएम धामी ने लिखा कि उन्होंने एक प्यारी बिटिया से उसके सपनों, पढ़ाई और भविष्य को लेकर स्नेहपूर्वक बातचीत की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नौनिहालों की मुस्कान में उत्तराखंड के सुनहरे कल की झलक दिखाई देती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियां उत्तराखंड की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त उत्तराखंड का निर्माण सरकार का संकल्प है। 

उन्होंने अपने संदेश में बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण को प्रदेश के विकास से जोड़ते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। सीएम धामी के इस संदेश को बेटियों की शिक्षा और महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने इससे पहले भी कई मंचों से कहा है कि उत्तराखंड की बेटियां हर क्षेत्र में प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर माहौल देना जरूरी है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने ‘जनता दर्शन’ में आए लोगों को दिया भरोसा

Yogi Janata Darshan

Yogi Adityanath Janta Darshan: मुख्यंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनपदों से आए प्रत्येक व्यक्ति से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यहां आए लोगों से कहा कि आप परेशान कतई न हों, सरकार हर उचित समस्या का निष्पक्ष समाधान कराएगी। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों के साथ आए बच्चों से भी बातचीत की, उनकी पढ़ाई और रूचि के बारे में भी जाना, फिर सभी को चॉकलेट भी दी। 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘जनता दर्शन’ में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं-शिकायतें सुनीं। उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि परेशान न हों, सबकी उचित समस्या पर प्रभावी कार्रवाई कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि यहां आईं शिकायतों का निस्तारण और समस्याओं का समाधान शीघ्रता से कराया जाए।

अधिकारियों को निर्देश- समयसीमा के भीतर निष्पक्षता से कराएं निराकरण

मुख्यमंत्री ‘जनता दर्शन’ में आए फरियादियों के पास पहुंचे और एक-एक कर उनके प्रार्थना पत्र लेते हुए शिकायतों व समस्याओं को सुना। उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा-परेशान न हों, सबकी उचित समस्या पर प्रभावी कार्रवाई कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने पास में खड़े अधिकारियों को निर्देशित किया कि यहां आईं शिकायतों का निस्तारण और समस्याओं का समाधान शीघ्रता से कराया जाए। अलग-अलग मामलों से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए उन्होंने संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी का निस्तारण निष्पक्ष और समयबद्ध होना चाहिए।

अपराध व कब्जा की शिकायत पर कड़ी कार्रवाई के दिए निर्देश 

अपराध व जमीन पर जबरन कब्जा किए जाने संबंधी शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके साथ ही इलाज के लिए आर्थिक मदद से जुड़े प्रार्थना पत्रों पर उन्होंने अस्पतालों के एस्टिमेट की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने को कहा। सीएम ने लोगों को आश्वस्त किया कि एस्टिमेट मिलते ही सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी। 

मुख्यमंत्री ने बच्चों से पढ़ाई और उनकी रुचि के बारे में भी जाना 

‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ कुछ बच्चे भी आए थे। मुख्यमंत्री ने इन बच्चों को दुलारा, उनसे पढ़ाई और रुचि के बारे में भी पूछा, फिर चॉकलेट के साथ आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा कि मन लगाकर पढ़ाई करें। इसके साथ ही किसी अन्य विधा (खेल, गीत-संगीत, कला, नाट्य) आदि में भी प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने भीतर की कला को निखारें।

Black Sea Conflict : ब्लैक सी हमले पर भारत का सख्त एक्शन, यूक्रेन के राजदूत तलब, 5 भारतीय नाविकों की मौत के बाद MEA की बड़ी एडवाइजरी

attack on ship

भारत सरकार ने ब्लैक सी (Black Sea) में वाणिज्यिक जहाज MV OMORFI पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत के बाद यूक्रेन के भारत स्थित राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक (Oleksandr Polishchuk) को सोमवार को तलब किया। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की।

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विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि ऐसे हमले समुद्री नौवहन की सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर डालते हैं। मंत्रालय ने यूक्रेन के राजदूत से कहा कि वे भारत की कड़ी आपत्ति और चिंता यूक्रेनी अधिकारियों तक पहुंचाएं।

