गुरु पूजन कर शिष्यों को आशीर्वाद देंगे गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ

गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का विशिष्ट पूजन कर नाथपंथ के गुरुजनों के प्रति श्रद्धा निवेदित करेंगे। इस पर्व पर नाथपंथ के आदिगुरु गोरखनाथ जी को रोट अर्पित करने की भी परंपरा है। आनुष्ठानिक कार्यक्रमों को पूर्ण करने के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर साधु-संतों और अपने शिष्यों को आशीर्वाद प्रदान करेंगे। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में चल रही सप्तदिवसीय श्रीराम कथा की पूर्णाहुति भी होगी। 

गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूजन का विशिष्ट अनुष्ठान

गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा के दिन बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूजन का विशिष्ट अनुष्ठान प्रातःकाल 5 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ सुबह सबसे पहले गुरु गोरखनाथ जी की पूरे विधि विधान से पूजा करेंगे। पूजनोपरांत गोरखनाथ जी को रोट चढ़ाया जाएगा। गुरु गोरखनाथ जी के विशिष्ट पूजन के बाद गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित सभी देव विग्रहों, नाथपंथ के सभी योगियों, ब्रह्मलीन महंतजनों के समाधि स्थल पर भी विशेष पूजन का कार्यक्रम होगा। पूजा का समापन सामूहिक आरती से होगा। गुरु पूजन से लेकर आरती तक का अनुष्ठान सुबह 7 बजे तक चलेगा। 

श्रीराम कथा की पूर्णाहुति

गुरु पूजन के बाद प्रायः 9 बजे से 11:30 बजे तक गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में 23 जुलाई से चल रही श्रीराम कथा की पूर्णाहुति होगी। इसके उपरांत इसी सभागार में आशीर्वचन और भजन का कार्यक्रम होगा। इस अवसर पर नाथपंथ के सभी श्रद्धालुओं को मंच से गोरक्षपीठाधीश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होगा। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर गोरखनाथ मंदिर में दोपहर 12:30 बजे से सहभोज/भंडारा का भी आयोजन किया गया है।

‘एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया’… लोकसभा में अखिलेश यादव का बड़ा हमला

akhilesh yadav attacks modi government on NTA and paper leak in loksabha

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा में बोलते हुए कहा कि जब मंत्री (पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान) संसद पहुंचे, तो सदन के बाहर उनका स्वागत किया गया। सोचिए सदस्यों को कितनी बड़ी राहत मिली होगी और वे किस बड़े संकट से बच गए। एक 'प्रधान' को हटाकर, आपने 'प्रधानमंत्री' को बचा लिया। ALSO READ: पेपर लीक करने वालों की खैर नहीं! जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कितना सख्‍त है नया कानून

 

अखिलेश यादव ने कहा कि जो चढ़ावा चोर को नहीं रोक पाए, वो पेपर लीक कैसे रोकेंगे? उन्होंने दावा किया कि भविष्य में भी NEET का पेपर लीक होगा, क्योंकि सरकार इसे रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि 10वीं और 12वीं के पेपर भी लीक हुए, लेकिन सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार आने के बाद से ही शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और सरकार की नीतियों के चलते पूरी व्यवस्था ध्वस्त होती जा रही है। अब तक 20 पेपर लीक हो चुके हैं।

 

सपा नेता ने कहा कि विपक्ष को डर है कि कहीं सरकार पूरे शासन को ही आउटसोर्स न कर दे। जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) तक को आउटसोर्स किया गया है तो आखिर इसकी जवाबदेही किसकी है? ALSO READ: “छात्रों पर पैलेट गन किसके आदेश से चली?” लोकसभा में गौरव गोगोई के तीखे सवाल, NTA और सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

 

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने प्राथमिक स्कूलों को निशाना बनाकर बंद किया, जिससे गरीब और जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि RSS ने देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों को बर्बाद कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने देश में नफरत की राजनीति होने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार किसी को न्याय दिलाने में सफल नहीं हुई है।

