नेपाल: बालेन शाह के खिलाफ जेन-जी में क्यों है उबाल

protest against balen shah in nepal

मनीष कुमार

नेपाली राजधानी काठमांडू की सड़कों पर फिर से कुछ वैसा ही उबाल दिखा, जो बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के पहले दिखा था। 'जेन-जी' वोटरों के सहारे हाल ही में बनी सरकार को पहली बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। ALSO READ: बर्लिन हमले का संदिग्ध पुलिस मुठभेड़ में मारा गया

 

जिस नेपाली युवा बालेन शाह को अंतरराष्ट्रीय 'टाइम मैगजीन' ने 2023 के शीर्ष सौ उभरते नेताओं में शामिल किया था, इतनी जल्दी कुछ लोग उनकी तुलना जर्मनी के तानाशाह हिटलर से कर रहे हैं। नेपाल में इसी 10 जुलाई को आत्मदाह करने वाले 25 वर्षीय युवक गणेश नेपाली का चेहरा बालेन शाह सरकार के खिलाफ विरोध व असंतोष का प्रतीक बन गया है।

 

शाह की सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने, विवादित अध्यादेश लाने और कूटनीतिक मोर्चों पर अनुभवहीनता से देश की किरकिरी कराने जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं। वहीं, नेपाल के गृहमंत्री ने सुधन गुरुंग ने गणेश की मौत को लेकर विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।

 

सिस्टम से नाराज होकर दी जान

ताजा विरोध की चिंगारी 25 वर्षीय गणेश नेपाली नामक एक युवक द्वारा आत्मदाह करने के बाद भड़क उठी। एक रिपोर्ट के अनुसार, गणेश एक राइड शेयरिंग ऐप के लिए मोटरसाइकिल चला कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसकी बाइक ही रोजी-रोटी का एकमात्र साधन थी। बीते 10 जुलाई को काठमांडू में पासपोर्ट ऑफिस के बाहर कथित तौर पर रास्ता अवरुद्ध करने के आरोप में पुलिस ने उसकी मोटरबाइक के पहियों पर व्हील लॉक लगा दिया। गणेश ने इसका विरोध किया और इसे लेकर पुलिस से उसकी तीखी झड़प भी हुई। लेकिन, कोई रास्ता नहीं निकलता देख पुलिस की कार्रवाई से हताश होकर गणेश ने अपनी ही बाइक से पेट्रोल निकाल खुद पर छिड़क कर आग लगा ली। 60 प्रतिशत तक जल चुके गणेश की एक दिन बाद अस्पताल में मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के विरोध में रविवार, 12 जुलाई को लोग काठमांडू की सड़कों पर उतर गए और तोड़फोड़ की। वहीं, इस घटना के बाद पहले से चल रहे विरोध प्रदर्शनों को और हवा मिल गई।

 

हालात बेकाबू होता देख सरकार ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश शुरू की। सरकार ने गणेश की मौत मामले की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में जांच समिति का गठन करने, उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी, बेटी की शिक्षा का खर्च उठाने तथा दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की घोषणा की। गृहमंत्री गुरुंग ने स्वयं गणेश के घर जाकर उनकी गर्भवती पत्नी एकमाया को नागरिकता प्रमाण पत्र सौंपा। ताकि, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। सुनसरी निवासी छात्रा रोमिला कहती  हैं, “राइडर गणेश की मौत किसी की व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि पुलिस-प्रशासन की व्यवस्था व संवेदनशीलता तथा विस्थापित लोगों की समस्याओं का प्रतीक बन गई है।”  ALSO READ: जंगल की आग के सामने लाचार होते फ्रांस और स्पेन

 

आखिर क्यों नाराज हो रहे युवा

गणेश नेपाली की खुदकुशी ही विरोध की एकमात्र वजह नहीं है। दरअसल, सरकार के खिलाफ विरोध की आग कई और मुद्दों को लेकर पहले से सुलग रही थी। बालेन सरकार के कई फैसलों जैसे, ट्रेड यूनियनों और छात्र संघ को भंग करना, संसद को दरकिनार कर अध्यादेश लाना, अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर लोगों को बेदखल करना, पुलिस की बर्बरता, सरकार का विरोध करने वालों की गिरफ्तारी और संसद में सरकार के विरोधाभासी बयान से लोग पहले से ही नाराज चल रहे थे।

 

जनकपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता धीरेन पाठक कहते हैं, “दरअसल युवाओं को रोजी-रोजगार चाहिए, किसानों को समय पर खाद-पानी। घोषणाओं और दावों से कुछ नहीं होता। लोकप्रिय होना अलग बात है और काम करना अलग। अगर सरकार के फैसलों पर सवाल उठने लगे तो कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है।”

 

ठेके पर नियुक्त लगभग 50 हजार कर्मचारी भी हड़ताल कर रहे हैं। शाह सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया से मुंह चुराने का आरोप तब लगा, जब 30 अप्रैल से शुरू होने वाला संसद का सत्र टाल कर 11 मई कर दिया गया और इस दौरान आठ अध्यादेश लागू कर दिए गए। संवैधानिक परिषद से जुड़े अध्यादेशों तथा प्रधानमंत्री को वीटो जैसी शक्ति देने की कोशिश पर भी पुरजोर विवाद हुआ।

 

