एक बार मंगेतर से मिला दो, सगाई से इनकार पर दुखी युवती ने की आत्‍महत्‍या, मंगेतर ने लगाए थे चैटिंग के आरोप

एक बार मंगेतर से मिला दो, सगाई से इनकार पर दुखी युवती ने की आत्‍महत्‍या, मंगेतर ने लगाए थे चैटिंग के आरोप

इंदौर में मंगेतर द्वारा शादी से इनकार करने के बाद एक 19 साल की युवती मारिया ने जहर खाकर आत्‍महत्‍या कर ली। वो लगातार अपने मंगेतर सोहेल से मिलने की गुहार लगा रही थी। लेकिन मंगेतर और घरवालों ने उसे मिलने से साफ मना कर दिया। बताया जा रहा है कि मारिया सगाई टूट जाने की वजह से दुखी और परेशान थी।

घटना विजय नगर की है। स्वर्ण बाग कॉलोनी निवासी 19 साल की मारिया ने गुरुवार देर रात संदिग्ध परिस्थिति में जहर खा लिया। तबीयत बिगड़ने पर जब छोटी बहन ने उससे कारण पूछा, तो उसने जहर खाने की बात स्वीकार की। इसके पश्चात परिजन तुरंत उसे इलाज के लिए एमवाय अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया है और पुलिस ने मामले की जांच प्रारंभ कर दी है।

जून 2025 में हुई थी सगाई : मारिया के पिता उमर शेख के अनुसार उनकी बेटी मारिया की सगाई 15 जून 2025 को आजाद नगर निवासी सोहेल उर्फ साहिल के साथ हुई थी। दोनों की सगाई को लगभग 1.5 साल बीत चुका था और इसी साल दोनों की शादी होना थी। किंतु करीब एक हफ्ते पहले सोहेल ने फोन पर मारिया को बताया कि वह अब उससे शादी नहीं करना चाहता और सगाई तोड़ रहा है। सोहेल ने अपने परिवार को भी इस निर्णय के लिए सहमत कर लिया था। जब मारिया के परिजनों ने सोहेल के परिवार से संपर्क किया, तो उन्होंने यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि लड़का जब शादी नहीं करना चाहता तो वे इसमें कुछ नहीं कर सकते।

एक बार मंगेतर से बात करा दो प्‍लीज : बताया जा रहा है कि सगाई टूटने की खबर के बाद से मारिया अत्यधिक मानसिक तनाव में रहने लगी थी। वह पिछले 8 दिनों से सोहेल से केवल 1 बार आमने सामने मिलकर बात करना चाहती थी। परिजनों का कहना है कि सोहेल ने उससे मिलने या बातचीत करने से साफ मना कर दिया था। सोहेल द्वारा आजाद नगर इलाके में जूस की दुकान का संचालन किया जाता है। इसके बाद वो गहरे तनाव में चली गई। मारिया ने गुरुवार देर रात यह आत्मघाती कदम उठा लिया।

अन्य लड़के से चैटिंग का आरोप : परिजनों के मुताबिक सोहेल ने मारिया पर किसी अन्य युवक से मोबाइल पर बातचीत और चैटिंग करने का आरोप लगाया था। उसका यह भी कहना था कि मारिया उसे टाइम नहीं देती है। हालांकि मारिया के पिता उसे लगातार समझा रहे थे और दोनों पक्षों के बीच चल रहे इस विवाद को सुलझाने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन वो एक बार मंगेतर सोहेल से मिलना चाहती थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है और परिवार द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की गहराई से जांच की जा रही है।

कनाडा में नमकीन खाते ही करनाल के युवक का हार्टफेल:गर्भवती पत्नी संग सैर पर निकला था; बहू की डिलीवरी के लिए विदेश जाने वाले थे परिजन

