Throwback viral video: ‘प्रेम रतन धन पायो’ गाने पर जब करण जौहर का डांस देख रानी मुखर्जी का हंस-हंसकर हुआ बुरा हाल, थ्रोबैक वीडियो हो रहा वायरल

Throwback viral video: करण जौहर और रानी मुखर्जी सालों से अच्छे दोस्त हैं। दोनों एक दूसरे की टांग खींचे अक्सर नजर आ जाते हैं। वहीं एक-दूसरे की तारीफ करते हुए भी नहीं थकते हैं। ऐसे कई मोमेंट अक्सर इवेंट्स में क्रिएट हो जाते हैं जहां दोनों के एक दूसरे को खूब टीज करते वीडियो सामने आते हैं। ऐसा ही एक थ्रोबैक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे देख यूजर्स भी खूब मजे रहे हैं।

वायरल वीडियो साल 2018 में हुई सोनम कपूर और आनंद आहूजा की शादी के फंक्शन का है, जहां पर सभी मौजूद लोग इंडियन अटायर में नजर आ रहे हैं। वीडियो में करण जौहर स्टेज पर सोनम कपूर और सलमान खान के पॉपुलर गाने प्रेम रतन धन पायों पर जमकर और खुलकर डांस कर रहे हैं। इस मौके पर उन्होंने ग्रीन सिल्क कुर्ता और व्हाइट पजामी कैरी की है।

वहीं वीडियो में आप आगे देखेंगी सभी करण के डांस को सीरियस होकर एंजॉय कर रहे हैं, लेकिन तभी रानी मुखर्जी पागलों की तरह हंसी नजर आती हैं। वह करण को देख-देखकर लोटपोट हुईं जा रही हैं। रानी को देख उस दोस्त की याद आती है, जो आपको कभी सीरियस नहीं लेता है….बेस्ट फ्रेंड थिंग्स…..।

सोशल मीडिया पर यूजर्स को ये वीडियो बेहद पसंद आ रहा है। लोग वीडियो को जमकर शेयर कर रहे हैं, साथ ही लाइक्स औक कमेंट्स की बारिश भी कर रहे हैं। कमेंट सेक्शन में लोगों की बातें पढ़कर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। वीडियो को टाइटल दिया गया है ‘वी ऑल हेव वन फ्रेंड लाइक रानी’। कमेंट हर कोई अपने एक ऐसे दोस्त को टैग कर रहा है।

बता दें कि रानी मुखर्जी और करण जौहर ने सबसे पहले ब्लॉकबास्टर फिल्म कुछ कुछ होता है में काम किया था। लव ट्राएंगल पर बेस्ड इस फिल्म में रानी के साथ काजोल और शाहरुख खान लीड रोल में नजर आए थे। वहीं सपोर्टिंग रोल में अनुपम खेर, अर्चना पूरन सिंह, फरीदा जलाल और सना नजर आई थीं।

Ketan Agarwal Murder Video: चेतन चौधरी के कंधे पर सर रखकर मैच देख रही है सिया गोयल, सामने आया चौंकाने वाला वीडियो

Ketan Agarwal murder case: पुणे के युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की जारी जांच के बीच सोशल मीडिया पर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी का एक क्रिकेट मैच देखते हुए चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। वायरल क्लिप में सिया और चेतन दर्शकों के स्टैंड में बैठकर मैच देखते और बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वायरल वीडियो में चेतन चौधरी के कंधे पर सर रखकर सिया मैच देख रही है। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह वीडियो अहम है क्योंकि इससे इस दावे को बल मिल सकता है कि सिया और चेतन केतन अग्रवाल से सगाई और शादी से पहले रिलेशनशिप में थे।

पुलिस सूत्रों का दावा है कि सिया के परिवार को इस रिश्ते के बारे में तब पता चला जब दोनों को एक क्रिकेट मैच में साथ देखा गया था। रिश्ते के बारे में पता होने के बावजूद, सिया के परिवार ने अग्रवाल परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए केतन के साथ उसकी शादी करवा दी। जांच के तहत, पुणे पुलिस ने सिया के माता-पिता और भाई से पूछताछ की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्हें इस रिश्ते और अरेंज मैरिज से जुड़े हालात के बारे में क्या जानकारी थी।

दोस्ती की शुरुआत क्रिकेट से हुई

सिया गोयल और चेतन चौधरी पर सिया के मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप है। बताया जा रहा है कि उनकी दोस्ती की शुरुआत क्रिकेट से हुई थी। वे सिया के भाई साहिल के एक क्रिकेट मैच के दौरान मिले थे। बाद में उनके बीच नजदीकियां बढ़ गईं। खेल के प्रति उनका जुनून एक बिना तारीख वाले वीडियो में साफ दिखता है। सिया और चेतन एक मैच के दौरान दर्शकों की गैलरी में बैठे और बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