न्यायिक नियुक्तियों में वरिष्ठता के क्रम को नजरअंदाज किए जाने की भी खूब आलोचना हुई। वहीं, सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए करीब 1,600 लोगों की नौकरियां खत्म कर दीं। चीन, भारत और अमेरिका के साथ विदेश नीति को लेकर भी विपक्ष बालेन सरकार पर अनुभवहीनता के आरोप लगा रहा है। विपक्ष यह भी आरोप लगा रहा कि बोर्डिंग स्कूलों और नर्सिंग होम के प्रति सरकार सख्त दृष्टिकोण भी बुरा असर डालेगा। क्योंकि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं केवल सरकारी सहायता के भरोसे नहीं चल सकती, इसके लिए निजी क्षेत्र का सहयोग जरूरी है। ALSO READ: स्विस बैंक की पोल पट्टी खोलने वाले जर्मन वकील पर मुकदमा

 

बेदखली से भड़की नाराजगी

एक रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में सरकार ने काठमांडू सहित देश के विभिन्न हिस्सों में अतिक्रमण के नाम पर भूमिहीन लोगों की झुग्गियों तथा अन्य अस्थायी निर्माण को हटाकर करीब 2,600 परिवारों को बेदखल कर दिया था। इनमें से करीब तीन सौ से अधिक परिवार काठमांडू के विभिन्न हिस्सों में बनाए गए अस्थायी आवास केंद्रों में रहने लगे, लेकिन सरकार ने दो जुलाई को इन आवास केंद्रों को भी छह जुलाई तक खाली करने का आदेश जारी कर दिया। इस बीच काठमांडू के कीर्तिपुर स्थित एक आवास केंद्र में बाढ़ का पानी भर गया। यहां रह रहे करीब 150 झुग्गीवासी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

 

मधेश प्रदेश के रौतहट निवासी सोरंग थापा कहते हैं, “नदी किनारे बसी इन अवैध बस्तियों को बालेंद्र उसी समय से हटाना चाहते थे, जब वे काठमांडू के मेयर हुआ करते थे। इन्हें पुलिस व सेना का सहारा लेकर हटा तो दिया गया, लेकिन इनके पुनर्वास का कोई उपाय नहीं किया गया। इन्होंने अपनी जगह तो खो ही दी, कमाई का जरिया भी चला गया।”

 

राजनीतिक समीक्षक एके चौधरी कहते हैं, “युवाओं की बड़ी जीत के प्रतीक बने बालेन को अपना काला चश्मा उतार कर हकीकत का सामना करना चाहिए। जनता को दिए गए आश्वासनों को हकीकत में बदलने की प्रतिबद्धता उन्हें दिखानी ही होगी।”

Top News : पेपर लीक संशोधन बिल पर लोकसभा में चर्चा, ट्रंप की ईरान को चेतावनी

Top News 28 July

Top News 28 July : संसद में आज पेपर लीक संशोधन बिल पर चर्चा होगी। दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर प्रोटेस्ट पर सभी FIR वापस लेने से इनकार किया। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को चेतावनी। गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने में मेरा कोई रोल नहीं। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को दूसरा गोल्ड मेडल मिला।

 

संसद में आज पेपर लीक संशोधन बिल पर चर्चा

संसद में गतिरोध समाप्त होने के बाद लोकसभा में आज परीक्षा में सुधारों से जुड़े विधेयक पर चर्चा होगी। चर्चा के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया गया है। स्पीकर ओम बिरला ने जरूरत पड़ने पर इससे अधिक समय देने की बात कही है। विधेयक पर चर्चा के दौरान बांसुरी स्वराज, सायोनी घोष जैसे युवा चेहरे सरकार की ओर से पक्ष रखेंगे। वहीं, विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सरकार पर हमले की जिम्मेदारी संभालेंगे। सपा की ओर से अखिलेश यादव, तृणमूल से महुआ मोइत्रा चर्चा में हिस्सा लेंगे। 

 

जंतर-मंतर आंदोलन में कार्रवाई जारी रहेगी

जंतर-मंतर पर चले 36 दिन के आंदोलन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दर्ज सभी एफआईआर वापस नहीं होंगी। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल वे मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो पुलिस या राज्य की ओर से दर्ज किए गए हैं। निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज एफआईआर संबंधी मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

 

ट्रंप की ईरान को चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हालिया सैन्य हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका से संपर्क कर हमले रोकने और बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोनों देशों के बीच नया युद्धविराम समझौता नहीं हो पाया तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।

 

पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने में मेरा कोई रोल नहीं : गडकरी

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने में उनका कोई रोल नहीं है। ये दोनों प्रोजेक्ट पूरी तरह से केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने डिजिटल कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति दे दी है। अब गडकरी मेटा प्लेटफॉर्म्स, एक्स और गूगल कंपनी के खिलाफ सिविल सुट दायर कर सकते हैं।

 

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को 2 गोल्ड समेत 10 मेडल

ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत अब तक 2 गोल्ड समेत 10 मेडल जीतकर तालिका में 8वें स्थान पर है। शर्मिला धनकर ने महिलाओं के शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में 9.81 मीटर गोला फेंका और भारत के लिए दूसरा गोल्ड जीता। भारोत्तोलक वल्लूरी अजय बाबू ने पुरुषों के 79 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता। सर्वेश कुशारे राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की ऊंची कूद स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने।  

बुरा मत मानिए, आईना हमेशा सुंदर नहीं होता…

CJP Protest

NEET paper leak protest: आज जिस पीढ़ी को “जेन-जी” कहकर या तो खारिज किया जा रहा है, या फिर उसकी भाषा, उसके मीम्स और उसके जार्गन पर नैतिकता का पहरा बैठाया जा रहा है, शायद उसे समझने की सबसे कम कोशिश की गई है।

 

