Waaree Energies Q1 Results: सोलर कंपनी को ₹850 करोड़ का मुनाफा, अमेरिका में मिली बड़ी राहत

Waaree Energies Q1 Results: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी वारी एनर्जीज ने जून तिमाही के मजबूत नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 850 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 745 करोड़ रुपये था। वहीं, मार्च तिमाही में कंपनी ने 773 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। इस तरह मुनाफा सालाना आधार पर 14.09% और तिमाही आधार पर 9.96% बढ़ा।

रेवेन्यू में 79% की बढ़ोतरी

जून तिमाही में वारी एनर्जीज का ऑपरेशन से रेवेन्यू 7,932 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 4,426 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में भी कंपनी का रेवेन्यू 4,426 करोड़ रुपये रहा था। इस तरह रेवेन्यू में सालाना और तिमाही, दोनों आधार पर करीब 79% की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

जून तिमाही में कंपनी का EBITDA बढ़कर 1,440 करोड़ रुपये हो गया। पिछली तिमाही में यह 997 करोड़ रुपये था। यानी तिमाही आधार पर इसमें 44.4% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, EBITDA मार्जिन घटकर 18.2% रह गया। मार्च तिमाही में यह 22.5% था।

अमेरिका से मिला बड़ा फायदा

वारी एनर्जीज ने बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद उसे बड़ा फायदा मिला है। कोर्ट ने एक्सपोर्टर्स पर लगाए गए रेसिप्रोकल ड्यूटी को गैरकानूनी करार दिया था।

इसके बाद अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने रिफंड क्लेम स्वीकार किए। इसी के आधार पर वारी एनर्जीज ने 349.18 करोड़ रुपये को अन्य ऑपरेटिंग रेवेन्यू के तौर पर दर्ज किया। इसके अलावा, कंपनी ने 25.13 करोड़ रुपये को एसेट्स और इन्वेंट्री की लागत में कमी के रूप में भी दर्ज किया।

वारी एनर्जीज के शेयरों का हाल

वारी एनर्जीज का शेयर बुधवार को 1.59% की बढ़त के साथ 2,738 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने से स्टॉक लगभग फ्लैट है। वहीं, 1 साल में इसने 14.06% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 78.71 हजार करोड़ रुपये है।

Vedanta Oil & Gas Q1 Results: डिमर्जर के बाद पहली तिमाही में ₹945 करोड़ का मुनाफा, रेवेन्यू और मार्जिन में गिरावट

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Saatvik Green Energy Share Price: गिरते बाजार में 5% दौड़ा शेयर, लगा सकता है आगे 45% की और छलांग, मोतीलाल ओसवाल बुलिश

Saatvik Green Energy Share Price: सोलार मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी सात्विक ग्रीन एनर्जी (Saatvik Green Energy) के शेयर मंगलवार , 14 जुलाई को 5 फीसदी की छलांग लगाते नजर आए। शेयर में यह तेजी घरेलू इक्विटी मार्केट में तेज गिरावट के बीच देखने को मिली। सुबह 11.33 बजे के आसपास जहां शेयर 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी दिखा रहा था वहीं निफ्टी 50 इंडेक्स 75 अंक गिरकर 24150 के नीचे ट्रेड कर रहा था।

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने स्टॉक पर Buy रेटिंग के साथ कवरेज शुरु की है और शेयर पर 565 रुपये प्रति शेयर का टारगेट दिया है, जो मौजूदा लेवल से 26 फीसदी की बढ़त दिखाता है। वहीं  अपने बुल केस के लिए, मोतीलाल ओसवाल ने फाइनेंशियल ईयर 2028 तक ₹652 का प्राइस टारगेट रखा है, जिसका मतलब है कि स्टॉक के पिछले क्लोजिंग लेवल से 45% की संभावित बढ़त हो सकती है।

ब्रोकरेज ने कहा कि सात्विक ग्रीन भारत की सोलर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में तेज़ी से हो रही ग्रोथ से फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है, जिसे इसकी चल रही कैपेसिटी बढ़ाने और बैकवर्ड इंटीग्रेशन योजनाओं से सपोर्ट मिला है।

