बेटा, बहू, बेटी, दामाद और ग्रैंड चिल्ड्रेन एक साथ 9 को खोने वाला ये बुजुर्ग जोड़ा मांग रहा अपनी मौत! श्यामभाई और मधुबेन की कहानी दर्दनाक

सूरत के 73 वर्षीय श्यामभाई कापूर्जी गहलोत और उनकी 68 वर्षीय पत्नी मधुबेन ने जिला प्रशासन से इच्छा-मृत्यु की अनुमति की मांग की है। दंपती का कहना है कि वर्षों से चल रहे संपत्ति विवाद और कथित प्रशासनिक उत्पीड़न ने उन्हें पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंचा दिया है। उनके अनुसार, लगातार कानूनी लड़ाई, दुकानों की बार-बार सीलिंग और आर्थिक नुकसान ने उनकी जिंदगी को बेहद कठिन बना दिया है। पहले परिवार में हुए दर्दनाक सड़क हादसे और अपनों की मौत ने पहले ही उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया था, और अब मौजूदा हालात ने उनकी हिम्मत पूरी तरह खत्म कर दी है।

दंपती का आरोप है कि उन्हें न्याय की उम्मीद अब नजर नहीं आती, और वे मानसिक व भावनात्मक रूप से पूरी तरह थक चुके हैं। इसी वजह से उन्होंने प्रशासन से अंतिम राहत के रूप में इच्छा-मृत्यु की अनुमति की मांग की है।

11 दुकानों का विवाद बना जीने की वजह

दंपती का कहना है कि उन्होंने 2006 में 11 छोटी व्यावसायिक दुकानें खरीदी थीं। 2008 में यह इलाका सूरत नगर निगम (SMC) के तहत आ गया, जिसके बाद वे लगातार इन संपत्तियों पर टैक्स भी भरते रहे। लेकिन 2021 में बिना किसी पूर्व नोटिस के उनकी दुकानें सील कर दी गईं।

कोर्ट की लड़ाई और अस्थायी राहत

इसके बाद उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और लगभग पांच साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। फायर विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि इन छोटी दुकानों पर बड़े कॉमर्शियल भवनों जैसे नियम लागू नहीं होते, जिसके बाद उन्हें राहत मिली और दुकानें 31 जनवरी को खोल दी गईं।

फिर से सील, फिर से विवाद

लेकिन राहत ज्यादा दिन नहीं टिक सकी। दंपती का आरोप है कि 30 मई को उनकी दुकानें फिर से बिना किसी नोटिस के सील कर दी गईं। उनका कहना है कि यह कार्रवाई अचानक और बिना किसी स्पष्ट कारण के की गई।

दबाव और आरोपों की परतें

श्यामभाई गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि उन पर स्थानीय स्तर पर एक राजनीतिक नेता से मिलने का दबाव बनाया गया और उनकी संपत्ति पर कब्जे की कोशिशें हुईं। उन्होंने कहा कि कई बार स्पष्टीकरण मांगने के बावजूद उन्हें कोई लिखित जवाब नहीं मिला।

परिवार की त्रासदी और टूटता हौसला

इस दर्द को और गहरा करने वाली घटना 2016 में हुई, जब एक सड़क हादसे में उनके परिवार के नौ सदस्य उनका इकलौता बेटा, बहू, पोते-पोतियां और अन्य रिश्तेदार एक साथ चल बसे। तब से यह दंपती अकेले जीवन बिता रहा है और एक-दूसरे का सहारा ही उनका पूरा संसार है।

 “अब जीने की इच्छा नहीं बची”

दंपती ने अपने आवेदन में साफ लिखा है कि लगातार कानूनी लड़ाई, आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव ने उन्हें इस हद तक तोड़ दिया है कि अब वे जीवन समाप्त करने की अनुमति चाहते हैं। उनका कहना है अगर न्याय नहीं मिल सकता, तो उनके लिए जीवन का कोई अर्थ नहीं बचा है।

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डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी पुण्यतिथि, जानें 5 अनसुने तथ्य

A photo in the image providing information regarding the death anniversary of Dr. Syama Prasad Mukherjee

Dr. Syama Prasad Mukherjees Martyrdom Day: भारतीय राजनीति में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने देश की एकता, अखंडता और वैचारिक राजनीति की एक नई नींव रखी। आज, 23 जून को उनकी पुण्यतिथि है। वे एक प्रखर शिक्षाविद्, महान बैरिस्टर और स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री थे। उन्होंने 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे' का नारा देकर कश्मीर को भारत का पूर्ण अंग बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। 

 

आइए, उनकी पुण्यतिथि के विशेष अवसर पर जानते हैं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन से जुड़े 5 अनसुने और बेहद दिलचस्प तथ्य:

 