उसकी भाषा में तल्खी है। गुस्सा है। व्यंग्य है। खिलंदड़पन है। लेकिन उससे भी ज़्यादा उसमें सवाल पूछने की हिम्मत है। यही बात असहज करती है। 

 

कई लोग जंतर-मंतर पर जुटे छात्रों के लोकतांत्रिक प्रतिरोध को केवल नीट परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ उपजा क्षणिक आक्रोश मान रहे हैं। यह विश्लेषण अधूरा है।

 

हर पीढ़ी का अपना एक निर्णायक क्षण होता है। 1974 में बिहार छात्र आंदोलन, 1990 में मंडल आंदोलन, 2011 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और 2012 में निर्भया आंदोलन—इन सबने युवाओं की राजनीतिक चेतना को नए रूप दिए। आज की पीढ़ी के लिए शिक्षा, रोजगार, परीक्षा प्रणाली, डिजिटल निगरानी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थाओं की विश्वसनीयता एक-दूसरे से अलग मुद्दे नहीं हैं। वे इन्हें एक ही लोकतांत्रिक प्रश्न के अलग-अलग अध्याय मानते हैं।

इस पीढ़ी का सबसे बड़ा अपराध शायद यह है कि इसने आंख मूंदकर भरोसा करना छोड़ दिया है।

 

राजनीति में भक्ति या व्यक्तिपूजा अंततः पतन और तानाशाही का मार्ग बन सकती है।”

— डॉ. भीमराव अंबेडकर, संविधान सभा का अंतिम भाषण (25 नवम्बर 1949)।

 

यह किसी राजनीतिक दल, किसी वैचारिक खेमे या किसी स्थापित चेहरे को अंतिम सत्य नहीं मानती। यह हर दावे का स्क्रीनशॉट मांगती है, हर बयान का फैक्ट-चेक करती है और हर सत्ता से जवाब चाहती है। उसका निष्कर्ष सही होगा या गलत, इसका फैसला इतिहास करेगा। लेकिन एक बात तय है—उसने अपना दिमाग किराए पर नहीं दिया है। यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

 

जेन-जी की भाषा पर सबसे अधिक आपत्ति की जाती है। कहा जाता है कि यह असभ्य है, आक्रामक है और मर्यादाहीन है। लेकिन यह बहस तब अधूरी हो जाती है जब भाषा की मर्यादा केवल नागरिकों से अपेक्षित हो और सत्ता से नहीं।

आईना अगर चुभ रहा है, तो शायद चेहरा देखने का समय आ गया है

जिस देश में संसद के भीतर दिए गए भाषणों के हिस्सों को असंसदीय मानकर कार्यवाही से हटाना पड़ता हो; जिस देश में अनेक जनप्रतिनिधि और मुख्यमंत्री सार्वजनिक मंचों या कैमरे पर अपशब्द बोलते रिकॉर्ड हो चुके हों; जिस देश में राजनीतिक संवाद का स्तर वर्षों से लगातार गिरा हो—वहां भाषायी शुचिता का नैतिक बोझ केवल युवाओं के कंधों पर डाल देना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।

मर्यादा यदि मूल्य है, तो वह सबके लिए समान होनी चाहिए

लोकतंत्र में भाषा केवल शिष्टाचार का विषय नहीं होती; वह सत्ता और समाज के रिश्ते का भी दर्पण होती है। जब संवाद सम्मानजनक होगा, तो प्रतिरोध भी अधिक सभ्य होगा। लेकिन यदि सार्वजनिक विमर्श लगातार कटु, व्यक्तिगत और अपमानजनक होता जाएगा, तो उसकी प्रतिध्वनि समाज में भी सुनाई देगी। युवा उसी समाज की उपज हैं, किसी दूसरी पृथ्वी के निवासी नहीं।

 

यह भी समझना होगा कि जेन-जी की व्यंग्यात्मक भाषा केवल मनोरंजन नहीं है। मीम, तंज, वायरल वीडियो और नए जार्गन आज के दौर की राजनीतिक अभिव्यक्ति के सबसे प्रभावशाली औज़ार बन चुके हैं। 

 

जिस तरह 2014 के बाद भारतीय राजनीति में टेलीविज़न, अखबारों के फ्रंट पेज विज्ञापनों, सोशल मीडिया अभियानों और विशेष रूप से व्हाट्सऐप नेटवर्क के ज़रिए राजनीतिक नैरेटिव गढ़े गए और जनमत को प्रभावित करने का अभूतपूर्व प्रयास हुआ, उसी डिजिटल पारिस्थितिकी को आज जेन-जी ने अपने प्रतिरोध की भाषा बना लिया है। पहले जो काम पोस्टर, पैम्फलेट और नुक्कड़ नाटक करते थे, वही काम आज 30 सेकंड का वीडियो, एक मीम या एक व्यंग्यात्मक वाक्य कर रहा है। माध्यम बदल गया है, लेकिन लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का अधिकार नहीं।

 

सवाल यह नहीं है कि हमें जेन-जी की हर बात पसंद है या नहीं। सवाल यह है कि क्या हम उसकी बात सुनने को तैयार हैं?

