Samsung Galaxy Z Fold 8 और Z Flip 8 होंगे पहले से ज्यादा महंगे! डिटेल्स हुई लीक

Samsung का अगला Galaxy Unpacked इवेंट इस साल के सबसे चर्चित स्मार्टफोन लॉन्च इवेंट्स में से एक माना जा रहा है। इस इवेंट में कंपनी अपने नए फोल्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च करेगी। अगर सामने आई लीक्स सही साबित होती हैं, तो इस बार ग्राहकों को इन नए फोल्डेबल फोन्स के लिए पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Samsung इस इवेंट में सिर्फ Galaxy Z Fold 8 और Galaxy Z Flip 8 ही नहीं, बल्कि Galaxy Z Fold 8 Ultra या Tri Fold वेरिएंट भी पेश कर सकती है। माना जा रहा है कि कंपनी यह डिवाइस Apple के आने वाले iPhone Fold को टक्कर देने के लिए लॉन्च करेगी।

आइए जानते हैं Samsung के इन नए फोल्डेबल स्मार्टफोन्स की संभावित लॉन्च डेट, कीमत, फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स के बारे में।

Samsung Galaxy Z Fold 8, Z Flip 8 के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

लीक हुई जानकारी के अनुसार, Galaxy Z Fold 8 में 8-इंच का फोल्डेबल AMOLED डिस्प्ले हो सकता है, जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और 2,600 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस मिलेगी। डिवाइस के अंदर, कोरियाई टेक कंपनी Qualcomm का Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दे सकती है, साथ ही इसमें 16GB तक RAM और 1TB तक की इंटरनल स्टोरेज भी मिल सकती है।

फोटोग्राफी के लिए, इस फोल्डेबल फोन में 200MP का प्राइमरी कैमरा, 50MP का अल्ट्रा-वाइड सेंसर और 3x ऑप्टिकल जूम वाला 10MP का टेलीफोटो लेंस होने की चर्चा है। साथ ही, इसमें 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ 5000mAh की बैटरी होने की भी उम्मीद है।

वहीं, Galaxy Z Flip 8 में 6.9-इंच का फोल्डेबल डिस्प्ले और साथ ही 4.1-इंच की बड़ी कवर स्क्रीन हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Samsung इस क्लैमशेल फोल्डेबल फोन के लिए अपने आने वाले Exynos 2600 प्रोसेसर का इस्तेमाल कर सकता है। इसमें 50MP का प्राइमरी सेंसर और 12MP का अल्ट्रा-वाइड लेंस हो सकता है, जबकि सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 10MP का फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है। साथ ही, ऐसी भी चर्चा है कि Galaxy Z Flip 8 में 25W चार्जिंग सपोर्ट के साथ 4300 mAh की बैटरी मिल सकती है।

Samsung Galaxy Z Fold 8, Z Flip 8 की लॉन्च डेट और कीमत में बढ़ोतरी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Samsung अपना अगला Galaxy Unpacked इवेंट 22 जुलाई को लंदन में आयोजित कर सकता है। हालांकि, इस बार सबसे ज्यादा चर्चा इन फोन्स की बढ़ी हुई कीमत को लेकर हो रही है। कई रिपोर्ट्स का दावा है कि 2026 में Samsung अपने फोल्डेबल स्मार्टफोन्स की कीमत बढ़ा सकता है।

अनुमानित कीमत की बात करें तो Galaxy Z Fold 8 की शुरुआती कीमत भारत में करीब 1,89,999 रुपये हो सकती है। वहीं, इसके हाई-स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 2,20,000 रुपये से ज्यादा जा सकती है।

दूसरी ओर, Galaxy Z Flip 8 की शुरुआती कीमत करीब 1,24,999 रुपये रहने की उम्मीद है। बता दें कि इसके पिछले मॉडल Galaxy Z Flip 7 को 1,09,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था।

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Rani Durgavati: रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस: इतिहास की वीर नायिका को नमन

An image featuring Rani Durgavati, the brave ruler of Gondwana and a symbol of self-respect and patriotism

Gondwana Queen Rani Durgavati: भारतीय इतिहास में अनेक वीर योद्धाओं और वीरांगनाओं ने अपने साहस, त्याग और देशभक्ति से अमिट छाप छोड़ी है। ऐसी ही महान वीरांगनाओं में रानी दुर्गावती का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने न केवल अपने राज्य की रक्षा के लिए शत्रुओं का डटकर सामना किया, बल्कि मातृभूमि और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का भी बलिदान दे दिया।ALSO READ: Sanjay Gandhi: पुण्यतिथि विशेष: संजय गांधी कौन थे, जानें राजनीति में उनका योगदान

रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस हमें उनके अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रप्रेम की याद दिलाता है। आज भी उनका जीवन देश की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

 

आइए, उनके इस शौर्य दिवस पर जानते हैं मध्य प्रदेश के गोंडवाना साम्राज्य की इस महान रानी की वीरता और बलिदान की अमर गाथा…

