यूपी में हर पात्र महिला को स्वयं सहायता समूह से जोड़ने के लिए घर-घर अभियान शुरू

yogi adityanath in rampur

Self-help groups: ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी सरकार ने प्रदेशव्यापी 'परिवार संतृप्तिकरण अभियान' शुरू किया है। 5 अगस्त से 20 अगस्त तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत गांव-गांव, घर-घर जाकर ऐसे पात्र परिवारों की पहचान की जाएगी, जो अभी तक स्वयं सहायता समूहों या ग्रामीण आजीविका मिशन से नहीं जुड़े हैं। अभियान का उद्देश्य हर पात्र महिला को स्वरोजगार, बैंकिंग सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

घर-घर सर्वे से जोड़ा जा रहा हर पात्र परिवार

अभियान के दौरान विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर नोडल अधिकारी घर-घर जाकर सर्वे करेंगे और ऐसे परिवारों की पहचान करेंगे, जहां महिलाएं अभी स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा नहीं हैं। सर्वे के आधार पर उन्हें समूहों से जोड़ा जाएगा ताकि वे बचत, ऋण, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकें।

स्वयं सहायता समूहों के बैंक खाते भी खुलेंगे

योगी सरकार ने अभियान के दौरान सभी पात्र स्वयं सहायता समूहों के बैंक खाते तत्काल खुलवाने के निर्देश दिए हैं। इससे समूहों को सरकारी वित्तीय सहायता, बैंक ऋण और अन्य योजनाओं का लाभ सीधे मिल सकेगा। बैंकिंग सुविधाओं से जुड़ने के बाद ग्रामीण महिलाओं के लिए छोटे उद्यम शुरू करना और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करना आसान होगा।

कोई भी पात्र परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित नहीं रहेगा

परिवार संतृप्तिकरण अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र परिवार सरकारी योजनाओं, स्वयं सहायता समूहों और आजीविका के संसाधनों से वंचित न रहे। योगी सरकार चाहती है कि प्रत्येक पात्र महिला को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उसकी आय बढ़ाई जाए और ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया जाए।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार

जब अधिक से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ेंगी तो गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। छोटे-छोटे घरेलू उद्योग, कृषि आधारित गतिविधियां, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और अन्य स्वरोजगार के माध्यम विकसित होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और महिलाओं की आय में भी वृद्धि होगी।

10 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह बदल रहे गांवों की तस्वीर

ग्रामीण आजीविका मिशन प्रदेश में महिला सशक्तीकरण का मजबूत आधार बन चुका है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 10 लाख 10 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे एक करोड़ 19 लाख से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं। इन समूहों ने ग्रामीण महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें उद्यमी बनने का अवसर भी दिया है। आज बड़ी संख्या में महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, पशुपालन, हस्तशिल्प, सिलाई-कढ़ाई, जैविक उत्पाद, डिजिटल सेवाओं और अन्य लघु उद्योगों के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर रही हैं।

'बचत से आगे बढ़कर उद्यमिता' बना मिशन का लक्ष्य

ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के अनुसार महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें उद्यमी बनने का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। यही कारण है कि स्वयं सहायता समूह आज गांवों में आर्थिक बदलाव के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन के भी मजबूत माध्यम बनकर उभरे हैं। परिवार संतृप्तिकरण अभियान के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं इस परिवर्तन की भागीदार बनेंगी और प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

No Insurance, No Fuel प्रोजेक्ट क्या है, सुप्रीम कोर्ट क्यों करना चाहता है लागू और आप पर कैसे पड़ेगा असर

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सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ते सड़क हादसों और टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे जाम को लेकर मंगलवार को गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने केंद्र सरकार को चुनिंदा राष्ट्रीय राजमार्गों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत पारंपरिक टोल प्लाजा की जगह Automatic Number Plate Recognition (ANPR) जैसी तकनीक आधारित ऑटोमैटिक व्हीकल डिटेक्शन सिस्टम लागू करने की योजना है, जिससे वाहनों को टोल भुगतान के लिए रुकना न पड़े।

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 जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारें न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित करती हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय हैं। कोर्ट ने सुझाव दिया कि चुनिंदा राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर पर ऐसी व्यवस्था का परीक्षण किया जाए, जिसमें ANPR तकनीक के जरिए वाहनों की पहचान कर उन्हें बिना रुके टोल प्वाइंट से गुजरने दिया जा सके।

 

करीब 56 फीसदी वाहन बिना इंश्योरेंस

 

सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस के नियमों के पालन में कमी पर भी गंभीर चिंता जताई। कोर्ट के मुताबिक, वित्त मामलों की स्थायी समिति की 2024-25 की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की सड़कों पर चलने वाले करीब 56 फीसदी वाहन बिना वैध बीमा के हैं।

 

कोर्ट ने इस स्थिति को देखते हुए भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के साथ मिलकर एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है। इसके तहत वाहन के इंश्योरेंस स्टेटस को पेट्रोल पंप पर ईंधन बिक्री से जोड़ा जा सकता है।

 

‘No Insurance, No Fuel’ पर विचार

 

प्रस्ताव के अनुसार, यदि किसी वाहन का वैध इंश्योरेंस नहीं है तो उसका इंश्योरेंस रिन्यू होने तक पेट्रोल पंप पर उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से बिना बीमा और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों की पहचान करने में मदद मिलेगी और वाहन मालिकों को वैध इंश्योरेंस बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा। कोर्ट ने कहा कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से कोई आपत्ति नहीं है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए ANPR कैमरों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

 

नई कार और दोपहिया के लिए बढ़ेगा इंश्योरेंस कवर

 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2018 के आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें नई कार खरीदने या रजिस्ट्रेशन के समय तीन साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस और नए दोपहिया वाहनों के लिए पांच साल का बीमा अनिवार्य किया गया था।

 

कोर्ट ने कहा कि करीब आठ साल बीत जाने के बावजूद बड़ी संख्या में वाहन अब भी बिना बीमा के चल रहे हैं। सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के हित को ध्यान में रखते हुए पीठ ने नई कारों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि चार साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए छह साल करने का निर्देश दिया। IRDAI को इस संबंध में तत्काल जरूरी निर्देश जारी करने को कहा गया है।

 

30.48 करोड़ वाहनों में 16.54 करोड़ बिना बीमा

 

सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि देश में रजिस्टर्ड 30.48 करोड़ वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहन बिना बीमा के हैं। कोर्ट ने कहा कि बीमा नहीं होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं में घायल या मृत लोगों के परिवारों को समय पर मुआवजा मिलने में परेशानी होती है। पीठ ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत अनिवार्य बीमा का उद्देश्य केवल दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा देना नहीं है, बल्कि उन्हें मुआवजे के लिए लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से बचाना भी है।

 

कोर्ट ने कहा कि बिना बीमा वाले वाहनों के कारण दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर आर्थिक मदद नहीं मिल पाती। खासतौर पर मौत या स्थायी विकलांगता के मामलों में परिवारों पर इसका गंभीर आर्थिक असर पड़ता है।

 

ANPR कैमरों से पकड़े जाएंगे बिना बीमा वाले वाहन

 

बीमा नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने IRDAI और MoRTH को चुनिंदा राज्यों में ANPR कैमरे लगाने का निर्देश दिया है। इन कैमरों को Insurance Information Bureau (IIB) और VAHAN Database से जोड़ा जा सकता है। इससे बिना बीमा वाले वाहनों की ऑटोमैटिक पहचान की जा सकेगी और उनके खिलाफ ई-चालान जारी किया जा सकेगा।

 

कोर्ट ने यह भी कहा कि वाहन जांच के दौरान पुलिस के पास बीमा की स्थिति जांचने के लिए देशभर में एक समान व्यवस्था नहीं है। इसलिए राज्य पुलिस को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल एप उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, जो Insurance Information Bureau और VAHAN पोर्टल से जुड़े हों। इससे पुलिस मौके पर ही वाहन का इंश्योरेंस स्टेटस रियल टाइम में जांच सकेगी।

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वाहन मालिकों को मिलेंगे कई इंश्योरेंस विकल्प

 

कोर्ट ने IRDAI को निजी वाहनों के मालिकों के लिए कई तरह की इंश्योरेंस पॉलिसी उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है। इनमें Add-on Covers, Personal Accident Cover और Own-Damage Cover जैसे विकल्प शामिल होंगे। इसके साथ मोटर वाहन अधिनियम के न्यूनतम अनिवार्य प्रावधानों को पूरा करने वाली बेस पॉलिसी भी उपलब्ध रहेगी।

 

सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान दिए। कोर्ट ने कहा कि देश में थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस अनिवार्य होने के बावजूद नियमों का पालन पर्याप्त नहीं है। इसका सीधा असर सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है, जिन्हें मुआवजा हासिल करने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

सदन में उजागर हुआ सपा का दलित-पिछड़ा, युवा, गरीब, किसान और महिला विरोधी चरित्र : CM योगी

UP Assembly Session

UP Assembly Session: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान सपा का असली चेहरा एक बार फिर देखने को मिला। सपा सदस्यों द्वारा विधानसभा सत्र को हंगामे के हवाले करना प्रदेश के युवाओं, किसानों, महिलाओं व गरीबों के साथ भारी अन्याय है। इन लोगों ने नकारात्मक रवैये के कारण अनुपूरक बजट की जन-कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा नहीं होने दी। सपा ने इस सदन को नहीं, बल्कि दलितों-पिछड़ों, युवाओं, किसानों, महिलाओं व गरीबों के अवसर बाधित करने का काम किया है। मुख्यमंत्री बुधवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के उपरांत विधान भवन में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।

हर तबके के लिए निरंतर कार्य करेगी डबल इंजन सरकार

सीएम ने कहा कि सपा का असली चरित्र दलित, पिछड़ा, युवा, गरीब, किसान, महिला विरोधी है। सदन ने उसके इसी चेहरे को बेनकाब किया है। इन लोगों का चरित्र अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक, शर्मनाक व इन सभी तबकों के साथ अनर्थ करने वाला रहा है। सदन में सपा के इस व्यवहार की हम निंदा करते हैं और प्रदेशवासियों को आश्वस्त करते हैं कि डबल इंजन सरकार ने पिछले सवा 9 वर्षों में जिस प्रतिबद्धता के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों के लिए कार्य किया है, वह बिना रुके, डिगे, थके आगे बढ़ता रहेगा। 

हर वर्ग के उत्थान के लिए 59 हजार करोड़ से अधिक का अनुपूरक बजट 

सीएम ने कहा कि सरकार की मंशा यही रही कि मानसून सत्र में युवाओं के रोजगार, स्किलिंग कार्यक्रम बढ़ें। किसानों, गरीबों के कल्याण के लिए नए कार्यक्रम और महिलाओं के सम्मान-स्वावलंबन के लिए अतिरिक्त प्रयास आगे बढ़ें। इसीलिए सरकार 59 हजार करोड़ से अधिक का अनुपूरक बजट लेकर आई और कई जन-कल्याणकरी योजनाओं व कार्यक्रमों के लिए धनराशि की व्यवस्था की। सरकार चाहती थी कि नई योजनाओं को घोषित करने के लिए विधानसभा सदन में सार्थक चर्चा हो। 

सपा का नकारात्मक रवैया बना जन-कल्याण में बाधा

मुख्यमंत्री ने दो-टूक कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने नकारात्मक रवैये के कारण युवाओं, अन्नदाता किसानों, महिलाओं के स्वावलंबन व गरीबों के लिए बनने वाली कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा नहीं होने दी। इनका आचरण असंवैधानिक होने के साथ ही युवा, किसान, महिला व गरीब विरोधी भी है। जन प्रतिनिधियों ने नई मांगों के साथ ही प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत किए जाने तथा एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और बेहतर बनाने के लिए जो मांगें रखी थीं, अनुपूरक बजट में उसके लिए भी धनराशि का प्रावधान किया गया है। 

प्रदेश के विकास में योगदान देने वालों के हित में कार्यरत सरकार

सीएम ने कहा कि आंगनवाड़ी, आशा वर्कर, रसोइए, ग्राम चौकीदार, कोटेदार आदि तमाम लोग प्रदेश के विकास के लिए मजबूती से काम कर रहे हैं। इन लोगों के साथ ही सरकार ने हर उस तबके के हित में काम करने का प्रयास किया था, जिनके मानदेय बढ़ने हैं। निराश्रित महिला पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन में वृद्धि और नए पात्र लोगों को जोड़ने के प्रावधानों पर सदन में चर्चा होती, लेकिन समाजवादी पार्टी का नकारात्मक रवैया इसमें बाधा बन गया। सदस्यों द्वारा कई महत्वपूर्ण मांगों को सदन में मजबूती से बढ़ाने का प्रयास किया जाता, लेकिन सपा सदस्यों का आचरण में रुकावट बन गया। इसके बावजूद विधानसभा ने अनुपूरक मांगों को पारित किया है।