FY26 के आखिर तक, कंपनी के पास 4.8 GW की सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी थी। यह सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग में भी एंट्री करते हुए 4 GW की मॉड्यूल कैपेसिटी और जोड़ रही है।

मोतीलाल ओसवाल को उम्मीद है कि कंपनी की मॉड्यूल बनाने की कैपेसिटी FY27 तक बढ़कर 8.8 GW हो जाएगी, जबकि सेल बनाने की कैपेसिटी FY27 में 2.4 GW और FY28 में 6 GW तक पहुंचने का अनुमान है।

कंपनी FY29 तक 6 GW की प्रस्तावित कैपेसिटी के साथ इंगोट और वेफर सेगमेंट में भी एंट्री करने की योजना बना रही है, जिससे उसकी बैकवर्ड इंटीग्रेशन स्ट्रैटेजी और मजबूत होगी।

ब्रोकरेज को अगले दो सालों में अच्छी कमाई की उम्मीद है। इसका अनुमान है कि FY26 और FY28 के बीच रेवेन्यू, EBITDA और एडजस्टेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (APAT) क्रमशः 38%, 55% और 44% की कंपाउंड सालाना दर से बढ़ेंगे।

यह ग्रोथ ज़्यादा मॉड्यूल बिक्री से होने की उम्मीद है, जिसके FY26 में 3.1 GW से बढ़कर FY27 में 3.8 GW और FY28 में 4.9 GW होने का अनुमान है। डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (DCR) मॉड्यूल का बड़ा हिस्सा, जो FY28 तक बिक्री का लगभग 56% होने की उम्मीद है, से भी रियलाइज़ेशन में सुधार होने की संभावना है।

मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि सात्विक ग्रीन ने FY25 और FY26 दोनों में 84% का इंडस्ट्री-लीडिंग कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन फैक्टर (CUF) बनाए रखा है, जो नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी को तेज़ी से बढ़ाने की इसकी क्षमता को दिखाता है।

वैल्यूएशन के आधार पर ब्रोकरेज ने कहा कि स्टॉक FY28 के अनुमानित EV/EBITDA के 6.9 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जबकि वारी एनर्जीज़ के लिए यह 9.2 गुना और प्रीमियर एनर्जीज़ के लिए 10.4 गुना है।

हालांकि मोतीलाल ओसवाल सात्विक ग्रीन को इसके छोटे स्केल, सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग में ऑपरेटिंग ट्रैक रिकॉर्ड की कमी और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग पर ज़्यादा निर्भरता के कारण FY28 के EV/EBITDA मल्टीपल के 8 गुना कम पर वैल्यू देता है, लेकिन उसका मानना ​​है कि मौजूदा वैल्यूएशन एक आकर्षक इन्वेस्टमेंट का मौका देता है।

Waaree Energies Share Price: यूबीएस ने रेटिंग में किया बदलाव, टारगेट प्राइस में भी की 30% की कटौती, जानें क्या हैं इसकी वजह

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Waaree Energies Share Price: यूबीएस ने रेटिंग में किया बदलाव, टारगेट प्राइस में भी की 30% की कटौती, जानें क्या हैं इसकी वजह

Waaree Energies Share Price: कैपिटल गुड्स सेक्टर , Electric Equipment इंडस्ट्रीज की कंपनी वारी एनर्जीज लिमिटेड (Waaree Energies) के शेयरों में मंगलवार, 14 जुलाई को गिरावट देखने को मिली। शेयर एनएसई पर 09.50 बजे के आसपास 1.88 फीसदी गिरकर 2826 रुपये पर ट्रेड कर रहा। शेयर में यह आज यह गिरावट ब्रोकरेज फर्म UBS द्वारा स्टॉक की रेटिंग में बदलाव और टारगेट प्राइस में भारी कटौती के बाद आया है।

ब्रोकरेज फर्म UBS ने स्टॉक को ‘Buy’ से ‘Neutral’ रेटिंग कर दी है। साथ ही UBS ने अपने प्राइस टारगेट को पहले के ₹4,400 से 30% घटाकर ₹3,100 कर दिया। हालांकि, बदले हुए टारगेट से अभी भी सोमवार को स्टॉक के आखिरी क्लोजिंग प्राइस से 8% की संभावित बढ़त का पता चलता है।