 

चंदेल राजवंश की बेटी, गोंडवाना की रानी

रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को कालिंजर के राजा कीर्तिसिंह चंदेल के यहां हुआ था। उनका विवाह गोंडवाना साम्राज्य के राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह से हुआ था। विवाह के कुछ वर्षों बाद ही राजा दलपत शाह का असमय निधन हो गया। उस समय उनका बेटा नारायण केवल 5 वर्ष का था। ऐसे कठिन समय में रानी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने छोटे बेटे को सिंहासन पर बैठाकर खुद गोंडवाना की कमान संभाली और जबलपुर को अपना केंद्र बनाकर शासन किया।

 

एक कुशल और न्यायप्रिय शासिका

रानी दुर्गावती केवल युद्ध कौशल में ही माहिर नहीं थीं, बल्कि एक बेहद दूरदर्शी शासिका भी थीं। उनके शासनकाल में गोंडवाना बेहद समृद्धशाली बना:

 

* धार्मिक सहिष्णुता: वे हिंदू धर्म की अनुयायी थीं, लेकिन उन्होंने अपने राज्य में जैन और अन्य संप्रदायों के विकास के लिए भी खुलकर दान दिया।

 

* जल संरक्षण: उन्होंने अपने राज्य में पानी की कमी को दूर करने के लिए कई तालाबों का निर्माण कराया, जिनमें जबलपुर का प्रसिद्ध 'चेरीताल' और 'आधारताल' आज भी उनके नाम की गवाही देते हैं।

 

* मजबूत सेना: उन्होंने एक विशाल और अनुशासित सेना तैयार की, जिसमें 20,000 से अधिक घुड़सवार, हजारों हाथी और बड़ी संख्या में पैदल सैनिक शामिल थे।ALSO READ: रानी दुर्गावती के बलिदान की कहानी की 3 खास बातें

 

अकबर की सेना से ऐतिहासिक टकराव

गोंडवाना की समृद्धि और एक महिला के बढ़ते प्रभाव को देखकर मुगल सम्राट अकबर विचलित हो उठा। उसने अपने सिपहसालार आसफ खान को एक विशाल सेना के साथ गोंडवाना पर आक्रमण करने के लिए भेजा। मुगल सेना आधुनिक हथियारों और तोपों से लैस थी, जबकि रानी की सेना संख्या में कम थी। इसके बावजूद रानी दुर्गावती ने खुद युद्ध का नेतृत्व किया।
 

 

1. नरई नाला का मोर्चा

रानी ने जबलपुर के पास 'नरई नाला' नामक स्थान पर मोर्चा संभाला, जो एक तरफ पहाड़ों और दूसरी तरफ उफनती नदी से घिरा था। इस रणनीतिक बढ़त के कारण मुगलों को भारी नुकसान हुआ और वे पीछे हटने पर मजबूर हो गए।

 

2. रात के हमले का प्रस्ताव

रानी मुगलों को संभलने का मौका नहीं देना चाहती थीं। उन्होंने रात में ही मुगल कैंप पर हमला करने की योजना बनाई, लेकिन उनके सेनापतियों ने रात में युद्ध करने से मना कर दिया। यह देरी भारी पड़ी और अगली सुबह आसफ खान ने बड़ी तोपें मंगवा लीं।

 

3 अंतिम सांस तक संघर्ष (24 जून 1564)

अगले दिन भयंकर युद्ध हुआ। रानी का बेटा वीर नारायण घायल हो गया, लेकिन रानी लड़ती रहीं। तभी एक तीर रानी की आंख में और दूसरा उनकी गर्दन में आकर लगा। रानी ने होश खोने से पहले स्थिति को भांप लिया।

 

4 बलिदान (अमर शहादत)

जब रानी को लगा कि वे चारों तरफ से घिर चुकी हैं और बंदी बना ली जाएंगी, तो उन्होंने अपने वफादार सैनिक से खुद पर तलवार चलाने को कहा। सैनिक के मना करने पर रानी ने अपनी ही कटार अपनी छाती में घोंपकर मातृभूमि के लिए प्राण त्याग दिए।

 

मुगल सेना से घिर जाने पर अपनी अंतिम सांसों के दौरान रानी दुर्गावती के शब्द थे- 'जब तक जीवित हूं, कलंक का टीका नहीं लगाऊंगी। अपमानजनक जीवन जीने से अच्छा है गरिमा के साथ मर जाना।'

 

5. विरासत और सम्मान

रानी दुर्गावती का यह सर्वोच्च बलिदान भारतीय महिलाओं के आत्मसम्मान और वीरता का प्रतीक बन गया। जबलपुर के पास स्थित 'बरेला' में आज भी उनकी समाधि बनी हुई है, जहां लोग श्रद्धासुमन अर्पित करने जाते हैं।

 