कनाडा में रह रहे हरियाणा के करनाल के एक 27 वर्षीय युवक की अचानक हार्ट फेल होने से मौत हो गई। युवक अपनी गर्भवती पत्नी के साथ सैर पर निकला था। इसी दौरान उसने एक दुकान से लेकर नमकीन खाई, जिसके बाद अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने डेड डिक्लेयर कर दिया। परिवार के मुताबिक, युवक को कनाडा की नागरिकता (PR) मिल चुकी थी। उसकी पत्नी 7 माह की गर्भवती है। दोनों की करीब दो साल पहले शादी हुई थी। दोनों अपने आने वाले बच्चे को लेकर बेहद खुश था, अचानक खुशियां गम में बदल गईं। बेटे की मौत की खबर के बाद से दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब शव को भारत लाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। बताया गया कि गुरुवार को कनाडा में पोस्टमॉर्टम हुआ। कपल के कई रिश्तेदार कनाडा और अमेरिका से मौके पर पहुंचे हैं। 9 साल पहले स्टडी वीजा पर गया कनाडा करनाल के गांव नरूखेड़ी के गुरमेल नरवाल का बेटा रजत वर्ष 2017-18 में स्टडी वीजा पर कनाडा गया था। परिजन दिलबाग ने बताया कि रजत वहां पढ़ाई के साथ प्लंबरिंग का काम भी करता था। वह काफी मेहनती थी और उसे स्थाई नागरिकता (PR) मिल गई थी। फिलहाल वह कनाडा के ब्रैम्पटन, ओंटारियो में रह रहा था। रजत का भाई पम्मी भी वर्ष 2017-18 में अमेरिका गया था और वहां काम करता है। शादी के 2 माह बाद पत्नी को कनाडा ले गया रजत की शादी 4 जनवरी 2025 को पानीपत के मॉडल टाउन निवासी अक्षिता के साथ हुई थी। शादी के करीब दो महीने बाद ही वह पत्नी को लेकर कनाडा चला गया। अक्षिता अभी सात महीने की गर्भवती है। रजत और अक्षिता अपने होने वाले बच्चे को लेकर बेहद उत्साहित थे। अकसर परिवार के साथ होने वाले बच्चे की परवरिश को लेकर चर्चा करते थे। परिजनों के अनुसार, रजत ने मौत से एक दिन पहले ही अपनी मां सुनीता से फोन पर बात की थी। उसने परिवार को बताया था कि सब ठीक-ठाक है। सैर पर निकले थे कपल, तबीयत खराब हुई परिजनों ने बताया कि 18 अगस्त की शाम दोनों रोजाना की तरह सैर पर निकले थे। इस दौरान नमकीन खाने का मन हुआ तो एक दुकान से नमकीन ली। रजत ने जैसे ही नमकीन खाई, अचानक उसकी तबीयत खराब होने लगी। पत्नी घबरा गई। उसकी हालत बिगड़ती देखकर आसपास के लोग मौके पर जुटे और अस्पताल पहुंचाने में मदद की। परिजन दिलबाग के अनुसार, अस्पताल पहुंचने तक रजत का शरीर नीला पड़ चुका था। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार का कहना है कि मौत का कारण हार्ट फेल्योर बताया गया है। बहन ने फोन पर दी परिवार को खबर रजत की चचेरी बहन अंशुल भी कनाडा में रहती है। उसने फोन कर परिवार को घटना की जानकारी दी। अचानक उसकी मौत की खबर आने से माता-पिता गुरमेल और सुनीता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। रजत का भाई पम्मी भी मौत की सूचना मिलने के बाद वह अपने साथियों के साथ अमेरिका से कनाडा पहुंचा है। परिवार ने अब रजत का शव भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। माता-पिता भी जाने वाले थे कनाडा परिजनों ने बताया कि अक्षिता सात महीने की गर्भवती होने के कारण रजत के माता-पिता को भी कनाडा जाना था, ताकि वे उसकी देखभाल में साथ रह सकें। दोनों के पासपोर्ट रिन्यू होने के लिए गए हुए थे। पासपोर्ट मिलते ही उन्हें कनाडा रवाना होना था, लेकिन इससे पहले ही रजत की मौत हो गई। परिवार के लोग अब शव भारत लाने की तैयारी में जुटे हैं। इस दुखद घटना से पूरे गांव में शोक का माहौल है। —————— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में करनाल के युवक की मौत:5 साल पहले काम करने गया था, परिजन कर रहे शव को भारत लाने का प्रयास करनाल के चोरकारसा गांव के एक युवक की अमेरिका में हार्ट अटैक से मौत हो गई। युवक पांच साल पहले बेहतर भविष्य के लिए अमेरिका गया था और वहीं ग्रीन कार्ड होल्डर बनकर काम कर रहा था। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। (पूरी खबर पढ़ें)

गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, विदेश में पढ़ाई के लिए अब 10 लाख रुपये तक आय वालों को मिलेगा लोन

गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, विदेश में पढ़ाई के लिए अब 10 लाख रुपये तक आय वालों को मिलेगा लोन

education loan

गुजरात सरकार ने अनारक्षित वर्ग के छात्रों को एक बड़ी राहत दी है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए विदेश अध्ययन ऋण योजना के तहत पारिवारिक वार्षिक आय सीमा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी है।

 

19 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक संकल्प के अनुसार, अब 10 लाख रुपये तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले छात्र इस योजना के तहत विदेश में पढ़ाई के लिए ऋण पाने के पात्र होंगे। पहले इस योजना का लाभ उठाने के लिए अधिकतम आय सीमा 6 लाख रुपये थी, जिसमें अब 4 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

 

पिछले संकल्प के अन्य सभी प्रावधान यथावत रहेंगे

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 'विदेश अध्ययन ऋण योजना' के तहत पहले जारी किए गए वर्तमान संकल्पों के अन्य सभी प्रावधान यथावत (जैसे थे वैसे ही) रहेंगे। यह फैसला वित्त विभाग और सरकार की 3 अगस्त 2026 की टिप्पणी से मिली मंजूरी के तहत जारी किया गया है।

Hyundai to hike prices from September 2026

Hyundai to hike prices from September 2026
Hyundai logo

In a regulatory filing, Hyundai Motor India announced that it will hike prices across its entire portfolio in September 2026. Models will see a price increase of up to 1 percent. The brand has cited “rising input and commodity costs, higher operational expenses and continuing geopolitical and macroeconomic uncertainties, among other factors” as reasons for the price increase.

  1. This marks Hyundai’s third price hike this year
  2. Prices to increase by up to 1 percent

Hyundai price hike in September 2026: Additional details 

While Hyundai has not revealed the revised prices for its models, it said the increase will vary by model and variant. Depending on that, one can expect a hike ranging from Rs 7,767 to Rs 23,672. Hyundai also said it continues to optimise costs and absorb cost escalations to mitigate impact on customers. “However, the persistence of these cost pressures has necessitated passing on a part of the increased costs to customers through this marginal price revision,” it said.

Below are the prices for locally built Hyundai models currently on sale in India:

Hyundai cars price list in September 2026

Model

Price range (in Rs lakh)

Grand i10 Nios

5.59-8.04

Aura

5.99-8.60

i20

5.99-11.74

Exter

5.80-9.46

Venue

7.99-15.64

Creta

10.90-19.95

Verna

10.99-18.26

Alcazar

14.50-21.25

Creta Electric

18.02-23.67

This is the third time this year that the Korean carmaker has implemented a price hike. The previous revisions happened in June and January.

पीवी सिंधु और आयुष शेट्टी जीते लेकिन यह स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी हुआ बाहर

इंदिरा गांधी स्टेडियम में बुधवार को बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 के तीसरे दिन, मेज़बान खिलाड़ियों के लिए मिले-जुले नतीजे रहे। पूर्व चैंपियन पीवी सिंधु और बड़े खिलाड़ियों को हराने वाले आयुष शेट्टी ने अपने दूसरे राउंड के प्रतिद्वंद्वियों को आसानी से हरा दिया।

नौवीं वरीयता प्राप्त सिंधु ने महिला सिंगल्स के दूसरे राउंड में कनाडा की झांग वेन यू को 21-16, 21-17 से हराया, जबकि आयुष ने श्रीलंका के डुमिंडु अबेविक्रमा को 21-8, 21-10 से हराने में सिर्फ़ 26 मिनट लिए और पुरुष सिंगल्स के प्री-क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाई।

राउंड ऑफ़ 16 में, सिंधु का मुक़ाबला चीन की तीसरी वरीयता प्राप्त वांग ज़ी यी से होगा, जिन्होंने दिन की शुरुआत में मलेशिया की कारुओथेवन लेतशाना को 21-16, 21-9 से हराया था। आयुष का प्री-क्वार्टर फ़ाइनल मुक़ाबला इंडोनेशिया के 11वीं वरीयता प्राप्त अल्वी फरहान से होगा। 2023 के वर्ल्ड जूनियर चैंपियन ने फ़िनलैंड के जोआकिम ओल्डोर्फ़ के ख़िलाफ़ अपना दूसरे राउंड का मैच 21-12, 21-9 से आसानी से जीत लिया।