आउटसोर्सिंग कमीशन का गठन किया गया 

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आउटसोर्सिंग कमीशन का गठन कर दिया है। हर आउटसोर्स कर्मी को न्यूतनम मानदेय और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी प्राप्त हो, इसके लिए बजट में धनराशि की व्यवस्था कर दी गई है। आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ता, ग्राम चौकीदार, रसोइया, कोटेदार आदि के इंसेंटिव, मानदेय को बढ़ाने के लिए भी बजट में धनराशि की व्यवस्था की गई है। विधानसभा से पारित होने के उपरांत बजट विधान परिषद से पारित होगा। इसके बाद अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार इसका लाभ हर तबके तक पहुंचाएगी।

कर्मठ तबके को अपमानित करने वाला है सपा का चरित्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी का यह चरित्र, अल्प मानदेय के बावजूद प्रदेश के विकास व 25 करोड़ जनता-जनार्दन की सेवा में जुटे तबके को अपमानित करने वाला है। इससे पहले भी इन लोगों ने शिक्षामित्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया था। शिक्षामित्रों को पहले 3000 मानदेय मिलता था, लेकिन हमारी सरकार ने इसे बढ़ाकर पहले 10 हजार और फिर 18 हजार किया। अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार से बढ़ाकर 17 हजार रुपये किया। साथ ही बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई। 

सामाजिक न्याय के लिए समर्पित महापुरुषों का भी अपमान

सीएम ने कहा कि अनुपूरक मांगों में हम अन्य तमाम तबकों के लिए बेहतरीन योजनाएं लेकर आए थे। सामाजिक न्याय के लिए जीवन समर्पित करने वाले महापुरुष बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर, महर्षि वाल्मीकि, संत शिरोमणि रविदास, संत ज्योतिबा फुले,  शाहूजी महाराज, लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर आदि की मूर्तियों पर छाजन, पार्क, बाउंड्रीवाल के लिए हमने 407 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह बजट पास न हो, इसके लिए समाजवादी पार्टी ने सदन की कार्यवाही को बाधित किया और लगातार व्यवधान पैदा करने का प्रयास किया।  लेकिन, सपा के हंगामे के बावजूद विधानसभा से अनुपूरक मांगें पारित हुई हैं। विधानमंडल से पारित होने के उपरांत ये सभी कार्य तय सीमा के अंदर आगे बढ़ेंगे और सामाजिक न्याय के सभी पुरोधाओं को सम्मान मिलेगा। 

 

पत्रकार वार्ता में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, स्वतंत्र देव सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, नंदकिशोर गुर्जर, राजेश्वर सिंह, सुशील सिंह आदि मौजूद रहे।

6 दिन तक मृत बच्चे को पीठ पर लेकर तैरती रही मां डॉल्फिन, VIDEO देख नम हो जाएंगी आंखें

समुद्र की अथाह गहराइयों से सामने आई एक तस्वीर ने दुनिया भर के लोगों को भावुक कर दिया है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तट पर शोधकर्ताओं ने 'फ्रैगल' (Fraggle) नाम की एक बॉटलनोज डॉल्फिन को अपने महज दो सप्ताह के मृत शावक को कई दिनों तक पीठ और सिर के सहारे पानी की सतह पर तैराते हुए देखा। यह मार्मिक दृश्य ड्रोन कैमरे में कैद हुआ और सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लाखों लोगों की आंखें नम हो गईं।

 

समुद्री जीवों पर शोध करने वाली संस्था जियोग्राफ मरीन रिसर्च ने इस वीडियो को साझा करते हुए बताया कि यह सिर्फ एक मां का अपने बच्चे के प्रति प्रेम नहीं, बल्कि शोक और बिछड़ने के दर्द की ऐसी कहानी है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

 

पहली बार नहीं टूटा फ्रैगल का दिल

 

शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह हादसा फ्रैगल के साथ पहली बार नहीं हुआ। वह इससे पहले भी अपने चार शावकों को खो चुकी है। इस बार भी उसका बच्चा जन्म के महज दो सप्ताह बाद दुनिया छोड़ गया।

 

रिसर्च टीम ने बताया कि शावक का जन्म सर्दियों के मौसम में हुआ था, जब समुद्र का तापमान कम होने के कारण उसके जीवित रहने की संभावना पहले से ही कम थी। कुछ दिन पहले उसकी सांसें असामान्य रूप से तेज चलती देखी गई थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि निमोनिया या फेफड़ों में गंभीर संक्रमण उसकी मौत की संभावित वजह हो सकता है।

मृत बच्चे को छोड़ने को तैयार नहीं थी मां

 

वीडियो में फ्रैगल अपने मृत शावक को लगातार पीठ और सिर के सहारे पानी की सतह पर संभालती दिखाई देती है। वह उसे एक पल के लिए भी खुद से अलग नहीं होने देती, मानो अब भी उसे जिंदा रखने की कोशिश कर रही हो।

 

समुद्री जीव वैज्ञानिक बताते हैं कि डॉल्फिन अत्यंत बुद्धिमान और सामाजिक जीव होती हैं। जब किसी मां डॉल्फिन का शावक मर जाता है, तो वह कई घंटों या कई दिनों तक उसके शव को अपने साथ लेकर तैरती रहती है। वैज्ञानिक इसे 'मॉर्निंग बिहेवियर' (Mourning Behaviour) यानी शोक व्यक्त करने का प्राकृतिक तरीका मानते हैं।

 

हालांकि, अंततः उसे जीवित रहने के लिए अपने शावक को छोड़ना पड़ता है, क्योंकि भोजन की तलाश करना उसके लिए जरूरी होता है।

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दुख की घड़ी में पूरा समूह बना सहारा

 