उनके सम्मान में मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय' किया। देश उनके बलिदान दिवस पर इस महान वीरांगना के शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति को शत-शत नमन करता है।

 

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बागी गुट ने TMC चेयरपर्सन पद से हटाया पर उससे पहले ही ममता बनर्जी चल चुकी थीं अपनी चाल! इनसाइड स्टोरी अब सामने आई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद अब ममता बनर्जी अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को गंवाने के खतरे से जूझ रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी फाउंडर ममता बनर्जी के लिए स्थितियां और विकट तब हो गईं जब पार्टी के बागी खेमे ने उन्हें चेयरपर्सन के पद से ही हटा दिया। एक बारगी ऐसा लगा कि क्या अब टीएमसी ममता बनर्जी के हाथों से पूरी तरह फिसल गई। पर अब एक नई जानकारी सामने आ रही है।

ममता बनर्जी के खेमे ने एक बड़ा खुलासा किया है। कोलकाता में बागी गुट द्वारा एक बैठक में पार्टी संस्थापक और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाए जाने के ठीक एक दिन बाद ममता बनर्जी की ओर से एक बड़ा जवाबी दांव चला गया है।

सामने आई इनसाइड स्टोरी के मुताबिक बागी गुट द्वारा उन्हें पद से हटाए जाने से पहले ही ममता बनर्जी अपनी चाल चल चुकी थीं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की एक नई पुनर्गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची तैयार कर भारतीय चुनाव आयोग को सौंप दी थी। इसमें खुद ममता बनर्जी को ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का चेयरपर्सन बताया गया है।

बागी गुट के कदम से पहले ही ममता ने सुरक्षित किया दावा

न्यूज एजेंसी पीटीआई और दूसरी रिपोर्टों के मुताबिक जब बागी नेता पार्टी के भीतर संगठनात्मक तख्तापलट की तैयारी कर रहे थे ठीक उसी समय ममता बनर्जी ने 1998 में अपने द्वारा स्थापित की गई पार्टी के तंत्र पर अपना नियंत्रण सुरक्षित करने के लिए कदम उठा दिया था। ममता बनर्जी के करीबी नेताओं ने बताया कि शनिवार को ही पार्टी के नए नेतृत्व ढांचे और 24 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति को अंतिम रूप दे दिया गया था।

सोमवार दोपहर को ही इस सूची को चुनाव आयोग के पास जमा कर दिया गया था। यह सब तब हुआ जब कोलकाता में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले असंतुष्ट खेमे ने अपना विशेष सत्र भी आयोजित नहीं किया था।

ममता खेमे के एक वरिष्ठ नेता ने पीटीआई को बताया कि जब बागी खेमा अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने की तैयारियां कर रहा था, तब ममता बनर्जी ने पहले ही पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप दे दिया था और टीएमसी की चेयरपर्सन के रूप में यह सूची चुनाव आयोग को भेज दी थी।

ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग भेजी गई लिस्ट में कौन-कौन?

चुनाव आयोग को सौंपे गए आधिकारिक दस्तावेज पर खुद ममता बनर्जी के हस्ताक्षर हैं। इस नई सूची में निम्नलिखित नेताओं को प्रमुख पदाधिकारी बनाया गया है-

चेयरपर्सन: ममता बनर्जी

उपाध्यक्ष: सुब्रत बख्शी

राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा नेता: अभिषेक बनर्जी

संयुक्त सचिव और राज्यसभा नेता: डेरेक ओ’ब्रायन

संयुक्त सचिव: डोला सेन

कोषाध्यक्ष: सुभाशीष चक्रवर्ती

ममता के करीबी नेताओं ने बताया कि चुनाव आयोग को भेजी गई इस नई कमेटी का ढांचा पुराने संगठनात्मक प्रबंधों से बिल्कुल अलग है। इस लिस्ट से असंतुष्ट और बागी खेमे से जुड़े कई नेताओं की छुट्टी कर दी गई है। यहां तक कि इस महीने की शुरुआत में गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति का हिस्सा रहे अरूप बिस्वास को भी इस संशोधित सूची से बाहर कर दिया गया है।

दूसरी तरफ बागी गुट ने अरूप रॉय को चुना नया चेयरपर्सन

दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने सोमवार को कोलकाता में हुए विशेष सत्र के बाद पार्टी में संगठनात्मक विभाजन को और गहरा कर दिया। बागी खेमे ने घोषणा की कि उन्होंने ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटा दिया है और उनकी जगह वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन चुना है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की। बागी खेमे का दावा है कि यह विशेष सत्र तृणमूल कांग्रेस के संविधान के अनुसार ही बुलाया गया था और इस सत्र में लिए गए सभी फैसलों की जानकारी औपचारिक रूप से चुनाव आयोग को दी जाएगी।