 

हर नई पीढ़ी अपने समय की भाषा लेकर आती है। पहले उसे उद्दंड कहा जाता है, फिर उसे खतरनाक बताया जाता है और अंततः वही भाषा समाज का हिस्सा बन जाती है। इतिहास इसका गवाह है। 

 

इसलिए, जेन-जी से असहमति रखिए। उसकी भाषा की आलोचना कीजिए। उसे बेहतर तर्क देना सिखाइए। लेकिन उसके सवालों से मत भागिए। 

 

क्योंकि लोकतंत्र की असली परीक्षा यह नहीं होती कि सत्ता कितनी शक्तिशाली है। असली परीक्षा यह होती है कि सवाल पूछने वाला युवा कितना निडर है—और जवाब देने वाली व्यवस्था कितनी ईमानदार।

CJP के प्रोटेस्ट में घुसे थे हत्या, लूट और रेप के आरोपी, 989 क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले शातिर, 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा दावा किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान मौजूद 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई है जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। जांच में सामने आया कि 989 लोगों का पुराना गंभीर और जघन्य आपराधिक इतिहास रहा है।  इनमें हत्या, लूट, दुष्कर्म, अपहरण, अवैध हथियार और मादक पदार्थों से जुड़े मामलों के आरोपी शामिल बताए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों की मदद से इन लोगों की पहचान की गई। पुलिस का आरोप है कि इनमें से कई लोग 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान हिंसा प्रभावित इलाकों में मौजूद थे।

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हिंसा प्रभावित इलाकों में मिली मौजूदगी

दिल्ली पुलिस के अनुसार, पहचाने गए अधिकांश लोग उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, चांद बाग और सीलमपुर के रहने वाले हैं। इसके अलावा दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जामिया नगर, शाहीन बाग और ओखला सहित मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों से भी लोगों की पहचान की गई है।

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CCTV फुटेज जारी, पुलिस ने लगाए गंभीर आरोप

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा का कथित सीसीटीवी फुटेज भी जारी किया है। पुलिस का दावा है कि फुटेज में प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड तोड़ते, सुरक्षाकर्मियों पर पथराव करते, पेपर स्प्रे का इस्तेमाल करते, वाहनों को पलटते और पुलिस की संपत्ति में तोड़फोड़ करते हुए देखा जा सकता है।

सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के लिए नोटिस

दिल्ली पुलिस ने हालिया CJP प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद सोशल मीडिया पर साझा किए गए कथित आपत्तिजनक और गैरकानूनी कंटेंट के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है। समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, पुलिस ने कई सोशल मीडिया अकाउंट्स को नोटिस जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कथित अपमानजनक या गैरकानूनी पोस्ट हटाने के निर्देश दिए हैं।

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया पर साझा किए गए पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियों की लगातार समीक्षा की जा रही है ताकि कानून के उल्लंघन और सार्वजनिक व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का आकलन किया जा सके।

 

480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के दायरे में

 

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि जांच के दौरान 480 से अधिक ऐसे सोशल मीडिया हैंडल की पहचान की गई है, जिनका संबंध कथित तौर पर पाकिस्तान से है। इन हैंडल्स पर प्रदर्शन से जुड़े फर्जी नैरेटिव, अफवाहें और डीपफेक वीडियो फैलाने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि ये वही अकाउंट्स हैं जो पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सक्रिय थे। जांच एजेंसियां इन हैंडल्स के आईपी एड्रेस की भी जांच कर रही हैं।

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पुलिस ने कहा कि विशेष टीमें उन सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान कर रही हैं, जिन्होंने फर्जी, डीपफेक, भ्रामक या कानून का उल्लंघन करने वाला कंटेंट पोस्ट किया है। ऐसे सभी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

योगी सरकार में अब तक अनुसूचित जाति/जनजाति के 1.39 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को मिली आर्थिक सहायता

 

 

  • बीते नौ साल में पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना से छात्र-छात्राओं को किया गया सशक्त 
  • योगी सरकार का लगातार प्रयास, आर्थिक अभाव किसी भी मेधावी विद्यार्थी की शिक्षा में न बने बाधा

 

लखनऊ, 27 जुलाई। शिक्षा को सामाजिक सशक्तीकरण का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए योगी सरकार ने अनुसूचित जाति/जनजाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति व्यवस्था को लगातार मजबूत किया है। पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से बीते नौ वर्षों में 1.39 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव किसी भी मेधावी विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने और वह विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा तक अपनी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रख सके।

 

तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता, समय पर मिली सहायता 

 

योगी सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में कई सुधार किए हैं। ओटीआर, बायोमेट्रिक सत्यापन, एस-कोड वैलिडेशन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी व्यवस्थाओं से छात्रवृत्ति सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और पात्र विद्यार्थियों तक समय पर सहायता पहुंचाना आसान हुआ है।

 

हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक पहुंचा लाभ

 

पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के तहत वर्ष 2017-18 में 4,16,860 अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को लाभ मिला। इसके बाद 2018-19 में 5,24,426, 2019-20 में 5,41,386, 2020-21 में 3,62,511, 2021-22 में 3,20,390, 2022-23 में 3,86,139, 2023-24 में 3,74,963, 2024-25 में 4,11,797 तथा 2025-26 में 4,39,647 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई। वहीं दशमोत्तर स्तर पर 2017-18 में 12,80,515, 2018-19 में 11,43,804, 2019-20 में 13,60,376, 2020-21 में 8,02,648, 2021-22 में 12,29,471, 2022-23 में 9,42,939, 2023-24 में 10,35,766, 2024-25 में 11,76,281 तथा 2025-26 में 11,54,567 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है।

 

 

शिक्षा के जरिए सामाजिक बदलाव की पहल

 

योगी सरकार का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का सबसे मजबूत आधार है। छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है, जिससे वे उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के बेहतर अवसरों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। समाज कल्याण विभाग उप निदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि, बीते नौ वर्षों में छात्रवृत्ति व्यवस्था में हुए सुधारों ने विद्यार्थियों के बीच शिक्षा के प्रति विश्वास को मजबूत किया है। सरकार की कोशिश है कि पात्र विद्यार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता मिले और वे बिना किसी आर्थिक बाधा के अपने सपनों को साकार कर सकें।

