रांची JPSC-JSSC धांधली, वांगचुक की अपील पर देवेन्द्र ने तोड़ा अनशन, जानिए कौन हैं छात्र नेता महतो

Devendra Nath Mahato Protest

Devendra Nath Mahato Protest: राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और धांधली के खिलाफ पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर हुई बातचीत और उनकी अपील के बाद देवेंद्र ने अन्न-जल ग्रहण किया। हालांकि, अनशन समाप्त होने के बावजूद छात्रों का आंदोलन जारी है। इस बीच, खबर है कि सीजेपी नेता अभिजीत दीपके भी रांची पहुंचने वाले हैं। 

 

झारखंड की राजधानी रांची में राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षा प्रणालियों में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका है। बुधवार को लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से देवेंद्र महतो से बात की। वार्ता के दौरान वांगचुक ने आंदोलन के मुद्दों पर चर्चा की और देवेंद्र की लगातार गिरती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उनसे अनशन वापस लेने का आग्रह किया। 

 

सोनम वांगचुक की अपील और छात्रों के भारी दबाव के बाद देवेंद्र महतो ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। लगातार चार दिनों के उपवास के कारण उनकी स्थिति बिगड़ रही थी। रांची सदर अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल काफी घट गया था, साथ ही वे गंभीर डिहाइड्रेशन और थकान से जूझ रहे थे। ALSO READ: CJP Protest : हिंसा करने वालों पर दिल्ली पुलिस का एक्शन, रद्द हो सकते हैं पासपोर्ट, CCTV से हो रही पहचान, सीजेपी का कल देशभर में आंदोलन का ऐलान

विवाद का पूरा घटनाक्रम

इस पूरे आंदोलन की शुरुआत बीती 2 जुलाई को जेपीएससी 14वीं की प्रारंभिक परीक्षा (PT) का परिणाम आने के बाद हुई। मुख्य परीक्षा के लिए कुल 2204 अभ्यर्थियों को योग्य घोषित किया गया था और परीक्षा की तिथि 18 से 20 जुलाई तय की गई थी। लेकिन परिणाम जारी होते ही धांधली के आरोप लगने शुरू हो गए। रिजल्ट में कैटेगरी-वाइज कट-ऑफ जारी नहीं किया गया। इसके अलावा जारी परिणाम पत्र पर जेपीएससी अध्यक्ष, सचिव या किसी सदस्य के हस्ताक्षर नहीं थे।

क्या है छात्रों की मांग? 

सोशल मीडिया पर एक अभ्यर्थी की OMR शीट वायरल हुई, जिसमें केवल 48 प्रश्न हल करने के बावजूद उसे मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था। व्यापक विरोध के बाद मुख्य परीक्षा को तो रद्द कर दिया गया, लेकिन छात्र इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं। अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि पेपर लीक किए गए और सीटें बेची गईं। छात्रों ने सीआईडी (CID) जांच को नकारते हुए पूरे मामले की जांच ईडी (ED) या सीबीआई (CBI) से कराने की मांग की है। ALSO READ: बड़ा धमाका! अब यूपी के भाजपा नेता की बेटी ने किया CJP का समर्थन, जानिए कौन हैं यशस्विनी राजे सिंह?

आंदोलन का बढ़ता दायरा, दीपके भी जाएंगे रांची

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) से जुड़े देवेंद्र महतो ने 25 जुलाई को मोराबादी मैदान में गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना शुरू किया था। शुरुआती दिनों में कम संख्या के बावजूद सोशल मीडिया के जरिए छात्रों का भारी समर्थन मिला। खबर है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके भी आंदोलनकारियों को समर्थन देने के लिए रांची जाएंगे। 

कौन हैं छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो?