इस वीडियो का सबसे भावुक पहलू सिर्फ मां और उसके बच्चे का रिश्ता नहीं, बल्कि उसके पूरे समूह का साथ भी है। फुटेज में देखा जा सकता है कि कई दूसरी डॉल्फिन लगातार फ्रैगल के आसपास तैरती रहीं। वे उसे अकेला छोड़कर नहीं गईं। शोधकर्ताओं का कहना है कि कई बार समूह की दूसरी डॉल्फिन भी मृत शावक को संतुलित रखने में मदद करती हैं और शोक में डूबी मां की सुरक्षा करती हैं।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि डॉल्फिन और व्हेल जैसे समुद्री जीवों के सामाजिक रिश्ते बेहद मजबूत होते हैं। वे एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहते हैं और समूह के सदस्य की पीड़ा को भी महसूस करते हैं।

 

वीडियो ने छू लिया लोगों का दिल

 

यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। करोड़ों लोग इसे देख चुके हैं और हजारों यूजर्स ने भावुक प्रतिक्रियाएं दी हैं।

 

कई लोगों ने लिखा कि यह दृश्य साबित करता है कि भावनाएं सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं हैं। एक यूजर ने कहा, “मां का प्यार हर प्रजाति में एक जैसा होता है।” वहीं दूसरे ने लिखा, “जिस तरह दूसरी डॉल्फिन उसके साथ बनी रहीं, उसने सबसे ज्यादा भावुक कर दिया।”

 

समुद्र से मिला एक बड़ा संदेश

 

फ्रैगल की कहानी केवल एक डॉल्फिन की कहानी नहीं है। यह हमें याद दिलाती है कि प्रेम, अपनापन, बिछड़ने का दर्द और शोक जैसी भावनाएं केवल इंसानों की दुनिया तक सीमित नहीं हैं। कभी-कभी प्रकृति ऐसे दृश्य दिखा देती है, जो बिना कुछ कहे हमें संवेदनशीलता, रिश्तों और साथ निभाने का सबसे बड़ा सबक सिखा जाते हैं।

 

राहुल-रिजिजू मुलाकात बेनतीजा: ‘गृह मंत्री दें जवाब, पीएम मांगे माफी… तभी होगी बात’, परिसीमन बिल पर संसद में फंसा पेच!

kiren rijiju and rahul gandhi

संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच बना गतिरोध टूटने का नाम नहीं ले रहा है। लोकसभा और राज्यसभा में जारी हंगामे के बीच बुधवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसद भवन स्थित चेंबर में जाकर उनसे मुलाकात की। लगभग 50 मिनट तक चली इस उच्चस्तरीय बैठक में कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद रहीं।ALSO READ: Fact-Check: क्या दतिया उपचुनाव हारने के बाद BJP ने हजारों नेताओं को बाहर निकाला?

हालांकि, परिसीमन बिल (Delimitation Bill) पर विपक्ष का समर्थन जुटाने और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की सरकारी कोशिशें इस बैठक के बाद भी बेनतीजा ही रहीं। 

 

1. मुलाकात में क्या हुआ और कहां अटका पेच?

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रस्तावित परिसीमन बिल को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों का रुख जानना चाहा और संसद की कार्यवाही में सहयोग की अपील की। लेकिन राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि जब तक सरकार विपक्ष की मुख्य मांगों पर ध्यान नहीं देती, तब तक किसी भी विधायी कार्य पर सहमति बनना संभव नहीं है। ALSO READ: यूसुफ पठान समेत 3 मुस्लिम सांसदों ने क्यों बनाई NDA से दूरी! क्या 'खेला' हो गया?
 

2. राहुल गांधी की 3 मुख्य शर्तें

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए सरकार के सामने ये प्रमुख मांगें रखी हैं: 

1. गृह मंत्री अमित शाह का सदन में वक्तव्य: विपक्ष की मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद सदन में आकर हालिया प्रदर्शनों के दौरान हुए पुलिस एक्शन और पेलेट गन/लाठीचार्ज के मुद्दे पर विस्तृत बयान दें। 

2. प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी और माफी: विपक्ष का कहना है कि उत्पन्न हुई समस्याओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। 

3. मुद्दों पर सीधी चर्चा: जब तक इन गंभीर विषयों पर गृह मंत्री और प्रधानमंत्री का जवाब नहीं आता, तब तक विपक्ष किसी भी नए बिल या विधायी प्रक्रिया का समर्थन नहीं करेगा। ALSO READ: संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का मार्च, अमित शाह से मांगा जवाब

 

 

किरेन रिजिजू और राहुल गांधी के बीच हुई यह बैठक भले ही गतिरोध को समाप्त न कर सकी हो, लेकिन इसने दोनों पक्षों के कड़े रुख को स्पष्ट कर दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार विपक्ष की मांगों को मानते हुए गृह मंत्री के बयान के लिए तैयार होती है या फिर मानसून सत्र के बाकी बचे दिनों में भी हंगामे का दौर इसी तरह जारी रहता है। 

Fact-Check: क्या दतिया उपचुनाव हारने के बाद BJP ने हजारों नेताओं को बाहर निकाला?

दतिया उपचुनाव में हार के बाद सोशल मीडिया और कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भाजपा के 1000 नेताओं को बाहर करने, नरोत्तम मिश्रा का क्या होगा जैसे दावों के खबरें वायरल हो रही है।

राजनीतिक घटनाक्रमों और आधिकारिक रिपोर्टों के आधार पर इस दावे की पड़ताल:


वायरल दावे का Fact Check

दावा 1: “BJP ने 1,000 नेताओं को पार्टी से बाहर निकाला”

फैक्ट-चेक: भ्रामक और असत्य।

वास्तविकता: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन की ओर से जारी अनुशासनात्म कार्यवाही से जुड़े पत्र में भाजपा जिला दतिया की वर्तमान संगठनात्मक संरचना को तत्काल प्रभाव से भंग करने की बात की है। पार्टी की ओर से जारी पत्र में जिला अध्यक्ष, जिला पदाधिकारी, जिला कार्यसमिति, मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प एवं विभागों सहित समस्त जिला संगठन की वर्तमान संगठना्त्मक इकाईओं को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया है।  पार्टी  की ओर से जारी पत्र में निष्कासन का कोई उल्लेख नहीं है। 