ममता खेमे का पलटवार- यह सिर्फ एक कॉमेडी शो और सर्कस है

ममता बनर्जी खेमे ने बागियों के इस पूरे सत्र और अभ्यास को पूरी तरह से अमान्य और खारिज कर दिया है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि असंतुष्ट नेताओं के पास न तो ऐसा सत्र बुलाने का कोई अधिकार था और न ही पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को बदलने का कोई जनादेश था।

कुणाल घोष ने स्पष्ट रूप से कहा कि, ‘यह एक कॉमेडी शो है। एक व्यक्ति जिसे टीएमसी से निष्कासित किया जा चुका है, वह विशेष सत्र आयोजित कर रहा है। यह मामला कोर्ट में है और हमें विश्वास है कि न्याय होगा। हम इस तरह के हास्यास्पद व्यवहार को कोई महत्व नहीं देते हैं। टीएमसी का मतलब ही ममता बनर्जी है, बाकी सब एक सर्कस है।’

कई बड़े नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी

पार्टी के भीतर बगावत पर कड़ा रुख अपनाते हुए ममता बनर्जी खेमे की अनुशासन समिति ने कई वरिष्ठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, अरूप रॉय, जावेद खान, रथिन घोष, बिप्लव मित्रा, स्नेहाशीष चक्रवर्ती और सबीना यास्मिन के नाम शामिल हैं। इन सभी नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।

ममता बनर्जी के लिए आगे क्या? लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई के आसार

कोलकाता के एक राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव आयोग किस संगठनात्मक ढांचे को वैध और असली टीएमसी के रूप में मान्यता देगा। दोनों गुटों द्वारा किए जा रहे परस्पर विरोधी दावों ने टीएमसी के भीतर संकट को एक नया मोड़ दे दिया है, जहां दोनों धड़े अब पार्टी की विधायी और संगठनात्मक दोनों शाखाओं पर अपना दावा ठोक रहे हैं।

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ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि यह विवाद चुनाव आयोग के सामने लड़ा जाएगा और अंततः अदालतों तक भी पहुंच सकता है। इससे एक बात तो साफ है कि ममता बनर्जी द्वारा 1998 में स्थापित की गई इस पार्टी पर नियंत्रण के लिए एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई का मंच तैयार हो गया है।

CSM Technologies IPO: 24 जून को खुल रहा सीएसएम टेक्नोलॉजीज का आईपीओ, क्या निवेश करना चाहिए?

CSM Technologies IPO: सीएसएम टेक्नोलॉजीज का आईपीओ 24 जून यानी बुधवार को खुल रहा है। कंपनी इस इश्यू के तहत 146 करोड़ रुपये जुटाने जा रही है। वह करीब 1.29 करोड़ शेयर जारी करेगी। आईपीओ से मिले पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने, कारोबार के विस्तार और सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए करेगी।

ई-गवर्नेंस, सिस्टम इंटिग्रेशन में विशेषज्ञता

CSM Technologies एक प्रमुख GovTech और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन कंपनी है। इसे सरकार के डिपार्टमेंट्स, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स और एंटरप्राइजेज को टेक्नोलॉजी एनेबल्ड सॉल्यूशंस ऑफर करने का 27 साल से ज्यादा का अनुभव है। इसे ई-गवर्नेंस, सिस्टम इंटिग्रेशन, अप्लिकेशन डेवलपमेंट, क्लाउड सॉल्यूशंस, एनालिटिक्स और एआई में विशेषज्ञता हासिल है।

आईपीओ में 29 जून तक लगाई जा सकती है बोली

कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड 107-113 रुपये तय किया है। इस आईपीओ में 29 जून तक निवेश किया जा सकता है। इस इश्यू में ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं होगा। इसका मतलब है कि कंपनी इश्यू में सिर्फ नए शेयर इनवेस्टर्स को इश्यू करेगी।

1998 में हुई थी कंपनी की शुरुआत

सीएसएम टेक्नोलॉजी की शुरुआत 1998 में हुई थी। इसका मुख्यालय भुवनेश्वर है। बीते सालों में खुद को सॉफ्टवेयर सर्विसेज प्रोवाइडर से एंड-टू-एंड टेक्नोलॉलीज सॉल्यूशंस पार्टनर के रूप में बदला है। आईपीओ में शेयर के अपर प्राइस बैंड पर FY25 के अर्निंग्स के मुकाबले कीमत 41.6 गुनी है। यह ज्यादा नहीं है, क्योंकि कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड और फाइनेंशियल मीट्रिक्स बेहतर रहे हैं।

आनंदराठी ने दी बोली लगाने की सलाह

ब्रोकरेज फर्म आनंदराठी ने इस आईपीओ को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है। कंपनी ने इश्यू में 50 फीसदी शेयर क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व रखा है। 15 फीसदी शेयर नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व होंगे। बाकी 35 फीसदी शेयर रिटेल इनवेस्टर्स के लिए होंगे।