PV Sindhu

वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो बार ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वाले सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी भी बिना कोर्ट पर उतरे ही राउंड ऑफ़ 16 में पहुँच गए, क्योंकि अलेक्जेंडर डन की चोट के कारण उनके स्कॉटिश प्रतिद्वंद्वियों ने उन्हें वॉकओवर दे दिया।

जहाँ सिंधु और आयुष को अपने दूसरे राउंड के मुक़ाबलों में कोई परेशानी नहीं हुई, वहीं लक्ष्य और उन्नति को निराशा हाथ लगी। 14वीं सीड वाले लक्ष्य को अमेरिका के 18 साल के गैरेट टैन ने एक घंटे 13 मिनट तक चले कड़े मुकाबले में 19-21, 21-19, 21-17 से हराया। वहीं, उन्नति कनाडा की 13वीं सीड मिशेल ली के खिलाफ दो मैच पॉइंट का फायदा नहीं उठा सकीं और अपने वर्ल्ड चैंपियनशिप डेब्यू में 11-21, 21-9, 23-21 से हार गईं।

लक्ष्य ने टैन के खिलाफ पहला गेम तो जीत लिया, लेकिन अमेरिकी खिलाड़ी ने अपने ज़बरदस्त स्मैश से घरेलू खिलाड़ी को कड़ी टक्कर दी। लक्ष्य ने दूसरे गेम में वापसी करते हुए चार गेम पॉइंट बचाए, लेकिन मैच को निर्णायक गेम (डिसाइडर) में जाने से नहीं रोक सके। तीसरे और आखिरी गेम में भी लक्ष्य 4-11 से पीछे थे, लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए स्कोर 16-17 तक पहुँचाया; हालाँकि, कुछ गलतियों और आक्रामक खेल दिखा रहे टैन ने उनकी वापसी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

इससे पहले, उन्नति उलटफेर करने के करीब पहुँच गई थीं क्योंकि उन्होंने ली के खिलाफ दो मैच पॉइंट हासिल कर लिए थे। लेकिन दोनों ही मौकों पर उनके शॉट साइड में बाहर चले गए और ली ने मौके का फायदा उठाते हुए ‘डाउन-द-लाइन’ स्मैश के साथ मैच जीत लिया।

नोएडा का ये OTT स्टार्टअप हरियाणवी-भोजपुरी कंटेंट के दम पर चमका! 2 साल में 6.3 गुना बढ़ा रेवेन्यू

STAGE OTT Platform: भारत में जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की बात होती है, तो ज्यादातर लोग नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम का नाम लेते हैं। लेकिन इस बीच देश के रीजनल ‘बोली आधारित’ ओटीटी प्लेटफॉर्म STAGE ने चुपके से एक ऐसा बड़ा मार्केट कब्जा लिया है, जिसे बड़े-बड़े ब्रॉडकास्टर्स ‘निश’ (Niche) समझकर छोड़ देते थे।

कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, FY24 से FY26 के बीच STAGE के रेवेन्यू में 6.3 गुना का जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसका सालाना कंपाउंडेड ग्रोथ रेट (CAGR) लगभग 150% रहा है।

FICCI-EY की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के डिजिटल वीडियो और ओटीटी मार्केट में बड़े दिग्गजों के बीच STAGE ने अपनी मजबूत जगह बना ली है। भारतीय ओटीटी मार्केट में STAGE की हिस्सेदारी 1.6% पर पहुंच गई है। STAGE ने अपनी शुरुआत हरियाणवी और राजस्थानी बोलियों से की थी, लेकिन अब यह मॉडल 6 भाषा क्षेत्रों में फैल चुका है।

STAGE के सह-संस्थापक और सीईओ विनय सिंघल ने कहा, ‘भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं और 1,900 से ज्यादा बोलियां हैं, लेकिन स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री ने सिर्फ 5-6 भाषाओं के लिए कंटेंट बनाया। बाकी सबको ‘निश’ कह दिया गया। जबकि देश में ओटीटी पर आधा कंटेंट क्षेत्रीय भाषाओं में देखा जा रहा है। हमने सिर्फ देश की असली संस्कृति को सम्मान देकर प्लेटफॉर्म बनाया है।’