झारखंड के छात्र आंदोलनों का एक प्रमुख चेहरा बन चुके देवेंद्र नाथ महतो का जीवन संघर्षों और सार्वजनिक मुद्दों से भरा रहा है। देवेंद्र रांची जिले के राहे प्रखंड स्थित कापीडीह गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता विशंभर महतो एक सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक हैं। देवेंद्र ने साल 2006 में मैट्रिक, 2008 में साइंस से इंटरमीडिएट, 2017 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक और बाद में कुरमाली भाषा में स्नातकोत्तर (PG) व B.Ed की डिग्री हासिल की। 

 

कॉलेज के दिनों से ही छात्र हित के मुद्दों पर मुखर रहे महतो ने 2015 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार की नियोजन नीति का विरोध किया। 2016 में छात्रवृत्ति में कटौती के खिलाफ सड़क पर उतरे।

 

छात्र आंदोलनों के कारण जेल में रहने के बावजूद उन्होंने रांची सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा और 1.48 लाख वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे। सिल्ली विधानसभा सीट से JLKM प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर 44 हजार वोट प्राप्त किए और पुनः तीसरे स्थान पर रहे। छात्रों की मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत रहने के कारण देवेंद्र महतो पर वर्तमान में 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

झारखंड CM हेमंत सोरेन ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, 6 अगस्त से शुरू होगा विधानसभा सत्र

jharkhand all party meeting

Jharkhand News in Hindi : झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन ने 6 अगस्त से शुरू हो रहे 5 दिवसीय मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक में उन्होंने सभी दलों से सदन की कार्यवाही को सफल बनाने की अपील की। 

 

सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि झारखंड विधानसभा के आगामी मॉनसून सत्र के सफल संचालन को लेकर आज सर्वदलीय बैठक में शामिल हुआ।

 

उन्होंने कहा कि सदन जनता की आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का सर्वोच्च मंच है। हमारी सरकार हर जनहित के मुद्दे पर सार्थक चर्चा, जवाबदेही और सकारात्मक संवाद के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आशा है कि सभी दल झारखंड के हित को सर्वोपरि रखते हुए सदन की कार्यवाही को सफल बनाएंगे।

गौरतलब है कि झारखंड विधानसभा का मॉनसून सत्र 6 अगस्त से 12 अगस्त तक चलेगा। मानसून सत्र को लेकर विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने भी एक उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें सभी सदस्यों से सदन व्यवस्थित ढंग से संचालित करने की भी अपील की।

MYH फार्मासिस्ट के घर EOW का छापा, दवाओं में गड़बड़ी के आरोप, आय से ज्‍यादा संपत्‍ति, थाईलैंड यात्रा भी

EOW raids MYH

इंदौर में एमवाय अस्‍पताल में पदस्‍थ फार्मासिस्‍ट के घर EOW के छापे में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। मंगलवार को फार्मासिस्ट राकेश गोरखे के कई ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई थी।

कार्रवाई की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने सरकारी दवाओं के स्टॉक में कथित गड़बड़ी कर आय से करीब 108 प्रतिशत अधिक संपत्ति जमा कर ली। बता दें कि जांच के दौरान बिना विभागीय अनुमति थाईलैंड यात्रा करने का भी खुलासा हुआ है।

2007 में हुई थी नियुक्ति: EOW के मुताबिक राकेश गोरखे की साल 2007 में फार्मासिस्ट के पद पर नियुक्ति हुई थी। साल 2015 में उनका मासिक वेतन 18,711 रुपए था, जो 2025 में बढ़कर 54,664 रुपए हो गया। उनकी पत्नी कीर्ति गोरखे वर्ष 2010 से शासकीय दंत चिकित्सालय में लाइब्रेरियन हैं और वर्तमान में उनका मासिक वेतन 42,402 रुपए है।

जांच में सामने आया कि जांच अवधि (चेक पीरियड) के दौरान दंपती की कुल वैध आय 1 करोड़ 11 लाख 31 हजार 383 रुपए रही, जबकि उनके पास 2 करोड़ 13 लाख 85 हजार रुपए से अधिक की चल-अचल संपत्ति मिली। यह उनकी वैध आय से करीब 108 प्रतिशत अधिक है।