कम से कम 14,916 रुपये से अप्लाई करना होगा

इनवेस्टर्स को इश्यू में कम से कम शेयरों के एक लॉट के लिए अप्लाई करना होगा। एक लॉट 132 शेयरों का है। इसका मतलब है कि शेयर के अपर प्राइस बैंड पर अप्लाई करने के लिए रिटेल इनवेस्टर्स को कम से कम 14,916 रुपये की बोली लगानी होगी।

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आईटी कंपनियों को लेकर मार्केट सेंटिमेंट कमजोर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सीएसएम टेक्नोलॉजीज का आईपीओ ऐसे वक्त आ रहा है, जब आईटी शेयरों पर बिकवाली का दबाव है। खासकर भारतीय आईटी कंपनियों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल का असर पड़ा है। 23 जून को भी शेयर बाजार में गिरावट में आईटी कंपनियों में बिकवाली का बड़ा हाथ रहा। करीब सभी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों पर बिकवाली का दबाव दिखा।

IPL 2027 से पहले दिल्ली लौटे ऋषभ पंत, कुलदीप यादव पहुंचे लखनऊ

इंडियन प्रीमियर लीग IPL 2027 से पहले होने वाले पहले ट्रेड में लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को उनकी पुरानी फ़्रैंचाइजी दिल्ली कैपिटल्स (DC) को वापस भेजने और बदले में भारत के स्पिनर कुलदीप यादव को अपनी टीम में शामिल करने की तैयारी पूरी हो गई है। ट्रेड के तहत रवींद्र जाडेजा के बाद पंत दूसरे बड़े खिलाड़ी होंगे जिनकी सैलरी कम होगी। ऋषभ पंत को दिल्ली कैपिटल्स में 15 करोड़ रुपए मिलेंगें जबकि लखनऊ सुपरजाएंट्स में उनको 27 करोड़ के रिकॉर्ड रकम में संजीव गोयनका ने खरीदा था।हालांकि कुलदीप को लखनऊ की फ्रैंचाइजी को 13.5 करोड़ रुपए जरूर देने पड़ेंगें।

IPL 2026 से पहले चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल इतिहास के सबसे बड़े ट्रेड में से एक किया था। तब उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के साथ संजू सैमसन के बदले जाडेजा का ट्रेड किया था। 2022 में,सीएसके ने जडेजा को 18 करोड़ रुपये में रिटेन किया था, लेकिन आरआर ने उन्हें 14 करोड़ रुपये की सैलरी ऑफर करके अपनी टीम में शामिल किया था। माना जा रहा है कि पंत से दो फ़्रेंचाइजी ने संपर्क किया था। उसमें एक टीम डीसी थी और एक ऐसी टीम थी, जिसने एक से ज़्यादा बार आईपीएल जीता है।

तो पंत की दिल्ली कैपिटलस में वापसी हार्दिक पांड्या की मुंबई इंडियंस में वापसी जैसी हुई। दोनों खिलाड़ी उस फ्रेंचाइजी में लौट रहे हैं जहां से उनका आईपीएल सफर शुरू हुआ था। पंत ने आईपीएल 2026 में ख़राब प्रदर्शन के बाद लखनऊ सुपर जायंट्स की कप्तानी छोड़ दी थी। इसके बाद एलएसजी ने कहा था, “लखनऊ सुपर जायंट्स पचारिक रूप से यह घोषणा करती है कि ऋषभ पंत ने फ़्रेंचाइजी से कप्तानी छोड़ने का अनुरोध किया है। फ़्रेंचाइज़ी ने उनके इस अनुरोध को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।”

साथ ही एलएसजी के क्रिकेट निदेशक टॉम मूडी ने कहा था, “ऋषभ ने फ़्रेंचाइज़ी से इस संबंध में संपर्क किया था और हमने सम्मानपूर्वक उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। ऐसे निर्णय लेना कभी आसान नहीं होता। कप्तान के रूप में ऋषभ ने इस ड्रेसिंग रूम में जो कुछ भी योगदान दिया है, उसके लिए हम उनके आभारी हैं। अब हमारा ध्यान सर्वश्रेष्ठ मानकों तक पहुंचने के लिए टीम के सामूहिक पुनर्निर्माण और पुनर्गठन पर है।”

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स्कूल होंगे अपग्रेड, किसान कल्याण पर फोकस, जानें सीएम डॉ.मोहन ने कैबिनेट में क्या-क्या लिए फैसले?