99% कमाई सिर्फ सब्सक्रिप्शन से, विज्ञापन का कोई चक्कर नहीं

जहाँ कई ऐप्स विज्ञापनों पर निर्भर हैं, वहीं STAGE पूरी तरह से ‘सब्सक्रिप्शन-ओनली’ मॉडल पर काम करता है। FY26 में कंपनी की कुल कमाई का 99.2% हिस्सा केवल यूजर सब्सक्रिप्शन से आया है। Q1 FY27 में कुल सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू का 80.3% हिस्सा पुराने यूजर्स के रिन्यूअल और रिएक्टिवेशन से आया है। FY24 में यह आंकड़ा सिर्फ 30.4% था, जो दिखाता है कि यूजर्स को इसका कंटेंट बेहद पसंद आ रहा है।

AI के इस्तेमाल से कंटेंट बनाना हुआ सस्ता

STAGE ने अपनी प्रोडक्शन कॉस्ट को घटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू किया है। एआई की मदद से ओरिजिनल शोज और मूवीज का प्रोडक्शन टाइम और लागत दोनों काफी कम हो गए हैं। इससे उन भाषाओं/बोलियों में भी कंटेंट बनाना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो गया है, जहां पहले पारंपरिक तरीके से काम करना नामुमकिन माना जाता था।

अमेरिका गल्फ देशों से सैनिकों को कम कर सकता है:ईरान जंग के चलते फैसला, यहां 20 सैन्य ठिकानों पर 40 हजार सैनिक तैनात

अमेरिका गल्फ देशों में मौजूद सैनिकों की संख्या कम कर सकता है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी बड़ी वजह ईरान के साथ जारी युद्ध है। इस युद्ध में अमेरिका की 200 से ज्यादा सैन्य फैसिलिटी को नुकसान पहुंचा है। गल्फ देशों से मतलब फारस की खाड़ी के आसपास स्थित देश हैं। इसमें मुख्य रूप से सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान, इराक, ईरान शामिल हैं। इस मामले में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। अमेरिका आमतौर पर जॉर्डन से लेकर ओमान तक फैले करीब 20 सैन्य ठिकानों पर लगभग 40 हजार सैनिक तैनात रखता है। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय है, जबकि कुवैत, कतर और अन्य खाड़ी देशों में अमेरिकी सेना और वायुसेना की बड़ी मौजूदगी है। मार्च में कुवैत स्थित एक सैन्य ठिकाने पर हुए हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हुई थी। खबर अपडेट की जा रही है…. —————————– यह भी पढ़ें….. ट्रम्प का ईरान पर सबसे बड़े आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान: बोले- जो देश मदद करेंगे, उन पर भी एक्शन लेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका गल्फ देशों से सैनिकों को कम कर सकता है:ईरान जंग के चलते फैसला, यहां 20 सैन्य ठिकानों पर 40 हजार सैनिक तैनात