दोनों के बीच लगातार हो रही थी बात

यह क्लिप ऐसे समय में सामने आया है जब जांचकर्ता कथित हत्या की साजिश की जांच कर रहे हैं। पुलिस ने उनके फोन रिकॉर्ड की जांच की तो पाया कि जनवरी से अब तक उन्होंने आपस में 2,004 बार बात की थी। इससे उनके कथित रिश्ते का पता चलता है। इन कॉल्स की कुल अवधि 238 घंटे थी। सिया और केतन की सगाई फरवरी में हुई थी। जबकि उनकी शादी इस नवंबर में होने वाली थी।

सिया गोयल के माता-पिता और भाई से पूछताछ की

महाराष्ट्र पुलिस ने पुणे के 25 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में आरोपी सिया गोयल के माता-पिता और भाई से पूछताछ की है। केतन की मंगेतर सिया गोयल (20) और उसके प्रेमी चेतन चौधरी (22) को 18 जून को पुणे जिले के मावल तालुका स्थित लोहागढ़ किले की एक चट्टान से केतन को खाई में धक्का देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि सिया के माता-पिता प्रवीण और पूजा गोयल और भाई साहिल पूर्वाह्न करीब 11 बजे अपने बयान दर्ज कराने के लिए लोनावला ग्रामीण पुलिस थाने पहुंचे और लगभग 12 घंटे बाद वहां से निकले। इससे पहले शुक्रवार को पुलिस ने साहिल से 10 घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की थी।

शादी नहीं करना चाहती थी सिया

सिया ने कथित तौर पर पुलिस को बताया है कि वह अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी। इसलिए उसने चौधरी के साथ मिलकर उसकी हत्या की साजिश रची, क्योंकि उसे लगा कि शादी तोड़ने से परिवार की बदनामी होगी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ता मामले के कई पहलुओं की जांच कर रहे हैं, जिनमें कथित अपराध की योजना, घटना से पहले और बाद में आरोपियों की गतिविधियां, उनके ‘डिजिटल फुटप्रिंट’ और हत्या के पीछे का मकसद शामिल है।

पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपियों ने सबूत मिटाने की कोशिश में 18 जून से पहले और घटना के बाद अपने मोबाइल फोन से चैट रिकॉर्ड हटा दिया। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि जांच अभी जारी है। पूछताछ के दौरान दिए गए बयानों की पुष्टि के लिए और सबूत जुटाए जा रहे हैं।

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इस बीच, केतन को न्याय दिलाने की मांग को लेकर उस हाउसिंग सोसाइटी में कैंडल मार्च निकाला गया, जहां अग्रवाल परिवार रहता है। केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने कहा कि परिवार को न्याय के अलावा और कुछ नहीं चाहिए। उन्होंने बताया कि घटना के दिन लोहागढ़ किले पर कई लोग मौजूद थे।उनसे अपील की कि वे आगे आएं और पुलिस को जानकारी दें।

Viral Video: कौन हैं बीजेपी पार्षद किशन नायक, जिन्होंने अपने जन्मदिन पर नाले में उतरकर काटा केक

Who is Kishan Nayak: देश में आए दिन नेताओं के ऐसे कोई न कोई वीडियो वायरल होते रहते हैं, जो यह दिखाते हैं कि वे जनता की समस्याओं को लेकर कितने गंभीर हैं। दरअसल, हम बात कर रहे हैं आगरा के वार्ड 12 से बीजेपी पार्षद किशन नायक की, जिन्होंने गुरुवार को एक अनोखा कदम उठाते हुए अपने जन्मदिन का केक नाले में काटा। जिसके बाद उनका वीडियो इंटरनेट पर खुब चर्चा बटोर रहा है।

दरअसल, यह पूरा मामला न्यू विजय नगर कॉलोनी के नागला धानी इलाके की है, जहां गंदे और ओवरफ्लो हो रहे नाले से जन जीवन बेहाल है। लोगों के कई बार शिकायत करने पर भी प्रशासन द्वारा यहां की समस्या पर गौर नहीं किया गया।

इसी समस्या को देखते हुए पार्षद किशन नायक ने अपने जन्मदिन पर कहीं और केक काटने की बजाय घुटनों तक भरे नाले के पानी में उतर गए और वहीं केक काटा। उस समय हल्की बारिश भी हो रही थी और स्थानीय लोग नारे भी लगा रहे थे। इस घटना के बाद वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और और इंटरनेट पर इसकी खूब चर्चा हो रही है।