 

अखिलेश ने कहा कि सरकार के खिलाफ नारा लगा। सरकार को ईगो था कि सरकार झुकती नहीं, लेकिन नौजवानों ने नारा दिया कि झुकाने वाला चाहिये। उन्होंने कहा कि मंत्री जी लौटे तो सदन के बाहर उनका स्वागत हुआ। उन्होंने कहा कि जो आंदोलन शुरुआत में मजाक लग रहा था, वह इतना गंभीर हो गया कि सरकार को धरने की अनुमति देनी पड़ी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार युवाओं की सभी मांगों को स्वीकार करेगी।

पेपर लीक करने वालों की खैर नहीं! जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कितना सख्‍त है नया कानून

jitendra singh on paper leak in parliament

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान कहा कि यह संशोधन कानून को और सख्त बनाने और तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है, ताकि इन सभी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़े और बहाल हो सके। ALSO READ: “छात्रों पर पैलेट गन किसके आदेश से चली?” लोकसभा में गौरव गोगोई के तीखे सवाल, NTA और सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

 

उन्होंने कहा कि धारा 10 की उप-धारा 1 में प्रावधान था कि इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को कम से कम 3-5 साल की सजा और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। आज लाए जा रहे संशोधन के तहत, सजा की यही अवधि कम से कम 5-10 साल और जुर्माना 50 लाख रुपए तक कर दिया गया है। 2024 के कानून में, सर्विस प्रोवाइडर के लिए सजा 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना थी। अब इसे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया जा रहा है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2024 के कानून में यह भी लिखा था कि प्रोवाइडर को अगले 4 वर्षों तक कोई भी परीक्षा आयोजित करने से रोक दिया जाएगा। आज, इस संशोधन के तहत उस अवधि को बढ़ाकर 8 साल किया जा रहा है… अंत में, संगठित अपराध करने वालों, यानी जहां माफिया गिरोह शामिल हो, के मामले में पहले सज़ा 5-10 साल थी। इसे बढ़ाकर 7-10 साल कर दिया गया है और जुर्माना पहले 1 करोड़ रुपये तक था। अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।

 

उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने वीडियो के माध्यम से भी किया था, वह है तेजी से न्याय सुनिश्चित करना। हम परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करेंगे। हमने उसमें भी समय सीमा तय की है। जांच 2 महीने की अवधि के भीतर पूरी होनी चाहिए, चाहे वह केंद्रीय एजेंसी हो या विशेष कार्य बल। ALSO READ: कौन हैं जंतर-मंतर के वायरल हो रहे मोहम्मद इरफान? क्यों राहुल गांधी पहुंचे उनके घर?

 

यूपीए राज में भी लीक होते थे पेपर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि पहले भी पेपर लिक होते थे। 2009, 2011, 2012 और 2013 में पेपर लीक हुए। यह सिर्फ एक राज्य तक सिमित नहीं। पीएम ने जल्द न्याय का फैसला किया है। नए बिल में स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया है।  

MPPSC: छात्र आंदोलन का असर, अब परीक्षार्थी भी देख सकेंगे उत्तर पुस्तिका, 5 साल पहले लगी रोक हटेगी

MPPSC Students Protest

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने पिछले 5 वर्षों से उत्तर पुस्तिकाओं को दिखाने पर लगाई गई रोक को हटाने का निर्णय लिया है। विगत वर्षों और 2023 में अभ्यर्थियों द्वारा किए गए विशाल आंदोलनों में उत्तर पुस्तिकाएं दिखाए जाने की मांग सर्वप्रमुख रही थी। आयोग अब राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2019 से लेकर 2024 तक की उत्तर पुस्तिकाएं अभ्यर्थियों को दिखाएगा।