बता दें कि EOW की कार्रवाई में इंदौर के अलग-अलग इलाकों में स्थित छह संपत्तियों का खुलासा हुआ। इनमें स्कीम नंबर-140 स्थित वृंदावन गार्डन का दो मंजिला मकान, साकार एनआरआई सिटी का बड़ा प्लॉट, साहिल इंद्रांचल होम्स, संघवी रेजीडेंसी और सद्गुरु नंदी विहार में प्लॉट शामिल हैं। इसके अलावा ओमेक्स डेवलपर्स में प्लॉट बुकिंग के लिए 6.70 लाख रुपए का भुगतान भी मिला है।

थाईलैंड यात्रा का भी खुलासा: छापेमारी के दौरान जब्त पासपोर्ट से पता चला कि राकेश गोरखे अक्टूबर 2023 में बिना विभागीय अनुमति थाईलैंड गए थे। EOW अब इस विदेश यात्रा पर हुए खर्च का भी आकलन कर रही है और उसे आरोपी के कुल व्यय में शामिल किया जाएगा। टीम ने छह संपत्तियों के दस्तावेज, बैंक पासबुक, पासपोर्ट और 1.51 लाख रुपए नकद भी जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कई संपत्तियों की जानकारी अपने विभाग को नहीं दी थी। फिलहाल दस्तावेजों की जांच और संपत्तियों के सत्यापन की कार्रवाई जारी है।

यूसुफ पठान समेत 3 मुस्लिम सांसदों ने क्यों बनाई NDA से दूरी! क्या ‘खेला’ हो गया?

Yusuf Pathan

Yusuf Pathan NDA Meeting: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए हालिया उबाल और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट नेशनल प्रोग्रेसिव सिटीजन्स इनिशिएटिव (NCPI) के गठन के बाद दिल्ली के सियासी गलियारों में एक नई हलचल पैदा हो गई है। टीएमसी से अलग होकर बने 20 सांसदों के समूह में शामिल तीन प्रमुख मुस्लिम सांसदों—यूसुफ पठान (बहरामपुर), अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद), और खलीलुर रहमान (जंगीपुर) ने सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि वे सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा नहीं हैं। 

 

मंगलवार को संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में आयोजित एनडीए संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक से इन तीनों सांसदों ने लगातार दूसरी बार दूरी बनाई। इससे पहले 21 जुलाई को हुई पहली बैठक में भी ये तीनों अनुपस्थित रहे थे।

कुछ ही दिनों के भीतर क्या बदला?

जब टीएमसी से 20 सांसदों का समूह अलग होकर NCPI बना, तो यह माना जा रहा था कि यह पूरा गुट एनडीए के साथ मिलकर अपनी स्थिति मजबूत करेगा। हालांकि, तीन मुस्लिम सांसदों के रुख में आए इस बदलाव के पीछे मुख्य रूप से 3 बड़े कारण देखे जा रहे हैं:

  • संसदीय क्षेत्र और मतदाताओं का दबाव : तीनों सांसद (बहरामपुर, मुर्शिदाबाद और जंगीपुर) पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, बागी गुट के एनडीए के निकट जाने की खबरों के बाद स्थानीय मतदाताओं में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, जिसके बाद सांसदों को अपना रुख स्पष्ट करना पड़ा। 
  • मुस्लिम समुदाय के हितों की बात : सांसद अबू ताहेर खान ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया, “हम एनडीए के साथ नहीं हैं और न ही भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। हम ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे या समर्थन करेंगे जो मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हो। 
  • दल-बदल विरोधी कानून का पेंच : टीएमसी के मूल 28 लोकसभा सांसदों में से दो-तिहाई (कम से कम 19 सांसद) का समर्थन बागी गुट के पास होना अनिवार्य है। यदि ये तीन सांसद अलग राह चुनते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित NCPI की अलग समूह के रूप में मान्यता खतरे में पड़ सकती है। 