बता दें कि नायक नगला हरमुख वार्ड का प्रतिनिधित्वा करते हैं। उन्होंने पिछले तीन सालों में मेयर और नगर आयुक्त को 30 से ज़्यादा पत्र लिखकर सुल्तानगंज पुलिया से लंगड़े की चौकी होते हुए यमुना नदी तक जाने वाले नाले की सफाई और मरम्मत की मांग की है।

उनका कहना है कि यह नाला कभी एक ऐतिहासिक शाही नहर हुआ करता था, लेकिन 2011 से इसकी ठीक से सफ़ाई नहीं हुई है। उनका आरोप है कि कागजों पर तो बार-बार सफाई का काम पूरा दिखाया गया है, लेकिन असल में यहां के लोग बरसों से जल-जमाव, गंदगी और बदबू के बीच रह रहे हैं। इस नाले में गिरकर तीन लोगों — दो बच्चों और एक किसान — की मौत हो चुकी है और एक बच्चा अभी भी लापता है।

उन्होंने अपने जन्मदिन पर विरोध क्यों किया?

नायक का कहना है कि यह समय जान-बूझकर और एक खास मकसद से चुना गया था। उन्होंने बताया कि उनके वार्ड के लोगों को शादी-ब्याह, त्योहार और पारिवारिक कार्यक्रम कूड़े और बाढ़ के पानी के बीच करने पड़ते हैं — इसलिए उन्होंने भी अपना जन्मदिन उसी तरह मनाने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “हमने प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचने के लिए नाले में जन्मदिन मनाया।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मॉनसून आने वाला है और पानी जमा रहने की समस्या हल न होने से सेहत और बाढ़ का गंभीर खतरा बना हुआ है।

इंटरनेट पर क्या कहा जा रहा है?

इस वीडियो पर ऑनलाइन कई तरह की प्रतिक्रियाएं आई हैं-कहीं लोग सच में तारीफ कर रहे हैं, तो कहीं तीखे राजनीतिक मजाक भी हो रहे हैं।

यूजर @mr_mayank ने एक पोस्ट में लिखा,  “भाई को इस बात की परवाह नहीं थी कि BJP क्या एक्शन लेगी, न ही उन्हें ED की चिंता थी। भाई अपने लोगों के साथ खड़े रहे। भाई गलत पार्टी में एक अच्छे इंसान हैं। भाई जैसे बनो।” पोस्ट में यह भी बताया गया कि नायक ने उच्च अधिकारियों (जो सभी BJP-शासित राज्यों में थे) से कम से कम 12 बार शिकायत की थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला; न तो स्थानीय MLA ने और न ही MP ने इसमें कोई दखल दिया।

वहीं, कुछ यूजर्स ने सिस्टम की खामियों पर तीखी टिप्पणी की। @YTKDIndia ने लिखा कि जब एक विभाग फाइल आगे बढ़ाता है, तो दूसरा विभाग जिम्मेदारी टाल देता है—और नाली वहीं की वहीं रह जाती है।

यूजर @DikshaKandpal8 ने बताया कि खुद नायक ने प्रधानमंत्री की मुख्य योजना का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी का ‘स्वच्छ भारत मिशन’ जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो रहा है — यह बीजेपी के ही अंदर से की गई तीखी आलोचना थी।

वहीं, मीम बनाने वालों को सत्ताधारी पार्टी के एक पार्षद की तस्वीर पर मजाक करने का मौका मिल गया, जिसमें वह अपनी ही पार्टी के सिविक एडमिनिस्ट्रेशन के खिलाफ विरोध कर रहे थे — कई यूजर्स ने मजाक में कहा कि बीजेपी को अपना ही विरोध करने का एक नया तरीका मिल गया है। आगरा को ‘स्मार्ट सिटी’ का दर्जा मिलने की वजह से यह नजारा और भी ज्यादा चर्चा का विषय बन गया।

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Video: 4-5 मीटर लंबे विशाल फन फैलाए इस किंग कोबरा को कैसे नंगे हाथ सिर्फ पाइप और बैग से पकड़ लिया, Pipe में क्यों घुस जाते हैं Snake?

सोशल मीडिया पर वन्यजीवों और सांपों के रेस्क्यू के कई वीडियो वायरल होते हैं, लेकिन हाल ही में एक्स (पहले ट्विटर) पर सामने आया एक वीडियो लोगों के होश उड़ा रहा है। इस वीडियो में एक जांबाज रेस्क्यूअर महज एक साधारण पाइप और बैग की मदद से 4 से 5 मीटर लंबे विशालकाय किंग कोबरा को बेहद आसानी से पकड़ते हुए नजर आ रहा है। इस हैरान कर देने वाले रेस्क्यू वीडियो पर भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी हिमांशु त्यागी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और वैज्ञानिक नजरिए से समझाया है कि आखिर खुले में आक्रामक दिखने वाला सांप खुद ब खुद पाइप के अंदर क्यों घुस जाता है।