निर्दोष नाविकों की जान खतरे में डालना अस्वीकार्य

MEA ने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, जिससे निर्दोष नागरिक नाविकों की जान जोखिम में पड़े, पूरी तरह अस्वीकार्य है और भविष्य में ऐसे हमलों से बचा जाना चाहिए। इससे पहले 24 जुलाई को भी विदेश मंत्रालय ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की निंदा करते हुए सभी पक्षों से समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक व्यापार को बाधित न करने की अपील की थी।

 

MV OMORFI पर हमले में भारतीय नागरिक की मौत

 

विदेश मंत्रालय के अनुसार, 18 जुलाई को MV OMORFI ब्लैक सी से गुजर रहा था, तभी उस पर हमला हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, जहाज उस समय रूसी क्षेत्रीय जलक्षेत्र के पास था। जहाज पर कुल 10 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें तीन भारतीय नागरिक शामिल थे। हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि अन्य दो भारतीय सुरक्षित बताए गए हैं। सरकार ने मृतक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।

 

18 जुलाई के बाद 5 भारतीयों की मौत

 

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 18 जुलाई के बाद से ब्लैक सी में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए अलग-अलग हमलों में पांच भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। 20 जुलाई को MV Golden Leo पर हुए हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी। यह जहाज यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुआ था। जहाज पर कुल 17 क्रू सदस्य थे, जिनमें पांच भारतीय शामिल थे। चार की मौत हुई, जबकि एक भारतीय गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।

MV AGN Ragnar पर भी हमला

 

भारतीय दूतावास ने रविवार को बताया कि 25 जुलाई को ओडेसा बंदरगाह पर MV AGN Ragnar भी हमले का शिकार हुआ। जहाज पर चार भारतीय नागरिक सवार थे। ताजा जानकारी के अनुसार, दो भारतीय सुरक्षित हैं, जबकि अन्य दो के बारे में जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। खोज एवं बचाव अभियान जारी है और भारतीय दूतावास संबंधित अधिकारियों के लगातार संपर्क में है।

 

भारतीय नाविकों के लिए एडवाइजरी जारी

 

इन घटनाओं के बीच विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों और नाविकों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने कहा कि ब्लैक सी और आसपास का समुद्री क्षेत्र अभी भी अत्यधिक संवेदनशील और अस्थिर बना हुआ है, जहां मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा लगातार बना हुआ है। मंत्रालय ने कहा कि जो भारतीय नागरिक इस क्षेत्र में संचालित वाणिज्यिक जहाजों पर नौकरी करने की योजना बना रहे हैं, वे नियुक्ति स्वीकार करने से पहले सुरक्षा स्थिति का गंभीरता से आकलन करें।

सरकार ने सलाह दी है कि नाविक जहाज के रूट, बंदरगाह, सुरक्षा व्यवस्था, बीमा, आपातकालीन सहायता और रोजगार अनुबंध की शर्तों की पूरी जानकारी लेने के बाद ही नौकरी स्वीकार करें। साथ ही अपने परिवार से नियमित संपर्क बनाए रखें और महानिदेशालय समुद्री प्रशासन (DGMA) की ओर से जारी सुरक्षा सलाह का पालन करें।

अगर गालियों से समाज का पतन होता है तो इसकी शुरुआत आपके बेडरूम से हो चुकी है

Gen-Z protest

गालियों से याद आया कि जब मध्‍यप्रदेश में मोहन यादव सीएम बने थे तो उनका एक वीडियो वायरल हुआ था— वीडियो में वे गालियां दे रहे हैं, जिसे फुरसत से देखा जाना चाहिए। इसके कुछ पहले जाएं तो मध्‍यप्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने भी अपने कार्यकर्ताओं को बहुत ही अपनत्‍व और प्‍यारे मालवी अंदाज में बुलाया था। राजनीति में गालियों की यह ‘अनफिल्‍टर्ड’ परंपरा हाल ही में बीजेपी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के ‘घंटा’ तक पहुंची थी। अतीत में अखबार के पन्‍ने और न्‍यूज चैनल के दृश्‍य टटोलेंगे तो कई जगह बीप… बीप… सुनाई दे जाएंगी।