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असल में क्या हुआ?- दतिया उपचुनाव के लिए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाया गया था, तब नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों, पार्षदों और स्थानीय पदाधिकारियों ने खुद विरोध दर्ज कराते हुए इस्तीफे की पेशकश की थी। चुनाव नतीजे आने के बाद चुनाव परिणाओं की समीक्षा के लिए  दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है, जिसके अनुशंसा पर भाजपा जिला संगठनात्मक सरंचना को तत्काल प्रभाव से भंग किया गया। 


क्या थी दतिया भाजपा जिला संगठनात्मक सरंचना? ( जो भंग हुई) 

भाजपा जिला कार्यकारिणी-  20-22 पदाधिकारी

जिले में भाजपा के कुल 16 मंडल- प्रत्येक मंडल में 25 पदाधिकारी

7 जिला मोर्चा प्रमुख और मोर्चा का्र्यकारिणी (प्रत्यके कार्यकारिणी में 15 पदाधिकारी)  

जिला भाजपा में कुल- 707 बूथ (दतिया, भांडेर और सेवढ़ा विधानसभा में) 

 

दावा 2: “नरोत्तम मिश्रा का क्या होगा?” 
फैक्ट-चेक: अटकलें और राजनीतिक विश्लेषण।

वास्तविकता: 2023 का विधानसभा चुनाव दतिया से हराने वाले पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को उपचुनाव में बीजेपी ने प्रत्याशी नहीं बनाया था। शुरुआती असंतोष के बाद नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी के फैसले को स्वीकार किया और बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार भी किया। लेकिन अब चुनाव में हार के बाद सोशल मीडिया पर नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों के भितरघात करने के दावे किए जा रहे  है। अभी नरोत्तम मिश्रा को पार्टी से बाहर नहीं किया गया है। अब उनका राजनीतिक भविष्य और भूमिका पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा। 

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दतिया उपचुनाव में बीजेपी की हार की बात सच है, लेकिन “BJP द्वारा 1,000 नेताओं को बाहर निकाले जाने” का दावा पूरी तरह सहीं नहीं है। अभी केवल भाजपा की जिल संगठनात्मक ईकाई को भंग किया गया है। सभी पदाधिकारी अपने दायित्वों से मुक्त हो गए है लेकिन वह पार्टी के प्राथमिक सदस्य बने हुए है। 

 

एथनॉल पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं पर लगे रोक, किसानों के हित में सरकार के सकारात्मक निर्णयों का हो समर्थन

Ethanol Production India: भारतीय किसान यूनियन धनसिंह कोतवाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन गुर्जर ने एथनॉल नीति को लेकर फैल रही भ्रामक एवं तथ्यहीन सूचनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों के हित में सरकार द्वारा लिए जा रहे सकारात्मक निर्णयों का समर्थन किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि एथनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में प्रत्यक्ष वृद्धि होगी और देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में और मजबूत होगा।

 

पवन गुर्जर ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसानों की आर्थिक समृद्धि के बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है। एथनॉल उत्पादन में वृद्धि से गन्ना, मक्का और धान उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जहां बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं, वहां एथनॉल उद्योग के विस्तार से चीनी मिलों की क्षमता बढ़ेगी, गन्ने की मांग में इजाफा होगा और किसानों के वर्षों से लंबित भुगतान की समस्या के समाधान में मदद मिलेगी। इससे किसानों को समय पर भुगतान और उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

 

उन्होंने कहा कि एथनॉल केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। जैव ईंधन के रूप में एथनॉल का अधिक उपयोग प्रदूषण कम करने और स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगा।

गन्ने का समर्थन मूल्य 600 रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग

पवन गुर्जर ने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए केवल एथनॉल नीति पर्याप्त नहीं है। सरकार को आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने का समर्थन मूल्य कम से कम 600 रुपए प्रति क्विंटल घोषित करना चाहिए। साथ ही, सभी प्रमुख कृषि उपजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके और उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर फसल न बेचनी पड़े।

नितिन गडकरी को सौंपेंगे ज्ञापन

उन्होंने बताया कि भारतीय किसान यूनियन धनसिंह कोतवाल का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर एथनॉल के समर्थन में ज्ञापन सौंपेगा। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष, वरिष्ठ पदाधिकारी और किसान प्रतिनिधि शामिल होंगे। संगठन एथनॉल नीति को और अधिक किसान हितैषी बनाने के सुझाव भी सरकार के समक्ष रखेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में वाहन निर्माताओं के साथ समन्वय कर E50 या उससे अधिक एथनॉल मिश्रण वाले वाहनों के निर्माण को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

किसानों के हित में संघर्ष जारी रहेगा

पवन गुर्जर ने स्पष्ट किया कि भारतीय किसान यूनियन धनसिंह कोतवाल किसी राजनीतिक दल से जुड़ा संगठन नहीं है। संगठन किसान, मजदूर और नौजवानों के अधिकार एवं सम्मान के लिए कार्य करता है। किसानों के हित में सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों का समर्थन किया जाएगा, जबकि किसान विरोधी नीतियों का लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में सरकार की कोई नीति किसानों, मजदूरों या नौजवानों के हितों के विरुद्ध होती है तो संगठन संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप उसका सशक्त विरोध करेगा। संगठन का उद्देश्य केवल आंदोलन करना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना, उन्हें सम्मान दिलाना और उनके सामाजिक एवं आर्थिक जीवन को मजबूत बनाना है।

 

उन्होंने कहा कि देश का किसान आज भी अपनी मेहनत से देश का पेट भर रहा है। इसलिए सरकार की प्राथमिकता किसानों की आय, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य, समय पर भुगतान, सस्ती खाद-बीज, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ मिलना चाहिए। संगठन किसानों से जुड़े मुद्दों पर लगातार जमीनी स्तर पर काम करता रहेगा और आवश्यक कार्रवाई की मांग उठाता रहेगा।

 

अंत में पवन गुर्जर ने कहा कि एथनॉल जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जनता तक तथ्यात्मक और सही जानकारी पहुंचाई जानी चाहिए, ताकि किसानों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न फैले और वे सही जानकारी के आधार पर अपने भविष्य से जुड़े निर्णय ले सकें।

बेटियों की खास कैबिनेट से मिलकर गदगद हुए डॉ. मोहन यादव, बताया कितना और कैसे इस्तेमाल करें AI