1. महज 33 वर्ष की उम्र में बने सबसे युवा वाइस चांसलर

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की बुद्धिमत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे केवल 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता (कोलकाता) विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बन गए थे। उनके कार्यकाल (1934-1938) के दौरान ही महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार कलकत्ता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को बंगाली भाषा में संबोधित किया था, जो उस दौर में एक बहुत बड़ा बदलाव था।

 

2. नेहरू कैबिनेट के पहले मंत्री, जिन्होंने खुद इस्तीफा दिया

देश आजाद होने के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपनी पहली कैबिनेट में उद्योग और आपूर्ति मंत्री (Minister for Industry and Supply) बनाया था। हालांकि, साल 1950 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच 'नेहरू-लियाकत समझौता' हुआ, तो डॉ. मुखर्जी ने इसका कड़ा विरोध किया। वे पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों/ हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। नीतिगत मतभेदों के कारण उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। वे आजाद भारत के पहले ऐसे मंत्री थे जिन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया था।

 

3. भारतीय जनसंघ (बीजेपी की नींव) की स्थापना

नेहरू कैबिनेट से अलग होने के बाद, डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोग से 21 अक्टूबर 1951 को 'भारतीय जनसंघ' की स्थापना की। यही जनसंघ आगे चलकर 1980 में 'भारतीय जनता पार्टी' (BJP) के रूप में सामने आया। आज बीजेपी उन्हें अपना मार्गदर्शक और वैचारिक संस्थापक मानती है।

 

'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।' 

– यह ऐतिहासिक नारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के विरोध में दिया था।

 

4. कश्मीर में प्रवेश के लिए बिना परमिट के किया सफर

1950 के दशक में जम्मू-कश्मीर जाने के लिए भारत के ही नागरिकों को एक विशेष 'परमिट' या अनुमति पत्र लेना पड़ता था। वहां का अपना अलग झंडा या निशान और अलग प्रधानमंत्री/ प्रधान होता था। डॉ. मुखर्जी ने इस व्यवस्था को भारत की संप्रभुता के खिलाफ माना। मई 1953 में, उन्होंने इस कानून को चुनौती देने के लिए बिना परमिट के कश्मीर में प्रवेश किया, जहां लखनपुर बॉर्डर पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

 

5. जेल में रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत्यु

गिरफ्तारी के बाद उन्हें श्रीनगर की एक जेल में नजरबंद रखा गया। वहां उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। 23 जून 1953 को रहस्यमयी परिस्थितियों में अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनकी मां जोगमाया देवी और देश के कई बड़े नेताओं ने इस मौत की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनकी यह मृत्यु आज भी भारतीय इतिहास के सबसे बड़े रहस्यों में से एक मानी जाती है।

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Uttarakhand: अर्द्धकुंभ 2027 के लिए सीएम धामी का बड़ा मास्टरप्लान, 156 करोड़ से बदलेगी ऋषिकेश त्रिवेणी घाट की सूरत

Uttarakhand Ardh Kumbh 2027: उत्तराखंड में साल 2027 में आयोजित होने वाले अर्द्धकुंभ को ऐतिहासिक, भव्य और दिव्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। इस महाआयोजन के मद्देनजर देवभूमि आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं की सुगमता और अध्यात्म को बढ़ावा देने के लिए ऋषिकेश के विश्व प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट का कायाकल्प किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने त्रिवेणी घाट को एक आधुनिक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 156 करोड़ का विशेष बजट स्वीकृत किया है।

बनेगा नया 'गंगा कॉरिडोर'

इस विशेष योजना के तहत ऋषिकेश में एक भव्य गंगा कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। यह कॉरिडोर न केवल त्रिवेणी घाट की सुंदरता में चार चांद लगाएगा, बल्कि यहां आने वाले तीर्थयात्रियों को आध्यात्मिकता का एक बिल्कुल नया, सुगम और सुरक्षित अनुभव प्रदान करेगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होने के बावजूद इस पूरे क्षेत्र के पौराणिक और धार्मिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखा जाएगा।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं

  • आधुनिक धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र : त्रिवेणी घाट को वैश्विक स्तर के सांस्कृतिक हब के रूप में री-डेवलप किया जाएगा, जहां भव्य गंगा आरती के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।
  • श्रद्धालुओं के लिए सुगम मार्ग : अर्द्धकुंभ के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने और उनके आवागमन को आसान बनाने के लिए कॉरिडोर के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा।
  • 156 करोड़ का विशेष प्रावधान: इस भारी-भरकम बजट से घाटों का विस्तार, सौंदर्यीकरण, रोशनी की आधुनिक व्यवस्था और स्वच्छता प्रबंधन के कार्य किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, राज्य सरकार अर्द्धकुंभ 2027 को भव्यता के नए शिखर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह नया इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल कुंभ के दौरान काम आएगा, बल्कि भविष्य में ऋषिकेश में पर्यटन और तीर्थाटन को एक नई ऊंचाई देगा।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Delhi Weather: दिल्ली में अचानक आई धूल भरी आंधी, 40 Kmph की रफ्तार से चली हवा, रेड अलर्ट जारी