यह नई व्यवस्था इसी वर्ष नवंबर माह से लागू कर दी जाएगी। छात्रों की लंबे समय से चल रही इस मांग को आखिरकार आयोग ने स्वीकार कर लिया है। नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) के छात्र नेता रणजीत किसानवंशी ने कहा कि यह निर्णय छात्रों की जीत है। छात्र लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। छात्र आंदोलनों में भी यह मुद्दा हमने हमेशा प्रमुखता से उठाया है।

अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण विवाद न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण परीक्षाओं के परिणाम दो अलग भागों में घोषित किए जा रहे हैं। इसी कारण फिलहाल मुख्य भाग में शामिल 87 प्रतिशत अभ्यर्थियों को ही अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देखने का अवसर प्राप्त होगा। वहीं दूसरी ओर प्रोविजनल भाग में रोके गए शेष 13 प्रतिशत अभ्यर्थियों को अपनी कॉपियां देखने के लिए न्यायालय के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा करनी होगी। इसके अतिरिक्त आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगस्त में प्रस्तावित राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 और सितंबर में आयोजित होने वाली मुख्य परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाएं भी अभ्यर्थियों को दिखाई जाएंगी।

उत्तर पुस्तिकाओं को देखने की संपूर्ण प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से संपन्न कराया जाएगा। वर्ष 2019 से 2024 तक की मुख्य परीक्षाओं में सम्मिलित अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे। इस प्रक्रिया का शुभारंभ नवंबर माह में 2019 के अभ्यर्थियों के साथ किया जाएगा, जिसके पश्चात प्रति माह एक या दो मुख्य परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं दिखाई जाएंगी।

आवेदक अभ्यर्थियों को आयोग के इंदौर स्थित रेसीडेंसी मुख्यालय पर आमंत्रित किया जाएगा। वहां मुख्य हॉल में स्थापित किए गए कंप्यूटर सिस्टम्स के माध्यम से प्रत्येक घंटे 25 से 30 अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। अभ्यर्थी अपने द्वारा किए गए आवेदन के अनुसार एक से लेकर सभी 6 प्रश्न पत्रों की कॉपियां देख सकेंगे। प्रत्येक अभ्यर्थी को स्क्रीन पर उत्तर पुस्तिका का अवलोकन करने के लिए दो से चार मिनट का समय प्रदान किया जाएगा।

“छात्रों पर पैलेट गन किसके आदेश से चली?” लोकसभा में गौरव गोगोई के तीखे सवाल, NTA और सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

gaurav gogoi on paper leak in loksabha

पेपर लीक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि छात्रों को बेरहमी से पीटा गया, उन पर पैलेट गन से गोलियां चलाई गई। उन्होंने कहा कि छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया? ALSO READ: कौन हैं जंतर-मंतर के वायरल हो रहे मोहम्मद इरफान? क्यों राहुल गांधी पहुंचे उनके घर?

 

गोगोई ने कहा कि छात्रों की पीड़ा को समझना होगा। आज छात्र सरकार से सवाल नहीं पूछ सकते हैं। सजा बढ़ाने से शिक्षा में सुधार नहीं होगा। सरकार के रवैये से हताश लोक आत्महत्या कर रहे हैं।

 

उन्होंने इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन के लिए देशभर से छात्र आए। इन छात्रों ने अपने भविष्‍य के लिए लाठियां खाई। पुलिस ने उन्हें क्रूरता से पीटा। उन पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। एसीपी ने छात्रा को थप्पड़ मारा। लड़कियों के कपड़े फाड़े गए।
 

 

45 में से 44 आरोपियों को बेल कैसे मिली?

कांग्रेस सांसद ने कहा कि ये सरकार शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि संशोधन बिल केवल सरकार का दिखावा है। पेपर लीक के आरोपियों को बेल मिली। 2024 में भी सरकार बिल लाई थी। उस समय बड़ी बड़ी बाते कही गई। 2024 का कानून कड़ा था तो 45 में से 44 आरोपियों को बेल कैसे मिली?

 

एनटीए से बर्खास्त 47 लोग कौन हैं?