ईरान के साथ युद्ध के बाद अमेरिका फारस की खाड़ी (गल्फ) में अपनी सैन्य मौजूदगी कम करने पर विचार कर रहा है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन समीक्षा कर रहा है कि क्या अब गल्फ देशों में पहले जितने अमेरिकी सैनिक रखने की जरूरत है। इसकी बड़ी वजह युद्ध में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हुआ भारी नुकसान है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 200 से ज्यादा अमेरिकी सैन्य सुविधाएं क्षतिग्रस्त या तबाह हुई हैं। फिलहाल अमेरिका जॉर्डन से लेकर ओमान तक फैले करीब 20 सैन्य ठिकानों पर लगभग 40 हजार सैनिक तैनात रखता है। हालांकि, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। पेंटागन, ज्वाइंट स्टाफ और अमेरिकी सेंट्रल कमांड मिलकर यह आकलन कर रहे हैं कि युद्ध के बाद मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य तैनाती कैसी होनी चाहिए। गल्फ में अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य ठिकाने बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय है। वहीं कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और दूसरे गल्फ देशों में अमेरिका के बड़े सैन्य ठिकाने हैं। अमेरिका कई दशकों से इन सैन्य ठिकानों के जरिए मिडिल ईस्ट में अपने सैन्य अभियान चलाता रहा है और क्षेत्र के सहयोगी देशों की सुरक्षा में मदद करता रहा है। ईरानी हमलों के बाद बदली रणनीति ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने मिसाइल और ड्रोन हमलों की जद में आए। मार्च में कुवैत के एक सैन्य ठिकाने पर हुए हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध में 200 से ज्यादा अमेरिकी मिलिट्री फैसिलिटी को नुकसान पहुंचा। इस दौरान कुल 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है। ईरान के हमलों से बचाव के लिए अमेरिकी सेना को 1000 से ज्यादा एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलें दागनी पड़ीं। इससे पैट्रियट और थाड जैसे एयर डिफेंस सिस्टम के मिसाइल भंडार पर दबाव बढ़ गया। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में ऐसे हमलों का खतरा कम करने के लिए सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तैनाती पर दोबारा विचार करना जरूरी है। सैनिकों को दूसरी जगह भेजने पर विचार पेंटागन में इस समय कई प्रस्तावों पर चर्चा चल रही है। इनमें गल्फ देशों से कुछ सैनिकों और सैन्य उपकरणों को जॉर्डन, इजराइल या सऊदी अरब के रेड सी (लाल सागर) तट के करीब तैनात करने का सुझाव दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि ये इलाके ईरान की सीधी मिसाइल और ड्रोन पहुंच से अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सैनिकों की तैनाती को लेकर ट्रम्प सरकार के भीतर भी अलग-अलग राय है। एक पक्ष चाहता है कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी कम करे और संसाधनों का ज्यादा इस्तेमाल घरेलू सुरक्षा तथा चीन से मुकाबले पर करे। वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि गल्फ देशों और इजराइल में मजबूत अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बनाए रखना जरूरी है, ताकि क्षेत्र में अमेरिका का प्रभाव कायम रहे। इजराइल में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का भी प्रस्ताव एक प्रस्ताव में कुवैत समेत कुछ गल्फ देशों से सैनिकों और सैन्य उपकरणों को इजराइल के ओवदा एयरबेस भेजने की बात भी कही गई है। हालांकि, इस प्रस्ताव का प्रशासन के भीतर विरोध भी हो रहा है। कुछ अधिकारियों का कहना है कि इजराइल में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने से संवेदनशील खुफिया जानकारी की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। गल्फ देशों पर भी पड़ेगा असर अगर अमेरिका गल्फ देशों से बड़ी संख्या में अपने सैनिक हटाता है, तो इसका सबसे ज्यादा असर वहां के सिक्योरिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर पड़ेगा। साथ ही, पूरे मिडिल ईस्ट के सुरक्षा समीकरण भी बदल सकते हैं। दशकों से सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, बहरीन और दूसरे खाड़ी देश अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर निर्भर रहे हैं। सैनिकों की संख्या कम होने पर इन देशों को अपनी सैन्य क्षमता बढ़ानी पड़ सकती है या नए सुरक्षा साझेदार तलाशने पड़ सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम होने का मतलब यह नहीं होगा कि दोनों पक्षों के सुरक्षा संबंध खत्म हो जाएंगे। हथियारों की खरीद, खुफिया जानकारी साझा करने और सैन्य सहयोग जैसी व्यवस्थाएं पहले की तरह जारी रह सकती हैं। सितंबर तक 3.6 लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान पेंटागन का अनुमान है कि सितंबर के अंत तक ईरान युद्ध पर अमेरिका का खर्च 37.5 अरब डॉलर (करीब 3.6 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच सकता है। इस अनुमान में क्षतिग्रस्त सैन्य ठिकानों को दोबारा बनाने का खर्च शामिल नहीं है। इसलिए अमेरिका अब सिर्फ उनकी मरम्मत पर नहीं, बल्कि यह भी तय कर रहा है कि सभी ठिकानों को पहले की जगह फिर से बनाया जाए या कुछ को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए। अमेरिका ने गल्फ देशों में सैन्य ठिकाने क्यों बनाए? 1. तेल और गैस की सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए:
दुनिया के बड़े हिस्से को तेल और गैस फारस की खाड़ी से मिलती है। अमेरिका चाहता है कि इन समुद्री रास्तों में कोई बाधा न आए। 2. ईरान की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए:
1979 की ईरानी क्रांति के बाद से अमेरिका और ईरान के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। गल्फ में मौजूद सैन्य ठिकाने अमेरिका को ईरान की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करते हैं। 3. सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए:
सऊदी अरब, UAE, कुवैत, कतर और बहरीन लंबे समय से अमेरिका के रणनीतिक साझेदार रहे हैं। अमेरिकी सैन्य ठिकाने इन देशों की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। 4. मिडिल ईस्ट में सैन्य अभियानों के लिए:
इराक, अफगानिस्तान और ISIS के खिलाफ अभियानों में अमेरिका ने इन्हीं सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किया है। —————————– यह भी पढ़ें….. ट्रम्प का ईरान पर सबसे बड़े आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान: बोले- जो देश मदद करेंगे, उन पर भी एक्शन लेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