ब्रोकरेज ने इंडस्ट्री के साथियों की तुलना में ज़्यादा डिस्काउंट और कम मार्जिन की उम्मीदों का हवाला देते हुए अपने वैल्यूएशन मल्टीपल को 28x से घटाकर 21x 12-महीने के फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) कर दिया।

UBS के अनुसार, यह डाउनग्रेड सोलर इंडस्ट्री के लिए बढ़ती नियर टू मीडियम अवधि की चुनौतियों को दिखाता है क्योंकि यह सेक्टर कंसोलिडेशन के दौर में प्रवेश कर रहा है।

ब्रोकरेज ने कहा कि वारी के प्लान किए गए ₹30,000 करोड़ के कैपिटल खर्च (जो पिछले साल घोषित ₹13,000 करोड़ से काफी ज़्यादा है) से FY28 तक इसकी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़कर 15.4 GW सोलर मॉड्यूल और 10 GW सेल और इंगोट-वेफर कैपेसिटी हो जाने की उम्मीद है। यह भारत की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी का लगभग 20% होगा।

ब्रोकरेज फर्म का मानना ​​है कि यह इन्वेस्टमेंट ज़्यादा बैकवर्ड इंटीग्रेशन के ज़रिए वारी की लीडरशिप पोजीशन को मज़बूत करेगा। हालांकि, इसने यह भी चेतावनी दी कि इंडस्ट्री में तेज़ी से कैपेसिटी बढ़ाने से प्रॉफिट पर असर पड़ सकता है।ब्रोकरेज ने वारी के बड़े एक्सपेंशन प्लान से जुड़े एग्ज़िक्यूशन रिस्क का भी ज़िक्र किया और कहा कि बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) जैसे नए बिज़नेस से रिटर्न की विजिबिलिटी अभी भी लिमिटेड है।

ब्लूमबर्ग डेटा के मुताबिक, अभी 19 एनालिस्ट स्टॉक को कवर करते हैं। इनमें से 14 ने ‘buy’ रेटिंग दी है, 1 ने ‘hold’ करने की सलाह दी है, जबकि 4 ने ‘Sell’ करने की सलाह दी है।

वारी एनर्जीज़ के शेयर मंगलवार 14 जुलाई को सुबह 9.58 बजे 1.85% गिरकर ₹2,827.80 पर ट्रेड कर रहा है। पिछले एक महीने में इनमें लगभग 6% से ज्यादा की गिरावट आई है। जबकि 3 महीनों में यह 15 फीसदी से अधिक टूटा है।

Stock Market Live Update Today: सेंसेक्स 460 अंक टूटा, निफ्टी 24100 के नीचे, HCLTech 2% गिरा, Biocon में तेजी

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

अनलिस्टेड मार्केट में निवेश आपकी पॉकेट पर पड़ सकता है भारी, हाल में आए IPO में निवेशकों को लगी बड़ी चपत

अनलिस्टेड मार्केट में निवेश आपकी पॉकेट पर भारी पड़ सकता है। हाल में आए IPO में निवेशकों को बड़ी चपत लगी है। अनलिस्टेड शेयरों में निवेशकों के पॉकेट लगातार खाली होते रहे हैं। तमाम अईपीओ अनलिस्टेड प्राइस के मुकाबले भारी डिस्काउंट पर आए हैं। उदाहरण के तौर पर देखें तो SBI फंड्स का IPO अनलिस्टेड भाव के मुकाबले 32% डिस्काउंउट पर आया है। जून में इसका अनलिस्टेड प्राइस 850 रुपए पर दिख रहा था। IPO ऑफर प्राइस 574 रुपए प्रति शेयर था। यह आईपीओ 32 फीसदी डिस्काउंट पर आया है।