गोगोई ने कहा कि एनटीए से बर्खास्त 47 लोग कौन हैं? उन्होंने सरकार से बर्खास्त अधिकारियों के नाम बताने को कहा। उन्होंने कहा कि एनटीए में तो सिर्फ 37 लोग ही रह सकते हैं। एनटीए के डीजी को बदला लेकिन चेयरमैन के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि एनटीए के बड़े अधिकारी RSS से जुड़े हैं।

धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर जताई नाराजगी

उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते 21 बच्चों ने अपनी जान दे दी। जब वे इस्तीफा देने के बाद संसद परिसर में आए तो BJP सांसदों ने उनका ऐसे स्वागत किया, जैसे वो पाकिस्तान से जंग लड़कर आए हों।  

जेई-एईएस को लेकर अलर्ट हुई योगी सरकार, प्रभावित हर गांव तक पहुंचेगा स्वच्छ पेयजल

 

तीन शिफ्ट में काम पूरा कर सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के निर्देश, जलजनित बीमारों पर लगेगी रोक

जल अर्पण व जल चौपाल से बढ़ेगी जनभागीदारी, गुणवत्ता और समयबद्धता पर सरकार सख्त

पाइपलाइन बिछाने के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की तत्काल मरम्मत की जाए: मंत्री स्वतंत्र देव सिंह

 

*लखनऊ, 27 जुलाई।* उत्तर प्रदेश में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के संकल्प को और गति देते हुए योगी सरकार ने जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) प्रभावित गांवों में जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड में कार्य करने का खाका तैयार किया है। इसी क्रम में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन प्रभावित गांवों में अभी तक नल से जलापूर्ति शुरू नहीं हो पाई है, वहां 24 घंटे में तीन शिफ्टों में काम पूरा कर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हर प्रभावित गांव तक सुरक्षित पेयजल पहुंचे, जिससे जलजनित बीमारियों की रोकथाम के साथ ग्रामीणों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।

 

*गुणवत्ता और समयबद्धता पर सरकार का फोकस*

राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन कार्यालय में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक के दौरान जलशक्ति मंत्री ने सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जलापूर्ति से जुड़ी शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

 

*क्षतिग्रस्त सड़कों की तुरंत मरम्मत कराने के निर्देश*

जलशक्ति मंत्री ने अधिकारियों को नियमित रूप से गांवों का भ्रमण कर पेयजल योजनाओं की प्रगति की निगरानी करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि सिंगल विलेज योजनाओं के सभी लंबित कार्य तय समय में पूरे किए जाएं। पाइपलाइन बिछाने के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की तुरंत मरम्मत कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी, सड़क मरम्मत या अन्य कार्यों में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

*जल जीवन मिशन के प्रभाव का होगा आकलन*

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे गांवों में जाकर जल जीवन मिशन के प्रभाव का आकलन करें। विशेष रूप से यह देखा जाए कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से जलजनित बीमारियों में कितनी कमी आई है और ग्रामीणों के जीवन में क्या सकारात्मक बदलाव हुए हैं। साथ ही लोगों को सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।

 

*'जल अर्पण' कार्यक्रमों को मिलेगा विस्तार*

जलशक्ति मंत्री ने कहा कि जिन गांवों में नल से जलापूर्ति शुरू हो चुकी है, वहां ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को इस अभियान से जोड़ा जाए। उन्होंने प्रत्येक जिले में नियमित जल चौपाल आयोजित करने व जनप्रतिनिधियों को ‘जल सारथी’ ऐप और प्रगति पोर्टल के माध्यम से योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि जनभागीदारी और पारदर्शिता दोनों को और मजबूत किया जा सके।

इंदौर में बीच सड़क पर बॉयफ्रेंड का आतंक, लड़की को बाल पकड़कर पर पीटा, जमीन पर गिराया, पेट में लात मारी

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां बीच सड़क पर एक सिरफिरे आशिक ने सारी हदें पार कर दीं। भरी सड़क पर तमाशबीन बने लोगों के बीच एक युवती पर उसके ही बॉयफ्रेंड ने जमकर पीटा। बाल खींचे और पेट में लात मारी।