बैठक से दूरी पर सांसद अबू ताहेर खान का बयान

संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बात करते हुए मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहेर खान ने गठबंधन और विकास कार्यों को लेकर स्थिति साफ की: 

 

अबू ताहेर खान : “हम भाजपा या एनडीए का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए बैठक में जाने का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि, यदि मेरे संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों से जुड़ी कोई बैठक राज्य या केंद्र स्तर पर बुलाई जाती है, तो हम अपने क्षेत्र की जनता के हित के लिए उसमें जरूर शामिल होंगे।” 

NCPI गुट के अंदर दरार के संकेत

 कारक  विवरण
 समूह की कुल संख्या  20 बागी सांसद (टीएमसी से अलग हुए)
 विरोध में आए सांसद  यूसुफ पठान, अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान
 मुख्य चिंता  क्षेत्रीय विकास बनाम एनडीए में औपचारिक विलय
 मौजूदा स्थिति  लोकसभा अध्यक्ष के पास अलग समूह की मान्यता लंबित

यूसुफ पठान और अन्य दो मुस्लिम सांसदों के इस कदम से स्पष्ट है कि वे अपने संसदीय क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरणों को खतरे में नहीं डालना चाहते। जहां एक ओर NCPI के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय पार्टी में एकजुटता का दावा कर रहे हैं, वहीं तीन मुख्य सांसदों की गैरमौजूदगी ने एनडीए के साथ बागी गुट के पूर्ण विलय की संभावनाओं पर फिलहाल सवालिया निशान लगा दिया है।

नितिन गडकरी पर AI-डीपफेक पोस्ट को लेकर हाई कोर्ट सख्त, X, Meta और Google को दिए यह निर्देश

Nitin Gadkari gets relief from bombay high court

बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए कथित मानहानिकारक, अश्लील और अपमानजनक पोस्ट हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने X और Meta को यह जानकारी देने का भी आदेश दिया है कि वे कंटेंट किसने अपलोड किए थे। ALSO READ: 'पद के लायक हूं या नहीं, जल्द बताऊंगा'… यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना क्यों हैं इतने दुखी?

 

अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वह सारा कंटेंट हटाने को कहा है, जिसमें इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल से जुड़े मामले में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बदनाम करने वाला AI कंटेंट भी शामिल है।

 

कोर्ट ने मेटा, एक्स और गूगल को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए और भविष्य में डीपफेक या आपत्तिजनक पोस्ट पर भी सख्त कदम उठाने को कहा। यह जानकारी भी मांगी गई कि यह कंटेट किसने अपलोड किए थे। अदालत ने कहा कि ये पोस्ट देखने में ही अपमानजनक, घिनौने और अश्लील हैं। ALSO READ: भारत में अब मुफ्त UPI नहीं? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन

 

अदालत ने मेटा, X कॉर्प और गूगल LLC जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से यह भी पूछा कि आपके पास इतनी टेक्नोलॉजी है, तो क्या आपके पास कोई ऐसा सिस्टम नहीं है, जो ऐसे मामलों को तुरंत पकड़ सके? अगर कोई अश्लील या अपमानजनक चीज पोस्ट करता है, तो उसे तुरंत पकड़कर हटा दिया जाना चाहिए। यह बहुत ही घिनौनी बात है। कोई जहर उगल रहा है।'

 

कोर्ट ने गडकरी से कहा कि अगर भविष्य में ऐसी कोई पोस्ट अपलोड की जाती है, जिसमें डीपफेक या एआई से बना कंटेंट भी शामिल हो, तो मंत्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से संपर्क कर सकते हैं। वे इस पर कार्रवाई करेंगे।

 

कब बनेगा 62 करोड़ रुपए का सत्यसाईं फ्लायओवर, लेटलतीफी और दावों के बीच हांफ गया ट्रैफिक, हजारों परेशान