CJP के आंदोलन की चेतावनी के बीच दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, पार्टी का आरोप- राज्यों में जारी है गिरफ्तारियां, कानूनी सहायता के लिए बनाया फंड

cjp

कॉकरोच जनता पार्टी (cjp) ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं लेने और विभिन्न राज्यों में कथित पुलिस कार्रवाई जारी रहने का आरोप लगाते हुए दोबारा बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। इस बीच, किसी भी संभावित विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली और मध्य दिल्ली जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

 

कॉजपा के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शन समाप्त होने के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं करने का जो आश्वासन दिया गया था, उसका उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली समेत कई राज्यों में छात्रों की निगरानी की जा रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की मदद करने वाले स्वयंसेवकों को भी हिरासत में लिया जा रहा है।

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'सरकार छात्रों को निशाना बना रही है'

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कॉजपा के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन को पहले से आशंका थी कि आंदोलन स्थगित होने के बाद सरकार छात्रों को एक-एक कर निशाना बनाएगी। उन्होंने कहा, “प्रदर्शन समाप्त होने से पहले और बाद में हमारी वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से लगातार बातचीत हुई थी। हमें पहले से अंदेशा था कि आंदोलन की गति कम होने के बाद सरकार छात्रों पर कार्रवाई शुरू करेगी और वही अब हो रहा है।”

असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में कार्रवाई का आरोप

 

कॉजपा की सदस्य रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि कई राज्यों में पुलिस कार्रवाई तेज कर दी गई है। उनके अनुसार, असम में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 7 से 8 एफआईआर दर्ज की गई हैं। वहीं कोलकाता में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 10 मुस्लिम बताए गए हैं और उन पर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार में 86 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

 

कॉजपा ने कहा कि जिन छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है, संगठन उनके साथ खड़ा है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

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'साक्षी' पोर्टल लॉन्च, कानूनी मदद का ऐलान

 

संगठन ने प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए 'साक्षी' नाम से एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू करने की घोषणा की है। इस पोर्टल पर प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो और तस्वीरें अपलोड कर सकेंगे, ताकि उनके मामलों का रिकॉर्ड रखा जा सके। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वे कानूनी सहायता मंच तैयार करने के लिए 1 करोड़ रुपये का योगदान देंगे।

 

कपिल सिब्बल ने कहा, “हम नहीं चाहते कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई हो। हम ऐसा प्लेटफॉर्म बनाएंगे, जहां प्रदर्शनकारी सीधे वकीलों से संपर्क कर सकें। मैं देशभर के वकीलों से अपील करता हूं कि वे इन प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हों।”

दतिया‌ उपचुनाव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशवाहा समाज को साधा, बोले भाजपा ने कुशवाह समाज को दिया सम्मान

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दतिया उपचुनाव में भले ही आशुतोष तिवारी प्रत्याशी हैं, लेकिन चुनाव प्रचार के दौर में हम सभी प्रत्याशी हैं। यहां लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच है। कांग्रेस 5 पीढ़ियों में केवल एक ही परिवार में सिमट गई। कभी किसी को मौका नहीं दिया। दतिया में भी कांग्रेस प्रत्याशी की यही हालत है। कांग्रेसियों ने दतिया के विकास के रथ का पहिया जाम कर दिया। यह बातें मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दतिया उपचुनाव में कुशवाह समाज के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहीं। 

गरजते हुए अंदाज में उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश आगे बढ़ रहा है तो दतिया भी आगे बढ़ना चाहिए। कांग्रेस के शासनकाल में दतिया में डकैतों का राज चलता था। हमारी सरकार गुंडागर्दी और किसी भी तरह की हिंसा को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। मध्यप्रदेश लाल सलाम को आखिरी सलाम कर चुका है। भारतीय जनता पार्टी व्यापार-व्यवसाय के लिए भय मुक्त वातावरण देती है। सबका साथ, सबका विकास के संकल्प के साथ हम दतिया को आगे बढ़ाएंगे। आगामी डेढ़ माह में दतिया को साढ़े 11 हजार करोड़ से अधिक लागत के कारखाने की सौगात मिलेगी।  कार्यक्रम के बाद दतिया में उन्होंने विशाल रोड़ शो भी किया और भाजपा प्रत्याशी को जिताने की अपील की।  

 

कांग्रेसी भगवान श्रीराम के न हो सके-

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम के काल से भगवान लव-कुश और कुशवाहा समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। कांग्रेसी भगवान श्रीराम के नहीं हो सके, ये किसी काम के नहीं। कांग्रेसियों ने सुप्रीम कोर्ट तक में श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी कभी अयोध्या में भगवान श्रीराम के दर्शन करने नहीं गए। भाजपा ऐसी पार्टी है, जिसने कुशवाहा समाज को कैबिनेट मंत्री, सांसद, विधायक बनाकर सम्मानित किया। दतिया में तो कुशवाहा समाज से जिलाध्यक्ष और पार्षद भी हैं। भारतीय जनता पार्टी ने ही हरियाणा और बिहार में कुशवाहा समाज से मुख्यमंत्री तक बनाए हैं। उत्तर प्रदेश में एक डिप्टी सीएम भी कुशवाहा समाज के आते हैं। इस बार दतिया उपचुनाव में जीत का पूरा श्रेय सांसद भारत सिंह कुशवाहा और जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा को जाएगा। कांग्रेस ने कभी कुशवाहा समाज के लोगों को राजनीति में कोई पद नहीं दिया और आगे नहीं आने दिया।  

 

यह केवल भाजपा में ही संभव है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक गरीब परिवार का बेटा नरेंद्र मोदी देश का प्रधानमंत्री बनता है। नितिन नवीन जैसे युवा के हाथों में पार्टी की कमान सौंप दी जाती है। यह केवल भाजपा में ही संभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के सभी पात्र किसानों को किसान सम्मान निधि दी जा रही है। आज ही राज्य सरकार ने प्रदेश के 82 लाख 70 हजार से अधिक किसानों को 4 हजार रुपए सम्मान निधि अंतरित की है। सरकार की इन योजनाओं का लाभ प्रदेश के कुशवाहा किसान भाइयों को भी मिल रहा है।

हमारी सरकार सच्चा वादा पक्का काम के संकल्प के साथ काम करती है। लाड़ली बहनों को भी राशि लगातार हर महीने भेजी जा रही है। राज्य सरकार ने प्रदेश का बजट बढ़ाया है। किसानों को बिजली, पानी सभी क्षेत्रों में विकास के मामले में हमारी सरकार कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। ग्वालियर क्षेत्र बहुत जल्द टेलीकॉम सेक्टर का बड़ा हब बनने वाला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा “सबका साथ, सबका विकास” के संकल्प के साथ दतिया को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

Ayushman Card क्या है? घर बैठे मोबाइल से कैसे करें एप्लाई, जानें पात्रता, फायदे और पूरा प्रोसेस

अगर आप या आपका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) या सरकार द्वारा पात्र लाभार्थियों की सूची में शामिल है, तो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) आपके लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल ₹5 लाख तक का मुफ्त कैशलेस इलाज सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में मिलता है।

 

इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड (Ayushman Card) बनवाना होता है। अच्छी बात यह है कि अब आप अपने मोबाइल फोन से घर बैठे भी आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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Ayushman Card क्या है?

 

आयुष्मान कार्ड, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत जारी किया जाने वाला एक डिजिटल हेल्थ कार्ड है। यह कार्ड पात्र लाभार्थियों को देशभर के हजारों सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा देता है।

 

इस कार्ड में आधार और लाभार्थी की जानकारी लिंक होती है, जिससे अस्पताल में भर्ती की प्रक्रिया तेज और पेपरलेस हो जाती है।

 

कौन बनवा सकता है आयुष्मान कार्ड?

 

यह योजना मुख्य रूप से सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना (SECC) 2011 और अन्य सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर पात्र परिवारों के लिए है।

 

इन लोगों को योजना का लाभ मिल सकता है:

 

  • गरीबी रेखा (BPL) से जुड़े पात्र परिवार
  • पात्र राशन कार्ड धारक
  • PM-JAY लाभार्थी सूची में शामिल परिवार
  • अन्य पात्र लाभार्थी जिनका नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है

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आयुष्मान कार्ड के फायदे

  • प्रति परिवार हर साल ₹5 लाख तक का मुफ्त कैशलेस इलाज
  • सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इलाज
  • ऑपरेशन, अस्पताल में भर्ती, दवाइयां, जांच और इलाज के बाद की देखभाल भी शामिल
  • पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और कैशलेस
  • पात्र लाभार्थियों के लिए उम्र और परिवार के आकार की कोई सीमा नहीं
  • आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
  • आधार कार्ड
  • आधार से लिंक मोबाइल नंबर
  • राशन कार्ड (यदि उपलब्ध हो)
  • फैमिली आईडी या PM-JAY आईडी (यदि उपलब्ध हो)
  • मोबाइल से Ayushman Card के लिए कैसे करें आवेदन?

 

1. पात्रता जांचें

सबसे पहले PM-JAY के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपनी पात्रता जांचें और लाभार्थी सूची में अपना नाम देखें।

 

2. Official Ayushman App डाउनलोड करें

Google Play Store या Apple App Store से National Health Authority द्वारा जारी Official Ayushman App डाउनलोड करें।

 

3. लॉगिन करें

ऐप खोलें, मोबाइल नंबर दर्ज करें और OTP के जरिए सत्यापन पूरा करें।

 

4. परिवार की जानकारी खोजें

राज्य चुनें और आधार नंबर, राशन कार्ड नंबर, फैमिली आईडी या PM-JAY आईडी की मदद से अपना विवरण खोजें।

 

5. e-KYC पूरा करें

यदि आपका नाम सूची में है तो आधार आधारित e-KYC प्रक्रिया पूरी करें और सभी आवश्यक जानकारी सही-सही भरें।

 

आयुष्मान कार्ड कैसे डाउनलोड करें?

 

आवेदन स्वीकृत होने के बाद आप Official Ayushman App या ऑनलाइन पोर्टल से अपना Ayushman Card डाउनलोड कर सकते हैं और सूचीबद्ध अस्पतालों में इसका उपयोग कर सकते हैं।

 

अगर सूची में नाम नहीं है तो क्या करें?