इस पर सेबी भी लगातार अलर्ट दे रहा है। ध्यान में रखने का बात है कि अनलिस्टेड स्पेस में लिक्विडिटी बहुत कम होती है। ऐसे प्राइस डिस्कवरी कैसी हो रही है? क्या हो रहा है? शेयर किस भाव पर ट्रेड कर रहे हैं? अधिकतर वेबसाइट्स आपको इन पर एक इंडिकेटिव प्राइस ही बताते हैं। ऐसे में इनमें इस बात का रिस्क होता है कि जिस भाव पर आप स्टॉक में खरीदारी कर रहे हैं, बिकवाली कर रहे हैं या ट्रांजैक्शन कर रहे हैं, क्या वो असल भाव है या नहीं है? अगर आप देखें तो बहुत सारे लोग अनलिस्टेड स्पेस को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित हो जाते हैं। उनको लगता है कि आईपीओ में अलॉटमेंट मिले ना मिले लेकिन आईपीओ से पहले ही हम इन शेयरों खरीदारी कर लेते हैं। हम सोचते हैं जब आईपीओ आएगा तो उसके बाद फायदा हो जाएगा। लेकिन अब तक का ट्रैक रिकॉर्ड यह बताता है कि यह स्ट्रेटजी बिल्कुल गलत पड़ती है और निवेशकों पर भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

एसबीआई फंड्स के आईपीओ से ही यह बात समझ में आती है जो अपने अपने अनलिस्टेड भाव के 32 फीसदी नीचे के भाव पर आया है। जिन्होंने यह सोचा था कि इसके आईपीओ के पहले अनलिस्टेड मार्केट में खरीदारी करके फायदा लेंगे, अब उनको फिलहाल बड़ा झटकाव लगा है। इस आईपीओ में अनलिस्टेड मार्केट में पॉकेट भरने के चक्कर में बड़ा नुकसान देखने को मिला।

यह सिर्फ एसबी फंड्स की बात नहीं है। अगर आप पिछले रिकॉर्ड देखें तो बहुत सारे आईपीओ जिनका अनलिस्टेड स्पेस में बहुत तगड़ा हाइप था, उन्होंने निवेशकों को तगड़ा चूना लगाया है। AGS Transact के IPO की बात करें तो इसका आईपीओ प्राइस 185-195 रुपए प्रति शेयर था। लेकिन जनवरी 2022 में इसका अनलिस्टेड प्राइस 550 रुपए प्रति शेयर था। HDB Financial को लेकर भी अनलिस्टेड स्पेस में काफी हाइप था। इसमें स्टॉक में लिक्विडिटी भी काफी अच्छी थी। इस आईपीओ का प्राइस 700-740 रुपए प्रति शेयर था। वहीं, इसका अनलिस्टेड प्राइस 1200-1250 रुपए प्रति शेयर था। यानी यह आईपीओ अपने अनलिस्टेड प्राइस से 40 फीसदी कम भाव पर आया।

UTI AMC की बात करें तो इसका आईपीओ प्राइस 552–554 प्रति शेयर था। लेकिन अनलिस्टेड स्पेस में इसका भाव 1,100 रुपए प्रति शेयर के आसपास तक पहुंच गया। यह आईपीओ भी अपने अनलिस्टेड प्राइस से लगभग आधे भाव पर आया है।

PB Fintech (Policybazaar) का आ IPO प्राइस 940–980 रुपए प्रति शेयर था। जबकि, नवंबर 2023 में इसका अनलिस्टेड प्राइस 1,800 रुपए प्रति शेयर था। यानी, यह आईपीओ 45 फीसदी डिस्काउंट पर आया। Tata Technologies का आईपीओ प्राइस 475–500 रुपए प्रति शेयर था। जबकि, नवंबर 2023 में इसका अनलिस्टेड प्राइस 950 रुपए प्रति शेयर था। यानी, यह आईपीओ 47 फीसदी डिस्काउंट पर आया।

इसी तरह Waaree Energies और Delhivery के आईपीओ पर नजर डालें तो Waaree Energies का IPO प्राइस 1,427–1,503 प्रति शेयर था। वहीं, इसका अनलिस्टेड प्राइस अक्टूबर 2024 में 2,700–2,750 रुपए प्रति शेयर था। Delhivery का आईपीओ भी अनलिस्टेड प्राइस से 50 फीसदी कम भाव पर आया था। ऐसे अगर आप अनलिस्टेड स्पेस में सिर्फ आईपीओ की उम्मीद से निवेश करते हैं तो यह आपके लिए बहुत बड़ा अलर्ट हैं।

 

 

Chartist Talk: जुलाई में निफ्टी के 25000 के स्तर को पार करने की संभावना कम, जोरदार कमाई के लिए इस हफ्ते इन दो शेयरों पर लगाएं दांव