Delhi Weather Today: राजधानी दिल्ली समेत आसपास के इलाकों में मंगलवार (23 जून) की दोपहर में अचनाक मौसम बदल गया। धूल भरी आंधी चली। मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी करते हुए बताया कि दिल्ली में करीब 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली।

दिन में दिखा रात सा नजारा 

बता दें कि, दिल्ली और आसपास के इलाकों में अचानक आई धूल भरी आंधी के कारण दिन में ही रात सा माहौल हो गया। धूल भरी आंधी से पूरा आसमान ढक गया। तेज हवाओं ने सड़क पर चल रहे राहगीरों की मुश्किलें बढ़ा दी। बता दें कि मंगलवार की सुबह IMD ने बताया था कि , दिल्ली में दिन में कहीं-कहीं आंधी-तूफान की गतिविधि हो सकती है। तेज हवाओं से पिछले कुछ दिनों से बनी उमस भरी स्थिति से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

बता दें कि, भारतीय मौसम विभाग ने पहले ही 23 जून 2026 को दिल्ली में आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने, तेज हवाएं चलने और आंधी-तूफान की संभावना जताई थी। मौसम विभाग ने दोपहर और शाम के समय आंधी-तूफान की स्थिति बनने का अनुमान लगाया था साथ ही 40  किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं जो दिन में 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।

उधर मंगलवार को सुबह साढ़े नौ बजे दिल्ली का एक्यूआइ 145 दर्ज किया गया। इसे ‘मध्यम’ श्रेणी में रखा जाता है। एनसीआर के शहरों में भी हवा संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में चल रही है। वहीं अधिकतम तापमान 39°C से 41°C के बीच रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान 24°C से 26°C के बीच रहने की उम्मीद है।

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रानी दुर्गावती के बलिदान की कहानी की 3 खास बातें

rani durgavati balidan diwas 2026

24 जून का दिन भारतीय इतिहास में एक ऐसी महानायिका के आत्म बलिदान को नमन करने का दिन है, जिसने दिल्ली के मुगल सम्राट के सामने सिर झुकाने के बजाय अपनी मातृभूमि के लिए प्राण न्यौछावर करना बेहतर समझा। वर्ष 2026 में भी उनका यह अदम्य साहस हर देशवासी को गौरवान्वित करता है। आइए, उनके प्रेरक जीवन को 3 मुख्य श्रेणियों में एक नए और ओजस्वी अंदाज़ में समझते हैं।

 

1. चंदेल वंश की बेटी से गोंडवाना की कुशल शासिका (परिचय एवं कुशल नेतृत्व)

तेजस्वी जन्म और नामकरण: बुंदेलखंड के बांदा जिले में स्थित ऐतिहासिक कालिंजर किले के राजा कीर्तिसिंह चंदेल के घर 5 अक्टूबर 1524 को एक कन्या ने जन्म लिया। उस दिन दुर्गाष्टमी का पावन पर्व था, इसलिए नाम रखा गया 'दुर्गावती'। वे बचपन से ही अपने नाम के अनुरूप अद्वितीय सौंदर्य, तीक्ष्ण बुद्धि और अदम्य साहस की धनी थीं।

 

विवाह और अचानक आया संकट: दुर्गावती का विवाह गोंडवाना साम्राज्य के प्रतापी राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह से हुआ। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; विवाह के मात्र 4 वर्ष बाद ही राजा दलपत शाह का असमय निधन हो गया।

 

साम्राज्य का कुशल संचालन: इस संकट की घड़ी में रानी घबराईं नहीं। उनका पुत्र नारायण केवल 3 वर्ष का था, इसलिए रानी ने स्वयं गढ़मंडला (वर्तमान जबलपुर केंद्र) की सत्ता संभाली। उन्होंने लगभग 16 वर्षों तक न केवल कुशलता से राजकाज चलाया, बल्कि अपनी प्रजा की भलाई के लिए कई भव्य मंदिर, मठ, कुएं, बावड़ियां और धर्मशालाएं भी बनवाईं।

 

2. दुश्मनों पर काल बनकर टूटने वाली वीरांगना (शौर्य, पराक्रम और सैन्य कुशलता)