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 जून को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई। कैबिनेट ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना और कल्याणी विवाह सहायता योजना को 1 अप्रैल 2026 से 5 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रुपयेकी स्वीकृति दी। मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना प्रदेश में 1 अप्रैल 2006 से प्रभावशील है। योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। 

 

मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना अंतर्गत गरीब जरूरतमंद, निराश्रित और निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या-विधवा-परित्यक्ता के सामूहिक विवाह में आर्थिक सहायता के रूप में राशि 55 हजार रुपये प्रति कन्या के मान से दी जाती है। योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 1 लाख 72 हजार 905 हितग्राहियों को 989 करोड़ 80 लाख 62 हजार रुपये से अधिक सहायता राशि प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह, योजना महिला सशक्तिकरण की एक अहम योजना है, जिसके अंतर्गत गरीब और जरूरतमंद अभिभावकों की कन्याओं का सामूहिक विवाह सम्पन्न होता है। इस योजना से विवाह की वैधानिक आयु सुनिश्चित हो जाती है। यह योजना महिलाओं के सामाजिक उत्थान के लिए महत्वपूर्ण है।

 

कैबिनेट ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुंच एवं गुणवत्ता में वृद्धि के लिए शासकीय माध्यमिक शाला का हाई स्कूल एवं हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी में उन्नयन की योजना पर सैद्धांतिक स्वीकृति दी। स्वीकृति अनुसार वर्ष 2026-27 में 75 माध्यमिक शालाओं का हाई स्कूल तथा 100 हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी स्कूल में उन्नयन किया जाएगा। आगामी 2 वर्षों 2027-28 एवं 2028-29 में भी इसी प्रकार प्रतिवर्ष 75 माध्यमिक एवं 100 हाईस्कूलों के उन्नयन पर सैद्धांतिक सहमति दी गई। साथ ही विद्यालयों के उन्नयन के लिए अनुमानित व्यय राशि 635 करोड़ 24 लाख रुपये के प्रस्ताव पर सहमति दी गई। विकसित मध्यप्रदेश@2047 के तहत वर्ष 2029 तक 100 प्रतिशत सकल नामांकन दर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। मापदण्डों के आधार पर जिला स्तर से मेपिंग अनुसार 315 हाई स्कूल एवं 214 हायर सेकेण्डरी स्कूल खोले जाने की आवश्यकता है। सांदीपनि विद्यालयों के कैचमेंट एरिया में विद्यालयों का उन्नयन नहीं किया जाएगा।

सांदीपनि विद्यालय के कैचमेंट एरिया में आने वाले विद्यालयों के समस्त विद्यार्थियों का प्रवेश सांदीपनि विद्यालय में होने पर विद्यालय को अन्य आवश्यकता वाले स्थानों पर युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। उन्नत विद्यालय अपने वर्तमान भवन या अन्य शासकीय भवन में संचालित होंगे। आवश्यकता एवं बजट उपलब्धता के अनुसार अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत किए जाएंगे। वास्तविक रूप से आवश्यक विद्यालयों की संख्या का आंकलन गति शक्ति पोर्टल, जनसंख्या एवं यू-डाइस के आंकड़ों के आधार पर की जायेगी। राज्य में हाई स्कूल का सकल नामांकन दर (जीईआर) 75 प्रतिशत तथा हायर सेकेण्डरी स्तर पर 55 प्रतिशत है। कक्षा 8 से 9 में कक्षांतरण दर 77 प्रतिशत और कक्षा 10 से 11 में 68 प्रतिशत है। विद्यालयों की दूरी अधिक होने होने के कारण विद्यार्थियों का प्रवेश कम होता है या वे नियमित रूप से उपस्थित नहीं रह पाते जिससे ड्रॉप आउट दर बढ़ती है इसलिए विद्यार्थियों की पहुँच में विद्यालय उपलब्ध कराकर उच्च नामांकन एवं निरंतरता सुनिश्चित करना इस निर्णय का मूल लक्ष्य है।

 

किसानों के हित में अहम फैसला-कैबिनेट ने वर्ष 2026-27 के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को अल्पावधि फसल ऋण दिए जाने की योजना अंतर्गत किसानों के हित में शर्तों की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार खरीफ एवं रबी सीजन के लिए पृथक-पृथक देय तिथि (ड्यू डेट) नहीं रखते हुए उसके स्थान पर वार्षिक एकल ऋण सीमा रखी जाएगी। इसमें नगद एवं वस्तु ऋण की उप-सीमा निर्धारित रहे। योजनान्तर्गत देय तिथि (डयू डेट) कृषकों को स्वीकृत वार्षिक एकल लिमिट से प्रथम ऋण आहरण से 12 माह निर्धारित की जाएगी और अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले किसानों को 1.25 प्रतिशत (सामान्य) ब्याज अनुदान तथा निर्धारित ड्यू डेट तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों को 4 प्रतिशत प्रोत्साहन स्वरूप (अतिरिक्त ब्याज अनुदान) राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों से संबद्ध बहुउददेशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण दिए जाने की योजना वर्ष 2012-13 से निरन्तर लागू है। योजनान्तर्गत खरीफ एवं रबी सीजन की निर्धारित तिथि (ड्यू डेट) तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों से 3 लाख रुपये तक के अल्पावधि फसल ऋण पर कोई ब्याज नहीं लिया जाता है। योजना में राज्य शासन द्वारा प्रत्येक वर्ष बेस रेट के साथ-साथ डयू डेट आदि का निर्धारण किया जाता है और निर्धारित बेसरेट में से भारत सरकार से प्राप्त होने वाली ब्याज सहायता को कम करते हुए शेष राशि राज्य शासन द्वारा ब्याज अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जाती है जिससे कृषकों को प्रदेश में शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि ऋण उपलब्ध होता है।