Waaree Energies Share Price: सोलर कंपनी पर अमेरिकी एक्शन का असर, JM Financial ने घटाया टारगेट प्राइस

Waaree Energies Share Price: ब्रोकरेज JM Financial ने सोलर कंपनी Waaree Energies के शेयर का टारगेट प्राइस घटा दिया है। अब उसने 12 महीने का टारगेट प्राइस 3,509 रुपये से घटाकर 3,185 रुपये रखा है। इसकी वजह अमेरिका की ओर से कंपनी पर सोलर सेल आयात में टैरिफ से बचने (Tariff Evasion) का आरोप लगना है।

हालांकि, ब्रोकरेज ने शेयर पर अपनी ‘Add’ रेटिंग बरकरार रखी है। मौजूदा भाव 2,954 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 231 रुपये या 7.8% की संभावित बढ़त की गुंजाइश बनती है।

अमेरिका ने क्या कहा?

अमेरिका की Customs and Border Protection (CBP) ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट में कहा है कि Waaree Energies ने 2021 से 2026 के बीच वियतनाम और मलेशिया से आने वाले सोलर सेल्स पर लगने वाले टैरिफ से बचने की कोशिश की।

CBP का कहना है कि कंपनी ने चार साल तक सामान के मूल देश (Country of Origin) की गलत जानकारी दी। JM Financial का मानना है कि इससे कंपनी की साख पर असर पड़ सकता है।

271% तक एंटी-डंपिंग ड्यूटी

CBP के फैसले के बाद जिन आयातों को नियमों से बचने वाला माना गया है, उन पर 271.28% तक एंटी-डंपिंग ड्यूटी के लिए कैश डिपॉजिट देना होगा। यह जांच 2025 में शुरू हुई थी।

शिकायत में कहा गया था कि Waaree Energies ने चीन से सोलर सेल का आयात काफी बढ़ाया। इसके बाद भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले क्रिस्टलाइन सिलिकॉन फोटोवोल्टिक (CSPV) मॉड्यूल का निर्यात भी तेजी से बढ़ा। 2021 से 2023 के बीच भारत से अमेरिका जाने वाले CSPV मॉड्यूल के आयात में 2,250% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ऑर्डर बुक पर पड़ सकता है असर

JM Financial के मुताबिक, Waaree Energies की ऑर्डर बुक 53,000 करोड़ रुपये की है। इसका 65% से 70% हिस्सा विदेशी ग्राहकों के लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़ा है।

ब्रोकरेज का मानना है कि इस फैसले से कंपनी की साख पर असर पड़ सकता है। इसका असर भविष्य में मिलने वाले कुछ अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स पर भी पड़ सकता है।

फिर भी ‘Add’ रेटिंग क्यों बरकरार?

JM Financial का कहना है कि हालात उतने खराब नहीं हैं, जितनी आशंका जताई जा रही थी। CBP ने कंपनी के सभी आयातों को नियमों का उल्लंघन करने वाला नहीं माना है।

जांच में यह भी सामने आया कि Waaree Energies ने गैर-चीनी सोलर सेल्स से इतने मॉड्यूल तैयार किए थे, जो अमेरिका भेजे गए उसके कुल मॉड्यूल की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त थे। इसी वजह से ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी पर असर तो पड़ेगा, लेकिन सबसे खराब स्थिति बनने की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है।

मार्च तिमाही में कैसा रहा प्रदर्शन?

FY26 की चौथी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 112% बढ़कर 8,840.25 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, शुद्ध मुनाफा 74.7% बढ़कर 1,126.26 करोड़ रुपये रहा। EBITDA 80% बढ़कर 1,577 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन घटकर 18.6% रह गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 23% था।

Waaree के शेयरों का हाल

Waaree Energies का शेयर मंगलवार को 2.35% की बढ़त के साथ 2,954 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने स्टॉक तकरीबन फ्लैट है। वहीं, 1 साल के दौरान इसमें करीब 6% की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैप 84.71 हजार करोड़ रुपये है।

Apollo Tyres Share Price: ब्रोकरेज ने स्टॉक की रेटिंग की अपग्रेड, शेयर सरपट दौड़ा, जानें क्या है नया टारगेट प्राइस

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।