बाजबहादुर को सिखाया सबक: मालवा के स्त्री-लोलुप सूबेदार बाजबहादुर ने जब रानी के राज्य और सम्मान पर बुरी नजर डाली, तो रानी दुर्गावती के पराक्रम के सामने उसे करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। जब उसने दोबारा हिम्मत की, तो रानी ने उसकी पूरी सेना का समूल नाश कर दिया, जिसके बाद उसने कभी गोंडवाना की तरफ आंख उठाकर नहीं देखा।

 

तीन मुस्लिम राज्यों को दी शिकस्त: रानी के सैन्य कौशल का खौफ ऐसा था कि उन्होंने अपने आसपास के तीन बड़े मुस्लिम राज्यों को बार-बार युद्ध में धूल चटाई। इस पराजय से वे राज्य इतने डर गए कि उन्होंने गोंडवाना की सीमाओं से दूरी बना ली। इन जीतों से रानी को अपार वैभव और संपत्ति भी मिली।

 

निडर शिकारी: रानी दुर्गावती के भीतर क्षत्राणी का खून दौड़ता था। उन्हें शिकार का बेहद शौक था। यदि उन्हें राज्य में कहीं शेर होने की सूचना मिलती, तो वे तुरंत उसका शिकार करने निकल पड़ती थीं और जब तक उस हिंसक पशु को मार नहीं लेती थीं, तब तक जल भी ग्रहण नहीं करती थीं।

 

3. अकबर के अहंकार को चुनौती और महाबलिदान (अंतिम संघर्ष एवं अमर सम्मान)

अकबर की कुदृष्टि और रानी का संकल्प: मुगल सम्राट अकबर के सूबेदार ख्वाजा अब्दुल मजीद खां ने अकबर को रानी के खिलाफ भड़काया। अकबर इस स्वाभिमानी रानी को अपने हरम (रनवासे) की शोभा बनाना चाहता था। जब यह संदेश रानी तक पहुंचा, तो उन्होंने मुगलों की गुलामी और इस अपमान को स्वीकार करने के बजाय युद्ध के मैदान में अपनी अस्मिता की लड़ाई लड़ना चुना।

 

ऐतिहासिक कटार और आत्म-बलिदान: 24 जून 1564 को मुगलों के खिलाफ लड़ते हुए रानी ने अद्भुत वीरता दिखाई। जब युद्ध भूमि (जबलपुर-मंडला मार्ग पर बरेला के पास, नारिया नाला) में वे चारों ओर से दुश्मनों से घिर गईं और उन्हें लगा कि जीवित रहते मुगलों के हाथ आना निश्चित है, तो उन्होंने दुश्मन के हाथों अपमानित होने के बजाय अपनी ही कटार अपने सीने में घोंप ली और वीरगति को प्राप्त हुईं। (हालांकि बाद में उनके देवर चंद्रशाह ने मुगलों की अधीनता मान ली)।

 

अमर प्रतीक और सम्मान: जिस पावन धरती पर रानी ने प्राण त्यागे, वहां आज उनका भव्य स्मारक बना है, जहां हर साल 24 जून को 'बलिदान दिवस' मनाया जाता है। इस महान वीरांगना के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए भारत सरकार ने 24 जून 1988 को उनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया था। रानी दुर्गावती का शौर्य आज भी हर हिंदुस्तानी के दिलों में राष्ट्रभक्ति की अलख जगा रहा है।

India-US Trade Talks 2026: अमेरिका के साथ बड़ी डील की तैयारी में भारत, शेयर बाजार के निवेशकों के लिए क्या है इसके मायने?

US Trade Deal

India-US Trade Deal Talks 2026: अमेरिकी सरकार द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ की वजह से भारत का अमेरिका के साथ व्यापार मुनाफा (Trade Surplus) 40% तक गिर चुका है। इस बीच वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अगले हफ्ते अमेरिकी सरकार के प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मुलाकात करेंगे। कहा जा रहा है कि इस दौरान भारत अमेरिका के बीच व्यापार समझौता जल्द ही अंतिम दौर में पहुंच सकता है। इस इमरजेंसी मीटिंग के बाद कौन से सेक्टर्स के शेयर रॉकेट बनने वाले हैं और कहां आपको सतर्क रहना चाहिए? ALSO READ: तेल निर्यात में राहत के बीच ट्रंप की चेतावनी, क्या मुश्किल में पड़ जाएगी US-Iran डील?

 

जून 2026 में G7 समिट से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। भारतीय शेयर बाजार से जुड़े निवेशक भी इस पॉजिटिव न्यूज का ब्रेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

 

व्यापार डील से भारत को क्या फायदा? 

एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा, बाजारों तक पहुंच आसान होगी और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। यदि भारत अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करते हुए संतुलित समझौता करता है, तो ट्रेड डील से सबसे बड़ा फायदा निर्यात, निवेश, रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिल सकता है। यही वजह है कि बाजार और उद्योग जगत भारत-अमेरिका ट्रेड डील को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मान रहे हैं।

 

ट्रेड डील से भारत को उन्नत तकनीक, रक्षा उपकरण, सेमीकंडक्टर और एयरोस्पेस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलेगा। टेक्सटाइल और गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो कंपोनेंट्स, आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में भी भारत को फायदा मिलेगा। अगर भारत और अमेरिका के बीच व्यापक ट्रेड डील होती है, तो भारत को कई क्षेत्रों में सीधा फायदा मिल सकता है। हालांकि अंतिम लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि समझौते की शर्तें क्या होती हैं। ALSO READ: PM मोदी-ट्रंप बैठक का असर, अंतिम चरण में पहुंचा भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

बाजार विशेषज्ञ योगेश बागौरा ने कहा कि अमेरिका भारत का एक्सपोर्ट में बड़ा पार्टनर है। अगर ट्रेड डील होती है और टैरिफ घटकर 10 फीसदी तक हो जाता है तो भारत के लिए ठीक रहेगा। 

 

अगर इससे ज्यादा टैरिफ लगेगा तो भारतीय सामान महंगा हो जाएगा और उसे चीन और अन्य देशों के सामान से कॉम्पिटिशन का सामना पड़ेगा। शेयर बाजार पर डील का सकारात्मक असर होगा और एक्सपोर्ट सेक्टर को फायदा होगा। आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों को शेयर बाजार “ट्रेड डील बेनिफिशियरी” के रूप में देख सकता है। हालांकि इस डील मात्र से ही एफआईआई भारतीय बाजार की ओर आकर्षित नहीं होंगे। 

गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने फरवरी में लगभग एक वर्ष तक चली बातचीत के बाद व्यापार को लेकर अंतरिम सहमति बनाई थी। इसके बाद से दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं भारत अमेरिका से टैरिफ को और कम करने की मांग रख सकता है, जबकि अमेरिका भारत से एग्री के कुछ प्रोडक्‍ट्स को परमिशन देने की मांग कर रहा है।

edited by : Nrapendra Gupta

कलेक्‍टर की चौखट पर बेबस बुजुर्ग, न्‍याय मांगने बिजनौर से एंबुलेंस में इंदौर आई 80 साल की फातिमा, दबंगों ने कर रखा है प्रापर्टी कब्‍जा

Anis Fatima

अपराध इस देश के सिस्‍टम पर कितना हावी हो चुका है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है जब कोई 80 से 85 साल की बीमार बुजुर्ग न्‍याय के लिए उत्‍तर प्रदेश से करीब 850 किमी से ज्‍यादा का सफर तय कर के मध्‍यप्रदेश के इंदौर तक आए। वो भी तब जब वो कई बीमारियों से जूझ रही हों, अपनी आखिरी सांसें गिर रही हों और उन्‍हें यहां तक आने के लिए एंबुलेंस का सहारा लेना पड़े।

मंगलवार को इंदौर कलेक्‍ट्रेट कार्यालय की चौखट पर एंबुलेंस में इस ‘बेबस बुजुर्ग’ की यह तस्‍वीर देखकर हर किसी का दिल और आंखें भर आईं। मंगलवार को वे अपने बेटे और बहू के साथ कलेक्‍टर शिवम वर्मा से मिलीं और न्‍याय की गुहार लगाई।

अनीस फातिमा ने अपना सुनाया दर्द : इस बुजुर्ग का नाम अनीस फातिमा पति मेहबूब हैं। अनीस फातिमा इंदौर की हैं। वे इंदौर के गांधीनगर में बक्षीबाग स्‍कूल में शिक्षिका थीं। पति के निधन के बाद अपने मायके उत्‍तर प्रदेश के बिजनौर में रहती हैं। इस बीच फातिमा ने इंदौर में स्‍थित अपना एक मकान और एक प्‍लॉट अपने पति के भतीजे अनीस पिता मोहम्‍मद अय्युब को यह कहकर उसकी देखभाल करने के लिए कहा था कि मकान और प्‍लॉट का संरक्षण हो सके। अपने मकान में उन्‍होंने कुछ सामान और कीमती दस्‍तावेज आदि भी रखे थे। इस दौरान पीड़ित अनीस फातिमा वहां से इंदौर के सदर बाजार की इकबाल कॉलोनी में इस लिहाज से अस्‍थाई तौर पर रहने के लिए आ गई थी कि वहां से उन्‍हें अपने स्‍कूल जाने में कोई दिक्‍कत और असुविधा न हो। स्‍कूल के रिटायर्ड होने के बाद अनीस फातिमा अपने परिवार में खजराना में रहने चली गईं। इसी का फायदा उठाकर उनके पति के भतीजे आरोपी अनीस पिता मोहम्‍मद अय्युब ने ताला लगाकर उस पर कब्‍जा कर लिया।