' किताब से कल तक' कार्यक्रम में सीएम डॉ. यादव ने छात्राओं के साथ किया संवाद

छात्राओं के मंत्रि-मंडल को मुख्यमंत्री ने बैठाया मंच पर, समझी पूरी कार्यवाही

सीएम डॉ. मोहन यादव ने शिक्षकों के साथ भी किया संवाद, साझा किए विचार

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अपनी कैबिनेट है। लेकिन, 5 अगस्त को उनका परिचय एक और खास कैबिनेट से हुआ। यह कैबिनेट थी भोपाल के कमला नेहरू सांदीपनि कन्या शासकीय विद्यालय की। इस कैबिनेट से मिलकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव गदगद हो गए। उन्होंने बाकायदा स्कूल की कैबिनेट को मंच पर अपने पास बैठाया और कार्रवाई को समझा। एक तरफ उन्होंने छात्राओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी, तो दूसरी ओर उनके संवाद से भी नया अनुभव लिया। दरअसल, स्कूल में 'किताब से कल तक' कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में सीएम डॉ. यादव ने छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने छात्राओं को बताया कि वे एआई का कितना और कैसे इस्तेमाल करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्राओं को सड़क पर घायल राहगीरों की सहायता करने का संदेश दिया। छात्राओं के बाद सीएम डॉ. यादव ने शिक्षकों से भी संवाद कर विचार साझा किए। 

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सांदीपनि विद्यालय के परिसर में मैं आप सभी का स्वागत करता हूं। मैं आपका भाई हूं। मैं भी सरकारी स्कूल से ही पढ़ा हूं। हां, इतने अच्छे स्कूल से नहीं पढ़ा हूं। हमारे समय स्कूल अलग प्रकार के होते थे। आप सभी भाग्यशाली हैं जो आपको इतना सुंदर परिसर पढ़ने के लिए मिला है। परमात्मा ने आप पर विशेष कृपा करके आपका जन्म थोड़ी देर से किया, ताकि आप अच्छे स्कूल में पढ़ सकें। मैं सभी का अभिनंदन करता हूं। उन्होंने कहा कि भारत की विशेषता है कि उसे दुनिया में बहुत मान-सम्मान मिलता है। भारत को लोग आदर से देखते हैं। भारत का संधि विच्छेद करें तो भा का अर्थ है जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए और रत का मतलब है लीन। जो अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाने में लीन है उसे कहते हैं भारत।

इसी तरह गुरु शब्द का भी अर्थ है। भारत के संस्कारयुक्त जीवन के कारण उसे सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। हमें संस्कार संस्कृति से मिलते हैं। हमारी संस्कृति जियो और जीने दो की है, वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति है। हम अपना जीवन सभी के भले में लगाएं। उन्होंने कहा कि भारत ने ऋषि-मुनियों के मार्गदर्शन में अच्छी व्यवस्था खड़ी की। हम अपनी शिक्षा व्यवस्था पर गर्व कर सकते हैं। कई देश हैं जो धन संग्रह करना जानते हैं , लेकिन इस ज्यादा संग्रह से वे लंबे समय तक टिके नहीं रह सकते। देश लंबा चलता है मूल संस्कारों से, हमारी अच्छाइयों से। 

 

कैबिनेट के सदस्यों से मिले सीएम डॉ. यादव-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूछा कि मैं यहां आया तो मुझे पता चला कि स्कूल में छात्राओं की कैबिनेट भी है। उन्होंने स्कूल कैबिनेट के सदस्यों को मंच बुलाया और सबका परिचय लिया। 12वीं क्लास की शिवानी ने सीएम डॉ. यादव को बताया कि मैं स्कूल की स्पोर्ट्स मिनिस्टर हूं। मैं स्पोर्ट्स पसंद करने वाले बच्चों के मन की बात शिक्षकों को बताती हूं। 12वीं कक्षा की सपना गिरी ने बताया कि मैं कल्चरल मिनिस्टर हूं। स्कूल में जितने सांस्कृतिक प्रोग्राम होते हैं, मैं उन्हें देखती हूं। 11वीं क्लास की दीपिका परते ने बताया कि मेरा काम अनुशासन बनाकर रखना है। मेरा काम छात्रों को सही मार्ग दिखाना है। शालिनी परतेले ने बताया कि मैं डिसिप्लीन मिनिस्टर हूं। मैं स्कूल का अनुशासन बनाए रखती हूं। ये सुनकर सीएम डॉ. मोहन यादव मुस्कुराए।

उन्होंने कहा कि अनुशासन बनाने वाले के प्रति लोग नाराज रहते हैं। इस पर शालिनी ने जब कहा कि सारे बच्चे अच्छे हैं तो सीएम डॉ. यादव हंस पड़े। स्कूल की कैबिनेट मेंबर स्नेहा ने बताया मैं स्कूल की हैड गर्ल हूं। मैं कैबिनेट के काम के साथ-साथ स्कूल की व्यवस्थाओं को भी देखती हूं। डिप्टी हैड गर्ल सालेह खान ने बताया कि मैं स्कूल की व्यवस्था में हाथ बंटाती हूं। सेक्रेटरी भावना पाठे ने बताया कि मैं सीनियर्स की मदद करती हूं, जो काम बताया जाता है वो करती हूं। स्कूल की कैबिनेट ने बताया कि वे महीने में एक बार टीचरों के साथ मीटिंग करती है। ये कैबिनेट एक साल के लिए बनती है। बच्चे वोट देते हैं। जैसे चुनाव होते हैं, वैसे ही यहां कैबिनेट बनती है। बाकायदा कैंपेंनिंग होती है। कैबिनेट पूरे साल का कैलेंडर बनता है। और, अगर कोई खराब काम करता है उसे हटा भी दिया जाता है। 

इतना खास है यह स्कूल-स्कूल टीचर शिवानी शर्मा ने बताया कि वर्ष 1958 में स्थापित कमला नेहरू कन्या शासकीय विद्यालय अब मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सहयोग से सांदीपनि विद्यालय के रूप में स्थापित हो चुका है। यहां नर्सरी से कक्षा 12वीं तक 1800 से अधिक छात्राएं अध्ययनरत हैं। सांदीपनि विद्यालय में इन्हें सर्व सुविधायुक्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है। यहां विज्ञान, वाणिज्य और कला सहित अन्य पाठ्यक्रमों के माध्यम से छात्राओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय में स्मार्ट क्लासेस, कंप्यूटर लैब, गणित प्रयोगशाला, लाइब्रेरी है।