वायरल वीडियो में क्या है?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक कंक्रीट की संकरी गली में एक विशालकाय किंग कोबरा फन फैलाए बैठा है। सांप की लंबाई करीब 4-5 मीटर है। इतने बड़े और खतरनाक सांप को पकड़ने के लिए रेस्क्यूअर ने किसी भारी-भरकम उपकरण या बल का प्रयोग नहीं किया, बल्कि उसने बेहद सूझबूझ के साथ सांप के आगे एक पाइप और उससे जुड़ा बैग रख दिया। कुछ ही पलों में वह खतरनाक किंग कोबरा बिना किसी आक्रामकता के बेहद शांति से खुद उस पाइप के रास्ते बैग के अंदर चला गया।

इस वीडियो को यहां नीचे देखिए

Pipe में क्यों घुस जाते हैं सांप? IFS अफसर ने समझाया विज्ञान

IFS अधिकारी हिमांशु त्यागी ने इस वायरल वीडियो का विश्लेषण करते हुए बताया कि सांप का इस तरह खुद पाइप में चले जाना कोई जादू नहीं बल्कि जीव विज्ञान है। उन्होंने इसके पीछे थिग्मोटैक्सिस (Thigmotaxis) नाम के एक विशेष व्यवहार को जिम्मेदार ठहराया है।

सुरक्षा की तलाश (Thigmotaxis): आईएफएस त्यागी के मुताबिक जब किंग कोबरा जैसी प्रजाति का सांप किसी कंक्रीट की गली जैसी खुली जगह पर खुद को असुरक्षित या खतरे में महसूस करता है तो उसकी जन्मजात प्रवृत्ति उसे किसी तंग, अंधेरी और बंद जगह की तलाश करने के लिए प्रेरित करती है। रेस्क्यू के दौरान जब सांप के सामने पाइप लाया गया तो उसने उस बंद और अंधेरी जगह को अपने छिपने और सुरक्षित रहने का ठिकाना मान लिया और वह खुद-ब-खुद उसमें दाखिल हो गया।

क्यों कारगर और सुरक्षित है पाइप और बैग का यह तरीका?

आमतौर पर सांपों को पकड़ने के लिए स्टिक का इस्तेमाल किया जाता है या उन्हें बलपूर्वक दबोचा जाता है। इससे सांप और रेस्क्यूअर दोनों के लिए खतरा बढ़ जाता है। लेकिन पाइप और बैग की यह तकनीक सबसे सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि इसमें सांप को जबरन पकड़ने या उस पर दबाव बनाने के बजाय उसे खुद अपनी मर्जी से आगे बढ़ने का मौका दिया जाता है। इस तरीके से रेस्क्यू करने पर सांप बहुत कम तनाव में आता है और इंसानों को काटने या रेस्क्यू के दौरान होने वाले जोखिम का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है।

शिकारी स्वभाव पर भारी पड़ता है आत्मरक्षा का भाव

किंग कोबरा सांपों के साम्राज्य का एपेक्स प्रेडेटर यानी शीर्ष शिकारी माना जाता है। ये दूसरे सांपों का भी शिकार करता है। वे शिकार की तलाश करने के लिए अपने जैकोब्सन्स ऑर्गन के माध्यम से रासायनिक संकेतों का उपयोग करते हैं। आईएफएस त्यागी ने स्पष्ट किया कि जब किंग कोबरा खुद को किसी विपरीत परिस्थिति या रेस्क्यू के माहौल में पाता है तो उसका यह शिकारी स्वभाव पीछे छूट जाता है। ऐसे समय में अपनी जान बचाने और सुरक्षित आश्रय खोजने का उसका जन्मजात रक्षात्मक व्यवहार सबसे पहले सक्रिय हो जाता है और जैसे ही उसे भागने या छिपने का विकल्प (पाइप के रूप में) मिलता है वह उसकी तरफ बढ़ जाता है।

viral video: लद्दाख में मोबाइल फोन पर अचानक दिखाने लगा चीन का समय? वीडियो हुआ वायरल, जानिए क्या है मामला

Ladakh mobile showing China time: लद्दाख से हाल ही में सामने आए एक वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। लद्दाख के वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास स्थित सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मोबाइल फोन पर अचानक इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) की जगह चीन का स्टैंडर्ड टाइम (Beijing Time) दिखने लगा, जो भारतीय समय से 2 घंटे और 30 मिनट आगे है। एक वीडियो में दावा किया गया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के नजदीक यात्रा कर रहे कुछ लोगों के मोबाइल फोन अचानक भारतीय समय (IST) से बदलकर China Standard Time (CST) दिखाने लगे।