 

शुजालपुर में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किए जाने की स्वीकृति

कैबिनेट ने मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुपालन में सत्र 2026-27 में शुजालपुर (शाजापुर) में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किए जाने की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार शैक्षणिक वर्ग के 9 पद और अशैक्षणिक वर्ग के 8 पद, इस प्रकार कुल 17 पदों के सृजन और व्यय राशि 2 करोड़ 39 लाख 92 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। साथ ही आवश्यक कार्यवाही करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग को अधिकृत किया गया है। जवाहरलाल नेहरू स्मृति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शुजालपुर में विधि पाठ्यक्रम (एल एल बी तीन वर्षीय) एक संकाय के रूप में संचालित है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के 2008 के 'लीगल एजुकेशन रूल्स' के अनुसार मान्यता के लिए विधि पाठ्यक्रमों को संकाय के स्थान पर पृथक शासकीय विधि महाविद्यालय में संचालित किया जाना आवश्यक है। इसी आधार पर शुजालपुर में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किया जा रहा है।

 

सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत 3 हजार 580 करोड़ 7 लाख रुपये की स्वीकृति 

कैबिनेट ने खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं एवं परियोजनाओं के परीक्षण तथा प्रशासकीय अनुमोदन की प्रक्रिया अन्तर्गत 500 करोड़ रुपये से अधिक की संबंधित योजना लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत परिवहन, कमीशन व्यय की प्रतिपूर्ति का 16 वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए 3 हजार 580 करोड़ 7 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) एवं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत विद्युतीकरण कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा दिए गए केन्द्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंश पूंजी के रूप में उपलब्ध करवाये जाने का निर्णय लिया है।

मध्यप्रदेश में अगले 48 से 72 घंटे में मानसून देगा दस्तक, जानें कैसे रहेगी इस बार बारिश?

भोपाल। मध्यप्रदेश में अगले 48-72 घंटों में मानसून अपनी दस्तक दे सकता है। मध्यप्रदेश में मानसून की एंट्री पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्से से होगी और बालाघाट, सिवनी, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर और शहडोल जैसे जिले सबसे पहले मानसूनी बारिश होगी।
 
25 जून को मानसून की एंट्री-भोपाल मौसम केंद्र के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी एके सिंह कहते हैं कि इस बार मध्यप्रदेश में मानसून काफी लेट है, सामान्य तौर पर प्रदेश में मानसून 15-16 जून तक दस्तक दे देता है। अब उम्मीद है कि मानसून अगले 2 से 3 दिनों में प्रदेश में एंट्री कर लेगा। अभी मानसून ने छत्तीसगढ़ के बडे़ एरिया को कवर कर लिया है, ऐसे में संभावना है कि मानसून अगले 2 से 3 दिनों में प्रदेश में दस्तक दे देगा।
 
अल-नीनो ने मानसून पर लगाया ब्रेक- वहीं मानसून पर अलनीनो को प्रभाव पर को लेकर एके सिंह कहते है कि जब भी अलनीनो ईयर होता है तो मानसून कमजोर होता है। अलनीनों के प्रभाव के चलते इस वर्ष मानसून कमजोर रहेगा। मानसून बारिश इस बार 92 फीसदी के आसपास रहेगी।
 
कितना कमजोर रहेगा मानसून?-मौसम विज्ञानी एके सिंह कहते हैं कि अलनीनो के प्रभाव से मानसून लेट होता है और यहीं कारण है कि एक जून को केरल पहुंचने वाला मानसून इस बार 4 जून  को प्रदेश में एंट्री किया है और मध्यप्रदेश में सामान्य तौर पर 15-16 जून को  पहुंचने वाला मानसून 23 जून तक नहीं पहुंचा है। वहीं अलनीनो के चलते  मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में इस बार मानसून कमजोर रहेगा।
 
मानसून में देरी से किसान परेशान?-वहीं मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मानसून के लेट और कमजोर होने से कई जिलों में बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। मानसून लेट होने का सीधा असर सोयबीन की फसल और खरीब की बुआई पर पड़ रहा है। प्रदेश की राजधानी भोपल को छोड़कर बाकी प्रदेश में अभी जून का कोटा पूरा नहीं हुआ है, जिसके कारण बुआई लेट हो रही है। सामान्य तौर पर 4 इंच की  बारिश के बाद किसान बुआई शुरु करते है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता बढ़ने से खरीफ सीजन की बुवाई में तेजी आएगी। किसान लंबे समय से अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं और मानसून की दस्तक कृषि अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।