Satya Sai flyover

  • सत्‍यसाईं पर 746 मीटर लंबा 6-लेन फ्लायओवर बन रहा।
  • मार्च 2026 तक पूरा किया जाना था प्रोजेक्‍ट।
  • 2.5 साल से भी अधिक का समय बीत चुका है।
  • 15 मार्च 2024 को जारी किया गया था वर्क ऑर्डर।
  • करीब 62 करोड़ रुपए की लागत से होगा तैयार।

आर्थिक राजधानी इंदौर में विकास के दावों और हकीकत के बीच का अंतर अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शुमार सत्यसाईं चौराहे पर बनाए जा रहे 6-लेन फ्लायओवर की सुस्त रफ्तार ने रोजाना यहां से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों का जीना मुहाल कर दिया है। प्रशासनिक सुस्ती और निर्माण एजेंसी की लापरवाही का आलम यह है कि तय समय-सीमा बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है, और ऊपर से मानसून ने हालात को और बदतर बना दिया है।

प्रोजेक्ट एक नजर में: डिजाइन, लागत और समय-सीमामध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) की देखरेख में बन रहे इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के आंकड़े और इसकी मौजूदा स्थिति कुछ इस प्रकार है।

लागत (Cost): इस बहुप्रतीक्षित 6-लेन फ्लायओवर प्रोजेक्ट पर लगभग 62 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

लंबाई और डिजाइन (Design & Length): चौराहे पर ट्रैफिक के भारी दबाव को देखते हुए इसे करीब 746 मीटर लंबा 6-लेन फ्लायओवर डिजाइन किया गया है, ताकि भविष्य में यह जंक्शन पूरी तरह सिग्नल-फ्री हो सके।

तय समय-सीमा (Deadline): इस प्रोजेक्ट का वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद इसे मार्च 2026 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, निर्धारित डेडलाइन निकले हुए महीने बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रोजेक्ट का बड़ा हिस्सा अब भी अधूरा है। फ्लायओवर निर्माण शुरू हुए 2.5 साल से भी अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अब तक आम लोग इस प्रोजेक्ट के पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं।

बारिश में और गहराया संकट: कीचड़, गड्ढे और रोज का जाम। सत्यसाईं चौराहे पर इन दिनों हालात यह हैं कि जरा सी बारिश में ही सर्विस रोड तालाब में तब्दील हो जाती है। देवास नाका से विजय नगर और एबी रोड से बसंत विहार की ओर जाने वाले मार्गों पर बड़े-बड़े और गहरे गड्ढे बन गए हैं। सड़कों पर फैले कीचड़ और निर्माण सामग्री के मलबे के कारण दोपहिया वाहन चालकों का स्लिप होकर गिरना आम बात हो गई है। पीक आवर्स में यहां मीलों लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है, जिससे आम जनता का कीमती समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं।

जिंदगी से खिलवाड़: एंबुलेंस भी फंस रही जाम में इस इलाके की सबसे गंभीर समस्या यह है कि इसके आसपास कई बड़े अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र स्थित हैं। चौराहे और सर्विस रोड पर फैली अव्यवस्था के कारण आपातकालीन स्थिति में आने वाली एंबुलेंस तक देर तक ट्रैफिक जाम में फंसी रहती हैं। जरा सी प्रशासनिक चूक या प्रोजेक्ट में देरी किसी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार महकमों की नींद नहीं टूट रही है।

प्रशासनिक लेट-लतीफी पर सवाल: प्रशासनिक बैठकों और कागजी दावों में भले ही विकास कार्यों को समय पर पूरा करने की बात कही जाती हो, लेकिन सत्यसाईं चौराहे की यह तस्वीर सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी है। समय-सीमा निकल जाने के बाद भी काम अधूरा रहना और निर्माण एजेंसी पर कड़ी कार्रवाई न होना यह बताता है कि मॉनिटरिंग कितनी कमजोर है। जनता अब बस यही सवाल पूछ रही है कि आखिर इन कागजी वादों और लेट-लतीफी के चक्रव्यूह से उन्हें कब मुक्ति मिलेगी और कब यह फ्लायओवर बनकर तैयार होगा।