दरअसल, इंदौर के राऊ में रहने वाली एक युवती ने अपने बॉयफ्रेंड के खिलाफ छेड़छाड़ और मारपीट का मामला दर्ज कराया है। युवती के मुताबिक, आरोपी उस पर दोबारा बात करने का दबाव बना रहा था। पुलिस के मुताबिक पीड़िता एक निजी कंपनी में नौकरी करती है। उसने बताया कि वह शुभम चौहान को पिछले चार साल से जानती है। दोनों के बीच अच्छी दोस्ती थी, लेकिन शुभम की कुछ हरकतों के चलते उसने करीब एक माह पहले उससे बात करना बंद कर दिया।

सोमवार को वह अपनी कंपनी जा रही थी। तभी रास्ते में शुभम बाइक लेकर पहुंचा और उसे रोककर पूछा कि वह उससे बात क्यों नहीं करती। जब युवती आगे बढ़ने लगी तो आरोपी ने उसका हाथ पकड़ लिया और अपशब्द कहे। इसके बाद उसके बाल पकड़कर उसे जमीन पर गिरा दिया। आरोपी ने उसके पेट में जोर से लात मारी और जबरन बाइक पर बैठाने की कोशिश करने लगा।

इस दौरान आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए, जिसके बाद शुभम युवती को धमकी देकर वहां से भाग गया। बाद में पीड़िता ने अपनी मां और भाई को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

योगी सरकार में अब तक अनुसूचित जाति/जनजाति के 1.39 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को मिली आर्थिक सहायत

 

  • बीते नौ साल में पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना से छात्र-छात्राओं को किया गया सशक्त
  • योगी सरकार का लगातार प्रयास, आर्थिक अभाव किसी भी मेधावी विद्यार्थी की शिक्षा में न बने बाधा

 

लखनऊ, 27 जुलाई। शिक्षा को सामाजिक सशक्तीकरण का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए योगी सरकार ने अनुसूचित जाति/जनजाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति व्यवस्था को लगातार मजबूत किया है। पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से बीते नौ वर्षों में 1.39 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव किसी भी मेधावी विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने और वह विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा तक अपनी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रख सके।

 

तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता, समय पर मिली सहायता

 

योगी सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में कई सुधार किए हैं। ओटीआर, बायोमेट्रिक सत्यापन, एस-कोड वैलिडेशन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी व्यवस्थाओं से छात्रवृत्ति सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और पात्र विद्यार्थियों तक समय पर सहायता पहुंचाना आसान हुआ है।

 

हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक पहुंचा लाभ

 

पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के तहत वर्ष 2017-18 में 4,16,860 अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को लाभ मिला। इसके बाद 2018-19 में 5,24,426, 2019-20 में 5,41,386, 2020-21 में 3,62,511, 2021-22 में 3,20,390, 2022-23 में 3,86,139, 2023-24 में 3,74,963, 2024-25 में 4,11,797 तथा 2025-26 में 4,39,647 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई। वहीं दशमोत्तर स्तर पर 2017-18 में 12,80,515, 2018-19 में 11,43,804, 2019-20 में 13,60,376, 2020-21 में 8,02,648, 2021-22 में 12,29,471, 2022-23 में 9,42,939, 2023-24 में 10,35,766, 2024-25 में 11,76,281 तथा 2025-26 में 11,54,567 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है।

 

 

शिक्षा के जरिए सामाजिक बदलाव की पहल

 

योगी सरकार का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का सबसे मजबूत आधार है। छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है, जिससे वे उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के बेहतर अवसरों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। समाज कल्याण विभाग उप निदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि, बीते नौ वर्षों में छात्रवृत्ति व्यवस्था में हुए सुधारों ने विद्यार्थियों के बीच शिक्षा के प्रति विश्वास को मजबूत किया है। सरकार की कोशिश है कि पात्र विद्यार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता मिले और वे बिना किसी आर्थिक बाधा के अपने सपनों को साकार कर सकें।

आखिर कौन है यूपी में नकल संस्कृति का जनक?