उत्तराखंड का कमलेश्वर महादेव मंदिर, जानें इतिहास, मान्यता और पहुंचने का रास्ता

उत्तराखंड का कमलेश्वर महादेव मंदिर, जानें इतिहास, मान्यता और पहुंचने का रास्ता

kamleshwar mahadev mandir

पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर स्थित कमलेश्वर महादेव मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है। मान्यता है कि यहां भगवान राम ने 108 कमलों से शिव की पूजा की थी। उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री पुष्कर धामी ने भी श्रावण मास में पौड़ी गढ़वाल आने वाले श्रद्धालुओं से कमलेश्वर महादेव के दर्शन करने की अपील की है। जानें मंदिर का इतिहास, धार्मिक महत्व और पहुंचने का रास्ता। ALSO READ: दक्षेश्वर महादेव मंदिर: सावन में क्यों खास है कनखल का यह शिव धाम?

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि श्रीनगर, पौड़ी गढ़वाल में स्थित श्री कमलेश्वर महादेव मंदिर देवभूमि के प्राचीन एवं पौराणिक शिवालयों में से एक है। स्कंद पुराण में वर्णित यह पावन धाम भगवान शिव की आराधना और आस्था का प्रमुख केंद्र है। पवित्र श्रावण मास में यदि आप पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र के भ्रमण पर हैं, तो देवाधिदेव महादेव के इस दिव्य धाम के दर्शन अवश्य करें।

मंदिर का पुरातात्विक महत्व

यह एक पौराणिक मंदिर है, जिसका उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। यहां भू लिंग स्थापित है और गणेश-पार्वती की नवनिर्मित मूर्तियां हैं। नवंबर माह में बैकुंड चतुर्दशी के अवसर पर यहां मेला लगता है। इस दिन प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में निसंतान दंपति संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर यहां पहुंचते हैं। ये लोग जलते दीए को अपने हाथ में रखकर रात भर जाप और जागरण करते हैं। सुबह दीपक को अलकनंदा में प्रवाहित कर मंदिर में पूजा करते हैं। कहा जाता है कि उनकी मनोकामना पूरी भी होती है। ALSO READ: रुद्रनाथ मंदिर क्यों है खास? भगवान शिव की मुखाकृति के दर्शन और मंदिर से जुड़ी अद्भुत मान्यताएं

 

कैसे पड़ा कमलेश्वर महादेव नाम

मंदिर के बारे में मान्यता है कि रावण वध करने के बाद श्रीराम गुरु वशिष्ठ की आज्ञा अनुसार, भगवान शिव की उपासना करने के लिए कमलेश्वर मंदिर आए थे। इस स्थान पर आकर उन्होंने 108 कमलों से भगवान शिव की उपासना की थी। इसके बाद से यहां का नाम कमलेश्वर पड़ा।

 

ऐसे पहुंचें कमलेश्वर मंदिर

हवाई मार्ग: जौलीग्रांट हवाई अड्डा से कमलेश्वर मंदिर से 151 किमी दूर है। वहां से आप मंदिर के लिए टैक्सी या बस ले सकते हैं।

ट्रेन से: निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है, जो कमलेश्वर मंदिर से 140 किमी दूर है।

सड़क मार्ग से: श्रीनगर गढ़वाल उत्तराखंड के अन्य जिलों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश से आसानी से कमलेश्वर मंदिर के लिए टैक्सी बुक कर सकते हैं।

नेपाल में चीनी का रेट पहुंचा 120 रुपये किलो! समझिए दशैं-तिहार त्योहार से पहले नेपाली शुगर इंडस्ट्री क्यों दिख रही डंवाडोल