स्कूल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से क्लासेस का संचालन होता है। कमला नेहरू सांदीपनि कन्या शासकीय विद्यालय को हरित विद्यालय श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर नामित किया गया है। राज्य स्तर पर स्कूल सर्टिफिकेशन में विद्यालय को सिल्वर अवॉर्ड मिला है। बोर्ड परीक्षाओं में परिणाम शत प्रतिशत रहा है। विद्यालय में कैबिनेट गठित करने के लिए ईवीएम ऐप से चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराते हैं। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी चुनाव के लिए नामांकन करते हैं और 8 से 12वीं तक के विद्यार्थी वोटिंग करते हैं। 

 

अपना दिमाग जरूर लगाएं- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सांदीपनि विद्यालय देश के सबसे अच्छे विद्यालय हैं। कमला नेहरू स्कूल के 58 बच्चे मेरिट में उत्तीर्ण हुए हैं, यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। आज निजी विद्यालयों के बच्चे भी सांदीपनि विद्यालयों में आने के लिए लालायित हैं। बच्चे पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर, सेना में अफसर बनें। विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में भी आगे बढ़ने की आवश्यकता है। अगर देश के लोकतंत्र को जीवित रखना है तो राजनीति में भी आने पड़ेगा। युवा शिक्षित होकर कृषि, पशुपालन और फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से आगे बढ़ें। देश और प्रदेश को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाएं। राज्य सरकार ने कई कल्याणकारी योजनाएं तैयार की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्राओं से पूछा- किताब से कल तक विषय का क्या अर्थ है? छात्रा एकता राजौरिया ने बताया कि किताब से कल तक अर्थ है कि आज बच्चे जो कुछ पढ़ रहे हैं, उसका जीवन में क्या महत्व है।

आज हम जो पढ़ रहे हैं, वहीं भविष्य को साकार बनाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- सिलेबल की पढ़ाई केवल पाठ्यक्रम के लिए आवश्यक है। छात्रा प्रिंसी वर्मा ने उनसे पूछा- क्या आप चैटजीपीटी का प्रयोग करते हैं, यदि हां तो क्या सर्च करते हैं? इस पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मैं किसी कार्यक्रम के विषय पर वर्तमान परिदृश्य में क्या नई चीजें हैं, उन्हें सर्च करता हूं। जो हमें अपने भाषण में शामिल करना चाहिए। लेकिन चैटजीपीटी हो या ग्रोक्स, जिसने भी एआई टूल्स हों, ये आखिरी नहीं है। एआई का उपयोग करें, लेकिन स्वयं का दिमाग लगाएं और आंकड़ों को क्रॉस चेक जरूर करें।

 

भाई-बहनों को पढ़ने के लिए करें प्रेरित-छात्रा लारा खत्री ने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या आप इंस्टाग्राम यूज करते हैं और किसे फॉलो करते हैं? इस पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि सोशल मीडिया के जमाने में हर राजनेता को वर्तमान जरूरतों के साथ चलना पड़ता है। इंस्टाग्राम भी हमें इस्तेमाल करना पड़ता है। मैं पीएम सर को फॉलो करता हूं। छात्रा एकता राजौरिया ने पूछा कि सिलेबस के साथ और कौनसी पुस्तकें पढ़ें, जो हमारे सामान्य ज्ञान को बढ़ाएं? सीएम डॉ. यादव ने कहा कि पाठ्यक्रम पाठ्यक्रम की पढ़ाई के अलावा हमें अपने जीवन का लक्ष्य तय करके आगे बढ़ना चाहिए। टारगेट से जुड़े विषयों के अध्ययन पर ध्यान देना चाहिए। ईश्वर ने हमें विशेष गुण दिया है कि जो जैसा सोचता है, वैसा बन जाता है। मैंने नौकरी नहीं की, खेती की और व्यवसाय किया। बेटी को डॉक्टर बनाया।

अपने छोटे भाई-बहनों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। छात्रा अयोध्या- आपने डॉक्टरेट (पीएचडी) तक की पढ़ाई और खेल विधा में पारंगत होने के लिए कैसे बैलेंस किया? मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्यार्थी अपने पाठ्यक्रम की पढ़ाई के साथ-साथ खेलों के लिए भी समय निकालें। अपनी दिनभर की दिनचर्या निर्धारित करें। इसमें खेलकूद के लिए भी टाइम दें। सोच-विचार के लिए थोड़ा खाली समय भी निकालें। मैं सीएम हाउस में रहते हुए भी नियमित स्वाध्याय करता हूं। डायरी लिखता हूं और आगे करने वाले कार्यों की लिस्ट बनाता हूं। पिछले कार्यों का मूल्यांकन भी करता हूं। जब मैं उज्जैन विकास प्राधिकरण का चेयरमैन बन गया, तब भी राजनीति शास्त्र में एमए किया। उसके बाद इसी विषय में पीएचडी भी कर ली। मैं पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन रखते एमबीए भी किया। जीवन में पढ़ाई का दौर चलता रहना चाहिए। पढ़ने के लिए सिर्फ डिग्री जरूरी नहीं है, बल्कि यह मन की जिज्ञासा को शांत करने के लिए होनी चाहिए। अध्ययन के लिए जीवन में अनुशासन की भी आवश्यकता होती है। लोगों के सामने अपने ज्ञान के प्रदर्शन का तरीका व्यक्तित्व को निखारता है।

 

इस तरह कम करें तनाव-छात्रा आकांक्षा ने पूछा कि आप तनाव को हैंडिल करने के लिए क्या करते हैं? इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम जिस स्थिति में हो, अपने मन को पहले से तैयार कर लें। मैं संगीत सुनता हूं, योग और व्यायाम भी करता हूं। तनाव कम करने के लिए दिन के साथ रात में नींद का भी समय निर्धारित करें। छात्रा निकिता कटारा ने पूछा कि आपने इतने सुंदर विद्यालयों के नाम सांदीपनि क्यों रखा? मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता हुई। मित्रता को जीवनभर निभाना चाहिए। महर्षि सांदीपनि आश्रम के नाम पर ऐसे विद्यालयों के नाम रखे गए हैं। छात्रा शालिनी पटेल ने पूछा कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आपको क्या प्रेरणा मिलती है। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बिना थके, निरंतर समाज हित में काम करते रहें और नई तकनीक को इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