कथित वायरल वीडियो में फोन की स्क्रीन पर समय क्षेत्र बदलने का नोटिफिकेशन दिखाई देता है। इसमें बताया गया है कि डिवाइस का समय चीन के टाइम जोन के अनुसार सेट हो गया है। बताया जा रहा है कि यह घटना सीमा के बेहद करीब वाले इलाके में हुई।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में कई बार पड़ोसी देशों के मोबाइल नेटवर्क सिग्नल स्थानीय नेटवर्क से ज्यादा मजबूत हो सकते हैं। यदि फोन में ऑटोमैटिक टाइम और टाइम जोन सेटिंग्स एक्टिव हों, तो डिवाइस विदेशी नेटवर्क की जानकारी के आधार पर समय बदल सकता है।

हालांकि, इस कथित घटना को लेकर कोई आधिकारिक सुरक्षा चिंता नहीं जताई गई है। लेकिन इसने सीमा क्षेत्रों में दूरसंचार नेटवर्क और कनेक्टिविटी से जुड़ी चुनौतियों पर बहस को फिर से तेज कर दिया है।

आखिर क्यों बदल गया मोबाइल का टाइम? जानिए इसके पीछे का टेक्निकल सच

पहली नजर में यह हैरान करने वाली घटना लगती है। लेकिन तकनीकी विशेषज्ञ इसे नेटवर्क और टाइम जोन सिंक्रोनाइजेशन से जोड़कर देखते हैं। दरअसल, अधिकांश स्मार्टफोन में “Automatic Date & Time” और “Automatic Time Zone” फीचर ऑन रहता है। फोन जिस मोबाइल नेटवर्क से जुड़ता है, उसी नेटवर्क से समय और टाइम जोन की जानकारी भी प्राप्त करता है। यदि सीमा के पास किसी विदेशी टेलीकॉम नेटवर्क का सिग्नल ज्यादा मजबूत मिल जाए, तो फोन उसी के आधार पर टाइम जोन अपडेट कर सकता है।

भारत-चीन सीमा के कुछ इलाकों में भारतीय मोबाइल नेटवर्क कमजोर पड़ जाता है। जबकि दूसरी तरफ से आने वाले सिग्नल फोन तक पहुंच सकते हैं। ऐसी स्थिति पहले भी अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में देखी गई थी। यहां लोगों के मोबाइल पर “Welcome to China” जैसे संदेशमैसेज और बीजिंग समय दिखाई देने की खबरें सामने आई थीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई हैकिंग या साइबर हमला नहीं है। बल्कि फोन का नेटवर्क-आधारित ऑटोमैटिक टाइम अपडेट सिस्टम है। यदि यूजर ऑटोमैटिक टाइम ज़ोन बंद कर दे और टाइम मैन्युअली सेट कर दे, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।

क्या है अन्य कारण?

शक्तिशाली चीनी मोबाइल टावर: चीनी सेना (PLA) ने सीमा के उस पार एलएसी (LAC) के बिल्कुल नजदीक बेहद शक्तिशाली 5G मोबाइल टावर स्थापित किए हैं।

नेटवर्क ओवरलैपिंग: इन चीनी टावरों के सिग्नल इतने मजबूत हैं कि वे भारतीय सीमा के भीतर तक आ जाते हैं। जब भारतीय नागरिकों के फोन का ‘ऑटोमैटिक टाइम जोन’ (Automatic Time Zone) ऑन होता है, तो उनका फोन भारत के कमजोर सिग्नल की बजाय चीन के मजबूत नेटवर्क सिग्नल को पकड़ लेता है। नेटवर्क बदलते ही फोन का समय अपने आप चीन के समय (GMT+8) के अनुसार बदल जाता है।

स्थानीय लोगों की क्या हैं चिंताएं?

इस वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे कि चुशुल, डेमचोक और न्योमा में भारतीय दूरसंचार नेटवर्क (जैसे जियो, एयरटेल या बीएसएनएल) के सिग्नल काफी कमजोर हैं। इसके कारण चीनी नेटवर्क आसानी से हावी हो जाता है। यह न सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है। बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी संवेदनशील है।

भारत-चीन सीमा के कई दुर्गम इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। जब स्थानीय नेटवर्क कमजोर होता है, तब फोन दूर स्थित लेकिन अधिक शक्तिशाली विदेशी नेटवर्क से जुड़ने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में डिवाइस समय, नेटवर्क पहचान और अन्य सूचनाएं उसी नेटवर्क से लेने लगता है।

2018 में अरुणाचल प्रदेश के किबिथू और काहो जैसे सीमावर्ती इलाकों में भी ऐसी घटनाएं सामने आई थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, वहां भारतीय मोबाइल फोन चीनी नेटवर्क से जुड़ गए थे और फोन की घड़ी अपने-आप बीजिंग समय पर पहुंच गई थी।