बेटे फरहान के साथ गाली गलौच और मारने की धमकी : अनीस फातिमा के साथ आए उनके बेटे फरहान ने बताया कि आरोपी अनीस पिता मोहम्‍मद अय्युब, मोहम्‍मद जुबैर और किश्‍वरजहां ने मिलकर हमारे मकान और प्‍लॉट के फर्जी दस्‍तावेज बनवा लिए और कब्‍जा कर लिया। जब वे इस बारे में बात करने पहुंचे तो उसे गालियां दी और जान से मारने की धमकी दे डाली।

Anis Fatima

गांधीनगर थाना में शिकायत दर्ज : फरहान और उनके वकील ने आवेदन के माध्‍यम से बताया कि प्रापर्टी पर कब्‍जे को लेकर 13 दिसंबर 2023 को इंदौर के गांधी नगर थाना में आरोपी मोहम्‍मद जुबेर और किश्‍वर जहां के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई थी। उनके खिलाफ थाने में मामला दर्ज होने के बाद जांच कर्ता मीना चौहान ने मामले की जांच की थी। पीड़ित परिवार का आरोप है कि मीना चौहान ने भी ठीक से मामले की जांच नहीं की।

प्रापर्टी के मूल दस्‍तावेज पीड़ित के पास हैं : पीड़ित परिवार के सदस्‍यों ने बताया कि उनकी यह पूरी प्रापर्टी अनीस फातिमा और उनके बेटे फरहान और बहू फरजाना अंजुम के स्‍वामित्‍व और आधिपत्‍य की है। वे ही उसके हकदार हैं। इसके मूल दस्‍तावेज भी अनीस फातिमा के पास मौजूद हैं। बावजूद इसके आरोपी उनके मकान और प्‍लॉट पर कब्‍जा किए हुए हैं। उन्‍होंने कलेक्‍टर शिवम वर्मा को जनसुनवाई में आवेदन देकर न्‍याय की गुहार लगाई। कलेक्‍टर वर्मा ने पीड़ित अनीस फातिमा से मुलाकात कर जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्‍वासन दिया है।

850 किमी सफर तय कर इंदौर पहुंची फातिमा : फातिमा के बेटे फरहान ने बताया कि उनकी मां को कई तरह की बीमारियां है, वे करीब 80 साल की हैं। इस बीच उन्‍हें ब्रेनहेमरेज भी हुआ था। उनके पास ले-देकर यही एक प्रापर्टी है जिस पर दबंगों ने कब्‍जा कर लिया है। ऐसे में 80 साल की बुजुर्ग और बीमार मां को एंबुलेंस से यूपी के बिजनौर से इंदौर लाना पड़ा। उनकी हालत बेहद नाजुक है। उन्‍हें इंदौर प्रशासन और पुलिस से न्‍याय की उम्‍मीद है।

Ram Mandir Daan Chori Case: एसआईटी ने सरकार को सौंपी राम मंदिर में कथित चंदा चोरी की रिपोर्ट, जानें- बड़ी बातें

Ayodhya Ram temple donation case: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मंगलवार (23 जून) को यूपी सरकार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंप दी। लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को यह शुरुआती रिपोर्ट सौंपी। उन्होंने बताया कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच अभी भी चल रही है। मामले में अभी जानकारी जुटाई जा रही है।

अयोध्या राम मंदिर में मिले चंदे के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया था। SIT द्वारा शुरुआती रिपोर्ट सौंपने के बाद, पंत ने PTI वीडियो को बताया कि SIT अगले 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की कोशिश कर रही है। पंत ने कहा, “अब तक सामने आई जानकारी और हमारे पास मौजूद तथ्यों के आधार पर हमने आज पहली रिपोर्ट सौंपी है। यह केवल शुरुआती रिपोर्ट है और अंतिम रिपोर्ट कुछ समय बाद सौंपी जाएगी।”

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट गोपनीय है। उन्हें इस चरण में मीडिया के साथ जांच के नतीजों का विवरण साझा करने की अनुमति नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या टीम आगे की जांच के लिए अयोध्या लौटेगी क्योंकि सौंपी गई रिपोर्ट केवल शुरुआती थी? इस पर पंत ने PTI से कहा, “बिल्कुल, हम जरूरत के हिसाब से ऐसा करेंगे।”

अखिलेश यादव ने उठाया था मामला

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को उन रिपोर्टों का हवाला दिया था जिनमें दावा किया गया था कि राम मंदिर में दिए गए चंदे में से करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने अदालतों से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था। यादव ने SIT जांच पर रोज़ाना जानकारी देने की मांग की थी। साथ ही आरोप लगाया था कि एजेंसी पर जनता का भरोसा कम हो गया है, जिसे उन्होंने BJP सरकार के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का नतीजा बताया था।