 

शिक्षकों के साथ हुआ आत्मीय संवाद-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षकों से भी आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि हमारे विद्यार्थी पढ़-लिखकर उन्नत खेती करें, राजनीति में आएं, सैनिक बनकर देश सेवा करें। व्यवसाय शुरू कर स्वावलंबी बनें, दूसरों को भी रोजगार प्रदान करें। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षक उन्हें प्रेरित करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षकों से हल्के अंदाज में विज्ञान के रहस्यों और पारिवारिक जीवन से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यत पिंडे तत ब्राह्मांडे, जैसा हमारा शरीर है, वैसा ही ब्रह्मांडे। व्यक्ति को प्रत्येक सांस के साथ जीवन मिलता है। हमारा पिंड हर पल बदलता है। उज्जैन में वैधशाला पर तो परछाई भी साथ छोड़ देती है।  एक शिक्षिका ने बताया कि सांदीपनि कन्या शासकीय विद्यालय में कक्षाओं की शुरुआत आत्मीयता के साथ खुशनुमा माहौल में होती है। बच्चों को समूह में एक्टिविटी करवाई जाती है। शिक्षकों के प्रयास से विद्यालयों में सकारात्मक वातावरण निर्मित हुआ है।

जंतर-मंतर पर बड़ी आतंकी साजिश नाकाम! 4 नाबालिग समेत 9 गिरफ्तार, ISI कनेक्शन और विदेशी फंडिंग की जांच

punjab police busted terror module

पंजाब पुलिस ने दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान कथित आतंकी साजिश के मामले में चार नाबालिगों समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से पुलिस ने 3 अवैध पिस्तौल, 4 पेट्रोल बम (बोतल वाले) और 9 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। 

 

 

जंतर मंतर पर यूपी के व्यक्ति से संपर्क

अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर के अनुसार, जांच में सामने आया है कि आरोपियों को पाकिस्तान में बैठे कथित ISI हैंडलर से निर्देश मिल रहे थे। पुलिस का दावा है कि जंतर-मंतर पहुंचने के बाद आरोपियों को स्थानीय स्तर पर मदद और सामग्री उपलब्ध कराने की कोशिश की गई थी। वे उत्तर प्रदेश के रहने वाले एक व्यक्ति के संपर्क में भी आए थे, जिसे कथित तौर पर हथियार और विस्फोटक मुहैया कराने थे।

 

पुलिस के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता के चलते वहां कोई वारदात नहीं हो सकी और आरोपी वापस पंजाब लौट आए। अब जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही हैं। विदेशी फंडिंग, स्थानीय मदद, हथियारों की सप्लाई और दूसरे संभावित सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

जांच से क्या पता चला?

प्राथमिक जांच से पता चला है कि आरोपी विदेशी स्थित आईएसआई हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहे थे, जो स्थानीय युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने, सुरक्षा प्रतिष्ठानों की निगरानी करने, अवैध हथियार हासिल करने और सार्वजनिक शांति भंग करने के लिए भर्ती करने की कोशिश कर रहे थे।

जांच में रेलवे ट्रैक के पास निगरानी कैमरे लगाने का भी खुलासा हुआ है, जिनका फुटेज कथित तौर पर विदेशी हैंडलर्स के साथ साझा किया जाता था। अमृतसर के मोहकमपुरा, एयरपोर्ट और सी-डिवीजन पुलिस स्टेशनों में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

इंदौर में फर्जी Instagram ID से सहेली को किया ब्लैकमेल, अश्लील मैसेज भेजे, आवाज बदलकर दी धमकी, FIR दर्ज

इंदौर में साइबर तकनीक की मदद से उत्पीड़न का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक सिरफिरी छात्रा ने फर्जी इंस्टाग्राम आईडी (Fake Instagram ID) का इस्तेमाल कर के अपनी ही सहेली को ही मानसिक प्रताड़ना का शिकार बना डाला। आरोपी छात्रा ने न सिर्फ अश्लील मैसेज भेजे, बल्कि आवाज बदलकर फोन पर धमकियां भी दीं। इस गंभीर मामले में पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज की है।
 
इंदौर की खजराना पुलिस ने सोशल मीडिया पर फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाकर बदनाम करने और धमकाने के आरोप में एक छात्रा के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोपी छात्रा अपनी पूर्व की क्लासमेंट को अश्लील मैसेज भेज रही थी और आवाज बदलकर ऑडियो कॉल के जरिए धमकियां भी दे रही थी। पीड़िता की शिकायत पर पहले साइबर पुलिस ने जांच की, जिसके बाद मामला खजराना थाने पहुंचा।
 
पुलिस के मुताबिक, पीड़िता और आरोपी छात्रा रिया तीन साल तक एक ही स्कूल में साथ पढ़ चुकी हैं। करीब तीन महीने पहले पीड़िता की सगाई हुई थी। इसके बाद उसकी इंस्टाग्राम आईडी पर एक फर्जी अकाउंट से अश्लील और आपत्तिजनक संदेश आने शुरू हो गए। शुरुआत में पीड़िता ने इन संदेशों को नजरअंदाज किया।
 
कुछ समय बाद आरोपी ने पीड़िता की मां और होने वाली सास के बारे में भी आपत्तिजनक बाते करते हुए मैसेज भेजे। लगातार मिल रहे मैसेज से पीड़िता को संदेह हुआ कि यह हरकत कोई परिचित व्यक्ति कर रहा है। इसी दौरान उसी फर्जी इंस्टाग्राम आईडी से ऑडियो कॉल भी आया, जिसमें कॉल करने वाले ने युवक की आवाज निकालकर बात की और धमकियां दीं।
 
परेशान होकर पीड़िता ने साइबर पुलिस से शिकायत की। जांच के दौरान पता चला कि फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाकर मैसेज और कॉल करने वाली कोई और नहीं, बल्कि उसकी पूर्व क्लासमेट रिया थी। पीड़िता ने जब रिया से इस संबंध में बात की, तो उसने कथित तौर पर उसे धमकाते हुए कहा कि वह उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।
 
साइबर जांच की रिपोर्ट मिलने के बाद खजराना पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर आरोपी छात्रा के खिलाफ ब्लैकमेलिंग, धमकी देने और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।