-बृज लाल
UP paper leak history: बीते तीन दशक में उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल व नियुक्त प्रक्रियाओं में धांधली, भाई-भतीजावाद व कमीशनखोरी की घटनाओं पर नजर डालते हैं तो एक साफ पैटर्न नजर आता है कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में नकल माफिया व भर्ती सिंडिकेट ने जमकर अपने पैर पसारे।

 

आज के दौर में जबकि पेपर लीक जैसी घटनाओं के संबंध में निर्णायक प्रक्रिया तय की जा रही हो तो उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के नौजवानों के मन में यह प्रश्न भी है कि आखिर नकल संस्कृति की जड़ें कहां से शुरू हुईं और किस शासनकाल में पल्लवित पुष्पित होते हुए इतनी बड़ी बेल बन गईं। उत्तर प्रदेश की बात इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि इस राज्य के अधिसंख्य युवा परीक्षाओं में अपना भविष्य देखते हैं और जब उनकी मेधा को उचित मंच नहीं मिल पाता तो वह हताशा में चले जाते हैं। प्रदेश के युवाओं का भविष्य परीक्षा कक्ष का माहौल और भर्ती बोर्ड की नीयत से तय होता है। बीते तीन दशकों में इस राज्य ने इस मोर्चे पर दो बिल्कुल विपरीत स्थितियां देखी हैं।

 

एक समय समाजवादी पार्टी की सरकारों का दौर भी देखा जब नकल को लगभग संस्थागत छत्रछाया मिली हुई थी और भर्तियों में खुलेआम पूरी बेशर्मी से भाई-भतीजावाद चलता था। दूसरा दौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल का है, जब नकल माफिया की जड़ों पर देश का सबसे कठोर कानून बनाकर प्रहार किया गया। इन दोनों दौर की तुलनात्मक बात इसलिए कि यह उन लाखों युवाओं की सांसों से जुड़ा सवाल है, जिनकी आने वाली ज़िंदगी एक परीक्षा के परिणाम पर टिकी होती है।

 

किसी भी सरकार का चरित्र उसके फैसलों से तय होता है। बात शुरू करने से पहले थोड़ा पीछे जाते हैं। 1992 से शुरू करते हैं जब उत्तर प्रदेश में नकल अध्यादेश लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य परीक्षाओं में नकल पर पूरी तरह अंकुश लगाना था। लेकिन जैसे ही मुलायम सिंह यादव की सरकार सत्ता में आई, इस कानून को व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी बना दिया गया। इसके साथ ही स्व-केंद्र यानी सेल्फ-सेंटर की नीति को बनाए रखा गया, जिसके तहत विद्यार्थी अपने ही स्कूल में परीक्षा दे सकते थे। यह नीति देखने में एक प्रशासनिक फैसला भर लगती है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम बेहद घातक साबित हुए। इस नीति की आड़ में राज्यभर में एक समानांतर तंत्र खड़ा हो गया, जिसे बाद में लोग नकल माफिया के नाम से जानने लगे। 

 

इस ढील का सीधा असर परीक्षा परिणामों पर भी दिखा। वर्ष 2004 में इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम अचानक बेतहाशा ऊंचाई तक पहुंच गया, जो किसी भी सामान्य शैक्षणिक प्रगति के बजाय व्यवस्थागत ढील का ही परिणाम प्रतीत होता था। इसका सबसे दुखद पहलू यह रहा कि जो छात्र वर्षों मेहनत करके योग्यता के आधार पर आगे बढ़ना चाहते थे, वे इस भीड़ में कहीं पीछे छूट गए, जबकि माफिया तंत्र की जेबें भरती रहीं। शिक्षा की नींव में यह खोखलापन आने वाले वर्षों तक राज्य को नुकसान पहुंचाता रहा।