टेलीकॉम विशेषज्ञों की राय

टेलीकॉम विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि सीमा क्षेत्रों में मजबूत और स्थिर भारतीय नेटवर्क की कितनी आवश्यकता है। पहाड़ी भूगोल, कम आबादी और कठिन मौसम के कारण कई क्षेत्रों में टावर स्थापित करना चुनौतीपूर्ण होता है। जबकि दूसरी ओर चीन ने सीमा के पास दूरसंचार ढांचे का तेजी से विस्तार किया है।

हालांकि, लद्दाख वायरल वीडियो की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। लेकिन तकनीकी दृष्टि से ऐसा होना संभव माना जाता है। यही वजह है कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। लद्दाख में मोबाइल फोन पर चीन का समय दिखने का वायरल वीडियो केवल एक तकनीकी घटना नहीं। बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में दूरसंचार ढांचे की चुनौतियों को भी उजागर करता है।

60% सैलरी हाइक के ऑफर पर जॉब बदलने में इस शख्स ने की ऐसी गलती कि अब पछता रहा! Job स्विच करते वक्त आप भी रखें ये ख्याल

आज के अनिश्चित जॉब मार्केट में जब भी किसी को बड़ी सैलरी हाइक का ऑफर मिलता है तो वह बिना ज्यादा सोचे-समझे तुरंत कंपनी बदल लेता है। सवाल ये है कि क्या सिर्फ भारी-भरकम पैकेज देखकर नौकरी बदलना हमेशा सही होता है? बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल के सोशल मीडिया पोस्ट ने इस विषय पर इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है। सनी कुमार नाम के एक शख्स ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। ये काफी वायरल हो रहा है। उन्होंने अपने एक दोस्त की आपबीती सुनाते हुए दावा किया है कि आज के दौर में किसी छोटी कंपनी में ज्यादा सैलरी पाने से बेहतर है कि आप किसी बड़ी कंपनी में थोड़ी कम सैलरी पर काम करें। आइए जानते हैं कि उनके दोस्त ने 60% हाइक के चक्कर में क्या गलती की और नौकरी बदलते समय आपको किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

60% हाइक का ऑफर और फिर लग गया बड़ा झटका

हमारी सहयोगी वेबसाइट न्यूज 18 ने इस वायरल वीडियो पर डिटेल्ड रिपोर्ट की है। इसके मुताबिक सनी कुमार ने वीडियो में बताया कि उनका एक दोस्त पुणे में मास्टरकार्ड जैसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था। वहां उसकी सैलरी अच्छी थी, वर्क प्रोफाइल पूरी तरह स्टेबल था और वह अपने करियर में काफी अच्छा कर रहा था। इसी बीच उसे एक कंसल्टेंसी फर्म से 60 फीसदी सैलरी हाइक का बड़ा ऑफर मिला। इतने बड़े पैकेज के लालच में आकर उसने मास्टरकार्ड की स्टेबल नौकरी छोड़ दी और नई कंपनी जॉइन कर ली।

6 महीने में ही पलट गई बाजी

सनी के मुताबिक यह फैसला उनके दोस्त के लिए सही साबित नहीं हुआ। नई कंसल्टेंसी कंपनी को जॉइन किए हुए अभी महज छह महीने ही हुए थे कि कंपनी के हाथ से वो प्रोजेक्ट ही फिसल गया जिसके लिए उनके दोस्त को हायर किया गया था। इसके तुरंत बाद कंपनी ने उसके दोस्त से कहा कि या तो वह खुद इस्तीफा दे दे या फिर उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

आईटी सेक्टर में अस्थिरता: सनी कुमार की सलाह

इस घटना का उदाहरण देते हुए सनी कुमार ने प्रोफेशनल्स को सलाह दी है कि वे सिर्फ बड़ा पे-चेक देखकर नौकरी बदलने से पहले दो बार जरूर सोचें। उन्होंने वीडियो में कहा कि अगर आप एक अच्छी और स्टेबल कंपनी में हैं, जहां आपकी सैलरी अच्छी है तो मेरा सुझाव यही होगा कि भले ही आपको 60-70% या 100% तक की हाइक भी क्यों न मिल रही हो, कम से कम अगले 6 महीने से एक साल तक जॉब स्विच न करें। इन दिनों आईटी सेक्टर काफी वोलटाइल यानी अस्थिर है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

सनी कुमार का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इस पर नौकरीपेशा लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक यूजर ने सनी की बात से सहमति जताते हुए कहा कि जॉब सिक्योरिटी जरूरी है लेकिन मेट्रो शहरों की हकीकत भी देखनी होगी। यूजर ने लिखा कि कम सैलरी में मेट्रो शहर के कमरे का किराया और राशन का खर्च उठाना मुश्किल होता है। इसलिए किसी के बहकावे में आने के बजाय अपना फैसला खुद लें। मास्टरकार्ड अच्छी कंपनी है और हमें समझना चाहिए कि हर बार बात सिर्फ हाइक की नहीं, स्टेबिलिटी की होती है।