 

यदि आपका नाम लाभार्थी सूची में नहीं है तो संभव है कि आप PM-JAY के तहत पात्र न हों।

 

फिर भी आप:

 

  • नजदीकी Common Service Centre (CSC) जाएं।
  • सूचीबद्ध अस्पताल के Ayushman Help Desk से संपर्क करें।
  • अपने राज्य की State Health Agency से पात्रता की जानकारी प्राप्त करें।
  • आवेदन करते समय इन बातों का रखें ध्यान
  • केवल National Health Authority की आधिकारिक Ayushman App का ही उपयोग करें।
  • आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए किसी को पैसे न दें। पात्र लाभार्थियों के लिए यह सेवा पूरी तरह मुफ्त है।
  • OTP और e-KYC के लिए आधार से लिंक मोबाइल नंबर सक्रिय रखें।

गुरु पूर्णिमा पर शिष्य और गुरु, दोनों भूमिका में दिखेंगे सीएम योगी

सनातन विचार दर्शन एवं संस्कृति में गुरु-शिष्य के रिश्ते को प्रतिष्ठित करने वाले पावन पर्व गुरु पूर्णिमा गोरक्षपीठ के लिए विशेष होती है। गुरु पूर्णिमा महोत्सव वह अवसर होता है जब गोरक्षपीठाधीश्वर, शिवावतार एवं नाथपंथ के आदिगुरु महायोगी गोरखनाथ सहित पीठ के अपने पूर्ववर्ती गुरुजन की पूजन-स्तुति करते हैं और तदुपरांत अपने शिष्यों और गोरक्षपीठ के श्रद्धालुओं को स्नेहाशीष से अभिसिंचित करते हैं। गोरक्षपीठ की इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान पीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई, बुधवार) पर शिष्य और गुरु दोनों भूमिकाओं में दिखेंगे।

 

गुरु पूर्णिमा पर्व और नाथपंथ का संबंध कितना अटूट और गहरा है, इसका अंदाजा इस पर्व पर गोरखनाथ मंदिर में होने वाले भव्य आनुष्ठानिक आयोजन को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। सभी नाथ योगियों ने इस परंपरा की गरिमा और प्रतिष्ठा को पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ कायम रखा है। महायोगी गुरु गोरखनाथ से लेकर गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ तक ने न केवल इस परंपरा को समृद्ध किया है, बल्कि गुरु प्रतिष्ठा के प्रति लोगों को प्रेरित भी किया है। मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद की तमाम व्यस्तताओं के बावजूद गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ हर गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु का आशीर्वाद लेने और शिष्यों को आशीर्वाद देने के लिए गोरखनाथ मंदिर जरूर पहुंचते हैं। इसी क्रम में इस बार भी बुधवार को वह गुरु पूर्णिमा पूजा के लिए मंदिर में मौजूद रहेंगे। 

 

नाथपंथ के प्रादुर्भाव से ही गुरु-शिष्य परंपरा उससे अनिवार्य रूप से जुड़ी रही और अनवरत आगे बढ़ रही है। नाथपंथ में गुरु और ईश्वर में कोई फर्क नहीं माना जाता है। नाथ परंपरा में गुरु ही ईश्वर है और ईश्वर ही गुरु है। यही वजह है कि गोरखनाथ मंदिर के लिए गुरु पूर्णिमा महोत्सव का विशेष महत्व है। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ बुधवार (29 जुलाई) को महायोगी गोरखनाथ का विशिष्ट पूजन कर नाथपंथ के गुरुजन के प्रति श्रद्धा निवेदित करेंगे। इस पर्व पर शिवावतार गुरु गोरक्षनाथ को रोट अर्पित करने की भी परंपरा है। आनुष्ठानिक कार्यक्रमों को पूर्ण करने के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर अपने शिष्यों और गोरक्षपीठ के अनुयायियों को आशीर्वाद प्रदान करेंगे। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर 23 जुलाई से गोरखनाथ मंदिर में चल रही श्रीरामकथा की पूर्णाहुति भी होगी। 

 

गुरु पूर्णिमा के दिन बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूजन का सिलसिला प्रातःकाल से ही शुरू हो जाएगा। गोरक्षपीठाधीश्वर सुबह सबसे पहले गुरु गोरक्षनाथ की पूरे विधि विधान से पूजा करेंगे। इसके बाद नाथपंथ के सभी योगियों की समाधि स्थली और देवी देवताओं के मंदिर में विशेष पूजन का कार्यक्रम होगा। पूजा की पूर्णता सामूहिक आरती से होगी। गुरु पूजन के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर अपने शिष्यों के बीच आएंगे। बारी-बारी से शिष्य, गोरक्षपीठाधीश्वर तक पहुंचेंगे और तिलक लगाकर उनका आशीर्वाद ग्रहण करेंगे। आशीर्वचन के बाद मंदिर में सहभोज का आयोजन किया जाएगा।

गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव : बुधवार के कार्यक्रम

-महायोगी गोरखनाथ जी को रोट अर्पण, पूजन, मंदिर परिसर स्थित सभी देव विग्रहों एवं समाधि स्थलों पर विशेष पूजा, प्रातः 5 बजे से 6 बजे तक।

-सामूहिक आरती, प्रातः 6:30 बजे से 7 बजे तक।

-सप्तदिवसीय श्रीराम कथा की पूर्णाहुति, प्रातः 9 बजे से पूर्वाह्न 11:30 बजे तक।

-भजन एवं आशीर्वचन, पूर्वाह्न 11:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक।