Price of sugar in Nepal: नेपाल के लोगों के लिए दशैं और तिहार जैसे बड़े हिंदू त्योहारों से पहले ही चीनी की मिठास जेब पर बहुत भारी पड़ने लगी है। नेपाल में चीनी की किल्लत रिपोर्ट की जा रही है। खुदरा बाजारों में जो चीनी अबतक 95-100 रुपये बिक रही थी, उसका रेट अब 120 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि लोग अगर बढ़ी हुई कीमतें चुकाने को तैयार हैं तो भी दुकानों पर चीनी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही है। नेपाल के न्यूज पोर्टल ‘रातोपाटी’ की रिपोर्ट की मानें तो नेपाली सरकार इसे लेकर कोई ठोस कदम भी अबतक नहीं उठा पाई है।

आइए समझते हैं कि आखिर नेपाल में अचानक ये चीनी की क्राइसिस क्यों दिखने लगी है और क्या इसका भारत से भी कोई कनेक्शन है या नहीं?

तीन महीने में ही टूटा उद्योगपतियों का वादा, खाली हुए स्टॉक

‘रातोपाटी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल की चीनी सप्लाई काफी हद तक पड़ोसी देश भारत पर निर्भर करती है। जब भारत ने बैशाख के अंतिम सप्ताह में चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था तब से ही नेपाली बाजार में चीनी की भारी किल्लत की आशंका पैदा हो गई थी। उस समय नेपाल शुगर इंडस्ट्री एसोसिएशन ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि देश के भीतर चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की कोई बात नहीं है। एसोसिएशन ने यह भी कहा था कि फैक्ट्रियों के स्तर से चीनी की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।

उद्योगपतियों के इस आश्वासन के बाद बाजार में फैला डर कुछ हद तक शांत हुआ। सरकार ने भी घरेलू उत्पादन पर भरोसा जताते हुए आयात के फैसलों को आगे बढ़ा दिया। यह वादा तीन महीने से ज्यादा नहीं टिका। अब स्थिति यह है कि जेठ के महीने में पर्याप्त स्टॉक का दावा करने वाले उद्योगपति ही अब अपने हाथ खड़े कर रहे हैं। उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के एक उच्च पदस्थ अधिकारी के मुताबिक बैठकों के दौरान उद्योगपति अब सीधे तौर पर कह रहे हैं कि उनके पास चीनी का स्टॉक समाप्त हो चुका है और अब उनके पास चीनी नहीं बची है।

आयात प्रक्रिया में देरी से पैदा हुआ डर

नेपाल के आयातकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और देश के भीतर बढ़ती मांग के बीच तालमेल न बैठ पाने की वजह से ऐसा हो रहा है। अगर सरकार ने समय रहते चीनी आयात की अनुमति नहीं दी और कोटा प्रणाली को लेकर स्पष्ट नीतिगत फैसले नहीं किए तो त्योहारों के चरम पर बाजार में भारी किल्लत और कीमतों में प्रचंड उछाल देखने को मिल सकता है।

ग्लोबल मार्केट में फ्यूल की बढ़ती कीमतों और कमोडिटी मार्केट में आई अस्थिरता की वजह से चीनी के दाम भी डॉलर में लगातार बढ़ रहे हैं। इसका सीधा असर भारत और अन्य देशों से नेपाल आने वाली चीनी पर पड़ रहा है। व्यवसायियों ने सरकार पर आयात प्रक्रिया में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है। आयातकों का तर्क है कि जब भी बाजार में चीनी की कमी की अफवाहें या खबरें फैलती हैं तो उपभोक्ता और खुदरा व्यापारी जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदकर जमा करने लगते हैं।

भारत से G2G के जरिए 10,000 क्विंटल चीनी मंगाने की तैयारी

बाजार में गहराते संकट और लगातार मिल रही शिकायतों के बीच फूड मैनेजमेंट एंड ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड त्योहारों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के साथ ‘G2G’ (सरकार से सरकार) माध्यम के जरिए 10000 क्विंटल चीनी आयात करने की अंतिम तैयारी में है।

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कंपनी के सूचना अधिकारी माधव मिश्रा के मुताबिक पहले चरण में 10,000 क्विंटल चीनी लाई जा रही है और यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यह चीनी बहुत जल्द नेपालगंज सीमा पर पहुंच जाएगी। सरकारी स्तर पर यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि त्योहारों के दौरान लोगों को चीनी की किल्लत का सामना न करना पड़े।