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समाजवादी पार्टी की ही सत्ता जब अखिलेश यादव के नेतृत्व में बनी तो उम्मीद थी कि भर्तियों को लेकर कुछ सार्थक फैसले लिए जाएंगे लेकिन 2012 से 2017 के बीच, स्थिति में सुधार आने के बजाय समस्या और गहरी होती चली गई। इस दौर में प्रतियोगी परीक्षाओं की गरिमा को बार-बार आघात पहुंचा। राज्य का शायद ही कोई बड़ा भर्ती बोर्ड ऐसा बचा हो, जिस पर धांधली या पेपर लीक के आरोप न लगे हों। मेडिकल प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र ट्रेजरी से लीक होने की घटना ने लाखों अभ्यर्थियों के सपनों को झटका दिया और अंततः परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

 

इसी तरह प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा परीक्षा का पर्चा भी सोशल मीडिया के माध्यम से लीक हो गया, जिसके बाद भारी विरोध और हंगामे के बीच परीक्षा को रद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। ग्राम विकास अधिकारी पद के लिए हो रही भर्ती प्रक्रिया में भी स्टिंग ऑपरेशन के माध्यम से रिश्वतखोरी का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें सत्ताधारी दल से जुड़े प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता के दावे सामने आए। नकल और पेपर लीक उस दौर की एक व्यवस्थागत विशेषता के रूप में उभरकर सामने आए। 

 

यहां एक और गौरतलब बात यह है कि प्रदेश में जहां तमाम सरकारी विभागों की भर्तियां उप्र लोक सेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा आयोग के माध्यम से की जाती थीं, अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आजम खान अपने सभी विभागों में सारी भर्तियां खुद करते थे। उनके विभागों में तब धर्म विशेष के लोगों को जमकर नौकरियां बांटी गईं। भर्तियों में भाई-भतीजावाद सपा दौर की विशेष पहचान बना।

उप्र लोक सेवा आयोग जैसी संस्था, जिसकी निष्पक्षता किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है, उस पर भी गंभीर सवाल उठे। एक विशेष जाति-वर्ग के अभ्यर्थियों के चयन में असंगत बहुलता को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका तक दायर की गई, जिसमें चयन प्रक्रिया में भारी असंतुलन के आंकड़े प्रस्तुत किए गए।

 

ऐसे आरोपों ने मेधावी और अन्य वर्गों से आने वाले अभ्यर्थियों में गहरा आक्रोश पैदा किया, क्योंकि उन्हें लगने लगा कि योग्यता से ज़्यादा जाति और राजनीतिक निकटता ही चयन का आधार बन गई है। इसी कड़ी में पुलिस भर्ती को लेकर हुआ विवाद भी कम गंभीर नहीं था। हज़ारों सिपाहियों और पीएसी जवानों की भर्ती में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े, राजनीतिक सिफारिशों और रिश्वतखोरी के प्रमाण मिलने के बाद सरकार को एक जांच समिति गठित करनी पड़ी, जिसकी रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। यह मामला वर्षों तक अदालतों में उलझा रहा, जो दिखाता है कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी कितनी गहराई तक पैठ बना चुकी थी।

 

2017 के बाद जब हम योगी आदित्यनाथ की सरकार के दृष्टिकोण की ओर देखते हैं, तो एक स्पष्ट नीतिगत बदलाव नज़र आता है। योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद परीक्षा प्रणाली में व्याप्त अराजकता को एक गंभीर प्रशासनिक चुनौती के रूप में स्वीकार किया और इसके समाधान के लिए कानूनी हस्तक्षेप का रास्ता चुना। इसी सोच का नतीजा रहा उत्तर प्रदेश लोक सेवा (प्रतियोगी परीक्षा) अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम, जिसे आमतौर पर नकल विरोधी कानून के नाम से जाना जाता है।