वहीं मानसून की एंट्री से प्रदेश के ऊपर चार मौसम प्रणालियां सक्रिय हो गई हैं, जिनके प्रभाव से अगले 24 से 48 घंटों में गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। भोपाल, जबलपुर, नर्मदापुरम और आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।  मौसम विभाग ने कई जिलों में तेज हवाओं, आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है।

Lucknow fire update: हाथ से उतर गई चमड़ी… लखनऊ में आग लगी तो दूसरी मंजिल से कूदने वाले मोहम्मद आसिफ ने उस खौफनाक मंजर को किया बयान

Lucknow fire tragedy update: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार 22 जून को एक कमर्शियल बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने सिर्फ 15 लोगों की जान ही नहीं ली। बल्कि उनके साथ जुड़े अनगिनत सपनों, उम्मीदों को भी हमेशा के लिए राख कर दिया। कोई अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था, तो कोई बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाने का सपना देख रहा था। कोई अपने करियर की शुरुआत कर रहा था, तो कोई छुट्टियां बिताने की तैयारी में जुटा था। लेकिन इस भीषण अग्निकांड ने उनके जीवन के साथ-साथ उनके सपनों को भी निगल लिया।

लखनऊ के आशियाना निवासी 32 वर्षीय मोहम्मद आसिफ उस भयावह अग्निकांड के चश्मदीद और पीड़ित हैं, जो अलीगंज स्थित बिल्डिंग में हुआ। आसिफ दूसरी मंजिल पर मौजूद गेमिंग स्टूडियो में काम करते थे। उन्होंने News18 को बताया बताया कि हादसे के वक्त सब कुछ सामान्य था। लेकिन कुछ ही पलों में माहौल मौत के मंजर में बदल गया। आसिफ के बताया, “हम लोग बैठे हुए थे और मस्ती कर रहे थे। अचानक सब कुछ एक दर्दनाक हादसे में बदल गया। धुआं इतना ज्यादा था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।”

उन्होंने आशंका जताई कि बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में मौजूद पेट स्टोर में बड़ी मात्रा में रखा सामान आग को तेजी से फैलाने का कारण बना। जान बचाने के लिए आसिफ को दूसरी मंजिल से छलांग लगानी पड़ी। उन्होंने बताया, “मैं हाईटेंशन वायर के सहारे नीचे कूदा। गर्मी इतनी ज्यादा थी कि तार भी पिघल चुका था। उसे पकड़ने के दौरान मेरे हाथों की चमड़ी तक उधड़ गई। अगर मैं 10-15 सेकंड और देर करता तो शायद मेरी भी मौत हो जाती।”

आसिफ ने राहत और उचित इलाज व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी काफी देर तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने बताया कि उनके एक दोस्त ने भी जान बचाने के लिए छलांग लगाई थी। लेकिन उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई। आसिफ ने कहा, “वह काफी देर तक सड़क पर ही पड़ा रहा, मदद समय पर नहीं पहुंची।”

आसिफ के अनुसार हादसे के दौरान इमारत में सुरक्षा व्यवस्थाएं भी नाकाम साबित हुईं। उन्होंने आगे कहा, “टेरेस का दरवाजा बंद था, वाटर स्प्रिंकलर काम नहीं कर रहे थे और बायोमेट्रिक दरवाजे लॉक थे। इसी वजह से कई लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया।” इस हादसे ने इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों और इमरजेंसी इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

15 लोगों की गई जान

अलीगंज स्थित तीन मंजिला बिल्डिंग में सोमवार दोपहर लगी आग में 15 लोगों की झुलसकर मौत हो गई और नौ अन्य घायल हो गए। इस हादसे ने कई परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया है और पीछे छूट गए हैं बूढ़े माता-पिता, भाई-बहन और वे अधूरे सपने, जो अब कभी पूरे नहीं हो सकेंगे।

मृतकों में 22 वर्षीय आईटी तकनीशियन अब्दुल रहमान भी शामिल हैं। वह पिछले एक वर्ष से ‘एरिया स्टूडियो’ में कार्यरत थे और अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके पिता अफजल कई वर्षों से लकवाग्रस्त हैं। रहमान की मौत के बाद परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

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इस भीषण अग्निकांड में मोहम्मद इमरान के इकलौते बेटे शाहजान (18) की भी मौत हो गई। जानकीपुरम निवासी शाहजान एक छोटे कारोबारी परिवार से थे। पिछले कुछ समय से कंप्यूटर की ट्रेनिंग ले रहे थे। परिजनों के अनुसार, वह बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश जाने की योजना बना रहे थे। सुखमनी सिंह (22) भी इस हादसे का शिकार हो गईं। उनके परिवार में पिता प्रभजोत सिंह, मां और एक छोटा भाई हैं। प्रभजोत सिंह सिविल डिफेंस में कार्यरत हैं।