एक दूसरे यूजर ने कुमार के विचार का समर्थन करते हुए लिखा कि मैं हमेशा सुनिश्चित करता हूं कि जब भी जॉब बदलूं तो एक बड़ी कंपनी से दूसरी बड़ी कंपनी में ही जाऊं। मैं किसी छोटी कंपनी में नौकरी खोने का रिस्क और उसका रोज का तनाव नहीं झेल सकता।

दूसरा पक्ष: बड़ी कंपनियां भी नहीं हैं लेऑफ से सुरक्षित

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सनी के इस तर्क का विरोध किया कि बड़ी कंपनियां पूरी तरह सुरक्षित होती हैं। उन्होंने इसके लिए उदाहरण भी दिए। एक यूजर ने कमेंट किया कि कोई भी कंपनी सुरक्षित नहीं है।। मुझे बीती 15 जून को ही HSBC से लेऑफ (नौकरी से निकालना) कर दिया गया। दूसरे यूजर ने लिखा कि क्या गारंटी है कि मास्टरकार्ड से भी उसे नहीं निकाला जाता… आजकल बड़ी कंपनियां भी बहुत ज्यादा रीस्ट्रक्चरिंग कर रही हैं। एक तीसरे शख्स ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘निकाले तो आप बड़ी कंपनी से भी जा सकते हैं और छोटी से भी। अंतर बस इतना है कि छोटी कंपनी ने कम से कम वहां रहने के दौरान आपको 60% ज्यादा पैसे तो दिए।’

जॉब स्विच करते वक्त केवल कंपनी का साइज न देखें, इन बातों का रखें ख्याल

बहस के बीच एक यूजर ने बहुत ही काम की सलाह दी कि फैसला सिर्फ कंपनी के छोटे या बड़े होने के आधार पर नहीं होना चाहिए बल्कि आज के दौर में कुछ अन्य महत्वपूर्ण चीजों का एनालिसिस करना जरूरी है:

SaaS कंपनियों से बचें: यूजर के मुताबिक इन दिनों SaaS (सॉफ्टवेयर एज अ सर्विस) कंपनियों में जाने से बचना चाहिए। नौकरी बदलने से पहले कंपनी के ग्लोबल हेडकाउंट और भारत में उनके कर्मचारियों की संख्या की जांच करें। कंपनी का कुल रेवेन्यू कितना है और उसका नेट प्रॉफिट क्या है, इसकी जानकारी जरूर जुटाएं। कंपनी के भविष्य के प्लान क्या हैं और वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में कितना निवेश कर रहे हैं, इन सभी पहलुओं को चेक करने के बाद ही कोई फैसला लें।

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मंगेतर के अंतिम संस्कार के 4 दिन बाद उसके घर पहुंची थी सिया गोयल और वहां उसकी बहन के सामने कर बैठी ये गलती! फिर नहीं बच पाई

पुणे के लोहगढ़ किले में 18 जून को हुई 26 साल के केतन विशाल अग्रवाल की मौत को पहले एक हादसा माना गया था, लेकिन जांच आगे बढ़ते ही मामला पूरी तरह बदल गया। पुलिस को मिले डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड और संदिग्ध गतिविधियों ने इस घटना को एक साजिश की ओर मोड़ दिया है। अब इसे महज दुर्घटना नहीं, बल्कि पहले से रची गई हत्या की योजना बताया जा रहा है। जांच में कई ऐसे संकेत मिले हैं, जिन्होंने पूरे मामले को और रहस्यमयी बना दिया है।

जैसे-जैसे पुलिस परत-दर-परत सच खंगाल रही है, वैसे-वैसे इस केस के नए पहलू सामने आ रहे हैं। इस घटना ने न सिर्फ परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे शहर में सनसनी फैला दी है और लोग अब सच्चाई जानने को बेताब हैं।

बहन के एक सवाल से शुरू हुआ शक का खेल

न्यूज 18 के रिपोर्ट के मुताबिक, मामले का टर्निंग पॉइंट तब आया जब केतन के अंतिम संस्कार के चार दिन बाद उसकी मंगेतर सिया गोयल घर पहुंची। बातचीत के दौरान केतन की बहन को उसके जवाबों में कुछ अजीब लगा और यहीं से परिवार को शक हुआ, जिसने पुलिस जांच को नई दिशा दे दी।