इससे ज्‍यादा ही मनोरंजित होना है और समाज के सामने अच्‍छा नागरिक भी बने रहना है तो अपने कमरे में चुपचाप हेडफोन लगाकर ओटीटी पर कोई भी वेब-सीरीज लगा लीजिए और बाहर दफ्तर, समाज में सभ्‍य बनकर अच्‍छा नागरिक बने रहिये।

इन सब के बीच सवाल यह है कि अगर गुस्‍से में गालियां न दी जाएं तो गालियों की जगह क्‍या दिया जाना चाहिए?

ओटीटी, स्‍टैंडअप्‍स और पॉडकास्‍ट में गालियों को 'कूल' और 'रॉ' बताकर जिस तरह से आप और हम कूल बनते हैं तो यह भी बता दें कि इस जनरेशन को अपनी गालियों के साथ कौनसे श्‍लोक और मंत्र शामिल करने चाहिए थे, जिससे ये गालियां इतनी अश्‍लील और भद्दी न हो?

बात यह है कि गालियों का संबंध किसी पार्टी, संगठन या उम- वर्ग आदि से नहीं होता है। जिस आदमी को गुस्‍सा आता है— आक्रोश होता है वो जब वो चरम पर पहुंचता है तो उस आदमी के खिलाफ गालियां दी जाती हैं, जिसने उसे इसके लिए मजबूर किया है। हां, कुछ हद तक हमारे संस्‍कार काम आते हैं, लेकिन यह भी सिचुएशनल काम करते हैं। हम कितने ही आध्‍यात्‍मिक बन जाएं, किसी के मरने पर रो ही देंगे— किसी के बिछडने पर दुख होता ही है। हां, यह सही कि नई जनरेशन आपसे ज्‍यादा मुखर है— उसके लिए बहुत सी बातें नॉर्मल है, उनके बीच लिंग-भेद कम होता जा रहा है।

अगर प्रोटेस्‍ट में आक्रोश में एक करप्‍ट सिस्‍टम के खिलाफ निकली गालियों से समाज का पतन होता है तो यह पतन आपके बेडरूम में पहले ही हो चुका है। उन ओटीटी, स्‍टैंडअप कॉमेडी और पॉडकास्‍ट में हो चुका है, जिसे आप बड़े चाव से अपने कमरे की लाइट्स बंद कर के देखते हैं।

गालियां Gen-Z की भाषा नहीं है— न ही ये गालियां उन्‍होंने ईजाद की है— ये गालियां आपने उन्‍हें विरासत में ट्रांसफर की हैं। फर्क इतना है कि आप में सिर्फ अपने बेडरूम और प्राइवेट पार्टी में गालियां देने का साहस है— जबकि वे कहीं भी अनफिल्‍टर्ड नहीं हैं।

CJP ने फिर दी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी, सरकार की वादाखिलाफी पर भड़की पार्टी, एक्स पर क्या बोले आशुतोष रांका

cjp jantar mantar protest

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को चेतावनी दी कि यदि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं रोकी गई तो वह अपना आंदोलन दोबारा शुरू करेगी। पार्टी का आरोप है कि देशव्यापी प्रदर्शन वापस लेने के बाद केंद्र के साथ हुए समझौते का उल्लंघन किया गया है।

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CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली और अन्य राज्यों में कई छात्रों की निगरानी की जा रही है और उन्हें कथित तौर पर परेशान किया जा रहा है। रांका ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनकारियों को लॉजिस्टिक सहायता देने वाले स्वयंसेवकों को भी हिरासत में लिया जा रहा है।

FIR वापस लेने और छात्रों की रिहाई की मांग

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CJP ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तुरंत वापस लेने, हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा करने और यह सुनिश्चित करने की मांग की कि दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियां या भाजपा-शासित अथवा सहयोगी राज्यों की पुलिस छात्रों के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज न करे।

 

आंदोलन दोबारा शुरू करने की चेतावनी

 

आशुतोष रांका ने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो CJP फिर से आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगी। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पुलिस या सरकारी एजेंसियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।