मंदिर से जुड़े लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ने का निर्देश

राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने रविवार को लखनऊ रवाना होने से पहले यह निर्देश दिए। सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ सहित रोजाना की जांच रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित की जा रही हैं। सूत्रों ने बताया कि एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है।

सूत्रों के मुताबिक, सबसे बड़ी कथित अनियमितता कुंभ मेले के दौरान सामने आई, जब करीब दो महीने की अवधि में रोजाना लगभग 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे। दान पेटियां दो घंटे के भीतर ही नोटों से भर जाती थीं। यही वजह है कि एसआईटी इस दान की निगरानी एवं हिसाब-किताब की गहराई से जांच कर रही है। सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी सामने आई है।

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यूपी में पुलिस डॉग मैरी ने सुलझाया ब्लाइंड रेप केस, एसपी ने दिया 10000 का इनाम

Sambhal blind rape case

Sambhal blind rape case: यूपी के संभल जिले में 5 दिनों से पुलिस के लिए सिर दर्द बने एक 'ब्लाइंड रेप केस' की गुत्थी को पुलिस डॉग मैरी ने चंद मिनटों में सुलझा दिया। घटनास्थल पर मिले एक अदद 'गमछे' की गंध के सहारे मैरी खेतों और जंगलों को चीरती हुई सीधे रेपिस्ट के घर जा पहुंची। इस हैरतअंगेज कामयाबी से खुश होकर संभल के एसपी ने इस 'गोल्ड मेडलिस्ट' डॉग को 10 हजार रुपए के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया है।

जंगल में बेहोश मिली थी 6 साल की मासूम

दिल को दहला देने वाली यह वारदात बबराला थाना क्षेत्र की है। बीती 18 जून को एक 6 साल की मासूम बच्ची घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक लापता हो गई थी। काफी खोजबीन के बाद बच्ची घर से करीब 300 मीटर दूर जंगल में लहूलुहान और बेहोशी की हालत में मिली। दरिंदे ने मासूम के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने उसी रात क्राइम सीन को सील कर दिया। अगले दिन फॉरेंसिक टीम को जांच के दौरान झाड़ियों से एक संदिग्ध 'गमछा' मिला। पुलिस के पास आरोपी का न तो कोई हुलिया था और न ही कोई नाम। केस पूरी तरह 'ब्लाइंड' था, तभी एंट्री हुई पुलिस की स्पेशल डॉग 'मैरी' की।
 

गंध मिलते ही मैरी का एक्शन

एसपी के निर्देश पर डॉग स्क्वॉड की जर्मन शेफर्ड 'मैरी' को घटनास्थल पर लाया गया। मैरी को जैसे ही वह बरामद हुआ गमछा सूंघने को दिया गया, उसकी आंखों में चमक आ गई। गंध पकड़ते ही मैरी तेजी से खेतों और पगडंडियों से होते हुए एक खास दिशा में दौड़ पड़ी। पुलिस की टीम मैरी के पीछे-पीछे भाग रही थी। करीब कुछ दूरी तय करने के बाद मैरी सीधे बबराला के ही रहने वाले संदीप नाम के युवक के घर के भीतर घुस गई और वहां जाकर रुक गई। जब मैरी संदीप के घर पहुंची, तो पुलिस को देखकर उसके घरवाले घबरा गए और संदीप के घर पर न होने का बहाना बनाने लगे। लेकिन मैरी की सटीक क्रेडिबिलिटी को देखते हुए पुलिस का शक यकीन में बदल गया।

फिर पुलिस ने दबोच लिया आरोपी

पुलिस की भनक लगते ही संदीप पिछले दरवाजे से खेतों की तरफ भाग निकला था। संदीप के भागने के बाद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। आखिरकार बबराला-रजपुरा मार्ग पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी संदीप को दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक अवैध तमंचा और कारतूस भी बरामद हुआ, जिससे साफ है कि वह पुलिस पर हमला करने या खुद को नुकसान पहुंचाने की फिराक में था।

 

पुलिस ने आरोपी संदीप पर न सिर्फ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और दुष्कर्म की संगीन धाराएं लगाई हैं, बल्कि तमंचा मिलने के बाद उस पर आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है। फॉरेंसिक टीम ने संदीप के डीएनए सैंपल और गमछे के रेशों को मैचिंग के लिए लैब भेज दिया है, ताकि कोर्ट में उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। फिलहाल, मासूम का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर है।