समय सीमा निकले 4 महीने बीते : बता दें कि प्रोजेक्ट का काम मार्च 2026 तक पूरा किया जाना था। एमपीआरडीसी द्वारा सत्यसाई चौराहे पर बनाए जा रहे फ्लायओवर का वर्क ऑर्डर 15 मार्च 2024 को जारी किया गया था, जिसे 62 करोड़ रुपए की लागत से 6 लेन का बनाया जाना है। इस प्रोजेक्ट का काम मार्च 2026 तक पूरा किया जाना था, जिसकी निर्धारित समय सीमा को भी लगभग 4 महीने बीत चुके हैं लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी बहुत सारा काम बाकी बचा हुआ है।

‘पद के लायक हूं या नहीं, जल्द बताऊंगा’… यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना क्यों हैं इतने दुखी?

Satish Mahana

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सदन के भीतर घटे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। अमूमन शांत और सख्त अनुशासन के लिए जाने जाने वाले विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना विपक्ष के आचरण और सदन में हुई नारेबाजी से खासे आहत नजर आ रहे हैं।
 
विधानसभा में सदस्यों के रवैये से दुखी होकर स्पीकर ने यहां तक कह दिया कि वे इस बात का आकलन कर रहे हैं कि वे इस गरिमामयी पद के लायक हैं भी या नहीं।
सदन में ऐसा क्या हुआ जिससे दुखी हुए सतीश महाना?
उत्तर प्रदेश विधानमंडल के सत्र के दौरान मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने लगातार नारेबाजी और हंगामा किया।

•   'चंदा चोर' के नारों पर तीखी बहस: विपक्ष द्वारा “चंदा चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगाए जाने पर अध्यक्ष पीठ का धैर्य जवाब दे गया। सतीश महाना ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा— “अगर आप में से किसी ने चंदा दिया हो, तो रसीद दिखाओ।”

•   मुख्यमंत्री के पोस्टर लहराना: बहस के दौरान सपा विधायक सचिन यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर वाले पोस्टर लहराए और आसन के सामने आकर नारेबाजी की।

•   सख्त कार्रवाई: आसन की अवमानना और मर्यादित आचरण न करने के कारण अध्यक्ष ने विधायक सचिन यादव को पूरे सत्र के लिए सदन से निष्कासित कर दिया।

आसन की पीड़ा: “सदन लोकतंत्र का मंदिर है। जब जनप्रतिनिधि नियमों और परंपराओं को ताक पर रखकर वेल में आकर हंगामा करते हैं और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे संसदीय मर्यादा तार-तार होती है।”

'जल्द बताऊंगा कि पद के लायक हूं या नहीं'
सदन के भीतर और बाहर जिस तरह का माहौल बना, उससे क्षुब्ध होकर स्पीकर सतीश महाना ने कहा कि वे निष्पक्ष रहकर सदन चलाने का हरसंभव प्रयास करते हैं। इसके बावजूद जब दोनों पक्षों (विशेषकर विपक्ष) से सहयोग नहीं मिलता और आसन पर लांछन लगाए जाते हैं, तो यह बात मानसिक रूप से आहत करती है।
उन्होंने भावुक लहजे में संकेत दिया कि वे जल्द ही इस बात का सार्वजनिक रूप से जवाब देंगे कि क्या वे इस गरिमामय पद के योग्य हैं या नहीं।

यूपी की राजनीति पर क्या होगा असर?
सतीश महाना का यह बयान केवल एक भावुक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की संसदीय राजनीति के लिए बड़ा संदेश है। जब से सतीश महाना ने विधानसभा अध्यक्ष का पद संभाला है, उन्होंने कई नई पहल की हैं— जैसे डिजिटल विधानसभा (e-Vidhan) और सदस्यों को बोलने का समान मौका देना। ऐसे में उनका यह क्षोभ सदन के संचालन और भावी सत्रों के नियमों को और अधिक कड़ा बनाने की ओर इशारा करता है।