यह कानून देश के सबसे कठोर प्रावधानों में गिना जाता है, जिसमें पेपर लीक कराने वाले या नकल में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के लिए आजीवन कारावास तक की सज़ा और एक करोड़ रुपए जुर्माने तक का प्रावधान किया गया। इसके साथ ही दोषी पाई जाने वाली परीक्षा संचालन एजेंसियों की संपत्ति कुर्क करने और उनसे परीक्षा की पूरी लागत वसूलने जैसे कड़े कदम भी इस कानून का हिस्सा बनाए गए।

 

इस कानूनी सख्ती के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी कई ठोस बदलाव किए गए। परीक्षा केंद्रों के चयन में संवेदनशीलता को आधार बनाया गया, सीसीटीवी निगरानी को अनिवार्य किया गया, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए बहु-स्तरीय व्यवस्था लागू की गई और परीक्षा के दिन प्रशासनिक अमले की जवाबदेही तय की गई। नतीजा यह हुआ कि जिस राज्य में पेपर लीक होना लगभग हर बड़ी परीक्षा की नियति मानी जाने लगी थी, वहां अपेक्षाकृत सहज और सुव्यवस्थित ढंग से बड़ी प्रतियोगी परीक्षाएं संपन्न होने लगीं। 

 

दोनों दौर की तुलना में यह स्पष्ट है कि सपा के दौर में परीक्षा प्रणाली को ढीला छोड़कर नकल को लगभग परोक्ष संरक्षण दिया गया और भर्तियों में जातिगत तथा राजनीतिक निकटता को प्रभावी माना गया, जबकि योगी सरकार में कानूनी सख्ती के माध्यम से इस प्रवृत्ति पर लगाम कसने का प्रयास किया गया। जब परीक्षा व भर्ती प्रणाली निष्पक्ष होती है, तभी वास्तविक अर्थों में मेधा को उसका हक मिलता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए आने वाले समय में भी यह पारदर्शिता बनी रहना जरूरी है। (लेखक राज्यसभा सांसद हैं एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक हैं)

इंदौर की बेटी सारा ने Oxford University में जीता इलेक्‍शन, सचिव बनी, लंबे समय बाद किसी भारतीय छात्रा को सफलता

Sara lunawat

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रही इंदौर की छात्रा सारा लुणावत ने विदेश में इंदौर का सम्‍मान बढ़ाया है। वे ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसायटी का चुनाव जीतकर सचिव बनी हैं। सारा को 900 में से 523 वोट मिले। वे साल भर पहले ही पढ़ने के लिए वहां गई थीं।

उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रही इंदौर की बेटी ने विदेश में अपना परचम लहराया है। सारा लुणावत ने ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसायटी के चुनाव में जीत हासिल की है। वह इंदौर की पहली छात्रा हैं, जिन्होंने चुनाव जीतकर सचिव पद प्राप्त किया है।

लंबे समय बाद किसी भारतीय छात्रा ने यह सफलता हासिल की है। सारा को चुनाव में 900 में से 523 वोट मिले और वह विजयी रहीं। इस सफलता पर खुशी जताते हुए सारा ने कहा कि जिन उम्मीदों के साथ मतदाताओं ने उन्हें चुना है, वे उन उम्मीदों पर खरी उतरने और विद्यार्थियों के हितों के लिए काम करने की पूरी कोशिश करेंगी।

सारा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में विधि (कानून) विषय की छात्रा हैं। वह एक वर्ष पहले इंदौर से पढ़ाई के लिए वहां गई थीं। ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसायटी के चुनाव जून में हुए थे। सारा ने सचिव पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। उन्हें विश्वास था कि वे चुनाव जीतेंगी। 26 जुलाई को जब चुनाव परिणाम घोषित हुए, तो सारा सचिव पद का चुनाव जीत गईं।

सारा ने बताया कि ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसायटी में पुरुष पदाधिकारियों की संख्या अधिक है। ऐसे में एक छात्रा के रूप में चुनाव लड़ना और जीत हासिल करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया और चुनाव लड़ा। सारा का कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वे भारत लौटेंगी और विदेश नीति के क्षेत्र में कार्य करेंगी।