-सहभोज/ भंडारा, दोपहर 12:30 बजे से।

गोरक्षपीठ और गुरु पूर्णिमा का अटूट नाता

वैसे तो गोरक्षपीठ, गोरखनाथ मंदिर में धर्म-अध्यात्म की मंगलध्वनि अहर्निश गुंजायमान रहती है, पर गुरु पूर्णिमा का पर्व यहां अत्यंत विशेष होता है। नाथपंथ मुख्यतः गुरुगम्य मार्ग है। इस लिहाज से गोरक्षपीठ और गुरु पूर्णिमा का अटूट नाता है। गुरु-शिष्य परंपरा इस पीठ के मूल में है। गुरु परंपरा से ही नाथ परंपरा आगे बढ़ी है। यही वजह है कि गोरक्षपीठ, गुरु परंपरा के प्रतीक के तौर पर पूरी दुनिया में प्रतिष्ठित है। हर काल में इस परंपरा को कायम रखकर पीठ ने कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। शिवावतार भगवान गोरखनाथ ने योग को लोक कल्याण का माध्यम बनाया तो उनके अनुगामी नाथपंथ के मनीषियों ने लोक कल्याणकारी अभियान को गति दी। 

 

गुरु से प्राप्त लोक कल्याण की परंपरा को विस्तारित किया गोरक्षपीठाधीश्वरों ने सनातन संस्कृति गुरु को गोविंद (भगवान) से भी ऊंचे स्थान पर प्रतिष्ठित करती है। गुरु का ध्येय समग्र रूप में लोक कल्याण होता है और इसकी दीक्षा भी वह अपने शिष्य को देते हैं। नाथपंथ में पीढ़ी दर पीढ़ी गोरक्षपीठाधीश्वरों ने अपने गुरु से प्राप्त लोक कल्याण की परंपरा को विस्तारित किया है। वर्तमान पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ इसे निरंतर ऊंचाई प्रदान कर रहे हैं। गुरु परंपरा के लोक कल्याणकारी कार्यों के अनुगमन में गोरक्षपीठ की गत-सद्यः तीन पीढ़ियां कीर्तिमान रचती नजर आती हैं। 
 

गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने लोक कल्याण के लिए शिक्षा को सबसे सशक्त माध्यम बनाते हुए 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। ब्रह्मलीन महंत जी ने गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अपने दो महाविद्यालय भी दान में दे दिए थे। उनके समय में मंदिर परिसर में एक आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र की भी स्थापना हुई थी। इन प्रकल्पों को अपने समय में उनके शिष्य ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज ने विस्तार दिया। शिक्षा, चिकित्सा, योग सहित सेवा के सभी प्रकल्पों को नया आयाम दिया।

 

ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज के शिष्य एवं वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक कल्याण के लिए अपने दादागुरु द्वारा रोपे और अपने गुरु द्वारा सींचे गए पौधे को वटवृक्ष सरीखा बना दिया है। किराए के एक कमरे में शुरू शिक्षा का प्रकल्प दर्जनों संस्थानों के साथ ही विश्वविद्यालय तक विस्तारित हो चुका है। इलाज के लिए गोरक्षपीठ की तरफ से संचालित गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय की ख्याति पूरे पूर्वांचल में है। गोरक्षपीठ से योग के प्रसार को लगातार गति मिली है। पीठ की गुरु परंपरा में लोक कल्याण के मिले मंत्र की सिद्धि योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री की भूमिका में भी नजर आती है।

PARAKH-2024 रिपोर्ट पर योगी सरकार का एक्शन, छात्रों के सीखने के स्तर को बढ़ाने के लिए बनेगा नया रोडमैप

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुख शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण-2024 की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर विद्यालयों में अधिगम स्तर सुधारने की ठोस रणनीति तैयार की जाएगी। इसी उद्देश्य से 28 एवं 29 जुलाई को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), निशातगंज, लखनऊ के गंगा सभागार में राज्य स्तरीय मंडलवार कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। 

 

इस संबंध में एससीईआरटी ने संबंधित अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। कार्यशालाओं में परख-2024 रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सामने आई चुनौतियों की समीक्षा करते हुए जनपदवार सुधार रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि विद्यालयों में शिक्षण प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी, परिणामोन्मुख तथा राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जा सके।

 

दो दिन, पांच मंडलों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

एससीईआरटी के गंगा सभागार में आयोजित होने वाली इन कार्यशालाओं में 28 जुलाई को मेरठ एवं सहारनपुर मंडल तथा 29 जुलाई को आजमगढ़, झांसी और आगरा मंडल के प्रतिनिधि प्रतिभाग करेंगे। प्रत्येक मंडल से उपशिक्षा निदेशक/डायट प्राचार्य, जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यशालाएं प्रातः 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक आयोजित होंगी।

 

डेटा आधारित शिक्षा सुधार पर रहेगा फोकस

कार्यशालाओं में परख-2024 के निष्कर्षों के आधार पर विषयवार एवं कक्षावार अधिगम स्तर का विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता में सुधार, शिक्षण पद्धतियों को अधिक प्रभावी बनाने तथा विद्यालय स्तर पर आवश्यक शैक्षणिक हस्तक्षेपों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इससे जनपदवार आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य-योजना तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

 

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को मिलेगी नई गति: डॉ. पवन सचान

संयुक्त निदेशक (एसएसए) डॉ. पवन सचान ने बताया कि परख-2024 केवल मूल्यांकन रिपोर्ट नहीं है। यह विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधार का मजबूत आधार है। राज्य स्तरीय मंडलवार कार्यशालाओं के माध्यम से रिपोर्ट के निष्कर्षों का गहन विश्लेषण कर जनपदवार सुधार रणनीति तैयार की जाएगी। हमारा उद्देश्य डेटा आधारित शैक्षणिक योजना के माध्यम से प्रत्येक बच्चे के अधिगम स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शिक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को परिणाम आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में परख-2024 के निष्कर्षों को जमीनी स्तर पर लागू कर विद्यार्थियों की सीखने की उपलब्धियों में ठोस सुधार लाने की दिशा में यह कार्यशालाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।