भारत में अब मुफ्त UPI नहीं? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन

MDR charge on UPI payment

मंगलवार को संसद में देश के भुगतान कानूनों में प्रस्तावित संशोधन पेश किए जाने के साथ ही भारत अपने लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से किए गए लेन-देन पर मर्चेंट शुल्क को फिर से लागू करने के एक कदम और करीब पहुंच गया है। ALSO READ: UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! 2000 रुपए से ऊपर के बिजनेस पेमेंट पर लग सकता है MDR चार्ज, जानिए किस पर पड़ेगा असर

 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट नेटवर्क में से एक यूपीआई ने जुलाई में 29.9 ट्रिलियन रुपये ($313.5 बिलियन) मूल्य के 23.6 बिलियन लेन-देन संसाधित किए। वॉलमार्ट का फोनपे और अल्फाबेट का गूगल पे यूपीआई के माध्यम से होने वाले भुगतान में अपना दबदबा बनाए हुए हैं।

उद्योग जगत के अधिकारियों ने लंबे समय से यह तर्क दिया है कि डिजिटल भुगतान में वृद्धि को बनाए रखना कठिन हो गया है क्योंकि भुगतान कंपनियों को यूपीआई लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं मिलता है, जिससे इस पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) में निवेश करने की उनकी क्षमता सीमित हो जाती है।

 

उद्योग और नियामक स्रोतों के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए भारत के भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन से डिजिटल भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुरू करने की अनुमति मिलेगी। सूत्रों ने कहा कि यह बदलाव एमडीआर वसूलने का एक कानूनी आधार तैयार करता है, लेकिन शुल्क के स्तर या वे कहाँ लागू होंगे, इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

 

एमडीआर वह शुल्क है जो व्यापारियों द्वारा डिजिटल लेन-देन को संसाधित करने के लिए बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को दिया जाता है। हालांकि भारत में क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर लगभग 1.5% और डेबिट कार्ड पर 0.9% तक का एमडीआर लगता है, लेकिन वर्तमान में व्यापारियों के लिए यूपीआई लेन-देन मुफ़्त है।

 

दो दृष्टिकोणों पर विचार किया जा रहा है

नीति निर्माता दो व्यापक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं: एक निश्चित सीमा (थ्रेसहोल्ड) से ऊपर के लेन-देन पर एमडीआर लगाना या व्यापारी के वार्षिक टर्नओवर के आधार पर शुल्क वसूलना। एक प्रस्ताव में केवल बड़े व्यापारियों पर शुल्क लागू करने की बात कही गई है, जबकि उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के लिए यूपीआई भुगतान मुफ़्त रहेगा।

 

सरकार 1.5 करोड़ रुपये (15 मिलियन रुपये) से अधिक के वार्षिक टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये ($20.97) से अधिक के लेन-देन पर 0.3% से 0.5% का एमडीआर लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। मंगलवार को जेफरीज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन व्यापारी भुगतान मात्रा (वॉल्यूम) का केवल 4% हिस्सा हैं, लेकिन कुल लेन-देन मूल्य (वैल्यू) का लगभग 67% हिस्सा हैं।

साधु वेश में विपक्ष के प्रदर्शन पर भड़के सीएम धामी, बोले- ‘पप्पू गैंग ने किया संतों का अपमान’

pushkar singh dhami

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संसद परिसर में साधु का वेश धारण कर विरोध प्रदर्शन कर रहे सांसदों पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि पप्पू गैंग संतों के वेश का उपहास उड़ाकर और हिंदू धर्म की आस्था पर प्रहार कर अपनी मानसिकता उजागर कर रही है। उन्होंने कहा कि सनातन और संत परंपरा का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ALSO READ: देवभूमि में कांवड़ियों का भव्य स्वागत, पुष्पवर्षा और चरण प्रक्षालन से किया अभिनंदन, CM धामी ने परोसा भोजन

उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष द्वारा छद्म वेश धारण कर साधु-संतों का उपहास करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यह केवल संत समाज का अपमान नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है। सनातन परंपरा में साधु-संत सदैव श्रद्धा और सम्मान के प्रतीक रहे हैं। राजनीतिक विरोध के लिए सनातन और संत समाज को निशाना बनाना किसी भी प्रकार से स्वीकार्य नहीं है

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि एक ओर सनातन में आस्था रखने वाले शिवभक्तों के चरण पखारकर, पुष्पवर्षा कर और सेवा-सम्मान के साथ इसकी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पप्पू गैंग संतों के वेश का उपहास उड़ाकर और हिंदू धर्म की आस्था पर प्रहार कर अपनी मानसिकता उजागर कर रही है।

 

उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में हमारे लिए कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, श्रद्धा, संस्कार और करोड़ों शिवभक्तों के सम्मान का महापर्व है। यही कारण है कि हमारी सरकार ने शिवभक्तों की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

सीएम धामी ने कहा कि सनातन परंपरा, संत समाज और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसा करने वालों को यह समझ लेना चाहिए कि भारत की आत्मा सनातन में बसती है और सनातन का सम्मान करने वाले करोड़ों श्रद्धालु ऐसे हर कृत्य का लोकतांत्रिक जवाब देना जानते हैं।

 

संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का मार्च, अमित शाह से मांगा जवाब

opposition protest in parliment

छात्रों पर लाठीचार्ज और चढ़ावा चोरी मामले में प्रेरणा स्थल से मकर द्वार तक विपक्षी सांसदों ने बुधवार को मार्च किया। प्रदर्शन में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत सभी विपक्षी दलों के सांसद शामिल थे। प्रदर्शनकारियों के हाथ में एक बड़ा पोस्टर था, इस पर लिखा था 'अमित शाह जवाब दो'। भाजपा ने राहुल गांधी पर संसद नहीं चलने देने का आरोप लगाया। ALSO READ: सुनेत्रा पवार को 'गूंगी गुड़िया' कहने पर गरमाई महाराष्ट्र की सियासत, CM फडणवीस का कांग्रेस पर तीखा हमला

 

 

कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में प्रोटेस्ट का वीडियो शेयर करते हुए कहा कि छात्रों पर हुई बर्बरता और चढ़ावा चोरी के खिलाफ विपक्ष के सांसदों का पैदल मार्च। मोदी सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती। नरेंद्र मोदी और अमित शाह को सदन में आकर जवाब देना ही होगा।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हमारी मांग यही है कि प्रधानमंत्री मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं। वो अपना बयान दें, हम चर्चा करने को तैयार हैं। चर्चा से ही हल निकलेगा। सदन शुरु हुए काफी दिन हो गए हैं। उन्हें आना चाहिए, सदन में न आकर वो संसद का अपमान कर रहे हैं। ALSO READ: UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! 2000 रुपए से ऊपर के बिजनेस पेमेंट पर लग सकता है MDR चार्ज, जानिए किस पर पड़ेगा असर

 

राहुल गांधी पर भाजपा का बड़ा आरोप

भाजपा नेता गौरव भाटिया ने कहा कि ऐसा क्यों है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संसद को चलने नहीं दे रहे हैं? हमने हमेशा कहा है कि ये 2 विचार धाराओं की लड़ाई है। एक तरफ नरेंद्र मोदी राष्ट्र की बात करते हैं राष्ट्र हित सर्वोपरि है। दूसरी तरफ विपक्ष के नेता राहुल गांधी केवल देश को बांटने का काम करते हैं। अराजक तत्वों के साथ खड़े होना खुद, अराजक हो जाना। नरेंद्र मोदी की सरकार में जीरो टॉलरेंस की नीति है, 2019-2026 तक 36 देशों से 274 भगोडे भारत वापस लाए गए हैं।'

 

गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है। इस वजह से संसद की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने आज भी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ बैठक की।