2000 से ज्यादा कॉल्स, 238 घंटे की बातचीत ने खोला राज

पुलिस जांच में सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच 1 जनवरी से जून के बीच 2004 कॉल्स का खुलासा हुआ। दोनों के बीच करीब 238 घंटे तक लगातार बातचीत हुई, जिससे शक और गहरा गया।

घटना वाले दिन ‘गायब’ हुआ इंटरनेट और लोकेशन ट्रिक

18 जून को चेतन चौधरी का इंटरनेट सुबह 7 बजे से शाम 5:40 बजे तक बंद रहा। पुलिस को शक है कि लोकेशन छिपाने के लिए उसने अपना मोबाइल दुकान पर छोड़ दिया और कर्मचारी का फोन लेकर लोहगढ़ पहुंचा।

16-17 जून की ‘प्लानिंग मीटिंग’ और अगला दिन खौफनाक वारदात

जांच में सामने आया कि 16 और 17 जून को हत्या की पूरी योजना बनाई गई थी। दोनों ने कॉल और वीडियो कॉल के जरिए पूरी साजिश को अंजाम देने की तैयारी की।

लोहगढ़ फोर्ट पर कैसे दिया गया वारदात को अंजाम

18 जून को सिया केतन को किले पर लेकर पहुंची, जहां पहले से चेतन मौजूद था। एकांत जगह पर केतन को खड़ा कर उस पर हमला किया गया और उसे खाई में धक्का देकर मौत के घाट उतारने का आरोप है।

पुलिस का दावा

डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन ट्रेसिंग के आधार पर पुलिस का कहना है कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि पहले से रची गई हत्या की साजिश थी। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है।

Viral Video: तेजस एक्सप्रेस में खाना या लापरवाही? पैकेट खोलते ही दिखा कीड़ा, यात्री ने उठाए गंभीर सवाल

Viral Video: तेजस एक्सप्रेस में खाना या लापरवाही? पैकेट खोलते ही दिखा कीड़ा, यात्री ने उठाए गंभीर सवाल

मुंबई जा रही तेजस एक्सप्रेस (Train No. 82902, अहमदाबाद–मुंबई सेंट्रल) में एक यात्री को परोसे गए खाने को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। यात्रा के दौरान जब यात्री ने भोजन का पैकेट खोला, तो उसमें कीड़ा मिलने का दावा किया गया, जिससे वह बेहद परेशान हो गया। इस घटना के बाद यात्री ने भारतीय रेलवे और IRCTC की फूड क्वालिटी पर गंभीर सवाल उठाए और सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की। मामला सामने आते ही यह ऑनलाइन चर्चा का विषय बन गया और लोगों ने ट्रेन में मिलने वाले खाने की स्वच्छता और गुणवत्ता पर फिर से बहस शुरू कर दी।

प्रीमियम ट्रेन होने के बावजूद इस तरह की शिकायत ने यात्रियों की सुरक्षा और भरोसे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब इस पूरे मामले पर IRCTC की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर

यात्री सुमित मेहता ने X (Twitter) पर खाना और पैकेट की तस्वीर साझा की। उन्होंने लिखा कि यह “प्रीमियम ट्रेन” में मिलने वाला खाना है, लेकिन इसमें कीड़ा मिला, जो बेहद खराब और अस्वीकार्य है।

“थैंक यू IRCTC… ये कैसी सर्विस?”

गुस्से में यात्री ने IRCTC पर तंज कसते हुए कहा कि इतनी ऊंची कीमत वाली ट्रेन में भी ऐसी लापरवाही शर्मनाक है। उनका कहना था कि यह अनुभव बेहद निराशाजनक और घटिया सेवा को दर्शाता है।

सोशल मीडिया पर दो फाड़ राय

पोस्ट वायरल होते ही लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ यूजर्स ने रेलवे की स्वच्छता पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने इसे सामान्य शिकायत बताते हुए मजाकिया टिप्पणियां भी कीं।

“रेलवे का खाना मत लो” बनाम “कभी-कभी ठीक भी होता है”

कई यात्रियों ने कहा कि वे रेलवे का खाना लेने से बचते हैं क्योंकि गुणवत्ता भरोसेमंद नहीं है। वहीं कुछ लोगों ने तर्क दिया कि हर सर्विस में कभी-कभी शिकायतें आ जाती हैं और यह बड़ा मुद्दा नहीं है।

IRCTC का जवाब

घटना के बाद IRCTC ने प्रतिक्रिया देते हुए यात्री से PNR और मोबाइल नंबर DM करने को कहा ताकि मामले की जांच की जा सके। हालांकि, आगे क्या कार्रवाई हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

फिर उठा बड़ा सवाल

यह घटना एक बार फिर ट्रेन में मिलने वाले खाने की स्वच्छता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर गई है, खासकर प्रीमियम ट्रेनों में जहां यात्री बेहतर सेवा की उम्मीद रखते हैं।

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