'मैरी' ने पहले भी सुलझाए हैं केस

मैरी कोई आम डॉग नहीं है, बल्कि वह अपने ट्रेनिंग बैच की 'गोल्ड मेडलिस्ट' रही है। अपराधियों को पकड़ने में उसका लोहा हर कोई मानता है। इससे पहले बिलासपुर के घने जंगलों में हुए एक अंधे कत्ल (Blind Murder Case) की गुत्थी को भी मैरी ने ही सुलझाया था। संभल के ही एक अन्य अज्ञात हत्याकांड में मैरी ने हत्यारे के फेंकें हुए हथियार को ढूंढ निकाला था।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala

 

यूपी में पुलिस डॉग मैरी ने सुलझाया ब्लाइंड रेप केस, एसपी ने दिया 10000 का इनाम

Sambhal blind rape case

Sambhal blind rape case: यूपी के संभल जिले में 5 दिनों से पुलिस के लिए सिर दर्द बने एक 'ब्लाइंड रेप केस' की गुत्थी को पुलिस डॉग मैरी ने चंद मिनटों में सुलझा दिया। घटनास्थल पर मिले एक अदद 'गमछे' की गंध के सहारे मैरी खेतों और जंगलों को चीरती हुई सीधे रेपिस्ट के घर जा पहुंची। इस हैरतअंगेज कामयाबी से खुश होकर संभल के एसपी ने इस 'गोल्ड मेडलिस्ट' डॉग को 10 हजार रुपए के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया है।

जंगल में बेहोश मिली थी 6 साल की मासूम

दिल को दहला देने वाली यह वारदात बबराला थाना क्षेत्र की है। बीती 18 जून को एक 6 साल की मासूम बच्ची घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक लापता हो गई थी। काफी खोजबीन के बाद बच्ची घर से करीब 300 मीटर दूर जंगल में लहूलुहान और बेहोशी की हालत में मिली। दरिंदे ने मासूम के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने उसी रात क्राइम सीन को सील कर दिया। अगले दिन फॉरेंसिक टीम को जांच के दौरान झाड़ियों से एक संदिग्ध 'गमछा' मिला। पुलिस के पास आरोपी का न तो कोई हुलिया था और न ही कोई नाम। केस पूरी तरह 'ब्लाइंड' था, तभी एंट्री हुई पुलिस की स्पेशल डॉग 'मैरी' की।
 

गंध मिलते ही मैरी का एक्शन

एसपी के निर्देश पर डॉग स्क्वॉड की जर्मन शेफर्ड 'मैरी' को घटनास्थल पर लाया गया। मैरी को जैसे ही वह बरामद हुआ गमछा सूंघने को दिया गया, उसकी आंखों में चमक आ गई। गंध पकड़ते ही मैरी तेजी से खेतों और पगडंडियों से होते हुए एक खास दिशा में दौड़ पड़ी। पुलिस की टीम मैरी के पीछे-पीछे भाग रही थी। करीब कुछ दूरी तय करने के बाद मैरी सीधे बबराला के ही रहने वाले संदीप नाम के युवक के घर के भीतर घुस गई और वहां जाकर रुक गई। जब मैरी संदीप के घर पहुंची, तो पुलिस को देखकर उसके घरवाले घबरा गए और संदीप के घर पर न होने का बहाना बनाने लगे। लेकिन मैरी की सटीक क्रेडिबिलिटी को देखते हुए पुलिस का शक यकीन में बदल गया।

फिर पुलिस ने दबोच लिया आरोपी

पुलिस की भनक लगते ही संदीप पिछले दरवाजे से खेतों की तरफ भाग निकला था। संदीप के भागने के बाद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। आखिरकार बबराला-रजपुरा मार्ग पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी संदीप को दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक अवैध तमंचा और कारतूस भी बरामद हुआ, जिससे साफ है कि वह पुलिस पर हमला करने या खुद को नुकसान पहुंचाने की फिराक में था।

 

पुलिस ने आरोपी संदीप पर न सिर्फ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और दुष्कर्म की संगीन धाराएं लगाई हैं, बल्कि तमंचा मिलने के बाद उस पर आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है। फॉरेंसिक टीम ने संदीप के डीएनए सैंपल और गमछे के रेशों को मैचिंग के लिए लैब भेज दिया है, ताकि कोर्ट में उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। फिलहाल, मासूम का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर है।

'मैरी' ने पहले भी सुलझाए हैं केस

मैरी कोई आम डॉग नहीं है, बल्कि वह अपने ट्रेनिंग बैच की 'गोल्ड मेडलिस्ट' रही है। अपराधियों को पकड़ने में उसका लोहा हर कोई मानता है। इससे पहले बिलासपुर के घने जंगलों में हुए एक अंधे कत्ल (Blind Murder Case) की गुत्थी को भी मैरी ने ही सुलझाया था। संभल के ही एक अन्य अज्ञात हत्याकांड में मैरी ने हत्यारे के फेंकें हुए हथियार को ढूंढ निकाला था।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala